अलसी के चौंकाने वाले फायदे



सुपर फुड अलसी में ओमेगा थ्री व सबसे अधिक फाइबर होता है। यह डब्लयू एच ओ ने इसे सुपर फुड माना है। यह रोगों के उपचार में लाभप्रद है। लेकिन इसका सेवन अलग-अलग बीमारी में अलग-अलग तरह से किया जाता है। स्वस्थ व्यक्ति को रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच अलसी का पाउडर पानी के साथ ,सब्जी, दाल या सलाद मंे मिलाकर लेना चाहिए । अलसी के पाउडर को ज्यूस, दूध या दही में मिलाकर भी लिया जा सकता है। इसकी मात्रा 30 से 60 ग्राम प्रतिदिन तक ली जा सकती है। 100-500 ग्राम अलसी को मिक्सर में दरदरा पीस कर किसी एयर टाइट डिब्बे में भर कर रख लें। अलसी को अधिक मात्रा मंे पीस कर न रखें, यह पाउडर के रूप में खराब होने लगती है। सात दिन से ज्यादा पुराना पीसा हुआ पाउडर प्रयोग न करें। इसको एक साथ पीसने से तिलहन होने के कारण खराब हो जाता है। *खाँसी होेने पर अलसी की चाय पीएं। पानी को उबालकर उसमें अलसी पाउडर मिलाकर चाय तैयार करें।एक चम्मच अलसी पावडर को दो कप (360 मिलीलीटर) पानी में तब तक धीमी आँच पर पकाएँ जब तक यह पानी एक कप न रह जाए। थोड़ा ठंडा होने पर शहद, गुड़ या शकर मिलाकर पीएँ। सर्दी, खाँसी, जुकाम, दमा आदि में यह चाय दिन में दो-तीन बार सेवन की जा सकती है। दमा रोगी एक चम्मच अलसी का पाउडर केा आधा गिलास पानी में 12 घंटे तक भिगो दे और उसका सुबह-शाम छानकर सेवन करे तो काफी लाभ होता है। गिलास काँच या चाँदी को होना चाहिए। *समान मात्रा में अलसी पाउडर, शहद, खोपराचूरा, मिल्क पाउडर व सूखे मेवे मिलाकर नील मधु तैयार करें। कमजोरी में व बच्चों के स्वास्थ्यके लिए नील मधु उपयोगी है।

शीघ्र पतन से निजात पाने के उपचार 

*डायबीटिज के मरीज को आटा गुन्धते वक्त प्रति व्यक्ति 25 ग्राम अलसी काॅफी ग्राईन्डर में ताजा पीसकर आटे में मिलाकर इसका सेवन करना चाहिए। अलसी मिलाकर रोटियाँ बनाकर खाई जा सकती हैं। अलसी एक जीरो-कार फूड है अर्थात् इसमें कार्बोहाइट्रेट अधिक होता है।शक्कर की मात्रा न्यूनतम है। 
*कैंसर रोगियों को ठंडी विधि से निकला तीन चम्मच तेल, छः चम्मच पनीर में मिलाकर उसमें सूखे मेवे मिलाकर देने चाहिए। कैंसर की स्थिति मेें डाॅक्टर बुजविड के आहार-विहार की पालना श्रद्धा भाव से व पूर्णता से करनी चाहिए। कैंसर रोगियों को ठंडी विधि से निकले तेल की मालिश भी करनी चाहिए। 
*साफ बीनी हुई और पोंछी हुई अलसी को धीमी आंच पर तिल की तरह भून लें।मुखवास की तरह इसका सेवन करें। इसमें सैंधा नमक भी मिलाया जा सकता है। ज्यादा पुरानी भुनी हुई अलसी प्रयोग में न लें। बेसन में 25 प्रतिशत अलसी मिलाकर व्यंजन बनाएं। बाटी बनाते वक्त भी उसमें भी अलसी पाउडर  मिलाया जा सकता है। सब्जी की ग्रेवी में भी अलसी पाउडर का प्रयोग करें। अलसी सेवन के दौरान खूब पानी पीना चाहिए। इसमें अधिक फाइबर होता है, जो खूब पानी माँगता है।
दमा में दिलाये राहत

बहुत कम लोग यह बात जानते है, लेकिन दमा के रोगियों के लिए भी किसी चमत्कारी औषधि से कम नहीं है| दमा के रोगी एक चम्मच अलसी के पाउडर को आधा गिलास पानी में 12 घंटे तक भिगो दे और फिर इसे सुबह शाम छानकर इसका सेवन करे तो काफी लाभ होता है| 
खांसी से दिलाये छुटकारा -यदि ठंड के दिनों में आपको अकसर खांसी रहती है, तो ऐसे में अलसी की चाय का सेवन आपके लिए फायदेमंद होगा| इसके लिए अलसी का पाउडर बनाये| सादा पानी उबाल ले और उसमे अलसी का पाउडर मिलाये| इसका सेवन दिन में 2 से 3 बार करे|
ह्रदय रोग में फायदेमंद -भले ही अलसी के दाने छोटे छोटे हो, लेकिन इससे मिलने वाले फायदे बहुत बड़े है| आपको जानकर शायद आश्चर्य हो लेकिन अलसी का सेवन ह्रदय रोगो में भी फायदेमंद है| अलसी में पाया जाने वाला ओमेगा-3 जलन को कम और हृदय गति को सामान्य करने में मदद करता है| इसका नियमित सेवन करने से कार्डियो वेस्कुलर सिस्टम बेहतर बनता है। कुछ किये गए अध्यनों से पता चला है कि ओमेगा-3 से भरपूर भोजन करने से धमनियां सख्त नहीं पड़ती है। साथ ही यह व्हाइट ब्लड सेल्स को ब्लड वेसल के आंतरिक परत पर चिपका देता है, जिससे धमनियों में प्लैक जमने की संभावना भी कम हो जाती है|
जोड़ो के दर्द कम करे -ठंडी के दिनों में अक्सर वृद्ध लोगो को जोड़ो के दर्द में शिकायत रहती है| अलसी के बीजो का तेल जोड़ों के दर्द में राहत दिलाता है। इसके अलावा अलसी का नियमित सेवन शरीर को ऊर्जा व स्फूर्ति प्रदान करता है। कुछ लोगो के शरीर का वजन इतना ज्यादा होता है की उन्हें हमेशा पैरो में दर्द बना रहता है, लेकिन अलसी के सेवन से शरीर का भार कम होता है, वसा कम होता है| और यह हमारी खाने की ललक को भी कम करता है।अलसी खून को पतला बनाये रखती है, जिसके चलते शरीर में अच्छा कोलेस्ट्रोल बढ़ता है और खराब कोलेस्ट्रोल कम होता है और ह्रदय स्वस्थ रहता है।
*इसका रोजाना सेवन करने से महिलाओ मे होने वाली रजोनिवृत्ति संबंधी परेशानियों से राहत मिलती है। यह मासिक धर्म के दौरान ऐंठन को कम करके गर्भाशय को स्वस्थ बनाये रखता है।
*अलसी के सेवन से पैरो में रक्त का प्रवाह बढ़ता है, जिससे पेरो के घाव और फोड़े, फुंसी दूर हो जाते है| यहाँ तक की इसके तेल से मसाज करने पर पेरो के नाख़ून मुलायम और सुन्दर बनते है|
*डायबिटीज के रोगी को कम शर्करा व ज्यादा फाइबर खाने की सलाह दी जाती है। अलसी में प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है| जिससे ब्लड शुगर नियंत्रित रहती है और डायबिटीज से शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव कम होते है|
*अलसी का सेवन पेट को साफ रखने में भी प्रभावशाली है। इसलिए स्वस्थ व्यक्ति को रोज सुबह-शाम असली का सेवन जरूर करना चाहिए| आप चाहे तो अलसी के पाउडर को दूध, दही या ज्यूस में मिलाकर भी लिया जा सकता है|
अलसी के सेवन करने के तरीके- लसी से मिलने वाले लाभ तो बहुत है, लेकिन इस से मिलने वाले फायदों के लिए इसका सेवन सही तरीके से करना जरुरी है| यहाँ जानिए इसे किस तरह से लेना चाहिए|
अलसी के सेवन करने के तरीके अलसी से मिलने वाले लाभ तो बहुत है, लेकिन इस से मिलने वाले फायदों के लिए इसका सेवन सही तरीके से करना जरुरी है| यहाँ जानिए इसे किस तरह से लेना चाहिए| जो लोग कैंसर के रोगी है उन्हें 3 चम्मच अलसी का तेल पनीर में मिलाकर उसमें सूखे मेवे मिलाकर लेना चाहिए। स्वस्थ व्यक्ति रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच अलसी का पाउडर पानी के साथ या फिर दाल और सब्जी के साथ ले सकते है| स्वस्थ व्यक्ति इसकी मात्रा 30 से 60 ग्राम ले सकता है| अलसी को सूखी कढ़ाई में रोस्ट कीजिये और मिक्सी में पीस लीजिये| लेकिन एकदम बारीक मत कीजिये और दरदरे पीसिये| भोजन के बाद इसे सौंफ की तरह खाया जा सकता है|

दमा के रोगी को एक चम्मच अलसी के पाउडर को आधा गिलास पानी में 12 घंटे तक भिगो दे और फिर उसे सुबह – शाम छानकर इसका सेवन करने से लाभ मिलता है| आप इसे गर्मी या सर्दी दोनों मौसम में खा सकते है| इसमें पाया जाने वाले फाइबर से हमें कई स्वास्थ लाभ पहुँचते है| कभी कभार इसके सेवन से बहुत प्यास लगती है, इसलिए इसका सेवन करते वक्त भरपूर मात्रा में पानी पिये| जो लोग कैंसर के रोगी है उन्हें 3 चम्मच अलसी का तेल पनीर में मिलाकर उसमें सूखे मेवे मिलाकर लेना चाहिए। *स्वस्थ व्यक्ति रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच अलसी का पाउडर पानी के साथ या फिर दाल और सब्जी के साथ ले सकते है| *स्वस्थ व्यक्ति इसकी मात्रा 30 से 60 ग्राम ले सकता है| अलसी को सूखी कढ़ाई में रोस्ट कीजिये और मिक्सी में पीस लीजिये| लेकिन एकदम बारीक मत कीजिये और दरदरे पीसिये| भोजन के बाद इसे सौंफ की तरह खाया जा सकता है| *दमा के रोगी को एक चम्मच अलसी के पाउडर को आधा गिलास पानी में 12 घंटे तक भिगो दे और फिर उसे सुबह – शाम छानकर इसका सेवन करने से लाभ मिलता है| तो यह थे आलसी सेवन के फायदे |आप इसे गर्मी या सर्दी दोनों मौसम में खा सकते है| इसमें पाया जाने वाले फाइबर से हमें कई स्वास्थ लाभ पहुँचाते है| कभी कभार इसके सेवन से बहुत प्यास लगती है, इसलिए इसका सेवन करते वक्त भरपूर मात्रा में पानी पिये|

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज 

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार 

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि

एक्जीमा,दाद,खाज के आयुर्वेदिक घरेलू उपचार






 एक्जिमा एक प्रकार का चर्म रोग है। त्वचा के उत्तेजक, दीर्घकालीन विकार को एक्जिमा के नाम से जाना जाता है। इस रोग में त्वचा शुष्क हो जाती है और बार-बार खुजली करने का मन करता है क्योंकि त्वचा की ऊपरी सतह पर नमी की कमी हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप त्वचा को कोई सुरक्षा नहीं रहती, और जीवाणुओं और कोशाणुओं के लिए हमला करने और त्वचा के भीतर घुसने के लिए आसान हो जाता है। एक्जिमा के गंभीर मामलों में त्वचा के ग्रसित जगहों से में पस और रक्त का स्राव भी होने लगता है। यह रोग डर्माटाईटिस के नाम से भी जाना जाता है।
    मुख्य रूप से यह रोग खून की खराबी के कारण होता है और चिकित्सा न कराने पर तेजी से शरीर में फैलता है। एक्जिमा का रोग अपने रोगियों को उम्र और लिंग के आधार पर नहीं चुनता। एक्जिमा के रोग से ग्रस्त रोगी अन्य विकारों के भी शिकार होते हैं। यह किसी भी उम्र के पुरुष या महिलाओं को प्रभावित कर सकता है। लेकिन कुछ आयुर्वेदिक उपचारों को अपनाकर इस समस्‍या के लक्षणों को कम किया जा सकता है।



सोरायसिस(छाल रोग) के आयुर्वेदिक उपचार 

खदिरारिष्ट
२० मिलीलीटर खदिरारिष्ट को २० मिलीलीटर पानी में मिलाकर खाना खाने के बाद दिन में दो बार लेने से फायदा होता है।
गुदुच्याड़ी तेल
एक औषधियुक्त तेल जिसे ग्रसित जगह पर लगाने से लाभ मिलता है।
पञ्चनिम्बडी चूर्ण
खाना खाने के बाद आधे से एक चमच पानी के साथ लेने से भी लाभ होता है।





नीम 
नीम रक्त विकारों में बहुत ही लाभकारी है | पाव भर सरसों के तेल में नीम की 50 ग्राम के लगभग कोंपलें पकाएं | कोंपले काली होते ही तेल नीचे उतार लें | छानकर बोतल में रखें और दिन में थोड़ा-थोड़ा एग्जिमा प्रभावित स्थान पर लगाएं | नीम की कोंपलों का रस 10 ग्राम की मात्रा में नित्य सेवन करते रहने से भी एक्जीमा ठीक हो जाता है |
आटे का लेप :
गेहूं के आटे का लेप करने से शरीर के सारे चर्म रोग दूर हो जाते हैं और खुजली में आराम मिलता है।
*तुलसी के पत्तों का रस पीने और लगाते रहने से लाभ होता है |
शुद्ध गुग्गूल-
आयुर्वेद की बहुत ही प्रचलित जड़ी बूटी, गुग्गूल में शुद्धि और तरोताजा करने के लिए अत्यधिक ओजस्वी शक्तियों का समावेश होता है।

एलोविरा 
एलोविरा के पौधे की पत्‍ती को काट लें और उसमें से निकलने वाले जेल को खुजली वाली जगह पर लगा लें। दिन में कम से कम चार से पांच बार ऐसा करने पर आपको आराम मिलेगा। साथ ही ठीक होने तक लगाने पर बाद में कभी खुजली नहीं होगी।
नींबू :
नींबू हर घर में आराम से मिल जाता है। इसलिए बॉडी में जहां पर भी खुजली हो रही हो उस जगह पर नींबू और गरी का तेल मिलाकर लगा लें। लगाने के तुरंत बाद खुजलाएं नहीं। थोड़ी देर में आराम मिल जाएगा।



छाछ -

. छाछ में एक साफ कपड़े का टुकड़ा भिगोकर त्वचा पर जलन, खुजली और बेचैनी वाले स्थान पर रखें | जितनी अधिक देर रख सकें, रखें | फिर उस स्थान को भली प्रकार साफ कर दें |

*खुबानी के पत्तों के रस का दाद-खाज पर प्रयोग करना भी लाभदायक है |
खीरे का रस:
खीरे को बारीक स्‍लाइस में काटकर दो घंटे के लिए रख दें। पूरा रस निकल जाने के बाद उसे छान लें और खुजली वाली जगह पर लगा लें। जरूर आराम होगा।
चन्दन
एक चम्मच कपूर के साथ एक चम्मच चन्दन की लई मिलाकर एक्जिमा से ग्रसित जगह पर लगाने से भी बहुत फायदा होता है।
नीम
नीम के कोमल पत्तों का रस निकालकर उसमें थोड़ी सी मिश्री मिला लें। इसे प्रतिदिन सुबह पीने से खून की खराबी दूर होकर एक्जिमा ठीक होने लगता है।

*चने के आटे में पानी मिलाकर पेस्ट सा बनाकर त्वचा के विकारग्रस्त स्थान पर लगाने से लाभ होता है | चने के आटे का उबटनके रूप में प्रयोग से मेकअप से होने वाला एक्जीमा भी ठीक हो जाता है |
*शुद्ध हल्दी भी एक्जिमा की चिकित्सा में लाभ  करती है। इसे एक्जिमा के चकतों पर लगाया जा सकता है और दूध में मिलाकर भी पीया जा सकता है।
हरड़-
4 हरड़ को गौमूत्र में पीसकर लेप बना लें। यह लेप प्रतिदिन दो से तीन बार एक्जिमा पर लगाने से लाभ होता है।




आहार और खान पान
दही और अचार जैसे खट्टी चीज़ों का सेवन बिलकुल ना करें।
करेले और नीम के फूलों का सेवन भी लाभकारी होता है।
क्या करें क्या ना करें
डिटरजेंट (कपडे धोने का पाउडर) को बिलकुल भी ना छुएं, पर अगर मजबूरी से छूना भी पड़े तो सूती दस्तानों का प्रयोग करें।
एक्जिमा से ग्रसित जगह पर तंग कपडे ना पहनें।
सिंथेटिक कपड़ों का भी बिलकुल प्रयोग ना करे, क्योंकि इससे पसीने के निष्काशन में कठिनाई होती है।
तरबूज जैसे फलों का नियमित रूप से सेवन करें।
गाजर और पालक के रस का मिश्रण पीने से भी एक्जिमा के ठीक होने में लाभ मिलता है।
पानी का भरपूर मात्रा में सेवन करें और चाहें तो संतरे का रस भी पी सकते हैं।
अध्ययनों से पता चला है कि टमाटर का रस भी एक्जिमा को चंद दिनों में ठीक करने में सहायक सिद्ध होता है।


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गर्दन के दर्द के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार







गर्दन दर्द को कभी हलके में नहीं लेना चाहिये क्‍योंकि इससे कई लक्षणों का पता चलता है। गर्दन में दर्द की समस्‍या से ना तो आप ठीक से उठ-बैठ सकते हैं और ना ही रोज मर्रा के काम कर सकते हैं।
गर्दन में दर्द होना एक आम समस्या है।जिसे लोग अक्सर इग्नोर कर देते है। कई बार तो यह परेशानी इतनी बढ़ जाती है कि काम करने में और उठने-बैठने में भी मुश्किल होती है। गर्दन में लगातार दर्द रहने पर डॉक्टरी सलाह जरूर लेनी चाहिए।आज हम आपको इस परेशानी से निजात पाने के कुछ घरेलू उपाय बता रहे हैं, जिससे आपको काफी फायदा मिलेगा।

सीधे बैठे

गर्दन दर्द का एक कारण झुककर बैठना भी हो सकता है।काम करते समय हमेशा अपनी रीढ की हड्डी को सीधे रखकर ही बैठना चाहिए।

मसाज

गर्दन की दर्द में मसाज करने से बहुत फायदा मिलता है। मसाज से आप अच्‍छी नींद सो सकते है, लेकिन मसाज हमेशा हल्के हाथों से ही करनी चाहिए।

गर्म सिकाई

गर्म पानी की सिकाई करने से दर्द को बहुत आराम मिलता है।इससे खून का दौरा तेज हो जाता है।

अदरक

यह एक दर्द निवारक दवा के रूप में काम करती है। अगर आप अदरक पावडर को पानी में मिला कर पियें या फिर इसे घिस कर गरम पानी में मिला कर पेस्‍ट बना कर गरदन पर लगाएं तो राहत मिलेगी।

आइस पैक लगाएं

गरदन की दर्द में आइस पैक काफी लाभ पहुंचाता है। आप चाहें तो बरफ के टुकड़े को कपड़े में बांध कर दर्द पर रख सकते हैं। इससे दर्द में काफी आराम मिलेगा।

हींग एवं कपूर


गर्दन में दर्द होने पर हींग और कपूर बराबर मात्रा में लेकर सरसों के तेल में मिलाकर अच्छे से फेंटकर क्रीम की तरह बना लें।अब इस पेस्ट से गर्दन की हल्के हाथों से मसाज करने से दर्द में आराम मिलता है।

गरम पानी से स्‍नान

गुनगुने पानी का शॉवर लेने से आपकी गर्दन को आराम मिलेगा और जल्दी असर दिखाई देगा।

सही मुद्रा बना कर रखें

शरीर की सही मुद्रा बना कर रखने से भी गरदन का दर्द ठीक करने में सहायता मिलती है। अपने शरीर को एक दीवार पर सटा कर खड़ा कीजिये। अपनी पीठ और बुटक को दीवार से लगाइये और ठुड्डी को बिल्‍कुल सीधे रखिये। बस इसी मुद्रा में सारे दिन रहिये।

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घुटनों के दर्द के अचूक असर उपचार


               
           
घुटने का दर्द कैसे करें ठीक : –
 घुटनों के दर्द की समस्या आजकल आम होती जा रही है कई बार ऐसा भी होता है कि किसी कारणवश चोट लग जाने से या बढ़ती हुई उम्र के कारण या फिर व्रद्धावस्था में हड्डियों के कमजोर हो जाने से अक्सर घुटनों में दर्द होने लगता है. इस पोस्ट में हम आपको घुटनों कादर्द से राहत दिलाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे बता रहे हैं जिनका उपयोग करने पर लगभग 7 दिन में ही आपको घुटनों के दर्द से राहत मिल जाएगी. अक्सर घुटनों में दर्द होना आम बात नही है. और यदि आप भी अपने घुटनों में होने वाले दर्द से परेशान है. आपको बैठने उठने में समस्या आती है. सीडियां चढ़ते-उतरते घुटनों में दर्द होता है तो परेशान न हो आपके लिए घुटनों का दर्द ख़त्म करने वाला इलाज है. घुटनों का दर्द का इलाज बेहद सरल और असरदार है. यदि आप इन उपायों को आजमतें है तो आपको घुटने के दर्द से राहत मिलेगी

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 

घुटनों के दर्द का इलाज – 
यदि आपके घुटनों में लगातार या थोड़ा-थोड़ा दर्द या तेज दर्द बना रहता है तो यहां दिए गए घरेलू नुस्खे आजमाएं और आपको 7 से लेकर 15 दिन के अंदर-अंदर इन घरेलू नुस्खों से पूरा पूरा आराम मिल जाएगा और फिर कभी आपके घुटने दर्द नहीं करेंगे. घुटनों के लिए दर्द निवारक दवा बनाने के लिए आप नीचे दिए गए कुछ नुस्खे आजमाएं. माना जाता है कि बूढ़े होने पर हड्डियों में दर्द होना शुरू हो जाता है. लेकिन ऐसा नही है. घुटनों में दर्द होने के कई कारण है. जैसे गलत तरीके ज्यादा वजन उठाना अपने घुटनों को घंटों तक मोड़ कर बैठना घुटने में पुरानी चोट को नज़रंदाज़ व्यायाम करने से पहले बॉडी को स्ट्रेच और बॉडी वार्मअप न करना गलत खान-पान और रहन-सहन ये सभी घुटनों में होने वाले दर्द का कारण बन सकता है. इसे कुछ बातों का ध्यान रखें. ज्यादातर शरीर में होने वालें दर्द का कारण उपरोक्त ही है. इसलिए इन्हें दोहरायें नही. ये आपके के लिए काफी खतरनाक हो सकता है.

सौठ से बनी दर्द निवारक दवा -
सौंठ भी एक बहुत अच्छा दर्द निवारक दवा के रूप में फायदेमंद साबित हो सकता है, सौंठ से दर्दनिवारक दवा बनाने के लिए एक आप एक छोटा चम्मच सौंठ का पाउडर व थोड़ा आवश्यकतानुसार तिल का तेल इन दोनों को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट जैसा बना ले. दर्द या मोच के स्थान पर या चोट के दर्द में आप इस दर्द निवारक सौंठ के पेस्ट को हल्के हल्के प्रभावित स्थान पर लगाएं और इसको 3 घंटे तक लगा रहने दें इसके बाद इसे पानी से धो लें. ऐसा करने से सप्ताह में आपको घुटने के दर्द में पूरा आराम मिल जाता है और अगर मांसपेशियों में भी खिंचाव महसूस होता है तो वह भी जाता रहता है.
दर्द निवारक हल्दी का पेस्ट -किसी चोट का दर्द हो या घुटने का दर्द आप इस दर्द निवारक हल्दी के पेस्ट को बनाकर अपनी चोट के स्थान पर या घुटनों के दर्द के स्थान पर लगाइए इससे बहुत जल्दी आराम मिलता है. दर्द निवारक हल्दी का पेस्ट कैसे बनाएं इसके लिए आप सबसे पहले एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर लें और एक चम्मच पिसी हुई चीनी और इसमें आप बूरा या शहद मिला लें, और एक चुटकी चूना मिला दें और थोड़ा सा पानी डाल कर इसका पेस्ट जैसा बना लें.

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

इस लेप को बनाने के बाद अपने चम्मच के स्थान पर या जो घुटना का दर्द करता है उस स्थान पर स्लिप को लगा ले और ऊपर से  बैंडेज या कोई पुराना सूती कपड़ा बांध दें और इसको रातभर लगा रहने दें और सुबह सादा पानी से इसको धो ले इस तरह से लगभग 1 सप्ताह से लेकर 2 सप्ताह तक ऐसा करने से इसको लगाने से आपके घुटने की सूजन मांसपेशियों में खिंचाव अंदरुनी रूप से होने वाले दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलता है और यह आप के दर्द को जड़ से खत्म कर देता है. दर्द के आराम दिलाये सौंठ का लेप
खजूर से घुटने में दर्द का इलाज -सर्दियों के मौसम में रोजाना 5-6 खजूर खाना बहुत ही लाभदायक होता है, खजूर का सेवन आप इस तरह भी कर सकते हैं रात के समय 6-7 खजूर पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट इन खजूर को खा ले और साथ ही वह पानी भी पी ले जिनको जिसमें आपने रात में खजूर भिगोए थे. यह घुटनों के दर्द के अलावा आपके जोड़ों के दर्द में भी आराम दिलाता

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

आपके घर में मौजूद कुछ दवाओं के द्वारा भी आप अपने घुटने का दर्द को दूर कर सकते है. इसके आपको आधा कप सरसों का तेल लेना है फिर उसमे कुछ लहसुन की कच्ची कालिया छिल कर दाल देनी है. फिर इस सरसों के तेल को धीमी आंच पर गर्म करना है. और तब तक इसे गर्म करना जब तक की लहसुन की कालिया पक न जाये. फिर इस तेल के मिश्रण को ठंडा होने के लिए छोड़ दें. ठंडा होने पर इसे अपने घुटनों में हल्के हाथों से मालिश करें. इस उपाय को यदि आप 1 से लेकर २ दिन इसे करें आपका घुटने का दर्द पूरी तरह से गायब हो जायेगा.
नारियल का तेल है बेहतर- नारियल के तेल के बड़े फायदे है नारियल का तेल केवल आपके बालों को ही मजबूत नही बनाता बल्कि ये आपके शरीर के कई हिस्सों को मजबूत बनाने में मदद करता है. आप यदि नारियल के तेल से अपने शरीर की मशाज़ करते है तो आपको शरीर में होने अकडन से निजात मिलेगी. और आप नारियल के भीतर मौजूद गिरी को खाते है तो भी ये आपके लिए फायदेमंद ही है क्योंकि ये सीधे आपके पेट पर असर करती है. और ये आपके घुटने का दर्द दूर करने में मदद करेगा.

नई और पुरानी खांसी के रामबाण उपचार 

अखरोट के सेवन से आपको काफी फायेदा होगा-  अखरोट जितना सख्त होता है उसे फायदे उठने ही मुलायम होते है. यदि आप रोजाना 2 से 3 अखरोट खाते है तो आपके लिए काफी फायदेमद रहेगा. अखरोट खाने का तरीका बेहद आसान है आपको रात में अखरोट की गिरी को भिगो कर रखना है फिर सुबह खाली पेट सेवन करना है ताकि आपकी पचाने की शक्ति पर असर न पड़े. ऐसा करने से आपके घुटने का दर्द खत्म होगा साथ ही आपकी हड्डिया भी मजबूत हो जायेंगी.
हल्दी का मिश्रण घुटने का दर्द मिटाए- उम्र के साथ साथ शरीर की कार्यशक्ति कम हो जाती है. और बृद होने पर जोड़ो में दर्द होने लगता है. और कमर और घुटने में दर्द होना आम बात हो जाती है. लेकिन कभी कभी ये दर्द असहनीय हो जाता है. घुटने का दर्द मिटाना चाहते है तो हल्दी के आयुर्वेदिक लेप का इस्तेमाल करें इस लेप को बनाने के लिए आपको एक चम्मच हल्दी लीजिये. फिर इसमें शक्कर या शहद के घोल में इसे मिला दीजिये. और इस मिश्रण में चूना (जो पान में इस्तेमाल होता है) अपनी आवश्यकतानुसार मिला लें. और इस मिश्रण को अच्छी तरह से फेंटे. जब ये पेस्ट बनकर तैयार हो जाये तो इस पेस्ट या लेप को अपने घुटनों में लगायें. कुछ ही देर में आपको घुटने का दर्द छूमंतर हो जायगा.


गोखरू के औषधीय गुण और प्रयो


यदि आपका वजन बढ़ा हुआ है तो आपको चलने में तकलीफ होना या फिर घुटनों में दर्द होना स्वाभाविक है. इसलिए सबसे पहले अपने वजन को कम कीजिये ताकि आपकी बॉडी फिट रहे है आपको अन्य बीमारियाँ न लगे. अपने शरीर को मजबूत बनायें सही नियमों के साथ व्यायाम करें. स्पोर्ट एक्टिविटीज में हिस्सा है और कुछ न कुछ करते रहे इससे आपके शरीर का तनाव और खिचाव कम होगा. और घुटनों के दर्द में आराम मिलेगा.

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार

विशिष्ट परामर्श-  


संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है|  बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| औषधि के लिए वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं| 
    




इलायची के औषधीय उपयोग


छायादार नमीयुक्त, भूमि में इलायची के पेड़ होता है। पेड़ की आयु लगभग 10-12 वर्ष होती है। इलायची दो प्रकार की होती है। एक छोटी इलायची और दूसरी बड़ी। घरेलू उपयोग में आने के कारण यह घर-घर उपलब्ध रहती है।

आयुर्वेदिक मतानुसार गुण-दोष- वायुदोष से सिरदर्द में छोटी इलाचयी के बीच शीत, तीक्ष्ण, पाचन शक्तिवर्धक और सुगंधित होते हैं। इलायची मुख शुद्धिकारक, रुचिकारक, पथरीनाशक, हृदय रोग नाशक, मूत्र रोग नाशक, खांसी, सुजाक, वात, श्वास और क्षय रोग, खुजली तथा बवासीर नाशक मानी गई है। भारतवर्ष में प्राचीनकाल से इलायची पकवानों को सुगंधित स्वादिष्ट बनाने के लिए उपयोग में लाई जाती रही है। मूत्र निस्सारक गुण भी होता है। पेशाब की जलन दूर करती है। अब हम दोनों प्रकार की इलाचयी के रोग हितकारी उपचारो के बारे मे जानकारी देते हैं-
बड़ी इलायची के घरेलू प्रयोग- सभी प्रकार के ज्वरों में बड़ी इलायची चूर्ण 3 ग्राम के साथ 3 ग्राम बेल वृक्ष की जड़ का चूर्ण तथा पुनर्नवा की जड़ के चूर्ण की 2-2 ग्राम मात्रा लेकर 200 ग्राम दूध में 100 ग्राम पानी मिलाकर पकाएं, जब मात्र दूध शेष रहे, तब ठंडा होने पर छानकर पिला दें।
गर्भवती को भूख की कमी में-  बड़ी इलायची चूर्ण में समान मात्रा में मिश्री के साथ पीसकर मिला लें। यह 2 ग्राम चूर्ण दिन में 3 बार खाने से जठराग्नि तेज होती है। भूख खुलकर लगती है।
हिचकी में-  बड़ी इलायची को थोड़ा भूनकर पीस लें तथा 1 ग्राम चूर्ण गरम पानी के साथ तीन-चार बार सेवन कराने से हिचकी दूर हो जाती है। शीतऋतु की खांसी में- बड़ी इलायची, काली मिर्च, पिपली (बड़ी), बादाम-मिंगी, मुनक्का (बीज निकालकर) सबको 15-15 ग्राम लें। बादाम को पानी में भिगोकर छिलका हटा दें। सबको कूटकर खूब घोंटें। थोड़ा पानी मिलाकर जितनी घुटाई कर सकते हैं करें। जंगली बेर के बराबर गोली बना लें। रात्रि के समय 1 गोली मुंह में रखकर चूसें। छोटी इलायची के घरेलू प्रयोग-
सुजाक में- छोटी इलायची 7 नग लेकर उसके दाने पीसकर तथा धनियां 5 ग्राम पीसकर, चंदन पाउडर 5 ग्राम लेकर सबको आधा लीटर पानी में खूब घोट-पीसकर छान लें। मिश्री मिलाकर दिन में तीन-चार बार पिलाएं। यह रामबाण प्रयोग है।
प्यास की अधिकता में- प्यास की तीव्रता में चार लीटर पानी में 25 ग्राम इलाचयी के छिलके ओटाकर जब पानी आधा शेष रह जाए तो ठंडा करके पीने के लिए उपयोग में लाएं। यह रामबाण प्रयोग है। यह हैजा में भी उपयोगी है।
सिरदर्द में- इलायची के बीजों को महीन पीसकर सूंघने से छींकें आती हैं, जिससे सिरदर्द दूर होता है।
केले के अजीर्ण में-  अधिक मात्रा में केला खाने पर अजीर्ण से बचने के लिए केला के पाचन के लिए केला खाने के बाद इलायची खाना चाहिए।
आंखों की कमजोरी में-




इलायची के बीज 50 ग्राम तथा बंशलोचन 50 ग्राम, 50 ग्राम बादाम तथा पिस्ता 50 ग्राम लेकर (बादाम और पिस्ता को पानी में भिगोकर छिलका हटा दें।) सभी को कूट-पीस लें और 2 किलो दूध में पकाएं। जब दूध गाढ़ा हो जाए तब 250 ग्राम मिश्री मिलाकर पकाएं। हलुवा-सा बन जाए तब ठंडा कर सुरक्षित रखें। इसे 20 ग्राम नित्य सेवन करें। इससे आखों की कमजोरी दूर होती है।
उल्टी में-  इलायची दाने का चूर्ण 1 ग्राम लेकर अनार के शरबत के साथ पिलाने से उल्टी बंद होती है।
धातु पुष्टि के लिए-
 इलायची के बीच 2 ग्राम, जावित्री 1 ग्राम, बादाम 5 नग इन्हें पानी में पीसकर गाय के मक्खन में मिश्री मिलाकर सेवन करें, यह एक खुराक है। दिन में दो बार लेें।

स्वप्नदोष में- इलायची के बीजों को पीसकर ईसबगोल की भूसी बराबर मात्रा में मिलाकर आंवला के रस में घोंटकर दो-दो रत्ती की गोलियां बना लें। 40 दिनों तथा 1-1 गोली गाय के दूध के साथ सेवन करें।
कफजन्य खांसी में- 
कफजन्य खांसी होने पर इलायची के बीजों को पीसकर आधा ग्राम लेकर बराबर मात्रा में सोंठ चूर्ण मिलाकर शहद के साथ चटाने से कफदोष से निवृत्ति मिलती है। खांसी में लाभ होता है।
यकृत शोथ एवं पीलिया में-
 इलायची चूर्ण 2 ग्राम, भूआमलकी चूर्ण (भुई आंवला) 2 ग्राम और मिश्री 4 ग्राम लेकर गोदुग्ध के साथ नित्य प्रात: सेवन कराने से लाभ होता है।

शीत पित्ती में- इस रोग में त्वचा पर लाल चकत्ते उभरते हैं। इलायची चूर्ण 60 ग्राम, सोना गेरू 50 ग्राम और जवाखार 60 ग्राम, सबको एक साथ मिलाकर रखें। इसकी 3-3 ग्राम की मात्रा सुबह-शाम पानी के साथ सेवन कराने से लाभ होता है। अधिक गरम भोजन न करें। अचार, गरम मसाला, बेसन एवं तले खाद्यों से बचें। सादा सुपाच्य भोजन करें।
जमालगोटा की विषाक्तता में-  जमालगोटा के विषाक्तता दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए 200 ग्राम दही के साथ 2 ग्राम इलायची बीज के चूर्ण को तीन बार प्रतिदिन सेवन कराएं। तीन-चार दिनों में जमालगोटा के विषय का दुष्प्रभाव दूर हो जाता है।




नाभि खिसकने (वायु गोला) के आयुर्वेदिक घरेलू उपचार


नाभि का खिसकना जिसे आम लोगों की भाषा में धरण गिरना या फिर गोला खिसकना भी कहते हैं। यह एक ऐसी परेशानी है जिसकी वजह से पेट में दर्द होता है। रोगी को समझ में भी नहीं आता कि ये दर्द किस वजह से हो रहा है, पेट दर्द की दवा लेने के बाद भी यह दर्द खत्म नहीं होता। और केवल दर्द ही नहीं, कई बार नाभि खिसकने से दस्त भी लग जाते हैं।
नाभि टलने को परखिये आमतौर पर पुरुषों की नाभि बाईं ओर तथा स्त्रियों की नाभि दाईं ओर टला करती है। ऊपर की तरफ यदि नाभि का स्पंदन ऊपर की तरफ चल रहा है याने छाती की तरफ तो यकृत प्लीहा आमाशय अग्नाशय की क्रिया हीनता होने लगती है ! इससे फेफड़ों-ह्रदय पर गलत प्रभाव होता है। मधुमेह, अस्थमा,ब्रोंकाइटिस -थायराइड मोटापा -वायु विकार घबराहट जैसी बीमारियाँ होने लगती हैं।

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नीचे की तरफ यही नाभि मध्यमा स्तर से खिसककर नीचे अधो अंगों की तरफ चली जाए तो मलाशय-मूत्राशय -गर्भाशय आदि अंगों की क्रिया विकृत हो अतिसार-प्रमेह प्रदर -दुबलापन जैसे कई कष्ट साध्य रोग हो जाते है। फैलोपियन ट्यूब नहीं खुलती और इस कारण स्त्रियाँ गर्भधारण नहीं कर सकतीं। स्त्रियों के उपचार में नाभि को मध्यमा स्तर पर लाया जाये। इससे कई वंध्या स्त्रियाँ भी गर्भधारण योग्य हो जाती है । बाईं ओर बाईं ओर खिसकने से सर्दी-जुकाम, खाँसी,कफजनित रोग जल्दी-जल्दी होते हैं। दाहिनी ओर दाहिनी तरफ हटने पर अग्नाशय -यकृत -प्लीहा क्रिया हीनता -पैत्तिक विकार श्लेष्म कला प्रदाह -क्षोभ -जलन छाले एसिडिटी (अम्लपित्त) अपच अफारा हो सकती है।

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

नाभि टलने पर क्या करे। मरीज को सीधा (चित्त) सुलाकर उसकी नाभि के चारों ओर सूखे आँवले का आटा बनाकर उसमें अदरक का रस मिलाकर बाँध दें एवं उसे दो घण्टे चित्त ही सुलाकर रखें। दिन में दो बार यह प्रयोग करने से नाभि अपने स्थान पर आ जाती है तथा दस्त आदि उपद्रव शांत हो जाते हैं। नाभि खिसक जाने पर व्यक्ति को मूँगदाल की खिचड़ी के सिवाय कुछ न दें। दिन में एक-दो बार अदरक का 2 से 5 मिलिलीटर रस पिलाने से लाभ होता है।

नाभि कैसे स्थान पर लाये- 1- ज़मीन पर दरी या कम्बल बिछा ले। अभी बच्चो के खेलने वाली प्लास्टिक की गेंद ले लीजिये। अब उल्टा लेट जाए और इस गेंद को नाभि के मध्य रख लीजिये। पांच मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे। खिसकी हुई नाभि (धरण) सही होगी। फिर धीरे से करवट ले कर उठ जाए, और ओकडू बैठ जाए और एक आंवला का मुरब्बा खा लीजिये या फिर 2 आटे के बिस्कुट खा लीजिये। फिर धीरे धीरे खड़े हो जाए।

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2- कमर के बल लेट जाएं और पादांगुष्ठनासास्पर्शासन कर लें। इसके लिए लेटकर बाएं पैर को घुटने से मोड़कर हाथों से पैर को पकड़ लें व पैर को खींचकर मुंह तक लाएं। सिर उठा लें व पैर का अंगूठा नाक से लगाने का प्रयास करें। जैसे छोटा बच्चा अपना पैर का अंगूठा मुंह में डालता है। कुछ देर इस आसन में रुकें फिर दूसरे पैर से भी यही करें। फिर दोनों पैरों से एक साथ यही अभ्यास कर लें। 3-3 बार करने के बाद नाभि सेट हो जाएगी। 3- सीधा (चित्त) सुलाकर उसकी नाभि के चारों ओर सूखे आँवले का आटा बनाकर उसमें अदरक का रस मिलाकर बाँध दें एवं उसे दो घण्टे चित्त ही सुलाकर रखें। दिन में दो बार यह प्रयोग करने से नाभि अपने स्थान पर आ जाती है हैं।

बिदारीकन्द के औषधीय उपयोग 

नाभि सेट करके पाँव के अंगूठों में चांदी की कड़ी भी पहनाई जाती हैं, जिस से भविष्य में नाभि टलने का खतरा कम हो जाता हैं। अक्सर पुराने बुजुर्ग लोग धागा भी बाँध देते हैं। नाभि के टलने पर और दर्द होने पर 20 ग्राम सोंफ, गुड समभाग के साथ मिलाकर प्रात: खाली पेट खायें। अपने स्थान से हटी हुई नाभि ठीक होगी। और भविष्य में नाभि टलने की समस्या नहीं होगी। नाभि या धरन ठीक करने का मंत्र बहुत से लोग जो नाभि टलने के रोग से पीड़ित रहते है और बार बार मुझसे धरण /नाभि ठीक करने के उपाय पूछते है उनके लिए निम्न मंत्र विधि दे रहा हु प्रयोग करे और लाभ उठाएं ।

बिना आपरेशन प्रोस्टेट  वृद्धि की अचूक औषधि

मंत्र "ॐ नमो नाड़ी नाड़ी नौ सै बहत्तर सौ कोस चले अगाडी डिगे न कोण चले न नाड़ी रक्षा करे जति हनुमंत की आन मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरो मंत्र ईश्वरोवाचा " विधि :- इस मंत्र को ग्रहण , दिवाली की महानिशा बेला में धुप दीप देकर 108 जप करके सिद्ध करले । कच्चे सूत के धागे में 9 गांठ लगाले उसे छल्ले की भांति बनाले उसे रोगी की नाभि पर रखकर इस मंत्र को 108 बार पढ़ते हुए नाभि के ऊपर फूक मारने से धरण ठिकाने पर आ जाती है ।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार




चश्मा हटाने का अचूक नुस्खा



आँखों पर नजर का चश्मा लगाना एक अवस्था में मजबूरी भरी जरूरत बन जाता है जिसका समाधान सिर्फ आँखों के ऑप्रेशन द्वारा ही हो पाता है । किंतु अब यही एकमात्र सत्य नही है चश्में से छुटकारा एक स्पेशल उपाय द्वारा भी पाया जा सकता है । इस उपाय के बारे में हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से बता रहे हैं, जरूर पढ़िये और लाभ उठाइये ।

जरूरी सामग्री -

देशी गाय के दूध से बना देशी घी आधा किलो
असली शुद्ध शहद 250 ग्राम
काली मिर्च 100 ग्राम
असली केसर 2 ग्राम
बादाम की गिरी 100 ग्राम
पिस्ते की गिरी 100 ग्राम
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बनाने की विधि -

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सबसे पहले काली मिर्च को सुखाकर और मिक्सी में पीसकर बारीक चूर्ण तैयार कर लें और बादाम एवं पिस्ते को बारीक बारीक कतर लें । इसके बाद देशी घी को सिर्फ इतना गर्म करें कि वो पिघल जाये । घी के पिघल जाने पर उसमें सभी चीजे अर्थात शहद, काली मिर्च का चूर्ण, केसर, पिस्ता और बादाम को मिलाकर खूब अच्छी तरह से मिक्स करदें । बस आपका नुस्खा तैयार है । इसको साफ काँच की शीशी अथवा मर्तबान में भरकर रख दीजिये । रोज सुबह और शाम एक-एक चम्मच सेवन करना है । 12 साल से छोटे बच्चों को आधा आधा चम्मच ही देना उचित है ।

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भुने हुए लहसुन खाने के फायदे


                                                        
  लहसुन अपने स्वाद, एंटी बायोटिक तत्वों और सेहत लाभ के लिए जाना जाता है, इसलिए आप इसे भोजन में या फिर कच्चा उपयोग करते हैं। लेकिन भुनी हुई लहसुन खाने के यह फायदे जानेंगे तो आप हैरान रह जाएंगे।     सुबह खालीपेट लहसुन को भूनकर खाने से कॉलेस्ट्रॉल कम होता है, और कॉलेस्ट्रॉल से जुड़ी सभी स्वास्थ्य समस्याओं जैसे हृदय की नलियों में कॉलेस्ट्रॉल का जमाव आदि के लिए यह बेहद फायदेमंद तरीका है।| *वजन कम करना चाहते हैं तो भी यह फायदेमंद है, क्योंकि कॉलेस्ट्रॉल का स्तर कम होने के साथ-साथ आपका वजन घटने लगेगा और मोटापा गायब हो जाएगा। 
*सर्दी के दिनों में यह सर्दी, खांसी और जुकाम से बचाता है और शरीर में गर्माहट पैदा करने में मदद करता है। इतना ही नहीं यह रक्तप्रवाह को भी बेहतर बनाए रखता है।
*सर्दी के दिनों में यह सर्दी, खांसी और जुकाम से बचाता है और शरीर में गर्माहट पैदा करने में मदद करता है। इतना ही नहीं यह रक्तप्रवाह को भी बेहतर बनाए रखता है।
*प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ यह ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है और अपने एंटी इंफ्लेमटरी एवं एंटी *फंगल गुणों के कारण शरीर की अंदरूनी सफाई कर  कई बीमारियों से बचाए
रखता है।

*इसमें मौजूद भरपूर कार्बोहाइड्रेट शरीर की कमजोरी को दूर कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी मददगार है और कब्ज से भी बचाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की रिसर्च के अनुसार लहसुन में मौजूद फाइटोकेमिकल्स पुरुषों की हेल्थ के लिए फायदेमंद है। प्रोस्टेट कैंसर और कार्डियो वेस्क्यूलर डिसीज में इसे खाने के कई फायदे हैं। इसलिए महर्षि अायुर्वेद हॉस्पिटल, नई दिल्ली की डॉ. भानु शर्मा रोज पुरुषों को सोने से पहले भुने हुए लहसुन की एक कली खाने की सलाह देती हैं।
कैसे भूनें- लहसुन की कलियों को थोड़े से देसी गाय के घी या ऑलिव आईल मे हल्की आंच पर भूरे रंग की होने तक  तवे पर गरम करें|


गौमूत्र के औषधीय उपयोग फायदे







गोमुत्र अर्क :-

गौ कई प्रकार की होती है जेसे जर्शी, दोगली, देशी | इनमें से देशी गौ का मूत्र बहुत काम आता है | हिन्दू धर्म में गौ को माता मानते है और उसकी पूजा भी करते है | इसलिए देशी गौ को गौ माता के नाम से भी जाना जाता है | भाइयो हमारे बुजुर्ग कहते है की गौ माता के मूत्र में गंगा और गोबर में लक्ष्मी का वास होता है तभी मूत्र को घर में छिड़का और गोबर से चोका लगाया जाता है |
आयुर्वेद में गौ मूत्र के बहुत प्रयोग हैं |गौमूत्र का रासायनिक विश्लेषण करने पर वैज्ञानिकों ने पाया, कि इसमें 24 ऐसे तत्व हैं जो शरीर के विभिन्न रोगों को ठीक करने की क्षमता रखते हैं। आयुर्वेद के अनुसार गौमूत्र का नियमित सेवन करने से कई बीमारियों को खत्म किया जा सकता है। जो लोग नियमित रूप से थोड़े से गौमूत्र का भी सेवन करते हैं, उनकी रोगप्रतिरोधी क्षमता बढ़ जाती है। मौसम परिवर्तन के समय होने वाली कई बीमारियां दूर ही रहती हैं। शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है। इसके कुछ गुण इस प्रकार गए हैं|

गौ मूत्र का सेवन कैसे करें :-
स्वस्थ गौ माता का गौ मूत्र को रोजाना दो तोला सात पट कपड़े में छानकर उसमें से आधा कफ गौ मूत्र सुबह-सुबह खाली पेट पियें | ध्यान रहे की गौ देशी होनी चाहिए और वो प्रेगनेंट नहीं होनी चाहिए | अगर आप गौ अर्क का सेवन करना चाहते हैं तो आधे कफ पानी में 1 या 2 चम्मच गौ अर्क डाल दें और उसे पी लें | आप इसका सेवन सुबह-साम खाली पेट कर सकते हैं |
कृषि में गोमूत्र का प्रयोग :-
वर्तमान मानव जीवन कृषि में रासायनिक खादों के प्रयोग से होने वाले दुष्परिणामों को झेल रहा है। रासायनिक खादों से विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ फैल रही हैं। ऐसे में गोमूत्र एवं अन्य अपशिष्ट वैकल्पिक खाद और कीटनाशक के रूप में सामने आ रहे हैं।
याद रहे जो भी उपचार आपको नीचे गौ मूत्र से बताये गयें है | इसमें आपको देशी गौ माता का मूत्र ही लेना है और गौ प्रेग्नेनेट नहीं होने चाहिए | या आप उसकी बछिया का ले सकते है | और फिर आपको ये गौ मूत्र किसी सूती कपडे में से 7-8 बार छानना है | तभी इसका प्रयोग करना है |
गौ मुत्र के फायदे :



कान के सभी रोगों के लिए : 

जिन व्यक्तियों के कान में प्रॉब्लम है जेसे कान में दर्द रहना, कम सुनायी देना मवाद निकलना इत्यादि | जिनको भी ये सभी तकलीफें है वो लोग देशी गौ माता का मूत्र कान में एक – दो बूंद अवस्य डाले कम से कम 5-6 दिन तक | और आधा गौ मूत्र कफ पियें बहुत जल्द ही ठीक हो जाएगा | याद रहे की गौ मूत्र तजा ही पियें | अगर बहुत पुराना है तो तो उसमें थोडा सा पानी मिलाकर पी सकते है |
आँख के सभी रोगों के लिए :
 जिन व्यक्तियों की आँख में प्रॉब्लम है जेसे , आँख में से पानी आना, आँखों का लाल रहना, रेटिना का रोग, आँखों में खुजली चलना, इत्यादि इन सबकी सबसे बेस्ट एक ही दवा है वो है गौ मूत्र करना क्या है देशी गौ माता का मूत्र लेना और उसे आँख में एक एक टपका डाल लेना | इससे आँखों के सभी रोग सही हो जाते है 100%
अस्थमा रोग के लिए : 
जिन भी लोगो को अस्थमा की बीमारी है वो लोग रोज सुबह-सुबह गौ मूत्र का सेवन करें | कम से कम १५ दिन तक इसका सेवन करें अस्थमा की बीमारी जद से खत्म हो जाएगी |
घाव में फायदेमंद :
 जिन लोगो के सरीर पर चोट लगने से उनके सरीर पर घाव बन जाते है | तो उसकी सबसे अच्छी दवा है गौ मूत्र | याद रहे की मूत्र देशी गौ माता का ही होना चाहिए | करना क्या की आपको गेंदे के एक फूल की चटनी बनानी है फिर उसमें थोडा सा गौ मूत्र मिलाना है | फिर ये एक लेप के रूप में आ जाएगा | फिर आपको ये लगाना है जहा पर घाव है | घाव बहुत जल्द ही ठीक हो जाएगा |
चर्म रोग के लिए :- चर्म रोग में गौ मूत्र और पीसे हुए जीरे के लेप से लाभ मिलता है। खाज, खुजली में गौ मूत्र उपयोगी है।
मोटापा घटाने के लिए :–
 गौमूत्र मोटापा कम करने में भी सहायक है। एक ग्लास ताजे पानी में चार बूंद गौ मूत्र के साथ दो चम्मच शहद और एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर नियमित पीने से लाभ मिलता है।
पेट की बिमारियों के लिए :-
 पेट की बीमारियों के लिए गौमूत्र रामवाण की तरह काम करता है, इसे चिकित्सीय सलाह के अनुसार नियमित पीने से यकृत यानि लिवर के बढ़ने की स्थिति में लाभ मिलता है। यह लिवर को सही कर खून को साफ करता है और रोग से लड़ने की क्षमता विकसित करता है।



छालों के लिए :
- जिन व्यक्तियों के मुह में छालें है वो लोग गौ मूत्र से कुल्ला करें सुबह-सुबह दिन दिन में ही सही हो जाएँगे |
केंसर के लिए :- 
आजकल केंसर की बीमारी बहुत चल रही है केंसर की सबसे अच्छी दवा है गौ मूत्र जिन को भी केंसर है रोज सुबह-सुबह गौ मूत्र पियें | गारंटी के साथ ठीक हो जाएगी |
यकृत रोग में फायदेमंद :- 
जब यकृत का रोग बढ़ जाता है तो व्यक्ति उदर जैसी बिमारियों का शिकार हो जाते हैं | अगर आपको यकृत से सम्बंधित कोई भी परेशानी है तो आप थोड़े से पुननर्वा के काढ़े में थोडा-सा गौ मूत्र मिला लें और इसका सेवन करें | ऐसा करने से बहुत जल्दी लाभ मिलता है |



कुछ आवश्यक जानकारी :-

1. जिस घर में नियमित रूप से गौमूत्र का छिड़काव होता है, वहां बहुत सारे वास्तु दोषों का समाधान एक साथ हो जाता हैं।

2. देसी गाय के गोबर-मूत्र-मिश्रण से ‘`प्रोपिलीन ऑक्साइड” उत्पन्न होती है, जो बारिस लाने में सहायक होती है| इसी के मिश्रण से ‘इथिलीन ऑक्साइड‘ गैस निकलती है जो ऑपरेशन थियटर में काम आता है |
3. गौमूत्र का सेवन छानकर किया जाना चाहिए। यह वैसा रसायन है, जो वृद्धावस्था को रोकता है और शरीर को स्वस्थ्यकर बनाए रखता है।
4. गाय के मूत्र में आयुर्वेद का खजाना है! इसके अन्दर ‘कार्बोलिक एसिड‘ होता है जो कीटाणु नासक है, यह किटाणु जनित रोगों का भी नाश करता है। गौमूत्र चाहे जितने दिनों तक रखे, ख़राब नहीं होता है।
5. गौमूत्र को मेध्या और हृदया कहा गया है। इस तरह से यह दिमाग और हृदय को शक्ति प्रदान करता है। यह मानसिक कारणों से होने वाले आघात से हृदय की रक्षा करता है और इन अंगों को प्रभावित करने वाले रोगों से बचाता है।
ध्यान देने योग्य बातें :-
1. गोमूत्र को हमेशा निश्चित तापमान पर रखें|
2. गोमूत्र की मात्रा ऋतु पर निर्भर करती है। चूँकि इसकी प्रकृति कुछ गर्म होती है इसीलिए गर्मियों में इसकी मात्रा कम लेनी चाहिए।
3. 8 वर्ष से कम बच्चों और गर्भवती स्त्रियों को गौमूत्र अर्क वैद्य की सलाह के अनुसार ही दें।
4. मिट्टी, कांच या स्टील के बर्तन में ही गौमूत्र रखें।



गैस के लिए :-
 गैस की शिकायत में प्रातःकाल आधे कप पानी में गौ मूत्र के साथ नमक और नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए।
किडनी की बिमारियों में फायदेमंद :
 जिनकी किडनी ख़राब है वो व्यक्ति कभी भी खड़ा होकर पानी नहीं पियें | और एसा भोजन न करें जिसमें हिप्रोटिन, चिकनाई युक्त वाला भोजन न करें | और सुबह देशी गौ माता का मूत्र ले सुबह खाली पेट आधा कफ | एसा करने से किडनी सही हो जाएगी |

खांसी में फायदेमंद : जिनको भी खांसी की समस्या है वो लोग रोज सुबह- सुबह आधा कफ गौ माता का मूत्र पियें | चाहे खांसी कितनी भी खतरनाक हो सभी खांसी की समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा |

गरम पानी में पैर डुबोने से होते हैं कई स्वास्थ्य लाभ



 जब आप काम से थक कर घर आएं और कोई आपके लिये गरम पानी से भरा टब पैरो के नीचे रख दे. फिर आप उसमें अपने पैरों को डुबो कर अपने शरीर की सारी थकान मिटाएं. है ना सुकून देने वाला एहसास आपको करना केवल इतना है कि एक बाल्‍टी में गरम पानी भरिये और उसमें थोड़ा सा नमक मिला कर पैरों को डुबो लीजिये. कई लोग रात को सोने से पहले पैरों को डुबोते हैं. जिससे उन्‍हें अच्‍छी नींद आ सके.

पैर में होने वाले दर्द का कारण और उपचार - 


जी हां, गरम पानी में पैर डुबोने से ना केवल शरीर की थकान मिटाई जा सकती है बल्‍कि इससे अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभ भी मिलते हैं. पैरों को गरम पानी में डुबोने से मासपेशियों की थकान मिटती है, दर्द और सूजन से भी राहत मिलती है.

कब्ज (कांस्टीपेशन)  के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार

पानी में क्‍या मिलाना चाहिए - 

यदि आपको सर्दी-जुखाम है तो पानी के टब में ताजी अदरक की जड़ें डालें. अगर आपको गठिया है तो पानी में दालचीनी या काली मिर्च डाल सकते हैं. पैरों की थकान दूर करने और खुद को रिलैक्‍स करने के लिये लेवेंडर ऑइल या रोजमैरी ऑइल भी मिला सकते हैं.

सुबह में पैर डुबोने के फायदे -

 सुबह के दौरान गरम पानी में पैरों को डुबोने से एनर्जी बढ़ती है. रातभर एक ही पोजिशन में सोने से खून का संचार धीमा पड़ जाता है इसलिये अगर सुबह के दौरान अपने पैरों को गरम पानी में डुबोया जाए तो आप पहले से कहीं ज्‍यादा फ्रेश फील करने लगेंगे.

गेहूं के जवारे हैं अच्छे स्वास्थय की कुंजी

संध्या के समय पैर  डुबोने के फायदे -

 लेकिन सबसे अच्‍छा समय होता है शाम 5 बजे से 7 बजे का. इस दौरान आपकी किडनियों की एनर्जी बढ़ती है और खून का संचार तेज होता है. ऐसा करने के बाद अपने तलवों की तेल से मालिश करें, खासतौर पर एडियों की|
किसे नहीं डुबोने चाहिये गर्म पानी में पैर

वे लोग जिन्‍हें लो बीपी की समस्‍या है. उन्‍हें गरम पानी में पैर डुबोने से बेहोशी आ सकती है. मधुमेह रोगियों को भी इससे बचना चाहिये. क्‍योंकि गरम पानी से पैरों की त्‍वचा जल सकती है. यदि आपको काफी तेज भूखे हैं या फिर बहुत ज्‍यादा खा लिया है. तो भी पैरों को गरम पानी में ना डुबोएं| 

*सिर्फ आपरेशन नहीं ,प्रोस्टेट वृद्धि की 100% अचूक हर्बल औषधि 

* संगृहणी(बार बार दस्त आना) के आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक उपचार 

जोड़ों और हड्डियों में दर्द के कारण, लक्षण और उपचार लंबाई बढ़ाने के जबर्दस्त उपाय