20191129

अलसी के चौंकाने वाले फायदे



सुपर फुड अलसी में ओमेगा थ्री व सबसे अधिक फाइबर होता है। यह डब्लयू एच ओ ने इसे सुपर फुड माना है। यह रोगों के उपचार में लाभप्रद है। लेकिन इसका सेवन अलग-अलग बीमारी में अलग-अलग तरह से किया जाता है। स्वस्थ व्यक्ति को रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच अलसी का पाउडर पानी के साथ ,सब्जी, दाल या सलाद मंे मिलाकर लेना चाहिए । अलसी के पाउडर को ज्यूस, दूध या दही में मिलाकर भी लिया जा सकता है। इसकी मात्रा 30 से 60 ग्राम प्रतिदिन तक ली जा सकती है। 100-500 ग्राम अलसी को मिक्सर में दरदरा पीस कर किसी एयर टाइट डिब्बे में भर कर रख लें। अलसी को अधिक मात्रा मंे पीस कर न रखें, यह पाउडर के रूप में खराब होने लगती है। सात दिन से ज्यादा पुराना पीसा हुआ पाउडर प्रयोग न करें। इसको एक साथ पीसने से तिलहन होने के कारण खराब हो जाता है। *खाँसी होेने पर अलसी की चाय पीएं। पानी को उबालकर उसमें अलसी पाउडर मिलाकर चाय तैयार करें।एक चम्मच अलसी पावडर को दो कप (360 मिलीलीटर) पानी में तब तक धीमी आँच पर पकाएँ जब तक यह पानी एक कप न रह जाए। थोड़ा ठंडा होने पर शहद, गुड़ या शकर मिलाकर पीएँ। सर्दी, खाँसी, जुकाम, दमा आदि में यह चाय दिन में दो-तीन बार सेवन की जा सकती है। दमा रोगी एक चम्मच अलसी का पाउडर केा आधा गिलास पानी में 12 घंटे तक भिगो दे और उसका सुबह-शाम छानकर सेवन करे तो काफी लाभ होता है। गिलास काँच या चाँदी को होना चाहिए। *समान मात्रा में अलसी पाउडर, शहद, खोपराचूरा, मिल्क पाउडर व सूखे मेवे मिलाकर नील मधु तैयार करें। कमजोरी में व बच्चों के स्वास्थ्यके लिए नील मधु उपयोगी है।
*डायबीटिज के मरीज को आटा गुन्धते वक्त प्रति व्यक्ति 25 ग्राम अलसी काॅफी ग्राईन्डर में ताजा पीसकर आटे में मिलाकर इसका सेवन करना चाहिए। अलसी मिलाकर रोटियाँ बनाकर खाई जा सकती हैं। अलसी एक जीरो-कार फूड है अर्थात् इसमें कार्बोहाइट्रेट अधिक होता है।शक्कर की मात्रा न्यूनतम है। 
*कैंसर रोगियों को ठंडी विधि से निकला तीन चम्मच तेल, छः चम्मच पनीर में मिलाकर उसमें सूखे मेवे मिलाकर देने चाहिए। कैंसर की स्थिति मेें डाॅक्टर बुजविड के आहार-विहार की पालना श्रद्धा भाव से व पूर्णता से करनी चाहिए। कैंसर रोगियों को ठंडी विधि से निकले तेल की मालिश भी करनी चाहिए। 
*साफ बीनी हुई और पोंछी हुई अलसी को धीमी आंच पर तिल की तरह भून लें।मुखवास की तरह इसका सेवन करें। इसमें सैंधा नमक भी मिलाया जा सकता है। ज्यादा पुरानी भुनी हुई अलसी प्रयोग में न लें। बेसन में 25 प्रतिशत अलसी मिलाकर व्यंजन बनाएं। बाटी बनाते वक्त भी उसमें भी अलसी पाउडर  मिलाया जा सकता है। सब्जी की ग्रेवी में भी अलसी पाउडर का प्रयोग करें। अलसी सेवन के दौरान खूब पानी पीना चाहिए। इसमें अधिक फाइबर होता है, जो खूब पानी माँगता है।
दमा में दिलाये राहत

बहुत कम लोग यह बात जानते है, लेकिन दमा के रोगियों के लिए भी किसी चमत्कारी औषधि से कम नहीं है| दमा के रोगी एक चम्मच अलसी के पाउडर को आधा गिलास पानी में 12 घंटे तक भिगो दे और फिर इसे सुबह शाम छानकर इसका सेवन करे तो काफी लाभ होता है| 
खांसी से दिलाये छुटकारा -यदि ठंड के दिनों में आपको अकसर खांसी रहती है, तो ऐसे में अलसी की चाय का सेवन आपके लिए फायदेमंद होगा| इसके लिए अलसी का पाउडर बनाये| सादा पानी उबाल ले और उसमे अलसी का पाउडर मिलाये| इसका सेवन दिन में 2 से 3 बार करे|
ह्रदय रोग में फायदेमंद -भले ही अलसी के दाने छोटे छोटे हो, लेकिन इससे मिलने वाले फायदे बहुत बड़े है| आपको जानकर शायद आश्चर्य हो लेकिन अलसी का सेवन ह्रदय रोगो में भी फायदेमंद है| अलसी में पाया जाने वाला ओमेगा-3 जलन को कम और हृदय गति को सामान्य करने में मदद करता है| इसका नियमित सेवन करने से कार्डियो वेस्कुलर सिस्टम बेहतर बनता है। कुछ किये गए अध्यनों से पता चला है कि ओमेगा-3 से भरपूर भोजन करने से धमनियां सख्त नहीं पड़ती है। साथ ही यह व्हाइट ब्लड सेल्स को ब्लड वेसल के आंतरिक परत पर चिपका देता है, जिससे धमनियों में प्लैक जमने की संभावना भी कम हो जाती है|
जोड़ो के दर्द कम करे -ठंडी के दिनों में अक्सर वृद्ध लोगो को जोड़ो के दर्द में शिकायत रहती है| अलसी के बीजो का तेल जोड़ों के दर्द में राहत दिलाता है। इसके अलावा अलसी का नियमित सेवन शरीर को ऊर्जा व स्फूर्ति प्रदान करता है। कुछ लोगो के शरीर का वजन इतना ज्यादा होता है की उन्हें हमेशा पैरो में दर्द बना रहता है, लेकिन अलसी के सेवन से शरीर का भार कम होता है, वसा कम होता है| और यह हमारी खाने की ललक को भी कम करता है।अलसी खून को पतला बनाये रखती है, जिसके चलते शरीर में अच्छा कोलेस्ट्रोल बढ़ता है और खराब कोलेस्ट्रोल कम होता है और ह्रदय स्वस्थ रहता है।
*इसका रोजाना सेवन करने से महिलाओ मे होने वाली रजोनिवृत्ति संबंधी परेशानियों से राहत मिलती है। यह मासिक धर्म के दौरान ऐंठन को कम करके गर्भाशय को स्वस्थ बनाये रखता है।
*अलसी के सेवन से पैरो में रक्त का प्रवाह बढ़ता है, जिससे पेरो के घाव और फोड़े, फुंसी दूर हो जाते है| यहाँ तक की इसके तेल से मसाज करने पर पेरो के नाख़ून मुलायम और सुन्दर बनते है|
*डायबिटीज के रोगी को कम शर्करा व ज्यादा फाइबर खाने की सलाह दी जाती है। अलसी में प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है| जिससे ब्लड शुगर नियंत्रित रहती है और डायबिटीज से शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव कम होते है|
*अलसी का सेवन पेट को साफ रखने में भी प्रभावशाली है। इसलिए स्वस्थ व्यक्ति को रोज सुबह-शाम असली का सेवन जरूर करना चाहिए| आप चाहे तो अलसी के पाउडर को दूध, दही या ज्यूस में मिलाकर भी लिया जा सकता है|
अलसी के सेवन करने के तरीके- लसी से मिलने वाले लाभ तो बहुत है, लेकिन इस से मिलने वाले फायदों के लिए इसका सेवन सही तरीके से करना जरुरी है| यहाँ जानिए इसे किस तरह से लेना चाहिए|
अलसी के सेवन करने के तरीके अलसी से मिलने वाले लाभ तो बहुत है, लेकिन इस से मिलने वाले फायदों के लिए इसका सेवन सही तरीके से करना जरुरी है| यहाँ जानिए इसे किस तरह से लेना चाहिए| जो लोग कैंसर के रोगी है उन्हें 3 चम्मच अलसी का तेल पनीर में मिलाकर उसमें सूखे मेवे मिलाकर लेना चाहिए। स्वस्थ व्यक्ति रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच अलसी का पाउडर पानी के साथ या फिर दाल और सब्जी के साथ ले सकते है| स्वस्थ व्यक्ति इसकी मात्रा 30 से 60 ग्राम ले सकता है| अलसी को सूखी कढ़ाई में रोस्ट कीजिये और मिक्सी में पीस लीजिये| लेकिन एकदम बारीक मत कीजिये और दरदरे पीसिये| भोजन के बाद इसे सौंफ की तरह खाया जा सकता है|

दमा के रोगी को एक चम्मच अलसी के पाउडर को आधा गिलास पानी में 12 घंटे तक भिगो दे और फिर उसे सुबह – शाम छानकर इसका सेवन करने से लाभ मिलता है| आप इसे गर्मी या सर्दी दोनों मौसम में खा सकते है| इसमें पाया जाने वाले फाइबर से हमें कई स्वास्थ लाभ पहुँचते है| कभी कभार इसके सेवन से बहुत प्यास लगती है, इसलिए इसका सेवन करते वक्त भरपूर मात्रा में पानी पिये| जो लोग कैंसर के रोगी है उन्हें 3 चम्मच अलसी का तेल पनीर में मिलाकर उसमें सूखे मेवे मिलाकर लेना चाहिए। *स्वस्थ व्यक्ति रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच अलसी का पाउडर पानी के साथ या फिर दाल और सब्जी के साथ ले सकते है| *स्वस्थ व्यक्ति इसकी मात्रा 30 से 60 ग्राम ले सकता है| अलसी को सूखी कढ़ाई में रोस्ट कीजिये और मिक्सी में पीस लीजिये| लेकिन एकदम बारीक मत कीजिये और दरदरे पीसिये| भोजन के बाद इसे सौंफ की तरह खाया जा सकता है| *दमा के रोगी को एक चम्मच अलसी के पाउडर को आधा गिलास पानी में 12 घंटे तक भिगो दे और फिर उसे सुबह – शाम छानकर इसका सेवन करने से लाभ मिलता है| तो यह थे आलसी सेवन के फायदे |आप इसे गर्मी या सर्दी दोनों मौसम में खा सकते है| इसमें पाया जाने वाले फाइबर से हमें कई स्वास्थ लाभ पहुँचाते है| कभी कभार इसके सेवन से बहुत प्यास लगती है, इसलिए इसका सेवन करते वक्त भरपूर मात्रा में पानी पिये|

20191128

एक्जीमा,दाद,खाज के आयुर्वेदिक घरेलू उपचार






 एक्जिमा एक प्रकार का चर्म रोग है। त्वचा के उत्तेजक, दीर्घकालीन विकार को एक्जिमा के नाम से जाना जाता है। इस रोग में त्वचा शुष्क हो जाती है और बार-बार खुजली करने का मन करता है क्योंकि त्वचा की ऊपरी सतह पर नमी की कमी हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप त्वचा को कोई सुरक्षा नहीं रहती, और जीवाणुओं और कोशाणुओं के लिए हमला करने और त्वचा के भीतर घुसने के लिए आसान हो जाता है। एक्जिमा के गंभीर मामलों में त्वचा के ग्रसित जगहों से में पस और रक्त का स्राव भी होने लगता है। यह रोग डर्माटाईटिस के नाम से भी जाना जाता है।
    मुख्य रूप से यह रोग खून की खराबी के कारण होता है और चिकित्सा न कराने पर तेजी से शरीर में फैलता है। एक्जिमा का रोग अपने रोगियों को उम्र और लिंग के आधार पर नहीं चुनता। एक्जिमा के रोग से ग्रस्त रोगी अन्य विकारों के भी शिकार होते हैं। यह किसी भी उम्र के पुरुष या महिलाओं को प्रभावित कर सकता है। लेकिन कुछ आयुर्वेदिक उपचारों को अपनाकर इस समस्‍या के लक्षणों को कम किया जा सकता है।


खदिरारिष्ट
२० मिलीलीटर खदिरारिष्ट को २० मिलीलीटर पानी में मिलाकर खाना खाने के बाद दिन में दो बार लेने से फायदा होता है।
गुदुच्याड़ी तेल
एक औषधियुक्त तेल जिसे ग्रसित जगह पर लगाने से लाभ मिलता है।
पञ्चनिम्बडी चूर्ण
खाना खाने के बाद आधे से एक चमच पानी के साथ लेने से भी लाभ होता है।





नीम 
नीम रक्त विकारों में बहुत ही लाभकारी है | पाव भर सरसों के तेल में नीम की 50 ग्राम के लगभग कोंपलें पकाएं | कोंपले काली होते ही तेल नीचे उतार लें | छानकर बोतल में रखें और दिन में थोड़ा-थोड़ा एग्जिमा प्रभावित स्थान पर लगाएं | नीम की कोंपलों का रस 10 ग्राम की मात्रा में नित्य सेवन करते रहने से भी एक्जीमा ठीक हो जाता है |
आटे का लेप :
गेहूं के आटे का लेप करने से शरीर के सारे चर्म रोग दूर हो जाते हैं और खुजली में आराम मिलता है।
*तुलसी के पत्तों का रस पीने और लगाते रहने से लाभ होता है |
शुद्ध गुग्गूल-
आयुर्वेद की बहुत ही प्रचलित जड़ी बूटी, गुग्गूल में शुद्धि और तरोताजा करने के लिए अत्यधिक ओजस्वी शक्तियों का समावेश होता है।

एलोविरा 
एलोविरा के पौधे की पत्‍ती को काट लें और उसमें से निकलने वाले जेल को खुजली वाली जगह पर लगा लें। दिन में कम से कम चार से पांच बार ऐसा करने पर आपको आराम मिलेगा। साथ ही ठीक होने तक लगाने पर बाद में कभी खुजली नहीं होगी।
नींबू :
नींबू हर घर में आराम से मिल जाता है। इसलिए बॉडी में जहां पर भी खुजली हो रही हो उस जगह पर नींबू और गरी का तेल मिलाकर लगा लें। लगाने के तुरंत बाद खुजलाएं नहीं। थोड़ी देर में आराम मिल जाएगा।



छाछ -

. छाछ में एक साफ कपड़े का टुकड़ा भिगोकर त्वचा पर जलन, खुजली और बेचैनी वाले स्थान पर रखें | जितनी अधिक देर रख सकें, रखें | फिर उस स्थान को भली प्रकार साफ कर दें |

*खुबानी के पत्तों के रस का दाद-खाज पर प्रयोग करना भी लाभदायक है |
खीरे का रस:
खीरे को बारीक स्‍लाइस में काटकर दो घंटे के लिए रख दें। पूरा रस निकल जाने के बाद उसे छान लें और खुजली वाली जगह पर लगा लें। जरूर आराम होगा।
चन्दन
एक चम्मच कपूर के साथ एक चम्मच चन्दन की लई मिलाकर एक्जिमा से ग्रसित जगह पर लगाने से भी बहुत फायदा होता है।
नीम
नीम के कोमल पत्तों का रस निकालकर उसमें थोड़ी सी मिश्री मिला लें। इसे प्रतिदिन सुबह पीने से खून की खराबी दूर होकर एक्जिमा ठीक होने लगता है।

*चने के आटे में पानी मिलाकर पेस्ट सा बनाकर त्वचा के विकारग्रस्त स्थान पर लगाने से लाभ होता है | चने के आटे का उबटनके रूप में प्रयोग से मेकअप से होने वाला एक्जीमा भी ठीक हो जाता है |
*शुद्ध हल्दी भी एक्जिमा की चिकित्सा में लाभ  करती है। इसे एक्जिमा के चकतों पर लगाया जा सकता है और दूध में मिलाकर भी पीया जा सकता है।
हरड़-
4 हरड़ को गौमूत्र में पीसकर लेप बना लें। यह लेप प्रतिदिन दो से तीन बार एक्जिमा पर लगाने से लाभ होता है।




आहार और खान पान
दही और अचार जैसे खट्टी चीज़ों का सेवन बिलकुल ना करें।
करेले और नीम के फूलों का सेवन भी लाभकारी होता है।
क्या करें क्या ना करें
डिटरजेंट (कपडे धोने का पाउडर) को बिलकुल भी ना छुएं, पर अगर मजबूरी से छूना भी पड़े तो सूती दस्तानों का प्रयोग करें।
एक्जिमा से ग्रसित जगह पर तंग कपडे ना पहनें।
सिंथेटिक कपड़ों का भी बिलकुल प्रयोग ना करे, क्योंकि इससे पसीने के निष्काशन में कठिनाई होती है।
तरबूज जैसे फलों का नियमित रूप से सेवन करें।
गाजर और पालक के रस का मिश्रण पीने से भी एक्जिमा के ठीक होने में लाभ मिलता है।
पानी का भरपूर मात्रा में सेवन करें और चाहें तो संतरे का रस भी पी सकते हैं।
अध्ययनों से पता चला है कि टमाटर का रस भी एक्जिमा को चंद दिनों में ठीक करने में सहायक सिद्ध होता है।

20191126

गर्दन के दर्द के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार







गर्दन दर्द को कभी हलके में नहीं लेना चाहिये क्‍योंकि इससे कई लक्षणों का पता चलता है। गर्दन में दर्द की समस्‍या से ना तो आप ठीक से उठ-बैठ सकते हैं और ना ही रोज मर्रा के काम कर सकते हैं।
गर्दन में दर्द होना एक आम समस्या है।जिसे लोग अक्सर इग्नोर कर देते है। कई बार तो यह परेशानी इतनी बढ़ जाती है कि काम करने में और उठने-बैठने में भी मुश्किल होती है। गर्दन में लगातार दर्द रहने पर डॉक्टरी सलाह जरूर लेनी चाहिए।आज हम आपको इस परेशानी से निजात पाने के कुछ घरेलू उपाय बता रहे हैं, जिससे आपको काफी फायदा मिलेगा।

सीधे बैठे

गर्दन दर्द का एक कारण झुककर बैठना भी हो सकता है।काम करते समय हमेशा अपनी रीढ की हड्डी को सीधे रखकर ही बैठना चाहिए।

मसाज

गर्दन की दर्द में मसाज करने से बहुत फायदा मिलता है। मसाज से आप अच्‍छी नींद सो सकते है, लेकिन मसाज हमेशा हल्के हाथों से ही करनी चाहिए।

गर्म सिकाई

गर्म पानी की सिकाई करने से दर्द को बहुत आराम मिलता है।इससे खून का दौरा तेज हो जाता है।

अदरक

यह एक दर्द निवारक दवा के रूप में काम करती है। अगर आप अदरक पावडर को पानी में मिला कर पियें या फिर इसे घिस कर गरम पानी में मिला कर पेस्‍ट बना कर गरदन पर लगाएं तो राहत मिलेगी।

आइस पैक लगाएं

गरदन की दर्द में आइस पैक काफी लाभ पहुंचाता है। आप चाहें तो बरफ के टुकड़े को कपड़े में बांध कर दर्द पर रख सकते हैं। इससे दर्द में काफी आराम मिलेगा।

हींग एवं कपूर


गर्दन में दर्द होने पर हींग और कपूर बराबर मात्रा में लेकर सरसों के तेल में मिलाकर अच्छे से फेंटकर क्रीम की तरह बना लें।अब इस पेस्ट से गर्दन की हल्के हाथों से मसाज करने से दर्द में आराम मिलता है।

गरम पानी से स्‍नान

गुनगुने पानी का शॉवर लेने से आपकी गर्दन को आराम मिलेगा और जल्दी असर दिखाई देगा।

सही मुद्रा बना कर रखें

शरीर की सही मुद्रा बना कर रखने से भी गरदन का दर्द ठीक करने में सहायता मिलती है। अपने शरीर को एक दीवार पर सटा कर खड़ा कीजिये। अपनी पीठ और बुटक को दीवार से लगाइये और ठुड्डी को बिल्‍कुल सीधे रखिये। बस इसी मुद्रा में सारे दिन रहिये।




घुटनों के दर्द के अचूक असर उपचार


               
           
घुटने का दर्द कैसे करें ठीक : –


 घुटनों के दर्द की समस्या आजकल आम होती जा रही है कई बार ऐसा भी होता है कि किसी कारणवश चोट लग जाने से या बढ़ती हुई उम्र के कारण या फिर व्रद्धावस्था में हड्डियों के कमजोर हो जाने से अक्सर घुटनों में दर्द होने लगता है. इस पोस्ट में हम आपको घुटनों कादर्द से राहत दिलाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे बता रहे हैं जिनका उपयोग करने पर लगभग 7 दिन में ही आपको घुटनों के दर्द से राहत मिल जाएगी. अक्सर घुटनों में दर्द होना आम बात नही है. और यदि आप भी अपने घुटनों में होने वाले दर्द से परेशान है. आपको बैठने उठने में समस्या आती है. सीडियां चढ़ते-उतरते घुटनों में दर्द होता है तो परेशान न हो आपके लिए घुटनों का दर्द ख़त्म करने वाला इलाज है. घुटनों का दर्द का इलाज बेहद सरल और असरदार है. यदि आप इन उपायों को आजमतें है तो आपको घुटने के दर्द से राहत मिलेगी

घुटनों के दर्द का इलाज – 
यदि आपके घुटनों में लगातार या थोड़ा-थोड़ा दर्द या तेज दर्द बना रहता है तो यहां दिए गए घरेलू नुस्खे आजमाएं और आपको 7 से लेकर 15 दिन के अंदर-अंदर इन घरेलू नुस्खों से पूरा पूरा आराम मिल जाएगा और फिर कभी आपके घुटने दर्द नहीं करेंगे. घुटनों के लिए दर्द निवारक दवा बनाने के लिए आप नीचे दिए गए कुछ नुस्खे आजमाएं. माना जाता है कि बूढ़े होने पर हड्डियों में दर्द होना शुरू हो जाता है. लेकिन ऐसा नही है. घुटनों में दर्द होने के कई कारण है. जैसे गलत तरीके ज्यादा वजन उठाना अपने घुटनों को घंटों तक मोड़ कर बैठना घुटने में पुरानी चोट को नज़रंदाज़ व्यायाम करने से पहले बॉडी को स्ट्रेच और बॉडी वार्मअप न करना गलत खान-पान और रहन-सहन ये सभी घुटनों में होने वाले दर्द का कारण बन सकता है. इसे कुछ बातों का ध्यान रखें. ज्यादातर शरीर में होने वालें दर्द का कारण उपरोक्त ही है. इसलिए इन्हें दोहरायें नही. ये आपके के लिए काफी खतरनाक हो सकता है.

सौठ से बनी दर्द निवारक दवा -
सौंठ भी एक बहुत अच्छा दर्द निवारक दवा के रूप में फायदेमंद साबित हो सकता है, सौंठ से दर्दनिवारक दवा बनाने के लिए एक आप एक छोटा चम्मच सौंठ का पाउडर व थोड़ा आवश्यकतानुसार तिल का तेल इन दोनों को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट जैसा बना ले. दर्द या मोच के स्थान पर या चोट के दर्द में आप इस दर्द निवारक सौंठ के पेस्ट को हल्के हल्के प्रभावित स्थान पर लगाएं और इसको 3 घंटे तक लगा रहने दें इसके बाद इसे पानी से धो लें. ऐसा करने से सप्ताह में आपको घुटने के दर्द में पूरा आराम मिल जाता है और अगर मांसपेशियों में भी खिंचाव महसूस होता है तो वह भी जाता रहता है.
दर्द निवारक हल्दी का पेस्ट -किसी चोट का दर्द हो या घुटने का दर्द आप इस दर्द निवारक हल्दी के पेस्ट को बनाकर अपनी चोट के स्थान पर या घुटनों के दर्द के स्थान पर लगाइए इससे बहुत जल्दी आराम मिलता है. दर्द निवारक हल्दी का पेस्ट कैसे बनाएं इसके लिए आप सबसे पहले एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर लें और एक चम्मच पिसी हुई चीनी और इसमें आप बूरा या शहद मिला लें, और एक चुटकी चूना मिला दें और थोड़ा सा पानी डाल कर इसका पेस्ट जैसा बना लें.
इस लेप को बनाने के बाद अपने चम्मच के स्थान पर या जो घुटना का दर्द करता है उस स्थान पर स्लिप को लगा ले और ऊपर से  बैंडेज या कोई पुराना सूती कपड़ा बांध दें और इसको रातभर लगा रहने दें और सुबह सादा पानी से इसको धो ले इस तरह से लगभग 1 सप्ताह से लेकर 2 सप्ताह तक ऐसा करने से इसको लगाने से आपके घुटने की सूजन मांसपेशियों में खिंचाव अंदरुनी रूप से होने वाले दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलता है और यह आप के दर्द को जड़ से खत्म कर देता है. दर्द के आराम दिलाये सौंठ का लेप
खजूर से घुटने में दर्द का इलाज -सर्दियों के मौसम में रोजाना 5-6 खजूर खाना बहुत ही लाभदायक होता है, खजूर का सेवन आप इस तरह भी कर सकते हैं रात के समय 6-7 खजूर पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट इन खजूर को खा ले और साथ ही वह पानी भी पी ले जिनको जिसमें आपने रात में खजूर भिगोए थे. यह घुटनों के दर्द के अलावा आपके जोड़ों के दर्द में भी आराम दिलाता
आपके घर में मौजूद कुछ दवाओं के द्वारा भी आप अपने घुटने का दर्द को दूर कर सकते है. इसके आपको आधा कप सरसों का तेल लेना है फिर उसमे कुछ लहसुन की कच्ची कालिया छिल कर दाल देनी है. फिर इस सरसों के तेल को धीमी आंच पर गर्म करना है. और तब तक इसे गर्म करना जब तक की लहसुन की कालिया पक न जाये. फिर इस तेल के मिश्रण को ठंडा होने के लिए छोड़ दें. ठंडा होने पर इसे अपने घुटनों में हल्के हाथों से मालिश करें. इस उपाय को यदि आप 1 से लेकर २ दिन इसे करें आपका घुटने का दर्द पूरी तरह से गायब हो जायेगा.
नारियल का तेल है बेहतर- नारियल के तेल के बड़े फायदे है नारियल का तेल केवल आपके बालों को ही मजबूत नही बनाता बल्कि ये आपके शरीर के कई हिस्सों को मजबूत बनाने में मदद करता है. आप यदि नारियल के तेल से अपने शरीर की मशाज़ करते है तो आपको शरीर में होने अकडन से निजात मिलेगी. और आप नारियल के भीतर मौजूद गिरी को खाते है तो भी ये आपके लिए फायदेमंद ही है क्योंकि ये सीधे आपके पेट पर असर करती है. और ये आपके घुटने का दर्द दूर करने में मदद करेगा.
अखरोट के सेवन से आपको काफी फायेदा होगा-  अखरोट जितना सख्त होता है उसे फायदे उठने ही मुलायम होते है. यदि आप रोजाना 2 से 3 अखरोट खाते है तो आपके लिए काफी फायदेमद रहेगा. अखरोट खाने का तरीका बेहद आसान है आपको रात में अखरोट की गिरी को भिगो कर रखना है फिर सुबह खाली पेट सेवन करना है ताकि आपकी पचाने की शक्ति पर असर न पड़े. ऐसा करने से आपके घुटने का दर्द खत्म होगा साथ ही आपकी हड्डिया भी मजबूत हो जायेंगी.
हल्दी का मिश्रण घुटने का दर्द मिटाए- उम्र के साथ साथ शरीर की कार्यशक्ति कम हो जाती है. और बृद होने पर जोड़ो में दर्द होने लगता है. और कमर और घुटने में दर्द होना आम बात हो जाती है. लेकिन कभी कभी ये दर्द असहनीय हो जाता है. घुटने का दर्द मिटाना चाहते है तो हल्दी के आयुर्वेदिक लेप का इस्तेमाल करें इस लेप को बनाने के लिए आपको एक चम्मच हल्दी लीजिये. फिर इसमें शक्कर या शहद के घोल में इसे मिला दीजिये. और इस मिश्रण में चूना (जो पान में इस्तेमाल होता है) अपनी आवश्यकतानुसार मिला लें. और इस मिश्रण को अच्छी तरह से फेंटे. जब ये पेस्ट बनकर तैयार हो जाये तो इस पेस्ट या लेप को अपने घुटनों में लगायें. कुछ ही देर में आपको घुटने का दर्द छूमंतर हो जायगा. 
यदि आपका वजन बढ़ा हुआ है तो आपको चलने में तकलीफ होना या फिर घुटनों में दर्द होना स्वाभाविक है. इसलिए सबसे पहले अपने वजन को कम कीजिये ताकि आपकी बॉडी फिट रहे है आपको अन्य बीमारियाँ न लगे. अपने शरीर को मजबूत बनायें सही नियमों के साथ व्यायाम करें. स्पोर्ट एक्टिविटीज में हिस्सा है और कुछ न कुछ करते रहे इससे आपके शरीर का तनाव और खिचाव कम होगा. और घुटनों के दर्द में आराम मिलेगा.


विशिष्ट परामर्श-  


संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है|  बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| औषधि के लिए वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं| 











        




    20191125

    इलायची के औषधीय उपयोग


    छायादार नमीयुक्त, भूमि में इलायची के पेड़ होता है। पेड़ की आयु लगभग 10-12 वर्ष होती है। इलायची दो प्रकार की होती है। एक छोटी इलायची और दूसरी बड़ी। घरेलू उपयोग में आने के कारण यह घर-घर उपलब्ध रहती है।

    आयुर्वेदिक मतानुसार गुण-दोष- वायुदोष से सिरदर्द में छोटी इलाचयी के बीच शीत, तीक्ष्ण, पाचन शक्तिवर्धक और सुगंधित होते हैं। इलायची मुख शुद्धिकारक, रुचिकारक, पथरीनाशक, हृदय रोग नाशक, मूत्र रोग नाशक, खांसी, सुजाक, वात, श्वास और क्षय रोग, खुजली तथा बवासीर नाशक मानी गई है। भारतवर्ष में प्राचीनकाल से इलायची पकवानों को सुगंधित स्वादिष्ट बनाने के लिए उपयोग में लाई जाती रही है। मूत्र निस्सारक गुण भी होता है। पेशाब की जलन दूर करती है। अब हम दोनों प्रकार की इलाचयी के रोग हितकारी उपचारो के बारे मे जानकारी देते हैं-
    बड़ी इलायची के घरेलू प्रयोग- सभी प्रकार के ज्वरों में बड़ी इलायची चूर्ण 3 ग्राम के साथ 3 ग्राम बेल वृक्ष की जड़ का चूर्ण तथा पुनर्नवा की जड़ के चूर्ण की 2-2 ग्राम मात्रा लेकर 200 ग्राम दूध में 100 ग्राम पानी मिलाकर पकाएं, जब मात्र दूध शेष रहे, तब ठंडा होने पर छानकर पिला दें।
    गर्भवती को भूख की कमी में-  बड़ी इलायची चूर्ण में समान मात्रा में मिश्री के साथ पीसकर मिला लें। यह 2 ग्राम चूर्ण दिन में 3 बार खाने से जठराग्नि तेज होती है। भूख खुलकर लगती है।
    हिचकी में-  बड़ी इलायची को थोड़ा भूनकर पीस लें तथा 1 ग्राम चूर्ण गरम पानी के साथ तीन-चार बार सेवन कराने से हिचकी दूर हो जाती है। शीतऋतु की खांसी में- बड़ी इलायची, काली मिर्च, पिपली (बड़ी), बादाम-मिंगी, मुनक्का (बीज निकालकर) सबको 15-15 ग्राम लें। बादाम को पानी में भिगोकर छिलका हटा दें। सबको कूटकर खूब घोंटें। थोड़ा पानी मिलाकर जितनी घुटाई कर सकते हैं करें। जंगली बेर के बराबर गोली बना लें। रात्रि के समय 1 गोली मुंह में रखकर चूसें। छोटी इलायची के घरेलू प्रयोग-
    सुजाक में- छोटी इलायची 7 नग लेकर उसके दाने पीसकर तथा धनियां 5 ग्राम पीसकर, चंदन पाउडर 5 ग्राम लेकर सबको आधा लीटर पानी में खूब घोट-पीसकर छान लें। मिश्री मिलाकर दिन में तीन-चार बार पिलाएं। यह रामबाण प्रयोग है।
    प्यास की अधिकता में- प्यास की तीव्रता में चार लीटर पानी में 25 ग्राम इलाचयी के छिलके ओटाकर जब पानी आधा शेष रह जाए तो ठंडा करके पीने के लिए उपयोग में लाएं। यह रामबाण प्रयोग है। यह हैजा में भी उपयोगी है।
    सिरदर्द में- इलायची के बीजों को महीन पीसकर सूंघने से छींकें आती हैं, जिससे सिरदर्द दूर होता है।
    केले के अजीर्ण में-  अधिक मात्रा में केला खाने पर अजीर्ण से बचने के लिए केला के पाचन के लिए केला खाने के बाद इलायची खाना चाहिए।
    आंखों की कमजोरी में-




    इलायची के बीज 50 ग्राम तथा बंशलोचन 50 ग्राम, 50 ग्राम बादाम तथा पिस्ता 50 ग्राम लेकर (बादाम और पिस्ता को पानी में भिगोकर छिलका हटा दें।) सभी को कूट-पीस लें और 2 किलो दूध में पकाएं। जब दूध गाढ़ा हो जाए तब 250 ग्राम मिश्री मिलाकर पकाएं। हलुवा-सा बन जाए तब ठंडा कर सुरक्षित रखें। इसे 20 ग्राम नित्य सेवन करें। इससे आखों की कमजोरी दूर होती है।
    उल्टी में-  इलायची दाने का चूर्ण 1 ग्राम लेकर अनार के शरबत के साथ पिलाने से उल्टी बंद होती है।
    धातु पुष्टि के लिए-
     इलायची के बीच 2 ग्राम, जावित्री 1 ग्राम, बादाम 5 नग इन्हें पानी में पीसकर गाय के मक्खन में मिश्री मिलाकर सेवन करें, यह एक खुराक है। दिन में दो बार लेें।

    स्वप्नदोष में- इलायची के बीजों को पीसकर ईसबगोल की भूसी बराबर मात्रा में मिलाकर आंवला के रस में घोंटकर दो-दो रत्ती की गोलियां बना लें। 40 दिनों तथा 1-1 गोली गाय के दूध के साथ सेवन करें।
    कफजन्य खांसी में- 
    कफजन्य खांसी होने पर इलायची के बीजों को पीसकर आधा ग्राम लेकर बराबर मात्रा में सोंठ चूर्ण मिलाकर शहद के साथ चटाने से कफदोष से निवृत्ति मिलती है। खांसी में लाभ होता है।
    यकृत शोथ एवं पीलिया में-
     इलायची चूर्ण 2 ग्राम, भूआमलकी चूर्ण (भुई आंवला) 2 ग्राम और मिश्री 4 ग्राम लेकर गोदुग्ध के साथ नित्य प्रात: सेवन कराने से लाभ होता है।

    शीत पित्ती में- इस रोग में त्वचा पर लाल चकत्ते उभरते हैं। इलायची चूर्ण 60 ग्राम, सोना गेरू 50 ग्राम और जवाखार 60 ग्राम, सबको एक साथ मिलाकर रखें। इसकी 3-3 ग्राम की मात्रा सुबह-शाम पानी के साथ सेवन कराने से लाभ होता है। अधिक गरम भोजन न करें। अचार, गरम मसाला, बेसन एवं तले खाद्यों से बचें। सादा सुपाच्य भोजन करें।
    जमालगोटा की विषाक्तता में-  जमालगोटा के विषाक्तता दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए 200 ग्राम दही के साथ 2 ग्राम इलायची बीज के चूर्ण को तीन बार प्रतिदिन सेवन कराएं। तीन-चार दिनों में जमालगोटा के विषय का दुष्प्रभाव दूर हो जाता है। 


    चश्मा हटाने का अचूक नुस्खा



    आँखों पर नजर का चश्मा लगाना एक अवस्था में मजबूरी भरी जरूरत बन जाता है जिसका समाधान सिर्फ आँखों के ऑप्रेशन द्वारा ही हो पाता है । किंतु अब यही एकमात्र सत्य नही है चश्में से छुटकारा एक स्पेशल उपाय द्वारा भी पाया जा सकता है । इस उपाय के बारे में हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से बता रहे हैं, जरूर पढ़िये और लाभ उठाइये ।

    जरूरी सामग्री -

    देशी गाय के दूध से बना देशी घी आधा किलो
    असली शुद्ध शहद 250 ग्राम
    काली मिर्च 100 ग्राम
    असली केसर 2 ग्राम
    बादाम की गिरी 100 ग्राम
    पिस्ते की गिरी 100 ग्राम
    .

    बनाने की विधि -

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    सबसे पहले काली मिर्च को सुखाकर और मिक्सी में पीसकर बारीक चूर्ण तैयार कर लें और बादाम एवं पिस्ते को बारीक बारीक कतर लें । इसके बाद देशी घी को सिर्फ इतना गर्म करें कि वो पिघल जाये । घी के पिघल जाने पर उसमें सभी चीजे अर्थात शहद, काली मिर्च का चूर्ण, केसर, पिस्ता और बादाम को मिलाकर खूब अच्छी तरह से मिक्स करदें । बस आपका नुस्खा तैयार है । इसको साफ काँच की शीशी अथवा मर्तबान में भरकर रख दीजिये । रोज सुबह और शाम एक-एक चम्मच सेवन करना है । 12 साल से छोटे बच्चों को आधा आधा चम्मच ही देना उचित है ।

    पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज

    *किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार

    गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार

    गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि 





    भुने हुए लहसुन खाने के फायदे


                                                            
      लहसुन अपने स्वाद, एंटी बायोटिक तत्वों और सेहत लाभ के लिए जाना जाता है, इसलिए आप इसे भोजन में या फिर कच्चा उपयोग करते हैं। लेकिन भुनी हुई लहसुन खाने के यह फायदे जानेंगे तो आप हैरान रह जाएंगे।     सुबह खालीपेट लहसुन को भूनकर खाने से कॉलेस्ट्रॉल कम होता है, और कॉलेस्ट्रॉल से जुड़ी सभी स्वास्थ्य समस्याओं जैसे हृदय की नलियों में कॉलेस्ट्रॉल का जमाव आदि के लिए यह बेहद फायदेमंद तरीका है।| *वजन कम करना चाहते हैं तो भी यह फायदेमंद है, क्योंकि कॉलेस्ट्रॉल का स्तर कम होने के साथ-साथ आपका वजन घटने लगेगा और मोटापा गायब हो जाएगा। 
    *सर्दी के दिनों में यह सर्दी, खांसी और जुकाम से बचाता है और शरीर में गर्माहट पैदा करने में मदद करता है। इतना ही नहीं यह रक्तप्रवाह को भी बेहतर बनाए रखता है।
    *सर्दी के दिनों में यह सर्दी, खांसी और जुकाम से बचाता है और शरीर में गर्माहट पैदा करने में मदद करता है। इतना ही नहीं यह रक्तप्रवाह को भी बेहतर बनाए रखता है।
    *प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ यह ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है और अपने एंटी इंफ्लेमटरी एवं एंटी *फंगल गुणों के कारण शरीर की अंदरूनी सफाई कर  कई बीमारियों से बचाए
    रखता है।

    *इसमें मौजूद भरपूर कार्बोहाइड्रेट शरीर की कमजोरी को दूर कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी मददगार है और कब्ज से भी बचाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की रिसर्च के अनुसार लहसुन में मौजूद फाइटोकेमिकल्स पुरुषों की हेल्थ के लिए फायदेमंद है। प्रोस्टेट कैंसर और कार्डियो वेस्क्यूलर डिसीज में इसे खाने के कई फायदे हैं। इसलिए महर्षि अायुर्वेद हॉस्पिटल, नई दिल्ली की डॉ. भानु शर्मा रोज पुरुषों को सोने से पहले भुने हुए लहसुन की एक कली खाने की सलाह देती हैं।
    कैसे भूनें- लहसुन की कलियों को थोड़े से देसी गाय के घी या ऑलिव आईल मे हल्की आंच पर भूरे रंग की होने तक  तवे पर गरम करें|



    आर्थराइटिस(संधिवात),गठियावात की तुरंत असर हर्बल औषधि


    गौमूत्र के औषधीय उपयोग फायदे



    गोमुत्र अर्क :-

    गौ कई प्रकार की होती है जेसे जर्शी, दोगली, देशी | इनमें से देशी गौ का मूत्र बहुत काम आता है | हिन्दू धर्म में गौ को माता मानते है और उसकी पूजा भी करते है | इसलिए देशी गौ को गौ माता के नाम से भी जाना जाता है | भाइयो हमारे बुजुर्ग कहते है की गौ माता के मूत्र में गंगा और गोबर में लक्ष्मी का वास होता है तभी मूत्र को घर में छिड़का और गोबर से चोका लगाया जाता है |
    आयुर्वेद में गौ मूत्र के बहुत प्रयोग हैं |गौमूत्र का रासायनिक विश्लेषण करने पर वैज्ञानिकों ने पाया, कि इसमें 24 ऐसे तत्व हैं जो शरीर के विभिन्न रोगों को ठीक करने की क्षमता रखते हैं। आयुर्वेद के अनुसार गौमूत्र का नियमित सेवन करने से कई बीमारियों को खत्म किया जा सकता है। जो लोग नियमित रूप से थोड़े से गौमूत्र का भी सेवन करते हैं, उनकी रोगप्रतिरोधी क्षमता बढ़ जाती है। मौसम परिवर्तन के समय होने वाली कई बीमारियां दूर ही रहती हैं। शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है। इसके कुछ गुण इस प्रकार गए हैं|

    गौ मूत्र का सेवन कैसे करें :-
    स्वस्थ गौ माता का गौ मूत्र को रोजाना दो तोला सात पट कपड़े में छानकर उसमें से आधा कफ गौ मूत्र सुबह-सुबह खाली पेट पियें | ध्यान रहे की गौ देशी होनी चाहिए और वो प्रेगनेंट नहीं होनी चाहिए | अगर आप गौ अर्क का सेवन करना चाहते हैं तो आधे कफ पानी में 1 या 2 चम्मच गौ अर्क डाल दें और उसे पी लें | आप इसका सेवन सुबह-साम खाली पेट कर सकते हैं |
    कृषि में गोमूत्र का प्रयोग :-
    वर्तमान मानव जीवन कृषि में रासायनिक खादों के प्रयोग से होने वाले दुष्परिणामों को झेल रहा है। रासायनिक खादों से विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ फैल रही हैं। ऐसे में गोमूत्र एवं अन्य अपशिष्ट वैकल्पिक खाद और कीटनाशक के रूप में सामने आ रहे हैं।
    याद रहे जो भी उपचार आपको नीचे गौ मूत्र से बताये गयें है | इसमें आपको देशी गौ माता का मूत्र ही लेना है और गौ प्रेग्नेनेट नहीं होने चाहिए | या आप उसकी बछिया का ले सकते है | और फिर आपको ये गौ मूत्र किसी सूती कपडे में से 7-8 बार छानना है | तभी इसका प्रयोग करना है |
    गौ मुत्र के फायदे :



    कान के सभी रोगों के लिए : 

    जिन व्यक्तियों के कान में प्रॉब्लम है जेसे कान में दर्द रहना, कम सुनायी देना मवाद निकलना इत्यादि | जिनको भी ये सभी तकलीफें है वो लोग देशी गौ माता का मूत्र कान में एक – दो बूंद अवस्य डाले कम से कम 5-6 दिन तक | और आधा गौ मूत्र कफ पियें बहुत जल्द ही ठीक हो जाएगा | याद रहे की गौ मूत्र तजा ही पियें | अगर बहुत पुराना है तो तो उसमें थोडा सा पानी मिलाकर पी सकते है |
    आँख के सभी रोगों के लिए :
     जिन व्यक्तियों की आँख में प्रॉब्लम है जेसे , आँख में से पानी आना, आँखों का लाल रहना, रेटिना का रोग, आँखों में खुजली चलना, इत्यादि इन सबकी सबसे बेस्ट एक ही दवा है वो है गौ मूत्र करना क्या है देशी गौ माता का मूत्र लेना और उसे आँख में एक एक टपका डाल लेना | इससे आँखों के सभी रोग सही हो जाते है 100%
    अस्थमा रोग के लिए : 
    जिन भी लोगो को अस्थमा की बीमारी है वो लोग रोज सुबह-सुबह गौ मूत्र का सेवन करें | कम से कम १५ दिन तक इसका सेवन करें अस्थमा की बीमारी जद से खत्म हो जाएगी |
    घाव में फायदेमंद :
     जिन लोगो के सरीर पर चोट लगने से उनके सरीर पर घाव बन जाते है | तो उसकी सबसे अच्छी दवा है गौ मूत्र | याद रहे की मूत्र देशी गौ माता का ही होना चाहिए | करना क्या की आपको गेंदे के एक फूल की चटनी बनानी है फिर उसमें थोडा सा गौ मूत्र मिलाना है | फिर ये एक लेप के रूप में आ जाएगा | फिर आपको ये लगाना है जहा पर घाव है | घाव बहुत जल्द ही ठीक हो जाएगा |
    चर्म रोग के लिए :- चर्म रोग में गौ मूत्र और पीसे हुए जीरे के लेप से लाभ मिलता है। खाज, खुजली में गौ मूत्र उपयोगी है।
    मोटापा घटाने के लिए :–
     गौमूत्र मोटापा कम करने में भी सहायक है। एक ग्लास ताजे पानी में चार बूंद गौ मूत्र के साथ दो चम्मच शहद और एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर नियमित पीने से लाभ मिलता है।
    पेट की बिमारियों के लिए :-
     पेट की बीमारियों के लिए गौमूत्र रामवाण की तरह काम करता है, इसे चिकित्सीय सलाह के अनुसार नियमित पीने से यकृत यानि लिवर के बढ़ने की स्थिति में लाभ मिलता है। यह लिवर को सही कर खून को साफ करता है और रोग से लड़ने की क्षमता विकसित करता है।



    छालों के लिए :
    - जिन व्यक्तियों के मुह में छालें है वो लोग गौ मूत्र से कुल्ला करें सुबह-सुबह दिन दिन में ही सही हो जाएँगे |
    केंसर के लिए :- 
    आजकल केंसर की बीमारी बहुत चल रही है केंसर की सबसे अच्छी दवा है गौ मूत्र जिन को भी केंसर है रोज सुबह-सुबह गौ मूत्र पियें | गारंटी के साथ ठीक हो जाएगी |
    यकृत रोग में फायदेमंद :- 
    जब यकृत का रोग बढ़ जाता है तो व्यक्ति उदर जैसी बिमारियों का शिकार हो जाते हैं | अगर आपको यकृत से सम्बंधित कोई भी परेशानी है तो आप थोड़े से पुननर्वा के काढ़े में थोडा-सा गौ मूत्र मिला लें और इसका सेवन करें | ऐसा करने से बहुत जल्दी लाभ मिलता है |



    कुछ आवश्यक जानकारी :-

    1. जिस घर में नियमित रूप से गौमूत्र का छिड़काव होता है, वहां बहुत सारे वास्तु दोषों का समाधान एक साथ हो जाता हैं।

    2. देसी गाय के गोबर-मूत्र-मिश्रण से ‘`प्रोपिलीन ऑक्साइड” उत्पन्न होती है, जो बारिस लाने में सहायक होती है| इसी के मिश्रण से ‘इथिलीन ऑक्साइड‘ गैस निकलती है जो ऑपरेशन थियटर में काम आता है |
    3. गौमूत्र का सेवन छानकर किया जाना चाहिए। यह वैसा रसायन है, जो वृद्धावस्था को रोकता है और शरीर को स्वस्थ्यकर बनाए रखता है।
    4. गाय के मूत्र में आयुर्वेद का खजाना है! इसके अन्दर ‘कार्बोलिक एसिड‘ होता है जो कीटाणु नासक है, यह किटाणु जनित रोगों का भी नाश करता है। गौमूत्र चाहे जितने दिनों तक रखे, ख़राब नहीं होता है।
    5. गौमूत्र को मेध्या और हृदया कहा गया है। इस तरह से यह दिमाग और हृदय को शक्ति प्रदान करता है। यह मानसिक कारणों से होने वाले आघात से हृदय की रक्षा करता है और इन अंगों को प्रभावित करने वाले रोगों से बचाता है।
    ध्यान देने योग्य बातें :-
    1. गोमूत्र को हमेशा निश्चित तापमान पर रखें|
    2. गोमूत्र की मात्रा ऋतु पर निर्भर करती है। चूँकि इसकी प्रकृति कुछ गर्म होती है इसीलिए गर्मियों में इसकी मात्रा कम लेनी चाहिए।
    3. 8 वर्ष से कम बच्चों और गर्भवती स्त्रियों को गौमूत्र अर्क वैद्य की सलाह के अनुसार ही दें।
    4. मिट्टी, कांच या स्टील के बर्तन में ही गौमूत्र रखें।



    गैस के लिए :-
     गैस की शिकायत में प्रातःकाल आधे कप पानी में गौ मूत्र के साथ नमक और नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए।
    किडनी की बिमारियों में फायदेमंद :
     जिनकी किडनी ख़राब है वो व्यक्ति कभी भी खड़ा होकर पानी नहीं पियें | और एसा भोजन न करें जिसमें हिप्रोटिन, चिकनाई युक्त वाला भोजन न करें | और सुबह देशी गौ माता का मूत्र ले सुबह खाली पेट आधा कफ | एसा करने से किडनी सही हो जाएगी |

    खांसी में फायदेमंद : जिनको भी खांसी की समस्या है वो लोग रोज सुबह- सुबह आधा कफ गौ माता का मूत्र पियें | चाहे खांसी कितनी भी खतरनाक हो सभी खांसी की समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा |



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    गरम पानी में पैर डुबोने से होते हैं कई स्वास्थ्य लाभ



     जब आप काम से थक कर घर आएं और कोई आपके लिये गरम पानी से भरा टब पैरो के नीचे रख दे. फिर आप उसमें अपने पैरों को डुबो कर अपने शरीर की सारी थकान मिटाएं. है ना सुकून देने वाला एहसास आपको करना केवल इतना है कि एक बाल्‍टी में गरम पानी भरिये और उसमें थोड़ा सा नमक मिला कर पैरों को डुबो लीजिये. कई लोग रात को सोने से पहले पैरों को डुबोते हैं. जिससे उन्‍हें अच्‍छी नींद आ सके.

    पैर में होने वाले दर्द का कारण और उपचार - 


    जी हां, गरम पानी में पैर डुबोने से ना केवल शरीर की थकान मिटाई जा सकती है बल्‍कि इससे अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभ भी मिलते हैं. पैरों को गरम पानी में डुबोने से मासपेशियों की थकान मिटती है, दर्द और सूजन से भी राहत मिलती है.

    पानी में क्‍या मिलाना चाहिए - 

    यदि आपको सर्दी-जुखाम है तो पानी के टब में ताजी अदरक की जड़ें डालें. अगर आपको गठिया है तो पानी में दालचीनी या काली मिर्च डाल सकते हैं. पैरों की थकान दूर करने और खुद को रिलैक्‍स करने के लिये लेवेंडर ऑइल या रोजमैरी ऑइल भी मिला सकते हैं.

    सुबह में पैर डुबोने के फायदे - 

    सुबह के दौरान गरम पानी में पैरों को डुबोने से एनर्जी बढ़ती है. रातभर एक ही पोजिशन में सोने से खून का संचार धीमा पड़ जाता है इसलिये अगर सुबह के दौरान अपने पैरों को गरम पानी में डुबोया जाए तो आप पहले से कहीं ज्‍यादा फ्रेश फील करने लगेंगे.


    संध्या के समय पैर  डुबोने के फायदे -

     लेकिन सबसे अच्‍छा समय होता है शाम 5 बजे से 7 बजे का. इस दौरान आपकी किडनियों की एनर्जी बढ़ती है और खून का संचार तेज होता है. ऐसा करने के बाद अपने तलवों की तेल से मालिश करें, खासतौर पर एडियों की|
    किसे नहीं डुबोने चाहिये गर्म पानी में पैर

    वे लोग जिन्‍हें लो बीपी की समस्‍या है. उन्‍हें गरम पानी में पैर डुबोने से बेहोशी आ सकती है. मधुमेह रोगियों को भी इससे बचना चाहिये. क्‍योंकि गरम पानी से पैरों की त्‍वचा जल सकती है. यदि आपको काफी तेज भूखे हैं या फिर बहुत ज्‍यादा खा लिया है. तो भी पैरों को गरम पानी में ना डुबोएं| 

    कब्ज मिटाने के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार


     रोगी आहार-विहार में असंयम के कारण कब्ज का शिकार होता है। कब्ज से ही दुनिया-भर की बीमारियाँ होती हैं। अपना आहार विहार सुसंयमित कर लें तो कभी कोई बीमारी नहीं होगी। असंयम के कारण कभी कोई रोग हो भी जाये तो प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से उसका धैर्यपूर्वक इलाज कराना चाहिए। ऐसा कोई रोग नहीं जो प्राकृतिक चिकित्सा से अच्छा नहीं किया जा सकता हो। प्राकृतिक चिकित्सा प्राणीमात्र के लिए वरदान है। अत: पहले संयम से रहकर कब्ज मिटाइए।
    रात का रखा हुआ सवा लीटर पानी हर रोज सुबह सूर्योदय से पूर्व बासी मुँह पीने से कभी कब्जियत नहीं होगी तथा अन्य रोगों से सुरक्षा होगी।
    * रात्रि में पानी के साथ2 से 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से अथवा 40-50 ग्राम मुनक्का (काली द्राक्ष) को रात्रि में ठण्डे पानी में भीगोकर सुबह उन्हें मसलकर, छानकर थोड़े दिन पीने से कब्जियत मिटती है।
     *


    एक हरड़ खाने अथवा 2 से 5 ग्राम हरड़ के चूर्ण को गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज मिटती है। चौथी प्रयोग: गुडुच का सेवन लंबे समय तक करने से कब्ज के रोगी को लाभ होता है। 

    * कड़ा मल होने व गुदाविकार की तकलीफ में जात्यादि तेल या मलहम को शौच जाने के बाद अंगुली से गुदा पर लगायें। इससे 7 दिन में ही रोग ठीक हो जायगा। साथ में पाचन ठीक से हो ऐसा ही आहार लें। छोटी हरड़ चबाकर खायें ।
    *एक गिलास सादे पानी में एक नींबू का रस एवं दो-तीन चम्मच शहद डालकर पीने कब्ज मिट जाता है।
    * एक चम्मच सौंफ का चूर्ण और 2-3 चम्मच गुलकन्द प्रतिदिन दोपहर के भोजन के कुछ समय पश्चात् लेने से कब्ज दूर होने में सहायता मिलती है।  कब्ज सब रोगों का मूल है। अत: पेट को सदैव साफ रखना चाहिए। रात को देर से कुछ भी न खायें तथा भोजन के बाद दो घंटे तक न सोयें। 
      मैदे से बनी वस्तुएँ एवं दही अधिक न खायें। बिना छने (चोकरयुक्त) आटे का सेवन, खूब पके पपीते का सेवन एवं भोजन के पश्चात् छाछ का सेवन करने से कब्जियत मिटती है।


    विशिष्ट परामर्श-


    यकृत,प्लीहा,आंतों के रोगों मे अचूक असर हर्बल औषधि "उदर रोग हर्बल " चिकित्सकीय  गुणों  के लिए प्रसिद्ध है|पेट के रोग,लीवर ,तिल्ली की बीमारियाँ ,पीलिया रोग,कब्ज  और गैस होना,सायटिका रोग ,मोटापा,भूख न लगना,मिचली होना ,जी घबराना ज्यादा शराब पीने से लीवर खराब होना इत्यादि रोगों मे प्रभावशाली  है|बड़े अस्पतालों के महंगे इलाज के बाद भी  निराश रोगी  इस औषधि से ठीक हुए हैं| औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 9826795656 पर संपर्क करें|








    20191124

    उच्च रक्तचाप के आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खे



    उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन एक खतरनाक स्थिति है जो आपके दिल को नुकसान पहुंचा सकती है। हाई ब्लडप्रेशर या उच्‍च रक्‍तचाप को नियंत्रित करने में घरेलू उपाय बहुत ही फायदेमंद साबित होते है। हाई ब्लड प्रेशर भारत में हर पांच लोगों में से एक को प्रभावित करता है और हाई ब्लड प्रेशर ने दुनिया भर में 1 बिलियन लोगों को प्रभावित किया है। हर साल भारत में उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन के 1 करोड़ से भी अधिक मामले सामने आते हैं। उच्च रक्तचाप से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे- गुर्दे की विफलता, दिल का दौरा, स्ट्रोक आदि। आमतौर पर उच्च रक्तचाप के लिए लोग दवा चिकित्सा का सहारा लेते है जो शुरुआती लेवल पर सही भी माना जाता है लेकिन लम्बे समय तक इनका सेवन करना नुकसान दायक हो सकता है। आप दवाओं के रूप में ड्रग थेरेपी शुरू करने से पहले अपनी जीवन शैली में कुछ बदलाव करके उच्च रक्तचाप को कम कर सकते हैं। रक्तचाप या ब्लड प्रेशर वह बल है जिस बल पर रक्त हृदय से धमनियों में जाता है। एक सामान्य व्यक्ति की रक्तचाप रीडिंग 120/80 mm Hg होती है। जब रक्तचाप अधिक होता है, तो रक्त धमनियों के माध्यम से अधिक बलपूर्वक चलता है। यह धमनियों में नाजुक ऊतकों पर अधिक दबाव डालता है और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। उच्च रक्तचाप को अंग्रेजी में हाइपरटेंशन (hypertension) कहा जाता हैं। हाई ब्लड प्रेशर को एक “साइलेंट किलर” के रूप में भी जाना जाता है। आमतौर पर इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं जब तक हृदय को कोई महत्वपूर्ण नुकसान ना हों। इसके लक्षण दिखाई ना देने के कारण अधिकांश लोग इस बात से अनजान होते हैं कि उन्हें उच्च रक्तचाप है। घरेलू आयुर्वेदिक उपचार 
    प्याज उच्च रक्त चाप मे -यदि आपको प्याज खाना पसंद है तो आपके लिए खुशखबरी है जी हाँ प्याज का सेवन करना आपके बढ़े हुए रक्तचाप को कम करने में आपकी मदद सकता हैं। हालांकि प्याज को कटते समय आपकी आँखों से आँसू निकलते है। इससे बचने के लिए आप प्याज को काटने से पहले थोड़ी देर के लिए उसे पानी में डाल दें। प्याज में क्वेरसेटिन (Quercetin) नामक एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होता है। क्वेरसेटिन उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद करता है साथ ही सीने में दर्द, एनजाइना (Angina) के इलाज में भी मदद करता है और स्ट्रोक (stroke) और दिल के दौरे के खतरे को भी कम करता है। इस क्वेरसेटिन को अधिक प्राप्त करने के लिए प्याज को कच्चा या हल्का पका हुआ खाएं। इसके अलावा आप प्याज सूप का भी सेवन कर सकते है।
    अदरक और इलायची की चाय -अदरक-इलायची चाय उच्च रक्तचाप कम करने के लिए बहुत ही फायदेमंद है। एक शोध में कुछ प्रतिभागियों के एक समूह को कई हफ्तों तक रोजाना 1 चम्मच इलायची पाउडर दिया। परिणामों ने रक्तचाप में महत्वपूर्ण कमी दिखाई। अदरक और दालचीनी के साथ दोनों गरम मशाले के रूप में जो रक्त के परिसंचरण में सुधार करते हैं। आप अपने दिल को स्वस्थ बनाने में मदद करने के लिए इसकी एक अच्छी चाय बना सकते हैं।
    सुबह तरबूज खाना -सुबह के समय अपने नाश्ते में तरबूज का सेवन करना आपके उच्च रक्तचाप को आसानी से कम कर सकता है। तरबूज हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में फायदेमंद है, कई बार तरबूज को एक सख्त गर्मियों के फल के रूप में देखा जाता है, लेकिन यह उच्च रक्तचाप को कम करने में भी मदद कर सकता है। तरबूज में एक कार्बनिक यौगिक होता है जिसे सिट्रीलाइन (citrulline) कहा जाता है। एक बार जब यह शरीर में प्रवेश करता है तो यह नाइट्रिक ऑक्साइड (nitric oxide) के आगे जाकर एल-आर्जिनिन (L-arginine) में बदल जाता है। शरीर में नाइट्रिक-ऑक्साइड रक्त वाहिकाओं को आराम देता है जिससे आपका रक्तचाप कम हो जाता है। तरबूज के बीज: तरबूज के बीज में एक यौगिक होता है जिसका नाम है कुकुर्बोसिट्रिन (cucurbocitrin)। यह रक्त केशिकाओं को काफी चौड़ा करने में मदद करता है। साथ ही ये बीज किडनी के कार्यों को भी बेहतर बनाने में मदद करते हैं। यह बदले में रक्तचाप के स्तर को कम करता है।
    उच्च रक्तचाप का घरेलू उपाय अंगूर -उच्च रक्तचाप के उपचार के लिए एक और बढ़िया घरेलू उपाय है अंगूर। अंगूर को बहु-विटामिन फल माना जाता है जो फास्फोरस और पोटेशियम में उच्च होता है। इसलिए रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए रोजाना अंगूर खाने की कोशिश करें। अंगूर आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाएंगे और आपके उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करेंगे। विटामिन डी -रक्तचाप कम करने के लिए विटामिन डी बहुत ही फायदेमंद होता है। एक अध्ययन के अनुसार रक्तचाप को कम करने के लिए सनशाइन विटामिन-डी को बताया गया था। क्योंकि लोग आजकल बाहर धूप में कम समय बिता रहे हैं जिससे लोगों को विटामिन-डी की कमी हो रही है।
    लहसुन -लहसुन में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो प्रेशर को रोकते हैं और रक्त प्रवाह में सुधार करते हैं। इसलिए हर दिन लहसुन खाने की कोशिश करें। बहुत सारे अध्ययनों से पता चला है कि लहसुन में उच्च रक्तचाप को कम करने वाले प्रभाव हैं। पका हुआ और कच्चा लहसुन दोनों ही आपके उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में आपकी मदद कर सकते हैं। यह आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को काफी कम कर सकता है। लहसुन हाइड्रोजन सल्फाइड और नाइट्रिक ऑक्साइड के निर्माण को उत्तेजित करके आपकी रक्त वाहिकाओं को आराम करने में मदद करता है।
    पपीता – उच्च रक्तचाप से छुटकारा पाने के लिए आपको पपीता खाना होगा, इसमें सोडियम, जिंक, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस होते हैं, और इसमें मल्टी-विटामिन भी होते हैं। पपीता कई बीमारियों को रोकेगा और कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करेगा। कच्चे पपीते का सेवन आपके उच्च रक्तचाप को नियंत्रण में रखने का सबसे अच्छा तरीका होगा। हालांकि, इसे खाने का यह एकमात्र तरीका नहीं है। आप इसे पका सकते हैं, इसे भून सकते हैं, इसे उबाल सकते हैं, इसका सूप बना सकते हैं- जिस भी तरीके से आप इसे लेते हैं वह बिल्कुल ठीक है और पूरी तरह से प्रभावी है।
    नारियल पानी आपके उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए नारियल पानी बहुत प्रभावी है। यह आपके शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है और स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न समस्याओं से भी बचाता है। उच्च रक्तचाप से छुटकारा पाने के लिए हर दिन नारियल पानी पीने की कोशिश करें। इसके लिए आप एक ताजा कटा हुआ नारियल लें और उसके रस का सेवन करें
    नींबू- उच्च रक्तचाप को कम करने के लिए नींबू एक बेहतरीन घरेलू उपचार है। नींबू रक्त वाहिकाओं को नरम रखता है और उच्च रक्तचाप के स्तर को भी कम करता है। इसके अलावा नींबू अपने विटामिन C की वजह से हार्ट फैल की संभावना को कम करने में मदद कर सकता है। विटामिन सी एक महान एंटीऑक्सीडेंट है जो मुक्त कणों के सभी हानिकारक परिणामों हमे बचने में मदद करता है।
    पुदीने की पत्तियां – पुदीना के पत्ते वास्तव में उच्च रक्तचाप को कम करने के लिए एक अच्छा इलाज है। अपने उच्च रक्तचाप को कम करने के लिए, दो चम्मच सूखे पुदीने के पत्तों के पाउडर को पानी या नींबू के पानी के साथ घोलें और इसे दिन में दो बार पियें। आप पुदीने के स्वाद वाले च्युइंग गम का भी उपयोग कर सकते हैं जिसे आप दिन में किसी भी समय चबा सकते हैं।
    केला- केला वास्तव में हाई ब्लड प्रेशर में बहुत ही प्रभावी होता है। केले पोटेशियम का एक बड़ा स्रोत हैं। केले में पाया जाने वाला पोटेशियम, सोडियम के प्रभाव को कम करता है। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए आपको नियमित रूप से केले का सेवन करना चाहिए। आपको हमेशा दो केले खाने की कोशिश करनी चाहिए। केला खाने के साथ-साथ आप अन्य फलों को भी खा सकते हैं। आप किशमिश, पालक, संतरा और पके हुए शकरकंद जैसे फलों और सब्जियों को काट कर सलाद बनाने के लिए कुछ कटे हुए केले मिला सकते हैं।
    त्रिफला का पानी -इसी तरह से त्रिफला के पानी का प्रयोग भी कर सकते हैं। 20 ग्राम त्रिफला को रात में पानी में भिगो दें और सुबह पानी को सुबह निथारकर दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से हाइपरटेंशन में फायदा मिलता है।
    शहद – शहद आपके उच्च रक्तचाप को कम करने के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। शहद आपके दिल से दबाव को कम करता और यह आपके रक्त वाहिकाओं पर भी शांत प्रभाव डालता है। इसलिए यह उच्च रक्तचाप के लिए एक उपयोगी घरेलू उपचार माना जाता है। आप रोज सुबह नाश्ते से एक घंटा पहले दो चम्मच कच्चा शहद ले सकते हैं। शहद आपके हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखने में आपकी मदद करता है। मेथी के बीज -अपने उच्च रक्तचाप को कम करने के लिए मेथी के बीज लेना एक प्रभावी हाई ब्लड प्रेशर का देसी इलाज है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मेथी के बीजों में आहार फाइबर सामग्री और उच्च पोटेशियम होता है। इसके लिए आप एक कप पानी दो चमच मेथी बीज को डाल कर उबाले लें और मेथी के बीज को पीस कर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को सुबह खाली पेट एक बार नाश्ते से पहले खाएं।
    मेथी और अजवाइन का पानी -मेथी और अजवाइन के पानी का प्रयोग भी किया जा सकता है। इसके लिए एक चम्मच मेथी और अजवाइन पाउडर को पानी में भिगोएं और सुबह इस पानी को पी लें।
    आंवला – आंवला रक्तचाप को कम करने में बहुत प्रभावी साबित हुआ है। आंवले का रस, अगर एक गिलास पानी के साथ खाली पेट लिया जाए तो आप लंबे समय में कई तरह की बीमारियों से बच सकते हैं। यह दिल की विफलता और उच्च रक्तचाप जैसी उन्नत चरण की समस्याओं को रोकने में सबसे अच्छे फलों में से एक माना जाता है। विटामिन सी का एक समृद्ध स्रोत होने के नाते, यह रक्त वाहिका को चौड़ा करने और रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है।
    हाई ब्लड प्रेशर के आयुर्वेदिक उपचार - 
    *इससे निजात पाने के लिए अर्जुन का क्षीरपाक इस्तेमाल कर सकते हैं। क्षीरपाक बनाने के लिए अर्जुन की छाल का 10 ग्राम चूर्ण, 100 मिली दूध और100 मिली पानी लेते हैं। फिर इसे पकाते हैं, जब सिर्फ दूध बच जाए, मतलब सिर्फ 100 मिली रह जाए तब इसे आंच से उतार कर, ठंडा करके, छान कर इसे पीते हैं। अपनी शरीर के उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए आप निम्न बातों को अपने ध्यान में रखें-
    *हाइपरटेंशन के रोगियों को रोजाना या हफ्ते में तीन से चार बार पूरे शरीर पर तेल से मालिश करनी चाहिए। आप नियमित रूप से व्यायाम करें।
    *उच्च रक्तचाप से बचने के लिए धुम्रपान ना करें। *अल्कोहल का सेवन करना हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनता है। 
    *उच्च रक्त चाप वाले व्यक्तियों को कम नमक वाली चीज़ें ही खाना चाहिए।हो सके तो सेंधा नमक का प्रयोग करें।
    *दूध में हल्दी और दालचीनी का प्रयोग करने से लाभ मिलता है।
    *उच्च रक्तचाप से छुटकारा पाने के लिए जैतून का तेल बहुत प्रभावी है। अपने खाना पकाने और सलाद में जैतून का तेल जोड़ने की कोशिश करें। 
    *हाइपरटेंशन की सबसे बड़ी वजह है तनाव जिसे दूर करने के लिए योग और प्राणायाम सबसे अचूक उपाय हैं।ताड़ासन, पवनमुक्तासन,शलभासन और योगनिद्रा के अलावा भ्रामरी, अनुलोम-विलोम का प्रयोग भी कर सकते हैं। अगर हम ॐ का जप करते हैं तो इससे भी बहुत फायदा मिलता है।
    *खाने में सब्ज़ियों और फलों की मात्रा बढ़ाएं। लगभग सारी हरी सब्ज़ियां और मौसमी फल फायदेमंद होते हैं।*छाछ और दूध के साथ ही नारियल पानी को भी अपनी डाइट में शामिल करें।
    *ड्रायफ्रूट्स जैसे अखरोट, बादाम, अंजीर, किशमिश खाना भी फायदेमंद रहेगा।
    *डिब्बा बंद, बासी, ज़्यादा तला हुआ, मिर्च-मसालेदार, ज्यादा नमक वाला खाना और दही का सेवन नहीं करना चाहिए।