अडूसा है एक चमत्कारी जड़ी बूटी



अडूसा एक औषधीय जड़ी बूटी है जिसे आमतौर पर वासा या वसाका और अंग्रेजी में मालाबार नट्स के नाम से जाना जाता है। औषधीय गुण होने के कारण अडूसा के फायदे कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के लिए जाने जाते हैं। अपने पोषक तत्‍वों के कारण अडूसा का उपयोग आयुर्वेद चिकित्‍सा, होम्‍योपैथी और यूनानी उपचार में व्‍यापक रूप से किया जाता है। अडूसा के फायदे त्वचा संक्रमण का इलाज करने, अस्‍थमा, अपचन को ठीक करने, गले के दर्द का उपचार करने, मसूड़ों की समस्‍याओं, खांसी आदि से राहत दिलाने में जाने जाते हैं।
अडूसे का पौधे कई बीमारियों को दूर करने में मदद करता है | अडूसा का प्रयोग अधिकतर औषधि के रूप ही किया जाता है | अडूसा का पौधा 4-10 फुट तक ऊँचा होता है। अडूसा के पत्ते 3-8 इंच लम्बे होते हैं और इसके फूल सफेद रंग के होते हैं। इसके फल में 4 बीज होते हैं। अडूसा खाने में जितना स्वादिष्ट लगता है, उसके खाने और रस के सेवन से उतने ही अधिक गुणकारी तत्त्व शरीर को मिलते हैं। अडूसा पौष्टिक होने के साथ ही शरीर की कमजोरी को दूर करके, रक्तवृद्धि करता है और अनेक रोग-विकारों को नष्ट करता है। अडूसे के सेवन से सांस और (खांसी) के प्रकोप में बहुत लाभ होता है, खांसी या अस्थमा की शायद ही ऐसी कोई आयुर्वेदिक दवाई हो जिसमें इसे न डाला जाता हो । चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार अडूसा पेशाब रूकने की बीमारी, वात विकृति से उत्पन्न रक्त प्रदर (ल्यूकोरिया), शुष्क कास (खांसी), रक्त पित्त (नाक व मुंह से रक्त निकलने पर), शोथ (सूजन), नेत्र रोग, अम्लपित्त और वमन आदि रोग-विकारों में बहुत लाभ पहुंचाता है |


अस्‍थमा के उपचार में

अड़ूसा में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद अन्‍य औषधीय गुणों के कारण इसका उपयोग अस्‍थमा का उपचार में किया जाता है। यह वायुमार्ग और फेफड़ों की सूजन को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा अडूसा फल में पाए जाने वाले वाइसिसिन यौगिक ब्रोंकोडाइलेटर हैं जो सांस फूलने की प्रक्रिया को कम करने में मदद करते हैं। अपने इन्‍हीं विशेष गुणों के कारण अस्‍थमा उपचार के विभिन्‍न औषधीयों में इसका उपयोग किया जाता है। अस्थमा में अडूसा के फायदे लेने के लिए 5-5 मिली अडूसा के पत्तों का रस शहद के साथ 2.5 मिली अदरक का रस मिलाकर सेवन करें। अस्‍थमा जैसी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने के लिए आप भी अडूसा के लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।
मसूड़ों के रक्‍तस्राव में
यदि आपके मसूड़ों से खून आ रहा है तो इसका जल्‍द ही उपचार किया जाना चाहिए। यदि समय पर उपचार न किया गया तो आपके मुंह में संक्रमण बढ़ सकता है और अन्‍य दांतों से संबंधित परेशानियां हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में मालबार नट्स की ताजा पत्तियों का उपयोग किया जा सकता है। आप अडूसा की पत्तियां लें और इसे अच्‍छी तरह से पेस्‍ट बना लें। इस पेस्‍ट को धीरे-धीरे मसूड़ों के ऊपर लगाएं। इस पेस्‍ट को नियमित रूप से तब तक इस्‍तेमाल करें जब तक रक्‍तस्राव से राहत मिल जाए। संभवत: 2-3 दिनों में राहत मिल सकती है। यदि आप भी ऐसी समस्‍या से परेशान हैं तो इस औषधीय जड़ी बूटी का उपयोग कर सकते हैं।
खांसी का इलाज
आप सामान्‍य खांसी का उपचार करने के लिए अडूसा का उपयोग कर सकते हैं। इस औषधीय पौधे की पत्तियों में खांसी को दूर करने वाले गुण मौजूद रहते हैं। इसका उपयोग खांसी की आयुर्वेदिक दवाओं में प्रमुख घटक के रूप में उपयोग किया जाता है। खांसी आपके व्‍यक्तिगत जीवन को प्रभावित कर सकती है विशेष रूप से आपकी रात की नींद को। खांसी का उपचार करने के लिए अडूसा की पत्तियों से बने काढ़े को शहद के साथ मिलाकर सेवन कर खांसी से छुटकारा पाया जा सकता है।
*चिकित्सक अडूसा को यक्ष्मा (टी. बी.) में बहुत गुणकारी मानते हैं। अडूसे के रस के सेवन से शरीर में गर्मी कम होती है। गर्मियों में अडूसे का शर्बत पीने से तेज गर्मी और तेज प्यास का निवारण होता है। अडूसे के पत्ते, फूल और छाल भी विभिन्न रोग-विकारों में बहुत लाभ पहुंचाते हैं।
ब्रोंकाइटिस में
वसाका अपने औषधीय गुणों के कारण ब्रोंकाइटिस के इलाज में मदद कर सकता है। ब्रोंकाइटिस मे ब्रोंन्कियल ट्यूबें सूजन के कारण अवरूद्ध हो जाती हैं। इसके अलावा वायु मार्ग की अंदरूनी सतह में श्‍लेष्‍म का जमाव भी होने लगता है। लेकिन अडूसा का उपयोग करने पर यह वायु मार्गों में आने वाले अवरोधों को दूर करने में मदद करता है। जिससे खांसी, सीने का दर्द और ब्रोंकाइटिस जैसी अन्‍य स्‍वशन संबंधी समस्‍याओं से छुटकारा मिल सकता है। आप भी अपने स्‍वशन मार्गों को स्‍वस्‍थ्‍य बनाए रखने के लिए अडूसा का उपयोग कर सकते हैं।
गठिया का उपचार
इस समस्‍या का प्रमुख कारण खराब जीवन शैली ही है। इस प्रकार की समस्‍या का प्रमुख कारण शरीर में यूरिक एसिड की उच्च मात्रा भी होती है। लेकिन इस स्थिति का इलाज करने के लिए वसाका जड़ी बूटी का उपयोग किया जा सकता है। अडूसा में मौजूद पोषक तत्‍व शरीर में यूरिक एसिड के स्‍तर को कम करने में मदद कर सकते हैं। जिससे आपको गठिया के दर्द और सूजन से छुटकारा मिल सकता है। क्‍योंकि अडूसा में मौजूद एंटी-इंफ्लामेटरी गुण गठिया की सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। इस तरह से आप अडूसा के लाभ गठिया उपचार में प्राप्‍त कर सकते हैं। इसके पत्तों का पेस्ट लगाने से सूजन तो कम होती ही है, साथ में जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है।


गले को राहत

जो लोग गले के दर्द और इससे संबंधित अन्‍य परेशानियों से ग्रसित हैं उनके लिए मालबार नट्स फायदेमंद होते हैं। अडूसा में मौजूद एंटी-बैक्‍टीरियल, एंटीवायरल और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण सामान्‍य संक्रमण को रोकने में मदद करते हैं। गले में दर्द और इससे संबंधित अन्‍य समस्‍याओं जैसे गले की सूजन आदि के लिए आप अडूसा का उपयोग कर सकते हैं। 1 चम्मच अडूसा के रस को दो चम्मच शहद के साथ लेने से गले की खराश से राहत मिलती है।
अल्‍सर के उपचार में
मालाबार नट्स की पत्तियों में नॉन-स्‍टेरॉयड एंटी-इंफ्लामेटरी ड्रग्‍स गुण होते हैं। इस कारण से अडूसा की पत्तियों का उपयोग करने पर यह बिना किसी दुष्‍प्रभाव के अल्‍सर की सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है। इसलिए अडूसा का उपयोग पेप्टिक अल्‍सर के उपचार में किया जा सकता है। अल्‍सर का उपचार करने अलावा भी अडूसा का उपयोग आयुर्वेद में रक्‍तस्राव को रोकने के लिए भी उपयोग किया जाता है। इस तरह से अडूसा मानव स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने के लिए विशेष जड़ी बूटीयों के रूप में उपयोग की जा सकती है।
त्‍वचा समस्‍याओं में
विभिन्‍न स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिलाने के साथ ही अडूसा के फायदे त्‍वचा समस्‍याओं के लिए भी जाने जाते हैं। आप त्‍वचा से संबंधित विभिन्‍न समस्‍याओं के इलाज के लिए अडूसा पौधे के विभिन्‍न भागों का उपयोग कर सकते हैं। अडूसा प्रकृति में ठंडा होता है इसलिए यह त्‍वचा की जलन और संक्रमण आदि को दूर करने में अहम योगदान दे सकता है। आप इसकी पत्तियों के रस का उपयोग त्‍वचा संक्रमण पर कर सकते हैं। एंटी-इंफ्लामेटरी गुण त्‍वचा की सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। साथ ही इसके एंटी-बैक्‍टीरियल गुणों के कारण संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिलती है। इसके अलावा आप इसकी पत्तियों का पेस्‍ट बनाकर भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
मासिक धर्म में
महिलाओं के लिए मासिक धर्म के दौरान होने वाली समस्‍याएं बहुत ही कष्‍टदायक होती हैं। इस दौरान होने वाली समस्‍याओं में दर्द, ऐंठन और अत्‍यधिक रक्‍तस्राव शामिल हैं। लेकिन इस प्रकार की समस्‍याओं का उपचार करने के लिए अडूसा की पत्तियों का उपयोग किया जा सकता है। इस समस्‍या का इलाज करने के लिए इसकी 6-8 पत्तियों का पेस्‍ट तैयार करें। इस पेस्‍ट को दिन में दो बार गुड़ के साथ सेवन करने से मासिक धर्म की समस्‍याओं से छुटकारा मिल सकता है। विशेष रूप से मासिक धर्म के दौरान होने वाले अत्‍यधिक रक्‍तस्राव को रोकने का प्रभावी इलाज माना जाता है।
और भी फायदे हैं अड़ूसा के-
अडूसा का रस खांसी की सबसे गुणकारी औषधि है। स्वादिष्ट होने के कारण सभी छोटे-बड़े व्यक्ति बहुत रुचि से इसका सेवन करते हैं।
अडूसेके का़ढ़े में शहद मिलाकर देने से खाँसी में आराम मिलता है।
अडूसे के पत्तों का रस 20 ग्राम मात्रा में पिलाने से आंत्रकृमि बहुत जल्दी नष्ट होते हैं।
अडूसा के रस का सुबह-शाम कुछ सप्ताह सेवन करने से रक्त-पित्त की बीमारी ठीक होती है।
खेलने-कूदने से बच्चों की नाक से रक्तस्राव होने पर अडूसे के रस का सेवन कराने से बहुत लाभ होता है।
अडूसा के पत्तों का रस 15-20 ग्राम मात्रा में दिन में दो बार सेवन करने से छाती में एकत्र कफ (बलगम) निष्कासित होता है।
अडूसे के पत्तों को पानी में उबालकर, छानकर पिलाने से खांसी की बीमारी ठीक होती है और कफ भी सरलता से निकल जाता है।
अडूसे के फूलों को रात में पानी में डालकर रखें। प्रातः उठकर उन फूलों को मसलकर उस जल को छानकर पीने से पेशाब का अवरोध ठीक होने के साथ ही जलन का भी निवारण होता है।
अडूसे के ताजे, कोमल पत्तों का रस निकालकर 10 मिलीलीटर मात्रा में तथा बराबर मात्रा में मिसरी मिलाकर दिन में दो-तीन बार सेवन करने से ऋतुस्राव में अधिक रक्तस्राव की विकृति ठीक होती है।


अडूसे के रस में शहद मिलाकर दिन में चार-पांच बार चटाने से अस्थमा रोगी का कफ सरलता से निकल जाता है।

अडूसे के रस में शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से स्त्रियों के रक्त व श्वेत प्रदर में बहुत लाभ होता है। मूत्राघात की बीमारी भी ठीक होती है।
अडूसे के फूलों को छाया में सुखाकर, कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। इस चूर्ण में गुड़ मिलाकर सेवन करने से सिरदर्द में बहुत लाभ होता है।
टी बी रोग में अडूसा का स्वरस 20 मि.ली. की मात्रा में एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो-तीन बार दें। रोगी को आराम मिलेगा
टी बी रोग एक भाग पिप्पली चूर्ण लें। 4 भाग मिस्त्री और 16 भाग अडूसा के स्वरस को मंद आंच पर पकाएं। गाढा होने पर पिप्पली चूर्ण इसमें मिला लें। फिर इसमें दो भाग गाय का घी मिलाकर बार-बार चलाएं। ठंडा होने पर इसमें चार भाग शहद मिलाएं। एक से दो चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम रोगी को चटाएं।
10 ग्राम खरबूजे के बीज और अडूसे के पत्ते बराबर लेकर पीस लें। इसका सेवन करने से पेशाब खुलकर आता है और आपका पेट भी साफ़ रहता है।
अडूसे के सूखे फूलों को कूट-छानकर उसमें दुगुनी मात्रा में बंगभस्म मिलाकर, शीरा और खीरा के साथ खाने से शुक्रमेह खत्म हो जाता है।
अडूसा के पत्तों का रस और चूर्ण खूनी बवासीर की बहुत असरदार दवाई है |
अडूसा के मूल का क्वाथ पीने से बुखार ठीक होता है।
अडूसा के पत्तियों को गर्म करके जोड़ो के दर्द वाले स्थान पर लगाने से दर्द फ़ौरन चला जाता है।
अडूसा के फूलों को सुखाकर पीस लें। इस पाउडर में थोड़ी सी मात्रा में गुड़ मिलाकर उसकी छोटी छोटी गोलियाँ बना लें। रोजाना इस एक गोली के सेवन से सिर दर्द की समस्या खत्म हो जाती है।
सावधानी-
चूंकि अडूसा एक आयुर्वेदिक औषधी है जिसका उपयोग स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओ से राहत पाने के लिए किया जाता है। लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से कुछ दुष्‍प्रभाव भी हो सकते हैं। इसलिए जहां तक संभव हो किसी अनुभवी व्‍यक्ति की सलाह और देख रेख में ही जड़ी बूटीयों का सेवन किया जाना चाहिए।

अडूसा से होने वाले कुछ दुष्‍प्रभाव इस प्रकार हैं-
मधुमेह रोगीयों को बहुत ही संभल कर इस औषधी का सेवन करना चाहिए। क्‍योंकि यह रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने में मदद करता है। लेकिन यदि अधिक मात्रा में इसका सेवन किया जाता है तो यह शरीर में रक्‍त शर्करा के स्‍तर को बहुत ही निम्‍न स्‍तर में ले जा सकता है।
1 वर्ष से कम उर्म के बच्‍चों को अडूसा का सेवन करने से बचना चाहिए।
गर्भावस्‍था के समय महिलाओं को इसका सेवन करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही स्‍तनपान कराने वाली माताओं को डॉक्‍टर की सलाह के बाद ही इसका सेवन करना उचित है।
अधिक मात्रा में मालाबार नट्स का सेवन करने पर यह उल्टी और दस्‍त जैसी समस्‍याओं को बढ़ा सकता है।

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1 टिप्पणी:

dilbag virk ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 8.8.19 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3421 में दिया जाएगा

धन्यवाद

दिलबागसिंह विर्क