करेला खाने के स्वास्थ्य लाभ

                                    
करेले का स्वाद जितना कड़वा है, उससे कहीं ज्यादा गुणकारी है. ऐसा कहा जाता है कि करेला खाने वाले को कई बीमारियां नहीं होतीं. चिकित्सीय विज्ञान में इसका औषधीय महत्व भी बताया गया है. करेला का प्रयोग गई दवाईयों को तैयार करने में किया जाता है. यह रक्तशोधक सब्जी है. यहीं कारण है कि प्रतिदिन करेला का सेवन करने से या इसका जूस पीने से बहुत सी स्वास्थ्य समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है.
आयुर्वेद के अनुसार भोजन में सभी प्रकार के रस शामिल होने चाहिए जैसे मीठा , कसैला , खारा , खट्टा तथा कड़वा आदि। करेले को भोजन में शामिल करने से कड़वा रस प्राप्त हो सकता है।
यह शरीर के लिए लाभदायक होता है। विशेषकर डायबिटीज के लिए करेला बहुत महत्त्व रखता है। लेकिन यदि सावधानी पूर्वक इस्तेमाल नहीं किया जाये तो यह नुकसानदेह भी हो सकता है। करेले की तासीर गर्म होती है अतः गर्मी के मौसम में विशेष ध्यान रखना जरुरी होता है।
करेला स्वाद में भले ही कड़वा हो लेकिन सेहत के लिए यह किसी टॉनिक से कम नहीं हैं। करेले में ऐसे तत्व मौजूद हैं जो कि हमारे लिए बहुत लाभदायक है। इसके सेवन या इसका जूस पीने से कई बीमारियों की संभावनाओं को खत्म किया जा सकता है। इसे बहुत-सी दवाईयों को बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है
डायबिटीज के रोगियों के लिए


टाइप 4 डायबिटीज के मरीजों के लिए करेले का जूस पीना बहुत ही फायदेमंद है। इंसुलिन की उचित मात्रा न होने पर ब्लड में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है जो टाइप 2 डायबिटीज के लिए जिम्मेदार हैं। करेला का जूस ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है। डायबिटीज के रोगियों को एक चौथाई कप करेले के रस में इतना ही गाजर का रस मिलाकर पिलाना चाहिए। इससे ब्लड शुगर का लेवल धीरे-धीरे कम होने लगता है। सुबह के समय करेला का जूस पीना बहुत ही फायदेमंद साबित होता है। करेले में मोमर्सिडीन और चैराटिन जैसे एंटी-हाइपर ग्लेसेमिक तत्व पाए जाते हैं।यदि डायबिटीज की दवा ले रहे हों तो करेले का उपयोग डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए। करेले को छाया में सुखाकर इसका चूर्ण दिन में एक बार एक चम्मच लेने से पेशाब में शक्कर मात्रा कम होती हैयह रक्त में शक्कर की मात्रा को कम करता है तथा इन्सुलिन के यूज़ को नियंत्रित करता है। इसमें पाए जाने वाले कई तत्व इन्सुलिन की तरह काम करते हैं।
त्वचा रोग में भी लाभकारी
करेले में मौजूद बिटर्स और एल्केलाइड तत्व रक्त शोधक का काम करते हैं. करेले की सब्जी खाने और मिक्सी में पीस कर बना लेप रात में सोते समय हाथ-पैर पर लगाने से फोड़े-फुंसी और त्वचा रोग नहीं होते. दाद, खाज, खुजली, सियोरोसिस जैसे त्वचा रोगों में भी करेले के रस में नींबू का रस मिलाकर पीना फायदेमंद है.
करेले में मौजूद बिटर्स और एल्केलाइड तत्व रक्त शोधक का काम करते हैं। करेले की सब्जी खाने और मिक्सी में पीस कर बना लेप रात में सोते समय हाथ-पैर पर लगाने से फोड़े-फुंसी और त्वचा रोग नहीं होते। दाद, खाज, खुजली, सियोरोसिस जैसे त्वचा रोगों में भी करेले के रस में नींबू का रस मिलाकर पीना फायदेमंद है।पथरी रोगियों के लिए अमृत


पथरी रोगियों को दो करेले का रस पीने और करेले की सब्जी खाने से आराम मिलता है. इससे पथरी गलकर धीरे-धीरे बाहर निकल जाती है. 20 ग्राम करेले के रस में शहद मिलाकर पीने से पथरी गल कर पेशाब के रास्ते निकल जाती है. इसके पत्तों के 50 मिलीलीटर रस में हींग मिलाकर पीने से पेशाब खुलकर आता है.
भूख बढ़ाने में सहायक
यदि आपको या आपके परिवार में किसी व्यक्ति को भूख कम लगने या नहीं लगने की समस्या है तो करेले का सेवन उसके लिए फायदेमंद साबित होगा. दरअसल भूख नहीं लगने से शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता, जिससे स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां होती हैं. इसलिए करेले के जूस को रोजाना पीने या करेले की सब्जी खाने से पाचन क्रिया सही रहती है, जिससे भूख बढ़ती है.
खून की कमी दूर करता है
महिलाओं में हिमोग्लोबिन की समस्या बहुत ही आम हैं लेकिन आयरन से भरपूर सब्जियों का सेवन करना सबसे ज्यादा फायदेमंद हैं। दिन में एक बार करेले की सब्जी खाने या इसका जूस पीने से हीमोग्लोबिन की कमी को दूर किया जा सकता हैं। साथ ही खून भी साफ होता है।



कफ से दिलाए छुटकारा
करेला गर्मियों के मौसम की खुश्क तासीर वाली सब्जी है. इसमें फॉस्फोरस पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है. एक महीने तक इसके प्रतिदिन सेवन से पुराने से पुराने कफ बनने की शिकायत दूर हो जाती है. खासी के उपचार में भी करेला काफी फायदा करता है.
डायरिया में फायदेमंद
उल्टी-दस्त या हैजा की समस्या होने पर करेले के रस में थोड़ा पानी और काला नमक मिलाकर सेवन करने से तुरंत लाभ मिलता है. यकृत संबंधी बीमारियों में भी करेला बहुत ही लाभकारी है. जलोदर रोग होने या यकृत बढ़ जाने पर आधा कप पानी में दो चम्मच करेले का रस मिलाकर दिन में तीन से चार बार पीने से लाभ होता है.
*उल्टी-दस्त या हैजा हो जाने पर करेले के रस में काला नमक मिलाकर पीने से तुरंत आराम मिलता है। जलोदर की समस्या होने पर भी दो चम्मच करेले का रस पनी में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
*करेले में एंटी बेक्टिरियल और एंटी वाइरल तत्व पाए जाते हैं जो कई प्रकार के संक्रमण से बचाते हैं। यह पेट में होने वाले अल्सर से बचाता है। यह अल्सर पैदा करने वाले बेक्टिरिया को रोकता है।








मेथी खाने के स्वास्थ्य लाभ



हरी सब्जी जैसे साग, पालक व मेथी, शरीर के लिए बहुत फायदेमंद भी मानी जाती है, इसलिए सर्दियां शुरू होते ही इनकी डिमांड बढ़ने लगती हैं। विंटर वेजीटेबल मेथी में भी बहुत तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं जो शरीर को बीमारियों की चपेट में आने से बचाते है। इसे आप सब्जी, जूस व स्टफ परांठे के तौर पर खा सकते हैं जो सिर्फ हैल्दी ही नहीं बल्कि खाने में स्वादिष्ट भी होते हैं
 डायबिटीज से बचाव
डायबिटीज के मरीजों के लिए मेथी का सेवन लाभकारी है। अगर डायबिटीक मरीज हैं तो रोजाना मेथी की पत्तियों का रस निकालकर पीएं |
जोड़ों का दर्द 
बड़े बुजुर्गों को आपने सर्दियों में मेथी और मेवे के लड्डू खाते देखा होगा क्योंकि इनसे जोड़ों का दर्द की समस्या नहीं होती। मेथी के बीजों की तरह उसके पत्ते भी वहीं काम करते है, जिसे आप सब्जी के रूप में खा सकते है।
मेथी की पत्ति‍यां भी आपके बालों के लिए बहुत लाभकारी साबित होंगे। इसकी पत्तियां पीसकर बालों में लगाने से बाल काले, घने व चमकदार होते हैं। साथ ही बालों का झड़ना भी रूक जाता है। 


मेथी के फायदे स्‍वस्‍थ मस्तिष्‍क के लिए – 
मैथी में कई प्रभावकारी गुण होते है उनमें से एक गुण यह है कि यह हमारे मस्तिष्‍क को स्‍वस्‍थ और निरोगी रखता है। यह अल्‍जाइमर और पार्किंसंस रोगो के लक्षणों को कम कर उनसे होने वाले नुकसानों से हमारी रक्षा करता है। मेथी बीज के पाउड़र का उपयोग अल्‍जाइमर रोग के साथ साथ ऑक्‍सीडेटिव तनाव, सूजन, याददास्‍त में कमी और प्‍लेक को कम करने में मदद करता है। इन्‍ही वजह से मेथी हमारे स्‍वास्‍थ के लिए फायदेमंद होती है।
 जोड़ों के दर्द की परेशानी -
घर के बड़े बुजुर्गों को आपने सर्दियों में मेथी और मेवे के लड्डू खाते जरूर देखा होगा। इसका प्रमुख कारण है, कि मेथी का सेवन आपको जोड़ों के दर्द की परेशानी से भी मुक्ति दिलाता है। इसके बीज हों या फिर पत्ति‍यां, दोनों ही जोड़ों के दर्द में समान रूप से फायदेमंद है। 
मासिक धर्म के दर्द से बचने में मेथी पाउडर के फायदे – 
महिलाओं को मासिक धर्म के समय असहनीय दर्द से गुजरना पड़ता है। मेंथी पाउडर का उपयोग मासिक धर्म के तीन दिन पहले से इस्‍तेमाल किया जाए तो इस प्रकार की समस्‍या से बचा जा सकता है। मेथी में एस्‍ट्रोजेन जैसे गुणों के साथ डायोजजेनिन और इससोफ्लावोन जैसे यौगिक होते है जो मासिक धर्म से जुड़े ऐंठन जैसे लक्षणों को कम करने में मदद करते है। यदि इससे पीडि़त महिला नियमित रूप से मेथी का उपयोग करे तो उसे मासिक धर्म के समय होने वाली पीड़ा को दूर करने में मदद मिल सकती है।


मेथी के फायदे वजन कम करने में – 
आप अपने बढ़ते वजन को लेकर परेशान है। यदि ऐसा है तो डरें नहीं क्‍योंकि आपके लिए एक आयुर्वेदिक औषधी के रूप में मैंथी उपलब्‍ध है। यह आपके वजन को कम करने में आपके लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है। परिक्षणों से पता चलता है कि मेथी बीजों का सेवन करने वाले व्‍यक्तियों में वसा की मात्रा चमत्‍कारिक ढ़ंग से घटने लगता है। यदि इसका सेवन नियमित रूप से किया जाए तो यह आपके वजन को घटाने में मदद सकता है।
सुबह खाली पेट भीगीं हुई मैथी को खाने से आप अपने वजन को कम कर सकते है। मेंथी में उपस्थित घुलनशील फाइबर पेट की सूजन को कम कर सकते है जिससे आपकी भूख दवाने और वजन घटाने में फायदा होता है।
मेथी के फायदे त्‍वचा के लिए – 
मैथी आपकी त्वचा के लिए भी फायदेमंद होती है। इसमें म्‍यूसीज (mucilage) होता है यह एक चिपचिपा (gooey) पोषक पदार्थ होता जो आपकी त्वचा को शुष्क होने से बचाता है। मेथी का पेस्‍ट चेहरे पर लगाने से यह आपके चेहरे के दागो को दूर करता है और आपके रंग को निखारता है। यह सैपोनिन एक्‍सपोजर (saponin exposure) के बाद त्‍वचा कोशिकाओं में आई सूजन (swelling) को कम करने में मदद करता है।
मेथी के फायदे कोलेस्‍ट्रोल कम करने में – 
कोलेस्‍ट्रोल को कम करने में मेथी अद्वितीय है। मेथी के बीजों का सेवन करने से निम्न घनत्व वाला लिपोप्रोटीन (lipoprotein) या खराब कोलेस्‍ट्रोल कम होता है। इसलिए यदि स्‍वस्‍थ शरीर की इच्‍छा रखते है तो मैथी को अपने आहार में शामिल करें यह आपके स्‍वास्‍थ के लिए लाभकारी होता है।


मेथी के फायदे स्‍तन दूध बढ़ाने में – 
कुछ शोधों के अनुसार मेथी पाउडर का सेवन स्तनपान कराने वाली महिलाओं (Breastfeeding women) में दूध उत्‍पादन बढ़ता है। कुछ अध्‍ययन यह भी बताते है कि मैथी को अकेले ही या अन्‍य पदार्थो के साथ चाय के रूप में लेने पर भी दूध की मात्रा को बढ़ाया जा सकता है।
पेट के लिए फायदेमंद
पेट संबंधी समस्याएं जैसे कब्ज, गैस या अन्य पेट संबंधी दिक्कत दूर करने में मेथी वरदान साबित होती है। हरी मेथी की सब्जी खाने से पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम करने लगता है और जैसे ही इम्यून सिस्टम स्ट्रांग होता है पेट से जुड़ी दिक्कतें अपने आप सही होने लगती है
बुखार के लिए लाभकारी मेथी के फायदे
मेथी में बुखार (Fever) को कम करने के गुण विद्यमान होते है। यदि आप बुखार से पीडित है तो आप मैथी शहद और नीबू के रस के घोल का सेवन करें। यह आपके शरीर के अधिक तापक्रम और कमजोरी को दूर करने में सहायाता करेगा। साथ ही यह मिश्राण आपको गले की खांसी और दर्द से भी राहत दिलाने मदद करता है।
गठिया मे
गठिया (Arthritis) एक प्रकार की बीमारी होती है जिसे आम बोल चाल की भाषा में गठिया बाद कहा जाता है। यह जोड़ो में होने वाली सूजन और असहनीय दर्द देता है। साथ ही मांसपेशियों में बहुत तेज दर्द पैदा करता है। इस समस्‍या से बचने के लिए हमे मेथी को नियमित रूप से खाना चाहिए। कुछ अध्‍ययनों द्वारा भी इसकी पुष्‍टी की जा चुकी है।






छाछ के स्वास्थ्य लाभ और औषधीय गुण

                           
छाछ वास्तव में एक हल्का तरल पेय पदार्थ है जो दही को मथ कर बनाया जाता है। छाछ में दूध की अपेक्षा वसा कम होती है क्योंकि मक्खनबनाने के लिए पहले ही क्रीम निकाल ली जाती है। छाछ के फायदे और स्वास्थ्य लाभ अनेक हैं। यह विटामिन और खनिज से समृद्ध होने के साथ ही अच्छे पाचन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पेट को ठंडक प्रदान करने के लिए मट्ठा बहुत उपयोगी माना जाता है। छाछ का सेवन करने से गर्मी शांत होती है
आयुर्वेद में छाछ को सात्विक आहार माना गया है। दही से बनने वाला यह पेय पदार्थ स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है। जब भी आप भारी या मसालेदार भोजन की वजह से एसिडिटी का अनुभव करें, तो एक गिलास छाछ पी लें। पेट के लिए छाछ बहुत फायदेमंद है, खासकर गर्मियों में इससे बेहतर आपका मित्र और कोई नहीं हो सकता।
कई लोग छाछ को दूध और मक्खन का मिश्रण मान लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। जब दही को मथनी से मथा जाता है, तब मक्खन अलग हो जाता है और जो बचता है वो छाछ कहलाता है। छाछ अधिकांश भारतीय घरों में पाई जाती है और दैनिक रूप से भोजन के साथ या भोजन के बाद इसका सेवन किया जाता है। छाछ बनाने के विधि में कुछ मसाले भी शामिल होते हैं, जैसे कि जीरा पाउडर, काली मिर्च, अदरक, हरी मिर्च, करी पत्ता और धनिया पत्ता। ये सभी सामग्रियां छाछ के जायके और चिकित्सकीय गुण को बढ़ा देती हैं।
आयुर्वेद में छाछ का उल्लेख किया गया है, जिसका इस्तेमाल स्वास्थ्य को बनाए रखने और बीमारियों के खिलाफ उपचार के लिए किया जाता है। स्वास्थ्य के लिहाज से छाछ पीने के फायदे कई हैं। यह भोजन पचाने में मदद करती है और पेट को शांत रखती है।इसका स्वाद कुछ खट्टा होता है। छाछ का यह गुण पाचन में सुधार का काम करता है। सूजन, जलन, पाचन संबंधी विकार, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारी, एनीमिया और भूख की कमी के खिलाफ छाछ एक प्राकृतिक उपचार है।


छाछ के प्रकार
छाछ को प्राकृतिक दही से तैयार किया जाता है। फुल क्रीम दही से बनी छाछ में चीनी मिलाकर पीने से पाचन क्रिया बेहतर होती है। यह अपनी विशेषताओं में प्राकृतिक दही के समान है।
जिस छाछ को बिना क्रीम वाली दही से तैयार किया जाता है, वह मुधमेह रोगियों और वजन से परेशान लोगों के लिए सटीक है। पानी के आधे अनुपात के साथ बनी छाछ पीने से ऊर्जा और पाचन में सुधार होता है। बिना फैट वाली छाछ थकान और पेट को ठंडा करने का काम करती है।
छाछ बनाने की विधि 
छाछ एक संपूर्ण भोजन है। यह पोषण से भरपूर है और एक अच्छे संतुलित आहार के लिए सभी आवश्यक तत्व इसमें मिल जाते हैं। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, न्यूनतम लिपिड (फैट), विटामिन और आवश्यक एंजाइम होते हैं। दैनिक रूप से इसका सेवन किया जाना चाहिए।
छाछ में 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, इसलिए इसका सेवन शरीर में जल संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। आंतें इसे धीरे-धीरे एब्जॉर्ब करती हैं, क्योंकि इसकी सामग्री ज्यादातर प्रोटीन के साथ जुड़ी होती हैं। छाछ पीना किसी भी अन्य स्वाद वाले पेय या फिर सादे पानी की तुलना में बेहतर है। फर्मेंटेड छाछ का स्वाद खट्टा होता है, लेकिन जैविक रूप से मानव शरीर और कोशिकाओं के लिए बहुत पोषक भरा होता है।
पाचन तंत्र में सुधार
छाछ के सेवन से मसालेदार और तीखे भोजन से पेट में होने वाली जलन से आराम मिलता है। यह भोजन के ज्वलनशील तत्वों को साफ कर देता है, जिससे पेट को आराम मिलता है। भोजन के बाद आप इसका सेवन कर सकते हैं। इसके स्वाद और चिकित्सकीय गुणों को बढ़ाने के लिए आप इसमें अदरक व जीरा पाउडर आदि मिला सकते हैं। छाछ शरीर की गर्मी को शांत करने का काम भी करता है। यह महिलाओं द्वारा खासतौर पर पसंद किया जाता है, क्योंकि यह रजोनिवृत्ति से पहले और बाद में शरीर की गर्मी को शांत करता है। साथ ही रजोनिवृत्ति से पीड़ित महिलाओं के कई लक्षणों को छाछ कम करने का काम करता है। अचानक गर्मी (हॉट फ्लैश) लगने जैसी समस्या से पीड़ित लोग छाछ को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना सकते हैं। साथ ही जिनके शरीर का तापमान और मेटाबॉलिज्म स्तर अधिक होता है, वो बटरमिल्क का लाभ उठा सकते हैं।
डिहाइड्रेशन के खिलाफ प्रभावी
दही में नमक व मसाले डालकर बनाई गई छाछ डिहाइड्रेशन को रोकने का एक प्रभावी उपचार है। यह इलेक्ट्रोलाइट्स से भरा प्रभावी पेय है, जो शरीर से पानी की कमी और शरीर में गर्मी के खिलाफ लड़ने का काम करता है। गर्मियों के दौरान आप इसका आनंद जी भरकर ले सकते हैं। यह आपको चुभन भरी गर्मी, बेचैनी और थकान से आराम दिलाने का काम करेगा।
फैट के बिना कैल्शियम
बहुत लोग मानते हैं कि यह बटरमिल्क है, इसलिए यह फैट और कैलोरी से भरा होगा, लेकिन सामान्य दूध की तुलना में इसमें कम फैट होता है। दूध में एक महत्वपूर्ण घटक होता है – कैल्शियम। दूध भी वसा से भरा होता है। लैक्टोज को सहन न करने वालों ( जो दूध का सेवन करने से बचते हैं) के लिए छाछ एकमात्र प्राकृतिक कैल्शियम का स्रोत है। ऐसे लोग छाछ का सेवन करके आवश्यक कैल्शियम ले सकते हैं। यह किसी भी प्रतिकूल प्रतिक्रिया का कारण नहीं होगा, क्योंकि लैक्टोज छाछ में मौजूद स्वस्थ बैक्टीरिया को लैक्टिक एसिड में बदल दिया जाता है।
कैल्शियम शरीर के लिए बहुत ही जरूरी है। कैल्शियम हड्डियों के विकार जैसे ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने और इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छाछ अतिरिक्त कैलोरी के बिना कैल्शियम और पोषण की खुराक प्रदान करता है। दैनिक भोजन में आवश्यक कैल्शियम लेने से हड्डी के नुकसान की आशंका कम हो जाती है। यह हड्डी को स्वस्थ रखने में मदद करता है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी से हड्डियों को दूर रखता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इन सभी गुणों के लिए छाछ को दैनिक आहार में शामिल करना अच्छा विकल्प है।


विटामिन में समृद्ध
छाछ में बी कॉम्प्लेक्स विटामिन और विटामिन-डी जैसे गुण भी होते हैं। विटामिन की कमी के कारण होने वाली कमजोरी और एनीमिया जैसी बीमारियों को दूर करने के लिए छाछ अच्छा विकल्प है। छाछ में मौजूद विटामिन-डी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का काम भी करता है। यह पेय आपको सुझाए गए किसी अन्य विटामिन स्रोत से 21 प्रतिशत से अधिक विटामिन की मात्रा देता है।
शरीर को करता है डिटॉक्स
छाछ में राइबोफ्लेविन नाम का तत्व होता है, जो भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने, हार्मोन के स्राव और पाचन में सहायता करता है। साथ ही शरीर कोशिकाओं में एंजाइम को सक्रिय करने के लिए राइबोफ्लेविन का उपयोग करता है, जिससे ऊर्जा का उत्पादन होता है। यह लीवर के कार्य को भी प्रभावित करता है और शरीर को डिटॉक्स करने में सहायता प्रदान करता है। बटरमिल्क में एंटी-ऑक्सीडेशन गुण भी होते हैं।
पेट की एसिडिटी करे ठीक
छाछ पेट में होने वाली एसिडिटी या किसी अन्य तरह की गड़बड़ को शांत करने का काम करता है। इसके लिए आप छाछ में आवश्यक मसाले जैसे अदरक, नमक, जीरा व काली मिर्च आदि को मिलाकर पिएं। एसिडिटी से होने वाली पेट की जलन को यह आसानी से शांत कर देता है। साथ ही मसालेदार या तैलीय भोजन से होने वाली पेट की तकलीफ को भी दूर करता है।
 कब्ज का इलाज
छाछ एक प्राकृतिक औषधि है, जिसका सेवन कब्ज जैसी समस्या को ठीक करने के लिए किया जा सकता है। गलत भोजन और असमय खाने-पीने से पाचन तंत्र खराब हो जाता है, जिससे कई बार दस्त या कब्ज हो सकती है। इस स्थिति को कम करने के लिए नियमित रूप से छाछ का सेवन करें। अगर आप कब्ज से पीड़ित हैं, तो एक गिलास छाछ ले सकते हैं, जिससे आपको मल त्याग करने में आसानी होगी। यह उन लोगों के लिए भी सही है, जो पर्याप्त मात्रा में फाइबर का सेवन नहीं करते हैं।
 वजन कम करने में मददगार
छाछ एक बहुउपयोगी पेय है, जो आपके बढ़ते वजन पर भी रोक लगा सकता है। जो लोग अपने वजन को लेकर परेशान हैं, वे रोजाना नियमित रूप से बटरमिल्क का सेवन कर सकते हैं। छाछ अन्य डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही और पनीर में पाए जाने वाली कैलोरी व वसा के बिना शरीर को आवश्यक पोषण और एंजाइम प्रदान करता है।
इसे नियमित रूप से पीने से आप हाइड्रेटेड और ऊर्जावान बने रहते हैं। यह शरीर को प्रोटीन, विटामिन्स, खनिज, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और ऊर्जा को बनाए रखने के लिए आवश्यक अन्य एंजाइम प्रदान करता है। यह उपयोगी पेय है, जो भूख को संतुष्ट करता है और वजन को भी कम करने का काम करता है।


 भोजन बनाने में इस्तेमाल
छाछ का उपयोग खाना पकाने में भी किया जा सकता है। यह एसिड, कैल्शियम और विभिन्न एंजाइमों का एक प्रमुख मिश्रण है। इसके प्रयोग से भोजन में एक खास प्रकार का स्वाद आ जाता है। छाछ का इस्तेमाल केक बनाने में किया जाता है। केक के अलावा हल्के रसीले बिस्कुट और यहां तक कि वेफल्स और पेनकेक्स बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
रक्तचाप को करता है कम
अध्ययन से पता चलता है कि छाछ में भरपूर मात्रा में बायोएक्टिव प्रोटीन होते हैं। ये कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करते हैं। साथ ही छाछ में एंटी बैक्टीरियल और एंटी वायरल गुण भी होते हैं। नियमित रूप से छाछ पीने से रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है।
 कोलेस्ट्रॉल करता है नियंत्रित
कोलेस्ट्रॉल को कम करने और नियंत्रित करने के लिए छाछ एक प्राकृतिक उपाय है। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखने के लिए इसमें मौजूद तत्व बहुत प्रभावी हैं। यहां तक कि आयुर्वेदिक ग्रंथों ने भी छाछ के सेवन के गुण को अच्छा बताया है।
पाचन और पेट की बीमारियों का इलाज
छाछ में काफी मात्रा में एसिड होता है, जो बैक्टीरिया के खिलाफ लड़ने का काम करता है और पाचन प्रणाली को सुचारू करता है। छाछ में मिलाए जाने वाले सभी मसाले पाचन एजेंट की तरह काम करते हैं। अदरक, काली मिर्च और जीरा सभी बेहतरीन पाचन गुणों से समृद्ध होते हैं। ये सभी कामिनटिव पदार्थ हैं, जो पेट से गैस को दूर करते हैं। इन सामग्रियों का एक साथ सेवन करने से जठरांत्र मार्ग ठंडा होता है। नियमित रूप से छाछ का सेवन करने से जठरांत्र संबंधी परेशानियां उत्पन्न नहीं होती हैं। छाछ से ठीक होने वाली पाचन संबंधी कुछ बीमारियां इस प्रकार हैं –
लैक्टोज का सेवन करने में असमर्थता
अनियमित मल त्याग
कोलन कैंसर
इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम
पेट में संक्रमण
बॉडी मास को बढ़ाता है
छाछ प्रोटीन से भरपूर है, इसलिए यह शरीर में प्रोटीन की मात्रा भी बढ़ाता है। शरीर की हर कोशिका में प्रोटीन होता है। सभी कोशिकाएं मरम्मत और खुद को बनाए रखने के लिए प्रोटीन पर निर्भर हैं। मांसपेशियों के निर्माण के लिए प्रोटीन जरूरी है। छाछ कई बॉडी बिल्डरों का पसंदीदा पेय है। यह शरीर के अच्छे स्वास्थ्य के लिए विटामिन्स प्रदान करता है और अनावश्यक कैलोरी के बिना ही पौष्टिक होता है। प्रोटीन मजबूत हड्डियों, सख्त मांसपेशियों और स्वस्थ त्वचा के लिए महत्वपूर्ण तत्व है।
हड्डियों को मजबूती
दही में पानी डालकर बनाए गए छाछ में दूध के सभी पोषक तत्व होते हैं। यह कैल्शियम का एक समृद्ध स्रोत है, जो शरीर की हड्डियों और उनके ढांचे के लिए आवश्यक है। इसके अलावा, यह दांतों को मजबूत बनाने में भी मदद करता है। अगर आप चाहते हैं कि बच्चों की हड्डियां व दांत स्वस्थ रहें, तो उन्हें नियमित रूप से छाछ पीने को दें। इस पेय में मौजूद कैल्शियम को बोन टिशू सोख लेते हैं, जिससे बोन डेंसिटी को बनाए रखने में मदद मिलती है।
तैलीय भोजन को साफ करने का काम
अगर आप भारी भोजन के बाद पेट को फूला हुआ महसूस करते हैं, तो एक गिलास छाछ आपकी इस समस्या को शांत कर सकता है। छाछ के साथ अदरक, जीरा व धनिया आदि मिलाकर पीने से पाचन क्रिया को बहुत मदद मिलती है। इसके अलावा, छाछ भोजन से तेल और वसा को साफ करने में भी कुशल है। भारी भोजन के बाद आमतौर पर लोग सुस्ती महसूस करते हैं, लेकिन भोजन के बाद एक गिलास छाछ आपकी इस सुस्ती को दूर कर सकता है। इसके सेवन के बाद आप अधिक चुस्त महसूस करने लगेंगे।
छाछ का उपयोग करके बनाई गई मकई की रोटी नम रहती है और जल्दी सूखती नहीं है। चिकन को तलने से पहले जब छाछ में भिगोया जाता है, तो यह रसदार और नरम रहता है।
 गर्मी के मौसम में फर्मेंटेड और ठंडा बटरमिल्क शरीर के लिए बहुत ही उपयोगी माना जाता है। गर्मी के दौरान छाछ पीने से पसीने के जरिए शरीर से बाहर निकले पोषक तत्वों की पूर्ति हो जाती है। जैम, पालक और ब्रोकोली को भी छाछ में डालकर अलग-अलग स्वाद पाए जा सकते हैं।
प्रतिरक्षा स्तर बढ़ाता है
छाछ को लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया से समृद्ध माना गया है। यह जीवाणु प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है और शरीर को रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों में मौजूद हानिकारक रोगजनकों से लड़ने में मदद करता है।
छाछ के कई लाभ इसमें मौजूद बैक्टीरिया की वजह से हैं। इसमें दूध की तुलना में लगभग आधी कैलोरी होती है और वसा की मात्रा भी काफी कम होती है, इसलिए इसका सेवन मोटापे से परेशान लोग और मधुमेह से पीड़ित लोग कर सकते हैं।
इसके अलावा, यह रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है। छाछ में मौजूद विशेष प्रोटीन रक्तचाप को नियंत्रित करने और कैल्शियम, पोटैशियम व मैग्नीशियम रक्तचाप को कम करने में मदद करते हैं।
इसमें अधिक नमक न जोड़ें, क्योंकि इससे छाछ के पोषक तत्व कम हो जाते हैं। प्रोबायोटिक के रूप में, यह योनि संक्रमण और यूरिनरी ट्रैक्ट के खिलाफ सक्रिय है। मधुमेह से पीड़ित महिलाओं में कैंडिडा संक्रमण एक आम समस्या है और नियमित रूप से छाछ का सेवन करने से इसे कम किया जा सकता है।


त्वचा की देखभाल और सौंदर्य प्रसाधनों में उपयोग
छाछ पीने के फायदे कई हैं। छाछ पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के साथ-साथ त्वचा के लिए भी फायदेमंद है। शरीर में टॉक्सिन की मात्रा बढ़ने पर त्वचा पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। ऐसे में छाछ टॉक्सिन से लड़ने का काम करता है।
छाछ त्वचा को मॉइस्चराइज करता है और उसे प्राकृतिक चमक देता है। छाछ का लाभ लेने के लिए जरूरी नहीं कि आप इसका सिर्फ सेवन ही करें। इसका इस्तेमाल बाहरी तरीके से करने से भी कई लाभ मिल सकते हैं। इसलिए, बटरमिल्क बाथ को त्वचा के लिए फायदेमंद माना गया है। यह प्रोबायोटिक लैक्टिक एसिड में समृद्ध है, इसलिए इसका इस्तेमाल फेस मास्क के रूप में किया जा सकता है।
इसका उपयोग त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने और मुलायम करने के लिए किया जा सकता है। यह झाइयों  के उपचार के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
बटरमिल्क एंटी एंजिंग के रूप में भी काम कर सकता है। इसका इस्तेमाल फेस मास्क और फेस वॉश के रूप में किया जा सकता है। छाछ का नियमित उपयोग त्वचा को कसने में मदद करता है और इसे झुर्रियों से मुक्त रखता है।
लैक्टिक एसिड के कसैले गुणों की वजह से छाछ को चेहरे पर लगाने से काले धब्बों और दाग से निजात मिल सकती है। शहद और अंडे का मिश्रण छाछ के लाभों को बढ़ा सकता है। यह सन टैन को हटाने में मदद करता है और त्वचा को एक चमक देता है।
एवोकाडो और शहद के साथ छाछ को मिलाकर आप हेयर मास्क बना सकते हैं, जिसके आपके बाल मुलायम हो जाएंगे।
सनबर्न के खिलाफ उपयोगी
अगर आप अधिक समय से धूप में हैं और आपकी त्वचा लाल हो गई है और जलन हो रही है, तो तुरंत राहत पाने के लिए इस नुस्खे को आजमाएं। आधा कप छाछ में समान मात्रा में टमाटर का रस मिलाकर प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं। इसे लगभग एक घंटे तक लगा रहने दें। बाद में त्वचा को धो लें। यह त्वचा को ठंडक प्रदान करता है और सनबर्न से त्वचा को होने वाले दर्द को कम करता है। साथ ही त्वचा पर पड़ी लालिमा को भी कम करेगा।
 बवासीर के इलाज
बवासीर के लिए बटरमिल्क असरदार इलाज है। अगर आप बवासीर से पीड़ित हैं, तो चावल और केले के मिश्रण में एक कप छाछ मिलाकर सेवन कर सकते हैं। बवासीर से राहत पाने के लिए दिन में दो बार इसका सेवन करें।


सर्दी-जुकाम से राहत
छाछ आम सर्दी और बहती नाक से लड़ने के लिए कारगर माना जाता है। कुछ महीन कटे लहसुन और अदरक को छाछ के साथ मिलाएं और दो-तीन बार लें।
अल्सर के खिलाफ प्राकृतिक चिकित्सा
कई केस स्टडी में यह प्रमाणित किया गया है कि छाछ पीना अल्सर के खिलाफ एक प्राकृतिक उपचार है। छाछ पेट के परत की कोटिंग कर एसिड को बेअसर करने में मदद करता है । यह हार्ट बर्न को रोकता है और एसिड को भोजन नलिका में ऊपर जाने से रोकता है। इसके शीतल प्रभाव के कारण अल्सर को फैलने से रोका जा सकता है।
 थ्रश के खिलाफ सक्रिय
दिन में दो या तीन गिलास छाछ का सेवन यीस्ट यानी थ्रश इंफेक्शन (मुंह से जुड़ा संक्रमण, जो कैंडिडा फंगस की वजह से होता है) के लिए अच्छा घरेलू उपचार है। छाछ में मौजूद स्वस्थ बैक्टीरिया यीस्ट के विकास को रोकते हैं। थ्रश के लिए आप बटरमिल्क को माउथ वॉश के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। यह मुंह के छालों और घावों को ठीक करने में भी मदद करता है।
प्रोबायोटिक्स लाभ
शरीर के लिए छाछ के फायदों की श्रृंखला बड़ी है। छाछ बैक्टीरिया से समृद्ध होता है, जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट के लिए फायदेमंद होता है। ऐसे बैक्टीरिया को प्रोबायोटिक्स कहा जाता है। स्वस्थ बैक्टीरिया हर किसी के कोलन (मलाशय) में मौजूद होते हैं। पोषण के लिए ये बैक्टीरिया हमारी मदद कर सकते हैं।
छाछ के बैक्टीरिया में लैक्टिक एसिड गुण होता है, क्योंकि ये लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में बदल देते हैं। ये भोजन में मौजूद पोषक तत्वों को आसानी से शरीर में समा जाने में मदद करते हैं। बटरमिल्क के बैक्टीरिया को समग्र गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्वास्थ्य के लिए मददगार माना जाता है और इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) को कम करता है। आईबीएस के लिए छाछ एक सटीक घरेलू विकल्प हो सकता है। छाछ के बैक्टीरिया अच्छे बैक्टीरिया के विकास में मदद करते हैं और खराब बैक्टीरिया को पनपने नहीं देते हैं।
नीचे उन सभी अच्छे कामों की एक सूची दी गई है, जो छाछ के बैक्टीरिया करते हैं-
विटामिन का संश्लेषण
पाचन में सहायता
प्रतिरक्षा बढ़ाते हैं
पोषक तत्वों का निर्माण
हृदय रोगों के लिए
कार्सिनोजन के खिलाफ रक्षा






मक्का खाने के स्वास्थ्य लाभ

                                         


मकई जिसे मक्का या कॉर्न के नाम से भी जाना जाता है आहार के रूप में उपयोग किया जाने वाला विशेष खाद्य पदार्थ है। मकई या मक्‍का दुनिया के सबसे प्रसिद्ध अनाजों में अपना स्‍थान रखता है और कई देशों में यह मुख्‍य भोजन के रूप में उपयोग किया जाता है। मकई के स्‍वास्‍थय लाभ बहुत अधिक होते हैं यह मधुमेह को कम करने, निम्‍न रक्‍तचाप को ठीक करने, वजन कम करने और जन्‍म के समय तंत्रिका ट्यूब दोष आदि को कम करने में मदद करता है।
मक्‍का या मकई एक अनाज का पौधा है जो मेक्सिको में पैदा हुआ था। मकई के कर्नेल या बीजों में बहुत से पोषक तत्‍व होते हैं जिनके कारण इनका उपभोग करना लाभकारी होता है। मक्‍के की कई प्रजातियां होती है जो विविधता के आधार पर वे कई रंगों के होते हैं। मक्‍का का एक और प्रकार होता है जिसे मीठा मक्‍का  कहा जाता है जिनमें पोषक तत्‍वों के साथ चीनी अधिक मात्रा में होती है और स्‍टार्च बहुत ही कम मात्रा में होता है।
मक्‍का में पाए जाने वाले पोषक तत्‍व
स्‍वस्‍थ्‍य रहने और दैनिक चयापचय के लिए कैलोरी की आवश्‍यक्‍ता होती है। मक्‍का केवल कैलोरी ही प्रदान नहीं करता है बल्कि विटामिन ए, बी, ई और कई खनिजों का समृद्ध स्रोत भी है। साथ ही साथ मक्‍का में वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रे भी होते हैं। इसमें फाइबर की अच्‍छी मात्रा होती है जो कब्‍ज, बवासीर और कोलोरेक्‍टल कैंसर जैसे पाचन रोगों की रोकथाम करने में मदद करते हैं। मक्‍का में उपस्थित एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-कैंसरजन्‍य एजेंट के रूप में भी कार्य करते हैं और अल्जाइमर जैसे मानशिक रोग को रोकने में मदद करते हैं।

कैंसर को रोकने में 
कॉर्नेल विश्वविद्यालय में किए गए अध्‍ययनों के अनुसार, मकई में एंटीऑक्‍सीडेंट का एक समृद्ध स्रोत है जो कैंसर पैदा करने वाले मुक्‍त कणों (free radicals) से लड़ता है। कई अन्‍य खाद्य पदार्थों की अपेक्षा मक्‍के का उपयोग करने से आप अपने आहार में एंटीऑक्सिडेंटगुणों को बढ़ा सकते हैं। यह फेरिलिक एसिड नामक एक फेनोलिक यौगिक का एक समृद्ध स्रोत है। मक्‍के में एंटी-कार्सिनोजेनिक एजेंट होता है जो स्‍तन और यृकत कैंसर के कारण ट्यूमर से लड़ने में मदद करता है। बैंगनी मक्‍का में पाए जाने वाले एंथोकाइनिन, मुक्‍त कणों को खोजने का काम करते हैं जो कैंसर का कारण होते हैं। विभिन्‍न प्रकार के कैंसरों के प्रभाव को एंटीऑक्‍सीडेंट  के सहायता से कम किया जा सकता है।


मकई के फायदे 
मकई में उपस्थिति पोषक तत्‍वों के कारण यह हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बेहद लाभकारी होता है। इस खाद्य पदार्थ का उपयोग कर आप अपने भोजन को स्‍वादिष्‍ट बना सकते हैं। साथ ही इसमें फाइटोकेमिकल्‍स  भी होते हैं जो पुरानी बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। आइए जाने मकई के फायदे क्‍या है।
मक्‍का का उपयोग  अल्जाइमर रोग मे
थाइमाइन की अच्‍छा मात्रा मकई मे होती है जो आपकी शक्ति को बढ़ाने के साथ-साथ मस्तिष्‍क कोशिका और ज्ञान संब‍धी क्रिया  को बढ़ाने के लिए मदद करता है। एसिटाइलॉक्लिन के संश्‍लेषण के लिए भी इसकी आवश्‍यकता होती है, जो स्‍मृति के लिए आवश्‍यक एक न्‍यूरोट्रांसमीटर है और जिसकी कमी के कारण मानसिक क्रिया  और अल्‍जाइमर रोग से संबंधित परेशानियां हो सकती हैं।
कॉर्न खाने के फायदे आंखों के लिए
पीले मकई के दानों में कैरोटीनोइड नामक पदार्थ होता है जो मैकुलर अपघटन के खतरे को कम करते हैं जिसका सीधा संबंध आपके देखने की क्षमता से संबंधित होता है। मक्‍के में मौजूद बीटा कैरोटीन विटामिन ए बनाने में मदद करता है। इस प्रकार यह आपके देखने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।


मक्‍का मधुमेह को रोके
भुट्टा जैसे कार्बिनिक फल (Organic fruits) और सब्जियां मधुमेह के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं। मकई के दानों का नियमित सेवन करने से इंसुलिन की अनुपस्थिति में मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। साथ ही मकई के दानों में उपस्थित फाइटोकेमिकल्‍स उच्‍च रक्‍तचाप को कम करने में मदद करते हैं। फाइटोकेमिकल्‍स शरीर में इंसुलिन के अवशोषण और मुक्‍त  होने को नियंत्रित करते हैं। इस प्रकार मक्‍का सामान्‍य जीवनशैली बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा मक्‍का में पैंटोथिनेक एसिड भी होता है यह विटामिन बी, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और लिपिड चयापचय में मदद करता है। इसलिए यह एड्रेनल ग्रंथियों  के कामकाज को बढ़ा कर तनाव को कम करता है।
मकई  गर्भवती महिलाओं के लिए
फोलिक एसिड की अच्‍छी मात्रा होने के कारण मकई गर्भवती महिलाओं  के लिए बहुत ही महत्‍वपूर्ण होता है। गर्भवती महिलाओं में फोलिक एसिड की कमी के कारण होने वाले बच्‍चे का वजन कम हो सकता है और साथ ही जन्‍म के समय तंत्रिका ट्यूब मे भी नुकसान  हो सकता है।

इसलिए गर्भवती महिलाओं  को अपने आहार मे मकई को शामिल करना चाहिए क्‍योंकि इससे मां और बच्‍चे दोनों को स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त होता है। हांलाकि उच्‍च रक्‍तचाप या हाथ-पैर की सूजन होने की स्थति में डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए।

मक्‍का के गुण ग्‍लूटेन फ्री
आमतौर पर अन्‍य खाद्य आहारों के तरह ही मक्‍का का उपयोग किया जाता है। वास्‍तव में यह अनाज नहीं है और इसमें कोई ग्‍लूटेन नहीं होता है। ग्‍लूटेन का उपभोग करने के कई हानिकारक लक्षण होते हैं जिनमें पाचन, क्रैम्पिंग , दस्‍त, कब्‍ज, थकान और त्‍वाचा संबंधी समस्‍याएं होती हैं। ग्‍लूटेन कई लोगों को नकारात्‍मक रूप से प्रभावित कर सकता है। इसलिए आप अपने स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाने और ऊर्जा बढ़ाने के लिए ग्‍लूटेन मुक्‍त  मकई का सेवन कर सकते हैं।


मक्‍का के गुण वजन बढ़ाने में सहायक 
वे लोग जो अपना वजन बढ़ाने  का प्रयास कर रहे हैं उनके लिए भुट्टे का सेवन करना लाभकारी होता है। ऐसे लोग जिनका वजन कम होता है उन्‍हें अपने आहार में कैलोरी  की मात्रा बढ़ाने की आवश्‍यकता होती है ताकि उनके शरीर का वजन बढ़ सके। मक्‍के में कैलोरी और कार्बोस बहुत अधिक मात्रा में होते हैं जो आपके शरीर के वजन को बढ़ाने में मदद करते हैं।
यदि आपका वजन सामान्‍य से कम है तो आप अपने आहार में मक्‍के को शामिल करें क्‍योंकि इसके एक कप दानों में 130 कैलोरी की मात्रा होती है।
मकई का उपयोग एनीमिया के उपचार में
विटामिन बी 12 और फोलिक एसिड  की कमी के कारण एनीमिया होता है। मकई में आयरन बहुत ही अच्‍छी मात्रा में होता है जो नयी लाल रक्‍त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्‍यक खनिजों में से एक है। मकई का नियमित और संतुलित उपभोग कर आप लोहे की कमी से होने वाले एनीमिया रोग  की संभावनाओं को कम कर सकते हैं।
स्वीट कॉर्न  कोलेस्‍ट्रोल को कम करे
कोलेस्‍ट्रोल का उत्‍पादन यकृत द्वारा किया जाता है। आमतौर पर कोलेस्‍ट्रोल दो प्रकार के होते है अच्‍छे कोलेस्‍ट्रोल  और खराब कोलेस्‍ट्रोल होते हैं। खराब कोलेस्‍ट्रोल फैटी भोजन का सेवन करने के कारण बढ़ता है जो आपके दिल को कमजोर करता है कार्डियोवैस्‍कुलर बीमारीयों का कारण बनता है। मीठे मकई विटामिन सी, कैरोटीनोइड और बायोफ्लावोनोइड्स में समृद्ध होते है जो कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करके रक्‍त प्रवाह को बढ़ावा देते हैं जो आपके दिल को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए आवश्‍यक होता है। मकइ के तेल मे एंथैथोजेनिक  प्रभाव होता है जो शरीर द्वारा कोलेस्‍ट्रोल के अवशोषण को कम करता है और आपके शरीर को स्‍वस्‍थ्‍य रखता है। अगर आपको लगता है कि आपके शरीर में कोलेस्‍ट्रोलकी मात्रा बढ़ने लगी है तो आप मक्‍का का सेवन कर इसे नियंत्रित कर सकते हैं।

भुट्टे के लाभ त्‍वचा समस्‍याओं के लिए
स्‍टार्च का प्रयोग कई कॉस्‍मेटिक उत्‍पादों में उपयोग किया जाता है जो कि मक्‍का में भरपूर मात्रा में होता है। इस कारण मक्‍का त्‍वचा के चकते और जलन को शांत करने के लिए उपयोग किया जाता है। रासायनिक सौंदर्य उत्‍पादों के निर्माण के समय इनमें कई कैंसरजन्‍य पेट्रोलियम उत्‍पादों को मिलाया जाता है जो त्‍वचा छिद्रों को बंद कर सकते हैं और त्‍वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए आप अपनी त्‍वचा को हानिकारक सौंदर्य उत्‍पादों से बचाने के लिए मकई का उपयोग कर सकते हैं।

भुट्टा का लाभ पाचन के लिए
फाइबर की अच्‍छी मात्रा मकई में होती है जिसमें घुलनशील और अघुलनशील दोनों ही प्रकार के फाइबर होते हैं। घुलनशील फाइबर एक जेल में बदलकर कोलेस्‍ट्रोल के अवशोषण को रोकने में मदद करते हैं जबकी अघुलनशील फाइबर नरम और भारी मल को बढ़ावा देकर कब्‍ज और आंतों की समस्‍याओं को रोकता है। जिससे इर्रेबल बाउल सिंड्रोम और दस्‍त की संभावना को कम किया जा सकता है। इस प्रकार यह पाचन समस्‍याओं जैसे कब्‍ज, बवासीर के साथ-साथ कोलन कैंसर को रोकने में मदद करता है। मक्‍का मे दोनों ही प्रकार के फाइबर होते हैं लेकिंन इसमें अघुलनशील फाइबर की मात्रा ज्‍यादा होती है जो आपके पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने में लाभकारी होते हैं।





शुक्राणुओं की संख्‍या बढ़ाने के उपाय


           
                                         
शुक्राणुओं की संख्या कम होना नपुंसकता का कारण बन सकती है। शुक्राणुओं की संख्‍या बढ़ाने के घरेलू उपाय की आवश्‍यकता उन लोगों को अधिक होती है जो पुरुष बांझपन से पीड़ित रहते है और उन सभी पुरुषों के लिए जनके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम होती है। क्‍योंकि मानव समाज में अन्‍य गतिविधियों के साथ यौन गतिविधि का प्रमुख स्‍थान होता है। यह शारीरिक सुख के साथ-साथ प्रजनन प्रक्रिया का प्रमुख आधार होता है। आज के समय में हर तीसरे व्‍यक्ति में शुक्राणुओं की कमी होती है जिसकी वजह से वे सफल यौन संबंध नहीं बना पाते है। पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की संख्‍या प्रजनन शक्ति को प्रभावित कर स‍कती है। जो की आपकी नामर्दानगी और बांझपन से संबंधित होती है।
स्पर्म की कमी होने पर यदि समय पर उचित उपचार किया जाए तो आप आपनी यौन शक्ति को बढ़ा सकते है और अपने साथी के सामने शर्मिदगी से बच सकते है। शुक्राणुओं की कमी को पूरा करने के लिए आपको पौष्टिक आहार, पूरक दवाएं और अपनी दिनचर्या में कुछ परिवर्तन की आवश्‍यक्‍ता होती है। आज हम अपको शुक्राणुओं की संख्या में वृद्धि के तरीके, भोजन सामग्री, पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थो की जानकारी उपलब्‍ध करा रहे है जिससे आप बेहतर यौन सुख पा सके और अपनी प्रजनन क्षमता को बढ़ा सकें।
शुक्राणुओं की संख्‍या बढ़ाने के उपाय वजन कम करना
आपका ज्‍यादा वजन आपके शुक्राणुओं की संख्‍या को प्रभावित कर सकता है। यदि आप अपना वजन कम कर सकते है तो यह आपकी प्रजनन क्षमता और शुक्राणुओं की संख्‍या को बढ़ाने में बहुत ही प्रभावी होगा। यौन से संबंधित शोधों से जानकारी मिलती है कि कम वजन वीर्य की मात्रा , गुणवत्‍ता, गतिशीलता  और शुक्राणुओं के संपूर्ण स्‍वास्‍थ के लिए बहुत फायदेमंद है।आप अपने स्‍वस्‍थ खान-पान के लिए डॉक्‍टर से परार्मश कर सकते है। नियंत्रित वजन और स्‍वस्‍थ्‍य शरीर आपकी यौन समस्‍या को दूर करने में मदद कर सकता है।
शुक्राणु बढ़ाने का अचूक नुस्‍खा केला
स्‍वादिष्‍ट और स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक केला में बहुत सारे पोषक तत्‍व होते है जो शुक्राणुओं के पोषण में मदद करते है। केला विटामिन A, विटामिन C और विटामिन B1 के अच्‍छे उत्‍पादक होते है जो शुक्राणु को स्‍वस्‍थ और उनके उत्‍पादन को बढ़ावा देने में मदद करते है। केले में बहुत ही उपयोगी और कम मात्रा में मिलने वाले एंजाइम होता है जिसे ब्रोमेलेन (Bromelain) कहते है। यह शुक्राणुओं की उत्‍पादन और उनकी सक्रीयता में वृद्धि करता है।
शुक्राणु बढ़ाने वाला आहार विटामिन युक्‍त हो
शुक्राणुओं में आने वाली कमी को पूरा करने के लिए विटामिनो का उपयोग बहुत ही फायदेमंद होता है। शुक्राणुओं के पोषण के लिए विटामिन D, C, E और Coenzyme Q10 (CoQ10) लाभकारी होते है। विटामिन C से शुक्राणुओं की संख्‍या में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता लेकिन यह उनकी कार्य क्षमता को बढ़ा सकता है। जिससे गर्भधारण कराने की शक्ति संभावित रूप से बढ़ सकती है। विटामिन D जो कि हमें प्राकृतिक रूप से सिर्फ सूर्य से मिलता है। इसकी मात्रा मनुष्‍यों में काफी कम होती है। विटामिन D प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। इसलिए आप अपने शरीर विटामिन की कमी होने पर इनके पूरको का उपयोग करें।
व्‍यायाम शुक्राणु कमी के लक्षण दूर करे
नियमित व्‍यायाम आपके शरीरिक विकास के लिए महत्‍वपूर्ण होता है। नियमित व्‍यायाम से आप शुक्राणुओं की संख्‍या को बढ़ा सकते है। एक्‍सरसाइज करने से सक्रीय और स्‍वस्‍थ जीवन शैली को अपनाया जा सकता है। वेटलिफ्टिंग, आउटडोर व्‍यायाम और अन्‍य एक्सरसाइज स्‍वस्‍थ शुक्राणुओं की वृद्धि करने में मदद करते है। व्‍यायाम करने से आप अपने वजन को नियंत्रित रखने के साथ स्‍वस्‍थ शरीर और स्‍वस्‍थ शुक्राणुओं के लिए लाभकारी होता है।
शुक्राणु बढ़ाने के तरीके हैं अंण्‍डें
पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्‍या को बढ़ाने के लिए अंडों का उपयोग किया जा सकता है। अंण्‍ड़े में विटामिन Eऔर प्रोटीन पर्याप्‍त मात्रा में होते है। इसमें मौजूद विटामिन और प्रोटीन शुक्राणुओं की सुरक्षा के लिए फायदेमंद होते है। फ्री रेडिकल्‍स (free radicals) शुक्राणुओं की संख्‍या को कम कर सकते है। अंण्‍ड़े में उपस्थित पोषक तत्‍व शुक्राणुओं को स्‍वस्‍थ और उनकी संख्‍या में वृद्धि करते है। यह आपकी प्रजनन क्षमता  को बढ़ा सकते है।


शुक्राणुओं की गतिशीलता बढ़ाने के लिए शतावरी
आयुर्वेदिक औषधी के रूप में शतावरी (Asparagus) का उपयोग किया जाता है। यह शुक्राणुओं की संख्‍या में वृद्धि करने सहायक होती है। शतावरी का उपयोग हम हरी सब्‍जी के रूप में करते है। इसमें विटामिन सी अच्‍छी मात्रा में होते जो कि शुक्राणुओं पर बहुत ही अच्‍छा प्रभाव डालता है। यह आपके अंडकोष  कोशिकाओं की सुरक्षा करता है और हानिकारक तत्‍वों का विरोध करता है।
पालक का सेवन स्‍पर्म बढ़ाने के घरेलू उपाय में करें
शुक्राणुओं के पोषण में विटामिन C और फोलिक एसिड की प्रमुख भूमिका होती है। पालक  और अन्‍य हरी पत्‍तेदार सब्‍जीयों में विटामिन और फोलिक एसिड अच्‍छी मात्रा में होते है। फोलिक एसिड  कम होने पर शरीर में स्‍वस्‍थ शुक्राणुओं के उत्‍पादन में कमी होती है। शरीर में पहले से उपस्थित शुक्राणु कुपोषित हो जाते है जो कि आपकी प्रजनन क्षमता को कम कर देते है। इसलिए अपने शरीर में फोलिक एसिड के स्‍तर को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से पालक और अन्‍य पत्‍तेदार सब्‍जीयों का नियमित सेवन करना चाहिए।
शुक्राणु की संख्‍या बढ़ाने में अनार है फायदेमंद
स्‍वादिष्‍ट और पौषटिक फल के रूप में अनार को जाना जाता है। यह शुक्राणुओं को बढ़ाने के साथ-साथ आपके वीर्य की गुणवत्‍ता को भी बढ़ाता है। इसमें एंटीऑक्सिडेंट भरपूर मात्रा में होते है जो हमारे शरीर की हानिकारक जीवाणुओं से रक्षा करते है। इसमें उपस्थित एंटीऑक्सिडेंट कुपोषित शुक्राणुओं को नष्‍ट करने में सहायक होते है और स्‍वस्‍थ शुक्राणुओं में वृद्धि करते है। अनार के रस  का उपयोग प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए प्राचीन समय से किया जा रहा है। आप भी अपने यौन स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ाने के लिए अनार का उपयोग कर सकते हैं।
Y शुक्राणुओं को बढ़ाने के उपाय चॉकलेट
डार्क चॉकलेट अधिकतर कामुकता (sexuality) की इच्‍छाओं को दर्शाती है। यह आपके शरीर में शुक्राणुओं की वृद्धि करने में मदद करती है। चाकलेट में एल-आर्जिनिन एचसीएल  नाम का एमिनो एसिड होता है जो कि वीर्य और उसमें उपस्थित शुक्राणुओं की संख्‍या को बढ़ाने में बहुत प्रभावी होता है। ऐसा माना जाता है कि चॉकलेट का नियमित सेवन कर पुरुषों में y शुक्राणुओं की संख्‍या को बढ़ाया जा सकता है। चाकलेट का सेवन कर आप अपनी यौन-तीव्रता  भी बढ़ा सकते है।
शुक्राणु बढ़ाने की दवा है अखरोट


ओमेगा-3 फैटी एसिड अच्‍छी मात्रा अखरोट में होती है जो अंडकोष में खून संचरण को बढ़ा कर शुक्राणुओं की मात्रा और उनके उत्‍पादन में वृद्ध करते है। यह आर्जिनिन  से परिपूर्ण होते है इनका कार्य भी शुक्राणुओं की वृद्धि करना होता है।अखरोट में एंटीऑक्सिडेंट भी होते है जो आपके खून में उपस्थित विषैले और हानिकारक पदार्थो को दूर करने में सहायक होते है।
स्पर्म को बढ़ाने के घरेलू उपाय लहसुन
हम मसालेदार खाने को स्‍वादिष्‍ट और पोष्टिक बनाने के लिए लहसुन का उपयोग करते है। इसे आयुर्वेदिक उपचार में प्राचीन समय उपयोग किया जा रहा है। यह हमारे हृदय, स्‍वशन संक्रमण सहित अन्‍य शारीरिक बीमारीयों के उपचार में मदद करता है। इसमें कामोद्दीपक की तरह एक पावर फुल घटक उपस्थित होता है। जो शुक्राणुओं की संख्‍या वृद्धि में लाभकारी होता है। एफ्रोडायसियाक एलिसिन यौगिक से युक्‍त होता है जो पुरूषों के जननांग में खून वितरण प्रणाली को मजबूत करता है। यह वीर्य और उसमें शुक्राणु उत्‍पादन को बढ़ाने में सहायता करता है।
वीर्य बढ़ाने के उपाय गाजर
गाजर में विटामिन ए प्रमुख रूप से पाया जाता है जो कि शुक्राणुओं की वृद्धि और उनकी कार्य क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। यदि आप यौन-सुख की प्राप्‍ती करना चाहते है तो गाजर और अन्‍य खाद्य पदार्थ जो विटामिन ए  उपलब्‍ध कराते है उनका नियमित रूप से सेवन करते रहें।




चमकी बुखार के लक्षण और सामान्य उपचार


बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में चमकी बुखार या हाइपोग्लाइसीमिया से हालात भयावह हैं।इतने बच्‍चों की मौत के बाद भी अभी तक खुलासा नहीं हो पा रहा है कि मरने वाले बच्‍चें की मौत चमकी बुखार से हो रही है या जहरीली लीची या हाइपोग्लाइसीमिया के कारण। विशेषज्ञों की माने तो चमकी बुखार के कारण ही हाइपोग्लाइसीमिया होने का खतरा बढ़ जाता है।
क्या हैं चमकी बुखार के लक्षण?
 चमकी नाम की बीमारी में शुरुआत में तेज बुखार आता है। इसके बाद बच्चों के शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है। इसके बाद तंत्रिका तंत्र काम करना बंद कर देता है। इस बीमारी में ब्लड शुगर लो हो जाता है। बच्चे तेज बुखार की वजह से बेहोश हो जाते हैं और उन्हें दौरे भी पड़ने लगते हैं। जबड़े और दांत कड़े हो जाते हैं. बुखार के साथ ही घबराहट भी शुरू होती है और कई बार कोमा में जाने की स्थिति भी बन जाती है। अगर बुखार के पीड़ित को सही वक्त पर इलाज नहीं मिलता है तो उसकी मौत होने की सम्‍भावाना बढ़ जाती है।
अगर चमकी बुखार हो जाए तो क्या करें?
 - बच्चों को पानी पिलाते रहे, इससे उन्हें हाइड्रेट रहने और बीमारियों से बचने में मदद मिलेगी।
 - तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछें। 



- पंखे से हवा करें या माथे पर गीले कपड़े की पट्टी लगायें ताकि बुखार कम हो सके। 
- बच्‍चे के शरीर से कपड़े हटा लें एवं उसकी गर्दन सीधी रखें। बच्चों को बुखार आने पर कोई भी एंटीबॉयोट‍िक देने से पहले डॉक्‍टर की सलाह जरुर लें। 
- अगर बच्चे के मुंह से लार या झाग निकल रहा है तो उसे साफ कपड़े से पोछें, जिससे सांस लेने में दिक्‍कत न हो।
 - बच्‍चों को लगातार ओआरएस का घोल पिलाते रहें. तेज रोशनी से बचाने के लिए मरीज की आंख को पट्टी से ढंक दें।
 - बेहोशी व दौरे आने की अवस्‍था में मरीज को हवादार जगह पर लिटाएं। 
- चमकी बुखार की स्थिति में मरीज को बाएं या दाएं करवट पर लिटाकर डॉक्टर के पास ले जाएं। यानी सीधा न सुलाएं।
हाइपोग्लाइसीमिया है गंभीर लक्षण
 शरीर में पानी की कमी होने पर बच्चे जल्दी हाइपोग्लाइसीमिया के चपेट में आ जाते हैं। सही खानापान न होने से उनके शरीर का शुगर लेवल तेजी से नीचे गिरने लगता है। ऐसे में उनके शरीर में सोडियम की कमी भी होती है। बेहोशी का एक बड़ा कारण हाइपोग्लाइसीमिया भी होता है। बच्चों को पता ही नहीं होता कि उनका ग्लोकोज लेवल कम हो रहा है और वे अचानक से गिर पड़ते हैं।
बीमारी से बचाने के लिए रखें ये बातें ध्यान में - 
*फल और खाना खाने से पहले उसकी जांच जरूर कर लें कि कही वह खराब न हो। 
* बच्चे को कभी भी किसी भी हाल में किसी का जूठा खाना न दें। 
* तेज धूप, गर्मी में बच्चों को बाहर न निकलने दें।



*जब भी बच्चा बाहर जाए वह पूरी तरह से कपड़ों में हो। 
* बाहर जाने से पहले खाना खा कर निकलें और शरीर में पानी की कमी न होने दें।
*बच्चों को सूअर और गाय के पास जाने से रोकें।
*खाने से पहले और खाने के बाद हाथ ज़रूर धुलवाएं।
* बच्चों की साफ सफाई पर खूब ध्यान दें। उनके नाखून नहीं बढ़ने दें। 
* बच्चों को पोषण पूरा हो यह ध्यान दें। हरी सब्जी, फल और दूध-दही खूब खिलाएं।
* जब भी पानी पीने को कुछ मीठा भी खिलाएं अगर बच्चा ज्यादा समय बाहर रहता हो तो। 





आलू एक फायदे अनेक



भारत में पाई जाने वाली सब्जियों में आलू बहुतायत में पाया जाता है, इसमें गुणों का भंडार होता है। आलू को किसी भी सब्जी में मिलाकर आसानी से बनाया जा सकता है। यह जितना सस्ता मिलता है, उसके विपरीत गुणों का भंडार है।
आलू में कैल्शियम, लोहा, विटामिन-बी तथा फास्फोरस बहुतायत में होता है। आलू खाते रहने से रक्त वाहिनियां बड़ी आयु तक लचकदार बनी रहती हैं तथा कठोर नहीं होने पातीं, इसलिए आलू खाकर लम्बी आयु प्राप्त की जा सकती है।
हड्डियों के लिए फायदेमंद है आलू
आलू का सेवन हड्डियों के लिए फायदेमंद होता है। इसका कारण यह है कि आलू में कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस तीनों की मात्रा अच्छी होती है। 100 ग्राम आलू में 12 मिलीग्राम कैल्शियम, 23 मिलीग्राम मैग्नीशियम और 57 मिलीग्राम फास्फोरस होता है। ये सभी तत्व हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी हैं। छोटे बच्चों को भी सीमित मात्रा में आलू खिलाना चाहिए। हालांकि आलू को बहुत ज्यादा ऑयल में फ्राई करने से इसके पोषक तत्वों में कमी आ जाती है।आलू में विटामिन बहुत होता है। इसको मीठे दूध में भी मिलाकर पिला सकते हैं। आलू को छिलके सहित गरम राख में भूनकर खाना सबसे अधिक गुणकारी है या इसको छिलके सहित पानी में उबालें और गल जाने पर खाएं।


यदि दो-तीन आलू उबालकर छिलके सहित थोड़े से दही के साथ खा लिए जाएं तो ये एक संपूर्ण आहार का काम करते हैं।
आलू से मोटापा नहीं बढ़ता। आलू को तलकर तीखे मसाले, घी आदि लगाकर खाने से जो चिकनाई पेट में जाती है, वह चिकनाई मोटापा बढ़ाती है। आलू को उबालकर अथवा गर्म रेत या राख में भूनकर खाना लाभदायक और निरापद है।
आलू के छिलके ज्यादातर फेंक दिए जाते हैं, जबकि छिलके सहित आलू खाने से ज्यादा शक्ति मिलती है। जिस पानी में आलू उबाले गए हों, वह पानी न फेंकें, बल्कि इसी पानी से आलुओं का रसा बना लें। इस पानी में मिनरल और विटामिन बहुत होते हैं।
ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है आलू
स्वस्थ रक्तचाप को बनाए रखने के लिए कम सोडियम आहार आवश्यक है, लेकिन पोटेशियम की उच्च मात्रा भी समान रूप से महत्वपूर्ण होती है। पोटेशियम वासोडिलेशन, या रक्त वाहिकाओं की चौड़ाई को प्रोत्साहित करता है। पोषक तत्व जैसे पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम सभी आलू में मौजूद होते हैं। यह स्वाभाविक रूप से रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।आलू पीसकर, दबाकर, रस निकालकर एक चम्मच की एक खुराक के हिसाब से चार बार नित्य पिएं, बच्चों को भी पिलाएं, ये कई बीमारियों से बचाता है। कच्चे आलू को चबाकर रस को निगलने से भी बहुत लाभ मिलता है।



दिल की बीमारियों से बचाए आलू

आलू में मौजूद फाइबर, पोटेशियम, विटामिन सी, और विटामिन बी 6 कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। आलू में फाइबर की महत्वपूर्ण मात्रा रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में मदद करती है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। एनएचएएनईएस के आधार पर कहा गया है कि आलू में मौजूद पोटेशियम की उच्च मात्रा और सोडियम की कम मात्रा से कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा लगभग न के बराबर होता है।

दिमाग के लिए भी फायदेमंद है आलू

मस्तिष्क की उचित कार्यप्रणाली बड़े पैमाने पर ग्लूकोज स्तर, विटामिन-बी परिसर के विभिन्न घटकों, ऑक्सीजन आपूर्ति, ओमेगा-3 जैसे फैटी एसिड, कुछ हार्मोन और एमिनो एसिड पर निर्भर करती है। आलू में यह सभी तत्व मौजूद होते हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि आलू मस्तिष्क के लिए भी बहुत लाभकारी है। आलू मस्तिष्क को थकने से रोकता है और आपको हर समय सतर्क रखता है।जिन मरीजों के पाचनांगों में अम्लता (खट्टापन) की अधिकता है, खट्टी डकारें आती हैं, वायु अधिक बनती है, उनके लिए गरम-गरम राख या रेत में भुना हुआ आलू बहुत लाभदायक है।

आलू के आसान घरेलू नुस्खे

* रक्तपित्त बीमारी में कच्चा आलू बहुत फायदा करता है।
* कभी-कभी चोट लगने पर नील पड़ जाती है। नील पड़ी जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाएँ ।
* शरीर पर कहीं जल गया हो, तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो, त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है।


* भुना हुआ आलू पुरानी कब्ज और अंतड़ियों की सड़ांध दूर करता है। आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित्त को रोकता है।
* चार आलू सेंक लें और फिर उनका छिलका उतार कर नमक, मिर्च डालकर नित्य खाएं। इससे गठिया ठीक हो जाता है।
* गुर्दे की पथरी में केवल आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है। पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियाँ और रेत आसानी से निकल जाती हैं।
* उच्च रक्तचाप के रोगी भी आलू खाएँ तो रक्तचाप को सामान्य बनाने में लाभ करता है।
* आलू को पीसकर त्वचा पर मलें। रंग गोरा हो जाएगा।
* कच्चा आलू पत्थर पर घिसकर सुबह-शाम काजल की तरह लगाने से 5 से 6 वर्ष पुराना जाला और 4 वर्ष तक का फूला 3 मास में साफ हो जाता है।
* आलू का रस दूध पीते बच्चों और बड़े बच्चों को पिलाने से वे मोटे-ताजे हो जाते हैं। आलू के रस में मधु मिलाकर भी पिला सकते हैं।
* आलुओं में मुर्गी के चूजों जितना प्रोटीन होता है, सूखे आलू में 8.5 प्रतिशत प्रोटीन होता है। आलू का प्रोटीन बूढ़ों के लिए बहुत ही शक्ति देने वाला और बुढ़ापे की कमजोरी दूर करने वाला होता है।