पित्ताश्मरी (गॉल ब्लेडर स्टोन) के आयुर्वेदिक ,हर्बल उपचार



  गाल ब्लाडर में पथरी (gallstones) बनना एक भयंकर पीडादायक रोग है। इसे ही पित्त पथरी कहते हैं। पित्ताषय में दो तरह की पथरी बनती है। प्रथम कोलेस्ट्रोल निर्मित पथरी।  दूसरी पिग्मेन्ट से बननेवाली पथरी।    ध्यान देने योग्य है कि लगभग८०% पथरी कोलेस्ट्रोल तत्व से ही बनती हैं।वैसे तो यह रोग किसी को भी और किसी भी आयु में हो सकता है लेकिन महिलाओं में इस रोग के होने की सम्भावना पुरुषों की तुलना में  लगभग  दूगनी हुआ करती है।पित्त लिवर में बनता है और इसका भंडारण गाल ब्लाडर में होता है।यह पित्त वसायुक्त भोजन को पचाने में मदद करता है। जब इस पित्त में कोलेस्ट्रोल और बिलरुबिन की मात्रा  ज्यादा हो जाती है,तो पथरी निर्माण के लिये उपयुक्त स्थिति बन जाती है।  पथरी रोग में मुख्य रूप से पेट के दायें हिस्से में तेज  या साधारण दर्द होता है।भोजन के बाद पेट फ़ूलना,अजीर्ण होना,दर्द और उल्टी होना  इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

  प्रेग्नेन्सी,मोटापा,मधुमेह,अधिक बैठे रेहने की जीवन शैली, तेल घी अधिकता वाले भोजन,और शरीरमें खून की कमी से पित्त पथरी रोग होने की सम्भावना बढ जाती है।   दो या अधिक बच्चों की माताओं में भी इस रोग की प्रबलता देखी जाती है।    अब मैं कुछ आसान घरेलू नुस्खे प्रस्तुत कर रहा हूं जिनका उपयोग करने से  इस भंयकर रोग से होने वाली पीडा में राहत मिल जाती है और निर्दिष्ट अवधि तक इलाज जारी रखने पर ३ से ४ एम एम  तक की पित्त  पथरी से मुक्ति मिल जाती है। 
   १) गाजर और ककडी का रस प्रत्येक १०० मिलिलिटर की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीयें। अत्यन्त लाभ दायक  उपचार है।  
२)  नींबू  का रस ५० मिलिलिटर की मात्रा में सुबह खाली पेट पीयें। यह उपाय एक सप्ताह तक जारी रखना उचित है। 
३)  सूरजमुखी या ओलिव आईल ३० मिलि खाली पेट पीयें।इसके तत्काल बाद में १२० मिलि अन्गूर का रस या निम्बू का रस पीयें।  इसे  कुछ हफ़्तों तक जारी रखने पर अच्छे परिणाम मिलते हैं।
४)  नाशपती का फ़ल खूब खाएं। इसमें पाये जाने वाले रसायनिक तत्व से पित्ताषय के रोग दूर होते हैं। 
५)  विटामिन सी याने एस्कोर्बिक एसिड के प्रयोग से शरीर का इम्युन सिस्टम मजबूत बनता है।यह कोलेस्ट्रोल को पित्त में बदल देता है। ३-४ गोली नित्य लें।
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  2013 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, शरीर में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पथरी की समस्‍या कम करता है। एक लाल शिमला मिर्च में लगभग 95 मिलीग्राम विटामिन सी होता है, यह मात्रा पथरी को रोकने के लिए काफी होती है। इसलिए अपने आहार में शिमला मिर्च को शामिल करें। 
 ६)  पित्त पथरी रोगी भोजन में प्रचुर मात्रा में हरी सब्जीयां और फ़ल शामिल करें। ये कोलेस्ट्रोल रहित पदार्थ है।


) तली-गली,मसालेदार चीजों का परहेज जरुरी है।
 

8) शराब,चाय,काफ़ी एवं शकरयुक्त पेय हानिकारक है। 
९) एक बार में ज्यादा भोजन न करें। ज्यादा भोजन से अधिक मात्रा में कोलेस्ट्रोल निर्माण होगा जो हांनिकारक है।
१०) आयुर्वेद में उल्लेखित कतिपय औषधियां इस रोग में लाभदायक साबित हो सकती हैं।कुटकी चूर्ण,त्रिकटु चूर्ण,आरोग्य वर्धनी वटी,फ़लत्रिकादि चूर्ण,जैतुन का तैल ,नींबू का रस आदि औषधियां व्यवहार में लाई जाती हैं। ११)   सर्जरी  में  पित्त पथरी  नहीं निकाली जाती है  बल्कि  पूरे  पित्ताशय को ही  काटकर  निकाल दिया जाता है जिसके  दुष्परिणाम  रोगी को  जीवन भर  भुगतने  पड़ते हैं|  अत: जहां तक हो सके सर्जरी के बजाय औषधि से  चिकित्सा करना श्रेष्ठ  है| 
१२) पुदीने में टेरपेन नामक प्राकृतिक तत्‍व होता है, जो पित्त- पथरी को घुलाने के लिए जाना जाता है। यह पित्त प्रवाह और अन्य पाचक रस को उत्तेजित करता है, इसलिए यह पाचन में भी सहायक होता है। पित्त की पथरी के लिए घरेलू उपाय के रूप में पुदीने की चाय का इस्‍तेमाल करें।

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  विशिष्ट परामर्श-

सिर्फ हर्बल चिकित्सा ही पित्त पथरी में सफल परिणाम देती है| वैध्य श्री दामोदर की हर्बल औषधि बड़ी साईज़ की पित्ताशय की पथरी मे भी प्रभावी है| पथरी का भयंकर दर्द जो बड़े अस्पतालों मे महंगे इंजेक्शन  से भी काबू मे नहीं आता ,इस दवा की कुछेक खुराक देने से आराम लग जाता है|रोगी आपरेशन से बच जाता है|  दवा के लिए 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं|

शकरकंद के फायदे


शकरकंद को स्वीट पोटैटो के नाम से भी जाना जाता है और इसमें ऊर्जा का खजाना होता है. अक्सर लोग इसे आलू से जोड़कर देखते हैं लेकिन पोषक तत्वों और स्वास्थ्य के लिहाज से इसके कई फायदे हैं. 
 * शकरकंद या स्वीट पोटैटो का सेवन सर्दियों में लाभदायक होता है. सर्दियों में कंद-मूल अधिक फायदेमंद रहते हैं, क्योंकि ये शरीर को गर्म रखते हैं. शकरकंद की गहरे रंग की प्रजाति में कैरोटिनॉयड जैसे, बीटा-कैरोटीन और विटामिन ए अधिक मात्रा में पाया जाता है. 100 ग्राम शकरकंद में 400 फीसदी से अधिक विटामिन ए पाया जाता है.
 * शकरकंद में आयरन, फोलेट, कॉपर, मैगनीशियम, विटामिन्‍स आदि होते हैं, जिससे इम्‍यून सिस्‍टम मजबूत बनता है. इसको खाने से त्‍वचा में चमक आती है और चेहरे पर जल्‍दी झुर्रियां नहीं पड़ती. इसमें मौजूद विटामिन सी त्‍वचा में कोलाजिन का निर्माण करता है जिससे आप सदाबाहर जवां और खूबसूरत रहते हैं. 


* शकरकंद में भरपूर मात्रा में आयरन होता है. आयरन की कमी से हमारे शरीर में एनर्जी नहीं रहती, रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और ब्लड सेल्स का निर्माण भी ठीक से नहीं होता. शकरकंद आयरन की कमी को दूर करने में मददगार रहता है. 
* अगर आपको का ब्‍लड शुगर लेवल कुछ भी खाने से तुरंत ही बढ जाता है तो, शकरकंद खाना ज्‍यादा अच्‍छा होता है. इसे खाने से ब्‍लड शुगर हमेशा नियन्‍त्रित रहता है और इंसुलिन को बढने नहीं देता. 
 * शकरकंद पोटैशियम का एक बहुत अच्छा माध्यम है. यह नर्वस सिस्टम की सक्रियता को सही बनाए रखने के लिए आवश्यक है. साथ ही किडनी को भी स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है. 
* शकरकंद डायट्री फाइबर और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है. शकरकन्‍द खाने में मीठा होता है. इसके सेवन से खून बढ़ता है, शरीर मोटा होता है साथ ही यह कामशक्ति को भी बढ़ाता है. नारंगी रंग के शकरकंद में विटामिन ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है. शकरकंद में कैरोटीनॉयड नामक तत्व पाया जाता है जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है. वहीं इसमें मौजूद विटामिन बी6 डायबिटिक हार्ट डिजीज में भी फायदेमंद होता है .
* यह उच्च मात्रा वाला स्टार्च फूड है, जिसके 100 ग्राम में 90 कैलोरीज होती हैं. शकरकंद खाने में मीठा होता है. इसके सेवन से मोटापा, मधुमेह, हृदय रोगों और सम्पूर्ण तौर पर मृत्युकारक जोखिम कम होते हैं. यह आरोग्यवर्धक तथा ऊर्जा वर्धक होता है, पर वजन को कम करने में मददगार होता है. 
* शकरकंद विटामिन डी का एक बहुत अच्छा सोर्स है. यह विटामिन दांतों, हड्ड‍ियों, त्वचा और नसों की ग्रोथ और मजबूती के लिए आवश्यक होता है. शकरकंद विटामिन ए का बहुत अच्छा माध्यम है. इसके सेवन से शरीर की 90 प्रतिशत तक विटामिन ए की पूर्ति हो जाती है. 
* शकरकंद में कैलोरी और स्टार्च की सामान्य मात्रा होती है. वहीं, सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा इसमें न के बराबर रहती है. इसमें फाइबर, एंटी-ऑक्सीडेंट्स, विटामिन और लवण भरपूर पाए जाते हैं. 
* शकरकंद में भरपूर मात्रा में विटामिन बी6 पाया जाता है, जो शरीर में होमोसिस्टीन नाम के अमीनो एसिड के स्तर को कम करने में सहायक होता है. अगर इस अमीनो एसिड की मात्रा बढ़ने पर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है
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टेस्टोस्टेरोन बूस्‍टर(मर्दानगी बढ़ाने वाली) जड़ी-बूटियाँ


प्राकृतिक टेस्टोस्टेरोन बूस्टर जड़ी बूटियों का सेवन पुरुषों के लिए बेहद फायदेमंद होता हैं। टेस्‍टोस्‍टेरोन प्रमुख पुरुष सेक्‍स हार्मोन है लेकिन यह महिलाओं के लिए भी आवश्‍यक होता है। टेस्‍टोस्‍टेरोन की कमी किसी पुरुष को नपुंसकता के लक्षणों की ओर ले जा सकती है। लेकिन प्राकृतिक टेस्‍टोस्‍टेरोन बूस्‍टर जड़ी बूटी का उपयाग कर पुरुष इस समस्‍या से बच सकते हैं। आयुर्वेदिक टेस्‍टोस्‍टेरोन बूस्‍टर दवाओं का सेवन करने से किसी प्रकार के गंभीर दुष्‍प्रभाव भी नहीं होते हैं। आप टेस्‍टोस्‍टेरोन सप्‍लीमेंट के रूप में कुछ ऐसी जड़ी बूटीयों का उपयोग कर सकते हैं जिन्‍हें आप अपने दैनिक जीवन सामानय रूप से उपयोग करते हैं।

टेस्टोस्टेरोन आपके पेट को कम करने में मदद कर सकता है- हां, आपने सही पढ़ा! जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ता एड्रियन डॉब्स ने खुलासा किया है कि पुरुषों में पेट के मोटापे में कैसे कमी आई, जब उन्हें टेस्टोस्टेरोन दिया गया। जो महिलाएं अभी किसी रिश्ते या प्यार में हैं, वे शुरुआती महीनों में उन महिलाओं की तुलना में अधिक टेस्टोस्टेरोन का स्तर रखती हैं जो सिंगल हैं या दीर्घकालिक संबंध में हैं।

बहुत अधिक टेस्टोस्टेरोन अंडकोष को सिकोड़ सकता है- जो पुरुष प्रदर्शन बूस्टर और सिंथेटिक टेस्टोस्टेरोन लेते हैं वे सिकुड़े अंडकोष और बढ़ते हुए स्तनों से पीड़ित होने का जोखिम रखते हैं, लेकिन यह उनके मिजाज और मुँहासे को उत्पन्न नहीं करते हैं। मनी-मेकिंग टेस्टोस्टेरोन के स्तर को प्रभावित करता है– ब्रिटिश शोधकर्ताओं के अनुसार, युवा पुरुष अपने टेस्टोस्टेरोन के स्तर पर उन दिनों में बढ़ोत्री का अनुभव करते हैं, जहां वे अधिक लाभ कमाते हैं।

अतिरिक्त वसा टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम कर सकती है- विशेषज्ञों का मानना ​​है कि मोटे पुरुषों को पतले पुरुषों की तुलना में कम टेस्टोस्टेरोन के स्तर से पीड़ित होने की संभावना होती है; और इसका कारण वसा कोशिकाओं के साथ इन्फ्लामेंट्री कारकों की उपस्थिति है, जो टेस्टोस्टेरोन के संश्लेषण को दबाते हैं।



टेस्टोस्टेरोन बूस्टर के लाभ –  आयुर्वेदिक टेस्‍टोस्‍टेरोन बूस्‍टर उत्‍पादों का सेवन पुरुषों की यौन कमजोरी को दूर करने का सबसे अच्‍छा तरीका है। पुरुषों में यौन कमजोरी या नपुंसकता का प्रमुख कारण टेस्‍टोस्‍टेरोन की कमी होती है। यह एक प्रकार का सेक्स हार्मोन है। टेस्‍टोस्‍टेरोन की उचित स्‍तर पुरुषों के यौन स्‍वास्‍थ्‍य के साथ ही मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी अच्‍छा होता है। टेस्‍टोस्‍टेरोन सीधे तौर पर पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्‍या और गुणवत्‍ता दोनों को प्रभावित करता है। इसलिए शरीर में टेस्‍टोस्‍टेरोन के उचित स्‍तर को बनाए रखने के लिए विभिन्‍न प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन करने की सलाह दी जाती है।  

आयुर्वेदिक दवा गोखरू या गोक्षुर –  इस जड़ी बूटी को पंचर बेल भी कहा जाता है, टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के लिए सदियों से इसका उपयोग हो रहा है, विशेष रूप से चीन और भारत में, और माना जाता है कि यह टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ावा देता है। इस जड़ी बूटी का सेवन यौन इच्छा को बढ़ावा देने, खेल समारोह में सुधार और स्तंभन दोष का इलाज करने में मदद करने के लिए भी माना जाता है। जड़ी बूटी जो स्वाभाविक रूप से टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ाती है – यहां हमने उन सर्वश्रेष्ठ प्राकृतिक जड़ी बूटियों को सूचीबद्ध किया है जो स्वाभाविक रूप से टेस्टोस्टेरोन के स्तर में सुधार करती हैं।

आयुर्वेदिक टेस्‍टोस्‍टेरोन बूस्‍टर है चिया सीड्स – पुरुषों के लिए चिया बीज आयुर्वेदिक टेस्‍टोस्‍टरोन बूस्‍टर की तरह काम करता है। चिया के बीज साल्विया हिस्पानिका (Salvia Hispanica) के पौधे के बीज होते हैं। यह पौधा पुदीना के परिवार से संबंधित है। चिया बीज के पौधे मुख्‍य रूप से दक्षिण अमेरिका में पाये जात है। प्राचीन समय से ही आयुर्वेद में पौरूष शक्ति को बढ़ाने के लिए चिया बीज को औषधी के रूप में उपयोग किया जा रहा है। चिया बीज में ओमेगा -3 फैटी एसिड के साथ ही अन्य आवश्यक फैटी एसिड, और एंटी इंफ्लामेटरी गुण होते हैं। इसके अलावा चिया बीज में जस्ता में भी उच्च मात्रा में होता है। जिसके कारण यह पुरुषों के शरीर में टेस्‍टोस्‍टेरोन के स्‍तर को बढ़ाने में सहायक होता है। जिन पुरुषों को यौन कमजोरी का अनुभव होता है उन्‍हें सबसे पहले अपने डॉक्‍टर से निश्चित करना चाहिए कि उनके शरीर में टेस्‍टोस्‍टेरोन का उचित स्‍तर है या नहीं। यदि टेस्‍टोस्‍टेरोन के स्‍तर में कमी होती है तो आप आयुर्वेदिक उपचार के रूप में चिया बीज का नियमित सेवन कर सकते हैं।

टेस्‍टोस्‍टेरोन बढ़ाने की आयुर्वेदिक दवा प्‍याज –  हृदय स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने और वजन कम करने के अलावा भी प्‍याज के अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होते हैं। प्‍याज में बहुत से पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थों की उच्‍च मात्रा होती है साथ ही प्‍याज में एंटीऑक्‍सीडेंट भी भरपूर मात्रा में होते हैं। नियमित रूप से उपभोग करने पर प्‍याज टेस्‍टोस्‍टेरोन के निम्‍न स्‍तर को बढ़ाने में सहायक होते हैं। एक अध्‍ययन के अनुसार नियमित रूप से 4 सप्ताह तक प्‍याज के रस का सेवन करने से सीरम और कुल टेस्‍टोस्‍टेरोन के स्‍तर में वृद्धि करता है। यदि आप भी कम टेस्‍टोस्‍टेरोन संबंधी समस्‍या से जूझ रहे हैं तो प्‍याज के रस का सेवन कर सकते हैं।



टेस्‍टोस्‍टेरोन बूस्‍टर इन आयुर्वेद एवोकैडो –  अध्‍ययनों के अनुसार पुरुषों के यौन स्‍वास्‍थ्‍य में टेस्‍टोस्‍टेरोन का विशेष योदान होता है। आप टेस्‍टोस्‍टेरोन बूस्‍टर आहार के रूप में एवोकैडो का सेवन कर सकते हैं। एवोकैडो में न केवल स्‍वस्‍थ वसा होता है बल्कि विटामिन E भी उच्‍च मात्रा में होता है। विटामिन E टेस्‍टोस्‍टेरोन के स्‍तर को बढ़ाने में सहायक होता है। इसके अलावा नियमित रूप से एवोकैडो का सेवन शरीर में एस्‍ट्रोजन के स्‍तर को कम करने में भी सहायक होता है। जिससे पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्‍या और गुणवत्‍ता दोनों में सुधार होता है। जिन पुरुषों में प्रजनन क्षमता की कमी होती है उन्‍हें नियमित आधार पर एवोकैडो का सेवन करना चाहिए।

टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के आयुर्वेदिक उपाय बुलबिन नटालेंसिस –  दक्षिण अफ्रीका में उत्पन्न, इस जड़ी बूटी को स्वाभाविक रूप से टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने में आश्चर्यजनक रूप से प्रभावी पाया गया है। एक मानव अध्ययन ने यह पाया कि 25-50mg / kg खुराक के बीच इस जड़ी बूटी को जब लिया जाता है तो इसका एक प्रमुख टेस्टोस्टेरोन-बूस्टिंग प्रभाव हो सकता है।

टेस्‍टोस्‍टेरोन सप्‍लीमेंट है कद्दू के बीज –  बीटा-कैरोटीन और अन्‍य फाइटोन्‍यूट्रिएंट्स की उच्‍च मात्रा कद्दू के बीजों में होती है। इस कारण ही टेस्‍टोस्‍टेरोन बूस्‍टर खुराक के रूप में कद्दू के बीजों का सेवन‍ किया जाता है। आप भी टेस्‍टोस्‍टेरोन के स्‍तर को बढ़ाने के लिए अपने आहार में कद्दू के बीजों को शामिल कर सकते हैं। सेक्‍स हार्मोन के स्‍तर को बढ़ाने के लिए कद्दू के बीजों में जिंक भी मौजूद रहता है। इसके अलावा कद्दू के बीजों में सेरोटोनिन का उत्‍पादन बढ़ाने वाले अमीनो एसिड भी होते हैं। सेरोटोनिन के उचित स्तर होने से पुरुषों के शरीर में टेस्‍टोस्‍टेरोन के स्‍तर में वृद्धि होती है। यदि आपको या आपके साथी को यौन कमजोरी का अनुभव हो रहा है तो दैनिक आधार पर कुछ कद्दू के बीजों का सेवन करें। ऐसा करने से न केवल यौन प्रदर्शन में वृद्धि होगी बल्कि अन्‍य बहुत सी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को भी दूर किया जा सकता है।

टेस्‍टोस्‍टेरोन की कमी दूर करे जैतून तेल –  जैतून का तेल एक प्रमुख खाद्य तेल है जिसमें हृदय रोग, कैंसर और अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को रोकने की क्षमता होती है। जैतून के तेल में मोनोअनसैचुरेटेड वसा और विटामिन ई की अच्‍छी मात्रा होती है। साथ ही इसमें कई प्रकार के एंटीऑक्‍सीडेंट होते हैं जो शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव से बचाते हैं। इसके अलावा शुद्ध जैतून का तेल पुरुषों की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में भी सहायक होता है। एक अध्‍ययन के अनुसार नियमित रूप से जैतून के तेल का सेवन पुरुषों में सीरम टेस्‍टोस्‍टेरोन के स्‍तर को बढ़ा सकता है। जैतून के तेल का सेवन करने वाले लोगों में ल्‍यूटिनाइजिंग हार्मोन में वृद्धि करता है। जो कि टेस्‍टोस्‍टेरोन के उत्‍पादन को बढ़ाता है।

टेस्‍टोस्‍टेरोन बूस्‍टर खुराक है अश्वगंधा का सेवन –  अश्वगंधा को विथानिया सोम्निफेरा (Withania somnifera) के रूप में भी जाना जाता है। अश्वगंधा एक और जड़ी बूटी है जिसका उपयोग प्राचीन भारतीय चिकित्‍सा पद्धति में किया जाता है। अश्वगंधा का उपयोग मुख्‍य रूप से एक एडेपोजेन (adaptogen) के रूप में किया जाता है। जिसका मतलब यह है कि अश्वगंधा आपके तनाव, चिंता और थकान को कम करने में सहायक है। एक अध्‍ययन के अनुसार प्रजनन क्षमता में कमी वाले लोगों में नियमित रूप से अश्वगंधा का सेवन करने पर शुक्राणुओं की संख्‍या और क्षमता दोनों पर सकारात्‍मक प्रभाव होता है। ऐसे लोगों को नियमित रूप से 3 माह तक प्रतिदन 5 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण का सेवन करना चाहिए। ऐसा करने पर पुरुषों के शरीर में 10 से 22 प्रतिशत तक टेस्‍टोस्‍टेरोन के स्‍तर में वृद्धि हो सकती है।



टेस्टोस्टेरोन बूस्‍ट करने के आयुर्वेदिक उपाय अदरक –  सदियों से लोग आयुर्वेदिक उपचार के लिए अदरक का उपयोग कर रहे हैं। कच्‍चे अदरक का सेवन करने पर टेस्‍टोस्‍टेरोन के स्‍तर में वृद्धि हो सकती है। नियमित रूप से अदरक का सेवन पुरुषों की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में सहायक होता है। अध्‍ययनों से पता चलता है कि औषधीय मसाले के रूप में अदरक का उपयोग प्रजनन क्षमता में सुधार कर सकता है। 2012 में हुए एक अध्‍ययन के अनुसार 3 माह तक दैनिक आधार पर अदरक का सेवन करने से पुरुषों की प्रजनन क्षमता में 17.7 प्रतिशत तक वृद्धि होती है। पुरुषों की यौन शक्ति में वृद्धि टेस्‍टोस्‍टेरोन के स्‍तर के वृद्धि के रूप में होती है। यदि आप भी कम टेस्‍टोस्‍टेरोन की समस्‍या से परेशान हैं तो अदरक को कई प्रकार से अपने आहार में श‍ामिल कर लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।

टेस्टोस्टेरोन बूस्‍टर औषधी है शिलाजीत –  
प्राकृतिक रूप से टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। उच्च गुणवत्ता के शिलाजीत और निम्न गुणवत्ता के शिलाजीत में बहुत अंतर होता है। इसलिए आप अच्छे क्‍वालिटी के शिलाजीत का सेवन करें  यह टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने में मदद करता है।

टोस्‍टोस्‍टेरोन बढ़ाने के लिए अनार – अनार प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए सबसे अच्‍छी औषधी माना जाता है। अनार में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट तनाव में कमी करने और हृदय स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ाने में सहायक होते हैं। 2012 में हुए एक अध्‍ययन के अनुसार पुरुषों और महिलाओं में टेस्‍टोस्‍टेरोन के स्‍तर को बढ़ाने में अनार बहुत ही प्रभावी है। अध्‍ययन में 60 लोगों को नियमित रूप से 14 दिनों तक अनार का जूस पिलाया गया। साथ ही शोधकर्ताओं ने इन लोगों की लार में 3 बार टेस्‍टोसटेरोन की जांच की। अध्‍ययन से पता चला कि पर्याप्‍त मात्रा में अनार का जूस पीने के कारण पुरुषों और महिलाओं में लगभग 24 प्रतिशत तक टेस्‍टेस्‍टोरोन के स्‍तर में वृद्धि हुई। साथ ही उनके मूड और रक्‍तचाप में भी सुधार हुआ। इस तरह से अनार के रस का सेवन टेस्‍टोस्‍टेरोन के स्‍तर को बढ़ाने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है।

टेस्‍टोस्‍टेरोन बढ़ाने वाली जड़ी बूटी टोंगकट अली –  टोंगकट अली एक औषधीय जड़ी बूटी है जो मुख्‍य रूप से इंडोनेशिया, मलेशिय और थाईलैंड में पाई जाती है। इस जड़ी बूटी का अर्क इसकी जड़ से प्राप्‍त किया जाता है। इस अर्क में कामोद्दीपक गुण होते हैं जो प्रजनन क्षमता को बढ़ाने और नपुसंकता का इलाज करने में सहायक होते हैं। एक अध्‍ययन के अनुसार उम्र बढ़ने के कारण यौन इच्‍छा में कमी को दूर करने और सेक्‍स ड्राइव को बढ़ाने में यह औषधी मदद करती है। नियमित रूप से उपभोग करने पर यह शरीर में टेस्‍टोस्‍टेरोन बूस्‍टर का काम करती है जिससे यौन शक्ति में अप्रत्‍याशित वृद्धि होती है। इस जड़ी बूटी में पाए जाने वाले पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थ न केवल यौन प्रदर्शन बल्कि मांसपेशियों के विकास और स्‍वास्‍थ्‍य को भी बढ़ावा देने में सहायक होती है। आप टेस्‍टोस्‍टेरोन बूस्‍टर जड़ी बूटी के रूप में टोंगकट अली का उपयोग कर सकते हैं।

कलौंजी (प्याज के बीज) के गुण औषधीय उपयोग


                                                                   

1. इसे संस्कृत में कृष्णजीरा, उर्दू में كلونجى कलौंजी, बांग्ला में कालाजीरो, मलयालम में करीम जीराकम, रूसी में चेरनुक्षा, तुर्की में çörek otu कोरेक ओतु, फारसी में शोनीज, अरबी में हब्बत-उल-सौदा, हब्बा-अल-बराकाحبه البركة, तमिल में करून जीरागम और तेलुगु में नल्ला जीरा कारा कहते हैं. लेकिन ध्यान रखें काली जीरी अलग होती है.
2. इसका स्वाद हल्का कड़वा व तीखा और गंध तेज होती है. इसका प्रयोग विभिन्न व्यंजनों नान, ब्रेड, केक और अचारों में किया जाता है.
3. इसमें मौजूद थाइमोक्विनोन एक बढ़िया एंटी-आक्सीडेंट है, कैंसर रोधी, कीटाणु रोधी, फंगस रोधी है, यकृत का रक्षक है और असंतुलित प्रतिरक्षा प्रणाली को दुरूस्त करता है.

4. कलौंजी, शरीर से कैंसर कोशिकाओं का सफाया करती है और एंटी-बोडीज के निर्माण करने वाली कोशिकाओं की संख्या को बढ़ाती है.
5. यकृत की कोशिकाओं की रक्षा करती है और यकृत में एस.जी.ओ.टी व एस.जी.पी.टी. के स्राव को कम करती है.
6. कलौंजी में उपस्थित उड़नशील तेल रक्त में शर्करा की मात्रा को कम करते हैं.
7. कलौंजी दमा, अस्थिसंधि शोथ आदि रोगों में शोथ (इन्फ्लेमेशन) दूर करती है. , सूजन को कम कर दर्द निवारण करती हैं. कलौंजी में विद्यमान 'निजेलोन' कोशिकाओं में हिस्टेमीन का स्राव कम करते हैं तथा श्वास नली की मांसपेशियों को ढीला कर दमा के रोगी को राहत प्रदान करते हैं.

8. यह श्वास नली की मांसपेशियों को ढीला करती है, प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करती है और खांसी, दमा, ब्रोंकाईटिस आदि को ठीक करती है|
9. पेट के कीड़ों को मारने के लिए आधी छोटी चम्मच कलौंजी के तेल को एक बड़ी चम्मच सिरके के साथ दस दिन तक दिन में तीन बार पिलाते हैं. मीठे से परहेज जरूरी है.
10 एच.आई.वी./एड्स के रोगी को नियमित कलौंजी, लहसुन और शहद देने से शरीर की रक्षा करने वाली टी-4 और टी-8 लिंफेटिक कोशिकाओं की संख्या में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि होती है.
11. कलौंजी दुग्ध वर्धक और मूत्र वर्धक होती है. कलौंजी जुकाम ठीक करती है और कलौंजी का तेल गंजापन दूर करता है. कलौंजी के नियमित सेवन से पागल कुत्ते के काटे जाने पर भी लाभ होता है. लकवा, माइग्रेन, खांसी, बुखार, फेशियल पाल्सी के इलाज में यह फायदा पहुँचाती हैं. दूध के साथ लेने पर यह पीलिया में लाभदायक पाई गई है. यह बवासीर, पाइल्स, मोतिया बिंद की आरंभिक अवस्था, कान के दर्द व सफेद दाग में भी फायदेमंद है.

 अलग-अलग रोगोपचार में कलौंजी की प्रयोग विधियाँ:

12. कैंसर के उपचार में कलौंजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक गिलास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लें. लहसुन भी खूब खाएँ. 2 किलो गेहूँ और 1 किलो जौ के मिश्रित अनुपात से आटे की रोटी 40 दिन तक खिलाएँ. आलू, अरबी और बैंगन से परहेज़ करें.
13. अवसाद और सुस्ती की स्थिति में एक गिलास संतरे के रस में एक बड़ी चम्मच तेल डाल कर 10 दिन तक सेवन करें. बहुत फर्क महसूस होगा.
14. सफेद दाग और कुष्ठ रोग में 15 दिन तक रोज पहले सेब का सिरका मलें, फिर कलौंजी का तेल मलें.

15. पुरषों के गुप्तरोग जैसे स्वप्नदोष, स्तंभन दोष, पुरुषहीनता आदि रोगों में एक प्याला सेब के रस में आधा छोटी चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में दो बार 21 दिन तक पियें. थोड़ा सा तेल गुप्तांग पर रोज मलें. तेज मसालेदार चीजों से परहेज करें
16. मधुमेह में एक कप कलौंजी के बीज, एक कप राई, आधा कप अनार के छिलके और आधा कप पितपाप्र को पीसकर चूर्ण बना लें. इसकी आधी छोटी चम्मच कलौंजी के तेल के साथ रोज नाश्ते के पहले एक महीने तक लें.
17 .गुर्दे की पथरी और मूत्राशय की पथरी में पाव भर कलौंजी को महीन पीस कर पाव भर शहद में अच्छी तरह मिला कर रख दें. इस मिश्रण की दो बड़ी चम्मच को एक कप गर्म पानी में एक छोटी चम्मच तेल के साथ अच्छी तरह मिला कर रोज नाश्ते के पहले पियें.
18. उल्टी और उबकाई एक छोटी चम्मच कार्नेशन और एक बड़ी चम्मच तेल को उबले पुदीने के साथ दिन में तीन बार लें.
19. सुन्दर व आकर्षक चेहरे के लिए, एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक बड़ी चम्मच जैतून के तेल में मिलाकर चेहरे पर मलें और एक घंटे बाद चेहरे को धो लें. कुछ ही दिनों में आपका चेहरा चमक उठेगा. एक बड़ी चम्मच तेल को एक बड़ी चम्मच शहद के साथ रोज सुबह लें, आप तंदुरूस्त रहेंगे और कभी बीमार नहीं होंगे

20. हृदयरोग, रक्तचाप और हृदय की धमनियों के अवरोध की स्थिति में जब भी कोई गर्म पेय लें, उसमें एक छोटी चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर लें, साथ ही रोज सुबह लहसुन की दो कलियाँ नाश्ते के पहले लें और तीन दिन में एक बार पूरे शरीर पर कलौंजी के तेल की मालिश करके आधा घंटा धूप का सेवन करें. यह उपचार एक महीने तक लें.
21. कमर दर्द और गठिया में कलौंजी के तेल को हल्का गर्म करके जहाँ दर्द हो वहाँ मालिश करें और एक बड़ी चम्मच तेल दिन में तीन बार लें. 15 दिन में बहुत आराम मिलेगा.
22. सर में रूसी हो तो 10 ग्राम कलौंजी का तेल, 30 ग्राम जैतून का तेल और 30 ग्राम पिसी मेंहदी को मिलाकर गर्म करें. ठंडा होने पर बालों में लगाएँ और एक घंटे बाद बालों को धोकर शैंपू कर लें.
23. सिरदर्द में माथे और सिर के दोनों तरफ कनपटी के आस-पास कलौंजी का तेल लगायें और नाश्ते के पहले एक चम्मच तेल तीन बार लें कुछ सप्ताह बाद सिरदर्द पूर्णतः खत्म हो जायेगा.
24. अम्लता और आमाशय शोथ में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल एक प्याला दूध में मिलाकर रोज पाँच दिन तक सेवन करने से आमाशय की सब तकलीफें दूर हो जाती है.
25. नेत्र रोग में रोज सोने के पहले पलकों ओर आँखो के आस-पास कलौंजी का तेल लगायें और एक बड़ी चम्मच तेल को एक प्याला गाजर के रस के साथ एक महीने तक लें.
26. दस्त या पेचिश में एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक चम्मच दही के साथ दिन में तीन बार लें तुरंत लाभ मिटा है.

27. मानसिक तनाव एक चाय की प्याली में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल डालकर लेने से मन शांत हो जाता है और तनाव के सारे लक्षण ठीक हो जाते हैं.
28. खाँसी व दमा में छाती और पीठ पर कलौंजी के तेल की मालिश करें, तीन बड़ी चम्मच तेल रोज पिएँ और पानी में तेल डाल कर उसकी भाप लें.
29. बाल झड़ते हों तो बालों में नीबू का रस अच्छी तरह लगाएँ, 15 मिनट बाद बालों को शैंपू कर लें व अच्छी तरह धोकर सुखा लें, सूखे बालों में कलौंजी का तेल लगायें एक सप्ताह के उपचार के बाद बालों का झड़ना बन्द हो जायेगा.
30. स्त्रियों के गुप्त रोगों ( जैसे श्वेत प्रदर, रक्त प्रदर, प्रसवोपरांत दुर्बलता व रक्त स्त्राव आदि) के लिए कलौंजी अत्यंत गुणकारी है. थोड़े से पुदीने की पत्तियों को दो गिलास पानी में डालकर उबालें व इसमें आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर दिन में दो बार पियें. बैगन, अचार, अंडा, मछली आदि मांसाहार से परहेज रखें.
31. स्मरणशक्ति और मानसिक चेतना के लिए एक छोटी चम्मच तेल 100 ग्राम उबले हुए पुदीने के साथ सेवन करें.


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि


किडनी फेल होने की सफल हर्बल चिकित्सा



हमारी दोनों किडनियां एक मिनट में 125 मिलिलीटर रक्त का शोधन करती हैं। ये शरीर से दूषित पदार्थो को भी बाहर निकालती हैं। इस अंग की क्रिया बाधित होने पर विषैले पदार्थ बाहर नहीं आ पाते और स्थिति जानलेवा होने लगती है जिसे गुर्दो का फेल होना (किडनी फेल्योर) कहते हैं। इस समस्या के दो कारण हैं, एक्यूट किडनी फेल्योर व क्रॉनिक किडनी फेल्योर।

क्रॉनिक किडनी फेल्योर

शुरूआत में इस रोग के लक्षण स्पष्ट नहीं होते लेकिन धीरे-धीरे थकान, सुस्ती व सिरदर्द आदि होने लगते हैं। कई मरीजों में पैर व मांसपेशियों में खिंचाव, हाथ-पैरों में सुन्नता और दर्द होता है। उल्टी, जी-मिचलाना व मुंह का स्वाद खराब होना इसके प्रमुख लक्षण हैं।

कारण : 

ग्लोमेरूनेफ्रायटिस, इस रोग में किडनी की छनन-यूनिट (नेफ्रॉन्स) में सूजन आ जाती है और ये नष्ट हो जाती है। डायबिटीज व उच्च रक्तचाप से भी किडनी प्रभावित होती है। पॉलीसिस्टिक किडनी यानी गांठें होना, चोट, क्रॉनिक डिजीज, किडनी में सूजन व संक्रमण, एक किडनी शरीर से निकाल देना, हार्ट अटैक, शरीर के किसी अन्य अंग की प्रक्रिया में बाधा, डिहाइड्रेशन या प्रेग्नेंसी की अन्य गड़बडियां।

स्नायु संस्थान की कमज़ोरी  के नुस्खे

एक्यूट किडनी फेल्योर

पेशाब कम आना, शरीर विशेषकर चेहरे पर सूजन, त्वचा में खुजली, वजन बढ़ना, उल्टी व सांस से दुर्गध आने जैसे लक्षण हो सकते हैं।

कारण: 

किडनी में संक्रमण, चोट, गर्भवती में टॉक्सीमिया (रक्त में दूषित पदार्थो का बढ़ना) व शरीर में पानी की कमी।

आयुर्वेद में इलाज

आयुर्वेद में दोनों किडनियों, मूत्रवाहिनियों और मूत्राशय इत्यादि अवयवों को मूत्रवह स्रोत का नाम दिया गया है। पेशाब की इच्छा होने पर भी मूत्र त्याग नहीं करना और खानपान जारी रखना व किडनी में चोट लगना जैसे रोगों को आयुर्वेद में मूत्रक्षय एवं मूत्राघात नाम से जाना जाता है।
आयुर्वेदिक ग्रंथ "माधव निदान" के अनुसार रूक्ष प्रकृति व विभिन्न रोगों से कमजोर हुए व्यक्ति के मूत्रवह में पित्त और वायु दोष होकर मूत्र का क्षय कर देते हैं जिससे रोगी को पीड़ा व जलन होने लगती है, यही रोग मूत्रक्षय है। इसमें मूत्र बनना कम या बंद हो जाता है।

उपाय : 

तनाव न लें। नियमित अनुलोम-विलोम व प्राणायाम का अभ्यास करें।

आँव रोग (पेचिश) के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार

ब्लड प्रेशर

ब्लड प्रेशर बढ़ने पर नमक, इमली, अमचूर, लस्सी, चाय, कॉफी, तली-भुनी चीजें, गरिष्ठ आहार, अत्यधिक परिश्रम, अधिक मात्रा में कसैले खाद्य-पदार्थ खाने, धूप में रहने और चिंता से बचें। काला नमक खाएं, इससे रक्त संचार में अवरोध दूर होता है।

किडनी

किडनी खराब हो तो ऎसे खाद्य-पदार्थ न खाएं, जिनमें नमक व फॉस्फोरस की मात्रा कम हो। पोटेशियम की मात्रा भी नियंत्रित होनी चाहिए। ऎसे में केला फायदेमंद होता है। इसमें कम मात्रा में प्रोटीन होता है। तरल चीजें सीमित मात्रा में ही लें। उबली सब्जियां खाएं व मिर्च-मसालों से परहेज करें।

औषधियां

आयुर्वेदिक औषधियों पुनर्नवा मंडूर, गोक्षुरादी गुग्गुलु, चंद्रप्रभावटी, श्वेत पर्पटी, गिलोय सत्व, मुक्ता पिष्टी, मुक्तापंचामृत रस, वायविडंग इत्यादि का सेवन विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें। नियमित रूप से एलोवेरा, ज्वारे व गिलोय का जूस पीने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है।

संधिवात (आर्थराईटिज)  के घरेलू,आयुर्वेदिक उपाय

डाइट कैसी हो
गाजर, तुरई, टिंडे, ककड़ी, अंगूर, तरबूज, अनानास, नारियल पानी, गन्ने का रस व सेब खाएं लेकिन डायबिटीज है तो गन्ने का रस न पिएं। इन चीजों से पेशाब खुलकर आता है। मौसमी, संतरा, किन्नू, कीवी, खरबूजा, आंवला और पपीते खा सकते हैं। रात को तांबे के बर्तन में रखा पानी सुबह पिएं।

सिरम क्रेटनीन व यूरिक एसिड बढ़ने पर

रोगी प्रोटीन युक्त पदार्थ जैसे मांस, सूखे हुए मटर, हरे मटर, फै्रंचबीन, बैंगन, मसूर, उड़द, चना, बेसन, अरबी, कुलथी की दाल, राजमा, कांजी व शराब आदि से परहेज करें। नमक, सेंधा नमक, टमाटर, कालीमिर्च व नींबू का प्रयोग कम से कम करें।
इस रोग में चैरी, अनानास व आलू खाना लाभकारी होता है।
लोक कहावत में सेहत का सार
एक लोक-कहावत के अनुसार- "खाइ के मूतै सोवे बाम। कबहुं ना बैद बुलावै गाम" यानी भोजन करने के बाद जो व्यक्ति मूत्र-त्याग करता है व बायीं करवट सोता है, वह हमेशा स्वस्थ रहता है और वैद्यों या डॉक्टरों की शरण में जाने से बचता है।

 विशिष्ट सलाह-    
बढे हुए क्रिएटनिन के लेविल को नीचे लाने और गुर्दे की क्षमता  बढ़ाने  में हर्बल औषधि सर्वाधिक सफल होती हैं| वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है| दुर्लभ जड़ी-बूटियों से निर्मित यह औषधि कितनी आश्चर्यजनक रूप से फलदायी है ,इसकी एक केस रिपोर्ट पाठकों की सेवा मे प्रस्तुत कर रहा हूँ -





रोगी का नाम -     राजेन्द्र द्विवेदी  
पता-मुन्नालाल मिल्स स्टोर ,नगर निगम के सामने वेंकेट रोड रीवा मध्यप्रदेश 
इलाज से पूर्व की जांच रिपोर्ट -
जांच रिपोर्ट  दिनांक- 2/9/2017 
ब्लड यूरिया-   181.9/ mg/dl
S.Creatinine -  10.9mg/dl












हर्बल औषधि प्रारंभ करने के 12 दिन बाद 
जांच रिपोर्ट  दिनांक - 14/9/2017 
ब्लड यूरिया -     31mg/dl
S.Creatinine  1.6mg/dl












लंबाई (height) बढ़ाने के प्रभावी उपचार

लम्बाई कैसे बढ़ाएं

स्त्री हो या पुरुष, अच्छी हाइट दोनो की सुंदरता और व्यक्तित्व में निखार लाती है। क्योंकि लम्बाई जीन्स पर निर्भर करती है, इसलिए कुछ लोग सोचते हैं कि लम्बाई बढ़ा पाना मुमकिन नहीं होता। लेकिन आपको यह जानकर खुशी होगी कि कुछ ऐसे प्रकृतिक तरीके हैं जिनको अपनाकर आप अपनी लम्बाई बढ़ा सकते हैं।
हमारे शरीर में लंबाई बढ़ाने का सबसे बड़ा योगदान होता है ह्यूमन ग्रोथ हॉरमोन का यानी की एचजीएच। एचजीएच पिटूइटेरी ग्लैंलड से निकलता है जिससे हमारी हाइट बढ़ती है। सही प्रोटीन और न्यूटिशन न मिलने के कारण शरीर का विकास होना बंद या कम हो जाता है। और अगर आप शरीर का सही विकास करना चाहते हैं तो खान-पान का पूरा ध्यान रखना शुरु कर दें। आजकल कोल्ड ड्रिंक्स पीना फैशन बन गया है, लेकिन यह सेहत के लिहाज से सही नहीं है। बर्गर, नूडल्स, पिज्जा खाने से भी हाइट नहीं बढ़ती। दूध, दही, पनीर, मक्खन, दालें खाने से हाइट बढ़ती है। प्रोटीन दूध, दही, अंडे में खूब होता है। विटामिन, मिनरल्स के लिए फल खाओ, जूस पियो और हरी सब्जी, दालें खाना मत भूलना। आइए हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे पोषक तत्व जिनका उपयोग कर के आप अपनी रुकी हुई हाइट को बढ़ा सकते हैं।

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 

 खाएं, हाइट बढ़ाएं

कैल्शियम- 


कैल्शियम शरीर के लिए एक आवश्यक खनिज है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है। कैल्शियम हमें दूध, चीज़, दही आदि में मिलता है। ऊंचा लंबा कद पाने के लिए कैल्शियम बेहद जरूरी है। *मिनरल- खनिज हड्डी के ऊतकों का निर्माण करता है। ये हड्डी के विकास और शरीर में रक्त के प्रवाह में सुधार करते हैं। अगर आपको अपनी लंबाई बढ़ानी है तो खनिज से भरपूर तत्वों का इस्तेमाल करें। यह पालक, हरी बीन्स, फलियां, ब्रोकोली, गोभी, कद्दू, गाजर, दाल, मूंगफली, केले, अंगूर और आड़ू में पाया जाता है।

दालचीनी के अद्भुत फायदे

*सुबह व्यायाम करें। व्यायाम में ताड़ासन करना सर्वोत्तम है। ताड़ासन– दोनों हाथ उपर करके सीधे खड़े हो जायें, दीर्घ श्वास लें, हाथ ऊपर धीरे-धीरे उठाते जायें और साथ-साथ पैर की एडियां भी उठती रहे। पूरी एड़ी उठाने के बाद शरीर को पूरी तरह से तान दें और दीर्घ श्वास लें। इससे फेफडे़ फैलते हैं और स्वच्छ वायु मिलती भी है। ताड़ासन करने से स्नायु सक्रिय होकर विस्तृत होते हैं। इसी कारण यह कद बढ़ाने में सहायक साबित होता है।*विटामिन डी- लंबाई बढ़ाने के लिए जिस विटामिन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है उनमें से एक है व‍िटामिन डी। अच्छी तरह से कैल्शियम को हड्डी में अवशोषित करने के लिए, हड्डी के विकास के लिए और प्रतिरक्षा प्रणाली के बेहतर कार्य करने के लिए आपको विटामिन डी की जरूरत होती है जो मछली, दाल, अंडा, टोफू, सोया मिल्कर, सोया बीन, मशरूम और बादाम आदि में पाया जाता है।


प्रोटीन- 

प्रोटीन रिच फूड न केवल हेल्थी होते हैं बल्कि आपकी हाईट भी बढ़ाते हैं। यह शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत करते हैं। अमीनो एसिड से भरपूर पदार्थ शरीर को सही ग्रोथ और बेहतर कार्य करने की क्षमता प्रदान करते हैं। कुछ आहार जिनमें प्रोटीन पाए जाते हैं वह हैं- मछली, दूध, चीज़, बींस, मीट, मूगंफली, दालें और चिकन आदि।
*शरीर में लंबाई बढ़ाने का सबसे बड़ा योगदान होता है ह्यूमन ग्रोथ हॉरमोन का यानी की एचजीएच। एचजीएच पिटूइटेरी ग्लैंड से निकलता है जिससे हाइट बढ़ती है। सही प्रोटीन और न्यूटिशन न मिलने के कारण शरीर का विकास होना बंद या कम हो जाता है। और अगर आप शरीर का सही विकास करना चाहते हैं तो खान-पान का पूरा ध्यान रखना शुरु कर दें।



शुक्राणुओ में वृद्धि करने के रामबाण उपाय



* कद बढ़ाने के लिये सूखी नागौरी अश्वगंधा की जड़ को कूटकर बारीक कर चूर्ण बना लें। बराबर मात्रा में खांड मिलाकर किसी टाईट ढक्कन वाली कांच की शीशी में रखें। इसे रात सोते समय रोज दो चम्मच गाय के दूध के साथ लें। इससे दुबले व्यक्ति भी मोटे हो जायेंगे। कम कद वाले लोग लंम्बे हो सकते हैं। इससे नया नाखून भी बनना शुरू होता है। इस चूर्ण का सेवन करने से कमजोर व्यक्ति अपने अंदर स्फूर्ति महसूस करने लगता है। इस चूर्ण को लगातार 40 दिन तक लेते रहें। इस चूर्ण को शीतकाल में लेने  
* 1 से 2 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण, 1 से 2 ग्राम काले तिल, 3 से 5 खजूर को 5 से 20 ग्राम गाय के घी में एक महीने तक खाने से लाभ होता है। साथ में पादपश्चिमोत्तानासन, 'पुल्ल-अप्स' करने से एवं हाथ से शरीर झुलाने से ऊँचाई बढ़ती है।

शीघ्रपतन का होमियोपैथिक इलाज


**विटामिन ए- शरीर के अंगों के सही प्रकार से कार्य करें इसके लिए आपको विटामिन ए से भरा हुआ आहार अपने रोजाना आहार में शामिल करना चाहिए। इससे हड्डियां मजबूत रहेंगी और साथ ही लम्बाई भी बढ़ेगी। तो विटामिन ए का सेवन जरूर करें। पालक, चुकदंर, गाजर, चिकन, दूध, टमाटर आदि के अलावा सब्जियों के जूस का भी सेवन करें।
*बच्चों को अपने हाथ तथा पैरों के बल झूलने तथा दौड़ने जैसी कसरतों के अलावा भोजन में प्रोटीन, कैल्शियम तथा विटामिनों की जरूरत बहुत आवश्यक है तथा पौष्टिक भोजन करने से लम्बाई बढ़ने में फायदा मिलता है।

पथरी की अचूक हर्बल औषधि से डाक्टर की बोलती बंद!

यदि आप अपनी हाइट को थोड़ा बढ़ाना चाहते हैं तो कुछ सब्जियां इसमें बड़ी सहायक बन सकती है। ये सब्जियां हार्मोन को बैलेन्स करती हैं। आइए, आज जानते हैं कुछ ऐसी सब्जियों के बारे में जिन्हें खाने से हाइट बढ़ने लगती है।

शलजम-शलजम एक ऐसी सब्जी है, जिसे भोजन में नियमित शामिल करने से हार्मोन संतुलित रहते हैं और हाइट बढ़ने लगती है। शलजम मुख्य रूप से शीतोष्ण क्षेत्र में पैदा होता है और यह पूरे विश्व में पाया जाता है। शलजम में भरपूर मात्रा में मिनरल्स, प्रोटीन, फाइबर्स व कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं। शलजम को आप सलाद के रूप में या किसी सब्जी में मिलाकर रोजाना उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, इसका जूस भी लिया जा सकता है।


गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

*इसके अलावा कुछ छोटी-छोटी मगर मोटी बातें है जिनको अपनाकर भी आप अपनी हाईट बढ़ा सकते है, जैसे- सही तरीके से बैठें और चलें। कभी भी झुककर बैठना और चलना नहीं चाहिए। चलते और बैठते समय अपनी कमर को सीधा रखें। समय पर सोएं। देर रात तक जागना नहीं चाहिए। रात 10 बजे तक सो जाएं और सुबह उठकर थोड़ा-सा व्यायाम करें, अच्छा रहेगा।

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गोंद खाने के अनुपम औषधीय फायदे



1.यदि आप हमेशा के लिए अपने आप को जवान दिखना चाहते हैं तो आपको एक गिलास दूध में गोंद और मिश्री डालकर रोज रात को ये वाला दूध पीना चाहिए इससे आपकी शारीरिक कमजोरी जल्द खत्म होगी।
2.नियमित रूप से गोंद का सेवन करने से आपके शरीर में तेजी से ऊर्जा आनी शुरू होगी। गोंद खाने से पुरूषों को भी कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ होंगे।
3.यदि किसी व्यक्ति को ब्लड प्रेशर की परेशानी है तो उसे पानी में गोंद और मिश्री मिलाकर इसका घोल बनाकर पी लेना चाहिए इससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।

4.गोंद खाने से कमर दर्द होने वाले लोगों को राहत मिलता है। आपको करना सिर्फ ये है कि आप बबूल की छाल और गोंद को पीसकर दिन में करीब तीन बार इसका पानी के साथ सेवन जरूर करें जल्द ही लाभ मिलेगा।


5.अगर आप भी शुगर से ग्रस्त हैं तो आप गोंद के चूर्ण में गाय का दूध मिलाकर रोज इसका सेवन करें। इससे आपका शुगर कंट्रोल रहेगा।
6.गोंद खाने से पति और पत्नी दोनों को ही अपनी शादीशुदा जिंदगी में लाभ मिलता है क्योंकि गोंद शरीर में ऊर्जा बढ़ती है इसलिए गोंद खाना कई मायानों में लाभकारी माना जाता है।
7.यदि आपको हाथ-पैरों में जलन की परेशानी रहती है या फिर शरीर में कंपन सा महसूस होता है तो 2 चम्मच गोंद कतीरा को 1 गिलास पानी में रात को सोने से पहले मिलाकर पी लें।
8.गर्मी की वजह से चक्कर आना या उल्टी माइग्रेन का दर्द हो तो आप गोंद खा ले। इससे आपको जल्द ही फायदा होगा। इसके लिए आप आधा गिलास दूध में गोंद कूटकर डालें और मिश्री डालकर इसका सेवन करें।
9.गोंद को खाने से शरीर में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और फॉलिकी एसिड प्रदान होता है। गोंद खाने से आप अपने शरीर में खून को गाढ़ा कर सकते हैं साथ ही इससे खून की कमी भी नहीं होती है।
10.अगर आपको टांसिल की परेशानी है तो आप गोंद और मिश्री का शरबत बनाकर इसका प्रयोग करें। ऐसा करने से गले में हो रहे हर प्रकार के रोग से लाभ मिलता है।


पित्त पथरी (gallstone) के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार 

किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि





वात रोग- जोड़ों का दर्द, गठिया, कमर दर्द, यूरिक एसिड का बढ़ना के आयुर्वेदिक उपचार


                                                         

वात रोग को दूर करने के उपाय 

 शरीर की अधिकतर बीमारियाँ बात असंतुलन के कारण पैदा होती हैं, बल्कि वात असंतुलन के बगैर पित्त और कफ भी असंतुलित नहीं हो सकते। जिस तरह से हवा के कारण बाहरी दुनिया में संचार संभव होता है, कुछ उसी तरह से वात के कारण ही शरीर के भीतर सभी तत्वों का आपस में जुडाव संभव होता है।
हवा की तरह ही वात का भी एक प्रमुख लक्षण है- गति। शरीर की सभी गतियों का संचालक वात ही है। शरीर के किसी अंग की गति में अवरोध हो तो समझना चाहिए कि वात असंतुलित हो रहा है। मसलन, हृदय का काम है रक्त संचार बनाए रखने के लिए धड़कते रहना। यदि हृदय की धड़कन में गड़बड़ी आ जाए तो इसका अर्थ है कि वात बढ़ रहा है। यदि कोई व्यक्ति चाहकर भी शांत नहीं रह सकता तो समझिए कि वह बात असंतुलन का शिकार है। जिसे अपनी ऊर्जा पर नियंत्रण नहीं है, वह वात रोगी होगा ही। इसी तरह शरीर की गतियों से संबंधित लकवा, पाकिंसन, अकड़न जैसे रोग बढ़े हुए वात के ही परिणाम हैं। यही कारण है कि सभी तरह की मानसिक व्याधियों में बिगड़े हुए वात का हाथ भी कुछ-न-कुछ जरूर दिखाई देता है। वात रोग में मुख्यतः जोड़ों का दर्द, गठिया, कमर दर्द, यूरिक एसिड का बढ़ना, खुश्की तथा रूखापन, शरीर में जकड़न तथा दर्द, सिर में भारीपन, पेट फूलने, गठिया, लकवा आदि शरीरिक कठिनाई आती है आज हम आपको वात रोग निवारण के लिए बहुत ही सरल और उपयोगी घरेलु उपचार बता रहे हैं
वात रोग निवारण के उपाय
*सोंठ चूर्ण आधा चम्मच, जावित्री आधा चम्मच को ग्वारपाठा के 10 ग्राम गूदे के साथ खाने से वात रोग 2 महीनो में ठीक हो जाता है।
*दानामेथी 2 चम्मच, एलोवेरा का रस 4 चम्मच को मिलाकर पीने से सभी वात रोग ठीक हो जाते हैं।
*गेहूँ की रोटी में एलोवेरा का गूदा मिलाकर प्रात:काल 1 बासी रोटी बिना चुपड़ी खाने से पेट की वायु एवं वात रोग शीघ्र शांत होने लगते हैं।
*वात रोग निवारण के लिए दानामेथी चूर्ण 100 ग्राम, सोंठ 50 ग्राम, देशी घी 100 ग्राम तथा पीपल, काली मिर्च, धनिया, पीपरामूल, दालचीनी और नागरमोथा सबका चूर्ण 10-10 ग्राम लें। सभी चीजों को कूट-पीसकर 200 ग्राम ग्वारपाठा का गूदा लेकर मिलाकर गरम करें। अब इनको देशी घी में भून लें। ठण्डा हो जाने पर 20-20 ग्राम के लड्डू बना लें। रोजाना 1 लड्डू खाएँ तो शरीर में सूजन, वात रोग, वात विकार, पेट की गैस आदि रोग जड़ सहित मिट जाते हैं।
*10 ग्राम चोपचीनी, 2 ग्राम पीपरामूल और 10 ग्राम एलोवेरा का गूदा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से वात रोग तथा विकार शांत हो जाते हैं।

वात रोग की वजह से होने वाले गठिया और जोड़ो के दर्द का उपचार

*एलोवेरा के गूदे को गरम करके जोड़ों पर मालिश करने से गठिया रोग में आराम मिलता है।
*अजमोदादि चूर्ण को 4 चम्मच एलोवेरा के रस के साथ खाने से गठिया रोग 2 सप्ताह में चला जाता है।
एक गिलास पानी में 20 ग्राम आंवले को उबालकर उसमें एलोवेरा का 10 ग्राम गूदा मिलाकर दिन मे 3-4 बार 4-4 चम्मच लें तो वात रोग के कारण होने वाली जोड़ों की सूजन मिट जाती है।
*पीपल के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर एलोवेरा का गूदा मिला लें। इस तैयार पानी को ठण्डा करके पीने से गठिया आदि रोग ठीक जाते हैं।
*4 नग बादाम को 4 चम्मच एलोवेरा के रस के साथ पीसकर गरम करके खाने से पक्षाघात वाले अंगों में शक्ति उत्पन्न हो जाती है।
*करेले का रस 2 चम्मच और एलोवेरा का रस आधा कप 10 दिनों तक सुबह शाम खाने से वात रोग के कारण होने वाला हड्डी दर्द ठीक हो जाता है।
*10 ग्राम गुग्गुल को एलोवेरा के रस के साथ सेवन करने से जोड़ों का दर्द मिट जाता है।
*दानामेथी का चूर्ण 1 चम्मच, एलोवेरा के रस के साथ सुबह-शाम लेने से जोड़ों की बीमारियाँ, घुटनों का दर्द मिट जाता है।
*खाने के साथ बच का चूर्ण 1 चम्मच प्रतिदिन एलोवेरा के ताजे रस के साथ सेवन करने से वात व्याधि, जोड़ों का दर्द, घुटनों की पीड़ा शांत हो जाती है।

 वात रोग की वजह से होने वाले कमर दर्द का उपचार

*सोंठ चूर्ण आधा चम्मच, तुलसी के बीजों का रस आधा चम्मच, एलोवेरा का रस 2 चम्मच मिलाकर काढ़ा बनाकर सेवन करने से कमर सम्बन्धी रोगों में आराम होता है।
*सहिजन की फलियों का रस 2 चम्मच, एलोवेरा का गूदा 10 ग्राम मिलाकर लें तो कमर का दर्द ठीक हो जाता है।
*राई 10 ग्राम, एलोवेरा का गूदा 50 ग्राम मिलाकर कमर पर गरम-गरम लेप करने से कमर दर्द एक बार में आधा चला जाता है।
*असगंध चूर्ण 1 चम्मच, सोंठ आधा चम्मच और एलोवेरा का गूदा 4 चम्मच मिलाकर खाने से कमर दर्द, स्लिप डिस्क, चणक, नस का दर्द एवं सायटिका रोग मिट जाता है।
*अजवायन को एलोवेरा के गूदे में भरकर 2 सप्ताह तक धूप में सुखाकर रखें और इस तैयार चूर्ण में से 1 चम्मच को 4 चम्मच एलोवेरा के रस के साथ लें तो वात रोग के कारण होने वाले कमर का दर्द ठीक हो जाता है।

वात रोग से होने वाली सूजन का उपचार

*शरीर में सूजन आ जाने पर मुलतानी या चिकनी मिट्टी में एलोवेरा का गूदा मिलाकर लेप करें तो सूजन ठीक हो जाती है।
*त्रिफला चूर्ण 1 चम्मच, एलोवेरा का रस चौथाई कप मिलाकर रात को सोते समय सेवन करें तो वात रोग, वात विकार और लकवा शीघ्र ठीक हो जाते हैं।
*फिटकरी 1 चम्मच और एलोवेरा का गूदा 10 ग्राम को हल्का गरम करके इसका लेप करें तो सूजन वाले अंग की सूजन मिट जाती है।*वात रोग या वात बिगड़ने से शरीर में सूजन आ जाने पर एलोवेरा का रस 2 चम्मच, हल्दी 1 चम्मच और चूना आधा चम्मच मिलाकर लेप करें तो लाभ हो जाता है।
*रात को सोते समय एलोवेरा के गूदे से तलवों पर मालिश करने से शरीर की वात संतुलित रहता है और पैरों का सुनपन भी ठीक हो जाता है।

लकवा पक्षाघात के लिए नुस्खे

*अंजीर 2 नग, एलोवेरा का रस 4 चम्मच, सोंठ आधा चम्मच और काली मिर्च चौथाई चम्मच मिलाकर खाने से 2 सप्ताह में लकवा ठीक हो जाता है।
*एलोवेरा का रस 50 ग्राम और तिल्ली का तेल 100 ग्राम मिलाकर उबाल लें एवं तेल तैयार होने पर मालिश करें तो वात रोग के कारण होने वाले लकवे में आराम मिलता है।

*लहसुन की 2-3 कलियाँ छिलकर एलोवेरा के गूदे के रस के साथ खाने से पक्षाघात 2 माह में ठीक हो जाता है।
*शहद 4 चम्मच, एलोवेरा का रस 4 चम्मच मिलाकर प्रात:काल बासी मुँह खाने से लकवा ठीक हो जाता है।
*1 चम्मच सर्पगंधा का चूर्ण को 10 ग्राम एलोवेरा के गूदे के साथ सेवन करने से पक्षाघात ठीक हो जाता है तथा उच्च रक्तचाप शांत हो जाता है।
*चौलाई के पत्तों का रस 2 चम्मच, एलोवेरा का गूदा 20 ग्राम और अदरक का रस 1 चम्मच मिलाकर गरम करके पीने से जोड़ों में मजबूती आती है एव दर्द मिट जाता है।
*एलोवेरा को पत्तों सहित उबालकर उसकी भाप से रोगी के लकवे वाले हिस्से की सिकाई करने से दो सप्ताह में अंगों में फड़कन, चलन शुरू हो जाती है।

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दर्द दूर करने के आयुर्वेदिक तरीके



आयुर्वेद में दर्द का इलाज 

आयुर्वेद में दर्द के इलाज में खान-पान पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। खाने में कोई भी गरिष्ठ चीज जैसे कि बैंगन, आलू, उड़द दाल सहित सभी साबुत दालें, ठंडी चीजें मना होती हैं। दर्द के हिसाब से पंचकर्म, पोटली मसाज आदि दी जाती है।
- अगर मरीज सर्वाइकल से पीड़ित है तो उसे ग्रीवा वस्ती थेरपी से ठीक किया जाता है जिसमें उड़द और गेहूं के आटे को गूंथ कर गर्दन में पीछे गोल कर रखा जाता है औऱ फिर गोल घेरे के अंदर दर्दनिवारक गुनगुने तेल से थेरपी दी जाती है। यह काम पूरा एक घंटे का होता है। हर सात दिन पर यह थेरपी दी जाती है।
- घुटने और कमर के दर्द के लिए जानू वस्ती और कटि वस्ती थेरपी का इस्तेमाल किया जाता है। लीफ डिटॉक्स थेरपी भी इन दर्द में कारगर साबित होती है।
- हर थेरपी के लिए 2000 से 3000 रुपये तक का खर्च आता है।
-आयुर्वेद में दवा, मालिश और लेप को मिलाकर विटामिन डी की कमी से होनेवाले दर्द का इलाज किया जाता है। आमतौर पर इलाज का नतीजा सामने आने में 3 महीने लग जाते हैं।
- पूरे शरीर पर तेल की धारा डालते हैं। इसके लिए क्षीरबला तेल, धनवंतरम तेल आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इसे 40 मिनट रोजाना और 5 दिन लगातार करते हैं। इससे हड्डियां मजबूत होती हैं।
- महिलाएं सुबह और शाम शतावरी की एक-एक टैब्लेट लें। वैसे तो किसी भी उम्र में ले सकते हैं लेकिन मिनोपॉज के बाद जरूर लें।
- रोजाना एक चम्मच मेथी दाना भिगोकर खाएं। मेथी दर्दनिवारक है और हड्डियों के लिए अच्छी है।
- एक कप गुनगुने दूध में एक चम्मच हल्दी डालकर पिएं।
- रोजाना एक चम्मच बादाम का तेल (बादाम रोगन) एक कप दूध में डालकर पिएं।

*घरेलू नुस्खे अपनाएं 

- गाय के घी में सेंधा नमक डाल कर दर्द वाली जगह पर मसाज करने से भी काफी फायदा होता है। 
- किसी भी तरह के दर्द से निपटने के लिए एक गिलास गाय के गुनगुने दूध में एक छोटी चम्मच हल्दी और गाय के घी की पांच बूंदे रात में नियमित पीने से फायदा होता है।
- रात में खाना खाने के करीब आधे घंटे बाद करीब आधा गिलास गुनगुना पानी पीने से भी लाभ होता है।
- माइग्रेन में गाय के घी को गुनगुना कर दो-दो बूंदें नाक में डालने से बहुत आराम मिलता है। यह सर्वाइकल के दर्द में भी मदद करता है।
- सोयाबीन, अंडे का पीला हिस्सा, फ्लैक्स सीड्स, सफेद तिल और आवंले का सेवन लाभकारी है। 



*दर्द भगाए योग


- गर्दन, साइटिका और कमर दर्द के लिए भुजंगासन, चक्रासन, शलभासन, धनुरासन कारगर हैं, वहीं ऑफिस में काम के दौरान चलित ताड़ासन यानी हर घंटे बाद 10 कदम आगे और 10 कदम पीछे चलने से बहुत आराम मिलता है। घुटने के दर्द वाले याद रखें कि वज्रासन बिलकुल नहीं करना है।
-अनुलोम-विलोम और कपालभाति काफी फायदेमंद हैं। सोने से पहले शवासन भी कई तरह के दर्द से आराम दिलाता है।

* ऐक्टिव रहें, एक्सरसाइज करें

- हमारा शरीर इस तरह से बना है कि सारे जोड़ चलते रहें। जरूरी है कि हम नियमित एक्सरसाइज करें और जितना मुमकिन हो, चलें। एक्सरसाइज में कार्डियोवस्क्युलर, स्ट्रेंथनिंग और स्ट्रेचिंग को मिलाकर करें। कार्डियो के लिए साइकलिंग, स्वीमिंग या डांस, स्ट्रेंथनिंग के लिए वेट लिफ्टिंग और स्ट्रेचिंग के लिए योग करें। वैसे, वॉक अपनेआप में संपूर्ण एक्सरसाइज है।
- अगर घुटने की समस्या नहीं है तो ब्रिस्क वॉक करें। ब्रिस्क वॉक में मोटेतौर पर 1 मिनट में 40-50 कदम चलते हैं। वैसे नॉर्मल वॉक (1 मिनट में लगभग 80 कदम) करना सबसे सेफ है। इससे घुटनों पर असर नहीं पड़ता। रोजाना कम-से-कम 3 किमी जरूर चलें।
- बीच-बीच में कलाइयों, घुटनों आदि को स्ट्रेच करते रहें। कमर को भी घुमाएं। साथ ही, जितना मुमकिन हो, अपना काम खुद करें और वजन कंट्रोल में रखें।
- जिन्हें पुराने दर्द परेशान करते हैं या सर्दियों में दर्द बढ़ जाता है, उन्हें तो एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए। कसरत से हमारे शरीर में मसल्स ऐक्टिव होती हैं, खून का दौरा बढ़ता है और इससे शरीर कुदरती तौर पर गर्म रहता है। ये लोग खासतौर पर पीटी जैसी एक्सरसाइज करें। ठंड की वजह से सुबह बाहर नहीं निकलना चाहते तो शाम को घूमने जाएं।



* विटामिन डी की कमी 


किसी भी शख्स को महीने में 60,000 यूनिट विटामिन डी की जरूरत होती है। इसके लिए महीने में 4-5 दिन और साल में औसतन 45-50 दिन करीब 80 फीसदी शरीर खुला रखकर 45 मिनट के लिए धूप में बैठें। ऐसा करना मुमकिन न हो तो 25-30 साल की उम्र के बाद हर महीने 60 हजार यूनिट का एक विटामिन डी का सैशे लेना चाहिए। विटामिन डी के अलावा कैल्शियम भी हड्डियों के लिए बहुत जरूरी है। कैल्शियम तभी शरीर में जज्ब हो पाता है, जबकि विटामिन डी का लेवल ठीक हो, यानी अगर विटामिन डी कम है तो कैल्शियम शरीर सोख नहीं पाता और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। शरीर को कैल्शियम अगर पूरा नहीं मिलता तो वह हड्डियों में मौजूद कैल्शियम को इस्तेमाल करना शुरू करता है। फिर हड्डियों में दर्द होने लगता है। शरीर में कैल्शियम का लेवल 8.8 से 10.6 mg/dl होना चाहिए। इसके लिए रोजाना 500 mg यानी 0.5 ग्राम कैल्शियम लेने की जरूरत होती है। कैल्शियम से भरपूर डाइट (दूध और दूध से बनी चीजें, हरी पत्तेदार सब्जियां और ड्राई-फ्रूट्स) लेने से यह जरूरत काफी हद तक पूरी हो जाती है। उम्र बढ़ने के साथ खासकर महिलाओं में कैल्शियम सप्लिमेंट या टैब्लेट लेने की जरूरत पड़ने लगती है। 

*पेनकिलर कितने सेफ ?

आमतौर पर किसी भी दर्द को खत्म करने के लिए हम पेनिकलर ले लेते हैं लेकिन यह सही तरीका नहीं है। ऐसा करने से दर्द सिर्फ दब जाता है, खत्म नहीं होता। बहुत दर्द हो तो पैरासिटामॉल 500 एमजी (क्रोसिन, पैरासिटामोल आदि) ले सकते हैं क्योंकि यह सेफ है। जरूरत लगने पर छह घंटे में दोबारा ले सकते हैं। एक दिन में 2 ग्राम तक लेना सेफ है लेकिन 2-3 दिन तक आराम न आए तो डॉक्टर को दिखाएं। दूसरी कोई पेनकिलर लेने से बचें क्योंकि उनका साइड इफेक्ट होता है। वैसे साल में 12 से ज्यादा पेनकिलर न लें, वरना किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार