घुटने के दर्द ,सूजन से मुक्ति के उपाय



                                              


    घुटना हमारे शरीर का सबसे बड़ा और सबसे जटिल जोड़ है. ऐसा प्रायः देखा गया है की बढती हुई उम्र के साथ अक्सर लोग घुटने के दर्द से ग्रस्त हो जाते है. कभी कभी घुटने में दर्द के साथ सूजन भी रहती है. जब यह दर्द अधिक हो जाये तो छोटे मोटे रोज मर्रा के काम भी मुश्किल हो सकते हैं, जैसे की हल्का वजन उठाना, सीडियां चड़ना, या थोड़े दूर पैदल चलना. हो सकता है  कि    पहले आपको सिर्फ एक ही पैर में दर्द हो, परन्तु थोड़े समय के बाद दोनों घुटनों में दर्द होने लगे.

पुराने जमाने में घुटने में दर्द होने की समस्या केवल बूढ़े लोगों में ही देखने को मिलती थी। घुटनों में होने वाले दर्द को आमतौर पर बुढ़ापे की बीमारी समझा जाता था। मगर आजकल यह समस्या बच्चों और नौजवानों में भी देखने को मिल रही है। गलत-खान पान, शरीर में यूरिक एसिड के बढ़ने से भी घुटनो और जोड़ों में दर्द होने लगता है। इसके अलावा इस समस्या के होने पर जोड़ों में सूजन भी होती है और रोगी को चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है। दर्द से छुटकारा पाने के लिए लोग बिना इसका कारण जाने ही दवा खाने लगते हैं। किसी भी चीज का इलाज तब ही होता है जब उसके पीछे का कारण ढूंढा जाएं। आज हम आपको उम्र से पहले शरीर में होने वाले दर्द का कारण बताएंगे तो आइए जानते है उनके बारे में।
1. मोटापा-
समय से पहले घुटनों में दर्द होने का एक कारण मोटापा भी है। शरीर का वजन बढ़ने का सबसे ज्यादा असर घुटनों पर ही पड़ता है। जब जरूरत से ज्याजा वजन घुटनों पर पड़ने लगता है तो जोड़ों में दर्द होने लगता है। इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए जरूरी है कि अपनी उम्र के हिसाब से वजन रखा जाए।
2. मांसपेशियों में बदलाव-
कई बार मांसपेशियों में बदलाव होने के कारण भी उम्र से पहले ही जोड़ों में दर्द होने की समस्या बढ़ सकती है। 20 से 60 साल की आयु के बीच में मांसपेशियां तकरीबन 40 फीसदी तक सिकुड जाती है। उनमें शक्ति कम होने लगती हैं। जब हम चलते है या फिर शारीरिक क्रियाएं करते हैं तो कुल्हों और टांगों की मांसपेशियां शरीर का भार उठाते हैं। मगर उम्र के साथ मांसपेशियों में बदलाव होने लगता है। उनकी क्षमता कम होती जाती है। इसके कारण टांगों पर अधिक दबाव पड़ता है। यही वजह है कि हमारे घुटनों में दर्द होने लगता है।




3. ऑस्टियोपो‍रोसिस-

ये बीमारी आजकल 20 से 30 वर्ष की आयु के करीब 14 प्रतिशत लोगों में आम देखने को मिल रही है। इसमें बीमारी में शरीर की हड्डियों की रक्षा करने वाले कार्टिलेज टूट जाते हैं। जब हड्डियों को मजबूत करने वाले तत्व टूट जाते हैं तो उनमें दर्द होना शुरू हो जाता है।

4. अर्थराइटिस-

पुराने जमाने में अर्थराइटिस की समस्या केवल बड़े लोगों में ही देखने को मिलती थी। मगर आजकल छोटे बच्चे भी इस बीमारी के शिकार है। अर्थराइटिस होने का खतरा सबसे ज्यादा महिलाओं को होता है। अर्थराइटिस होने पर भी उम्र से पहले ही शरीर में दर्द होने लगता है।

4. बर्साइटिस-

घुटने में चोट लगाने, भाग-दौड़ करने के कारण भी जोड़ों के आस-पास सुजन होने लगती है। ये समस्या सबसे ज्यादा खिलाड़ियों और जिम जाने वाले लोगों को होती है। इसके अलावा जिन लोगों का वजन जरूरत से ज्यादा है उनको भी घुटनों, कंधा, कोहनी, कूल्हा और घुटनों में दर्द होने लगता है।

5. टेन्टीनाइटिस-

आपके घुटने में सामने की ओर दर्द जो सीढ़ियों अथवा चढ़ते और उतरते समय बढ़ जाता है। टेन्टीनाइटिस धावकों,स्कॉयर और साइकिल चलाने वाले लोगों को ज्यादा होता है।

दर्द से तात्कालिक आराम के लिए कुछ सरल उपाय-

अगर आप ये जाना चाहते हैं की क्या आपका घुटने का दर्द अपने आप ही ठीक हो सकता है, तो चिकित्सक को दिखने से पहले आप ये कुछ उपाय घर में ही प्रयोग कर सकते हैं.
१. घुटने को आराम दें और कोई भी ऐसा कार्य न करें जिससे घुटने पर दवाब बड़े.
२. अगर आपके घुटने में सूजन हो तो, हर 2-3 घंटे में 15 मिनट के लिए अपने घुटने पर बर्फ की पट्टी लगायें.
३. सूजन को कम करने के लिए आप एक पट्टी से अपने घुटने को बाँध सकते हैं.
४. सोते समय अपने घुटने के नीचे एक तकिया रखें जिससे आपके घुटने को आराम मिले.
५. दर्द और सूजन को कम करने के लिए चिकित्सक के परामर्श से साधारण (NSAID) या दर्द निवारक दवा ले सकते हैं.

जोड़ों के दर्द का घरेलू उपाय : 

सर्दियों में जोड़ों के दर्द की समस्या आम सुनने को मिलती हैं। खासकर बढ़ती उम्र के लोगों में यह परेशानी ज्यादा सुनने को मिलती है। जोड़ों का दर्द शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। यह दर्द घुटनों, कोहनियों, गर्दन, बाजूओं और कूल्हों पर हो सकता है। लंबे समय तक किसी एक जगह पर ही बैठे रहने, सफर करने से घुटनें अकड़ जाते हैं और दर्द करने लगते हैं। इसी को जोड़ों का दर्द कहते हैं। अगर सही समय पर इसका इलाज ना किया जाए तो यह गठिया का रूप भी ले सकता है। जोड़ दर्द होने की वजह गलत खान पान ही है। हड्डियों में मिनरल्स की कमी और बढ़ती उम्र भी इसकी एक वजह से हो सकती है।

जोड़ दर्द होने के लक्षण-

खड़े होने, चलने और हिलने जुलने समय दर्द
सूजन और अकड़न
चलते समय जोड़ों पर अटकन लगना
सुबह के समय जोड़ों का अकड़ाव होना

जोड़ों का दर्द का इलाज-

जोड़ों के दर्द को ठीक करने के लिए आपको बहुत सारे मसाजर, तेल आदि मार्कीट में मिल जाएंगे लेकिन पैसे की खूब बर्बादी करने के बाद भी जोड़ों के दर्द से राहत नहीं मिलती। इसकी जगह पर अगर आप कुछ घरेलू नुस्खे अपनाएंगे तो इस दर्द से आपको जल्द राहत मिलेंगी। 

सामग्रीः

10ग्राम- काली उड़द दाल
4 ग्राम -अदरक (पिसा हुआ)
2 ग्राम -कपूर (पिसा हुआ)
50 मि.ली.- सरसों का तेल
विधिः काली साबुत उड़द दाल, अदरक, कपूर को सरसों के तेल में 5 मिनट तक गर्म करें फिर तीनों चीजों को छानकर तेल से बाहर निकाल लें। इस गुनगुने तेल से जोड़ों की मसाज करें। जल्द ही जोड़ों के दर्द से राहत मिलेगी। ऐसा दिन में 2 से 3 बार करें।
इसके अलावा आप इन नुस्खों को भी अपना सकते हैं।
अमरूद की 4-5 कोमल पत्तियों को पीसकर उसमें थोड़ा सा काला नमक मिलाकर रोजाना खाएं। इससे दर्द से राहत मिलेगी।
काली मिर्च को तिल के तेल में जलने तक गर्म करें और ठंडा होने पर उसी तेल से जोड़ों की मालिश करें।
गाजर को पीसकर इसमें थोड़ा सा नींबू का रस मिलाकर रोजाना सेवन करें।
दर्द वाले स्थान पर अरंडी का तेल लगाकर, उबाले हुए बेल के पत्तों को गर्म गर्म बांधे इससे भी तुरंत राहत मिलेगी।
2 चम्मच बड़े शहद और 1 छोटा चम्मच दालचीनी पाऊडर सुबह शाम एक गिलास गुनगुने पानी से लें।
सुबह के समय सूर्य नमस्कार और प्राणायाम करने से भी जोड़ों के दर्द से छुटकारा मिलता है।
1 चम्मच मेथी के बीच रातभर पानी में भिगोकर रखें। सुबह पानी निकाल दें और मेथी के बीजों को अच्छे से चबाकर खाएं।
गठिए के रोगी 4-6 लीटर पानी पीने की आदत डाल लें। इससे मूत्रद्धार के जरिए यूरिक एसिड बाहर निकलता रहेंगा।




विशिष्ट परामर्श-  

संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| रोगी के व्यक्तिगत लक्षणों के आधार पर  निर्मित औषधि से बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| 
औषधि के लिए वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं| 





वायु गोला के आयुर्वेदिक घरेलू उपचार



                                   


गुल्म (वायु गोला) 
लक्षण व निदान -
नाभि के ऊपर एक गोल स्थान है जहां वायु का गोला रुक जाता है या पेट में गांठ की तरह उभार आता है।
इस तरह पेट में एक जगह वायु के एकत्रित होने को गुल्म या वायु का गोला कहते हैं। वायु का गोला वात, पित्त, कफ, त्रिदोष और खून दोष के कारण उत्पन्न होता है।
यह गुल्म रोग 5 प्रकार का होता है और यह शरीर के विभिन्न स्थानों पर उत्पन्न होता है- दाईं कोख,
बाईं कोख, हृदय , नाभि और पेडू या मूत्राशय ।

वायु गोला होने के कारण :

मल-मूत्र का वेग रोकने, चोट लगने, भारी खाना खाने, रूखा- सूखा भोजन करने, दु:खी रहने और दूषित भोजन करने के कारण वायु दूषित होकर हृदय से मूत्राशय तक के भाग में गांठ की तरह बन जाता
है जिसे गुल्म या वायु का गोला कहते हैं।
लक्षण
वायु का गोला बनने पर दस्त बंद हो जाता है, कब्ज व गैस बनने लगती है, मुंह सूख जाता है, भोजन करने का मन नहीं करता है, भूख नहीं लगती, पेट में दर्द रहता है, अधिक डकारें आती है, दस्त साफ नहीं आता है, पेट फूल जाता है, आंतों में गुड़गुड़ाहट होती रहती है और शरीर का रंग काला पड़ जाता है।
स्त्रियों को गुल्म (वायु का गोला बनना) गर्भ गिरने, गलत खान-पान करने, प्रांरभिक अवस्था में खूनी वायु का ठहरना, गोलेमें जलन और पीड़ा होना आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं।

भोजन और परहेज :-

बकरी का दूध , गाय का दूध , छोटी मूली , बथुआ , सहजना , लहसुन, जमीकन्द, परवल , बैंगन, करेला , केले का फूल, सफेद कद्दु, कसेरू , दाख , नारियल , बिजौरा नींबू , फालसे , खजूर , अनार , आंवला, पका
पपीता , कच्चे नारियल का पानी, एक साल पुराना चावल , लाल चावल आदि का सेवन करना लाभकारी होता है। रात के समय हलवा खाना, रोटी, पूरी और दूध आदि वायु के गोले से पीड़ित रोगी के लिए अच्छा होता है।
बादी करने वाले अनाज, तासीर के विपरीत पदार्थो का
सेवन, सूखा मांस, सूखी साग, मछली आदि का सेवन न करें। गुड़गुड़ाहट करने वाले पदार्थ, स्त्री प्रसंग ( संभोग ), रात को जागना,अधिक मेहनत करना, धूप , आलू , मूली, मीठे फल आदि का प्रयोग करना भी गुल्म रोगी के लिए हानिकारक होता है। मल- मूत्र के वेग को रोकने से भी वायु का गोला बनता है।


विभिन्न औषधियों से आयुर्वेदिक उपचार :


1. पुराना गुड़ : 


गुड़, भांरगी और छोटी पीपल बराबर मात्रा में लेकर पीसकर रख लें। यह 2 से 4 ग्राम चूर्ण काले तिल के काढ़े में मिलाकर सेवन करने से खूनी गुल्म रोग ठीक होता है।
2. गोरखमुण्डी के चूर्ण का काढ़ा बनाकर सेवन करने से रक्त गुल्म की बीमारी दूर होती है।

3. बच : 

बच, हरड़, हींग, अम्लवेत, सेंधानमक, अजवायन और जवाखार को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीस लें। यह 3 से 6 ग्राम चूर्ण गर्म पानी के साथ सेवन करने से कुछ दिनों में ही पेट में गैस का गोला बनने और दर्द समाप्त होता है।

4. हरड़ : 


हरड़ का चूर्ण गुड़ में मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से पित्त के कारण होने वाली गुल्म रोग ठीक होता है।
बड़ी हरड़ का चूर्ण और अरण्ड का तेल गाय के दूध में मिलाकर पीने से पेट में गैस का गोला बनना ठीक होता है।


5. सज्जीखार : 

सज्जीखार, जवाक्षार, केवड़ा को पीसकर चूर्ण बनाकर अरण्ड के तेल में मिलाकर सेवन करने से गैस का गोला बनना ठीक होता है। सज्जीखार का रस गुड़ में मिलाकर सेवन करने से पेट में गैस का गोला बनने से उत्पन्न दर्द ठीक होता है।


6. साठी : 

साठी की जड़ और कालीमिर्च को पीसकर घी में मिलाकर पीने से गुल्म रोग से पीड़ित रोगी को दर्द से आराम मिलता है।


7. शूलग्रंथि :

शूलग्रंथि (बबूल के पेड़ के कांटों को एकत्रित करके पेड़ पर ही कीड़ा गांठ बनाया जाता है) चिलम में रखकर धूम्रपान करने से वायु का गोला समाप्त होता है।


8. अपामार्ग : 

अपामार्ग की जड़ और कालीमिर्च को पीसकर घी के साथ प्रयोग करने से वायु का गोला व दर्द में आराम मिलता है।


9. सोंठ :

सोंठ 40 ग्राम, सफेद तिल 160 ग्राम और पुराना गुड़ 80 ग्राम को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण 6 से 10 ग्राम।खाकर ऊपर से गर्म दूध पीने से पेट की कब्ज, वायु का गोला और दर्द समाप्त होता है।


10. मुलहठी : 

मुलेहठी, चंदन और दाख को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण दूध के साथ सेवन करने से पित्त के कारण उत्पन्न गुल्म।रोग दूर होता है ।


11. द्राक्षा (मुनक्का) :

पित्त के कारण उत्पन्न गुल्म रोग से पीड़ित रोगी को द्राक्षा (मुनक्का) और हरड़ का 1-2 चम्मच रस गुड़ मिलाकर पीना चाहिए ।


12. अजवायन : 

अजवायन का चूर्ण और थोड़ा-सा संचर नमक छाछ में मिलाकर पीने से कफ से उत्पन्न गुल्म में लाभ मिलता है।

13. हींग :
 

हींग, पीपल की जड़, धनिया, जीरा, बच, कालीमिर्च, चीता, पाढ़, चव्य, कचूर, कालानमक, सेंधानमक, बिरिया संचर नमक, विषांबिल, छोटी पीपल, सोंठ, जवाखार, सज्जीखार, हरड़, अनार
दाना, अम्लवेत, पोहकरमूल, हाऊबेर और काला जीरा आदि को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर लें। फिर इसमें एक बिजौरा नींबू का रस मिलाकर अच्छी तरह मिला लें और छाया में सुखाकर बोतल में भरकर रख लें। यह चूर्ण 3 से 4 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ
प्रतिदिन सेवन करने से गुल्म, अफारा, दस्त की रुकावट, पेट का रोग, कोख का दर्द, स्तन और पसलियों में वायु व कफ के दोषों से उत्पन्न दर्द आदि समाप्त होते हैं।
बच 20 ग्राम, हरड़ 30 ग्राम, बायविडंग 60 ग्राम, सोंठ 40 ग्राम, हींग 10 ग्राम, पीपल 80 ग्राम,चीता 50 ग्राम और अजवायन 70 ग्राम को एक साथ कूटकर चूर्ण बना लें। यह 2 से 4 ग्राम चूर्ण गर्म पानी या शराब के साथ सेवन करने से गुल्म रोग समाप्त होता है।


14. आक : 

आक के फूलों की कलियां 20 ग्राम और अजवायन 20 ग्राम को बारीक पीसकर इसमें 50 ग्राम चीनी मिलाकर 1-1 ग्राम सुबह-शाम खाने से गुल्म रोग दूर होता है।


15. शरपुंखा :

शरपुंखा का रस और हरड़ का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर 4 ग्राम की मात्रा में खाना खाने के बाद खाने से गुल्म के कारण उत्पन्न दर्द ठीक होता है और दस्त की रुकावट दूर होती है।


16. नींबू :

6 मिलीलीटर नींबू के रस को आधे गिलास गर्म पानी में मिलाकर सेवन करने से वायु का गोला समाप्त होता है।

17. लता करंज :

लता करंज के पत्तों को चावल के पानी में उबाल कर पीने से वायु गोला ठीक होता है। इसके सेवन से दर्द

कम होता है, पाचनशक्ति मजबूत होती है और वातशूल ठीक होता है।
लता करंज के बीज, कालानमक, सोंठ और हींग बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण आधे से 
एक ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ खाने से पेट में गैस बनने के कारण उत्पन्न दर्द ठीक होता है।गैस का गोला बनने से यदि कमर में दर्द हो तो करंज के बीजों की मींगी और एक चौथाई ग्राम शुद्ध नीलाथोथा मिलाकर पीस लें और सरसों तेल में मिलाकर 12 गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली प्रतिदिन खाने से गैस का गोला बनने से उत्पन्न दर्द ठीक होता है।10 से 20 ग्राम करंज के कोमल पत्ते को तिल के तेल में भूनकर खाने से गुल्म रोग ठीक होता है।
18. एरण्ड : 

2 चम्मच एरण्ड के तेल को गर्म दूध में मिलाकर पीने से वायु का गोला समाप्त होता है।


19. अरबी : 

अरबी के पत्ते डण्डी के समेत लेकर इसका पानी निकालकर घी में मिलाकर 3 दिनों तक सेवन से गुल्म रोग ठीक होता है।

20. द्राक्षा (मुनक्का) :

पित्त के कारण उत्पन्न गुल्म रोग से पीड़ित रोगी को द्राक्षा (मुनक्का) और हरड़ का 1-2 चम्मच रस गुड़ मिलाकर पीना चाहिए ।

21. अजवायन :

अजवायन का चूर्ण और थोड़ा-सा संचर नमक छाछ में मिलाकर पीने से कफ से उत्पन्न गुल्म में लाभ मिलता है।

22. हींग

हींग, पीपल की जड़, धनिया, जीरा, बच, कालीमिर्च, चीता, पाढ़, चव्य, कचूर, कालानमक, सेंधानमक, बिरिया संचर नमक, विषांबिल, छोटी पीपल, सोंठ, जवाखार, सज्जीखार, हरड़, अनार
दाना, अम्लवेत, पोहकरमूल, हाऊबेर और काला जीरा आदि को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर लें। फिर इसमें एक बिजौरा नींबू का रस मिलाकर अच्छी तरह मिला लें और छाया में सुखाकर बोतल में भरकर रख लें। यह चूर्ण 3 से 4 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ
प्रतिदिन सेवन करने से गुल्म, अफारा, दस्त की रुकावट, पेट का रोग, कोख का दर्द, स्तन और पसलियों में वायु व कफ के दोषों से उत्पन्न दर्द आदि समाप्त होते हैं।


23. बैंगन :

पेट में गैस बनने तथा पानी पीने के बाद पेट फूलने पर बैंगन के मौसम में लम्बे बैंगन की सब्जी बनाकर खाने से गैस की बीमारी दूर होती है, लीवर और तिल्ली का बढ़ना भी ठीक होता है। हाथ की हथेलियों व पैरों के तलवों में पसीना आने पर बैंगन का रस लगाने लाभ होता है।


24. त्रिफला :

त्रिफला के 3 से 5 ग्राम चूर्ण को चीनी मेंमिलाकर दिन में 3 बार खाने से गुल्म में लाभ मिलता है।

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