वायु गोला के आयुर्वेदिक घरेलू उपचार



                                   


गुल्म (वायु गोला) 
लक्षण व निदान -
नाभि के ऊपर एक गोल स्थान है जहां वायु का गोला रुक जाता है या पेट में गांठ की तरह उभार आता है।
इस तरह पेट में एक जगह वायु के एकत्रित होने को गुल्म या वायु का गोला कहते हैं। वायु का गोला वात, पित्त, कफ, त्रिदोष और खून दोष के कारण उत्पन्न होता है।
यह गुल्म रोग 5 प्रकार का होता है और यह शरीर के विभिन्न स्थानों पर उत्पन्न होता है- दाईं कोख,
बाईं कोख, हृदय , नाभि और पेडू या मूत्राशय ।

वायु गोला होने के कारण :

मल-मूत्र का वेग रोकने, चोट लगने, भारी खाना खाने, रूखा- सूखा भोजन करने, दु:खी रहने और दूषित भोजन करने के कारण वायु दूषित होकर हृदय से मूत्राशय तक के भाग में गांठ की तरह बन जाता
है जिसे गुल्म या वायु का गोला कहते हैं।
लक्षण
वायु का गोला बनने पर दस्त बंद हो जाता है, कब्ज व गैस बनने लगती है, मुंह सूख जाता है, भोजन करने का मन नहीं करता है, भूख नहीं लगती, पेट में दर्द रहता है, अधिक डकारें आती है, दस्त साफ नहीं आता है, पेट फूल जाता है, आंतों में गुड़गुड़ाहट होती रहती है और शरीर का रंग काला पड़ जाता है।
स्त्रियों को गुल्म (वायु का गोला बनना) गर्भ गिरने, गलत खान-पान करने, प्रांरभिक अवस्था में खूनी वायु का ठहरना, गोलेमें जलन और पीड़ा होना आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं।

भोजन और परहेज :-

बकरी का दूध , गाय का दूध , छोटी मूली , बथुआ , सहजना , लहसुन, जमीकन्द, परवल , बैंगन, करेला , केले का फूल, सफेद कद्दु, कसेरू , दाख , नारियल , बिजौरा नींबू , फालसे , खजूर , अनार , आंवला, पका
पपीता , कच्चे नारियल का पानी, एक साल पुराना चावल , लाल चावल आदि का सेवन करना लाभकारी होता है। रात के समय हलवा खाना, रोटी, पूरी और दूध आदि वायु के गोले से पीड़ित रोगी के लिए अच्छा होता है।
बादी करने वाले अनाज, तासीर के विपरीत पदार्थो का
सेवन, सूखा मांस, सूखी साग, मछली आदि का सेवन न करें। गुड़गुड़ाहट करने वाले पदार्थ, स्त्री प्रसंग ( संभोग ), रात को जागना,अधिक मेहनत करना, धूप , आलू , मूली, मीठे फल आदि का प्रयोग करना भी गुल्म रोगी के लिए हानिकारक होता है। मल- मूत्र के वेग को रोकने से भी वायु का गोला बनता है।


विभिन्न औषधियों से आयुर्वेदिक उपचार :


1. पुराना गुड़ : 


गुड़, भांरगी और छोटी पीपल बराबर मात्रा में लेकर पीसकर रख लें। यह 2 से 4 ग्राम चूर्ण काले तिल के काढ़े में मिलाकर सेवन करने से खूनी गुल्म रोग ठीक होता है।
2. गोरखमुण्डी के चूर्ण का काढ़ा बनाकर सेवन करने से रक्त गुल्म की बीमारी दूर होती है।

3. बच : 

बच, हरड़, हींग, अम्लवेत, सेंधानमक, अजवायन और जवाखार को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीस लें। यह 3 से 6 ग्राम चूर्ण गर्म पानी के साथ सेवन करने से कुछ दिनों में ही पेट में गैस का गोला बनने और दर्द समाप्त होता है।

4. हरड़ : 


हरड़ का चूर्ण गुड़ में मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से पित्त के कारण होने वाली गुल्म रोग ठीक होता है।
बड़ी हरड़ का चूर्ण और अरण्ड का तेल गाय के दूध में मिलाकर पीने से पेट में गैस का गोला बनना ठीक होता है।


5. सज्जीखार : 

सज्जीखार, जवाक्षार, केवड़ा को पीसकर चूर्ण बनाकर अरण्ड के तेल में मिलाकर सेवन करने से गैस का गोला बनना ठीक होता है। सज्जीखार का रस गुड़ में मिलाकर सेवन करने से पेट में गैस का गोला बनने से उत्पन्न दर्द ठीक होता है।


6. साठी : 

साठी की जड़ और कालीमिर्च को पीसकर घी में मिलाकर पीने से गुल्म रोग से पीड़ित रोगी को दर्द से आराम मिलता है।


7. शूलग्रंथि :

शूलग्रंथि (बबूल के पेड़ के कांटों को एकत्रित करके पेड़ पर ही कीड़ा गांठ बनाया जाता है) चिलम में रखकर धूम्रपान करने से वायु का गोला समाप्त होता है।


8. अपामार्ग : 

अपामार्ग की जड़ और कालीमिर्च को पीसकर घी के साथ प्रयोग करने से वायु का गोला व दर्द में आराम मिलता है।


9. सोंठ :

सोंठ 40 ग्राम, सफेद तिल 160 ग्राम और पुराना गुड़ 80 ग्राम को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण 6 से 10 ग्राम।खाकर ऊपर से गर्म दूध पीने से पेट की कब्ज, वायु का गोला और दर्द समाप्त होता है।


10. मुलहठी : 

मुलेहठी, चंदन और दाख को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण दूध के साथ सेवन करने से पित्त के कारण उत्पन्न गुल्म।रोग दूर होता है ।


11. द्राक्षा (मुनक्का) :

पित्त के कारण उत्पन्न गुल्म रोग से पीड़ित रोगी को द्राक्षा (मुनक्का) और हरड़ का 1-2 चम्मच रस गुड़ मिलाकर पीना चाहिए ।


12. अजवायन : 

अजवायन का चूर्ण और थोड़ा-सा संचर नमक छाछ में मिलाकर पीने से कफ से उत्पन्न गुल्म में लाभ मिलता है।

13. हींग :
 

हींग, पीपल की जड़, धनिया, जीरा, बच, कालीमिर्च, चीता, पाढ़, चव्य, कचूर, कालानमक, सेंधानमक, बिरिया संचर नमक, विषांबिल, छोटी पीपल, सोंठ, जवाखार, सज्जीखार, हरड़, अनार
दाना, अम्लवेत, पोहकरमूल, हाऊबेर और काला जीरा आदि को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर लें। फिर इसमें एक बिजौरा नींबू का रस मिलाकर अच्छी तरह मिला लें और छाया में सुखाकर बोतल में भरकर रख लें। यह चूर्ण 3 से 4 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ
प्रतिदिन सेवन करने से गुल्म, अफारा, दस्त की रुकावट, पेट का रोग, कोख का दर्द, स्तन और पसलियों में वायु व कफ के दोषों से उत्पन्न दर्द आदि समाप्त होते हैं।
बच 20 ग्राम, हरड़ 30 ग्राम, बायविडंग 60 ग्राम, सोंठ 40 ग्राम, हींग 10 ग्राम, पीपल 80 ग्राम,चीता 50 ग्राम और अजवायन 70 ग्राम को एक साथ कूटकर चूर्ण बना लें। यह 2 से 4 ग्राम चूर्ण गर्म पानी या शराब के साथ सेवन करने से गुल्म रोग समाप्त होता है।


14. आक : 

आक के फूलों की कलियां 20 ग्राम और अजवायन 20 ग्राम को बारीक पीसकर इसमें 50 ग्राम चीनी मिलाकर 1-1 ग्राम सुबह-शाम खाने से गुल्म रोग दूर होता है।


15. शरपुंखा :

शरपुंखा का रस और हरड़ का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर 4 ग्राम की मात्रा में खाना खाने के बाद खाने से गुल्म के कारण उत्पन्न दर्द ठीक होता है और दस्त की रुकावट दूर होती है।


16. नींबू :

6 मिलीलीटर नींबू के रस को आधे गिलास गर्म पानी में मिलाकर सेवन करने से वायु का गोला समाप्त होता है।

17. लता करंज :

लता करंज के पत्तों को चावल के पानी में उबाल कर पीने से वायु गोला ठीक होता है। इसके सेवन से दर्द

कम होता है, पाचनशक्ति मजबूत होती है और वातशूल ठीक होता है।
लता करंज के बीज, कालानमक, सोंठ और हींग बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण आधे से 
एक ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ खाने से पेट में गैस बनने के कारण उत्पन्न दर्द ठीक होता है।गैस का गोला बनने से यदि कमर में दर्द हो तो करंज के बीजों की मींगी और एक चौथाई ग्राम शुद्ध नीलाथोथा मिलाकर पीस लें और सरसों तेल में मिलाकर 12 गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली प्रतिदिन खाने से गैस का गोला बनने से उत्पन्न दर्द ठीक होता है।10 से 20 ग्राम करंज के कोमल पत्ते को तिल के तेल में भूनकर खाने से गुल्म रोग ठीक होता है।
18. एरण्ड : 

2 चम्मच एरण्ड के तेल को गर्म दूध में मिलाकर पीने से वायु का गोला समाप्त होता है।


19. अरबी : 

अरबी के पत्ते डण्डी के समेत लेकर इसका पानी निकालकर घी में मिलाकर 3 दिनों तक सेवन से गुल्म रोग ठीक होता है।

20. द्राक्षा (मुनक्का) :

पित्त के कारण उत्पन्न गुल्म रोग से पीड़ित रोगी को द्राक्षा (मुनक्का) और हरड़ का 1-2 चम्मच रस गुड़ मिलाकर पीना चाहिए ।

21. अजवायन :

अजवायन का चूर्ण और थोड़ा-सा संचर नमक छाछ में मिलाकर पीने से कफ से उत्पन्न गुल्म में लाभ मिलता है।

22. हींग

हींग, पीपल की जड़, धनिया, जीरा, बच, कालीमिर्च, चीता, पाढ़, चव्य, कचूर, कालानमक, सेंधानमक, बिरिया संचर नमक, विषांबिल, छोटी पीपल, सोंठ, जवाखार, सज्जीखार, हरड़, अनार
दाना, अम्लवेत, पोहकरमूल, हाऊबेर और काला जीरा आदि को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर लें। फिर इसमें एक बिजौरा नींबू का रस मिलाकर अच्छी तरह मिला लें और छाया में सुखाकर बोतल में भरकर रख लें। यह चूर्ण 3 से 4 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ
प्रतिदिन सेवन करने से गुल्म, अफारा, दस्त की रुकावट, पेट का रोग, कोख का दर्द, स्तन और पसलियों में वायु व कफ के दोषों से उत्पन्न दर्द आदि समाप्त होते हैं।


23. बैंगन :

पेट में गैस बनने तथा पानी पीने के बाद पेट फूलने पर बैंगन के मौसम में लम्बे बैंगन की सब्जी बनाकर खाने से गैस की बीमारी दूर होती है, लीवर और तिल्ली का बढ़ना भी ठीक होता है। हाथ की हथेलियों व पैरों के तलवों में पसीना आने पर बैंगन का रस लगाने लाभ होता है।


24. त्रिफला :

त्रिफला के 3 से 5 ग्राम चूर्ण को चीनी मेंमिलाकर दिन में 3 बार खाने से गुल्म में लाभ मिलता है।

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