शोथ(सूजन) के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार



                                                         


     शरीर के किसी भी अंग में शोथ (सूजन) होने से बहुत पीड़ा होती है। शरीर के किसी अंग में अचानक शोथ होने पर रोगी बुरी तरह परेशान हो उठता है। शीत ऋतु में संधिवात के कारण शोथ की अधिक विकृति होती है।

उत्पत्ति : 

रक्त दूषित होने पर शोथ की अधिक विकृति होती है। सीढ़ियों से फिसलकर गिरने व बस से उतरते-चढ़ते समय चोट लगने से भी शोथ की उत्पत्ति होती है। वृक्कों में विकृति होने पर शरीर के विभिन्न अंगों में शोथ होती है।
    गर्भावस्था में रक्त की अधिक कमी होने पर गर्भवती स्त्री के पांवों में, चेहरे पर शोथ के लक्षण दिखाई देते हैं। छोटे बच्चे जब मिट्टी खाते हैं तो उनके पेट पर शोथ दिखाई देती है। रक्ताल्पता में भी रोगी के हाथ-पांव व चेहरे पर शोथ के लक्षण दिखाई देते हैं।

लक्षण :

विभिन्न संक्रामक रोगों के चलते शोथ की विकृति दिखाई देती है। मलेरिया व आंत्रिक ज्वर में शोथ की विकृति होती है। शोथ के कारण अधिक पीड़ा होती है। कई बार शोथ की पीड़ा असहनीय हो जाती है। उदर में शोथ होने पर वमन विकृति भी हो सकती है। गर्भावस्था में हाथ-पांव व चेहरे पर शोथ होने से गर्भस्थ शिशु को अधिक हानि पहुंच सकती है। वृक्कों की विकृति के कारण उत्पन्न शोथ में मूत्र के साथ रक्त भी आ सकता है।

सूजन होने  पर  सेवनीय

5 ग्राम गाजर के बीजों को 300 ग्राम जल में उबालकर, क्वाथ बनाकर छानकर पिएं। अधिक मूत्र आने से शोथ नष्ट होती है।
2 ग्राम हल्दी (पिसी हुई) 1 ग्राम मिसरी गर्म दूध में मिलाकर पीने से कुछ दिनों में शोथ नष्ट हो जाती है।
अदरक का रस 10 ग्राम मात्रा में लेकर 20 ग्राम गुड के साथ प्रातः और सायं सेवन करें। कुछ दिनों में शोथ नष्ट हो जाती है।
अनन्नास का 150 ग्राम रस कुछ दिनों तक पीने से यकृत शोथ में बहुत लाभ होता है।
इंद्रायण की जड को सिरके के साथ पीसकर शोथ पर लेप करें।
अमलतास के ताजे फूल 10 ग्राम और भुना हुआ सुहागा 3 ग्राम पीसकर सुबह-शाम गर्म जल के साथ सेवन करें। शोथ नष्ट होती है।
हरड़ का क्वाथ बनाकर, छानकर 50 ग्राम की मात्रा में 5 ग्राम गुग्गुल मिलाकर सेवन करने से शोथ नष्ट होती है।
पुनर्नवा, देवदारु, सोंठ और गुग्गुल सभी चीजें 10-10 ग्राम लेकर 400 ग्राम जल में उबालकर क्वाथ बनाएं। 50 ग्राम क्वाथ पीने से शोथ नष्ट होती है।
मूली 100 ग्राम और तिल 10 ग्राम चबाकर खाने से त्वचा के नीचे एकत्र जल से उत्पन्न शोथ नष्ट होती है।
केला खाने से अनेक प्रकार की. शोथ नष्ट होती हैं।
सोंठ का 10 ग्राम चूर्ण गुड के साथ खाने से शोथ नष्ट होती है।
काली मिर्च पीसकर मक्खन के साथ मिलाकर चटाने से छोटी आयु के बच्चों की शोथ नष्ट होती है।
खजूर का कुछ दिनों तक सेवन करने से शोथ विकृति नष्ट होती है। (मधुमेह रोगी खजूर न खाएं)।

सूजन होने पर न  खाएं

शोथ  में घी, तेल से बने पकवानों का सेवन न करें।
उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रस से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
आम, इमली, कमरख व दूसरे खट्टे फलों का सेवन न करें।
अचार, कांजी व सिरके से बने चटपटे व्यंजन सेवन न करें।
चाइनीज व फास्ट फूड का सेवन न करें।

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कष्टसाध्य रोगों का आयुर्वेदिक समाधान




                                               

     खाना खाने से 1 घंटे बाद पानी पिए और हमेशा स्वस्थ रहे ,कभी भी खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए !
अब ये भी जानना बहुत जरुरी है ...हम पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद क्या कारण है |
सबसे पहले आप हमेशा ये बात याद रखें कि शरीर मे सारी बीमारियाँ वात-पित्त और कफ के बिगड़ने से ही होती हैं !
अब आप पूछेंगे ये वात-पित्त और कफ क्या होता है ???
बहुत ज्यादा गहराई मे जाने की जरूरत नहीं आप ऐसे समझे की सिर से लेकर छाती के बीच तक जितने रोग होते हैं वो सब कफ बिगड़ने के कारण होते हैं
छाती के बीच से लेकर पेट और कमर के अंत तक जितने रोग होते हैं वो पित्त बिगड़ने के कारण होते हैं !
और कमर से लेकर घुटने और पैरों के अंत तक जितने रोग होते हैं वो सब वात बिगड़ने के कारण होते हैं !
हमारे हाथ की कलाई मे ये वात-पित्त और कफ की तीन नाड़ियाँ होती हैं !

भारत मे ऐसे ऐसे नाड़ी विशेषज्ञ रहे हैं जो आपकी नाड़ी पकड़ कर ये बता दिया करते थे कि आपने एक सप्ताह पहले क्या खाया एक दिन पहले क्या खाया -दो पहले क्या खाया !!
और नाड़ी पकड़ कर ही बता देते थे कि आपको क्या रोग है ! आजकल ऐसी बहुत ही कम मिलते हैं !
शायद आपके मन मे सवाल आए ये वात -पित्त कफ दिखने मे कैसे होते हैं ???
तो फिलहाल आप इतना जान लीजिये ! कफ और पित्त लगभग एक जैसे होते हैं !
आम भाषा मे नाक से निकलने वाली बलगम को कफ कहते हैं ! कफ थोड़ा गाढ़ा और चिपचिपा होता है !
मुंह मे से निकलने वाली बलगम को पित्त कहते हैं ! ये कम चिपचिपा और द्रव्य जैसा होता है !!
और शरीर से निकले वाली वायु को वात कहते हैं !! ये अदृश्य होती है !
कई बार पेट मे गैस बनने के कारण सिर दर्द होता है तो इसे आप कफ का रोग नहीं कहेंगे इसे पित्त का रोग कहेंगे !!
क्यूंकि पित्त बिगड़ने से गैस हो रही है और सिर दर्द हो रहा है !

ये ज्ञान बहुत गहरा है खैर आप इतना याद रखें कि इस वात -पित्त और कफ के संतुलन के बिगड़ने से ही सभी रोग आते हैं !
और ये तीनों ही मनुष्य की आयु के साथ अलग अलग ढंग से बढ़ते हैं ! बच्चे के पैदा होने से 14 वर्ष की आयु तक कफ के रोग ज्यादा होते है ! बार बार खांसी ,सर्दी ,छींके आना आदि होगा !
 14 वर्ष से 60 साल तक पित्त के रोग सबसे ज्यादा होते हैं बार बार पेट दर्द करना ,गैस बनना ,खट्टी खट्टी डकारे आना आदि !!
और उसके बाद बुढ़ापे मे वात के रोग सबसे ज्यादा होते हैं घुटने दुखना ,जोड़ो का दर्द आदि
कभी भी खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना !!
अब आप कहेंगे हम तो हमेशा यही करते हैं ! 99% लोग ऐसे होते है जो पानी लिए बिना खाना नहीं खाते है |पानी पहले होता है खाना बाद मे होता है |बहुत सारे लोग तो खाना खाने से ज्यादा पानी पीते है दो-चार रोटी के टुकडो को खाया फिर पानी पिया,फिर खाया-फिर पानी पिया !
ये जानना बहुत जरुरी है ...हम पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद क्या कारण है |

बात ऐसी है की हमारा जो शरीर है शरीर का पूरा केंद्र है हमारा पेट|ये पूरा शरीर चलता है पेट की ताकत से और पेट चलता है भोजन की ताकत से|जो कुछ भी हम खाते है वो ही हमारे पेट की ताकत है |हमने दाल खाई,हमने सब्जी खाई, हमने रोटी खाई, हमने दही खाया लस्सी पी कुछ भी दूध,दही छाझ लस्सी फल आदि|ये सब कुछ भोजन के रूप मे हमने ग्रहण किया ये सब कुछ हमको उर्जा देता है और पेट उस उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है |आप कुछ भी खाते है पेट उसके लिए उर्जा का आधार बनता है |अब हम खाते है तो पेट मे सब कुछ जाता है|पेट मे एक छोटा सा स्थान होता है जिसको हम हिंदी मे कहते है अमाशय|उसी स्थान का संस्कृत नाम है जठर|उसी स्थान को अंग्रेजी मे कहते है epigastrium |ये एक थेली की तरह होता है और यह जठर हमारे शरीर मे सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी मे आता है ये |बहुत छोटा सा स्थान हैं इसमें अधिक से अधिक 350GMS खाना आ सकता है |हम कुछ भी खाते सब ये अमाशय मे आ जाता है|
अब अमाशय मे क्या होता है खाना जैसे ही पहुँचता है तो यह भगवान की बनाई हुई व्यवस्था है जो शरीर मे है की तुरंत इसमें आग(अग्नि) जल जाती है |आमाशय मे अग्नि प्रदीप्त होती है उसी को कहते हे जठराग्नि|ये जठराग्नि है वो अमाशय मे प्रदीप्त होने वाली आग है |ये आग ऐसी ही होती है जेसे रसोई गेस की आग|आप की रसोई गेस की आग है ना की जेसे आपने स्विच ओन किया आग जल गयी|ऐसे ही पेट मे होता है जेसे ही आपने खाना खाया की जठराग्नि प्रदीप्त हो गयी |यह ऑटोमेटिक है,जेसे ही अपने रोटी का पहला टुकड़ा मुँह मे डाला की इधर जठराग्नि प्रदीप्त हो गई|ये अग्नि तब तक जलती हे जब तक खाना पचता है |आपने खाना खाया और अग्नि जल गयी अब अग्नि खाने को पचाती है |वो ऐसे ही पचाती है जेसे रसोई गेस|आपने रसोई गेस पर बरतन रखकर थोडा दूध डाल दिया और उसमे चावल डाल दिया तो जब तक अग्नि जलेगी तब तक खीर बनेगी|इसी तरह अपने पानी डाल दिया और चावल डाल दिए तो जब तक अग्नि जलेगी चावल पकेगा|

अब अपने खाते ही गटागट पानी पी लिया और खूब ठंडा पानी पी लिया|और कई लोग तो बोतल पे बोतल पी जाते है |अब होने वाला एक ही काम है जो आग(जठराग्नि) जल रही थी वो बुझ गयी|आग अगर बुझ गयी तो खाने की पचने की जो क्रिया है वो रुक गयी|अब हमेशा याद रखें खाना पचने पर हमारे पेट मे दो ही क्रिया होती है |एक क्रिया है जिसको हम कहते हे Digation और दूसरी है fermentation|फर्मेंटेशन का मतलब है सडना और डायजेशन का मतलब हे पचना|
आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी तो खाना पचेगा,खाना पचेगा तो उसका रस बनेगा|जो रस बनेगा तो उसी रस से मांस,मज्जा,रक्त,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र और अस्थि बनेगा और सबसे अंत मे मेद बनेगा|ये तभी होगा जब खाना पचेगा|
अब ध्यान से पढ़े इन् शब्दों को मांस की हमें जरुरत है हम सबको,मज्जा की जरुरत है ,रक्त की भी जरुरत है ,वीर्य की भी जरुरत है ,अस्थि भी चाहिए,मेद भी चाहिए|यह सब हमें चाहिए|जो नहीं चाहिए वो मल नहीं चाहिए और मूत्र नहीं चाहिए|मल और मूत्र बनेगा जरुर ! लेकिन वो हमें चाहिए नहीं तो शरीर हर दिन उसको छोड़ देगा|मल को भी छोड़ देगा और मूत्र को भी छोड़ देगा बाकि जो चाहिए शरीर उसको धारण कर लेगा|
ये तो हुई खाना पचने की बात अब जब खाना सड़ेगा तब क्या होगा..?
अगर आपने खाना खाने के तुरंत बाद पानी पी लिया तो जठराग्नि नहीं जलेगी,खाना नहीं पचेगा और वही खाना फिर सड़ेगा|और सड़ने के बाद उसमे जहर बनेंगे|
खाने के सड़ने पर सबसे पहला जहर जो बनता है वो हे यूरिक एसिड(uric acid )|कई बार आप डॉक्टर के पास जाकर कहते है की मुझे घुटने मे दर्द हो रहा है ,मुझे कंधे-कमर मे दर्द हो रहा है तो डॉक्टर कहेगा आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है आप ये दवा खाओ,वो दवा खाओ यूरिक एसिड कम करो|यह यूरिक एसिड विष (जहर ) है और यह इतना खतरनाक विष है की अगर अपने इसको कन्ट्रोल नहीं किया तो ये आपके शरीर को उस स्थिति मे ले जा सकता है की आप एक कदम भी चल ना सके|आपको बिस्तर मे ही पड़े रहना पड़े पेशाब भी बिस्तर मे करनी पड़े और संडास भी बिस्तर मे ही करनी पड़े यूरिक एसिड इतना खतरनाक है |इस लिए यह इतना खराब विष हे नहीं बनना चाहिए |

और एक दूसरा उदाहरण खाना जब सड़ता है तो यूरिक एसिड जेसा ही एक दूसरा विष बनता है जिसको हम कहते हे LDL (Low Density lipoprotive) माने खराब कोलेस्ट्रोल(cholesterol )|जब आप ब्लड प्रेशर(BP) चेक कराने डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको कहता है (HIGH BP )हाय बीपी है आप पूछोगे कारण बताओ? तो वो कहेगा कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है |आप ज्यादा पूछोगे की कोलेस्ट्रोल कौनसा बहुत है ? तो वो आपको कहेगा LDL बहुत है |
इससे भी ज्यादा खतरनाक विष हे वो है VLDL(Very Low Density lipoprotine)|ये भी कोलेस्ट्रॉल जेसा ही विष है |अगर VLDL बहुत बढ़ गया तो आपको भगवान भी नहीं बचा सकता|
खाना सड़ने पर और जो जहर बनते है उसमे एक ओर विष है जिसको अंग्रेजी मे हम कहते है triglycerides|जब भी डॉक्टर आपको कहे की आपका triglycerides बढ़ा हुआ हे तो समज लीजिए की आपके शरीर मे विष निर्माण हो रहा है |
तो कोई यूरिक एसिड के नाम से कहे,कोई कोलेस्ट्रोल के नाम से कहे,कोई LDL - VLDL के नाम से कहे समज लीजिए की ये विष हे और ऐसे विष 103 है |ये सभी विष तब बनते है जब खाना सड़ता है |
 मतलब समझ लीजिए किसी का कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे ध्यान आना चाहिए की खाना पच नहीं रहा है ,कोई कहता हे मेरा triglycerides बहुत बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे डायग्नोसिस कर लीजिए आप ! की आपका खाना पच नहीं रहा है |कोई कहता है मेरा यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट लगना चाहिए समझने मे की खाना पच नहीं रहा है |

क्योंकि खाना पचने पर इनमे से कोई भी जहर नहीं बनता|खाना पचने पर जो बनता है वो है मांस,मज्जा,रक्त,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र,अस्थि और खाना नहीं पचने पर बनता है यूरिक एसिड,कोलेस्ट्रोल,LDL-VLDL| और यही आपके शरीर को रोगों का घर बनाते है !
पेट मे बनने वाला यही जहर जब ज्यादा बढ़कर खून मे आते है ! तो खून दिल की नाड़ियो मे से निकल नहीं पाता और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा जो खून मे आया है इकट्ठा होता रहता है और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है जिसे आप  हार्ट अटेक  कहते हैं !
तो हमें जिंदगी मे ध्यान इस बात पर देना है की जो हम खा रहे हे वो शरीर मे ठीक से पचना चाहिए और खाना ठीक से पचना चाहिए इसके लिए पेट मे ठीक से आग(जठराग्नि) प्रदीप्त होनी ही चाहिए|क्योंकि बिना आग के खाना पचता नहीं हे और खाना पकता भी नहीं है |रसोई मे आग नहीं हे आप कुछ नहीं पका सकते और पेट मे आग नहीं हे आप कुछ नहीं पचा सकते|
महत्व की बात खाने को खाना नहीं खाने को पचाना है |आपने क्या खाया कितना खाया वो महत्व नहीं हे कोई कहता हे मैंने 100 ग्राम खाया,कोई कहता है मैंने 200 ग्राम खाया,कोई कहता है मैंने 300 ग्राम खाया वो कुछ महत्व का नहीं है लेकिन आपने पचाया कितना वो महत्व है |आपने 100 ग्राम खाया और 100 ग्राम पचाया बहुत अच्छा है |और अगर आपने 200 ग्राम खाया और सिर्फ 100 ग्राम पचाया वो बहुत बेकार है |आपने 300 ग्राम खाया और उसमे से 100 ग्राम भी पचा नहीं सके वो बहुत खराब है !!
खाना पच नहीं रहा तो समझ लीजिये विष निर्माण हो रहा है शरीर में ! और यही सारी बीमारियो का कारण है ! तो खाना अच्छे से पचे इसके लिए वाग्भट्ट जी ने सूत्र दिया !!
भोजनान्ते विषं वारी (मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है )
इसलिए खाने के तुरंत बाद पानी कभी मत पिये !

अब आपके मन मे सवाल आएगा कितनी देर तक नहीं पीना ???
तो 1 घंटे 48 मिनट तक नहीं पीना ! अब आप कहेंगे इसका क्या calculation हैं ??
बात ऐसी है ! जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि द्वारा सब एक दूसरे मे मिक्स होता है और फिर खाना पेस्ट मे बदलता हैं है ! पेस्ट मे बदलने की क्रिया होने तक 1 घंटा 48 मिनट का समय लगता है ! उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है ! (बुझती तो नहीं लेकिन बहुत धीमी हो जाती है )
पेस्ट बनने के बाद शरीर मे रस बनने की परिक्रिया शुरू होती है ! तब हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती हैं तब आप जितना इच्छा हो उतना पानी पिये !!
जो बहुत मेहनती लोग है (खेत मे हल चलाने वाले ,रिक्शा खीचने वाले पत्थर तोड़ने वाले  उनको 1 घंटे के बाद ही रस बनने लगता है उनको एक घंटे बाद पानी पीना चाहिए !
अब आप कहेंगे खाना खाने के पहले कितने मिनट तक पानी पी सकते हैं ?
तो खाना खाने के 45 मिनट पहले तक आप पानी पी सकते हैं ! 


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कब्ज और गैस की समस्या के घरेलू प्राकृतिक उपचार



                                              

कब्ज
*पके टमाटर का रस एक कप पीने से पुरानी से पुरानी कब्ज दूर होती है और आंतों को ताकत भी मिलती है।
रात में सोते समय 1 से 2 चम्मच अलसी के बीज ताजा पानी से निगल लें। आंतों की खुश्की दूर होकर मल साफ होगा।
*2 अंजीर को रात को पानी में भिगोकर सुबह चबाकर पानी पीने से पेट साफ हो जाता है।
गाजर के रस का रोजाना सेवन करने से कोष्ठबद्धता (कब्ज) ठीक हो जाती है। ऐसे व्यक्ति अर्श (बवासीर) रोग से सुरक्षित रहते हैं।
*गिलोय का बारीक चूर्ण को गुड़ के साथ बराबर की मात्रा में मिलाकर 2 चम्मच सोते समय सेवन करने से कब्ज का रोग दूर हो जाता है।
*अजवायन 10 ग्राम, त्रिफला 10 ग्राम और सेंधानमक 10 ग्राम को बराबर मात्रा में लेकर कूटकर चूर्ण बना लें। रोजाना 3 से 5 ग्राम इस चूर्ण को हल्के गर्म पानी के साथ सेवन करने से काफी पुरानी कब्ज समाप्त हो जाती है।
*थूहर के दूध में कालीमिर्च, लौंग या पीपल भिगोकर सुखा लें। कब्ज से परेशान व्यक्ति को कालीमिर्च या लौंग खिला देने से पेट बिल्कुल साफ हो जाता है।
*सोते समय 1 चम्मच साबुत मेथी दाने को पानी के साथ पीने से कब्ज दूर होगी।


*4 चम्मच सौंफ 1 गिलास पानी में उबालें। जब आधा पानी रह जाये तो छानकर पीने से कब्ज दूर हो जायेगा।

गैस :

*10 पिसी हुई कालीमिर्च को फांककर, ऊपर से गर्म पानी में नीबू निचोड़कर सुबह-शाम पीते रहने से गैस बनना बंद हो जाती है।
*चुकन्दर को खाने से पेट की गैस दूर होती है।
*6 ग्राम अजवाइन में लगभग 2 ग्राम कालानमक को मिलाकर फंकी देकर गर्म पानी पिलाने से गैस मिटती है।
*पेट में गैस बनने पर सुबह 4 कली लहसुन की खाये इससे पाचन शक्ति बढ़ती है और गैस दूर होती है।

विशिष्ट परामर्श-



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तनाव (टेंशन) दूर करने के उपाय,उपचार

                                          

  अपने दैनिक जीवन का निरीक्षण करके और कुछ आदतों को बदलकर आप सभी नहीं तो कुछ तनाव उत्पन्न करने वाले कारणों को कम कर सकते हैं.
आधुनिक जीवन में तनाव न हो यह संभव नहीं है. जीवन मिला है तो रोजमर्रा की परेशानियां भी मिली हैं. गरीब, मध्यवर्गीय, धनी, धनकुबेर – सभी किसी-न-किसी कारण से चिंतित रहते हैं और तनाव उनके शरीर को खोखला करता रहता है. समस्याओं की प्रतिक्रिया करने से तनाव उपजता है. तनाव जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है. हांलाकि मेरा यह मानना है कि हमारा ज्यादातर तनाव अवांछित होता है और इसे कुछ सरल और कुछ कम सरल उपाय अपनाकर कम किया जा सकता है. यह चुटकियों में संभव नहीं है – मुझे इसमें सालों लगे हैं और अभी भी मैं तनाव पैदा करने वाले सभी कारणों को दूर नहीं कर पाया हूं. यह लक्ष्य कठिन है लेकिन हासिल करने योग्य है.
एक उदाहरण देखें – यह थोड़ा बढ़ा-चढ़ा कर बताया जा रहा है लेकिन इससे हमारी तनावपूर्ण ज़िंदगी परिलक्षित होती है. आप सवेरे देर से उठते हैं, काम पर समय पर पहुंचने की जद्दोजहद करते हैं, हड़बड़ी में नाश्ता करते हैं, आपकी शर्ट पर चाय छलक जाती है, दाढ़ी बनाते समय छिल जाता है, बाहर निकलने पर याद आता है कि आप अपना मोबाइल या पर्स भूल आये हैं, और भी बहुत कुछ.
अब आप भीड़ भरे ट्रेफिक में फंसे हुए हैं और आपका पारा धीरे-धीरे चढ़ता जा रहा है. कोई आपसे आगे गाड़ी निकालने की कोशिश करता है और आप उबल पड़ते हैं, आप हार्न बजाते हैं, कोसते हैं, झुंझलाते हैं. इस तरह आप बड़े बुरे मूड में काम पर पहुँचते हैं. आप ज़रूरी कागज़ तलाशते हैं और वह आपको नहीं मिलता, आपकी डेस्क पर सारी चीज़ें अस्तव्यस्त पड़ी हैं, आपका इनबॉक्स भी बहुत बुरी हालत में है, और आपको 25 ईमेल का उत्तर देना है. आप पहले ही कई असाइन्मेंट और प्रोजेक्ट्स में देरी कर चुके हैं और बॉस आपसे खुश नहीं है. 11 बजने से पहले आपको बहुत ज़रूरी 3 काम पूरे करने थे और 12 बज चुके हैं. काम करते-करते कब 2 बज गए पता ही नहीं चला. आपने अपना लंच मिस कर दिया.
ये तो सिर्फ एक बानगी है. आप समझ गए होंगे की मैं क्या कहना चाहता हूँ. आपका दिन ठीक से नहीं गुज़रता. वापसी में भी आप वही ट्रेफिक झेलते हैं. घर पहुँचते-पहुँचते तक आप बेहद बेदम, हलाकान, लेट, और तनावग्रस्त हो जाते हैं. इसके बाद भी आपका ध्यान अगले दिन की ज़रूरी बातों पर लगा रहता है. आप टेबल और इनबॉक्स आप वैसी ही हालत में छोड़कर आये हैं. घर की हालत भी कोई बेहतर नहीं है. शायद घर के दुसरे सदस्यों की लाइफस्टाइल भी आपकी ही तरह की हो गई है इसलिए हमेशा खटपट होती रहती है. बच्चे अपनी चीज़ों को जगह पर नहीं रखते और आप उनपर चिल्लाते रहते हैं. टीवी देखते समय आप जल्दी में बनाया गया तला-भुना खाना खा लेते हैं और उनींदे होकर सोने चले जाते हैं.
हो सकता है कि आपका रोजमर्रा का जीवन इतना बुरा न हो लेकिन इससे आपको उन बातों का पता तो चल ही गया होगा जिनके कारण लोग तनावग्रस्त हो जाते हैं. कारण तो और भी बहुत हो सकते हैं पर उनपर चर्चा बहुत लम्बी हो जायेगी.
तनाव उत्पन्न करने वाले कारणों को कुछ समझ और विचारपूर्वक दूर किया जा सकता है. ये हैं उसके तरीके:-



1. सरलीकरण करें – 



अपनी दिनचर्या को सरल-सहज करना बहुत ज़रूरी है. अपने संकल्प, सूचना-व्यवस्था, आवास और कार्यस्थल, और जीवन में घटित हो रही बातों को सरल बनाना ज़रूरी है. इसके अच्छे परिणाम होते हैं. इसके लिए इसी ब्लौग पर कुछ और लेखों में सुझाव बताये गए हैं.

2.स्वयं को समय दें – 


स्वयं को थोडा अधिक समय देने का प्रयास करें. ज़रूरी नहीं है कि हर काम घड़ी देखकर किया जाए. समय की कमी हो तो मीटिंग टाल दें. यदि फोन या ई-मेल से बात बनती हो तो मिलने की क्या ज़रुरत है? यदि यह संभव न हो तो मीटिंग का कोई वक़्त फिक्स न करें. लोगों से कहें कि वे आपको फोन करके पूछ लें कि आप फ्री हैं या नहीं. इस तरह कभी-कभार बचने वाले थोड़े-थोड़े समय को स्वयं को देने में या पसंदीदा काम करने में लगायें.

3. तनाव को पहचानें – 


यह सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. जो बातें आपको तनावग्रस्त करती हैं उन्हें यदि आप केवल पहचान ही लेंगे तो उन्हें दूर करने के उपाय करना आसान हो जायेगा. स्वयं को दस मिनट दें और सोचें कि आज आप तनाव में और दबाव में क्यों रहे. सप्ताह में ऐसा कितने बार होता है? कौन से लोग, गतिविधियाँ, बातें आपकी ज़िन्दगी को बोझिल बनाती हैं? टॉप 10 की एक लिस्ट बनायें और देखें कि क्या आप उनमें कुछ परिवर्तन ला सकते हैं या नहीं. एक-एक करके उन्हें सुधारते जाएँ और प्रयासरत रहें.

4. अनावश्यक संकल्पों को छोड़ दें –


 हम अपने जीवन में कई सारे संकल्प करते हैं – हमें यह करना है – हमें वह करना है. पत्नी, बच्चे, कामकाज, घर-गृहस्थी, समाज, धर्म, शौक, और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े कई सारे संकल्पों को हम पूरा करने में लगे रहते हैं. इनमें से प्रत्येक की समीक्षा करें. क्या ऐसा कुछ है जो अच्छे परिणाम की अपेक्षा तनाव देता है. इस कार्य को निर्ममतापूर्वक करने की ज़रुरत है. जो कुछ भी आपके शुख-शांति के रास्ते में आता है उसे बेवज़ह ढोने में कोई तुक नहीं है. उस संकल्प को पहले दूर करें जो ज्यादा तनाव देता हो.

5 – जल्दी उठें – 


देर से उठना कई परेशानियों की जड़ है. किसी दिन 15 मिनट देर से उठें तो पाएंगे की रोजमर्रा के सभी काम करने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है. कामकाज पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है. जल्दी उठने की आदत डालें. इसी के साथ जल्दी सोने की आदत भी डालनी चाहिए. काम पर जल्दी निकालने से आप ट्रेफिक की समस्या से बच जाते हैं और ड्राइविंग में मज़ा भी आता है. यह जांचें की आपको तैयार होने में कितना समय लगता है और कहीं पहुँचने में कितना समय लगता है. इस समय को कम करके न आंकें. एक छोटा सा अंतराल भी बड़ा बदलाव ला सकता है. सिर्फ दस मिनट का परिवर्तन लाकर देखें. आपको फर्क पता चलेगा.

6.दूसरों को नियंत्रित न करें –


 याद रखें, हम सारी दुनिया के मालिक नहीं हैं. हम चाहते तो हैं कि ऐसा होता लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम ऐसा ख्याल ही अपने मन में पाल लें. हम चीज़ों और लोगों को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं और इसमें सफल नहीं हो पाते. इससे तनाव बढ़ता ही है. दूसरी चीज़ें जैसी घटित होती हैं और दूसरे लोग जैसे काम करते हैं उसे स्वीकार कर लें. यह भी स्वीकार कर लें कि अलग-अलग परिस्थितियों में चीज़ें एक ही तरह से नहीं होतीं. धयान रखें, आप केवल स्वयं पर ही नियंत्रण रख सकते हैं. इसीलिए दूसरों को नियंत्रित करने से पहले स्वयं को काबू में रखने का काम करें. यह भी सीखें कि स्वयं पर काम थोपने के बजाय आप दूसरों से भी उसे करवा सकते हैं. हममें दूसरों को अपने अधीन रखने कि अदम्य इच्छा होती है. इससे बचने में ही हमारी भलाई है. यह जीवन को तनावमुक्त रखता है.



7. मल्टीटास्किंग बंद करें – 


मल्टीटास्किंग का अर्थ है एक साथ कई काम करना, जैसे कम्प्युटर कर लेता है. कई लोग इसे बहुत बड़ा गुण समझते हैं लेकिन हकीकत में इसके नुकसान अधिक हैं. यह हमारी काम करने की गति को सुस्त और बाधित कर देता है. इससे काम के ज़रूरी पक्षों से ध्यान हट भी सकता है. यह तनाव बढ़ाता है. एक वक़्त में एक ही काम करें.

8. टालमटोल करने की प्रवृत्ति छोडें –

 हम सभी ऐसा करते हैं. इसके कारण काम का दबाव बढ़ता जाता है. ‘अभी ही करना है’ की आदत डाल लें. अपने इनबॉक्स और टेबल को साफ़ रखें.

9. व्यवस्था लायें – 

कुछ हद तक सभी व्यक्ति अव्यवस्था के बीच रहते हैं. यदि हम व्यवस्था बनाये रखने का प्रयास करें और इसमें प्रारंभ में सफल हो भी जाएँ तो भी अव्यवस्था को जगह बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता. अपने माहौल में अव्यवस्था रखने से तनाव बढ़ता है. इससे हमें चीज़ें तलाशने में देर लग जाती है और कामकाज में बाधा आती है. अपने परिवेश में व्यवस्था लायें. शुरुआत अपनी टेबल और दराज़ से करें. घर के किसी एक कोने से शुरुआत करें. पूरे घर को दुरुस्त करना ठीक न होगा. छोटे से हिस्से से शुरुआत करें और व्यवस्था को वहां से आगे फैलने दें.

10॰ ऊर्जा का क्षय रोकें – 


यदि आपने पहली स्टेप में बताये अनुसार तनाव उत्पन्न करनेवाले कारणों की पहचान की है तो आपने शायद ऐसे काम भी नोट किये होंगे जो आपकी ऊर्जा को सिर्फ नष्ट करते हैं. कुछ काम ऐसे होते हैं जिनमें दूसरे कामों कि अपेक्षा ज्यादा ऊर्जा और समय लगता है. उन्हें पहचानें और हटायें. जिंदगी बेहतर जीने के लिए भरपूर ऊर्जा का होना जरूरी है.

11.दूसरों की मदद करें – 


यह टिप विरोधाभासी नहीं है. यह न सोचें कि आप तो वैसे ही काम के बोझ तले दबे हुए हैं और दूसरों कि मदद करके तो आपका कचूमर ही नक़ल जायेगा. दूसरों की मदद करने से, स्वयंसेवक के बतौर काम करने से, या चैरिटी संगठन में काम करने से आप भीतर से बहुत अच्छा अनुभव करते हैं और यह आपका तनाव दूर करता है. यदि आप दूसरों पर नियंत्रण ही करना जानते हैं तो यह आपके लिए कुछ मुश्किल होगा. यदि आप इसे बहुत सरसरे तरीके से करते हैं तो इसका लाभ आपको न मिलेगा. इसे सहजता और सद्भावना से करें. दूसरों का जीवन बेहतर होगा तभी आपका जीवन बेहतर बनेगा.

12. ज़रा सा आराम करते चलें – 

कामकाज के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लेना सही रहता है. यदि आप दो घंटों से काम में भिडे हुए हैं तो जरा ठहरें. अपने कन्धों और बांहों को आराम देने के लिए फैलाएं. टहलें, पानी पियें. बाहर जाएँ, खुला आसमान देखें, ताजी हवा में साँस लें. किसी से बात करें. रचनात्मकता अच्छी बात है लेकिन जीवन उससे ज्यादा कीमती है. अपनी ऑनलाइन गतिविधियों पर भी थोड़ा नियंत्रण रखें.

13॰ मुश्किल लोगों से दूर रहें


 क्या आप उन्हें जानते हैं? ये लोग हैं आपके बौस, कलीग, कस्टमर, दोस्त, परिजन, आदि. कभी-कभी ये ही हमारी ज़िन्दगी को मुश्किल बना देते हैं. उनसे लड़ना ठीक न होगा इसलिए उन्हें टालने में ही भलाई है.

14. धीरे करें – 


आपाधापी में लगे रहने के बजाय थोडी कम रफ़्तार से काम करने में चीज़ें बेहतर तरीके से होती हैं. आननफानन टाइप करके बाद में गलतियाँ सुधारने से बेहतर है कि धीरे टाइप करें. खाने का लुत्फ़ उठायें, लोगों से मन बहलायें, दुनिया देखें. तनाव दूर करने में यह टिप बड़ी कारगर है.


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15. ज़रूरी कामों की लिस्ट बनायें – 


क्या इसके बारे में भी विस्तार से बताना पड़ेगा? ज़रूरी कामों को प्राथमिकता के आधार पर करने के लिए एक लिस्ट बना लेना चाहिए और उसके अनुसार काम करना चाहिए.

16. कसरत करना –


 इसके कई लाभ हैं. शारीरिक और मानसिक स्तर पर यह बहुत प्रभावशील है. यह शरीर को फिट रखने के साथ-साथ तनाव से भी कुशलता से निपटती है. एक स्वस्थ और फिट व्यक्ति थकान और दबाव का सामना बेहतर तरीके से कर सकता है. दूसरी ओर, अस्वस्थ होना स्वयं में बहुत बड़ा घाटा है. कसरत हमें रोग और तनाव से दूर रखती है.

17.काम छोड़ दें – 


यह भयावह टिप है. इसे कर पाना सबके बस की बात नहीं है. सच कहूँ तो आपका कामकाज या नौकरी आपके तनाव का सबसे बड़ा कारण है. यदि आपको आर्थिक मोर्चे पर कुछ सुरक्षा हासिल है तो ज़रा सोचें – क्या आप नौकरी के बदले कुछ ऐसा कर सकते हैं जो आप सदैव करना चाहते थे. यदि आप ऐसा कर पाते हैं तो आपके जीवन में एड़ी से चोटी तक परिवर्तन आ जायेगा. केवल यही टिप आपका तनाव ९०% तक कम कर सकती है. इसे यूँ ही टालने की बजाय गंभीरता से लें – शायद ऐसी कई संभावनाएं हों जिनकी ओर आपका ध्यान नहीं गया हो.

18. अच्छा खाएं – 


यह कसरत करने जितना, बल्कि उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है. सम्यक, संतुलित, और सात्विक आहार शरीर और मन को पुष्ट करता है. तला हुआ चटपट खाना हाजमे को ख़राब करता है और शरीर को बोझिल बनाता है.

19.आभारी बनें – 

यदि आप दूसरों का आभार व्यक्त करते हैं तो इसके सकारात्मक परिणाम होते हैं. आपके जीवन से ऋणात्मक सोच बाहर निकलती है. दूसरे भी आपकी इस क्रिया से अच्छा अनुभव करते हैं. अपने जीवन में आपने जो कुछ भी पाया है और जिन व्यक्तियों का साथ आपको मिला है उसे उपहार मानकर उसके लिए ईश्वर का आभार व्यक्त करें. जीवन के प्रति इस प्रकार का दृष्टिकोण रखकर आप अपने जीवन में सुख और शांति के आने का मार्ग प्रशस्त करेंगे. यह आत्मिक समृद्धि का सूत्र है.




असालिया के अद्भुत फायदे

                                                          

असालिया प्राय:सारे भारत वर्ष में बोई जाती है । इसको विभीन्न नामों से जाना जाता है। जैसे हालों, असालु, असालियों,हालिम, अहालील आदी ।

गुण दोष और प्रभाव :- 

आयुर्वेदिक मतानुसार यह औषधि गरम कडवी पौष्टकि दुध बढाने वाली बाजीकरण और कामोदीपक है। यह वात कफ,अतिसार, आैर त्वचा के रोगाें को नष्ट करने वाली है । युनानी मत के अनुसार इसके बीज यकृत के रोग ,छाती के दर्द ,गठिया आैर आमाशय के तकलीफो में ये लाभजनक है। ये मस्तिष्क शक्ति बढाने वाले आैर बुद्धिवर्धक है ।
इसको बीज को पंजाब में स्तनों में दुध बढ़ानेवाला माना जाता है । इनको दुध के साथ मिलाकर पिलाया जाता है। परन्तु गर्भवती स्त्रियों को इन्हें नहीं पिलाना चाहीये ।

लंबाई बढाने के लीए:- 

बच्चों में अक्सर कद (Height) को लेकर चिंता बनी रहती है । मिश्री पाउडर में असालिया को मिलाकर दिन में दो बार दुध के साथ देने पर लंबाई बढती है । आैर शरीर का विकास होता है ।

आमाशय की पीडा :- 

इसका काढा पिलाने से अमाशय की पीडा मिटती है ।

सुजन :-

इसके बीजों को कुटकर नींबु के रस में मिलाकर लेप करने से सुजन बिखर जाती है ।

श्वास  व खांसी :- 

इसकी  डालियों को आेटकर पिलाने से श्वास आैर सुंखी खांसी मिटती है ।

खुनी बवासीर :- 

इसका शर्बत पिलाने से खुनी बवासीर मेें लाभ होता है ।

अतिसार :-

इसकी जड. के चुर्ण की फंकी देने से बार बार दस्त मिटता है ।

खुजली और दाह :- 

दाह और खुजली पैदा करनेवाले पदार्थो के विष को उतारने के लिये इसके बिजों का लेप निकालकर पिलाना चाहिये ।
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एलर्जी दूर करने के घरेलू नुस्खे और उपचार

                                             
                                                     

       एलर्जी की समस्या बच्चों से लेकर सभी उम्र के लोगों में देखने को मिलती है। शहरी वातावरण में तो इस तरह की समस्याएं ओर भी ज्यादा हैं। एलर्जी के बहुत से प्रकार होते हैं।


एलर्जी के कारण -

1.खाने पीने की चीज़ों के द्धारा: कुछ लोगो को खाने पीने की चीज़ों से भी एलर्जी होती हैं जैसे मछली, मशरूम, दूध, अंडा, गेहूं या कोई ओर चीज़।
2.मौसम के बदलने से: कुछ लोगो को मौसम के बदलने से भी एलर्जी जैसी समस्या का सामना करना पड़ता हैं, बारिश के मौसम में यह समस्या अधिक होती हैं ।

3.वातावरण के द्धारा: हवा में मौजूद फूलों के परागकण, धूल, मिटटी, धुआं और पशुओं से एलर्जी हो सकती हैं।
कीड़ों के काटने के द्धारा: मधुमक्खी, ततैया आदि के काटने से भी कुछ लोगों में एलर्जी की समस्या हो सकती हैं, जैसे त्वचा की सूजन और दर्द।
4.दवाईयों के द्धारा: अंग्रेजी दवाओं से भी कुछ लोगो को एलर्जी हो सकती हैं।


एलर्जी के लक्षण

नाक की एलर्जी: 

जुकाम होना, नाक बंद होना और बहना या छींके आना।

त्वचा में एलर्जी:

शरीर में किसी भी जगह लाल लाल दाने पड़ना और उनमे खुजली या सूजन होना शरीर में किसी भी अंग पर खारिश होना या त्वचा का लाल होना।

खाने से एलर्जी: 

खाने के एलर्जी की स्तिथि में पेट में दर्द, गैस, उलटी आना, दस्त की शिकायत या त्वचा लाल हो सकती हैं।

फेफड़ों में एलर्जी: 

गले में तेज़ जलन और खारिश होना, साँस लेने में तकलीफ होना। इसके अलावा स्वाद या गंध न आभास न होना व मुँह के आसपास सूजन होना और कुछ भी खाने में कठिनाई होना भी एलर्जी के लक्षण हैं।

अन्य लक्षण:

आँखों में जलन, खुजली होना या पानी आना।

एलर्जी दूर करने के घरेलू,आयुर्वेदिक उपाय 


अरंडी का तेल या कैस्टर ऑयल

आंतों, स्किन और नाक की एलर्जी से छुटकारा पाने के लिए फलों और सब्जी के रस में 5 बूंद कैस्टर ऑयल डाल कर रोज़ सुबह खाली पेट पीयें। फलों या सब्जियों के रस की जगह पानी का प्रयोग भी किया जा सकता हैं।

अंजीर और छुहारे के उपयोग से

एक अंजीर और एक छुआरा लें और उसे दूध में उबाल लें रात के समय इस उपाय के प्रयोग से भी एलर्जी से वचाव होता हैं।

पानी की भाप

रोज़ पानी की भाप लेने से भी छींकने, खांसने और नाक की एलर्जी से राहत मिलती हैं और यह उपाय सबसे अच्छे उपायों में से हैं।

हर्बल चाय

हर्बल चाय से एलर्जी की समस्या से राहत मिलती हैं। अदरक, काली मिर्च, तुलसी के पत्ते, लौंग व मिश्री से घर पर ही हर्बल चाय बनाये और पीयें। इसके सेवन से एलर्जी से भी छुटकारा मिलता हैं साथ में यह ऊर्जा का भी अच्छा स्त्रोत हैं। इसके अलावा ग्रीन टी भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर एलर्जी को दूर करने मदद करती हैं।

निम्बू का रस

गुनगुने पानी में आधा चम्मच निम्बू का रस और एक शहद का चम्मच मिलाएं और रोज़ सुबह इस उपाय का प्रयोग करने से एलर्जी में राहत मिलती हैं।

नीम की पत्तियां

नीम की पत्तियों को पीसकर पेस्ट बना ले और फिर उसकी गोलियां बना कर रख लें। रोज़ सुबह खाली पेट शहद में इन गोलियों को डूबा कर निगलें और इसके बाद एक घंटे तक कुछ न खाएं। इस उपाय से एलर्जी से राहत मिलती हैं।

त्वचा की एलर्जी के लिए निम्बू का प्रयोग

निम्बू एक अच्छा एंटी-बैक्टीरियल हैं, इसलिए अगर आपको त्वचा की एलर्जी की समस्या हैं तो निम्बू के रस में नारियल तेल मिलाएं और प्रभावित स्थान पर रात भर लगा के रखें। फिर इसे नीम के पानी से धो दें। इससे राहत मिलती हैं इसके अलावा खसखस के बीज, शहद और नींबू के रस को मिला कर प्रयोग करने से त्वचा की एलर्जी में राहत मिलती हैं।

स्किन एलर्जी पैक

स्किन की एलर्जी होने पर यह पैक भी बहुत उपयोगी होता हैं। इस बनाने के लिए कुछ तुलसी के पत्तों को पीस कर उसमे एक चम्मच जैतून का तेल, 2 कालिया लहसुन, थोड़ा सा नमक और काली मिर्च डाल कर अच्छे से पीस लें, उसके बाद प्रभावित जगह पर लगायें कुछ देर लगाने के बाद धो दें। इस उपाय से भी अच्छे परिणाम मिलते हैं

फलों के जूस के सेवन से

अगर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हैं तो आपको एलर्जी होने का खतरा नही होता। रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए रोजाना एक गिलास गाजर का जूस पीना सर्वोत्तम हैं। आपकी मर्जी हो तो आप मिक्स जूस जैसे खीरे, चुकंदर और गाजर को मिला कर भी सेवन कर सकते हैं।

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एलर्जी के लिए कुछ और आयुर्वेदिक उपाय-

1.स्किन एलर्जी होने पर फिटकरी के पानी से उस भाग को धोएं। नारियल तेल में कपूर या जैतून तेल मिलाकर लगाएं।
2. 100 मिलीलीटर खीरे के रस, 100 मिलीलीटर चुकंदर के रस और 300 मिलीलीटर गाजर के जूस को मिला कर पीने से भी लाभ मिलता हैं।
3.नाक की एलर्जी होने पर सुबह भूखे पेट 1 चम्मच गिलोय और 2 चम्मच आंवले के रस में 1चम्मच शहद मिला कर कुछ दिन इसका सेवन करें इससे अच्छे परिणाम मिलते हैं।
4.च्यवनप्राश के रोजाना सेवन करने से भी लाभ होता हैं।
5. 100 मिलीलीटर खीरे के रस, 100 मिलीलीटर चुकंदर के रस और 300 मिलीलीटर गाजर के जूस को मिला कर पीने से भी लाभ मिलता हैं।


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