14.1.18

ग्लूकोमा यानी काला मोतिया की जानकारी , सावधानियाँ और उपचार // Information about glaucoma ,black cataract, precautions and treatments





     भारत में अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक कारण काला मोतिया या ग्लूकोमा है। इस बीमारी के कारणों को देखने के पहले हमें आँख की रचना समझना होगी। आँख में स्थित कॉर्निया के पीछे आँखों को सही आकार और पोषण देने वाला तरल पदार्थ होता है, जिसे एक्वेस ह्यूमर कहते हैं।
   kundलेंस के चारों ओर स्थित सीलियरी टिश्यू इस तरल पदार्थ को लगातार बनाते रहते हैं। और यह द्रव पुतलियों के द्वारा आँखों के भीतरी हिस्से में जाता है। इस तरह से आँखों में एक्वेस ह्यूमर का बनना और बहना लगातार होता रहता है, स्वस्थ आँखों के लिए यह जरूरी है।
आँखों के भीतरी हिस्से में कितना दबाव रहे यह तरल पदार्थ की मात्रा पर निर्भर रहता है। जब ग्लूकोमा होता है तब हमारी आँखों में इस तरल पदार्थ का दबाव बहुत बढ़ जाता है। कभी-कभी आँखों की बहाव नलिकाओं का मार्ग रुक जाता है, लेकिन सीलियरी ऊतक इसे लगातार बनाते ही जाते हैं।

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    ऐसे में जब आँखों में ऑप्टिक नर्व के ऊपर पानी का दबाव अचानक बढ़ जाता है तो ग्लूकोमा हो जाता है। अगर आँखों में पानी का इतना ही दबाव लंबे समय तक बना रहता है तो इससे आँखों की ऑप्टिक नर्व नष्ट हो सकती है। समय रहते यदि इस बीमारी का इलाज नहीं कराया जाता तो इससे दृष्टि पूरी तरह जा सकती है।
ग्लूकोमा के प्रकार -
ओपन एंगल ग्लूकोमा- 
    अधिकांश रुप से यही ग्लूकोमा होता है। इसमें तरल पदार्थ मुख्यतः आँखों की पुतलियों से होकर आँखों के दूसरे भागों में बहता है और द्रव वहाँ नहीं पहुँचता जहाँ इसे छाना जाता है। जिससे आँखों में इस द्रव का दबाव बढ़ जाता है कि दृष्टि कमजोर हो जाती है।
लो टेंशन या नॉर्मल एंगल ग्लूकोमा - 
इसमें आँखों की तंत्रिका नष्ट हो जाती है और देखने की क्षमता में कमी आ जाती है।
एंगल क्लोजर ग्लूकोमा -
इस प्रकार के ग्लूकोमा में आँखों के द्रव का दबाव अचानक ही बहुत बढ़ जाता है, और दबाव को कम करने के लिए तुरंत इलाज की आवश्यकता होती है।
कन्जनाइटल ग्लूकोमा -
 इसमें जन्म से बच्चे को ग्लूकोमा के लक्षण पाए जाते हैं।
क्या होते हैं लक्षण- 

   अधिकांश लोगों को ग्लूकोमा के बारे में कम ही जानकारी है इसलिए इसके लक्षणों को तब तक पहचाना नहीं जाता जब तक कि उन्हें आँखों से कम नहीं दिखाई देने लगता। इस बीमारी के शुरुआती दौर में जब आँखों की तंत्रिकाओं की कोशिकाएँ मामूली रूप से टूटने लगती हैं तो आँखों के सामने छोटे-छोटे बिंदु और रंगीन धब्बे दिखाई देते हैं। पहले-पहल लोग इन लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते परिणामस्वरुप उन्हें हमेशा के लिए अपनी आँखों की रोशनी खोनी पड़ती है।
   ग्लूकोमा के जितने भी प्रकार हैं उनमें से एक्यूट एंगल-क्लोजर ग्लूकोमा के लक्षणों की पहचान पहले से की जा सकती है क्योंकि यह बीमारी धीरे-धीरे आती है। इसके प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं लेकिन अलग-अलग लोगों में ये अलग हो सकते हैं- आँखों के आगे इंद्रधनुष जैसी रंगीन रोशनी का घेरा दिखाई देना, सिर में चक्कर और मितली आना, आँखों में तेज दर्द होना आदि।
   हालाँकि एक्यूट एंगल ग्लूकोमा के ये लक्षण आँखों की दूसरी समस्याओं में भी देखे जा सकते हैं। उपरोक्त लक्षणों में से अगर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को किसी भी लक्षण का आभास हो तो आप तत्काल नेत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।

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इन बातों से रहें सावधान-

ग्लूकोमा के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि सामान्य रुप से पहले इसके कोई विशेष लक्षण दिखाई नहीं देते, जिनके आधार पर बीमारी को पहचाना जा सके। फिर भी इस संबंध में कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए-
अगर परिवार में माता-पिता को ग्लूकोमा है तो बच्चों को भी यह बीमारी हो सकती है।
अगर आप चश्मा पहनती हैं तो आप अपनी आँखों की नियमित जाँच जरूर करवाएँ।
डायबिटीज से पीड़ित लोगों को ग्लूकोमा का खतरा बना रहता है।
   ब्लड प्रेशर बहुत अधिक या कम होने पर भी ग्लूकोमा हो सकता है। इसलिए अगर आपका ब्लडप्रेशर बहुत ज्यादा या कम रहता हो तो आपको नियमित रूप से आँखों की जाँच करवानी चाहिए।
*हृदय रोग भी इस बीमारी का एक कारण है।
*अगर आप हैं 40 वर्ष से अधिक के हैं तो वर्ष में एक बार आँखों की जाँच जरूर कराएँ।
रोग अवधि-
*रोग के प्रकार, और ली गई चिकित्सा के आधार पर, ठीक होने का समय बदलता है।
*यदि पारम्परिक शल्यक्रिया हो तो एक सप्ताह से अधिक का समय लगता है।
*यदि लेज़र द्वारा शल्यक्रिया हुई हो, तो रोगी अपनी सामान्य गतिविधियों को शल्यक्रिया के अगले दिन से ही कर सकता है।
*जाँच और परीक्षण
*आँख के भीतरी दबाव को मापना (टोनोमेट्री)।
*दृष्टि क्षेत्र का परीक्षण।
*पेचिमेट्री (कॉर्निया की मोटाई को नापना)।
*गोनियोस्कोपी
*ओफ्थाल्मोस्कोपी
रोकथाम (बचाव)-
भावनात्मक तनाव से बचें और शांतिपूर्ण जीवन शैली अपनाएँ।
अत्यधिक टीवी और फिल्में देखने तथा अत्यधिक पढ़ने से बचें, क्योंकि ऐसी आदतें आँखों पर लम्बा जोर डालती हैं।
रोग का शीघ्र निर्धारण और चिकित्सा।
उन एलर्जन से बचें जो ग्लूकोमा को उत्प्रेरित करते हैं।
आँखों की सुरक्षा हेतु चश्मा/लेंस पहनें।
आँखों की नियमित देख-भाल करें।

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ध्यान देने की बातें-

आंख में दर्द
धुन्धला दिखाई देना
मतली और उल्टी
डॉक्टर को कब दिखाएँअपने डॉक्टर से संपर्क करें यदि आपको
आँखों में लालिमा
दृष्टि की हानि
धुंधला या सुरंग के मुहाने जैसा दिखाई देता है।
परहेज और आहार
लेने योग्य आहार-
विटामिन-ए, बी, सी, और ई (मुख्यतः सी)।
गिरियाँ, मेवे और अनाज।
फल और सब्जियाँ।
खट्टे फल, पत्तेदार हरी सब्जियाँ, अंडे, गाजर, दूध, लीन मीट, समुद्री भोजन, ब्लूबेरिस, चेरी, टमाटर ये सभी ग्लूकोमा के लिए अच्छे हैं।
इनसे परहेज करें-
चाय और कॉफ़ी
शीतल पेय
शराब और तम्बाकू
शक्कर
मसाले और अचार
माँस के आहार
योग और व्यायाम
नियमित व्यायाम ओपन-एंगल ग्लूकोमा के रोगियों की आँख के दबाव को धीमे-धीमे कम करता है। क्लोज्ड-एंगल ग्लूकोमा पर व्यायाम का कोई प्रभाव नहीं होता।
आँखों के व्यायाम — YouTube
आँखों के विश्रामदायक व्यायाम
योग — YouTube

घरेलू उपाय (उपचार)-
आँखों में तेजी से ठन्डे पानी के छींटे मारें। यह आँखों के रक्त संचार को उत्तेजित करता है और दबाव को हटाता है।
डॉक्टर द्वारा आम सवालों के जवाब-
प्रश्न-. मुझे उच्च रक्चाप पता चला है; क्या इससे मेरी आंख का दबाव प्रभावित होगा? 
   यदि आपका रक्तचाप ढ़ता है तो आपकी आंख का भीतरी दबाव तुरंत बढ़ सकता है। तब आपकी आँख इसके लिए प्रयत्न करके स्वयम पर के दबाव को उसके सामान्य स्तर तक लाएगी। हालाँकि, लम्बे समय तक बढ़ा हुआ रक्तचाप आपकी आँख में प्रवाह को घटा सकता है जो कि ग्लूकोमा के लिए हानिकारक होता है।
प्रश्न-. ग्लूकोमा में दृष्टिक्षेत्र की हानि क्यों होती है? 
   ऑप्टिक नर्व की महीन शिराओं का बढ़ता हुआ नुकसान धीरे-धीरे दृष्टि क्षेत्र के नुक्सान और आखिरकार दृष्टि के नुकसान अर्थात दृष्टिहीनता में बदल जाता है। हालाँकि, ग्लूकोमा के अधिकतर रूपों में रोग के काफी बढ़ जाने तक रोगी को लक्षणों का पता नहीं चलता। रोगी को परिधीय दृष्टि की शुरुआती हानि समझ में नहीं आती, और धीरे बढ़ने के कारण इसको समझ पाना बगैर खास जाँचों के लगभग नामुमकिन है। ग्लूकोमा में नाक के परिधीय दृष्टि क्षेत्र की हानि सबसे पहले होती है। बढ़ते हुए परिवर्तनों और दृष्टि क्षेत्र के दोषों के सन्दर्भ में इनको संभालना ग्लूकोमा के रोगी के मामले में सबसे कठिन कार्य है।
प्रश्न-. क्या उपचार के बाद मेरी दृष्टि वापस आ जाएगी?
     दुर्भाग्यवश, ग्लूकोमा के कारण हुआ दृष्टि का कोई भी नुकसान स्थाई होता है और वापस नहीं आ सकता। यदि शुरुआती चरण में ही पता चल जाये तो ग्लूकोमा को नियंत्रित किया जा सकता है और आगे का नुकसान थोड़ा या बिलकुल ना के बराबर हो सकता है। यदि बिना उपचार छोड़ दिया जाये तो पहले परिधीय दृष्टि, बाद में केंद्र की दृष्टि प्रभावित होगी और दृष्टिहीनता हो सकती है। इसलिए आँखों की नियमित सुरक्षात्मक जाँच आवश्यक और महत्वपूर्ण हैं।

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प्रश्न- यदि मेरी आँख का दबाव ज्यादा है तो क्या मुझे ग्लूकोमा हो सकता है? 
   ये आवश्यक नहीं है। आँख के बढ़े दबाव वाले हर व्यक्ति को ग्लूकोमा नहीं होता। कुछ लोग आँख के बढ़े दबाव को अन्य लोगों से बेहतर सहन कर सकते हैं। साथ ही, दबाव का कोई स्तर किसी व्यक्ति के लिए अधिक हो सकता है जबकि अन्य लोगों के लिये वह सामान्य होता है।
प्रश्न-क्या आँख में बढ़ते दबाव के साथ मुझे ग्लूकोमा उत्पन्न हो सकता है? 
   जी हाँ। ग्लूकोमा बिना आँख के दबाव के बढ़े हुए भी उत्पन्न हो सकता है। ग्लूकोमा के इस रूप को कम-दबाव या सामान्य-दबाव वाला ग्लूकोमा कहते हैं। यह ओपन-एंगल ग्लूकोमा जितना आम नहीं है।
ग्लूकोमा का इलाज अब सिर्फ एक इंजेक्शन से

लिक्विड
ड्रेनेज ट्यूब
हाइपोडर्मिक
इंजेक्शन
नए तरीके से 1 महीने में ही आराम
अभी 3 माह में मिलता है आराम
ब्रिटेन में अंधेपन के इलाज की नई तकनीक के टेस्ट सफल, भारत में सवा करोड़ लोगों को ग्लूकोमा
{ अभी ट्रैबेक्यूलेक्टॉमी प्रोसिजर से ग्लूकोमा का इलाज होता है। आंखों में चीरा लगा ट्यूब के जरिये आंख में जमा पानी निकाला जाता है। फिर टांके लगते हैं। ठीक होने में दो से तीन महीने लगते हैं। ग्लूकोमा के मरीज को अगर डायबिटीज भी है तो इलाज में ज्यादा दिक्कतें आती हैं।
{ यह जेन जैल स्टेंट तकनीक है। इसमें एक इंजेक्शन के जरिए महज 6 एमएम की लचीली ड्रेनेज ट्यूब या स्टेंट को आंखों में डाला जाता है। यह आंखों के कोन (छिद्र) में फिट हो जाती है। कोन वह जगह है जहां से आंखों में मौजूद लिक्विड बाहर निकलता है। कोन में ब्लॉकेज होेने पर जैल जैसा लिक्विड बाहर निकलने के बजाए आई लैंस में जमा होने लगता है। फिर ऑप्टिक नर्व पर दबाव डालकर उसे नुकसान पहुंचाता है। इससे आखिर में दृष्टि चली जाती है। ट्यूब इसी ब्लॉकेज को खोलेगी। मरीज को एक महीने में आराम मिलने लगेगा।
एजेंसी| लंदन



होम्योपैथिक औषधि बेलाडोना ( Belladonna ) का गुण लक्षण उपयोग


भारतसहित दुनियाभर में अंधेपन के लिए जिम्मेदार सबसे बड़ी बीमारी ग्लूकोमा या काला मोतिया का आसान इलाज मिल गया है। ब्रिटेन के डॉक्टरों ने इसके इलाज की ज्यादा आसान तकनीक ईजाद की है।
नई तकनीक में सिर्फ एक बार ही ग्लूकोमा प्रभावित आंख में इंजेक्शन दिया जाएगा। फिर आंखों में मौजूद ग्लूकोमा की वजह बनने वाला लिक्विड खुद ही बाहर आता रहेगा। इलाज के लिए चीरा देने की जरूरत नहीं होगी। लंदन के रॉयल फ्री हॉस्पिटल के आई सर्जन विक शर्मा के मुताबिक यह इलाज का बहुत ही सुरक्षित और जल्द राहत देने वाला तरीका है। ब्रिटेन में इसके टेस्ट सफल रहे हैं। भारत में भी जल्द इसका उपयोग होने लगेगा। भारत में सवा करोड़ लोग जबकि दुनियाभर में सात करोड़ से ज्यादा लोग ग्लूकोमा से पीड़ित है।
नई तकनीक दूसरी या तीसरी स्टेज तक पहुंच चुके ग्लूकोमा मरीजों के लिए भी कारगर है। डायबिटीज, हाई बीपी और हार्ट की बीमारियों की वजह से भी ग्लूकोमा हो सकता है। बार-बार चश्मे के नंबर बदलना, रोशनी में रंगीन छल्ला दिखना,अक्सर धुंधला दिखाई पड़ना और कम रोशनी में चीजों पर फोकस नहीं कर पाना, इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं।


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