20181204

अनिद्रा की होम्योपैथिक औषधियाँ

                                         

अच्छी सेहत के लिए सिर्फ प्रॉपर डाइट लेना ही काफी नहीं है। अच्छी नींद भी हेल्दी रहने के लिए उतनी ही जरूरी है। आजकल कई प्रफेशन में डिफरेंट शिफ्ट्स में काम होता है। ऐसे में सबसे ज्यादा नींद पर असर पड़ता है। कई बार तो ऐसा होता है कि टुकड़ों में नींद पूरी करनी पड़ती है, लेकिन छोटी-छोटी नैप लेना सेहत के लिहाज से बेहद खराब होता है। एक रिसर्च के मुताबिक, खराब नींद यानि छोटे-छोटे टुकड़ों में ली गई नींद बिल्कुल न सोने से भी ज्यादा खतरनाक होती है। इससे कई तरह की बीमारियां शरीर को शिकार बना सकती हैं।
टुकड़ों में सोने वाले लोग सुबह उठकर भी फ्रेश नहीं फील करते हैं। रिसर्च में यह साबित हो चुका है। अमेरिका के जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में दो तरह की नींद का अध्ययन किया है। इसमें रुकावट के साथ सोने वाली नींद और कम समय के लिए ही सही लेकिन शांति वाली नींद शामिल है। इन लोगों के मिजाज को जब कंपेयर किया गया तो पाया कि टुकड़ों में सोने वाले लोगों की तुलना में शांति से सोने वाले लोगों का मूड बेहतर था।
खराब नींद किडनी पर भी बुरा असर डालती है। शरीर में ज्यादातर प्रोसेस नैचरल डेली रिद्म (सरकाडियन क्लॉक या शरीर की प्राकृतिक घड़ी) के आधार पर होते हैं। ये हमारी नींद से ही कंट्रोल होता है। एक रिसर्च के मुताबिक जब सोने की साइकल बिगड़ती है तो किडनी को नुकसान होता है। इससे किडनी से जुड़ी कई बीमारियां हो सकती हैं।
आधी-अधूरी नींद दिल के लिए भी खतरे की घंटी है। इससे हार्ट डिजीज होने के चांस तो बढ़ते ही हैं, साथ ही दिल का दौरा भी पड़ सकता है। एक रिसर्च में खराब नींद की शिकायत करने वालों में अच्छी नींद लेने वालों के मुकाबले 20 फीसदी ज्यादा कोरोनरी कैल्शियम पाया गया।
  कम नींद लेने से दिमाग सही तरह से काम नहीं कर पाता है। इसका सीधा असर हमारी याद‌्‌दाश्त पर पड़ता है। इसके अलावा, पढ़ने, सीखने व डिसीजन लेने की क्षमताएं भी इफेक्ट होती हैं। खराब नींद से स्ट्रेस लेवल भी बढ़ता है और इमोशनली वीक लोग डिप्रेशन के भी शिकार हो सकते हैं।


होम्योपैथिक उपचार में प्रयुक्त विभिन्न औषधियों से चिकित्सा–


नींद लाने के लिए बार-बार कॉफिया औषधि का सेवन करना होम्योपैथी चिकित्सा नहीं है, हां यदि नींद न आना ही एकमात्र लक्षण हो दूसरा कोई लक्षण न हो तब इस प्रकार की औषधियां लाभकारी है जिनका नींद लाने पर विशेष-प्रभाव होता है- कैल्केरिया कार्ब, सल्फर, फॉसफोरस, कॉफिया या ऐकानाइट आदि।
1. लाइकोडियम- 


दोपहर के समय में भोजन करने के बाद नींद तेज आ रही हो और नींद खुलने के बाद बहुत अधिक सुस्ती महसूस हो तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए लाइकोडियम औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है।

2. चायना- 


रक्त-स्राव या दस्त होने के कारण से या शरीर में अधिक कमजोरी आ जाने की वजह से नींद न आना या फिर चाय पीने के कारण से अनिद्रा रोग हो गया हो तो उपचार करने के लिए चायना औषधि 6 या 30 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक है।

3. कैल्केरिया कार्ब – 


इस औषधि की 30 शक्ति का उपयोग दिन में तीन-तीन घंटे के अंतराल सेवन करने से रात के समय में नींद अच्छी आने लगती है। यह नींद किसी प्रकार के नशा करने के समान नहीं होती बल्कि स्वास्थ नींद होती है।


4. कॉफिया – 

खुशी के कारण नींद न आना, लॉटरी या कोई इनाम लग जाने या फिर किसी ऐसे समाचार सुनने से मन उत्तेजित हो उठे और नींद न आए, मस्तिष्क इतना उत्तेजित हो जाए कि आंख ही बंद न हो, मन में एक के बाद दूसरा विचार आता चला जाए, मन में विचारों की भीड़ सी लग जाए, मानसिक उत्तेजना अधिक होने लगे, 3 बजे रात के बाद भी रोगी सो न पाए, सोए भी तो ऊंघता रहें, चौंक कर उठ बैठे, नींद आए भी ता स्वप्न देखें। इस प्रकार के लक्षण रोगी में हो तो उसके इस रोग का उपचार करने के लिए कॉफिया औषधि की 200 शक्ति का उपयोग करना चाहिए। यह नींद लाने के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि है। यदि गुदाद्वार में खुजली होने के कारण से नींद न आ रही हो तो ऐसी अवस्था में भी इसका उपयोग लाभदायक होता है। रोगी के अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए कॉफिया औषधि की 6 या 30 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है।


5. जेल्सीमियम – 

यदि उद्वेगात्मक-उत्तेजना (इमोशनल एक्साइटमेंट) के कारण से नींद न आती हो तो जेल्सीमियम औषधि के सेवन से मन शांत हो जाता है और नींद आ जाती है। किसी भय, आतंक या बुरे समाचार के कारण से नींद न आ रही हो तो जेल्सीमियम औषधि से उपचार करने पर नींद आने लगती है। बुरे समाचार से मन के विचलित हो जाने पर उसे शांत कर नींद ले आते हैं। अधिक काम करने वाले रोगी के अनिंद्रा रोग को ठीक करने के लिए जेल्सीमियम औषधि का उपयोग करना चाहिए। ऐसे रोगी जिनकों अपने व्यापार के कारण से रात में अधिक बेचैनी हो और नींद न आए, सुबह के समय में उठते ही और कारोबार की चिंता में डूब जाते हो तो ऐसे रोगियों के इस रोग को ठीक करने के लिए जेल्सीमियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।


6. ऐकोनाइट –

बूढ़े-व्यक्तियों को नींद न आ रही हो तथा इसके साथ ही उन्हें घबराहट हो रही हो, गर्मी महसूस हो रही हो, चैन से न लेट पाए, करवट बदलते रहें। ऐसे बूढ़े रोगियों के इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए ऐकोनाइट औषधि की 30 का उपयोग करना लाभकारी है। यह औषधि स्नायु-मंडल को शांत करके नींद ले आती है। किसी प्रकार की बेचैनी होने के कारण से नींद न आ रही हो तो रोग को ठीक करने के लिए ऐकोनाइट औषधि का उपयोग करना फायदेमंद होता है।


7. कैम्फर –

नींद न आने पर कैम्फर औषधि के मूल-अर्क की गोलियां बनाकर, घंटे आधे घंटे पर इसका सेवन करने से नींद आ जाती है।


8. इग्नेशिया – 

किसी दु:ख के कारण से नींद न आना, कोई सगे सम्बंधी की मृत्यु हो जाने से मन में दु:ख अधिक हो और इसके कारण से नींद न आना। इस प्रकार के लक्षण से पीड़ित रोगी को इग्नेशिया औषधि की 200 शक्ति का सेवन करना चाहिए। यदि किसी रोगी में भावात्मक या भावुक होने के कारण से नींद न आ रही हो तो उसके इस रोग का उपचार इग्नेशिया औषधि से करना लाभदायक होता है। हिस्टीरिया रोग के कारण से नींद न आ रही हो तो रोग का उपचार करने के लिए इग्नेशिया औषधि की 200 शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद होता है। यदि रोगी को नींद आ भी जाती है तो उसे सपने के साथ नींद आती है, देर रात तक सपना देखता रहता है और रोगी अधिक परेशान रहता है। नींद में जाते ही अंग फड़कते हैं नींद बहुत हल्की आती है, नींद में सब-कुछ सुनाई देता है और उबासियां लेता रहता है लेकिन नींद नहीं आती है। ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए इग्नेशिया औषधि का उपयोग करना उचित होता है। मन में दु:ख हो तथा मानसिक कारणों से नींद न आए और लगातार नींद में चौक उठने की वजह से नींद में गड़बड़ी होती हो तो उपचार करने के लिए इग्नेशिया औषधि की 3 या 30 शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है।


9. बेलाडोना – 

मस्तिष्क में रक्त-संचय होने के कारण से नींद न आने पर बेलाडोना औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना चाहिए। रोगी के मस्तिष्क में रक्त-संचय (हाइपरमिया) के कारण से रोगी ऊंघता रहता है लेकिन मस्तिष्क में थकावट होने के कारण से वह सो नहीं पाता। ऐसे रोगी के रोग का उपचार करने के लिए के लिए भी बेलाडोना औषधि उपयोगी है। रोगी को गहरी नींद आती है और नींद में खर्राटें भरता है, रोगी सोया तो रहता है लेकिन उसकी नींद गहरी नहीं होती। रोगी नींद से अचानक चिल्लाकर या चीखकर उठता है, उसकी मांस-पेशियां फुदकती रहती हैं, मुंह भी लगतार चलता रहता है, ऐसा लगता है मानो वह कुछ चबा रहा हो, दांत किटकिटाते रहते हैं। इस प्रकार के लक्षण होने के साथ ही रोगी का मस्तिष्क शांत नहीं रहता। जब रोगी को सोते समय से उठाया जाता है तो वह उत्तेजित हो जाता है, अपने चारों तरफ प्रचंड आंखों (आंखों को फाड़-फाड़कर देखना) से देखता है, ऐसा लगता है कि मानो वह किसी पर हाथ उठा देगा या रोगी घबराकर, डरा हुआ उठता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए बेलाडोना औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है। अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए कैमोमिला औषधि का उपयोग करने पर लाभ न मिले तो बेलाडोना औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करें।


10. काक्युलस- 

यदि रात के समय में अधिक जागने के कारण से नींद नहीं आ रही हो तो ऐसे रोगी के इस लक्षण को दूर करने के लिए काक्युलस औषधि की 3 से 30 शक्ति का उपयोग करना चाहिए। जिन लोगों का रात के समय में जागने का कार्य करना होता है जैसे-चौकीदार, नर्स आदि, उन्हें यदि नींद न आने की बीमारी हो तो उनके के लिए कौक्युलस औषधि का उपयोग करना फायदेमंद है। यदि नींद आने पर कुछ परेशानी हो और इसके कारण से चक्कर आने लगें तो रोग को ठीक करने के लिए कौक्युलस औषधि का उपयोग करना उचित होता है।


11. सल्फर –

रोगी की नींद बार-बार टूटती है, जारा सी भी आवाजें आते ही नींद टूट जाती है, जब नींद टूटती है तो रोगी उंघाई में नहीं रहता, एकदम जाग जाता है, रोगी की नींद कुत्ते की नींद के समान होती है। रोगी के शरीर में कहीं न कहीं जलन होती है, अधिकतर पैरों में जलन होती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए सल्फर औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना फायदेमंद होता है।


12. नक्स वोमिका –


रोगी का मस्तिष्क इतना कार्य में व्यस्त रहता है कि वह रात भर जागा रहता है, व्यस्त मस्तिष्क के कारण नींद न आ रही हो, मन में विचारों की भीड़ सी लगी हो, आधी रात से पहले तो नींद आती ही नहीं यादि नींद आती भी है तो लगभग तीन से चार बजे नींद टूट जाती है। इसके घंटे बाद जब वह फिर से सोता है तो उठने पर उसे थकावट महसूस होती है, ऐसा लगता है कि मानो नींद लेने पर कुछ भी आराम न मिला हो। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए नक्स वोमिका औषधि का उपयोग कर सकते हैं।
किसी रोगी को आधी रात से पहले नींद नहीं आती हो, शाम के समय में नींद नहीं आती हो और तीन या चार बजे नींद खुल जाती हो, इस समय वह स्वस्थ अनुभव करता है लेकिन नींद खुलने के कुछ देर बाद उसे फिर नींद आ घेरती है और तब नींद खुलने पर वह अस्वस्थ अनुभव करता है, इस नींद के बाद तबीयत ठीक नहीं रहती। ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए नक्स वोमिका औषधि का उपयोग करना चाहिए।
कब्ज बनना, पेट में कीड़ें होना, अधिक पढ़ना या अधिक नशा करने के कारण से नींद न आए तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए नक्स वोमिका औषधि की 6 या 30 शक्ति का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।


13.पल्स – 


रोगी शाम के समय में बिल्कुल जागे हुए अवस्था में होता है, दिमाग विचारों से भरा हो, आधी रात तक नींद नहीं आती, बेचैनी से नींद बार-बार टूटती है, परेशान भरे सपने रात में दिखाई देते हैं, गर्मी महसूस होती है, उठने के बाद रोगी सुस्त तथा अनमाना स्वभाव का हो जाता है। आधी रात के बाद नींद न आना और शाम के समय में नींद के झोकें आना, रोगी का मस्तिष्क व्यस्त हो अन्यथा साधारण तौर पर तो शाम होते ही नींद आती है और 3-4 बजे नींद टूट जाती है, इस समय रोगी रात को उठकर स्वस्थ अनुभव करता है, यह इसका मुख्य लक्षण है-शराब, चाय, काफी से नींद न आए। ऐसी अवस्था में रोगी को पल्स औषधि का सेवन कराना चाहिए।


14. सेलेनियम – 

रोगी की नींद हर रोज बिल्कुल ठीक एक ही समय पर टूटती है और नींद टूटने के बाद रोग के लक्षणों में वृद्धि होने लगती है। इस प्रकार के लक्षण होने पर रोगी का उपचार करने के लिए सेलेनियम औषधि का उपयोग कर सकते हैं।


15. ऐम्ब्राग्रीशिया – 

रोगी अधिक चिंता में पड़ा रहता है और इस कारण से वह सो नहीं पाता है, वह जागे रहने पर मजबूर हो जाता है। व्यापार या कोई मानसिक कार्य की चिंताए होने से नींद आने में बाधा पड़ती है। सोने के समय में तो ऐसा लगता है कि नींद आ रही है लेकिन जैसे ही सिर को तकिए पर रखता है बिल्कुल भी नींद नहीं आती है। इस प्रकार की अवस्था उत्पन्न होने पर रोग को ठीक करने के लिए ऐम्ब्राग्रीशिया औषधि की 2 या 3 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है। इस औषधि का उपयोग कई बार करना पड़ सकता है।


16. फॉसफोरस –

रोगी को दिन के समय में नींद आती रहती है, खाने के बाद नींद नहीं आती लेकिन रात के समय में नींद बिल्कुल भी नहीं आती है। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए फॉसफोरस औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद होता है।
वृद्ध-व्यक्तियों को नींद न आ रही हो तो ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए सल्फर औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना चाहिए।
आग लगने या संभोग करने के सपने आते हों और नींद देर से आती हो तथा सोकर उठने के बाद कमजोरी महसूस होता हो तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए फॉसफोरस औषधि का उपयोग किया जा सकता है।
रोगी को धीरे-धीरे नींद आती है और रात में कई बार जाग पड़ता है, थोड़ी नींद आने पर रोगी को बड़ा आराम मिलता है, रोगी के रीढ़ की हड्डी में जलन होती है और रोग का अक्रमण अचानक होता है। ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए फॉसफोरस औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना अधिक लाभकारी है।


17. टैबेकम- 

यदि स्नायविक-अवसाद (नर्वस ब्रेकडाउन) के कारण से अंनिद्रा रोग हुआ हो या हृदय के फैलाव के कारण नींद न आने के साथ शरीर ठंडा पड़ गया हो, त्वचा चिपचिपी हो, घबराहट हो रही हो, जी मिचलाना और चक्कर आना आदि लक्षण हो तो रोग को ठीक करने के लिए टैबेकम औषधि की 30 शक्ति का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।


18. ऐवैना सैटाइवा –

स्नायु-मंडल पर ऐवैना सैटाइवा औषधि का लाभदायक प्रभाव होता है। ऐवैना सैटाइवा जई का अंग्रेजी नाम है। जई घोड़ों को ताकत के लिए खिलाई जाती है जबकि यह मस्तिष्क को ताकत देकर अच्छी नींद लाती है। कई प्रकार की बीमारियां शरीर की स्नायु-मंडल की शक्ति को कमजोर कर देती है जिसके कारण रोगी को नींद नहीं आती है। ऐसी स्थिति में ऐवैना सैटाइवा औषधि के मूल-अर्क के 5 से 10 बूंद हल्का गर्म पानी के साथ लेने से स्नायुमंडल की शक्ति में वृद्धि होती है जिसके परिणाम स्वरूप नींद भी अच्छी आने लगती है। अफीम खाने की आदत को छूड़ाने के लिए भी ऐवैना सैटाइवा औषधि का उपयोग किया जा सकता है।


19. स्कुटेलेरिया –

यदि किसी रोगी को अंनिद्रा रोग हो गया हो तथा सिर में दर्द भी रहता हो, दिमाग थका-थका सा लग रहा हो, अपनी शक्ति से अधिक काम करने के कारण उसका स्नायु-मंडल ठंडा पड़ गया हो तो ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए स्कुटेलेरिया औषधि का प्रयोग आधे-आधे घंटे के बाद इसके दस-दस बूंद हल्का गर्म पानी के साथ देते रहना चाहिए, इससे अधिक लाभ मिलेगा।


20. सिप्रिपीडियम –

अधिक खुशी का सामाचार सुनकर जब मस्तिष्क में विचारों की भीड़ सी लग जाए और इसके कारण से नींद न आए या जब छोटे बच्चे रात के समय में उठकर एकदम से खेलने लगते हैं और हंसते रहते हैं और उन्हें नींद नहीं आती है। ऐसे रोगियों के अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए सिप्रिपीडियम औषधि के मूल-अर्क के 30 से 60 बूंद दिन में कई बार हल्का गर्म पानी के साथ सेवन कराना चाहिए। रात में अधिक खांसी होने के कारण से नींद न आ रही हो तो सिप्रिपीडियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए जिसके फलस्वरूप खांसी से आराम मिलता है और नींद आने लगती है।


21. कैमोमिला – 

दांत निकलने के समय में बच्चों को नींद न आए और जंहाई आती हो और बच्चा औंघता रहता हो लेकिन फिर भी उसे नींद नहीं आती हो, उसे हर वक्त अनिद्रा और बेचैनी बनी रहती है। ऐसे रोगियों के इस रोग को ठीक करने के लिए कैमोमिला औषधि की 12 शक्ति का सेवन कराने से अधिक लाभ मिलता है।

22. बेल्लिस पेरेन्निस- 

यदि किसी रोगी को सुबह के तीन बजे के बाद नींद न आए तो बेल्लिस पेरेन्निस औषधि के मूल-अर्क या 3 शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है।
23. कैनेबिस इंडिका- 

अनिद्रा रोग (ओब्सीनेट इंसोम्निया) अधिक गंभीर हो और आंखों में नींद भरी हुई हो लेकिन नींद न आए। इस प्रकार के लक्षण यदि रोगी में है तो उसके इस रोग को ठीक करने के लिए कैनेबिस इंडिका औषधि के मूल-अर्क या 3 शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद है। इस प्रकार के लक्षण होने पर थूजा औषधि से भी उपचार कर सकते हैं।
24. पल्सेटिला-


रात के समय में लगभग 11 से 12 बजे नींद न आना। इस लक्षण से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए पल्सेटिला औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना चाहिए।


25. सिमिसि-

यदि स्त्रियों के वस्ति-गव्हर   की गड़बड़ी के कारण से उन्हें अनिद्रा रोग हो तो उनके इस रोग का उपचार करने के लिए सिमिसि औषधि की 3 शक्ति का उपयोग किया जाना चाहिए।


26. साइना-

पेट में कीड़ें होने के कारण से नींद न आने पर उपचार करने के लिए साइना औषधि की 2x मात्रा या 200 शक्ति का उपयोग करना लाभदाक है।


27. पैसिफ्लोरा इंकारनेट- 

नींद न आने की परेशानी को दूर करने के लिए यह औषधि अधिक उपयोगी होती है। उपचार करने के लिए इस औषधि के मल-अर्क का एक बूंद से 30 बूंद तक उपयोग में लेना चाहिए।

 

20181203

लकवा के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार


                                           

लकवा एक गम्भीर रोग है| इसमें शरीर का एक अंग मारा जाता है| रोगी का अंग विशेष निष्क्रिय हो जाने के कारण वह असहाय-सा हो जाता है| उसे काम करने या चलने-फिरने के लिए दूसरे के सहारे की जरूरत होती है| 
पक्षाघात (लकवा) 13 के घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं:
1. तुलसी
तुलसी के पत्तों को उबालकर उसकी भाप से रोगी के लकवाग्रस्त अंगों की सेंकाई करनी चाहिए|\
2. तुलसी, अफीम, नमक और दही
तुलसी के पत्ते, अफीम, नमक और जरा-सा दही-इन सबका लेप बनाकर अंगों पर थोड़ी-थोड़ी देर बाद लगाएं|\
3. कलौंजी
कलौंजी के तेल की मालिश लकवे के रोगी के लिए रामबाण है|
4. आक के पत्तों को सरसों के तेल में उबालकर शरीर पर मालिश करें|

5. सरसों
कबूतर का खून सरसों के तेल में मिलाकर रोगी के शरीर पर मलें|
6. तिली और कालीमिर्च
तिली के तेल में थाड़ी-सी कालीमिर्च पीसकर मिला लें| फिर इस तेल की मालिश लकवे के अंगों पर करें|

10. सरसों

सरसों के तेल में थोड़े से धतूरे के बीज डालकर पका लें| फिर उस तेल को छानकर अंग विशेष पर मालिश करें|

11. दूध, सोंठ और दालचीनी

दूध में एक चम्मच सोंठ और जरा-सी दालचीनी डालकर उबाल लें| फिर छानकर थोड़ा-सा शहद डालकर सेवन करें|


12.लहसुन और मक्खन 

लहसुन की चार-पांच कलियां पीसकर मक्खन में मिलाकर सेवन करें|
13. छुहारा या सफेद प्याज का रस दो चम्मच प्रतिदिन पीने से पक्षाघात के रोगी को काफी लाभ होता है|

7. सोंठ, पानी और उरद

सोंठ और उरद (साबुत) – दोनों को 200 ग्राम पानी में उबालें| फिर पानी को छानकर दिन में चार-पांच बार पिएं|

8. पानी

पानी में शहद डालकर रोगी को दिनभर में चार-पांच बार पिलाएं| लगभग 100 ग्राम शहद प्रतिदिन रोगी के पेट में पहुंचना चाहिए|

9. अजमोद, सौंफ, और बालछड़, नकछिनी

अजमोद 10 ग्राम, सौंफ 10 ग्राम, बबूना 5 ग्राम, बालछड़ 10 ग्राम तथा नकछिनी 20 ग्राम – सबको कूट-पीसकर पानी में डालकर काढ़ा बना लें| फिर इसे एक शीशी में भरकर रख लें| इसमें से चार चम्मच काढ़ा प्रतिदिन सुबह के समय सेवन करें|

8. पानी

पानी में शहद डालकर रोगी को दिनभर में चार-पांच बार पिलाएं| लगभग 100 ग्राम शहद प्रतिदिन रोगी के पेट में पहुंचना चाहिए|

पक्षाघात (लकवा) में क्या खाएं क्या नहीं

पक्षाघात के रोगी को गेहूं की रोटी, बाजरे की रोटी, कुलथी, परवल, करेला बैंगन, सहिजन की फली, लहसुन, तरोई आदि देनी चाहिए| फलों में पपीता, आम, फालसा, अंजीर, चीकू आदि बहुत लाभदायक है| दूध का उपयोग सुबह-शाम दोनों वक्त करना चाहिए| चावल, दही, छाछ, बर्फ की चीजें, तले हुए पदार्थ, दालें, बेसन, चना आदि नहीं खाना चाहिए| वायु उत्पन्न करने वाले फल तथा साग न खाएं|
शरीर पर सरसों का तेल, विषगर्भ तेल, तिली का तेल, निर्गुण्डी का तेल, बादाम का तेल या अजवायन का तेल मालिश के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए| यदि रक्तचाप बढ़ा हुआ हो तो सर्पगंधा नामक जड़ी खानी चाहिए| एरण्ड का तेल, चोपचीनी का चूर्ण तथा हरड़-बहेड़ा-आंवला (त्रिफला) भी पक्षाघात के रोगी के लिए बहुत लाभदायक है|

पक्षाघात (लकवा) का कारण

जब शरीर के किसी भाग में खून उचित मात्रा में नहीं पहुंच पता है तो वह स्थान (अंग) सुन्न हो जाता है| यही लकवा है| इसके अलावा जो व्यक्ति अधिक मात्रा में वायु उत्पन्न करने वाले या शीतल पदार्थों का सेवन करते हैं, उनको भी यह रोग हो जाता है| यह रोग रक्तचाप के बढ़ने, मर्म स्थान पर चोट पहुंचने, मानसिक दुर्बलता, नाड़ियों की कमजोरी आदि कारणों से भी हो जाता है| यह तीन प्रकार का होता है – सारे शरीर में पक्षाघात, आधे शरीर में पक्षाघात और केवल मुख का पक्षाघात|

पक्षाघात (लकवा) की पहचान

यह रोग पुरे शरीर या आधे शरीर की नाड़ियों और छोटी नसों को सुखा देता है जिसके कारण खून का संचार बंद हो जाता है| संधियों तथा जोड़ों में शिथिलता आ जाती है| अत: विशेष अंग बेकार हो जाता है| रोगी स्वयं उस अंग को चलाने, फिराने या घुमाने में असमर्थ रहता है| यदि लकवा मुख पर गिरता है तो रोगी के बोलने की क्षमता कम हो जाती है या बिलकुल नहीं रहती| आंख, नाक, कान आदि विकृत हो जाते हैं| दांतों में दर्द होने लगता है| गरदन टेढ़ी हो जाती है| होंठ नीचे की तरफ लटक जाते हैं| चमड़ी पर नोचने से भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता|





20181031

एलर्जी के कारण ,लक्षण ,आयुर्वेदिक उपचार

                                


आमतौर पर जब कोई नाक, त्वचा, फेफड़ों एवं पेट का रोग पुराना हो जाता है। और उसका इलाज नहीं होता तो अकसर लोग उसे एलर्जी कह देते हैं। बहुत सारे ऐसे रोगी जीवा में उपचार के लिए आते हैं और यह बताते हैं कि उन्हें एलर्जी है, लेकिन क्या है यह एलर्जी इसका ज्ञान हमें अकसर नहीं होता। यदि रोग के बारे में ज्ञान नहीं है तो उसका उपचार कैसे होगा।

क्या है एलर्जी?

एलर्जी हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति की कुछ बाहरी तत्वों, जैसे पराग कण, धूल, भोजन इत्यादि के प्रति अस्वाभाविक प्रतिक्रिया का नाम है। पूरे विश्व में यह रोग तेजी से फैल रहा है। आजकल युवा अवस्था एवं बाल्यावस्था में भी एलर्जी रोग देखने में आता है। एलर्जी प्रतिक्रिया करने वाले तत्वों को एलरजेन कहा जाता है। ये एलरजेन या एलर्जी पैदा करने वाले तत्व वास्तव में कोई हानिकारक कीटाणु या विषाणु नहीं बल्कि अहानिकर तत्व होते हैं, जैसे गेहूं, बादाम, दूध, पराग कण या वातावरण में मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व। यही कारण है कि सभी लोगों को ये हानि नहीं पहुंचाते। एक ही घर में, एक ही प्रकार के वातावरण से एक व्यक्ति को एलर्जी होती है तो दूसरे को नहीं। आखिर क्या कारण होता है एलर्जी का? क्यों किसी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक शक्ति हानिकारक प्रतिक्रिया करती है?

एलर्जी के कारण

आयुर्वेद के अनुसार एक स्वस्थ व्यक्ति में धातुओं और दोषों की साम्यावस्था होती है। इसी कारण उनकी रोग प्रतिरोध शक्ति किसी एलरजेन के सम्पर्क में आकर भी प्रतिक्रिया (एलर्जी पैदा नहीं करती) धातु और दोष जब साम्य रहते हैं तो हमारे शरीर की ओज शाक्ति उत्तम होती है। उत्तम ओज, यानि उत्तम रोग प्रतिरोधक शक्ति हमारे शरीर से नियमित रूप से हानिकारक तत्वों को निष्कासित करती है और उसमें किसी प्रकार की प्रतिक्रिया भी नहीं होती।


आयुर्वेद के अनुसार एलर्जी का मूल कारण है असामान्य पाचक अग्नि, कमजोर ओज शक्ति, और दोषों एवं धातुओं की विषमता। इसमें भी अधिक महत्व पाचक अग्नि का माना गया है। जब पाचक अग्नि भोजन का सही रूप से पाक नहीं कर पाती है तो भोजन अपक्व रहता है। इस अपक्व भोजन से एक चिकना विषैला पदार्थ पैदा होता है जिसे ‘आम’ कहते हैं। यह आम ही एलर्जी का मूल कारण होता है। यदि समय रहते इस आम का उपचार नहीं किया जाए तो यह आतों में जमा होने लगता है और पूरे शरीर में भ्रमण करता है। जहां कहीं इसको कमजोर स्थान मिलता है वहां जाकर जमा हो जाता है और पुराना होने पर आमविष कहलाता है। आमविष हमारी ओज शक्ति को दूषित कर देता है। इसके कारण, जब कभी उस स्थान या अवयव का सम्पर्क एलरजेन से होता है तो वहां एलर्जी प्रतिक्रिया होती है।

यदि आमविष त्वचा में है तो एलरजन के सम्पर्क में आने से वहां पर खुजली, जलन, आदि लक्षण होते है, यदि आमविष श्वसन संस्थान में है तो श्वास कष्ट, छीकें आना, नाक से पानी गिरना, खांसी इत्यादि और यदि पाचन संस्थान में है तो अतिसार, पेट दर्द, अर्जीण आदि लक्षण होते हैं।
स्किन एलर्जी के घरेलू उपचार

1. एलोवेरा

एलोवेरा जेल और कच्चे आम के पल्प को मिक्स करके त्वचा पर लगाएं। इस लेप को लगाने से स्किन एलर्जी की जलन, खुजली और सूजन से राहत मिलती है।

2. अधिक पानी पीना

स्किन एलर्जी होने पर अपने शरीर को अधिक से अधिक हाइड्रेट रखें। इसके लिए एक दिन में कम से कम 10 ग्लास पानी जरूर पीएं। अधिक पानी का सेवन आपको सनबर्न और फ्लू से बचाएगा।


3. कपूर और नारियल तेल

कपूर को पीसकर उसमें नारियल का तेल मिक्स करें। इसके बाद इसे खुजली वाली जगहें पर लगाएं। दिन में कम से कम 2 बार इस मिक्चर को लगाने से आपकी एलर्जी की समस्या दूर हो जाएगी।


4. फिटकरी

एलर्जी वाली जगहें को फिटकरी के पानी से धोएं। उसके बाद इसपर कपूर और सरसों का तेल मिक्स करके लगाएं। आप चाहें तो इसकी जगहें फिटकरी और नारियल का तेल मिक्स करके भी लगा सकते हैं।


5. नीम

एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर नीम एलर्जी की समस्या को दूर करने का रामबाण इलाज है। इसके लिए नीम के पत्तों को रात के समय पानी में भिगो दें और सुबह इसका पेस्ट बनाकर लगाएं। इससे आपकी स्किन एलर्जी मिनटों में गायब हो जाएगी।


एलर्जी होने पर बरतें ये सावधानियां

1. ज्यादा से ज्यादा खुली हवा में रहें।
2. अगर आपको किसी फूड से एलर्जी है तो उससे दूर रहें।
3. अपने साबुन को बदलकर किसी एंटीबैक्टीरियल साबुन का इस्तेमाल करें।
4. स्किन एलर्जी होने पर त्वचा में बार-बार खुजली न करें।
नाक की एलर्जी का इलाज करने के लिए तीन तरीके हैं:
1 सबसे अच्छा तरीका है बचाव। जिन वजहों से आपको एलर्जी के लक्षण बढ़ते हैं, उनसे आपको दूर रहना चाहिए।
2 दवा जिनका उपयोग आप लक्षणों को रोकने और इलाज के लिए करते हैं।
3 इम्यूनोथेरपी- इसमें मरीज को इंजेक्शन दिए जाते हैं, जिनसे एलर्जी करने वाले तत्वों के प्रति उसकी संवेदनशीलता में कमी आ जाती है।
नाक की एलर्जी को आपको नजरंदाज नहीं करना चाहिए। अगर इसका इलाज न किया जाए, तो इससे साइनस, गला, कान और पेट की समस्याएं हो सकती हैं।
ऐसी स्थितियों के लिए इलाज की मुख्य पद्धति के अलावा वैकल्पिक तरीके भी इस्तेमाल किए जाते हैं। जहां तक योग की बात है कपालभाति का रोजाना अभ्यास करने से एलर्जी के मरीजों को काफी फायदा होता है।

एलर्जी में रामबाण है कपालभाति

 इसके लिए आपको बस एक या दो महीने तक लगातार कपालभाति का अभ्यास करना है, आपका साइनस पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। अगर आप इसे सही तरीके से करते हैं, तो कपालभाति से सर्दी-जुकाम से संबंधित हर रोग में आराम मिलेगा।

जिन लोगों को एलर्जी की समस्या है, उन्हें लगातार कपालभाति का अभ्यास करना चाहिए और इसकी अवधि को जितना हो सके, उतना बढ़ाना चाहिए। तीन से चार महीने का अभ्यास आपको एलर्जी से मुक्ति दिला सकता है। कुछ अपवाद हो सकते हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों को इससे फायदा ही हुआ है।


20180901

वायु गोला के आयुर्वेदिक घरेलू उपचार



                                   


गुल्म (वायु गोला) 
लक्षण व निदान -
नाभि के ऊपर एक गोल स्थान है जहां वायु का गोला रुक जाता है या पेट में गांठ की तरह उभार आता है।
इस तरह पेट में एक जगह वायु के एकत्रित होने को गुल्म या वायु का गोला कहते हैं। वायु का गोला वात, पित्त, कफ, त्रिदोष और खून दोष के कारण उत्पन्न होता है।
यह गुल्म रोग 5 प्रकार का होता है और यह शरीर के विभिन्न स्थानों पर उत्पन्न होता है- दाईं कोख,
बाईं कोख, हृदय , नाभि और पेडू या मूत्राशय ।

वायु गोला होने के कारण :

मल-मूत्र का वेग रोकने, चोट लगने, भारी खाना खाने, रूखा- सूखा भोजन करने, दु:खी रहने और दूषित भोजन करने के कारण वायु दूषित होकर हृदय से मूत्राशय तक के भाग में गांठ की तरह बन जाता
है जिसे गुल्म या वायु का गोला कहते हैं।
लक्षण
वायु का गोला बनने पर दस्त बंद हो जाता है, कब्ज व गैस बनने लगती है, मुंह सूख जाता है, भोजन करने का मन नहीं करता है, भूख नहीं लगती, पेट में दर्द रहता है, अधिक डकारें आती है, दस्त साफ नहीं आता है, पेट फूल जाता है, आंतों में गुड़गुड़ाहट होती रहती है और शरीर का रंग काला पड़ जाता है।
स्त्रियों को गुल्म (वायु का गोला बनना) गर्भ गिरने, गलत खान-पान करने, प्रांरभिक अवस्था में खूनी वायु का ठहरना, गोलेमें जलन और पीड़ा होना आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं।

भोजन और परहेज :-

बकरी का दूध , गाय का दूध , छोटी मूली , बथुआ , सहजना , लहसुन, जमीकन्द, परवल , बैंगन, करेला , केले का फूल, सफेद कद्दु, कसेरू , दाख , नारियल , बिजौरा नींबू , फालसे , खजूर , अनार , आंवला, पका
पपीता , कच्चे नारियल का पानी, एक साल पुराना चावल , लाल चावल आदि का सेवन करना लाभकारी होता है। रात के समय हलवा खाना, रोटी, पूरी और दूध आदि वायु के गोले से पीड़ित रोगी के लिए अच्छा होता है।
बादी करने वाले अनाज, तासीर के विपरीत पदार्थो का
सेवन, सूखा मांस, सूखी साग, मछली आदि का सेवन न करें। गुड़गुड़ाहट करने वाले पदार्थ, स्त्री प्रसंग ( संभोग ), रात को जागना,अधिक मेहनत करना, धूप , आलू , मूली, मीठे फल आदि का प्रयोग करना भी गुल्म रोगी के लिए हानिकारक होता है। मल- मूत्र के वेग को रोकने से भी वायु का गोला बनता है।


विभिन्न औषधियों से आयुर्वेदिक उपचार :


1. पुराना गुड़ : 


गुड़, भांरगी और छोटी पीपल बराबर मात्रा में लेकर पीसकर रख लें। यह 2 से 4 ग्राम चूर्ण काले तिल के काढ़े में मिलाकर सेवन करने से खूनी गुल्म रोग ठीक होता है।
2. गोरखमुण्डी के चूर्ण का काढ़ा बनाकर सेवन करने से रक्त गुल्म की बीमारी दूर होती है।

3. बच : 

बच, हरड़, हींग, अम्लवेत, सेंधानमक, अजवायन और जवाखार को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीस लें। यह 3 से 6 ग्राम चूर्ण गर्म पानी के साथ सेवन करने से कुछ दिनों में ही पेट में गैस का गोला बनने और दर्द समाप्त होता है।

4. हरड़ : 


हरड़ का चूर्ण गुड़ में मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से पित्त के कारण होने वाली गुल्म रोग ठीक होता है।
बड़ी हरड़ का चूर्ण और अरण्ड का तेल गाय के दूध में मिलाकर पीने से पेट में गैस का गोला बनना ठीक होता है।


5. सज्जीखार : 

सज्जीखार, जवाक्षार, केवड़ा को पीसकर चूर्ण बनाकर अरण्ड के तेल में मिलाकर सेवन करने से गैस का गोला बनना ठीक होता है। सज्जीखार का रस गुड़ में मिलाकर सेवन करने से पेट में गैस का गोला बनने से उत्पन्न दर्द ठीक होता है।


6. साठी : 

साठी की जड़ और कालीमिर्च को पीसकर घी में मिलाकर पीने से गुल्म रोग से पीड़ित रोगी को दर्द से आराम मिलता है।


7. शूलग्रंथि :

शूलग्रंथि (बबूल के पेड़ के कांटों को एकत्रित करके पेड़ पर ही कीड़ा गांठ बनाया जाता है) चिलम में रखकर धूम्रपान करने से वायु का गोला समाप्त होता है।


8. अपामार्ग : 

अपामार्ग की जड़ और कालीमिर्च को पीसकर घी के साथ प्रयोग करने से वायु का गोला व दर्द में आराम मिलता है।


9. सोंठ :

सोंठ 40 ग्राम, सफेद तिल 160 ग्राम और पुराना गुड़ 80 ग्राम को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण 6 से 10 ग्राम।खाकर ऊपर से गर्म दूध पीने से पेट की कब्ज, वायु का गोला और दर्द समाप्त होता है।


10. मुलहठी : 

मुलेहठी, चंदन और दाख को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण दूध के साथ सेवन करने से पित्त के कारण उत्पन्न गुल्म।रोग दूर होता है ।


11. द्राक्षा (मुनक्का) :

पित्त के कारण उत्पन्न गुल्म रोग से पीड़ित रोगी को द्राक्षा (मुनक्का) और हरड़ का 1-2 चम्मच रस गुड़ मिलाकर पीना चाहिए ।


12. अजवायन : 

अजवायन का चूर्ण और थोड़ा-सा संचर नमक छाछ में मिलाकर पीने से कफ से उत्पन्न गुल्म में लाभ मिलता है।

13. हींग :
 

हींग, पीपल की जड़, धनिया, जीरा, बच, कालीमिर्च, चीता, पाढ़, चव्य, कचूर, कालानमक, सेंधानमक, बिरिया संचर नमक, विषांबिल, छोटी पीपल, सोंठ, जवाखार, सज्जीखार, हरड़, अनार
दाना, अम्लवेत, पोहकरमूल, हाऊबेर और काला जीरा आदि को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर लें। फिर इसमें एक बिजौरा नींबू का रस मिलाकर अच्छी तरह मिला लें और छाया में सुखाकर बोतल में भरकर रख लें। यह चूर्ण 3 से 4 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ
प्रतिदिन सेवन करने से गुल्म, अफारा, दस्त की रुकावट, पेट का रोग, कोख का दर्द, स्तन और पसलियों में वायु व कफ के दोषों से उत्पन्न दर्द आदि समाप्त होते हैं।
बच 20 ग्राम, हरड़ 30 ग्राम, बायविडंग 60 ग्राम, सोंठ 40 ग्राम, हींग 10 ग्राम, पीपल 80 ग्राम,चीता 50 ग्राम और अजवायन 70 ग्राम को एक साथ कूटकर चूर्ण बना लें। यह 2 से 4 ग्राम चूर्ण गर्म पानी या शराब के साथ सेवन करने से गुल्म रोग समाप्त होता है।


14. आक : 

आक के फूलों की कलियां 20 ग्राम और अजवायन 20 ग्राम को बारीक पीसकर इसमें 50 ग्राम चीनी मिलाकर 1-1 ग्राम सुबह-शाम खाने से गुल्म रोग दूर होता है।


15. शरपुंखा :

शरपुंखा का रस और हरड़ का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर 4 ग्राम की मात्रा में खाना खाने के बाद खाने से गुल्म के कारण उत्पन्न दर्द ठीक होता है और दस्त की रुकावट दूर होती है।


16. नींबू :

6 मिलीलीटर नींबू के रस को आधे गिलास गर्म पानी में मिलाकर सेवन करने से वायु का गोला समाप्त होता है।

17. लता करंज :

लता करंज के पत्तों को चावल के पानी में उबाल कर पीने से वायु गोला ठीक होता है। इसके सेवन से दर्द

कम होता है, पाचनशक्ति मजबूत होती है और वातशूल ठीक होता है।
लता करंज के बीज, कालानमक, सोंठ और हींग बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण आधे से 
एक ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ खाने से पेट में गैस बनने के कारण उत्पन्न दर्द ठीक होता है।गैस का गोला बनने से यदि कमर में दर्द हो तो करंज के बीजों की मींगी और एक चौथाई ग्राम शुद्ध नीलाथोथा मिलाकर पीस लें और सरसों तेल में मिलाकर 12 गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली प्रतिदिन खाने से गैस का गोला बनने से उत्पन्न दर्द ठीक होता है।10 से 20 ग्राम करंज के कोमल पत्ते को तिल के तेल में भूनकर खाने से गुल्म रोग ठीक होता है।
18. एरण्ड : 

2 चम्मच एरण्ड के तेल को गर्म दूध में मिलाकर पीने से वायु का गोला समाप्त होता है।


19. अरबी : 

अरबी के पत्ते डण्डी के समेत लेकर इसका पानी निकालकर घी में मिलाकर 3 दिनों तक सेवन से गुल्म रोग ठीक होता है।

20. द्राक्षा (मुनक्का) :

पित्त के कारण उत्पन्न गुल्म रोग से पीड़ित रोगी को द्राक्षा (मुनक्का) और हरड़ का 1-2 चम्मच रस गुड़ मिलाकर पीना चाहिए ।

21. अजवायन :

अजवायन का चूर्ण और थोड़ा-सा संचर नमक छाछ में मिलाकर पीने से कफ से उत्पन्न गुल्म में लाभ मिलता है।

22. हींग

हींग, पीपल की जड़, धनिया, जीरा, बच, कालीमिर्च, चीता, पाढ़, चव्य, कचूर, कालानमक, सेंधानमक, बिरिया संचर नमक, विषांबिल, छोटी पीपल, सोंठ, जवाखार, सज्जीखार, हरड़, अनार
दाना, अम्लवेत, पोहकरमूल, हाऊबेर और काला जीरा आदि को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर लें। फिर इसमें एक बिजौरा नींबू का रस मिलाकर अच्छी तरह मिला लें और छाया में सुखाकर बोतल में भरकर रख लें। यह चूर्ण 3 से 4 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ
प्रतिदिन सेवन करने से गुल्म, अफारा, दस्त की रुकावट, पेट का रोग, कोख का दर्द, स्तन और पसलियों में वायु व कफ के दोषों से उत्पन्न दर्द आदि समाप्त होते हैं।


23. बैंगन :

पेट में गैस बनने तथा पानी पीने के बाद पेट फूलने पर बैंगन के मौसम में लम्बे बैंगन की सब्जी बनाकर खाने से गैस की बीमारी दूर होती है, लीवर और तिल्ली का बढ़ना भी ठीक होता है। हाथ की हथेलियों व पैरों के तलवों में पसीना आने पर बैंगन का रस लगाने लाभ होता है।


24. त्रिफला :

त्रिफला के 3 से 5 ग्राम चूर्ण को चीनी मेंमिलाकर दिन में 3 बार खाने से गुल्म में लाभ मिलता है।

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20180729

शोथ(सूजन) के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार



                                                         


     शरीर के किसी भी अंग में शोथ (सूजन) होने से बहुत पीड़ा होती है। शरीर के किसी अंग में अचानक शोथ होने पर रोगी बुरी तरह परेशान हो उठता है। शीत ऋतु में संधिवात के कारण शोथ की अधिक विकृति होती है।

उत्पत्ति : 

रक्त दूषित होने पर शोथ की अधिक विकृति होती है। सीढ़ियों से फिसलकर गिरने व बस से उतरते-चढ़ते समय चोट लगने से भी शोथ की उत्पत्ति होती है। वृक्कों में विकृति होने पर शरीर के विभिन्न अंगों में शोथ होती है।
    गर्भावस्था में रक्त की अधिक कमी होने पर गर्भवती स्त्री के पांवों में, चेहरे पर शोथ के लक्षण दिखाई देते हैं। छोटे बच्चे जब मिट्टी खाते हैं तो उनके पेट पर शोथ दिखाई देती है। रक्ताल्पता में भी रोगी के हाथ-पांव व चेहरे पर शोथ के लक्षण दिखाई देते हैं।

लक्षण :

विभिन्न संक्रामक रोगों के चलते शोथ की विकृति दिखाई देती है। मलेरिया व आंत्रिक ज्वर में शोथ की विकृति होती है। शोथ के कारण अधिक पीड़ा होती है। कई बार शोथ की पीड़ा असहनीय हो जाती है। उदर में शोथ होने पर वमन विकृति भी हो सकती है। गर्भावस्था में हाथ-पांव व चेहरे पर शोथ होने से गर्भस्थ शिशु को अधिक हानि पहुंच सकती है। वृक्कों की विकृति के कारण उत्पन्न शोथ में मूत्र के साथ रक्त भी आ सकता है।

सूजन होने  पर  सेवनीय

5 ग्राम गाजर के बीजों को 300 ग्राम जल में उबालकर, क्वाथ बनाकर छानकर पिएं। अधिक मूत्र आने से शोथ नष्ट होती है।
2 ग्राम हल्दी (पिसी हुई) 1 ग्राम मिसरी गर्म दूध में मिलाकर पीने से कुछ दिनों में शोथ नष्ट हो जाती है।
अदरक का रस 10 ग्राम मात्रा में लेकर 20 ग्राम गुड के साथ प्रातः और सायं सेवन करें। कुछ दिनों में शोथ नष्ट हो जाती है।
अनन्नास का 150 ग्राम रस कुछ दिनों तक पीने से यकृत शोथ में बहुत लाभ होता है।
इंद्रायण की जड को सिरके के साथ पीसकर शोथ पर लेप करें।
अमलतास के ताजे फूल 10 ग्राम और भुना हुआ सुहागा 3 ग्राम पीसकर सुबह-शाम गर्म जल के साथ सेवन करें। शोथ नष्ट होती है।
हरड़ का क्वाथ बनाकर, छानकर 50 ग्राम की मात्रा में 5 ग्राम गुग्गुल मिलाकर सेवन करने से शोथ नष्ट होती है।
पुनर्नवा, देवदारु, सोंठ और गुग्गुल सभी चीजें 10-10 ग्राम लेकर 400 ग्राम जल में उबालकर क्वाथ बनाएं। 50 ग्राम क्वाथ पीने से शोथ नष्ट होती है।
मूली 100 ग्राम और तिल 10 ग्राम चबाकर खाने से त्वचा के नीचे एकत्र जल से उत्पन्न शोथ नष्ट होती है।
केला खाने से अनेक प्रकार की. शोथ नष्ट होती हैं।
सोंठ का 10 ग्राम चूर्ण गुड के साथ खाने से शोथ नष्ट होती है।
काली मिर्च पीसकर मक्खन के साथ मिलाकर चटाने से छोटी आयु के बच्चों की शोथ नष्ट होती है।
खजूर का कुछ दिनों तक सेवन करने से शोथ विकृति नष्ट होती है। (मधुमेह रोगी खजूर न खाएं)।

सूजन होने पर न  खाएं

शोथ  में घी, तेल से बने पकवानों का सेवन न करें।
उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रस से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
आम, इमली, कमरख व दूसरे खट्टे फलों का सेवन न करें।
अचार, कांजी व सिरके से बने चटपटे व्यंजन सेवन न करें।
चाइनीज व फास्ट फूड का सेवन न करें।

 



20180717

कब्ज और गैस की समस्या के घरेलू प्राकृतिक उपचार



                                              

कब्ज
*पके टमाटर का रस एक कप पीने से पुरानी से पुरानी कब्ज दूर होती है और आंतों को ताकत भी मिलती है।
रात में सोते समय 1 से 2 चम्मच अलसी के बीज ताजा पानी से निगल लें। आंतों की खुश्की दूर होकर मल साफ होगा।
*2 अंजीर को रात को पानी में भिगोकर सुबह चबाकर पानी पीने से पेट साफ हो जाता है।
गाजर के रस का रोजाना सेवन करने से कोष्ठबद्धता (कब्ज) ठीक हो जाती है। ऐसे व्यक्ति अर्श (बवासीर) रोग से सुरक्षित रहते हैं।
*गिलोय का बारीक चूर्ण को गुड़ के साथ बराबर की मात्रा में मिलाकर 2 चम्मच सोते समय सेवन करने से कब्ज का रोग दूर हो जाता है।
*अजवायन 10 ग्राम, त्रिफला 10 ग्राम और सेंधानमक 10 ग्राम को बराबर मात्रा में लेकर कूटकर चूर्ण बना लें। रोजाना 3 से 5 ग्राम इस चूर्ण को हल्के गर्म पानी के साथ सेवन करने से काफी पुरानी कब्ज समाप्त हो जाती है।
*थूहर के दूध में कालीमिर्च, लौंग या पीपल भिगोकर सुखा लें। कब्ज से परेशान व्यक्ति को कालीमिर्च या लौंग खिला देने से पेट बिल्कुल साफ हो जाता है।
*सोते समय 1 चम्मच साबुत मेथी दाने को पानी के साथ पीने से कब्ज दूर होगी।


*4 चम्मच सौंफ 1 गिलास पानी में उबालें। जब आधा पानी रह जाये तो छानकर पीने से कब्ज दूर हो जायेगा।

गैस :

*10 पिसी हुई कालीमिर्च को फांककर, ऊपर से गर्म पानी में नीबू निचोड़कर सुबह-शाम पीते रहने से गैस बनना बंद हो जाती है।
*चुकन्दर को खाने से पेट की गैस दूर होती है।
*6 ग्राम अजवाइन में लगभग 2 ग्राम कालानमक को मिलाकर फंकी देकर गर्म पानी पिलाने से गैस मिटती है।
*पेट में गैस बनने पर सुबह 4 कली लहसुन की खाये इससे पाचन शक्ति बढ़ती है और गैस दूर होती है।

विशिष्ट परामर्श-


यकृत,प्लीहा,आंतों के रोगों मे अचूक असर हर्बल औषधि "उदर रोग हर्बल " चिकित्सकीय  गुणों  के लिए प्रसिद्ध है|पेट के रोग,लीवर ,तिल्ली की बीमारियाँ ,पीलिया रोग,कब्ज  और गैस होना,सायटिका रोग ,मोटापा,भूख न लगना,मिचली होना ,जी घबराना ज्यादा शराब पीने से लीवर खराब होना इत्यादि रोगों मे प्रभावशाली  है|बड़े अस्पतालों के महंगे इलाज के बाद भी  निराश रोगी  इस औषधि से ठीक हुए हैं| औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 9826795656 पर संपर्क करें|






20180716

तनाव (टेंशन) दूर करने के उपाय,उपचार

                                          

  अपने दैनिक जीवन का निरीक्षण करके और कुछ आदतों को बदलकर आप सभी नहीं तो कुछ तनाव उत्पन्न करने वाले कारणों को कम कर सकते हैं.
आधुनिक जीवन में तनाव न हो यह संभव नहीं है. जीवन मिला है तो रोजमर्रा की परेशानियां भी मिली हैं. गरीब, मध्यवर्गीय, धनी, धनकुबेर – सभी किसी-न-किसी कारण से चिंतित रहते हैं और तनाव उनके शरीर को खोखला करता रहता है. समस्याओं की प्रतिक्रिया करने से तनाव उपजता है. तनाव जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है. हांलाकि मेरा यह मानना है कि हमारा ज्यादातर तनाव अवांछित होता है और इसे कुछ सरल और कुछ कम सरल उपाय अपनाकर कम किया जा सकता है. यह चुटकियों में संभव नहीं है – मुझे इसमें सालों लगे हैं और अभी भी मैं तनाव पैदा करने वाले सभी कारणों को दूर नहीं कर पाया हूं. यह लक्ष्य कठिन है लेकिन हासिल करने योग्य है.
एक उदाहरण देखें – यह थोड़ा बढ़ा-चढ़ा कर बताया जा रहा है लेकिन इससे हमारी तनावपूर्ण ज़िंदगी परिलक्षित होती है. आप सवेरे देर से उठते हैं, काम पर समय पर पहुंचने की जद्दोजहद करते हैं, हड़बड़ी में नाश्ता करते हैं, आपकी शर्ट पर चाय छलक जाती है, दाढ़ी बनाते समय छिल जाता है, बाहर निकलने पर याद आता है कि आप अपना मोबाइल या पर्स भूल आये हैं, और भी बहुत कुछ.
अब आप भीड़ भरे ट्रेफिक में फंसे हुए हैं और आपका पारा धीरे-धीरे चढ़ता जा रहा है. कोई आपसे आगे गाड़ी निकालने की कोशिश करता है और आप उबल पड़ते हैं, आप हार्न बजाते हैं, कोसते हैं, झुंझलाते हैं. इस तरह आप बड़े बुरे मूड में काम पर पहुँचते हैं. आप ज़रूरी कागज़ तलाशते हैं और वह आपको नहीं मिलता, आपकी डेस्क पर सारी चीज़ें अस्तव्यस्त पड़ी हैं, आपका इनबॉक्स भी बहुत बुरी हालत में है, और आपको 25 ईमेल का उत्तर देना है. आप पहले ही कई असाइन्मेंट और प्रोजेक्ट्स में देरी कर चुके हैं और बॉस आपसे खुश नहीं है. 11 बजने से पहले आपको बहुत ज़रूरी 3 काम पूरे करने थे और 12 बज चुके हैं. काम करते-करते कब 2 बज गए पता ही नहीं चला. आपने अपना लंच मिस कर दिया.
ये तो सिर्फ एक बानगी है. आप समझ गए होंगे की मैं क्या कहना चाहता हूँ. आपका दिन ठीक से नहीं गुज़रता. वापसी में भी आप वही ट्रेफिक झेलते हैं. घर पहुँचते-पहुँचते तक आप बेहद बेदम, हलाकान, लेट, और तनावग्रस्त हो जाते हैं. इसके बाद भी आपका ध्यान अगले दिन की ज़रूरी बातों पर लगा रहता है. आप टेबल और इनबॉक्स आप वैसी ही हालत में छोड़कर आये हैं. घर की हालत भी कोई बेहतर नहीं है. शायद घर के दुसरे सदस्यों की लाइफस्टाइल भी आपकी ही तरह की हो गई है इसलिए हमेशा खटपट होती रहती है. बच्चे अपनी चीज़ों को जगह पर नहीं रखते और आप उनपर चिल्लाते रहते हैं. टीवी देखते समय आप जल्दी में बनाया गया तला-भुना खाना खा लेते हैं और उनींदे होकर सोने चले जाते हैं.
हो सकता है कि आपका रोजमर्रा का जीवन इतना बुरा न हो लेकिन इससे आपको उन बातों का पता तो चल ही गया होगा जिनके कारण लोग तनावग्रस्त हो जाते हैं. कारण तो और भी बहुत हो सकते हैं पर उनपर चर्चा बहुत लम्बी हो जायेगी.
तनाव उत्पन्न करने वाले कारणों को कुछ समझ और विचारपूर्वक दूर किया जा सकता है. ये हैं उसके तरीके:-



1. सरलीकरण करें – 



अपनी दिनचर्या को सरल-सहज करना बहुत ज़रूरी है. अपने संकल्प, सूचना-व्यवस्था, आवास और कार्यस्थल, और जीवन में घटित हो रही बातों को सरल बनाना ज़रूरी है. इसके अच्छे परिणाम होते हैं. इसके लिए इसी ब्लौग पर कुछ और लेखों में सुझाव बताये गए हैं.

2.स्वयं को समय दें – 


स्वयं को थोडा अधिक समय देने का प्रयास करें. ज़रूरी नहीं है कि हर काम घड़ी देखकर किया जाए. समय की कमी हो तो मीटिंग टाल दें. यदि फोन या ई-मेल से बात बनती हो तो मिलने की क्या ज़रुरत है? यदि यह संभव न हो तो मीटिंग का कोई वक़्त फिक्स न करें. लोगों से कहें कि वे आपको फोन करके पूछ लें कि आप फ्री हैं या नहीं. इस तरह कभी-कभार बचने वाले थोड़े-थोड़े समय को स्वयं को देने में या पसंदीदा काम करने में लगायें.

3. तनाव को पहचानें – 


यह सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. जो बातें आपको तनावग्रस्त करती हैं उन्हें यदि आप केवल पहचान ही लेंगे तो उन्हें दूर करने के उपाय करना आसान हो जायेगा. स्वयं को दस मिनट दें और सोचें कि आज आप तनाव में और दबाव में क्यों रहे. सप्ताह में ऐसा कितने बार होता है? कौन से लोग, गतिविधियाँ, बातें आपकी ज़िन्दगी को बोझिल बनाती हैं? टॉप 10 की एक लिस्ट बनायें और देखें कि क्या आप उनमें कुछ परिवर्तन ला सकते हैं या नहीं. एक-एक करके उन्हें सुधारते जाएँ और प्रयासरत रहें.

4. अनावश्यक संकल्पों को छोड़ दें –


 हम अपने जीवन में कई सारे संकल्प करते हैं – हमें यह करना है – हमें वह करना है. पत्नी, बच्चे, कामकाज, घर-गृहस्थी, समाज, धर्म, शौक, और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े कई सारे संकल्पों को हम पूरा करने में लगे रहते हैं. इनमें से प्रत्येक की समीक्षा करें. क्या ऐसा कुछ है जो अच्छे परिणाम की अपेक्षा तनाव देता है. इस कार्य को निर्ममतापूर्वक करने की ज़रुरत है. जो कुछ भी आपके शुख-शांति के रास्ते में आता है उसे बेवज़ह ढोने में कोई तुक नहीं है. उस संकल्प को पहले दूर करें जो ज्यादा तनाव देता हो.

5 – जल्दी उठें – 


देर से उठना कई परेशानियों की जड़ है. किसी दिन 15 मिनट देर से उठें तो पाएंगे की रोजमर्रा के सभी काम करने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है. कामकाज पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है. जल्दी उठने की आदत डालें. इसी के साथ जल्दी सोने की आदत भी डालनी चाहिए. काम पर जल्दी निकालने से आप ट्रेफिक की समस्या से बच जाते हैं और ड्राइविंग में मज़ा भी आता है. यह जांचें की आपको तैयार होने में कितना समय लगता है और कहीं पहुँचने में कितना समय लगता है. इस समय को कम करके न आंकें. एक छोटा सा अंतराल भी बड़ा बदलाव ला सकता है. सिर्फ दस मिनट का परिवर्तन लाकर देखें. आपको फर्क पता चलेगा.

6.दूसरों को नियंत्रित न करें –


 याद रखें, हम सारी दुनिया के मालिक नहीं हैं. हम चाहते तो हैं कि ऐसा होता लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम ऐसा ख्याल ही अपने मन में पाल लें. हम चीज़ों और लोगों को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं और इसमें सफल नहीं हो पाते. इससे तनाव बढ़ता ही है. दूसरी चीज़ें जैसी घटित होती हैं और दूसरे लोग जैसे काम करते हैं उसे स्वीकार कर लें. यह भी स्वीकार कर लें कि अलग-अलग परिस्थितियों में चीज़ें एक ही तरह से नहीं होतीं. धयान रखें, आप केवल स्वयं पर ही नियंत्रण रख सकते हैं. इसीलिए दूसरों को नियंत्रित करने से पहले स्वयं को काबू में रखने का काम करें. यह भी सीखें कि स्वयं पर काम थोपने के बजाय आप दूसरों से भी उसे करवा सकते हैं. हममें दूसरों को अपने अधीन रखने कि अदम्य इच्छा होती है. इससे बचने में ही हमारी भलाई है. यह जीवन को तनावमुक्त रखता है.



7. मल्टीटास्किंग बंद करें – 


मल्टीटास्किंग का अर्थ है एक साथ कई काम करना, जैसे कम्प्युटर कर लेता है. कई लोग इसे बहुत बड़ा गुण समझते हैं लेकिन हकीकत में इसके नुकसान अधिक हैं. यह हमारी काम करने की गति को सुस्त और बाधित कर देता है. इससे काम के ज़रूरी पक्षों से ध्यान हट भी सकता है. यह तनाव बढ़ाता है. एक वक़्त में एक ही काम करें.

8. टालमटोल करने की प्रवृत्ति छोडें –

 हम सभी ऐसा करते हैं. इसके कारण काम का दबाव बढ़ता जाता है. ‘अभी ही करना है’ की आदत डाल लें. अपने इनबॉक्स और टेबल को साफ़ रखें.

9. व्यवस्था लायें – 

कुछ हद तक सभी व्यक्ति अव्यवस्था के बीच रहते हैं. यदि हम व्यवस्था बनाये रखने का प्रयास करें और इसमें प्रारंभ में सफल हो भी जाएँ तो भी अव्यवस्था को जगह बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता. अपने माहौल में अव्यवस्था रखने से तनाव बढ़ता है. इससे हमें चीज़ें तलाशने में देर लग जाती है और कामकाज में बाधा आती है. अपने परिवेश में व्यवस्था लायें. शुरुआत अपनी टेबल और दराज़ से करें. घर के किसी एक कोने से शुरुआत करें. पूरे घर को दुरुस्त करना ठीक न होगा. छोटे से हिस्से से शुरुआत करें और व्यवस्था को वहां से आगे फैलने दें.

10॰ ऊर्जा का क्षय रोकें – 


यदि आपने पहली स्टेप में बताये अनुसार तनाव उत्पन्न करनेवाले कारणों की पहचान की है तो आपने शायद ऐसे काम भी नोट किये होंगे जो आपकी ऊर्जा को सिर्फ नष्ट करते हैं. कुछ काम ऐसे होते हैं जिनमें दूसरे कामों कि अपेक्षा ज्यादा ऊर्जा और समय लगता है. उन्हें पहचानें और हटायें. जिंदगी बेहतर जीने के लिए भरपूर ऊर्जा का होना जरूरी है.

11.दूसरों की मदद करें – 


यह टिप विरोधाभासी नहीं है. यह न सोचें कि आप तो वैसे ही काम के बोझ तले दबे हुए हैं और दूसरों कि मदद करके तो आपका कचूमर ही नक़ल जायेगा. दूसरों की मदद करने से, स्वयंसेवक के बतौर काम करने से, या चैरिटी संगठन में काम करने से आप भीतर से बहुत अच्छा अनुभव करते हैं और यह आपका तनाव दूर करता है. यदि आप दूसरों पर नियंत्रण ही करना जानते हैं तो यह आपके लिए कुछ मुश्किल होगा. यदि आप इसे बहुत सरसरे तरीके से करते हैं तो इसका लाभ आपको न मिलेगा. इसे सहजता और सद्भावना से करें. दूसरों का जीवन बेहतर होगा तभी आपका जीवन बेहतर बनेगा.

12. ज़रा सा आराम करते चलें – 

कामकाज के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लेना सही रहता है. यदि आप दो घंटों से काम में भिडे हुए हैं तो जरा ठहरें. अपने कन्धों और बांहों को आराम देने के लिए फैलाएं. टहलें, पानी पियें. बाहर जाएँ, खुला आसमान देखें, ताजी हवा में साँस लें. किसी से बात करें. रचनात्मकता अच्छी बात है लेकिन जीवन उससे ज्यादा कीमती है. अपनी ऑनलाइन गतिविधियों पर भी थोड़ा नियंत्रण रखें.

13॰ मुश्किल लोगों से दूर रहें


 क्या आप उन्हें जानते हैं? ये लोग हैं आपके बौस, कलीग, कस्टमर, दोस्त, परिजन, आदि. कभी-कभी ये ही हमारी ज़िन्दगी को मुश्किल बना देते हैं. उनसे लड़ना ठीक न होगा इसलिए उन्हें टालने में ही भलाई है.

14. धीरे करें – 


आपाधापी में लगे रहने के बजाय थोडी कम रफ़्तार से काम करने में चीज़ें बेहतर तरीके से होती हैं. आननफानन टाइप करके बाद में गलतियाँ सुधारने से बेहतर है कि धीरे टाइप करें. खाने का लुत्फ़ उठायें, लोगों से मन बहलायें, दुनिया देखें. तनाव दूर करने में यह टिप बड़ी कारगर है.

15. ज़रूरी कामों की लिस्ट बनायें – 

क्या इसके बारे में भी विस्तार से बताना पड़ेगा? ज़रूरी कामों को प्राथमिकता के आधार पर करने के लिए एक लिस्ट बना लेना चाहिए और उसके अनुसार काम करना चाहिए.

16. कसरत करना –


 इसके कई लाभ हैं. शारीरिक और मानसिक स्तर पर यह बहुत प्रभावशील है. यह शरीर को फिट रखने के साथ-साथ तनाव से भी कुशलता से निपटती है. एक स्वस्थ और फिट व्यक्ति थकान और दबाव का सामना बेहतर तरीके से कर सकता है. दूसरी ओर, अस्वस्थ होना स्वयं में बहुत बड़ा घाटा है. कसरत हमें रोग और तनाव से दूर रखती है.

17.काम छोड़ दें – 


यह भयावह टिप है. इसे कर पाना सबके बस की बात नहीं है. सच कहूँ तो आपका कामकाज या नौकरी आपके तनाव का सबसे बड़ा कारण है. यदि आपको आर्थिक मोर्चे पर कुछ सुरक्षा हासिल है तो ज़रा सोचें – क्या आप नौकरी के बदले कुछ ऐसा कर सकते हैं जो आप सदैव करना चाहते थे. यदि आप ऐसा कर पाते हैं तो आपके जीवन में एड़ी से चोटी तक परिवर्तन आ जायेगा. केवल यही टिप आपका तनाव ९०% तक कम कर सकती है. इसे यूँ ही टालने की बजाय गंभीरता से लें – शायद ऐसी कई संभावनाएं हों जिनकी ओर आपका ध्यान नहीं गया हो.

18. अच्छा खाएं – 


यह कसरत करने जितना, बल्कि उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है. सम्यक, संतुलित, और सात्विक आहार शरीर और मन को पुष्ट करता है. तला हुआ चटपट खाना हाजमे को ख़राब करता है और शरीर को बोझिल बनाता है.

19.आभारी बनें – 

यदि आप दूसरों का आभार व्यक्त करते हैं तो इसके सकारात्मक परिणाम होते हैं. आपके जीवन से ऋणात्मक सोच बाहर निकलती है. दूसरे भी आपकी इस क्रिया से अच्छा अनुभव करते हैं. अपने जीवन में आपने जो कुछ भी पाया है और जिन व्यक्तियों का साथ आपको मिला है उसे उपहार मानकर उसके लिए ईश्वर का आभार व्यक्त करें. जीवन के प्रति इस प्रकार का दृष्टिकोण रखकर आप अपने जीवन में सुख और शांति के आने का मार्ग प्रशस्त करेंगे. यह आत्मिक समृद्धि का सूत्र है.




20180708

असालिया के अद्भुत फायदे

                                                          

असालिया प्राय:सारे भारत वर्ष में बोई जाती है । इसको विभीन्न नामों से जाना जाता है। जैसे हालों, असालु, असालियों,हालिम, अहालील आदी ।

गुण दोष और प्रभाव :- 

आयुर्वेदिक मतानुसार यह औषधि गरम कडवी पौष्टकि दुध बढाने वाली बाजीकरण और कामोदीपक है। यह वात कफ,अतिसार, आैर त्वचा के रोगाें को नष्ट करने वाली है । युनानी मत के अनुसार इसके बीज यकृत के रोग ,छाती के दर्द ,गठिया आैर आमाशय के तकलीफो में ये लाभजनक है। ये मस्तिष्क शक्ति बढाने वाले आैर बुद्धिवर्धक है ।
इसको बीज को पंजाब में स्तनों में दुध बढ़ानेवाला माना जाता है । इनको दुध के साथ मिलाकर पिलाया जाता है। परन्तु गर्भवती स्त्रियों को इन्हें नहीं पिलाना चाहीये ।

लंबाई बढाने के लीए:- 

बच्चों में अक्सर कद (Height) को लेकर चिंता बनी रहती है । मिश्री पाउडर में असालिया को मिलाकर दिन में दो बार दुध के साथ देने पर लंबाई बढती है । आैर शरीर का विकास होता है ।

आमाशय की पीडा :- 

इसका काढा पिलाने से अमाशय की पीडा मिटती है ।

सुजन :-

इसके बीजों को कुटकर नींबु के रस में मिलाकर लेप करने से सुजन बिखर जाती है ।

श्वास  व खांसी :- 

इसकी  डालियों को आेटकर पिलाने से श्वास आैर सुंखी खांसी मिटती है ।

खुनी बवासीर :- 

इसका शर्बत पिलाने से खुनी बवासीर मेें लाभ होता है ।

अतिसार :-

इसकी जड. के चुर्ण की फंकी देने से बार बार दस्त मिटता है ।

खुजली और दाह :- 

दाह और खुजली पैदा करनेवाले पदार्थो के विष को उतारने के लिये इसके बिजों का लेप निकालकर पिलाना चाहिये ।