गोमूत्र और हल्दी से केन्सर का इलाज //Cure of cancer with cow urine and turmeric




   कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर की कोशिकाएं (सेल्स) असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और एक ही स्थान पर इकट्ठी होती रहती हैं। दरअसल हमारे शरीर की एक प्राकर्तिक प्रक्रिया है, जिसमें शरीर की पुरानी कोशिकाएं एक निश्चित समय के बाद खुद-ब-खुद खत्म होती रहती हैं और उनकी जगह नयी कोशिकाएँ बनती रहती हैं। यदि किसी व्यक्ति को शरीर के किसी हिस्से में, कैंसर हो जाता है, तो उस जगह नयी कोशिकाएं तो बनती ही हैं, साथ ही पुरानी कोशिकाएं मरती नहीं और वह वहीँ इकट्ठी होती रहती हैं। यह कोशिकाएं इकट्ठी होकर वहीँ फैलती रहती है|
हालाँकि सभी कोशिकाएं कैंसर सेल्स नहीं होती। कुछ सेल्स महज ट्यूमर के रूप में इकट्ठी हो जाती है। लेकिन वह कोशिकाएं, जो आस-पास फैलती रहें और वहां के ऊत्तकों और अन्य स्वस्थ कोशिकाओं को नष्ट करने लगें, वह कोशिकाएं कैंसर की कोशिकाएं कहलाती हैं। मेडिकल में कैंसर का उपचार उन कोशिकाओं को केमिकल्स के द्वारा खत्म कर के किया जाता है। लेकिन साथ ही मेडिकल ट्रीटमेंट से जुड़ी एक और सच्चाई यह भी है कि इस ट्रीटमेंट के दौरान, जिन दवाओं (केमिकल्स) का प्रयोग किया जाता है, उनसे भले ही कैंसर की कोशिकाएं खत्म हो जाती हों, लेकिन शरीर की अन्य कोशिकाओं पर भी उनका बुरा असर पड़ता है। कहने का मतलब यह है कि कैंसर के लिए दिया जाने वाला ट्रीटमेंट भी शरीर को बहुत नुक्सान पहुँचाता है।

   वहीं दूसरी और आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञानियों का यह कहना है कि कैंसर का उपचार बिना कीमोथेरेपी और रेडियो थेरेपी के बिना भी किया जा सकता है। कुछ आयुर्वेदिक अस्पताल और विशेषज्ञ यह दावा भी करते हैं कई कैंसर के उपचार के लिए, यानी यदि इसे जड़ से खत्म करने के लिए कोई दवाई उपलब्ध है, तो वह है गोमूत्र और हल्दी। सिर्फ इन दोनों में कैंसर की कोशिकाओं को खत्म वाले तत्व मौजूद हैं। हल्दी और गोमूत्र में एक प्राकृतिक  केमिकल करक्यूमिन पाया जाता है और यही करक्यूमिन केमिकल कैंसर की कोशिकाओं को खत्म कर सकता है।हल्दी कैंसर ठीक करने की ताकत रखती है ! कैसे ताकत रखती है वो जान लीजिये हल्दी में एक केमिकल है उसका नाम है कर्कुमिन (Carcumin) और ये ही कैंसर cells को मार सकता है बाकि कोई केमिकल बना नही दुनिया में और ये भी आदमी ने नही भगवान ने बनाया है ।
   हल्दी जैसा ही कर्कुमिन और एक चीज में है वो है देशी गाय के मूत्र में । गोमूत्र माने देशी गाय के शारीर से निकला हुआ सीधा-सीधा मूत्र जिसे सूती के आठ परत की कपड़ो से छान कर लिया गया हो । तो देशी गाय का मूत्र अगर आपको मिल जाये और हल्दी आपके पास हो तो आप कैंसर का इलाज आसानी से कर पायेंगे ।
     अब देशी गाय का मूत्र आधा कप और आधा चम्मच हल्दी दोनों मिलाकर  गरम करना जिससे उबाल आ जाये फिर उसको ठंडा कर लेना । Room Temperature में आने के बाद रोगी को चाय की तरह पिलाना है |चुस्किया ले ले के सिप सिप कर  । एक और आयुर्वेदिक दवा है पुनर्नवा जिसको अगर आधा चम्मच इसमें मिलायेंगे तो और अच्छा result आयेगा । ये आयुर्वेद के दुकान में पाउडर या छोटे छोटे पीसेस में मिलती है ।
   याद रखें इस दवा में सिर्फ देशी गाय का मूत्र ही काम में आता है विदेशी जर्सी का मूत्र कुछ काम नही आता । और जो देशी गाय काले रंग की हो उसका मूत्र सबसे अच्छा परिणाम देता है इन सब में । इस दवा को (देशी गाय की मूत्र, हल्दी, पुनर्नवा ) सही अनुपात में मिलाके उबालकर ठंडा करके कांच की पात्र में स्टोर करके रखिये पर बोतल को कभी फ्रिज में मत रखिये, धुप में मत रखिये । ये दवा कैंसर के सेकंड स्टेज में और कभी कभी थर्ड स्टेज में भी बहुत अच्छे परिणाम देती है
      जब स्टेज थर्ड क्रोस करके फोर्थ में पहुँच गया हो तब रिजल्ट में प्रॉब्लम आती है । और अगर अपने किसी रोगी को Chemotherapy बैगेरा दे दिया तो फिर इसका कोई असर नही आता ! कितना भी पिलादो कोई रिजल्ट नही आता, रोगी मरता ही है । आप अगर किसी रोगी को ये दवा दे रहे है तो उसे पूछ लीजिये जान लीजिये कहीं Chemotherapy शुरू तो नही हो गयी ? अगर शुरू हो गयी है तो आप उसमे हाथ मत डालिए, जैसा डॉक्टर करता है करने दीजिये, आप भगवान से प्रार्थना कीजिये उसके लिए इतना ही करे । 

और अगर Chemotherapy स्टार्ट नही हुई है और उसने कोई  एलोपैथी  treatment शुरू नही किया तो आप देखेंगे इसके Miraculous (चमत्कारिक रिजल्ट आते है । ये सारी दवाई काम करती है बॉडी के resistance पर, हमारी जो vitality है उसको improve करता है, हल्दी को छोड़ कर गोमूत्र और पुनर्नवा शारीर के vitality को improve करती है और vitality improve होने के बाद कैंसर cells को control करते है ।
     तो कैंसर के लिए आप अपने जीवन में इस तरह से काम कर सकते है; इसके इलावा भी बहुत सारी मेडिसिन्स है जो थोड़ी complicated है वो कोई बहुत अच्छा डॉक्टर या वैद्य उसको हंडल करे तभी होगा आपसे अपने घर में नही होगा । इसमें एक सावधानी रखनी है के गाय के मूत्र लेते समय वो गर्भवती नही होनी चाहिए। गाय की जो बछड़ी है जो माँ नही बनी है उसका मूत्र आप कभी भी use कर सकते है।
ये तो बात हुई कैंसर के चिकित्सा की, पर जिन्दगी में कैंसर हो ही न ये और भी अच्छा है जानना । तो जिन्दगी में आपको कभी कैंसर न हो उसके लिए एक चीज याद रखिये के, हमेशा जो खाना खाए उसमे डालडा घी (refine oil ) तो नही है ? उसमे refined oil तो नही है ? हमेशा शुद्ध तेल खाये अर्थात सरसों ,नारियल ,मूँगफली का तेल खाने मे प्रयोग करें ! और घी अगर खाना है तो देशी गाय का घी खाएं ! गाय का देश घी नहीं !



ये देख लीजिये, दूसरा जो भी खाना खा रहे है उसमे रेशेदार हिस्सा जादा होना चाहिए जैसे छिल्केवाली डाले, छिल्केवाली सब्जिया खा रहे है , चावल भी छिल्केवाली खा रहे है तो बिलकुल निश्चिन्त रहिये कैंसर होने का कोई चान्स नही है ।
और कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से दो तीन कारण है, एक तो कारण है तम्बाकू, दूसरा है बीड़ी और सिगरेट और गुटका ये चार चीजो को तो कभी भी हाथ मत लगाइए क्योंकि कैंसर के maximum cases इन्ही के कारन है पुरे देश में ।
कैंसर के बारे में सारी दुनिया एक ही बात कहती है चाहे वो डॉक्टर हो, experts हो, Scientist हो के इससे बचाव ही इसका उपाय है ।
महिलाओं को आजकल बहुत कैंसर है uterus में गर्भाशय में, स्तनों में और ये काफी तेजी से बड़ रहा है .. Tumour होता है फिर कैंसर में convert हो जाता है । तो माताओं को बहनों को क्या करना चाहिए जिससे जिन्दगी में कभी Tumour न आये ? आपके लिए सबसे अच्छा prevention है की जैसे ही आपको आपके शारीर के किसी भी हिस्से में unwanted growth (रसोली, गांठ) का पता चले तो जल्द ही आप सावधान हो जाइये । हलाकि सभी गांठ और सभी रसोली कैंसर नही होती है 2-3% ही कैंसर में convert होती है
   लेकिन आपको सावधान होना तो पड़ेगा । माताओं को अगर कहीं भी गांठ या रसोली हो गयी जो non-cancerous है तो जल्दी से जल्दी इसे गलाना और घोल देने का दुनिया में सबसे अछि दावा है " चुना " । चुना ;जो पान में खाया जाता है, जो पोताई में इस्तेमाल होता है ; पानवाले की दुकान से चुना ले आइये उस चुने को कनक के दाने के बराबर रोज खाइये; इसको खाने का तरीका है पानी में घोल के पानी पी लीजिये, दही में घोल के दही पी लीजिये, लस्सी में घोल के लस्सी पी लीजिये, डाल में मिलाके दाल खा लीजिये, सब्जी में डाल के सब्जी खा लीजिये । पर ध्यान रहे पथरी के रोगी के लिए चुना बर्जित है ।
 
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