बच्चों के हाजमा ,अफ़ारा,वमन मे उपयोगी नुस्खे





१. चूने के स्वच्छ पानी को १/२ या १ चम्मच दूध पिलाने के पूर्व देने से बालकों की उल्टी, दस्त बन्द हो जाते है। वैल्सीयम कमी की पूर्ति होती है। बालक स्वथ्य रहता है।
२. अफारा (पेट) फूलने पर पानी में थोड़ा सा पापरी सोड़ा/ अथवा नीबू का रस डालकर पिलाने या तुलसी
का रस डालकर पिलाने या तुलसी का रस देने से शीघ्र लाभ होता है।
३. पेट पर थोड़ी धीमी—धीमी थपकी लगाने से छोटी आँत की क्षमता बढ़ती है। वायु पास हो जाती है।





यह रोग विटामिन सी और विटामिन बी की कमी से होता है। अत: खट्ठे फलों का जूस नियमित देना चाहिए।
१. हरी गिलोय (
गुरुचि )के रस में बालक  का कुर्ता रंगकर सुखा लें यही पहनाए रखें शीघ्र लाभ होगा।


२. खूबकला— ३०  ग्राम  बकरी  के  दूध मे औंटाकर छाया में सुखाये दूध फैक दें इस प्रकार ३ बार दूध में औटाए दूध फैकते जाएँ सुखाकर चूर्ण बना लें फिर २—४ ग्राम की खुराक गाय के दूध से पिलाएँ।

३. भैंस का ताजा गोबर प्रात: बच्चे की कमर और जाँघों पर ५ मिनट तक अच्छी तरह मलें। फिर हल्के गर्म -जल से धोए, धोने पर कमर पर काले काले रंग के छोटे—छोटे काँटे दिखाई देंगे इन काँटों को जल्दी—जल्दी चुन लें। कुछ दिन में बच्चा स्वस्थ हो जाएगा।

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गोमूत्र और हल्दी से केन्सर का इलाज




   कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर की कोशिकाएं (सेल्स) असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और एक ही स्थान पर इकट्ठी होती रहती हैं। दरअसल हमारे शरीर की एक प्राकर्तिक प्रक्रिया है, जिसमें शरीर की पुरानी कोशिकाएं एक निश्चित समय के बाद खुद-ब-खुद खत्म होती रहती हैं और उनकी जगह नयी कोशिकाएँ बनती रहती हैं। यदि किसी व्यक्ति को शरीर के किसी हिस्से में, कैंसर हो जाता है, तो उस जगह नयी कोशिकाएं तो बनती ही हैं, साथ ही पुरानी कोशिकाएं मरती नहीं और वह वहीँ इकट्ठी होती रहती हैं। यह कोशिकाएं इकट्ठी होकर वहीँ फैलती रहती है|
हालाँकि सभी कोशिकाएं कैंसर सेल्स नहीं होती। कुछ सेल्स महज ट्यूमर के रूप में इकट्ठी हो जाती है। लेकिन वह कोशिकाएं, जो आस-पास फैलती रहें और वहां के ऊत्तकों और अन्य स्वस्थ कोशिकाओं को नष्ट करने लगें, वह कोशिकाएं कैंसर की कोशिकाएं कहलाती हैं। मेडिकल में कैंसर का उपचार उन कोशिकाओं को केमिकल्स के द्वारा खत्म कर के किया जाता है। लेकिन साथ ही मेडिकल ट्रीटमेंट से जुड़ी एक और सच्चाई यह भी है कि इस ट्रीटमेंट के दौरान, जिन दवाओं (केमिकल्स) का प्रयोग किया जाता है, उनसे भले ही कैंसर की कोशिकाएं खत्म हो जाती हों, लेकिन शरीर की अन्य कोशिकाओं पर भी उनका बुरा असर पड़ता है। कहने का मतलब यह है कि कैंसर के लिए दिया जाने वाला ट्रीटमेंट भी शरीर को बहुत नुक्सान पहुँचाता है।

   वहीं दूसरी और आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञानियों का यह कहना है कि कैंसर का उपचार बिना कीमोथेरेपी और रेडियो थेरेपी के बिना भी किया जा सकता है। कुछ आयुर्वेदिक अस्पताल और विशेषज्ञ यह दावा भी करते हैं कई कैंसर के उपचार के लिए, यानी यदि इसे जड़ से खत्म करने के लिए कोई दवाई उपलब्ध है, तो वह है गोमूत्र और हल्दी। सिर्फ इन दोनों में कैंसर की कोशिकाओं को खत्म वाले तत्व मौजूद हैं। हल्दी और गोमूत्र में एक प्राकृतिक  केमिकल करक्यूमिन पाया जाता है और यही करक्यूमिन केमिकल कैंसर की कोशिकाओं को खत्म कर सकता है।हल्दी कैंसर ठीक करने की ताकत रखती है ! कैसे ताकत रखती है वो जान लीजिये हल्दी में एक केमिकल है उसका नाम है कर्कुमिन (Carcumin) और ये ही कैंसर cells को मार सकता है बाकि कोई केमिकल बना नही दुनिया में और ये भी आदमी ने नही भगवान ने बनाया है ।
   

हल्दी जैसा ही कर्कुमिन और एक चीज में है वो है देशी गाय के मूत्र में । गोमूत्र माने देशी गाय के शारीर से निकला हुआ सीधा-सीधा मूत्र जिसे सूती के आठ परत की कपड़ो से छान कर लिया गया हो । तो देशी गाय का मूत्र अगर आपको मिल जाये और हल्दी आपके पास हो तो आप कैंसर का इलाज आसानी से कर पायेंगे ।
     अब देशी गाय का मूत्र आधा कप और आधा चम्मच हल्दी दोनों मिलाकर  गरम करना जिससे उबाल आ जाये फिर उसको ठंडा कर लेना । Room Temperature में आने के बाद रोगी को चाय की तरह पिलाना है |चुस्किया ले ले के सिप सिप कर  । एक और आयुर्वेदिक दवा है पुनर्नवा जिसको अगर आधा चम्मच इसमें मिलायेंगे तो और अच्छा result आयेगा । ये आयुर्वेद के दुकान में पाउडर या छोटे छोटे पीसेस में मिलती है ।
   याद रखें इस दवा में सिर्फ देशी गाय का मूत्र ही काम में आता है विदेशी जर्सी का मूत्र कुछ काम नही आता । और जो देशी गाय काले रंग की हो उसका मूत्र सबसे अच्छा परिणाम देता है इन सब में । इस दवा को (देशी गाय की मूत्र, हल्दी, पुनर्नवा ) सही अनुपात में मिलाके उबालकर ठंडा करके कांच की पात्र में स्टोर करके रखिये पर बोतल को कभी फ्रिज में मत रखिये, धुप में मत रखिये । ये दवा कैंसर के सेकंड स्टेज में और कभी कभी थर्ड स्टेज में भी बहुत अच्छे परिणाम देती है
      जब स्टेज थर्ड क्रोस करके फोर्थ में पहुँच गया हो तब रिजल्ट में प्रॉब्लम आती है । और अगर अपने किसी रोगी को Chemotherapy बैगेरा दे दिया तो फिर इसका कोई असर नही आता ! कितना भी पिलादो कोई रिजल्ट नही आता, रोगी मरता ही है । आप अगर किसी रोगी को ये दवा दे रहे है तो उसे पूछ लीजिये जान लीजिये कहीं Chemotherapy शुरू तो नही हो गयी ? अगर शुरू हो गयी है तो आप उसमे हाथ मत डालिए, जैसा डॉक्टर करता है करने दीजिये, आप भगवान से प्रार्थना कीजिये उसके लिए इतना ही करे । 

और अगर Chemotherapy स्टार्ट नही हुई है और उसने कोई  एलोपैथी  treatment शुरू नही किया तो आप देखेंगे इसके Miraculous (चमत्कारिक रिजल्ट आते है । ये सारी दवाई काम करती है बॉडी के resistance पर, हमारी जो vitality है उसको improve करता है, हल्दी को छोड़ कर गोमूत्र और पुनर्नवा शारीर के vitality को improve करती है और vitality improve होने के बाद कैंसर cells को control करते है ।
     तो कैंसर के लिए आप अपने जीवन में इस तरह से काम कर सकते है; इसके इलावा भी बहुत सारी मेडिसिन्स है जो थोड़ी complicated है वो कोई बहुत अच्छा डॉक्टर या वैद्य उसको हंडल करे तभी होगा आपसे अपने घर में नही होगा । इसमें एक सावधानी रखनी है के गाय के मूत्र लेते समय वो गर्भवती नही होनी चाहिए। गाय की जो बछड़ी है जो माँ नही बनी है उसका मूत्र आप कभी भी use कर सकते है।
ये तो बात हुई कैंसर के चिकित्सा की, पर जिन्दगी में कैंसर हो ही न ये और भी अच्छा है जानना । तो जिन्दगी में आपको कभी कैंसर न हो उसके लिए एक चीज याद रखिये के, हमेशा जो खाना खाए उसमे डालडा घी (refine oil ) तो नही है ? उसमे refined oil तो नही है ? हमेशा शुद्ध तेल खाये अर्थात सरसों ,नारियल ,मूँगफली का तेल खाने मे प्रयोग करें ! और घी अगर खाना है तो देशी गाय का घी खाएं ! गाय का देश घी नहीं !
ये देख लीजिये, दूसरा जो भी खाना खा रहे है उसमे रेशेदार हिस्सा जादा होना चाहिए जैसे छिल्केवाली डाले, छिल्केवाली सब्जिया खा रहे है , चावल भी छिल्केवाली खा रहे है तो बिलकुल निश्चिन्त रहिये कैंसर होने का कोई चान्स नही है ।
और कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से दो तीन कारण है, एक तो कारण है तम्बाकू, दूसरा है बीड़ी और सिगरेट और गुटका ये चार चीजो को तो कभी भी हाथ मत लगाइए क्योंकि कैंसर के maximum cases इन्ही के कारन है पुरे देश में ।
कैंसर के बारे में सारी दुनिया एक ही बात कहती है चाहे वो डॉक्टर हो, experts हो, Scientist हो के इससे बचाव ही इसका उपाय है ।
महिलाओं को आजकल बहुत कैंसर है uterus में गर्भाशय में, स्तनों में और ये काफी तेजी से बड़ रहा है .. Tumour होता है फिर कैंसर में convert हो जाता है । तो माताओं को बहनों को क्या करना चाहिए जिससे जिन्दगी में कभी Tumour न आये ? आपके लिए सबसे अच्छा prevention है की जैसे ही आपको आपके शारीर के किसी भी हिस्से में unwanted growth (रसोली, गांठ) का पता चले तो जल्द ही आप सावधान हो जाइये । हलाकि सभी गांठ और सभी रसोली कैंसर नही होती है 2-3% ही कैंसर में convert होती है
   लेकिन आपको सावधान होना तो पड़ेगा । माताओं को अगर कहीं भी गांठ या रसोली हो गयी जो non-cancerous है तो जल्दी से जल्दी इसे गलाना और घोल देने का दुनिया में सबसे अछि दावा है " चुना " । चुना ;जो पान में खाया जाता है, जो पोताई में इस्तेमाल होता है ; पानवाले की दुकान से चुना ले आइये उस चुने को कनक के दाने के बराबर रोज खाइये; इसको खाने का तरीका है पानी में घोल के पानी पी लीजिये, दही में घोल के दही पी लीजिये, लस्सी में घोल के लस्सी पी लीजिये, डाल में मिलाके दाल खा लीजिये, सब्जी में डाल के सब्जी खा लीजिये । पर ध्यान रहे पथरी के रोगी के लिए चुना बर्जित है ।
 

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कमर दर्द जड़ से खत्म करने के उपचार



     

    कमर का दर्द अब एक सामान्य सी बीमारी बन गई है। पहले जहाँ कमर दर्द बुज़ुर्गो को ही हुआ करता था अब हर छोटे-बड़े इससे परेशान है।
    हांलाकि कमर दर्द होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते है। खास कर हमारी जीवनशैली की कुछ ख़राब आदते। जैसे की देर तक बिना आराम किये काम करते रहना या बैठने-उठने में बिना वजह उतावलापन तथा गलत तरीका।
कमर दर्द को जड़ से मिटाने के कई असरकारक और बेजोड़ घरेलु नुस्खें आयुर्वेद में दिए गए है। 
लेकिन इससे पहले कमर दर्द के बारे में कुछ सामान्य जानकारी जानते है। अगर आप खुद कमर दर्द से पीड़ित नहीं है तो यकीनन आपके लिए यह जानकारी उपयोगी होगी।

क्या न करें :


कमर दर्द का सीधा संबंध वायु से है. मतलब अगर शरीर में वायु प्रकोप होगा तो कमर दर्द के साथ-साथ जोड़ों के अन्य दर्द भी होने की संभावना है. इससे बचाव के लिए आपको वैसे खुराक से दुरी रखनी चाहिए जिससे पेट भारी रहे या कब्ज की शिकायत रहे. सामान्य कुदरती प्रक्रियाएं जैसे छींक, मलत्याग, मूत्रत्याग को रोकने का प्रयत्न न करें. चिंता, भय, और गुस्सा करने से बचने की कोशिश करें. शरीर को पर्याप्त आराम दें. रात को बिना-वजह जागने की आदत न बनाएं.

क्या खाएं ? 

    जैसा की आपने पढ़ा कमर दर्द का सीधा संबंध वायु से है. इसलिए कमर दर्द से पीड़ित व्यक्ति को चाहिए की वो भारी खुराक के बजाय हल्का, सुपाच्य ताजा खुराक खाएं. खुराक में लहसुन, हींग, मेथी, अजवाइन, ताजा हरी-हरी प्राकृतिक सब्जियों का प्रयोग करें.

क्या न खाएं ? : 

    कमर दर्द से पीड़ित व्यक्ति को चने, लोबिया के बीज, जौ, मटर, भिन्डी, बैंगन, ग्वार के बीज, इमली, दहीं, छाछ जैसे पदार्थ लेने से परहेज करना चाहिए. साथ ही अधिक तेल से तले हुए खाने और मसालेदार खाना खाने से भी बचना चाहिए.
     अगर आप कमर-दर्द से पीड़ित नही है तो ऊपर दी गई जानकारी से आपको इस दर्द से दुरी रखने में सहायक होगी. परंतु आप कमर-दर्द से पीड़ित है तो इसके लिए क्या इलाज और घरेलु नुस्खें है आइए अब वो जानते है

 1.मेथी को थोड़े से घी में सेंक कर पीस लें. फिर उसमे गुड और घी मिलाकर छोटे छोटे लड्डू बना लें. 8-10 दिनों तक इसका लगातार सेवन करने से कमर दर्द और गठिया जड़ से मिटता है. 
2.कच्चे आलू को बिना छिले टुकड़े कर तुरंत उसका रस निकाल लें. इस रस को पीने से गठिया (Arthritis) के रोग में बड़ा फायदा मिलता है. 3. सौंठ का काढा बनाकर पिने से जोड़ों के अक्सर दर्द में राहत मिलती है.
4.सौंठ, लहसुन, अजवाइन और सरसों के कुछ दानो (Mustard) को तेल में गरम कर लीजिए. ठंडा होने पर उस मिश्रण से मालिश करने से कमर के दर्द में आराम मिलता है.
 5. सौंठ के चूर्ण या पावडर का पानी के साथ सेवन करने से कमर का दर्द मिटता है.
6.सौंठ पावडर और हींग को तेल में गरम कर ठंडा होने पर मालिश करने से भी कमर दर्द में राहत मिलती है.
7.सरसों के तेल के साथ प्याज के रस को मिलाकर मालिश करने से कमर दर्द और गठिया मिटता है.
8.अदरक के रस में चुटकी भर सामान्य नमक (Salt) डाल दें. फिर उससे दर्द वाले हिस्से पर मालिश करें फायदा मिलेगा. 

9.अजवाइन और गुळ बराबर मात्रा में सुबह-शाम लेने से कमर का दर्द नहीं रहता. 
10.ताजा खजूर की पांच पेशियाँ लें और पानी में उसका काढा बनाएं. फिर उसमे दो चम्मच मेथी डालकर वो पेय पिएँ. इससे कमर दर्द में राहत मिलती है. 
11.जायफल को सरसों के तेल में भिगोकर कमर के दर्द वाले हिस्से पर हलके हाथों से मालिश करें. इससे कमर का दर्द तो दूर होगा पर अगर गठिया भी हुआ तो वह भी मिट जाएगा. 
12.लौंग का तेल घिसने से गठिया का रोग मिटता है.
13.चुटकी भर मेथी रोज खाने की आदत वायु के अधिकतर रोगों को दूर रखती है. और कमर दर्द तथा जोड़ों के दर्द का मुख्य कारण वायु ही होता है.




विशिष्ट परामर्श-  

संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| रोगी के व्यक्तिगत लक्षणों के आधार पर  निर्मित औषधि से बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| 
औषधि के लिए वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं| 












बायोकेमिक चिकित्सा पद्धति की जानकारी




*बायोकेमिक चिकित्सा शरीर के कोशों में होने वाली चयापचयिक(मेटाबोलिक)प्रक्रियाओं को खनिज लवणों के माध्यम से मानव शरीर के क्रियाकलापों की सहायता करने के लिए अपरिहार्य होती है। 
*योरोपीय भौतिक विज्ञानियों द्वारा यह सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया कि शरीर के कोषों और तंतुओं के वास्तविक घटक स्वास्थ्य के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रभावकारी होते हैं। बर्लिन के रूडोल्फ वरशु (1821-1902) ने अपनी अनुपम पुस्तक 'सैल्यूलर पैथोलॉजी" में इंगित किया है कि "अंततः प्रत्येक प्रकार का कष्ट (रोग) केवल कोषों में एक प्रकार की विकृति पर आधारित होता है। केवल कोष बीमार हो सकता है-कोष जो मानव शरीर की सबसे चोटी क्रियाकारी इकाई होता है। "
*जर्मन बायोकेमिस्ट और भौतिक विज्ञानी डॉ विल्हेम हेनरिक शुसलर (1821-1898) ने जैविक राख़ का विश्लेषण किया और इसमें 12 प्रमुख टिशु (खनिज) लवणों की पहचान की जो सभी प्राणियों में समान रूप से विद्यमान रहते हैं। ये टिशु  (खनिज) लवण कोषों, तंतुओं और अंगों के अकार्बनिक घटक होते हैं और शरीर की कार्य प्रणाली तथा चयापचयी क्रियाओं के लिए महात्व्पोर्ण होते हैं। डॉ शुसलर ने इन्हें फंक्शनल साल्ट या टिशु लवण" नाम दिया। 
*ये टिशु लवण शिलाओं और मिट्टी में आम पाये जाते हैं। ये लवण न केवल शरीर में खनिजों की कमी को पूरा करते हैं बल्कि भोजन में से इन लवणों के स्वांगीकरण को भी बढ़ाते हैं। 
*डॉ शुसलर ने आगे प्रतिपादित किया जीवित तंतुओं में  इन लवणों की कोषों में आवश्यक मात्रा में कमी से कोषों में मालिक्यूलर गति में जो अव्यवस्था उत्पन्न होती है उसको ही रोग कहते हैं। कमी वाले टिशु (खनिज ) लवण की सूक्ष्म मात्रा में आपूर्ती करने (खिलाने ) से अव्यवस्था को दुरुस्त करके स्वास्थ्य पुनर्स्थापित किया जा सकता है। 

*डॉ शुसलर ने शरीर में विद्यमान प्रत्येक टिशु (खनिज ) लवण के कार्य  और क्रियाकलाप का अन्वेषण किया और इनके आधार पर लक्षणों के अनुसार परीक्षणों द्वारा शानदार परिणाम पाये। 
*डॉ शुसलर का 30 मार्च 1898 को, 77 वर्ष की आयु में देहांत हुआ, लेकिन उनका शोध-कार्य सम्पूर्ण यूरोप तथा विश्व में आज भी जारी है। प्रथम बायोकेमिक परिषद ओलड़नबरी में 1885 में स्थापित हुआ। आज यह 96 शाखाओं में विभक्त है। 
डॉ शुसलर के सिद्धान्त :


*मनुष्य के शरीर में बारह विभिन्न टिशु (खनिज ) लवण विद्यमान होते हैं, अच्छे स्वस्थ्य और कोषों की सामान्य प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए इंका समुचित संतुलन बनाए रखना ज़रूरी होता है। 
*इस संतुलन में कोई भी कमी होने पर जो स्थिति उत्पन्न होती है उसे रोग कहा जाता है। 
*रोग की दशा में शरीर में कमी वाले 'लवणों' को पोटेन टाइज़ रूप में खिलाने से ये टिशु (खनिज ) लवण खून के प्रवाह के साथ तेजी से कोषों में पहुँच कर स्वास्थ्य का सामान्य संतुलन पुनर्स्थापित कर देते हैं। 
*डॉ शुसलर द्वारा आविष्कार की गई यह चिकित्सा विधि बायोकेमिक पद्धति कहलाई। 
*बायोकेमिक दवाएं होम्योपेथिक पद्धति के समान घर्षण करके तैयार की जाती हैं। 
*बायोकेमिक चिकित्सा पद्धति टिशु (खनिज ) लवणों की कमी के आधार पर की जाती है,अतः होम्योपेथिक पद्धति के विपरीत इस पद्धति में एक से अधिक दवा मिश्रित करके उपयोग की जा सकती है। 
*बायोकेमिक दवाएं सूक्ष्म मात्रा में निम्न पोटेनसी में यथा-1 x, 3 x, 6 x, 12 x, 30 x, 200 x में उपयोग की जाती हैं। ये दवाएं बच्चों, गर्भिणी महिलाओं,वृद्ध व्यक्तियों को भी सुरक्षित रोप से खिलाई जा सकती हैं। 


पिपली के गुण प्रयोग लाभ 



हस्त मैथुन से उत्पन्न यौन दुर्बलता के उपचार




    हस्तु मैथुन से धातु वीर्य दोष हो जाता है और धातु पतली हो जाती है. ऐसे में युवाओं की जिंदगी नरक बन जाती है. युवाओं से अनुरोध है के इस बुरी आदत को छोड़ दें. और हुए नुक्सान की भरपाई के लिए निम्न घरेलु नुस्खे अपनाने चाहिए.
दुर्बलता को दूर करने के उपाय.

आंवला तथा हल्दी – 


आंवला तथा हल्दी समान मात्रा में पीसकर घी डालकर सेंक लीजिये, और भून लीजिये, सिकने के बाद दोनों की बराबर मात्रा में पीसी मिश्री मिला लीजिये. (जैसे 100-100 ग्राम आंवला और हल्दी है तो मिश्री २०० ग्राम) अभी इसको सुबह शाम एक एक चम्मच गर्म दूध के साथ फंकी लीजिये.

असगंध (अश्वगंधा) –

 आधा चम्मच असगंध की फंकी नित्य सुबह शाम गर्म दूध से लेने से ठीक हो जाती है. मर्दाना शक्ति भी बढती है और आंवले के प्रयोग को भी निरंतर करे.

कच्ची हल्दी और शहद – 

कच्ची हल्दी का रस दो चम्मच, समान भाग शहद में मिलाकर एक बार रोजाना पियें. या पीसी हुयी हल्दी 250 ग्राम गाय या भैंस के घी में सेंक कर इसमें पीसी हुयी 250 ग्राम मिश्री मिला लें. नित्य रात को गर्म दूध से फंकी लें.

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सर्दी के मौसम मे सेहत बनाने वाले गोंद के लड्डू





    सर्दी का मौसम सेहत बनाने वाला मौसम होता है| इसलिए इस मौसम में हमें अपना अच्छे से ख्याल रखना चाहिए| यदि सेहत बनाने की बात चल रही हो तो ड्राई फ्रूट्स का नाम सबसे पहले आता है| जैसा की हम सभी जानते है ड्राई फ्रूट्स हमें ताकत देते है और हमारा स्वास्थ भी सुधारते है|
ठंड के समय पाचन शक्ति अच्छी रहती है और भूख भी खुलकर लगती है| इसलिए इस वक्त हैवी खाना भी आसानी से हजम हो जाता है| इसलिए शीत ऋतु में हमें सूखे मेवो से बने पौष्टिक आहार एवं व्यायाम, आदि के द्वारा पर्याप्त शक्ति अर्जित कर लेनी चाहिए, ताकि पुरे साल हम स्वस्थ रह सकें|

हस्त  मेथुन जनित यौन दुर्बलता के उपचार 


सूखे मेवे के लड्डू कई तरह से बनाये जा सकते है, लेकिन इसके लड्डू को गोंद के साथ बनाए जाएं और खाए जाएं, तो आपको केवल ताकत ही नहीं बल्कि स्वाद भी डबल मिलेगा| गोंद के लड्डू खासतौर पर राजस्‍थान में बनाये जाते है। इसके सेवन से शरीर को ताकत मिलती है और सर्दी भी नहीं लगती| तो आइये आज हम आपको बताते है  गोंद के लड्डू को बनाने के तरीके और इससे मिलने वाले फायदों के बारे में|

 गोंद के लड्डू खाने के लाभ और बनाने के तरीके
ठंडी के दिनों में शरीर को ऊर्जा देने के लिए गोंद से बने लड्डू से ताकत मिलती है| रोजाना सुबह नाश्ते में 1 या 2 लड्डू गोंद के खाकर आप खुद को सर्दियों में स्वस्थ रख सकते है| इससे शरीर को गर्मी मिलती है और सर्दी नहीं लगती| इसलिए बच्चो के लिए तो यह बहुत ही अच्छे होते है|


सामग्री:-

इन् गोंद के लड्डू को आप 1 महीने तक इस्तेमाल कर सकते है। गोंद के लड्डू में ड्राई फ्रूट्स के अलावा गोंद के साथ मूंग दाल का आटा और सोयाबीन का आटा और भी डाला जाता है। ये सभी शरीर को प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व देते हैं| इसलिए बच्चे को जन्म देने के बाद यदि यह माँ को खिलाया जाये तो वो जल्दी ठीक हो सकती है।

गोंद - 1 कप (100 ग्राम)
घी- 500 ग्राम
गुड़- 600 ग्राम
किशमिश, मखाने - 100 ग्राम
बादाम, काजू, खारिक - 200 ग्राम
बनाने की विधि:-



सारे सूखे मेवे को मिक्सर में चलाकर बारीक़ कर ले या छोटे-छोटे टुकड़ो में काट लें|
अब गोंद को ओखली में छोटा-छोटा करके तोड़ ले|
कढ़ाई में घी डाल कर गर्म करले|
अब गर्म घी में गोंद के टुकड़े डालकर उसे हल्का ब्राउन होने तक सेक लें|
फिर ठंडा करने के लिए प्लेट में निकाल ले|
   अब कढ़ाई में थोड़ा और घी डाल कर गर्म करें| गुड़ को तोड़ कर टुकड़े कर लें, और घी में डालकर पिघला लें|
गुड़ की गाढ़ी चाशनी बनने तक रुके|
   अब गुड़ की चाशनी में पीसी गोंद, सारे मेवे अच्छी तरह मिलाकर लड्डू का मिक्सचर तैयार कर लें|
अब इस मिश्रण को हाथ में लेकर हाथों से गोल-गोल लड्डू बनाकर तैयार करें|
आप अपने अनुसार छोटे या बड़े लड्डू बना सकते है|
     इन् लड्डू को सुबह 5 बजे उठकर खाया जाये और फिर थोड़ी देर सो लिया जाये तो इसका अधिक फायदा मिलता है| इसमें मौजूद काजू- बादाम और घी के कारण चेहरे पर चमक आती है|
इसके अलावा आप यदि इसमें मेथी दाने का इस्तेमाल करेंगे तो सर्दियों में होने वाले कमर या जोडों के दर्द से राहत मिलती है| एक बात का ख्याल रहे की 2 से ज्यादा लड्डू ना खाए|

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि