18.10.17

शरद ऋतु (Winter Season) में खान पान आहार विहार


   वर्षा ऋतु के तुरंत बाद ही शरद ऋतु (Winter Season) शुरु हो जाती है. आश्विन और कार्तिक मास में शरद ऋतु का आगमन होता है. वर्षा ऋतु में प्राकृतिक रूप से पित्त दोष का संचय होता है
शरद ऋतु (Winter Season) दस्तक दे चुकी है. तो ऋतु बदलने के साथ साथ हमारा खान पान भी इसके अनुसार ही होना चाहिए. आज का हमारा लेख इसी पर आधारित है. इसमें हम बता रहे है कि शरद ऋतु (Winter Season) में हमारा भोजन कैसा होना चाहिए. जिससे हम स्वस्थ के साथ इस ऋतु का भरपूर मजा ले सकते है.
शरद ऋतु में कैसा हो खान पान
खीर का सेवन – शरद ऋतु (Winter Season) में सूर्य का ताप बहुत अधिक होता है. ताप के कारण पित्त दोष पैदा होता है. ऐसे में पित्त से पैदा होने वाले रोग पैदा होते है. पित्त की विकृति में चावल तथा दूध से बनी खीर का सेवन किया जाता है. शरद पूर्णिमा पर इसलिए खीर का विशेष सेवन किया जाता है.



पित्त को शांत करने वाले खाद्य पदार्थो का सेवन – शरद ऋतु (Winter Season) में पित्त शांत करने वाले पदार्थो का सेवन अति आवश्यक होता है. शरद ऋतु में लाल चावल, नये चावल तथा गेहूं का सेवन करना चाहिए. कडवे द्रव्यों से सिद्ध किये गये घी के सेवन से लाभ मिलता है. प्रसिद्ध महर्षि चरक और महर्षि सुश्रुत ने कहा है की शरद ऋतु में मधुर, कडवे तथा कैसले पदार्थो का सेवन करना चिहिए. दूध, गन्ने के रस से बने खाद्य, शहद, चावल तथा मुंग आदि का सेवन लाभदायक होता है. कुछ विशेष जंगली जानवरों का मास भी गुणकारी होता है.

नीम्बू तथा शहद के जल का सेवन – 
शरद ऋतु (Winter Season) में चंद्रमा की किरणों में रखे गये भोजन को उत्तम माना गया है. सुबह के समय हल्के गर्म पानी में एक निम्बू का रस तथा शहद मिलाकर पीने से पित्त दोष का नाश होता है. शरद ऋतु में भोजन के बाद 1-2 केले खा सकते है. केला शरीर को पोषक तत्व तो देता ही है. साथ में पित्त दोष का दमन भी करता है. केला खाकर जल नहीं पीना चाहिए.
खुली छत पर ना सोयें – शरद ऋतु में दिन में तो गर्मी रहती है पर रात को ठण्ड होती है. ऐसे में रात को खुली छत पर नहीं सोना चाहिए. ओस पड़ने से सर्दी, जुकाम तथा खांसी हो सकती है.


हेमंत ऋतु में कैसा हो खान पान-

हेमंत ऋतु अथवा शीत ऋतु आगमन शरद ऋतु के समापन के साथ ही होने लगता है. शीतल हवा का प्रकोप बढ़ने लगता है. शीतल वायु के प्रकोप से शरीर की रुक्षता बढ़ने लगती है. शरीर में जठराग्नि बढ़ने से मेटाबोलिज्म प्रबल होने से भूख अधिक लगने लगती है. इससे सभी तरह के खाद्य पदार्थ आसानी से पाच जाते है.
शक्ति संचय की ऋतु– 
पाचन क्रिया तेज होने के कारण हेमंत ऋतु को शक्ति संचय की ऋतु भी कहा जाता है. इस ऋतु में खानपान पर नियन्त्रण रख कर शारीरिक व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाया जा सकता है. भोजन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हेमंत ऋतु में अस्थमा या दमा, खांसी, संधिशुल, वातरक्त, आमवात, सर्दी जुकाम तथा गले के रोग तीव्र गति से पैदा होते है.
मधुर तथा लवण युक्त खाद्य पदार्थो का सेवन – 
हेमंत ऋतु में सर्दी के प्रकोप से बचना चाहिए. मीठे तथा लवण रस वाले पदार्थो का सेवन करना चाहिए. जठराग्नि प्रबल होने से नया अनाज भी आसानी से पच जाता है. अधिक प्रोटिन वाले पदार्थ सेवन कर सकते है. उडद, राजमा, मुंग, मोठ सब कुछ आसानी से पच जाता है.शरद ऋतु में ऋतु में चावल, गेहूं, जो, मूंग की दाल,
शक्कर, शहद, परवल ,आंवला, अंगूर, दूध, गुड़, थोड़ी मात्रा में नमकीन पदार्थ, नदी का जल, कसैले पदार्थों का सेवन हितकर है|

इस ऋतु में चांदनी में रहना शरद कालीन फूलों की माला पहनना शरीर पर चंदन यकस का लेप करना तालाब के किनारे भ्रमण करना स्वच्छ हल के ऊनी वस्त्र पहनना तेल की मालिश करके गुनगुने पानी से नहाना स्वास्थ्य के लिए बहुत हितकर होता है
शरद ऋतु में अपथ्य-
 धूप तापमान औस पर नंगे पैर चलना वह गिरते समय खुले में रहना अत्यधिक व्यायाम, पुरवइया हवा में रहना, दही, खट्टे, कड़वे, तेल तले, गर्म चर्बीदार तथा क्षेत्रीय पदार्थों का सेवन लाल मिर्च का सेवन, दिन में सोना, भरपेट भोजन का त्याग करना चाहिए 
   इस ऋतु में जुलाब आदि द्वारा पेट की शुद्धि कर लेने से पित्तजन्य अनेक व्याधियों से बचाव होता है|



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