नई और पुरानी खांसी के रामबाण नुस्खे





खांसी बच्चे बूढ़े, जवान, स्त्री या पुरुष सभी को कभी भी हो सकती है। इतना साधारण-सा लगने वाला यह रोग किसी-न-किसी उम्र में सबको तंग कर चुका होता है। वास्तव में देखा जाए तो खांसी स्वयं कोई रोग नहीं, बल्कि दूसरे रोगों का लक्षण होता है। यह सर्दी-जुकाम, वाइरल इंफेक्शन, जीवाणु के संक्रमण, प्रदूषण, निमोनिया, तपेदिक, दमा, प्लूरिसी, फेफड़ो की खराबी आदि रोगों में हुआ करती है। मुख्य रूप से यह सूखी, तर, बलगम वाली खांसी और दौरे के रूप में उठने वाली खांसी (व्हूपिंग कफ़) होती है। इस पोस्ट में हम आपको खांसी की अचूक दवा ओं को बतायेंगे जो बिलकुल सुरक्षित हैं | आप इन घरेलु और आयुर्वेदिक नुस्खो को अपनाकर खांसी की समस्या से आसानी से छुटकारा पा सकते है |

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खांसी के कारण :
खांसी होने के प्रमुख कारणों में गले और फेफड़े के भीतरी भाग में सूजन होना, फेफड़ों की छोटी-छोटी नलिकाओं में उत्तेजना पैदा होने से, कीटाणुओं का संक्रमण, धूल या धुएं के कणों से एलर्जी होना आदि होते हैं।


खांसी के लक्षण :
इस रोग में सीने में जकड़न महसूस होना, सूखी खांसी और तर खांसी में बलगम निकलना आदि लक्षण दिखाई देते हैं।

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खांसी के घरेलू उपचार
तुलसी और हल्दी से खांसी की अचूक दवा
तुलसी के सूखे पत्ते और अजवायन 20-20 ग्राम तथा सैंधा नमक 10 ग्राम मिलाकर पाउडर बना लें। इस पाउडर को 3 ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से खांसी, जुकाम दूर हो जाता है।
तुलसी के रस में अदरक व पान के पत्तो का रस, कालीमिर्च, काला नमक और शहद मिलाकर लेने से भी खांसी छुटकारा मिल जाता है। अह भी खांसी की अचूक दवा है |
सुबह खाली पेट 4-5 तुलसी की पत्तियों को साफ पानी से धोकर खाते रहने से खांसी ,कफ, जुकाम आदि अनेक रोगों से बचाव रहता है |

गेहूं के जवारे हैं अच्छे स्वास्थय की कुंजी. 

*खांसी से तुरंत राहत पाने के लिए 1 ग्राम भुनी हुई हल्दी की गांठ मुंह में रखें |
अदरक का रस और शहद समान मात्रा में लेकर (1-1 चम्मच की मात्रा में) इनको मिलाकर मामूली-सा गर्म करके दिन में 3-4 बार लेने से बलगमी खांसी ठीक हो जाती है। बच्चों की खांसी में इस मिश्रण की 1-2 ऊँगली में जितना मिश्रण आ जाए, उतना ही दिन में 2-3 बार लेना ही काफी है। सिर्फ 2-3 दिन में लाभ हो जाएगा। साथ ही नजला, जुकाम भी ठीक हो जायेगा | (नोट शहद को ज्यादा गर्म नही करना चाहिए )

पेट दर्द मे घरेलू उपाय 

*आंवला, अलसी, खस-खस, और सुहागा से खांसी की अचूक दवा बनाने के उपाय
छोटी पीपल, छोटी इलायची के बीज और सौंठ इन सबको 4-4 ग्राम लेकर पीस लें। इसमें 100 ग्राम गुड मिलाकर 1-1 ग्राम की गोलियां बना लें। प्रतिदिन रात में 2 गोली गर्म पानी के साथ लें |
आंवले का पाउडर और मिश्री मिलाकर पानी के साथ लेने से पुरानी खांसी ठीक हो जाती है।
सुहागा (Borax) फुलाकर तथा बारीक पीसकर इसकी 1-1 ग्राम मात्रा को दिन में 3 बार शहद में मिलाकर अथवा गुनगुने पानी में डालकर सेवन करें। इससे खांसी पहले दिन ही ठीक हो जाती है। यह खांसी का रामबाण इलाज है |
*अलसी के बीज भुने हुए पीसकर शहद में मिलाकर लेने से भी खांसी मिटती है।
खस-खस के दाने भूनकर पीस लें और उसमें थोड़ा सैंधा नमक व कालीमिर्च मिलाकर एक चम्मच दिन में 2-3 बार सेवन करने से खांसी मिट जाती है।

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*अदरक और काली मिर्च युक्त तुलसी की चाय के सेवन से खांसी , कफ आदि दूर हो जाते है | इस चाय को बनाने की विधि – तुलसी की चाय बनाने के लिए तुलसी की ताजा 7 हरी पत्तियां या छाया में सुखाई हुई तुलसी की पत्तियों का पाउडर चौथाई चम्मच भर, कालीमिर्च के दाने 7 (थोड़े कुटे हुए) सूखी सौंठ का पाउडर चौथाई चम्मच अथवा ताजा अदरक 2 ग्राम लेकर इन सभी को 1 कप उबलते पानी में डालकर 4-5 उबाल आने दें। इसके बाद बर्तन को नीचे उतारकर 2 मिनट तक ढककर रख दें। उसके बाद छानकर इसमें उबाला हुआ दूध 100 मि.ली और 1-2 चम्मच शक्कर या चीनी मिलाकर गरम-गरम पी लें और कपड़ा ओढ़कर 5-10 मिनट के लिए सो जाएं। इस प्रयोग से खांसी, सर्दी का सिरदर्द, जुकाम, और गले के रोगों से छुटकारा मिल जाता है। साथ ही यह कफ से होने वाली खांसी की अचूक दवा है |

एक्ज़ीमा के घरेलु उपचार

*पुरानी खांसी का आयुर्वेदिक इलाज
जवाखार 1 ग्राम, कालीमिर्च 2 ग्राम, पीपल 4 ग्राम और अनार का छिलका, काकडासिंगी, वंशलोचन, सतमुलहठी तथा सौंठ प्रत्येक को 8-8 ग्राम लेकर बारीक पीसकर छान लें | उसके बाद इस पाउडर में शहद डालकर गोली बना लें। यह दिनभर में 4 गोलियां लेने से पुरानी बलगम वाली खांसी भी ठीक हो जाती है।
बबूल का गोंद, कत्था और मुलहठी प्रत्येक 10–10 ग्राम लेकर तीनों को बारीक पीसकर छान लें | फिर इस पाउडर को अदरक के रस में घोटकर गोलियां बनाकर किसी शीशे की बोतल में रख लें। यह 1-1 गोली लें यह खांसी का रामबाण इलाज है।
    जैसा की हम आपको हमेशा प्रेरित करते है की रोगों से बचाव ही उनका सबसे बेहतर इलाज होता है | सही खानपान और दिनचर्या का ध्यान रखकर रोगों के कुचक्र से बच सकते है | इसलिए नीचे खांसी में खानपान और परहेज सम्बंधित टिप्स दिए गये है जिनका पालन आपको जरुर करना चाहिए
*अतीस का पाउडर 3 ग्राम की मात्रा में शहद में मिलाकर चाटने से खांसी ठीक हो जाती है।

भगंदर को जड़ से खत्म करने के घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे

*अदरक, तुलसी के पत्तों का रस और शहद इन सबको 6-6 ग्राम मिलाकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से सूखी खांसी दूर हो जाती है। यह सूखी खांसी का बढ़ियां घरेलू उपचार है |
*हरड, बहेड़ा, आंवला, सौंठ, कालीमिर्च और पीपल सभी को समान मात्रा में लेकर पीसकर पाउडर बना लें। यह पाउडर प्रतिदिन 3-3 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ लेने से सभी प्रकार की खांसी का तुरंत इलाज होता है।
*अदरक के रस में इलायची का पाउडर और शहद मिलाकर हल्का गर्म करके लेने से खांसी से आराम मिलता है |
एक चौथाई चम्मच दालचीनी और शहद आधा चम्मच को मिलाकर गुनगुने पानी के साथ सुबह शाम लेने से भी कफ वाली खांसी का इलाज हो जाता है |
काली मिर्च और सौंठ से खांसी की अचूक दवा
*काली मिर्च और मिश्री समान मात्रा में लेकर तथा पीसकर इसमें इतनी मात्रा में देशी घी मिलाएं कि गोली-सी बन जाए यह 1-1 गोली दिन में 4 बार टॉफी की तरह चूसने से खांसी के अलावा ब्रोंकाइटिस, गले की खराश तथा गला बैठना आदि रोगों में भी फायदेमंद है।
*एक चम्मच काली मिर्च के पाउडर में 4 गुना गुड मिलाकर आधा-आधा ग्राम दिन में 3-4 बार लेने से भी खांसी ठीक हो जाती है।
*बीजरहित मुनक्का में कालीमिर्च रखकर चबाएं इसके सिर्फ 5-7 दिन के प्रयोग से खांसी दूर हो जाएगी। यह भी खांसी की अचूक दवा की तरह काम करता है |
*कालीमिर्च कूट-पीसकर, छानकर सुरक्षित रख लें। इसे 2 से 4 ग्रेन तक दिन में 2 बार शहद के साथ लेने से खांसी में जरुर आराम होगा | काली मिर्च का पाउडर ताज़ा घर में ही बनाये तो बेहतर होगा | रेडिमेड डब्बाबंद पाउडर में मसालों की खुशबू समय बीतने के साथ-साथ कम होती जाती है |

डेंगू ज्वर :कारण और निवारण के उपाय 

*सुबह नहाने के लिए शरीर पर पानी डालने से पहले कुछ दिन सरसों के तेल की कुछ बूंदें हथेली पर रखकर ऊँगली की सहायता से 1 नाक के दोनों नथुनों (nose nasals) से सूंघने से खुश्की से होने वाले सिरदर्द और सूखी खांसी में लाभ प्राप्त होता है।
*10 ग्राम भुनी हुई फिटकरी और 100 ग्राम देशी खांड इन दोनों को बारीक पीसकर व मिलाकर 14 मात्राएं बना लें। सूखी खांसी (ड्राई कफ) और बलगमी खांसी में 125 मि.ली. गर्म दूध के साथ रोजाना सोते समय 1 डोज का सेवन करें। यह बिल्कुल हानिरहित और सफल खांसी का देसी इलाज है।
खांसी में क्या खाना चाहिए
*सर्दियों में चाय, कॉफी, या गर्म पानी में ग्लूकोस मिलाकर पिएं।
*बथुआ, मकोय, मूली, मेथी, मिस्री, लोंग, हलदी, शहद, माल्टा, दालचीनी, पालक का सेवन करें।
*भोजन में चोकर सहित आटे की रोटियां सेवन करें।

स्मरण शक्ति बढाने के सरल उपचार

*फलों में मीठा संतरा, मौसमी, पपीता, चीकू खरबूजा, अमरूद, खजूर, अंजीर सेवन करने से फेफड़ों में तरावट पहुंचती है और बलगम आसानी से निकल जाता है। 

*जब-जब प्यास लगे गर्म पानी का सेवन करें। दिन भर में 2 से 3 लीटर गुनगुना गर्म जल ही पिएं।
*मुलहठी, दालचीनी, लौंग, हलदी, मिस्री, छोटी इलायची चूसते रहें।
खांसी में क्या न खाए ?

रात में सोते समय गुनगुना पानी शहद मिलाकर घूट-घूट कर पिएं।

तेल, घी या चिकनाहट से बने खाने के व्यंजनों के खाने के बाद कुछ देर तक पानी न पियें |
स्मोकिंग ना करें और करने वालो से भी दूर रहें |
भीड़-भाड़ तथा गंदे, धुएं युक्त वातावरण में न जाएं। अचानक गर्म से सर्द या सर्द से गर्म वातावरण में न जाएं।
प्रदूषण तथा धुंए से बचने के लिए मास्क या रूमाल मुंह पर लगायें |
चावल खाना बिल्कुल बंद कर दें। ज्यादा मिठाई से परहेज करें।
घी या तेल में तले अधिक मिर्च-मसालेदार, खट्टे, तीखे, चटपटे खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें।
बर्फ युक्त ठंडे पेय, आइस क्रीम, शर्बत, लस्सी आदि का सेवन न करें।
फ्रिज , कूलर का ठंडा पानी न पिएं। जुकाम, खांसी के कष्ट में दही, केला, ठंडे तथा तले-भुने खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें।
कई बार खांसी किसी चीज से एलर्जी होने पर भी हो जाती है जैसे धूल मिटटी , फूलो का पराग , आदि | ऐसी स्थिति  में आपको उस चीज से दूर रहना चाहिए, यही उसका आखरी इलाज है |






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शरद ऋतु (Winter Season) में खान पान आहार विहार



   वर्षा ऋतु के तुरंत बाद ही शरद ऋतु (Winter Season) शुरु हो जाती है. आश्विन और कार्तिक मास में शरद ऋतु का आगमन होता है. वर्षा ऋतु में प्राकृतिक रूप से पित्त दोष का संचय होता है
शरद ऋतु (Winter Season) दस्तक दे चुकी है. तो ऋतु बदलने के साथ साथ हमारा खान पान भी इसके अनुसार ही होना चाहिए. आज का हमारा लेख इसी पर आधारित है. इसमें हम बता रहे है कि शरद ऋतु (Winter Season) में हमारा भोजन कैसा होना चाहिए. जिससे हम स्वस्थ के साथ इस ऋतु का भरपूर मजा ले सकते है.


शरद ऋतु में कैसा हो खान पान

खीर का सेवन – शरद ऋतु (Winter Season) में सूर्य का ताप बहुत अधिक होता है. ताप के कारण पित्त दोष पैदा होता है. ऐसे में पित्त से पैदा होने वाले रोग पैदा होते है. पित्त की विकृति में चावल तथा दूध से बनी खीर का सेवन किया जाता है. शरद पूर्णिमा पर इसलिए खीर का विशेष सेवन किया जाता है.
पित्त को शांत करने वाले खाद्य पदार्थो का सेवन – शरद ऋतु में पित्त शांत करने वाले पदार्थो का सेवन अति आवश्यक होता है. शरद ऋतु में लाल चावल, नये चावल तथा गेहूं का सेवन करना चाहिए. कडवे द्रव्यों से सिद्ध किये गये घी के सेवन से लाभ मिलता है. प्रसिद्ध महर्षि चरक और महर्षि सुश्रुत ने कहा है की शरद ऋतु में मधुर, कडवे तथा कैसले पदार्थो का सेवन करना चिहिए. दूध, गन्ने के रस से बने खाद्य, शहद, चावल तथा मुंग आदि का सेवन लाभदायक होता है. कुछ विशेष जंगली जानवरों का मास भी गुणकारी होता है.

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नीम्बू तथा शहद के जल का सेवन – 


शरद ऋतु (Winter Season) में चंद्रमा की किरणों में रखे गये भोजन को उत्तम माना गया है. सुबह के समय हल्के गर्म पानी में एक निम्बू का रस तथा शहद मिलाकर पीने से पित्त दोष का नाश होता है. शरद ऋतु में भोजन के बाद 1-2 केले खा सकते है. केला शरीर को पोषक तत्व तो देता ही है. साथ में पित्त दोष का दमन भी करता है. केला खाकर जल नहीं पीना चाहिए.
खुली छत पर ना सोयें – शरद ऋतु में दिन में तो गर्मी रहती है पर रात को ठण्ड होती है. ऐसे में रात को खुली छत पर नहीं सोना चाहिए. ओस पड़ने से सर्दी, जुकाम तथा खांसी हो सकती है.
हेमंत ऋतु में कैसा हो खान पान-
हेमंत ऋतु अथवा शीत ऋतु आगमन शरद ऋतु के समापन के साथ ही होने लगता है. शीतल हवा का प्रकोप बढ़ने लगता है. शीतल वायु के प्रकोप से शरीर की रुक्षता बढ़ने लगती है. शरीर में जठराग्नि बढ़ने से मेटाबोलिज्म प्रबल होने से भूख अधिक लगने लगती है. इससे सभी तरह के खाद्य पदार्थ आसानी से पाच जाते है.

शक्ति संचय की ऋतु– 


पाचन क्रिया तेज होने के कारण हेमंत ऋतु को शक्ति संचय की ऋतु भी कहा जाता है. इस ऋतु में खानपान पर नियन्त्रण रख कर शारीरिक व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाया जा सकता है. भोजन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हेमंत ऋतु में अस्थमा या दमा, खांसी, संधिशुल, वातरक्त, आमवात, सर्दी जुकाम तथा गले के रोग तीव्र गति से पैदा होते है.

मधुर तथा लवण युक्त खाद्य पदार्थो का सेवन – 

हेमंत ऋतु में सर्दी के प्रकोप से बचना चाहिए. मीठे तथा लवण रस वाले पदार्थो का सेवन करना चाहिए. जठराग्नि प्रबल होने से नया अनाज भी आसानी से पच जाता है. अधिक प्रोटिन वाले पदार्थ सेवन कर सकते है. उडद, राजमा, मुंग, मोठ सब कुछ आसानी से पच जाता है.शरद ऋतु में ऋतु में चावल, गेहूं, जो, मूंग की दाल,
शक्कर, शहद, परवल ,आंवला, अंगूर, दूध, गुड़, थोड़ी मात्रा में नमकीन पदार्थ, नदी का जल, कसैले पदार्थों का सेवन हितकर है|

इस ऋतु में चांदनी में रहना शरद कालीन फूलों की माला पहनना शरीर पर चंदन यकस का लेप करना तालाब के किनारे भ्रमण करना स्वच्छ हल के ऊनी वस्त्र पहनना तेल की मालिश करके गुनगुने पानी से नहाना स्वास्थ्य के लिए बहुत हितकर होता है|

शरद ऋतु में अपथ्य-

 धूप तापमान औस पर नंगे पैर चलना वह गिरते समय खुले में रहना अत्यधिक व्यायाम, पुरवइया हवा में रहना, दही, खट्टे, कड़वे, तेल तले, गर्म चर्बीदार तथा क्षेत्रीय पदार्थों का सेवन लाल मिर्च का सेवन, दिन में सोना, भरपेट भोजन का त्याग करना चाहिए 
   इस ऋतु में जुलाब आदि द्वारा पेट की शुद्धि कर लेने से पित्तजन्य अनेक व्याधियों से बचाव होता है|

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भगंदर को जड़ से खत्म करने के घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे





भगन्दर क्या है ?

यह एक प्रकार का नाड़ी में होने वाला रोग है, जो गुदा और मलाशय के पास के भाग में होता है। भगन्दर में पीड़ाप्रद दानें गुदा के आस-पास निकलकर फूट जाते हैं। इस रोग में गुदा और वस्ति के चारो ओर योनि के समान त्वचा फैल जाती है, जिसे भगन्दर कहते हैं। `भग´ शब्द को वह अवयव समझा जाता है, जो गुदा और वस्ति के बीच में होता है। इस घाव (व्रण) का एक मुंख मलाशय के भीतर और दूसरा बाहर की ओर होता है। भगन्दर रोग अधिक पुराना होने पर हड्डी में सुराख बना देता है जिससे हडि्डयों से पीव निकलता रहता है और कभी-कभी खून भी आता है।
भगन्दर रोग अधिक कष्टकारी होता है। यह रोग जल्दी खत्म नहीं होता है। इस रोग के होने से रोगी में चिड़चिड़ापन हो जाता है। इस रोग को फिस्चुला अथवा फिस्चुला इन एनो भी कहते हैं।
विभिन्न भाषाओं में रोग का नाम : हिन्दी-भगन्दर। ,अंग्रेजी-फिस्चुला इन एनो। ,अरबी-नलिघा। ,बंगाली-भगन्दर। ,गुजराती-भगन्दर।

भगन्दर के प्रकार – 

भगन्दर आठ प्रकार का होता है-
1. वातदोष से शतपोनक
2. पित्तदोष से उष्ट्र-ग्रीव 
3. कफदोष से होने वाला
 4. वात-कफ से ऋजु 
5. वात-पित्त से परिक्षेपी 
6. कफ पित्त से अर्शोज 
7. शतादि से उन्मार्गी और
 8. तीनों दोषों से शंबुकार्त नामक भगन्दर की उत्पति होती है।
1. शतपोनक नामक भगन्दर :
शतपोनक नामक भगन्दर रोग कसैली और रुखी वस्तुओं को अधिक खाने से होता है। जिससे पेट में वायु (गैस) बनता है जो घाव पैदा करती है। चिकित्सा न करने पर यह पक जाते हैं, जिससे अधिक दर्द होता हैं। इस व्रण के पक कर फूटने पर इससे लाल रंग का झाग बहता है, जिससे अधिक घाव निकल आते हैं। इस प्रकार के घाव होने पर उससे मल मूत्र आदि निकलने लगता है।
2. पित्तजन्य उष्ट्रग्रीव भगन्दर : 
इस रोग में लाल रंग के दाने उत्पन्न हो कर पक जाते हैं, जिससे दुर्गन्ध से भरा हुआ पीव निकलने लगता है। दाने वाले जगह के आस पास खुजली होने के साथ हल्के दर्द के साथ गाढ़ी पीव निकलती रहती है।
3. वात-कफ से ऋजु : 
वात-कफ से ऋजु नामक भगन्दर होता है जिसमें दानों से पीव धीरे-धीरे निकलती रहती है।
4. परिक्षेपी नामक भगन्दर :
 इस रोग में वात-पित्त के मिश्रित लक्षण होते हैं।
5. ओर्शेज भगन्दर : 
इसमें बवासीर के मूल स्थान से वात-पित्त निकलता है जिससे सूजन, जलन, खाज-खुजली आदि उत्पन्न होती है।
4. शम्बुकावर्त नामक भगन्दर : 
इस तरह के भगन्दर से भगन्दर वाले स्थान पर गाय के थन जैसी फुंसी निकल आती है। यह पीले रंग के साथ अनेक रंगो की होती है तथा इसमें तीन दोषों के मिश्रित लक्षण पाये जाते हैं।

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5. उन्मार्गी भगन्दर : 
उन्मर्गी भगन्दर गुदा के पास कील-कांटे या नख लग जाने से होता है, जिससे गुदा में छोटे-छोटे कृमि उत्पन्न होकर अनेक छिद्र बना देते हैं। इस रोग का किसी भी दोष या उपसर्ग में शंका होने पर इसका जल्द इलाज करवाना चाहिए अन्यथा यह रोग धीरे-धीरे अधिक कष्टकारी हो जाता है।

भगन्दर के लक्षण – 

भगन्दर रोग उत्पंन होने के पहले गुदा के निकट खुजली, हडि्डयों में सुई जैसी चुभन, दर्द, दाह (जलन) तथा सूजन आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं। भगन्दर के पूर्ण रुप से निकलने पर तीव्र वेदना (दर्द), नाड़ियों से लाल रंग का झाग तथा पीव आदि निकलना इसके मुख्य लक्षण हैं।

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भोजन और परहेज :
आहार-विहार के असंयम से ही रोगों की उत्पत्ति होती है। इस तरह के रोगों में खाने-पीने का संयम न रखने पर यह बढ़ जाता है। अत: इस रोग में खास तौर पर आहार-विहार पर सावधानी बरतनी चाहिए। इस प्रकार के रोगों में सर्व प्रथम रोग की उत्पति के कारणों को दूर करना चाहिए क्योंकि उसके कारण को दूर किये बिना चिकित्सा में सफलता नहीं मिलती है। इस रोग में रोगी और चिकित्सक दोनों को सावधानी बरतनी चाहिए।


: गुदाभ्रंश के सरल 25 आयुर्वेदिक घरेलु उपचार -

1. सांप की केंचुली : 

सांप द्वारा उतारे गये केंचुली का भस्म (राख) बनाकर इसमें तम्बाकू के गुल को मिलाकर सरसों के तेल के साथ लेप करने से नाड़ी व्रण नष्ट होते हैं तथा रोग में लाभ होता है।

2. कालीमिर्च :

 लगभग 10 कालीमिर्च और खादिर (कत्था) 5 ग्राम मिलाकर पीसकर इसके मिश्रण को भगन्दर पर लगाने से पीड़ा खत्म होती है।

3. आंवला : 

आंवले का रस, हल्दी और दन्ती की जड़ 5-5 ग्राम की मात्रा में लें। और इसको अच्छी तरह से पीसकर इसे भगन्दर पर लगाने से घाव नष्ट होता है।

4. आक :

★ आक का 10 मिलीलीटर दूध और दारुहल्दी का दो ग्राम महीन चूर्ण, दोनों को एक साथ खरलकर बत्ती बनाकर भगन्दर के घावों में रखने से शीघ्र लाभ होता है।
★ आक के दूध में कपास की रूई भिगोकर छाया में सुखा कर बत्ती बनाकर, सरसों के तेल में भिगोकर घावों पर लगाने से लाभ होता है।

5. पुनर्न
वा :

★ पुनर्नवा, हल्दी, सोंठ, हरड़, दारुहल्दी, गिलोय, चित्रक मूल, देवदार और भारंगी के मिश्रण को काढ़ा बनाकर पीने से सूजनयुक्त भगन्दर में अधिक लाभकारी होता है। पुनर्नवा शोथ-शमन कारी गुणों से युक्त होता है।

मोतियाबिंद के  घरेलू प्राकृतिक उपचार 

★ पुनर्नवा के मूल को वरुण (वरनद्ध की छाल के साथ काढ़ा बनाकर पीने से आंतरिक सूजन दूर होती है। इससे भगन्दर के नाड़ी-व्रण को बाहर-भीतर से भरने में सहायता मिलती है।


6. खैर :

★ खैर, हरड़, बहेड़ा और आंवला का काढ़ा बनाकर इसमें भैंस का घी और वायविण्डग का चूर्ण मिलाकर पीने से किसी भी प्रकार का भगन्दर ठीक होता है।
★ खैर की छाल और त्रिफले का काढ़ा बनाकर उसमें भैस का घी और वायविडंग का चूर्ण मिलाकर देने से लाभ होता है।


★ खैरसार, 


बायबिडंग, हरड़, बहेड़ा एवं आंवला 10 ग्राम तथा पीपल 20 ग्राम इन सब को कूट पीसकर छान लें। इस चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में शहद और मीठा तेल (धुला तिल का तेल) मिलाकर चाटने से भगन्दर, नाड़ी व्रण आदि ठीक होता है।

गोमूत्र और हल्दी से केन्सर का इलाज

7. गूलर : 


गूलर के दूध में रूई का फोहा भिगोंकर, नासूर और भगन्दर के अन्दर रखने और उसको प्रतिदिन बदलते रहने से नासूर और भगन्दर ठीक हो जाता है।

8. भांगरा : 


भांगरा की पुल्टिश बनाकर कुछ दिनों तक लगातार बांधने से थोड़े ही दिनों में भगन्दर शुद्ध होकर भ


9. सहजना (शोभांजनाद) : 

सहजने का काढ़ा बनाकर उस में हींग और सेंधानमक डालकर पीने से लाभ होता है। सहजना (शोभांजनाद) वृक्ष की छाल का काढ़ा भी पीना अधिक लाभकारी होता है।


10. नारियल :

एक नारियल का ऊपरी खोपरा उतारकर फेंक दे और उसका गोला लेकर उस में एक छेद कर दें। उस नारियल को वट वृक्ष के दूध से भरकर उसके छेद दो अंगुल मोटी मिट्टी के लेप से बन्द कर उपले के आग पर पका लें। पक जाने पर लेप हटाकर उसका रस निकालकर उस में 5-6 ग्राम त्रिफला का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से भगन्दर का रोग ठीक हो जाता है।


गोखरू के औषधीय गुण और प्रयोग


11.. सुहागा : 

4 ग्राम सुहागा को 60 मिलीलीटर जल के साथ घोलकर पीने से खुजली नष्ट होती है। नासूर में लाभ होता है।

12. सैंधानमक : 

सैंधानमक और शहद की बत्ती बनाकर नासूर में रखने से दर्द में आराम मिलता है।

13. बड़ी माई : 

बड़ी माई का कपड़छन चूर्ण 8 ग्राम, अफीम 2 ग्राम और सफेद वैसलीन 20 ग्राम मिलाकर प्रतिदिन दो से तीन बार गुदा के घाव पर लगाने से दर्द में आराम मिलता है।

14. बरगद : 

बरगद के पत्तें, सोठ, पुरानी ईंट के पाउडर, गिलोय तथा पुनर्नवा मूल का चूर्ण सहभाग लेकर पानी के साथ पीसकर लेप करने से फायदा होता है।


15. त्रिफला :

 त्रिफला को जल में उबालकर उस जल को छानकर उससे भगन्दर को धोने से जीवाणु नष्ट होते हैं।


नीम के पत्ते खाने के फायदे 

16. नीम :

★ नीम की पत्तियां, घी और तिल 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर कूट-पीसकर उसमें 20 ग्राम जौ के आटे को मिलाकर जल से लेप बनाएं। इस लेप को वस्त्र के टुकड़े पर फैलाकर भगन्दर पर बांधने से लाभ होता है।
★ नीम की पत्तियों को पीसकर भगन्दर पर लेप करने से भगन्दर की विकृति नष्ट होती है।
★ नीम के पत्ते, तिल और मुलैठी गाढ़ी छाछ में पीसकर दर्द वाले तथा खूनी भगन्दर में लगाने से भगन्दर ठीक होता है।
★ बराबर मात्रा में नीम और तिल का तेल मिलाकर प्रतिदिन दो या तीन बार भगन्दर के घाव पर लगाने से आराम मिलता है।


17. तिल : 

नीम का तेल और तिल का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर नासूर में लगाने से भगन्दर ठीक होता है।


18. अंकोल : 

अंकोल का तेल 100 मिलीलीटर और मोम 25 ग्राम लेकर उसे आग पर गर्म करें और उसमें 3 ग्राम तूतिया (नीला थोथा) मिलाकर लेप करने से नाड़ी में उत्पन्न दाने नष्ट हो जाते हैं।

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19. अनार :

★ मुट्ठी भर अनार के ताजे पत्ते को दो गिलास पानी में मिलाकर गर्म करें। आधे पानी शेष रहने पर इसे छान लें। इसे उबले हुए मिश्रण को पानी में हल्के गर्मकर सुबह शाम गुदा को सेंके और धोयें। इससे भगन्दर ठीक होता है।
★ अनार की पेड़ की छाल 10 ग्राम लेकर उसे 200 मिलीलीटर जल के साथ आग पर उबाल लें। उबले हुए जल को किसी वस्त्र से छानकर भगन्दर को धोने से घाव नष्ट होते हैं।


20. तिल : 

तिल, एरण्ड की जड़ और मुलहठी को 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर थोड़े-से दूध के साथ पीसकर भगन्दर पर उसका लेप करने से रोग में आराम मिलता है।


21. दारुहल्दी : 

दारुहल्दी का चूर्ण बनाकर उसे आक के दूध के साथ अच्छी तरह से मिलाकर हल्का गर्म कर उसका वर्तिका (बत्ती) बनाकर घावों पर लगाना अधिक लाभकारी होता है।

22. डिटोल : 


डिटोल मिले जल से भगन्दर को अच्छी तरह से साफ करें। इसके बाद उस पर नीम की निबौली लगाने से भगन्दर का घाव नष्ट होता है।




23. फिटकरी :


 भुनी फिटकरी 1-1 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम पानी के साथ पीना चाहिए। कच्ची फिटकरी को पानी में पीसकर इसे रूई की बत्ती में लगाकर भगन्दर के छेद में भर दें। इससे रोग में अधिक लाभ होता है।


24 रस सिंदूर : 

रस सिंदूर लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग, त्रिफला पिसा 1 ग्राम और एक बायबिण्डग के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम खाना चाहिए।

25. धुआंसा : 


घर का धुआंसा, हल्दी, दारुहल्दी, लोध्र, बच, तिल, नीम के पत्ते और हरड़-इन सबको बराबर मात्रा में लें, और उसे पानी के साथ महीन पीसकर लेप करने से भगन्दर का घाव शुद्ध होकर भर जाता है।


26. अडूसा : 

अडूसे के पत्ते को पीसकर टिकिया बनाकर तथा उस पर सेंधा नमक बुरक कर बांधने से भगन्दर ठीक होता है।


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27. गुड़ :

 पुराना गुड़, नीलाथोथा, गन्दा बिरोजा तथा सिरस इन सबको बराबर मात्रा लेकर थोड़े से पानी में घोंटकर मलहम बना लें तथा उसे कपड़े पर लगाकर भगन्दर के घाव पर रखने से कुछ दिनों में ही यह रोग ठीक हो जाता है।

28. हरड़ : 

हरड़, बहेड़ा, आंवला, शुद्ध भैंसा गुग्गुल तथा बायबिडंग इन सब का काढ़ा बनाकर पीने से तथा प्यास लगने पर खैर का रस मिला हुआ पानी पीने से भगन्दर नष्ट होता है।

29 निशोथ :


 निशोथ, तिल, जमालगोटा, मजीठ, और सेंधानमक इनको पीसकर घी तथा शहद में मिलाकर लेप करने से भगन्दर ठीक हो जाता है।

30. सांठी : 


सांठी की जड़, गिलोय, सोंठ, मुलहठी तथा बेरी के कोमल पत्ते, इनको महीन पीसकर इसे हल्का गर्म कर लेप करने से भगन्दर में लाभ होता है।

31. रसौत :

 रसौत, दोनों हल्दी, मजीठ, नीम के पत्ते, निशोथ, तेजबल-इनको महीन पीसकर भगन्दर पर लेप करने से भगन्दर ठीक हो जाता है।

32 बिलाई की हाड़ : 


बिलाई की हड्डी (हाड़) को त्रिफला के रस में घिसकर भगन्दर रोग में लगाने से भगन्दर रोग ठीक होता है।

33. गेहूं : 

गेहूं के छोटे-छोटे पौधों के रस को पीने से भगन्दर ठीक होता है।


34 चमेली : 

चमेली के पत्ते, बरगद के पत्ते, गिलोय और सोंठ तथा सेंधानमक को गाढ़ी छाछ में पीसकर भगन्दर पर लगाने से भगन्दर नष्ट होता है।

35. दारुहरिद्रा :

 दारुहरिद्रा का चूर्ण आक (मदार) के दूध के साथ मिलाकर बत्ती बना लें। बत्ती को भगन्दर तथा नाड़ी व्रण पर लगाने से भगन्दर में आराम रहता है।


36. सहोरा (सिहोरा) : 

सहोरा (सिहोरा) के मूल (जड़) को पीसकर भगन्दर में लगाने से रोग ठीक होता है।


37. थूहर : 

थूहर का दूध, आक का दूध और हल्दी मिलाकर बत्ती बनायें। बत्ती को नासूर में रखने से रोग ठीक होता है।


38. शहद :

 शहद और सेंधानमक को मिलाकर बत्ती बनायें। बत्ती को नासूर में रखने से भगन्दर रोग में आराम मिलता है।


39. मुर्दासंख :

 मुर्दासंख को पीसकर भगन्दर के सूजन पर लगाने से सूजन खत्म होती है।

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40  पिठवन :

★ पिठवन के 8-10 पत्तों को पीसकर लेप करने से भगन्दर के रोग में बहुत लाभ होता है।
★ लगभग 10 मिलीलीटर पिठवन के पत्तों के रस को नियमित कुछ दिनों तक सेवन करने से भगन्दर रोग नष्ट हो जाता है।
★ पिठवन में थोड़ा सा कत्था मिलाकर पीसकर लेप करने से या कत्था तथा कालीमिर्च को बराबर मात्रा में मिलाकर पीसकर रोगी को पिलाने से भगन्दर के रोग में लाभ मिलता होता है।


41. लता करंज :

★ लगभग आधा ग्राम से 2 ग्राम करंज के जड़ की छाल का दूधिया रस की पिचकारी भगन्दर में देने से भगन्दर जल्दी भर जाता है।
दूषित कीडे़ से भरे भगन्दर के घावों पर करंज के पत्तों की पुल्टिस बनाकर बांधें अथवा कोमल पत्तों का रस 10-42 ग्राम की मात्रा में निर्गुण्डी या नीम के पत्तों के रस में मिलाकर कपास के फोहे से भगन्दर के व्रण (घाव) पर बांधें या नीम के पत्ते का रस में कपास का फोहा तर कर घाव पर लगाने से रोग में आराम मिलता है।


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★ करंज के पत्ते और निर्गुण्डी या नीम के पत्ते को पीसकर पट्टी बनाकर भगन्दर पर बांधने से या पत्तों को कांजी में पीसकर गर्म लेप बनाकर लेप करने से रोग में आराम मिलता है।
★ भगन्दर पर करंज के पत्तों को बांधने से भगन्दर रोग में लाभ होता है।
★ करंज के मूल (जड़) का रस प्रतिदिन दो से तीन बार लगाने से भगन्दर का पुराना जख्म ठीक होता है।

43. गुग्गुल :

★ गुग्गुल और त्रिफला का चूर्ण 10-10 ग्राम को जल के साथ पीसकर हल्का गर्म करें। इस लेप को भगन्दर पर लगाने से लाभ होता है।
★ शुद्ध गुग्गल 50 ग्राम, त्रिफला पिसा 30 ग्राम और पीपल 15 ग्राम लेकर इसे कूट-छानकर इसे पानी के साथ मिलाकर, इसके चने के बराबर गोलियां बना लें। इन गोलियों को छाया में सूखाकर लगातार 15-20 दिन तक इसकी 1-1 गोलियां सुबह-शाम खायें। इससे भगन्दर ठीक होता है।

44. छोटी अरणी : 

छोटी अरणी के पत्तों को जल द्वारा घुले मक्खन के साथ मिलाकर पीसकर इसका मिश्रण बनाएं। इस मिश्रण को रोग पर लेप करने से अधिक लाभ होता है।

45. अग्निमथ (छोटी अरणी) : 

अग्निमथ की जड़ को जल में उबालकर काढ़ा बनाकर इसके 15 ग्राम काढ़े में 5 ग्राम शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से भगन्दर नष्ट होता है।


संधिवात (आर्थराईटिज) की आयुर्वेदिक घरेलू चिकित्सा

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज

पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि




अगर करेंगे ये उपाय तो सारी रात संबंध बनाना चाहेंगे




*कई बार लोगो के मन में संकोच और दुविधा के चलते वे बेहतर संबंध का आनंद नहीं उठा पाते और उनके हाथ निराशा लगती है। जिससे वे परेशान हो जाते है। इसी कड़ी में हम आपको पांच ऐसे तरीके बता रहे है जिससे आप चरम संबंध का आनंद उठा सकते है।
*बिस्‍तर पर महिला साथी के साथ आंखों में आंखें डालकर प्‍यार जताना, होठों को संवेदनशील अंगों पर फिराना, नाजुक अंगों का स्‍पर्श भी महिलाओं का मन मचलने के लिए काफी होता है। संबंध के दौरान अगर आप तकिये का प्रयोग करते हैं तो इससे आपकी महिला साथी को बेहद आनंद आएगा वह भी तब जब संभोग के दौरान आप तकिये को नीचे रख कर करें।


पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 

*बिना जल्दबाजी किये कम से कम एक मिनट एक दूसरे की आंखों में एकटक देखने की कोशिश करें। साथ ही एक दूसरे के लिए प्यार को महसूस करें। उसके बाद आंखों ही आंखों में इशारा करके अगली स्टेप के लिए तैयार हो जाएं।
*संबंध के समय एक दूसरे को करीब से थामे जिससे वह पूरी तरह उत्तेजित हो सके।एक दूसरे के शरीर इतने ने करीब लाएं कि दोनों को ही गर्मी का अहसास होने लगे। ताकि बाद में किसी तरह की समस्या ना खड़ी हो सके।
*संबंध के दौरान आपकी महिला साथी उम्मीद करती हैं की आप उनके शरीर के बेहद कोमल अंगों को शुरुआती दौर में जीभ व उंगलियों का इस्‍तेमाल करके जरूरी उत्तेजना पैदा करें।


पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज 

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार 

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि






वृक्क शोथ के आयुर्वेदिक घरेलू उपाय




तीव्र वृक्क शोथ होने का कारण क्या है

जीवाणु संक्रमण या कभी-कभी स्वतः ही शरीर में उत्पन्न एलर्जी के कारण वृक्कों के धमनी गुच्छो में सृजन आ जाती है, जिससे मूत्र का निस्पंदन (छानने की क्रिया) कम हो जाती है। इस रोग में मूत्र कम निकलता है तथा एलब्यूमिन के साथ- साथ रक्तकण व धमनी गुच्छो के बहिस्तर की कोशिकाएं (इपीथीलियल सैल) भी मूत्र के साथ बाहर निकलने लगती हैं। इस रोग में वृक्कों की मूत्रस्राविणी नलिकाओं तथा रक्तवाहिनियों में प्रायः कोई विकृति नहीं होती । यह 10 वर्ष की आयु में अधिक होता है और लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में अधिक होता है। बच्चों में लंबे समय तक गला खराब होने के बाद इस रोग की संभावना बढ़ जाती है।

तीव्र वृक्क शोथ के लक्षण क्या है-

रोगी के शरीर विशेष कर चेहरे व पांवों पर सूजन होती है। पहले चार-पांच दिन 100° फारेनहाइट तक हलका बुखार रहता है। पेट में दर्द, उलटी, जी मिचलाना, सांस लेने में कष्ट होना आदि लक्षण मिल सकते हैं।

तीव्र वृक्क शोथ का घरेलू चिकित्सा-

* उपवास इस रोग की चिकित्सा का प्रमुख सिद्धांत है। भोजन न करने से वृक्कों पर कार्य का भार घट जाता है जिससे आराम जल्दी मिलता है। यदि पूर्णतः उपवास सम्भव न हो तो पहले 3 दिन में दो-तीन बार आधा-आधा गिलास पानी, नीबू, ग्लूकोज आदि डालकर ले सकते हैं। जैसे-जैसे पेशाब की मात्रा बढ़ाते जाए, पेय पदार्थों की मात्रा बढ़ाते जाएं। ठोस आहार स्वास्थ्य में पर्याप्त सुधार के बाद ही शुरू करें। इसके अलावा निम्नलिखित उपचार दे सकते हैं
*मक्के के भुट्टे के 20 ग्राम बाल पाव भर पानी में उबालें, आधा रह जाने पर उतार कर गुनगुना पी लें। सुबह-शाम यह एक-एक की मात्रा में लें।
*आक के पत्तों को सुखाकर व जलाकर राख कर लें। आधा चम्मच यह राख थोड़ा-सा नमक मिलाकर एक गिलास छाछ में मिलाकर सुबह-शाम लें।

तीव्र वृक्क शोथ का आयुर्वेदिक औषधियां द्वारा इलाज-

बंग भस्म, पुनर्नवा मंडूर, स्वर्ण वसन्त मालती रस, चन्दनासव, देवदार्वाद्यारिष्ट, चन्द्रप्रभा वटी आदि आयुर्वेदिक दवाएं इस रोग में ली जा सकती हैं।



विशिष्ट परामर्श-

किडनी फेल रोगी के बढे हुए क्रिएटनिन के लेविल को नीचे लाने और गुर्दे की क्षमता  बढ़ाने  में हर्बल औषधि सर्वाधिक सफल होती हैं| इस हेतु वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है| दुर्लभ जड़ी-बूटियों से निर्मित यह औषधि कितनी आश्चर्यजनक रूप से फलदायी है ,इसकी कुछ केस रिपोर्ट पाठकों की सेवा मे प्रस्तुत कर रहा हूँ -







इस औषधि के चमत्कारिक प्रभाव की एक लेटेस्ट  केस रिपोर्ट प्रस्तुत है-

रोगी का नाम -     राजेन्द्र द्विवेदी  
पता-मुन्नालाल मिल्स स्टोर ,नगर निगम के सामने वेंकेट रोड रीवा मध्यप्रदेश 
इलाज से पूर्व की जांच रिपोर्ट -
जांच रिपोर्ट  दिनांक- 2/9/2017 
ब्लड यूरिया-   181.9/ mg/dl
S.Creatinine -  10.9mg/dl






हर्बल औषधि प्रारंभ करने के 12 दिन बाद 
जांच रिपोर्ट  दिनांक - 14/9/2017 
ब्लड यूरिया -     31mg/dl
S.Creatinine  1.6mg/dl








जांच रिपोर्ट -
 दिनांक -22/9/2017
 हेमोग्लोबिन-  12.4 ग्राम 
blood urea - 30 mg/dl 

सीरम क्रिएटिनिन- 1.0 mg/dl
Conclusion- All  investigations normal 




 केस रिपोर्ट 2-

रोगी का नाम - Awdhesh 

निवासी - कानपुर 

ईलाज से पूर्व की रिपोर्ट






दिनांक - 26/4/2016

Urea- 55.14   mg/dl

creatinine-13.5   mg/dl 


यह हर्बल औषधि प्रयोग करने के 23 दिन बाद 17/5/2016 की सोनोग्राफी  रिपोर्ट  यूरिया और क्रेयटिनिन  नार्मल -




creatinine 1.34 
mg/dl

urea 22  mg/dl
















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हड्डियों को फौलाद की तरह ताकतवर बनाने का नुस्खा





हड्डियों की कमजोरी दूर कर शरीर को मजबूत बनाता है यह विशेष प्रयोग
हड्डियॉ शरीर की मजबूती का आधार होती हैं जो शरीर का धारण करती हैं । किंतु यदि हड्डियॉ ही कमजोर हो तो शरीर के मजबूत होने की कल्पना भी नही की जा सकती है । प्रस्तुत है हड्डियों को फौलाद की तरह ताकतवर बनाने का नुस्खा -

जरूरी सामग्री :-

1 :- अश्वगंधा चूर्ण 100 ग्राम
2 :- शतावरी चूर्ण 100 ग्राम
3 :- पुराना गुड़ 300 ग्राम
4 :- हल्दी चूर्ण 100 ग्राम
5 :- शुद्ध शहद 100 ग्राम

 बनाने की विधि :-

ऊपर लिखी गयी सभी सामग्री में से शहद को छोड़कर बाकि सभी सामान को इमामदस्ते में हल्के हल्के एक साथ कूट लें । लगभग 10 मिनट कूटने के बाद आपको एक गाढ़ा पेस्ट जैसा प्राप्त होगा । अब इसमें शहद को मिलाकर एक चमचे से बहुत अच्छी तरह से मिला दें । ध्यान दें यह बहुत महत्तवपूर्ण स्टेप है । शहद सम्पूर्ण मिश्रण में एक समान घुल जाना चाहिये । ऐसा करने से अन्त में एक चटनी जैसी आपके पास बचेगी, बस यही आपका नुस्खा है । इसको साफ काँच की चौड़ी मुँह वाली शीशी या मर्तबान आदि में भर लें ।

सेवन विधी :-.

ऊपर दी गयी मात्रा में सामान लेकर बनाने पर एक बड़े इन्सान के लिये यह महीने भर का नुस्खा तैयार होता है । इसका सेवन एक एक चम्मच रोज सुबह और शाम को करना है । इसके साथ चाहे तो गाय के दूध को गुनगुना गरम करके पिया जा सकता है । छोटे बच्चों को उम्र के हिसाब से आधा अथवा चौथाई चम्मच सेवन करवाया जा सकता है । प्रसूता स्त्री के लिये प्रसव के 2 सप्ताह बाद से यह बहुत उत्तम सेवनीय है ।

विशेष -

अश्वगंधा और शतावरी का चूर्ण आपको अपने आसपास किसी जड़ी-बूटी वाले के पास अथवा आयुर्वेदिक दवाओं की दुकान पर आसानी से मिल जायेगा । इस नुस्खे को हर महीने केवल एक महीने के लिये तैयार करना उचित रहता है । इक्ट्ठा बना कर नही रखना चाहिये । इस प्रयोग को लागातार चार से छः महिने सेवन करने से यह बहुत अच्छे लाभ देता है ।

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज

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ब्रा पहन कर सोने के क्या नुकसान है?





   क्या महिलाओं को रात को सोते समय ब्रा पहननी चाहिए? यह सवाल समय के साथ उठता ही आ रहा है।
कभी कहा जाता है कि रात को ब्रा पहन कर जरूर सोना चाहिए कभी स्टडीज सामने आती है कि नहीं ब्रा पहन कर सोना खतरे की घंटी हो सकती है। ज्यादा भारी ब्रेस्ट वाली महिलाओं को अक्सर ब्रा पहन कर सोने की सलाह दी जाती है वहीं जिनके कम होते हैं उनके लिए यह जरूरी नहीं। लेकिन क्या आपको पता है ब्रा पहन कर सोने से आपको क्या नुकसान हो सकते हैं?

 ब्रा पहन कर सोने के क्या नुकसान है-

1. रक्त संचार में असर-

 ब्रा इलास्टिक और पट्टियों की वजह से आपके सीने तक खून को नहीं पहुंचने देती। रात को इसका असर ज्यादा होता है। हर बार यह सलाह दी जाती है कि महिलाओं को ब्रांडेड और अच्छी ब्रा पहननी चाहिए ताकि पूरे शरीर में रक्त का संचार अच्छे से हो।

2. तंग पट्टियां- 

अक्सर ब्रा की पट्टियां काफी टाइट होती है जिससे रात को सोने में दिक्कत होती है। जितनी टाइट आपकी ब्रा होगी उतनी ही आपको दिक्कत होगी। अगर आप फिर भी रात को ब्रा पहन कर सोना चाहती हैं तो इसे ढीला कर लें। ताकि इसके टाइट होने से आपको कोई दिक्कत न हो।

3.स्तनों के आसपास पिगमेंटेशन- 

जो महिलाएं नियमित रूप से ब्रा पहनती हैं उनके स्तनों के आसपास निशान पड़ने लग जाते हैं उन्हें पिगमेंटेशन की दिक्कत होने लगती है। इससे बचने के लिए आपको रात में ब्रा पहनने से बचना होगा।

4. सूजन-

 ज्यादा समय तक ब्रा पहनने से फ्लूइड इकट्ठा होने लगता है और यह एक बड़ा कारण है कि महिलाएं आखिर क्यों ब्रा पहन कर नहीं सोतीं।

5. बेचैनी-


रात के समय ब्रा पहन कर सोने से बेचैनी बनी रहती है. और ठीक तरह से नींद भी नहीं आ पाती है. डॉक्टर्स भी रात के समय ढीले कपड़े पहन कर सोने की सलाह देते है.


6. त्वचा में खराश- 

कई महिलाओं को ब्रा पहन कर सोने में दिक्कत हो जाती है यही नहीं उनकी त्वचा पर निशान पड़ जाते हैं। अगर आपको भी ऐसी ही दिक्कत होती है तो आप भी रातो ब्रा पहन कर मत सोइए।

7॰एलर्जी 

दिनभर के बाद रात में भी ब्रा पहन कर सोने से पसीने और के चलते आपके स्तन एलर्जी का शिकार हो सकते है

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बंद नाक खोलने और कफ़ निकालने के अनुपम नुस्खे



    सर्दी का मौसम हो या बेमौसम सर्दी हो गई हो, नाक बंद होने की समस्या हर किसी के साथ होती है। लेकि‍न    असली समस्या तो तब होती है, जब आपकी नाक आसानी से नहीं खुलती और आपको बंद नाक की वजह से घुटन होने लगती है। इस समय नाक बंद होना सबसे गंभीर समस्या लगने लगती है। अगर आपके पास जरुरी सामग्री मौजूद है, तो बंद नाक से छुटकारा पाना बेहद आसान है। आपने सोचा होगा कि बंद नाक के पीछे कारण क्या है? ठण्ड लगना और मौसम के हिसाब से तालमेल न बिठा पाना इसके पीछे मुख्य कारण है। इस स्थिति में नाक के छिद्र उत्तेजित हो जाते है और उसमे जलन भी हो सकती है।
बंद नाक खोलने के कुछ आसान उपाय -

नारियल तेल -

नारियल तेल बंद नाक को खोलने का एक बेहतरीन उपाय है। जब भी कभी आपकी नाक बंद हो जाए, तो आप नारियल तेल अंगुली से नाक के अंदर तक लगाएं। या फिर नरियल तेल की कुछ बूंदे नाक में डालें और फिर गहरी सांस लें। कुछ ही देर में आपकी नाक खुल जाएगी। ध्यान रहे की नारियल तेल पिघला हुआ हो।
कपूर की महक भी बंद नाक को खोलने का अच्छा तरीका है। आप चाहें तो इसे नारियल तेल के साथ मिलाकर सूंघ सकते हैं, या फिर सादा कपूर सूंघना भी आपको फायदा देगा। इसके अलावा नाक को गर्माहट देकर भी बंद नाक को आसानी से खोल जा सकता है।

टमाटर सुप –

   यदि आप चटपटा खाने के शौकीन हैं, तो यह आपके लिए बंद नाक में बहुत ही फायदेमंद साबित होगा। चटपटी चीजें नाक बंद होने पर आपकी नाक को खोल देती हैं। घर पर गरम- गरम टमाटर सुप बनाकर पीने से भी बंद नाक में राहत मिलेगी। टमाटर सुप में लहसुन, नींबू रस और नमक मिलाकर पिएं, आराम मिलेगा।
बंद नाक खोलने का एक और आसान सा तरीका है एक छोटा सा व्यायाम। जी हां, इसके लिए आपको अपनी नाक बंद करके सिर को पीछे की तरह झुकाना है और कुछ समय के लिए सांस को रोककर रखना है। इसके बाद नाक खोलकर सांस लेने में आसानी होगी। इस तरीके को आप दोहरा सकते हैं।
    ठंड या सर्दी की वजह से ही नाक बंद होने की समस्या होती है। इसे ठीक करने के लिए हल्का गर्म या गुनगुना पानी भी आपकी बहुत मदद कर सकता है। अगर आप सहज हैं तो इसके लिए अपना सिर पीछे की ओर झुकाएं और किसी ड्रॉपर की मदद से हल्के गर्म या गुनगुने पानी की कुछ बूंदे नाक के छिद्रों में डालें। कुछ ही देर में वापस सिर आगे कर लें और इस पानी को निकाल दें।

कच्‍ची प्‍याज –

बंद नाक की समस्या के लिए प्‍याज भी फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि, कच्‍ची प्‍याज खाने से बंद नाक खुल जाती है। और इसके अलावा अगर आप प्याज का रस किसी कपडे पर डालकर सूंघे तो भी बंद नाक खुल सकती है.
नसवार –

नसवार का अधिक उपयोग स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होता है. मगर बंद नाक होने पर इसकी चुटकी भर मात्रा सूंघने से बहुत वेग से छींके आती हैं. और दिमाग तक चढ़ा हुआ रेशा नाक के रस्ते बाहर निकल जाता है. और 5 मिनट के बाद पूरा सिर हल्का हो जाता है. पुराने लोग इसका इस्तेमाल किया करते थे. आज कल के लोगों को इसका ज्ञान कम होगा. नसवार किसी भी पंसारी के पास मिल जाएगी.

गुनगुने पानी से स्‍नान –

यदि आपको अक्सर नाक बंद रहने की समस्‍या रहती है, तो कोशिश करें कि गुनगुने पानी से स्‍नान करें। क्योंकि गुनगुने पानी से स्‍नान करने से आपको बंद नाक में आराम मिलेगा।

भाप लेना -

बंद नाक खोलने का यह तरीका काफी पुराना और प्रभावकारी है, जो तुरंत आपको राहत देता है। इसके लिए आपको बस पानी गर्म करके किसी बर्तन में निकलना है और उसमें खुशबूदार तेल की कुछ बूंदे डालनी हैं। आपको जो भी महक पसंद हो। इसके अलावा आप इसमें अयोडीन की कुछ बूंदें या फिर विक्स कैप्सूल भी डाल सकते हैं। अब इस बर्तन की ओर चेहरा करके भाप लें। यह नाक खोलने के साथ ही सर्दी में आराम देगा।

गरमा गरम चाय पिएं -

नाक खोलने के लिए आप गर्म चाय ट्राई कर सकते हैं। यदि आप ग्रीन टी, पिपरमिंट या फिर अदरक की चाय पीते हैं तो यह फायदेमंद होगी। दूध वाली चाय मत पियें.

अलसी का सेवन -

अगर कफ जम चुका है इस कारण से नाक बंद है तो आप सुबह शाम एक एक चम्मच अलसी के बीजों को उतने ही गुड के साथ रोजाना खाएं. कफ भी निकल आएगा और नाक भी बिलकुल साफ़ हो जायेगी. अलसी के सेवन से शरीर में जमा हुआ कफ़ बाहर निकल जाता है.

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त्वचा की खूबसूरती के लिए नहाने के पानी मे क्या मिलाएँ?


   हर लड़की चाहती है कि वो नैचुकल तरीके से सुदंर,कोमल और निखरी त्वचा पाए। इसके लिए लड़किया कई तरह के घरेलू नुस्खे आजमाती हैं। इन नुस्खों का इस्तेमाल उनको हफ्ते में 2-3 बार करना पड़ता है। कई बार तो इनके लिए समय निकालना भी मुश्किल हो जाता है। आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं, जिससे नहाने के पानी में इस्तेमाल करने से ही आप खूबसूरत त्वचा पाएंगी। इन तरीको को अजमाकर सारा दिन फ्रैश भी रहेंगी।
नहाने के पानी में मिलाएं ये चीजें-


1॰एप्पल सिडर विनेगर

त्वचा का रूखापन दूर करने के लिए नहाने के पानी में 1-2 चम्मच एप्पल सिडर विनेगर डाल कर नहाएं। इससे त्वचा की नमी बनी रहेगी।

2.बेकिंग सोडा

नहाने से पहले पानी में थोड़ा-सा सोड़ा डाल लें। इस पानी से नहाने पर त्वचा पर मुंहासों से छुटकारा मिलता है। ध्यान में रखें कि बेकिंग सोड़े की मात्रा का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा न करें। 

3॰ गुलाब जल 

सारा दिन ताजगी बनाएं रखने के लिए नहाने के पानी में गुलाब जल डालें। इस पानी ले नहाने पर ताजगी बनी रहेगी और त्वचा में भी निखार आएगा।

4.नींबू के छिलके

नींबू त्वचा की रंगत निखारने में बेहद कारगर है। नहाने के पानी में 1 नींबू का रस डालकर नहाएं।इसके छिलकों को हाथ और पैर पर रगड़ें। 

5.दूध और शहद

रोजाना पानी में दूध और शहद डालकर नहाएं। इससे रूखी त्वचा से छुटकारा मिलेगा। दूध से त्वचा को नैचुरल माइश्चराइजर मिलेगा। शहद से रूखी त्वचा से निजात मिलेगी। इससे आपको कुछ अलग से इस्तेमाल करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। 
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