विभिन्न शारीरिक दर्दों का काल है आकडे का पौधा



   


आक जिसको मदार, आकड़ा, अर्क, अकद, इत्यादि नामो से जाना जाता है, भारतीय चिकित्सा विज्ञान में अति प्राचीन काल से यह एक दिव्य औषिधि रही है. इसके बारे में एक बात प्रचलित है के यह सूर्य के तेज़ के साथ बढ़ता है और सूर्य के तेज़ कम होते होते इसका प्रभाव भी कम होता जाता है. और बारिश के दिनों में इस पौधे का प्रभाव बिलकुल खत्म जैसा हो जाता है. सूर्य के जितने नाम हैं उतने नाम ही आक के भी हैं.

कालमेघ के उपयोग ,फायदे

Calotropis procera इसको इंग्लिश में swallow wort कहते हैं. Calotropis giginata इंग्लिश में इसे giant milk weed कहते है. यह Asclepidaceae परिवार से है सामान्य भाषा में इनके नाम ऊपर बता ही दिए गए हैं.
इसकी वैसे तो 4 प्रजातियाँ हैं मगर मुख्यतः दो प्रजातियाँ ही पायी जाती है. दो प्रजातियाँ अति दुर्लभ हैं.
वैसे तो आक ऐसा कोई रोग नहीं है जिसमे इसका उपयोग ना हो, यह भयंकर से भयंकर रोग में भी अपना विशेष असर दिखाता है. मगर हम आज इसके एक गुण जो के शरीरक दर्द को हरने का है, उस पर चर्चा करेंगे, के इसमें ऐसे क्या गुण पाए जाते हैं जिस कारण से ये अति विशेष है. 

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    आक में पाए जाने वाले प्राकृतिक Steroid, Alkaloid, Triterpenoids, Cardenolides और Saponin glycoside पाए जाते हैं. आक में ये सब रसायन होने के कारण इसमें शरीर में हर हिस्से में दर्द को हरने की क्षमता पायी जाती है, Specially गठिया का दर्द, Arthritis का दर्द, कमर दर्द, एड़ी का दर्द, अर्थात Musculoskeltan यानी कोई भी मांस पेशियों और हड्डियों से सम्बंधित कैसा भी दर्द हो उसमे इसके निरंतर इस्तेमाल करने से आश्चर्यजनक परिणाम मिलते हैं.
सावधानी
इन प्रयोग को करने से पहले आप ये ध्यान दें के इसके दूध की बूँद आँखों में नहीं जानी चाहिए अन्यथा आँखों में अंधापन आ सकता है.

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आकड़ा के विभिन्न दर्दों में विभिन्न प्रयोग.-
कमर के दर्द में उपयोगी-
*आक के दूध को थोड़े काले तिलो के साथ खूब खरल कर लें. (खरल रसोई में पड़ी हुयी मसाला कूटने वाली को बोलते हैं) जब यह पतला लेप सा हो जाए तो उसे गर्म कर के दर्द वाले स्थान पर लगा कर अच्छे से मालिश करे जिस से ये तेल अब्सोर्ब हो जाए और इसके बाद आक के पत्ते पर तिल का तेल या सरसों का तेल चुपड कर तवे पर गर्म करके इसको दर्द वाले स्थान पर बाँध लें. इस से शीघ्र ही लाभ होगा

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*तीसरा सहज प्रयोग ये है के आक का दूध निकाल कर इसको एड़ी पर अच्छे से रगड़ें, इतना रगड़ें, के ये अन्दर तक अवशोषित हो जाए. थोड़े दिन ऐसा करने से इसमें आराम आ जायेगा. एक बार तो तुरंत भी असर दिखायेगा.
*आक के पत्ते को तवे पर गर्म कर लीजिये, इस पर हो सके तो तिल का तेल लगायें, आगर तिल का तेल ना मिले तो सरसों का तेल लगायें, अभी इस पत्ते को किसी कपडे की सहायता से एड़ी पर बाँध दीजिये, अभी इसको किसी चीज से गर्म सिकाव कीजिये, किसी ईंट या पत्थर को चूल्हे पर गर्म कर लीजिये, इतना गर्म कीजिये जितना आप सहन कर सको, इस को अभी पत्ते के ऊपर से ऐड़ी पर सिकाव कीजिये. इस से पत्ते के अन्दर के रसायन एड़ी के दर्द वाली जगह के अन्दर तक जायेंगे. और वहां पर तुरंत ही आराम का अहसास होगा ये प्रयोग भी आप 10 से 15 दिन करें. काफी फर्क दिखने पर अगर ज़रूरत लगे तो इसको और भी जारी रखें| 

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घुटनों के दर्द में आकडा-
घुटनों के दर्द में दोपहर में आक की ताज़ी डंडी से दूध निकाल कर इसको हलके हाथ से circular motion में मालिश करनी है जब तक ये पुरा अवशोषित न हो जाये . ऐसा दिन में दो बार करे ये प्रयोग भी आप 10 से 15 दिन करें. काफी फर्क दिखने पर अगर ज़रूरत लगे तो इसको और भी continue कीजिये.
आक की ताजे पत्तो को तवे पर हल्का गर्म करे और उसके ऊपर सरसों या तिल का तेल लगाये और अब आप इसको घुटनों पर किसी सूती कपडे की सहायता से बांध ले और फिर इसका गर्म सिकाव करे|

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एड़ी के दर्द में उपयोग -
आक के 15 फूलों को एक कटोरी पानी में उबाल लीजिये, इसको उबालने के बाद फूलों को और पानी को अलग अलग कर लीजिये, अभी इस पानी से जितना गर्म सह सके एड़ी को अच्छे से धुलाई करें. अभी इन फूलों को अच्छे से निचुड़ जाने के बाद कोई सूती कपडे की सहायता से एड़ी पर बाँध लों. और इसके ऊपर से जुराब और जूते पहन लें. ये प्रयोग आपको 10 से 15 दिन करें. काफी फर्क दिखने पर अगर ज़रूरत लगे तो इसको  आगे भी जारी रखें||

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