सिरदर्द को कहें बाय बाय घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खों से





सिरदर्द होने पर ज्यादातर लोग दवा लेना एकमात्र उपाय मानते हैं। इसके पीछे की वजहों को जानने की कोशिश नहीं करते। इससे ये समस्या लगातार बनी रहती है। घंटों एक जगह पर बैठकर काम करते रहने से, चश्मा लगाए रहने से और कई बार भूखे रहने से भी सिरदर्द हो सकता है।
हर उम्र के लोग अकसर इसकी शिकायत करते हैं। वे लोग इसके लिए कई तरह की दवाइयां भी लेते हैं। कई बार तो सिर दर्द से छुटकारा पाने के लिए लोग काफी पैसे भी खर्च करते हैं। ऐसे लोगों को शायद ये पता नहीं कि सिर दर्द घरेलू उपचार के जरिए भी आसानी से ठीक हो सकता है।
कभी कभी तो सिददर्द ऑफिस में ही शुरु हो जाता है, लगातार कंप्‍यूटर के सामने बैठ कर आंखें गड़ाए रखने से ऐसा होता है। तो ऐसे में जिसके पास सिरदर्द की गोली नहीं होती है वह या तो चाय-कॉफी पी लेता है या फिर काम से ब्रेक ले कर थोड़ी देर के लिये बाहर निकल जाता है। पर इसके अलावा और भी कई घरेलू नुस्‍खे हैं जिसे आप आजमा सकते हैं। आइए हम आपाको बताते हैं सिर दर्द के कुछ घरेलू नुस्खे।
*दालचीनी पाउडर का पेस्ट लगाएं सिर दर्द से छुटाकारा पाने का सबसे अच्छा उपचार यह है कि दालचीनी को पीस कर पाउडर बना लें। अब इसे पानी में मिला कर पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को सिर पर लगाने से आपको तुरंत आराम मिलेगा
*गर्मागरम मासाला चाय यह सिरदर्द के लिए एक रामबाण उपाय है जिसको आसानी से घर में आजमाया जा सकता है। अपने गुणों के आधार पर यह एक उत्‍तेजक पेय पदार्थ है जो नींद को भगा कर दिमाग को सचेत करती है। नीदं गायब करने के लिए अगर आप चाय बना रहे हों तो उसमें थोडी से अदरख के साथ लौंग और इलायची भी मिला दें
*लहसुन का रस पीएं लहसुन के कुछ टुकड़े लें और इसे निचोड़ का रस निकालें। कम से कम एक चम्मच रस निकालें और पीएं। दरअसल लहसुन एक पेनकीलर के रूप में काम करता है, जिससे सिर दर्द से राहत पहुंचता है।
*लौंग और नमक का पेस्ट सिर दर्द के लिए यह एक प्रभावी उपचार है। इसके लिए आप लौंग पाउडर और नमक का पेस्ट बना लें। फिर इस पेस्ट को दूध में मिलाकर पीएं। नमक में हाइग्रस्कापिक गुण पाया जाता है, जिससे यह सर में मौजूद सभी द्रव्य पदार्थ को सोख लेता है। नतीजतन सिर दर्द से आराम मिलता है।
गर्म दूध पीएं सिर दर्द से छुटकारा पाने के लिए गाय का गर्म दूध पीएं। साथ ही अगर आप सिर दर्द से ग्रसित हैं तो अपने आहार में घी को शामिल करें।
*ताजा नींबू और गर्म पानी का घोल एक ग्लास में गर्म पानी लें और नींबू का रस मिला कर पीएं। इससे आपको सिर दर्द से राहत पहुंचेगा। कई बार पेट में गैस बनने से भी सिर दर्द होता है। यह घरेलू उपचार इस तरह के सिर दर्द को आसानी से ठीक कर देता है। नींबू पानी पीने से न सिर्फ गैस की समस्या दूर होती है, बल्कि सिद दर्द भी ठीक होता है।
*नारियल तेल से मसाज करें नारियल तेल से 10-15 मिनट मसाज करने से भी आपको सिर दर्द से राहत मिलेगा। अगर आप गर्मी के समय में सिर दर्द से जूझ रहे हैं तो यह नुस्खा प्रभावी तरीके से काम करेगा। यह सिर को ठंडक पहुंचाता है और दर्द कम करता है।
*चंदन लगाएं थोड़ा सा सैंडलवुड लेकर पानी के साथ उसका पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को अपने ललाट पर लगाएं। आपका सिर दर्द पूरी तरह से ठीक हो जाएगा।
*धनिया और चीनी का घोल आप धनिया, चीनी और पानी का घोल पी कर भी सिर दर्द से निजात पा सकते हैं। अगर आपका सिर दर्द जुखाम की वजह से है तो यह उपचार काफी असरकारी साबित होगा।
*यूकेलिप्टस तेल से करें मसाज सिर दर्द से छुटकारा पाने का एक और अच्छा तरीका यह है कि आप यूकेलिप्टस तेल से मसाज करें। इस तेल में दर्द से छुटकारा दिलाने का गुण होता है और इससे तुरंत आराम पहुंचता है।
*सेब खाएं जब आप सुबह उठें तो सेब पर नमक लगा कर खाएं। इसके बाद गर्म पानी या दूध पीएं। अगर आप लगातार 10 दिन तक ऐसा करेंगे तो पाएंगे कि आपकी सिर दर्द की समस्या खत्म हो गई।
ये मैग्नीशियम का सबसे अच्छा स्त्रोत होते हैं जो मांसपेशियों को मजबूत व ठीक करने के लिए अच्छे होते हैं। माइग्रेन के 50 प्रतिशत से भी ज्यादा रोगियों में मैग्नीशियम की ही कमी होती है। इसके लिए रोजाना इन्हें स्नैक्स के जैसे खाया जा सकता है जिससे लंबे समय के बाद भी सिरदर्द की कोई समस्या नहीं होगी। इन्हें शाम के समय हल्की भूख लगने पर खाया जा सकता है।


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*अपने पांव को गर्म पानी में रखें सिर दर्द से निजात पाने का एक और तरीका है। कुर्सी पर बैठ कर अपने पांव गर्म पानी में डुबो कर रखें। सोने से पहले कम से कम 15 मिनट तक ऐसा करें। अगर आप स्थाई सिर दर्द की समस्या से जूझ रहे हैं तो कम से कम दो से तीन सप्ताह तक ऐसा करें।
*अच्छे से सोएं सिर दर्द के पीछे सबसे बड़ा कारण ये होता है लोग ठीक तरह से नींद नहीं लेते हैं। इसलिए अगर आप सिरदर्द से निजात पाना चाहते हैं तो अच्छी नींद जरूर लें। अगर आप 6 घंटे की भी नींद लेंगे तो भी आपको सिर दर्द की शिकायत नहीं होगी।
*धनिया, जीरा और अदरक का घोल पीएं धनिया पत्ती, जीरा और अदरक से बनी चाय पीएं। इससे सिर दर्द से काफी तेजी से राहत पहुंचता है। थोड़ा गर्म पानी लें और इसमें इन तीनों को डाल कर पांच मिनट तक उबालें। अच्छे परिणाम के लिए इसे दिन में कम से कम दो बार पीएं।
*लौकी का गूदा लौकी का गूदा सिर पर लेप करने से सिरदर्द में तुरंत आराम मिलता है।
*खीरा काटकर सूँघे सिरदर्द में खीरा काटकर सूँघने एवं सिर पर रगडऩे से तुरंत आराम मिलता है।
*सीड्स और नट्स खाना -
ये मैग्नीशियम का सबसे अच्छा स्त्रोत होते हैं जो मांसपेशियों को मजबूत व ठीक करने के लिए अच्छे होते हैं। माइग्रेन के 50 प्रतिशत से भी ज्यादा रोगियों में मैग्नीशियम की ही कमी होती है। इसके लिए रोजाना इन्हें स्नैक्स के जैसे खाया जा सकता है जिससे लंबे समय के बाद भी सिरदर्द की कोई समस्या नहीं होगी। इन्हें शाम के समय हल्की भूख लगने पर खाया जा सकता है।
*अगर आप लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करते हैं तो सावधान हो जाने की जरूरत है। कंप्यूटर पर काम करते समय 20 या 30 मिनट बाद 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें और उस पर फोकस करें। ये आंखों के लिए भी एक अच्छी एक्सरसाइज है। इसके अलावा अगर सिरदर्द महसूस हो तो एक बड़ा गिलास पानी पिएं और 2-3 मिनट आंखों को बंद करके गर्दन को घुमाएं।


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केलॉइड को दूर करने के लिए घरेलू उपचार





केलॉइड को हटाने के लिए कुछ लोग सर्जरी, इंजेक्शन या लेजर उपचार को चुनते हैं। लेकिन इन महंगे उपचार पर पैसा खर्च करने से अच्‍छा है कि आप इसे दूर करने के लिए घर में ही मौजूद कम लागत वाले कुछ सरल प्राकृतिक उपचारों का इस्‍तेमाल करें।
केलॉइड
केलॉइड एक तरह के निशान है, जो रेशेदार ऊतको की असामान्‍य वृद्धि के कारण विस्‍तारित होते हैं। त्‍वचा के जख्म जैसे मुंहासे, जलने, काटने और छिलने पर निशान छोड़ सकते हैं। कोलेजन की अतिरिक्त राशि के बढ़ने से केलॉइड समय के साथ बढ़ता है। आमतौर पर यह दर्दरहित होता है लेकिन कभी-कभी इसमें खुजली हो सकती है।
भले ही केलॉइड के निशान से स्‍वास्‍थ्‍य को कोई नुकसान नहीं होता, ले‍किन कई लोग को यह बढ़े हुए बदसूरत निशान नापसंद होते है। इसे हटाने के लिए कुछ लोग सर्जरी, इंजेक्शन या लेजर उपचार को चुनते हैं। लेकिन इन महंगे उपचार पर पैसा खर्च करने से अच्‍छा है कि आप केलॉइड को दूर करने के लिए घर में ही मौजूद कम लागत वाले कुछ सरल प्राकृतिक उपचारों का इस्‍तेमाल करें। यहां पर केलॉइड के लिए सबसे अच्‍छे  उपाय दिये गये हैं

एलोवेरा

एलोवेरा त्‍वचा के लिए बहुत अच्‍छा होता है और केलॉइड के उपचार के लिए इसका इस्‍तेमाल किया जा सकता है। यह सूजन कम करने, त्‍वचा को अच्‍छी तरह मॉइस्चराइज रखने और क्षतिग्रस्‍त त्‍वचा को ठीक करने में मदद करता है। यह त्‍वचा के संक्रमण को रोकने में मदद करता है। दिन में दो बार गुनगुने पानी से अच्छी तरह प्रभावित हिस्‍से को साफ करके एलोवेरा जैल को लगाये।

नींबू का रस

नींबू के रस में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट और विटामिन सी केलॉइड सहित विभिन्‍न प्रकार के निशान के इलाज में बहुत मददगार होता है। इस उपाय का उपयोग करने के कुछ ही हफ्तों के बाद, निशान के रंग, बनावट, दिखावट, और लचीलापन में आपको महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिल जाता है। ताजा नींबू के रस को निकालकर उसे त्‍वचा के प्रभावित हिस्‍से पर लगायें। लगभग आधे घंटे के बाद इसे गुनगुने पानी से धो लें। इस प्रक्रिया को नियमित रूप से कम से कम दिन में एक बार जरूर दोहरायें।

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चंदन और गुलाब जल

चंदन में त्‍वचा को पुर्नजीवन देने के कई गुण होते हैं और गुलाव जल एक प्राकृतिक त्‍वचा टोनर है। इन दोनों के एक साथ इस्‍तेमाल से केलॉइड के निशान को रोकने और हल्‍का करने में मदद मिलती है। चंदन पाउडर में गुलाब जल मिलाकर गाढ़ा पेस्‍ट बना लें। इस पेस्‍ट को रात को सोने से पहले प्रभावित हिस्‍से पर लगा लें। सुबह गुनगुने पानी से इसे अच्‍छी तरह से धो लें। एक यह दो महीने इस उपाय को नियमित रूप से करें। i

बेकिंग सोडा-

बेकिंग सोडा एक एब्रेसिव (सख्त) एजेंट के रूप में काम करता है और त्वचा एक्सफोलिएट में मदद करता है। केलॉइड का प्रबंधन करने के लिए इसका सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आप ए‍क हिस्‍से बेकिंग सोडा को तीन भाग हाइड्रोजन पेरोक्‍साइड के साथ मिलाकर पेस्‍ट बना लें। सूजन को कम करने और उपचार प्रक्रिया को तेज करने के लिए इसे सीधा प्रभावित हिस्‍से पर लगाये। निशान की गंभीरता के आधार पर इसे एक दिन में तीन या चार बार लगाये।

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लहसुन

लहसुन, केलॉइड के कारण होने वाले अत्यधिक फीब्रोब्लास्ट प्रसार को रोकता है। ऐसा करना इसे इस तरह के निशान को दूर करने वाला अच्छा घर उपचार बनाता हैं। लहसुन के तेल को निशान पर लगा कर 10 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर उस हिस्‍से को अच्‍छी तरह से धो लें। अगर लहसुन का तेल उपलब्ध नहीं है, तो आप लहसुन की कली को क्रश करके उसका उपयोग कर सकते हैं। लहसुन का तेल या कली से जलन पैदा हो जाये तो तुरंत गुनगुने पानी से धो लें।

एस्पिरिन

सिर दर्द और अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने के लिए आप एस्पिरिन का इस्‍तेमाल करते हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि केलॉइड के इलाज के लिए भी इसे इस्‍तेमाल किया जा सकता है। यह केलॉइड के निशान के आकार और उपस्थिति को कम करने में मदद करता है। इसके लिए तीन या चार एस्पिरिन की गोलियां क्रश करके पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस पेस्‍ट को निशान पर लगाये और पूरी तरह से सूख जाने पर पानी के नीचे धीरे-धीरे रगड़ कर साफ कर लें। सूखाकर आप इस.पर जैतून या टी ट्री ऑयल लगा लें। इस उपाय को केलॉइड के दूर होने तक लगाये।

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सेब साइडर सिरका

सेब साइडर सिरका केलॉइड के लिए सबसे अच्‍छा घरेलू उपाय है क्‍योंकि यह निशान के आकार और लाली को कम करने में मदद करता है। प्रभा‍वित हिस्‍से पर इसे लगा कर धीरे-धीरे मसाज करें ताकि सिरका अच्‍छी तरह से त्‍वचा में अवशोषित हो जाये। कुछ मिनट इसे ड्राई होने के लिए छोड़ दें। उपचार में तेजी लाने के क्रम में इस प्रक्रिया को दोहराये। अच्‍छा परिणाम पाने के लिए इस उपाय को एक दिन में कई बाद करें और इलाज को चार से पांच सप्‍ताह के लिए जारी रखें। एप्पल साइडर सिरके के उपयोग से त्‍वचा पर जलन होने पर पानी से इसे तुरंत धो लें।
शहद
शहद एक प्राकृतिक हुमेक्टैंट humectant(किसी भी पदार्थ को नम रखने के लिए अन्‍य पदार्थ के साथ जोड़ा जाता है) है जो त्‍वचा के घावों को भरने और नम करने में मदद करता है। इसलिए केलॉइड के उपचार के लिए केलॉइड की अत्‍यधिक सिफारिश की जाती है। कुछ सप्ताह से अधिक शहद का नियमित इस्‍तेमाल केलॉइड की समस्या को हल कर देता हैं। निशान पर ताजा शहद लगाये और रक्त परिसंचरण में सुधार और मृत त्वचा कोशिकाओं के संचय को रोकने के लिए धीरे-धीरे उस हिस्‍से की मालिश करें।

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हरसिंगार के फायदे देख डाक्टर की भी बोलती बंद

                                                     


   हरसिंगार के फूल देखने में छोटे और सफेद रंग के होते हैं। इसकी डंडी नारंगी रंग की होती है। यह फूल रात को खिलते हैं आर सुबह जमीन पर बिखरे नज़र आते हैं। इसके पूरे पेड़ का इस्‍तमाल दवाइयों और सौंदर्य सामग्रियों को बनाने में किया जाता है।
    बात चाहे खूबसूरती निखारने की हो या फिर सेहत को फायदा पहुंचाने की, हरसिंगार फूल का कोई जवाब नहीं। हिंदू धर्म में हरसिंगार का बहुत महत्‍व है, इसे ईश्‍वर की अराधना में भी एक खास स्‍थान प्रदान किया गया है। अंग्रेजी में इसे नाइट जेस्मिन और उर्दू में इसे गुलज़ाफ़री कहा जाता है।

     हरसिंगार के फूलों से लेकर पत्त‍ियां, छाल एवं बीज भी बेहद उपयोगी हैं। इसकी चाय, न केवल स्वाद में बेहतरीन होती है बल्कि सेहत के गुणों से भी भरपूर है। इस चाय को आप अलग-अलग तरीकों से बना सकते हैं और सेहत व सौंदर्य के कई फायदे पा सकते हैं। जानिए विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के लिए इसके लाभ और 
चाय बनाने का तरीका

वि‍धि 1 :

हरसिंगार की चाय बनाने के लिए इसकी दो पत्तियां और एक फूल के साथ तुलसी की कुछ पत्त‍ियां लीजिए और इन्हें 1 गिलास पानी में उबालें। जब यह अच्छी तरह से उबल जाए तो इसे छानकर गुनबुना या ठंडा करके पी लें। आप चाहें तो स्वाद के लिए शहद या मिश्री भी डाल सकते हैं। यह खांसी में फायदेमंद है।

वि‍धि 2 :

हरसिंगार के दो पत्ते और चार फूलों को पांच से 6 कप पानी में उबालकर, 5 कप चाय आसानी से बनाई जा सकती है। इसमें दूध का इस्तेमाल नहीं होता। यह स्फूर्तिदायक होती है।

*जोड़ों में दर्द - 

हरसिंगार के 6 से 7 पत्ते तोड़कर इन्हें पीस लें। पीसने के बाद इस पेस्ट को पानी में डालकर तब तक उबालें जब तक कि इसकी मात्रा आधी न हो जाए। अब इसे ठंडा करके प्रतिदिन सुबह खालीपेट पिएं। नियमित रूप से इसका सेवन करने से जोड़ों से संबंधित अन्य समस्याएं भी समाप्त हो जाएगी।

*साइटिका -

 दो कप पानी में हरसिंगार के लगभग 8 से 10 पत्तों को धीमी आंच पर उबालें और आधा रह जाने पर इसे अंच से उतार लें। ठंडा हो जाने पर इसे सुबह शाम खाली पेट पिएं। एक सप्ताह में आप फर्क महसूस करेंगे।

*बुखार -

 किसी भी प्रकार के बुखार में हरसिंगार की पत्तियों की चाय पीना बेहद लाभप्रद होता है। डेंगू से लेकर मलेरिया या फिर चिकनगुनिया तक, हर तरह के बूखार को खत्म करने की क्षमता इसमें होती है।


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*बवासीर - 

हरसिंगार को बवासीर या पाइल्स के लिए बेहद उपयोगी औषधि माना गया है। इसके लिए हरसिंगार के बीज का सेवन या फिर उनका लेप बनाकर संबंधित स्थान पर लगाना फायदेमंद है।

*हृदय रोग - 

हृदय रोगों के लिए हरसिंगार का प्रयोग बेहद लाभकारी है। इस के 15 से 20 फूलों या इसके रस का सेवन करना हृदय रोग से बचाने में कारगर है।

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*त्वचा के लिए - 

हरसिंगार की पत्त‍ियों को पीसकर लगाने से त्वचा संबंधी समस्याएं समाप्त होती हैं। इसके फूल का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से चेहरा उजला और चमकदार हो जाता है।

*अस्थमा - 


सांस संबंधी रोगों में हरसिंगार की छाल का चूर्ण बनाकर पान के पत्ते में डालकर खाने से लाभ होता है। इसका प्रयोग सुबह और शाम को किया जा सकता है। की भी बोलती बंद 

*दर्द - 

हाथ-पैरों व मांसपेशियों में दर्द व खिंचाव होने पर हरसिंगार के पत्तों के रस में बराबर मात्रा में अदरक का रस मिलाकर पीने से फायदा होता है।

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गौमूत्र के अद्भुत फायदे





गाय के गोबर में लक्ष्मी और मूत्र में गंगा का वास होता है, जबकि आयुर्वेद में गौमूत्र के ढेरों प्रयोग कहे गए हैं। गौमूत्र का रासायनिक विश्लेषण करने पर वैज्ञानिकों ने पाया, कि इसमें 24 ऐसे तत्व हैं जो शरीर के विभिन्न रोगों को ठीक करने की क्षमता रखते हैं। आयुर्वेद के अनुसार गौमूत्र का नियमित सेवन करने से कई बीमारियों को खत्म किया जा सकता है। जो लोग नियमित रूप से थोड़े से गौमूत्र का भी सेवन करते हैं, उनकी रोगप्रतिरोधी क्षमता बढ़ जाती है। मौसम परिवर्तन के समय होने वाली कई बीमारियां दूर ही रहती हैं। शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है।


पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

* गौ मूत्र कड़क, कसैला, तीक्ष्ण और ऊष्ण होने के साथ-साथ विष नाशक, जीवाणु नाशक, त्रिदोष नाशक, मेधा शक्ति वर्द्धक और शीघ्र पचने वाला होता है। इसमें नाइट्रोजन, ताम्र, फास्फेट, यूरिया, यूरिक एसिड, पोटाशियम, सल्फेट, फास्फेट, क्लोराइड और सोडियम की विभिन्न मात्राएं पायी जाती हैं। यह शरीर में ताम्र की कमी को पूरा करने में भी सहायक है।
*गौमूत्र को मेध्या और हृदया कहा गया है। इस तरह से यह दिमाग और हृदय को शक्ति प्रदान करता है। यह मानसिक कारणों से होने वाले आघात से हृदय की रक्षा करता है और इन अंगों को प्रभावित करने वाले रोगों से बचाता है।


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* 20 मिली गौमूत्र प्रात: सायं पीने से निम्न रोगों में लाभ होता है।
1. भूख की कमी, 2. अजीर्ण, 3. हर्निया, 4. मिर्गी, 5. चक्कर आना, 6. बवासीर, 7. प्रमेह, 8.मधुमेह, 9.कब्ज, 10. उदररोग, 11. गैस, 12. लूलगना, 13.पीलिया, 14. खुजली, 15.मुखरोग, 16.ब्लडप्रेशर, 17.कुष्ठ रोग, 18. जांडिस, 19. भगन्दर, 20. दन्तरोग, 21. नेत्र रोग, 22. धातु क्षीणता, 23. जुकाम, 24. बुखार, 25. त्वचा रोग, 26. घाव, 27. सिरदर्द, 28. दमा, 29. स्त्रीरोग, 30. स्तनरोग, 31.छिहीरिया, 32. अनिद्रा।
*गौमूत्र को न केवल रक्त के सभी तरह के विकारों को दूर करने वाला, कफ, वात व पित्त संबंधी तीनो दोषों का नाशक, हृदय रोगों व विष प्रभाव को खत्म करने वाला, बल-बुद्धि देने वाला बताया गया है, बल्कि यह आयु भी बढ़ाता है।



प्रोस्टेट वृद्धि से मूत्र समस्या का 100% अचूक ईलाज 


*पेट की बीमारियों के लिए गौमूत्र रामबाण की तरह काम करता है, इसे चिकित्सीय सलाह के अनुसार नियमित पीने से यकृत यानि लिवर के बढ़ने की स्थिति में लाभ मिलता है। यह लिवर को सही कर खून को साफ करता है और रोग से लड़ने की क्षमता विकसित करता है।

* कैंसर की चिकित्सा में रेडियो एक्टिव एलिमेन्ट प्रयोग में लाए जाते है | गौमूत्र में विद्यमान सोडियम,पोटेशियम,मैग्नेशियम,फास्फोरस,सल्फर आदि में से कुछ लवण विघटित होकर रेडियो एलिमेन्ट की तरह कार्य करने लगते है और कैंसर की अनियन्त्रित वृद्धि पर तुरन्त नियंत्रण करते है | कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करते है | अर्क आँपरेशन के बाद बची कैंसर कोशिकाओं को भी नष्ट करता है | यानी गौमूत्र में कैसर बीमारी को दूर करने की शक्ति समाहित है | इसमें कैसर को रोकने वाली ‘करक्यूमिन‘ पायी जाती है |

हस्त  मेथुन जनित यौन दुर्बलता के उपचार 

*दूध देने वाली गाय के मूत्र में “लेक्टोज” की मात्रा आधिक पाई जाती है, जो हृदय और मस्तिष्क के विकारों के लिए उपयोगी होता है।
. गौमूत्र मोटापा कम करने में भी सहायक है। एक ग्लास ताजे पानी में चार बूंद गौ मूत्र के साथ दो चम्मच शहद और एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर नियमित पीने से लाभ मिलता है।
* गौमूत्र का सेवन छानकर किया जाना चाहिए। यह वैसा रसायन है, जो वृद्धावस्था को रोकता है और शरीर को स्वस्थ्यकर बनाए रखता है।
*गौमूत्र किसी भी प्रकृतिक औषधी के साथ मिलकर उसके गुण-धर्म को बीस गुणा बढ़ा देता है| गौमूत्र का कई खाद्य पदार्थों के साथ अच्छा संबंध है जैसे गौमूत्र के साथ गुड़, गौमूत्र शहद के साथ आदि


गोमूत्र और हल्दी से केन्सर का इलाज

. गाय के मूत्र में आयुर्वेद का खजाना है! इसके अन्दर ‘कार्बोलिक एसिड‘ होता है जो कीटाणु नाशक है, यह किटाणु जनित रोगों का भी नाश करता है। गौमूत्र चाहे जितने दिनों तक रखे, ख़राब नहीं होता है।
* जोड़ों के दर्द में दर्द वाले स्थान पर गौमूत्र से सेकाई करने से आराम मिलता है। सर्दियों के मौसम में इस परेशानी में सोंठ के साथ गौ मूत्र पीना फायदेमंद बताया गया है।

* गैस की शिकायत में प्रातःकाल आधे कप पानी में गौ मूत्र के साथ नमक और नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए।
* चर्म रोग में गौ मूत्र और पीसे हुए जीरे के लेप से लाभ मिलता है। खाज, खुजली में गौ मूत्र उपयोगी है।


हर प्रकार की खांसी और कफ की समस्या के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार

*मांसाहारी व्यक्ति को गौमूत्र नहीं लेना चाहिए| गौमूत्र लेने के 15 दिन पहले मांसाहार का त्याग कर देना चाहिए| पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति को सीधे गौमूत्र नहीं लेना चाहिए, गौमूत्र को पानी में मिलाकर लेना चाहिए| पीलिया के रोगी को गौमूत्र नहीं लेना चाहिए| देर रात्रि में गौमूत्र नहीं लेना चाहिए| ग्रीष्म ऋतु में गौमूत्र कम मात्र में लेना चाहिए|
* घर में गौमूत्र छिड़कने से लक्ष्मी कृपा मिलती है, जिस घर में प्रतिदिन गौमूत्र का छिड़काव किया जाता है, वहां देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है।
*गौमूत्र में गंगा मईया वास करती हैं। गंगा को सभी पापों का हरण करने वाली माना गया है, अत: गौमूत्र पीने से पापों का नाश होता है।


वैवाहिक जीवन की मायूसी दूर  करें इन जबर्दस्त  नुस्खों से

*जिस घर में नियमित रूप से गौमूत्र का छिड़काव होता है, वहां बहुत सारे वास्तु दोषों का समाधान एक साथ हो जाता हैं।

*अमेरिका में हुए एक अनुसंधान से सिध्द हो गया है कि गौ के पेट में “विटामिन बी” सदा ही रहता है। यह सतोगुणी रस है व विचारों में सात्विकता लाता है।
*गौमूत्र लेने का श्रेष्ठ समय प्रातःकाल का होता है और इसे पेट साफ करने के बाद खाली पेट लेना चाहिए| गौमूत्र सेवन के 1 घंटे पश्चात ही भोजन करना चाहिए|
* गौमूत्र देशी गाय का ही सेवन करना सही रहता है। गाय का गर्भवती या रोग ग्रस्त नहीं होना चाहिए। एक वर्ष से बड़ी बछिया का गौ मूत्र बहुत लाभकारी होता है।



भटकटैया (कंटकारी)के गुण,लाभ,उपचार


*गोमुत्र कीटनाशक के रूप में भी उपयोगी है। देसी गाय के एक लीटर गोमुत्र को आठ लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग किया जाता है । गोमुत्र के माध्यम से फसल को नैसर्गिक युरिया मिलता है। इस कारण खाद के रूप में भी यह छिड़काव उपयोगी होता है ।गौमूत्र से औषधियाँ एपं कीट नियंत्रक बनाया जा सकता है।
* अमेरिका ने गौ मूत्र पर 6 पेटेंट ले लिए हैं, और अमेरिकी सरकार हर साल भारत से गाय का मूत्र आयात करती है और उससे कैंसर की दवा बनाती हैं । उसको इसका महत्व समझ आने लगा है। जबकि हमारे शास्त्रो मे करोड़ो वर्षो पहले से इसका महत्व बताया गया है।





हींग मिला पानी पीने के अद्भुत फायदे





हींग का प्रयोग हिंदुस्तानी रसोई में सदियों से होता आ रहा है। एक ओर जहां इसका प्रयोग भोजन का स्वाद बढ़ाने में होता है वहीं दूसरी ओर इसका प्रयोग कई तरह की बीमारियों के निदान में भी किया जाता है। आयुर्वेद में भी हींग का बड़ा महत्व है। आयुर्वेद के अनुसार रोज़ाना एक गिलास गुनगुने पानी में चुटकी भर हींग मिलाकर पीना शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद होता हैं।

ब्लड शुगर लेवल करता है कंट्रोल-

अपने खाने में हींग का इस्तेमाल करने के साथ ही गुनगुने पानी में हींग मिलाकर पीने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल होता है। हींग इंसुलिन को छिपाने के लिए अग्नाशय की कोशिकाओं को उत्तेजित करता है जिससे ब्लड शुगर लेवल कम होता है और इससे डायबिटीज का खतरा भी कम होता है।




दर्द से दिलाता है राहत-

गुनगुने पानी में हींग मिलाकर पीने से दांत का दर्द, माइग्रेन जैसे दर्द से आराम मिलता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और दर्द निवारक तत्व मौजूद होते हैं जो दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं।

हड्डियां और दांत होते हैं मजबूत-

हींग के पानी में एंटी इंफ्लेमेट्री प्रॉपर्टीज होती है जिससे आपकी हड्डियां मजबूत होती हैं। इसमें मौजूद एंटी आक्सीडेंट्स दांतों को मजबूत बनाते हैं और बीटा कैरोटीन से आंखे हेल्दी रहती हैं।



महिलाओं के लिए है लाभकारी-

हींग में मौजूद एंटी-इनफ्लैमोटरी तत्व पीरियड्स से जुड़ी सभी तकलीफों में राहत पहुंचाती है। हींग के गुनगुने पानी के सेवन से ल्यूकोरिया और कैंडिडा इंफेक्शन भी जल्दी ठीक हो सकता है।

पेट की तकलीफें करता है दूर-

अपच और पेट की दूसरी समस्याओं से निजात पाने के लिए सदियों से हींग का इस्तेमाल किया जा रहा है। हींग के पानी में मौजूद एंटी इंफ्लेमेंट्री और एंटी ऑक्सीडेंट्स तत्व खराब पेट, एसिडिटी, पेट के कीड़े को दूर करने के साथ ही अपच की समस्या को भी दूर करते हैं।

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आँखों के लिए-

इसमें बीटा कैरोटीन होते हैं। इससे आँखें हेल्दी रहती हैं। 

ईम्युनिटी बढ़ती है-

हींग का पानी पीने से बॉडी की इम्युनिटी बढ़ती है। यह सर्दी-खांसी जैसे इंफेक्शन से बचाता है।

केंसर से बचाव-

इसमें एंटीकार्सिनोजेनिक एलिमेंट्स होते हैं। यह कैंसर से बचाता है।

एनीमिया (खून की कमी) मे-