शुगर रोगी खा सकते हैं ये फल



  

  फल पोषण और ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत है। हालांकि हर फल में एंटीऑक्सीडेंट और पौष्टिक तत्व की मात्रा अलग-अलग होती है। इससे होने वाला फायदा व्यक्ति के शरीर की जरूरतों पर निर्भर करता है। अगर कोई मधुमेह से पीड़ित है तो अलग-अलग फल शरीर में ब्लड सूगर लेवल को अलग-अलग मात्रा में बढ़ाता है। अगर आप सुरक्षित रहना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि आप उन फलों के सेवन से बचें, जो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा देता है।
यदि आप मधुमेहर रोगी हैं तो, जाहिर सी बात है कि आपके दिमाग में यह एक सवाल जरुर आया होगा कि क्‍या हम फल का सेवन कर सकते हैं? एक्‍सपर्ट बोलते हैं कि मधुमेह रोगी भी फल का सेवन कर सकते हैं लेकिन सही मात्रा में। ऐसे फल जैसे, केला, लीची, चीकू और कस्‍टर्ड एप्‍पल आदि से बचना चाहिये।
    ज्यादातर फलों को ब्लड शुगर लेवल में बदलाव लाने की क्षमता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। मधुमेह के रोगी किसी भी फल को खाने से पहले उसका जीआई इंडेक्स वैल्यू जरूर देख लें। जीआई का अर्थ होता है ग्लाइकेमिक इंडेक्स। अगर यह 55 या उससे कम है तो मधुमेह के रोगी इसे खा सकते हैं। स्ट्रॉबेरी, नाशपाती और एप्पल ऐसे कुछ फल हैं जिनमें कार्बोहाइड्रेट कम मात्रा में होता है और इसे मधुमेह के रोगी खा सकते हैं।
   


आज हम आपको कुछ ऐसे  फल बताने जा रहे हैं, जिसका सेवन आप आराम से कर सकते हैं। दरअसल, मधुमेह के रोगियों को रेशेदार फल, जैसे तरबूज, खरबूजा, पपीता, सेब और स्ट्राबेरी आदि खाने चाहिए। इन फलों से रक्त शर्करा स्तर नियंत्रित होता है इसलिये इन्‍हें खाने से कोई नुकसान नहीं होता।
   मधुमेह रोगियों को फलो का रस नहीं पीना चाहिये क्‍योंकि एक तो इसमें चीनी डाली जाती है और दूसारा कि इसमें गूदा हटा दिया जाता है, जिससे शरीर को फाइबर नहीं मिल पाता। तो आइये जानते हैं कि मधुमेहर रोगियों को कौन-कौन से फलों का सेवन करना चाहिये।

यह फल मधुमेह रोगी के लिए अच्छा फल माना जाता है। ये ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में आपकी काफी मदद करता है। इस फल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। हालांकि इस फल का सीजन काफी छोटा होता है। जामुन के मौसम में रोजाना तरकीबन 6 जामुन खाएं, इससे आपको फायदा ही होगा। साथ ही आप जामुन की गुठलियों को सुखाकर उसका पाउडर बनाकर रख लें, इसका सेवन आप सालभर कर सकते हैं।


जामुन-


सेब-

इस फल के बारे में मधुमेह को लेकर लोगों में काफी भ्रम है। सेव में कैलोरी बहुत कम होती है और फाइबर ज्यादा होता है। मधुमेह के रोगी एक छोटी सेव रोज खा सकता है। ग्रीन एप्पल ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।सेब में एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है।
अनानास-
शुगर के मरीज अनानास  खा सकते हैं। अनानास में कैलोरी और ग्लाइसेमिक इंडेक्स दोनों ही काफी कम होता है। इसे खाने से ग्लूकोज अचानक नहीं बढ़ता। मधुमेह के मरीज इसके दो तीन टुकड़े खा सकते हैं।
इसमें एंटी बैक्‍टीरियल तत्‍व होने के साथ ही शरीर की सूजन कम करने की क्षमता होती है। यह शरीर को पूरी तरह से फायदा पहुंचाता है।

पपीता-

पपीता में मीठेपन के अलावा भी कई सारे पोषक तत्व मौजूद होते हैं, विशेष रूप से विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा। मधुमेह के मरीज को भी इन पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसलिए वो पपीता खा सकते हैं। लेकिन पपीता सीमित मात्रा में ही खाएं।इसमें विटामिन और अन्‍य तरह के मिनरल होते हैं।अंजीर
इसमें मौजूद रेशे मधुमेह रोगियों के शरीर में इंसुलिन के कार्य को बढावा देते हैं।

संतरा-

यह फल मधुमेह रोगी के लिए अच्छा होता है।इसमें विटामिन सी और फाइबर की अच्छी खासी मात्रा होती है। यह फल आपका ब्लड ग्लूकोज लेवल कम करता है और इंसुलिन बढ़ाता है। मधुमेह के रोगी रोजाना एक संतरा खा सकता हैं।

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आमला-

इस फल में विटामिन सी और फाइबर होता है जो‍ कि मधुमेह रोगी के लिये अच्‍छा माना जाता है।

नाशपाती-

नाशपाती इसमें काफी ज्यादा फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होता है। मानसून के दिनों में बाजार में नाशपाती की बहार आ जाती है। ये फल ज्यादा महंगा नहीं होता, लेकिन ये आपका पेट भी देर तक भरा रख सकता है। ज्यादा तो नहीं, लेकिन आप आधी नाशपाती हर रोजाना खा सकते हैं।

अनार-

यह फल भी बढे हुए ब्‍लड शुगर लेवल को कम करने में असरदार है।

तरबूज-

यदि इसे सही मात्रा में खाया जाए तो यह फल मधुमेह रोगियों के लिये अच्‍छा साबित होगा।

अंगूर-

अंगूर का सेवन मधुमेह के एक अहम कारक मेटाबोलिक सिंड्रोम के जोखिम से बचाता है। अंगूर शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करता है।

खरबूज-

इसमें ग्‍लाइसिमिक इंडेक्‍स ज्‍यादा होने के बावजूद भी फाइबर की मात्रा अच्‍छी होती है इसलिये यदि इसे सही मात्रा में खाया जाए तो अच्‍छा होगा।
कटहल-

यह फल इंसुलिन लेवल को कम करता है क्‍योंकि इसमें विटामिन ए, सी, थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, कैल्‍शियम, पौटैशियम, आयरन, मैग्‍नीशियम तथा अन्‍य पौष्टिक तत्‍व होते हैं।

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पाचन शक्ति के उपचार जो पत्थर भी पचा दे



*खाने में फलों का इस्तेमाल अधिक करे। फलों में पपीता, अमरूद, अंजीर, संतरे और अनार खाए। इनमें फाइबर अधिक मात्रा में होता है जिससे पाचन क्रिया ठीक होती है और पेट भी साफ़ रहता है।
* पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए पानी अधिक पिए। खाना खाने से आधा घंटा पहले गुनगुना पानी पीने से पाचन मजबूत होता है।
* एक छोटा टुकड़ा अदरक ले और इस पर नींबू का रस डाल कर चूसे, इस घरेलू नुस्खे से पाचन क्रिया बढ़ती है।
* काला नमक, जीरा और अजवाइन बराबर मात्रा में ले और मिक्स करके इस मिश्रण का एक चम्मच पानी के ले।
*. इलायची के बीजों को पीस कर चूर्ण बना ले और बराबर मात्रा में मिश्री मिला ले। तीन ग्राम मात्रा में ये देसी दवा दिन में दो से तीन बार खाए।
* अजवाइन के पानी से भी पाचन मजबूत होता है।
* आँवले का पाउडर, भूना हुआ जीरा, सौंठ, सेंधा नमक, हींग और काली मिर्च मिलाकर इसकी छोटी छोटी वडी बनाकर सेवन करे। इस उपाय से पाचन शक्ति मजबूत होती है और इससे भूख भी बढ़ती है।

पाचन शक्ति बढ़ाने के योग- 

हलासन
धनुरासन
नौकासन
भुजंगासन
पश्चिमोत्तासन
इन आसनों को करने से पहले आप किसी योग गुरु की मदद से इन्हे सही तरीके से करने की जानकारी ले।
पाचन क्रिया ठीक करने के उपाय
* संतरे का रस पीने से पाचन क्रिया दरुस्त होती है।
अंकुरीत गेंहू, मूँग दाल और चने खाने से भी पाचन शक्ति ठीक रहती है।
*तांबे के बर्तन में रखा पानी सुबह खाली पेट पीने से पाचन शक्ति बढ़ती है।
*मूली का सेवन पेट में गैस की समस्या में रामबाण इलाज है। मूली पर काला नमक लगाये और सलाद जैसे खाये। मूली की सब्जी और रस पिने से भी फायदा होता है। इसे रात को ना खाए।
*विटामिन सी और फाइबर युक्त चीज़े खाने से डिजेस्शन की प्राब्लम से छुटकारा मिलता है।
* पाचन क्रिया सुधारने के लिए सलाद अधिक खाए। सलाद में टमाटर, कला नमक और नींबू का प्रयोग करे।
*. पुदीने का प्रयोग पेट की कई बीमारियों के उपचार में होता है। रोजाना इसका सेवन करने से पेट की बीमारियों से छुटकारा मिलता है।
* हरी सब्जियाँ पालक, मेथी पाचन सुधारने का अछा उपाय है, इनके सेवन से क़ब्ज़ का उपचार होता है और शरीर को ज़रूरी पोषण मिलता है।
लगातार कई घंटों तक एक ही जगह पर ना बैठे और अगर आपने काम की वजह से आपको एक ही जगह बैठना पड़ता है तो एक दो घंटे में पांच से दस मिनट का ब्रेक ले और कुछ कदम चले।

रात को देर से ना सोए, छह से आठ घंटे की नींद ले।
सुबह दोपहर और रात का भोजन सही समय पर करे।
खाना चबा चबा कर खाए।
धूम्रपान, तंबाकू और शराब से दूर रहे।
तला हुआ और मसालेदार खाने से परहेज करे।


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निम्न रक्तचाप के आयुर्वेदिक , प्राकृतिक उपचार


हर इंसान की चाहत होती है कि उसके जीवन में हर खुशी हो और कोई गम उसके आसपास न भटके। लेकिन जीवन में खुशियों को भरने के लिये स्वास्थ्य का खास स्थान है।ईश्वर ने यदि हमें रोग रूपी दुःख दिये हैं तो आसपास ही उनसे बचने के साधन भी दिये हैं,फर्क सिर्फ इतना है कि उसकी सत्ता को आप कैसे पहचानते हैं। यहाँ आपको स्वास्थ्य से सम्बन्धित जानकारियों को देखने और मनन करने को मिलेगी.

निम्न रक्तचाप के कारण,बचाव और इलाज

हमारे गलत खान पान और रहन सहन के कारण हम लोग लो ब्लड प्रेशर के शिकार हो जाते हैं। आज हम इसी विषय पर विस्तृत चर्चा करते हैं। हमारे दिल से सारे शरीर को साफ खून की सप्लाई लगातार होती रहती है। अलग-अलग अंगों को होने वाली यह सप्लाई आर्टरीज (धमनियों) के जरिए होती है। ब्लड को प्रेशर से सारे शरीर तक पहुंचाने के लिए दिल लगातार सिकुड़ता और वापस नॉर्मल होता रहता है - एक मिनट में आमतौर पर 60 से 70 बार। जब दिल सिकुड़ता है तो खून अधिकतम दबाव के साथ आर्टरीज में जाता है। इसे सिस्टोलिक प्रेशर कहते हैं। जब दिल सिकुड़ने के बाद वापस अपनी नॉर्मल स्थिति में आता है तो खून का दबाव आर्टरीज में तो बना रहता है, पर वह न्यूनतम होता है। इसे डायास्टोलिक प्रेशर कहते हैं। इन दोनों मापों - डायास्टोलिक और सिस्टोलिक को ब्लड प्रेशर कहते हैं। ब्लड प्रेशर दिन भर एक-सा नहीं रहता। जब हम सोकर उठते हैं तो अमूमन यह कम होता है। जब हम शारीरिक मेहनत का कुछ काम करते हैं जैसे तेज चलना, दौड़ना या टेंशन, तो यह बढ़ जाता है। बीपी मिलीमीटर्स ऑफ मरकरी (एमएमएचजी) में नापा जाता है।
दरअसल निम्न रक्तचाप में रक्त का प्रवाह बहुत धीमा पड़ जाता है अर्थात् ऊ पर का रक्तचाप सामान्य से घटकर 90 अथवा 100 रह जाए तथा नीचे का रक्चाप 80 से घटकर 60 रह जाए, ऐसी स्थिति को निम्न रक्तचाप कहते है। दौर्बल्य, उपवास, भोजन तथा जल की कमी, अधिक शारीरिक तथा मानसिक परिश्रम, मानसिक आघात तथा अधिक रक्त बहने की दशा में यह रोग हो जाता है। निम्न रक्तचाप में नब्ज धीमी पड़ जाती है, थोड़ा सा परिश्रम करने पर रोगी थक जाता है। शरीर का दुर्बल होना, आलस्य अनुत्साह, शक्ति का घटते जाना, बातें भूल जाना, मस्तिष्क अवसाद, विस्मृति, थोड़ी सी मेहनत में ही चिड़चिड़ाहट, सिर दर्द, सिर चकराना आदि इसके लक्षण होते है।


लो ब्लड प्रेशर के प्रमुख कारण-

* बहुत अधिक मोटापा।
* पानी या खून की कमी

* अधिक मानसिक चिंतन
* अधिक शोक।
* अचानक सदमा लगना, कोई भयावह दृश्य देखने या खबर सुनने से भी लो बीपी हो सकता है
* अधिक क्रोध
* आहार का असंतुलन होना
* उलटियां, डेंगू-मलेरिया, हार्ट प्रॉब्लम, सदमे, इन्फेक्शन, ज्यादा मोशन आने।

लो ब्लड प्रेशर के प्रमुख लक्षण-

* थकान, कमजोरी, चक्कर आना
* निम्न रक्तचाप में शारीरिक निर्बलता का अधिक अनुभव होता है
* प्यास लगना और तेज रफ्तार से आधी-अधूरी सांसें आना
* निराशा या डिप्रेशन
* धुंधला दिखाई देना
* चेहरे पर फीकापन।
* आंखों का लाल हो जाना
* नाड़ी की गति धीमी होना
* रक्त की अत्यधिक कमी के कारण निम्न रक्तचाप की उत्पत्ति होती है, इसलिए रोगी चलने-फिरने में बहुत कठिनाई अनुभव करता है
* सीढ़ियां चढ़ने में बहुत परेशानी होती है
* हृदय जोरों से धड़कता है और सारा शरीर पसीने से भीग जाता है
* पुरुषों में नपुंसकता के लक्षण उत्पन्न होते है। जबकि स्त्रियों में काम-इच्छा की उत्पत्ति नहीं होती है। ऐसे में स्त्री-पुरुष का यौन आनंद नष्ट हो जाता है
* निम्न रक्तचाप के कारण रोगी को भूख नहीं लगती, क्योंकि भोजन के प्रति अरुचि हो जाती है
* स्वादिष्ट पकवानों की सुगंध भी रोगी को आकर्षित नहीं कर पाती। भूख नष्ट हो जाती है
* सोफे या बिस्तर से उठाकर खड़े होने पर नेत्रों के आगे अंधेरा छा जाता है और सिर चकराने लगता है
* सिरदर्द भी होता है
* रोगी को अधिक प्यास लगती हैं
* निम्न रक्तचाप की बिस्तर पर पड़े रहना चाहता है। किसी काम को करने की इच्छा नहीं होती है

* देशी गुड़ हर रोज 50 ग्राम की मात्रा में खाएं या २५ ग्राम गुड एक गिलास पानी में घोल कर उसमे थोड़ा नीबू का रस और नमक मिला कर दिन में दो बार सेवन करे।

लो ब्लड प्रेशर  रोगी का खानपान-

* पालक, मेथी, घीया, टिंडा व हरी सब्जियां लें।
* अनार, अमरूद, सेब, केला, चीकू व अंगूर खाएं।
* कॉलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ न हो तो थोड़ा-बहुत घी, मक्खन व मलाई खाएं।
* केसर, दही, दूध और दूध से बने पदार्थ खाएं।
* सेंधा नमक का इस्तेमाल करें
* लो ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाये रखने में चुकंदर रस काफी कारगर होता है। रोजाना यह जूस सुबह-शाम पीना चाहिए। इससे हफ्ते भर में आप अपने ब्लड प्रेशर में सुधार पाएंगे।
* सेब, गाजर या बेल का मुरब्बा चांदी का वर्क लगाकर खाएं।
* दिन व रात में अधिक पानी पीना चाहिए। कम से कम डेढ़ से दो लीटर पानी जरूर पीएं
* तुलसी, काली मिर्च, लौग और इलायची की चाय बनाकर पीएं। मात्रा सबकी एक-एक ग्राम। इसे छानकर गर्म ही पीना चाहिये। इसे रोज़ाना दिन में 1 बार पीने से निम्न रक्तचाप यानि Low Blood Pressure बहुत ही जल्दी ठीक हो जाता है।
* राई तथा सौठ के चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर पानी में मिलाएं और पैर के तलवों पर लगाएं। प्रतिदिन सब्जी में लहसून का छौक (तड़का) लेने से निम्न रक्तचाप में तत्काल लाभ होता है
 * सेब, पपीता, अंजीर, आम आदि का अधिक सेवन करें
* प्रतिदिन गाजर के एक गिलास रस में 10 ग्राम शहद मिलाकर पीएं। यह प्रयोग 30 दिनों तक करें
* रात्रि में 2-3 छुहारे दूध में उबालकर पीने या खजूर खाकर दूध पीते रहने से निम्न रक्तचाप में सुधार होता है
* पुदीने की चटनी या रस में सेंधा नमक, काली मिर्च, किशमिश डालकर सेवन करें।

* प्रातः बासी मुंह सेब का मुरब्बा चांदी के वर्क के साथ खाएं
* हींग के सेवन से रक्त जम नहीं पाता अर्थात् रक्त संचार ठीक रहता है। इसलिए निम्न रतचाप ठीक रहता है। इसलिए निम्न रतचाप में हींग का सेवन करें
* भोजन के बाद आधा कप नारंगी पानी अवश्य पीएं
* आंवले के 2 ग्राम रस में 10 ग्राम शहद मिलाकर कुछ दिन प्रातःकाल सेवन करने से लो ब्लड प्रेशर दूर करने में मदद मिलती है
* 1/4 चम्मच हल्दी पाउडर, 1/4 चम्मच धनिया पाउडर, 1 चुटकी अदरक का पाउडर या पिसी हुई सौंठ, 1 चुटकी इलायची पाउडर और 2 चम्मच चीनी मिला लीजिये। 1 पैन में 1 कप दूध और 1/2 कप पानी और यह मिश्रण डालकर चाय की तरह उबाल लीजिये,फिर इसे छान लीजिये। इसे गर्म ही पीना चाहिये। इसे रोज़ाना दिन में 1 बार पीने से कुछ ही समय में Low Blood Pressure यानि निम्न रक्तचाप ठीक हो जाता है
* जटामानसी, कपूर और दालचीनी को समान मात्रा में लेकर मिश्रण बना लेँ और तीन-तीन ग्राम की मात्रा मेँ सुबह-शाम गर्म पानी से सेवन करें। कुछ ही दिन मेँ आपके ब्लड प्रेशर में सुधार हो जायेगा
* अदरक के बारीक कटे हुए टुकडों में नींबू का रस व सेंधा नमक मिलाकर रख लें। इसे भोजन से पहले थोडी-थोडी मात्रा में दिन में कई बार खाते रहने से यह रोग दूर होता है।
* 200 ग्राम मट्ठे मे नमक, भुना हुआ जीरा व थोडी सी भुनी हुई हींग मिलाकर प्रतिदिन पीते रहने से इस समस्या के निदान में पर्याप्त मदद मिलती है
* 200 ग्राम टमाटर के रस में थोडी सी काली मिर्च व नमक मिलाकर पीना लाभदायक होता है। उच्च रक्तचाप में जहां नमक के सेवन से रोगी को हानि होती है, वहीं निम्न रक्तचाप के रोगियों को नमक के सेवन से लाभ होता है
* गाजर के 200 ग्राम रस में पालक का 50 ग्राम रस मिलाकर पीना भी निम्न रक्तचाप के रोगियों के लिये लाभदायक रहता है
* दूध में दो-तीन छुहारे देर तक उबलकर सेवन करने से शक्ति बढ़ने पर निम्न रक्तचाप का निवारण हाता है
* रात को बादाम की तीन-चार गिरी जल में डालकर रखें। प्रातः उठकर गिरी को पीसकर मिस्री और मक्खन के साथ खायें और ऊपर से दूध पीने से निम्न रक्तचाप नष्ट होता
है
* रोगी का एक साथ अधिक मात्रा में भोजन नहीं करना चाहिए। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में कई बार भोजन करना चाहिए

बचाव और इलाज-

स्मोकिंग से परहेज करें, एक्टिव रहें और ज्यादा टेंशन न करें तो लो बीपी से बचा जा सकता है।
लो ब्लड प्रेषर का एलोपैथिक इलाज -
ऐलोपैथिक डॉक्टर लो बीपी को एक बीमारी न मानकर दूसरी बीमारियों का लक्षण या परिणाम मानते हैं, इसलिए बिना जांच वे कोई भी दवा नहीं खाने की सलाह देते हैं।

लो ब्लड प्रेशर की होम्योपैथी चिकित्सा -

होम्योपैथी में अलग-अलग वजहों से होने वाले लो बीपी के लिए अलग-अलग दवाइयां हैं :
*किसी भी प्रकार का सदमा लगने से होने वाले लो ब्लड प्रेशर में एकोनाइट-30 या इग्नीशिया-30 या मॉसकस-30 की पांच-पांच गोलियां दिन में चार बार या कालीफॉस-6 एक्स की चार-चार गोलियां चार बार लें।
* अगर अक्सर लो ब्लड प्रेशर रहता हो तो आर्सेनिक एल्बम-30 या जेल्सिमियम-30 या फॉसफोरिक एसिड-30 की पांच-पांच गोलियां दिन में चार बार लें।
* एक्सिडेंट, ऑपरेशन या महिलाओं में डिलिवरी या पीरियड्स के दौरान ज्यादा खून बह जाने से होने वाले लो ब्लड प्रेशर के लिए चाइना-30 की पांच-पांच गोलियां दिन में चार बार तीन-चार दिन तक लें।

निम्न रक्तचाप का आयुर्वेदिक  इलाज - 

इनमें से कोई एक उपाय करें :
7. चार रत्ती या आधा छोटा चम्मच अश्वगंधा चूर्ण या दो रत्ती ताप्यादि लौह या दो रत्ती प्रवाल पिष्टी (प्रवाल पिष्टी कैल्शियम बढ़ाती है) या चार रत्ती
1. सिद्धमकरध्वज की खुराक मरीज की हालत के मुताबिक वैद्य से बनवाकर लें।

2. वृह्दवातचिंतामणि रस की आधी-आधी गोली सुबह-शाम दूध से लें।
योगेंद्र रस की आधी गोली पानी से दिन में एक बार लें।
(सिद्धमकरध्वज, वृह्दवातचिंतामणि रस व योगेंद रस, ये तीनों दवाएं बहुत ज्यादा बीपी लो होने पर सिर्फ वैद्य की देखरेख में ही लेनी चाहिए।)
6. मृगांग पोटली रस पाउडर की एक रत्ती सुबह-शाम पानी से लें। शुगर वाले भी सकते हैं। दिल के लिए अच्छा है और ताकत भी देता है।
8. आंवला चूर्ण या कामदुधा रस की गोली दो रत्ती पानी से लें।
9. दो चम्मच अश्वगंधारिष्ट बराबर पानी मिला कर सुबह-शाम लें।
10. दो छोटी चम्मच बलारिष्ट या अर्जुनारिष्ट आधे कप पानी से लें।
3. मकरध्वज की एक गोली रोज लें।

4. कपूरादि चूर्ण एक छोटी चम्मच सुबह-शाम पानी से कुछ दिन तक लगातार लें। इसे शुगर के मरीज भी ले सकते हैं।
5. हरगौरी रस एक रत्ती सुबह-शाम शहद से लें।
* शुगर के मरीज अर्जुन की छाल का दो चम्मच चूर्ण पानी में उबाल लें। फिर छानकर पीएं।
* शुगर के मरीज अश्वगंधा का पाउडर आधा छोटा चम्मच पाउडर पानी से लें या एक-एक गोली सुबह-शाम लें।



घरेलू नुस्खे
*रात को पांच बादाम भिगोकर सुबह खाली पेट एक बादाम व एक काली मिर्च लेकर दो से तीन मिनट तक चबाकर खाएं। बाकी बादामों को भी इसी तरह खाएं। 15-20 मिनट बाद नाश्ता कर सकते हैं।
* चाय-कॉफी ले सकते हैं। इनसे बीपी बढ़ता है। नमक-चीनी का घोल या इलेक्ट्रॉल पाउडर का घोल भी ले सकते हैं।
* काले चने 20-25 ग्राम और 10 नग किशमिश रात को पानी में भिगो दें। सुबह शौच के बाद खाली पेट इस पानी को पीकर चने व किशमिश खा लें। आधे घंटे बाद चाय पी सकते हैं। शुगर के मरीज बिना किशमिश के चने खाएं व पानी पीएं।
* सात-आठ गिरी मुनक्का व बादाम मिलाकर रोज खाएं।
* हर रोज गाय के दूध के साथ एक-दो सिंघाड़े खाएं।
* दूध व चावल की खीर में छोटी इलायची, चिरौंजी, बादाम व केसर डालकर खाएं।
* पका हुआ शरीफा और सीताफल का सेवन करने से भी फायदा होता है।
* रात को दो-तीन अंजीर भिगोकर सुबह खाएं। शुगर के मरीज सिर्फ एक अंजीर भिगोकर लें।
* गाय या बकरी का एक पाव दूध, दो चम्मच गाय का घी, काली मिर्च के 10 दाने और 10 ग्राम मिश्री को उबालकर इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम पीएं। शुगर के मरीज मिश्री व शहद न लें।
*मक्खन एक चम्मच, मिश्री स्वादानुसार और एक चांदी का वर्क मिलाकर सुबह-शाम कुछ दिन सेवन करें।
* एक बड़ी इलायची व पुदीने के थोड़े-से पत्तों को उबाल कर उसका पानी पीएं। चाय में डालकर भी पी सकते हैं।

* हल्दी का आधा चम्मच पाउडर दूध के साथ दिन में किसी भी वक्त लें। इससे आराम मिलता है। ठीक होने पर छोड़ दें। इसे किसी भी मौसम में ले सकते हैं।

* छिले हुए चार बादाम, एक चम्मच शहद और एक चम्मच मिश्री को एक साथ पीस लें। सुबह-शाम इस पेस्ट को खाएं।
नेचरोपैथी-
तौलिया या किसी और कपड़े को सादे पानी में भिगोकर निचोड़ लें। चार उंगल चौड़ी पट्टी बनाएं। चटाई बिछाकर उस पर पट्टी फैला दें और खुद उस पर लेट जाएं। 10 मिनट तक लेटे रहें। ध्यान रहे कि पट्टी उतनी ही चौड़ी हो, जो रीढ़ की हड्डी को ही लंबाई में कवर करे, पूरी कमर को नहीं। यह लो व हाई बीपी, दोनों में फायदेमंद है। इससे थोड़ी देर में ही बीपी सामान्य हो जाएगा। इसे दिन या रात में किसी भी वक्त कर सकते हैं लेकिन सोते वक्त करना बेहतर है। लगातार 45 दिन करें।
योग
* लो बीपी में ये आसन व क्रियाएं फायदेमंद हैं।
*. अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका व उज्जायी प्राणायाम करें। 
* कपालभाति क्रिया, उत्तानपादासन, कटिचक्रासन, पवनमुक्तासन, नौकासन, मंडूकासन और लेटकर साइकिलिंग करें।

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज 

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार 

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि 




पुरुषों की प्रजनन शक्ति (fertility) घटने के प्रमुख कारण


    ह्यूमन रिप्रोडक्शन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार पुरुषों की कुछ आदतों के कारण उनमें स्पर्म काउंट कम होने की प्रॉब्लम पैदा हो रही है। इससे भी गंभीर बात यह है कि 80 फीसदी से अधिक पुरुषों को यह पता ही नहीं होता कि उनकी इन आदतों का असर उनकी फर्टिलिटी पर भी पड़ता है।
क्या है स्पर्म काउंट कम होने की साइंटिफिक वजह
बॉडी के टेम्प्रेचर की तुलना में स्क्रूटम (अंडकोश की थैली) का टेम्प्रेचर करीब एक डिग्री कम रहता है। स्क्रूटम का टेम्प्रेचर बढ़ने पर स्पर्म काउंट कम हो सकता है। आज की लाइफस्टाइल में हमने ऐसी कई आदतें एडॉप्ट कर ली हैं जो स्क्रूटम का टेचर बढ़ाती हैं। इसके अलावा स्ट्रेस का भी नेगेटिव असर स्पर्म काउंट पर पड़ता है। जानिए ऐसी आदतों के बारे में जिनकी वजह से स्पर्म काउंट कम होता है। इन्हें तुरंत छोड़ने की सलाह दी जाती है|


रेगुलर नशा करना – 

शराब, सिगरेट या अन्य किसी तरह का नशा करने से बॉडी में स्ट्रेस हारमोंस का लेवल बढ़ जाता है. इससे स्पर्म काउंट कम होने लगता है|

लैपटॉप पैर पर रखकर काम करना –

 अगर रेगुलर लैपटॉप को रखकर काम करते है तो इसकी हीट स्क्रुटम (अंडकोश की थेली) तक जाती है. लॉन्ग टाइम तक ऐसा करने इ स्पर्म काउंट घटता है.

टाइट कपडे पहनना –

 डेली टाइट कपडे पहनने से स्क्रुटम (अंडकोश की थेली) का तापमान बढ़ने लगता है. इसके कारण स्पर्म काउंट घटने लगता है|

पर्याप्त नींद न लेना –

 रेगुलर कम से कम 7 घंटे की नींद न लेने से बॉडी में स्ट्रेस बढ़ाने वाले हार्मोन्स का लेवल बढ़ता है. इससे बॉडी का ब्लड सर्कुलेशन बिगड़ता है, जिसके कारण स्पर्म काउंट कम होने लगता है|

ज्यादा कॉफ़ी पीना –

 एक हॉस्पिटल की रिसर्च के मुताबिक ज्यादा मात्रा में कॉफ़ी लेने से इसमें मौजूद केफीन स्ट्रेस हार्मोन्स बढाता है. इससे स्पर्म काउंट घटता है

स्ट्रेस में रहना –

 लगातार स्ट्रेस में रहने से बॉडी में हार्मोनल एम्बलेंस होता है. साथ ही बॉडी का ब्लड सर्कुलेशन बिगड़ता है. इससे स्पर्म काउंट कम होता है|

सोया प्रोडक्ट –

 हार्वर्ड स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ की रिसर्च के मुताबिक डाइट में ज्यादा सोया प्रोडक्ट लेने से इसमे मौजूद आइसोफ्लेवोन स्पर्म की संख्या कम करता है|






नींबू और सोड़ा के अद्भुत फायदे





आपने नींबू का रस पीने के फायदों के बारे में सुना होगा। विटामिन सी से भरपूर नींबू बहुत तरह के रोगों के लिए लाभकारी है। अब आप सोचिए अगर इसमें बेकिंग़ सोडा मिला दिया जाए तो कितना लाभ मिलेगा। नींबू और सोडा के फायदे के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है जो न केवल आपके स्वास्थ्य के लिए बल्कि आपकी त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद है।

नींबू और सोडा त्वचा के लिए फायदेमंद

यदि आप हर दिन सूर्य और धूल मिट्टी का सामना करते हैं तो आपको अपने चेहरे की देखभाल करने की जरूरत है। वैसे बाजार में बहुत से ऐसे प्रोडक्ट है जो आपकी स्किन के लिए बनाएं गए हैं, लेकिन इसमें कई तरह के रसायन शामिल है। इससे आपकी आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है और अधिक समस्याएं पैदा हो सकती है। इसके लिए आप घर पर फेस मास्क बना सकते हैं।
नींबू और बेकिंग सोडा आपके लिए बहुत ही गुणकारी होगा। आइए जानते इसके गुण के बारे में…
1. यह पुरानी त्वचा कोशिकाओं की बाहरी परत को साफ करता है।
2. इससे स्किन की टोन को बेहतर और चमकदार बनाया जा सकता है।
3. विटामिन सी में समृद्ध नीबू का रस, आपकी त्वचा से तेल निकालता है और अपना चेहरा साफ करता है यह बैक्टीरिया को भी मारता है और संक्रमण की संभावना कम करता है। चेहरे की चमक के लिए आयुर्वेदिक उपाय

कैसे लगाएं नींबू और बेकिंग सोडा का मास्क

1. फेस मास्क बनाने के लिए एक चम्मक नींबू का रस लीजिए और उसमें दो टेबल स्पून सोडा मिलाइए। इसको आप मिक्स तब तक कीजिए जब तक यह पीला न हो जाए।
2. अपनी आंखों को बचाते हुए इसे चेहरे पर लगाएं। इसे 15 मिनट से ज्यादा चेहरे पर रहने न दें। उसके बाद हल्के गिले कपड़े से वह मास्क अपने चेहरे पर से हटाएं और ठंड़े पानी से धो लें। इस बात का ध्यान दीजिए कि यदि आपको जलन हो तो तुरंत चेहरे लो धो लें।

नींबू और सोड़ा खराब कोलेस्ट्रॉल में करे मदद


पानी के साथ बेकिंग सोडा पीने से खराब कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे हमारे हृदय स्वास्थ्य में सुधार होता है।
आप जानते हैं कि नींबू में कई प्राकृतिक स्वास्थ्य लाभ होते हैं, जैसे यह पाचन को बढ़ावा देने में मदद करता है। अगर आप इसमें थोड़ा बेकिंग सोडा मिलाते हैं तो यह पाचन तंत्र में सुधार करने के लिए शानदार मिश्रण का काम करता है। यह पेट फूलना जैसी समस्या से निपटने के लिए एक बेहतर एसिड के रूप में भी काम करता है।

नींबू और सोड़ा के फायदे पाचन के लिए

नींबू और सोड़ा करे विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद
नींबू और बेकिंग सोडा का मिश्रण शरीर पर क्षारीय असर पड़ता है। यह एसिडोसिस से लड़ने में मदद करता है जब शरीर बहुत अधिक एसिड पैदा करता है। इसलिए किडनी की देखभाल करने के लिए यह एक बेहतर उपाय है। इसके अलावा यह शरीर को विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है।

नींबू और सोड़ा लिवर को करे शुद्ध

नींबू और सोड़ा एक ऐसा घरेलू उपचार है कि यह लिवर को शुद्ध करने में मदद करता है। आपको बता दें कि इससे शरीर को विटामिन सी, पोटेशियम और एंटीऑक्सिडेंट मिलते हैं।

चेहरे की सुन्दरता को चार चाँद लगाने वाला घरेलू नुख्सा

सामग्री :- Ingredients
2 चमच बेकिंग सोडा – Baking Soda
1 छोटा चमच निम्बू का रस – Lemon Juice
विधि :- Preparation and Use
दोनों औषधियों –Ingredients को अच्छे से एकसाथ मिक्स (Mix) कर लें | जब यह दोनों औषधिय अच्छे से मिक्स हो जाएं तो इस मास्क को अपने चेहरे पर अप्लाई करें और 20 मिनटों के लिए छोड़ दें (अगर आपके चेहरे पर जलन महसूस हो रही हो तो आप अपना फेस 20 मिनटों से पहले भी धो सकते हो ) जब यह सुख जाए तो मुह को ठन्डे पानी से धो लें Wash your Face with Cold Water | हफ्ते में एक बार ऐसा करने से लाभ होगा |
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सफेद बाल हमेशा काले रहेंगे इस उपाय से



    


हर कोई काले बाल का शौकीन होता है. हर किसी को काले बाल ही अच्छे लगते है. लेकिन आजकल के खान पान के कारण बुढ़ापे से पहले ही बाल सफ़ेद हो जाते है. यह एक बहुत ही चिंता का विषय है. क्या आप जानना चाहते है कि ऐसा क्यों होता है. हमारे बाल असमय ही काले क्यों हो जाते है. हमारे बालों में मिलेनिन पिगमेंटेशन (Melanin Pigmentation) नामक एक तत्व पाया जाता है. जब हमारे बालों में से मिलेनिन पिगमेंटेशन (Melanin Pigmentation) कम होना शुरु होता है तो हमारे बाल अपना काला रंग खो देते हैं और हमारे बाल सफेद होना शुरु हो जाते हैं.

यह तो सर्व विदित है कि मनुष्‍य की उम्र जैसे जैसे बढ़ती है वैसे वैसे हमारे बाल भी सफेद हो जाते हैं और अक्‍सर हम इन्‍हें छिपाने के लिए कई तरह का प्रयोग करते हैं जैसे हेयर कलर और भी कई सारे प्रोडक्‍ट जो हमारे बालों को नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन फिर भी हमारे बाल हमेशा के लिए काला नहीं हो पाता।
आज हम आपको एक ऐसा उपाय बताने जा रहे हैं जिससे देखकर डॉक्‍टर की भी बोलती बंद हो गई। अगर आप भी अपने बालों के ओरिजिनल कलर को वापस लाना चाहते है|
तो ये उपाय आजमाइए। अगर बाल पहले से ही ग्रे या सफेद हो चुके हैं तो इस उपाय से वो फिर से काला हो जाएगा। उम्र के साथ साथ ये समस्‍या सभी के साथ आती ही है। इसलिए ये उपाय सभी के लिए जानना जरूरी है। ताकि लोग समय से पहले अपने सफेद होने वाले ग्रे बालो को रोक सकती हैं।
इस उपाय को देखकर डॉक्टरों की बोलती भी हो गयी बंद, इसे बालों पर लगाने से आपके बाल कभी नहीं होंगे सफेद|
समय से पहले बाल सफेद होने का आयुर्वेदिक इलाज- 

करी पत्ते लें और उन्हें धो लें।
अब उन्हें एक क्रशर में डाल दें और उस में छाछ के 2-3 बड़े चम्मच डालें।
अब पत्तियों को पीसना चालू करें और तब तक करते रहें जब तक आपको एक गाढ़ा हरा पेस्ट नहीं मिल जाता।
अपने सिर पर इस पेस्ट को लगायें और धीरे से 5 मिनट के लिए मालिश करें।
अपने बालों पर पेस्ट फैला लें और इसे 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद इसे ठंडे पानी से धो लें।
अगर आप एक महीने में दो बार इस उपाय का उपयोग करती हैं, तो आपको कभी सफेद बालों की समस्या नहीं होगी।
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हाई और लो ब्लड प्रेशर के घरेलु आयुर्वेदिक उपचार





    उच्च रक्तचाप की बीमारी ठीक करने के लिए घर में उपलब्ध कुछ आयुर्वेदिक दवाईया है जो आप ले सकते है । जैसे एक बहुत अच्छी दवा आप के घर में है वो है दालचीनी जो मसाले के रूप में उपयोग होता है वो आप पत्थर में पिस कर पावडर बनाके आधा चम्मच रोज सुबह खाली पेट गरम पानी के साथ खाइए ; अगर थोडा खर्च कर सकते है तो दालचीनी को शहद के साथ लीजिये (आधा चम्मच शहद आधा चम्मच दालचीनी) गरम पानी के साथ, ये हाई BP के लिए बहुत अच्छी दवा है । और एक अच्छी दवा है जो आप ले सकते है पर दोनों में से कोई एक । दूसरी दवा है मेथी दाना, मेथी दाना आधा चम्मच लीजिये एक ग्लास गरम पानी में और रात को भिगो दीजिये, रात भर पड़ा रहने दीजिये पानी में और सुबह उठ कर पानी को पि लीजिये और मेथी दाने को चबा के खा लीजिये । ये बहुत जल्दी आपकी हाई BP कम कर देगा, देड से दो महीने में एकदम स्वाभाविक कर देगा ।
और एक तीसरी दवा है हाई BP के लिए वो है अर्जुन की छाल । अर्जुन एक वृक्ष होती है उसकी छाल को धुप में सुखा कर पत्थर में पिस के इसका पावडर बना लीजिये । आधा चम्मच पावडर, आधा ग्लास गरम पानी में मिलाकर उबाल ले, और खूब उबालने के बाद इसको चाय की तरह पि ले । ये हाई BP को ठीक करेगा, कोलेस्ट्रोल को ठीक करेगा, ट्राईग्लिसाराईड को ठीक करेगा, मोटापा कम करता है , हार्ट में अर्टेरिस में अगर कोई ब्लोकेज है तो वो ब्लोकेज को भी निकाल देता है ये अर्जुन की छाल । डॉक्टर अक्सर ये कहते है न की दिल कमजोर है आपका; अगर दिल कमजोर है तो आप जरुर अर्जुन की छाल लीजिये हरदिन , दिल बहुत मजबूत हो जायेगा आपका; आपका ESR ठीक होगा, ejection fraction भी ठीक हो जायेगा; बहुत अच्छी दवा है ये अर्जुन की छाल 
और एक अच्छी दवा है हमारे घर में वो है लौकी का रस । 
एक कप लौकी का रस रोज पीना सबेरे खाली पेट नास्ता करने से एक घंटे पहले ; और इस लौकी की रस में पांच धनिया पतपांच पुदीना पत्ता, पांच तुलसी पत्ता मिलाके, तिन चार कलि मिर्च पिस के ये सब डाल के पीना .. ये बहुत अच्छा आपके BP ठीक करेगा और ये ह्रदय को भी बहुत व्यवस्थित कर देता है , कोलेस्ट्रोल को ठीक रखेगा, डाईबेटिस में भी काम आता है ।और एक मुफ्त की दवा है , बेल पत्र की पत्ते – ये उच्च रक्तचाप में बहुत काम आते है । पांच बेल पत्र ले कर पत्थर में पिस कर उसकी चटनी बनाइये अब इस चटनी को एक ग्लास पानी में डाल कर खूब गरम कर लीजिये , इतना गरम करिए के पानी आधा हो जाये , फिर उसको ठंडा करके पि लीजिये । ये सबसे जल्दी उच्च रक्तचाप को ठीक करता है और ये बेलपत्र आपके सुगर को भी सामान्य कर देगा । जिनको उच्च रक्तचाप और सुगर दोनों है उनके लिए बेल पत्र सबसे अच्छी दवा है ।
और एक मुफ्त की दवा है हाई BP के लिए – देशी गाय की मूत्र पीये आधा कप रोज सुबह खाली पेट ये बहुत जल्दी हाई BP को ठीक कर देता है । और ये गोमूत्र बहुत अद्भूत है , ये हाई BP को भी ठीक करता है और लो BP को भी ठीक कर देता है – दोनों में काम आता है और ये ही गोमूत्र डाईबेटिस को भी ठीक कर देता है , Arthritis , Gout (गठिया) दोनों ठीक होते है । अगर आप गोमूत्र लगातार पि रहे है तो दमा भी ठीक होता है अस्थमा भी ठीक होता है, Tuberculosis भी ठीक हो जाती है । इसमें दो सावधानिया ध्यान रखने की है के गाय शुद्धरूप से देशी हो और वो गर्भावस्था में न हो ।

निम्न रक्तचाप की बीमारी के लिए दवा 



निम्न रक्तचाप की बीमारी के लिए सबसे अच्छी दवा है गुड । ये गुड पानी में मिलाके, नमक डालके, नीबू का रस मिलाके पी लो । एक ग्लास पानी में 25 ग्राम गुड, थोडा नमक नीबू का रस मिलाके दिन में दो तिन बार पिने से लो BP सबसे जल्दी ठीक होगा ।
और एक अच्छी दवा है ,अगर आपके पास थोड़े पैसे है तो रोज अनार का रस पियो नमक डालकर इससे बहुत जल्दी लो BP ठीक हो जाती है , गन्ने का रस पीये नमक डालकर ये भी लो BP ठीक कर देता है, संतरे का रस नमक डाल के पियो ये भी लो BP ठीक कर देता है , अनन्नास का रस पीये नमक डाल कर ये भी लो BP ठीक कर देता है ।
    लो BP के लिए और एक बढ़िया दवा है मिसरी और मखन मिलाके खाओ – ये लो BP की सबसे अच्छी दवा है 
लो BP के लिए और एक बढ़िया दवा है दूध में घी मिलाके पियो , एक ग्लास देशी गाय का दूध और एक चम्मच देशी गाय की घी मिलाके रातको पिने से लो BP बहुत अछे से ठीक होगा ।
और एक अच्छी दवा है लो BP की और सबसे सस्ता भी वो है नमक का पानी पियो दिन में दो तीन बार , जो गरीब लोग है ये उनके लिए सबसे अच्छा है ।

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शीघ्र पतन के घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे



 संभोगरत पुरुष का वीर्य उसकी इच्छा के विरुद्ध शीघ्र स्खलित हो जाने को शीघ्र पतन या जल्दी छूट की व्याधि कहा जाता है। पुरुष अपने वीर्य के छूटने के आवेग को नियंत्रित नहीं रख पाता है। ऐसे पुरुष स्त्री को संतुष्ट नहीं कर पाते है। यह स्थिति हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी जरूर आती है। ४० वर्ष से कम उम्र के पुरुषों मे यह रोग अधिकतर पाया जाता है। संभोग क्रिया के समय लिंग का कडा या कठोर नहीं पडना बहुत गंभीर दोष है क्योंकि सुस्त और ढीले लिंग से संभोग क्रिया संपन्न करना बेहद मुश्किल का काम है। संभोग में कितने समय तक वीर्य पात नहीं होना चाहिये, इसका कोई वैज्ञानिक मापदंड नही है। लेकिन शीघ्रपतन की सबसे खराब स्थिति में इंद्री प्रविष्ट करते ही वीर्य छूट जाता है। कुछ पुरुष तो  कामेंद्रीय  यौनि में प्रविष्ट भी  नहीं कर पाते और वीर्य स्खलन हो जाता है। शीघ्र पतन रोगी संभोग के दौरान चाह कर भी वीर्य छूटना नहीं रोक सकता है। सेक्स में लगने वाला समय प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक स्थिति के अनुसार लंबा या छोटा हो सकता है।


सेक्स का महारथी बनाने और मर्दानगी बढ़ाने वाले अचूक नुस्खे 

संभोग शुरू करने पर ६० सेकंड्स याने एक मिनिट से कम समय में पुरुष खारीज हो जाता है तो यह शीघ्र पतन का रोग माना जाता है। शीघ्र पतन रोगी को हम नपुंसक की श्रेणी में नहीं रख सकते हैं, क्योंकि अधिकांश शीघ्र पतन रोगी सेक्स के जरिये स्त्री को गर्भवती करने में सफ़ल होते हैं। फ़िर भी शीघ्र पतन रोगी अपने पार्टनर को संभोग से संतुष्ट नही कर पाता है।
 गृहस्थि जीवन मे आनंद का अभाव पसरने लगता है।


शीघ्र पतन के लक्षण-

१) शीघ्र पतन रोगी की  इंद्री  बहुत जल्द उत्तेजना में आजाती   है और पर्याप्त कठोरता न आने के बावजूद वीर्यपात हो जाता है। कामेन्द्रीय   में कडापन नहीं आने से कभी -कभी तो  यौनि में प्रविष्ट करने में भी मुश्किल होती है।
२) रोगी व्यक्ति अश्लील चित्र देखते हैं या नदी तालाब मे नहाती कम वस्त्र स्त्रियों को देखता है तो उत्तेजना होकर वीर्य निकल जाता है।
३) संभोग के दौरान स्त्री चरम उत्तेजना पर नहीं पहुंच पाती और स्त्री के खारीज होने के पहिले ही मर्द खारीज हो जाता है। पुरुष का  जननेन्द्रीय  एकदम सुस्त पड जाता है। स्त्री मन मसोस कर रह जाती है।
४) शीघ्र पतन रोगी का वीर्य पतला पड जाता है।

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५) पेशाब या शौच निवृत्त होते वक्त जोर लगाने से वीर्य की बूंदे निकल जाती है।
इस विषम स्थिति से निजात पाने के लिये मैं कुछ उपचारों का उल्लेख कर रहा हूं जिनके समुचित प्रयोग से पुरुष भरपूर सेक्स का आनंद लेने के काबिल हो जाता है--
१) तालमखाना के बीज ५० ग्राम लेकर अदरक के रस में आधा घंटे भिगोएं,फ़िर सुखाएं। आपको ऐसा तीन बार करना है। अब इनका चूर्ण बनालें। अब इस चूर्ण को २०० ग्राम शहद में अच्छी तरह मिश्रण करके शीशी में भर ले शीघ्र पतन की दवा तैयार है। १० ग्राम औषधि सुबह-शाम गाय के दूध के साथ लेने से जल्दी छूट होने की व्याधि में लाभ होता है।
२) सतावर का चूर्ण ३ ग्राम मीठे दूध( मिश्री मिला दूध) के साथ लेते रहने से शीघ्र पतन रोग नष्ट होता है।
३) तुलसी के पांच पत्ते और ३ ग्राम बीज(तुलसी के) नागर वेल के पान में रखकर चबाकर खाएं । शीघ्र पतन की अच्छा उपचार है।

हस्त  मेथुन जनित यौन दुर्बलता के उपचार 


४) असगंध और सतावर चूर्ण ३-३ ग्राम दूध के साथ सुबह -शाम लेते रहने से शीघ्र पतन रोग काबू में आ जाता ह।
५) शिलाजीत इस रोग की महान औषधि मानी गई है। विश्वसनीय निर्माता का ही शिलाजित खरीदें। वर्ना धोखा हो सकता है।
६) गाजर का रस २०० मिलि में लहसुन के रस की १० बूंदे डालकर पीना स्तंभन बढाने वाला होता है।
उडद की दाल २० ग्राम पानी में ३ घंटे भिगोएं फ़िर पीसलें इसमें घी और शहद १०-१० ग्राम मिश्रित कर चाट लें और ऊपर से एक गिलास मिश्री मिला दूध पी जाएं। संभोग शक्ति वर्धक उपचार है।
7) शीघ्र पतन की समस्या से निजात पाने के लिये एक बहुत ही कारगर उपचार लिख देता हूं,जरूर लाभ उठावें--
देशी घी २०० ग्राम,शहद १०० ग्राम ,मुलहठी १०० ग्राम और बंग भस्म २० ग्राम लेकर भली प्रकार मिश्रण बनाएं। यह दवा एक चम्मच सुबह और एक चम्मच शाम को लेते रहने से कई पुरुष लाभान्वित हुए हैं।
८) पांव के तलवे पर दस मिनट तक ठंडे जल की धार लगाने से शीघ्र पतन में लाभ होता है।
९) ७ नग बादाम,३ नग काली मिर्च और ३ ग्राम मिश्री मिलाकर चूर्ण करलें गरम दूध के साथ पीते रहने से जल्दी छूट नहीं होगी।

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 


१० ) रात को सोते वक्त पेडू और जननेंद्रिय पर मिट्टी की पटी लगाना चाहिये। कुछ ही दिन में फ़र्क नजर आयेगा।
११) शीघ्र पतन रोगी को कब्ज रहती हो तो सुबह -शाम कुन कुने पानी से एनीमा करना चाहिये। इससे कब्ज भी ठीक होगी और शरीर के दूषित पदार्थ बाहर निकलेंगे।
१२) शीघ्र पतन रोगी को २४ घंटे में ४ लिटर पानी पीने की आदत डालना चाहिये।
१३) नीली बोतल का सूर्य तप्त जल २५ मिलि की मात्रा मे दिन में आठ बार पीने से शीघ्र पतन रोग नष्ट होता है|
१४) शीघ्र पतन की समस्या निवारण के लिये दो सेक्स सत्र के बीच की अवधि कम रखें। ज्यादा दिन बाद सेक्स करेंगे तो वीर्य पात जल्दी होगा।
१५) हस्तमैथुन की आदत हो तो तुरंत त्याग दें। अश्लील चित्र ,फ़िल्म न देखें
१६) तालमखाना २०० ग्राम,सफ़ेद मूसली १०० ग्राम, गोखरू २५० ग्राम और मिश्री ६०० ग्राम लेकर चूर्ण बनालें। एक चम्मच सुबह -शाम लेते रहने से कामेन्द्रीय पुष्ट होगा और जल्दी छूट से छुटकारा मिलेगा।
१७) संभोग के एक सत्र (सेशन) में करीब ४०० से ५०० केलोरी उर्जा खर्च होती है इसलिये संभोग के दौरान तुरंत उर्जा प्रप्त करने के लिये ग्लुकोस,दूध,जुस आदि का उपयोग करना उचित है। इस अवधि में हल्की फ़ुल्की बात चीत करते रहने से संभोग का समय बढाया जा सकता है।

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18) होम्योपैथी चिकित्सा में शीघ्र पतन ठीक करने के लिये चमत्कारिक औषधिया हैं। महत्वपूर्ण रेमेडीज ये हैं--
टर्नेरा डेमियाना,कोनियम, एसीड फ़ास, सेलिक्स नाईग्रा, केलेडियम, सेलेनियम, विथानिया सोम्निफ़ेरा(अस्वगंधा) योहिम्बनम, लायकोपोडियम, बुफ़ो राना आदि । ये औषधियां लक्षणों की समानता के आधार पर चुनी जाती है। मेटेरिया मेडिका से ज्ञान बढाना चाहिये। ज्यादा माथा पच्ची न करना हो तो इनमें से कोई सात दवाएं मिलाकर प्रयोग करके लाभ उठाया जा सकता है।

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पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट)के बढ़ने के हर्बल उपचार



प्रोस्टेट पुरुषों में पाई जाने वाली एक ग्रंथि है, जो वास्‍तव में कई छोटी ग्रंथियों से मिलकर बनी होती है। यह ग्रंथि पेशाब के रास्‍ते को घेर कर रखती है और उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट ग्रंथि के ऊतकों में गैर-नुकसानदेह ग्रंथिकाएं विकसित हो जाती है। जिसके कारण धीरे-धीरे ग्रंथि के आकार में वृद्धि होने लगती है, और समस्या तब उत्पन्न होती है जब प्रोस्टेट का आकार इतना बढ़ जाता है कि मूत्रमार्ग पर दबाव पड़ने लगता है।यह रोग पुरुषों में ही होता है क्योंकि पुरुष ग्रंथि स्त्रियों में नहीं होती है केवल पुरुषों में होती है। पुरुष में यह ग्रंथि मूत्राशय की ग्रीवा तथा मूत्रमार्ग के ऊपरी भाग को चारों तरफ से घेरकर रखती है। इस ग्रंथि के द्वारा सफेद, लिसलिसा तथा गाढ़ा स्राव निकलता है। जब पुरुष उत्तेजित होता है तो उस समय शुक्राणु प्रोस्टेट में पहुंच जाते हैं। यह लिसलिसा पदार्थ इन शुक्राणुओं को जीवित रखने और बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब यह ग्रंथि अधिक बढ़ जाती है तो मूत्राशय तथा मूत्रमार्ग की क्रियाओं में बाधा उत्पन्न होती है।

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पुरुष ग्रंथि का अधिक बढ़ने का लक्षण:-

इस रोग से पीड़ित रोगी को रात के समय में कई बार पेशाब करने के लिए उठना पड़ता है।
रोगी को एक बार में पेशाब पूरा नहीं आता इसलिए उसे पेशाब बार-बार करने जाना पड़ता है। रोगी व्यक्ति का पेशाब बूंद-बूंद करके आने लगता है।
इस रोग से पीड़ित रोगी पेशाब तथा शौच को रोकने में असमर्थ होता है।
इस रोग से पीड़ित रोगी को सिर में दर्द, घबराहट, थकान, चिड़चिड़ापन, लिंग का ढीला हो जाना तथा अधिक कमजोरी महसूस होना आदि परेशानियां होने लगती हैं।
जब पुरुषों की पुरुष ग्रंथि बढ़ जाती है तो उस रोगी के पेशाब की धार पतली हो जाती है तथा पेशाब कम और रुक-रुक कर आता है।

पुरुष ग्रंथि के अधिक बढ़ने के कारण:-


*नशीले पदार्थों का अधिक सेवन करने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
*पेट में कब्ज बनने के कारण भी पुरुष ग्रंथि बढ़ जाती है।
*मूत्र तथा शौच की गति को रोकने के कारण भी पुरुष ग्रंथि अधिक बढ़ सकती है।
गलत तरीके के खान-पान तथा दूषित भोजन का सेवन करने से पुरुष ग्रंथि के अधिक बढ़ने का रोग हो जाता है।
मानसिक तनाव अधिक होने, अधिक चिंता करने तथा क्रोध करने के कारण पुरुष ग्रंथि का अधिक बढ़ने का रोग हो सकता है।
*लगातार लम्बे समय तक बैठने का कार्य करने से व्यक्ति के बस्ति प्रदेश पर बोझ पड़ता है जिसके कारण इस ग्रंथि में सूजन हो जाती है और यह रोग व्यक्ति को हो जाता है।

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सर्दियों में समस्‍या का बढ़ना

सर्दियों में कम पानी पीने के कारण प्रोस्‍टेट ग्रंथि की समस्‍या बढ़ जाती है। सर्दियों में पानी कम पीने के कारण यूरीन की थैली में एकत्र यूरीन की मात्रा बढ़ जाती है। इसके कारण यूरीन की नली में संक्रमण या यूरीन रुकने  की  समस्‍या हो जाती है।

किडनी पर असर-

प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने पर अगर यूरीन मूत्राशय के अंदर देर तक रुका रहता है तो कुछ समय के बाद किडनी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगता है। इसके कारण किडनी की यूरीन बनाने की क्षमता कम होने लगती है और किडनी यूरिया को पूरी तरह शरीर के बाहर निकाल नहीं पाती। इन सब के कारण ब्‍लड में यूरिया बढ़ने लगता है, जो शरीर के लिए नुकसानदेह होता है।

दवाओं से इलाज

प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने पर मरीज को चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता होती है। यूरीन की थैली के लगातार भरे रहने से किडनी पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे किडनी के खराब होने का खतरा पैदा हो जाता है। रोग की प्रारंभिक अवस्था में दवाओं द्वारा ग्रंथि को बढ़ने से रोकने का प्रयास किया जाता है।

पुरुष ग्रंथि के अधिक बढ़ने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-

इस रोग को ठीक करने के लिए सबसे पहले इस रोग के होने के कारणों को दूर करना चाहिए और इसके बाद इसका उपचार प्राकृतिक चिकित्सा से करना चाहिए।
*पुरुष ग्रंथि के बढ़ने के रोग को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को 2 दिन उपवास रखने के बाद लगभग 10 दिनों तक फलों तथा सब्जियों का हल्का भोजन लेना चाहिए।
*पालक और कुलथी को बराबर मात्रा में लेकर पानी में डालकर अच्छी तरह से उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को सुबह-शाम सेवन करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
*2 अंजीर को प्रतिदिन पानी में भिगोकर रख दें। इनको सुबह तथा शाम को खाकर इस पानी पी लें। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से यह रोग ठीक हो जाता है।

मलेरिया की जानकारी और विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों से इलाज  

बन्दगोभी, तरबूज, खीरा, सफेद पेठा, गाजर, अनन्नास आदि का रस पीना भी बहुत लाभदायक होता है।
इस रोग से पीड़ित रोगी को दूषित भोजन, उत्तेजक खाद्य पदार्थ, मिठाई, घी, तली हुई चीजें बिल्कुल भी सेवन नहीं करनी चाहिए।
यदि रोगी व्यक्ति को कब्ज बन रही हो तो सबसे पहले कब्ज को दूर करना चाहिए तथा इसके बाद इस रोग का उपचार करना चाहिए।

इस रोग से पीड़ित रोगी को अधिक मात्रा में पानी तथा नींबू का पानी पीना चाहिए। धनिये के पानी तथा कच्चे नारियल के पानी को भी पीना लाभदायक है।

 विशिष्ट परामर्श-


प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने  से पेशाब रुकावट मे हर्बल औषधि सर्वाधिक कारगर साबित हुई हैं| यहाँ तक कि लंबे समय से केथेटर नली लगी हुई मरीज को भी केथेटर मुक्त होकर स्वाभाविक तौर पर खुलकर पेशाब आने लगता है| प्रोस्टेट ग्रंथि के अन्य विकारों मे भी रामबाण प्रभाव |प्रोस्टेट केंसर की नौबत  नहीं आती| आपरेशन की त्रासदी  से बचाने वाली औषधि हेतु वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं|





गोरखमुंडी के विविध प्रयोग -अनेक रोग की एक औषधि





गोरखमुण्डी एक सुलभप्राप्य वनस्पति है।इसके छोटे-छोटे पौधे गेहूं,जौ,रब्बी आदि के खेतों में बहुतायत से पाये जाते हैं।प्रायः जाड़े में स्वतः उत्पन्न होने वाले ये बड़े घासनुमा पौधे गर्मी आते-आते परिपक्व होजाते हैं।दो-तीन ईंच लम्बी दांतेदार पत्तियों के ऊपरी भाग में, गुच्छों में छोटे-छोटे घुण्डीदार फल लगते हैं,जो वस्तुतः फूल के ही सघन परिवर्तित रुप हैं।ये पौधे यदाकदा जलाशयों के जल सूखजाने के बाद वहाँ भी स्वतः उत्पन्न हो जाते हैं।आयुर्वेद में रक्तशोधक औषधी के रुप में इसका उपयोग होता है।
भारतीय वनौषधियों में गोरखमुंडी का विशेष महत्‍व है। सर्दी के मौसम में इसमें फूल और फल लगते हैं। इस पौधे की जड़, फूल और पत्‍ते कई रोगों के लिए फायदेमंद होते हैं। गोरखमुण्डी भारत के प्रायः सभी प्रान्तों में पाई जाती है। संस्कृत में इसकी श्रावणी महामुण्डी अरुणा, तपस्विनी तथा नीलकदम्बिका आदि कई नाम हैं। यह अजीर्ण, टीबी, छाती में जलन, पागलपन, अतिसार, वमन, मिर्गी, दमा, पेट में कीड़े, कुष्ठरोग, विष विकार आदि में तो लाभदायक होती ही है, इसे बुद्धिवर्द्धक भी माना जाता है। गोरखमुंडी की गंध बहुत तीखी होती है।
गोरखमुंडी तथा सौंठ दोनों का चूर्ण बराबर-बराबर मात्रा में गर्म पानी से लेने से आम वात की पीड़ा दूर हो जाती है। गोरखमुंडी चूर्ण, घी, शहद को मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से वात रोग समाप्‍त होते हैं। कुष्‍ठ रोग होने पर गोरखमुंडी का चूर्ण और नीम की छाल मिलाकर काढ़ा तैयार कीजिए, सुबह-शा‍म इस काढ़े का सेवन करने से कुष्‍ठ रोग ठीक हो जाता है। गले के लिए यह बहुत फायदेमंद है, यह आवाज को मीठा करती है। गोरखमुंडी का सुजाक, प्रमेह आदि धातु रोग में सर्वाधिक सफल प्रयोग किया गया है।

गर्भाशय, योनि सम्बन्धी अन्य बीमारियों पथरी-पित्त सिर की आधाशीशी आदि में भी यह अत्यन्त लाभकारी औषधि है। गोरखमुंडी के चार ताजे फल तोड़कर भली प्रकार चबायें और दो घूंट पानी के साथ इसे पेट में उतार लें तो एक वर्ष तक न तो आंख आएगी और न ही आंखों की रोशनी कमजोर होगी। गोरखमुंडी की एक घुंडी प्रतिदिन साबुत निगलने कई सालों तक
आंख लाल नहीं होगी। इसके पत्ते पीस कर मलहम की तरह लेप करने से नारू रोग (इसे बाला रोग भी कहते हैं, यह रोग गंदा पानी पीने से होता है) नष्ट हो जाते हैं।
योनि में दर्द हो, फोड़े-फुन्सी या खुजली हो तो गोरखमुंडी के बीजों को पीसकर उसमें समान मात्रा में शक्कर मिलाकर रख लें और एक बार प्रतिदिन दो चम्मच ठंडे पानी से लेने से इन बीमांरियों में फायदा होता है। इस चूर्ण को लेने से शरीर में स्‍फूर्ति भी बढ़ती है। गोरखमुडी का सेवन करने से बाल सफेद नही होतेहैं। गोरखमुंडी के पौधे उखाड़कर उनकी सफाई करके छाये में सुखा लें। सूख जाने पर उसे पीस लीजिए और घी चीनी के साथ हलुआ बनाकर खाइए, इससे इससे दिल, दिमाग, लीवर को बहुत शक्ति मिलती है। गोरखमुडी का काढ़ा बनाकर प्रयोग करने से पथरी की समस्‍या दूर होती है।
गोरखमुंडी का प्रयोग बवासीर में भी बहुत लाभदायक माना गया है। गोरखमुंडी की जड़ की छाल निकालकर उसे सुखाकर चूर्ण बनाकर हर रोज एक चम्मच चूर्ण लेकर ऊपर से मट्ठे का सेवन किया जाये तो बवासीर पूरी तरह समाप्त हो जाती है। जड़ को सिल पर पीस कर उसे बवासीर के मस्सों में तथा कण्ठमाल की गाठों में लगाने से बहुत लाभ होता है। पेट के कीड़ों में भी इस की जड़ का पूर्ण प्रयोग किया जाता है, उससे निश्चित लाभ मिलता है।गोरखमुण्डी के ताजे स्वरस को शरीर पर लेप करने से ताजगी और स्फूर्ति आती है।त्वचा की सुन्दरता बढ़ती है।
गोरखमुण्डी के चूर्ण को जौ के आटे में मिलाकर(चार-एक की मात्रा में),रोटी बनाकर,गोघृत चुपड़ कर खाने से बल-वीर्य की बृद्धि होकर वुढ़ापे की झुर्रियां मिटती हैं।शरीर कान्तिवान होता है।
गोरखमुण्डी का सेवन दूषित रक्त को स्वच्छ करता है।विभिन्न रक्तविकारों में इसे सेवन करना चाहिए।
उक्त सभी प्रयोग सामान्य औषधि के रुप में भी किये जा सकते हैं,किन्तु तान्त्रिक विधान से ग्रहण करके,साधित करके उपयोग में लाया जाय तो लाभ अधिक होगा यह निश्चित है।
पीलिया के मरीजों के लिए भी यह फायदेमंद औषधि है। गोरखमुंडी के पत्ते तथा इसकी जड़ को पीस कर गाय के दूध के साथ लिया जाये तो इससे यौन शक्ति बढ़ती है। यदि इसकी जड़ का चूर्ण बनाकर कोई व्यक्ति लगातार दो वर्ष तक दूध के साथ सेवन करता है तो उसका शरीर मजबूत हो जाता है। गोरखमुंडी का सेवन शहद, दूध मट्ठे के साथ किया जा सकता है।



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प्रसव पीड़ा को दूर करते है यह घरेलु उपाय




प्रसव पीड़ा को दूर करते है यह घरेलु उपाय 
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पहला प्रयोगः प्रसूति के समय ताजे गोबर (1-2 घण्टे के भीतर का) को कपड़े में निचोड़कर एक चम्मच रस पिला देने से प्रसूति शीघ्र हो जाती है।
दूसरा प्रयोगः तुलसी का 20 से 50 मि.ली. रस पिलाने से प्रसूति सरलता से हो जाती है।
तीसरा प्रयोगः पाँच तोला आँवले को 20 तोला पानी में खूब उबालिये। जब पानी 8 तोला रह जाये तब उसमें 10 ग्राम शहद मिलाकर देने से बिना किसी प्रसव पीड़ा के शिशु का जन्म होता है।
चौथा प्रयोगः नीम अथवा बिजौरे की जड़ कमर में बाँधने से प्रसव सरलता से हो जाता है। प्रसूति के बाद जड़ छोड़ दें।
मंत्रः -
ॐ कौंरा देव्यै नमः। ॐ नमो आदेश गुरु का…. कौंरा वीरा का बैठी हात… सब दिराह मज्ञाक साथ…. फिर बसे नाति विरति…. मेरी भक्ति… गुरु की शक्ति…. कौंरा देवी की आज्ञा।
प्रसव के समय कष्ट उठा रही स्त्री को इस मंत्र से अभिमंत्रित किया हुआ जल पिलाने से वह स्त्री बिना पीड़ा के बच्चे को जन्म देती है।
औषधियों से उपचार-
1. लोध्र: 
लोध्र का लेप करने से प्रसूता (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) को प्रसव के समय हुए योनिक्षत पर लगाने से लाभ होता है।
2 .जायफल: 
प्रसव यानी डिलीवरी के समय होने वाले कमर दर्द में जायफल घिसकर लेप करने से लाभ होता है।
३ . पीपरामूल: 
प्रसव के समय पीपरा मूल, दालचीनी का चूर्ण लगभग 1.20 ग्राम में थोड़ी सी भांग के साथ प्रसूता (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) को पिलाने से प्रसव यानी बच्चे का जन्म आराम से होता है।
४.कलिहारी: 
सुख से प्रसव के लिए कलिहारी की  जड़ पीसकर नाभि के नीचे लगाने से लाभ होता है।
5. कपास: 
डिलीवरी के बाद में कपास की छाल का काढ़ा प्रसूता (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) को पिलाने से गर्भाशय जल्दी ही ठीक हो जाता है।

6.  सरपत: 
प्सूता (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) आसपास वातावरण साफ करने के लिये सरपत की धूनी जला कर धुंआ करें।
7.  हींग: 
हींग और बाजरे को गुड़ में रखकर निगल जाएं। दो घूंट से ज्यादा पानी न पियें। यह करने से बच्चा देने के समय दर्द नहीं होगा।
8. कपूर: 
पके केले में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग कपूर मिलाकर खाने से बच्चे का जन्म (चाइल्ड बर्थ) आराम से होता है।
9.  पान: 
पान को योनि में रखने तथा पान का सेंक व लेप करने से सूजन नष्ट हो जाती है और औरत का दूध साफ होकर निकलता है।
10. . कसौंदी: 
कसौंदी के पत्तों का रस देने से प्रसव (चाइल्ड बर्थ) जल्दी होता है।
11.  कुला: 
कुचला की मज्जा (बीच के हिस्से) को पानी में घिसकर नाभि पर लगायें।
12.. तेजपात: 
तेजपत्ते के पत्तों की धूनी देने से बच्चा सुख से उत्पन्न हो जाता है।
13. कंगुनी: 
प्रसव पीड़ा को कम करने के लिये कंगुनी के चूर्ण को दूध में बुझाकर, मिश्री को मिलाकर खाने से लाभ होता है। अगर पहले से ही लिया जाये तो दर्द कम रहता है।
14.  काफी: 
शरीर में स्फूर्ति पैदा करने के लिए काफी के बीज भूनकर, अच्छी तरह से पीसकर पानी में उबालकर पीने से लाभ होता है।
15. अजाझाड़े: 
अजाझाड़े की जड़ कमर में बांधने से प्रसव सुखपूर्वक होता है।
14. बादाम :
आखिरी महीने में प्रसूता (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) को 2 बादाम और 10-15 मुनक्का के दाने पानी में भिगोकर पीसकर खिलाने से लाभ होगा।
15. तुलसी: 
महिला को प्रसव (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) के समय 2 चम्मच तुलसी का रस पिलाने से प्रसव का दर्द कम हो जाता है।
16. बथुए: 
बथुए के 20 ग्राम बीजों को पानी में उबालकर, छानकर बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री को पिलाने से पीड़ा कम होगी।
17. हल्दी: 
बच्चा होने के आखिरी माह में एक चम्मच पिसी हुई हल्दी गर्म दूध के साथ सुबह-शाम पिलाएं।
18. नींबू: गर्भ के आखिरी महीने में पानी में नींबू का रस डालकर रोज पीने से लाभ होता है।
19. लौकी:
 लौकी को बिना पानी के साथ उबालकर उसका रस 30 ग्राम की मात्रा में निकालकर प्रसूता (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) को पिला देने से दर्द में आराम मिलता है।
20. हींग: 
चुटकी भर हींग लेकर, 10 ग्राम गुड़ में मिलाकर खाकर, ऊपर से आधा कप पानी या गाय का दूध पियें।
21. अंजीर: 
प्रसव के समय में 15-20 दिन तक रोज दो अंजीर दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
22. लालघुंघची: 
लाल घुंघची के दाने लेकर इसे बारीक पीस लें, फिर इसे पुराने गुड़ के साथ खायें इससे प्रसव के समय दर्द नहीं होता है।

23. जंगली पुदीना: 
जंगली पुदीना और हंसराज दोनों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। फिर इसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर सेवन करने से दर्द में लाभ होता है।
24. कलिहारी: 
कलिहारी की जड़ हाथ-पैरों में थोड़ी-थोड़ी बांध लें। कुछ देर बाद प्रसव के समय स्त्री को बिना अधिक पीड़ा के डिलीवरी हो जायेगी।
25. पोई: 
पोई की जड़ लेकर उसका काढ़ा बनाकर 4-5 चम्मच में 2 चम्मच तिल्ली का तेल मिलाकर स्त्री के पेट पर धीरे-धीरे लेप करने से प्रसव (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) शीघ्र और बिना दर्द के हो जाता है।
26. बिजौरा:
 बिजौरा की जड़ 10 ग्राम और महुआ 10 ग्राम दोनों को घी में पीस लें, फिर उसमें 2 चम्मच लेकर हर 1 घंटे बाद पिलाते रहें। इससे प्रसव यानी डिलिवरी में तकलीफ कम होती है।
27. अपामार्ग: अपामार्ग की जड़ और कलिहारी की जड़ को लेकर एक पोटली में रखें। फिर स्त्री की कमर से पोटली को बांधने प्रसव यानी डिलीवरी आसानी से हो जाती है।
28. एरण्ड: 
एरण्ड का तेल गर्म दूध में 50 मिलीलीटर की मात्रा में मिलाकर पिलाने से अगर प्रसव में दर्द हो तो दर्द तेज होकर बंद हो जायेगा।
29.  सोंठ: 
10 ग्राम सोंठ का चूर्ण लगभग 500 मिलीलीटर दूध में अच्छी तरह पकाकर लेने से 15 मिनट के अन्दर-अन्दर बच्चा बाहर आ जायेगा।
30. केला:
 केले की जड़ लाकर प्रसूता (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) के बांयी जांघ पर बांधे। इससे जल्द लाभ होगा।
 केले के ऊपर कपूर का चूर्ण डालकर खाने से प्रसव यानी डिलीवरी में दर्द नहीं होता है।
31.  पीपल लता: 
पीपल लता की गांठदार जड़ को पीपला मूल कहते हैं। कुछ पंसारी लोग पीपल लता की मोटी शाखाओं के टुकड़े कर बेचते हैं। अत: सावधानी से ही लें। प्रसव में ज्यादा देर होने पर पीपलामूल, ईश्वर मूल और हींग, पान के साथ खिलाने से प्रसव यानी डिलीवरी का दर्द बढ़कर प्रसव हो जाता है। प्रसव के तुरन्त बाद इसके बारीक चूर्ण का घोल देने से लाभ होता है।








नजला जुकाम के घरेलु आयुर्वेदिक उपचार





     नजला-जुकाम एक बहुत ही आम और हमेशा परेशान करने वाला रोग है। वास्तव में यह रोग नहीं, शरीर की एक सांवेदनिक प्रतिक्रिया है, जो मौसम बदलने, नाक में धूल कण जाने आदि से उत्पन्न होती है। पूरे विश्व के लोग कभी न कभी, इसके शिकार होते ही हैं। नज़ला-जुकाम शीत के कारण होने वाला एक ऐसा रोग है, जिसमें नाक से पानी बहने लगता है। मामूली- सा दिखने वाला यह रोग, कफ की अधिकता के कारण अधिक कष्टदायक हो जाता है। यों तो ऋतु आदि के प्रभाव से दोष संचय काल में संचित हो कर अपने प्रकोप काल में ही कुपित होते हैं, परंतु दोषों के प्रकोपक कारणों की अधिकता, या प्रबलता के कारण तत्काल भी कुपित हो जाते हैं, जिससे जुकाम हो जाता है; अर्थात नज़ला-जुकाम शीत काल के अतिरिक्त भी हो सकता है।
आयुर्वेद में नजला-जुकाम 6 प्रकार के बताये गये हैं। आचार्य चरक ने इसके चार प्रकार बताये हैं, जबकि आचार्य सुश्रुत ने पांच प्रकार माने हैं।

वायुजन्य (वातज) : 


वायु से उत्पन्न जुकाम में नाक में वेदना, सुंई चुभने जैसी पीड़ा, छींक आना, नाक से पतला स्राव आना, गला, तालु और होठों का सूख जाना, सिर दर्द और आवाज बैठ जाना आदि लक्षण होते हैं।

पित्तजन्य (पित्तज) : 


नाक से गर्म और पीले रंग का स्राव आना, नाक का अगला भाग पक जाना, ज्वर, मुख शुष्क हो जाना, बार-बार प्यास लगना, शरीर दुबला और त्वचा चमकरहित होना इसके लक्षण हैं। नाक से धुंआ निकलता महसूस होता है।

कफजन्य (कफज) : 


आंखों में सूजन, सिर में भारीपन, खांसी, अरुचि, नाक द्वारा कफ का स्राव, लाला स्राव और नाक के भीतर, गले और तालु में 'खुजली होती है।

त्रिदोषज : 


उपर्युक्त तीनों दोषों से उत्पन्न जुकाम बार-बार हो जाता हैे। साथ ही तीनों दोषों के मिलेजुले लक्षण दिखाई देते हैं। शरीर में अत्यधिक पीड़ा होती है।

रक्तजन्य (रक्तज) :

 नाक से लाल रंग का स्राव होता है। रोगी की आंखें लाल हो जाती हैं। मुंह से बदबू आती है। सीने में दर्द, गंध का ठीक तरह से पता न चलना आदि लक्षण होते हैं।
दूषित : नजला-जुकाम के सभी दोषों की अत्यंत वृद्धि हो जाने से बार-बार नाक बहना, सांस में दुर्गंध, नाक का बार-बार बंद होना-खुलना, सुंगंध-दुर्गंध पता न चलना आदि लक्षण होते हैं।
नजला-जुकाम के प्रमुख कारण : नजला-जुकाम मस्तिष्कजन्य रोग होते हुए भी इस रोग का मूल कारण अग्नि है; अर्थात जब जठराग्नि मंद होती है, तो इसमें अजीर्ण हो जाता है। पाचन क्रिया बिगड़ जाती है और भोजन ठीक से पच नहीं पाता एवं कब्ज हो जाने के कारण उपचय पदार्थ का विसर्जन नही होता, जिसके कारण जुकाम की उत्पत्ति होती है क्योंकि शरीर में एकत्रित विजातीय तत्व जब अन्य रास्तों से बाहर नहीं निकल पाते, तो वे जुकाम के रूप में नाक से निकलने लगते हैं। यह जुकाम अत्यधिक कष्टदायक होता है। इससे सिर, नाक, कान, गला तथा नेत्र के विकार उत्पन्न होने लगते हैं।
जुकाम का कारण मानसिक गड़बड़ी भी देखा गया है। इसके अतिरिक्त अन्य कारण हैं। मल, मूत्र, छींक, खांसी आदि वेगों को रोकना, नाक में धूल कण का प्रवेश होना, अधिक बोलना, क्रोध करना, अधिक सोना, अधिक जागरण करना, शीतल जल और ठंडे पेय पीना, अति मैथुन करना, रोना, धुएं आदि से मस्तिष्क में कफ जम जाना। साथ ही साथ मस्तिष्क में वायु की वृद्धि हो जाती है। तब ये दोनों दोष मिल कर नजला-जुकाम व्याधि उत्पन्न करते हैं।
जुकाम को साधारण रोग मान कर उसकी उपेक्षा करने से यह अति तकलीफदह हो जाता है; साथ ही अन्य विकार भी उत्पन्न होने लगते हैं। जुकाम बिगड़ने पर वह नजले का रूप धारण कर लेता है।
नजला हो जाने पर नाक में श्वास का अवरोध, नाक से हमेशा पानी बहना, नाक पक जाना, बाहरी गंध का ज्ञान न होना, मुख की दुर्गंध आदि विकार उत्पन्न हो जाते हैं।

कष्टदायी है जुकाम का बिगड़ना : 

जुकाम के बिगड़ जाने की अवस्था के बाद मस्तिष्क की अनेक व्याधियां होती हैं, जो कष्टदायी हो जाती हैं। इस रोग के कारण बहरापन, कान के पर्दे में छेद तथा कान, नाक, तालु, श्वास नलिका में कैंसर होने की संभावना रहती है। अंधापन भी उत्पन्न हो जाता है। कहा जाता है कि नजले ने शरीर के जिस अंग में अपना आश्रय बना लिया, वही अंग वह खा गया। दांतों में घुस गया, तो दांत गये, कान में गया, तो कान गये, आंखों में गया, तो आंखे गयी, छाती में जमा हो, तो दमा और कैंसर जैसी व्याधियां उत्पन्न कर देता है। सिर पर गया, तो बाल गये।

चिकित्सा : 

सबसे पहले रोग को उत्पन्न करने वाले कारणों को दूर करें। कफवर्द्धक, मधुर, शीतल, पचने में भारी पदार्थ न खाएं। दिन में सोने, ठंडी हवा का झोंका सीधे शरीर पर आने देने, अति मैथुन आदि से दूर रहें। पचने में हल्का, गर्म और रूखा आहार लें। सौंठ, तुलसी, अदरक, बैंगन, दूध, तोरई, हल्दी, मेथी दाना, लहसुन, प्याज आदि सेवनीय चीजें हैं। सोंठ के एक चम्मच को चार कप पानी में पका कर बनाया गया काढ़ा दिन में 3 -4 बार पीना लाभदायक है।

घरेलू उपचार :-


दो ग्राम मुलहठी चूर्ण को शहद के साथ दिन में 3 बार चाटने से जुकाम ठीक होता है।
सुहागे को तवे पर फुला कर चूर्ण बना लें। नजला-जुकाम होने पर गर्म पानी के साथ दिन में तीन बार लेने से पहले ही दिन, या ज्यादा से ज्यादा तीन दिनों में जुकाम ठीक हो जाएगा।
गर्म दूध के साथ सौंठ का चूर्ण सुबह-शाम सेवन करें।
काली मिर्च और बताशे पाव भर जल में पकावें। चौथाई रहने पर इसे गरमागरम पी लें। प्रातः खाली पेट और रात को सोते समय तीन दिन उपयोग करें। नजला-जुकाम से राहत मिलेगी।
षडबिंदु तेल की 4-4 बूंदे दोनों नथुनों में टपकाने से शीघ्र ही सिर के विकार नष्ट हो जाते हैं।
5 ग्राम अदरक के रस में 5 ग्राम तुलसी का रस मिला कर 10 ग्राम शहद से लें।
काली मिर्च को दूध में पका कर सुबह-शाम पीएं।
अमरूद के पत्ते चाय की तरह उबाल कर पीएं।
दिन में 2 बार अनार, या संतरे के छिलकों को उबाल कर उसका काढ़ा पीने से जुकाम ठीक हो जाता है।
चूने के पानी में गुड़ घोल कर पीने से जुकाम ठीक हो जाता है।


पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

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