Friday, July 7, 2017

वर्षा ऋतु मे कैसा हो खान -पान? // What should you eat during the rain?




बरसात के मौसम में मलेरिया, डेंगू , सर्दी-खांसी, दस्त, उलटी, टाईफ़ोइड, त्वचा रोग,पीलिया इत्यादी अनेक रोग फैलते है। जिस तरह हम बारिश से बचने के लिए छाते के इस्तेमाल करते है ठीक उसी तरह बरसात के मौसम मे फैलने वाली इन बीमारियों से बचने के लिए हमें कुछ एहतियात रूपी छाते का इस्तेमाल करना चाहिए।
मॉनसून का सीजन भले ही रोमांटिक और खुशनुमा होता है, लेकिन यह अपने साथ कई बीमारियां भी लेकर आता है। इस मौसम में लोग सबसे ज्यादा बीमार पड़ते हैं। बरसात के मौसम में खानपान में थोड़ी सी भी लापरवाही सेहत का बैंड बज सकती है। ऐसे में यदि थोड़ी सावधानी बरती जाए तो आप खुद को स्वस्थ भी रख सकते हैं और मानसून का पूरा मजा उठा सकते है। इस अनहाइजीन मौसम में फूड प्लान या डाइट चार्ट बनाना बेहद जरूरी है।
बरसात में खानपान से जुड़ी इन बातों का ध्यान रखें- 

दूध में रोजाना रात को हल्दी मिलाकर पीने से पेट और त्वचा दोनों स्वस्थ्य रहेंगे। 
तरबूज, मौसम्मी, खरबूज आदि मौसमी फलों से आपको जरूरी पोषक तत्वर मिल सकते हैं।
• मैदे की चीजें, आइसक्रीम, मिठाई, केला, अंकुरित अनाज आदि कम खायें।
*हमेशा ताजे और स्वच्छ सब्जी / फल का सेवन करे। ध्यान रहे की खाने से पहले फल / सब्जी को अच्छे से स्वच्छ पानी से धो कर साफ कर ले। बासी भोजन,पहले से कटे हुए फल तथा दुषित भोजन का सेवन न करे. हमेशा ताजा गरम खाना खाए. इसलिए जरुरी है अधिक तला, भुना खाना न खाया जाए बल्की ऐसा भोजन खाया खाएं जो आसानी से पच जाए.



स्ट्रीट फूड से बचें

बाहर का सड़क के किनारे मिलनेवाला या होटल का खाना खाने से पूरी तरह बचना चाहिए। बाहर का खाना खाने से हैजा, दस्त, उलटी, टाईफ़ोइड इत्यादी गंभीर रोग हो सकते है। सड़क के किनारे बेचे जानेवाले चायनिझ फ़ूड, भेल, पानी पूरी यह फ़ूड पॉईजनिंग होने के प्रमुख कारण है। ऐसा भोजन खाया खाएं जो आसानी से पच जाए.
इसका एक अपवाद है. यदि आपका पेट पाचन सही है तो सामने तले कचोडी, मंगोड़े, पकोड़े, का लुत्फ़ उठाया जा सकता है. डीप फ्राइंग से सब कीटाणु नष्ट हो जाते हैं• बारिश के मौसम में स्नैक्स व कूल ड्रिंस्क का सेवन भी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। 
• इस मौसम में सड़कों में कीचड़ और गंदगी का अंबार रहता है। ऐसे में सड़क के किनारे मिलने वाले खाने-पीने चीजों से दूर रहें।
दही का सेवन बंद करें
पहली बारिश के साथ ही दही, मट्ठे का सेवन कम से कम एक माह के लिये बंद कर दें. ये इसलिए क्योंकि बरसात गिरते हीसम प्रकार के वायरस, कीटाणु भी पनपने लगते हैं. जिससे पशुओं का चारा भी दूषित हो जाता है. परिणाम स्वरुप कीटाणुओं के रस भी दूध में आ जाते है. जब हम दही जमाते है तो इन एक कोशिकीय कीटाणुओं को भी पनपने का अवसर मिल जाता है. यदि आप ऐसा करेंगे तो दूध उत्पादों की एलर्जी जिससे मुहांसे व अन्य त्वचा रोग होते है, बचे रहेंगे.
 


फलों को साबुत खाने के बजाय सलाद के रूप में लें। क्योंकि इस मौसम में फलों में कीड़ा होने की संभावना काफी अधिक रहती है और अगर आप उन्हें सलाद के रूप में काटकर खाएंगे तो आप यह देख सकेंगे कि कहीं फल भीतर से खराब तो नहीं है। 

• इस मौसम में दाल, सब्जि़यां व कम वसा युक्त आहार खाएं।

भरपूर पानी का सेवन
वर्षा ऋतु में पसीना भी अधिक निकलता है. ऐसे में जरुरी है की शरीर में पर्याप्त पानी का प्रमाण रखने के लिए भरपूर पानी का सेवन करे। हमेशा उबाल कर ठंडा किया हुआ या फ़िल्टर किये हुए स्वच्छ पानी का सेवन करे। कम से कम १५ मिनट तक पानी अवश्य उबाले। ठंडा पेय पीने की बजाय तुलसी, इलायची की चाय या थोडा गरम पानी पीना ज्यादा फायादेमंद है।• बारिश में शरीर में वात यानी वायु की वृद्धि होती है, इसलिए हल्के व शीघ्र पचने वाले वाले व्यंजनों को ही खाएं।
• अगर आप खाने के शौकीन हैं तो घर पर ही साफ-सुथरे तरीके से बनी चीजों को खाएं।
• बरसात के मौसम में वातावरण में काफी नमी रहती है। जिसके कारण प्यास कम लगती है। लेकिन फिर भी पानी जरूर पीयें। 

 बरसात में गर्मागरम पकौड़े और समोसा खाने को मन जरूर ललचाता है। लेकिन बात अगर सेहत की हो तो इनसे दूर रहने में ही आपकी भलाई है। 
• गरिष्ठ भोजन, उड़द, अरहर, चौला आदि दालें कम खाएं। 
• दही से बनी चीजों का सेवन भी इस मौसम में कम करें तो बेहतर। 
• इस मौसम में फलों के जूस का सेवन सोच-समझकर करें। बारिश में फल पानी में भीगते रहते हैं इससे फलों में रस की तुलना में पानी ज्यादा भर जाता है।
• बरसात में चारों ओर हरी-भरी नजर आने वाली सब्जियों में कीड़े होने की आशंका ज्यादा रहती है। ऐसे में पत्तेदार सब्जियों के सेवन से बचें। 



• बरसात में नींबू की शिकंजी पीयें।

कैसा हो ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर
• ब्रेकफास्ट में ब्लैक टी के साथ पोहा, उपमा, इडली, सूखे टोस्ट या परांठे ले सकते है।
• लंच में तले-भुने खाने की बजाय दाल व सब्जी के साथ सलाद और रोटी लें।
• डिनर में वेजीटेबल, चपाती और सब्जी लें।
• इस मौसम में गर्मागरम सूप काफी फायदेमंद रहता है। 

बुजर्गो के लिये विशेष
बदलते मौसम मे बुजर्गो के बिमार होने कि संभावना ज्यादा होती है। इसलिये जरुरी है कि उनके स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखा जाए। बुजर्ग बारीश मे ज्यादा बाहर न निकले। गरम चाय, कॉफ़ी या सूप पिए। कच्चे फल या सलाद न खाए। खाने मे हल्दी, ईलायची, सौन्फ, काली मिर्च, अदरक का इस्तेमाल करे। इनसे रोगप्रतिकार शक्ति बढती है।• 








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