26.7.17

आंतों के रोग के कारण ,लक्षण व उपचार //Treatment of intestinal disease




आंतों के रोग का कारण व लक्षण
बिना चबाए भोजन निगलनेवालों,लगातार कुछ-न-कुछ खाते रहनेवालों, पानी कम पीनेवालों, चिकनाई का कम सेवन करनेवालों का आतों के रोग की चपेट में आना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। ज्यादा गरिष्ठ भोजन आंतों की कार्यप्रणाली को बिगाड़ देता है। रोग गंभीर होने पर ऑपरेशन भी करवाना पड़ सकता है। आतों में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं-जैसे आंतों में जलन, जख्म, सूजन, पीड़ा व आंत्र ज्वर।
आंतों के रोग का उपचार
*. मौसमीः
आत्रज्वर में मौसमी का सेवन लाभदायक होता है।
* केलाः
आत्रज्वर के रोगियों को केला काफी मात्रा में खाना चाहिए। इससे बहुत लाभ होता है। इससे आंतों की सूजन भी समाप्त हो जाती है।
* सेवः
सेव खाने से आतों के जख्म ठीक हो जाते हैं व सूजन मिट जाती है। सेव का रस पीने से आतों के घावों में आराम मिलता है।
* बेरः
बेर ठंडा व रक्तशोधक फल है। इसके सेवन से आतों के घाव ठीक हो जाते हैं।
3. संतराः
आंत के रोगियों को नित्य एक गिलास संतरे का रस पीना चाहिए।
* बेलः
पेट के भीतर की बड़ी आंतों में सूजन आ गई हो तो बेलपत्र का रस तथा बेलगिरी का हलवा साथ में लीजिए। पहले रस पी जाइए फिर पके हुए बेल का गूदा या हलवा खा जाइए। बेलपत्र का रस सूजन व घावों का इलाज करेगा तथा गूदे का हलवा सब कुछ पूर्ववत बना देगा।
* चुकंदर व गाजर का रसः
बड़ी आंत की सूजन में 185 ग्राम गाजर का रस 150 ग्राम चुकंदर का रस व लगभग 160 ग्राम खीरे का रस मिलाकर पीने से काफी आराम मिलता है।




* नारंगीः

नारंगी गर्मी शांत करनेवाली होती है। आत्रज्वर के रोगी को दूध में नारंगी का रस मिलाकर पिलाएं या फिर दूध पिलाकर नारंगी खिलाएं दिन में कई बार नारंगी खिलाएं। इससे आत्रज्वर में काफी राहत मिलती है।
* अनारः
अनार खाने से आतों के विभिन्न रोगों में लाभ होता है।
धनिया।
एक चम्मच साबुत बिना पिसा हुआ धनिया एक चम्मच बूरा खांड(चीनी) दोनों चबा चबाकर खाए और अंत में पानी से निगल जाएँ। दस्त पेट के रोगो में लाभ होगा।
रात को धनिया पानी में भिगोकर प्रात : पानी छानकर बूरा खांड(चीनी) या शक्कर मिलाकर नित्य पियें। ये प्रयोग अनेक लोगो पर सफलता पूर्वक आज़माया हुआ हैं।अजवायन
* साधारण जल से इसे खाने से बदहजमी, अरुचि व् मंदाग्नि मिटती है।
*गुनगुने पानी के साथ केवल अजवायन का चूर्ण खाने से बदहजमी, खांसी, पेट का तनाव, गुल्म (ट्यूमर), तिल्ली, कफ की खराबी, कफ और वायु की बहुत प्रकार की खराबियां दूर होती है। पेट के छोटे- बड़े केंचुए नष्ट हो जाते है। इन सब शिकायतों में आवश्यकता अनुसार सप्ताह- दो सप्ताह तक ले।
* अकेली अजवायन में चिरायते का कटुपोष्टिक, हींग का वायुनाशक और काली मिर्च का अग्निदीपक गुण समाया हुआ है। “एक यवानी शतमन्नपाचिका” अर्थात अकेली अजवायन सैकड़ो प्रकार के अन्न को पचाने वाली होती है। पेट दर्द, अफारा, वायुगोला, कफ, वात, शूल, वमन, कृमि, बवासीर, व् संक्रमण रोगो में यह बहुत ही लाभकारी है।
*अमृतधारा की दो-तीन बुँदे बताशे या खांड या पानी में डालकर लेने से पेट दर्द मिटता है। यदि एक बार में न मिटे तो आधा घंटे बाद फिर एक ऐसी खुराक लेने से आराम हो जाता है।
*तीन चम्मच ठंडे पानी में दो-तीन बुँदे अमृतधारा, सुबह शाम भोजन के बाद लेने से दस्त, आंव के दस्त, मरोड़, पेचिस, अतिसार, हैजा, खट्टी डकार, तेज प्यास, अधिक प्यास, पेट फूलना, पेट दर्द, खाना खाते ही उलटी या दस्त होना, मंदाग्नि, बादी, बदहजमी, आदि रोग मिटते है।



इसबगोल

इसबगोल इरिटेबल बाउल सिंड्रोम में बहुत लाभकारी हैं। इसबगोल फाइबर का बहुत अच्छा स्त्रोत हैं। ये मल को बांधकर रखता हैं। और इस रोग में तो ये रामबाण हैं। भोजन के १५ मिनट पहले एक चम्मच इसबगोल का छिलका ठन्डे पानी के साथ लेना चाहिए।
हल्दी
इस रोग में हल्दी बहुत लाभ करती हैं। भोजन के एक घंटा पहले या बाद में आधा चम्मच पिसी हल्दी की फंकी ठन्डे पानी से नित्य लीजिये। आंतो के रोगो में हल्दी बहुत गुणकारी हैं।
बेल, धनिया, मिश्री, सौंफ
अमीबोबायसिस, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, कई बार दस्त जाना, आंव, पेचिश, आदि पाचन तंत्र के रोग, चाहे नया रोग हो चाहे पुराना हो इनमे ये निम्नलिखित प्रयोग बहुत सफल हैं।
पिसा हुआ धनिया, मिश्री, सौंफ, बेल(बेलगिरी के फल) का चूर्ण इनको 100 – 100 ग्राम की मात्रा में मिलाये। अब इसमें एक चौथाई भाग अर्थात 25 ग्राम पीसी हुई सौंठ मिलाकर इस मिश्रण की दो दो चम्मच खाने से एक घंटा पहले चार बार पानी से फंकी ले।
घर पर बनाये चूर्ण.
सोंठ, नागरमोथा, अतीस और गिलोय ये सभी पंसारी (जो आयुर्वेदिक कच्ची दवा बेचता है) से मिल जाएँगी. इन सब का बराबर चूर्ण लेके मिक्स कर लें। फिर 10gm चूर्ण लेके 400ml पानी मे डाल के उबालिये फिर 100ml बच जाए तो उतार कर छान लीजिये। यह सुबह शाम खली पेट सेवन करना है।
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