Wednesday, July 5, 2017

शुगर मधुमेह का घरेलू आयुर्वेदिक इलाज




शुगर (मधुमेह ) क्या है :-
आज कल मधुमेह की बीमारी आम बीमारी है इससे किसी का लिवर ख़राब हो जाता है , किसी की किडनी किसी को लकवा हो रहा है किसी को ब्रेन स्ट्रोक  हो रहा है ,किसी को हार्ट अटेक  आ रहा है। कुल मिलकर मधुमेह  के complications बहुत है। प्रीतिदिन बहुत लोग इस बीमारी का शिकार हो रहे है। कभी भी शुगर में इन्सुलिन नहीं लेनी चाहिए क्योंकि इसे लगातार लेने से किडनी ख़राब हो जाती है। यह बिमारी हमारे शरीर में अग्नाशय द्वारा इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाने के कारण होती है। रक्त ग्लूकोज स्तर बढ़ जाता है, साथ ही इन मरीजों में रक्त कोलेस्ट्रॉल, वसा के अवयव भी असामान्य हो जाते हैं।
   शूगर को कई नाम से जाना जाता है जेसे मधुमेह, डायबिटीज, शूगर, चीनी रोग इत्यादि। ये बीमारी व्यक्ति को कमजोर बनाती है। जिससे व्यक्ति को बहुत सारी परेशानियों का समाना करना पड़ता है। जब व्यक्ति को सुगर होता है तब शरीर को भोजन से उर्जा प्राप्त करने मैं कठनाई होती है पेट फिर भी भोजन को ग्लूकोज में बदलता रहता है। ग्लूकोज रक्त धारा में जाता है। किन्तु अधिकांश ग्लूकोज कोशिकाओं में नही जा पाते। जिनके कारण हैं :- इन्सुलिन की मात्रा कम होने के कारण, पूरे ग्लूकोज को ग्रहण कर सकने के लिए रिसेप्टरों की संख्या कम हो सकती है। समय समय. पर जाच करवानी चाहिए। जिससे इससे सावधान रहा जा सके अगर आपको सुगर है तो घबराएँ नहीं इसका बहुत ही अच्छा इलाज आयुर्वेद में है जो की नीचे बतया गया है।
शुगर (मधुमेह ) के लक्षण :-
*. शरीर में कमजोरी महसूस होना।
*त्वचा के बार -२ रोगों का होना |
* रक्त ग्लूकोज स्तर बढ़ जाता है |
*आँखों की रोसनी बिना किसी कारण के कम होना।
* स्त्रियों में मासिक स्राव में विकृति अथवा उसका बन्द होना।
* भूख़ बहुत ज्यादा लगती है।
* लीवर सही तरह से काम नहीं करता।
* किडनी भी ख़राब हो जाती है।
*किसी किसी को ब्रेन हेमरेज भी हो जाता है।
* आँखों की रोशनी का धीरे -२ कम होना।
शुगर (मधुमेह ) के कारण :-
जब तक आप मधुमेह बीमारी का असली कारण नही समझेगे आपकी मधुमेह कभी भी ठीक नही हो सकती है जब हमारे रक्त में वसा (गंदे कोलेस्ट्रोल) या LDL की मात्रा बढ जाती है तब हमारे रक्त में मोजूद कोलेस्ट्रोल कोशिकाओ के चारों तरफ चिपक जाता है और जो खून में मोजूद जो इन्सुलिन होता है वो हमारी कोशिकाओं तक नही पहुँच पाता है इसलिए वो इन्सुलिन शरीर के किसी भी काम में नही आता है जिस कारण जब हम अपना शुगर level चैक कराते हैं तो शरीर में हमेशा शुगर का स्तर ही बढा हुआ होता है क्यूंकि वो कोशिकाओ तक नहीं पहुंची क्योंकि वहाँ (गंदे कोलेस्ट्रोल)LDL VLDL जमा हुआ है जबकि जब हम बाहर से इन्सुलिन लेते है तब वो इन्सुलिन नया-नया होता है तो वह कोशिकाओं के अन्दर पहुँच जाता है।
1. खाने वाली मीठी चीजो का ज्यादा सेवन करने से।
2. शरीर में ज्यादा बजन होने से।
3. चिंता भी इसका एक मुख्य कारण है।
4. व्यायाम न करना।
5. समय पर भोजन न करना इत्यदि।
शुगर का घरेलू इलाज :-
आयुर्वेद की ये सबसे अच्छी दवा ये है जो नीचे लिख रही है इससे सुगर 101% ठीक हो जाता है ये दवाई मेथी दाने, करेले के बीज, जामुन के बीज, बेल के पत्ते से बनायीं जाती है जेसा की नीचे आपको बताया गया है।
उपचार के लिए क्या चाहिए :1.100 ग्राम मेथी का दान
3.150 ग्राम जामुन के बीज
2.100 ग्राम तेज पत्ता
4.250 ग्राम बेल के पत्ते ( ये वो पत्ते है जो शिव भोले पर चढ़ाये जाते है )
     अब इनको धुप में सुखाकर फिर सिलबाट पर या पत्थर पर पीसकर अब इन सभी को एक साथ मिला ले और किसी शीशी मैं भरकर रख लें | ये आपकी डाइबिटीज़ की दवा बनकर तैयार है।
इस दवाई का सेवन कैसे करें :-
सुबह नास्ता करने से एक घंटे पहले एक चम्मच गर्म पानी के साथ ले फिर शाम को खाना खाने से पहले एक चम्मच गर्म पानी से ले ( मतलब ये दवा आपको सुबह शाम खाली पेट लेनी है ) अगर आप इसके साथ एक-दो दवाई और लें ले तो इस दवा का असर बहुत ही जल्द होगा शरीर की सभी बीमारियाँ वात,पित ,और कफ के बिगड़ने से होती हैं| दुनिया मे सिर्फ दो ही ऐसी ओषधियाँ है जो इन तीनों के लेविल  को बराबर रखती है वो हैं गौ मूत्र और त्रिफला चूर्ण।
त्रिफला चूर्ण का सेवन :- 
त्रिफला चूर्ण को रात को सोने से पहले एक से डेड चमच गर्म दूध के साथ ले लें उसके बाद थोडा सा चल फिर लें।
गौ मूत्र का सेवन :-
 आधा कफ ताजा गौ मूत्र लेकर उसमें आधा कफ पानी मिला लें और उसे सुबह-सुबह पी लें।
कब तक सेवन करें :- 
इस दवा का सुबह – सुबह खाली पेट 3 महीने तक सेवन करें।
मेथी के दाने से उपचार :- एक चम्मच मेथी के दानो को रात को थोड़े से पानी में भिगो कर रख दो फिर सुबह उठ कर पानी को घूट -२ कर के पिए और मेथी के दानो चबा लें। इससे भी आपकी सुगर cure होगी।
शुगर में परहेज :-
1. शूद्ध खाना एवं हलके खाने का सेवन करना है।
2. चीनी का प्रयोग कभी ना करें चीनी की जगह आप गुड का प्रयोग कर सकते हैं।
3. प्यास लगने पर पानी में नीबू मिलाकर पीना है।
4. ऐसी चीजे ज्यादा खाए जिसमे फाइबर हो रेशे ज्यादा हो ,हरी सब्जी जैसे दाल, पालक, छिलके वाली दाल आदि।
5. दही का भी सेवन कर सकते है।
6. तला हुआ भोजन, सूखे मेवे, चीनी, केला, चीकू, सीताफल इत्यादि का सेवन न करें।
7. हल्का व्यायाम करें, शारीरिक परिश्रम करें थोडा-थोडा।
8.शाम को सूरज अस्त होने से पूर्व भोजन कर लेना चाहिए।
प्राणायाम करें :-
सुबह-सुबह थोड़ी-थोड़ी सेर कराएँ और और प्राणायाम कराएँ जेसे आलोम-बिलोम , कपालभाती इन दोनों प्राणायाम को करने से कोई भी बीमारी पास नहीं आ सकती और अगर कोई बीमारी है तो वो भी जल्द ही ठीक हो जाएगी।
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