Saturday, June 3, 2017

होम्योपैथिक औषधि Veratrum Album/ वेरेट्रम एल्बम के गुण लक्षण उपयोग




धुले हुए चावल के पानी की तरह पतले दस्त – 
रोगी को धुले हुए चावल के पानी की तरह के दस्त आते हैं, ऐसे निकलते हैं जैसे पिचकारी छूट रही हो। पेट में सख्त दर्द होता है, रोगी को प्यास बेहद लगती है, ठंडा पानी मांगता है। दस्त भारी-भारी होते हैं, जल्दी-जल्दी होते हैं: दस्तों के समान कय जल्दी नहीं होती। रोगी के माथे पर ठंडा पसीना आता है, रोगी अत्यन्त कमजोर हो जाता है, मुर्दे के समान बिस्तर से लग जाता है, सारा शरीर बर्फ के समान ठंडा हो जाता है, रोगी को ऐसा लगता है मानो सिर पर बर्फ़ का टुकड़ा रखा हुआ है। यह ठंडक हैजे के रोगियों में पायी जाती है, हैजे की तीनों दवाओं-कैम्फर, वेरेट्रम, क्यूप्रम-में भी पायी जाती है, परन्तु जैसा हमने ऊपर लिखा, इतनी ठंड लगने पर भी माथे पर ठंडा पसीना आना इस औषधि का अपना लक्षण है। कैम्फर में ठंडक का लक्षण मौजूद है, परन्तु पसीने का लक्षण नहीं है।
माथे पर ठंडा पसीना आना – 
वेरेट्रम एल्बम औषधि का सब से मुख्य-लक्षण माथे पर ठंडे पसीने का आना है। इस औषधि की हैजे में विशेष प्रसिद्धि है, परन्तु हैजे में भी इसकी प्रसिद्धि का यही कारण है कि इसका मुख्य-लक्षण- ‘माथे पर ठंडा पसीना आना’ – हैजे में मौजूद रहता है। किसी भी रोग में अगर यह लक्षण हो, तो इस औषधि को विचार-कोटि में रखना ही होगा। खांसी, दमा, हैजा, ब्रोंकाइटिस, न्यूमोनिया, टाइफॉयड, कब्ज – कोई भी रोग क्यों न हो, अगर उस में माथे पर ठंडा पसीना आने का लक्षण मौजूद है, तो इस औषधि से लाभ होगा।



इस औषधि में ठंडक आश्चर्यजनक रूप में पायी जाती है। अगर किसी रोग में यह औषधि रोग को ठीक करेगी, तो रोग के साथ ठंडक का होना अवश्य जुड़ा होगा। शरीर बिल्कुल ठंडा, शरीर से जो स्राव निकले वे ठंडे, रोगी बिल्कुल नि:सत्व, शक्तिहीन, अत्यन्त ठंडा, गर्मी का नामोनिशान नहीं, होंठ इतने ठंडे कि नीले पड़ जायें, अंगुलियां भी ठंड के कारण नीली, शरीर में रक्त इतना ठंडा मानो बर्फ का पानी नाड़ियों में दौड़ रहा हो, सिर ठंडा, हाथ-पैर इतने ठंडे मानो रोगी मरा पड़ा हो, मानो सिर पर बर्फ का टुकड़ा पड़ा हो, इस ठंडक में भी आश्चर्य की बात यह है कि माथा ठंडे पसीने से तर-शरीर के किसी अंग में गर्मी नहीं दिखाई पड़ती।

हैजे में वेरेट्रम एल्बम, कैम्फर और क्यूप्रम की तुलना – 
हम कैम्फर और क्यूप्रम के प्रकरण में लिख आये हैं कि 1831 में, जब हनीमैन 76 वर्ष के थे, युरोप में हैजे का प्रकोप हुआ। तब तक हनीमैन के सामने हैजे का कोई मरीज नहीं आया था। रोग के लक्षणों के आधार पर उन्होंने कहा कि इस रोग के लक्षण तीन औषधियों में पाये जाते हैं – कैम्फर, क्यूप्रम तथा वेरेट्रम एल्बम उनका कथन था कि हैजे के लक्षण जब पहले-पहल प्रकट हों – कय, दस्त आदि-तब सब से प्रथम औषधि कैम्फर है। इसका प्रभाव बहुत क्षणिक होता है, इसलिये शुरू-शुरू में हर पांच मिनट के अन्तर से स्पिरिट ऑफ़ कैम्फर के कुछ बून्द तब तक देते रहना चाहिये जब तक शरीर में गर्मी न आ जाय। इन तीनों औषधियों के लक्षणों की तुलना निम्न है जिस से स्पष्ट होता है कि किस औषधि में कौन-सा लक्षण सर्व-प्रधान है; हैजे के कय-दस्त आदि लक्षण तो तीनों में रहते ही हैं।
कैम्फर वेरेट्रम क्यूप्रम
मुख्यतम लक्षण शरीर का ठंडा होना है मुख्यतम लक्षण भारी-भारी दस्त कय है मुख्यतम लक्षण ऐंठन का होना है
नीला पड़ जाने का लक्षणों में दूसरा स्थान है नीला पड़ जाने का लक्षणों में दूसरा स्थान है रोगी नीला इसमें भी पड़ता है
कय-दस्त थोड़े होते हैं – इस में खुश्क हैजा होता है ठंडा पड़ जाने का लक्षणों में तीसरा स्थान है कय-दस्त इसमें भी आते है
हैजे में आर्सेनिक – 
जिन तीन औषधियों की हैजे के लक्षणों में हमने ऊपर जिक्र किया, उनके अतिरिक्त आर्सेनिक में भी हैजे के-से लक्षण हो सकते हैं। उन लक्षणों के अलावा बेचैनी और जलन-ये दो लक्षण और दो जुड़ जायें, तो आर्सेनिक का क्षेत्र आ जाता है। इस में धुले हुए चावलों के पानी के-से दस्त नहीं होते, दस्तों का रंग काला सा होता है, परिमाण थोड़ा होता है और वे बदबूदार होते हैं।
हैजे में कार्बोवेज – 



हैजे में जब कय और दस्त बन्द हो जायें, फिर भी अगर रोगी ढहता चला जाय, शक्ति क्षीण होती जाय, पेट में हवा भर जाये, रोगी मृतक समान हो जाये, मृत्यु का बर्फीला पंजा रोगी को पकड़ता दीखे, तब कार्बोवेज देना चाहिए। है, पसीना नहीं

हैजे के प्रतिरोधक के तौर पर वेरेट्रम –
 कई चिकित्सकों का कहना है कि हैजे के शुरू-शुरू के लक्षणों में ज़ब रोगी को दस्त आने लगे, कय हो, और माथे पर ठंडा पसीना आये, तब इस औषधि को ‘प्रतिरोधक’ के तौर पर देने से हैजा अपना उग्र रूप धारण नहीं करता और रोग हैजे में परिणत नहीं होता।
 हैजे के प्रतिरोधक के तौर पर कैम्फर – 
हनीमैन ने हैजे के लक्षणों की शुरूआत में कैम्फ़र को ‘प्रतिरोधक’ के तौर पर देने की सिफारिश की है। कैम्फर का विशेष-क्षेत्र सूखे हैजे (Dry cholera) में है, रोग का आक्रमण अचानक और एकदम होता है, और रोगी का बल एकदम लुप्त होता जाता है।
वेरेट्रम का पागलपन-
हर समय कुछ-न-कुछ करते रहना, कुछ नहीं तो कपड़े फाड़ देना, घुटने टेक कर घंटों प्रार्थना करना – रोगी हर समय कुछ-न-कुछ करते रहना चाहता है, अगर कुछ भी करने.को न हो, तो कपड़े ही फाड़ने लगता है, घुटने टेक कर घंटों प्रार्थना करता है, प्रार्थना भी इतनी जोर से करता है कि कई घर दूर उसकी आवाज़ सुनाई देती है। वह समझता है कि वह कोई महान् अवतार है, दुनिया को पुकार-पुकार कर कहता है कि अपने पापों का प्रायश्चित करो। बड़े-बड़े लेक्चर झाड़ता है। सोचता है कि दुनियां भस्म हो जानेवाली है। कभी-कभी गन्दे गीत गाता है, अपने को नंगा कर लेता है।
शक्ति – 6, 30, 200 (दस्तों में 6 शक्ति से नीचे मत दो)
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