Thursday, June 22, 2017

जलोदर(ascites)) के आयुर्वेदिक होम्योपैथिक घरेलू उपचार


उदरगुहा में द्रव संचय होकर उदर (पेट) का बड़ा दिखना जलोदर (Ascites) कहलाता है। यह अशोथयुक्त (Noninflammatory) होता है। यह रोग नही बल्कि हृदय, वृक्क, यकृत इत्यादि में उत्पन्न हुए विकारों का प्रधान लक्षण है। यकृत के प्रतिहारिणी (portal) रक्तसंचरण की बाधा हमेशा तथा विशेष रूप से दिखाई देनेवाले जलोदर का सर्वसाधारण कारण है। यह बाधा कर्कट (Cancer) और सूत्रणरोग (Cirrhosis) जैसे यकृत के अन्दर कुछ विकारों में तथा आमाशय, ग्रहणी, अग्न्याशय इत्यादि एवं विदर (Fissure) में बढ़ी हुई लसीका ग्रंथियों जैसे यकृत के बाहर के कुछ विकारों में प्रतिहारिणी शिराओं पर दबाव पड़ने से उत्पन्न होती है।
  जलोदर रोग में इंसान के पेट के अंदर अधिक मात्रा में पानी भर जाता है और पानी किसी भी तरह से यानि मुख या मूत्र के मार्ग से बाहर नहीं आ पता है और फिर रोगी को चलने.फिरने और उठने-बैठने में बहुत दर्द होता है। जलोदर रोग में रोगी का पेट फूल जाता है। जलोदर अपने आप में कोई रोग नहीं है। यह गुर्दे की बीमारी, दिल की बीमारी, प्लीहा रोग और रक्तवाहिकाओं आदि बीमारियों के होने का लक्षण है। इस रोग में इंसान के पेडू में दर्द होता रहता है। वैदिक वाटिका आपको कुछ घरेलू नुस्खे बता रही है जससे जलोदर रोग से बचा जा सकता है।
जलोदर रोग का घरेलू उपचार
आधा कप पानी में पच्चीस ग्राम करेलों का रस मिलाकर रोज तीन बार सेवन करने से जलोदर रोग ठीक हो जाता है।
*ढ़ाई सौ ग्राम पानी में 25 ग्राम चने डालकर इसे उबाल लें। जब आधा पानी बच जाए तब इसे छाने और दो सप्ताह तक इस पानी को पीते रहें। इससे जलोदर रोग पूरी तरह से ठीक हो जाता है। यह बहुत कारगर घरेलू नुस्खा है।
*गर्मियों के मौसम में रोज खरबूजे का सेवन करने से जलोदर रोग ठीक होता है।
*जलोदर की समस्या से ग्रसित इंसान को नियमित रूप से गाजर का जूस पीना चाहिए।
*आधा कप पानी में मूली के पत्तों का रस मिलाकर तीन टाइम पीते रहने से जलोदर रोग से मुक्ति मिलती है।
काली मिर्च, सौंठ और पीपली का थोड़ा-थोड़ा चूर्ण को छाछ में डालकर पीने से जलोदर की बीमारी ठीक होती है।
*खाना खाने के बाद हमेशा पचास ग्राम की मात्रा में गुड़ खाते रहने से जलोदर की बीमारी में फायदा मिलता है।



एक सरल घरेलू नुस्खा है सुबह और शाम दो.दो आम खाने से जलोदर रोग ठीक हो सकता है।

*डेढ़ सौ ग्राम पानी में लहसुन के रस की आठ बूंदें मिलाकर पीने से जलोदर रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है।
*कुछ दिनों तक लगातार बीस ग्राम गुड में दस ग्राम अदरक के रस को मिलाकर खाने से जलोदर रोग ठीक हो जाता है।
*गौमूत्र मे अजवाइन को 24 घंटों के लिए भिगों लें और इसे सुखाकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सुबह.शाम लेते रहने से जलोदर शांत हो जाता है।
*प्याज को कच्चा चबाने से पेशाब की रूकावट ठीक हो जाती है और पेशाब भी खुलकर होती है।
पेट मे पानी भर जाने का होम्योपैथिक  इलाज -

आर्सेनिक 30, 200- 
रोगी कमजोर होता जाये, प्यास तो ज्यादा लगे पर पानी कम पीये, रात को ऐसा लगे कि साँस बंद होने वाली है, बेचैनी रहे, रोगी बिस्तर छोड़कर भागना चाहे तो देनी चाहिये ।

चायना 30, 200– 
यकृत या प्लीहा की बीमारी के कारण रोग हुआ हो, शोथ भी हो तो देनी चाहिये ।
आर्सेनिक 30, 200- 
रोगी कमजोर होता जाये, प्यास तो ज्यादा लगे पर पानी कम पीये, रात को ऐसा लगे कि साँस बंद होने वाली है, बेचैनी रहे, रोगी बिस्तर छोड़कर भागना चाहे तो देनी चाहिये ।
चायना 30, 200– यकृत या प्लीहा की बीमारी के कारण रोग हुआ हो, शोथ भी हो तो देनी चाहिये ।
सल्फर 30, 200- 
किसी भी चर्म-रोग के दब जाने के कारण रोग पैदा हो जाये, शरीर की त्वचा गंदी-सी लगे, चेहरे पर सहज ही पसीना आ जाये, नाड़ी तेज चले, रोगी को तन्द्रा बनी रहे, विना दर्द का अतिसार हो तो दें।



एसिड फ्लोर 6, 30–
 व्हिस्की पीने से रोग हुआ हो जिसमें यकृत कड़ा और बड़ा हो जाये तो लाभप्रद है ।
एपोसाइनम Q, 200– 
रोग के साथ में पाकस्थली में उत्तेजना, पानी पीते ही वमन हो जाना, कीचड़ की भाँति का मूत्र होना, अतिसार हो, शरीर में किसी भी प्रकार का शोथ ही तो देनी चाहिये ।
सेनिसियो 30- 

जलोदर के कारण पेट बहुत कड़ा हो जाये, मूत्र लाल रंग का हो जो कभी कम और कभी अधिक मात्रा में ही, निम्नांगों में शोथ हो तो देनी चाहिये ।
एपिस मेल 30, 200-
 मूत्र अत्यधिक मात्रा में हो पर प्यास नहीं लगे, शरीर में स्थान-स्थान पर डंक मारने जैसा दर्द और जलन हो तो यह दवा बहुत लाभकारी है
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