Sunday, June 18, 2017

किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार



   किडनी हमारे शरीर की सफाई करती हैं जिसमे मुख्या तौर पर ये क्रिएटिनिन और यूरिया शरीर से यूरिन के ज़रिये बाहर निकालती हैं, मगर हमारी दिनचर्या और बिगड़ती आदतो के कारण ये अपनी कार्य क्षमता खो देती हैं जिस कारण से इन ज़हरीले तत्वों को शरीर से बाहर नहीं निकाल पाती और हमको भयंकर रोग लग जाते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे नुस्खे जिन से आपकी किडनी बिलकुल सही काम करने लग जाएगी। आप धैर्यपूर्वक इनका उपयोग करे। और दुसरो को भी बताये।
   किडनी का क्रिएटिनिन और यूरिया का लेवल अगर बढ़ जाए तो आप कुछ उपचार करे जो बिलकुल निर्दोष हैं और 90% मरीजों को फायदा देते हैं।
*चीनी और सफ़ेद नमक बिल्कुल बंद कर दे इसकी जगह शक्कर और सेंधा नमक इस्तेमाल करे।
सुबह खाली पेट लौकी का जूस निकाले 5-5 पत्ते तुलसी और पोदीने के डाल कर और इसको पिए।
*100 ग्राम हरड़, 200 ग्राम बहेड़ा, और 300 ग्राम आंवला, इन सब का चूर्ण मिक्स करोगे तो ये त्रिफला चूर्ण बन जाएगा, अब इसमें 100 ग्राम गोखरू, और 300 ग्राम भूमि आंवला चूर्ण मिक्स कर ले। इस चूर्ण को 1-1 (5 gram) चम्मच सुबह शाम गुनगुने पानी के साथ ले।

*भोजन में अलसी के तेल का इस्तेमाल करे।
*इसके साथ में आप सुबह नाश्ते के पहले ज्वार का काढ़ा बना कर पिए। 10 ग्राम ज्वार को एक गिलास पानी में डाल कर उबाले आधा रहने पर इसको पिए।

*दिन में एक समय पीपल के 15 पत्ते ले इनको कूट कर 2 गिलास पानी में उबाले, आधा रहने पर इसको छान कर पिए। नाश्ते के आधे घंटे बाद ये करे।
*गेंहू के जवारो और गिलोय का रस



आवश्यक सामग्री।

गेंहू के जवारे (गेंहू घास) का रस
गिलोय(अमृता) का रस।
गेंहू की घास को धरती की संजीवनी के समान कहा गया है, जिसे नियमित रूप से पीने से मरणासन्न अवस्था में पड़ा हुआ रोगी भी स्वस्थ हो जाता है। और इसमें अगर गिलोय(अमृता) का रस मिला दिया जाए तो ये मिश्रण अमृत बन जाता है। गिलोय अक्सर पार्क में या खेतो में लगी हुयी मिल जाती है।
*गेंहू के जवारों का रस 50 ग्राम और गिलोय (अमृता की एक फ़ीट लम्बी व् एक अंगुली मोटी डंडी) का रस निकालकर – दोनों का मिश्रण दिन में एक बार रोज़ाना सुबह खाली पेट निरंतर लेते रहने से डायलिसिस द्वारा रक्त चढ़ाये जाने की अवस्था में आशातीत लाभ होता है।
इसके निरंतर सेवन से कई प्रकार के कैंसर से भी मुक्ति मिलती है। रक्त में हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट्स की मात्रा तेज़ी से बढ़ने लगती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत बढ़ जाती है। रक्त में तुरंत श्वेत कोशिकाएं (W.B.C.) बढ़ने लगती हैं। और रक्तगत बिमारियों में आशातीत सुधार होता है। तीन मास तक इस अमृतपेय को निरंतर लेते रहने से कई असाध्य बीमारियां ठीक हो जाती हैं।
इस मिश्रण को रोज़ाना ताज़ा सुबह खाली पेट थोड़ा थोड़ा घूँट घूँट करके पीना है। इसको लेने के बाद कम से कम एक घंटे तक कुछ नहीं खाएं।
* नीम गिलोय की तीन अंगुली जितनी डंठल को पानी में उबालकर, मसल छानकर पीते रहने से डायलिसिस वाले रोगी को बहुत लाभ मिलता है।
*एक टाइम के भोजन में सहजन की फली नियमित खाए। और भोजन में कड़ी पत्ता ज़रूर डाले। भोजन में दही का इस्तेमाल ज़रूर करे और दही में सेंधा नमक ज़रूर डाले।
* शाम के खाने के बाद पुनर्नवा का काढ़ा बना कर पिए। 5 ग्राम पुनर्नवा एक गिलास पानी में डाल कर उबाले और आधा रहने पर इसको छान कर पी ले।
इसके साथ में आपको सुबह जल्दी उठ कर कपाल भाति प्राणायाम भी करना होगा। मगर बहुत धीमी गति से।
*ये सब करने के बाद आपको रिजल्ट एक से ३ महीने में मिल जाएगा। और हमको ज़रूर अपना रिजल्ट बताये।
*अगर आप डायलिसिस पर है तो आप प्राणायाम किसी शिक्षक की देख रेख में करे।
*इसके साथ में आपको सुबह जल्दी उठ कर कपाल भाति प्राणायाम भी करना होगा।
ये सब करने के बाद आपको रिजल्ट एक से ३ महीने में मिल जाएगा।
*अगर आप डायलिसिस पर है तो आप प्राणायाम किसी शिक्षक की देख रेख में करे
*जिन लोगो का dialyasis चल रहा हैं वह भी ये प्रयोग कर सकते हैं। मगर सिर्फ डॉक्टर या वैद जी से संपर्क करने के बाद। अन्यथा नुक्सान भी हो सकता हैं।



*नीम और पीपल की छाल का काढ़ा

आवश्यक सामग्री।
नीम की छाल – 10 ग्राम
पीपल की छाल – 10 ग्राम
3 गिलास पानी में 10 ग्राम नीम की छाल और 10 ग्राम पीपल की छाल लेकर आधा रहने तक उबाल कर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को दिन में 3-4 भाग में बाँट कर सेवन करते रहें। इस प्रयोग से मात्र सात दिन क्रिएटिनिन का स्तर व्यवस्थित हो सकता है या प्रयाप्त लेवल तक आ सकता है।
गोखरू काँटा काढ़ा
250 ग्राम गोखरू कांटा (ये आपको पंसारी से मिल जायेगा) लेकर 4 लीटर पानी मे उबालिए जब पानी एक लीटर रह जाए तो पानी छानकर एक बोतल मे रख लीजिए और गोखरू कांटा फेंक दीजिए। इस काढे को सुबह शाम खाली पेट हल्का सा गुनगुना करके 100 ग्राम के करीब पीजिए। शाम को खाली पेट का मतलब है दोपहर के भोजन के 5, 6 घंटे के बाद। काढ़ा पीने के एक घंटे के बाद ही कुछ खाइए और अपनी पहले की दवाई ख़ान पान का रूटीन पूर्ववत ही रखिए।
15 दिन के अंदर यदि आपके अंदर अभूतपूर्व परिवर्तन हो जाए तो डॉक्टर की सलाह लेकर दवा बंद कर दीजिए। जैसे जैसे आपके अंदर सुधार होगा काढे की मात्रा कम कर सकते है या दो बार की बजाए एक बार भी कर सकते है।
ज़रूरत के अनुसार ये प्रयोग एक हफ्ते से 3 महीने तक किया जा सकता है। मगर इसके रिजल्ट १५ दिन में ही मिलने लग जाते हैं। अगर कोई रिजल्ट ना आये तो बिना डॉक्टर या वैद की सलाह से इसको आगे ना बढ़ाएं।

विशिष्ट सलाह-  



 
 

बढे हुए क्रिएटनिन  तथा यूरिया के लेविल को नीचे लाने और गुर्दे की कार्य क्षमता बढ़ाने में हर्बल औषधि ही  सर्वाधिक सफल होती हैं| वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है| दुर्लभ जड़ी-बूटियों से निर्मित यह औषधि कितनी आश्चर्यजनक रूप से फलदायी है ,इसकी एक केस रिपोर्ट पाठकों की सेवा मे प्रस्तुत कर रहा हूँ -




रोगी का नाम - Awdhesh 
निवासी - कानपुर 
ईलाज से पूर्व की सोनोग्राफी  रिपोर्ट







दिनांक - 26/4/2016
Urea- 55.14   mg/dl

creatinine-13.5   mg/dl 


हर्बल औषधि प्रयोग करने के 23 दिन बाद 17/5/2016 की सोनोग्राफी  रिपोर्ट  यूरिया और क्रेयटिनिन  नार्मल -





creatinine 1.34
mg/dl

urea 22  mg/dl 










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