जड़ी-बूटियों के चमत्कारिक टोटके


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    जड़ी-बूटियां बहुत चमत्कार‍िक होती है। यह जहां स्वास्थ्य के लिए हितकारी है वहीं इनके कई चमत्कारिक प्रयोग भी प्राचीनकाल से किए जाते रहे हैं। तांत्रिक कर्म में भी जड़ी बूटियों का प्रयोग किया जाता है और इसके चमत्कारिक लाभ का दावा किया जाता है।
हम आपको बताने वाले हैं ऐसी जड़ी-बूटियों के ऐसे 10 प्रयोग के बारे में जिनको जानकर आप सचमुच ही हैरान रह जाएंगे। आपके जीवन की कोई भी समस्या हो उसका समाधान तुरंत ही हो जाएगा। धन, यक्ष, कीर्ति, विजय, शां‍ति, पदोन्नती, कर्जमुक्ति तो पाएंगे ही साथ ही हर तरह के संकटों से भी मुक्त हो जाएंगे।
धन-समृद्धि हेतु
* शंखपुष्पी की जड़:- 

शंखपुष्पी की जड़ रवि-पुष्य नक्षत्र में लाकर इसे चांदी की डिब्बी में रख कर घर की तिरोरी में रख लें। यह धन और समृद्धि दायक है।
*हरसिंगार का बांदा:- 
हरसिंगार के बांदे को लाल कपड़े में लपेटकर तिजोरी में रखेंगे तो धन का अभाव समाप्त हो जाएगा।
* मदार की जड़ :

 रविपुष्प नक्षत्र में लाई गई मदार की जड़ को दाहिने हाथ में धारण करने से आर्थिक समृधि में वृद्धि होती हैं
* बहेड़ा की जड़ : 
पुष्य नक्षत्र में बहेड़ा वृक्ष की जड़ तथा उसका एक पत्ता लाकर पैसे रखने वाले स्थान पर रख लें। इस प्रयोग से घर में कभी भी दरिद्रता नहीं रहेगी।



* बरगद का पत्ता : 
अश्लेषा नक्षत्र में बरगद का पत्ता लाकर अन्न भंडार में रखें। भंडार हमेश भरा रहेगा। इसके अलाव धन हेतु बरगद अथवा बड़ के ताजे तोड़े पत्ते पर हल्दी से स्वास्तिक बना कर पुष्य नक्षत्र में घर में रखें।
* दूधी की जड़ : 
सुख की प्राप्ति के लिए पुनर्वसु नक्षत्र में दूधी की जड़ लाकर शरीर में लगाएं।
* धतूरे की जड़ : 
धतूरे की जड़ के कई तां‍त्रिक प्रयोग किए जाते हैं। इसे अपने घर में स्थापित करके महाकाली का पूजन कर 'क्रीं' बीज का जाप किया जाए तो धन सबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

अर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार

*सफेद पलाश का पौधा : 
पलाश अक्सर पीला और सिंदूरी होता है, लेकिन सफेद पलाश बहुत ही दुर्लभ माना गया है। लोगों का मानना है कि यह फूल चमत्कारी होता है। लोग इसे श्रद्घा और विश्वास के साथ घर लाकर पूजन कक्षbमें स्थापित करते हैं। तंत्र शास्त्र में इस वृक्ष के फूल से यंत्र बनाने का प्रयोग बताया गया है, जो धन लक्ष्मी के लिए कारगर बताया गया है।
*श्वेत अपराजिता : 
श्वेत अपराजिता का पौधा दरिद्रनाशक माना जाता है। श्वेत आंकड़ा, शल और लक्ष्मणा का पौधा भी श्वेत अपराजिता के पौधे की तरह धनलक्ष्मी को आकर्षित करने में सक्षम है। इसके सफेद या नीले रंग के. फूल होते हैं। जीवक नाम का पौधा भी ऐश्वर्यदायिनी होता है।
शत्रुनाश हेतु :
*चमेली की जड़ : 
अनुराधा नक्षत्र में चमेली की जड़ गले में बांधें, शत्रु भी मित्र हो जाएंगे। विष्णुकांता का पौधा भी शत्रुनाशक होता है
*नीम का बांदा:- 
नीम के बांदे को अपने दुश्मन से स्पर्श करा दें तो उसके बुरे दिन शुरू हो जाते हैं।
*मंगल्य : 
मंगल्य नामक जड़ी भी तांत्रिक क्रियानाशक होती है।
* धतूरे की जड़ : 
अश्लेषा नक्षत्र में धतूरे की जड़ लाकर घर में रखें, घर में सर्प नहीं आएगा और आएगा भी तो कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
*बरगद का बांदा:- 
यह बांदा बाजू में बांधने से हर कार्य में सफलता मिलती है और कोई आपको हानि नहीं पहुंचा सकता।
भूतादि ग्रह बाधा निवारक :  
*काले धतूरे की जड़:- 

इसका पौधा सामान्य धतूरे जैसा ही होता है, हां इसके फूल अवश्य सफेद की जगह गहरे बैंगनी रंग के होते हैं तथा पत्तियों में भी कालापन होता है। इसकी जड़ को रविवार, मंगलवार या किसी भी शुभ नक्षत्र में घर में लाकर रखने से घर में ऊपरी हवा का असर नहीं होता, सुख -चैन बना रहता है तथा धन की वृद्धि होती है।  
 *श्‍वेत, रक्त और काली गुंजा: 

यह जड़ी भूत एवं पिशाचनाशक, नजरदोष, वशीकरणनाशक मानी गई है। इसके अलावा तापसद्रुम को भी भूतादि ग्रह निवारक माना गया है। गुंजा तीन रंगों की होती है। सफेद गुंजा का प्रयोग तंत्र तथा उपचार में होता है, न मिलने पर लाल गुंजा भी प्रयोग में ली जा सकती है। परंतु काली गुंजा दुर्लभ होती है  
*अनार का बांदा:- 

बांदे को रखने से किसी की बुरी नजर नहीं लगती और न ही भूत-प्रेत आदि नकारात्मक शक्तियों का घर में प्रवेश होता है।  
* बहेड़ा की जड़ : 


पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में बेहड़े का पत्ता लाकर घर में रखें, घर पर ऊपरी हवाओं के प्रभाव से मुक्त रहेगा  
यश प्राप्ति हेतु :   
*उटकटारी:-
 यदि आप राजनीति के क्षेत्र में तरक्की करना चाहते हैं तो यह जड़ी राजयोग दाता है। इस पौधे को बहुत से लोगों ने देखा होगा। इसके प्रभाव से व्यक्ति के भाग्य में वृद्धि होती है। लेकिन इस पौधे को विधिपूर्वक लाकर पूजा करना होती है।  
रक्तगुंजा की जड़:- 
रक्तगुंजा को लगभग सभी लोग जानते होंगे। इसे रत्ती भी कहते हैं क्योंकि इसका वजन एक रत्ती के बराबर होता है और किसी समय इससे सोने की तौल की जाती थी। इस पौधे की जड़ रवि पुष्य के दिन,, किसी भी शुक्रवार को अथवा पूर्णिमा के दिन निर्मल भाव से धूप-दीप से पूजन कर उखाड़ें और घर में लाकर गाय के दूध से धो कर रख दें। इस जड़ का एक भाग अपने पास रखने से सारे कार्य सिद्ध होते हैं। मान-सम्मान में वृद्धि होती है। 
*आम का बांदा:- 

इस पेड़ के बांदे को भुजा पर धारण करने से कभी भी आपकी हार नहीं होती और विजय प्राप्त होती है।
* हत्था जोड़ी : 

यह विशेषतौर पर वशीकरण के लिए होती है। माना जाता है कि हत्था जोड़ी को अपने पास..रखने से लोग आपको सम्मान देने लगते हैं।  
करे सौदर्शनं बध्वा राजप्रियो भवेत्।
सिंही मूले हरेत्पुष्ये कटि बध्वा नृपप्रिय:।

हाथ में सुदर्शन की जड़ बांधें। तो राजा प्रिय होता है अथवा कांकरासिंही की जड़ पुष्य नक्षत्र में लाकर कमर में बाँधें तो राजा (मंत्री, अधिकारी) वश में होता है अथवा राजा का प्रिय हो जाता है।  
नजरदोष मुक्ति हेतु:   
* चंपा की जड़ : 

हस्त नक्षत्र में चंपा की जड़ लाकर बच्चे के गले में बांधें। इस उपाय से बच्चे की प्रेत बाधा तथा नजर दोष से रक्षा होगी।  
*अनार का बांदा:- 
अनार बांदे को रखने से किसी की बुरी नजर नहीं लगती और न ही भूत-प्रेत आदि नकारात्मक शक्तियों का घर में प्रवेश होता है।  
विवाह हेतु :
बेला :
 विवाह की समस्या दूर करने के लिए बेला के फूलों का प्रयोग किया जाता है। इसकी एक और जाति है जिसको मोगरा या मोतिया कहते हैं। बेला के फूल सफेद रंग के होते हैं।मोतिया के फूल मोती के समान गोल होते हैं। महिला को गुरु की जड़ और पुरुष को शुक्र की जड़ अपने पास रखनी चाहिए।    
कोर्ट कचहरी में विजय हेतु : 
* मदार की जड़ : 
कोर्ट कचहरी के मामलों में विजय हेतु आर्द्रा नक्षत्र में आक की जड़ लाकर तावीज की तरह गले में बांधें।
* हत्था जोड़ी : 
हत्था जोड़ी का मुकदमा, शत्रु संघर्ष, दरिद्रता आदि के निवारण में इसका प्रयोग किया जाता है। तांत्रिक विधि में इसके वशीकरण के उपयोग किए जाते हैं।  
वशीकरण हेतु-
* अपामार्ग के प्रयोग : 

अपामार्ग बाजीकरण के काम में आती है। इसके भी कई प्रयोग हैं। एक प्रयोग यह है कि अश्विनी नक्षत्र में अपामार्ग की जड़ लाकर इसे तावीज में रखकर किसी सभा में जाएं, सभा के लोग वशीभूत होंगे।  
* संखाहुली की जड़ :

भरणी नक्षत्र में संखाहुली की जड़ लाकर ताबीज में जड़ दे और इसे गले में पहनें तो विपरीत लिंग वाले प्राणी आपसे आकर्षित होने लगेंगे।  
 अनावश्यक भय से मुक्ति ‍:
*नागर बेल का पत्ता : 

यदि घर में किसी वस्तु की चोरी हो गई हो, तो भरणी नक्षत्र में नागर बेल का पत्ता लाकर उस पर कत्था लगाकर व सुपारी डालकर चोरी वाले स्थान पर रखें, चोरी की गईवस्तु का पला चला जाएगा।
*आंवले का बांदा:-
 आंवले का बांदा भुजा में बांधने से चोर, डाकू, हिंसक पशु का भय नहीं रहता।
* तुलसी की जड़ : 

पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में तुलसी की जड़ लाकर मस्तिष्क पर धारण करें।.इससे अग्निभय से मुक्ति मिलेगी।  

मनोकामना पूर्ती हेतु  
*अपराजिता की बेल : 

अपने घर में अपराजिता की बेल को उगाएं, उसे रोज धुप दें कर 'ॐ महालक्ष्मी वान्छितार्थ पूरय पूरय नमःका जाप 108 बार करें तो हर तरह की मनोकामना की पूर्ति होगी।

*बेर का बांदा:-
 बेर के बांदे को लाल कपड़े में बांधकर धारण कर लें। इस प्रकार आप जो भी इससे मांगेंगे वह सब आपको प्राप्त होगा।  

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि




पैरों का दर्द दूर करने के घरेलु उपचार


पैरों के दर्द से हर उम्र के लोगों को सहना पड़ता है, पैरों में दर्द की शिकायत किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है। पैरों के दर्द के दौरान आपको एड़ियो , सोल (sole) , एंक्ल (ankle) या पैरों की उंगलियों में कही भी दर्द हो सकता है। पैर दर्द के कारण, पैरों में दर्द होने के पीछे कई सारे कारण हो सकते हैं, जैसे कि असहज जूते पहनना , ज्यादा चलना , पैरों पर लंबे समय के लिए खड़े रहना , फ्रेक्चर , मिनरल्स की कमी , या मधुमेह आदि।
वैसे तो शरीर के हर अंग का अपना महत्व होता है। एक के बिना दूसरा अधूरा होता है। लेकिन बेचारे पैर को पूरे शरीर का भार उठाना पड़ता है, इसलिए कभी-कभी सारे दिन के कठीन परिश्रम के बाद पैर दर्द करने लगता है। पैर दर्द के एहसास के द्वारा यह बताना चाहता है कि अब वह थक गया है उसे आराम की ज़रूरत है। अतः पैरों का दर्द दूर करने के लिए यह है कुछ घरेलु उपचार:

 सेंधा नमक 
आधा बाल्टी गुनगुना गर्म पानी लें, उसमें दो बड़े चम्मच सेंधा नमक डालें। आप एक कुर्सी पर आराम से बैठे और बाल्टी में पैरों को दस से पंद्रह मिनट तक डुबोकर रखें। उसके बाद पैरों को नरम तौलिए से पोंछकर अच्छी तरह से लोशन लगाकर मॉश्चराइज़ कर लें।

लौंग का तेल

लौंग का तेल सिरदर्द , जोड़ों के दर्द , एथलिट फुट , नेल फंगस (nail fungas) और पैरों के दर्द में भीकारा दिलाती है। इसका इस्तेमाल कर आप आसानी से पैरों के दर्द से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं। इससे छुटकारा पाने के लिए आप अपने पैरों में लौंग के तेल की मालिश करना बिल्कुल ना भूलें। यह आपके ब्लड फ्लो और मांसपेशियों को आराम देता है। आप चाहे तो इस तेल से अपने पैरों और हिल्स दोनों के दर्द से छुटकारा पा सकते हैं। ऐसा करने से आपको आसानी से पैरों के दर्द से छुटकारा मिल जाता है। जिनके पैर काफी संवेदनशीनल या टूटा हुआ हो तो ऐसे में आप लौंग के तेल की 3 बूंदों में वरजिन ऑयल (virgin oil) या नारियल का तेल मिला कर अपने पैरों में इस्तेमाल कर सकते हैं। इन तेलों से पैरों की मसाज करने से भी काफी आराम मिलता है।आधा बाल्टी गुनगुना गर्म पानी और आधा बाल्टी ठंडा पानी लें। आप कुर्सी पर आराम से बैठें औ
र बारी बारी से पैरों को पानी में डुबोएं। उसके बाद पैरों को तौलिए से अच्छे से पोंछकर कुछ देर तक आराम करें।  बर्फ का प्रयोग-
 सारे दिन के कठिन परिश्रम के बाद अपने पैरों को आराम देने के लिए एक साफ नरम सूती के कपड़े में बर्फ लेकर उसका एक गोला बनाकर अपने पैरों पर धीरे-धीरे दस-पंद्रह मिनट तक लगायें, आपको अविश्वसनीय रूप से आराम मिलेगा और पैरों का सूजन भी धीरे-धीरे कम हो जाएगा।
अपने पैरों को बेबी ऑयल या मॉश्चराइज़र से अपने अंगूठे और अंगुलियों की मदद से गोलाकार गति में धीरे-धीरे दबाकर मालिश करें, इससे आपको आराम मिलेगा।
विनेगर का इस्तेमाल 
विनेगर का इस्तेमाल कर आप आसानी से अपने पैरों के दर्द को ठीक कर सकती हैं, इसका इस्तेमाल कर आपके पैरों का दर्द आराम से ठीक हो जाएगा। आप चाहे तो विनेगर के स्ट्रिीप्स को ठंडे और गर्म पानी में इस्तेमाल कर सकते हैं। आप इन उपचार को बनाने के लिए विनेगर और पानी के बराबर मात्रा में ले लें। एक बालटी में ठंडा पानी रख लें और दूसरे में गर्म पानी रख लें। अब अपने पैरों को गर्म पानी और विनेगर के मिक्चर में मिला लें, इसके बाद मॉइश्चराइजर को अपने पैरों में लगा लें। इसके 5 मिनट के लिए छोड़ दें, इसके बाद इस उपचार को आप इसी तरह ठंडे के साथ भी इस्तेमाल करें।
सेंधा नमक 
सेंधा नमक आपके पैरों के दर्द से छुटकारा दिलाने में काफी मददगार होती है, इसके लिए आपको अपने पैरों की सूथिंग करने की जरूरत होती हैं। अगर आपके पैर थके हुए हैं तो ऐसे में सेंधा नमक और गर्म पानी मिला लें। इसके बाद सेंधा नमक के 2 से 3 चम्मच एक पानी से भरे टब में मिला लें। अपने पैरों को 10 से 15 मिनट के लिए इस पानी में डुबाकर रखें और फिर तौलिए से पैरों को साफ कर लें। इसमें गर्मी और मैग्निशियम (magnesium) एक साथ काम करके पैरों को दर्द से छुटकारा दिलाता है। सेंधा नमक हमारे पैरों को सूखा बनाती है, इसलिए इसके बाद अपने पैरों में मॉइश्चराइजर (moisturizer) लगाना बिल्कुल ना भूलें।
आप जूते को खोलकर आराम से बैठे और उसके बाद गोल्फ की गेंद के ऊपर बारी-बारी से पैरों को रख कर धीरे-धीरे गेंद को गोलाकर गति में घुमाते हुए दबायें। इस व्यायाम से पैरों का दर्द कुछ देर के बाद कम होने लगेगा।
गर्म और ठंडा पानी 
पैरों के दर्द के लिए आप आसानी से ठंडे या गर्म पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं। गर्म पानी से पैरों का इलाज करने से ब्लड फ्लो (blood flow) को बढ़ावा मिलता हैं, वहीं ठंडे पानी से इलाज करके पैरों की सूजन कम होती है। अगर आप पैरों के दर्द से ग्रस्त हैं तो ऐसे में आप हीट पैड (heat pad) और बर्फ का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके पैर का दर्द ठीक हो जाएगा। इस के अलावा आप चाहे तो एक बालटी में ठंडा पानी भर लें और दूसरे में गर्म पानी भर लें। अब आराम से एक कुर्सी पर बैठ जाएं , अपने पैरों को पहले 2 मिनट के लिए गर्म पानी में डुबाकर रखें , इसके बाद अपने पैरों को ठंडे पानी में 10 मिनट के लिए डुबाकर रख लें। इस प्रक्रिया को दिन में 2 से 3 बार जरूर इस्तेमाल करें।
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हर्बल चिकित्सा के अनुपम आलेख-

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गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि


पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 





गुर्दे की कार्य क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोगी योग आसन





शरीर का महत्वपूर्ण अंग है गुर्दा जिसे अंग्रेजी में किडनी कहा जाता है। 150 ग्राम वजनी गुर्दे का आकार किसी बीज की भांति होता है। यह शरीर में पीछे कमर की ओर रीढ़ के ढांचे के ठीक नीचे के दोनों सिरों पर स्थित होते हैं। शरीर में दो गुर्दे होते हैं।
गुर्दे का कार्य : 
गुर्दा रक्त में से जल और बेकार पदार्थो को अलग करता है। शरीर में रसायन पदार्थों का संतुलन, हॉर्मोन्स छोड़ना, रक्तचाप नियंत्रित करने में सहायता प्रदान करता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायता करता है। इसका एक और कार्य है विटामिन-डी का निर्माण करना, जो मनुष्य की हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है।
गुर्दे के रोग : 
लगातार दूषित पदार्थ खाने, दूषित जल पीने और नेफ्रॉन्स के टूटने से गुर्दे के रोग उत्पन्न होते हैं। इस टूटन के कारण गुर्दे शरीर से व्यर्थ पदार्थो को निकालने में अक्षम हो जाते हैं। गुर्दे.के रोग का बहुत समय तक पता नहीं चलता, लेकिन जब भी कमर के पीछे दर्द उत्पन्न हो तो इसकी जांच करा लेनी चाहिए।
गुर्दे के गंभीर रोगों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है- पहला एक्यूट रीनल फेल्योर इसमें गुर्दे आंशिक अथवा पूर्ण रूप से काम करना बंद कर देते हैं परंतु लगातार उपचार द्वारा यह धीरे-धीरे पुन:कार्यशील हो जाते हैं। गुर्दे की दूसरी बीमारी क्रोनिक रीनल फेल्योर है इसमें नेफ्रॉन्स की अत्यधिक मात्रा में क्षति हो जाती है जिसके कारण गुर्दो की कार्यक्षमता उत्तरोत्तर कम होती चली जाती है।


गुर्दे की जांच : 
उक्त दो तरह के रोगों के निदान के लिए सबसे पहले रक्त यूरिया नाइट्रोजन तथा किरेटिनाइन का रक्त परीक्षण करवाना चाहिए। मूत्र जांच भी करा लेना चाहिए क्योंकि इससे यह पता चलता है कि गुर्दो की कार्यशीलता और कर्यक्षमता कैसी है।
लक्षण : 
जब गुर्दा किसी रोग से रोगग्रस्त हो जाता है तो मूत्र संबंधि तकलीफ शुरू हो सकती है। आंखों के ‍नीचे सुजन या पैरों के पंजों में सुजन हो सकती है। पाचन क्रिया भी कमजोर पड़ जाती है।
गुर्दे को मजबूत बनाए रखने के लिए योगासन:
:भुजंगासन
   भुजंग आसन करने के लिए सर्वप्रथम किसी स्वच्छ और साफ हवादार जगह का चयन कर लें। उसके बाद आसन (चटाई) बिछा कर पेट के बल लेट जाएं।
फिर दोनों परों को अच्छी तरह से लंबा कर के फैला दें। और ठोड़ी (chin) ज़मीन पर लगा दें। दोनों कुहनिया (Elbows) दोनों तरफ की पसलियों से सटी हुयी रख कर, दोनों हाथों की हथेलियाँ ज़मीन पर लगा दें। (Note- याद रहे की आप के हाथों के पंजे सीधे होने चाहिए ओर ज़मीन की और होने चाहिए, तथा दोनों कुहनिया (Elbows) सीधी आकाश की और मुड़ी होनी चाहिए )।
भुजंग आसन करते वक्त इस बात का खास ध्यान रखे की दोनों हाथों के पंजे, हमेशा दोनों कंधों के ठीक नीचे (ज़मीन पर) लगे होने चाहिए।
अब अपनें सिर को ज़मीन से लगा दें। और फिर अपनी दोनों आँखें बंद कर के सांस शरीर के अंदर भरते हुए धीरे धीरे ठोड़ी (chin) को ऊपर उठाएँ, उसके बाद गर्दन को ऊपर आकाश की तरफ उठाएँ। फिर अपनी छाती को धीरे धीरे ऊपर उठाएँ। और उसके बाद अपने पेट के भाग को धीरे धीरे ऊपर उठा लें।
अब आगे, गर्दन को ऊपर की ओर ले जाते हुए पीठ को पीछे की ओर जुकाना है (कमान की तरह )। ऊपर उठनें के लिए शरीर से ज़ोर लगाएं, हाथों पर हो सके उतना कम बल लगाएं। ध्यान में रखें की दोनों पैरों के अग्र भाग को ज़मीन पर लगा कर सामान्य गति से शरीर के अग्र भाग को ऊपर उठने का प्रयत्न करना है।

भुजंग आसन की इस मुद्रा में आने के बाद अपनी दोनों आँखें खोलें और श्वसन गति सामान्य बनाए रखें (सांस सामान्य गति से अंदर लें तथा बाहर छोड़ें)। और पहली बार में इस आसन मुद्रा को बीस सेकंड से तीस सेकंड तक बनाए रखिए। फिर ऊपर उठाए शरीर को नीचे की ओर ले जाना शुरू कर दीजिये।
शुरुआत में पेट के बल लैट कर जिस मुद्रा से आसन शुरू किया था, उस मुद्रा में लौट जाने के बाद अपनें दोनों हाथों पर अपना सिर टीका कर या ज़मीन से अपना सिर लगा कर उतनी ही देर विश्राम करें, जितनी देर तक भुजंग आसन किया हों।
भुजंगासन कर लेने के बाद शवासन कर के थकान मिटा लेनी चाहिए।

, धनुरासन-
सबसे पहले आप पेट के बल लेट जाए।
सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़े और अपने हाथ से टखनों को पकड़े।
सांस लेते हुए आप अपने सिर, चेस्ट एवं जांघ को ऊपर की ओर उठाएं।
अपने शरीर के लचीलापन के हिसाब से आप अपने शरीर को और ऊपर उठा सकते हैं।





शरीर के भार को पेट निचले हिस्से पर लेने की कोशिश करें।
जब आप पूरी तरह से अपने शरीर को उठा लें तो पैरों के बीच की जगह को कम करने की कोशिश करें।
धीरे धीरे सांस ले और धीरे धीरे सांस छोड़े। अपने हिसाब से आसन को धारण करें।
जब आप मूल स्थिति में आना हो तो लम्बी गहरी सांस छोड़ते हुए नीचे आएं।
यह एक चक्र पूरा हुआ।
इस तरह से आप 3-5 चक्र करने की कोशिश करें।
 


हलासन-

. सबसे पहले साफ़ जगह पर एक चटाई बिछा लेंं।
2. आप सर्वांगासन की तरह जमीन पर पीठ के बल लेट जाएंं।
3. अपने दोनों पैरों को एक-दूसरे से मिलाकर रखें और अपनी हथेलियों को कमर के पास सटाकर रखें।
4. अपने मुंह को आकाश की तरफ करके अपनी दोनों आखों को बंद कर लेंं।
5. अपने शरीर को एकदम से ढीला छोड़ देंं।

6. श्वास को अंदर की ओर लेते हुए अपने दोनों पैरों को धीरे-धीरे करके उठाएं।
7. जब दोनों पैरों का समकोण बन जाए तब अपने श्वास को छोड़ें।
8. सर्वांगासन की स्तिथि में आने के बाद अपने दोनों पैरों को अपने सिर के पीछे जमीन पर टिकने की कोशिश करे।
9. अपनी कमर और पीठ को पीछे झुकाने के लिए अपने दोनों हाथो का सहारा लेंं, हाथ की कोहनियों से पीठ को पीछे जमीन से लगा कर रखें।
10.फिर अपनी पीठ और पैर को धीरे-धीरे जमीन पर लगाना शुरू कर देंं|
11. इस आसन में घुटनों का मुड़ना नहींं होता है।








उष्ट्रासन,


उष्ट्रासन की विधि :
1. किसी खुली हवादार जगह पर एक चटाई बिछाएं।
2. दोनों पैरों को सामने की तरफ फैलाएं।
3. अब धीरे-धीरे दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर बैठें। जैसा कि वज्रासन में बैठते हैं।
4. धीरे-धीरे घुटनों के बल उपर की तरफ उठें।
5. अब दोनों हाथों को कमर पर रखकर पीछे की और आराम से झुकें।
6. पीछे कि तरफ झुकते हुए एक हाथ को ऐड़ी से लगाएं और एैसे ही दूसरे हाथ को दूसरे पैर की ऐड़ी पर।


7. ध्यान रहे एक बारी में एक ही हाथ को ऐड़ी से लगाएं। नहीं तो गिरने की संभावना अधिक होती है।
8. सिर को पीछे की ओर झुकाएं।
9. इस आसन में थोड़ा रूकने का प्रयास करें।
10. अब धीरे-धीरे क्रम में वापस पहली वाली अवस्था में वापस आएं।

पश्चिमोत्तनासन-
पश्चिमोत्तनासन करने की विधि -
सबसे पहले आप जमीन पर बैठ जाएं।
अब आप दोनों पैरों को सामने फैलाएं।
पीठ की पेशियों को ढीला छोड़ दें।
सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर लेकर जाएं।
फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुके।
आप कोशिश करते हैं अपने हाथ से उँगलियों को पकड़ने का और नाक को घुटने से सटाने का।





धीरे धीरे सांस लें, फिर धीरे धीरे सांस छोड़े
और अपने हिसाब से इस अभ्यास को धारण करें।
धीरे धीरे इस की अवधि को बढ़ाते रहे।
यह एक चक्र हुआ।
इस तरह से आप 3 से 5 चक्र करें।
त्रिकोणासन
त्रिकोणासन(Trikonasana) योग करने के नियम
सबसे पहले एक समतल स्थान पर अपने दोनों पैरों में कुछ फासला रखकर सीधे खड़े हो जाये।
*अपने दाहिने पैर को दायीं तरफ मोड़कर रखे।
* अपने कंधो की ऊंचाई तक अपने दोनों हाथों को बगल में फैला ले।
अब धीरे-धीरे साँस ले और दांयी तरफ झुके। झुकते समय अपनी नजरो को सामने की तरफ रखे।
*अब दायें हाथ से अपने दायें पैर को छूने की कोशिश करें|





*इसअवस्था में आपका बायाँ हाथ सीधा आकाश की ओर रखे और नजरे अपने बाये हाथ की उंगलियों की तरफ रखे।
*अब सामान्य अवस्था में वापिस आकर बांये हाथ के द्वारा समान क्रिया करें|
* ऐसे कम से कम 20 बार करे।
*शरीर उठाते समय सांसों को अन्दर ले और झुकते समय सांसों को छोड़े।

अंर्धचंद्रासन
अर्ध चंद्रासन शरीर की सभी माँसपेशियों में एकसाथ खिंचाव लाता है. यह आसन शरीर को सुगठित बनाने और अतिरिक्त चर्बी को घटाने में भी सक्षम है.
इसके अतिरिक्त कोई ध्यानात्मक आसन भी करना चाहिए. वीरासन ऐसा आसन है जिसके अभ्यास से अनचाहे विचारों को कम किया जा सकता है. इसके अभ्यास से शारीरिक और मानसिक तनाव से भी छुटकारा पाया जा सकता है.
विधि
अर्ध चंद्रासन करने के लिए दोहरा कम्बल बिछाएं और दोनों घुटनों के बल खड़े हो जाएं. अब बाएं पैर को घुटनों से एक क़दम आगे रखें. दायाँ घुटना ज़मीन से स्पर्श करेगा और दोनों हाथ बगल में रहेंगे. यह प्रारंभिक स्थिति है.
धीरे-धीरे कमर को आगे की ओर धकेलिए. ऐसा करने से बाएं पैर की पिछली ओर जंघा के बीच का फ़ासला कम हो जाएगा परंतु एड़ी नहीं उठाएंगे. नियंत्रणपूर्वक साँस भरते हुए दोनों हाथों को पहले कंधों के सामने लेकर आएँ.
फिर सिर के ऊपर हाथों को लाएँ. बाजू सीधी रखें और गर्दन को भी पीछे मोड़ लीजिए. थोड़ी देर रुकें, पीठ और कमर में खिंचाव को महसूस करें. आकाश की ओर देखें और साँस रोक कर रखें.
इस प्रकार आपके हाथ, पीठ, कमर और पैर के बीच में अर्ध चंद्राकार बन जाएगा. इसीलिए इसे अर्ध चंद्रासन नाम दिया गया है.साँस निकालते हुए हाथों को नीचे ले आएँ और फिर से दोनों घुटनों के बल खड़े हो जाएँ. इस बार दाएँ पैर को आगे रखें और फिर से अर्ध चंद्रासन का अभ्यास करें.






पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज

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गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि



विशिष्ट परामर्श-

किडनी फेल रोगी के बढे हुए क्रिएटनिन के लेविल को नीचे लाने और गुर्दे की क्षमता  बढ़ाने  में हर्बल औषधि सर्वाधिक सफल होती हैं| इस हेतु वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है| दुर्लभ जड़ी-बूटियों से निर्मित यह औषधि कितनी आश्चर्यजनक रूप से फलदायी है ,इसकी कुछ केस रिपोर्ट पाठकों की सेवा मे प्रस्तुत कर रहा हूँ -







इस औषधि के चमत्कारिक प्रभाव की एक लेटेस्ट  केस रिपोर्ट प्रस्तुत है-

रोगी का नाम -     राजेन्द्र द्विवेदी  
पता-मुन्नालाल मिल्स स्टोर ,नगर निगम के सामने वेंकेट रोड रीवा मध्यप्रदेश 
इलाज से पूर्व की जांच रिपोर्ट -
जांच रिपोर्ट  दिनांक- 2/9/2017 
ब्लड यूरिया-   181.9/ mg/dl
S.Creatinine -  10.9mg/dl






हर्बल औषधि प्रारंभ करने के 12 दिन बाद 
जांच रिपोर्ट  दिनांक - 14/9/2017 
ब्लड यूरिया -     31mg/dl
S.Creatinine  1.6mg/dl








जांच रिपोर्ट -
 दिनांक -22/9/2017
 हेमोग्लोबिन-  12.4 ग्राम 
blood urea - 30 mg/dl 

सीरम क्रिएटिनिन- 1.0 mg/dl
Conclusion- All  investigations normal 




 केस रिपोर्ट 2-

रोगी का नाम - Awdhesh 

निवासी - कानपुर 

ईलाज से पूर्व की रिपोर्ट






दिनांक - 26/4/2016

Urea- 55.14   mg/dl

creatinine-13.5   mg/dl 


यह हर्बल औषधि प्रयोग करने के 23 दिन बाद 17/5/2016 की सोनोग्राफी  रिपोर्ट  यूरिया और क्रेयटिनिन  नार्मल -




creatinine 1.34 
mg/dl

urea 22  mg/dl







हृदय रोगों मे उपकारी है मूँगफली





   मूंगफली सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है, यह तो सभी जानते हैं लेकिन क्‍या आप यह बात जानते हैं कि इससे आप लंबी और सेहतमंद जिंदगी पा सकते हैं। एक अध्‍ययन के अनुसार, इसके सेवन से दिल के दौरे और स्‍ट्रोक की आशंका को कम किया जा सकता है। अमेरिका के वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी और चीन के शंघाई कैंसर संस्थान के संयुक्त अध्ययन से इस बात का खुलासा हुआ है।
पोषक तत्‍वों से भरपूर मूंगफली
मूंगफली में प्रोटीन, कैलोरी, विटामिन बी, ई तथा के, आयरन, फोलेट, कैल्शियम, नियासिन और जिंक पाया जाता है। मात्र 100 ग्राम कच्ची मूंगफली में 1 लीटर दूध के बराबर प्रोटीन होता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा 25 प्रतिशत से भी अधिक होती है, जबकि मीट, मछली और अंडों में यह 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होती। मूंगफली में नुट्रिएंट, मिनरल, एंटी-ऑक्सीडेंट और विटामिन जैसे पदार्थ पाए जाते हैं। एक अंडे के मूल्य के बराबर मूंगफली में जितना प्रोटीन व ऊष्मा होती है, उतनी दूध व अंडे से संयुक्त रूप में भी नहीं होती।

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

मूंगफली सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है, यह तो सभी जानते हैं लेकिन क्‍या आप यह बात जानते हैं कि इससे आप लंबी और सेहतमंद जिंदगी पा सकते हैं। एक अध्‍ययन के अनुसार, इसके सेवन से दिल के दौरे और स्‍ट्रोक की आशंका को कम किया जा सकता है। अमेरिका के वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी और चीन के शंघाई कैंसर संस्थान के संयुक्त अध्ययन से इस बात का खुलासा हुआ है।
   मूंगफली में प्रोटीन, कैलोरी, विटामिन बी, ई तथा के, आयरन, फोलेट, कैल्शियम, नियासिन और जिंक पाया जाता है। मात्र 100 ग्राम कच्ची मूंगफली में 1 लीटर दूध के बराबर प्रोटीन होता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा 25 प्रतिशत से भी अधिक होती है, जबकि मीट, मछली और अंडों में यह 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होती। मूंगफली में नुट्रिएंट, मिनरल, एंटी-ऑक्सीडेंट और विटामिन जैसे पदार्थ पाए जाते हैं। एक अंडे के मूल्य के बराबर मूंगफली में जितना प्रोटीन व ऊष्मा होती है, उतनी दूध व अंडे से संयुक्त रूप में भी नहीं होती।

बिना आपरेशन प्रोस्टेट  वृद्धि की अचूक औषधि

शोध के अनुसार
  साइंस डेली में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मूंगफली पोषक तत्वों से भरा बेहद सस्ता आहार है। इसलिए दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही दिल की बीमारियों की रोकथाम में इसका सेवन प्रभावी हो सकता है। इसके लिए कम आय वाले 70 हजार अमेरिकी और 1.3 लाख शंघाई नागरिकों की जांच की गई। शोध में पाया गया कि मूंगफली खाने वाले लोग अकाल मृत्यु और दिल की बीमारियों से बचे रहते हैं।
साथ ही कुछ विशेषज्ञों का यह भी माना है कि भले ही मूंगफली दिल के लिए फायदेमंद हो, लेकिन नमक लगी मूंगफली ज्यादा मात्रा में खाने से नुकसान भी पहुंच सकता है क्योंकि इसमें कैलोरी ज्यादा होती है। इसलिए रोज थोड़ी मूंगफली ही खाई जाए तो बेहतर होगा।
अन्‍य अध्‍ययन
   फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन की मानें तो मूंगफली के सेवन से कोशिकाएं स्वस्थ रहती हैं जिससे दिल की बीमारी व कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मूंगफली में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन व अच्छी किस्म की चर्बी मोनो अनसेचुरेटेड फैट पाया जाता है। वहीं ब्रिटिश डायटिक एसोसिएशन के प्रवक्ता ने कहा कि मूंगफली सेहत के लिए फायदेमंद होती है लेकिन नमकीन मूंगफली से जरूर परहेज करना चाहिए।

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

मुट्ठीभर मूंगफली के ढेर सारे फायदे
मूंगफली खाने से रक्त में कोलेस्टॉल का लेवल कम होता है। इसमें मोनोसैचुरेटेड फैट होती है, जिसकी वजह से एक दिन में औसतन 67 ग्राम मूंगफली खाने से कुल कोलेस्टॉल लेवल में 51 फीसदी की कमी आती है। यही नहीं, इससे कम घनत्व वाले बैड कोलेस्टॉल यानी लिपोप्रोटीन कोलेस्टॉल का लेवल 7.4 फीसदी कम होता है। मूंगफली हमारी धमनियों के लिए भी अच्छी होती है।
दिल को स्‍वस्‍थ रखने के लिए खानपान के साथ नियमित व्‍यायाम भी बहुत जरूरी होता है। इसके अलावा अपने दिल की नियमित रूप से जांच भी करायें।
  इसे अंदर मौजूद हेल्दी फैट आपके हार्ट के लिए बहुत ही अच्छा है। हमारे शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। जिससे कि दिल के दौरे पड़ने की समस्या कम हो जाती है।
यह शरीर मे खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है।
  इसमे मौजूद प्रोटीन मसल बनाने मे मदद करता है। जो लोग जिम में जाते हैं या फिर एक्सरसाइज करते हैं उनको इसका सेवन करना चाहिए क्योंकि इसमें पाया जाने वाला प्रोटीन मसल बनाने में मदद करता है। और जोड़ो की दिक्कत को भी दूर करता है।

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 


हृदय रोगों मे उपकारी है मूँगफली
   यह मिनरल्स का खजाना है इसके सेवन से आप कई बीमारियों को अपने शरीर से दूर रख सकते है।
यह पाचन क्रिया को ठीक रखने मे मदद करता है।
इसका एक फायदा मेटाबोलिस्म को सही रखना भी है और कर्ब को एनर्जि मे बदलने मे मदद करता है। अगर आप का मेटाबोलिज्म सही रहता है तो आपका वजन बढ़ना और कम होना आसान हो जाता है अगर आप का फायदा होता है जब आपका मेटाबोलिज्म ज्यादा होता है तो आपका वजन कम हो जाएगा। और अगर आपका मेटाबॉलिज्म धीमा होता है तो आपका वजन बढ़ने लगेगा।
यह गर्भवती महिला मे फलोट की मात्रा को ठीक करने मे मदद करता है।
इसमे मौजूद विटामिन बी3 होता है जो दिमाग की ताकत बढ़ाता है।
यह कैंसर से बचाने मे भी मदद करता है। इससे महिलाओ मे 58 % और आदमियो मे 27% तक क्लोन कैंसर की समस्या कम हो सकती है। इसमें पाए जाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट पेट में होने वाली कैंसर से बचाता है।
यह बढ़ती उम्र से आने वाली झुरियों को रोकता है।

सोरायसिस(छाल रोग) के आयुर्वेदिक उपचार 

इसके नियमित सेवन से खून की कमी नही होती है।
हृदय रोगों मे उपकारी है मूँगफली
यह स्किन को मुलायम बनाए रखने मे मदद करता है। और इसके अलावा यह हमारी स्किन को डैमेज होने से भी बचाता है।

अगर आप इसका हर रोज एक मुट्ठी सेवन करते है तो यह आपकी हड्डियों को मजबूत रखने मे मदद करता है।
अगर आप गर्भवती हैं और अपने बच्चे को लेकर परेशान है। तो अगर आप अपनी प्रेगनेंसी से पहले और बाद में मूंगफली का सेवन करते हैं तो आपके होने वाले बच्चे को 70 परसेंट सभी बीमारियों से बचाया जा सकता है।
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अन्य उपयोगी लेख-











बवासीर ,मस्से, पाईल्स मे उपयोगी योग आसन





   पाइल्स को बवासीर और Hemorrhoids भी कहा जाता है| इसकी समस्या आजकल बहुत ही आम हो गयी है| जैसा की हम सभी जानते है की आजकल की जीवनशैली में सभी का खानपान अनियमित हो गया है, जिसके चलते कब्ज आदि की समस्या रहती है| और यही दोनों बवासीर के होने के मुख्य कारण है|
दरअसल बवासीर में मलद्वार के आसपास की नसें सूज जाती हैं| जिसके चलते मल त्यागते वक्त बहुत दर्द महसूस होता है, साथ ही मलद्वार से खून भी आता है या खुजली होती है|
इस परेशानी के चलते व्यक्ति की हालत बहुत ही ख़राब हो जाती है| बहुत से लोगो को तो इसका ऑपरेशन भी करवाना पढता है|
बवासीर से निजात के लिए योग
पर्वतासन
   पर्वतासना को माउंटेन पोस के नाम से भी जाना जाता है| यह आपके पुरे शरीर को स्ट्रेच करने के लिए बहुत अच्छा व्यायाम है| इसलिए गठिया रोगी के लिए तो यह बहुत ही अच्छा व्यायाम है| इसे करते वक्त शरीर की मुद्रा पर्वत के समान दिखती है इसलिए इसे पर्वतासन कहा जाता है| Piles Cure के लिए भी इसे करना अच्छा है|
इसे करने के लिए किसी साफ़ समतल जगह पर दरी बीछाकर खड़े हो जाये| अब अपने हाथो को ऊपर कर ले| इसके बाद सांस लेते हुए अपने पंजो को ऊपर उठाये, कुछ सेकंड्स इसी मुद्रा में बने रहे फिर निचे आ जाये|
हलासन-
   हलासन आपके पीठ की मांसपेशियों से तनाव दूर करता है| इसे करने से कब्ज, गैस, खाने का ना पचना जैसी समस्या दूर होती है| इसे करने के लिए सबसे पहले अपने पीठ के बल लेट जाये फिर अपने पैरो को धीरे धीरे उठाये|आपको सांस लेते हुए अपने पैरो को उठाना है और 90 डिग्री तक ले जाना है|
इसके बाद सांस छोड़ते हुए अपने पैरो को 120 डिग्री तक ले जाने का प्रयत्न करे| इसे बाद अपने पंजो को भूमि से लगाए| कुछ देर इसी अवस्था में बने रहे फिर वापिस आ जाये|


बालासन-

   बालासन करने में सरल तो है ही साथ ही इससे आप बवासीर की समस्या से राहत पा सकते है| दरहसल यह आपके पाचन तंत्र को सुचारू रखता है तथा कब्ज की समस्या से निजात दिलाता है| इस आसन को करने के लिए सबसे पहले तो घुटने मोड़कर बैठ जाये| अब हाथो को ऊपर उठाये और आगे जमीन को और रख दे|
अपने माथे को भी जमीन से छुए| इस वक्त आपके शरीर की मुद्रा पेट में पल रहे बच्चे के समान होती है| आपका नितम्ब दोनों एडियो के बिच होना चाहिए| इस मुद्रा में कुछ सेकंड्स बने रहे|
सर्वंगासन-

   सर्वंगासन करने से तनाव दूर होता है, साथ ही यह बवासीर के लक्षणों से भी निजात दिलाता है| इसे करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल सीधे लेट जाएं। इसके बाद अपने दोनों पैरों को साथ रखें और हाथों को कमर के पीछे रखे|


पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

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गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 



कमर दर्द मे लाभदायक योग आसन





  कमर का दर्म कमर तोड़ देता है। कमर का दर्द असहनीय होता है। पीठ दर्द, कमर दर्द, सरवाइकल और कमर से जुड़ी अन्य समस्याएं आम हो गई है। डॉक्टर भी कहते हैं कि इसका सबसे अच्छा इलाज योग (Yoga for Back pain) ही है। आओ जानते हैं कि वह कौन से आसन हैं जिससे कमर का दर्द ठीक हो जाता है। ये चार आसन है- 

1॰भुजंगासन ( bhujangasana ) : 
भुजंगासन की गिनती भी पेट के बल लेटकर किए जाने वाले आसनों में की जाती है।


इस आसन की अंतिम अवस्था में हमारे शरीर की आकृति फन उठाए सांप की तरह प्रतीत होती है इसीलिए इसे भुजंगासन कहते हैं।


2  अर्ध-मत्स्येन्द्रासन ( ardha matsyendrasana ) :
 यह आसन सबसे महत्वपूर्ण है। कहते हैं कि मत्स्येन्द्रासन की रचना गोरखनाथ के गुरु स्वामी मत्स्येन्द्रनाथ ने की थी। वे इस आसन में ध्यानस्थ रहा करते थे।


मत्स्येन्द्रासन की आधी क्रिया को लेकर ही अर्ध-मत्स्येन्द्रासन प्रचलित हुआ।

3॰ मकरासन ( makarasana ) 
: मकरासन की गिनती पेट के बल लेटकर किए जाने वाले आसनों में की जाती है। इस आसन की अंतिम अवस्था में हमारे शरीर की आकृति मगर की तरह प्रतीत होती है इसीलिए इसे मकरासन कहते हैं।


मकरासन से जहां दमा और श्वांस संबंधी रोग समाप्त हो जाते हैं वहीं यह कमर दर्द में रामबाण औषधि है।

4.हलासन ( halasana ) :
 दो आसन पेट के बल करने के बाद अब पीठ के बील किए जाने वाले आसनों में हलासन करें। हलासन करते वक्त शरीर की स्थित हल के समान हो जाती है इसीलिए इसे हलासन कहते हैं।


पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 

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विशिष्ट परामर्श-  

संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| रोगी के व्यक्तिगत लक्षणों के आधार पर  निर्मित औषधि से बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| 
|औषधि के लिए वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं|