29.5.17

होम्योपैथी में दिल का कारगर इलाज


   बीमार दिल को ठीक करने के लिए चिकित्सा के क्षेत्र में शोधरत चिकित्सकों ने कुछ उपलब्धियां अवश्य हासिल की हैं, पर अभी तक दिल पूरी तरह काबू में नहीं आ पाया है। दिल की खासियत ही कुछ ऐसी है कि जरा-सा नाम लो और धड़कनें बढ़ जाती हैं। यदि हम अपने रहन-सहन, खान-पान का ध्यान रखें और इस चकाचौंध की जिंदगी में तनावमुक्त रह सकें, तो निश्चय ही दिल को बेकाबू होने से रोका जा सकता है
हृदय संबंधी बीमारियों के मुख्य लक्षण
*डिसनिया : जरा-सा परिश्रम कर लेने पर सांस लेने में तकलीफ होने लगना, ‘श्वासकृच्छ’ हो जाना हृदय संबंधी रोगों का प्रथम लक्षण है।
*आर्थोपनिया : लेटने पर सांस लेने में कष्ट होना।
*पेरोक्सिसमल नाक्चरनल डिसनिया : रात में सोते समय फेफड़ों में द्रव इकट्ठा होने लगता है, जिस कारण रोगी बेचैनी महसूस करता है और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है।
*पल्मोनरी ओडिमा : सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ होना, सफेद, झागदार एवं खून मिला बलगम खांसने पर निकलता है।
*चाइनी स्पेक्स रेसपीरेशन (चाइनी स्पेक्स श्वसन) : एक विशेष प्रकार का पिरिआडिक श्वसन, मुख्यतया हृदयगति की न्यूनता की स्थिति में
*पेरीफेरल ओडिमा : हृदयगति की न्यूनता अथवा असफलता की स्थिति में शरीर में लवण एवं पानी के जमाव के कारण पैरों पर एवं एंकिल जोड़ पर (पैर को टांग से जोड़ने वाला जोड़) सूजन आ जाती है। रोग की तीक्ष्णता में उदरगुहा एवं फेफड़ों के छिद्रों में भी पानी भर सकता है और सूजन आ सकती है।
*सिनकोप : मूर्छित होना अथवा अचेतन अवस्था। इसमें धड़कनें धीमी एवं कम हो जाती हैं।
चेहरे पर पीलापन, पसीना धीमी नाड़ी गति एवं उल्टी महसूस होना, आंखों से दिखाई न देना एवं कानों में आवाज होने पर भी ‘सिनकोप’ की अवस्था प्रकट हो सकती है।
कार्डियक अरेस्ट – हृदयगति का रुक जाना : यह अचानक होता है और इसमें हृदय की धड़कनें पूरी तरह बंद हो जाती हैं। इसमें हृदय के निचले प्रकोष्ठ में पेशियों में अचानक ऐंठन होने लगती है और तंतु बनने लगते हैं। इसके लिए ‘पुनर्जीवन’ प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसमें हृदय के ऊपर,छाती पर तेज मालिश करना, हाथ से थपकाना एवं मुंह से मुंह सटाकर सांस देना आवश्यक है। यदि 2-3 मिनट में रक्त का प्रवाह शुरू नहीं हो पाता, तो दिमाग को गंभीर आघात पहंचता है, जिसका कोई उपचार नहीं है। ‘अरेस्ट’ की अवस्था में छाती की स्टरनम हड्डी (बीचोबीच) पर एक हलका मुक्का मारना चाहिए एवं मरीज की टांग 90 के कोण पर कर देनी चाहिए। यदि फिर भी धड़कन शुरू न हो, तो हृदय को दोनों हाथों से (बायां हाथ नीचे, दाहिना हाथ बाएं हाथ के ऊपर रखकर) छाती पर बाई तरफ नीचे की तरफ दबाना चाहिए एवं इसी प्रकार झटके देते रहना चाहिए। बीच-बीच में मुंह से मुंह सटाकर अथवा रोगी के एवं अपने मुंह के बीच किसी नली द्वारा सांस देते रहना चाहिए। इस तरह के लयबद्ध झटकों की संख्या प्रतिमिनट 60 से 100 होनी चाहिए। यदि मुंह से मुंह में सम्भव न हो, तो मुंह से नाक में सांस देनी चाहिए। 5-15 झटकों के बीच में एक बार अवश्य सांस देनी चाहिए।
चेस्टपेन : हृदय में पीड़ा, हृदय दौरे का मुख्य लक्षण है। इसे एंजाइना कहते हैं। ऐसा रूधिर प्रवाह बाधित होने के कारण होता है।
पलपिटेशन : दिल की तेज एवं बढ़ी हुई धड़कनें। परिश्रम अथवा बेचैनी की वजह से ऐसा होता है।
थकान, रात में अत्यधिक परेशान होना, खांसी।

शारीरिक जांच :
हाथ-पैरों पर नीलापन आ जाना, उँगलियों की क्लविंग (ऊतकों की कोशिकाओं में वृद्धि की वजह से उंगलियां मोटी एवं भद्दी हो जाती हैं) नाड़ी की गति की जांच आवश्यक है (रेडियल धमनी पर)। कोलेसिंग नाड़ी तीन ही हैं (अधिबुखार, थायराइड ग्रंथि का अधिक विकास एवं एओटी (हृदय के निचले प्रकोष्ठ की बड़ी धमनी) में खून के उल्टे प्रवाह की वजह से ऐसा हो सकता है, पल्ससपेराडोक्सस अर्थात् नाड़ी का कभी धीमा और कभी तीव्र होना ।
आज अधिकांश लोग हृदय की बीमारी से पीड़ित हैं जिसका सीधा संबंध हमारी जीवन शैली,खान-पान और हमारी मानसिक सोच पर निर्भर है । हृदय हमारे शरीर में रक्त को हर अंग तक पहुंचाता है ।
   शरीर के लिए जरूरी पोषण और प्राणवायु हमें रक्त के द्वारा प्राप्त होती है । हृदय का दाहिना भाग शरीर से इकट्ठा किया रक्त प्राप्त कर उसे फेफड़ों तक पहुंचाता है ।रक्त फेफड़ों से प्राणवायु प्राप्त कर हृदय के बांए भाग में एकत्र होता है ।हृदय का बांया भाग इस प्राणवायु रक्त को हमारे शरीर के हर एक अंग तक पहुंचाकर उसे पोषित करता है ।
LEFT VENTRICULAR FAILURE: इसके कुछ मुख्य कारण हैं -
*शराब का अत्यधिक सेवन
*हृदय की मांसपेशियों का संक्रमण
*उच्च रक्त चाप
*हाइपोथायराइड
*हृदय की धमनियों का पतला होना
RIGHT VENTRIGULAR FAILURE:-इसके कुछ मुख्य कारण हैं -
*उच्च रक्त चाप की वजह से हृदय के दाहिने भाग पर ज्यादा दबाव पड़ता है ।
*हृदय के बांये भाग के काम न करने की वजह से दाहिने भाग पर भी असर पड़ता है ।
*हृदय की धमनियों में रुकावट या पतला होना ।
*सांस लेने में तकलीफ,कमजोरी,पांव में सूजन आना।
MYOCARDIAL INFARCTION :- शोधगलन - आमतौर पर दिल के दौरे के रूप में जाना जाता है । दिल के कुछ भागों में रक्त संचार में बाधा होती है और दिल की कोशिकाएं मर जाती हैं ।
लक्षण- सांस की तकलीफ,मिचली,उल्टी,घबराहट,पसीना और चिंता/अचानक छाती में दर्द(बांए हाथ या गर्दन के बांए ओर)
कारण - धमनियों की दीवार में अथेरोस्टलेरीसिस(कोलिस्ट्राल) का जमाव,मानसिक तनाव,शारीरिक परिश्रम ,अधिक शराब का सेवन,मोटापा,उच्च रक्त चाप 45 वर्ष के पुरुष और 55 वर्ष की महिलाओं में देखा गया है । खासकर वे महिलाएं जो मौखिक गर्भनिरोधक गोली का इस्तेमाल अधिक समय के लिए करती हैं ।
जांच - ईसीजी,एंजियोग्राफी,रक्त परीक्षण
बचाव-
*संतृप्त वसा के बजाय बहुसंतृप्त वसा का सेवन करना ।
*फल और सब्जियों का सेवन
*जीवन शैली में परिवर्तन,व्यायाम,रक्तचाप प्रबंधन,धूम्रपान बंद करना
*साबुत अनाज के सेवन से भी शोधगलन को कम किया जा सकता है ।
ANGINA PECTORIS- उर:शूल - एक ऐसा रोग है जिसमें हृदय पर बांए सीने पर ठहर-ठहर कर हलकी या तीव्र पीड़ा होती है । जो कि बांए कंधे तथा बाईं बांह में फैल जाती है । दर्द थोड़े ही समय रहता है । यह दर्द भय,क्रोध आदि अनेक ऐसी ही मानसिक अवस्थाओं के कारण होता है । जिसमे हृदय को अधिक कार्य करना पड़ता है ।
कारण-


इस रोग में हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों का मार्ग संकुचित हो जाता है ।

उच्च रक्त चाप,मधुमेह,रुमेटिज्म,सिफलिस के कारण हृदय की धमनियों पर असर पड़ता है ।
हृदय रोग में होम्योपैथी द्वारा इलाज संभव है । अगर मरीज एक कुशल
होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श लेकर दवा का सेवन करता है । तो वह अपने हृदय की परेशानी में राहत पा सकता है । हृदय रो में उपयोगी कुछ मुख्य होम्योपैथिक दवाइयां इस प्रकार हैं -
जेलसेमियम (GELSEMIUM) - मरीज का यह सोचना कि अगर वह शांत बैठेगा तो उसकी हृदय की धड़कन बंद हो जाएगी इसलिए वह तेज चलना चाहता है । हाथ में दर्द के साथ कमजोरी और थकान जैसे लक्षणों में इस औषधि का प्रयोग कारगर साबित हो सकता है ।
कैक्टस,ग्रैंडीफ्लोरस (CACTUS,GRANDIFLORUS) - हृदय में प्रतीत होना कि किसी ने लोहे के पंजे में जकड़ रखा हो । हाथ में चमक के साथ दर्द । नाड़ी का तेज चलना ।
यह रूमैटिक कार्ड डाइटिस के लिए अच्छी दवा है ।
डिजीटेलिस (DIGITALIS) - नाड़ी का धीमे चलना और हृदय की मांसपेशियों की कमजोरी तनाव की स्थिति में नाड़ी का तेज होना मरीज का सोचना कि अगर वह चलेगा तो उसकी हृदय की धड़कन बंद हो जाएगी । बांए हाथ में सूनापन और कमजोरी नींद में बाधा और घबराहट जैसे लक्षणों में इस औषधि का प्रयोग कारगर हो सकता है ।
काल्मिया लैटिफोलिया (KALMIA LATIFOLIA)
*हाथ में सूनापन और हृदय के आकार में बढ़ोतरी के लिए
अच्छी दवा है जो कि रूमैटिज्म के साथ ही सांस का फूलना,दिल
की धड़कन का तेज होना जैसी समस्याओं के लिए उपयोगी दवा है ।
हृदय रोग में और भी हौम्योपैथिक दवाइयां कारगर हैं जिनका चयन मरीज की हालत देखकर कुशल चिकित्सक के द्वारा किया जा सकता है ।
एड्रीनेलीन : उच्च रक्तचाप, तेज हृदय धड़कना, हृदयगति बाधित, सांस लेने में तकलीफ, छाती में जकड़न, खिंचाव, हृदयगति थम जाने की अवस्था में 1:100 विलयन, पानी में मिलाकर हायपोडार्मिकली (त्वचा को सतह पर) देनी चाहिए, अन्यथा 2 × से 6 × शक्ति में, हृदयगति को बाधित होने से रोकने के लिए खिलाना चाहिए।



ग्लोनाइन (नाइट्रो-ग्लिसरीन)
: यह एंजाइना की प्रमुख औषधियों में है। धूप में निकलने पर सिरदर्द, भारीपन, जरा-सा परिश्रम करने पर हृदयगति अनियमित हो जाना, सांस लेने में तकलीफ होना, ऊपर चढ़ने में असमर्थ, परिश्रम से हृदय में खून का बहाव बहुत बढ़ जाता है और मूर्छा जैसी स्थिति बन जाती है, सम्पूर्ण शरीर में एवं उंगलियों के सिरों पर टपकन महसूस होना, ब्रांडी पीने पर कुछ आराम एवं धूप में, आग से, आगे झुककर बैठने से परेशानी बढ़ जाती है। यहां तक कि बाल कटाने से भी परेशानी होने लगती है। यदि छाती में दर्द हो, हृदयगति रुक जाए, मूर्छा आ जाए, शरीर पीला पड़ा हो, नाड़ी टूटती महसूस हो, तो 8-10 बूंद दवा का मूल अर्क पिलाना चाहिए, अन्यथा ऐसी आकस्मिक अवस्थाएं न हों, तो 6 x से 30 शक्ति तक की दवा नियमित लेनी चाहिए
स्पाइजेलिया : आंखों एवं सिर में दर्द, दिल की तेज धड़कन, एंजाइना, नाड़ी धीमी एवं अनियमित, चलने-फिरने पर परेशानी अधिक, मुंह से बुरी बदबू, सांस लेने में तकलीफ, गर्म पानी की इच्छा एवं पीने के बाद आराम महसूस होना, सिर ऊंचा करके दाई करवट लेट कर, अन्यथा सांस लेने में तकलीफ आदि लक्षण मिलने पर 6 × से 30 शक्ति तक दवा लेती रहनी चाहिए।
दिल का दौरा पड़ने पर ‘आर्सेनिक’ 200 व ‘नाज़ा’ 200 लेना हितकर रहता है। कुछ देर बाद ‘अर्निका’ 200 व ‘हायपेरिकम’200 की भी एक खुराक लें। ‘एमिल नाइट’ 3 शक्ति में लेना भी हितकर है।










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