Sunday, May 21, 2017

मासिक धर्म रुक जाने के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार


   


मासिक धर्म स्त्री में होने वाली एक स्वाभाविक प्रक्रिया है| यदि मासिक धर्म में अनियमितता होती है तो स्त्री के शरीर में अन्य विकार उत्पन्न हो जाते हैं| इसका कारण शरीर के भीतर किसी रोग का होना भी हो सकता है| इसके सुचारु रूप से न होने पर स्त्री जीवन भर मातृत्व सुख से वंचित रह जाती है|

मासिक धर्म के रुक जाने का कारण
शरीर में बहुत ज्यादा आलस्य, खून की कमी, मैथुन दोष, माहवारी के समय ठंडी चीजों का सेवन, ठंड लग जाना, पानी में देर तक भीगना, व्यर्थ में इधर-उधर भ्रमण करना, शोक, क्रोध, दुःख, मानसिक उद्वेग, तथा मासिक धर्म के समय खाने-पीने में असावधानी - इन सभी कारणों से मासिक धर्म रुक जाता है या समय से नहीं होता|
मासिक धर्म के रुक जाने की पहचान
गर्भाशय के हिस्से में दर्द, भूख न लगना, वमन, कब्ज, स्तनों में दर्द, दूध कम निकलना, दिल धड़कना, सांस लेने में तकलीफ, कान में तरफ-तरह की आवाजें सुनाई पड़ना, नींद न आना, दस्त लगना, पेट में दर्द, शरीर में जगह-जगह सूजन, मानसिक तनाव, हाथ, पैर व कमर में दर्द, स्वरभंग, थकावट, शरीर में दर्द आदि मासिक धर्म रुकने के लक्षण हैं|



मासिक धर्म के रुक जाने के घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं:

उलटकंबल: 
*उलटकंबल की जड़ की छाल का गर्म चिकना रस 2 ग्राम की मात्रा में कुछ समय तक रोज देने
से हर तरह के कष्ट से होने वाले मासिक-धर्म में लाभ मिलता है।
*उलटकंबल की जड़ की छाल  6 ग्राम लेकर 1 ग्राम कालीमिर्च के साथ पीसकर रख लें। इसे मासिक धर्म से 7 दिनों पहले से और जब तक मासिक-धर्म होता रहता है तब तक पानी के साथ लेने से मासिक-धर्म नियमित होता है। इससे बांझपन दूर होता है और गर्भाशय को शक्ति प्राप्त होती है।
*अनियमित मासिक-धर्म के साथ ही, गर्भाशय, जांघ और कमर में दर्द हो तो उलटकंबल की जड़ का रस 4 ग्राम निकालकर चीनी के साथ सेवन करने से 2 दिन में ही लाभ मिलता है।
*उलटकंबल की 50 ग्राम सूखी छाल को जौ कूट यानी पीसकर 500 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा तैयार करें। यह काढ़ा उचित मात्रा में दिन में 3 बार लेने से कुछ ही दिनों में मासिक-धर्म नियमित समय पर होने लग जाता है। इसका प्रयोग मासिक धर्म शुरू होने से 7 दिन पहले से मासिक-धर्म आरम्भ होने तक दें।
*उलटकंबल की जड़ की छाल का चूर्ण 4 ग्राम और कालीमिर्च के 7 दाने सुबह-शाम पानी के साथ मासिक- धर्म के समय 7 दिन तक सेवन करें। 2 से 4 महीनों तक यह प्रयोग करने से गर्भाशय के सभी दोष मिट जाते हैं। यह प्रदर और बन्ध्यत्व की सर्वश्रेष्ठ औषधि है। 
अनन्नास: 



अनन्नास के कच्चे फलों के 10 मिलीलीटर रस में, पीपल की छाल का चूर्ण और गुड़ 1-1 ग्राम मिलाकर सेवन करने से मासिक-धर्म की रुकावट दूर होती है।

अनान्नास के पत्तों का काढ़ा एक चौथाई ग्राम पीने से भी मासिक-धर्म की रुकावट दूर होती है।
बथुआ:
2 चम्मच बथुआ के बीज 1 गिलास पानी में उबालें। आधा पानी बच जाने पर छानकर पीने से रुका हुआ मासिकधर्म खुलकर साफ आता है। गरम पानी और नमक
दिन में तीन बार 2-2 ग्राम नमक गरम पानी से सेवन करना चाहिए| इससे मासिक धर्म खुल जाता है|
प्याज और गुड़
प्याज का सूप एक कप बनाएं| उसमें थोड़ा- सा गुड़ घोल लें| इस पीने से रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाएगा|
बरगद, मेथी, कलौंजी और शक्कर
बरगद की जटा, मेथी और कलौंजी - सब 3-3 ग्राम की मात्रा में लेकर मोटा-मोटा कूट लें| फिर आधा किलो पानी में सब चीजें डालकर काढ़ा बनाएं| जब पानी आधा रह जाए तो छानकर शक्कर डालकर पी जाएं|
सोंठ, गुड़, बायबिड़ंग जौ और पानी
50 ग्राम सोंठ, 30 ग्राम गुड़, 5 ग्राम बायबिड़ंग तथा 5 ग्राम जौ - सबको मोटा-मोटा कूटकर दो कप पानी में औटाएं| जब पानी आधा कप रह जाए तो काढ़े का सेवन करें| रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाएगा|



तुलसी और शहद

3 ग्राम तुलसी की जड़ का चूर्ण शहद के साथ सेवन करें|
कालीमिर्च, पीपल और शक्कर
10 ग्राम तिल, 2, ग्राम कालीमिर्च, दो नग छोटी पीपल तथा जरा-सी शक्कर-सबका काढ़ा बनाकर पीने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता है|
ग्वारपाठा
ग्वारपाठे का रस दो चम्मच की मात्रा में खाली पेट लगभग दो सप्ताह तक सेवन करें|
पपीता
कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर कुछ दिनों तक खाने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता है|
दूब
दूब का रस एक चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सुबह के समय पीने से रुकी माहवारी खुल जाती है|
कालीमिर्च और शहद
3 ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से माहवारी ठीक हो जाती है|








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