27.4.17

बेहोश होने के कारण और उपचार //unconsciousness treatment




मनुष्य की समस्त शारीरिक और मानसिक गतिविधियाँ उसकी चैतन्यता के कारण होती हैं। यदि व्यक्ति अचेत हो जाए तो उसकी सारी गतिविधियाँ ठप हो जाती हैं। मनुष्य की चैतन्यता के तार उसके दिमाग से जुड़े होते हैं। जब उसका मस्तिष्क निष्क्रिय हो जाता है तो व्यक्ति बेहोश हो जाता है। आखिर यह स्थिति क्यों बनती है और क्या है इसका उपचार, आइए देखते हैं-
लक्षण पहचानें
इससे पहले की आपको पूरी तरह चक्कर आए, आपको ऐसा महसूस होगा जैसे रोशनी कम हो रही है, शरीर हल्का हो रहा है और आस पास की ध्वनियां कम और ज्यादा महसूस होना शुरू हो जाती हैं। अगर आप इनमें से कोई भी लक्षण महसूस करते हैं तो जितने जल्दी हो सके नीचे बैठ जायें जिससे आप अपने आप को चोटिल होने से बचा सकें।
*कुछ लोगों को चक्कर आने से पहले आँखों के आगे अँधेरा छा जाता है, रंग धुंधले दिखने लगते हैं, और मितली जैसा अनुभव होने लगता है । कुछ लोगों को अपनी नज़र एवं सुनने की क्षमता मैं अंतर भी समझ मैं आता है ।

तुरंत लेट जाएँ: बेहोश होने पर सबसे ज्यादा डर गिरने पर चोटिल होने का रहता है, सामान्यतः यह ज्यादा गंभीर नहीं होता बशर्ते यह किसी बड़ी घटना के कारण न हो । । बेहोशी जैसी लगने पर अपने पैर थोड़े ऊपर (तकिये का इस्तेमाल कर सकते हैं) की ओर करके लेटें जिससे आपके पैर, हृदय की तुलना में थोड़े ऊपर हों । यह पोजीशन आपके हृदय और दिमाग की तरफ रक्त संचार बढाती है जिसकी आपको उस वक़्त जरूरत है ।
याद रखें की लेटी हुई अवस्था में भी आप बेहोश हो सकते हैं, और इस अवस्था में आप चोटिल होने से बच सकते हैं ।


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*अगर किसी वजह से लेटना संभव न हो पाए तो अपना सिर घुटनों के बीच में करें जिससे दिमाग में रक्त संचार बड़ सके । ऐसा करने से आपको कुछ वक़्त मिल सकता है जिसमें आप अपनी मदद के लिए अपने आसपास के लोगों को बुला सकते हैं और खुली हवादार जगह पर ले जाने के लिए कह सकते हैं ।
अगर संभव हो तो किसी से कहिये की आप बेहोश होने वाले हैं : अचानक से बेहोश हो जाना कभी कभी सचमुच खतरनाक हो सकता है, इसलिए बेहतर यही है कि ऐसा होने से पहले किसी की मदद ले लें । जैसे ही थोड़े बहुत लक्षण महसूस होना शुरू हों, उन्हें समझें और अपने आसपास के लोगों को मदद के लिए कहैं फिर चाहे वो कोई अज़नबी ही क्यों न हो ।
*भीड़ भरे एरिया मैं अपने आप को सम्हालना थोड़ा मुश्किल हो जाता है । इस स्थिति में सबसे पहले उस क्षेत्र से बाहर निकलें । लेकिन ज्यादा दूर नहीं जाएँ क्योंकि आपको किसी की मदद की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन दूसरी तरफ, आप नहीं चाहेंगे कि जब आप बेहोश हों या नीचे गिरें तो चारों तरफ लोग आपको घेरकर खड़े हों जायें । अगर संभव हो तो चक्कर जैसा महसूस होने पर लोगों को थोड़ा दूर होने को कहें, ऐसा करने पर वे न केवल आपको जगह देंगे बल्कि आपको चक्कर आने पर संभाल भी सकते हैं जिससे आप आगे होने वाली चोट को टाल सकते हैं ।
*अगर बेहोश होने की स्थिति को टाल नहीं सकते तो दीवाल का सहारा लें: अगर ऐसी स्थिति बनती है जहाँ आपको कोई सँभालने वाला न हो और आपको लगने लगा हो कि आप खड़े खड़े बेहोश हो जाएंगे तो दीवाल का सहारा ढूंढने की कोशिश करें । ऐसा करने से कम से कम आप अपने आप को घायल होने से बचा पाएंगे ।
या, फिर कुछ मुलायम चीज़ अपने आस पास देखें जिससे गिरने पर चोट न लगे ।
अगर आप सीढ़ियों पर बीच मैं है तो अंदर की तरफ से रेलिंग पकड़ने की कोशिश करें: ऐसा करने से आप अपना बैलेंस बना पाएंगे और उसे पकड़कर धीरे धीरे ऊपर या नीचे भी जा सकते हैं ।
लेकिन, आप जहाँ कहीं भी हैं (सीढ़ी पर या कहीं और ), जल्द से जल्द सतह पर आने की कोशिश करें ।

मनोवैज्ञानिक कारण
मनुष्य में किसी चीज का डर भी बेहोशी का कारण हो सकता है, जैसे अपने सामने कोई भयानक दुर्घटना होते देखना उसकी बेहोशी का कारण बन सकता है। कई बार किसी डरावनी चीज को देखकर भी व्यक्ति बेहोशी की स्थिति में पहुँच जाता है। किसी दुखद समाचार या सदमे की वजह से भी बेहोशी हो सकती है। ऐसा प्रायः तब होता है, जब किसी प्रियजन की आकस्मिक मौत हो जाए है यदि यह दुर्घटना नजरों के सामने हुई हो तो व्यक्ति अपने होश खो देता है। ये सभी मनोवैज्ञानिक कारण हैं।

*भोजन मनुष्य की मूल आवश्यकता है। इससे शरीर क्रियाशील रहता है। लेकिन जो लोग लंबे व्रत उपवास करते हैं या समय पर भोजन नहीं लेते, वे भी बेहोशी का शिकार बन सकते हैं। मधुमेह के रोगी यदि अधिक समय तक भूखे रहें तो उनकी रक्त शर्करा का स्तर काफी गिर जाता है और वे बेहोश हो सकते हैं। तेज धूप में अधिक देर तक खड़े रहने से भी व्यक्ति बेहोश हो सकता है। यह बेहोशी स्कूली बच्चों में अधिक देखी गई है, जबकि किसी रैली या नेता के भाषण की वजह से उन्हें तेज धूप में घंटों खड़ा रहना पड़ता है, वहीं सिर पर लगी चोट बेहोशी का एक बड़ा कारण है। इसके अलावा जब किसी भी वजह से मस्तिष्क में रक्त पहुँचने में बाधा आ जाती है तो वह काम करना बंद देता है, जिससे व्यक्ति चेतना खो देता है। मस्तिष्क के अंदर रक्त का अभाव होना ही बेहोशी का मूल कारण है।
शारीरिक कारण
चिकित्सा शास्त्र की दृष्टि से व्यक्ति के बेहोश होने के कारण कुछ भिन्न हैं। इसके अनुसार जब किसी वजह से शरीर में निर्जलीकरण की स्थिति हो जाए, जिसे डिहाइड्रेशन कहते हैं तो व्यक्ति बेहोश हो सकता है। इसमें उल्टी-दस्त होना या लू लगना भी शामिल है। जब शरीर में पानी और खनिज लवणों का क्षरण गंभीर रूप से हो जाता है तो व्यक्ति बेहोशी की हालत में आ जाता है। साथ ही शुद्ध वायु का न मिलना भी बेहोशी का एक कारण हो सकता है, क्योंकि इससे व्यक्ति का दम घुट सकता है। ऐसा प्रायः बंद कमरे में रहने की वजह से होता है, जहाँ खिड़कियाँ, रोशनदान, दरवाजे सभी पूरी तरह से बंदहों। फिर अत्यधिक थकान की वजह से भी व्यक्ति बेहोश हो सकता है।
    कुछ लोग हिस्टीरिया की बीमारी से ग्रस्त रहते हैं। कभी भी उन्हें दौरा पड़ जाता है जिससे वे अपना होश खो बैठते हैं। मिरगी के दौरे की वजह से भी व्यक्ति कुछ समय तक बेहोशी की स्थिति में पहुँच जाता है। हालाँकि यह बेहोशी अल्पकाल की होती है। कई बार ब्रेन ट्यूमर की वजह से भी व्यक्ति को बेहोशी का सामना करना पड़ता है। दिमाग में आई सूजन भी बेहोशी का कारण बन सकती है। इसके अलावा मस्तिष्क में आई किसी तरह की अन्य विकृति भी इसका कारण बन सकती है। जब किसी व्यक्ति का रक्तचाप तेजी से गिर जाए और वह खतरनाक स्तर पर आ जाए तो भी व्यक्ति बेहोश हो जाता है।
बेहोशी की स्थिति से कैसे बचें
यदि आपको लगता है कि आप बेहोश होने वाले हैं तो खड़े रहने की बजाय तुरंत जमीन पर लेट जाएँ। अपने सिर को नीचा करके टाँगों को थोड़ा ऊपर उठाएँ। इससे मस्तिष्क की ओर रक्त प्रवाह बढ़ जाएगा तथा बेहोशी रुक जाएगी। यदि फिर भी बेहोशी आ गई तो जमीन पर लेटे रहने से आप चोट लगने से बच जाएँगे।
बेहोशी का प्राथमिक उपचार
यदि कोई व्यक्ति बेहोश हो गया है तो सबसे पहले उसके कपड़े ढीले कर दें ताकि उसके फेफड़ों को ऑक्सीजन लेने की पर्याप्त जगह मिल सके। उसे साँस लेने में परेशानी हो रही हो तो उसे सीधा लिटाकर उसके दोनों ओर घुटने रखकर झुक जाएँ। रोगी की नाभि पर अपना एक हाथ रखें तथा अपना दूसरा हाथ उसके हाथ पर रखें। हथेली के निचले भाग से व्यक्ति की नाभि के ऊपर की ओर तीन से पाँच बार जोर लगाएँ। यदि इससे भी कोई लाभ न हो तो रोगी को करवट दिलाकर उसके कंधों के बीच कई बार हल्के से हाथ मारें। यदि कोई व्यक्ति लू की चपेट में आकर बेहोश हो गया है तो उसे तुरंत ठंडे स्थान पर ले जाएँ तथा संभव हो तो कूलर या एसी चला दें तथा अतिरिक्त कपड़े उतार दें। उसकी साँस गति एवं नब्ज जाँचें। जरूरी हो तो कृत्रिम साँस दें।





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