Saturday, February 11, 2017

कंप्यूटर पर ज़्यादा देर तक काम करने के दुष्प्रभाव To work on the computer for too long side effects

   

  आजकल कंप्यूटर के बिना ज़िन्दगी अधूरी लगने लगी है. बहुत बड़ी जनसँख्या कंप्यूटर के सामने रोजाना बहुत से घंटे गुजारती है. चाहे स्टूडेंट हो, बिजनेसमैन हो या अकाउंटेंट हो, घर में समय काटने के लिए चैटिंग करती महिलाएं हो या विडियो गेम्स खलेते हुए बच्चे हो, सभी कंप्यूटर के सामने अपना काफी समय बिताते है, लेकिन कंप्यूटर के सामने ज्यादा बैठने से आँखों से सम्बंधित समस्याएं हो सकती हैं. ऐसी ही एक समस्या है कंप्यूटर विजन सिंड्रोम.
   इससे पीडि़त व्यक्ति की पलकें एक मिनट में 5-7 बार ही झपक पाती हैं. इस से आंखों में जलन और भारीपन हो जाता है. इस के साथ ही आंखों का पानी कम होने से आंखें सूखी महसूस होती हैं और थकान से दर्द करने लगती हैं. इस के अलावा सिर, गर्दन और कंधों में भी दर्द होने लगता है. कंप्यूटर के सामने बैठे रहने से उनकी आंख में धीरे-धीरे जलन सी महसूस होने लगती है. कुछ देर आराम करने पर थोड़ी राहत मिलती है लेकिन कंप्यूटर पर काम के लिए लौटते ही फिर से दिक्कत होने लगती है.   आज 21वीं सदी में कंप्यूटर अपनी बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है. फिर चाहे नौकरी, व्यापार, हॉस्पिटल, दुकानें, स्कूल या फिर घर ही क्यो ना हो. हर जगह कंप्यूटर की भूमिका अहम है. सीधे शब्दों में यह कह सकते है कि अगर आज के समय में आपको कंप्यूटर चलाना नही आता है तो तरक्की तो क्या नौकरी मिलना भी मुश्किल है. सिर्फ़ कंप्यूटर ही नही बल्कि मोबाइल, टेबलेट, लैपटॉप आदि आधुनिक चीज़ें इंसानों की अहम ज़रूरत बन गई है. सिर्फ़ देश-विदेशों में ही नही बल्कि गाँवों में भी इन साधनों ने अपनी पकड़ बनायें रखी है. जहाँ ये मशीने हमें सुख-सुविधायें दे रही है, जीवन को आसान और सहज बना रही है. वही दूसरी और खामोशी से हमें नुकसान भी पहुँचा रही है. देखा जायें तो पहले की तुलना में इंसान बहुत ही सक्षम हुआ है. लेकिन इस सक्षमता के पीछे इंसानों ने बहुत बड़ी कीमत अदा की है, जैसे कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक तीनों रूप में ही इंसान दिनों दिन कमजोर हो रहा है. कंप्यूटर पर लगातार बैठकर काम करने से शरीर को नुकसान होता है यह आप जानते है. लेकिन इससे क्या-क्या नुकसान है और इन परेशानियों से कैसे बचा जायें, यह हम आपको इस लेख से अवगत करायेंगे.



हाल ही ब्रिटेन में हुई एक रिसर्च ने यह दावा किया है कि अधिक समय तक एक ही मुद्रा में कंप्यूटर के सामने बैठ कर काम करने से शरीर के प्रत्येक अंग को किसी ना किसी रूप में नुकसान ज़रूर होता है. यह उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो बिना वज़ह कंप्यूटर का इस्तेमाल करते है. वे अपने स्वास्थ्य के लिए सतर्क हो जायें. कई लोग काम ख़त्म होने के बाद भी chatting, gaming, Facebook आदि पर अपना समय नष्ट करते है और बिमारियों को न्यौता देते है. कंप्यूटर से निकलने वाली हानिकारक किरणें आपकी ऑंखें और गलत तरीके से बैठने की आदत से आपकी पीठ, कमर, पैर आदि कई अंग दर्द की चपेट में आ जाते है. इसके अलावा अनिंद्रा, स्ट्रेस, उच्च-रक्तचाप, मोटापा जैसी कई गंभीर समस्या भी एक ही जगह लगातार बैठ कर काम करने की आदत से उत्पन्न होती है.
  हम यह नही कहना चाहते कि कंप्यूटर का इस्तेमाल घातक है, बल्कि यह समझाना चाहते है कि ज़रा सी सावधानी और सतर्कता के साथ कंप्यूटर का उचित उपयोग करें. जिससे आपका काम भी ना रुके और आप एक स्वस्थ जीवन भी जी सके. बस ज़रूरत है तो अपने इस आधुनिक जीवन शैली में ज़रा से परिवर्तन की, जिससे आप अपने आप को काम करते हुए भी तरोताज़ा महसूस करे.
तो आइये जाने अधिक समय तक कंप्यूटर पर काम करते रहने के दुष्प्रभावों को और सतर्कता को
लगातार कम्प्यूटर , लैपटॉप या मोबाइल पर काम करने के कारण आँखों व शरीर को नुकसान पहुंचता है। बिना आँखों को आराम दिए लगातार लंबे समय तक स्क्रीन पर आँखें गढ़ा कर काम करने से ऑंखें ख़राब हो सकती है। सामान्य तौर पर एक मिनट में 15 -18 बार पलक झपकती है। स्क्रीन देखते समय पलक इसकी आधी बार ही झपक पाती है। इस वजह से आँखों की नमी सूख जाती है। ऑंखें भारी-भारी लगने लगती है। आंख में पानी कम हो जाता है। आँखों की नमी सूख जाती है। आँखों में जलन , लाली व खुजली हो सकती है , आँखों से धुंधला दिखने लगता है। ऑंखें थक जाती है और दर्द करने लगती है। सिरदर्द होने लगता है। गर्दन और पीठ में दर्द भी हो सकता है।अगर आपकी कोई सिटींग जॉब है तो आप लगातार घंटो तक स्क्रीन पर काम नहीं करें और बीच बीच में ब्रेक लेते रहे. कंप्यूटर पर काम करते समय खास तरह का चश्मा पहनना चाहिए. अगर आंखों में किसी भी तरह की तकलीफ हो तो डाक्टर से सलाह लेने में देर न करें. कंप्यूटर पर काम करने के दौरान सीधे बैठे और अपनी आँखों को बार बार ब्लिंक करें ताकि आपकी आँखों की नमी बनी रहे.
सिर और गर्दन:-
 अधिक समय तक बैठे रहने से खून के थक्के बन जाते हैं, जो मस्तिक तक पहुँच कर स्ट्रोक का कारण बन सकते है. अधिक देर तक काम करने से सिर दर्द की समस्या हो सकती है. लेकिन हमें यह समझना होगा कि यह समस्या बिल्कुल भी साधारण नहीं है, लंबे अंतराल के पश्चात् यह समस्या माइग्रेन तथा डिप्रेशन में भी बदल सकती है. इतना ही नही लगातार सर में दर्द रहने के कारण हमारे कार्य और सोचने की क्षमता पर भी असर पड़ता है. साथ ही यह आदत गर्दन को भी हानि पहुँचाती है. दिन भर बैठे रहने के दौरान टांगों में इकट्ठा हुआ तरल गर्दन तक चला जाता है, जिसके चलते स्लीप एप्निया(नींद में सांस का रुकना) जैसी समस्या पैदा हो सकती है. इसके अलावा गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव के चलते दर्द भी हो सकता है.
* आँखों को नुकसान:-
 एक ही मुद्रा में बैठकर लगातार कई घंटे तक कंप्यूटर पर कार्य करते रहने से आँखों को हानि पहुँचती है. क्योंकि कंप्यूटर स्क्रिन से निकलने वाली नीली तरंगें आपकी आँखों को क्षति पहुँचाती है. आप कितना भी अपनी आंखों को सुरक्षा प्रदान करें किंतु ज्यादा देर तक कंप्यूटर के आगे बैठे रहने से आंखों में दर्द और आँखों का कमजोर होना तय है.



* रक्त संचार का कम होना:-
 ज्यादा देर तक कंप्यूटर के आगे बैठे रहने से सबसे पहले आपकी शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती है जिसके कारण रक्त संचार भी कम होता जाता है. यह शरीर के लिए बहुत ही ख़तरनाक हो सकता है, जिसके कारण आपको दमा, उच्च-रक्तचाप, तनाव आदि बिमारियाँ होने की आशंका रहती है.
* लंग और हार्ट पर असर:- 
यदि आप दिन में ज़्यादातर समय बैठ कर बिताते हैं तो पल्मोनरी एम्बोलिज्म यानी लंग में खून के थक्के जमने की आशंका दोगुना हो जाती है, जिसका असर दिल पर भी पड़ता है. क्‍योंकि असंतुलित जीवन शैली का अनुसरण करने वाले लोगों में लगातार चलते फिरते रहने वालों लोगों की तुलना में मधुमेह तथा हृदय रोग पैदा होने कि संभावना अधिक होती है.
* पैर, उंगलियाँ और बाँहों पर असर:-
 कई देर तक बैठे रहने के कारण पैर सुन्न हो जाते है जिस कारण रक्त प्रवाह कम हो जाता है. जिसका नुकसान पैरों की नाड़ियों को पहुँचता है. बैठे रहने की आदत से नाड़ियों पर दबाव पड़ता है. इसके अलावा इस आदत का असर बांहों पर भी पड़ता है. शारीरिक गतिविधि की कमी से उच्च-रक्तचाप व हाइपरटेंशन की समस्या उत्पन्न हो जाती है. कंप्यूटर के की-बोर्ड पर घंटों टाइप करने के कारण उँगलियों और कलाई में दर्द शुरू हो जाता है. जिससे आपका हाथ भी प्रभावित हो जाता है. अधिक समय तक कलाई को एक ही जगह पर रखकर शीघ्रता से की-बोर्ड पर टाइपिंग करते रहने से उँगलियों में सूजन, दर्द, झंझनाहट की समस्या हो जाती है.
* गलत तरीके से बैठे रहने के कारण शरीर में दर्द रहना:-
कंप्यूटर पर अधिक देर तक गलत तरीके से बैठ कर काम करने के कारण आपके शरीर में दर्द शुरू हो सकता है. यह समस्या सभी व्यक्तियों को अलग-अलग समय पर शुरू होती है, जैसे कि कुछ व्यक्तियों को शुरू के कुछ माह में तो कुछ लोगो को कुछ समय के बाद यह समस्या शुरू हो जाती है. गलत तरीके से बैठने के कारण सर में, गर्दन में तथा कंधे में दर्द रहने लग जाता है तथा रीढ़ के अंदर हल्के-हल्के दर्द के आप आदि हो जाते है.
* पीठ व पेट पर असर:लम्बे अंतराल तक बैठे रहने से पीठ पर अधिक दबाव पड़ता है. जिससे भविष्‍य में रीढ़ की हड्डी में संकुचन पैदा हो जाती है. क्योंकि दबाव के कारण मांसपेशियां कड़क हो जाती हैं और ऐसी हालत में एकदम उठना चोट का कारण बन सकता है. लगातार बैठने से पीठ के अलावा पेट पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है. ज़्यादा देर तक बैठे रहने से मोटापा और कोलोन कैंसर की समस्‍या पैदा हो सकती है.>इन सभी समस्याओं को आप ज़रा सी सावधानी और सजगता से दूर कर सकते है. नीचे दिए गये कुछ टिप्स का पालन करे.
कंप्यूटर कि स्क्रीन कलर को कंट्रास्‍ट रखें. फॉन्‍ट को गहरा और बैकग्राउंड हल्के रंग का रखे. जिससे आँखों पर अधिक ज़ोर नही पड़ेगा.



लगातार कंप्यूटर पर काम ना करे. हर 1-2 घंटे बाद कुछ मिनट का ब्रेक ले. टहल के आये, फिर फ्रेश मूड से कार्य करे|

कंप्यूटर के सामने काम करते-करते भी आप छोटी-मोटी कसरत कर सकते है जैसे कि हाथों को लंबा करना, पैरों को सीधा करके हिलाना, आँखों को कुछ क्षण के लिए बंद करके बैठना आदि|
कंप्यूटर पर काम करने के लिए एक खाश चश्‍मा आता है, जिसमें एंटी-लेयर ग्‍लास होते है. इससे आपकी आंखों की रोशनी पर दुष्प्रभाव नही पड़ेगा और आंखें हमेशा स्वस्थ रहेगी. जिन लोगों को अधिक समय तक स्क्रीन के सामने बैठने का काम पड़ता है, उन्हें इसका उपयोग जरुर करना चाहिए|
काम करते समय अधिक चकाचौंध वाली रोशनी से बचना चाहिए, ऐसी जगह काम करें जहां लाईट की सही व्‍यवस्‍था हो. बहुत ज्यादा या बहुत कम रोशनी वाली जगह पर बैठकर काम ना करे|
की-बोर्ड पर काम करते समय कलाई को सीधा रखें क्योंकि कलाई को मोड़ कर काम करने से नर्व के लिए कम जगह बचती है और उन पर दबाव पड़ता है. कोहनी को करीब 90 डिग्री पर रखना उचित है|
कुर्सी की इतनी ऊँचाई होनी चाहिए की कंप्यूटर की स्क्रीन आपकी आँखों की सीध पर हो और आपके पैर फर्श पर आयें जिससे आपका घुटना 90 डिग्री के एंगल पर और कमर को टिकाते वक्त यह एंगल 20 डिग्री अधिक हो, यानी आपकी कमर कुछ पीछे की ओर 110 डिग्री के एंगल पर हो.कंप्यूटर का आधुनिक युग में बहुत बड़ा योगदान है, इसलिए इसकी सेवा से हम वंचित नही रह सकते. क्योकि आजकल ज़्यादातर लोग अपना सभी काम कंप्यूटर पर ही करते है. अगर आप भी कंप्यूटर प्रेमी है तो इससे होने वाले दुष्प्रभाव और सावधानियों का ख्याल रखे. जिससे लंबे अंतराल तक आप बिना रुकावट के अपना काम कर पायें. इन सावधानियों के उपरांत भी अगर आपको कंप्यूटर के सामने सिटिंग में या कोई अन्य प्रॉब्लम हो रही है तो आप अतिशीघ्र अपने डॉक्टर से संपर्क करे और ईलाज करवायें|
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