Saturday, February 11, 2017

भगंदर (फिश्चुला) के लक्षण और उपचार Fistula-in-ano (Fischula) Symptoms and Treatment

    

    भगन्दर गुदा क्षेत्र में होने वाली एक ऐसी बीमारी है जिसमें गुदा द्वार के आस पास एक फुंसी या फोड़ा जैसा बन जाता है जो एक पाइपनुमा रास्ता बनाता हुआ गुदामार्ग या मलाशय में खुलता है। शल्य चिकित्सा के प्राचीन भारत के आचार्य सुश्रुत ने भगन्दर रोग की गणना आठ ऐसे रोगों में की है जिन्हें कठिनाई से ठीक किया जा सकता है। इन आठ रोगों को उन्होंने अपने प्रसिद्ध ग्रन्थ सुश्रुत संहिता में 'अष्ठ महागद कहा है।
   एनल फिस्टुला यानि भगंदर एक ऐसा रोग है जिस के इलाज में लापरवाही बरतने पर बाद में कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं जैसे गुदा यानी (Anus) में फोड़ा और सूजन आंतो में विकार या आंतों में कैंसर और रेक्टम (मलाशय) की तपेदिक आदि |
भगन्दर गुद प्रदेश में होने वाला एक नालव्रण है जो भगन्दर पीड़िका (abscess) से उत्पन होता है। इसे इंग्लिश में फिस्टुला (Fistula-in-Ano) कहते है। 
   बवासीर बहुत पुराना होने पर भगन्दर हो जाता है। जिसे अंग़जी में फिस्टुला कहते हें। इसलिए बवासीर को नज़र अंदाज़ ना करे। भगन्दर का इलाज़ अगर ज्यादा समय तक ना करवाया जाये तो केंसर का रूप भी ले सकता है। जिसको रिक्टम केंसर कहते हें। जो कि जानलेवा साबित होता है। ऐसा होने की सम्भावना बहुत ही कम होती है ।यह गुद प्रदेश की त्वचा और आंत्र की पेशी के बीच एक संक्रमित सुरंग का निर्माण करता है जिस में से मवाद का स्राव होता रहता है। यह बवासीर से पीड़ित लोगों में अधिक पाया जाता है। सर्जरी या शल्य चिकित्सा या क्षार सूत्र के द्वारा इस में से मवाद को निकालना पड़ता है और कीटाणुरहित करना होता है। आमतौर पर यही चिकित्सा भगन्दर रोग के इलाज के लिए करनी होती है जिस से काफी हद तक आराम भी आ जाता है




भगन्दर रोग के लक्षण (Fistula-in-Ano Symtopms)

मलद्वार से खून का स्राव होना
मलद्वार के आसपास जलन होना
मलद्वार के आसपास सूजन
मलद्वार के आसपास दर्द
खूनी या दुर्गंधयुक्त स्राव निकलना
थकान महसूस होना
इन्फेक्शन (संक्रमण) के कारण बुखार होना और ठंड लगना
भगन्दर रोग उत्पंन होने के पहले गुदा के निकट खुजली, हडि्डयों में सुई जैसी चुभन, दर्द, दाह (जलन) तथा सूजन आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं। भगन्दर के पूर्ण रुप से निकलने पर तीव्र वेदना (दर्द), नाड़ियों से लाल रंग का झाग तथा पीव आदि निकलना इसके मुख्य लक्षण हैं।
बार-बार गुदा के पास फोड़े का निर्माण होता
मवाद का स्राव होना
मल त्याग करते समय दर्द होना
भगन्दर रोग अधिक पुराना होने पर हड्डी में सुराख बना देता है जिससे हडि्डयों से पीव निकलता रहता है और कभी-कभी खून भी आता है। कुछ दिन बाद इसी रास्ते से मल भी आने लगता है।
नीम:
नीम की पत्तियां, घी और तिल 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर कूट-पीसकर उसमें 20 ग्राम जौ के आटे को मिलाकर जल से लेप बनाएं। इस लेप को वस्त्र के टुकड़े पर फैलाकर भगन्दर पर बांधने से लाभ होता है।
नीम की पत्तियों को पीसकर भगन्दर पर लेप करने से भगन्दर की विकृति नष्ट होती है।
गुड़:
पुराना गुड़, नीलाथोथा, गन्दा बिरोजा तथा सिरस इन सबको बराबर मात्रा लेकर थोड़े से पानी में घोंटकर मलहम बना लें तथा उसे कपड़े पर लगाकर भगन्दर के घाव पर रखने से कुछ दिनों में ही यह रोग ठीक हो जाता है। अगर गुड पुराना ना हो तो आप नए गुड को थोड़ी देर धुप में रख दे, इसमें पुराने गुड जिने गुण आ जाएंगे।
शहद:



शहद और सेंधानमक को मिलाकर बत्ती बनायें। बत्ती को नासूर में रखने से भगन्दर रोग में आराम मिलता है।

केला और कपूर-
एक पके केले को बीच में चीरा लगा कर इस में चने के दाने के बराबर कपूर रख ले और इसको खाए, और खाने के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद में कुछ भी नहीं खाना पीना।
चोपचीनी और मिस्री
भगंदर के लिए चोपचीनी और मिस्री पीस कर इनके बराबर देशी घी मिलाइए।20-20 ग्राम के लड्डू बना कर सुबह शाम खाइए। परहेज नमक तेल खटाई चाय मसाले आदि हैं। अर्थात फीकी रोटी घी शक्कर से खा सकते हैं। दलिया बिना नमक का हलवा आदि खा सकते हैं। इससे 21 दिन में भगन्दर सही हो जायेगा। इसके साथ सुबह शाम १-१ चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ ले। इसके साथ रात को सोते समय कोकल का चूर्ण आपको बाजार से मिल जाएगा वो एक चम्मच गुनगुने पानी के साथ ले। 21 दिन में भगन्दर सही हो जायेगा। ये बहुत लोगो द्वारा आज़माया हुआ नुस्खा हैं।
पुनर्नवाः
पुनर्नवा, हल्दी, सोंठ, हरड़, दारुहल्दी, गिलोय, चित्रक मूल, देवदार और भारंगी के मिश्रण को काढ़ा बनाकर पीने से सूजनयुक्त भगन्दर में अधिक लाभकारी होता है। पुनर्नवा शोथ-शमन कारी गुणों से युक्त होता है।
पुनर्नवा के मूल को वरुण (वरनद्ध की छाल के साथ काढ़ा बनाकर पीने से आंतरिक सूजन दूर होती है। इससे भगन्दर के नाड़ी-व्रण को बाहर-भीतर से भरने में सहायता मिलती है।
योग और व्यायाम
30 मिनट तक मध्यम-तीव्रता वाले व्यायाम या पैदल चलने से आँतों की नियमित गतिविधि और मलत्याग होता है, जिससे मल की अधिक मात्रा संचित होकर सख्त या कड़क नहीं हो पाती और इसका त्याग भी कठिनाई भरा नहीं होता।
मध्यम-तीव्रता के अन्य व्यायामों में वेक्यूम क्लीनर द्वारा सफाई और घास काटना आदि आते हैं।



योग
भगंदर में आराम देने वाले योगासनों में हैं:
धनुरासन
पवनमुक्तासन
त्रिकोणासन

स्नान व्यायाम- 
इस व्यायाम द्वारा क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ता है, जिससे ठीक होने में वृद्धि होती है। शुरू करने के लिए, गर्म पानी से टब को अधिकतम संभव स्थिति तक भर लें। टब में बैठने के दौरान, गुदा में मल के त्याग को रोकने वाली पेशी को सिकोड़ लें। इसके पश्चात् इस पेशी को ढीला छोड़ने पर ध्यान केन्द्रित करें। टब में बैठे रहने के दौरान प्रत्येक 5 मिनटों में सिकोड़ने और ढीला छोड़ने की क्रिया दोहराएँ। दिन में तीन बार टब में स्नान करें, और प्रत्येक स्नान के दौरान इस व्यायाम को करें 
परहेज और आहार
लेने योग्य आहारअधिक मात्रा में सब्जियाँ, गेहूँ का चोकर, साबुत अनाज की ब्रेड और दलिया तथा फल लें। यह निश्चित करें कि आप पर्याप्त मात्रा में पानी  छः से आठ गिलास प्रतिदिन ले रहे हैं। अपर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने से कब्ज में बढ़ोतरी होती है।
गाजर, अन्नानास और संतरे का कच्चा रस पियें।
सेब, अन्नानास, संतरे, आडू, नाशपाती, अंगूर और पपीता सेवन हेतु उत्तम वस्तुएँ हैं।
पर्याप्त मात्रा में मेवे, शीरा, दालें, फलियाँ, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, टमाटर, पत्तागोभी, प्याज आदि का सेवन करें।
इनसे परहेज करें
मैदे और शक्कर से बने उत्पाद बिलकुल ना लें। इनमें बिस्कुट, केक्स, पेस्ट्रीज आदि आते हैं।
चावल, पनीर, परिरक्षक भी अस्वास्थ्यकारी होते हैं।

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