आयुर्वेदिक औषधियाँ और प्रयोग

चन्द्र प्रभावटी-
यह मूत्र रोगों पर और यौन रोगों पर विशेष असर दिखाती है.
बार बार पेशाब को जाना, पेशाब में शक्कर का जाना,
स्त्री को सफ़ेद पानी का जाना, मासिक धर्म की अनियमितताए,
पुरुषो को पेशाब में धातु जाने की समस्या,
पेशाब में जलन होना ऐसे अनेक विकारो पर यह दवा काम करती है.
यह स्नायु और हड्डी को भी मजबूती प्रदान करती है. इसलिए इसका प्रयोग कमजोरी में भी करते है.



योगराज गुग्गुलु

इस दवा का प्रयोग स्नायुओ को मजबूती प्रदान करता है. बुढ़ापे की व्याधियो जैसे पैर की पिंडलियों में दर्द होना, घुटनों में दर्द होना वगैराह उसमे यह दवा अच्छा असर दिखाती है.
इसकी १-१ गोली सुबह शाम नाश्ते या भोजन के बाद पानीसे ले. इसे शहद से या दूध से भी ले सकते है. गोली को दात से तोड़े फिर निगले या पहले ही तोड़कर फिर निगले.
हरिद्रा खंड
यह खुजली की एक जबरदस्त दवा है. शीत पित्त में भी इसे किसी जादू की तरह काम करते हुए देखा है. इसे आधा चम्मच रोजाना पानीसे तीन बार ले सकते है.



सितोपलादी चूर्ण

यह खासी की एक जबरदस्त दवा है. सूखी खासी पर इसे जादू की तरह काम करते हुए देखा गया है. एक चौथाई चम्मच चूर्ण शहद के साथ एक दिन में ३-४ बार ले सकते है.
त्रयोदशांग गुग्गुलु
यह वात विकारो की एक जबरदस्त दवा है. इसके प्रयोग से लकवे (पक्षाघात) में अद्भुत लाभ होता है. लकवा होने के बाद जितने जल्दी इसे प्रयोग में लाया जायेगा लाभ उतना ही जल्द होंगा. यदि लकवा होने के बाद बहोत समय बीत गया है तो एक लम्बे काल के लिए इस दवा का नियमित सेवन करना होगा.सर्वाइकल स्पोंडीलायटिस में भी यह अच्छा काम करती है.
इसकी १-१ गोली सुबह शाम नाश्ते या भोजन के बाद पानी से ले. इसे शहद से या दूध से भी ले सकते है. गोली को दात से तोड़े फिर निगले या पहले ही तोड़कर फिर निगले.
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हर्बल चिकित्सा के अनुपम आलेख-

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 






आलू के फायदे,उपचार,प्रयोग




   हर इंसान को आलू खाना पंसद होता है। इसे सभी अपने-अपने तरीके से रेसिपी बनाकर खाते है। लेकिन आप जानते है कि यह हमारी सेहत के लिए कितना फायदेमंद है। इसका सेवन करने से आपको कई बीमारियों से निजात मिल जाता है। इसका इस्तेमाल करने से केवल सेहत ही नहीं बल्कि सौंदर्य के लिए भी किया जाता है। कई लोग मानते है कि आलू खाने से आप मोटे हो जाएगे। जबकि ऐसा कुछ नहीं है |   
*उच्च रक्तचाप के रोगी भी आलू खाएँ तो रक्तचाप को सामान्य बनाने में लाभ करता है।
* आलू को पीसकर त्वचा पर मलें। रंग गोरा हो जाएगा।
* कच्चा आलू पत्थर पर घिसकर सुबह-शाम काजल की तरह लगाने से 5 से 6 वर्ष पुराना जाला और 4 वर्ष तक का फूला 3 मास में साफ हो जाता है।
* आलू का रस दूध पीते बच्चों और बड़े बच्चों को पिलाने से वे मोटे-ताजे हो जाते हैं। आलू के रस में मधु मिलाकर भी पिला सकते हैं। 


मलेरिया की जानकारी और विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों से इलाज  

* आलुओं में मुर्गी के चूजों जितना प्रोटीन होता है, सूखे आलू में 8.5 प्रतिशत प्रोटीन होता है। आलू का प्रोटीन बूढ़ों के लिए बहुत ही शक्ति देने वाला और बुढ़ापे की कमजोरी दूर करने वाला होता है।
भुना हुआ आलू पुरानी कब्ज और अंतड़ियों की सड़ांध दूर करता है। आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित्त को रोकता है।
* चार आलू सेंक लें और फिर उनका छिलका उतार कर नमक, मिर्च डालकर नित्य खाएँ। इससे गठिया ठीक हो जाता है।
* गुर्दे की पथरी में केवल आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है। पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियाँ और रेत आसानी से निकल जाती हैं। 

*क्या आप जानते हैं आलू में बहुत अधिक मात्रा में पोटैशियम पाया जाता हैं. जो कि सेहत के लिए फायदेमंद है. ऐसे में आपको कोशिश करनी चाहिए कि जब आप आलू का इस्तेमाल करें तो उसे अच्छे से धोकर बिना छिलका उतारे ही इस्तेमाल करें. ताकि इसमें मौजूद पौटेशियम का पूरा-पूरा फायदा मिल सके|
* रक्तपित्त बीमारी में कच्चा आलू बहुत फायदा करता है।
* कभी-कभी चोट लगने पर नील पड़ जाती है। नील पड़ी जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाएँ ।
* शरीर पर कहीं जल गया हो, तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो, त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है।



गोखरू के औषधीय गुण और प्रयोग


आलू का रस पीने के फायदे / benefit of potato juice
आलू के जूस को पीने से आप आसानी से अपने कोलेस्ट्रोल के स्तर को नियंत्रण में रख सकते हैं। यह आपके समस्त स्वस्थ्य सम्बन्धी समस्या का हल भी है।
*आलू का जूस आपके बढ़ते हुए वजन को घटा देता है। इसके लिए सुबह अपने नाश्ते से दो घंटे पहले आलू का जूस का सेवन करें। यह भूख को नियंत्रित करता है और वजन को कम कर देता है।
*गठिया के रोग में आलू का जूस बेहद कारगर तरह से काम करता है। आलू के जूस को पीने से यूरिक एसिड शरीर से बाहर निकलता है। और गठिया की सूजन को कम करता है।
*लिवर और गॉल ब्लैडर की गंदगी को निकालने के लिए आलू का जूस काफी मददगार साबित होता है। जापानी लोग हेपेटाइटिस से निजात पाने के लिए आलू के जूस का इस्तमाल करते हैं ।
 *आपके बालों को जल्दी बड़ा करने के लिए आलू के जूस का नियमित मास्क काफी मददगार साबित होता है। एक आलू को लेकर इसका छिलका निकाल लें। इसके टुकड़ों में काटकर पीस लें। अब इससे रस निकाल लें और इसमें शहद और अंडे का उजला भाग मिला लें। अब इस पेस्ट को सर और बालों पर लगाएं। इसे दो घंटे तक रखें और उसके बाद शैम्पू से धो लें।


बिना आपरेशन प्रोस्टेट  वृद्धि की अचूक औषधि

*अगर आप डाइबिटीज के मरीज हैं तो यह आपके लिए बेहद फायदेमंद चीज है। इसका सेवन करने से यह शरीर के खून में शर्करा के स्तर को कम करने में काफी प्रभावकारी साबित होगा।
*अगर आपको एसिडिटी की समस्या है तो आलू का रस काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके लिए इसके रस को रोजना आधा कप पिएं। इससे आपको लाभ मिलेगा।
*ह्रदय की बिमारी और स्ट्रोक से बचने और इसे कम करने के लिए आलू सबसे अच्छा उपाय है।
यह नब्ज़ के अवरोध, कैंसर, हार्ट अटैक और ट्यूमर को बढ़ने से कम करता है।
*किडनी की बिमारियों का इलाज करने के लिए आलू का जूस पीने की आदत डालें। यह ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नियंत्रण में रखने में भी मदद करता है। आलू का जूस मूत्राशय में कैल्शियम का पत्थर बनने नहीं देता।


किडनी फेल (गुर्दे खराब) रोग के कारगर उपचार 

*आलू का जूस जोड़ों के दर्द व सूजन को खत्म करता है। अर्थराइटिस से परेशान लोगों को दिन में दो बार आलू का जूस पीना चाहिए। यह दर्द व सूजन में राहत देता है। शरीर में खून के संचार को भी बेहतर बनाता है आलू का जूस।
*अगर आपके चेहरे में दाग, धब्बे और पिपंल है तो आलू का रस काफी फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी और बी कॉम्प्लेक्स के साथ पोटेशियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और जस्त जैसे खनिज पाया जाता है, जोकि हमारी स्किन के लिए फादेमंद है।



मसूड़ों की सूजन के उपचार,उपाय,नुस्खे




    मुंह के अंदर स्वच्छता की खराब स्थिति के कारण दांतों के बीच और मसूढ़ों की रेखा पर प्लेक (plaque) जम जाते हैं जिसके कारण मसूढ़ों में सूजन हो जाती है।मसूड़ों की बीमारी एक तरह का इन्फेक्शन है जो दांतों के नीचे हड्डियों तक फैल जाता है। ये एक आम समस्या है जिसके कारण दांत निकल या टूट जाते हैं। मसूड़ों की बीमारी की दो स्टेज होती हैं। अगर पहली ही स्टेज पर ही इसका पता चल जाए तो इससे होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।
मसूड़ों में सूजन
  उन का कमजोर पड़ना, ब्रश करने के बाद खून आना और मुंह से लगातार दुर्गंध आना, ये सभी मसूड़ों की समस्या के लक्षण हैं. इन से शुरुआती चरण में नजात पाना आसान है, लेकिन शुरू से अगर इलाज नहीं कराया जाता तो दुष्परिणाम दांत टूटने और कई रोगों के रूप में सामने आ सकता है.

औरतों मे सफ़ेद पानी जाने की प्रभावी औषधि

    मसूड़ों में सूजन या खून आने जैसे किसी भी लक्षण को हलके में नहीं लेना चाहिए. ये लक्षण मसूड़ों को नुकसान से बचाने के लिए उपाय करने का संकेत दे रहे होते हैं. यदि इन की अनदेखी की गई तो स्थिति बिगड़ कर पेरियोडोंटाइटिस (मसूड़ों और दांतों की हड्डियों के रोग) तक बढ़ सकती है. यह रोग मसूड़ों की गंभीर तकलीफ से जुड़ा होता है जिस से मसूड़े कमजोर पड़ने लगते हैं और दांतों की जड़ों तक बैक्टीरिया का हमला बढ़ जाता है. मसूड़ों के टिशू जब क्षतिग्रस्त होने लगते हैं तो दांतों को मजबूती देने में असमर्थ हो जाते हैं. तब दांत टूटने लग जाते हैं. यानी इस का अंतिम दुष्परिणाम दांतों के कमजोर हो कर टूटने के रूप में ही सामने आता है.
   कई लोगों को पता नहीं होता कि मसूड़े के रोग से न सिर्फ दांतों को नुकसान पहुंचता है बल्कि इस से कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य परेशानियां भी खड़ी हो सकती हैं. मसूड़ों की समस्या के नाम से जाना जाने वाला पेरियोडोंटल रोग कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है. लिहाजा मसूड़ों की समस्या से संबंधित किसी भी लक्षण की अनदेखी नहीं होनी चाहिए.



बिना आपरेशन प्रोस्टेट  वृद्धि की अचूक औषधि

   दांतों में पस होने के कारण मसूड़ों की बीमारी मुंह की सफाई ठीक से न करना प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर होना टूटा हुआ दांत मसूड़ों में सूजन और जलन दांतों में संक्रमण बैक्टीरिया कार्बोहाइड्रेट युक्त तथा चिपचिपे पदार्थ अधिक मात्रा में खाना
दांतों में पस होने के लक्षण जब भी आप कुछ खाएं तो संक्रमित जगह पर दर्द संवेदनशील दांत मुंह में गंदे स्वाद वाले तरल पदार्थ का स्त्राव साँसों में बदबू मसूड़ों में लालिमा और दर्द अस्वस्थ महसूस करना मुंह खोलने में तकलीफ होना प्रभावित क्षेत्र में सूजन चेहरे पर सूजन दांतों में अनपेक्षित दर्द होना अनिद्रा कुछ निगलने में परेशानी होना बुखार
शरीर में प्रोटीन की कमी दांतों को भी प्रभावित करती है, इसके कारण पेरियोडोंटिस नामक मसूड़ों की बीमारी हो सकती है।

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

लोबान-
लोबान यानि गुग्गुल का इस्तेमाल बहुत सी आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है। इसमें एंटी इनफ्लेमेटरी तत्व होते हैं जो कि बैक्टीरियल ग्रोथ और प्लाक जमने को रोकते हैं।
टिप: एक ग्लास पानी में आधा चम्मच लोबान मिलाएं और उसका इस्तेमाल माउथवॉश की तरह करें। दिन में दो से तीन बार इससे कुल्ला करने से आप अपने मसूड़ों को स्वस्थ रख पाएंगे।
लहसुन -
लहसुन बैक्टीरिया को मारने के लिए एक प्राकृतिक हथियार है। कच्चे लहसुन का रस संक्रमण को मारने में मदद करता है। यदि वास्तव में आपके दांत में बहुत अधिक दर्द हो रहा हो तो आप ऐसा कर सकते हैं। कच्चे लहसुन की एक कली लें। इसे पीसें और निचोड़ें तथा इसका रस निकालें। इस रस को प्रभावित क्षेत्र पर लगायें। यह घरेलू उपचार दांत के दर्द में जादू की तरह काम करता है।

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

नीम-
   नीम की टहनी से दांत ब्रश करना एक बहुत पुराना और प्रभावशाली तरीका है मुंह की सफाई का। इसे दातुन कहा जाता है। नीम के पेड़ में आश्चर्यजनक ऐन्टीमाइक्रोबीअल (antimicrobial) और एंटी फंगल तत्व होते हैं जिन्हें मुंह की समस्या के लिए चिकित्सा जगत में महत्वपूर्ण माना जाता है।
*पानी में कुछ नीम की पत्तियां डाल कर उबालें और उससे दिन में तीन से चार बार कुल्ला करें। ऐसा करने से आपके मसूड़े बीमारियों से दूर रहेंगे।
नमक के पानी से मुंह धोना: -
   मुंह से संबंधित समस्याओं के निदान में नमक का पानी बहुत महत्वपूर्ण होता है। नमक के पानी से कुल्ला करने से मुंह में होने वाले संक्रमण से बचाव होता है जो मसूड़ों में सूजन आने का एक कारण है।

नमक- 
  यदि आप तुरंत आराम पाना चाहते हैं तो नमक से आप तुरंत आराम पा सकते हैं। इसके लिए थोड़ा सा नमक गुनगुने पानी में मिलाएं और इस पानी से गरारे करें। पहले थोड़ा दर्द महसूस होगा परंतु उसके बाद कुछ आराम मिलेगा। इसे कई बार दोहरायें और आपका दर्द लगभग 90% तक कम हो जाएगा

हाथ पैर और शरीर का कांपना कारण और उपचार

लौंग का तेल- 
  लौंग का तेल भी संक्रमण रोकने में सहायक होता है तथा दांतों के दर्द में तथा मसूड़ों की बीमारी में अच्छा उपचार है। थोड़ा सा लौंग का तेल लें तथा इस तेल से धीरे धीरे ब्रश करें। जब आप प्रभावित क्षेत्र में इसे लगायें तो अतिरिक्त सावधानी रखें। बहुत अधिक दबाव न डालें तथा अपने मसूड़ों पर धीरे धीरे मालिश करें अन्यथा अधिक दर्द होगा। मसूड़ों पर लौंग के तेल की कुछ मात्रा लगायें तथा धीरे धीरे मालिश करें।
टी बैग-

टी बैग एक अन्य घरेलू उपचार है। हर्बल टी बैग को प्रभावित क्षेत्र पर लगायें। इससे पस के कारण होने वाले दर्द से आपको तुरंत आराम मिलेगा।

आईल पुलिंग -
     यह घरेलू उपचार बहुत ही सहायक है। इसमें आपको सिर्फ नारियल के तेल की आवश्यकता होती है। एक टेबलस्पून नारियल का तेल लें और इसे अपने मुंह में चलायें। इसे निगले नहीं, इसे लगभग 30 मिनिट तक अपने मुंह में रखें रहें। फिर इसे थूक दें और मुंह धो लें। आपको निश्चित रूप से आराम मिलेगा।
मसूड़ों की बीमारी की दूसरी स्टेज बहुत गंभीर होती है। इसके कुछ लक्षण इस तरह हैं।मसूड़ों और दांतों के बीच मवाद (puss) बनना

नीम के पत्ते खाने के फायदे 

दांतों का गिरना-
दांतों व मसूड़ों के बीच बहुत अंतर होना
खाने को काटते समय सभी दांतों की स्थिति में बदलाव आना
मुलैठी-

मुलैठी यानि लिकोराइस (licorice) की जड़ में लिकोराइसाइडिन और लिकोराइसोफ्लेविन ए होता है जो कि ओरल कैविटी के विकास को रोकते हैं और सांस की बदबू से लड़ते हैं।
टिप: मुलैठी के पाउडर को एक चुटकी में लेकर प्रभावित दांत पर लगाएं या इस पाउडर से रोज़ ब्रश करें। ऐसा करके आप अपनी मसूड़ों की समस्याओं से निजात पा लेंगे।
तुलसी-
सभी जानते हैं कि तुलसी की पत्तियों में कितने औषधीय गुण होते हैं। एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक होने के नाते तुलसी मसूड़ों की समस्याओं को रोकने में काफी अहम भूमिका निभाती है। इसके एंटीबैक्टीरियल गुण से प्लाक और सांस की बदबू जैसी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।
* मसूड़ों की समस्याओं से निपटने के लिए हर रोज़ कुछ पत्ते तुलसी के चबाएं।

जोड़ों और हड्डियों में दर्द के कारण, लक्षण और उपचार

कार्डियोवैस्क्युलर रोग-
शोध बताते हैं कि पेरियोडोंटल रोग के कारण कार्डियोवैस्क्युलर रोग का खतरा भी बढ़ सकता है. पेरियोडोंटल तथा कार्डियोवैस्क्युलर रोग दोनों में गंभीर सूजन आ जाती है, इसलिए शोधकर्ताओं का मानना है कि सूजन से इन दोनों का ताल्लुक हो सकता है.
डिमेंशिया-
यह रोग किसी व्यक्ति की सोचने समझने की शक्ति और याददाश्त को प्रभावित करता है और यह भी मसूड़े की बीमारी से जुड़ा होता है. यूनिवर्सिटी औफ सैंट्रल लंकाशायर और स्कूल औफ मैडिसिन ऐंड डैंटिस्ट्री का एक अध्ययन बताता है कि ये दोनों बीमारियां एक दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं.


रूमेटाइड आर्थ्राराइटिस-

कई अध्ययन बताते हैं कि मसूड़ा रोग से पीडि़त लोगों को रूमेटाइड आर्थ्राराइटिस यानी गठिया होने की आशंका ज्यादा रहती है.
*बबूल की छाल-: 
मसूड़ों की सूजन से छुटकारा पाने का यह दादी मां का नुस्खा है। बबूल के पेड़ की छाल मसूड़ों की सूजन से छुटकारा दिलाने में जादू की तरह काम करती है। आप बबूल की छाल को पानी में उबालकर माउथवॉश भी बना सकते हैं। तुरंत राहत पाने के लिए दिन में दो से तीन बार इस घरेलू माउथवॉश से गरारे करें
कैस्टर ऑइल (एरंड का तेल): -
एरंड के तेल में सूजन विरोधी गुण होता है जो मसूड़ों की सूजन से राहत दिलाने में एक प्रभावी घरेलू उपचार है। दर्द वाले भाग पर इसे लगाने से दर्द तथा सूजन से आराम मिलता है।

*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 

क्रौनिक किडनी रोग-
इस के साथ मसूड़ों रोग का संबंध साबित हो चुका है. केस वैस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी का एक शोध बताता है कि जिन के असली दांत नहीं रह गए हैं, उन्हें असली दांत वाले व्यक्तियों की तुलना में क्रौनिक किडनी रोग होने का खतरा ज्यादा रहता है.
मुंह का कैंसर-
मसूड़ों की समस्या के गंभीर मामलों में मुंह का कैंसर भी देखा गया है. कई ऐसे उदाहरणों से साबित हो गया है कि मसूड़ों का रोग और मुंह के कैंसर का सीधा ताल्लुक है.
ऐसा कुछ न हो इस के लिए दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखना जरूरी है. बहुत सारे लोग अभी भी इस बात से नावाकिफ हैं कि मसूड़ा रोग पूरी सेहत पर असर कर सकता है. मुंह की परेशानी के किसी भी लक्षण की अनदेखी नहीं होनी चाहिए, बल्कि बचाव के उपाय करने के लिए कदम उठने चाहिए. साल में 2 बार डैंटिस्ट से परामर्श लेने से मुंह की सेहत दुरुस्त रह सकती है. यह कभी न भूलें कि बचाव ही महत्त्वपूर्ण है|





सूरजमुखी के बीज हैं स्‍वास्‍थ्‍य का खजाना





    सूरजमुखी के बीचों के तेल में कई लाभदायक तत्व मोजूद होते हैं। इन छोटे से बीजों के तेल के सेवन से पेट के कैंसर, उच्च कोलेस्ट्रॉल के स्तर, उच्च रक्तचाप, दिल के दौरे और स्ट्रोक आदि गंभीर रोगों से बचाव होता है।
सूरजमुखी के बीज भले ही दिखने में आकर्षक न लगें, लेकिन गुणों के मामले में ये कमाल होते हैं। इन बीजों में विटामिन ई और पोली अन-सैचुरेटेड फैट व मैग्नीशियम कफी होता है। इसके तेल के नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। महिलाओं तथा उम्रदराज लोगों के लिए भी यह काफी लाभदायक होते हैं। तो चलिये जाने सूरजमुखी के बीजों के ऐसे ही कुछ कमाल स्वास्थ्य लाभ।

बिना आपरेशन प्रोस्टेट  वृद्धि की अचूक औषधि

दिल को रखे स्‍वस्‍थ इनके बीजों में विटामिन सी होता है जो कि दिल की बीमारी को दूर रखने में मदद करता है। साथ ही इसमें मौजूद विटामिन ई कोलेस्‍ट्रॉल को खून की धमनियों में जमने से रोक कर हार्ट अटैक और स्‍ट्रोक का खतरा टालता है। एक चौथाई कप सूरजमुखी बीज 90 प्रतिशत तक का डेली विटामिन ई प्रदान करता हैहार्ट अटैक का मुख्य कारण रक्त की धमनियों में रुकावट, कम-ज्यादा रक्तचाप व मानसिक तनाव व अधिक थकान होते हैं। हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि धमनियों में खून का थक्का जमने से हार्ट अटैक का खतरा अधिक होता है।
*रक्त धमनियों में खून के थक्के का नियंत्रण एक एसिड करता है, जिसे ‘लिनोलेइक एसिड’ कहते हैं। यह एक असंतृप्त अम्ल होता है। इसकी पूर्ति वनस्पति तेल से की जाती है। शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि सूरजमुखी (सन फ्लावर) के बीजों में यह एसिड काफी मात्र में पाया जाता है।

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

*इस कारण इसका तेल हृदय रोगियों के लिए लाभदायक है। यह रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्र को भी नियंत्रण में रखता है। यह अच्छे कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) की मात्र को बढ़ाता है और खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) को कम करता है। शरीर में जमा अतिरिक्त वसा को भी यह कम करता है। साथ ही यह रक्तचाप बढ़ाने वाले रसायन ‘डोपामाइन डी-1’ को भी घटाता है।अस्थमा और पेट के कैंसर से बचाता है : सूरजमुखी के तेल में किसी अन्य खाना पकाने के तेल की तुलना में अधिक Vitamin E होता है। इसलिए आप अपने आहार में इस तेल को शामिल कर के अस्थमा और पेट के कैंसर जैसे बीमारियों से बचे रहा सकते है।
बॉडी को रिपेयर करता है :
 सूरजमुखी का तेल में भी प्रोटीन होता है, जो की हमारे शरीर के निर्माण और मरम्मत तथा हार्मोन और एंजाइमों के उत्पादन करने के लिए मदद करती हैं। हमारे शरीर को उच्च मात्रा के proteins की आवश्यकता होती है। चूंकि शरीर proteins की मात्रा को स्टोर कर के नहीं रख सकता है उसे consume किया जाता है और इस आवश्यकता को पूरा sunflower seed oil करता है।

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

हड्डी बनाए मजबूत :
 इसमें मैग्नीशियम की भी अधिक मात्रा होती है, जिससे हड्डियों में मजबूती आती है। इसके साथ ही यह हड्डियों के जोड़ों में एक्ने और त्वचा संबन्धित रोग दूर करे :
 सूरजमुखी बीज के तेल में फैटी एसिड होते हैं जो कि त्वचा को बैक्टीरिया से बचा कर एक्ने होने से रोकते हैं। यह भी माना जाता है कि सूरजमुखी तेल एक्जिमा और डर्मेटाइटिस की बीमारी से बचाता है।
दिमाग के लिये अच्छा : यह आपके दिमाग को शांत रखता है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम दिमाग की नसों को शांत करता है तथा स्ट्रेस और माइग्रेन से छुटकारा दिलाता है।
हेयर ग्रोथ : 
जिंक से भरे ये बीज आपके बालों को बढाएंगे। हांलाकि अत्यधिक जिंक के सेवन से बाल झड़ने की समस्या काफी ज्यादा बढ़ सकती है। इसमें मौजूद विटामिन ई, सिर में ब्लड सर्कुलेशन कर के बालों की ग्रोथ बढ़ाता है।


गठिया से बचाता है : जो लोग गठिया के बीमारियों से डरते है उनके लिए सूरजमुखी का तेल सबसे बेहतर solution है। सूरजमुखी तेल rheumatoid arthritis को रोकथाम में मदद करता है। इसलिए जिनको भी गठिया की समस्या हो उन्हें सूरजमुखी के तेल उपयोग में लेना चाहिए
*सूरजमुखी के बीजों को खाने से हार्ट अटैक का खतरा कम होता है, कोलेस्ट्रॉल घटता है, त्वचा में निखार आता है तथा बालों की भी ग्रोथ होती है। आइये जानते हैं सूरजमुखी के बीज खाने से क्या-क्या स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।


कान दर्द,कान पकना,बहरापन के उपचार


दिल को रखे स्वस्थ : इनके बीजों में विटामिन सी होता है जो कि दिल की बीमारी को दूर रखने में मदद करता है। साथ ही इसमें मौजूद विटामिन ई कोलेस्ट्रॉल को खून की धमनियों में जमने से रोक कर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा टालता है। एक चौथाई कप सूरजमुखी बीज 90 प्रतिशत तक का डेली विटामिन ई प्रदान करता है।
कोलेस्ट्रॉल घटाए :
 इनमें मोनो और पोलीसैच्युरेटेड फैट्स होते हैं, जो कि एक अच्छे फैट माने जाते हैं। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाने का काम करते हैं। इसके अलावा इनमें ढेर सारा फाइबर भी होता है जो कोलेस्ट्रॉल को घटाता है।
पेट ठीक रखे : 

बीज में काफी सारा फाइबर होता है जिससे कब्ज की समस्या ठीक हो जाती है।
कैं
सर से बचाव :
 इसमें विटामिन ई, सेलियम और कॉपर होता है, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। रिसर्च दृारा कहा गया है कि यह पेट, प्रोस्ट्रेट और ब्रेस्ट कैंसर से रक्षा करता है।
त्वचा निखारे : सूरजमुखी के बीज का तेल त्वचा की नमी बनाए रखने के रूप में के रूप में अच्छी तरह से यह बैक्टीरिया के खिलाफ की रक्षा में मदद करता है।


पेट मे गेस बनने के घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार 

जिंक
सूरजमुखी तेल में जिंक प्रचुर मात्रा में है जो कि घावों के जल्द उपचार में मदद करता है। यह स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए रखने में भी मददगार होता है।
फोलिक एसिड
सूरजमुखी के तेल में मौजूद फोलिक एसिड वर्तमान नई सैल्स के निर्माण में मदद करता है और मांसपेशियों में ऐंठन को रोकने में में असरदार होता है। जबकि इसमें मौजूद ट्रीप्टोफन मस्तिष्क को आराम पहुंचाता है और गहरी नींद लेने में सहायता करता है।
फैटी एसिड और विटामिन
सूरजमुखी के तेल में व्याप्त ओमेगा फैटी एसिड और विटामिन बालों की चमक और बनावट को बेहतर बनाए रखते हैं। बालों पर नियमित रूप से सूरजमुखी के बीज का तेल लगाने से डेंड्रफ आदि की समस्या भी नहीं होती है।
विटामिन ई
सूरजमुखी के बीजों में मौजूद विटामिन 'ई', संधिशोथ, अस्थमा, पेट के कैंसर, उच्च कोलेस्ट्रॉल के स्तर, उच्च रक्तचाप, दिल के दौरे और स्ट्रोक आदि गंभीर रोगों से बचाव करता है।
विटामिन बी6
सूरजमुखी के बीजों में प्रचुर मात्रा में मौजूद विटामिन बी6 और जिंक शरीर का मेटाबॉलिज्म दुरुस्त रखते हैं और सीबम के निर्माण को भी नियंत्रित करते हैं। इसके सेवन से सिर की त्वचा पर डैंड्रफ भी नहीं होती है।

कलमी शोरा (पोटाशियम नाईटेरेट) के गुण उपयोग 

एंटीऑक्सीडेंट गुण
सूरजमुखी का तेल एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है। इसमें विटामिन 'ई' प्रचुर मात्रा में होता है जो इसे यह गुण प्रदान करता है। एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में सूरजमुखी का तेल कैंसर से बचाता है।
त्वचा की नमी
सूरजमुखी के बीज का तेल त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद करता है और शरी और त्वचा के बैक्टीरिया के खिलाफ रक्षा करने में भी मदद करता है।
दिल का रखे खयाल-
सूरजमुखी के तेल हृदय रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। यह रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्र को नियंत्रण रखता है। साथ ही साथ अच्छे कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) की मात्र को बढ़ाता है और खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) को कम करता है। यह शरीर में जमा अतिरिक्त वसा को कम करता है और रक्तचाप बढ़ाने वाले रसायन ‘डोपामाइन डी-1’ को घटाता है।
सूरजमुखी के बीजों को खाने से हार्ट अटैक का खतरा कम होता है, कोलेस्‍ट्रॉल घटता है, त्‍वचा में निखार आता है तथा बालों की भी ग्रोथ होती है। आइये जानते हैं सूरजमुखी के बीज खाने से क्‍या-क्‍या स्‍वास्‍थ्‍य लाभ मिलते हैं।दिल को रखे स्‍वस्‍थ इनके बीजों में विटामिन सी होता है जो कि दिल की बीमारी को दूर रखने में मदद करता है। साथ ही इसमें मौजूद विटामिन ई कोलेस्‍ट्रॉल को खून की धमनियों में जमने से रोक कर हार्ट अटैक और स्‍ट्रोक का खतरा टालता है। एक चौथाई कप सूरजमुखी बीज 90 प्रतिशत तक का डेली विटामिन ई प्रदान करता है।
*कोलेस्‍ट्रॉल घटाए इनमें मोनो और पोलीसैच्‍युरेटेड फैट्स होते हैं, जो कि एक अच्‍छे फैट माने जाते हैं। यह खराब कोलेस्‍ट्रॉल को घटाने का काम करते हैं। इसके अलावा इनमें ढेर सारा फाइबर भी होता है जो कोलेस्‍ट्रॉल को घटाता है।


सदाबहार (vinca rosea) पौधा ही नही औषिधि भी है



   


    सदाफूली या सदाबहार या सदा सुहागन  बारहों महीने खिलने वाले फूलों का एक पौधा है। इसकी आठ जातियां हैं। इनमें से सात मेडागास्कर में तथा आठवीं भारतीय उपमहाद्वीप में पायी जाती है। इसका वैज्ञानिक नाम केथारेन्थस है। भारत में पायी जाने वाली प्रजाति का वैज्ञानिक नाम केथारेन्थस रोजस है। इसे पश्चिमी भारत के लोग सदाफूली के नाम से बुलाते है।
    *सदाबहार नाम के अनुसार ही सदाबहार (evergreen) पौधा है जिसको उगाने से आस-पास में सदैव हरियाली बनी रहती है। कसैले स्वाद के कारण तृष्णभोजी जानवर (herbivores) इस पौधे का तिरस्कार करते हैं। सदाबहार पौधों के आस-पास कीट, फतिगें, बिच्छू तथा सर्प आदि नहीं फटकते (शायद सर्पगंधा समूह के क्षारों की उपस्थिति के कारण) जिससे पास-पड़ोस में सफाई बनी रहती है। सदाबहार की पत्तियाँ विघटन के दौरान मृदा में उपस्थित हानिकारक रोगाणुओं को नष्ट कर देती हैं।बवासीर होने की स्थिति में इसके पत्तियों और फूलों को कुचलकर लगाने से बेहद फायदा मिलता है, ऐसा रोज़ाना करें।

*सदाबहार की जड़ों में रक्त शर्करा को कम करने की विशेषता होती है। अतः पौधे का उपयोग मधुमेह के उपचार में किया जा सकता है। दक्षिण अफ्रीका में पौधे का उपयोग घरेलू नुस्खा (folk remedy) के रूप में मधुमेह के उपचार में होता रहा है। पत्तियों के रस का उपयोग हड्डा डंक (wasp sting) के उपचार में होता है। जड़ का उपयोग उदर टानिक के रूप में भी होता है। पत्तियों का सत्व मेनोरेजिया (Menorrhagia) नामक बिमारी के उपचार में दिया जाता है। इस बिमारी में असाधारण रूप से अधिक मासिक धर्म होता है।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) रोग के कारगर उपचार 

*त्वचा पर खुजली, लाल निशान, रशेस या किसी तरह की एलर्जी होने पर सदाबहार (vinca rosea) की पत्तियों के रस को लगाने पर आराम मिलता है।

*. दो फूल को एक कप उबले पानी या बिना शक्कर की उबली चाय में पीने से मधुमेह में फायदा पहुंचाता है।
* त्वचा पर घाव या फोड़े-फुंसी हो जाने पर इसकी पत्तियों का रस दूध में मिला कर लगाते हैं।

*कैंसर ऐसी बीमारी है जिसका पता सामान्यत: रोग बढऩे के बाद ही चल पाता है। इस स्थिति में सर्जरी ही बीमारी के विकल्प के रूप में सामने आती है। आयुर्वेद शोधकर्ताओं ने सफेद फूल वाले सदाबहार पौधे को इस बीमारी में प्रभावी माना है।

इस तरह हैं कैंसर में लाभकारी:

ये पत्तियां कैंसररोधी हैं। ये रोग बढ़ाने वाली कोशिकाओं के विकास को रोकती हैं साथ ही इस दौरान क्षतिग्रस्त हो गई कोशिकाओं को फिर से सेहतमंद बनाने का काम करती हैं। यदि इसकी पत्तियों से बने रस को कैंसर की पहली स्टेज वाले मरीज को दिया जाए तो उसके रोग के बढऩे की आशंका कम हो जाती है। वहीं दूसरी व आखिरी स्टेज के दौरान इसके प्रयोग से मरीज की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होकर उसके जीवित रहने की अवधि बढ़ सकती है।

आँखों  का चश्मा  हटाने का अचूक  घरेलू उपाय


*क्षारों में जीवाणुनाशक गुण पाये जाते हैं इसलिए पत्तियों का सत्व का उपयोग ‘स्टेफाइलोकाकल’ (Staphylococcal) तथा ‘स्टेªप्टोकाकल’ (Streptococcal) संक्रमण के उपचार में होता है। आमतौर से ये दोनों प्रकार के संक्रमण मनुष्य में गले (throat) एवं फेफड़ों (lungs) को प्रभावित करते हैं।
*पत्तियों में मौजूद विण्डोलीन नामक क्षार डीप्थिरिया के जीवाणु कारिनेबैक्टिीरियम डिप्थेरी Corynebacterium diptherae) के खिलाफ सक्रिय होता है। अतः पत्तियों के सत्व का उपयोग डिप्थिीरिया रोग के उपचार में किया जा सकता है।
*इसकी पत्तियों को तोड़े जाने पर जो दूध निकलता है, उसे घाव पर लगाने से किसी तरह का संक्रमण नहीं होता, खुजली होने पर भी लगाया जा सकता है।
*सदाबहार के फूलों और पत्तियों के रस को पिम्पल्स पर लगाने से कुछ ही दिनों में इनसे छुटकारा मिल जाता है।
*पौधे के जड़ का उपयोग सर्प, बिच्छू तथा कीट विषनाशक (antidote) के रूप में किया जा सकता है।
उपर्युक्त के अतिरिक्त आज सदाबहार ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है क्योंकि इसमें कैंसररोधी (Anticancer) गुण पाये जाते हैं। सदाबहार से प्राप्त विनक्रिस्टीन तथा विनब्लास्टीन नामक क्षारों का उपयोग रक्त कैंसर (Leukaemia) के उपचार में किया जा रहा है।

*सदाबहार की तीन - चार कोमल पत्तियाँ चबाकर रस चूसने से मधुमेह रोग से राहत मिलती है |

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

* सदाबहार के पौधे के चार पत्तों को साफ़ धोकर सुबह खाली पेट चबाएं और ऊपर से दो घूंट पानी पी लें | इससे मधुमेह मिटता है 

| यह प्रयोग कम से कम तीन महीने तक करना चाहिए |
*सदाबहार के फूलों और पत्तियों के रस को पिम्पल्स पर लगाने से कुछ ही दिनों में इनसे छुटकारा मिल जाता है।


प्रयोग का तरीका:

 इसके पत्तों को सुखाकर चूर्ण बना लें व रोजाना नाश्ते के बाद आधा ग्राम चूर्ण को सादा पानी से लें। इसके अलावा रस को भी प्रयोग में लाया जा सकता है। रोजाना पांच ताजा पत्तियों को पानी के साथ पीसकर बारीक कपड़े से छानकर रस निकालें व इसे भोजन करने के बाद पिएं।
* आधे कप गरम पानी में सदाबहार के तीन ताज़े गुलाबी फूल 5 मिनिट तक भिगोकर रखें | उसके बाद फूल निकाल दें और यह पानी सुबह ख़ाली पेट पियें | यह प्रयोग 08 से 10 दिन तक करें | अपनी शुगर की जाँच कराएँ यदि कम आती है तो एक सप्ताह बाद यह प्रयोग पुनः दोहराएँ |विंका फूल का कैंसर के कुछ प्रकार जैसे ल्यूकेमिया (leukemia) और लिम्फोमा (lymphoma) के उपचार में इस्तेमाल किया जाता है। इस फूल से साइटोटोक्सिक (cytotoxic) प्रभाव पड़ता है, जो इसे कैंसर के खिलाफ प्रभावी बनाता है। इसे अन्‍य दवाओं में मिलाकर कीमोथेरेपी (chemotherapy) में भी प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा इसका प्रयोग एंटी-माइक्रोबियल (anti-microbial), एंटी हाइपरटेंसिव (anti-hypertensive) और एंटी डायबिटीक (anti-diabetic) के खिलाफ किया जाता है।

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ध्यान रहे: 


कड़वा स्वाद होने के कारण इसे खाली पेट लेने से उल्टी हो सकती है। इसलिए इसका प्रयोग कुछ खाकर ही करें। छोटे बच्चों को इसके रस में शक्कर या चूर्ण में गुड़ मिलाकर गोलियों के रूप में दिया जा सकता है।

साइड इफेक्‍ट

सदाबहार में कई सारे गुण होते हैं, लेकिन इसके साथ कुछ साइड इफेक्‍ट भी होते हैं। इसके उपयोग के बाद कई बार उल्टी, सिर दर्द, मतली, खून बहना और थकान आदि समस्याएं भी हो सकती हैं।









चिरायता के गुण,लाभ, उपयोग

    



     चिरायता (Swertia chirata Ham) यह जेंशियानेसिई (Gentianaceae) कुल का पौधा है, जिसका प्रेग देशी चिकित्सा पद्धति में प्राचीन काल से होता आया है। यह तिक्त, बल्य (bitter tonic), ज्वरहर, मृदु विरेचक एवं कृमिघ्न है, तथा त्वचा के विकारों में भी प्रयुक्त होता है। इस पौधे के सभी भाग (पंचांग), क्वाथ, फांट या चूर्ण के रूप में, अन्य द्रव्यों के साथ प्रयोग में जाए जाते हैं। इसके मूल को जंशियन के प्रतिनिधि रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है।चिरायता के बारे में आमतौर पर अधिकांश लोग जानते हैं, क्योंकि प्राचीन समय से इसका उपयोग आयुर्वेदिक व घरेलू उपचारों में होता आया है। चिरायता स्वाद में कड़वा होता है। चिरायता मूल रूप से नेपाल, कश्मीर और हिमाचल में पाया जाता है। इसके फूल बरसात और फल सर्दियों के मौसम में आते हैं।
चिरायता एक एंटीबॉयोटिक औषधि है, जो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। इसका रोजाना सेवन करने पर कीटाणु नष्ट हो जाते हैं और बीमारियां दूर रहती हैं।

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चिरायता बनाने की विधि (Method of Swertia Chirata)
सूखी तुलसी पत्ते का चूर्ण, नीम की सूखी पत्तियों का चूर्ण, सूखे चिरायते का चूर्ण समान मात्रा (100 ग्राम) मिलाकर एक डिब्बे में भर कर रख लीजिए। मलेरिया, बुखार व अन्य रोगों की स्थिति में दिन में 3 बार दूध से सेवन करने से लाभ होगा।
चिरायता इस्‍तेमाल का तरीका

चिरायता बनाने का आसान और सरल उपाय है कि इसका चाय की तरह सेवन किया जाए। जिस तरह आप चाय बनाते हैं यानी सबसे पहले पानी उबालें। इसके बाद इसमें एक चम्मच चिरायता की जड़ का इस्तेमाल करें। इस मिक्सचर को तकरीबन आधा घंटे तक रखें। इसके बाद इसे छानें और चिरायता चाय का मजा लें।

कैंसर और ट्यूमर से बचाव
तमाम अध्ययनों से पता चला है कि चिरायता के जड़, पत्तों, टहनी, फल में 24 किस्म के तत्व मौजूद होते हैं। ये तमाम तत्व कैंसर को प्राकृतिक रूप से ठीक करने में मदद करते हैं। आस्ट्रेलिया में स्थित यूनिवर्सिटी आफ क्वीन्सलैंड में हुए अध्ययन के मुताबिक चिरायता में पांच किस्म के स्टेराइडल सैपोनिन्स होते हैं। वास्तव में यही सैपोनिन्स कैंसर से लड़ने में सहायक है। इसके अलावा इसमें कई किस्म के एंटीआक्सीडेंट एसिड, एंटी-इन्फ्लेमेटरी, तेल, रसायन आदि होते हैं जो कि इस बीमारी से बचाव के जरूरी है। यही नहीं चिरायता की सेल की हो रही क्षति रोकन में भी महति भूमिका है।

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खून साफ करें चिरायता
हजारों सालों से चिरायता नामक जड़ी-बूटी का इस्‍तेमाल त्‍वचा संबंधी रोगों के लिए किया जाता है, क्‍योंकि इसके सेवन से रक्‍त को साफ करने में मदद मिलती है। इसके अलावा चिरायता एक एंटी-बायोटिक औषधि है, जो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ान में मदद करती है। इसके रोजाना सेवन करने से कीटाणु नष्‍ट होते हैं और बीमारियां दूर रहती है। आयुर्वेद के अनुसार चिरायता का रस कई किस्म की बीमारियों से लड़ने में सहायक है मसलन कैंसर, ट्यूमर का विकास, सर्दी-जुखाम, रुमेटाइड अर्थराइटिस, दर्द, जोड़ों के दर्द, त्वचा सम्बंधी बीमारी, थकन, कमजोरी, मस्लस में दर्द, सेक्स सम्बंधी समस्याएं, सिरदर्द, गठिया, पाचनतंत्र सम्बंधी समस्या, लिवर सम्बंधी समस्या, संक्रमण आदि। आइए चिरायता के त्‍वचा और स्‍वास्‍थ्‍य लाभों की जानकारी लेते हैं।
लिवर की सुरक्षा
चूंकि चिरायता पेशाब की स्थिति को भी बेहतर करता है। यही नहीं पसीने आने में भी यह मदद करता है। इसका मतलब साफ है कि यह लिवर के लिए लाभकारी तत्व है। यह सूजन और जलन से तो बचाता ही है। साथ पेट में हा रही तमाम किस्म की समस्याओं को भी रोकता है। इससे लिवर की सुरक्षा तो होती है साथ ही कई अन्य समस्याएं आने से पहले ही निपट जाती हैं। यह हमारे रक्त को साफ करता है और रक्त संचार को बेहतर करता है। इसके अलावा चिरायता का एक बड़ा गुण यह भी है कि रक्त से टाक्सिन को निकाल बाहार करता है। इसके अलावा यह टिश्यू को क्षति होने से रोकता है जिससे लिवर के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

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त्वचा सम्बंधी समस्या का निदान
एग्जीमा, फंगस, कील-मुंहासे आदि तमाम त्वचा सम्बंधी समस्याओं को चिरायता से निदान किया जा सकता है। यही नहीं इससे बैक्टीरियल इंफेक्शन को भी दूर किया जा सकता है। जिन महिलाओं को मौसम बदलने से या फिर बरसात के मौसम में मुंहासों की समस्या होती है, उन्हें आवश्यक तौर पर इसका उपयोग करना चाहिए।
सर्दी-जुखाम
यह इसका सबसे आम और सर्वविदित गुण है। तमाम जड़ी बूटियों की तरह चिरायता भी सर्दी-जुखाम से लड़ने में सहायक है। इसका सेवन कोई भी कर सकता है। जिन लोगों को ठंड लगने की शिकायत होती है खासकर उन्हें जिन्हें सर्दी के कारण फ्लू तक हो जाता है, उन्हें चिरायता का सेवन आवश्यक तौरपर करना चाहिए। हालांकि अकसर यह माना जाता है कि जड़ी बूटियां गंभीर बीमारियों को ठीक करने में मददगार नहीं होती। लेकिन चिरायता के साथ ऐसा नहीं है। यह रेसपिरेटरी संक्रमण को न सिर्फ ठीक करता है वरन किसी को यदि परिवार से यह बीमारी मिली है तो भी इसमें सुधार लाया जा सकता है।

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कारगर एंटीबॉयोटिक-
बुखार ना होने की स्थिति में भी यदि इसका एक चम्मच सेवन प्रतिदिन करें तो यह चूर्ण किसी भी प्रकार की बीमारी चाहे वह स्वाइन फ्लू ही क्यों ना हो, उसे शरीर से दूर रखता है। इसके सेवन से शरीर के सारे कीटाणु मर जाते हैं। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक है। इसके सेवन से खून साफ होता है तथा धमनियों में रक्त प्रवाह सुचारू रूप से संचालित होता है।







कुंदरु (तिदूरी) की सब्जी है गुणों का खजाना




   कुंदरू को तिंदूरी भी कहा जाता है। यह ककड़ी वर्ग यानी कुकुरबिटेसी परिवार की सदस्य है। इसे ग्रीष्मकालीन (मार्च से जून) या बरसाती (जून-जुलाई से अक्टूबर-नवंबर) फसल के रूप में उगाया जा सकता है। इसे पुरानी लताओं की कटिंग से बोया जाता है। एक बार उगाए जाने पर सही देखरेख, पोषण एवं पौध संरक्षण के साथ पाँच-छः साल तक इससे फल प्राप्त किए जा सकते हैं|



*कुंदरू की सब्जी के अलावा फूल और पत्ते भी हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है। साथ ही यह प्रोटीन, कैल्शियम और कार्बोहाइड्रेट्स का भी बेहतर सोर्स है। कुंदरू खाने से पथरी की संभावना कम होती है। जिन्हें किडनी स्टोन है वो अगर कुंदरू खाते हैं तो स्टोन निकल जाता है। कुंदरू की जड़ों, तनों और पत्तियों में कई गुण हैं। ये चर्म रोगों, जुकाम, फेफड़ों के शोथ तथा डायबिटीज़ में लाभदायक बताया गया है। इसके अलावा अगर आप अपने खान-पान में सुधार करके आंखों से चश्मा हटाना चाहते हैं, तो भी कुंदरू का सेवन लाभ पहुंचाता है। कुंदरू एक स्वादिष्ट सब्जी होने के साथ पौष्टिक भी है। आयुर्वेदिक दृष्टि से इसके मूल (जड़) वमनकारक, रेचक, शोधघ्न (सूजन को कम करने वाले) होते हैं। इसके फल गरिष्ठ, मधुर व शीतल होते हैं।कुंदरू के फायदे भले ही आपको नजर न आते हों लेकिन यह सब्जी ऐसी है जिसके पत्ते और फूल भी उतने ही गुणकारी हैं जितना इसका फल है। हाल में एक शोध में यह माना गया है कि खाने में रोज 50 ग्राम कुंदरू का सेवन करने से हाई बीपी के मरीजों को आराम मिलता है।
*100 ग्राम कुंदरू में 93.5 ग्राम पानी होता है, 1.2 ग्राम प्रोटीन, 18 के कैलोरी ऊर्जा, 40 मिलीग्राम कैल्शियम, 3.1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 30 मिलीग्राम पोटैशियम, 1.6 ग्राम फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं।
*कुंदरू के कडुवे फल साँस रोगों, बुखार एवं कुष्ठ रोग के शमन के लिए उपयोग में लाए जाते हैं। मधुमेह में इसकी पत्तियों का चूर्ण जामुन की गुठली के चूर्ण व गुड़मार के साथ दिया जाना लाभदायक है
चश्मा हटाए कुंदरू का सेवन-
आदिवासियों के अनुसार कुंदरू के फल की अधकच्ची सब्जी लगातार कुछ दिनों तक खाने से आखों से चश्मा तक उतर जाता है। साथ ही माना जाता है कि इसकी सब्जी के निरंतर उपभोग से बाल झड़ने का क्रम बंद हो जाता है। यह गंजेपन से भी बचा जा सकता है|

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रोजाना कच्‍चा अंडा खाने के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ






   पहले लोग अंडे को माँसाहारी खाना मानते थे, वैसे अभी भी कुछ लोग मानते है. लेकिन अंडे खाने वालों का एक अलग वर्ग बन गया है, जहाँ पहले सिर्फ वेजिटेरियन व् नॉन वेजिटेरियन वर्ग होता था, अब एक तीसरा वर्ग भी है एग्गिटेरियन मतलब जो लोग मांस नहीं खाते लेकिन अंडे खाते है. अंडे में मौजूद पोषक तत्व के कारण इसे कोई नज़रअंदाज नहीं कर पाता. डॉक्टर सभी को इसे खाने की सलाह देते है.क्या आपने कभी अंडे को बिना पकाए खाने की बात सोची है? अगर नहीं, तो आपको बता दें कि अंडे को उसके नेचुरल रूप में उसी तरह खाने के ढ़ेरों फायदे हैं. अंडे को बिना पकाए खाने से उसमें मौजूद विटामिन, ओमेगा 3, जिंक, प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्व नष्ट नहीं होते हैं जो कई बार पकाने के दौरान या तो नष्ट हो जाते हैं या फिर उस मात्रा में नहीं मिल पाते हैं जिस रूप में मिलना चाहिए.
   अंडे को उसके मूल रूप में खाना थोड़ा अलग हो सकता है और अगर ये आपके लिए पहला मौका है तो आपको खराब भी लग सकता है. पर अगर आपने कच्चा अंडा खाने का फैसला कर लिया है तो सबसे पहले अंडे को अच्छी तरह, साबुन से धो लीजिए. इससे उसकी खोल पर जमी गंदगी साफ हो जाएगी.खाने-पीने की किसी भी चीज को आजमाने के दौरान इस बात का विशेष ख्याल रखना चाहिए कि आप जो कुछ भी खाएं वो नियंत्रित मात्रा में हो. अति किसी भी चीज की बुरी हो सकती है.
अंडे को उबालकर (boil egg), या किसी रेसिपी के रूप में उपयोग किया जाता है. एक उबले हुए अंडे में मौजूद पोषक तत्व व् उनकी मात्रा इस प्रकार है –




अंडे में मौजूद पोषक तत्व (Egg/ Ande ingredients list) व् उसके फायदे इस प्रकार है –

आयरन
एनीमिया को दूर करता है, ओक्सीजन का प्रवाह पुरे शरीर में करवाता है. अंडे में मौजूद आयरन आसानी से शरीर में घुल जाता है.




किडनी फेल (गुर्दे खराब) रोग के कारगर उपचार 
विटामिन A
त्वचा को हेल्थी रखता है, व् आँखों की रौशनी को बढाता है.
विटामिन डी
हड्डी व् दांत मजबूत होते है, साथ ही कैंसर व् इम्यून सिस्टम से जुड़ी परेशानी दूर करता है.
विटामिन E
इसमें मौजूद एंटीओक्सिडेंट रोगों से बचाता है, व् स्वास्थ्य अच्छा रखता है.
विटामिन B12
दिल की सुरक्षा करता है.
फोलेट
पुरानी कोशिकाओं की रक्षा करता है, साथ ही नई कोशिकाओं का निर्माण करता है. एनीमिया से भी बचाता है.
प्रोटीन
मसल, स्किन, ऑर्गन, बाल को सुरक्षित रखता है. अंडे में प्रोटीन की अधिकता बहुत होती है, जो वजन बढ़ाने में भी करिगर है, ये शरीर में आसानी से घुल जाती है.
कॉलिन
दिमाग के विकास व् कार्य में यह अहम भूमिका निभाता है

;*अंडे में एंटी-ऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा होती है. साथ ही शरीर के लिए आवश्यक अमीनो एसिड की मात्रा की पूर्ति भी इससे हो जाती है. अगर आपके घर में कोई बुजुर्ग है तो आप उसे कच्चा अंडा दे सकते हैं. इससे मांस पेशियों को ताकत मिलती है.
* कोलेस्ट्रॉल दो प्रकार के होते हैं. एक वो जो शरीर के लिए बेहतर होता है और दूसरा वो जो शरीर को नुकसान पहुंचाता है. को‍शिकाओं और हॉर्मोन के निर्माण के लिए कोलेस्ट्रॉल की आवश्यकता होती है. अंडे से मिलने वाला कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए अच्छा होता है.
आपको ये जानकर आश्चर्य हो सकता है कि कच्चा अंडा, पकाए गए अंडे की तुलना में कम संक्रमित होता है. कई बार ऐसा होता है कि पकाने के दौरान अंडे में मौजूद प्रोटीन की मूल संरचना बदल जाती है. जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
* कच्चा अंडा विटामिन का खजाना होता है. इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन बी-12 मौजूद होता है. कच्चा अंडा खाने से एनीमिया की समस्या दूर हो जाती है और इससे दिमाग भी तेज होता है.
*अंडे के पीले भाग में बायोटिन मिलता है जो बाल और त्वचा को मजबूती देने का काम करता है. अंडे के पीले भाग को बालों में लगाने से बाल कोमल-मुलायम होते हैं.
अंडे से स्वास्थ्य व् स्किन/बालों दोनों में फायदा होता है. इसे खाने के साथ साथ स्किन व् बालों में लगाने से भी फायदा मिलता है. नीचे आपको इन फायदों को डिटेल में बताया गया है-
प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत –
 अंडे में सबसे प्रमुख प्रोटीन होता है. प्रोटीन के उपयोग से शरीर में सारे टिश्यू बनते है, साथ ही पुराने की देखभाल की जाती है. प्रोटीन से अमीनो एसिड बनता है, लेकिन ये शरीर में नहीं बनता, हमें इसके लिए ऐसा भोज्य पदार्थ लेना होगा. एक अच्छे प्रोटीन से युक्त भोजन में बराबर मात्रा में अमीनो एसिड भी होता है, जिसकी हमारे शरीर को जरुरत होती है. अंडा प्रोटीन का खजाना है.

हड्डी मजबूत करे –
 कैल्शियम की कमी से हड्डी, दांत, नाख़ून कमजोर हो जाते है. फिर हड्डी मजबूत करने के लिए हमें तरह तरह की दवाइयों का सहारा लेना पड़ता है. दवाई से अच्छा है कि हम प्राकतिक रूप से अंडे का प्रयोग करें, इससे हड्डी दांत धीरे-धीरे मजबूत होने लगेंगें.
एग्ग वाइट के फायदे (egg white benefits) –

 अंडे की सफेदी में 0 कोलेस्ट्रोल होता है, इसमें 52 कैलोरी व् प्रोटीन 11 ग्राम होता है. अंडे की सफेदी में, उसके पीले भाग से ज्यदा प्रोटीन होता है. इसमें 0 कोलेस्ट्रोल होता है, जिससे इसे कोई भी आसानी से खा सकता है. इसमें फैट भी बहुत कम होता है.
एग्ग योल्क के फायदे (egg yolk benefits) – अंडे की सफेदी से ज्यादा पोषक तत्व उसके पीले भाग में होते है. इसमें विटामिन, मिनिरल्स सब अधिक होता है, जिससे ये स्किन, बालों के लिए बेस्ट होता है.
अंडे को दूध के फायदे (egg with milk benefits ) – 

अंडे को दूध के साथ मिला कर पीने से भी यह सेहत के लिए बहुत फायदे मंद होता है.
आयरन की कमी दूर करे – कई लोगों को शरीर में आयरन की कमी होती है, जिससे उन्हें सर दर्द, चिड़चिड़ापन, बदन दर्द, खून की कमी की शिकायत होती है. अंडे के पीले भाग में आयरन की अधिकता होती है, जिसे खाने से खून बढ़ता है, मेटापोलिस्म बढ़ता है. गर्भवती महिलाओं को अक्सर इसकी शिकायत होती है, इसलिए उन्हें अंडे खाने के लिए मुख्य रूप से बोला जाता है.

बालों व् आँखों की सुरक्षा (Egg benefits for hair)– 

इसमें विटामिन A होता है, जो बालों व् आँखों के लिए अच्छा होता है. कहते है जो बच्चे बचपन से ही अंडा का सेवन करते है, उनकी आई साईट (eye sight) जो अंडे का सेवन नहीं करते है उनके मुकाबले अधिक होती है. इससे बालों को भी मजबूती मिलती है. अंडा खाने के अलावा लगाने से बाल में अच्छा कंडीशनर होता है. अंडे को बालों में लगाने के लिए उसे हिना के साथ मिलाकर भी लगा सकते है, या इसके अलावा आप उसकी सफेदी को कुछ देर बालों में लगाकर छोड़ दे फिर धोएं. बाल सॉफ्ट चमकदार हो जायेंगें.
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाये – इसमें मौजूद विटामिन डी शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाता है.
वजन कम करने वालों के लिए –

 आप अगर अपना वजन कम कर रहे है तो आप अंडे को जरुर अपनी डाइट में शामिल करें. लेकिन आपको सिर्फ इसका सफ़ेद वाला हिस्सा खाना है, इसमें कैलोरी बस 17 (1 अंडे) होती है, जिसे खाने से हमें बाकि पोषक तत्व मिल जाते है.
दिमाग मजबूत करे – 

अंडे में कॉलिन दिमाग के विकास के लिए बहुत जरुरी है. कॉलिन एक ऐसा पोषक तत्व है, जो दिमाग को तेज बनाने व् विकास के लिए बहुत जरुरी होता है. छोटे बच्चे से लेकर बड़े बूढों तक के दिमाग को इसकी जरुरत पड़ती है. इसकी कमी से याददाश्त कम होती है. इसी की कमी से बच्चे मंद बुद्धि पैदा होते है. गर्भकाल के समय कॉलिन महिलाओं के लिए बहुत जरुरी पोषक तत्व है. ऐसे में अंडे से अच्छा कुछ नहीं जो एक साथ इतने फायदे देता है.
स्टेमिना बढ़ाये –

 एक अंडा खाने से आपको 6 gm प्रोटीन मिलती है, साथ ही एक बड़ी मात्रा में नुट्रीशियन मिलते है. बस इसमें विटामिन C नहीं होता है. अंडे को नीम्बू या संतरे के जूस के साथ सुबह के नाश्ते में खाना चाहिए, जिससे आपके शरीर में विटामिन C की भी पूर्ति हो जाये. इससे स्टेमिना बढ़ता है.
अंडे से फायदे तो बहुत है, लेकिन इससे कुछ नुकसान भी है, जिसका जानकारी आपको होना बहुत जरुरी है, ताकि आप इसे एक निर्धारित मात्रा में ही अपनी डाइट में शामिल करें.
अंडे से होने वाले नुकसान (Egg harmful effects)–
फ़ूड पोइजनिंग व् पेट से जुड़ी तकलीफ – अंडे को खाने से पहले ये जरुर देख ले कि वो अच्छे से पका है कि नहीं. कच्चा या आधा पका अंडा स्वास्थ्य के लिए हानि कारक होता है, इससे फ़ूड पोइजनिंग होती है. आधा पका अंडा खाने से उलटी, पेट दर्द, पेट ख़राब होना जैसी शिकायतें होती है.
सोडियम की अधिकता –

 अंडे की सफेदी में बहुत अधिक सोडियम होता है. जिस किसी इन्सान को सोडियम न खाने की सलाह दी जाती है, उन्हें अंडा सोच समझकर अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए.

कोलेस्ट्रोल रिस्क – 

जिस किसी को ब्लडप्रेशर, डायबटीज व् हाई कोलेस्ट्रोल की परेशानी हो, उन्हें अंडा सोच समझकर खाना चाइये, हफ्ते में 2 से ज्यादा ना खाएं, क्यूंकि इसमें कोलेस्ट्रोल की अधिकता होती है.
कुछ ध्यान देने वाली बातें-
वैसे तो आप अंडा करी बनाकर या उबालकर या फ्राई करके किसी भी तरह दिन में एक या दो बार खा सकते हैं लेकिन हेल्दी तरीके से खाने पर ही यह शरीर के लिए उपयोगी सिद्ध होता है।
• ऑमलेट बनाकर या स्क्रैब्लड रूप में अंडा कभी भी न खायें क्योंकि यह वज़न घटाने के प्रक्रिया पर पानी फेर देता है। इसको बनाने में बहुत तेल की ज़रूरत होती है, इसलिए यह उतना हेल्दी नहीं होता है।
• उबला हुआ अंडा वज़न घटाने की प्रक्रिया में सहायता करता है। फैट कम और पौष्टिकता से भरपूर होता है। लेकिन हजम आसानी से हो जाता है, सिर्फ अंडे की जर्दी का सेवन रोज न करें।
• अगर आप होलसम ब्रेकफास्ट करना चाहते हैं तो होल ग्रेन ब्रेड के साथ उबला हुआ अंडा या पोच्ड अंडा खा सकते हैं। इसमें फाइबर होता है और प्रोटीन पूरे दिन के लिए आपको ऊर्जा से भरपूर कर देता है।
*लोगों की यह धारणा गलत है कि अंडा में फैट उच्च मात्रा में होता है, इसलिए इसको रोज खाने से वज़न बढ़ने का भय होता है। लेकिन आहार विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग हेल्दी तरीके से वज़न घटाना चाहते हैं, वे ज़रूर अंडा को अपने डायट में शामिल करें।


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पेट के अल्सर (छाले) के घरेलू उपचार








अल्सर की बीमारी कैसे होती हैं.

जब मानव शरीर में स्थित भोजन को पचाने वाला अम्लीय पदार्थ अमाशय की दीवारों को क्षति पहुंचाने लगता हैं तो व्यक्ति को अल्सर का रोग हो जाता हैं.अल्सर व्यक्ति के अमाशय या छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में फोड़े निकलते हैं. अल्सर को अमाशय का अल्सर, पेप्टिक अल्सर तथा गैस्ट्रिक अल्सर के नाम से भी जाना जाता हैं.
कारण (Causes) –
अत्याधिक दर्द निवारक दवाओं का सेवन करना।
अधिक चाय या काफी पीना।
अधिक गरम मसालें खाना।
अधिक तनाव लेना।
गलत तरह के खान-पान करना।
अनियमित दिनचर्या।
अधिक धूम्रपान करना।
*अल्सर अधिक गर्म खट्टे, मिर्च मसलों वाला भोजन करने के कारण हो कसता हैं.
इसके अलावा जो व्यक्ति ज्यादा क्रोध करते हैं,तनावग्रस्त रहते हैं, जल्दी किसी भी कार्य को करने के लिए उत्तेजित रहते हैं, चिंता अधिक करते हैं, दूसरों सेइर्ष्या करते हैं. उन्हें भी यह बीमारी हो सकती हैं
*जो व्यक्ति अधिक चाय, कॉफ़ी तथा शराब का सेवनकरते हैं. उन्हें भी अल्सर हो सकता हैं



किडनी फेल (गुर्दे खराब) रोग के कारगर उपचार 
लक्षण (Symptoms) –
* अल्सर होने पर मानव शरीर में स्थित अमाशय तथा पक्वाशय में घाव होता हैं.
*धीरे – धीरे इस घाव से मनुष्य के ऊतक भी प्रभावितहोने लगते हैं.
*अमाशय में घाव होने के बाद पाचक रसों की क्रिया ठीक ढंग से कार्य नहीं कर पाती. जिससे ये घाव फोड़ों का रूप धारण कर लेते हैं.
पेट में कब्ज की शिकायत रहती हैं तथा मल के साथ खून भी आता हैं.
* इस रोग से ग्रस्त होने के बाद व्यक्ति शरीरिक रूप से अधिक कमजोर हो जाता हैं और उसके पेट की जलन उसकी छाती को भी प्रभावित करती हैं. जिससे उसके पेट के साथ – साथ छाती में भी जलन होने लगती हैं.
* इस रोग से पीड़ित व्यक्ति अधिकतर समय बुझा – बुझा सा रहता हैं, उसका स्वभाव चिडचिडा हो जाता हैं, जिसके परिणाम स्वरूप उसे छोटी – छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता हैं.
इलाज व सावधानी- पेप्टिक अल्सर का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। अपनी दिनचर्या व खान-पान में बदलाव करना ज़रूरी है। समय पर सोये व सुबह नियम से जल्दी उठने की आदत डाले। प्रातः व्यायाम करे या भ्रमण के लिए अवश्य जाये। इससे फेफड़ो को अधिक ऑक्सीजन मिलती है। पेट में कब्ज न होने दे। तेज मसालेदार, या तेज नमक मिर्च वाले खाने तथा तले - भुने खाद्य पदार्थो से परहेज करे।
भोजन में कच्ची सब्जिया जैसे, लौकी, टमाटर, गाजर, मूली, चुकंदर, व फलो में अमरुद, पपीता, अंजीर का सेवन करना फायदेमंद होगा। बेल फल का सेवन अलसर में लाभकारी साबित होगा। ३-५ ग्राम मुलैठी पाउडर गरम दूध के साथ पीने से अलसर से आराम मिलता है। ताजे फलो का रस व मट्ठा आदि का सेवन भी लाभकारी है।-
*पानी अधिक मात्रा में पिए। दिन में कम से कम ३ -४ लीटर पानी पीना उचित है। धूम्रपान व शराब का सेवन न करें। किसी भी तरह का उपचार शुरू करने से पहले डॉक्टर का परामर्श अवश्य ले। तनाव व चिंता से मुक्त रहे। हमेशा खुश रहे।
*अल्सर का रोग होने पर व्यक्ति के पेट में हमेशा जलन होती रहती हैं, उसे अधिक खट्टी ढकारें आती हैं, सिर में दर्द होने लगता हैं और चक्कर आने लगते हैं.

*.अल्सर के होने पर मनुष्य की भोजन के प्रति रूचि ख़त्म हो जाती हैं, उसके शरीर में पित्त की मात्रा बढती जाती हैं.

अल्सर के लिए घरेलू उपचार (Treatment Of Ulcer Disease)
*संतरे का रस (Orange Juice) -
यदि जांच कराने के बाद आपको पता चले की आपके पेट में घाव हो गया हैं तो इस घाव को जल्द भरने के लिए रोजाना दिन में दो बार एक छोटा गिलास संतरे का रस पियें. संतरे का रस रोजाना पीने से घाव जल्द ही भर जाएगा.गुडहल : गुडहल की पत्तियों के रस का शरबत बनाकर पीने से अल्सर रोग ठीक होता है।
बेलफल की पत्तियों का सेवन :
बेल की पत्तियों में टेनिन्स नामक गुण होता है जो पेट के अल्सर को ठीक करते हैं। बेल का जूस पीने से पेट का दर्द और दर्द ठीक होता है।
गाजर और पत्ता गोभी का रस :
पत्तागोभी पेट में खून के प्रभाव को बढ़ाती है और अल्सर को ठीक करती है। पत्ता गोभी और गाजर का रस मिलाकर पीना चाहिए। पत्ता गोभी में लेक्टिक एसिड होता है जो शरीर में एमीनो एसिड को बनाता है।
सहजन :
दही के साथ सहजन के पत्तों का बना पेस्ट बना लें और दिन में कम से कम एक बार इसका सेवन करें। इस उपाय से पेट के अल्सर में राहत मिलती है।
मेथी का दाना :
अल्सर को ठीक करने में मेथी बेहद लाभदायक होती है। एक चम्मच मेथी के दानों को एक गिलास पानी में उबालें और इसे ठंडा करके छान लें। अब आप शहद की एक चम्मच को इस पानी में मिला लें और इसका सेवन रोज दिन में एक बार जरूर करें। ये उपाय अल्सर को जड़ से खत्म करता है।
.केला (Banana) -
अल्सर के रोग से पीड़ित होने पर आप केलों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. केलों का इस्तेमाल करने के लिए दो केले लें और उन्हें छिल लें. इसके बाद इन केले के गुदे को मैश कर लें और उसमें थोडा सा तुलसी के पत्तों का रस मिला दें. इसके बाद इसका सेवन करें. आपको अल्सर के रोग में काफी राहत मिलेगी.
अल्सर के रोग से पीड़ित रोगी के लिए कच्चे केले भी बहुत ही लाभकारी सिद्ध होते हैं. इसलिए इसका भी प्रयोग वह इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए कर सकत़ा हैं. इस रोग को दूर करने के लिए अधिक से अधिक कच्चे केले की सब्जी बनाएं और उसमें हिंग पाउडर मिलाकर खाएं.
पेट में दर्द (Abdominal Pain) –
यदि अल्सर कारोग होने के बाद आपके पेट में हेमशा दर्द रहता हैं तो इस दर्द को दूर करने के लिए एक काम्म्च जीरा, एक चुटकी सेंधा नमक, दो रत्ती घी में भुनी हुई हिंग लेकर इन सभी को एक साथ मिला लें. इसके बाद इस चुर्ण का सेवन दिन में दो बार भोजन ग्रहण करने के पश्चात् करें. आपको लाभ होगा.
अजवायन (Parsley) –
अल्सर के रोग से जल्द मुक्त होने के लिए 3 छोटी हरड, कुछ मुनक्का जिनमें बीज न हो, डेढ़ चम्मच अजवायन लें. इसके बाद इन सभी चीजों को मिलाकर चटनी बना लें और इस चटनी का सेवन रोजाना करें.
चुर्ण (Powder) –
अल्सर के रोग को से बचने एक लिए आप चुर्ण का प्रयोग भी कर सकते हैं. चुर्ण बनाने के लिए
* 1 चम्मच अजवायन, 3 चम्मच धनिया पाउडर, 2 चम्मच जीरा पाउडर और एक चुटकी हिंग पाउडर लें और इन सबको मिला लें. अब इस चुर्ण का सेवन भोजन करने के पश्चात् करें. जल्द ही आपको इस रोग से मुक्ति मिल जायेगी.
* आंवले का मुरब्बा (Amla ’s Jam) –
अगर अल्सर के रोग से पीड़ित व्यक्ति दिन में एक बार आंवले के मुरब्बे के रस में आधा गिलास अनार का जूस मिलाकर पियें तो भी उसे इस रोग से जल्द ही आराम मिल जाता हैं.

शहद :

पेट के अल्सर को कम करता है शहद। क्योकिं शहद में ग्लूकोज पैराक्साइड होता है जो पेट में बैक्टीरिया को खत्म कर देता ह। और अल्सर के रोगी को आराम मिलता है।
नारियल :
नारियल अल्सर को बढ़ने से रोकता है साथ ही उन कीड़ों को भी मार देता है जो अल्सर को बढ़ाते हैं। नारियल में मौजूद एंटीबेक्टीरियल गुण और एंटी अल्सर गुण होते हैं। इसलिए अल्सर के रोगी को नारियल तेल और नारियल पानी का सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए।
बादाम :
बादाम को पीसकर इसे अल्सर के रोगी को देना चाहिए। इन बादामों को इस तरह से बारीक चबाएं कि यह दूध की तरह बनकर पेट के अंदर जाएं।
लहसुन :
लहुसन की तीन कच्ची कलियों को कुटकर पानी के साथ सेवन करें।
गाय का दूध :
गाय के दूध में हल्दी को मिलाकर पीना चाहिए। हल्दी में मौजूद गुण अल्सर को बढ़ने नहीं देते हैं।
*आंवला (Amla) -
अल्सर से जल्द छुटकारा पाने के लिए के लिए 2 चम्मच आंवले का पिसा हुआ चुर्ण लें और इसे रात को पानी में भिगोकर सो जाएँ. इसके बाद एक चम्मच पीसी हुई सोंठ लें, 2 चम्मच मिश्री का पाउडर लें. अब इन सभी को उस पानी में मिला दें.इसके बाद इस पानी का सेवन करें. अल्सर में काफी लाभ होगा.
अल्सर के लिए जरूरी परहेज :
*अधिक मिर्च मसाले और जंक फूडस से परहेज करें।
*चाय, काफी और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन करना बंद कर दें।
*अपने को तनाव मुक्त रखें। हर रोज सुबह-शाम पैदल घूमें।
*अधिक दवाओं का सेवन न करें।
*अल्सर का अधिक बढ़ने पर इसका ऑपरेशन ही एक मात्र उपाय है। यदि यह कैंसर में बदल जाता है तो अल्सर की कीमोथैरेपी की जाती है।
*यदि आप चाहते हैं कि अल्सर का रोग आपको न लगें तो आपको अपने खान-पान और गलत लतों को छोड़ना होगा।

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