22.1.17

चर्म रोग दूर करने के घरेलू उपाय:Domestic measures to remove skin diseases

   

  चर्म रोग कई प्रकार के होते हैं। जैसे कि- दाद, खाज, खुजली, छाछन, छाले, खसरा, फोड़े, फुंसी आदि। बहुत से मामलों में हम आयुवेदिक व घरेलू उपचार से रोग को ठीक कर सकते हैं, पर कई मामलो में एक अच्छे dermatologist से सलाह लेना उचित होता है। Skin disease में बहुत से लोगों को होमियोपैथी की दवाओं से भी काफी लाभ मिलता है।

चर्म रोग होने के कारण -
चर्म रोग होने के कई कारण हो सकते हैं|खुजली का रोग ज़्यादातर शरीर में खून की खराबी के कारण उत्पन्न होता है।
गरम और तीखीं चिज़े खाने पर फुंसी और फोड़े निकल आ सकते हैं।
आहार ग्रहण करने के तुरंत बाद व्यायाम करने से भी चर्म रोग होने की संभावना रहती है।
उल्टी, छींक, डकार, वाहर (Fart), पिशाब, और टट्टी इन सब आवेगों को रोकने से चर्म रोग होने का खतरा रहता है।
शरीर पर लंबे समय तक धूल मिट्टी और पसीना जमें रहने से भी चर्म रोग हो सकता है।
और भोजन के बाद विपरीत प्रकृति का भोजन खाने से कोढ़ का रोग होता है। (उदाहरण – आम का रस और छाछ साथ पीना)।
अधिक कसे हुए कपड़े पहेनने पर और नाइलोन के वस्त्र पहनने पर भी चमड़ी के विकार ग्रस्त होने का खतरा होता है।
नहाने के साबुन में अधिक मात्रा में सोडा होने से भी यह रोग हो सकता है।
अधिकतर समय धूप में बिताने वाले लोगों को चर्म रोग होने का खतरा ज्यादा होता है।
किसी एंटीबायोटिक दवा के खाने से साइड एफेट्स होने पर भी त्वचा रोग हो सकता है।
महिलाओं में मासिक चक्र अनियमितता की समस्या हो जाने पर भी उन्हे चर्म रोग होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है।
शरीर में ज़्यादा गैस जमा होने से खुश्की का रोग हो सकता है।
त्वचा रोग के लक्षण- 
दाद-खाज होने पर चमड़ी एकदम सूख जाती है, और उस जगह पर खुजलाने पर छोटे छोटे दाने निकल आते हैं। समान्यतः किसी भी प्रकार के चर्म रोग में जलन, खुजली और दर्द होने की शिकायत  रहती है। शरीर में तेजा गरमी इकट्ठा होने पर चमड़ी पर सफ़ेद या भूरे दाग दिखने लगते हैं या फोड़े और फुंसी निकल आते हैं और समय पर इसका उपचार ना होने पर इनमें पीप भी निकलनें लगता है।
त्वचा रोग होने पर भोजन में परहेज़-

* भोजन में अचार, नींबू, नमक, मिर्च, टमाटर तैली वस्तुएं, आदि चीज़ों का सेवन बिलकुल बंद कर देना चाहिए। (चर्म रोग में कोई भी खट्टी चीज़ खाने से रोग तेज़ी से पूरे शरीर में फ़ेल जाता है।)।
*अगर खाना पचने में परेशानी रहती हों, या पेट में गैस जमा होती हों तो उसका उपचार तुरंत करना चाहिए। और जब यह परेशानी ठीक हो जाए तब कुछ दिनों तक हल्का भोजन खाना चाहिए।
*बाजरे और ज्वार की रोटी बिलकुल ना खाएं। शरीर की शुद्धता का खास खयाल रक्खे।
त्वचा रोग हो जाने पर, समय पर सोना, समय पर उठना, रोज़ नहाना, और धूप की सीधी किरणों के संपर्क से दूर रहेना अत्यंत आवश्यक है।



*खराब पाचनतत्र वाले व्यक्ति को चर्म रोग होने के अधिक chances होते हैं।
*त्वचा की किसी भी प्रकार की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को हररोज़ रात को सोने से पूर्व एक गिलास हल्के गुनगुने गरम दूध में, एक चम्मच हल्दी मिला कर दूध पीना चाहिए।
*त्वचा रोग होने पर बीड़ी, सिगरेट, शराब, बीयर, खैनी, चाय, कॉफी, भांग, गांजा या अन्य किसी भी दूसरे नशीले पदार्थों का सेवन ना करें।
त्वचा रोग में  घरेलू उपचार- 
*पिसा हुआ पोदीना लेप बना कर चहेरे पर लगाया जाए और फिर थोड़ी देर के बाद चहेरे को ठंडे पानी से धो लिया जाए तो चहेरे की गरमी दूर हो जाती है, तथा स्किन चमकदार बनती है।

*अजवायन को पानी में उबाल कर जख्म धोने से उसमे आराम मिल जाता है।
गर्म पानी में पिसे हुए अजवायन मिला कर, उसका लेप दाद, खाज, खुजली, और फुंसी पर लगाने से फौरन आराम मिल जाता है।
*नमक मिले गर्म पानी से त्वचा को धोने या सेक करने से हाथ-पैर और ऐडियों की दरारें दूर होती हैं और दर्द में फौरन आराम मिल जाता है।
*गरम पानी में नमक मिला कर नहाने से सर्दी के मौसम में होने वाले त्वचा रोगों के सामने रक्षण मिलता है। और अगर रोग हो गए हों तो इस प्रयोग के करने से रोग समाप्त हो जाते हैं।
*नहाते समय नीम के पत्तों को पानी के साथ गरम कर के, फिर उस पानी को नहाने के पानी के साथ मिला कर नहाने से चर्म रोग से मुक्ति मिलती है।
*नीम की कोपलों (नए हरे पत्ते) को सुबह खाली पेट खाने से भी त्वचा रोग दूर हो जाते हैं।
त्वचा के घाव ठीक करने के लिए नीम के पत्तों का रस निकाल कर घाव पर लगा कर उस पर पट्टी बांध लेने से घाव मिट जाते हैं। (पट्टी समय समय पर बदलते रहना चाहिए)।
*मूली के पत्तों का रस त्वचा पर लगाने से किसी भी प्रकार के त्वचा रोग में राहत हो जाती है।
*प्रति दिन तिल और मूली खाने से त्वचा के भीतर जमा हुआ पानी सूख जाता है, और सूजन खत्म खत्म हो जाती है।
*मूली का गंधकीय तत्व त्वचा रोगों से मुक्ति दिलाता है।
*मूली में क्लोरीन और सोडियम तत्व होते है, यह दोनों तत्व पेट में मल जमने नहीं देते हैं और इस कारण गैस या अपचा नहीं होता है।
*मूली में मेग्नेशियम की मात्रा भी मौजूद होती है, यह तत्व पाचन क्रिया नियमन में सहायक होता है। जब पेट साफ होगा तो चमड़ी के रोग होने की नौबत ही नहीं होगी।
हर रोज़ मूली खाने से चहरे पर हुए दाग, धब्बे, झाईयां, और मुहासे ठीक हो जाते हैं।
*त्वचा रोग में सेब के रस को लगाने से उसमें राहत मिलती है। प्रति दिन एक या दो सेब खाने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं। त्वचा का तैलीयपन दूर करने के लिए एक सेब को अच्छी तरह से पीस कर उसका लेप पूरे चहरे पर लगा कर दस मिनट के बाद चहरे को हल्के गरम पानी से धो लेने पर “तैलीय त्वचा” की परेशानी से मुक्ति मिलती है।
*सूखी चमड़ी की शिकायत रहती हों तो सरसों के तैल में हल्दी मिश्रित कर के उससे त्वचा पर हल्की मालिश करने से त्वचा का सूखापन दूर हो जाता है।
*हल्दी को पीस कर तिल के तैल में मिला कर उससे शरीर पर मालिश करने से चर्म रोग जड़ से खत्म होते हैं।
*चेहरे के काले दाग और धब्बे दूर करने के लिए हल्दी की गांठों को शुद्ध जल में घिस कर, उस के लेप को, चेहरे पर लगाने से दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं।
*करेले के फल का रस पीने से शरीर का खून शुद्ध होता है। दिन में सुबह के समय बिना कुछ खाये खाली पेट एक ग्राम का चौथा भाग “करेले के फल का रस” पीने से त्वचा रोग दूर होते हैं।
*दाद, खाज और खुजली जैसे रोग, दूर करने के लिए त्वचा पर करेले का रस लगाना चाहिए।
*रुई के फाये से गाजर का रस थोड़ा थोड़ा कर के चहेरे और गरदन पर लगा कर उसके सूखने के बाद ठंडे पानी से चहेरे को धो लेने से स्किन साफ और चमकीली बन जाती है।
*प्रति दिन सुबह एक कप गाजर का रस पीने से हर प्रकार के त्वचा रोग दूर होते हैं। सर्दियों में त्वचा सूखने की समस्या कई लोगों को होती है, गाजर में विटामिन A भरपूर मात्रा में होता है, इस लिए रोज़ गाजर खाने से त्वचा का सूखापन दूर होता है।
*पालक और गाजर का रस समान मात्रा में मिला कर उसमें दो चम्मच शहद मिला कर पीने से, सभी प्रकार के चर्म रोग नाश होते हैं।
*गाजर का रस संक्रमण दूर करने वाला और किटाणु नाशक होता है, गाजर खून को भी साफ करता है, इस लिए रोज़ गाजर खाने वाले व्यक्ति को फोड़े फुंसी, मुहासे और अन्य चर्म रोग नहीं होते हैं।
*काली मिट्टी में थोड़ा सा शहद मिला कर फोड़े और फुंसी वाली जगह पर लगाया जाए तो तुरंत राहत हो जाती है।
*फुंसी पर खाज,शहद लगाने से फौरन राहत हो जाती है।
*शहद में पानी मिला कर पीने से फोड़े, फुंसी, और हल्के दाग दूर हो जाते हैं।
*सेंधा नमक, दूध, हरड़, चकबड़ और वन तुलसी को समान मात्रा में ले कर, कांजी के साथ मिला कर पीस लें। तैयार किए हुए इस चूर्ण को दाद, खाज और खुजली वाली जगहों पर लगा लेने से फौरन आराम मिल जाता है।
*हरड़ और चकबड़ को कांजी के साथ कूट कर, तैयार किए हुए लेप को दाद पर लगाने से दाद फौरन मीट जाता है।
*पीपल की छाल का चूर्ण लगा नें पर मवाद निकलने वाला फोड़ा ठीक हो जाता है। चार से पाँच पीपल की कोपलों को नित्य सुबह में खाने से एक्ज़िमा रोग दूर हो जाता है। (यह प्रयोग सात दिन तक लगातार करना चाहिए)।



*नीम की छाल, सहजन की छाल, पुरानी खल, पीपल, हरड़ और सरसों को समान मात्रा में मिला कर उन्हे पीस कर उसका चूर्ण बना लें। और फिर इस चूर्ण को गौमूत्र में मिश्रित कर के त्वचा पर लगाने से समस्त प्रकार के जटिल त्वचा रोग दूर हो जाते हैं।
*अरण्डी, सौंठ, रास्ना, बालछड़, देवदारु, और बिजौरे की छड़ इन सभी को बीस-बीस ग्राम ले कर एक साथ पीस लें। उसके बाद इन्हे पानी में मिला कर लेप तैयार कर लें और फिर उस लेप को त्वचा पर लगा लें। इस प्रयोग से समस्त प्रकार के चर्म रोग दूर हो जाते हैं।
*खीरा खाने से चमड़ी के रोग में राहत मिलती है। ककड़ी के रस को चमड़ी पर लगाने से त्वचा से मैल दूर होता है, और चेहरा glow करता है। ककड़ी का रस पीने से भी शरीर को लाभ होता है।
*प्याज को आग में भून कर फोड़ों और फुंसियों और गाठों पर बांध देने से वह तुरंत फुट जाती हैं। अगर उनमें मवाद भरा हों तो वह भी बाहर आ निकलता है। हर प्रकार की जलन, सूजन और दर्द इस प्रयोग से ठीक हो जाता है। इस प्रयोग से infection का जख्म भी ठीक हो जाता है। प्याच को कच्चा या पक्का खाने से त्वचा में निखार आता है।
*प्रति दिन प्याज खाने वाले व्यक्ति को लू (Heat stroke) कभी नहीं लगती है।
*पोदीने और हल्दी का रस समान मात्रा में मिश्रित कर के दाद खाज खुजली वाली जगहों पर लगाया जाए तो फौरन राहत मिल जाती है।
*खाज और खुजली की समस्या में ताज़ा सुबह का गौमूत्र त्वचा पर लगाने से आराम मिलता है।
*जहां भी फोड़े और फुंसी हुए हों, वहाँ पर लहसुन का रस लगाने से फौरन आराम मिल जाता है।
*लहसुन और सूरजमुखी को एक साथ पीस कर पोटली बना कर गले की गांठ पर (कण्ठमाला की गील्टियों पर) बांध देने से लाभ मिलता है।
*सरसों के तेल में लहसुन की कुछ कलीयों को डाल कर उसे गर्म कर के, (हल्का गर्म) उसे त्वचा पर लगाया जाए तो खुजली और खाज की समस्या दूर हो जाती है।
एक्जिमा रोग से पीड़ित व्यक्ति का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-
एक्जिमा रोग को ठीक करने के लिए नाड़ी शोधन, भस्त्रिका, प्राणायाम क्रिया करना भी लाभदायक है। लेकिन इस क्रिया को करने के साथ-साथ रोगी व्यक्ति को प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार भी करना चाहिए तभी एक्जिमा रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है।
एक्जिमा रोग से पीड़ित रोगी को प्राकृतिक चिकित्सा से इलाज कराने के साथ-साथ कुछ खाने पीने की चीजों जैसे- चाय, कॉफी तथा उत्तेजक पदार्थों का परहेज भी करना चाहिए तभी यह रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है।
*एक्जिमा रोग को ठीक करने के लिए हरे रंग की बोतल के सर्यूतप्त नारियल के तेल से पूरे शरीर की मालिश करनी चाहिए और धूप में बैठकर या लेटकर शरीर की सिंकाई करनी चाहिए। इससे एक्जिमा रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
*इस रोग से पीड़ित रोगी को आसमानी रंग की बोतल का सूर्यतप्त जल 28 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन कम से कम 8 बार पीना चाहिए तथा रोगग्रस्त भाग पर हरे रंग का प्रकाश कम से कम 25 मिनट तक डालना चाहिए। इस प्रकार से कुछ दिनों तक उपचार करने से एक्जिमा रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
*औषधियों के द्वारा एक्जिमा रोग का कोई स्थायी इलाज नहीं हैं, लेकिन प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा एक्जिमा रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है।
*एक्जिमा रोग में सबसे पहले रोगी व्यक्ति को गाजर का रस, सब्जी का सूप, पालक का रस तथा अन्य रसाहार या पानी पीकर 3-10 दिन तक उपवास रखना चाहिए। फिर इसके बाद 15 दिनों तक फलों का सेवन करना चाहिए और इसके बाद 2 सप्ताह तक साधारण भोजन करना चाहिए। इस प्रकार से भोजन का सेवन करने की क्रिया उस समय तक दोहराते रहना चाहिए जब तक कि एक्जिमा रोग पूरी तरह से ठीक न हो जाए।
*इस रोग से पीड़ित रोगी को फल, हरी सब्जी तथा सलाद पर्याप्त मात्रा में सेवन करना चाहिए तथा 2-3 लीटर पानी प्रतिदिन पीना चाहिए।
*एक्जिमा रोग से पीड़ित रोगी को नमक, चीनी, चाय, कॉफी, साफ्ट-ड्रिंक, शराब आदि पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
*प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार एक्जिमा रोग से पीड़ित रोगी को शाम के समय में लगभग 15 मिनट तक कटिस्नान करना चाहिए। इसके बाद पीड़ित रोगी को नीम की पत्ती के उबाले हुए पानी से स्नान करना चाहिए। इस पानी से रोगी को एनिमा क्रिया भी करनी चाहिए जिससे एक्जिमा रोग ठीक होने लगता है।



*प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार सूत्रनेति, कुंजल तथा जलनेति करना भी ज्यादा लाभदायक है। इन क्रियाओं को करने के फलस्वरूप एक्जिमा रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
*रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह के समय में उपचार करने के साथ-साथ हलासन, मत्स्यासन, धनुरासन, मण्डूकासन, पश्चिमोत्तानासन तथा जानुशीर्षसन क्रिया करनी चाहिए। इससे उसका एक्जिमा रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
*सुबह के समय में रोगी व्यक्ति को खुली हवा में धूप लेकर शरीर की सिंकाई करनी चाहिए तथा शरीर के एक्जिमा ग्रस्त भाग पर कम से कम 2-3 बार स्थानीय मिट्टी की पट्टी का लेप करना चाहिए। जब रोगी के रोग ग्रस्त भाग पर अधिक तनाव या दर्द हो रहा हो तो उस भाग पर भाप तथा गर्म-ठंडा सेंक करना चाहिए।
*प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार एक्जिमा रोग से पीड़ित रोगी को सप्ताह में 1-2 दिन भापस्नान तथा गीली चादर लपेट स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद रोगग्रस्त भाग की कपूर को नारियल के तेल में मिलाकर मालिश करनी चाहिए या फिर सूर्य की किरणों के द्वारा तैयार हरा तेल लगाना चाहिए। रोगी व्यक्ति को इस उपचार के साथ-साथ सूर्यतप्त हरी बोतल का पानी भी पीना चाहिए।
*नीम की पत्तियों को पीसकर फिर पानी में मिलाकर सुबह के समय में खाली पेट पीना चाहिए जिसके फलस्वरूप एक्जिमा रोग धीरे-धीरे ठीक होने लगता है।
चरम रोग नुस्खे -
*गर्मी की घमौरियों पर बर्फ का टुकड़ा मलने से घमौरियां मुरझा जाती है और राहत मिलती है.
-तुलसी का अर्क लगाने से सभी तरह के चरम रोग चले जाते है .
- लहसुन पिस क्र उसमे पानी मिलकर लगाने से भी ठीक होता है .
-हाथ पाँव में जलन की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया व मिश्री मिलाकर पीस कर छान ले. खाना खाने के बाद 5-6 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण लेने से राहत मिलती है.
-नीम की पत्तियों को पीसकर हाथ पेरों पर लेप करने से जलन शांत होती है.
-चर्म रोगों में फिटकरी बड़ी गुणकारी होती है. जिस स्थान पर चर्म रोग हुआ हो उस स्थान को बार -बार फिटकरी के पानी से धोने से लाभ होता है.
-बादाम का तेल चहरे पर विशेषकर आँखों के आसपास मलने से झुर्रियां नहीं पड़ती.
-जड़ सहित तुलसी का हरा भरा पौधा लेकर धो लें, इसे पीसकर इसका रस निकालें। आधा लीटर पानी- आधा लीटर तेल डालकर हल्की
20 ग्राम शहद ठंडे पानी में मिलाकर चार पांच महीने तक रोज सुबह पीवे |
-प्रतिदिन 10 ग्राम सौंफ बिना मीठा मिलाये वैसे ही चबा -चबा कर नियमित कुछ दिनों तक खाने से रक्त शुद्ध होता है और त्वचा का रंग साफ़ होता है.
-गर्मी के दिनों में नींबू का शरबत पीये. इससे खून साफ़ होता है और ठंडक भी मिलती है.
-नीम के पत्ते डाल कर उबाले गए पानी से स्नान करने से चर्म रोग मिटते है.
-दाद, खाज, फुंसी, फोड़े इत्यादि चर्म रोगों में ताजे संतरे के छिलके पीस कर लगाने से लाभ होता है.
-सर्दी के दिनों में तिल का शुद्ध तेल शरीर पर मलने से शरीर में गर्मी आती है. रक्त की गति तीव्र होती है और त्वचा का रूखापन भी समाप्त होता है.
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