Friday, January 13, 2017

बवासीर(मस्से) की अनुभूत चिकित्सा


    
 इस रोग में गुदा की भीतरी दीवार में मौजूद खून की नसें सूजने के कारण तनकर फूल जाती हैं। इससे उनमें कमजोरी आ जाती है और मल त्याग के वक्त जोर लगाने से या कड़े मल के रगड़ खाने से खून की नसों में दरार पड़ जाती हैं और उसमें से खून बहने लगता है। बवासीर दो तरह की होती है-भीतरी एवं बाहरी। भीतरी बवासीर की दशा में अंदरूनी रक्तपात होता है जिसमें दर्द नहीं होता। बाहरी बवासीर में इंसान को दर्द महसूस होता है क्योंकि इसमें गूदे में सूजन की वजह से काफी पीड़ा होती है। बवासीर के कई कारण हो सकते हैं जिनमें प्रमुख हैं वंशानुगत दशा,खानपान सही न होना, फाइबर की कमी गूदे की कैविटी में असामान्य वृद्धि ,लम्बे समय तक बैठे रहना और कब्ज़ की समस्या।इस बीमारी में गुदा द्वार पर मस्से हो जाते है। मलत्याग के समय इन मस्सो में असहनीय पीड़ा होती है। यह बहुत अधिक पीड़ादायक रोग है। अनियमित खान-पान और कब्ज की वजह से भी बवासीर हो सकती है। इस बीमारी को अर्श, पाइलस या मूलव्याधि के नाम से भी जाना जाता बवासीर को ठीक करने के लिए नीचे दिए गए घरेलू उपचारों में से किसी का भी सहारा लिया जा सकता है।
*एलोवेरा में काफी जलनरोधी गुण होते हैं, जिसकी वजह से यह बवासीर की समस्या से छुटकारा दिलाने का काफी बेहतरीन तरीका साबित होता है। यह काफी आसान तरीकों से बवासीर के लक्षणों से आपको निजात दिलाता है। एलो वेरा की एक पत्ती लें तथा इसके सारे काँटों को तोड़कर फेंक दें। इसके बाद इसे फ्रिज (fridge) में रख दें। इसके बाद ठंडी सेंक का दोगुना प्रभाव प्राप्त करने के लिए इसका प्रयोग प्रभावित भाग पर करें। एलो वेरा जलन और सूजन को कम करने में आपकी मदद करता है। आप सूजी हुई धमनियों को ठीक करने के लिए एलो वेरा की पत्तियों से निकाले गए जेल (gel) का प्रयोग कर सकते हैं।
*सेब का सिरका बवासीर की समस्या को दूर करने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक पात्र में थोड़ा सा सेब का सिरका लें और इसमें रुई का कपड़ा डुबोएं। इसे अपने बवासीर वाले भाग पर तुरंत आराम प्राप्त करने के लिए लगाएं। हालांकि सीधे इसे लगाने से आपको कुछ देर तक काफी जलन होगी। इस समय आप इसका प्रयोग करने से परहेज भी कर सकते हैं, पर यह खुजली और दर्द को तुरंत कम कर देता है। यह विधि सिर्फ बाहरी बवासीर के लिए ही है। अंदरूनी बवासीर के लिए एक चम्मच सेब के सिरके में थोड़ा सा पानी मिश्रित करके पियें। इसे दर्द और खून निकलने की समस्या से छुटकारा मिलता है।
    रक्त की मौजूदगी एक ऐसा लक्षण है, जो हमेशा बवासीर की स्थिति में दिखता है। अगर आपको अंदरूनी बवासीर है तो आपको टॉयलेट पेपर (toilet paper) पर खून दिख सकता है। पर अगर आपको बाहरी बवासीर है, तो आपके मलाशय के पास खून का थक्का या सूजन जमी देखी जा सकती है।ठंडी सेंक सिकुड़न में सहायता करती है। यह दर्द को कम करती है और खुजली से तुरंत आराम दिलाती है। ठंडी सेंक की मदद से सूजन काफी कम हो जाती है और इसके फलस्वरूप आपके लिए मलत्याग करना काफी आसान हो जाता है। अतः एक साफ़ कपड़े में बर्फ का टुकड़ा बांधें तथा इसका प्रयोग अपने बवासीर के ऊपर करें। इसका प्रयोग दिन में कई बार करें। इससे रक्त की धमनियां सिकुड़ जाती हैं, जिसके फलस्वरूप बवासीर से छुटकारा मिलता है।
*नींबू का रस एंटीऑक्सीडेंटस से युक्त होता है और बवासीर की समस्या से निपटने में आपकी काफी मदद करता है। इसका प्रयोग सीधे सूजन वाली प्रभावित जगह पर किया जा सकता है। आप नींबू के रस में अदरक और थोड़े से स्वाद के लिए शहद का मिश्रण करके इसका सेवन भी कर सकते हैं और इस फल के दर्द और जलन को कम करने के गुणों से अच्छी तरह वाकिफ हो सकते हैं।
गर्म पानी में डुबोकर रखें। पानी में खुद को डुबोये रखने से खुजली और दर्द से काफी छुटकारा प्राप्त होता है। इससे रक्त की धमनियों को सुकून मिलता है। 15 से 20 मिनट तक प्रभावित भागों को गर्म पानी में डुबोकर रखें। आप प्रभावित भाग को गीले तौलिये से भी पोंछ सकते हैं, क्योंकि इससे इसे सूखने में आसानी होती है। बेहतर परिणामों के लिए इस प्रक्रिया को बार बार दोहराएं।
*छाछ बवासीर के इलाज का एक बेहतरीन विकल्प है। अजवाइन का पाउडर और 1 ग्राम काला नमक 1 गिलास छाछ में मिश्रित करें। रोजाना दोपहर का खाना खाने के बाद एक गिलास छाछ का सेवन करें। इससे आपको बवासीर की समस्या से काफी आराम मिलेगा। छाछ आपको दर्द से बचाता है और शरीर में नमी का संचार करता है।
*खाना आसानी से हज़म करने और मलाशय का स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए फाइबर युक्त भोजन काफी फायदेमंद होता है। फाइबर के पोषक तत्व मल को नर्म करने में मदद करते हैं और आँतों की सारी प्रणाली को साफ़ सुथरा रखने में सहायता करते हैं। फाइबर युक्त भोजन के सेवन से कब्ज़ की समस्या से भी आराम प्राप्त होता है। फाइबर युक्त भोजनों में प्रमुख हैं पटसन के बीज, प्रून (prune), नाशपाती, सब्जियां और बीन्स (beans)।
*रोजाना कम से कम 8 गिलास पानी पिएं, क्योंकि इससे शरीर की अशुद्धियों को दूर करने में सहायता मिलती है। पानी आपके मलाशय को स्वस्थ बनाकर रखता है, जिससे ये नर्म और नमीयुक्त रहता है और आपका मल भी इससे नर्म होता है। अपनी अंदरूनी प्रणाली को साफ करने के लिए हमेशा पानी पियें। पानी आपके शरीर में नमी का संचार करता है और आपके मल को नर्म बनाता है। इसी तरह फाइबर युक्त भोजन भी मल नर्म करते हैं और मलत्याग की प्रक्रिया में होने वाले दर्द में काफी कमी करते हैं।
*दूध में बरगद का लैटेक्स मिलाने से भी फायदा होता है अगर रोज़ाना इसका प्रयोग किया जाए।
*बवासीर की समस्या को आसानी से दूर करने के लिए 1 कप दही लें और उसमें थोड़ा सरसों का पाउडर मिलाएं और इसे पीकर आराम करें। घर पर बनी दही का प्रयोग फायदेमंद है
*, बेर में जलन दूर करने के प्राकृतिक तत्व होते हैं। अच्छे परिणामों के लिए इनका रोज़ाना सेवन करें। आप काले जामुनों के अलावा अंगूरों का भी सेवन कर सकते हैं।
* अदरक,मीठे नींबू,पुदीने और शहद का मिश्रण तैयार करके उसका सेवन करने से भी बवासीर की दशा में काफी लाभ मिलता है।
* पके केलों को उबालें और उनका दिन में दो बार सेवन करें। यह बवासीर को प्राकृतिक रूप से ठीक करने की काफी कारगर विधि है क्योंकि यह लैक्सेटिव के लिए जाना जाता है।
*नसों में सूजन और जलन कम करने के लिए उस भाग में बेकिंग पाउडर लगाएं। आप गाजर या बीटरूट के रस का भी उपयोग कर सकते हैं। अगर सूजे हुए भाग में जलन है तो उसे दूर करने के लिए एलो वेरा का सेवन करें।
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