Monday, December 26, 2016

लकवा (पेरेलिसिस) के असरदार उपचार




लकवा को आयुर्वेद में पक्षाघात रोग भी कहते हैं। इस रोग में रोगी के एक तरफ के सभी अंग काम करना बंद कर देते हैं जैसे बांए पैर या बाएं हाथ का कार्य न कर पाना। साथ ही इन अंगों की दिमाग तक चेतना पहुंचाना भी निष्क्रिय हो जाता है। और इस रोग की वजह से अंगों का टेढापनए शरीर में गरमी की कमीए और कुछ याद रखने की क्रिया भी नष्ट हो जाती है। लकवा रोग में इंसान असहाय सा हो जाता है। और दूसरों पर हर काम के लिए निर्भर होना पड़ता है। इस रोग मे मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है और मस्तिष्क की कोशिकाओं के आस-पास की जगह में खून भर जाता है। जिस तरह किसी व्यक्ति के हृदय में जब रक्त आपूर्ति का आभाव होता तो कहा जाता है कि उसे दिल का दौरा पड़ गया है उसी तरह जब मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम हो जाता है या मस्तिष्क में अचानक रक्तस्राव होने लगता है तो कहा जाता है कि आदमी को मस्तिष्क का दौरा पड़ गया है।
शरीर की सभी मांस पेशियों का नियंत्रण केंद्रीय तंत्रिकाकेंद्र (मस्तिष्क और मेरुरज्जु) की प्रेरक तंत्रिकाओं से, जो पेशियों तक जाकर उनमें प्रविष्ट होती हैं,से होता है। अत: स्पष्ट है कि मस्तिष्क से पेशी तक के नियंत्रणकारी अक्ष के किसी भाग में, या पेशी में हो, रोग हो जाने से पक्षाघात हो सकता है। सामान्य रूप में चोट, अबुद की दाब और नियंत्रणकारी अक्ष के किसी भाग के अपकर्ष आदि, किसी भी कारण से उत्पन्न प्रदाह का परिणाम आंशिक या पूर्ण पक्षाघात होता है।
लकवा की बीमारी के लक्षण
लकवा रोग में शरीर की नसों को पूरी तरह से सुखा देता है। जिसकी वजह से शरीर के अंगों पर खून नहीं पहुचं पाता है। और शरीर का अंग किसी काम का नहीं रह जाता है।
इसके अलावा शरीर के मुख्य अंग जैसे नाक, आंख और कान सभी टेढ़े हो जाते हैं। इस रोग का सबसे बड़ा लक्षण हैं होठों का एक तरफ लटक जाना।
लकवा-पक्षाघात-फालिज के प्रकार
अर्दित - सिर्फ चेहरे पर लकवे का असर होने को अर्दित (फेशियल पेरेलिसिस) कहते हैं। अर्थात सिर, नाक, होठ, ढोड़ी, माथा तथा नेत्र सन्धियों में कुपित वायु स्थिर होकर मुख को पीड़ित कर अर्दित रोग पैदा करती है।
एकांगघात - इसे एकांगवात भी कहते हैं। इस रोग में मस्तिष्क के बाह्यभाग में विकृति होने से एक हाथ या एक पैर कड़ा हो जाता है और उसमें लकवा हो जाता है। यह विकृति सुषुम्ना नाड़ी में भी हो सकती है। इस रोग को एकांगघात (मोनोप्लेजिया) कहते हैं।
सर्वांगघात - इसे सर्वांगवात रोग भी कहते हैं। इस रोग में लकवे का असर शरीर के दोनों भागों पर यानी दोनों हाथ व पैरों, चेहरे और पूरे शरीर पर होता है, इसलिए इसे सर्वांगघात (डायप्लेजिया) कहते हैं।
अधरांगघात - इस रोग में कमर से नीचे का भाग यानी दोनों पैर लकवाग्रस्त हो जाते हैं। यह रोग सुषुम्ना नाड़ी में विकृति आ जाने से होता है। यदि यह विकृति सुषुम्ना के ग्रीवा खंड में होती है, तो दोनों हाथों को भी लकवा हो सकता है। जब लकवा 'अपर मोटर न्यूरॉन' प्रकार का होता है, तब शरीर के दोनों भाग में लकवा होता है।





बाल पक्षाघात - बच्चे को होने वाला पक्षाघात एक तीव्र संक्रामक रोग है। जब एक प्रकार का विशेष कृमि सुषुम्ना नाड़ी में प्रविष्ट होकर वहाँ खाने लगता है, तब सूक्ष्म नाड़ियाँ और माँसपेशियां आघात पाती हैं, जिसके कारण उनके अधीनस्थ शाखा क्रियाहीन हो जाती है। इस रोग का आक्रमण अचानक होता है और प्रायः 6-7 माह की आयु से ले कर 3-4 वर्ष की आयु के बीच बच्चों को होता है।
लकवा के असरदार उपचार-
*कुछ दिनों तो रोज छुहारों को दूध में भिगोकर रोगी को देते रहने से लकवा ठीक होने लगता है।
*सौंठ और उड़द को पानी में मिलाकर हल्की आंच में गरम करके रोगी को नित्य पिलाने से लकावा ठीक हो जाता है।नाशपाती, सेब और अंगूर का रस बराबर मात्रा में एक ग्लिास में मिला लें। और रोगी को देते रहें। कुछ समय तक यह उपाय नित्य करना है तभी फायदा मिलेगा।
*1 चम्मच काली मिर्च को पीसकर उसे 3 चम्मच देशी घी में मिलाकर लेप बना लें और लकवाग्रसित अंगों पर इसकी मालिश करें। एैसा करने से लकवा ग्रस्त अंगों का रोग दूर हो जाएगा।
*करेले की सब्जी या करेले का रस को नित्य खाने अथवा पीने से लकवा से प्रभावित अंगों में सुधार होने लगता है। यह उपाय रोज करना है।
*प्याज खाते रहने से और प्याज का रस का सेवन करते रहने से लकवा रोगी ठीक हो जाता है।
*6 कली लहसुन को पीसकर उसे 1 चम्मच मक्खन में मिला लें और रोज इसका सेवन करें। लकवा ठीक हो जाएगा।
लहसुन आधारित औषधि नं-1
औषधि के लिये लहसुन बड़ी गांठ वाला जिसमें से अधिक रस निकाल सकें ले।
विधि- लहसुन की आठ कली लेकर छील लें फिर इसे बारीक चटनी की तरह पीस लें फिर गाय का दूध लेकर उबाल लें, अब थोड़ा सा दूध अलग कर लें उसमें शक्कर मिला दें, जब यह दूध हल्का गरम रह जाय तो इस दूध में लहसुन मिलाकर पी जायें, ऊपर से इच्छा अनुसार जितना चाहें दूध पियें। परंतु ध्यान रखें लहसुन कभी खौलते दूध में न मिलावें वरना उसके गुण नष्ट हो जायेंगे। दिन में दो बार ये विधि करें। इस प्रकार दिन में दो बार इसका सेवन करें। तीन दिन तक दोनों समय लेने के बाद इसकी मात्रा बढ़ाकर 9 या 10 कलियां कर दें। एक हफ्ते बाद कम से कम 20 कली लहसुन लें। इसी तरह तीन बाद फिर बढ़ाकर 40 कली का रस दूध से लें। इसके बाद अब इनकी मात्रा घटाने का समय है जैसे-जैसे बढ़ाया वैसे-वैसे ही घटाते जाना है तीन-तीन दिन पर यानी-
*पहली बार – 8 कली लहसुन की लें लेत रहें
* तीन दिन बाद-10 कली लहसुन की लें लेते रहें
* 1 सप्ताह बाद – 20 कली लहसुन की लें लेते रहें
  उसके  बाद- 40 कली लहसुन की लें लेते रहें
लहसुन आधारित औषधि नं-2
मोटी पोथी वाला 1 मोटा दाना लहसुन का लेकर छीलकर पीस लें बारीक और इसे चाट लें ऊपर से गाय का दूध हल्का गर्म चीनी डालकर पी जायें। अब दूसरे दिन 2 लहसुन की चटनी चाट कर दूध पी जायें। तीसरे दिन तीन लहसुन, चौथे दिन चार कली इसी तरह से ग्यारह दिन तक 11 लहसुन पीसकर चाटें व दूध पी जायें। अब बारहवें दिन से 1-1 कली लहसुन की घटाती जायें तथा सेवन की विधि वहीं होगी। एक लहसुन की संख्या आ जाने पर बंद कर दें पीना। इससे हाई ब्लड प्रेशर का असर कम होगा। पक्षाघात का प्रभाव कम होगा। सर का भारी पन ठीक होगा। नींद अच्छी आयेगी। दस्त खुलकर होगा। भूख अच्छी लगेगी। (अगर आप सामान्य तरीके से रोज लहसुन खायें तो इसका खतरा ही नहीं होगा।)
औषधि नं-3
लहसुन व शतावर- 7-8 कली लहसुन, शतावर का चूर्ण 1 तोला दोनों को खरल में डालकर घोंट लें, आधा किलो दूध में शक्कर मिलाकर लहसुन शतावर पिसा हुआ मिलाकर पी जायें इसे लेने पर हल्का सुपाच्य भोजन लें। शरीर के हर अंग का भारी पन ठीक होगा साथ पक्षाघात में फायदा होगा। इसे 31 दिन लगातार लें।




औषधि नं-4
लहसुन,शतावर चूर्ण, असगंध चूर्ण- 1 चाय का बड़ा चशतावर चूर्ण, उतनी ही मात्रा में असगंध चूर्ण दोनों चूर्ण को दूध में मिलाकर पियें साथ दोपहर के भोजन के साथ लहसुन लें। लहसुन की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाते जायें, रोटी, आंवला, लहसुन का प्रयोग भोजन में अवश्य करें। शरीर की मालिश भी करें इन सभी विधियों से पक्षाघात में जल्दी व सरलता से मरीज ठीक होता है।
औषधि नं-5
लहसुन छीलकर पीस लें 3-4 कली, फिर उसमें उतनी ही मात्रा में शहद मिला कर चाटें। धीरे-धीरे लहसुन की मात्रा बढ़ाते जायें 1-1 कली करके कम से कम 11-11 कली तक पहुंचे साथ बराबर मात्रा में शहद भी मिलाकर चाटें। साथ लहसुन का रस किसी तेल में मिलाकर उस प्रभावित हिस्से पर लेप, मालिश हल्के हाथ से करें। लहसुन के रस को थोड़ा गरम करके लगायें धीरे-धीरे काफी फायदा पहुंचेगा लहसुन से रक्त संचार ठीक तरह से होता है।
इसका सेवन करने से और भी लाभ है पेशाब खुलकर होगा।
दस्त साफ होने लगेगी शरीर की चेतना शक्ति बढ़ने लगेगी तथा पक्षाघात का असर धीरे-धीरे कम होने लगेगा।
तुलसी के पत्तोंए दही और सेंधा नमक को अच्छे से मिलाकर उसका लेप करने से लकावा ठीक हो जाता है। ये उपाय लंबे समय तक करना होगा।
गरम पानी में तुलसी के पत्तों को उबालें और उसका भाप लकवा ग्रस्ति अंगों को देते रहने से लकवा ठीक होने लगता है।
लकवा के लिए मालिश का तेल-आधा लीटर सरसों के तेल में 50 ग्राम लहसुन डालकर लोहे की कड़ाही में पका लें। जब पानी जल जाए उसे ठंडा होने दें फिर इस तेल को छानकर किसी डिब्बे में डाल लें। और इस तेल से लकवा वाले अंगों पर मालिश करें।
*निर्गुण्डी का तेल आदि की मालिश करनी चाहिए।
मक्खन और लहसुन
मक्खन और लहसुन भी लकवा की बीमारी में राहत देते हैं। आप मक्खन के साथ लहसुन की चार कलियों को पीसकर सेवन करें।
सोंठ व दालचीनी
एक गिलास दूध में थोड़ी सी दालचीनी और एक चम्मच अदरक का पाउडर यानि कि सोंठ को मिलाकर उबाल लें। और नियमित इसका सेवन करें। इस कारगर उपाय से लकवा रोग में आराम मिलता है।
सरसों
धतूरे के बीजों को सरसों के तेल में मंदी आंच में पका लें और इसे छानकर लकवा से ग्रसित अंग पर मालिश करें।
तेल
लकवा से ग्रसित हिस्से पर बादाम के तेल की मालिश करें|




लकवा में क्या खाएं क्या ना खाएं-
क्या ना खाएं
तली हुई चीजें
बेसन
चना
दही
चावल
लकवा होने पर इन चीजों का सेवन जरूर करें
इन फलों का सेवन करें
आम
चीकू
पपीता और
अंजीर।
परवल
करेला
गेहूं की रोटी
लहसुन
बाजरे की रोटी
तरोई
फली।
इसके अलावा सुबह और शाम दूध का सेवन करें।
*त्रिफला का सेवन करने से भी लकवा ठीक हो सकता है।
लकवा का सही समय पर इलाज न होने से रोगी एक अपाहिज की जिंदगी जीने को मजबूर हो जाता है इसलिए समय रहते लकवा का उपचार कराना जरूरी है। आयुवेर्दिक तरीकों से लकवा पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। ये उपाय लंबे समय तक लगातार करने से ही फायदा देगें।
लकवे का प्रभावशाली होम्योपैथिक इलाज
यदि किसी रोगी को एलोपैथ से फ़ायदा नही हो रहा हैं तो वह कृपया आयुर्वेद और होम्योपैथ का सहारा ले!
जैसा की मैने पहले भी कहा हैं की आप अपने लक्षण के हिसाब से अपनी होम्यो दावा का चुनाव खुद भी कर सकते हैं !
मुँह पर लकवे का प्रभाव होने पर
Causticum (कास्टीक्म् ):
जब किसी रोगी के मुँह पर लकवे का असर हो जाए ! जिसके कारण वह मुँह नही खोल पाता हैं ! उसके जबड़े कड़े हो जाते हैं ! मुँह फाड़ नही सकता हैं ! मुँह पर पक्षाघात होने की वजह से जीभ पर भी पक्षाघात हो गया हो ! जिसकी वजह से रोगी स्पस्ट बात नही कर पता हैं ! तो एसे रोगियों के उपचार के लिए कास्टिकम का उपयोग  करना चाहिए ! यदि लकवे का असर शरीर के दाहिने तरफ हैं तो कास्टिकाम इसकी उत्तम दवा है!
इस दवा के उपयोग से पहले आप इसके चारित्रिक और अन्य रोगों के बारे मैं ज़रूर पढ़े जिसमे की इसका उपयोग किया जाता हैं
लकवा मे शरीर कांपना , ठीक से सीधा नही चल पाना की उत्तम होम्यो औषधि :
Lolium Temulentum :
इस दावा का प्रयोग प्राय : सयटिका और पक्षाघात में ही अधिक किया जाता हैं ! रोगी का शरीर काँपता हैं ! सिर चकराना , ठीक से सीधा ना चल पाना , शरीर के अंगों की स्वाभाविक शक्ति का लोप , घुटने से एडी तक तेज दर्द रहता हैं ! कुछ हाथ से पकड़ने पर हाथ कँपता हैं ! तो इस दावा के सेवन से लाभ होता हैं
घटने या मेरुदण्ड के रोग के साथ लकवा का प्रभाव होने पर – उत्तम होम्योपैथिक दवा :
घुटने या रीड की हड्डी की समस्या के साथ यदि शरीर के किसी अंग मैं लकवा का प्रभाव हो जाए तो एनकारडियाम दबा का प्रयोग करना चाहिए !जब रोगी को एसा मालूम होता हैं की उसकी पीठ की रीड के भीतर कोई डाट सी लगी हुई हैं ! या उसके शरीर को कस कर बाँध दिया गया हैं, जिससे की उससे चला नही जाता हैं ! एक तरह का रह रह कर अकड़न का दर्द होता हैं ! यह दर्द पैर की एडी से लेकर उपर तक जाता हैं !
शरीर के दाहिने तरफ़ का पक्षाघात होने पर किस दवा का प्रयोग स्वस्थ होने के लिए करें!:
Elaps Corallinus (इलैप्स कोरलिंस ):
यह द्वा ब्राज़ील देश के एक विषधर सर्प के विष से तैयार किया जाता हैं ! शरीर के किसी भी द्वार से स्याही के समान काले रंग का रक्त स्राव होने पर इस दावा को याद करना चाहिए ! इलैइप्स शरीर के दाहिनी तरफ ज़्यादा असर करता हैं ! शरीर के दाहिने ओर लकवा का असर होने पर इस दावा से निरोग हो जाता हैं !
क्या करें जब लकवा का असर कमर पर हो (What to do when the effects of paralysis at the waist) ? :
काकुलस इंडिक्स :
जब लकवे का असर कमर पर हो और साथ ही रोगी को एसी कमज़ोरी हो जैसे पैरों मैं ताक़त ही ना हो , पाँव के तलवे सुन्न हो गये हों , घुटने टूट से गये हों. , जाँघ जैसे कुचल सा गया हों , पहले एक हाथ फिर दूसरा हाथ सुन्न हो गया हों !
यदि रोगी के शरीर मैं उपर दिये  गये लक्षण हैं तो पहले काकुलस इंडिक्स के प्रयोग से फायदा होता हैं !
जीभ पर लकवा का असर होने पर कौन सी दवा उपयोग करें
जब जीभ पर लकवे का असर हो गया हो और उसमे कोई गति मालूम नही होती हैं ! रोगी मुँह फाडे रहता हैं और मुँह से लार बहा करता हैं ! उस समय कलचिकम् फ़ायदा करती हैं !




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