Friday, November 25, 2016

हार्ट अटैक आने पर क्या करें ? हार्ट अटैक से कैसे बचें





हार्ट अटैक की बीमारी आजकल एक आम समस्या बनती जा रही है और हमारे भारत में तो यह बिल्कुल कॉमन हो गया है ज़्यादातर नौजवान लोगों में हार्ट अटैक आने की काफी मामले सामने आ रहे हैं. | हम आपको बता रहे हैं कि अगर किसी को हार्ट अटैक आ जाए तो हार्ट अटैक आने के 5 मिनट के अंदर आप यह काम करें और इन सावधानियों का ख्याल रखें जिससे मरीज की जान तुरंत बचाई जा सके|
हार्ट अटैक एक ऐसी बीमारी है जो कभी भी अचानक किसी को भी इसका दौरा पड़ सकता है. अगर आपके सामने किसी को हार्ट अटैक आ जाए तो आप तुरंत यहां दिए गए उपायों को अपनाएं जिससे रोगी की जान बचाने में आसानी हो, हार्ट अटैक में जितनी जल्दी रोगी को मेडिकल फैसिलिटी मिल जाए उतना अच्छा होता है क्योंकि हार्टअटैक एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है और इसमें बहुत कम समय मिलता है जिसमें आप रोगी की जान बचा सके|
हृदय रोगी को लंबी सांस लेने को कहें और उसके आसपास से हवा आने की जगह छोड़ दें ताकि उन्हें पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिल सके. कई बार ऐसा देखा गया है के घर में या कहीं किसी को अटैक आया और लोग उसको बुरी तरह से चारों तरफ घेर लेते हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें के रोगी को ऑक्सीजन लेने के लिए पर्याप्त खुली जगह होना चाहिए.
अटैक आने पर रोगी को उल्टी आने जैसा अनुभव होता है ऐसे में उसे एक तरफ मुड़ कर उल्टी करने को कहें ताकि उल्टी लंग्स में न भरने पाए और इन्हें कोई नुकसान ना हो.




रोगी की गर्दन के साइड में हाथ रखकर उसका पल्स रेट चेक करें यदि पल्स रेट 60 या 70 से भी कम हो तो समझ लें कि ब्लड प्रेशर बहुत तेजी से गिर रहा है और पेशेंट की हालत बहुत सीरियस है.
पल्स रेट कम होने पर हार्ट पेशेंट को आप इस तरह से लिटा दें उसका सर नीचे रहे और पैर थोड़ा ऊपर की और उठे हुए हों. इससे पैरों के ब्लड की सप्लाई हार्ट की और होगी जिससे ब्लड प्रेशर में राहत मिलेगी.
इस दौरान रोगी को कुछ खिलाने पिलाने की गलती ना करें इससे उसकी स्थिति और भी बिगड़ सकती है.
एस्प्रिन ब्लड क्लॉट रोकती है इसलिए हार्ट अटैक के पेशेंट को तुरंत एस्प्रिन या डिस्प्रिन खिलानी चाहिए. लेकिन कई बार इनसे हालात और भी ज्यादा बिगड़ जाते हैं इसलिए एस्प्रिन या डिस्प्रिन देने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले लेना चाहिए.
पल्स रेट बहुत ज्यादा कम हो जाने पर पेशेंट के चेस्ट पर हथेली से दबाब देने से थोड़ी राहत जरूर मिलती है लेकिन गलत तरीके से हार्ट को प्रेस करने में प्रॉब्लम और भी बढ़ सकती है इसलिए इसके लिए विशेष अभ्यास की जरूरत होती है रोगी को गाड़ी में बिठाने की बजाए सीधा लिटाएं , इससे उसका ब्लड सर्कुलेशन सही रखने में मदद मिलेगी|पहले यह बीमारी अधिक उम्र के लोगों में मिलती थी लेकिन भारत में अब कम उम्र के लोग भी इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। इस बीमारी की सबसे बड़ी वजहों में से प्रमुख रूप से  तनाव असंतुलित खाना है। तनाव दिल का सबसे बड़ा दुश्मन है। तनाव हृदय का पूरा सिस्टम बिगाड़ देते है। तनाव से उबरने के लिए योग का भी सहारा लिया जा सकता है।हार्ट अटैक से बचने के लिए जीवन शैली में बदलाव लाना चाहिए। मक्खन, घी, मलाई, तली हुई चीजें, चिकनाई युक्त चीजें, मीठा कम खाना चाहिए, स्मोकिंग नहीं करनी चाहिए। हार्ट की बीमारी से बचने के लिए- रोजाना एक्सरसाइज योगा करना चाहिए। सबसे बढ़िया उपाय है कि जॉगिंग की जाए, साइकिल, स्विमिंग करनी चाहिए।

 व्यक्ति को साइकिल चलाना जरुरी है।
 हार्ट की तीन वाहिनियों में कचरा (कोलस्ट्रॉल) फंसने के कारण वाहिनियां 100 प्रतिशत बंद हो जाए तो मेजर (बड़ा) हार्ट अटैक जाता है।




मेजर (बड़ा) हार्ट अटैक आने से पहले मरीज के दिल में तेजी से दर्द होनी शुरु हो जाती है जोकि रुकती नही है। इसके साथ ही मरीज के दिल की धड़कन बढ़ जाती है, ठंडा पसीना आने लग जाता है तथा सांस रुक रुक कर आती है। जिसके लिए मरीज को तुरंत डाक्टर के पास लेकर जाना चाहिए। छोटा हार्ट अटैक को (एनजानिया) कहते है। शुरु में मरीज को छाती के मध्य में दर्द होता है जोकि 5 से 10 मिनट तक रहता है। इसके साथ बाएं बाजू में तथा जबड़े में दर्द जा सकती है। इस दौरान मरीज को बहुत ज्यादा ठंडा पसीना आने लगता है था सांस रुक रुक कर आती है। जिसके लिए मरीज को तुरंत डाक्टर के पास लेकर जाना चाहिए।
छोटा हार्ट अटैक को (एनजानिया) कहते है। इसकी शुरूआत में मरीज को छाती के मध्य में दर्द होता है जोकि 5 से 10 मिनट तक रहता है। इसके साथ बाएं बाजू में तथा जबड़े में दर्द जा सकती है। ठंडा पसीना आने लगता है तथा सांस रुक रुक कर आती है।
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