अदरक के ये फायदे जानकार दंग रह जायेगे आप



      दुनिया के सबसे ज्यादा उपजाए जाने वाले मसाले के रूप में अदरक दुनिया का सबसे बहुपयोगी औषधीय गुण वाला पदार्थ है। 100 से ज्यादा बीमारियों में इस चमत्कारी मसाले के औषधीय लाभों पर अनगिनत अध्ययन किए गए हैं। आधे से अधिक पारंपरिक हर्बल औषधियों में इसे शामिल किया जाता है।
भारत के आयुर्वेदिक ग्रंथों में अदरक को सबसे महत्वपूर्ण बूटियों में से एक माना गया है। यहां तक कि उसे अपने आप में औषधियों का पूरा खजाना बताया गया है। आयुर्वेदिक चिकित्सक इसको एक शक्तिशाली पाचक के रूप में लेने की सलाह देते हैं क्योंकि यह पाचक अग्नि को भड़काता है और भूख बढ़ाती है। इसके पोषक तत्व शरीर के सभी हिस्सों तक आसानी से पहुंच पाते हैं। आयुर्वेद में अदरक को जोड़ों के दर्द, मतली और गति के कारण होने वाली परेशानी के उपचार में भी इस्तेमाल किया जाता है।
अदरक में आपको स्वस्थ रखने की जबरदस्त शक्ति होती है। भारतवासियों को 5,000 साल पहले से अदरक में पाए जाने वाले गुणों के विषय में जानकारी है।
*अदरक में बहुत सारे विटामिन्स के साथ-साथ मैग्नीज और कॉपर भी पाए जाते हैं जिनकी शरीर को सुचारु रूप से चलाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अदरक कई सारे गुणों की खान है और इसे विभिन्न तरीकों से उपयोग में लाया जा सकता है, पर अदरक का ज्यूस इसे इस्तेमाल करने का सबसे अच्छा तरीका समझा जाता है।
* अदरक के ज्यूस में सूजन को कम करने की शक्ति अत्यधिक मात्रा में होती है और यह उन लोगों के लिए वरदान की तरह है, जो जोड़ों के दर्द और सूजन से परेशान हैं। एक अध्ययन के मुताबिक जो लोग अदरक के ज्यूस का उपयोग नियमित तौर पर करते हैं उन्हें जोड़ों में सूजन और दर्द पैदा करने वाली बीमारियां परेशान नहीं करतीं। आपके जोड़ों की समस्या नई हो या कई साल पुरानी- यकीन रखिए कि अदरक का ज्यूस बहुत असरकारी है।अदरक के ज्यूस में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में ताजे रक्त के प्रवाह को बढ़ाते हैं, क्योंकि इनमें खून को साफ करने का खास गुण होता है।
.* सभी प्रकार के दर्द से राहत देने की इसकी क्षमता इसे बहुत ही खास बनाती है। चाहे आपके दांत में दर्द हो या सिर में- अदरक का ज्यूस बहुत असरकारक है। शोधों के हिसाब से यह माइग्रेन से बचने में भी आपकी मदद करता है|. अदरक में खून को पतला करने का नायाब गुण होता है और इसी वजह से यह ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी में तुरंत लाभ के लिए जाना जाता है।
*अदरक कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में सक्षम
आधुनिक शोधों में अदरक को विभिन्न प्रकार के कैंसर में एक लाभदायक औषधि के रूप में देखा जा रहा है और इसके कुछ आशाजनक नतीजे सामने आए हैं।
मिशिगन यूनिवर्सिटी कांप्रिहेंसिव कैंसर सेंटर के एक अध्ययन में पाया गया कि अदरक ने न सिर्फ ओवरी कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट किया, बल्कि उन्हें कीमोथैरेपी से प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने से भी रोका जो कि ओवरी के कैंसर में एक आम समस्या होती है।
इस अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने ओवरी कैंसर कोशिकाओं पर अदरक पाउडर और पानी का एक लेप लगाया। हर परीक्षण में पाया गया कि अदरक के मिश्रण के संपर्क में आने पर कैंसर की कोशिकाएं नष्ट हो गईं। हर कोशिका ने या तो आत्महत्या कर ली, जिसे एपोप्टोसिस कहा जाता है या उन्होंने एक-दूसरे पर हमला कर दिया, जिसे ऑटोफेगी कहा जाता है।
अदरक को स्तन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और कोलोन कैंसर के इलाज में भी बहुत लाभदायक पाया गया है।
जर्नल ऑफ बायोमेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित शोध में पता चला कि अदरक के पौधे के रसायनों ने स्वस्थ स्तन कोशिकाओं पर असर डाले बिना स्तन कैंसर की कोशिकाओं के प्रसार को रोक दिया। यह गुण बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि पारंपरिक विधियों में ऐसा नहीं होता। हालांकि बहुत से ट्यूमर कीमोथैरैपी से ठीक हो जाते हैं, मगर स्तन कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना ज्यादा मुश्किल होता है। वे अक्सर बच जाती हैं और उपचार के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेती हैं।
अदरक के इस्तेमाल के दूसरे फायदे ये हैं कि उसे कैप्सूल के रूप में दिया जाना आसान है, इसके बहुत कम दुष्प्रभाव होते हैं और यह पारंपरिक दवाओं का सस्ता विकल्प है।
आधुनिक विज्ञान प्रमाणित करता है कि अदरक कोलोन में सूजन को भी कम कर सकता है जिससे कोलोन कैंसर को रोकने में मदद मिलती है। मिशिगन यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 30 मरीजों के एक समूह को 28 दिनों में दो ग्राम अदरक की जड़ के सप्लीमेंट या प्लेसबो दिए। 28 दिनों के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन मरीजों ने अदरक की जड़ का सेवन किया था, उनमें कोलोन की सूजन के चिह्नों में काफी कमी पाई गई। इससे यह कोलोन कैंसर के रिस्क वाले लोगों में एक कारगर प्राकृतिक बचाव विधि हो सकती है।

कई और तरह के कैंसर, जैसे गुदा कैंसर, लिवर कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, मेलानोमा और पैंक्रियाज के कैंसर को रोकने में अदरक के तत्वों की क्षमता पर भी अध्ययन किए गए हैं। यह एक दिलचस्प बात है कि एक कैंसर रोधी दवा बीटा-एलिमेन अदरक से बनाई जाती है।|अदरक में कैंसर जैसी भयानक बीमारी से शरीर को बचाए रखने का गुण होता है। यह कैंसर पैदा करने वाले सेल्स को खत्म करता है। एक शोध के हिसाब से अदरक स्तन कैंसर पैदा करने वाले सेल को बढ़ने से रोकता है।
*अगर आपको पाचन संबंधी कोई भी समस्या है, तो समझ लीजिए कि आपकी यह समस्या अब आपको और परेशान नहीं कर पाएगी। अदरक का ज्यूस आपके पेट में पड़े हुए खाने को निकास द्वार की तरफ धकेलता है। अदरक का यह चमत्कारी गुण आपको न केवल पाचन और गैस बल्कि सभी तरह के पेट दर्द से भी निजात दिलाता है।
*अगर आप घने और चमकदार बाल चाहते हैं तो अदरक ज्यूस का नियमित उपयोग आपकी यह इच्छा पूरी कर सकता है। इसे आप पी भी सकते हैं और सीधे सिर की त्वचा पर भी लगा सकते हैं। आपको सिर्फ यह ध्यान रखना है कि आप आप शुद्ध ज्यूस सिर पर लगाएं जिसमें पानी की मात्रा बिलकुल न हो या न के बराबर हो। यह न केवल आपके बाल स्वस्थ बना देगा बल्कि यह आपको रूसी से भी छुटकारा दिला देगा। . अदरक के ज्यूस के नियमित इस्तेमाल से आप कोलेस्ट्रॉल को हमेशा कम बनाए रख सकते हैं। यह रक्त के थक्कों को जमने नहीं देता और खून के प्रवाह को बढ़ाता है और इस प्रकार हृदयाघात की आशंका से आपको बचाए रखता. है|
*अदरक हृदय के लिए लाभकारी
अदरक सालों से हृदय रोगों के उपचार में इस्तेमाल होती रही है। चीनी चिकित्सा में कहा जाता है कि अदरक के उपचारात्मक गुण हृदय को मजबूत बनाते हैं। हृदय रोगों से बचाव और उसके उपचार में अक्सर अदरक के तेल का प्रयोग किया जाता था।
*आधुनिक अध्ययन दर्शाते हैं कि इस जड़ी-बूटी के तत्व कोलेस्ट्रॉल को कम करने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, रक्त प्रवाह में सुधार लाने और अवरुद्ध आर्टरियों तथा रक्त के थक्कों से बचाव करने का काम करते हैं। ये सारी चीजें हृदयाघात (हार्ट अटैक) और स्ट्रोक के जोखिम को कम करती हैं।
*अदरक के ज्यूस में गठिया रोग को भी ठीक करने की क्षमता होती है। इसके सूजन को खत्म करने वाले गुण गठिया और थायराईड से ग्रस्त मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद हैं।
अदरक मोशन सिकनेस को कम करती है
*अलग-अलग तरह की मतली और उल्टी को ठीक करने में अदरक बहुत मददगार होती है। गर्भवती स्त्रियों में मॉर्निंग सिकनेस, सफर पर रहने वाले लोगों में मोशन सिकनेस और कीमोथैरेपी के मरीजों में भी मितली की समस्या में यह राहत देती है। कीमोथैरेपी के दौरान वमन रोकने वाली दवाएं दिए जाने के बावजूद 70 फीसदी मरीजों को मितली की परेशानी होती है। वयस्क कैंसर रोगियों पर किए गए एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि रोजाना कीमो से पहले आधा से एक ग्राम अदरक की डोज दिए जाने पर अध्ययन में हिस्सा लेने वाले 91 फीसदी मरीजों में तेज मितली की गंभीरता काफी हद तक कम हुई।
अदरक चक्कर आने के साथ आने वाली मितली को भी कम करने में मदद करती है। इस संबंध में हुए शोध से पता चलता है कि इस मसाले के उपचारात्मक रसायन, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र में काम करते हुए उबकाई के असर को कम करते हैं।
अदरक जोड़ों के दर्द और आर्थराइ‍टिस में राहत देती है
*अदरक में जिंजरोल नामक एक बहुत असरदार पदार्थ होता है जो जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द को कम करता है। एक अध्ययन के मुताबिक, अदरक गंभीर और स्थायी इंफ्लामेटरी रोगों के लिए एक असरकारी उपचार है।
*कई और वैज्ञानिक अध्ययन भी जोड़ों के दर्द में अदरक के असर की पुष्टि करते हैं। गठिया के शुरुआती चरणों में यह खास तौर पर असरकारी होता है। *ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित बहुत से मरीजों ने नियमित तौर पर अदरक के सेवन से दर्द कम होने और बेहतर गतिशीलता का अनुभव किया।
*हांग कांग में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि अदरक और संतरे के तेल से मालिश करने पर घुटने की समस्याओं वाले मरीजों में थोड़ी देर के लिए होने वाली अकड़न और दर्द में राहत मिलती है।
*अदरक कसरत से होने वाले सूजन और मांसपेशियों के दर्द को भी कम कर सकती है। जार्जिया यूनिवर्सिटी द्वारा करवाए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने लगातार 11 दिन तक 34 और 40 वाटंलियरों के दो समूहों को कच्ची और पकाई हुई अदरक खिलाई। अध्ययन के नतीजों से यह निष्कर्ष निकाला गया कि अदरक के सप्लीमेंट्स का रोजाना इस्तेमाल, कसरत से होने वाले मांसपेशियों के दर्द में 25 फीसदी तक राहत देती है।
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लंबाई बढ़ाने के जबर्दस्त उपाय



    

सम्पूर्ण व्यक्तित्व में आपकी हाइट भी बहुत ही मायने रखती है। जिन लोगों की कद छोटा होता है वे लोग अपनी पर्सनेलिटी में कुछ कमी महसूस करते हैं। वैसे लंबाई जीन्स पर निर्भर करती है। कुछ लोगों का तो मानना है कि लंबाई केवल 18 साल की उम्र तक बढ़ती है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। व्यापाम करके भी हाइट बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा ऐसे बहुत सारे प्राकृतिक तरीके भी हैं, जिनको अपनाकर आप अपनी लंबाई बढ़ा सकते हैं।
. पौष्टिक आहार-
भोजन में मौजूद विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम, जिंक, मैग्नीशियम और फास्फोरस लम्बाई बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं इसलिए स्वस्थ और पोषक आहार लें। चर्बी बनाने वाले भोजन और ज्यादा चीनी लेने से परहेज करें क्योंकि ये आपकी लंबाई पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। दूध, जूस तथा गाजर, मछली, चिकन, अंडे, सोयाबीन, दलिया, आलू, बीन्स और हरी सब्जियां अपने भोजन में शामिल करें।
ताड़ासन की मदद से लंबाई बढ़ाई जा सकती है। छोटे बच्चे और टीनएजर इस आसन को रोज करके अपनी लंबाई 6 फुट तक बढ़ा सकते हैं। ताड़ासन करने के लिए दोनों हाथ ऊपर करके सीधे खड़े हो जाएं, फिर गहरी सांस लें, धीरे-धीरे हाथों को ऊपर उठाते जाएं और साथ-साथ पैर की एडियां भी उठती रहें। पूरी एड़ी उठाने के बाद शरीर को पूरी तरह से तान दें और फिर गहरी सांस लें। ताड़ासन करने से स्नायु सक्रिय होकर विस्तृत होते हैं। इसी लिए यह कद बढ़ाने में सहायक होता है।योग-

पूरी नींद-
पर्याप्त नींद स्वस्थ जीवनशैली और शरीर की समग्र वृद्धि और विकास के लिए सबसे अच्छा उपाय है। पूरी नींद न लेने से शरीर पर बुरा असर पड़ता है। पर्याप्त नींद लेने से लम्बाई को नियंत्रण करने वाले हार्मोन की वृद्धि होती है, इसलिए एक दिन में कम से कम 7 घंटे की नींद लेना जरूरी होता है।
फ्रीक्वेन्ट मील-
लंबाई बढ़ाने के लिए आपको अपने मेटाबॉलिज्म को मजबूत बनाने की बहुत आवश्यक होती है। एक दिन में छह भोजन लेकर आप अपने चयापचय को मजबूत बना सकते हैं। बीच-बीच में स्वस्थ भोजन लेने से अपके शरीर में कम वसा एकत्रित होगी और इस प्रकार आप प्राकृतिक रूप से अपनी लम्बाई को बढ़ा पाएंगे।
. नशे से रहें दूर-
शराब पीना और धूम्रपान गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं। धूम्रपान या अल्कोहल लेने वाले व्यक्ति के विकास को और लम्बाई पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहें।





शरीर की उचित मुद्रा

अनुचित मुद्रा में रहने से शरीर पर- बुरा प्रभाव पड़ता है। सिर और गर्दन झुकाकर चलने, खड़े रहने से लम्बाई पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। यह न केवल आपकी रीढ़ बाहर की ओर झुका देता है बल्कि लंबाई को भी कम करता है। उचित आसन में रहने से अपकी मांसपेशियों को आराम मिलता है और लम्बाई बढ़ती है।
पानी-
पानी पीना बहुत ही जरूरी है क्योंकि पानी आपके शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने तथा भोजन को अच्छे से पचाने में सहायता करता है। पानी न पीने से मेटबॉलिज्म धीमा हो सकता -है और आपकी बढ़ती लम्बाई बाधित हो सकती है। यहां तक कि कम पानी पीने पर, सारी सावधानियों और पौष्टिक भोजन लेने के बाद भी आपकी लम्बाई नहीं बढ़ती है।
धूप लें-
विटामिन 'डी' अपकी हड्डियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है, और सूरज की रोशनी विटामिन 'डी' का सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत है लेकिन इसका मतलब यह नहीं की आप तेज धूप में ही खड़े रहे। सुबह औऱ शाम को हल्की धूप होने पर सेंके।
हाइट बढ़ाने वाली दवाइयों से बचें
हाइट बढ़ाने के चक्कर में लम्बाई बढ़ाने वाली दवाओं और एंटीबायोटिक्स से बचे क्योंकि इनके बहुत सारे साइड इफैक्ट्स होते हैं। यह लंबाई भी नहीं बढ़ाते और आपको आलसी बना देते हैं।
. जड़ी बूटियां-
कद बढ़ाने के लिए सूखी नागौरी और अश्वगंधा की जड़ के चूर्ण में बराबर मात्रा में खांड मिला लें। रात को सोते समय रोज दो चम्मच गाय के दूध के साथ इसे लें। इसकी मदद से कम कद वाले लोग लंम्बे हो सकते हैं लेकिन इसका सेवन करने से पहले एक बार डाक्टरी सलाह जरूर ले लें।
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सुबह पेट ठीक से साफ़ न हो तो अपनाएं ये तरीके


पेट खुश तो आप भी खुश
एक साधे, सब सधे। यह बात हमारे पाचन तंत्र पर भी पूरी तरह लागू होती है। कमजोर पाचन तंत्र के कारण न सिर्फ भोजन पचने में परेशानी आती है, बल्कि शरीर का प्रतिरोध सिस्टम भी गड़बड़ा जाता है। शरीर में विषैले तत्वों की मात्रा बढ़ने से शरीर कई अनियमितताओं का शिकार होने लगता है। पाचन तंत्र की विभिन्न गड़बड़ियों और उनसे दूर रहने के उपाय लिखते हैं-
एलोवेरा :
आप जैसे ही सुबह उठें, वैसे ही एक गिलास पानी में थोड़ा सा एलोवेरा का जैल मिक्स कर लें। इसे पीने से आपका पेट बिल्‍कुल ठीक रहेगा।
मुनक्का : मुनक्के में काफी सारा फाइबर और एंटीऑक्‍सीडेंट होता है। इसे जरुर खाएं जिससे पेट साफ रहे।
अलसी-
इनमें भी फाइबर की मात्रा अधिक होती है। इसलिए यह कब्ज जैसी बीमारी से राहत देता है। अच्छे रिज़ल्ट के लिए अलसी के बीज को आप सुबह कॉर्नफ्लेक्स के साथ मिलाकर खा सकते हैं या फिर मुट्ठी भर अलसी के बीज को गर्म पानी के साथ सुबह खा सकते हैं। फाइबर आपकी डाइट में ज़रूर होना चाहिए। इससे आप कब्ज जैसी परेशानी से दूर रहेंगे। अलसी के बीज कब्ज के साथ-साथ डायबिटीज़, हृदय रोग, मोटापे और कैंसर के खतरे को कम करता है।
दही :
दही आपके पेट को अच्‍छा बनाए रखने में मदद कर सकता है। दही को रात में खाएं जिससे सुबह पेट अच्‍छे से साफ हो जाए।
त्रिफला पाउडर
त्रिफला पाउडर आवंला, हरीताकी और विभीताकी औषधियों के चूर्ण से बनता है। इससे पाचन क्रिया संतुलित रहती है और कब्ज जैसी दिक्कतों से राहत मिलती है। आप एक छोटे चम्मच त्रिफला पाउडर को गुनगुने पानी के साथ खा सकते हैं या शहद के साथ पाउडर मिक्स करके खा सकते हैं। इस मिक्सचर को रात में सोने से पहले या सुबह खाली पेट खाने से कब्ज में तुरंत राहत मिलती है। यह पूरी तरह से औषधियों से बना है, इसलिए यह एंटी-बायोटिक दवाइयों से कहीं बेहतर है।
कॉफी कम पियें :

कैफीन के अधिक सेवन से पेट की समस्‍या पैदा होती है, जिससे पेट सुबह अच्‍छे से साफ नहीं होता।
किशमिश
किशमिश फाइबर से भरपूर होती है और नेचुरल जुलाब की तरह काम करती है। मुट्ठी भर किशमिश को रात भर पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इसे खाली पेट खाएं। गर्भवती महिलाओं को होने वाली कब्ज के लिए यह बिना किसी साइड इफेक्ट की दवा है। किशमिश एनर्जी बूस्टर की तरह होती है, इसलिए यह किसी भी प्रकार के एनर्जी ड्रिंक्स से बेहतर होती है।
तनाव से रहें दूर -:
बहुत ज्‍यादा तनाव लेने से भी पेट -की समस्या पैदा होती है। अगर पेट साफ ना हो तो तनाव से दूरी बना लें।
अमरूद
अमरूद के गूदे और बीज में फाइबर की उचित मात्रा होती है। इसके सेवन से खाना जल्दी पच जाता है और एसिडिटी से राहत मिलती है। साथ ही, पेट भी साफ हो जाता है। अमरूद पेट के साथ-साथ शरीर के इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता है, जिससे रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
सेब :
आपको सेब नियमित रूप से खाना चाहिये क्युकी इसमें एक प्रकार का तत्त्व पाया जाता है जो कि आपके पेट को सुबह अच्छे से साफ कर देगा।
अंजीर
अंजीर पका हो या सूखा, जुलाब की तरह काम करता है, क्योंकि इसमें फाइबर की मात्रा काफी ज्यादा होती है। कब्ज से राहत पाने के लिए एक गिलास दूध में अंजीर के कुछ टुकड़ों को उबालें और इसे रात को सोने से पहले पिएं। ध्यान रहे, गर्म दूध ही पिएं। साबुत अंजीर का सेवन मेडिकल शॉप में मिलने वाले कब्ज खत्म करने वाले सीरप से ज्यादा असरदार होता है।
नींद :
क्या आप को इस बात का कभी एहसास हुआ है कि जिन दिनों आपकी नींद अच्छे से पूरी नहीं होती, उस दौरान आपका पेट भी अच्छे से साफ नहीं होता? इसका जवाब है कि आपको नियमित रूप से नींद पूरी करनी चाहिये।
नींबू का रस
अक्सर वैद्य कब्ज से तुरंत राहत दिलाने के लिए नींबू के रस लेने को कहते हैं। एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू और नमक मिलाकर सुबह खाली पेट पिएं। इससे आंतों में से शरीर का बेकार तत्व साफ होता है। इसके लिए एक गिलास गर्म पानी में एक छोटा चम्मच नींबू का रस मिलाएं और फिर चुटकी भर नमक मिलाकर इस जूस को सुबह फ्रेश होने से पहले पिएं। इससे शरीर का टॉक्सिन भी बाहर हो जाते है।

मिर्च :
बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन खाने से बचना चाहिये। इसकी जगह पर आपको साबुत मिर्च का सेवन करना चाहिये।
अरंडी का तेल
अरंडी के तेल को सदियों से कब्ज से राहत पाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। कब्ज खत्म करने के साथ यह पेट के कीड़े भी नष्ट करता है। खाली अरंडी के तेल को पीने से बेहतर रहेगा कि आप इसे रात को सोने से पहले दूध में मिलाकर पिएं। एक चम्मच से ज़्यादा न डालें। इससे अगले दिन पेट साफ रहेगा।
पानी :
प्रतिदिन सुबह एक गिलास गुनगुना पानी अवश्य पिएं।
संतरा
संतरा सिर्फ विटामिन सी का ही मुख्य स्रोत नहीं है, बल्कि इसमें फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। रोज सुबह-शाम एक-एक संतरा खाने से कब्ज जैसी बीमारी में राहत मिलती है।
रेगुलर वर्कआउट :
रेगुलर एक्‍सरसाइज़ करने से पाचन क्रिया हमेशा दुरुस्त बनी रहेगी। शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।
    इस पोस्ट में दी गयी जानकारी आपको अच्छी और लाभकारी लगी हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर कीजियेगा । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँच सकती है और हमको भी आपके लिये और अच्छे लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है|
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लो ब्लड प्रेशर होने पर तुरंत करें ये पाँच उपाय


शरीर को स्‍वस्‍थ रखने के लिए दिल का स्‍वस्‍थ होना बहुत जरूरी है। लेकिन वर्तमान में अनियमित खानपान और अस्‍वस्‍थ दिनचर्या के कारण उच्‍च रक्‍तचाप और निम्‍म रक्‍तचाप की समस्‍या बढ़ रही है। जब किसी के शरीर में रक्त-प्रवाह सामान्य से कम हो जाता है तो उसे लो ब्लड प्रेशर कहते हैं। सामान्‍यतया ब्लड प्रेशर 120/80 होता है। यदि ब्‍लड प्रेशर 90 से कम हो जाए तो उसे लो ब्लड प्रेशर कहते हैं। इसे अगर गंभीरता से न लिया जाये तो इसका असर शरीर के दूसरे अंगों पर पड़ता है। ऐसे में शरीर में ब्लड का दबाव कम होने से आवश्यक अंगों तक पूरा ब्लड नही पहुंच पाता जिससे उनके कार्यो में बाधा पहुंचती है। ऐसे में दिल, किडनी, फेफड़े और दिमाग आंशिक रूप से या पूरी तरह से काम करना भी बंद कर सकते हैं। लो ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या होने पर तुरंत ये काम करें। 

फायदेमंद है किशमिश
:


किशमिश को पारंपरिक आयुर्वेदिक दवा के रूप में देखा जाता है। लो ब्‍लड प्रेशर होने पर किशमिश खाना बहुत फायदेमंद होता है। रात में 30 से 40 किशमिश भिगो दें और सुबह खाली पेट इसका सेवन करें। जिस पानी में किशमिश भिगोई थी आप उस पानी को भी पी सकते हैं। महीने में आप ऐसा एक बार कर सकते हैं। इसके अलावा एक गिलास दूध में 4-5 बादाम, 15-20 मूंगफली और 10 से 15 किशमिश भी मिलाकर ले सकते हैं।

तुलसी कम होते ब्‍लड प्रेशर को सामान्य करने में मददगार साबित होती है। इसमें विटामिन सी, पोटैशियम, मैग्नीशियम जैसे कई तत्व पाए जाते हैं जो दिमाग को संतुलित करते हैं और तनाव को भी दूर करते हैं। जूस में 10 से 15 प‌त्तियां डाल दें। एक चम्मच शहद डाल दें और रोजाना खाली पेट इसका सेवन करें।

लेमन जूस पियें :
लेमन जूस उच्च रक्तचाप में काफी फायदेमंद होता है लेकिन ये निम्‍न रक्तचाप में भी फायदेमंद होता है। जब डीहाइड्रेशन की समस्‍या हो तो यह बहुत ही उपयोगी है। कई बार लेमन जूस में हल्का सा नमक और चीनी डालकर पिया जा सकता है। इससे शरीर को एनर्जी मिलेगी। साथ ही लीवर भी सही से काम करता है। 
नमक का पानी :
नमक का पानी लो ब्‍लड प्रेशर के लिए बड़े काम का है। इससे ब्लड प्रेशर सामान्य हो जाता है। नमक में सोडियम मौजूद होता है और यह ब्‍लड प्रेशर बढ़ाता है। ध्यान रहें, नमक की मात्रा इतनी भी ना दें कि इससे स्वास्‍थ्य पर बुरा असर पड़े। बहुत ज्यादा मात्रा में नमक सेहत के लिए फायदेमंद नहीं माना जाता। कम ब्लड प्रेशर में एक गिलास पानी में डेढ़ चम्मच नमक मिलाकर पी सकते हैं।


कैफीन का सेवन करें :
कॉफी भी बड़े काम की है। ब्‍लड प्रेशर कम होने पर स्ट्रांग कॉफी, हॉट चॉकलेट, कोला और कैफीन युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करने से रक्तचाप सामान्‍य हो जाता है। यदि आपको अक्सर निम्न रक्तचाप रहता है तो आपको रोजाना सुबह एक कप कॉफी पीना चाहिए। लेकिन यह भी ध्‍यान रखें कि इसके साथ कुछ न कुछ जरूर खायें।
हेल्‍दी खानपान और हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल अपनाने से भी लो ब्लड प्रेशर की समस्‍या नहीं होती है।




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बची हुई चाय पत्ती के जबर्दस्त उपयोग





     हमारे देश में शायद ही ऐसा कोई घर होगा जिसमे कि चाय नहीं बनती है। अधिकतर लोगों की सुबह की शुरुआत गर्मागम चाय के साथ होती है। अक्सर हम चाय बनाने के बाद बची हुई चायपत्ती को डस्टबिन में डाल देते है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह यूजलेस चायपत्ती हमारे और कोई काम आ सकती है, नहीं ना। आज हम आपको बताते है इन चाय की पत्तियों का इस्तेमाल आप कैसे कर सकते है। ये चाय की पत्तियां हमारी सेहत के साथ-साथ कुछ घुरेल कामों में भी आसानी काम में लाई जा सकती है।
जानते है चाय की पत्ती के फायदे
*बालों में चमक और दमक के लिए यूज होने वाली चायपत्ती बेहद ही फायदेमंद होती है। यह एक तरह से प्राकृतिक कंडिशनर का काम करती है। चाय की बची हुई पत्तियों को एक बार धो लें और इन्हें दोबारा पानी में 

उबाल लें। और फिर इस पानी से अपने बालों को साफ करें। नियमित ऐसा करने से बालों में प्राकृतिक चमक आएगी।

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चोट पर भी असरदार
चाय-पत्ती चोट को ठीक करने के लिए भी काफी असरदार मानी जाती है, क्योंकि इसमें एक एंटीआक्सीडेंट तत्व होता है, जो घाव को ठीक करने का काम करता है। उसी तरह चाय पत्ती को भी घाव पर लगाने से वो जल्द ठीक हो जाता है। आइये जानते है किस तरह इसे घाव पर लगा सकते है
आप चाय पत्ती को बॉईल कर उसे घाव पर लगा सकते है।
चाय पत्ती के पानी को आप अपने घाव के ऊपर लगा सकते है।
चाय पत्ती को चोट पर लगाने से आप इन्फेक्शन से भी बच सकते है।
*चाय की पत्ती में थोड़ा सा विम पाउडर मिलाकर क्राकरी साफ करें। उसमें चमक आ जाएगी।
गमले में पौधों को समय-समय पर खाद की जरूरत होती है। ऐसे में आप बची हुई चायपत्ती को साफ कर लें और गमले में डाल दें। इससे आपके पौधे स्वस्थ रहेगें।




*जिस स्थान पर अधिक मक्खियां बैठ रही हों। वहां धोयी हुई चाय की पत्ती को गीला करके रगड़ दें।
*चाय की पत्ती में एंटीआक्सीडेंट होता है और इसे हम चोट और घावों को भ्भ्भरने के लिए काम में ले सकते है। इसके लिए सबसे पहले आप चायपत्तियों को उबाल लें और इसे चोट के ऊपर लगा दें। या फिर आप चायपत्ती के पानी से चोट और घावों को धो सकते हैं। यह संक्रमण से भी आपको बचाती है।

धतूरा के औषधीय उपयोग

पैरों की बदबू दूर करें
कई लोग पैरों की बदबू या दुर्गन्ध से बहुत परेशान रहते है। लेकिन आप चाय पत्ती के इस्तेमाल से इस समस्या का निराकरण कर सकते है। आप चाय की पत्तियो को पानी में डाल कर बॉईल कर ले और ठंडा हो जाने पर इस पानी को किसी बर्तन में निकाल लें। अब उस पानी में अपने पैरों को कुछ देर तक रखे। ऐसा रोजाना करने से आपको इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी।
डार्क सर्कल हटाएं
आज कल लोगों को डार्क सर्कल होना एक आम बात हो गयी है। जिससे वो बहुत परेशान रहते है, क्योंकि ये आँखे के नीचे होते है और चेहरे पर बड़े गंदे दिखते है। घबराइये मत हम आपको बता रहे है इस समस्या से निजात पाने का तरीका।
आप टी-बैग को अपनी आँखों पर कुछ दर तक रखे और ऐसा करने से इसमें मौजूद कैफीन आंखों के नीचे के काले घेरे को कम करने में मदद करता है।
किडनी फेल्योर(गुर्दे खराब) रोगी घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार

2. चायपत्ती का इस्तेमाल में हम लकड़ी के बने सामानों को चमकदार बनाने में भी कर सकते है। चाय बनाने के बाद बची हुई चायपत्ती को दोबार में पानी में उबालकर किसी शीशी में भरकर रख लें। इससे लकड़ी के बने सामानों की सफाई करने से उनमें शानदार चमक आती है।
* आप चायपत्ती का इस्तेमाल काबुली चना बनाने के लिए भी कर सकते हैं। इसके लिए आप चायपत्तियों को सुखा लें और काबुली चना बनाते समय उबलते हुए पानी में चायपत्ती की पोटली को उसमें डाल दें। ऐसा करने से काबुली चनों का रंग अधिक आकर्षक दिखता है।

* बालों में चमक और दमक के लिए यूज होने वाली चायपत्ती बेहद ही फायदेमंद होती है। यह एक तरह से प्राकृतिक कंडिशनर का काम करती है। चाय की बची हुई पत्तियों को एक बार धो लें और इन्हें दोबारा पानी में उबाल लें। और फिर इस पानी से अपने बालों को साफ करें। नियमित ऐसा करने से बालों में प्राकृतिक चमक 
आएगी।
दाँतो के दर्द से राहत
चाय पत्ती दाँतो के दर्द से भी निजात दिलाता है। इसके लिए सबसे पहले आप एक बर्तन में ठंडे पानी को रख उसमे टी-बैग को भीगा दें। अब उस टी-बैग को अपने दाँतो पर लागए जहाँ दर्द हो रहा हो। इसे लगाते ही आपको तुरंत राहत महसूस होगी।
* चाय की पत्ती में थोड़ा सा विम पाउडर मिलाकर क्राकरी साफ करें। उसमें चमक आ जाएगी।
* गमले में पौधों को समय-समय पर खाद की जरूरत होती है। ऐसे में आप बची हुई चायपत्ती को साफ कर लें और गमले में डाल दें। इससे आपके पौधे स्वस्थ रहेगें।
*. जिस स्थान पर अधिक मक्खियां बैठ रही हों। वहां धोयी हुई चाय की पत्ती को गीला करके रगड़ दें।

    इस पोस्ट में दी गयी जानकारी आपको अच्छी और लाभकारी लगी हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर कीजियेगा । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँच सकती है और हमको भी आपके लिये और अच्छे लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है
7 दिनों में स्तनों का ढीलापन दूर करने के घरेलु नुस्खे




घुटनो का दर्द करें जड़ से खत्म करने के उपचार




     घुटनों के दर्द की समस्या आजकल आम होती जा रही है कई बार ऐसा भी होता है कि किसी कारणवश चोट लग जाने से या बढ़ती हुई उम्र के कारण या फिर व्रद्धावस्था में हड्डियों के कमजोर हो जाने से अक्सर घुटनों में दर्द होने लगता है. इस पोस्ट में हम आपको घुटनों के दर्द से राहत दिलाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे बता रहे हैं जिनका उपयोग करने पर लगभग 7 दिन में ही आपको घुटनों के दर्द से राहत मिल जाएगी.
घुटनों के दर्द का इलाज -
   यदि आपके घुटनों में लगातार या थोड़ा-थोड़ा दर्द या तेज दर्द बना रहता है तो यहां दिए गए घरेलू नुस्खे आजमाएं और आपको 7 से लेकर 15 दिन के अंदर-अंदर इन घरेलू नुस्खों से पूरा पूरा आराम मिल जाएगा और फिर कभी आपके घुटने दर्द नहीं करेंगे. घुटनों के लिए दर्द निवारक दवा बनाने के लिए आप नीचे दिए गए कुछ नुस्खे आजमाएं.
 

दर्द के आराम दिलाये सौंठ का लेप-

   सौंठ से बनी दर्द निवारक दवा सौंठ भी एक बहुत अच्छा दर्द निवारक दवा के रूप में फायदेमंद साबित हो सकता है, सौंठ से दर्दनिवारक दवा बनाने के लिए एक आप एक छोटा चम्मच सौंठ का पाउडर व थोड़ा आवश्यकतानुसार तिल का तेल इन दोनों को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट जैसा बना ले.
दर्द या मोच के स्थान पर या चोट के दर्द में आप इस दर्द निवारक सौंठ के पेस्ट को हल्के हल्के प्रभावित स्थान पर लगाएं और इसको दो से 3 घंटे तक लगा रहने दें इसके बाद इसे पानी से धो लें ऐसा करने से 1 सप्ताह में आपको घुटने के दर्द में पूरा आराम मिल जाता है और अगर मांसपेशियों में भी खिंचाव महसूस होता है तो वह भी जाता रहता है.


दर्द निवारक हल्दी का पेस्ट-
   किसी चोट का दर्द हो या घुटने का दर्द आप इस दर्द निवारक हल्दी के पेस्ट को बनाकर अपनी चोट के स्थान पर या घुटनों के दर्द के स्थान पर लगाइए इससे बहुत जल्दी आराम मिलता है. दर्द निवारक हल्दी का पेस्ट कैसे बनाएं इसके लिए आप सबसे पहले एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर लें और एक चम्मच पिसी हुई चीनी और इसमें आप बूरा या शहद मिला लें, और एक चुटकी चूना मिला दें और थोड़ा सा पानी डाल कर इसका पेस्ट जैसा बना लें.
इस लेप को बनाने के बाद अपने चम्मच के स्थान पर यार जो घुटना का दर्द करता है उस स्थान पर स्लिप को लगा ले और ऊपर से किराए बैंडेज या कोई पुराना सूती कपड़ा बांध दें और इसको रातभर लगा रहने दें और सुबह सादा पानी से इसको धो ले इस तरह से लगभग 7:00 से लेकर 1 सप्ताह से लेकर 2 सप्ताह तक ऐसा करने से इसको लगाने से आपके घुटने की सूजन मांसपेशियों में खिंचाव अंदरुनी च** होने वाले दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलता है और यह पृष्ठ आप के दर्द को जड़ से खत्म कर देता है.


खजूर से घुटने में दर्द का इलाज-

   सर्दियों के मौसम में रोजाना 5-6 खजूर खाना बहुत ही लाभदायक होता है, खजूर का सेवन आप इस तरह भी कर सकते हैं रात के समय 6-7 खजूर पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट इन खजूर को खा ले और साथ ही वह पानी भी पी ले जिनको जिसमें आपने रात में खजूर भिगोए थे. यह घुटनों के दर्द के अलावा आपके जोड़ों के दर्द में भी आराम दिलाता है.
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विशिष्ट परामर्श- 

गठिया , संधिवात , कटिवात,साईटिका ,घुटनो की पीड़ा जैसे वात रोगों मे वैध्य श्री दामोदर 98267-95656 की जड़ी- बूटी निर्मित औषधि सर्वाधिक असरदार साबित होती है| रोगी के व्यक्तिश: लक्षणों  के आधार पर निर्मित औषधि से बिस्तर पकड़े रोगी भी दर्द- मुक्त सक्रियता हासिल करते हैं|







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यूरिक एसिड से छुटकारा पाने के रामबाण घरेलु उपाय



    कुछ वर्ष पहले तक यूरिक एसिड की समस्या कम ही लोगों को हुआ करता था और सबसे बड़ी बात जो उस समय देखने में आती थी कि यह बीमारी पहले नंबर में तो केवल वृद्धावस्था वालों में ही दिखलाई पड़ती थी। और दूसरे नंबर में यह बीमारी केवल अमीर, गरिष्ट भोजन करने वालों, शारीरिक परिश्रम न करने वाले आलसी और अनुवांशिक दोषों वालों को ही होती थी।
    परंतु आज यह बीमारी अपनी पुरानी सीमाएं तोड़ते हुए समाज हर वर्ग, हर आयु और लगभग सभी को पीड़ित करने लगी है।
इस बीमारी में प्रारंभिक अवस्था में शरीर में जकड़न देखी जाती है। बाद में छोटे जोड़ों में दर्द शुरू होता है। आलस्य करने पर जब जोड़ों के स्थान में हड्डियां प्रभावित होने लग जाती हैं तो इलाज मुश्किल होना शुरू हो जाता है।
एलोपैथी में इस के लिए प्रयोग की जाने वाली औषधियां शरीर में गुर्दो आदि अवयवों के लिए काफी नुकसानदेह होती है।
इस बीमारी में घुटनों, एड़ियों और पैरों की उंगलियों आदि में दर्द होने की सबसे बड़ी वजह यूरिक एसिड का बढ़ना है।

इस बीमारी को गठिया या गाउट ( Gout ) भी कहते हैं।
इस बीमारी का उपचार आरम्भ में ही सही समय पर न किया जाये तो मरीज का न् केवल उठना बैठना और चलना फिरना भी दुश्वार होता ही है। बल्कि समय बीत जाने पर यह रोग जड़ जमा कर दुस्साध्य भी हो जाता है। वैसे अभी भी ये समस्या 40 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों में ही अधिक होती दिखलाई पड़ती है और और यदि यह कहा जाये कि 40 से ऊपर उम्र के अधिकांश लोग इससे पीड़ित होते देखे जाते है परंतु यह बात भी एकदम सही है यदि खाने पीने के मामले में यदि प्राकृतिक स्वास्थ्य नियमों का ख़याल न रखा जाए और उनका पालन न किया जाये तो यह बीमारी 40 वर्ष की उम्र से पहले भी किसी भी उम्र में हो सकती है। इसके लिए आपको अपना रोजाना खाने में ऐसा भोजन करना चाहिए जिससे शरीर में पाचन के दौरान आवश्यकता से अधिक प्यूरिन न बने। क्योंकि प्यूरिन ‌‌_ Purine के टूटने जाने की वजह से शरीर में यूरिक एसिड बनता है, यह बात भी जग जाहिर है कि जो ख़ून गुर्दों पास पहुंचता है उस खून में से फालतू और बेकार तत्वों को छान कर हमारे गुर्दे उन्हें पेशाब के द्वारा शरीर से बाहर निकाल देते है। परंतु जब किन्ही गलत आचरणों के के कारण ये प्यूरिन टूट कर टुकड़ों के रूप में खून के साथ गुर्दों के पास पंहुचते है तब हमारे शरीर में स्थित गुर्दे इनको खून में से छान कर पेशाब के रूप में शरीर से बाहर नहीं निकल पाते है और ये टुकड़े शरीर के अंदर क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगते है। बॉडी में इसका लेवल बढ़ने से यह परेशानी का सबब बन जाता है। और इसके बाद जोड़ों का दर्द शुरु हो जाता है। घुटनों, एड़ियों और पैरों की उंगलियों में दर्द होने लगता है

हममें से अधिकांश लोगों को तो इस बीमारी के लक्षण ही मालूम नही होते हैं। मोटापे की वजह से शरीर में प्यूरिन जल्दी टूटता है, जिससे यूरिक एसिड ज़्यादा बनने लगता है। इसलिए अपना वज़न बढ़ने न दें। वज़न कम करने के लिए डायटिंग न करके सही और शुद्ध भोजन करें। प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन बंद करना जरूरी होता है। साग, पालक जैसे पदार्थ भी नहीं लेने चाहिए। विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएँ। इसके अलावा आप ये निम्न 16 ऐसे घरेलु उपाय हैं जिनको अपनाकर इस बीमारी से बहुत आसानी से छुटकारा पा सकते हैं.
यूरिक एसिड से छुटकारा पाने के सरल घरेलु उपाय.
*बथुए का जूस खाली पेट पिएँ। दो घंटे तक कुछ न खाएँ पिएँ।
*अजवाइन भी शरीर में हाइ यूरिक एसिड को कम करने की अच्छी दवा है। इसलिए भोजन पकाने में अजवाइन का इस्तेमाल करें।
*हर रोज दो चम्मच सेब का सिरका 1 गिलास पानी में मिलाकर दिन में 3 बार पिएँ। लाभ दिखेगा।
सेब, गाजर और चुकंदर का जूस हर रोज़ पीने से बॉडी का pH लेवल बढ़ता है और यूरिक एसिड कम होता है।
 एक मध्यम आकार का कच्चा पपीता लें, उसे काटकर छोटे छोटे टुकड़े कर लें। बीजों को हटा दें। कटे हुए पपीते को 2 लीटर पानी में 5 मिनट के लिए उबालें। इस उबले पानी को ठंडा करके छान लें और इसे दिन में चाय की तरह 2 से 3 बार पिएँ।
* नींबू पानी पिएँ। ये बॉडी को डिटॉक्सिफ़ाइ करता है और क्रिस्टल को घोलकर बाहर कर देता है।
* कुकिंग के लिए तिल, सरसों या ऑलिव ऑयल का प्रयोग करें। हाइ फ़ाइबर डाइट लें।
* अगर लौकी का मौसम हो तो सुबह खाली पेट लौकी (घीया, दूधी) का जूस निकाल कर एक गिलास इस में 5-5 पत्ते तुलसी और पुदीना के भी डाल ले, अब इसमें थोड़ा सेंधा नमक मिला ले। और इसको नियमित पिए कम से कम 30 से 90 दिन तक।
 *रात को सोते समय डेढ़ गिलास साधारण पानी में अर्जुन की छाल का चूर्ण एक चम्मच और दाल चीनी पाउडर *आधा चम्मच डाल कर चाय की तरह पकाये और थोड़ा पकने पर छान कर निचोड़ कर पी ले। ये भी 30 से 90 दिन तक करे।
* चोबचीनी का चूर्ण का आधा आधा चम्मच सवेरे खाली पेट और रात को सोने के समय पानी से लेने पर कुछ दिनों में यूरिक एसिड खत्म हो जाता है।
*दिन में कम से कम 3-5 लीटर पानी का सेवन करें। पानी की पर्याप्‍त मात्रा से शरीर का यूरिक एसिड पेशाब के रास्‍ते से बाहर निकल जाएगा। इसलिए थोड़ी – थोड़ी देर में पानी को जरूर पीते रहें।
*1 चम्मच अश्वगंधा पाउडर में 1 चम्मच शहद मिलाकर 1 गिलास गुनगुने दूध के साथ पिएँ।
रोज़ रात में सोने के पूर्व 3 अखरोट खाये।
 *एलो वेरा जूस में आंवले का रस मिलाकर पीने से भी आराम आता है।
*नारियल पानी रोज पिए।
*खाना खाने के आधे घंटे बाद 1 चम्मच अलसी के बीज चबाकर खाने से फ़ायदा मिलता है।
यूरिक एसिड में परहेज.-
*दही, चावल, अचार, ड्राई फ्रूट्स, दाल, और पालक बंद कर दे।
*ओमेगा 3 फैटी एसिड का सेवन न करें।
*डिब्बा बंद फ़ूड खाने से बचें।
*शराब और बीयर से परहेज़ करें।
*रात को सोते समय दूध या दाल का सेवन अत्यंत हानिकारक हैं। अगर दाल खातें हैं तो ये छिलके वाली खानी है, धुली हुयी दालें यूरिक एसिड की समस्या के लिए
*सब से बड़ी बात खाना खाते समय पानी नहीं पीना, पानी खाने से डेढ़ घंटे पहले या बाद में ही पीना हैं।
*फ़ास्ट फ़ूड, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड फ़ूड, अंडा, मांस, मछली, शराब, और धूम्रपान बिलकुल बंद कर दे। इन से आपकी यूरिक एसिड की समस्या,हार्ट की कोई भी समस्या, जोड़ो के दर्द, हाई ब्लड प्रेशर की समस्या में बहुत आराम आएगा।



कच्चे केले के अद्भुत फायदे






केला जिसे अंग्रेजी में बनाना कहते हैं हमारे बॉडी के लिए बहुत लाभकारी होता है। चाहे पका हुआ केला हो या फिर कच्चा केला, दोनों ही शरीर के लिए बेहद लाभकारी है। पके हुए केले को हम तो ऐसे ही खा लेते हैं, या फिर उसका शेक बना लेते हैं वहीं कच्चे केले की सब्जी, कच्चे केले के कोफ्ते और कच्चे केले के चिप्स बनाकर हम खाते हैं। लोग कच्चे से ज्यादा पके हुए केले को बड़ी ही चाव से खाते हैं। बहुत कम लोग कच्चे केले के लाभ के बारे में जानते हैं।
केला जिसे अंग्रेजी में बनाना कहते हैं हमारे बॉडी के लिए बहुत लाभकारी होता है। चाहे पका हुआ केला हो या फिर कच्चा केला, दोनों ही शरीर के लिए बेहद लाभकारी है। पके हुए केले को हम तो ऐसे ही खा लेते हैं, या फिर उसका शेक बना लेते हैं वहीं कच्चे केले की सब्जी, कच्चे केले के कोफ्ते और कच्चे केले के चिप्स बनाकर हम खाते हैं। लोग कच्चे से ज्यादा पके हुए केले को बड़ी ही चाव से खाते हैं। बहुत कम लोग कच्चे केले के लाभ के बारे में जानते हैं।
कच्चा केला पोटेशियम का खजाना होता है जिसकी मदद से आप प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बना सकते हैं। यही नहीं, इसको खाने से आपकी बॉडी में हमेशा उर्जा रहेगी और आप खुद को सक्रिय पाएंगे। इसमें मौजूद विटामिन B6, विटामिन C आपको उर्जा देती है। कच्चे केले में स्टार्च भी मौजूद होता है और साथ ही एंटीऑक्सीडेंट भी। आपको बता दें कच्चा केला खाना आपके सेहत के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।
कच्चा केला पोटेशियम का खजाना होता है जिसकी मदद से आप प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बना सकते हैं। यही नहीं, इसको खाने से आपकी बॉडी में हमेशा उर्जा रहेगी और आप खुद को सक्रिय पाएंगे। इसमें मौजूद विटामिन B6, विटामिन C आपको उर्जा देती है। कच्चे केले में स्टार्च भी मौजूद होता है और साथ ही एंटीऑक्सीडेंट भी। आपको बता दें कच्चा केला खाना आपके सेहत के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।
आइये जानते  हैं कच्चे केले खाने के फायदे-


वजन घटाने का तरीका है

जो लोग अपने मोटापे को लेकर परेशान हैं उन्हें कच्चा केला जरूर खाना चाहिए। इसमें मौजूद फाइबर आपके बॉडी के अनचाहे फैट को साथ ही जहरीली चीजों को साफ करने में मददगार होता है।
     इस पोस्ट में दी गयी जानकारी आपको अच्छी और लाभकारी लगी हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर कीजियेगा । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँच सकती है और हमको भी आपके लिये और अच्छे लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है|

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नीलगिरी तेल के स्वास्थ्य लाभ


कब्ज का रामबाण इलाज
जैसे कि हमने ऊपर आपको बताया कि कच्चे केले में फाइबर और हेल्दी स्टार्च मौजूद होते हैं जो आपकी आंत को हमेशा साफ रखने में मदद करता है। यह आंत में किसी भी प्रकार की गंदगी को साफ करता है और हेल्दी बनाता है। अगर आपको कब्ज की शिकायत है तो कच्चा केला खाना शुरू कर दें। आपके लिए यह फायदेमंद रहेगा।


भूख को शांत करने का उपाय

अक्सर लोगों को समय-समय पर भूख लगने की बीमारी होती है। ऐसे में कच्चा केला आपकी इस भूख को कम करने में मदद करता है। इससे फायदा यह होता है कि हम जंक फूड या कोई और बीमार पैदा करने वाले खाने से बच जाते हैं।
मधुमेह का एक उपचार
क्या आप मधुमेह के रोगी हैं? अगर जवाब हां में है तो आपके लिए कच्चा केला एक दवाई के रूप में काम करेगा। जी हां मधुमेह की शुरुआत में आप कच्चा केले का सेवन करना शुरू कर दें। आपकी मधुमेह की बीमारी बहुत ही जल्दी दूर हो जाएगी।
पाचन तंत्र को करता है मजबूत
रोजाना कच्चा केला खाने से आपकी पाचन क्रिया हमेशा सही रहेगी। आपको बता दें जब भी आपका पेट खराब हो तो कच्चा केला जरूर खाइए। यह आपके पेट को अंदर से कसेगा और आपको बार-बार बाथरूम नहीं जाना पड़ेगा। यह एक दवाई की तरह आपके पेट सही कर देता है।