Tuesday, October 18, 2016

लीवर के रोगों मे रामबाण है घरेलू नुस्खे : household tip for Liver diseases



यदि ख़राब हो रहा है तो कुछ सामान्य से लक्षणों से जाना जा सकता है !
जैसे -
* मुंह से गंदी बदबू आना
* काले घेरे या थकान भरी आंखें
* पाचन तंत्र में खराबी
* त्वचा पर धब्बे -
* गहरे रंग का मूत्र
* आंखों में पीलापन
* मुंहु में कड़वाहट
* पेट पर सूजन
जैसे लक्षणो से आसानी से समझा जा सकता है कि लीवर खराब हो रहा है !
खराब लीवर की चिकित्सा से पहले जानना होगा की लीवर के रोग कौन कौन से हैं ताकि उनके अनुसार चिकित्सा की जा सके !







* एकदम से होने वाले रोग.... एक्यूट !
और
धीरे धीरे लंबे समय में होने वाले रोग.... क्रोनिक !
   एक्यूट रोग लंबे समय तक रह कर क्रोनिक लीवर रोग पैदा करते है !
इसी प्रकार से यकृत के रोग भी कुछ दवाओं या शराब ( अल्कोहल ) आदि के लंबे समय तक सेवन से होने वाला लीवर रोग विश्व में सबसे अधिक देखा जाता है इसमें लीवर क्षति ग्रस्त होकर सिकुड़ जाता है - इस स्थिति को सिरोसिस कहा जाता है !
 ये यकृत रोग तीन स्तर पर :-
* पहले फेटी और सूजन वाला
* दूसरा अल्कोहलिक हेपेटाइटिस
* अंत में तीव्र मारक सिरोसिस तक पहुँचता है !
 फैटी लीवर लिवर के लिये आयुर्वेद औषधि :-
* आरोग्यवर्धिनी वटी 2 गोली - पूनर्नवादि मण्डुर 2 गोली - प्लीहारी वटी 2 गोली पानी से दिजिये !
* कालमेघनवायसलौह 10 ग्राम - रोहितक लौह 5 ग्राम - वृहत लोकनाथ रस 5 ग्राम यानी 20 गोली - इन सबको एक मेँ मिलाकर ठिक से पीसकर कम से कम 30 खुराक बना लिजिये -
और 1 - 1 पुड़िया उसमे से लेकर शहद के साथ चटायेँ !
रोहितकारिष्ट 3 चम्मच + कालमेघासव 3 चम्मच पानी 6 चम्मच मिलाकर सुबह और शाम भोजन के बाद दें !
छोटी इलाइची चबा कर खायें 3 महीने तक दिन मे एक इलाइची रोज खायें


* अजवाईन 3 ग्राम और आधा ग्राम नमक भोजन के बाद पानी के साथ लेने से लिवर - तिल्ली के सभी रोग ठीक होते हैं !
** जिगर की कमजोरी :-
ग्वारपाठा के पत्तों का रस तथा शहद दोनों को चीनी मिट्टी के बर्तन में मुंह बंद कर 1 सप्ताह तक धूप में रखें - इसके बाद इसे छान लें !
जितना ग्वारपाठा के पत्तों का रस लें - उसकी आधी मात्रा में शहद
इसमें से 10 - 20 ग्राम की मात्रा में सुबह - शाम सेवन करने से यकृत विकारों ( जिगर के रोगों ) को दूर करने में लाभ मिलता है !
 इसकी अधिक मात्रा विरेचक होती है परन्तु उचित मात्रा में सेवन करने से मल एवं वात की प्रवृत्ति ठीक होने लगती है !
इसमें सेवन से यकृत ( जिगर ) मजबूत हो जाता है और उसकी क्रिया सामान्य हो जाती है !
* हल्दी को अपने खाने में शामिल करें या रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पिए !
* साबूत चावल के दाने चुटकी भर ( 7 दाने ) ले सुबह सुबह पानी के साथ खाली पेट निगल ले !
{ ध्यान रहे चावल के दाने टूटे हुए न हो एक दम से साबुत हों - इन्‍हे लेते वक्त चबाना नही - सिधे पानी से निगल लें - फिर उसके आधे घंटे बाद ही कुछ खायें - लिवर को नयी ज़िदगी मिलेगी इस प्रयोग से }
एक बहुत उपयोगी और कई बार परीक्षित नुस्खा !!!
यह पूरी तरह निरापद है .... !
इसका कोई साइड इफ़ेक्ट भी नही .... !
यहाँ तक की 6 माह के बच्चे को भी दे सकते है !
# भृंगराज ~ Alba .... लीवर के लिए अमृत ... !
* किसी को पीलिया के कारण की तकलीफ है
* किसी को शराब के कारण लीवर की तकलीफ है







* लीवर की कई तरह की तकलीफ में यह राम बाण इलाज है !
* लिवर बढा हुवा हो तो प्याज रस में काला नमक व थोडा सा निम्बू रस निचोड नियमित पीयें !
इससे बढा हुवा लीवर व तिल्ली ( Spleen ) सामान्‍य हो जायेंगे व लीवर सबंधि  कष्ट भी दूर होजाएंगे
* लीवर की बिमारी में भुई आंवला अत्यंत ही गुणकारी है - लीवर की परेशानी हो Bilirubin बढा हुवा है व पीलिया रोग है भुई आंवला के पंचाग - जड टहनी फल फूल पत्ति का काढा बनाकर सुबह शाम पीयें - इससे लीवर की सूजन और लीवर बढे होने की परेशानी है तो वह भी जल्द दूर हो जायेगी !
*जिनको लीवर की परेशानी नही है - वो भी भुई आंवला का काढा बना 1 माह नियमित सेवन कर ले तो पूरे वर्ष लीवर की परेशानी नही होगी !
इसके साथ पतंजलि के-
'' दिव्य उदरामृत वटी '' 2 - 2 गोली सुबह शाम ...
'' सर्वकल्प क्वाथ '' का सुबह शाम सेवन करें ..
लीवर की किसी भी समस्या के लिये रामबाण है !

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विशिष्ट परामर्श- लीवर ,तिल्ली (स्प्लीन)और आंतों संबंधी रोगों की रामबाण हर्बल औषधि  है "उदर रोग हर्बल" जो रोग की बढ़ी हुई अवस्था मे भी कारगर परिणाम देती है|| वैध्य श्री दामोदर  से  98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है| 
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