माइग्रेन का इलाज सिर्फ एक मिनट में सेंधा नमक के प्रयोग से



आज हम आपके लिए माइग्रेन का एक रामबाण नुस्खा लेकर आये है जो माइग्रेन की एक मिनट में ही कर देगा छुट्टी और आप पायेंगे चेन की साँस |माइग्रेन से यह नुस्खा जितना सरल आपको देखने में लग रहा है इसका रिजल्ट उतना ही असरदार है और आपको शीघ्र ही मिल जाता है आइये जानते है इस साधारण से दिखने वाले नुस्खे को तेयार करने की विधि 
इस रामबाण नुस्खे के लिए जरूरी सामग्री :-
# सेंधा नमक
# उबाल कर ठंडा किया हुआ पानी 5 मि.ली.


इस ओषधि को तेयार करने की विधि :-

सबसे पहले आप सेंधा नमक को पानी में घोल लीजिये अभी आप सीधा लेट जाइए और अब किसी ड्रापर या रुई की सहायता से सिर में जिस साइड में दर्द हो रहा हो उसके उलटी दिशा के नथुने में यह घोल 1 से 2 मि.ली. डाल लीजिये इस प्रयोग को करते ही आपको कुछ ही समय में आराम मिल जायेगा अगर आपको फिर भी आराम न मिले तो आप कुछ देर के बाद दोबारा इसे आजमा सकते है या प्रयोग कर सकते हैI
सावधानी :-
आपको यह प्रयोग एक या दो बार ही करना है अगर आप अधिक बार इस प्रयोग को करेंगे तो आपके गले में कांटे चुबने जेसी चुबन हो सकती है अगर आपको इस प्रकार की समस्या आये तो आप थोडा सा देशी घी लेकर उसको गुनगुना करके उसको ऊँगली की सहायता से गले में लगा दीजिये जहा पर आपको चुभन महसूस हो रही है तो आपको आराम मिल जायेगा
कई बार हमारे सिर के अाधे हिस्से में अचानक से दर्द होने लगता है और यह दर्द कई बार उठता है। इस दर्द से बचने के लिए हम कई तरह के उपाय करते है लेकिन इसका कोई असर नहीं होता है। इसे अर्धकपारी दर्द या अर्ध मस्तिष्क दर्द, जिसे माइग्रेन भी कहते है। यह बार-बार उठने वाला दर्द है, जो कभी-कभी कम अौर कई बार असहनीय हो जाता है। इसके साथ दूसरें लक्षण जैसे सुनने, बोलने या महसूस करने की शक्ति पर असर होना अाम बात है।
माइग्रेन के दर्द से पीड़ित लोग संसार के सभी भागों में पाए जाते है। इंगलैंड में किए गए एक सर्वेक्षण में वहां के 10 प्रतिशत से 12 प्रतिशत लोगों को इस बीमारी से पीड़ित बताया गया है। महिलाअों में यह बीमारी पुरूषों की अपेक्षा ज्यादा पाई जाती है। महिला और पुरूषों में यह अनुपात 2:1 है। हालांकि एक अप्रचलित माइग्रेनियस न्युरेलजीया, सिर्फ पुरूषों तक सीमित है।
माइग्रेन के प्रकार :-
माइग्रेन चार प्रकार का हो सकता है।
1. क्लासिकल माइग्रेन
इस माइग्रेन में दर्द शुरू होने के लक्षण महसूस होने लगते है। अगले दिन रोगी को दर्द का अहसास होने लगता है, इसमें देखने की क्षमता पर असर पड़ता है और धुंधला नजर अाने लगता है। कई बार तो अांखों के सामने अधेरा छा जाता है। यह लक्षण 15 से 30 मिनट में अपने अधिकतम रूप पर पहुंच जाता है। कभी-कभी तो व्यक्ति को पूरा दिन इस समस्या से गुजरना पड़ता है। इसका एक लक्षण और है जी मचलाना और बैचेनी या चक्कर अाना। ऐसा होने के बाद तुरंत बाद सिरदर्द होने लगता है। यह दर्द एक आंख के ऊपर से सिर के पिछले हिस्से तक फैल जाता है। क्लासिकल माइग्रेन की तीव्रता जैसे टीस उठना, सिर पर लगातार मार लगने का अहसास या असहनीय और पीड़ादायक है।



2. साधारण या अाम माइग्रेन-

इस तरह का माइग्रेन अाम देखने को मिलता है। एक अनुमान के अनुसार, 10 प्रतिशत से 18 प्रतिशत लोग साधारण माइग्रेन से पीड़ित होते है। यह क्लासिकल माइग्रेन की तरह खतरनाक नहीं होता। इसके लक्षण अधिकतर माइग्रेन की तरह ही होते है लेकिन दर्द की तीव्रता 30 से 60 मिनट तक हो सकती है। इस तरह के माइग्रेन में कुछ देर तक अाराम या ऐसा कोई काम, जिससे सिर से जाने वाले खून की मात्रा बढ़ सकती है जैसे- व्यायाम, झुकना, सीढ़ी चढ़ना, खांसना, उल्टी होना अादि से रोगी बेहतर महसूस कर सकता है।

3. माइग्रेनियम न्यूरेलजिया


यह अधिकतर सिर्फ पुरुषों में विशेषकर 20 से 40 वर्ष के पुरुषों में और विशेषकर सर्दियों और बसंत ऋतु में होता है। इसमें दर्द एक आंख में होता है और आंखें लाल हो जाती हैं और पानी निकलने लगता है और उसी आंख की तरफ नाक भी बहने लगती है। यह दर्द 24 घंटों में एक या दो बार हो सकता है। यह 15 से 45 मिनट तक रहता है। पर आश्चर्यजनक रूप से इस प्रकार के माइग्रेन में उल्टियां नहीं होतीं, जो दूसरे हर प्रकार के माइग्रेन में आम लक्षण है।
4. बच्चों का माइग्रेन
बच्चों को माइग्रेन अधिकतर यात्रा करने पर ही होता है। यह आगे चलकर वयस्क होने पर माइग्रेन का दूसरा रुप धारण कर सकता है। बच्चों को उल्टी होना, चक्कर आना और चिड़चिड़ाहट इसके आम लक्षण हैं। इस माइग्रेन में सिरदर्द की तीव्रता कम होती है।
इसमें अधिकतर बच्चे पेट दर्द की शिकायत करते हैं। बच्चों में इसका प्रतिशत चार है अर्थात माइग्रेन पीड़ितों में से करीब 40 प्रतिशत बच्चे इस रोग से वयस्क होने पर मुक्ति पा जाते हैं।

माइग्रेन होने के कारण:-
1. पैतृक
2. दबाव,शारीरिक, मानसिक
3. व्यक्तित्व
4. असंतुलित भोजन
5. वातारण
6. बहुत अधिक यात्रा करना
7. सिर व गर्दन की चोट
8. ब्लड प्रेशर
9. हारमोंस का प्रभाव
10. दूसरी दवाइयों का असर


उपचार :-

माइग्रेन का इलाज शुरूअाती लक्षणों के साथ ही शुरू कर देना चाहिए। इलाज जैसे एस्प्रिन या पेरासिटामॉल के साथ हो सकता है। अगर माइग्रेन साधारण ना होकर क्लासिक हो तो मेरोक्लोप्रेमिड और इसके अाधे घंटे बाद एस्प्रिन या पेरासिटामॉल लेना काफी असरदायक होता है।
माइग्रिल और इफेरगोट, जिसमें इरगोटेमिन की मात्रा दो मिलीग्राम है, को लेने पर उल्टी बंद हो जाती है और साथ ही दर्द का प्रभाव कम हो जाता है। इसके अलावा बाजार में केफेगोट और फेमिरगिन भी मिलती है। इरगोरिमिन युक्त दवाई की पहली खुराक दो मिलीग्राम की होनी चाहिए। अगर 45 से 60 मिनट बाद भी दर्द कम ना हो तो अादी लेबलेट और लेनी चाहिए। ध्यान रहे इसका इस्तेमाल प्रैग्नेंसी में बिल्कुल ना करें।
जिन लोगों ने लंबे समय की बीमारी के बावजूद भी इसका इलाज नहीं किया है तो उनको तुरंत डॉक्टरी सहायता लेनी चाहिए। माइग्रेनियम न्यूरेलजिया का माइग्रेन होने पर तुरंत ली गई दवाई से काफी फायदा होता है। इस तरह के दर्द में भी इरगोटिमिन युक्त दवाई लेनी चाहिए। ऐसे में क्लोनिडिन या पिझोटिफेन दिन में तीन बार लेना फायदेमंद हो सकता है।
बच्चों के माइग्रेन में एस्प्रिन का प्रयोग काफी है या उल्टी रोकने की दवा दी जा सकती है। कुल मिलाकर माइग्रेन ऐसी बीमारी है, जिसका इलाज अावश्यक है। हालांकि इसका कोई जानलेवा प्रभाव नहीं होता, लेकिन यह काफी कषंटदायक होता है। इसलिए उचित दवाइयों के अलावा मानसिक तनाव, जिनसे अपचन होने की संभावना हो ऐसी खाने की चीजें, तेज रोशनी और ज्यादा ध्वनि से बचना और संतुलित खाना नियमपूर्वक खाना, 7-8 घंटे की नींद लेना, खुश रहना इस बीमारी का सबसे अच्छा इलाज है।




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लाल प्याज से Thyroid का चमत्कारिक उपचार





Thyroid का सरल उपचार
सेंट पीटर्सबर्ग, रूस से एक प्रसिद्ध चिकित्सक ने थायराइड ग्रंथि के विकारों का इलाज खोजने का दावा किया है इस अविश्वसनीय उपाए में सिर्फ एक घरेलु औषधि का उपयोग होता है
और वो है लाल प्याज |


प्याज के गुणों के बारे में हम सब जानते हैं इसमें बहुत सारे anti-bacterial, anti-fungal, anti-inflammatory, and cancer fighting गुण होते हैं इस में विटामिन और मिनरल्स भी भरपूर मात्रा में होते हैं जो हमारे शारीर को पोषण देते हैं और बिमारियों से बचाते हैं |
प्याज से Thyroid का इलाज (Thyroid Gland Remedy)
ये उपचार रात को सोने से पहले करना है एक प्याज लेकर उसको दो हिस्सों में काट लें और गर्दन पर Thyroid Gland के आस पास गोल गोल मसाज करे |


बिना आपरेशन प्रोस्टेट वृद्धि की अचूक औषधि


मसाज करने के बाद गर्दन को धोएं नहीं रात भर ऐसे ही छोड़ दें और प्याज का रस अपना काम करता रहेगा |
ये उपचार बहुत ही आसान है और आप इसे एक बार जरुर आजमा कर देखें आप को अच्छे नतीजे प्राप्त होंगे |

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बार बार पेशाब आने के अचूक नुस्खे






* जामुन की गुठली एवं बहेडे का छीलका दोनो बारीक पीस लें आठ दिन तक चार ग्राम रोज पानी के साथ लें,बार बार पेशाब आना बंद हो जायेगा
* कलमी शोरा दस ग्राम दूध दो सौ पचास ग्राम और पानी एक किलो इन सबकोमिलाकर दिन में दो बार पियें पेशाब खुलकर आयेगा बहुमूत्र रोग ठीक होजायेगा
* पिस्ता छ: दाने मुनक्का तीन दाने और काली मिर्च तीन दाने इन्हे सुबह शाम चबाकर पंद्रह दिन खाने से पेशाब बार बार नही आयेगा|
* काले तिल भुने हुए आधा किलो + आंवला १५० ग्राम इन दोनो में आवश्यकतानुसार देसी गुड(गन्ने का) मिला कर १५ या २० ग्राम के लड्डू बना लें। सुबह-शाम सेवन करें और इसे खाने के आधे घंटे तक पानी न पियें। बस आपकी समस्या जादू की तरह से गायब हो जाएगी।

* यदि बार-बार पेशाब आता है, यदि बहुमूत्र रोग हो गया है तो उसके उपचार के लिए आंवले के पांच ग्राम रस में हल्दी की चुटकी घोलिए और उसमें पांच ग्राम शहद मिलाकर पी जाइये। ऐसा करने से जरा-जरा सी देर में पेशाब का आना बंद हो जाता है।
* मूली के नियमित प्रयोग से बहुमूत्र में आराम मिलता है
* आंवले का रस का सूखा चूर्ण गुड के साथ मिलाकर लेने से पेशाब खुलकर आता है
* जवाखार और मिश्री तीन तीन ग्राम ताजे जल के साथ कुछ दिन लेने से बहुमूत्र का रोग समाप्त हो जाता है
* राई काले तिल कलमी शोरा टेसू के फ़ूल एवं दालचीनी सभी को समभाग मेंलेकर चूर्ण बना लें,रोज दो ग्राम सुबह शाम शहद के साथ खाने पर बहुमूत्र रोगसे मुक्ति मिलती है
* बहुमूत्र में बबूल का गोंद घी मे भून कर मक्खन के साथ सुबह को खाने से फ़ायदा होता है
* अदरक का ताजा रस सेवन करने से रुका हुआ मूत्र जल्दी बाहर निकल जाता है,साथ ही बहुमूत्र की शिकायत भी दूर होती है|


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घर पर हर्बल नेचुरल डाई बनाने का तरीका

घर पर हर्बल नेचुरल डाई बनाने का तरीका-



क्या आप बाल काला करने के लिए डाई या केमिकल युक्त हानिकारक कलर इस्तेमाल करते हैं। शायद आप नहीं जानते ये आपके बालो के लिए कितने हानिकारक हैं और साथ में ये आपकी त्वचा और स्वस्थ्य को भी बहुत नुक्सान पहुंचाते हैं। इनसे आपको बालो के गिरने पकने और गंजे पन की शिकायत हो सकती हैं। । तो अब आप भारतीय ज्ञान की मदद से घर पर ही बनाये अपने लिए बाल काला करने की सुरक्षित हर्बल और देसी डाई। और अपने बालो और त्वचा को बचाइये इन हानिकारक पदार्थो से।
आइये जाने इसको बनाने की विधि।
आवश्यक सामग्री-
1. सूखी पीसी मेहँदी – 20 ग्राम
2. काफी पाउडर – 3 ग्राम
3. कत्था – 3 ग्राम
4. ब्राह्मी चूर्ण – 10 ग्राम
5. आंवला चूर्ण – 10 ग्राम
6. दही – 25 ग्राम
7. नीम्बू का रस – 4 चम्मच


1 से 5 तक सभी को कूट पीस कर आपस में मिला लीजये। आवश्यकता अनुसार मिला कर रख लीजिये। बाद में ५० ग्राम मिश्रित पाउडर में २५ ग्राम दही और ४ चम्मच नीम्बू का रस मिला कर बालो में आधे घंटे तक लगा कर रखे। फिर पानी से धो लीजिये। इसके प्रयोग से बाल काले घने तथा मुलायम हो जायेंगे।

विशेष – कई बार पहली बार में तुरंत काले बाल नहीं होते। तो जब आप तीन चार बार इसको नियमित करेंगे तो आपके बाल प्राकृतिक रूप से काले दिखने लगेंगे।
इसके साथ में आप बाल धोने के लिए घर पर ही बनाया हुआ या फिर गौ पंचगव्य से बना हुआ शैम्पू और साबुन इस्तेमाल कीजिये।
अगर छोटी उम्र में ही आपके बाल झड़ने पकने या सफ़ेद होने लग गए हैं तो आप अपनी नियमित खुराक पर ज़रूर ध्यान दे। भोजन में नियमित मिनरल्स और फोलिक एसिड को शामिल करे।

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रोज़ाना गुड़ खाने के फायदे,लाभ



रोज़ाना गुड़ खाने के 
फायदे,लाभ 
 Gur Khane Ke Fayde .






गुड़ में हैं औषधीय गुण :
गुड़ का सेवन ज्यादातर लोग ठंड में ही करते हैं, वह भी थोड़ी मात्रा में इस सोच के साथ की ज्यादा गुड़ खाने से नुकसान होता है। इसकी प्रवृत्ति गर्म होती है, लेकिन ये एक गलतफहमी है। गुड़ हर मौसम में खाया जा सकता है और पुराना गुड़ हमेशा औषधि के रूप में काम करता है। आयुर्वेद संहिता के अनुसार यह शीघ्र पचने वाला, खून बढ़ाने वाला व भूख बढ़ाने वाला होता है। इसके अतिरिक्त गुड़ से बनी चीजों के खाने से बीमारियों में राहत मिलती है।
मोटापा को करें कंट्रोल
माना जाता है कि अगर आप दूध के साथ चीनी का इस्तेमाल करते है तो इसकी जगह आप गुड का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से आपका वजन कंट्रोल में रहेगा। जिससे आप मोटापा का शिकार नहीं होगे।.
जिस दिन आप बहुत ज्‍यादा थके हुए हों, उस दिन पानी के साथ गुड़ का सेवन करें और फिर देंखे ये आपको कैसे फायदा पहुंचाता है। इसी तरह से गुड़ का दूध के साथ सेवन करने से काफी फायदा मिलता है। लेकिन इस बात का ध्‍यान रखें कि दूध हमेशा ठंडा होना चाहिये तभी फायदा पहुंचेगा नहीं तो गरम दूध और गुड जहर के समान होंगे।

सायनस ,नाक की हड्डी  बढ़ने के उपचार

*पेट संबंधी समस्या को रखें ठीक
*अगर आपको पाचन संबधी कोई भी समस्या है तो गर्म-गर्म दूध और गुड का सेवन करने से आपको पेट संबंधी हर समस्या से निजात मिल जाता है।
*ठंड में जरूर खाएं गुड़ : गुड़ में सुक्रोज, ग्लूकोज, खनिज तरल और जल अंश मौजूद होते हैं। इसके अलावा गुड़ में कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन और ताम्र तत्व भी अच्छी मात्रा में मिलते हैं। इसलिए चाहे हर मौसम में आप गुड़ खाना न पसन्द करें लेकिन ठंड में गुड़ जरूर खाएं।
* गुड़ खाने से खून बढ़ता है।
* खाना खाने के बाद इसे खाने से गैस नहीं बनती है।
असिडिटी में सहायक गुड़ : अगर आप गैस या असिडिटी से परेशान हैं तो खाने के बाद थोड़ा गुड़ जरूर खाएं ऐसा करने से ये दोनों ही समस्याएं नहीं होती हैं। गुड़, सेंधा नमक, काला नमक मिलाकर चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।

*सिर्फ आपरेशन नहीं ,प्रोस्टेट वृद्धि की 100% अचूक हर्बल औषधि *

 *गुड़ खाने से याद्दाश्त कमजोर नहीं होती, इसलिएअगर आप अपनी याद्दाश्त दुरुस्त रखना चाहते हैं,तो इसका नियमित सेवन करें।
*जोड़ो के दर्द को करें दूरगुड़ खाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। अगर रोजाना गुड़ का एक छोटा पीस अदरक के साथ मिला कर खाया जाए तो जोड़ों में मजबूती आएगी और दर्द दूर होगा।
खूबसूरती बढ़ाए
इसे खाने से त्‍वचा मुलायम और स्‍वस्‍थ बनती है। बाल भी अच्‍छे हो जाते हैं। साथ ही मुंहासे और एक्‍ने भी ठीक हो जाते हैं।
 *गुड़ खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
 *इसे खाने से बैठे हुए गले को ठीक किया जा सकता है।
*गुड़ से बनी चाय सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है, इसलिए चाय में चीनी की जगह गुड़ डालें।
 *अगर आपको खट्टी डकारें आती हैं, तो गुड़ में काला नमक मिलाकर चाटें. ऐसा करने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाएंगी।

जोड़ों और हड्डियों में दर्द के कारण, लक्षण और उपचार

 *यह लड़कियों के मासिक धर्म को नियमित करने में मददगार होता है।
 ज्यादातर लोगों को लगता है कि गर्मी के मौसम में इसका सेवन नहीं करना चाहिए। अगर आपको भी यही लगता है, तो ये आपकी गलत फहमी है। ये एक ऐसी चीज है, जिसे किसी भी मौसम में खाया जा सकता है।
*पीरियड्स के दर्द से आराम
पीरियड्स में दर्द होता है तो महिलाओं को इसका सेवन जरुर करना चाहिये। पीरियड शुरु होने के 1 हफ्ते पहले 1 चम्‍मच गुड़ का सेवन रोजाना करें।
*कान दर्द की समस्या दूर करता है गुड़ : ठंड में कई लोगों को कान के दर्द की समस्या होने लगती है। ऐसे में कान में सरसों का तेल डालने से व गुड़ और घी मिलाकर खाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
*जुकाम को भगाने में भी ये लाभदायक साबित होता है।
अस्थमा से परेशान
लोगों के लिए गुड़ और काले तिल से बने लड्डूखाना फायदेमंद होता हैं।

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

*अस्थमा और ब्लडप्रेशर कंट्रोल करता है गुड़ : गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से सर्दी में अस्थमा परेशान नहीं करता है। रोजाना गुड़ का सेवन हाइब्लडप्रेशर को कंट्रोल करता है। जिन लोगों को खून की कमी हो उन्हें रोज थोड़ी मात्रा में गुड़ जरूर खाना चाहिए। इससे शरीर में हीमॉग्लोबिन का स्तर बढ़ता है।
* दिल की बीमारी से परेशान लोगों के लिएये लाभदायक साबित होता है।
*प्रेगनेंसी में एनीमिया नहीं होता
*प्रेगनेंट महिलाओं को रोजाना गुड़ खाने की सलाह दी जाती है, जिससे उन्‍हें एनीमिया ना हो। एनीमिया होने पर महिलाएं जल्‍दी थक जाती हैं और उन्‍हें कमजोरी आने लगती है।
स्मरण शक्ति बढ़ाता है गुड़ : गुड़ का हलवा खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है। शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकालता है व सर्दियों में यह शरीर के तापमान को नियमित करने में मदद करता है। यह लड़कियों के मासिक धर्म को नियमित करने में मददगार होता है।
 *थकान मिटाने के लिए गुड़ का शर्बत पीएं।
*थकान दूर करता है गुड़ : यह सेलेनियम के साथ एक ऐंटिऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करता है। गुड़ में मध्यम मात्रा में कैल्शियम, फॉस्फोरस व जस्ता पाया जाता है यही कारण है कि इसका रोजाना सेवन करने वालों की इम्युनिटी पावर बढ़ता है। गुड़ में मैग्निशियम अधिक मात्रा में पाया जाता है इसलिए ये बॉडी को रिचार्ज करता है साथ ही इसे खाने से थकान भी दूर होती है।
*अगर आपके कान में दर्द रहता है, तो घी में गुड़ मिलाकर खाएं।

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