Wednesday, September 7, 2016

फोड़े ,घाव के सरल घरेलू उपचार , simple home remedies to heal Boils, wounds


हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग हमारी त्वचा है और जब त्वचा कटती है या चोट लगती है तब तुरंत ही इसे ठीक करने के लिए जटिल बायोकैमिकल प्रतिक्रियाएं काम करने लगती हैं | प्राकृतिक चीज़ों जैसे हर्बल एंटीसेप्टिक और मरहम के द्वारा चोट का इलाज करने से शरीर की घाव भरने की प्रक्रिया को सहारा मिल सकता है और घाव या चोट को न्यूनतम निशान छोड़े जल्दी ठीक करने में मदद मिल सकती है |
फोड़े-फुंसियों या दाद-खाज खुजली जैसी चमड़ी की बीमारियों को पीछे प्रमुख रूप से रक्त का दूषित होना होता है। जब शरीर का खून दूषित यानी गंदा हो जाता है तो कुछ समय के बाद उसका प्रभाव बाहर त्वचा पर भी नजर आने लगता है। प्रदूषण चाहे बाहर का हो या अंदर का वो हर हाल में अपना दुष्प्रभाव दिखाता ही है। बाहरी और भतरी प्रदूषण ने मिलकर हमारे शरीर की प्राकृतिक खूबसूरती को छीनकर कई सारे त्वचा रोगों को जन्म दिया है फोड़े- फुंसियां भी उन्हीं में से एक हैं।
आज दुनिया का हर दूसरा व्यक्ति चमड़ी से जुड़े किसी न किसी रोग से जूझ रहा है। खुजली,जलन, फुंसियां, घमोरियां, दराद, लाल-सफेद चकत्ते... जैसी कई समस्याएं हैं जिनसे हर कोई परेशान है या कभी न कभी रह चुका है। कई बार छूत से यानी इनसे संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने पर खुद को भी संक्रमण

घाव को बहते पानी के नीचे धोकर साफ़ करें: सुनिश्चित करें कि रक्तस्त्राव बंद हो गया है | घाव युक्त त्वचा को नल के बहते पानी के नीचे लायें | धीमी गति से पानी को कुछ मिनट तक घाव के ऊपर बहने दें |[८]घाव को साफ़ करने की इस विधि का उपयोग करने से संक्रमण पैदा करने वाली अधिकतर अशुद्धियाँ बाहर निकल जाएँगी |
अधिकतर उथले घावों के लिए जिन्हें सिर्फ घरेलू उपचार की ज़रूरत हो, प्राकृतिक रूप से की जाने वाली सफाई काफ़ी होती है |
रक्तस्त्राव को बंद करें: अपने घाव की गंभीरता की परवाह किये बिना और अधिक रक्त को न बहने देकर रक्तस्त्राव बंद करके पहला कदम उठायें | एक कॉटन की साफ़ पट्टी को घाव के ऊपर रखें और हल्का एक समान दबाव लगायें | बिना पट्टी हटाये इसे कम से कम 10 मिनट तक पकड़ें रहें |



एक बार रक्तस्त्राव बंद हो जाने पर घाव भरना शुरू हो सकता है |
घाव पर बहुत अधिक दबाव न डालें | अगर आप बहुत अधिक दबाव डालेंगे तो आप रक्त संचरण को रोक सकते हैं और इससे रक्त पट्टी के ऊपर आ जायेगा और इस तरह आपके घाव से लम्बे समय तक रक्त बहता रहेगा |
अगर पट्टी से रक्त ऊपर तक आ जाये तो एक अन्य पट्टी को उसे सुखाने के लिए ऊपर रखें | पहली पट्टी के टुकड़े को न हटायें | एकसमान दबाव बनाये रखें |
*अगर रक्त तुरंत पट्टी पर आ जाये और दबाव डालने पर भी रक्तस्त्राव का बंद होना प्रतीत न हो तो आपातकालीन कक्ष या डॉक्टर के पास जाएँ |
*अपने हाथ धोएं: घाव का उपचार करने से पहले आपको हमेशा अपने हाथ साबुन और पानी से धोना चाहिए | इससे संक्रमण की सम्भावना को कम करने में मदद मिलेगी |[६]अपने हाथ गर्म पानी से धोएं और साफ़ टॉवल से सुखाएं |
*अगर घाव आपके हाथ पर हो तो घाव पर साबुन लगाने से बचें क्योंकि इससे घाव उत्तेजित हो सकता है
ब्रेड पुटलिस से करें उपचार-
क्या आपको पता है कि आप ब्रेड पुटलिस से भी फोड़े का उपचार कर सकते हैं। यह एक प्रभावशाली तरीका है। ब्रेड के एक टुकड़े को गर्म दूध या पानी में डुबा लें। अब इस ब्रेड को संक्रमित त्वचा पर लगाएं। इससे जलन कम होगी और जल्द ही फोड़ा भी ठीक हो जाएगा। अच्छे परिणाम के लिए ऐसा दिन में दो बार करें।
* नींबू के छोटे पत्ते खाने से लाभ होता है। नींबू में मौजूद विटामिन सी खून साफ करता है. फोड़े-फुंसियों पर नींबू की छाल पीसकर लगाएं. सप्ताह में एक बार फोड़े-फुंसिंयों पर मुल्तानी मिट्टी लगाएं. एक-दो घंटे बाद नहाएं 
*हल्दी खून को साफ करता है और इसमें एंटी-इंफ्लामैटॉरी गुण पाया जाता है। गर्म दूध के साथ हल्दी मिलाकर पीने से फोड़ा ठीक हो जाता है। साथ ही आप हल्दी और अदरक का पेस्ट बनाकर फोड़े पर लगा सकते हैं। कुछ दिन तक ऐसा करने पर फोड़ा ठीक हो जाएगा।
*एक टूनिकेट (tourniquet) का उपयोग करें: टूनिकेट का उपयोग सिर्फ बहुत गंभीर स्थितियों में करें | घर पर बनी टूनिकेट का उपयोग घाव पर केवल तब करना चाहिए जब खतरनाक मात्रा में रक्त निकलता जाये | सही तरीके से टूनिकेट न बाँधने पर आपके रक्त प्रवाह और हाथ या पैर में गंभीर रूप से नुकसान पहुँच सकता है और उन्हें काटने की नौबत तक आ सकती है |
* पालक, मूली के पत्ते, प्याज, टमाटर, गाजर, अमरुद, पपीता आदि को अपने भोजन में नियमित रूप से शामिल करें।*सुबह खाली पेट चार-पांच तुलसी की पत्तियां चूंसने से भी त्वचा रोगों में स्थाई लाभ होता है।
पानी अधिक से अधिक पीएं-
चन्दन की लेई घाव पर लगाने से भी घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं। कच्चे केले का रस घाव पर लगाने से भी घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं। लहसुन का रस और हल्दी तिल के तेल के साथ मिलाकर बनाये हुए मिश्रण से सूजन कम हो जाती है और घाव जल्दी भर जाते हैं। तिल और नीम के पत्ते एरंडी के तेल के साथ भूनकर और हल्दी और कपूर के साथ पीसकर घरेलू मरहम बनाया जा सकता है। इस मरहम को घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं। नारियल के तेल में कपूर उबाल लें और इसे सूजी हुई जगह पर लगा लें। अगले दिन उसे गरम पानी से धो लें। इससे अंदरूनी चोट के कारण हुई सूजन कम हो जाती है। संतरे, अंगूर, लहसून, गाजर का सेवन करने से घावों के भरने में सहायता मिलती है। पिसे हुए पुदीने को एक कपड़े में बांधकर घाव पर रखने से घाव जल्दी भर जाते हैं और संक्रमण का डर भी नहीं रहता।
*सुबह उठकर 2 से 3 किलो मीटर घूमने के लिये अवश्य जाएं ताकि आपके शरीर और रक्त को शुद्ध ताजा हवा मिल सके और शरीर का रक्त प्रवाह भी सुधर सके।



एलो वेरा
कटे और छिले को तुरंत ठीक करना हो तो, उस पर एलो वेरा का रस लगा लेना चाहिये।
किसी पैनी चीज़ जैसे कि चाक़ू, छुरी या रेज़र या काँच के टुकड़े से त्वचा का कटना। खरोंच जिससे त्वचा की उपरी सतह निकल जाती है। किसी सुई या कील से त्वचा का पंचर होना। भेदन घाव जो चाक़ू जैसी चीज़ शरीर के अन्दर घुसने के कारण होता है, बन्दूक की गोली या ऐसे ही किसी प्रक्षेप्य वस्तु के कारण ज़ख्म का होना। अंदरूनी मार, खरोंच वगैरह से भीतरी चोट पहुँचना। हेमाटोमस जिसे रक्त का ट्यूमर भी कहा जाता है, रक्त वाहिका के क्षतिग्रस्त होने के कारण होता है। लम्बे समय से हो रहे दबाव के कारण कृष इंजरी का होना। तीक्ष्ण और गंभीर या अभिघताज घाव, उन चोटों के कारण होते हैं जो टिस्यू को भंग कर देते हैं।
फोड़े के लिए नीम सबसे अच्छा एंटीसेप्टिक होता है। इससे एंटी बैक्टीरिअल और एंटी माइक्रोबिअल गुण पाया जाता है, जो फोड़े के उपचार में फायदेमंद होता है। वास्तव में नीम हर तरह की त्वचा संबंधित समस्या के लिए फायदेमंद होता है। नीम को पीस कर इसका पेस्ट तैयार कर लें। अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा के संक्रमित हिस्से पर लगाएं। अगर आप चाहें तो नीम की पत्ती को उबाल कर भी इसका पेस्ट तैयार कर सकते हैं। पेस्ट को कुछ देर के लिए लगा रहने दें और फिर पानी से धो लें।
अगर त्‍वचा छिल गई है या उस पर घाव बन गया है तो, त्‍वचा को तुरंत ही साफ पानी से धो कर उस पर शहद का थोड़ा सा लेप लगाएं। अगर त्‍वचा पर सूजन भी आ गई होगी तो वह भी शहद लगाने से चली जाएगी।
आज दुनिया का हर दूसरा व्यक्ति चमड़ी से जुड़े किसी न किसी रोग से जूझ रहा है। खुजली,जलन, फुंसियां, घमोरियां, दराद, लाल-सफेद चकत्ते... जैसी कई समस्याएं हैं जिनसे हर कोई परेशान है या कभी न कभी रह चुका है। कई बार छूत से यानी इनसे संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने पर खुद को भी संक्रमण लगने से भी फोड़े- फुंसी या खुजली जैसी कोई त्वचा संबंधी समस्या हो सकती है।
पता लगायें कि घाव कितना गहरा है: एक गेज या पट्टी के झीने कपड़े (gauge) के द्वारा घाव का परीक्षण करके पता लगायें कि आपको चिकित्सीय देखरेख की ज़रूरत है या इसे घर पर ठीक किया जा सकता है | अगर घाव बहुत गहरा और गंभीर हो तो हॉस्पिटल जाएँ और चिकित्सा विशेषज्ञ के द्वारा इलाज़ कराएँ | गंभीर ताज़े जख्म या घाव को ठीक से भरने के लिए इसमें टांके लगाने की ज़रूरत पड़ सकती है |[१] अगर आपके घाव के लिए इनमे से कुछ सही हो तो आपातकालीन कक्ष में जाएँ:
घाव में गहराई में लाल मांसपेशियां या पीले वसा ऊतक दिखाई दे रहे हों |
जब आप घाव के किनारों को पकड़ना छोड़ दें तो घाव खुला रह जाये |
घाव जोड़ों के पास हो या अन्य अधिक गतिविधि वाले हिस्से के पास हो जहाँ यह बिना टाँके लगाये बंद नहीं रह सकेगा |
*रक्तस्त्राव गंभीर रूप से हो रहा हो और 10 मिनट तक दबाने के बाद भी बंद न किया जा सकता हो |[२]
घाव एक धमनी को कटकर खोल दें; जो एक मोटा, हाई ट्रैफिक वेन (high-traffic vein) युक्त घाव हो | धमनियों का रक्त सामान्यतः चटक लाल रंग का होता है | यह आवेग के साथ तेज़ी से आता है और इसके पीछे उच्च दबाव होता है
*थोड़ी सी साफ रूई पानी में भिगो दें, फिर हथेलियों से दबाकर पानी निकाल दें। तवे पर थोड़ा सा सरसों का तेल डालें और उसमें इस रूई को पकायें। फिर उतारकर सहन कर सकने योग्य गर्म रह जाय तब इसे फोड़े पर रखकर पट्टी बाँध दें। ऐसी पट्टी सुबह-शाम बाँधने से एक दो दिन में फोड़ा पककर फूट जायेगा। उसके बाद सरसों के तेल की जगह शुद्ध घी का उपयोग उपरोक्त विधि के अनुसार करने से घाव भर के ठीक हो जाता है।



* फोड़े फुंसियों पर वट वृक्ष या बरगद के पत्तों को गरम कर बाँधने से शीघ्र ही पक कर फूट जाते
चीनी
चीनी घाव से रिस रहे पानी को बिल्‍कुल सोख लेती है और इंफेक्‍शन को दूर रखती है।आयुर्वेद के अनुसार नीम की सूखी छाल को पानी के साथ घिसकर फोड़े फुंसी पर लेप लगाने से बहुत लाभ मिलता है और धीरे-धीरे इनकी समाप्ति हो जाती है।
*जब तक समस्या से पूरी तरह से छुटकारा नहीं मिल जाता मीठा यानी शक्कर से बनी, बासी,तली-गली और अधिक मिर्च-मसालेदार चीजों को पूरी तरह से छोड़ दें।
सिरका
यह भले ही कटी त्‍वचा पर लगाने से जलता है मगर यह घाव को भरने में बिल्‍कुल भी समय नहीं लेता। इसकी एक बूंद रूई पर डाल कर घाव पर लगाइये।
*फोड़े-फुंसी, दराद या खुजली वाले स्थान पर मूली के बीज पानी में पीस कर गरम करके लगाने से तत्काल लाभ होता होगा।
*नीम की पत्तियों को पीस कर फोड़े-फुंसी, दराद या खुजली वाले स्थान पर लगाने और पानी के साथ पीने से बहुत सीघ्र लाभ होता है।


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