मस्सों का होम्योपैथिक ईलाज




   होम्योपैथी 'समः समं, शमयति' के सिद्धांत पर काम करती है, जिसका अर्थ है समान की समान से चिकित्सा अर्थात एक तत्व जिस रोग को पैदा करता है, वही उस रोग को दूर करने की क्षमता भी रखता है।
इस पद्धति के द्वारा रोग को जड़ से मिटाया जाता है।किसी भी बीमारी की चिकित्सा करते समय ---रोगी के धातुगत लक्षण,मानसिक लक्षण और रोग के लक्षणों के साथ जिस दवा के लक्षणों (Majority of symptoms) सबसे अधिक मेल खाता हो,उसी दवा का प्रयोग सर्वप्रथम करना चाहिए। आइये अब हम मस्सों का इलाज होमियोपैथी से करते हैं जो निरापद और लाभकारी है।
कॉस्टिकम : कास्टिकम एक प्रधान सॉरा-बिष-नाशक और फास्फोरस की विरोधिनी दवा है। अगर शरीर पर छोटे-छोटे बहुत से ठोस मस्से हो गए हों जिसके जड़ मुलायम एवं ऊपर के मुंह कठोर और नोकदार हो तो ऐसे मस्सों को ठीक करने के लिए कॉस्टिकम औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना लाभकारी होता है। नाखूनों के किनारे, बाहों, हाथों, पलकों एवं चेहरे पर होने वाले मस्सों में भी इस औषधि का उपयोग किया जाता है।
कैलि म्यूर : हाथों पर मस्से होने पर कैलि म्यूर औषधि का सेवन करने के साथ इस औषधि की 3x मात्रा को एक चम्मच पानी में मिलाकर लोशन बनाकर मस्सों पर लगाना भी चाहिए।
सीपिया : जननेन्द्रिय की आगे की त्वचा के अगले भाग या शरीर पर बड़े-बड़े कठोर एवं काले मस्से होने पर सीपिया औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना हितकारी होता है। सीपिया के बाद सल्फर की जरूरत पड़ती है। 
नैट्रम-म्यूर : हथेलियों पर मस्से होने पर नैट्रम-म्यूर औषधि की 3x से 200 शक्ति का सेवन करना लाभकारी होता है।
थूजा :थूजा एक प्रधान एंटीसाइकोटिक दवाहै। इस औषधि का प्रयोग किसी भी प्रकार के मस्सों में किया जा सकता है। मस्सों के यह सबसे अच्छी औषधि है। मस्सों के झुण्ड निकलने, सिर के पीछे मस्से जैसे दाने होने, ठोड़ी पर मस्से होने, लटकने वाले मस्से होने, खूनी मस्से जिससे कभी-कभी खून निकलता रहता है। इन सभी प्रकार के मस्सों को ठीक करने के लिए थूजा औषधि की 30 और 200 शक्ति का सेवन करना लाभदायक होता है। इन मस्सों में थूजा औषधि के सेवन के साथ-साथ थूजा Q (मूल अर्क ) को रूई पर लगाकर मस्सों पर लगाना चाहिए।गर्भावस्था के दौरान स्त्री को पहले कुछ दिनों तक सल्फर औषधि की 30 शक्ति का सेवन कराने और फिर कुछ दिनों तक थूजा औषधि की 30 शक्ति का सेवन कराने और अंत में मर्क सौल औषधि की 30 शक्ति सेवन कराने से बच्चे को मस्से नहीं होते। यदि त्वचा पर मस्से गोभी की तरह दिखाई दे तो इस औषधि का प्रयोग करना लाभकारी होता है। योनि के ऊपर -उसमे दर्द होता है की हाथ लगाया जाता स्वर यंत्र के अर्बुद में थूजा काफी लाभप्रद है।
कैलकेरिया कार्ब : कठोर, नोकदार व चुभने वाले मस्से जिनमें सूजन आने के बाद कभी-कभी जख्म भी बन जाते हैं।चेहरे पर, गर्दन पर, और शरीर के ऊपरी हिस्से के मस्से में लाभकारी। इस तरह के मस्से को ठीक करने के लिए कैलकेरिया कार्ब औषधि की 12 शक्ति का प्रयोग करना लाभकारी होता। नाक अर्बुद से रक्तस्राव होता है।




आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार



किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार




नाइट्रिक ऐसिड : फूलगोभी की तरह बड़े खुरदरे मस्से, टेढ़े-मेढ़े मस्से एवं ऐसे मस्से जिसे धोने से बदबूदार खून निकलने लगता हो। छूने पर भी खून निकलने लगता है।इस तरह के मस्सों में नाइट्रिक ऐसिड औषधि की 12 शक्ति का प्रयोग किया जाता है। इस औषधि का प्रयोग लटकने एवं होंठों पर मस्से की तरह दाने होने पर भी किया जाता है।
नैट्रम म्यूर : पुराने मस्से, ऐसे मस्से जिसमें दर्द हो और मस्से को हल्का सा छू देने पर असहनीय दर्द हो। मस्से कभी-कभी जख्म में बदल जाता है।हाथ और अंगूठे में अनगिनित मस्से, ऐसे लक्षणों वाले मस्सों का उपचार नैट्रम-म्यूर औषधि की 30 शक्ति से फयदेमन्द होता है। यह रक्तहीन,कमजोर और हरित पाण्डु रोग ग्रस्त स्त्रियों की बीमारी में खास रूप से फायदा करती है।
सल्फर : यदि कठोर एवं दर्द वाले मस्से हो गए हों और उसमें तपकन महसूस होता हो तो सल्फर औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करें।
ऐन्टिम टार्ट : पुरुषों के जननेन्द्रिय की सुपारी के पीछे मस्से हो गए हों तो ऐन्टिम टार्ट औषधि की 12 शक्ति का प्रयोग किया जाता है।
स्थान विशेष के मस्सों में उपयोगी औषधियाँ :
दाढ़ी में : लाइकोपोडियम 
जीभ पर : आरम म्यूर 
गर्दन पर : एसिड नाइट्रिकम 
बाहँ पर :कैल्केरिया,कास्टिकम,कास्टिकम,सीपिया,नाइट्रिक एसिड,सल्फर 
तलहथी पर: नैट्रम म्यूर, अनकॉर्डियम 
अंगुली में : कैल्केरिया, कास्टिकम,लैक्सिस, नैट्रम मयूर,नाइट्रिक एसिड,सल्फर,थूजा, सीपिया 
लिंगमुण्ड पर : एसिड नाइट्रिक,एसिड फास, थूजा 
लिंगाग्र चर्म : सिनाबेर,इयूकैलिप्
मुहं में : कास्टिकम, एसिड नाइट्रिकम, थूजा
भौं में : कास्टिकम,
आँख की पलकों में : एसिड नाइट्रिकम
आँख के नीचे : सल्फर
नाक में : थूजा,कास्टिकम
मुहं के कोने में : काण्डुरैगों

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गर्म पानी पीने के फायदे // Drinking Hot Water Benefits



गर्म पानी पीने के फायदे
Drinking Hot Water Benefits 


सामान्य पानी (Normal Water) शरीर की प्यास दूर करता है तो गर्म पानी शरीर से अनेकों रोगों को बाहर निकालने की सामर्थ्य रखता है । गर्म व कुनकुने पानी का सेहत के साथ बहुत पुराना सम्बन्ध है । गर्म पानी के नित्य नियमबद्ध तरीके से सेवन करने से शरीर को रोगानुसार निम्न प्रकार से लाभ मिलते है-
*त्वचा के रुखेपन की समस्या को दूर कर चिकनी व चमकदार त्वचा हासिल करने के लिये एक ग्लास गर्म पानी रोजाना पीएं ।
*गर्म पानी पीने से शरीर के सभी विषैले तत्व शरीर से बाहर हो जाते हैं । (Hot Water Removes all poison in the stomach)


*पेट की अधिकांश बीमारियां दूषित जल के कारण ही उत्पन्न होती है । यदि पानी को गर्म करने के बाद ठंडा करके पीने की आदत बना ली जावे तो पेट की अधिकांश बीमारियां शरीर में पनपने ही नहीं पाएगी ।
गर्म पानी शरीर में शक्ति का संचार करता है । इसके प्रयोग से कफ व सर्दी से सम्बन्धित सभी रोग दूर हो जाते हैं ।
*दमा, हिचकी व खराश जैसे रोगों के समाधान हेतु गर्म पानी का उपयोग करने के साथ ही तले-भुने पदार्थों के सेवन के बाद भी गर्म पानी पी लेना शरीर के लिये उचित रहता है
*सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस ( Hot Water mix with lemon Juice) मिलाकर पीने से शरीर को पर्यापत मात्रा में विटामिन सी की पूर्ति होती रहती है । गर्म पानी के साथ नींबू का संयोजन *शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है व शरीर का पी. एच. स्तर भी इससे सही बना रहता है ।
*रोजाना एक गिलास गर्म पानी सिर के सेल्स के लिये उत्तम टानिक का कार्य करता है ।
*वजन घटाने के लिये भी गर्म पानी महुत मददगार होता है । भोजन के एक घंटे बाद गर्म पानी पीने से शरीर का मेटाबालिज्म बढता है । यदि गर्म पानी में थोडा नींबू और शहद मिलाकर इसे मुँह में घुमाते हुए पिया जावे तो इससे वजन संतुलित होकर मोटापा दूर होता है ।
*हमेशा जवान दिखते रहने की चाहत रखने वाले लोगों के लिये गर्म पानी का नियमित सेवन सदैव एक बेहतरीन औषधि के रुप में मददगार साबित होता है ।
>पानी पीने की सही विधि- ( Drink Water in the Correct Way)
*. प्रातः उठकर 2-3 गिलास सामान्य तापमान का या गुनगुना पानी पीना चाहिये । इससे मोटापा, कब्ज, त्वचा, रक्तचाप जैसी शारीरिक समस्याओं से मुक्ति पाने में सहायता मिलती है. यही पानी उषापान कहलाता है ।
* पानी हमेशा घूंट-घूंट करके व बैठकर पीना चाहिये क्योंकि इससे लार का निर्माण होता है । हमारे पेट में *भोजन को पचाने के लिये अम्ल होता है व मुँह में जो लार होती है वह क्षार होती है और अम्ल व क्षार के संयमित संयोग से शरीर में कब्ज की शिकायत नहीं होती ।
 *पानी हमेशा शरीर के तापमान के अनुसार पीना चाहिये । न ज्यादा ठंडा और न ही बहुत ज्यादा गर्म क्योंकि ज्यादा ठंडा पानी पीने से पेट को अतिरिक्त कार्य करना पडता है और दिमाग, ह्रदय (Brain, Heart)जैसे महत्वपूर्ण अंगों की कार्यशीलता कम होने लगती है । दिमाग का रक्त गुरुत्वाकर्षण के कारण सबसे पहले कम होने लगता है जिससे आगे चलकर ब्रेन हेमरेज जैसी समस्या की गिरफ्त में हमारा शरीर आ सकता है ।
* ज्यादा ठंडा पानी पीने से पेट की बडी आंत सिकुड जाती है जिससे सभी रोगों की जनक कब्ज की शुरुआत होती है ।
*. खाना खाने के कम से कम 30 मिनिट पहले और 45 मिनिट बाद तक पानी नहीं पीना चाहिये अन्यथा पाचन सम्ब्नधी समस्याएं होती हैं ।
.* कोई भी फल अथवा मीठा खाने के तत्काल बाद पानी नहीं पीना चाहिये ।



यहां आपको कुछ सुझाव दिए जा रहे हैं, ताकि आपको पानी की कमी से होने वाली बीमारियां न घेरें। इसलिए कुछ बातों का ख़ास ध्य़ान रखें।
*पानी पीने से एसिडिटी हटती है, क्योंकि पानी पेट साफ रखता है।
*हमारा दिमाग 90 प्रतिशत पानी से बना है। पानी न पीने से भी सिर दर्द होता है।
*पानी जोड़ों को चिकना बनाता है और जोड़ों का दर्द भी कम करता है।
*हमारी मांसपेशियों का 80 प्रतिशत भाग पानी से बना हुआ है। इसलिए पानी पानी से मांसपेशियों की ऐंठन भी दूर होती है।
.*सुबह उठते ही एक गिलास पानी पीना अच्छा होता है। इसे अपनी आदत में शामिल करें। इससे पेट साफ रहता है। पानी पीने से स्किन में रूखापन नहीं होता।
*सुबह उठने के बाद गरम या गुनगुने पानी में शहद और नींबू डालकर पिया करें। इससे टॉक्सिक एलिमेंट शरीर से निकल जाते हैं और इम्यून सिस्टम भी सही रहता है।
*.कुछ लोग ज़्यादा ही ठंडा पानी पीते हैं। इससे गुर्दे खराब हो सकते हैं। इसलिए ज़्यादा ठंडा पानी न पिएं।
*.अगर आप चाय या कॉफी ज्यादा पीते हैं तो उसकी जगह ग्रीन टी पिएं। इससे एनर्जी मिलती है।
*सॉफ्ट ड्रिंक की जगह गुनगुना पानी या नींबू पानी पिया करें। आपका एनर्जी लेवल बढ़ेगा और डायजेस्टिव सिस्टम भी सही रहेगा।
*कब्‍ज दूर करे- शरीर में पानी की कमी हो जाने की वजह से कब्‍ज की समस्‍या पैदा हो जाती है। रोजाना एक ग्‍लास सुबह गरम पानी पीने से फूड पार्टिकल्‍स टूट जाएंगे और आसानी से मल बन निकल जाएंगे।

* मोटापा कम करे- सुबह के समय या फिर हर भोजन के बाद एक ग्‍लास गरम पानी में नींबू और शहद मिला कर पीने से चर्बी कम होती है। नींबू मे पेकटिन फाइबर होते हैं जो बार-बार भूख लगने से रोकते हैं। सर्दी और *जुखाम के लिये- *अगर गले में दर्द या फिर टॉन्‍सिल हो गया हो, तो गरम पानी पीजिये। गरम पानी में हल्‍का सा सेंधा नमक मिला कर पीने से लाभ मिलता है। खूब पसीना बहाए- जब भी आप कोई गरम चीज़ खाते या पीते हैं, तो बहुत पसीना निकलता है। ऐसा तब होता है जब शरीर का टम्‍परेचर बढ जाता है और पिया गया पानी उसे ठंडा करता है, तभी पसीना निकलता है। पसीने से त्‍वचा से नमक बाहर निकलता है और शरीर की अशुद्धी दूर होती है। शरीर का दर्द दूर करे- मासकि शुरु होने के दिनो में पेट में दर्द होता है, तब गरम पानी में इलायची पाउडर डाल कर पिएं। इससे ना केवल मासिक का दर्द बल्कि शरीर, पेट और सिरदर्द भी सही हो जाता है।


.*वजन कम करने के लिए ठंडे पानी की जगह गुनगुना गर्म पानी पीना फायदेमंद होता है।
सफाई और शुद्धी- यह शरीर को अंदर से साफ करता है। अगर आपका पाचन तंत्र सही नहीं रहता है, तो आपको दिन में दो बार गरम पानी पीना चाहिये। सुबह गरम पानी पीने से शरीर के सारे विशैले तत्‍व बाहर निकल जाते हैं, जिससे पूरा सिस्‍टम साफ हो जाता है। नींबू और शहद डालने से बड़ा फायदा होता है।
*शहद के साथ नींबू और गुनगुने पानी के नियमित सेवन से शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है। शहद और नींबू में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और कई पोषक तत्व शरीर को मौसम बदलने के साथ होने वाले संक्रमणों से दूर रखने में मदद रखता हैं।
*त्‍वचा के लिए नींबू काफी फायदेमंद होता है, लेकिन इसके अलावा इसमें मौजूद क्‍लीजिंग तत्‍व रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है। नई रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करता है। पानी और शहद का मिश्रण आपकी त्वचा के लिए और ज्यादा फायदेमंद होती है।




कमर दर्द के कारण और हर्बल चिकित्सा





लगभग ८०% लोग अपने जीवन में कभी न कभी कमर दर्द से परेशान होते हैं। कमर दर्द नया भी हो सकता है और पुराना रोग भी हो सकता है। नया रोग कमर की मांसपेशियों का असंतुलित उपयोग करने से उत्पन्न होता है। रोग पुराना होने पर वक्त बेवक्त कमर दर्द होता रहता है और उसके कारण का पता नहीं चलता है। यह दर्द कभी-कभी इतना भयंकर होता है कि रोगी तडफ़ उठता है,बैठना-उठना और यहां तक कि बिस्तर में करवट बदलना भी कठिन हो जाता है।सतही तौर पर देखने पर कमर में होने वाला दर्द भले ही एक सामान्य सी मेडिकल स्थिति लगता है, लेकिन इसे नज़र अंदाज करने से समस्या काफी बढ़ सकती है।

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

* शरीर के अंगों जैसे गुर्दे में इन्फ़ेक्शन,पोरुष ग्रंथि की व्याधि,स्त्रियों में पेडू के विकार ,मूत्राषय के रोग और कब्ज की वजह से कमर दर्द हो सकता है। गर्भवती स्त्रियों में कमर दर्द आम तौर पर पाया जाता है। गर्भ में बच्चे के बढने से भीतरी अंगों पर दवाब बढने से कमर दर्द हो सकता है।
* कमर दर्द में लाभकारी घरेलू उपचार किसी भी आनुषंगिक दुष्प्रभाव से मुक्त हैं और असरदार भी है। देखते हैं कौन से हैं वे उपचार जो कमर दर्द राहत पहुंचाते हैं--
* कमर दर्द पुराना हो तो शरीर को गर्म रखें और गरम वस्तुएं खाऎं।
*दर्द वाली जगह पर बर्फ़ का प्रयोग करना हितकारी उपाय है। इससे भीतरी सूजन भी समाप्त होगी। कुछ रोज *बर्फ़ का उपयोग करने के बाद गरम सिकाई प्रारंभ कर देने के अनुकूल परिणाम आते हैं।
*भोजन मे टमाटर,गोभी,चुकंदर,खीरा ककडी,पालक,गाजर,फ़लों का प्रचुर उपयोग करें।
*नमक मिलें गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। पेट के बल लेटकर दर्द के स्थान पर तौलिये द्वारा भाप लेने से कमर दर्द में राहत मिलती है।


पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 

* भोजन में पर्याप्त लहसुन का उपयोग करें। लहसुन कमर दर्द का अच्छा उपचार माना गया है।
गूगल कमर दर्द में अति उपयोगी घरेलू चिकित्सा है। आधा चम्मच गूगल गरम पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें।
२ ग्राम दालचीनी का पावडर एक चम्मच शहद में मिलाकर दिन में दो बार लेते रहने से कमरदर्द में शांति मिलती है।
*रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन—चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियाँ काली न हो जायें) गर्म कर लें फिर ठंडा कर इसकी पीठ—कमर में मालिश करें।
* कढ़ाई में दो—तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। थोड़े मोटे सूती कपड़े में यह गरम नमक डालकर पोटली बांध लें। कमर पर इसके द्वारा सेक करें।
*चाय बनाने में ५ कालीमिर्च के दाने,५ लौंग पीसकर और थौडा सा सूखे अदरक का पावडर डालें। दिन मे दो बार पीते रहने से कमर दर्द में लाभ होता है।

* सख्त बिछोने पर सोयें। औंधे मुंह पेट के बल सोना हानिकारक है।

पेट मे गेस बनने के घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार

कान दर्द,कान पकना,बहरापन के उपचार

नीलगिरी तेल के स्वास्थ्य लाभ

सुहागा के गुण,प्रयोग,उपचार 
 




नींबू और जीरे से तेजी से वजन घटाएँ




   जो लोग मोटापे से परेशान हैं और मोटापे को दूर करने के लिए अनेक तरह के प्रयोग और पैसे बर्बाद कर के थक चुके हैं तो हम बता दें के ये प्रयोग मोटापे के लिए काल साबित होगा।
बिलकुल साधारण सा दिखने वाला ये प्रयोग सिर्फ थोड़े से दिनों में अपना रिजल्ट आपको दिखा जायेगा। और बड़ी बात ये है के ये नुस्खा बिलकुल आसान है। आइये जाने।
हर शाम को एक चम्मच जीरा साफ़ पीने के पानी में भिगो कर रख दीजिये। सुबह खाली पेट ये जीरा चबा चबा कर खा लीजिये और इस बचे हुए पानी को चाय की तरह गर्म करें और इसमें आधा निम्बू निचोड़ कर इसमें एक चम्मच शहद मिला कर इस पेय के घूँट घूँट कर चाय की तरह पियें।

जीरा शरीर में हमारे द्वारा ग्रहण की गयी वसा को शरीर में अवशोषित नहीं होने देता। और गर्म पानी में निम्बू शरीर में जमी हुई चर्बी को काटता है। इस कारण से प्रयोग मोटापे के लिए चमत्कार है।
और ध्यान रखें, इस प्रयोग के करते समय आप नाश्ता ना करें। नहीं तो मनचाहा रिजल्ट नहीं मिलेगा। सुबह ये पीने के बाद सीधे दोपहर का खाना खाएं। और खाने के पहले एक प्लेट सलाद खाएं। और भोजन में हरी सब्जियों का प्रयोग करें। और रात को भी सोने से 2-3 घंटे पहले भोजन कर लें।

मैदे से बनी हुई वस्तुओ से परहेज करें। मीठा और चीनी मोटापे में ज़हर के समान हैं। अनाज भी चोकर वाला (आटे को छानने से जो कचरा निकालते हैं वो चोकर होता है उसको मत निकाले) इस्तेमाल करें। फलों का जूस पीने की बजाय फल खाने चाहिए, इससे फाइबर भी मिल जाता है और जल्दी भूख नहीं लगती।
शीघ्र परिणाम  पाने  के इच्छुक व्यक्तियों को इसके साथ साथ में कुछ व्यायाम ज़रूर करना चाहिये। विशेषकर पश्चिमोत्तनासन, कपाल भाति और हो सके तो रनिंग या जॉगिंग ज़रूर करें।
दोपहर और रात के भोजन के तुरंत बाद एक गिलास गर्म पानी चाय की तरह आधा नीम्बू निचोड़ कर पीयें। भोजन के साथ ठंडा पानी बिलकुल नहीं पीना।

 प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 



आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार


किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार

     

चिकनगुनिया के चमत्कारी उपचार






    चिकनगुनिया के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक घरेलू उपचार
    चिकनगुनिया बुखार एक वायरस बुखार है जो एडीज मच्छर एइजिप्टी के काटने के कारण होता है। चिकनगुनिया और डेंगू के लक्षण लगभग एक समान होते हैं। इस बुखार का नाम चिकनगुनिया स्वाहिली भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है ”ऐसा जो मुड़ जाता है” और यह रोग से होने वाले जोड़ों के दर्द के लक्षणों के परिणामस्वरूप रोगी के झुके हुए शरीर को देखते हुए प्रचलित हुआ है।
    चिकनगुनिया के लक्षण 
    चिकनगुनिया में जोड़ों के दर्द के साथ साथ बुखार आता है और त्वचा खुश्क हो जाती है। चिकनगुनिया सीधे मनुष्य से मनुष्य में नहीं फैलता है। यह बुखार एक संक्रमित व्यक्ति को एडीज मच्छर के काटने के बाद स्वस्थ व्यक्ति को काटने से फैलता है। चिकनगुनिया से पीड़ित गर्भवती महिला को अपने बच्चे को रोग देने का जोखिम होता है।
    चिकनगुनिया के लक्षण
    *उल्‍टी होना
    *एक से तीन दिन तक बुखार के साथ जोड़ों में दर्द और सूजन होना
    *कंपकपी और ठंड के साथ बुखार का अचानक बढ़ना
    *सरदर्द होना
    चिकगुनिया के कारण 
    *चिकनगुनिया मुख्य रूप से मच्छरों के काटने के कारण ही होता है। इसके सामान्य कारण निम्न हैं:
    *मच्छरों का पनपना।
    रहने के स्थान के आसपास गंदगी होना।
    *पानी का जमाव।
    *चिकनगुनिया का सामान्य उपचार
    *चिकनगुनिया से पीड़ित रोगी को निम्न उपाय अपनाने चाहिए:
    चिकनगुनिया का प्राथमिक उपचार 
    *अधिक से अधिक पानी पीएं, हो सके तो गुनगुना पानी पीएं।
    ज्यादा से ज्यादा आराम करें।





    *दूध से बने उत्पाद, दूध-दही या अन्य चीजों का सेवन करें।

    *रोगी को नीम के पत्तों को पीस कर उसका रस निकालकर दें।
    *रोगी के कपड़ों एवं उसके बिस्तर की साफ-सफाई पर खास ध्यान दें।
    *करेला व पपीता अधिक से अधिक खाएं।
    *चिकनगुनिया इस मौसम की घातक बीमारी है, जिसका उपचार भी काफी कठिन होता है। ऐसे में इस बीमारी से बचे रहने के लिए क्या करें, क्या नहीं, बता रहे हैं मूलचंद मेडिसिटी के सलार्हकार (इंटरनल मेडिसिन) डॉ ए के बाली
    *मौसम में बदलाव आया है और माहौल खुशनुमा हुआ है, लेकिन अगर आपने जरूरी सावधानियां नहीं बरतीं तो यह मौसम आपको जानलेवा बीमारियों के चंगुल में भी फंसा सकता है। ऐसी ही एक बीमारी है चिकनगुनिया, जो इस मौसम में पैदा होने वाले मच्छरों के कारण होती है।
    क्या है चिकनगुनिया
    चिकनगुनिया एक तरह का बुखार है, जो वायरस से होता है। यह संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से होता है। ये एडीज मच्छर (एइजिप्टी) मुख्यत: दिन के समय काटते हैं। इस रोग के लक्षण डेंगू बुखार से मिलते-जुलते होते हैं। पिछले कुछ वर्षों से यह बीमारी अपने देश में भी खूब पैरा फैलाने लगी है।
    क्या हैं लक्षण
    इस संक्रमण से होने वाली बीमारी का समय 2 से 12 दिन हो सकता है, लेकिन आमतौर पर तीन से सात दिन हैं। चिकनगुनिया वायरस का संक्रमण एक गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। बुखार, जोड़ों में गंभीर दर्द, ठंड लगना और सिर दर्द, अत्यधिक संवेदनशीलता (प्रकाश से अत्यधिक संवेदनशीलता), आंखों का संक्रमण, मांसपेशियों में दर्द, थकान, भूख की कमी, उल्टी और पेट में दर्द इस बीमारी के प्रारम्भिक लक्षण हैं। इस वायरल के दौरान त्वचा पर चकत्ते पड़ जाते हैं। कभी-कभी सारे शरीर में दाने भी निकलने लगते हैं। ये दाने हाथ-पैरों सहित शरीर के कुछ खास हिस्सों में अधिक देखने को मिलते हैं। कुछ मरीजों में श्वेत रक्त कणों (डब्ल्यूबीसी) की कमी देखने को मिलती है।





    समय रहते जांच जरूरी

    इसकी जांच का सबसे विश्वसनीय तरीका है एलिसा रक्त परीक्षण।
    उपचार 
    फिलहाल चिकनगुनिया के लिए अभी तक कोई विशेष एंटीवायरल उपचार उपलब्ध नहीं है। मरीज के लक्षणों को देख कर उसका इलाज किया जाता है और मुख्यतया बुखार और दर्द के लक्षणों को दूर करने के लिए आराम, अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन और जरूरी दवाओं के सेवन की आवश्यकता पड़ती है।
    रोकथाम

    जरूरी है एडिस मच्छर को पनपने से रोकना। घरों या अपने आसपास के इलाकों में पानी का जमाव न होने दें।
    घरों में कूलर, गमले, टायर, बर्तनों, जानवरों के लिए प्रयोग किए जाने वाले बर्तनों आदि का पानी दो-तीन दिनों के अंतराल में बदलते रहें।
    घर और आसपास के इलाके में मच्छर भगाने वाले स्प्रे, कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराएं।
    पूरी बाजू की शर्ट और फुल पैंट पहनें, ताकि शरीर कम से कम खुला रहे।
    सोने से पहले मच्छरदानी व मच्छर भगाने वाले साधनों का उपयोग करें।
    शरीर के खुले हिस्से में मच्छर से सुरक्षा प्रदान करने वाली क्रीम लगाएं।
    इनसे भी रहें सावधान
    पीलिया पीलिया जिसे जॉन्डिस के नाम से भी जाना जाता है, बरसात में होने वाली आम बीमारी है। पीलिया के लक्षण दस्त, पीला पेशाब, उल्टी और कमजोरी हैं। इस मौसम में पीलिया से बचाव के लिए उबले पानी का सेवन करें और सफाई का पूरा ख्याल रखें।
    डायरिया
    यह बरसात का आम रोग है, लेकिन इस मौसम में भी परेशान करता है। आंत की इस समस्या को रोकने के लिए उचित सफाई रखें। खाना खाने से पहले हाथ धोएं और पानी उबाल कर पिएं।




    टायफॉयड

    यह पानी से होने वाली एक आम बीमारी है। यह बीमारी दूषित पानी या भोजन के कारण फैलती है। तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी आदि इसके आम लक्षण हैं। इससे बचने के लिए सफाई का ध्यान रखें।
    हैजा
    इस मौसम की घातक बीमारी है हैजा। यह अक्सर दूषित भोजन और पानी के कारण होता है। बचाव के लिए
    स्वच्छता का ख्याल रखें।
    चिकनगुनिया में बच्चों की देखभाल
    बच्चों का खास ख्याल रखें। बच्चे नाजुक होते हैं और उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है इसलिए बीमारी उन्हें जल्दी पकड़ लेती है। ऐसे में उनकी बीमारी को नजरअंदाज न करें।
    बच्चे खुले में ज्यादा रहते हैं इसलिए इन्फेक्शन होने और मच्छरों से काटे जाने का खतरा उनमें ज्यादा होता है।
    बच्चों घर से बाहर पूरे कपड़े पहनाकर भेजें। मच्छरों के मौसम में बच्चों को निकर व टी – शर्ट न पहनाएं।
       आमतौर पर छोटे बच्चों को बुखार होने पर उनके हाथ – पांव तो ठंडे रहते हैं लेकिन माथा और पेट गर्म रहते हैं इसलिए उनके पेट को छूकर और रेक्टल टेम्प्रेचर लेकर उनका बुखार चेक किया जाता है। बगल से तापमान लेना सही तरीका नहीं है, खासकर बच्चों में। अगर बगल से तापमान लेना ही है तो जो रीडिंग आए, उसमें 1 डिग्री जोड़ दें। उसे ही सही रीडिंग माना जाएगा।

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    स्तनों को जल्दी बड़ा बनाने के उपाय





        सही आकृति और फिट आकार वाले शरीर को ही आकर्षक और सुंदर काया माना जाता है और आज की हर महिला फेस ब्यूटी के साथ-साथ एक अच्छी फिट बॉडी चाहती है इसीलिए आधुनिक समाज में अच्छे और सुंदर फेस के साथ-साथ सुडौल और बड़े स्तनो को आकर्षक शारीरिक विशेषताओं में से एक माना जाता है।
    अच्छे स्तन पाने की इच्छा महिलाओं को पुरातन काल से रही है। महिलाओं के स्तन उनकी सुंदरता में चार चाँद लगाते हैं और पुरूषों के लिए तो ये हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र रहे हैं। आज के ज़माने में भी पुरुष बड़े और आकर्षक स्तन वाली महिलाओं को ही ज़्यादा पसंद करते हैं। आजकल महिलाएं अपनी सुंदरता के विभिन्न आयामों को लेकर काफी सजग हो गयी हैं,अतः स्तनों को बड़ा और आकर्षक बनाने के तरीकों पर भी शोध चलते रहते हैं।

    मर्दानगी(सेक्स पावर) बढ़ाने के नुस्खे 

    आज एक औरत को और अधिक आकर्षक लगने के लिए उसके पास शारीरिक ऊंचाई और वजन से मेल खाते स्तनों की आदर्श जोड़ी का होना आवश्यक माना जा रहा है। अगर छोटे और बड़े स्तन वाली महिला में अंतर की बात करें तो छोटे स्तनों की अपेक्षा सुडौल और बड़े स्तन वाली महिला देखने में तो अधिक सुंदर लगती ही है साथ में बड़े स्तन वाली महिलाओं के अंदर आत्मविश्वास भी अधिक होता है इसी कारण आत्मविश्वास से भरी महिला जहाँ जाती है उनका नैतिक सम्मान भी बढ़ जाता है।
    आकर्षक शारीरिक विशेषताओं में सुडौल और बड़े स्तनो के महत्व को समझ कर ही आज महिलाएं स्वाभाविक रूप से स्तन के आकार बढ़ाने के उपाय जानने के लिए उत्सुक रहती है पर ज्यादातर महिलायें स्तन का आकार बढ़ाने लिए महंगी प्रक्रिया सर्जरी को ही चुनती है लेकिन स्तन वृद्धि की प्रक्रिया हमेशा परिणाम प्रदान करने वाली सर्जरी कई बार दुष्प्रभाव भी छोड़ जाती है इसलिए ब्रेस्ट का साइज बढाने के लिए हम कुछ सफल और आसान उपाय लेकर आये है जो ब्रेस्ट का साइज बढाने में आपकी मदद जरुर करेंगे।

    औरतों मे सफ़ेद पानी जाने की प्रभावी औषधि 

    चेस्ट प्रेसेस (Chest presses) करने के लिए डंबल्स (dumbbells) या वज़न दोनों तरफ लें और इन्हें उठाएं। चटाई पर सीधे खड़े हो जाएं और घुटनों को मोड़कर वज़न को हाथों में ले लें। इसे तब तक सीधा उठाते रहें, जब तक ये आपके कंधे के स्तर तक ना पहुँच जाए। इसके बाद उसी मुद्रा में वापस आ जाएं। इसे 10 से 15 बार दोहराएं और इससे आपको आसानी से फर्क दिखेगा।
    कसरत और योग : सुडौल और बड़े आकार के स्तन पाने में कसरत और योग हमेशा ही सबसे उपयोगी साबित हुए है। स्तन मांसपेशियों के बढ़ाने के लिए आप पुश-अप,डम्बल से ब्रेस्ट प्रेस,वाल प्रेस,स्विंगिंग आर्म्स के साथ-साथ घर पर गोमुखासन,उष्ट्रासन,वृक्षासन,द्विकोणासन आदि योग का अभ्यास सुडौल और अधिक आकर वाले स्तन प्राप्त करने के लिए कर सकती है। ये सभी कसरत और योग आपको शारीरिक ताजगी देने के साथ-साथ शरीर से तनाव भी दूर कर देंगे।

    बिदारीकन्द के औषधीय उपयोग 

    पोषक पेय पदार्थ : अगर आप रोज़ाना दूध और पपीते का रस पी सकती हैं तो आपके स्तनों के जल्दी बड़े होने की संभावना काफी ज़्यादा हो जाएगी। इनमें मौजूद विटामिन एवं अन्य पोषक पदार्थ आपके स्तनों की बढ़त तथा उन्हें आकर्षक और सुडौल बनाने में काफी बड़ी भूमिका निभाते हैं। अगर आप रस पीना नहीं चाहती तो ताज़ा पपीता खाने से भी आपको काफी लाभ मिलेगा।
    छाती को सिकोड़ना भी एक व्यायाम है। पैरों में कूल्हों जितनी दूरी बनाकर सीधे खड़े हों। एक नहाने के तौलिये को दोनों कोनों से पकड़ें और हाथों को सीधा खींचें। तौलियों को दोनों हाथों से विपरीत दिशा में लेकर जाएं। इस मुद्रा में 30 सेकंड से एक मिनट तक रहें। यह व्यायाम 3 बार करें।
    प्रोटीन : हम सभी जानते हैं कि मांसपेशियों के विकास के लिए प्रोटीन काफी आवश्यक हैं। अतः जिम में जाकर अपनी मांसपेशियां विकसित करने वालों को मांस और अंडे के सेवन की हिदायत दी जाती है जिनमें प्रोटीन भरा हो। इसी तरह महिलाओं के लिए उनके स्तन भी एक प्रकार की मांसपेशियां ही हैं,अतः उन्हें सुडौल वाक्स की प्राप्ति के लिए काफी मात्रा में प्रोटीन का सेवन करना चाहिए।
    वजन बढ़ाना-वज़न बढ़ने पर धीरे धीरे स्तनों के आकार में भी काफी वृद्धि होती है। अगर आपको लगता है कि आपके स्तन काफी धीरे बढ़ रहे हैं, तो आप अपने डॉक्टर से भी सलाह कर सकती हैं। वज़न बढाने के लिए मूंगफली, पनीर, मक्खन, दही आदि का सेवन करें। जिम (gym) जाकर वहाँ कुछ समय बिताएं। वहां 13 से 15 पुश अप्स , वज़न उठाना और छाती के अन्य व्यायाम करें, जिससे कि आपकी छाती की मांसपेशियों में खिंचाव आए।
    स्तनों की क्रीम : बाज़ार में आज तरह तरह की क्रीम उपलब्ध हैं जो आपके स्तनों के विकास एवं उन्हें बड़ा बनाने का भरोसा दिलाती हैं। आपको ऐसी क्रीम चुन्नी चाहिए जो आपकी त्वचा के अनुसार सही हो। ये क्रीम्स भी आपके स्तनों को सुडौल एवं आकर्षक बनाने हेतु काफी उपयोगी हैं। आपके लिए केवल यह आवश्यक है कि किसी अच्छी नामी ब्रांड की क्रीम लें जिसकी ग्राहक समीक्षा अच्छी हो।
    चेस्ट फ्लाइस
    (Chest flys) घर पर बिना किसी अतिरिक्त मेहनत के किये जा सकते हैं। एक कुर्सी लेकर बीच में बैठ जाएं और दोनों हाथों में बराबर भार उठाएं। हाथों को वज़न सहित सीधे उठाएं और कंधे तक पहुंचकर धीरे धीरे नीचे आ जाएं। इस बात का ध्यान रखें कि आपके हाथ निचले शरीर की तरफ एक दूसरे से पास रहें। इस व्यायाम को 3 सेट्स (sets) में दिन में 12 बार करें। आप रात को ब्रा पहनने से भी परहेज़ भी कर सकती हैं।
    आहार : स्तन का आकार शरीरक हार्मोन की अनुपस्थिति पर भी निर्भर करता है। आपके शरीर में अगर पुरुष हार्मोन या टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की उपस्थिति होगी तो यह स्तन विकास में बाधा डाल सकता है। इस हार्मोन के अतिरिक्त बात करे तो एस्ट्रोजन की कमी भी छोटे स्तन के पीछे की एक वजह हो सकती है। इन हार्मोनस पर काबू पाने के लिए सबसे अच्छा तरीका नपा तुला खाद्य पदार्थ ही सकता है। आप अपने संतुलित भोजन में चिकन सूप,मछली,सौंफ बीज, सोयाबिन और सोया से बने अन्य खाद्य पदार्थ सब्जियां,फलियां,फल,अंडे,नट्स के साथ-साथ सूरजमुखी के बीज, तिल के बीज और सन बीज भी शामिल कर सकती है।


    हाथ पैर और शरीर का कांपना कारण और उपचार

    मेथी : यह आपके वक्षों को बढ़ाने के प्राकृतिक उपचारों में से एक है। मेथी का रस निकालें और इसे अपने स्तनों पर अच्छे से लगाएं। अगर आप इस विधि का रोज़ाना इस्तेमाल करें तो आपको जल्दी ही सुन्दर और बड़े वक्षों की प्राप्ति होगी।
    स्तन की बढ़त में धैर्य रखना
    : आपको इस बात का इल्म होना चाहिए कि आपके स्तन एक ही दिन में बड़े,सुडौल एवं आकर्षक नहीं हो सकते जब तक आप स्तनों पर शल्य क्रिया का प्रयोग ना करें। जब कोई महिला अपने यौवन के प्रारम्भ की स्थिति में पहुँचती है तो उसकी छाती में दो तरफ स्तन के नाम पर सिर्फ २ छोटे मांस के टुकड़े होते हैं। स्तन बढ़ने में काफी समय लगता है,अतः महिलाओं के लिए यह काफी आवश्यक है कि स्तन बढ़ाने के नुस्खे अपनाते वक़्त धैर्य का परिचय दें।
    पुश अप्स
    करने के लिए सामने के भाग को फर्श पर रखें और हाथों को समतल तरीके से नीचे रखें। पैरों को भी सीधा रखें और हथेलियों की मदद से खुद को धीरे धीरे उठाने और नीचे लाने की प्रक्रिया आरम्भ करें। इसे कम से कम 13 से 15 बार करें और आप खुद के हाथ और छाती में शक्ति का अनुभव करेंगी। कुएं से पानी निकालने से भी आपकी छाती की मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है, जिससे वे तेज़ी से बढती हैं।

    स्तनों का दूध बढ़ाने के उपाय 

    स्तनों की मसाज : सुडौल स्तन पाने का यह एक और कारगर तरीका है। अगर आप तेल से अपने स्तनों की मालिश करें तो भरपूर एवं बड़े स्तन पाने की आपकी इच्छा अवश्य पूरी होगी। सोने के पहले रोज़ाना अपने स्तनों पर तेल लगाकर उनकी मालिश करें। इससे आपके स्तन के तंतु सुडौल होंगे और आपके स्तनों को अच्छी बढ़त मिलेगी।
    व्यायाम
    : कुछ छाती एवं हाथ से जुड़े व्यायाम आपके स्तनों की बढ़त और उन्हें बड़ा बनाने में काफी उपयोगी सिद्ध होते हैं। अगर आप कुछ हाथ के व्यायाम कर सकें जिनके द्वारा आपके स्तनों पर दबाव पड़ सके तो इससे आपके स्तनों को सुडौल एवं बड़ा होने में काफी मदद मिलेगी।
    जड़ी बूटियां : प्राकृतिक रूप से मिलने वाली कुछ जड़ीबूटियां आपके वक्षों को आकर्षक एवं बड़ा बनाने में काफी हद तक सक्षम हैं। ये प्राथमिक रूप से स्तनों को बढ़ाने वाली जड़ी बूटियां ही हैं जो आपके स्तनों को बड़ा करके उन्हें एक सुन्दर आकार देती हैं। आप अपने वक्षों को बढ़ाने के लिए कुछ हॉर्मोन्स की भी मदद ले सकती हैं परन्तु इनके काफी साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। पर अगर आप जड़ीबूटियों का सहारा लेंगी तो साइड इफेक्ट्स की कोई भी संभावना नहीं है।


    गोखरू के औषधीय गुण और प्रयोग


    कपड़ों का सही चुनाव करें
    : अपने छोटे स्तनों को उजागर करने के लिए हमेशा छोटे या गलत फिटिंग वाले ब्रा पहनना आपकी ब्रेस्ट स्वाथ्य के लिए हानिकारक हो सकता है इसलिए स्तनों को बड़े और फुले हुए देखने के लिए आप गद्देदार ब्रा की मदद ले सकती है पर घर पर रहते हुए या अधिक समय तक ऐसी ब्रा को पहनना आपके ब्रेस्ट और स्वास्थ्य दोनों के लिए गलत हो सकता है।

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    फोड़े ,घाव के सरल घरेलू उपचार



    हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग हमारी त्वचा है और जब त्वचा कटती है या चोट लगती है तब तुरंत ही इसे ठीक करने के लिए जटिल बायोकैमिकल प्रतिक्रियाएं काम करने लगती हैं | प्राकृतिक चीज़ों जैसे हर्बल एंटीसेप्टिक और मरहम के द्वारा चोट का इलाज करने से शरीर की घाव भरने की प्रक्रिया को सहारा मिल सकता है और घाव या चोट को न्यूनतम निशान छोड़े जल्दी ठीक करने में मदद मिल सकती है |
    फोड़े-फुंसियों या दाद-खाज खुजली जैसी चमड़ी की बीमारियों को पीछे प्रमुख रूप से रक्त का दूषित होना होता है। जब शरीर का खून दूषित यानी गंदा हो जाता है तो कुछ समय के बाद उसका प्रभाव बाहर त्वचा पर भी नजर आने लगता है। प्रदूषण चाहे बाहर का हो या अंदर का वो हर हाल में अपना दुष्प्रभाव दिखाता ही है। बाहरी और भतरी प्रदूषण ने मिलकर हमारे शरीर की प्राकृतिक खूबसूरती को छीनकर कई सारे त्वचा रोगों को जन्म दिया है फोड़े- फुंसियां भी उन्हीं में से एक हैं।

    आज दुनिया का हर दूसरा व्यक्ति चमड़ी से जुड़े किसी न किसी रोग से जूझ रहा है। खुजली,जलन, फुंसियां, घमोरियां, दराद, लाल-सफेद चकत्ते... जैसी कई समस्याएं हैं जिनसे हर कोई परेशान है या कभी न कभी रह चुका है। कई बार छूत से यानी इनसे संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने पर खुद को भी संक्रमण
    घाव को बहते पानी के नीचे धोकर साफ़ करें: सुनिश्चित करें कि रक्तस्त्राव बंद हो गया है | घाव युक्त त्वचा को नल के बहते पानी के नीचे लायें | धीमी गति से पानी को कुछ मिनट तक घाव के ऊपर बहने दें |[८]घाव को साफ़ करने की इस विधि का उपयोग करने से संक्रमण पैदा करने वाली अधिकतर अशुद्धियाँ बाहर निकल जाएँगी |
    अधिकतर उथले घावों के लिए जिन्हें सिर्फ घरेलू उपचार की ज़रूरत हो, प्राकृतिक रूप से की जाने वाली सफाई काफ़ी होती है |
    रक्तस्त्राव को बंद करें: 
    अपने घाव की गंभीरता की परवाह किये बिना और अधिक रक्त को न बहने देकर रक्तस्त्राव बंद करके पहला कदम उठायें | एक कॉटन की साफ़ पट्टी को घाव के ऊपर रखें और हल्का एक समान दबाव लगायें | बिना पट्टी हटाये इसे कम से कम 10 मिनट तक पकड़ें रहें |एक बार रक्तस्त्राव बंद हो जाने पर घाव भरना शुरू हो सकता है |
    घाव पर बहुत अधिक दबाव न डालें -

    अगर आप बहुत अधिक दबाव डालेंगे तो आप रक्त संचरण को रोक सकते हैं और इससे रक्त पट्टी के ऊपर आ जायेगा और इस तरह आपके घाव से लम्बे समय तक रक्त बहता रहेगा |

    अगर पट्टी से रक्त ऊपर तक आ जाये तो एक अन्य पट्टी को उसे सुखाने के लिए ऊपर रखें | पहली पट्टी के टुकड़े को न हटायें | एकसमान दबाव बनाये रखें |
    *अगर रक्त तुरंत पट्टी पर आ जाये और दबाव डालने पर भी रक्तस्त्राव का बंद होना प्रतीत न हो तो आपातकालीन कक्ष या डॉक्टर के पास जाएँ |
    *अपने हाथ धोएं: घाव का उपचार करने से पहले आपको हमेशा अपने हाथ साबुन और पानी से धोना चाहिए | इससे संक्रमण की सम्भावना को कम करने में मदद मिलेगी |[६]अपने हाथ गर्म पानी से धोएं और साफ़ टॉवल से सुखाएं |
    *अगर घाव आपके हाथ पर हो तो घाव पर साबुन लगाने से बचें क्योंकि इससे घाव उत्तेजित हो सकता है
    ब्रेड पुटलिस से करें उपचार-
    क्या आपको पता है कि आप ब्रेड पुटलिस से भी फोड़े का उपचार कर सकते हैं। यह एक प्रभावशाली तरीका है। ब्रेड के एक टुकड़े को गर्म दूध या पानी में डुबा लें। अब इस ब्रेड को संक्रमित त्वचा पर लगाएं। इससे जलन कम होगी और जल्द ही फोड़ा भी ठीक हो जाएगा। अच्छे परिणाम के लिए ऐसा दिन में दो बार करें।
    * नींबू के छोटे पत्ते खाने से लाभ होता है। नींबू में मौजूद विटामिन सी खून साफ करता है. फोड़े-फुंसियों पर नींबू की छाल पीसकर लगाएं. सप्ताह में एक बार फोड़े-फुंसिंयों पर मुल्तानी मिट्टी लगाएं. एक-दो घंटे बाद नहाएं 
    *हल्दी खून को साफ करता है और इसमें एंटी-इंफ्लामैटॉरी गुण पाया जाता है। गर्म दूध के साथ हल्दी मिलाकर पीने से फोड़ा ठीक हो जाता है। साथ ही आप हल्दी और अदरक का पेस्ट बनाकर फोड़े पर लगा सकते हैं। कुछ दिन तक ऐसा करने पर फोड़ा ठीक हो जाएगा।
    *एक टूनिकेट (tourniquet) का उपयोग करें: टूनिकेट का उपयोग सिर्फ बहुत गंभीर स्थितियों में करें | घर पर बनी टूनिकेट का उपयोग घाव पर केवल तब करना चाहिए जब खतरनाक मात्रा में रक्त निकलता जाये | सही तरीके से टूनिकेट न बाँधने पर आपके रक्त प्रवाह और हाथ या पैर में गंभीर रूप से नुकसान पहुँच सकता है और उन्हें काटने की नौबत तक आ सकती है |
    * पालक, मूली के पत्ते, प्याज, टमाटर, गाजर, अमरुद, पपीता आदि को अपने भोजन में नियमित रूप से शामिल करें।*सुबह खाली पेट चार-पांच तुलसी की पत्तियां चूंसने से भी त्वचा रोगों में स्थाई लाभ होता है।
    पानी अधिक से अधिक पीएं-
    चन्दन की लेई घाव पर लगाने से भी घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं। कच्चे केले का रस घाव पर लगाने से भी घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं। लहसुन का रस और हल्दी तिल के तेल के साथ मिलाकर बनाये हुए मिश्रण से सूजन कम हो जाती है और घाव जल्दी भर जाते हैं। तिल और नीम के पत्ते एरंडी के तेल के साथ भूनकर और हल्दी और कपूर के साथ पीसकर घरेलू मरहम बनाया जा सकता है। इस मरहम को घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं। नारियल के तेल में कपूर उबाल लें और इसे सूजी हुई जगह पर लगा लें। अगले दिन उसे गरम पानी से धो लें। इससे अंदरूनी चोट के कारण हुई सूजन कम हो जाती है। संतरे, अंगूर, लहसून, गाजर का सेवन करने से घावों के भरने में सहायता मिलती है। पिसे हुए पुदीने को एक कपड़े में बांधकर घाव पर रखने से घाव जल्दी भर जाते हैं और संक्रमण का डर भी नहीं रहता।
    *सुबह उठकर 2 से 3 किलो मीटर घूमने के लिये अवश्य जाएं ताकि आपके शरीर और रक्त को शुद्ध ताजा हवा मिल सके और शरीर का रक्त प्रवाह भी सुधर सके।


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    एलो वेरा
    कटे और छिले को तुरंत ठीक करना हो तो, उस पर एलो वेरा का रस लगा लेना चाहिये।
    किसी पैनी चीज़ जैसे कि चाक़ू, छुरी या रेज़र या काँच के टुकड़े से त्वचा का कटना। खरोंच जिससे त्वचा की उपरी सतह निकल जाती है। किसी सुई या कील से त्वचा का पंचर होना। भेदन घाव जो चाक़ू जैसी चीज़ शरीर के अन्दर घुसने के कारण होता है, बन्दूक की गोली या ऐसे ही किसी प्रक्षेप्य वस्तु के कारण ज़ख्म का होना। अंदरूनी मार, खरोंच वगैरह से भीतरी चोट पहुँचना। हेमाटोमस जिसे रक्त का ट्यूमर भी कहा जाता है, रक्त वाहिका के क्षतिग्रस्त होने के कारण होता है। लम्बे समय से हो रहे दबाव के कारण कृष इंजरी का होना। तीक्ष्ण और गंभीर या अभिघताज घाव, उन चोटों के कारण होते हैं जो टिस्यू को भंग कर देते हैं।
    फोड़े के लिए नीम सबसे अच्छा एंटीसेप्टिक होता है। इससे एंटी बैक्टीरिअल और एंटी माइक्रोबिअल गुण पाया जाता है, जो फोड़े के उपचार में फायदेमंद होता है। वास्तव में नीम हर तरह की त्वचा संबंधित समस्या के लिए फायदेमंद होता है। नीम को पीस कर इसका पेस्ट तैयार कर लें। अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा के संक्रमित हिस्से पर लगाएं। अगर आप चाहें तो नीम की पत्ती को उबाल कर भी इसका पेस्ट तैयार कर सकते हैं। पेस्ट को कुछ देर के लिए लगा रहने दें और फिर पानी से धो लें।
    अगर त्‍वचा छिल गई है या उस पर घाव बन गया है तो, त्‍वचा को तुरंत ही साफ पानी से धो कर उस पर शहद का थोड़ा सा लेप लगाएं। अगर त्‍वचा पर सूजन भी आ गई होगी तो वह भी शहद लगाने से चली जाएगी।
    आज दुनिया का हर दूसरा व्यक्ति चमड़ी से जुड़े किसी न किसी रोग से जूझ रहा है। खुजली,जलन, फुंसियां, घमोरियां, दराद, लाल-सफेद चकत्ते... जैसी कई समस्याएं हैं जिनसे हर कोई परेशान है या कभी न कभी रह चुका है। कई बार छूत से यानी इनसे संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने पर खुद को भी संक्रमण लगने से भी फोड़े- फुंसी या खुजली जैसी कोई त्वचा संबंधी समस्या हो सकती है।
    पता लगायें कि घाव कितना गहरा है: एक गेज या पट्टी के झीने कपड़े (gauge) के द्वारा घाव का परीक्षण करके पता लगायें कि आपको चिकित्सीय देखरेख की ज़रूरत है या इसे घर पर ठीक किया जा सकता है | अगर घाव बहुत गहरा और गंभीर हो तो हॉस्पिटल जाएँ और चिकित्सा विशेषज्ञ के द्वारा इलाज़ कराएँ | गंभीर ताज़े जख्म या घाव को ठीक से भरने के लिए इसमें टांके लगाने की ज़रूरत पड़ सकती है |[१] अगर आपके घाव के लिए इनमे से कुछ सही हो तो आपातकालीन कक्ष में जाएँ:
    घाव में गहराई में लाल मांसपेशियां या पीले वसा ऊतक दिखाई दे रहे हों |
    जब आप घाव के किनारों को पकड़ना छोड़ दें तो घाव खुला रह जाये |
    घाव जोड़ों के पास हो या अन्य अधिक गतिविधि वाले हिस्से के पास हो जहाँ यह बिना टाँके लगाये बंद नहीं रह सकेगा |
    *रक्तस्त्राव गंभीर रूप से हो रहा हो और 10 मिनट तक दबाने के बाद भी बंद न किया जा सकता हो |[२]
    घाव एक धमनी को कटकर खोल दें; जो एक मोटा, हाई ट्रैफिक वेन (high-traffic vein) युक्त घाव हो | धमनियों का रक्त सामान्यतः चटक लाल रंग का होता है | यह आवेग के साथ तेज़ी से आता है और इसके पीछे उच्च दबाव होता है
    *थोड़ी सी साफ रूई पानी में भिगो दें, फिर हथेलियों से दबाकर पानी निकाल दें। तवे पर थोड़ा सा सरसों का तेल डालें और उसमें इस रूई को पकायें। फिर उतारकर सहन कर सकने योग्य गर्म रह जाय तब इसे फोड़े पर रखकर पट्टी बाँध दें। ऐसी पट्टी सुबह-शाम बाँधने से एक दो दिन में फोड़ा पककर फूट जायेगा। उसके बाद सरसों के तेल की जगह शुद्ध घी का उपयोग उपरोक्त विधि के अनुसार करने से घाव भर के ठीक हो जाता है।



    * फोड़े फुंसियों पर वट वृक्ष या बरगद के पत्तों को गरम कर बाँधने से शीघ्र ही पक कर फूट जाते
    चीनी
    चीनी घाव से रिस रहे पानी को बिल्‍कुल सोख लेती है और इंफेक्‍शन को दूर रखती है।आयुर्वेद के अनुसार नीम की सूखी छाल को पानी के साथ घिसकर फोड़े फुंसी पर लेप लगाने से बहुत लाभ मिलता है और धीरे-धीरे इनकी समाप्ति हो जाती है।
    *जब तक समस्या से पूरी तरह से छुटकारा नहीं मिल जाता मीठा यानी शक्कर से बनी, बासी,तली-गली और अधिक मिर्च-मसालेदार चीजों को पूरी तरह से छोड़ दें।
    सिरका
    यह भले ही कटी त्‍वचा पर लगाने से जलता है मगर यह घाव को भरने में बिल्‍कुल भी समय नहीं लेता। इसकी एक बूंद रूई पर डाल कर घाव पर लगाइये।
    *फोड़े-फुंसी, दराद या खुजली वाले स्थान पर मूली के बीज पानी में पीस कर गरम करके लगाने से तत्काल लाभ होता होगा।
    *नीम की पत्तियों को पीस कर फोड़े-फुंसी, दराद या खुजली वाले स्थान पर लगाने और पानी के साथ पीने से बहुत सीघ्र लाभ होता है।

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