Thursday, July 14, 2016

शरीर मे शौथ के कारण और उपचार// Treatment of swelling in the body



हमारे  पूरे शरीर में या फिर किसी अंग विशेष में सूजन आने के लक्षण प्रकट होते हैं| आमतौर पर हम इसकी अनदेखी करते हैं या फिर दर्द निवारक तेल व मरहम से इसे दूर करने की कोशिश करते हैं। पर हर बार यह लापरवाही ठीक नहीं। यह सूजन शरीर में छिपी किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकती है। 

चेहरे या शरीर के किसी हिस्से में लंबे समय से बनी हुई सूजन को देख कर भी अनदेखा करना समझदारी नहीं है। यदि शरीर में बार-बार पानी एकत्र हो रहा है तो यह हृदय, लिवर या किडनी की किसी समस्या का संकेत हो सकता है। ‘जब शरीर में अतिरिक्त फ्लूइड यानी पानी इकट्ठा हो जाता है तो शरीर में सूजन आने लगती है, जिसे एडिमा कहा जाता है। जब यह सूजन टखनों, पैरों और टांगों में आती है तो उसे पेरिफेरल एडिमा कहते हैं। फेफड़ों की सूजन पलमोनरी एडिमा और आंखों के पास आने वाली सूजन पेरिऑरबिटल एडिमा कहलाती है। शरीर के ज्यादातर भागों में दिखायी पड़ने वाली सूजन को मैसिव एडिमा कहा जाता है। इस स्थिति में मसूड़ों, पेट, चेहरे, स्तन, लसिका ग्रंथि व जोड़ों आदि सभी भागों पर सूजन आ जाती है। ज्यादा देर तक खड़े रहने या बैठने की वजह से होने वाली सूजन को ऑर्थोस्टेटिक एडिमा कहा जाता है। हल्की सूजन ज्यादातर कोई बड़ी समस्या नहीं होती, लेकिन अधिक समय तक रहने वाली ज्यादा सूजन गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है।



पेट या शरीर के किसी भी अंग में एक सप्ताह से ज्यादा सूजन रहने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी हो जाता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ऐसे मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं। ऐसा इसलिए भी कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में वसा का अनुपात ज्यादा होता है और वसा कोशिकाएं अतिरिक्त पानी संचित कर लेती हैं। नियमित व्यायाम व खान-पान में लापरवाही भी एडिमा की स्थिति को अधिक बढ़ा सकती है।’


सूजन का कारण 

, दिल से जुड़ी बीमारियों, किडनी की समस्या, असंतुलित हॉरमोन और स्टेरॉयड दवाओं के सेवन की वजह से एडिमा की समस्या हो सकती है। दरअसल इन सभी स्थितियों में हमारी किडनी सोडियम को संचित कर लेती है। हालांकि कुछ महिलाओं को मासिक धर्म के एक सप्ताह पहले भी कुछ ऐसे ही लक्षण नजर आते हैं। इस दौरान एस्ट्रोजन हारमोन की मात्रा बढ़ जाती है, जिसकी वजह से किडनी ज्यादा पानी रोकना शुरू कर देती है। हमारा अनियमित भोजन व जीवनचर्या भी एडिमा की बड़ी वजह है। 

पैरों में सूजन 

पैरों में सूजन के भी कई कारण हो सकते हैं, जैसे मोच, लंबी दूरी तक सैर करना, ज्यादा देर तक खड़े रहना, व्यायाम या फिर खेल-कूद आदि। लेकिन अचानक एक या दोनों पैर में भारी सूजन, लाली और गर्माहट तथा चलने-फिरने पर पैर में खिंचाव जैसे लक्षण डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डीवीटी) की परेशानी हो सकते हैं। इसमें टांगों की नसों में खून के कतरों का जमाव होता है। अक्सर लोग अज्ञानता के कारण इसे नस में खिंचाव, चोट, थकान, सामान्य संक्रमण या फाइलेरिया मान कर इलाज कराने लगते हैं। सामान्य डॉक्टर भी इसे फाइलेरिया, सियाटिका अथवा नस चढ़ना मान बैठते हैं।

फाइलेरिया के इलाज के नाम पर कई सप्ताह तक मरीज को दवाएं दी जाती हैं या फिर सही रोग पकड़ में न आने पर रोगी के पैर पर वजन लटकाने की सलाह दी जाती है, जिससे समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं डीवीटी की शिकार अधिक होती हैं। नियमित व्यायाम न करना, गर्भ निरोधक दवाओं का अधिक इस्तेमाल और हारमोन असंतुलन के कारण भी ऐसा होता है। लंबे समय तक ऊंची एड़ी वाले फुटवियर पहनने से भी यह आशंका बढ़ जाती है। पैरों में लंबे समय तक रहने वाली सूजन हृदय रोगों की आशंका को भी दर्शाती है। पैरों की सूजन को कम करने के लिए गरम पानी में नमक डाल कर उसमें अपने पैरों को डुबोएं। सोने से पहले पैरों की गरम तेल से मालिश करें। इससे सूजन व दर्द में कमी आएगी। प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करने से भी रक्त संचार नियमित होता है, जो सूजन व दर्द में राहत देता है। 

हाथों में सूजन




हाथों व उंगलियों में सूजन एक आम परेशानी है, खासकर बढ़ती आयु में जब शरीर का मेटाबॉलिज्म घटने लगता है तो यह समस्या आमतौर पर देखी जाती है। ऐसा एडियोपैथिक एडिमा के कारण होता है। ऐसे में हाथों के कुछ सरल व्यायाम और स्ट्रेचिंग सहायक हो सकते हैं। हालांकि कुछ स्थितियों में यह सूजन लिवर व किडनी रोग का संकेत भी होती है। इसके अतिरिक्त हृदय रोग, गठिया, रक्त विकार, हाइपो थाइरॉएड, रूमेटाइड अर्थराइटिस में यह एक महत्वपूर्ण संकेत है। इस स्थिति में शरीर के विभिन्न जोड़ों में सूजन आ जाती है। त्वचा संक्रमण के कारण भी ऐसा होता है।

चेहरे पर सूजन

इसके कई कारण हो सकते हैं, मसलन फ्लूइड का इकट्ठा होना, चोट लगना, संक्रमण या फिर कैंसर। यह सूजन गाल, आंख व होठों के पास भी होती है। इस तरह की सूजन को मेडिकल साइंस में फेशियल एडिमा कहते हैं। यदि चेहरे की सूजन थोड़े समय के लिए होती है तो ऐसा संक्रमण के कारण हो सकता है, पर बार-बार ऐसा होने के साथ-साथ चेहरा लाल, बुखार या सांस लेने में परेशानी होती है तो यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टरी सलाह लेकर पूरा उपचार करवाएं।




जीभ में सूजन
जीभ में कई कारणों से सूजन आ सकती है, जैसे दवाओं का साइड इफेक्ट, एलर्जी, हारमोन थेरेपी। इसे एंजियोडिमा कहते हैं। इस स्थिति में संक्रमण त्वचा के भीतर गहराई में पहुंच जाता है। हमारी जीभ एपिथेलियम नाम की कोशिकाओं से बनी होती है। इसकी सतह पर बने टेस्ट बड्स से ही हमें खट्टे, मीठे या कड़वेपन का एहसास होता है। जब जीभ पर सूजन आ जाती है तो टेस्ट बड्स भी सूज जाते हैं, जिसकी वजह से सांस लेने में भी परेशानी होती है। इस सूजन की अनदेखी न करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

आंखों की सूजन
आंखों की सूजन ज्यादातर संक्रमण, एलर्जी, कॉर्नियल अल्सर, कंजक्टिवाइटिस, स्टाई, ट्यूमर बनने या वायरल इन्फेक्शन के कारण होती है। आंखें शरीर का सबसे जरूरी व नाजुक अंग होती हैं। उनके उपचार में कोई जोखिम न लें। डॉक्टर की सलाह से स्टेरॉयड या एंटीबायोटिक आई ड्रॉप की मदद से आंखों की सूजन को ठीक किया जा सकता है।

पेट में सूजन
पेट में सूजन कब्ज, गैस, काबरेनेटेड ड्रिंक्स और फूड एलर्जी के कारण हो सकती है। अधिक फास्ट व जंक फूड के सेवन से भी ऐसा होता है। हाई प्रोसेस्ड फूड में सोडियम की मात्रा अधिक और फाइबर कम होता है, जो पेट में भारीपन और सूजन का कारण बन सकता है। इसलिए डिब्बा बंद आहार या प्रोसेस्ड आहार लेते समय सोडियम की मात्रा जांच लें। अधिक सोडियम का शरीर में जाना सूजन का कारण बन जाता है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर, डायबिटीज की दवाओं व हारमोनल थेरेपी की वजह से भी सूजन देखने को मिलती है। पेट की सूजन को दूर करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। खाने के बाद अजवायन में काला नमक मिला कर खाने से पाचन एकदम दुरुस्त हो जाता है और सूजन भी नहीं होती। अधिक शराब पीने वालों का लिवर सिकुड़ने की वजह से भी पेट पर सूजन आ जाती है। पेशाब पीला आने लगता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

सूजन को कम करने के उपाय
सामान्य स्थितियों में जीवनशैली व खान-पान में बदलाव करके सूजन की समस्या से राहत पायी जा सकती है। *हरी सब्जियों व फल के सेवन से विटामिन बी-वन की कमी पूरी होती है। प्रोटीन के लिए दूध, सोयाबीन व दाल का सेवन लाभकारी होता है। इनके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। खून की कमी पूरी होती है, जो सूजन का एक मुख्य कारण है।
*एडिमा की स्थिति में शराब और कैफीनयुक्त चीजों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है और पानी के अवशोषण की समस्या बढ़ जाती है। हर्बल चाय पिएं। खासतौर पर अजवायन की चाय सबसे अच्छी मानी जाती है।
*शरीर की जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन भी पानी के अवशोषण की समस्या को बढ़ा सकता है। अधिक नमकयुक्त चीजों के सेवन से बचें।
*मोटापा होने पर सबसे पहले थोड़ा वजन घटाएं। एक कैलोरी चार्ट बनाएं और उसके आधार पर खान-पान की सूची तैयार करें।
*रोजाना एक्सरसाइज करने की आदत डालें। इससे पसीने के रूप में शरीर का अतिरिक्त पानी निकल जाता है। त्वचा भी अच्छी रहती है। घूमना, टहलना, तैराकी या नृत्य, अपनी सुविधानुसार आप किसी भी व्यायाम का चुनाव कर सकते हैं।
*शरीर की नसों, तंत्रिकाओं और मांसपेशियों के कामकाज को नियंत्रित करने में सोडियम के साथ पोटैशियम का भी योगदान होता है। पोटैशियम के लिए रोजाना कम से कम पांच फल और सब्जियों का सेवन जरूर करें। अखरोट, बादाम, मूंगफली आदि भी पोटैशियम के अच्छे स्रोत हैं।
* शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखने में विटामिन बी-6 मददगार है। ब्राउन राइस व रेड मीट विटामिन बी-6 के अच्छे स्रोत हैं।
*विटामिन बी-5, कैल्शियम और विटामिन डी सूजन को कम करने में असरकारी हैं। नियमित रूप से कुछ देर धूप का सेवन करें।
*खाने में कैल्शियम के स्तर की जांच करें। रोजाना टोंड दूध पिएं। दही, मछली, हरी पत्तेदार सब्जियां और अंजीर खाएं।










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