Friday, January 1, 2016

हरड़ के गुण और लाभ : Benefits of Harad






  हरड़ बेहद उपयोगी आयुर्वेदिक औषधि है| इसके पेड़ पूरे भारत में पाये जाते हैं | इसका रंग काला व पीला होता है तथा इसका स्वाद खट्टा,मीठा और कसैला होता है | आयुर्वेदिक मतानुसार हरड़ में पाँचों रस -मधुर ,तीखा ,कड़ुवा,कसैला और अम्ल पाये जाते हैं | आयुर्वेद की चरक संहिता मे जिस प्रथम औषधि के बारे में बताया गया है वह हरड़, हर्रे या हरीतकी है। हरड़ की उपयोगिता के बारे मे शास्त्रों मे कहा गया है कि जिसके घर मे माता नहीं है, उसकी माता हरीतकी है। माता फिर भी कभी कुपित (गुस्सा) हो सकती है लेकिन हरड़ पेट में जाने पर कोई अहित नहीं करती बल्कि हमेशा फायदा ही करती है। घरेलू रूप में छोटी हरड़ का ही अधिकतर उपयोग किया जाता है। हरीतकी संपूर्ण शरीर के लिए फायदेमंद है विशेष रूप से कब्ज, बवासीर, पेट के कीड़ों को दूर करने, नेत्र ज्योति व भूख बढ़ाने, पाचन तथा अलग-अलग मौसम में होने वाले रोगों में भी ये प्रभावी होती है। आज हम हरड़ के कुछ लाभ जानेंगे -
1) हरड़ के टुकड़ों को चबाकर खाने से भूख बढ़ती है |
2) छोटी हरड़ को पानी में घिसकर छालों पर प्रतिदिन तीन बार लगाने से मुहं के छाले नष्ट हो जाते हैं | इसको आप रात को भोजन के बाद भी चूंस सकते हैं |



3) छोटी हरड़ को पानी में भिगो दें | रात को खाना खाने के बाद चबा चबा कर खाने से पेट साफ़ हो जाता है और गैस कम हो जाती है |
4) कच्चे हरड़ के फलों को पीसकर चटनी बना लें | एक -एक चम्मच की मात्रा में तीन बार इस चटनी के सेवन से पतले दस्त बंद हो जाते हैं |
5) हरड़ का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दो किशमिश के साथ लेने से एसीडिटी ठीक हो जाती है |
6) हरीतकी चूर्ण सुबह शाम काले नमक के साथ खाने से कफ ख़त्म हो जाता है |



7) हरड़ को पीसकर उसमे शहद मिलाकर चाटने से उल्टी आनी बंद हो जाती है|

8) भोजन के बाद अगर पेट में भारीपन महसूस हो तो हरड़ का सेवन करने से राहत मिलती है।
9) हरड़ को पीसकर आंखों के आसपास लगाने से आंखों के रोगों से छुटकारा मिलता है।



10) हरड़ का सेवन लगातार करने से शरीर में थकावट महसूस नहीं होती और स्फूर्ति बनी रहती है।
11) हरड़ का सेवन गर्भवती स्त्रियों को नहीं करना चाहिए।

12) हरड़ पेट के सभी रोगों से राहत दिलवाने में मददगार साबित हुई है।
13) हरड़ का सेवन करने से खुजली जैसे रोग से भी छुटकारा पाया जा सकता है।
14)अगर शरीर में घाव हो जांए हरड़ से उस घाव को भर देना चाहिए।
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