Monday, January 4, 2016

पौष्टिक तत्वों से भरपुर बेंगन : benefits of brinjal








बैंगन की लोकप्रियता स्वाद और गुण के नज़र से ठंड तक ही रहती है। इसलिए पूरे सर्दी के मौसम की सब्जी-भाजियों में बैंगन को राजा के रूप में माना जाता है। गर्मी के महीनों में इसका स्वाद भी बदल जाता है।ज्यादा बीज वाले बैंगन जहर का रूप हैं। बैंगन जितने ज्यादा कोमल और मुलायम होते हैं। उतने ही ज्यादा गुण वाले और बलवर्धक माने जाते हैं। गर्मी के महीनों मे पैदा होने वाले ज्यादा बीज वाले बैगन का उपयोग नहीं करना चाहिए। शरद के महीने में पित्त का प्रकोप होता है। इसलिए इस ऋतु में पित्तकर बैंगन खाने से अनेकों रोग उत्त्पन्न होते है। बसंत के महीनों में बैंगन को खाने से लाभ होता है।तेल और हींग में बनायी हुआ बैंगन की सब्जी वायु प्रकृति वालों के लिए बहुत ही फायदेमंद है। कफ (बलगम) प्रकृतिवालों और समप्रकृति वालों के लिए भी सर्दी के मौसम में बैंगन का सेवन गुणकारी है।
स्वभाव : बैंगन की प्रकृति गर्म और खुश्क होती है।
हानिकारक : यह पेट में बादी पैदा करता है और बवासीर को बढ़ाता है।
दोषों को दूर करने के लिए : बैंगन को गोश्त, घी और सिरका में मिलाकर खाने से इसके दोष दूर हो जाते हैं।
गुण : बैंगन आमाशय को बलवान बनाता है, गांठों को तोड़कर सिख्तयों को नर्म करता है, पेशाब जारी करता है, गर्मी के दर्दों को शांत करता है, हल्दी के साथ इसकी सेंक चोट को लाभ करती है। बैंगन कड़वा है, रुचि को बढ़ाता है, मधुर है, पित्त को पैदा करता है, बल को बढ़ाता है और धातु (वीर्य) को बढ़ाता है। यह दिल के लिए फायदेमंद, भारी और वात रोगों में लाभदायक है। बैंगन नींद लाता है, खांसी पैदा करता है, कफ बलगम और सांस को बढ़ाता है। लंबा बैंगन श्रेष्ठ होता है, यह पाचनशक्ति और खून को बढ़ाता है। कच्चा बैंगन कफ बलगम, पित्त को खत्म करता है। पका बैंगन क्षारयुक्त, पित्तकारक तथा मध्यम बैंगन त्रिदोषनाशक, रक्त-पित्त को निर्मल करने वाला है। आग पर भुने हुए बैंगन का भर्ता पित्त को शांत करता है, वात और पित्त रोग को खत्म करता है।
विभिन्न रोंगों का बैंगन से उपचार :
1 गैस : -
*पेट में गैस बनती हो, पानी पीने के बाद पेट इस तरह फूलता हो जैसे फुटबाल में हवा भर जाती है तो

लंबे बैंगन की सब्जी-जब तक मौसम में बैंगन हो खाते रहें। इससे गैस की बीमारी दूर हो जायेगी। इस प्रयोग से लीवर और तिल्ली बढ़ी हुई हो तो उसमें भी लाभ मिलता है।
*बैंगन की सब्जी, भर्ता या सूप बनाकर हींग और लहसुन के साथ खाने से पेट के अन्दर की गैस कम हो जाती है और गुल्म रोग दूर हो जाता है।
2 पसीना अधिक आना : -
हाथ की हथेलियों व पैरों के तलवों में पसीना आने पर बैंगन का रस निकाल कर हथेलियों व तलुवों पर लगाने से पसीना आना कम हो जायेगा।
3 बाला नारू रोग : -
*बैंगन को सेंककर दही में पीसकर 10 दिनों तक जहां बाला निकल रहा हो वहां पर लगाने से लाभ होता है।
*एक गोल आकार के मोटे बैंगन को भूनकर पीस लें और दही में मिला लें फिर जहां पर बाला निकल रहा हो वहां पर लगातार 10 दिन तक लगाने से बाला रोग में लाभ होता है।"
4 बवासीर :
*बैंगन का वह हिस्सा जिससें बैंगन जुड़ा रहता है। उसे पीसकर बवासीर पर लेप करने से दर्द और जलन में आराम मिलता है। बैंगन को जला लें। इनकी राख शहद में मिलाकर मरहम बना लें। इसे मस्सों पर लगायें। इससे बवासीर के मस्से सूखकर गिर जायेंगे। बैंगन की डंडी को पीसकर बवासीर पर लगाने से दर्द और जलन से आराम मिलता है।
*बैंगन को जलाकर पीसकर कपड़े से छान लें। इसे बवासीर के मस्सों पर लगाने से दर्द मे लाभ होता है।"
5 दिल के रोग में :
दिल के रोग में बैंगन का बराबर सेवन करने से लाभ होता है।
6 मन्दाग्नि याने पाचनशक्ति का कमजोर होना:-
बैंगन और टमाटर का सूप पीने से मन्दाग्नि मिटती है और खाना सही से पचने लगता है।
7 मलेरिया बुखार में :-
कोमल बैंगन को आग पर सेंककर रोज सुबह के समय खाली पेट गुड़ के साथ खाने से मलेरिया बुखार में तिल्ली बढ़ गई हो और शरीर पीला पड़ गया हो तो इससे लाभ होता है।
8 पथरी : -
*बैंगन का साग खाने से पेशाब ज्यादा आकर शुरुआत हुई छोटी पथरी गलकर पेशाब के साथ बाहर आ जाती है।
*बैगन को आग में पकाकर उसका बीज निकाल लें। फिर उसका भर्ता बनाकर 15 से 20 दिन खायें। इससे पथरी गलकर बाहर निकल जाती है।"
10 अनिद्रा :-
बैंगन को आग पर सेंककर, शहद में मिलाकर शाम को चाटने से नींद अच्छी आती है। इस प्रयोग को रोज करते रहने से अनिद्रा का रोग में लाभ होता है।
11 बंद मासिक-धर्म :-
मासिक-धर्म कम मात्रा में आता हो या साफ न आता हो तो सर्दियों में बैंगन की सब्जी, बाजरे की रोटी और गुड़ का बराबर मात्रा में सेवन करने से लाभ होता है। ध्यान रहें गर्म प्रकति की स्त्रियों को यह प्रयोग न करायें।
12 पेट का भारी होना :-
बैंगन को आग पर सेंककर उसमें सज्जीखार मिलाकर पेट पर बांधने से, भारी पेट कुछ ही समय में हल्का हो जाता है।
13 फोड़े, फुन्सी :-
बैंगन की पट्टी फोड़े, फुन्सियों पर बांधने से फोड़े जल्दी पककर फूट जाते हैं।
14 अंडकोष की सूजन :-
बैंगन की जड़ को पानी में मिलाकर अंडकोषों पर कुछ दिनों तक लेप करने से अंडकोषों की सूजन और वृद्धि नष्ट हो जाती है।
15 अफारा (गैस का बनना) : -
बैंगन की सब्जी में ताजे लहसुन और हींग का छौंका लगाकर खाने से आध्यमान (अफारा, गैस) आदि दूर हो जाती है।
16 कब्ज (गैस) का बनना: -
*बैंगन और पालक का सूप पीने से कब्ज मिट जाती है और पाचन-शक्ति को बढ़ती है।*बैंगन को धीमी आग पर पकाकर खाने से कब्ज दूर हो जाती है।"
17 कान का दर्द :-
बैंगन को आग में भूनकर उसका रस निकाल लें। फिर उसके अंदर नीम का गोंद मिलाकर गुनगुना करके कान में बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द समाप्त हो जाता है।
18 कान के कीड़े : -
बैंगन को भूनकर उसमें से निकलने वाले धुंए को कान में लेने से कान के सारे कीड़े खत्म हो जाते हैं।
*बैंगन का धुंआ और सरसों के तेल को गर्म करके गाय के पेशाब में मिलाकर उसमें हरताल की राख को मिलाकर कान में डालने से कान के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।"
19 जिगर का रोग :-
यकृत वृद्धि में रोगी को बैंगन का भर्ता बनाकर खिलाने से बहुत फायदा होता है। भर्ता को लोहे की कड़ाही में सरसों के तेल के साथ बनाएं और इसमें लाल मिर्च का प्रयोग करें इससे जिगर का बढ़ना कम हो जाता है।
20 जलोदर के लिए :-
1 बड़े बैंगन को चीरकर उसके अंदर ठंडा नौसादार रखकर रात में खुली हुई जगह में रख दें। सुबह-सुबह इसे निचोड़कर इस रस की 4 से 5 बूंद रस को बतासे में भरकर रोगी को सेवन कराने से अधिक पेशाब आकर जलोदर (पेट में पानी भरना) के रोग से छुटकारा मिल जाता है।
21 प्लीहा वृद्धि (तिल्ली) :-
ताजे लंबे बैंगन की सब्जी खाने से तिल्ली (प्लीहा) बढ़ने के रोग में आराम मिलता है।
22 योनि का आकार छोटा होना :
-सूखे हुए बैंगन को पीसकर योनि में रखने से योनि सिकुड़कर छोटी हो जाती है।
23 आन्त्रवृद्धि का बढ़ना :-
मारू बैंगन को गर्मराख में भूनकर बीच से चीरकर अंडकोषों पर बांधने से आन्त्रवृद्धि व दर्द दोनों बंद हो जाते हैं। बच्चों की अंडवृद्धि को ठीक करने के लिए यह बहुत ही उपयोगी है।
24 सूखा रोग :-
   बैंगन को अच्छी तरह से पीसकर उसका रस निकालकर उसके अंदर थोड़ा सा सेंधानमक मिला लें। इस एक चम्मच रस को रोजाना दोपहर के भोजन के बाद कुछ दिनों तक बच्चे को पिलाने से सूखा रोग (रिकेट्स) में लाभ मिलता है।
बेंगन के कुछ और गुणों के बारे मे लिख देते हैं|-
बैंगन के सेवन से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर गिरता है। इस तरह के प्रभाव का प्रमुख कारण है। बैंगन में पोटेशियम व मैंगनीशियम की अधिकता। बैंगन की पत्तियों के रस का सेवन करने से भी रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम किया जा सकता है।
   बेंगन के सेवन से धमनियों की दीवारों में कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल कम हो जाता है। यहां तक की खून की नसों में भी खून ठीक प्रकार से बहने लगता है।
     बैंगन में विटामिन सी बहुत अच्छी मात्रा में है जो प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है और शरीर को संक्रमण से मुक्त रखने में मदद करता है।
    बैंगन का सूप तैयार किया जाए जिसमें हींग और लहसून भी स्वाद के अनुसार मिलाया जाए और सेवन किया जाए तो यह पेट फूलना, गैस, बदहज़मी और अपचन जैसी समस्याओं में काफी राहत देता है|
बैंगन का रस दांत के दर्द में लाभदायक प्रभाव दिखलाता है। अस्थमा के उपचार के लिये बैंगन की जड़ें प्रयुक्त की जाती हैं।
    इस पौधे में जो न्‍यूट्रियन्‍ट्स पाए जाते हैं वह हमारे दिमाग के लिये बहुत ही अच्‍छे होते हैं। यह किसी भी प्रकार की हानि से हमारी कोशिका की झिल्‍ली को बचाते हैं। यह दिमाग को फ्री रेडिकल से बचाता है और दिमाग का विकास करता है। लीवर की बीमारियां होने पर भी बैंगन का सेवन लाभदायक प्रभाव दिखलाता है। बैंगन की पत्तियों में हल्का निद्राकारी तत्व उपस्थित रहता है। अत: कई दवाईयां बनाने में इसकी पत्तियां आधारभूत तत्व की तरह कार्य करती हैं।
   हाई फाइबर और कम कार्बोहाइड्रेट के तत्‍व होने के कारण यह मधुमेह रोगियों के लिये बहुत अच्‍छा आहार है। इसको नियमित खाने से आपका शुगर लेवल कम होगा।
प्राकृतिक तरीके से सिगरेट छोड़ना चाहते हैं तो डाइट में बैंगन का सेवन अधिक करें। निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी के तहत इसमें मौजूद निकोटिन की सीमित मात्रा सिगरेट छोड़ने वाले लोगों के लिए मददगार हो सकती है।
   अगर आप प्रतिदिन बैंगन खाएंगे तो आपका शरीर कैंसर से लड़ने के लिये मजबूत हो जाएगा। यह खासकर पेट के कैंसर से लड़ने में सहायक है।इसमें एक तत्‍व पाया जाता है जो कि शरीर में कैंसर की सेल से लड़ने में सहायक होता है।
   यह याद रखें कि सब्जी बनाते समय इसका डंठल व्यर्थ समझकर फेंकना नहीं चाहिए, क्योंकि इसमें पौष्टिक तत्वों की अधिकता होती है।






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