नशा छोडने का सरल उपाय // Remedy to quit Aaddiction





नशा छोड़ने का उपाय
नशा कोई भी हो शराब, गुटखा, तम्बाकू या कोई ओर निम्न उपचार से आप नशे की
लत से मुक्ति पा सकते हैं|
अदरक के छोटे छोटे टुकड़े काट ले अब इन पर सेंधा नमक बुरक ले, अब इन टुकड़ो पर
निम्बू निचोड़ लेऔर इन टुकड़ो को धुप में सूखने के लिए रख दे। जब सूख जाए तो बस
हो गयी दवा तैयार।

अब जब भी किसी नशे की लत लगे तो ये टुकड़ा निकाला और चूसते रहो। ये अदरक
मुह में घुलती नहीं इसको आप सुबह से शाम तक मुह में रख सकते हैं।








अब आप सोचोगे के ऐसा अदरक में क्या हैं तो सुनिए जब किसी आदमी को नशे की
लत लगती हैं तो उसकी बॉडी सल्फर की डिमांड करती हैं, और अगर हम सल्फर की
कमी शरीर में पूरी कर दे तो फिर बॉडी को ये नशे की उठने वाली तलब नहीं लगेगी।
ये प्रयोग आप 3 से 4 दिन करोगे तो ही आप नशा मुक्त हो जाओगे। अगर कोई बहुत
बड़ा नशेबाज हैं या रेगुलर ड्रिंक करते हैं तो उनको ये 7 से 8 दिन लग सकते हैं।

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सर्दी के मौसम मे खजूर के फायदे //Benefits of Dates



मौसम के परिवर्तन पर हमको अपने शरीर को तंदुरुस्त रखने के लिए खान पान मे बदलाव लाना जरूरी हो जाता है| मतलब ये कि सर्दियों में कुछ खास खाद्य पदार्थो के सेवन से हमारे शरीर को विशेष लाभ होता है।




   खजूर को सर्दियों का मेवा कहा जाता है और इसे इस मौसम में खाने से खास फायदे होते हैं। खजूर या पिंड खजूर  भी कहते हैं|">कई प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें आयरन और फ्लोरिन भरपूर मात्रा में होते हैं इसके अलावा यह कई प्रकार के विटामिंस और मिनरल्स का बहुत ही खास स्त्रोत होता है। 
*इसका इस्तेमाल नियमित तौर पर करने से आप खुद को कई प्रकार के रोगों से दूर रख सकते हैं और यह कॉलेस्ट्राल कम रखने में भी मददगार है। खजूर को इस्तेमाल करने के अनगिनत फायदे हैं क्योंकि खजूर में कॉलेस्ट्रोल नही होता है और फेट का स्तर भी काफी कम होता है। खजूर में प्रोटीन के साथ साथ डाइटरी फाइबर और विटामिन B1,B2,B3,B5,A1 और c भरपूर मात्रा में होते हैं।
*खजूर में शरीर को एनर्जी प्रदान करने की अद्भुत क्षमता होती है क्योंकि इसमें प्राक्रतिक शुगर जैसे की ग्लूकोज़, सुक्रोज़ और फ्रुक्टोज़ पाए जाते हैं। खजूर का भरपूर फायदा इसे दूध में मिलाकर इस्तेमाल करने से मिलता है।
*खजूर खाने से पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है क्योंकि यह घुलनशील और अघुलनशील फायबर से भरपूर होता है साथ ही साथ इसमें अमीनो एसीड भी पाया जाता है। खजूर को रातभर पानी में गलाकर इस पानी के साथ पीने से पाचनतंत्र में निश्चित तौर पर सुधार आता है।
*खजूर में पाया जाने वाला आयरन शरीर में खून की कमी यानी की एनीमिया को ठीक करने में बहुत कारगर है। खजूर की मात्रा बढाकर खून की कमी को दूर किया जा सकता है। ख़जूर में फ्लूरिन भी पाया जाता है जिससे दांतों के क्षय होने की प्रकिया धीमी हो जाती है। 
*खजूर में पाए जाने वाली पोटेशियम की भरपूर और सोडियम की कम मात्रा के कारण से शरीर के नर्वस सिस्टम के लिए बेहद लाभकारी है। शोध से साबित हुआ है कि शरीर को पोटेशियम की काफी जरुरत होती है और इससे स्ट्रोक का खतरा कम होता है। खजूर शरीर में होने वाले LDL कॉलेस्ट्रोल के स्तर को भी कम रखकर आपके दिल के स्वास्थ्य की रक्षा करता है।
*खजूर उन लोगों के लिए अत्यधिक लाभकारी है जो वजन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इसका उपयोग शराब पीने से शरीर को होने वाले नुकसान से बचने में भी किया जाता है।
*सेक्सुअल स्टेमिना बढाने में खजूर की अहम भूमिका होती है। खजूर को रातभर बकरी के दूध में गलाकर सुबह पीस लेना चाहिए और फिर इसमें थोड़ा शहद और इलाइची मिलाकर सेवन करने से सेक्स संबंधी समस्याओं में बहुत लाभ होता है।
*खजूर से पेट का कैंसर भी ठीक होता है। इसके विषय में सबसे अच्छी बात यह है कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। इससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है और इसके नियमित उपयोग से रतोंधी से भी छुटकारा मिलता है।
*अगर आप अपने शरीर का शुगर स्तर को खजूर के उपयोग से निय़ंत्रित कर सकते हैं। खजूर को शहद के साथ इस्तेमाल करने से डायरिया में भरपूर लाभ होता है।
*रात में बिस्तर गीला करने वाले बच्चों के लिए खजूर अत्यधिक लाभकारी है। यह उन लोगों के लिए भी बहुत कारगर है जिन्हें बार-बार बाथरुम जाना पडता है।
*खजूर को विभिन्न तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन इसे इस्तेमाल करने के पहले इसे अच्छी तरह से धोना बेहद जरुरी है। इसके इस्तेमाल से खाने का स्वाद बढ़ता है और शरीर में तुरंत एनर्जी आती है। सर्दियों में इसका उपयोग अत्यधिक लाभकारी है।
*खजूर के उपयोग से निराशा को दूर किया जा सकता है और यह स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए अत्यधिक लाभकारी है। खजूर गर्भवती महिलाओं में होने वाली कई प्रकार की समस्याओं से छुटकारा दिलाता है क्योंकि यह बच्चेदानी की दीवार को मज़बूती प्रदान करता है। इससे बच्चों के पैदा होने की प्रक्रिया आसान हो जाती है और खून का स्त्राव भी कम होता है।
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पेट की चर्बी घटाने के उपाय //Reduce abdominal fat




सुबह उठते ही एक गिलास गरम पानी मे आधा नींबू निचोड़कर पीएं| इसमे एक चम्मच शहद मिलाकर पिएंगे तो ज्यादा फायदा होगा |इससे मेटाबोलिज़म तेज होता है और चर्बी जलती है|
अदरक को टुकड़ों मे काट लें फिर एक कप पानी मे उबालें | 10 मिनिट तक उबालने के बाद अदरक बाहर निकाल दें और इसे चाय की तरह पीएं|
लहसुन मे मोटापा कम करने के तत्व होते हैं| एक कप मामूली गरम पानी मे एक नींबू निचोड़ें | लहसुन की तीन जवे इस पानी के साथ लें | चर्बी कम करने का उम्दा उपाय है |रोज सुबह खाली पेट लें|
बादाम मे मौजूद ओमेगा 3 फेटी एसिड अनावश्यक पेट की चर्बी हटाने मे सहायक है| रोज रात को 9 बादाम पानी मे गलाए और सुबह इनको छीलकर खाएं |

भोजन से आधे घंटे पूर्व एक चम्मच एप्पल सायडर वेनेगर को एक गिलास पानी मे मिलाकर पीएं| इससे ज्यादा केलोरी जलती है और चर्बी कम होती है|
पुदेने के पत्ते और हरा धनिया के पत्ते पीस लें ,इसमे नमक और नींबू का रस मिलाकर चटनी तैयार करें| भोजन के साथ प्रयोग करें |इससे मेटाबोलिज़म तेज होता है और फालतू चर्बी खत्म होती है|

एलोवेरा का जूस पीने से चर्बी पेट मे जमा नही होती| आधा गिलास गरम पानी मे 2 चम्मच एलोवेरा जूस और एक चम्मच जीरा मिश्रण करें | रोज सुबह खाली पेट लें और लेने के बाद एक घंटे तक कुछ न खाएं| चर्बी कम करने का बेहतरीन उपचार है|
अपनी दिनचर्या मे कसरत और मॉर्निंग वाक को आवश्यक रूप से शामिल करें|

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गिलोय के रोग नाशक प्रयोग//Tinospora medicinal properties






गिलोय का वैज्ञानिक नाम है--टिनोस्पोरा कार्डीफोलिया । इसे अंग्रेजी में गुलंच कहते हैं। कन्नड़ में अमरदवल्ली, गुजराती में गालो, मराठी में गुलबेल, तेलगू में गोधुची ,तिप्प्तिगा , फारसी में गिलाई,तमिल में शिन्दिल्कोदी आदि नामों से जाना जाती है। गिलोय में ग्लुकोसाइन, गिलोइन, गिलोइनिन, गिलोस्तेराल तथा बर्बेरिन नामक एल्केलाइड पाये जाते हैं। अगर आपके घर के आस-पास नीम का पेड़ हो तो आप वहां गिलोय बो सकते हैं । नीम पर चढी हुई गिलोय उसी का गुण अवशोषित कर लेती है ,इस कारण आयुर्वेद में वही गिलोय श्रेष्ठ मानी गई है जिसकी बेल नीम पर चढी हुई हो ।
1) गिलोय का एक चम्मच चूर्ण या काली मिर्च अथवा त्रिफला का एक चम्मच चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
2) गिलोय की बेल गले में लपेटने से भी पीलिया में लाभ होता है। गिलोय के काढ़े में शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।

3) गैस, जोडों का दर्द ,शरीर का टूटना, असमय बुढापा वात असंतुलित होने का लक्षण हैं। गिलोय का एक चम्मच चूर्ण को घी के साथ लेने से वात संतुलित होता है ।
4) गिलोय का चूर्ण शहद के साथ खाने से कफ और सोंठ के साथ आमवात से सम्बंधित बीमारीयां (गठिया) रोग ठीक होता है।

5) गिलोय और अश्वगंधा को दूध में पकाकर नियमित खिलाने से बाँझपन से मुक्ति मिलती हैं।
6) गिलोय का रस और गेहूं के जवारे का रस लेकर थोड़ा सा पानी मिलाकर इस की एक कप की मात्रा खाली पेट सेवन करने से रक्त कैंसर में फायदा होगा।

7) गिलोय और गेहूं के ज्वारे का रस तुलसी और नीम के 5 – 7 पत्ते पीस कर सेवन करने से कैंसर में भी लाभ होता है|

8) गिलोय के 6″ तने को लेकर कुचल ले उसमे 4 -5 पत्तियां तुलसी की मिला ले इसको एक गिलास पानी में मिला कर उबालकर इसका काढा बनाकर पीजिये।
9) और उक्त काढ़े के साथ ही तीन चम्मच एलोवेरा का गुदा पानी में मिला कर नियमित रूप से सेवन करते रहने से जिन्दगी भर कोई भी बीमारी नहीं आती।
10) और उक्त मिश्रण मे पपीता के 2-3 पत्तो का रस मिला कर दिन में तीन चार लेने से रोगी को प्लेटलेट की मात्रा में तेजी से इजाफा होता है प्लेटलेट बढ़ाने का इस से बढ़िया कोई इलाज नहीं है यह चिकन गुनियां डेंगू स्वायन फ्लू और बर्ड फ्लू में रामबाण होता है।






11) गिलोय को पानी में घिसकर और गुनगुना करके दोनों कानो में दिन में 2 बार डालने से कान का मैल निकल जाता है। और गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके इस रस को कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है।
12) गिलोय का रस पीने से या गिलोय का रस शहद में मिलाकर सेवन करने से प्रदर रोग खत्म हो जाता है। या गिलोय और शतावरी को साथ साथ कूट लें फिर एक गिलास पानी में डालकर इसे पकाएं जब काढ़ा आधा रह जाये इसे सुबह-शाम पीयें प्रदर रोग ठीक हो जाता है।
13) गिलोय के रस में रोगी बच्चे का कमीज रंगकर सुखा लें और यह कुर्त्ता सूखा रोग से पीड़ित बच्चे को पहनाकर रखें। इससे बच्चे का सूखिया रोग जल्द ठीक होगा।
14) मट्ठे के साथ गिलोय का 1 चम्मच चूर्ण सुबह शाम लेने से बवासीर में लाभ होता है।गिलोय के रस को सफेद दाग पर दिन में 2-3 बार लगाइए एक-डेढ़ माह बाद असर दिखाई देने लगेगा ।





15) गिलोय के पत्तों को पीसकर एक गिलास मट्ठा में मिलाकर सुबह सुबह पीने से पीलिया ठीक हो जाता है|
1 लीटर उबलते हुये पानी मे एक कप गिलोय का रस और 2 चम्मच अनन्तमूल का चूर्ण मिलाकर ठंडा होने पर छान लें। इसका एक कप प्रतिदिन दिन में तीन बार सेवन करें इससे खून साफ होता हैं और कोढ़ ठीक होने लगता है।

16) गिलोय का काढ़ा बनाकर दिन में दो बार प्रसूता स्त्री को पिलाने से स्तनों में दूध की कमी होने की शिकायत दूर होती है और बच्चे को स्वस्थ दूध मिलता है।
17) एक टेबल स्पून गिलोय का काढ़ा प्रतिदिन पीने से घाव भी ठीक होते है।गिलोय के काढ़े में अरण्डी का तेल मिलाकर पीने से चरम रोगों में लाभ मिलता है खून साफ होता है और गठिया रोग भी ठीक हो जाता है।
18) गिलोय का चूर्ण, दूध के साथ दिन में 2-3 बार सेवन करने से गठिया ठीक हो जाता है।
19) गिलोय और सोंठ सामान मात्रा में लेकर इसका काढ़ा बनाकर पीने से पुराने गठिया रोगों में लाभ मिलता है।
20) गिलोय का रस तथा त्रिफला आधा कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम भोजन के बाद पीने से घुटने के दर्द में लाभ होता है।
21) गिलोय का रास शहद के साथ मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पेट का दर्द ठीक होता है।
यह एक झाडीदार लता है। इसकी बेल की मोटाई एक अंगुली के बराबर होती है इसी को सुखाकर चूर्ण के रूप में दवा के तौर पर प्रयोग करते हैं। बेल को हलके नाखूनों से छीलकर देखिये नीचे आपको हरा,मांसल भाग दिखाई देगा । इसका काढा बनाकर पीजिये । यह शरीर के त्रिदोषों को नष्ट कर देगा । आज के प्रदूषणयुक्त वातावरण में जीने वाले हम लोग हमेशा त्रिदोषों से ग्रसित रहते हैं। त्रिदोषों को अगर मैं सामान्य भाषा में बताने की कोशिश करूं तो यह कहना उचित होगा कि हमारा शरीर कफ ,वात और पित्त द्वारा संचालित होता है । 

पित्त का संतुलन गडबडाने पर पीलिया, पेट के रोग जैसी कई परेशानियां सामने आती हैं । कफ का संतुलन बिगडे तो सीने में जकड़न, बुखार आदि दिक्कते पेश आती हैं । वात [वायु] अगर असंतुलित हो गई तो गैस ,जोडों में दर्द ,शरीर का टूटना ,असमय बुढापा जैसी चीजें झेलनी पड़ती हैं । अगर आप वातज विकारों से ग्रसित हैं तो गिलोय का पाँच ग्राम चूर्ण घी के साथ लीजिये । पित्त की बिमारियों में गिलोय का चार ग्राग चूर्ण चीनी या गुड के साथ खालें तथा अगर आप कफ से संचालित किसी बीमारी से परेशान हो गए है तो इसे छः ग्राम की मात्रा में शहद के साथ खाएं । गिलोय एक रसायन एवं शोधक के र्रूप में जानी जाती है जो बुढापे को कभी आपके नजदीक नहीं आने देती है । यह शरीर का कायाकल्प कर देने की क्षमता रखती है। किसी ही प्रकार के रोगाणुओं ,जीवाणुओं आदि से पैदा होने वाली बिमारियों, खून के प्रदूषित होने बहुत पुराने बुखार एवं यकृत की कमजोरी जैसी बिमारियों के लिए यह रामबाण की तरह काम करती है । मलेरिया बुखार से तो इसे जातीय दुश्मनी है। पुराने टायफाइड ,क्षय रोग, कालाजार ,पुरानी खांसी , मधुमेह [शुगर ] ,कुष्ठ रोग तथा पीलिया में इसके प्रयोग से तुंरत लाभ पहुंचता है । बाँझ नर या नारी को गिलोय और अश्वगंधा को दूध में पकाकर खिलाने से वे बाँझपन से मुक्ति पा जाते हैं। इसे सोंठ के साथ खाने से आमवात-जनित बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं ।गिलोय तथा ब्राह्मी का मिश्रण सेवन करने से दिल की धड़कन को काबू में लाया जा सकता है। 

मात्रा :

 गिलोय को चूर्ण के रूप में 5-6 ग्राम, सत् के रूप में 2 ग्राम तक क्वाथ के रूप में 50 से 100 मि. ली.की मात्रा लाभकारी व संतुलित होती है।

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आवाज बैठ जाना याने गला बैठने के उपचार // How to Treat hoarse throat

                                         
१) अदरक का रस १० ग्राम ,निम्बू का रस १० मिली और एक ग्राम सेंधा नमक मिलाकर दिन में तीन बार आहिस्ता -आहिस्ता पीने से आवाज ठीक होती है|
) मुलेठी ,आंवला,मिश्री प्रत्येक २ ग्राम का काढा ५० मिली बनाकर पीने से गला बैठने में लाभ होता है|
३) आवाज सुरीली बनाने के लिए १० ग्राम बहेड़ा की छाल को गोमूत्र में भावित कर चूसने से आवाज कोयल जैसी सुरीली हो जाती है| किसी चूर्ण को किसी द्रव पदार्थ में मिलाकर सूख जाए तब तक घोटना-इसे भावित करना कहते हैं|
४) जामुन की गुठलियाँ को पीसकर शहद में मिलाकर गोलियां बनालें| एक गोली दिन में चार बार चूसें| गले की आवाज बैठने में हितकारी उपाय है| खांसी में भी लाभकारी है| भाषण देने व़ालों और गायकों के लिए यह नुस्खा अमृत तुल्य है| आवाज का भारीपन भी ठीक हो जाता है|
५)सोते समय एक ग्राम मुलहठी की छोटी सी गांठ मुख में रखकर कुछ देर चबाते रहे। फिर मुंह में रखकर सो जाए। सुबह तक गला साफ हो जायेगा। मुलहठी चूर्ण को पान के पत्ते में रखकर लिया जाय तो और भी अच्छा रहेगा। इससे सुबह गला खुलने के साथ-साथ गले का दर्द और सूजन भी दूर होती है।   



६) जिन व्यक्तियों के गले में निरंतर खराश रहती है या जुकाम में एलर्जी के कारण गले में तकलीफ बनी रहती है, वह सुबह-शाम दोनों वक्त चार-पांच मुनक्का के दानों को खूब चबाकर खा लें, लेकिन ऊपर से पानी ना पिएं। दस दिनों तक लगातार ऐसा करने से लाभ होगा।
७) कच्चा सुहागा आधा ग्राम मुंह में रखें और उसका रस चुसते रहें। दो तीन घण्टों मे ही गला बिलकुल साफ हो जाएगा।
८) रात को सोते समय सात काली मिर्च और उतने ही बताशे चबाकर सो जायें। बताशे न मिलें तो काली मिर्च व मिश्री मुंह में रखकर धीरे-धीरे चूसते रहने से बैठा गला खुल जाता है।

९) 1 कप पानी में 4-5 कालीमिर्च एवं तुलसी की थोंडी सी पत्तियों को उबालकर काढ़ा बना लें और इस काढ़े को पी जाए|

१०) गुनगुने पानी में नमक मिला कर दिन में दो-तीन बार गरारे करें। गरारे करने के तुरन्त बाद कुछ ठंडा न लें। गर्म चाय या गुनगुना पानी पिएं जिससे गले को आराम मिलेगा
११) गले में खराश होने पर सुबह-सुबह सौंफ चबाने से बंद गला खुल जाता है।

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पेट में गैस बनने के सरल उपचार //How to deal with gas trouble.


पेट में गैस या वायु की बीमारी पेट की मंदाग्नि (पाचनशक्ति की कमजोरी या अपच) के कारण होती है। शरीर में यह बीमारी तीन भागों से हो जाती है।
पहला- शाखा,
 दूसरा-मर्म, अस्थि और संधि 
 तीसरा- कोष्ठ (आमाशय)।
वायु या गैस की बीमारी कोष्ठ से पैदा होती है। जब वायु कोष्ठ में चलती है, तो मल-मूत्र का अवरोध, हृदय के रोग, वायु का गोला, और बवासीर आदि रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
कारण : मनुष्य सेवन किया गया भोजन हजम नहीं कर पाता है तो उसका कुछ भाग शरीर के भीतर सड़ने लगता है। इस सड़न से गैस पैदा होती है। गैस बनने के अन्य कारण भी होते हैं, जैसे- अधिक व्यायाम करना, अधिक मैथुन करना, अधिक देर तक पढ़ना-लिखना, कूदना, तैरना, रात में जागना, बहुत परिश्रम करना, कटु, कषैला तथा तीखा भोजन खाना, लालमिर्च, इमली, अमचूर, प्याज, शराब, चाय, कॉफी, उड़द, मटर, कचालू, सूखी मछली, मैदे तथा बेसन की तली हुई चीजें, मावा, सूखे शाक व फल, मसूर, अरहर, मटर, लोबिया आदि की दालें खाने से भी पेट में गैस बन जाती है।

इसके अतिरिक्त मूत्र , मल, वमन , छींक, डकार, आंसू, भूख, प्यास आदि को रोकने से भी गैस बनती है। आमाशय में वायु के बढ़ने से हृदय , नाभि, पेट के बाएं भाग तथा हाथ-पैरों में दर्द होने से गैस बन जाती है।

लक्षण :

रोगी की भूख कम हो जाती है। छाती और पेट में दर्द होने लगता है, बेचैनी बढ़ जाती है, मुंह और मल-द्वार से आवाज के साथ वायु निकलती रहती है। इससे पेट व् हृदय के आस-पास भी दर्द होने लगता है। सुस्ती, ऊंघना, बेहोशी, सिर में दर्द, आंतों में सूजन, नाभि में दर्द, कब्ज, सांस लेने में परेशानी, हृदय के रोग , जकड़न, पित्त का बढ़ जाना, पेट का फूलना, घबराहट, सुस्ती, थकावट, सिर में दर्द, कलेजे में दर्द और चक्कर आदि लक्षण होने लगते हैं।

भोजन- 

साग-सब्जी, फल और रेशेवाले खाद्य पदार्थो का सेवन करें। आटे की रोटी में चोकर मिलाकर खाएं। मूंग की दाल की खिचड़ी, मट्ठे के साथ और लौकी (घिया), तोरई, टिण्डे, पालक, मेथी आदि की सब्जी तथा, दही व मट्ठे का प्रयोग हितकर है।शारीरिक व्यायाम और पेट सम्बंधी योगासन करें।

परहेज-

चावल, अरबी, फूल गोभी और अन्य वायु पैदा करने वाले पदार्थो का सेवन नहीं करना चाहिए। मिर्च, मसाले, भारी भोजन, मांस, मछली, अण्डे आदि का सेवन न करें।
पेट में गैस के उपचार -

अदरक-
अदरक का रस एक चम्मच, नींबू का रस आधा चम्मच और शहद को डालकर खाने से पेट की गैस में धीरे-धीरे लाभ होता है।
सरसों का तेल-
यदि पेट की नाभि अपने स्थान से हट जाती है तो पेट में गैस, दर्द और भूख नहीं लगती है। ऐसे में नाभि को सही बैठाने से और नाभि पर सरसों का तेल लगाने से लाभ होता है। यदि पेट में दर्द यादा हो रहा हो तो रूई का फोया सरसों के तेल में भिगोकर नाभि पर रखकर पट्टी भी बांध सकते हैं।
लौंग-
दो लौंग पीसकर उबलते हुए आधा कप पानी में डालें। फिर कुछ ठण्डा होने हर रोज तीन बार सेवन करने से पेट की गैस में फायदा मिलेगा।

पोदीना-

** चार चम्मच पोदीने के रस में एक नींबू का रस और दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से गैस के रोग में आराम आता है।
**सुबह एक गिलास पानी में २५ ग्राम पोदीना का रस और २० ग्राम शहद मिलाकर पीने से गैस समाप्त हो जाती है।
**साठ ग्राम पोदीना, दस ग्राम अदरक और आठ ग्राम अजवायन को एक गिलास पानी में डालकर उबालें। उबाल आने पर इसमें आधा कप दूध और स्वाद के अनुसार गुड़ मिलाकर पीएं.



पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज 








** चौथाई कप पोदीने का रस आधा कप पानी में आधा नींबू निचोड़कर पीयें। इससे भी गैस से होने वाला पेट का दर्द तुरंत ठीक हो जाता है।
**बीस ग्राम पोदीने का रस, 10 ग्राम शहद और 5 ग्राम नींबू के रस को मिलाकर खाने से पेट के वायु विकार (गैस) समाप्त हो जाते हैं।

पानी-

एक गिलास पानी में ५० ग्राम पुदीना, १० ग्राम अदरक के टुकड़े, १० ग्राम अजवाइन को उबाल लें। बाद में थोड़ी-सी चीनी या गुड़ मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े में से 2 चम्मच काढ़ा रोजाना खाना खाने के बाद पीने से पेट की गैस दूर हो जाती है।
अगर बदहजमी की शिकायत हो, खाना न पचता हो तो एक दिन के लिए भोजन बंद करके सिर्फ पानी ही पीने से लाभ होता है।
एक गिलास गुनगुना पानी जितना पिया जा सके, लगातार कुछ सप्ताह तक खाना खाने के बाद पीते रहने से पेट की गैस में राहत मिलती है।

अन्य उपचार-

सुबह जल्दी उठकर गर्म पानी में आधा नींबू को निचोड़कर पीयें।
उपवास रखें।
एनिमा लें।
रोजाना कमर तक पानी में १० से १५ मिनट तक बैठे रहें।
गैस की बीमारी खत्म होने तक नियमित रूप से ठण्डे दूध के अलावा अन्य किसी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए।
रोगी को ठीक हो जाने पर भी दो घण्टे के अंतर में एक बार कटे हुए फल खाने में देने चाहिए।
तली हुई चीजें, चाय, कॉफी और शराब का बिल्कुल सेवन नहीं करना चाहिए।
दर्दनाशक और सूजन को दूर करने वाली सारी औषधियां पूरी तरह बंद कर देनी चाहिए।
चिकनाई रहित छाछ और दही का अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए।
पेट पर चिकनी मिट्टी का लेप करें, जब मिट्टी सूख जाए तो उसे हटा दें। एक सप्ताह तक रोजाना मिट्टी से इलाज करें। इससे पेट में गैस बनना बंद हो जाएगी। मिट्टी को कपड़े की पट्टी पर लगाकर भी पेट से बांधा जा सकता है। इसे लगभग आधे घंटे तक अवश्य बांधा जा सकता है। फिर इसी पट्टी को सुबह या शाम को भी प्रयोग में लिया जा सकता है। हाँ ध्यान रहे कि खाना खाने के बाद या नाश्ता करने के बाद मिट्टी का प्रयोग न करें।


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खीरा ककड़ी के लाभ //Benifits of cucumber


 


पेट की गैस, एसिडिटी, छाती की जलन में नियमित रूप से खीरा खाना लाभप्रद होता है। जो लोग मोटापे से परेशान रहते हैं उन्हें सवेरे इसका सेवन करना चाहिए। इससे वे पूरे दिन अपने आपको फ्रेश महसूस करेंगे। खीरा हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।
आयुर्वेद के अनुसार खीरा स्वादिष्ट, शीतल, प्यास, दाहपित्त तथा रक्तपित्त दूर करने वाला रक्त विकार नाशक है।खीरा व ककड़ी एक ही प्रजाति के फल हैं। खीरे में विटामिन बी व सी, पोटेशियम, फास्फोरस, आयरन आदि विद्यमान होते हैं।
खीरे को भोजन में सलाद के रूप में अवश्य लेना चाहिए। नमक, काली मिर्च व नींबू डालकर खाने से भोजन आसानी से पचता है व भूख भी बढ़ती है। घुटनों के दर्द को भी दूर भगाता है खीरे का सेवन। घुटनों के दर्द वाले व्यक्ति को खीरे अधिक खाने चाहिएं तथा साथ में एक लहसुन की कली भी खा लेनी चाहिए।
पथरी के रोगी को खीरे का रस दिन में दो-तीन बार जरूर पीना चाहिए। इससे पेशाब में होने वाली जलन व रुकावट दूर होती है। खीरा रक्तचाप को भी काबू में रखने में कारगार है। इसमें मौजूद पोटेशियम ज्यादा और कम दोनों तरह के रक्तचाप को नियंत्रित रखता है।

 अगर आपके नाखून बार- बार टूट जाते हैं तो आज ही खीरे का सेवन शुरू करें, यह आपके नाखूनों को मजबूती देता है। गैस की समस्या में भी खीरा बेहद लाभदायक होता है। अगर आप किडनी या लीवर की समस्या से परेशान हैं तो खीरे का नियमित रूप से सेवन करें|
अपने बालों को सेहतमंद रखने के लिए खीरे के जूस का सेवन करें। इसके नियमित इस्तेमाल से बाल लंबे और घने होते हैं। दांतों और मसूढ़े से जुड़ी समस्या और पायरिया जैसे रोग में भी खीरा फायदेमंद है। खीरा कभी भी बासी न खाएं। जब भी खीरा खरीदें यह जरूर देख लें कि वह कहीं से गला हुआ न हो। खीरे का सेवन रात में न करें। जहां तक हो सके, दिन में ही इसे खाएं। खीरे के सेवन के तुरंत बाद पानी न पीयें।
खीरा कई रोगों को भी दूर भगाता है। खीरा कब्ज से मुक्ति दिलता है। पेट की गैस, एसिडिटी, छाती की जलन में नियमित रूप से खीरा खाना लाभप्रद होता है।जो लोग मोटापे से परेशान रहते हैं उन्हें सवेरे इसका सेवन करना चाहिये। कटे खीरे में नमक, काली मिर्च और नींबू डालकर खाने से ये स्वादिष्ट तो लगता ही है साथ ही खाना पचाने में मदद करता है। खीरे के रस में दूध, शहद व नींबू मिलाकर चेहरे और हाथ पैर पर लगाने से त्वचा मुलायम और कांतिवान हो जाती है।
जिन लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान काफी परेशानी होती है वो दही में खीरे को कसकर उसमें पुदानी, काला नमक, काली मिर्च, जीरा और हींग डालकर रायता बनाकर खाएं। आराम मिलेगा। खीरा खाने से कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होते हैं|
इसमें विटामिन ए, बी और सी तथा अनेको प्रकार के मिनरल जैसे, मैगनीशियम, सिलिका और कैल्‍शियम आदि होता है जो कि त्‍वचा के लिये अच्‍छे माने जाते हैं और खीरे की स्‍लाइस को त्‍वचा पर लगाने से बहुत लाभ भी मिलता है। इसको चेहरे पर लगान से त्‍वचा टाइट बनती है।

कोलेस्‍ट्रॉल कंट्रोल -

खीरे में स्‍टीरॉल होता है जो कि कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम करने मे सहायक है।
क्‍लीजर का काम करे

खीरे के रस में नींबू मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे के रंग में निखार आता है। खीरा चेहरे के लिए बहुत अच्छा क्लीजर हैं।

मोटापा कम करे

जब भी भूख लगे तब खीरा खाइये क्‍योंकि इसमें 96 प्रतिशत पानी और फाइबर पाया जाता है जो कि बिना कैलोरी के होता है, इसे खाने से आपका वजन नहीं बढेगा। अगर आप खीरे से तैयार सलाद बना कर खाएगें तो 3 दिन में लगभग 2 किलो वजन तो कम ही हो जाएगा।

मधुमेह में लाभकारी

खीरे का नियमित सेवन करने से यह इंसुलिन लेवल को कंट्रोल करता है।

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दांतों का पीलापन के उपचार //Yellowing of teeth : Simple Remedies



खाने की कुछ चीजों के लगातार उपयोग, बढ़ती उम्र या अधिक दवाइयों का सेवन दांतों के पीलेपन के कारण हो सकते हैं। यदि आपके साथ भी यह समस्या है तो दांतो को सफेद बनाने के लिए निम्न उपाय लाभदायक साबित होंगे -

तुलसी:-

तुलसी में दांतों का पीलापन दूर करने की अद्भुत क्षमता पाई जाती है। साथ ही, तुलसी मुंह और दांत के रोगों से भी बचाती है। तुलसी के पत्तों को धूप में सुखा लें। इसके पाउडर को टूथपेस्ट में मिलाकर ब्रश करने से दांत चमकने लगते हैं।

नमक:-

 नमक दांतों को साफ करने का सदियों पुराना नुस्खा है। नमक में थोड़ा सा चारकोल मिलाकर दांत साफ करने से पीलापन दूर हो जाता है और दांत चमकने लगते हैं।

संतरे के छिलके:- 

संतरे के छिलके और तुलसी के पत्तों को सुखाकर पाउडर बना लें। ब्रश करने के बाद इस पाउडर से दांतों पर हल्के से रोजाना मसाज करें। संतरे में मौजूद विटामिन सी और कैल्शियम के कारण दांत मोती जैसे चमकने लगते हैं।

गाजर:-

 रोजाना गाजर खाने से भी दांतो का पीलापन कम हो जाता है। दरअसल, भोजन करने के बाद गाजर खाने से इसमें मौजूद रेशे दांतों की अच्छे से सफाई कर देते हैं।

नीम:- 

नीम का उपयोग प्राचीनकाल से ही दांत साफ करने के लिए किया जाता रहा है। नीम में दांतों को सफेद बनाने व वैक्टीरिया को खत्म करने के गुण पाए जाते हैं। यह नेचुरल एंटीबैक्टिीरियल और एंटीसेप्टिक है। रोजाना नीम की दातून से मुंह धोने पर दांतों के रोग नहीं होते हैं।



बेकिंग सोडा:-

बेकिंग सोडा पीले दांतों को सफेद बनाने का सबसे अच्छा घरेलू तरीका है। ब्रश करने के बाद थोड़ा सा बेकिंग सोडा लेकर दांतों को साफ करें। इससे दांतों पर जमी पीली पर्त धीरे-धीरे साफ हो जाती है। बेकिंग सोडा और थोड़ा नमक टूथपेस्ट में मिलाकर ब्रश करने से भी दांत साफ हो जाते हैं।


नींबू:-

 नींबू एक ऐसा फल है जो मुंह की लार में वृद्धि करता है। इसलिए यह दांतों और मसूड़ों की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। एक नींबू का रस निकालकर उसमें उतनी ही मात्रा में पानी मिला लें। खाने के बाद इस पानी से कुल्ला करें। इस नुस्खे को अपनाने से दांत सफेद हो जाते हैं और सांसों की दुर्गंध भी दूर हो जाती है।

केला:-

 केला पीस लें, इसके पेस्ट से दांतों को रोज 1 मिनट तक मसाज करें। उसके बाद दांतों को ब्रश करें। रोजाना ये उपाय करने से धीरे-धीरे दांतों का पीलापन खत्म हो जाएगा।

विनेगर:-

एक चम्मच जैतून के तेल में एप्पल विनेगर मिला लें। इस मिश्रण में अपना टूथब्रश डुबाएं और दांतों पर हल्के-हल्के घुमाएं। ये प्रक्रिया तब तक दोहराएं, जब तक मिश्रण खत्म न हो जाएं। इस नुस्खे को अपनाने से दांतों का पीलापन मिट जाता है। साथ ही, सांसों की दुर्गंध की समस्या भी नहीं रहती है।

नीम्बू के छिलके -

सूखे नींबू के छिलकों को पीसकर पाउडर बना लें। इसे दिन में एक बार दांतों पर मलें। दांत चमकने लगेंगे।
नींबू का रस और बेकिंग सोडा एक साथ मिक्स करके पेस्ट बनाएं और उससे दांतों को ब्रश करें। दांतों का पीलापन दूर हो जाएगा।
एक चम्मच नींबू का रस ले कर उसमें आधा चम्मच नमक मिलाएं और उससे दांतों की मालिश करें। दांत बिल्कुल साफ हो जाएंगे।


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बरसात मे नेत्र रोगों से रहें सतर्क // Be wary of eye diseases in rainy season



मानसून के सीजन में आखों की विशेष देखभाल जरूरी होती है। तरह-तरह के आंखों के संक्रमण इसी मौसम में पनपते है। बच्चें एवं स्कूल कॉलेज जाने वाले छात्रों को विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि उनमें ही संक्रमण अधिक फैलता है। मध्य अगस्त से सितम्बर तक की गर्मी में काफी उमस एवं धूप तीखी होती है। वर्षा एवं गर्मी का मिला-जुला मौसम रहता है। जिसके कारण मानव शरीर का सबसे संवेदनशील अंग आंख बाहरी वातावरण के उतार चढ़ाव झेलती है। इस प्रदूषण भरे वातावरण एवं भागदौड़ की जिंदगी में लोगों द्वारा आंखों की देखभाल के प्रति लापरवाही बरती जाती है। जिस समस्या से व्यक्ति सबसे अधिक प्रभावित होता है वह कन्जकटीवाईटिस का इंफेक्शन है। जिसे नेत्र फ्लू भी कहा जाता है। इससे प्रभावित व्यक्तियों को हर समय यही लगता रहता है कि उसकी आंख में रेत जैसा कुछ गड़ रहा है। इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही आंखों को काफी नुकसान पहुंचा सकती है। कन्जकटीवाईटिस के अलावा भी बरसात में और कई तरह के इंफेक्शन होते है। बरसात में होने वाले सामान्य इंफेक्शन इस प्रकार से है:- 

आंखों का सफेद भाग एवं पलक का अन्दरूनी भाग कन्जकटीवा कहलाता है। आंख के इस भाग में जलन, लाली और सूजन होने को कन्जकटीवाईटिस या नेत्रशोथ कहते है। इसके मुख्य कारण हैं इन्फेक्शन और एलर्जी, इस मौसम में आने वाले वायरल बुखार जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देते है उसकी वजह से भी नेत्रशोथ हो जाता है। इस मौसम में सबसे ज्यादा फैलने वाली आम बीमारी यही है। कन्जकटीवाईटिस का संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है। आंखों को सबसे अधिक कन्जकटीवाईटिस से ही बचाने की जरूरत होती है। स्टाई पलकों के आसपास लाली लिए हुए आई सूजन को कहते है। इसमें पस बन जाता है और पस के पूरी तरह साफ होने पर ही ठीक होती है। इसके होने का मुख्य कारण बिना धूले हाथों से आंखों को रगडऩा एवं बैक्ट्रीरिया है। ये बीमारी भी इस मौसम में होना एक आम बात है।
आंखों में किर-किराहट व जलन होने लगती है। ऐसा लगता है कि उनमें कुछ गिर गया हो। रोगी को काफी तकलीफ होती है। आंखों को धूप तथा तेज रोशनी चुभती है। जिससे आंखों को पूरी तरह खोलने से रोगी हिचकता है। आंखों में थकान तथा दर्द भी महसूस होता है। कभी-कभी आंखों की पुतलियों पर दाने पड़ जाते हैं। उपयुक्त उपचार न होने की स्थिति में दूसरे बैक्ट्रीरिया भी आंखों को प्रभावित कर देते हैं। जिससे सफेद गाढ़ा पदार्थ आंखों के कोने तथा पलकों के किनारों पर एकत्र हो जाता है। यह कीचड़ इतना हो सकता है कि जब सुबह व्यक्ति उठता है उसकी दोनों पलकें चिपकी होती है।
इन सभी समस्याओं के बावजूद बरसात में अगर कुछ बातों का ख्याल रखा जाए तो आप और हम इस इंफेक्शन से बचाव कर सकते है। आपको उपर्युक्त में से यदि कोई लक्षण खुद में या आस-पास किसी में नजर आते है तो इन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:-
कंजक्टिवाइटिस होने पर चिकित्सक की सलाह जरूर लें। आखों को दिन में तीन से चार बार धोएं। घरेलू उपचार भी आँखों के रोगों मे काफी कारगर साबित होते हैं| समय पर रोग का इलाज नहीं किया गया तो कार्निया में जख्म हो सकता है जो बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है। कंजक्टिवाइटिस संक्रामक बीमारी है। यानी सम्पर्क में आने पर यह एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है। घर के बाहर निकलने से पहले धूप का चश्मा लगाएं। यह न सिर्फ धूप से बचाता है बल्कि धुंए और गंदगी से होने वाली एलर्जी से भी रक्षा करता है। आंखों को तेज रोशनी से होने वाली परेशानी से बचाने के लिए कोशिश करे कि आंखों पर गहरे रंग का शीशें वाला धूप का चश्मा पहनें। आई फ्लू होने पर चश्में का प्रयोग करें। तीन-चार दिन रोगी को आराम करना चाहिए धूप में बाहर न निकलें।

मानसून के दौरान, कन्जकटीवाईटिस और स्टाई आखों की इंप्रेक्शन से लोग अधिक पीडि़त हो रहे हैं। इसका इंफेक्शन रोजाना के सामानों के इस्तेमाल से आसानी से फैलता है जैसे तौलिया, रूमाल, लैंसिस, चश्मा और अन्य सामान जो एक हाथ से दूसरे हाथ जाते है।
इन इंफेक्शन वाली चींजों से दूर ही रहें। साथ ही साफ -सफाई का ध्यान रखें। इसके लिए आपको निश्चित रूप के तय करना होगा कि परिवार में जो व्यक्ति संक्रमित है, उसका सामान अलग रखें। आंखों को साफ करने के लिए साफ तौलिया या रुमाल का इस्तेमाल करें व अपना तौलिया रूमाल एवं साबुन आदि किसी के साथ शेयर न करें। किसी भी संक्रमक चीज को छूने के बाद जैसे(फोन, टीवी रिमोट, दरवाजे इत्यादि)छूने पर हाथ धोकर ही खाना खाएं।
आंखों में दवा डालने के पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह धो लें। बार-बार अपनी आखों को हाथ से न छुएं। आंखों को हमेशा साफ और ठंडे पानी से धोएं। आंखों को हाथ से नहीं रगडऩा चाहिए। बिना धुले हाथों से आंखों को ना छूएं।
कम रोशनी में पढ़ाई न करें। आंख में कुछ गिर जाने पर उसे मले नहीं। उसे साफ पानी से धुलें। आराम न मिले तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।


उपचार-

रोग की प्रारंभिक व्यवस्था आरंभ होते ही तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ की राय लें। बिना डॉक्टरी सलाह लिए कोई दवा न लें। साथ ही मेडिकल स्टोर से स्टेरायड वाली दवा न लें। आंखों का तेज रोशनी से बचाव करें। आंखों को तेज रोशनी से होने वाली परेशानी से बचने के लिए आंखों पर गहरे रंग का शीशे वाला धूप का चश्मा पहनना चाहिए। आंखों को पट्टी बांधकर बंद नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे आखों से निकलने वाले पानी की स्वतंत्र निकासी रूक जाती है तथा पट्टी बांधने से हुई गर्मी आंख में इन्फेक्शन को और बढ़ावा देती है।
इस रोग की चिकित्सा केवल दो बातों पर निर्भर करती है, पहली किसी उचित विसंक्रामक द्रव से आंखों की बार-बार सफाई एवं दूसरी आंखों में सेकेन्डरी इंफेक्शन को रोकने के लिए एंटीबायोटिक का प्रयोग करें। इसका प्रमुख कारण आंखों से निकलने वाले हानि कारक पदार्थों को ठीक करना होता है। इस तरह आंखों को तब तक धुलना चाहिए जब तक कि आंखों से निकलने वाला पदार्थ कीचड़ पूरी तरह से साफ न हो जाए। यदि फिर भी परेशानी संभल ना रही हो तो तुंरत किसी नेत्र विशेषज्ञ के पास जाएं और इलाज करवाएं चूंकि थोड़ी सी भी देरी हमेशा के लिए आपको नेत्रहीन कर सकती है।


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त्वचा के रोग के घरेलू उपचार // Skin Disease: Simple Remedies


*खाने का सोडा (सोडा बाई कार्ब ) लें और पानी की थोंड़ी सी मात्रा मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाएँ| दवा तैयार है | मुहासे पर लगाएँ| समय 20 मिनिट | गुनगुने पानी से धोलें|
*ककड़ी का रस और टमाटर का गुदा अच्छी तरह मिक्स करें | इसे मुहासे पर लगाएँ| समय 15 मिनिट | बाद मे पानी से साफ कर लें| इससे न केवल मुहासे ठीक होंगे ,चेहरे की चमक भी बढ़ेगी|
*नीम के पत्ते डाल कर उबाले गए पानी से स्नान करने से चर्म रोग मिटते है.
*नीम की पत्तियों को पीसकर हाथ पेरों पर लेप करने से जलन शांत होती है|
*गर्मी की घमौरियों पर बर्फ का टुकड़ा मलने से घमौरियां मुरझा जाती है और राहत मिलती है|.
चर्म रोगों में फिटकरी बड़ी गुणकारी होती है. जिस स्थान पर चर्म रोग हुआ हो उस स्थान को बार -बार फिटकरी के पानी से धोने से लाभ होता है

*दाद, खाज, फुंसी, फोड़े इत्यादि चर्म रोगों में ताजे संतरे के छिलके पीस कर लगाने से लाभ होता है.
*रोज सुबह 20 ग्राम शहद ठंडे पानी में मिलाकर चार पांच महीने तक पीने से त्वचा सम्बन्धी रोग दूर होते है.
*हाथ पाँव में जलन की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया व मिश्री मिलाकर पीस कर छान ले. खाना खाने के बाद 5-6 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण लेने से राहत मिलती है.|
*बादाम का तेल चहरे पर विशेषकर आँखों के आस पास मलने से झुर्रियां नहीं पड़ती.|
*गर्मी के दिनों में नींबू का शरबत पीये. इससे खून साफ़ होता है और ठंडक भी मिलती है.
|*सौंफ रक्त को शुद्ध करने वाला एवं चर्म रोग नाशक है. प्रतिदिन 10 ग्राम सौंफ बिना मीठा मिलाये वैसे ही चबा -चबा कर नियमित कुछ दिनों तक खाने से रक्त शुद्ध होता है और त्वचा का रंग साफ़ होता है.|
*त्वचा रोगों मे बादाम बहुत काम की चीज है| 5 बादाम रात को पानी मे भिगोकर रखें सुबह छिलका उतारें थौड़े से गुलाब जल मे पीसकर पेस्ट बनाएं| रुग्ण त्वचा पर लगाएँ | फायदा होगा|
*शकर ,बादाम का तेल और नींबू का रस मिलाएँ | इसे चेहरे पर मालिश करें | समय 10 मिनिट | गुन गुने जल से धोलें| मुहासे दूर होंगे |
*लहसुन मुहासे दूर करने मे उपयोगी है| चेहरा धोकर भली प्रकार साफ कर पोंछ कर सूखा लें | अब लहसुन या इसके रस को मुहासे पर लगाकर उंगली से रगड़ें| चेहरे पर 15 मिनिट लगा रहने दें फिर गुन गुने पानी से साफ कर लें| दिन मे तीन मर्तबा प्रयोग करना है| एक माह मे परिणाम आएंगे |
*नींबू का रस रुई के फाये से मुहासे पर लगाएँ कुछ देर लगा रहने के बाद ठंडे जल से साफ कर लें,| दिन मे तीन बार प्रयोग करें| अच्छे परिणाम की आशा की जा सकती है|
चमेली के फूलों को पीसकर चहेरे पर लेप करने से 2 - 3 माह में झांइयां व मुंहासे दूर हो जाते हैं !
* हल्दी व एक चुटकी नमक दूध में मिला सोते समय चेहरे पर लगाएं और सुबह गुनगुने पानी से मुंह धो लें !
कुछ दिनों तक लगातार ऐसा करने से चेहरे पर निखार आता है !
* दाग मिटाने के लिए नीम की ताजी पत्तियों को पीसकर रात के समय चेहरे पर लगाएं व सुबह सामान्य पानी से धो लें !
* गाजर - टमाटर - संतरे और चुकंदर का 25 - 25 ग्राम रस दो - तीन माह तक रोजाना पीने से चेहरे के दाग - धब्बे ~ मुंहासे व कालापन दूर होता है !
* शतावरी की जड़ को पीस पानी में मिलाएं व इस पानी से सिर धोने से बाल लंबे होते हैं !
* 50 ग्राम मुल्तानी मिट्टी व 50 ग्राम आंवला चूर्ण को 10 ग्राम दही में मिला बालों पर लगाएं और एक घंटे बाद धो लें - इससे बाल काले व चमकदार होते हैं !
* आंखों के नीचे का कालापन दूर करने के लिए आलू के रस से सुबह - शाम मसाज करें !
* आलू - टमाटर और नींबू का रस मिला आंखों के नीचे हल्की मालिश करें - इससे भी कालापन दूर होगा !





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मेथी के स्वास्थ्यकारी लाभ //Health benefits of Fenugreek seeds





     मेथी  सेहत के लिहाज से बहुत गुणकारी है। मेथी में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, नैसिन, पौटेशियम, आयरन और अल्कालाड्यस होता है। इसमें डाइसोजेनिन भी होता है जो ऑस्ट्रियोजेन जैसे गुणों से भरपूर होता है। मेथी में कई स्वास्थ्यवर्धक गुण होते है जो कई शारीरिक समस्याओं को दूर भगा देते है। मेथी के दाने बालों की जड़ों को मजबूत करते हैं और उसे पुनर्जीवित भी करते हैं। इसमें प्रोटीन होता है, इसलिए मेथी दानों को अपनी डाइट में शामिल करने से आपके बाल खूबसूरत बनेंगे।
मेथी के दानों में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। खाली पेट मेथी दानों को चबाने से एक्सट्रा कैलरी बर्न होती है। सुबह दो गिलास मेथी का पानी पीने से मोटापा दूर होता है। मेथी का पानी बनाने क लिए एक बड़ा चम्मच मेथी के दानों को दो गिलास पानी में रात भर भिगो दें और सुबह इसे छानकर पी लें। मेथी के सेवन से किडनी भी स्वस्थ होती है। पथरी के इलाज में भी मेथी फायदा करती है। इस जादुई औषधि से पथरी पेशाब के साथ शरीर से बाहर निकल जाती है।


मेथी के दानों के सेवन से पेट दर्द और जलन दूर होती है। साथ ही पाचन क्रिया भी दुरुस्त होती है। मेथी दाने में फॉस्फेट, लेसिथिन और न्यूक्लिओ अलब्यूमिन होने से यह पोषक होती है। इसमें फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर आदि भी मिलते हैं जो शरीर के लिए बेहद जरूरी हैं। पेट ठीक रहे तो स्वास्थ्य भी ठीक रहता है और खूबसूरती भी बनी रहती है। मेथी पेट के लिए काफी अच्छी होती है।

दूध बढ़ाता है -

मेथी के दाने  का सेवन करने से माँ  के शरीर  मे दूध ज्यादा बनाता है |  यह मेथी मे पर्याप्त मात्रा मे डायसोजेनिन  तत्व  होने के कारण  होता है| यह दूध निर्माण को प्रोत्साहित करता है| 

प्रसव आसानी से होता है-

मेथी के प्रयोग से गर्भाशय  ऐसा हो जाता है कि प्रसव के समय महिला को कम पीड़ा होती है|  लेकिन गर्भावस्था   के दौरान इसका उपयोग  वर्जित माना गया है| गर्भ पात हो सकता है| 
मेथी के सेवन से महिलाओं के शरीर को सभी आवश्‍यक तत्‍व मिल जाते है जो मासिक धर्म की समस्‍या को दूर कर देते है। मासिक धर्म के दौरान होने वाला दर्द आदि भी इसके सेवन से दूर हो जाता है।

स्तनो को सूडोल  बनाए -

अगर किसी स्त्री के स्टैन सूडोल नहीं हैं तो उसे मेथी को अपने दैनिक खुराक मे जगह देनी चाहिए| मेथी के प्रयोग से स्त्रियॉं के स्तन संबंधी हारमोन बेलेन्स मे रहते हैं|

  कोलेस्‍ट्रॉल घटाएं -

 अध्‍ययन के अनुसार, कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ने पर मेथी का सेवन करना चाहिये, इससे बढ़ता कोलेस्‍ट्रॉल घटता है या स्थिर हो जाता है। 

  डायबटीज को नियंत्रण में लाएं -

 मेथी का सेवन करने से डायबटीज यानि मधुमेह की समस्‍या नहीं होती है। इसमें गेलाक्‍टोमेनोन नामक फाइबर होता है जो मेथी में भरपूर मात्रा में पाया जाता है, यह शरीर में सुगर की कम मात्रा को अवशोषित करता है, जिससे शरीर में एसिड कम बनता है और इंसुलिन की मात्रा बढ़ती है।

पेट के कैंसर - 

 मेथी के दानों में फाइबर सामग्री जैसे- सापोनिन्‍स, म्‍यूसिलेज आदि होता है जो शरीर में स्थित विषाक्‍त पदार्थो को बाहर निकाल देता है और पेट में कैंसर जैसी गंभीर समस्‍या होने पर आराम दिलाता है।

पाचन दुरूस्‍त करे -

 मेथी के बीज का सेवन करने से शरीर के हार्मफुल टॉक्सिन बाहर निकल जाते है। इसके सेवन से पाचन क्रिया भी दुरूस्‍त रहती है।

त्‍वचा सम्‍बंधी रोगों को दूर करें-

 त्‍वचा सम्‍बंधी किसी भी प्रकार का रोग होने पर जैसे - जल जाना, खुजली होना आदि को मेथी के बीज क पेस्‍ट लगाकर ठीक किया जा सकता है। इससे त्‍वचा सम्‍बंधी कई अंदरूनी विकार भी दूर हो जाते है।

बुखार और गले के छाले-

बुखार आने और गला पकने  मे भी मेथी का प्रयोग हितकारी होता है|  मेथी बीज के साथ शहद और नींबू  का भी उपयोग करें|  गले की खराश  और खिच खिच  मे भी उपयोगी है|

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