Tuesday, June 8, 2010

पैरों का शौथ (oedema of feet) के घरेलू उपचार


                      
पैरों का शौथ रोग में ऊतकों में असामान्य मात्रा में जल एकत्रित होने लगता है जिससे पैर शौथ युक्त हो जाते हैं। शौथ अक्सर टखनों,पैर और टांगों की जगह पर आता है। शौथ के प्रमुख  कारण निम्न हो सकते हैं-






१. अधिक समय तक खडे रहना।
२. आर्तव काल (मासिक धर्म।
३.हार्मोन स्तर में तब्दीली होना।
४. गर्भ काल( प्रेग्नेन्सी)
५. मोटापा
६. वृद्धावस्था
७. चौंट लगना




१.  सबसे पहली और महत्व पूर्ण बात यह है कि नमक का उपयोग बंद कर दें। नमक सेवन करते रहने से हालत ज्यादा बिगड जाएगी।
२. सरसों के तेल की मालिश से लाभ होता है।
३. नित्य पकाये हुए चावल खाना चाहिये।
४. सूजन की जगह ककडी की चीरें रखें और उसके ऊपर आलू की  चीरें रखकर पट्टी बांधें। बढिया उपाय है।
५. भोजन में प्रोटीन की प्रधानता रखनी चाहिये।दालों का भरपूर उपयोग करें।वसा युक्त भोजन पदार्थ भी उपयोग करना हितकारी है।
६.  कर्बोहाईड्रेट प्रधानता वाले पदार्थों में पानी एकत्र करने के गुण होते हैं इसलिये ऐसे पदार्थों का उपयोग न्युनतम करें।
७. गर्भवती स्त्री के पैरों में सूजन होने पर पत्ता गोभी के पत्ते लगाकर पट्टी बंधना हितकर है।सोने से   पहिले पैरों पर ठंडे पानी की धार लगाना लाभप्रद रहता हैं।
८.  रेशे वाले पदार्थ भी सूजन बढाने में सहायक होते हैं  हरी सब्जीयां और फ़लों का उपयोग कम कर देना चाहिये।
९. धूम्रपान और शराब सेवन से शौथ रोग उग्र हो जाता है। अत: ये पदार्थ त्याज्य हैं।



१०. सोते वक्त अपने पैरों को शरीर से ऊंचा रखें। पांव के नीचे तकिया रखना  उपकारी है।
धनिये के बीज ३-४ चम्मच दो कप पानी में तब तक ऊबालें कि आधा रह जाए। रोजाना पीयें। बहुत लाभदायक उपचार है। आजमाएं।
१२. अधिक मात्रा में पानी पीने से भी परहेज करना चाहिये। ज्यादा पानी पीने से सूजन ज्यादा बढेगी।
१३. शौथ  अपने आप में कोई रोग नहीं है बल्कि यह संकेत देता है कि हमारे शरीर के  सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। इसे गंभीरता से लेना चाहिये। कुछ ही दिनों में नियंत्रण नहीं होने पर कुशल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिये। गुर्दे और हृदय की गंभीर बीमारियों से भी शरीर में सूजन आने लगता है।
१४.. आयुर्वेदिक चिकित्सा   में पुनर्नवासव का उपयोग लाभप्रद माना गया है।
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