18.7.18

घुटने के दर्द के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार //Ayurvedic treatment of knee pain

                                               


घुटने का दर्द कैसे करें ठीक : –
 घुटनों के दर्द की समस्या आजकल आम होती जा रही है कई बार ऐसा भी होता है कि किसी कारणवश चोट लग जाने से या बढ़ती हुई उम्र के कारण या फिर व्रद्धावस्था में हड्डियों के कमजोर हो जाने से अक्सर घुटनों में दर्द होने लगता है. इस पोस्ट में हम आपको घुटनों कादर्द से राहत दिलाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे बता रहे हैं जिनका उपयोग करने पर लगभग 7 दिन में ही आपको घुटनों के दर्द से राहत मिल जाएगी.
अक्सर घुटनों में दर्द होना आम बात नही है. और यदि आप भी अपने घुटनों में होने वाले दर्द से परेशान है. आपको बैठने उठने में समस्या आती है. सीडियां चढ़ते-उतरते घुटनों में दर्द होता है तो परेशान न हो आपके लिए घुटनों का दर्द ख़त्म करने वाला इलाज है. घुटनों का दर्द का इलाज बेहद सरल और असरदार है. यदि आप इन उपायों को आजमतें है तो आपको घुटने के दर्द से राहत मिलेगी


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घुटनों के दर्द का इलाज – 

यदि आपके घुटनों में लगातार या थोड़ा-थोड़ा दर्द या तेज दर्द बना रहता है तो यहां दिए गए घरेलू नुस्खे आजमाएं और आपको 7 से लेकर 15 दिन के अंदर-अंदर इन घरेलू नुस्खों से पूरा पूरा आराम मिल जाएगा और फिर कभी आपके घुटने दर्द नहीं करेंगे. घुटनों के लिए दर्द निवारक दवा बनाने के लिए आप नीचे दिए गए कुछ नुस्खे आजमाएं.
माना जाता है कि बूढ़े होने पर हड्डियों में दर्द होना शुरू हो जाता है. लेकिन ऐसा नही है. घुटनों में दर्द होने के कई कारण है. जैसे
गलत तरीके ज्यादा वजन उठाना
अपने घुटनों को घंटों तक मोड़ कर बैठना
घुटने में पुरानी चोट को नज़रंदाज़
व्यायाम करने से पहले बॉडी को स्ट्रेच और बॉडी वार्मअप न करना
गलत खान-पान और रहन-सहन
ये सभी घुटनों में होने वाले दर्द का कारण बन सकता है. इसे कुछ बातों का ध्यान रखें. ज्यादातर शरीर में होने वालें दर्द का कारण उपरोक्त ही है. इसलिए इन्हें दोहराहे नही. ये आपके के लिए काफी खतरनाक हो सकता है.
सौठ से बनी दर्द निवारक दवा 

सौंठ भी एक बहुत अच्छा दर्द निवारक दवा के रूप में फायदेमंद साबित हो सकता है, सौंठ से दर्दनिवारक दवा बनाने के लिए एक आप एक छोटा चम्मच सौंठ का पाउडर व थोड़ा आवश्यकतानुसार तिल का तेल इन दोनों को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट जैसा बना ले.
दर्द या मोच के स्थान पर या चोट के दर्द में आप इस दर्द निवारक सौंठ के पेस्ट को हल्के हल्के प्रभावित स्थान पर लगाएं और इसको 3 घंटे तक लगा रहने दें इसके बाद इसे पानी से धो लें. ऐसा करने से सप्ताह में आपको घुटने के दर्द में पूरा आराम मिल जाता है और अगर मांसपेशियों में भी खिंचाव महसूस होता है तो वह भी जाता रहता है.

दर्द निवारक हल्दी का पेस्ट

किसी चोट का दर्द हो या घुटने का दर्द आप इस दर्द निवारक हल्दी के पेस्ट को बनाकर अपनी चोट के स्थान पर या घुटनों के दर्द के स्थान पर लगाइए इससे बहुत जल्दी आराम मिलता है. दर्द निवारक हल्दी का पेस्ट कैसे बनाएं इसके लिए आप सबसे पहले एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर लें और एक चम्मच पिसी हुई चीनी और इसमें आप बूरा या शहद मिला लें, और एक चुटकी चूना मिला दें और थोड़ा सा पानी डाल कर इसका पेस्ट जैसा बना लें.

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

इस लेप को बनाने के बाद अपने चम्मच के स्थान पर यार जो घुटना का दर्द करता है उस स्थान पर स्लिप को लगा ले और ऊपर से किराए बैंडेज या कोई पुराना सूती कपड़ा बांध दें और इसको रातभर लगा रहने दें और सुबह सादा पानी से इसको धो ले इस तरह से लगभग 1 सप्ताह से लेकर 2 सप्ताह तक ऐसा करने से इसको लगाने से आपके घुटने की सूजन मांसपेशियों में खिंचाव अंदरुनी रूप से होने वाले दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलता है और यह पृष्ठ आप के दर्द को जड़ से खत्म कर देता है.
दर्द के आराम दिलाये सौंठ का लेप

खजूर से घुटने में दर्द का इलाज

सर्दियों के मौसम में रोजाना 5-6 खजूर खाना बहुत ही लाभदायक होता है, खजूर का सेवन आप इस तरह भी कर सकते हैं रात के समय 6-7 खजूर पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट इन खजूर को खा ले और साथ ही वह पानी भी पी ले जिनको जिसमें आपने रात में खजूर भिगोए थे. यह घुटनों के दर्द के अलावा आपके जोड़ों के दर्द में भी आराम दिलाता

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

आपके घर में मौजूद कुछ दवाओं के द्वारा भी आप अपने घुटने का दर्द को दूर कर सकते है. इसके आपको आधा कप सरसों का तेल लेना है फिर उसमे कुछ लहसुन की कच्ची कालिया छिल कर दाल देनी है. फिर इस सरसों के तेल को धीमी आंच पर गर्म करना है. और तब तक इसे गर्म करना जब तक की लहसुन की कालिया पक न जाये. फिर इस तेल के मिश्रण को ठंडा होने के लिए छोड़ दें. ठंडा होने पर इसे अपने घुटनों में हल्के हाथों से मालिश करें. इस उपाय को यदि आप 1 से लेकर २ दिन इसे करें आपका घुटने का दर्द पूरी तरह से गायब हो जायेगा.

नारियल का तेल है बेहतर

नारियल के तेल के बड़े फायदे है नारियल का तेल केवल आपके बालों को ही मजबूत नही बनाता बल्कि ये आपके शरीर के कई हिस्सों को मजबूत बनाने में मदद करता है. आप यदि नारियल के तेल से अपने शरीर की मशाज़ करते है तो आपको शरीर में होने अकडन से निजात मिलेगी. और आप नारियल के भीतर मौजूद गिरी को खाते है तो भी ये आपके लिए फायदेमंद ही है क्योंकि ये सीधे आपके पेट पर असर करती है. और ये आपके घुटने का दर्द दूर करने में मदद करेगा.



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अखरोट के सेवन से आपको काफी फायेदा होगा. अखरोट जितना सख्त होता है उसे फायदे उठने ही मुलायम होते है. यदि आप रोजाना 2 से 3 अखरोट खाते है तो आपके लिए काफी फयदेमद रहेगा. अखरोट खाने का तरीका बेहद आसान है आपको रात में अखरोट को भिगो कर रखना है फिर सुबह खाली पेट सेवन करना है ताकि आपकी पचाने की शक्ति पर असर न पड़े. ऐसा करने से आपके घुटने का दर्द खत्म होगा साथ ही आपकी हड्डिया भी मजबूत हो जायेंगी.

हल्दी का मिश्रण घुटने का दर्द मिटाए

उम्र के साथ साथ शरीर की कार्यशक्ति कम हो जाती है. और बृद होने पर जोड़ो में दर्द होने लगता है. और कमर और घुटने में दर्द होना आम बात हो जाती है. लेकिन कभी कभी ये दर्द असहनीय हो जाता है. घुटने का दर्द मिटाना चाहते है तो हल्दी के आयुर्वेदिक लेप का इस्तेमाल करें इस लेप को बनाने के लिए आपको एक चम्मच हल्दी लीजिये. फिर इसमें शक्कर या शहद के घोल में इसे मिला दीजिये. और इस मिश्रण में चूना (जो पान में इस्तेमाल होता है) अपनी आवश्यकतानुसार मिला लें. और इस मिश्रण को अच्छी तरह से फेंटे. जब ये पेस्ट बनकर तैयार हो जाये तो इस पेस्ट या लेप को अपने घुटनों में लगायें. कुछ ही देर में आपको घुटने का दर्द छूमंतर हो जायगा.


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यदि आपका वजन बढ़ा हुआ है तो आपको चलने में तकलीफ होना या फिर घुटनों में दर्द होना स्वाभाविक है. इसलिए सबसे पहले अपने वजन को कम कीजिये ताकि आपकी बॉडी फिट रहे है आपको अन्य बीमारियाँ न लगे. अपने शरीर को मजबूत बनायें सही नियमों के साथ व्यायाम करें. स्पोर्ट एक्टिविटीज में हिस्सा है और कुछ न कुछ करते रहे इससे आपके शरीर का तनाव और खिचाव कम होगा. और घुटनों के दर्द में आराम मिलेगा.




17.7.18

कब्ज और गैस की समस्या के घरेलू प्राकृतिक उपचार //Domestic natural remedies for constipation and gas problem



                                              

कब्ज
*पके टमाटर का रस एक कप पीने से पुरानी से पुरानी कब्ज दूर होती है और आंतों को ताकत भी मिलती है।
रात में सोते समय 1 से 2 चम्मच अलसी के बीज ताजा पानी से निगल लें। आंतों की खुश्की दूर होकर मल साफ होगा।
*2 अंजीर को रात को पानी में भिगोकर सुबह चबाकर पानी पीने से पेट साफ हो जाता है।
गाजर के रस का रोजाना सेवन करने से कोष्ठबद्धता (कब्ज) ठीक हो जाती है। ऐसे व्यक्ति अर्श (बवासीर) रोग से सुरक्षित रहते हैं।

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

*गिलोय का बारीक चूर्ण को गुड़ के साथ बराबर की मात्रा में मिलाकर 2 चम्मच सोते समय सेवन करने से कब्ज का रोग दूर हो जाता है।
*अजवायन 10 ग्राम, त्रिफला 10 ग्राम और सेंधानमक 10 ग्राम को बराबर मात्रा में लेकर कूटकर चूर्ण बना लें। रोजाना 3 से 5 ग्राम इस चूर्ण को हल्के गर्म पानी के साथ सेवन करने से काफी पुरानी कब्ज समाप्त हो जाती है।
*थूहर के दूध में कालीमिर्च, लौंग या पीपल भिगोकर सुखा लें। कब्ज से परेशान व्यक्ति को कालीमिर्च या लौंग खिला देने से पेट बिल्कुल साफ हो जाता है।

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

*सोते समय 1 चम्मच साबुत मेथी दाने को पानी के साथ पीने से कब्ज दूर होगी।
*4 चम्मच सौंफ 1 गिलास पानी में उबालें। जब आधा पानी रह जाये तो छानकर पीने से कब्ज दूर हो जायेगा।

गैस :

*10 पिसी हुई कालीमिर्च को फांककर, ऊपर से गर्म पानी में नीबू निचोड़कर सुबह-शाम पीते रहने से गैस बनना बंद हो जाती है।
*चुकन्दर को खाने से पेट की गैस दूर होती है।
*6 ग्राम अजवाइन में लगभग 2 ग्राम कालानमक को मिलाकर फंकी देकर गर्म पानी पिलाने से गैस मिटती है।
*पेट में गैस बनने पर सुबह 4 कली लहसुन की खाये इससे पाचन शक्ति बढ़ती है और गैस दूर होती है।
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16.7.18

तनाव (टेंशन) दूर करने के उपाय,उपचार

                                          

अपने दैनिक जीवन का निरीक्षण करके और कुछ आदतों को बदलकर आप सभी नहीं तो कुछ तनाव उत्पन्न करने वाले कारणों को कम कर सकते हैं.
आधुनिक जीवन में तनाव न हो यह संभव नहीं है. जीवन मिला है तो रोजमर्रा की परेशानियां भी मिली हैं. गरीब, मध्यवर्गीय, धनी, धनकुबेर – सभी किसी-न-किसी कारण से चिंतित रहते हैं और तनाव उनके शरीर को खोखला करता रहता है. समस्याओं की प्रतिक्रिया करने से तनाव उपजता है. तनाव जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है. हांलाकि मेरा यह मानना है कि हमारा ज्यादातर तनाव अवांछित होता है और इसे कुछ सरल और कुछ कम सरल उपाय अपनाकर कम किया जा सकता है. यह चुटकियों में संभव नहीं है – मुझे इसमें सालों लगे हैं और अभी भी मैं तनाव पैदा करने वाले सभी कारणों को दूर नहीं कर पाया हूं. यह लक्ष्य कठिन है लेकिन हासिल करने योग्य है.

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एक उदाहरण देखें – यह थोड़ा बढ़ा-चढ़ा कर बताया जा रहा है लेकिन इससे हमारी तनावपूर्ण ज़िंदगी परिलक्षित होती है. आप सवेरे देर से उठते हैं, काम पर समय पर पहुंचने की जद्दोजहद करते हैं, हड़बड़ी में नाश्ता करते हैं, आपकी शर्ट पर चाय छलक जाती है, दाढ़ी बनाते समय छिल जाता है, बाहर निकलने पर याद आता है कि आप अपना मोबाइल या पर्स भूल आये हैं, और भी बहुत कुछ.
अब आप भीड़ भरे ट्रेफिक में फंसे हुए हैं और आपका पारा धीरे-धीरे चढ़ता जा रहा है. कोई आपसे आगे गाड़ी निकालने की कोशिश करता है और आप उबल पड़ते हैं, आप हार्न बजाते हैं, कोसते हैं, झुंझलाते हैं. इस तरह आप बड़े बुरे मूड में काम पर पहुँचते हैं. आप ज़रूरी कागज़ तलाशते हैं और वह आपको नहीं मिलता, आपकी डेस्क पर सारी चीज़ें अस्तव्यस्त पड़ी हैं, आपका इनबॉक्स भी बहुत बुरी हालत में है, और आपको 25 ईमेल का उत्तर देना है. आप पहले ही कई असाइन्मेंट और प्रोजेक्ट्स में देरी कर चुके हैं और बॉस आपसे खुश नहीं है. 11 बजने से पहले आपको बहुत ज़रूरी 3 काम पूरे करने थे और 12 बज चुके हैं. काम करते-करते कब 2 बज गए पता ही नहीं चला. आपने अपना लंच मिस कर दिया.
ये तो सिर्फ एक बानगी है. आप समझ गए होंगे की मैं क्या कहना चाहता हूँ. आपका दिन ठीक से नहीं गुज़रता. वापसी में भी आप वही ट्रेफिक झेलते हैं. घर पहुँचते-पहुँचते तक आप बेहद बेदम, हलाकान, लेट, और तनावग्रस्त हो जाते हैं. इसके बाद भी आपका ध्यान अगले दिन की ज़रूरी बातों पर लगा रहता है. आप टेबल और इनबॉक्स आप वैसी ही हालत में छोड़कर आये हैं. घर की हालत भी कोई बेहतर नहीं है. शायद घर के दुसरे सदस्यों की लाइफस्टाइल भी आपकी ही तरह की हो गई है इसलिए हमेशा खटपट होती रहती है. बच्चे अपनी चीज़ों को जगह पर नहीं रखते और आप उनपर चिल्लाते रहते हैं. टीवी देखते समय आप जल्दी में बनाया गया तला-भुना खाना खा लेते हैं और उनींदे होकर सोने चले जाते हैं.

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हो सकता है कि आपका रोजमर्रा का जीवन इतना बुरा न हो लेकिन इससे आपको उन बातों का पता तो चल ही गया होगा जिनके कारण लोग तनावग्रस्त हो जाते हैं. कारण तो और भी बहुत हो सकते हैं पर उनपर चर्चा बहुत लम्बी हो जायेगी.
तनाव उत्पन्न करने वाले कारणों को कुछ समझ और विचारपूर्वक दूर किया जा सकता है. ये हैं उसके तरीके:-
1. सरलीकरण करें – 
अपनी दिनचर्या को सरल-सहज करना बहुत ज़रूरी है. अपने संकल्प, सूचना-व्यवस्था, आवास और कार्यस्थल, और जीवन में घटित हो रही बातों को सरल बनाना ज़रूरी है. इसके अच्छे परिणाम होते हैं. इसके लिए इसी ब्लौग पर कुछ और लेखों में सुझाव बताये गए हैं.
2.स्वयं को समय दें – 
स्वयं को थोडा अधिक समय देने का प्रयास करें. ज़रूरी नहीं है कि हर काम घड़ी देखकर किया जाए. समय की कमी हो तो मीटिंग टाल दें. यदि फोन या ई-मेल से बात बनती हो तो मिलने की क्या ज़रुरत है? यदि यह संभव न हो तो मीटिंग का कोई वक़्त फिक्स न करें. लोगों से कहें कि वे आपको फोन करके पूछ लें कि आप फ्री हैं या नहीं. इस तरह कभी-कभार बचने वाले थोड़े-थोड़े समय को स्वयं को देने में या पसंदीदा काम करने में लगायें.
3. तनाव को पहचानें – 
यह सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. जो बातें आपको तनावग्रस्त करती हैं उन्हें यदि आप केवल पहचान ही लेंगे तो उन्हें दूर करने के उपाय करना आसान हो जायेगा. स्वयं को दस मिनट दें और सोचें कि आज आप तनाव में और दबाव में क्यों रहे. सप्ताह में ऐसा कितने बार होता है? कौन से लोग, गतिविधियाँ, बातें आपकी ज़िन्दगी को बोझिल बनाती हैं? टॉप 10 की एक लिस्ट बनायें और देखें कि क्या आप उनमें कुछ परिवर्तन ला सकते हैं या नहीं. एक-एक करके उन्हें सुधारते जाएँ और प्रयासरत रहें.

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4. अनावश्यक संकल्पों को छोड़ दें –
 हम अपने जीवन में कई सारे संकल्प करते हैं – हमें यह करना है – हमें वह करना है. पत्नी, बच्चे, कामकाज, घर-गृहस्थी, समाज, धर्म, शौक, और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े कई सारे संकल्पों को हम पूरा करने में लगे रहते हैं. इनमें से प्रत्येक की समीक्षा करें. क्या ऐसा कुछ है जो अच्छे परिणाम की अपेक्षा तनाव देता है. इस कार्य को निर्ममतापूर्वक करने की ज़रुरत है. जो कुछ भी आपके शुख-शांति के रास्ते में आता है उसे बेवज़ह ढोने में कोई तुक नहीं है. उस संकल्प को पहले दूर करें जो ज्यादा तनाव देता हो.
5 – जल्दी उठें – 
देर से उठना कई परेशानियों की जड़ है. किसी दिन 15 मिनट देर से उठें तो पाएंगे की रोजमर्रा के सभी काम करने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है. कामकाज पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है. जल्दी उठने की आदत डालें. इसी के साथ जल्दी सोने की आदत भी डालनी चाहिए. काम पर जल्दी निकालने से आप ट्रेफिक की समस्या से बच जाते हैं और ड्राइविंग में मज़ा भी आता है. यह जांचें की आपको तैयार होने में कितना समय लगता है और कहीं पहुँचने में कितना समय लगता है. इस समय को कम करके न आंकें. एक छोटा सा अंतराल भी बड़ा बदलाव ला सकता है. सिर्फ दस मिनट का परिवर्तन लाकर देखें. आपको फर्क पता चलेगा.
6.दूसरों को नियंत्रित न करें –
 याद रखें, हम सारी दुनिया के मालिक नहीं हैं. हम चाहते तो हैं कि ऐसा होता लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम ऐसा ख्याल ही अपने मन में पाल लें. हम चीज़ों और लोगों को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं और इसमें सफल नहीं हो पाते. इससे तनाव बढ़ता ही है. दूसरी चीज़ें जैसी घटित होती हैं और दूसरे लोग जैसे काम करते हैं उसे स्वीकार कर लें. यह भी स्वीकार कर लें कि अलग-अलग परिस्थितियों में चीज़ें एक ही तरह से नहीं होतीं. धयान रखें, आप केवल स्वयं पर ही नियंत्रण रख सकते हैं. इसीलिए दूसरों को नियंत्रित करने से पहले स्वयं को काबू में रखने का काम करें. यह भी सीखें कि स्वयं पर काम थोपने के बजाय आप दूसरों से भी उसे करवा सकते हैं. हममें दूसरों को अपने अधीन रखने कि अदम्य इच्छा होती है. इससे बचने में ही हमारी भलाई है. यह जीवन को तनावमुक्त रखता है.

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7. मल्टीटास्किंग बंद करें – 
मल्टीटास्किंग का अर्थ है एक साथ कई काम करना, जैसे कम्प्युटर कर लेता है. कई लोग इसे बहुत बड़ा गुण समझते हैं लेकिन हकीकत में इसके नुकसान अधिक हैं. यह हमारी काम करने की गति को सुस्त और बाधित कर देता है. इससे काम के ज़रूरी पक्षों से ध्यान हट भी सकता है. यह तनाव बढ़ाता है. एक वक़्त में एक ही काम करें.
8. टालमटोल करने की प्रवृत्ति छोडें –
 हम सभी ऐसा करते हैं. इसके कारण काम का दबाव बढ़ता जाता है. ‘अभी ही करना है’ की आदत डाल लें. अपने इनबॉक्स और टेबल को साफ़ रखें.
9. व्यवस्था लायें – 
कुछ हद तक सभी व्यक्ति अव्यवस्था के बीच रहते हैं. यदि हम व्यवस्था बनाये रखने का प्रयास करें और इसमें प्रारंभ में सफल हो भी जाएँ तो भी अव्यवस्था को जगह बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता. अपने माहौल में अव्यवस्था रखने से तनाव बढ़ता है. इससे हमें चीज़ें तलाशने में देर लग जाती है और कामकाज में बाधा आती है. अपने परिवेश में व्यवस्था लायें. शुरुआत अपनी टेबल और दराज़ से करें. घर के किसी एक कोने से शुरुआत करें. पूरे घर को दुरुस्त करना ठीक न होगा. छोटे से हिस्से से शुरुआत करें और व्यवस्था को वहां से आगे फैलने दें.
10॰ ऊर्जा का क्षय रोकें – 
यदि आपने पहली स्टेप में बताये अनुसार तनाव उत्पन्न करनेवाले कारणों की पहचान की है तो आपने शायद ऐसे काम भी नोट किये होंगे जो आपकी ऊर्जा को सिर्फ नष्ट करते हैं. कुछ काम ऐसे होते हैं जिनमें दूसरे कामों कि अपेक्षा ज्यादा ऊर्जा और समय लगता है. उन्हें पहचानें और हटायें. जिंदगी बेहतर जीने के लिए भरपूर ऊर्जा का होना जरूरी है.

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11.दूसरों की मदद करें – 
यह टिप विरोधाभासी नहीं है. यह न सोचें कि आप तो वैसे ही काम के बोझ तले दबे हुए हैं और दूसरों कि मदद करके तो आपका कचूमर ही नक़ल जायेगा. दूसरों की मदद करने से, स्वयंसेवक के बतौर काम करने से, या चैरिटी संगठन में काम करने से आप भीतर से बहुत अच्छा अनुभव करते हैं और यह आपका तनाव दूर करता है. यदि आप दूसरों पर नियंत्रण ही करना जानते हैं तो यह आपके लिए कुछ मुश्किल होगा. यदि आप इसे बहुत सरसरे तरीके से करते हैं तो इसका लाभ आपको न मिलेगा. इसे सहजता और सद्भावना से करें. दूसरों का जीवन बेहतर होगा तभी आपका जीवन बेहतर बनेगा.
12. ज़रा सा आराम करते चलें – 
कामकाज के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लेना सही रहता है. यदि आप दो घंटों से काम में भिडे हुए हैं तो जरा ठहरें. अपने कन्धों और बांहों को आराम देने के लिए फैलाएं. टहलें, पानी पियें. बाहर जाएँ, खुला आसमान देखें, ताजी हवा में साँस लें. किसी से बात करें. रचनात्मकता अच्छी बात है लेकिन जीवन उससे ज्यादा कीमती है. अपनी ऑनलाइन गतिविधियों पर भी थोड़ा नियंत्रण रखें.
13॰ मुश्किल लोगों से दूर रहें –
 क्या आप उन्हें जानते हैं? ये लोग हैं आपके बौस, कलीग, कस्टमर, दोस्त, परिजन, आदि. कभी-कभी ये ही हमारी ज़िन्दगी को मुश्किल बना देते हैं. उनसे लड़ना ठीक न होगा इसलिए उन्हें टालने में ही भलाई है.
14. धीरे करें – 
आपाधापी में लगे रहने के बजाय थोडी कम रफ़्तार से काम करने में चीज़ें बेहतर तरीके से होती हैं. आननफानन टाइप करके बाद में गलतियाँ सुधारने से बेहतर है कि धीरे टाइप करें. खाने का लुत्फ़ उठायें, लोगों से मन बहलायें, दुनिया देखें. तनाव दूर करने में यह टिप बड़ी कारगर है.


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15. ज़रूरी कामों की लिस्ट बनायें – 
क्या इसके बारे में भी विस्तार से बताना पड़ेगा? ज़रूरी कामों को प्राथमिकता के आधार पर करने के लिए एक लिस्ट बना लेना चाहिए और उसके अनुसार काम करना चाहिए.
16. कसरत करना –
 इसके कई लाभ हैं. शारीरिक और मानसिक स्तर पर यह बहुत प्रभावशील है. यह शरीर को फिट रखने के साथ-साथ तनाव से भी कुशलता से निपटती है. एक स्वस्थ और फिट व्यक्ति थकान और दबाव का सामना बेहतर तरीके से कर सकता है. दूसरी ओर, अस्वस्थ होना स्वयं में बहुत बड़ा घाटा है. कसरत हमें रोग और तनाव से दूर रखती है.
17.काम छोड़ दें – 
यह भयावह टिप है. इसे कर पाना सबके बस की बात नहीं है. सच कहूँ तो आपका कामकाज या नौकरी आपके तनाव का सबसे बड़ा कारण है. यदि आपको आर्थिक मोर्चे पर कुछ सुरक्षा हासिल है तो ज़रा सोचें – क्या आप नौकरी के बदले कुछ ऐसा कर सकते हैं जो आप सदैव करना चाहते थे. यदि आप ऐसा कर पाते हैं तो आपके जीवन में एड़ी से चोटी तक परिवर्तन आ जायेगा. केवल यही टिप आपका तनाव ९०% तक कम कर सकती है. इसे यूँ ही टालने की बजाय गंभीरता से लें – शायद ऐसी कई संभावनाएं हों जिनकी ओर आपका ध्यान नहीं गया हो.

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18. अच्छा खाएं – 
यह कसरत करने जितना, बल्कि उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है. सम्यक, संतुलित, और सात्विक आहार शरीर और मन को पुष्ट करता है. तला हुआ चटपट खाना हाजमे को ख़राब करता है और शरीर को बोझिल बनाता है.
19.आभारी बनें – 
यदि आप दूसरों का आभार व्यक्त करते हैं तो इसके सकारात्मक परिणाम होते हैं. आपके जीवन से ऋणात्मक सोच बाहर निकलती है. दूसरे भी आपकी इस क्रिया से अच्छा अनुभव करते हैं. अपने जीवन में आपने जो कुछ भी पाया है और जिन व्यक्तियों का साथ आपको मिला है उसे उपहार मानकर उसके लिए ईश्वर का आभार व्यक्त करें. जीवन के प्रति इस प्रकार का दृष्टिकोण रखकर आप अपने जीवन में सुख और शांति के आने का मार्ग प्रशस्त करेंगे. यह आत्मिक समृद्धि का सूत्र है.




8.7.18

असालिया के अद्भुत फायदे

                                                          

असालिया प्राय:सारे भारत वर्ष में बोई जाती है । इसको विभीन्न नामों से जाना जाता है। जैसे हालों, असालु, असालियों,हालिम, अहालील आदी ।
गुण दोष आैर प्रभाव :- आयुर्वेदिक मतानुसार यह आैषधि गरम कडवी पौष्टकि दुध बढाने वाली बाजीकरण आैर कामोदीपक है। यह वात कफ,अतिसार, आैर त्वचा के रोगाें को नष्ट करने वाली है । युनानी मत के अनुसार इसके बीज यकृत के रोग ,छाती के दर्द ,गठिया आैर आमाशय के तकलीफो में ये लाभजनक है। ये मस्तिष्क शक्ति बढाने वाले आैर बुद्धिवर्धक है ।

दालचीनी के अद्भुत फायदे

इसको बीज को पंजाब में स्तनों में दुध बढ़ानेवाला माना जाता है । इनको दुध के साथ मिलाकर पिलाया जाता है। परन्तु गर्भवती स्त्रियों को इन्हें नहीं पिलाना चाहीये ।
लंबाई बढाने के लीए:- बच्चों में अक्सर कद (Height) को लेकर चिंता बनी रहती है । मिश्री पाउडर में असालिया को मिलाकर दिन में दो बार दुध के साथ देने पर लंबाई बढती है । आैर शरीर का विकास होता है ।
अामाशय की पीडा :- इसका काढा पिलाने से अमाशय की पीडा मिटती है ।
सुजन :- इसके बीजों को कुटकर नींबु के रस में मिलाकर लेप करने से सुजन बिखर जाती है ।

वैवाहिक जीवन की मायूसी दूर  करें इन जबर्दस्त  नुस्खों से

श्वास  व खांसी :- इसकी  डालियों को आेटकर पिलाने से श्वास आैर सुंखी खांसी मिटती है ।
खुनी बवासीर :- इसका शर्बत पिलाने से खुनी बवासीर मेें लाभ होता है ।
अतिसार :- इसकी जड. के चुर्ण की फंकी देने से बार बार दस्त मिटता है ।
खुजली आैर दाह :- दाह आैर खुजली पैदा करनेवाले पदार्थो के विष को उतारने के लिये इसके बिजों का लेप निकालकर पिलाना चाहीये ।




3.7.18

एलर्जी दूर करने के घरेलू नुस्खे और उपचार // Home remedies for allergy

                                             
                                                     

       एलर्जी की समस्या बच्चों से लेकर सभी उम्र के लोगों में देखने को मिलती है। शहरी वातावरण में तो इस तरह की समस्याएं ओर भी ज्यादा हैं। एलर्जी के बहुत से प्रकार होते हैं।
एलर्जी के कारण -

1.खाने पीने की चीज़ों के द्धारा: कुछ लोगो को खाने पीने की चीज़ों से भी एलर्जी होती हैं जैसे मछली, मशरूम, दूध, अंडा, गेहूं या कोई ओर चीज़।
2.मौसम के बदलने से: कुछ लोगो को मौसम के बदलने से भी एलर्जी जैसी समस्या का सामना करना पड़ता हैं, बारिश के मौसम में यह समस्या अधिक होती हैं ।


शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

3.वातावरण के द्धारा: हवा में मौजूद फूलों के परागकण, धूल, मिटटी, धुआं और पशुओं से एलर्जी हो सकती हैं।
कीड़ों के काटने के द्धारा: मधुमक्खी, ततैया आदि के काटने से भी कुछ लोगों में एलर्जी की समस्या हो सकती हैं, जैसे त्वचा की सूजन और दर्द।
4.दवाईयों के द्धारा: अंग्रेजी दवाओं से भी कुछ लोगो को एलर्जी हो सकती हैं।
एलर्जी के लक्षण
नाक की एलर्जी: जुकाम होना, नाक बंद होना और बहना या छींके आना।
त्वचा में एलर्जी: शरीर में किसी भी जगह लाल लाल दाने पड़ना और उनमे खुजली या सूजन होना शरीर में किसी भी अंग पर खारिश होना या त्वचा का लाल होना।
खाने से एलर्जी: खाने के एलर्जी की स्तिथि में पेट में दर्द, गैस, उलटी आना, दस्त की शिकायत या त्वचा लाल हो सकती हैं।

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फेफड़ों में एलर्जी: गले में तेज़ जलन और खारिश होना, साँस लेने में तकलीफ होना। इसके अलावा स्वाद या गंध न आभास न होना व मुँह के आसपास सूजन होना और कुछ भी खाने में कठिनाई होना भी एलर्जी के लक्षण हैं।
अन्य लक्षण: आँखों में जलन, खुजली होना या पानी आना।

एलर्जी दूर करने के घरेलू,आयुर्वेदिक उपाय 
अरंडी का तेल या कैस्टर ऑयल
आंतों, स्किन और नाक की एलर्जी से छुटकारा पाने के लिए फलों और सब्जी के रस में 5 बूंद कैस्टर ऑयल डाल कर रोज़ सुबह खाली पेट पीयें। फलों या सब्जियों के रस की जगह पानी का प्रयोग भी किया जा सकता हैं।
अंजीर और छुहारे के उपयोग से
एक अंजीर और एक छुआरा लें और उसे दूध में उबाल लें रात के समय इस उपाय के प्रयोग से भी एलर्जी से वचाव होता हैं।

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पानी की भाप
रोज़ पानी की भाप लेने से भी छींकने, खांसने और नाक की एलर्जी से राहत मिलती हैं और यह उपाय सबसे अच्छे उपायों में से हैं।
हर्बल चाय
हर्बल चाय से एलर्जी की समस्या से राहत मिलती हैं। अदरक, काली मिर्च, तुलसी के पत्ते, लौंग व मिश्री से घर पर ही हर्बल चाय बनाये और पीयें। इसके सेवन से एलर्जी से भी छुटकारा मिलता हैं साथ में यह ऊर्जा का भी अच्छा स्त्रोत हैं। इसके अलावा ग्रीन टी भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर एलर्जी को दूर करने मदद करती हैं।

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निम्बू का रस
गुनगुने पानी में आधा चम्मच निम्बू का रस और एक शहद का चम्मच मिलाएं और रोज़ सुबह इस उपाय का प्रयोग करने से एलर्जी में राहत मिलती हैं।
नीम की पत्तियां
नीम की पत्तियों को पीसकर पेस्ट बना ले और फिर उसकी गोलियां बना कर रख लें। रोज़ सुबह खाली पेट शहद में इन गोलियों को डूबा कर निगलें और इसके बाद एक घंटे तक कुछ न खाएं। इस उपाय से एलर्जी से राहत मिलती हैं।
त्वचा की एलर्जी के लिए निम्बू का प्रयोग
निम्बू एक अच्छा एंटी-बैक्टीरियल हैं, इसलिए अगर आपको त्वचा की एलर्जी की समस्या हैं तो निम्बू के रस में नारियल तेल मिलाएं और प्रभावित स्थान पर रात भर लगा के रखें। फिर इसे नीम के पानी से धो दें। इससे राहत मिलती हैं इसके अलावा खसखस के बीज, शहद और नींबू के रस को मिला कर प्रयोग करने से त्वचा की एलर्जी में राहत मिलती हैं।

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स्किन एलर्जी पैक
स्किन की एलर्जी होने पर यह पैक भी बहुत उपयोगी होता हैं। इस बनाने के लिए कुछ तुलसी के पत्तों को पीस कर उसमे एक चम्मच जैतून का तेल, 2 कालिया लहसुन, थोड़ा सा नमक और काली मिर्च डाल कर अच्छे से पीस लें, उसके बाद प्रभावित जगह पर लगायें कुछ देर लगाने के बाद धो दें। इस उपाय से भी अच्छे परिणाम मिलते हैं
फलों के जूस के सेवन से
अगर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हैं तो आपको एलर्जी होने का खतरा नही होता। रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए रोजाना एक गिलास गाजर का जूस पीना सर्वोत्तम हैं। आपकी मर्जी हो तो आप मिक्स जूस जैसे खीरे, चुकंदर और गाजर को मिला कर भी सेवन कर सकते हैं।

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एलर्जी के लिए कुछ और आयुर्वेदिक उपाय-
1.स्किन एलर्जी होने पर फिटकरी के पानी से उस भाग को धोएं। नारियल तेल में कपूर या जैतून तेल मिलाकर लगाएं।
2. 100 मिलीलीटर खीरे के रस, 100 मिलीलीटर चुकंदर के रस और 300 मिलीलीटर गाजर के जूस को मिला कर पीने से भी लाभ मिलता हैं।
3.नाक की एलर्जी होने पर सुबह भूखे पेट 1 चम्मच गिलोय और 2 चम्मच आंवले के रस में 1चम्मच शहद मिला कर कुछ दिन इसका सेवन करें इससे अच्छे परिणाम मिलते हैं।
4.च्यवनप्राश के रोजाना सेवन करने से भी लाभ होता हैं।
5. 100 मिलीलीटर खीरे के रस, 100 मिलीलीटर चुकंदर के रस और 300 मिलीलीटर गाजर के जूस को मिला कर पीने से भी लाभ मिलता हैं।



9.6.18

डॉ॰ आलोक के आयुर्वेदिक ,होम्योपैथिक ,घरेलू और प्राकृतिक चिकत्सा के लेखों की लिंक सूची

                                                       

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नीलगिरी तेल के स्वास्थ्य लाभ

19.5.18

वात रोग (जोड़ों का दर्द ,कमर दर्द,गठिया,सूजन,लकवा) को दूर करने के उपाय // Remedies to overcome Vata Disease (Joint Pain, Waist Pain, Arthritis, Swelling, Paralysis)


                                                           

वात रोग को दूर करने के उपाय 
 शरीर की अधिकतर बीमारियाँ बात असंतुलन के कारण पैदा होती हैं, बल्कि वात असंतुलन के बगैर पित्त और कफ भी असंतुलित नहीं हो सकते। जिस तरह से हवा के कारण बाहरी दुनिया में संचार संभव होता है, कुछ उसी तरह से वात के कारण ही शरीर के भीतर सभी तत्वों का आपस में जुडाव संभव होता है।
हवा की तरह ही वात का भी एक प्रमुख लक्षण है- गति। शरीर की सभी गतियों का संचालक वात ही है। शरीर के किसी अंग की गति में अवरोध हो तो समझना चाहिए कि वात असंतुलित हो रहा है। मसलन, हृदय का काम है रक्त संचार बनाए रखने के लिए धड़कते रहना। यदि हृदय की धड़कन में गड़बड़ी आ जाए तो इसका अर्थ है कि वात बढ़ रहा है। यदि कोई व्यक्ति चाहकर भी शांत नहीं रह सकता तो समझिए कि वह बात असंतुलन का शिकार है। जिसे अपनी ऊर्जा पर नियंत्रण नहीं है, वह वात रोगी होगा ही। इसी तरह शरीर की गतियों से संबंधित लकवा, पाकिंसन, अकड़न जैसे रोग बढ़े हुए वात के ही परिणाम हैं। यही कारण है कि सभी तरह की मानसिक व्याधियों में बिगड़े हुए वात का हाथ भी कुछ-न-कुछ जरूर दिखाई देता है। वात रोग में मुख्यतः जोड़ों का दर्द, गठिया, कमर दर्द, यूरिक एसिड का बढ़ना, खुश्की तथा रूखापन, शरीर में जकड़न तथा दर्द, सिर में भारीपन, पेट फूलने, गठिया, लकवा आदि शरीरिक कठिनाई आती है आज हम आपको वात रोग निवारण के लिए बहुत ही सरल और उपयोगी घरेलु उपचार बता रहे हैं

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वात रोग निवारण के उपाय
*सोंठ चूर्ण आधा चम्मच, जावित्री आधा चम्मच को ग्वारपाठा के 10 ग्राम गूदे के साथ खाने से वात रोग 2 महीनो में ठीक हो जाता है।
*दानामेथी 2 चम्मच, एलोवेरा का रस 4 चम्मच को मिलाकर पीने से सभी वात रोग ठीक हो जाते हैं।
*गेहूँ की रोटी में एलोवेरा का गूदा मिलाकर प्रात:काल 1 बासी रोटी बिना चुपड़ी खाने से पेट की वायु एवं वात रोग शीघ्र शांत होने लगते हैं।
*वात रोग निवारण के लिए दानामेथी चूर्ण 100 ग्राम, सोंठ 50 ग्राम, देशी घी 100 ग्राम तथा पीपल, काली मिर्च, धनिया, पीपरामूल, दालचीनी और नागरमोथा सबका चूर्ण 10-10 ग्राम लें। सभी चीजों को कूट-पीसकर 200 ग्राम ग्वारपाठा का गूदा लेकर मिलाकर गरम करें। अब इनको देशी घी में भून लें। ठण्डा हो जाने पर 20-20 ग्राम के लड्डू बना लें। रोजाना 1 लड्डू खाएँ तो शरीर में सूजन, वात रोग, वात विकार, पेट की गैस आदि रोग जड़ सहित मिट जाते हैं।
*10 ग्राम चोपचीनी, 2 ग्राम पीपरामूल और 10 ग्राम एलोवेरा का गूदा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से वात रोग तथा विकार शांत हो जाते हैं।

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वात रोग की वजह से होने वाले गठिया और जोड़ो के दर्द का उपचार
*एलोवेरा के गूदे को गरम करके जोड़ों पर मालिश करने से गठिया रोग में आराम मिलता है।
*अजमोदादि चूर्ण को 4 चम्मच एलोवेरा के रस के साथ खाने से गठिया रोग 2 सप्ताह में चला जाता है।
एक गिलास पानी में 20 ग्राम आंवले को उबालकर उसमें एलोवेरा का 10 ग्राम गूदा मिलाकर दिन मे 3-4 बार 4-4 चम्मच लें तो वात रोग के कारण होने वाली जोड़ों की सूजन मिट जाती है।
*पीपल के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर एलोवेरा का गूदा मिला लें। इस तैयार पानी को ठण्डा करके पीने से गठिया आदि रोग ठीक जाते हैं।
*4 नग बादाम को 4 चम्मच एलोवेरा के रस के साथ पीसकर गरम करके खाने से पक्षाघात वाले अंगों में शक्ति उत्पन्न हो जाती है।

बढ़ी हुई तिल्ली प्लीहा के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार

*करेले का रस 2 चम्मच और एलोवेरा का रस आधा कप 10 दिनों तक सुबह शाम खाने से वात रोग के कारण होने वाला हड्डी दर्द ठीक हो जाता है।
*10 ग्राम गुग्गुल को एलोवेरा के रस के साथ सेवन करने से जोड़ों का दर्द मिट जाता है।
*दानामेथी का चूर्ण 1 चम्मच, एलोवेरा के रस के साथ सुबह-शाम लेने से जोड़ों की बीमारियाँ, घुटनों का दर्द मिट जाता है।
*खाने के साथ बच का चूर्ण 1 चम्मच प्रतिदिन एलोवेरा के ताजे रस के साथ सेवन करने से वात व्याधि, जोड़ों का दर्द, घुटनों की पीड़ा शांत हो जाती है।
 वात रोग की वजह से होने वाले कमर दर्द का उपचार
*सोंठ चूर्ण आधा चम्मच, तुलसी के बीजों का रस आधा चम्मच, एलोवेरा का रस 2 चम्मच मिलाकर काढ़ा बनाकर सेवन करने से कमर सम्बन्धी रोगों में आराम होता है।
*सहिजन की फलियों का रस 2 चम्मच, एलोवेरा का गूदा 10 ग्राम मिलाकर लें तो कमर का दर्द ठीक हो जाता है।

*किडनी फेल रोग का अचूक इलाज* 

*राई 10 ग्राम, एलोवेरा का गूदा 50 ग्राम मिलाकर कमर पर गरम-गरम लेप करने से कमर दर्द एक बार में आधा चला जाता है।
*असगंध चूर्ण 1 चम्मच, सोंठ आधा चम्मच और एलोवेरा का गूदा 4 चम्मच मिलाकर खाने से कमर दर्द, स्लिप डिस्क, चणक, नस का दर्द एवं सायटिका रोग मिट जाता है।
*अजवायन को एलोवेरा के गूदे में भरकर 2 सप्ताह तक धूप में सुखाकर रखें और इस तैयार चूर्ण में से 1 चम्मच को 4 चम्मच एलोवेरा के रस के साथ लें तो वात रोग के कारण होने वाले कमर का दर्द ठीक हो जाता है।
वात रोग से होने वाली सूजन का उपचार
*शरीर में सूजन आ जाने पर मुलतानी या चिकनी मिट्टी में एलोवेरा का गूदा मिलाकर लेप करें तो सूजन ठीक हो जाती है।
*त्रिफला चूर्ण 1 चम्मच, एलोवेरा का रस चौथाई कप मिलाकर रात को सोते समय सेवन करें तो वात रोग, वात विकार और लकवा शीघ्र ठीक हो जाते हैं।


मलेरिया की जानकारी और विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों से इलाज  

*फिटकरी 1 चम्मच और एलोवेरा का गूदा 10 ग्राम को हल्का गरम करके इसका लेप करें तो सूजन वाले अंग की सूजन मिट जाती है।*वात रोग या वात बिगड़ने से शरीर में सूजन आ जाने पर एलोवेरा का रस 2 चम्मच, हल्दी 1 चम्मच और चूना आधा चम्मच मिलाकर लेप करें तो लाभ हो जाता है।
*रात को सोते समय एलोवेरा के गूदे से तलवों पर मालिश करने से शरीर की वात संतुलित रहता है और पैरों का सुनपन भी ठीक हो जाता है।

लकवा पक्षाघात के लिए नुस्खे

*अंजीर 2 नग, एलोवेरा का रस 4 चम्मच, सोंठ आधा चम्मच और काली मिर्च चौथाई चम्मच मिलाकर खाने से 2 सप्ताह में लकवा ठीक हो जाता है।
*एलोवेरा का रस 50 ग्राम और तिल्ली का तेल 100 ग्राम मिलाकर उबाल लें एवं तेल तैयार होने पर मालिश करें तो वात रोग के कारण होने वाले लकवे में आराम मिलता है।

*लहसुन की 2-3 कलियाँ छिलकर एलोवेरा के गूदे के रस के साथ खाने से पक्षाघात 2 माह में ठीक हो जाता है।
*शहद 4 चम्मच, एलोवेरा का रस 4 चम्मच मिलाकर प्रात:काल बासी मुँह खाने से लकवा ठीक हो जाता है।
*1 चम्मच सर्पगंधा का चूर्ण को 10 ग्राम एलोवेरा के गूदे के साथ सेवन करने से पक्षाघात ठीक हो जाता है तथा उच्च रक्तचाप शांत हो जाता है।

गोमूत्र और हल्दी से केन्सर का इलाज

*चौलाई के पत्तों का रस 2 चम्मच, एलोवेरा का गूदा 20 ग्राम और अदरक का रस 1 चम्मच मिलाकर गरम करके पीने से जोड़ों में मजबूती आती है एव दर्द मिट जाता है।
*एलोवेरा को पत्तों सहित उबालकर उसकी भाप से रोगी के लकवे वाले हिस्से की सिकाई करने से दो सप्ताह में अंगों में फड़कन, चलन शुरू हो जाती है।


विशिष्ट परामर्श-  

संधिवात,,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द रहित सक्रियता  हासिल  करते  हैं |औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क करने की सलाह दी जाती है|