चमकी बुखार के लक्षण और सामान्य उपचार


बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में चमकी बुखार या हाइपोग्लाइसीमिया से हालात भयावह हैं।इतने बच्‍चों की मौत के बाद भी अभी तक खुलासा नहीं हो पा रहा है कि मरने वाले बच्‍चें की मौत चमकी बुखार से हो रही है या जहरीली लीची या हाइपोग्लाइसीमिया के कारण। विशेषज्ञों की माने तो चमकी बुखार के कारण ही हाइपोग्लाइसीमिया होने का खतरा बढ़ जाता है।
क्या हैं चमकी बुखार के लक्षण?
 चमकी नाम की बीमारी में शुरुआत में तेज बुखार आता है। इसके बाद बच्चों के शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है। इसके बाद तंत्रिका तंत्र काम करना बंद कर देता है। इस बीमारी में ब्लड शुगर लो हो जाता है। बच्चे तेज बुखार की वजह से बेहोश हो जाते हैं और उन्हें दौरे भी पड़ने लगते हैं। जबड़े और दांत कड़े हो जाते हैं. बुखार के साथ ही घबराहट भी शुरू होती है और कई बार कोमा में जाने की स्थिति भी बन जाती है। अगर बुखार के पीड़ित को सही वक्त पर इलाज नहीं मिलता है तो उसकी मौत होने की सम्‍भावाना बढ़ जाती है।
अगर चमकी बुखार हो जाए तो क्या करें?
 - बच्चों को पानी पिलाते रहे, इससे उन्हें हाइड्रेट रहने और बीमारियों से बचने में मदद मिलेगी।
 - तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछें। 



- पंखे से हवा करें या माथे पर गीले कपड़े की पट्टी लगायें ताकि बुखार कम हो सके। 
- बच्‍चे के शरीर से कपड़े हटा लें एवं उसकी गर्दन सीधी रखें। बच्चों को बुखार आने पर कोई भी एंटीबॉयोट‍िक देने से पहले डॉक्‍टर की सलाह जरुर लें। 
- अगर बच्चे के मुंह से लार या झाग निकल रहा है तो उसे साफ कपड़े से पोछें, जिससे सांस लेने में दिक्‍कत न हो।
 - बच्‍चों को लगातार ओआरएस का घोल पिलाते रहें. तेज रोशनी से बचाने के लिए मरीज की आंख को पट्टी से ढंक दें।
 - बेहोशी व दौरे आने की अवस्‍था में मरीज को हवादार जगह पर लिटाएं। 
- चमकी बुखार की स्थिति में मरीज को बाएं या दाएं करवट पर लिटाकर डॉक्टर के पास ले जाएं। यानी सीधा न सुलाएं।
हाइपोग्लाइसीमिया है गंभीर लक्षण
 शरीर में पानी की कमी होने पर बच्चे जल्दी हाइपोग्लाइसीमिया के चपेट में आ जाते हैं। सही खानापान न होने से उनके शरीर का शुगर लेवल तेजी से नीचे गिरने लगता है। ऐसे में उनके शरीर में सोडियम की कमी भी होती है। बेहोशी का एक बड़ा कारण हाइपोग्लाइसीमिया भी होता है। बच्चों को पता ही नहीं होता कि उनका ग्लोकोज लेवल कम हो रहा है और वे अचानक से गिर पड़ते हैं।
बीमारी से बचाने के लिए रखें ये बातें ध्यान में - 
*फल और खाना खाने से पहले उसकी जांच जरूर कर लें कि कही वह खराब न हो। 
* बच्चे को कभी भी किसी भी हाल में किसी का जूठा खाना न दें। 
* तेज धूप, गर्मी में बच्चों को बाहर न निकलने दें।



*जब भी बच्चा बाहर जाए वह पूरी तरह से कपड़ों में हो। 
* बाहर जाने से पहले खाना खा कर निकलें और शरीर में पानी की कमी न होने दें।
*बच्चों को सूअर और गाय के पास जाने से रोकें।
*खाने से पहले और खाने के बाद हाथ ज़रूर धुलवाएं।
* बच्चों की साफ सफाई पर खूब ध्यान दें। उनके नाखून नहीं बढ़ने दें। 
* बच्चों को पोषण पूरा हो यह ध्यान दें। हरी सब्जी, फल और दूध-दही खूब खिलाएं।
* जब भी पानी पीने को कुछ मीठा भी खिलाएं अगर बच्चा ज्यादा समय बाहर रहता हो तो। 
* खाली पेट लीची खाने से बचें और जब भी लीची खांए उसे अच्छी तरह धो लें। ताकि उस पर लगा केमिकल्स हट जाए।



आलू एक फायदे अनेक



भारत में पाई जाने वाली सब्जियों में आलू बहुतायत में पाया जाता है, इसमें गुणों का भंडार होता है। आलू को किसी भी सब्जी में मिलाकर आसानी से बनाया जा सकता है। यह जितना सस्ता मिलता है, उसके विपरीत गुणों का भंडार है।
आलू में कैल्शियम, लोहा, विटामिन-बी तथा फास्फोरस बहुतायत में होता है। आलू खाते रहने से रक्त वाहिनियां बड़ी आयु तक लचकदार बनी रहती हैं तथा कठोर नहीं होने पातीं, इसलिए आलू खाकर लम्बी आयु प्राप्त की जा सकती है।
हड्डियों के लिए फायदेमंद है आलू
आलू का सेवन हड्डियों के लिए फायदेमंद होता है। इसका कारण यह है कि आलू में कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस तीनों की मात्रा अच्छी होती है। 100 ग्राम आलू में 12 मिलीग्राम कैल्शियम, 23 मिलीग्राम मैग्नीशियम और 57 मिलीग्राम फास्फोरस होता है। ये सभी तत्व हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी हैं। छोटे बच्चों को भी सीमित मात्रा में आलू खिलाना चाहिए। हालांकि आलू को बहुत ज्यादा ऑयल में फ्राई करने से इसके पोषक तत्वों में कमी आ जाती है।आलू में विटामिन बहुत होता है। इसको मीठे दूध में भी मिलाकर पिला सकते हैं। आलू को छिलके सहित गरम राख में भूनकर खाना सबसे अधिक गुणकारी है या इसको छिलके सहित पानी में उबालें और गल जाने पर खाएं।
यदि दो-तीन आलू उबालकर छिलके सहित थोड़े से दही के साथ खा लिए जाएं तो ये एक संपूर्ण आहार का काम करते हैं।
आलू से मोटापा नहीं बढ़ता। आलू को तलकर तीखे मसाले, घी आदि लगाकर खाने से जो चिकनाई पेट में जाती है, वह चिकनाई मोटापा बढ़ाती है। आलू को उबालकर अथवा गर्म रेत या राख में भूनकर खाना लाभदायक और निरापद है।
आलू के छिलके ज्यादातर फेंक दिए जाते हैं, जबकि छिलके सहित आलू खाने से ज्यादा शक्ति मिलती है। जिस पानी में आलू उबाले गए हों, वह पानी न फेंकें, बल्कि इसी पानी से आलुओं का रसा बना लें। इस पानी में मिनरल और विटामिन बहुत होते हैं।
ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है आलू
स्वस्थ रक्तचाप को बनाए रखने के लिए कम सोडियम आहार आवश्यक है, लेकिन पोटेशियम की उच्च मात्रा भी समान रूप से महत्वपूर्ण होती है। पोटेशियम वासोडिलेशन, या रक्त वाहिकाओं की चौड़ाई को प्रोत्साहित करता है। पोषक तत्व जैसे पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम सभी आलू में मौजूद होते हैं। यह स्वाभाविक रूप से रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।आलू पीसकर, दबाकर, रस निकालकर एक चम्मच की एक खुराक के हिसाब से चार बार नित्य पिएं, बच्चों को भी पिलाएं, ये कई बीमारियों से बचाता है। कच्चे आलू को चबाकर रस को निगलने से भी बहुत लाभ मिलता है।



दिल की बीमारियों से बचाए आलू

आलू में मौजूद फाइबर, पोटेशियम, विटामिन सी, और विटामिन बी 6 कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। आलू में फाइबर की महत्वपूर्ण मात्रा रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में मदद करती है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। एनएचएएनईएस के आधार पर कहा गया है कि आलू में मौजूद पोटेशियम की उच्च मात्रा और सोडियम की कम मात्रा से कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा लगभग न के बराबर होता है।

दिमाग के लिए भी फायदेमंद है आलू

मस्तिष्क की उचित कार्यप्रणाली बड़े पैमाने पर ग्लूकोज स्तर, विटामिन-बी परिसर के विभिन्न घटकों, ऑक्सीजन आपूर्ति, ओमेगा-3 जैसे फैटी एसिड, कुछ हार्मोन और एमिनो एसिड पर निर्भर करती है। आलू में यह सभी तत्व मौजूद होते हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि आलू मस्तिष्क के लिए भी बहुत लाभकारी है। आलू मस्तिष्क को थकने से रोकता है और आपको हर समय सतर्क रखता है।जिन मरीजों के पाचनांगों में अम्लता (खट्टापन) की अधिकता है, खट्टी डकारें आती हैं, वायु अधिक बनती है, उनके लिए गरम-गरम राख या रेत में भुना हुआ आलू बहुत लाभदायक है।

आलू के आसान घरेलू नुस्खे

* रक्तपित्त बीमारी में कच्चा आलू बहुत फायदा करता है।
* कभी-कभी चोट लगने पर नील पड़ जाती है। नील पड़ी जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाएँ ।
* शरीर पर कहीं जल गया हो, तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो, त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है।


* भुना हुआ आलू पुरानी कब्ज और अंतड़ियों की सड़ांध दूर करता है। आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित्त को रोकता है।
* चार आलू सेंक लें और फिर उनका छिलका उतार कर नमक, मिर्च डालकर नित्य खाएं। इससे गठिया ठीक हो जाता है।
* गुर्दे की पथरी में केवल आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है। पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियाँ और रेत आसानी से निकल जाती हैं।
* उच्च रक्तचाप के रोगी भी आलू खाएँ तो रक्तचाप को सामान्य बनाने में लाभ करता है।
* आलू को पीसकर त्वचा पर मलें। रंग गोरा हो जाएगा।
* कच्चा आलू पत्थर पर घिसकर सुबह-शाम काजल की तरह लगाने से 5 से 6 वर्ष पुराना जाला और 4 वर्ष तक का फूला 3 मास में साफ हो जाता है।
* आलू का रस दूध पीते बच्चों और बड़े बच्चों को पिलाने से वे मोटे-ताजे हो जाते हैं। आलू के रस में मधु मिलाकर भी पिला सकते हैं।
* आलुओं में मुर्गी के चूजों जितना प्रोटीन होता है, सूखे आलू में 8.5 प्रतिशत प्रोटीन होता है। आलू का प्रोटीन बूढ़ों के लिए बहुत ही शक्ति देने वाला और बुढ़ापे की कमजोरी दूर करने वाला होता है।



बैंगन सब्जी के फायदे व नुकसान



बैंगन की सब्जी भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीन काल से ही इस्तेमाल होने वाली सब्जी में से है. हलांकि अब इसे दुनिया भर में उगाया जाता है. इसके कई रंग और रूप हैं. लगभग 800 साल पहले मध्य पूर्व और भूमध्य क्षेत्र में इसकी खेती की शुरुआत हुई थी जबकि इंग्लैण्ड में इसे 16वीं सदी से उगाया जाने लगा. इसे भारत में सब्जियों का राजा कहा जाता है. क्योंकि यह सांस्कृतिक विरासत में सबसे अधिक बहुमुखी और कार्यात्मक खाद्य पदार्थों में से एक है. इसका उपयोग सूप, स्टू, सॉस में और कई व्यंजनों में अकेले किया जाता है. यह स्वादिष्ट तो होता ही है साथ ही यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभदायक है. इसमें विटामिन सी, विटामिन के, विटामिन बी 6, थायामिन, नियासिन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, कॉपर, फाइबर,पोटेशियम और मैंगनीज पाया जाता है. इसकी एक विशेष बात ये है कि इसमें कोलेस्ट्रोल या संतृप्त वसा नहीं पाया जाता है. बैंगन के फायदे और नुकसान निम्लिखित हैं.
 पाचन के लिए
इसमें मौजूद आहार फाइबर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्वास्थ्य और आंत्र की नियमित गतिविधि के लिए जरुरी होता है. ये हमारे आंत्र की गतिविधियों को बढ़ाता है जिससे पाचन सही रहता है. फाइबर अंत में गैस्ट्रिक रस के स्राव को उत्तेजित करता है जिससे खाद्य पदार्थों के प्रसंस्करण के माध्यम से पोषक तत्व अवशोषित होते हैं. फाइबर हृदय रोग की समस्या में लाभदायक है.
बालों के लिए
बैंगन में मौजूद प्रचुर मात्रा में खनिज, विटामिन और पानी बालों की जड़ों को मजबूत बनता है. इसके लिए एक छोटे से बैंगन को मीन्स करे लें और उसे 10-15 मिनट के लिए अपनी खोपड़ी पर रगड़ें. अब गुनगुने पानी और हल्के शैम्पू के साथ बालों को धो लें.



मधुमेह के लिए
बैंगन में पाए जाने वाले फाइबर की मात्रा उच्च जबकि घुलनशील कार्बोहाइड्रेट कम मात्रा में पाया जाता है जो मधुमेह को संतुलित करने में मदद करते हैं. ये ग्लूकोज और इंसुलिन गतिविधि को संतुलित करता है और मधुमेह जैसी समस्या में मदद करता है.
मस्तिष्क के लिए
बैंगन पाए जाने वाले फाइटोन्‍यूट्रीएंटस, संज्ञानात्मक गतिविधि और सामान्य मानसिक स्वास्थ्य के लिए बूस्टर का काम करते हैं. यह मुक्त कणों से बचाने के साथ ही शरीर और मस्तिष्क को विषाक्त पदार्थों और रोगों से सुरक्षित भी रखता है. मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को भी बढ़ाने में मदद करता है.
पाचन के लिए
इसमें मौजूद आहार फाइबर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्वास्थ्य और आंत्र की नियमित गतिविधि के लिए जरुरी होता है. ये हमारे आंत्र की गतिविधियों को बढ़ाता है जिससे पाचन सही रहता है. फाइबर अंत में गैस्ट्रिक रस के स्राव को उत्तेजित करता है जिससे खाद्य पदार्थों के प्रसंस्करण के माध्यम से पोषक तत्व अवशोषित होते हैं. फाइबर हृदय रोग की समस्या में लाभदायक है.
 वजन कम करने में
इसमें किसी प्रकार का वसा या कोलेस्ट्रॉल नहीं होने के कारण ये वजन कम करने या मोटापे से परेशान लोगों के लिए बहुत ही स्वस्थ भोजन है. इसमें मौजूद फाइबर घ्रालिन हार्मोन को बनने से रोकता है.
 हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए
बैंगन में मौजूद पोषक तत्व हड्डियों के पतन और ऑस्टियोपोरोसिस में मदद करता है. इसमें पाए जाने वाले फिनोलिक यौगिक ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण को कम करते हैं हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और हड्डियों के घनत्व को भी बढ़ाने का काम करते हैं. इसमें लोहा और कैल्शियम जैसे कनीज हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है.
कैंसर के लिए


इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स, हमारे प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करके विभिन्न प्रकार की बीमारियों से हमारी रक्षा करते हैं. यह रक्त में सफेद रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करके उनकी गतिविधि को बढ़ाता है. इसमें पाया जाने वाला मैंगनीज एक प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट हैं. इसमें मौजूद नसुनिन और क्लोरोजेनिक एसिड फ्री रेडिकल्स को ख़त्म करते हैं.
 हृदय को स्वस्थ रखने में
यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल की उपस्थिति को कम करके कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है. शरीर में कोलेस्ट्रॉल का संतुलन करके भोजन के आधार पर घटता-बढ़ता है. बैंगन में बायोफ्लैवोनॉइड्स पाए जाते हैं जो रक्तचाप को कम करने में मदद करते हैं.
गर्भवती महिलाओं के लिए
बैंगन में पाए जाने वाले तत्वों की वजह से ये गर्भवती महिलाओं के लिए एक अति आवश्यक तत्व होता है. फोलिक एसिड सीधे न्यूरल ट्यूब के दोष से शिशुओं की सुरक्षा करता है जो कई तरह से हो सकता है.
 त्वचा के लिए
बैंगन त्वचा की नरमी और चिकनेपन के लिए उपयोगी है. बैंगन खनिज, विटामिन और आहार फाइबर में समृद्ध हैं यह हमारे सिस्टम को अंदर से साफ करके त्वचा को सुन्दर बनाता है. सूरज के किरणों के कारण सुस्त और बेजान त्वचा के लिए बैंगन बहुत अच्छा होता है.
बैंगन खाने के नुकसान
अगर आप अवसादरोधी दवा ले रहे हैं तो बैंगन का सेवन नहीं करें क्योंकि यह दवाओं के असर को कम कर सकता है.
बैंगन अधिक तेल सोखता है जो वसा होता है जिसके कारण आपका वजन बढ़ सकता है और आपके दिल को भी नुकसान पहुँच सकता है.
इसके सेवन से कुछ लोगों को एलर्जी की समस्या हो सकती है.
गर्भवती महिलाओं को बहुत अधिक बैंगन नहीं खाना चाहिए क्योंकि यह प्राकृतिक मूत्रवर्धक है और भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकता है.




एलोवेरा से तेजी से वजन कम करें


आज के समय में ज्यादातर लोग अपने बढ़ते हुए वजन की समस्या को लेकर परेशान रहते हैं. अपने वजन को कम करने के लिए लोग खाना-पीना तक छोड़ देते हैं. पर हम आपको बता दें की खाना ना खाने से वजन कम नहीं होता है, बल्कि आपको कमजोरी महसूस होने लगती है. अगर आप अपने वजन को कम करना चाहते हैं तो आज हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं, जिसके इस्तेमाल से आप अपने वजन को आसानी से कम कर सकते हैं.
हम सभी जानते हैं कि घर में लगा कांटेदार एलोवेरा हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिये कितना ज्‍यादा लाभकारी है। ऐलोवेरा बालों, चेहरे तथा शरीर के लिये काफी लाभकारी है। पर क्‍या आप जानते हैं कि एलोवेरा जैल वजन को कम करने के भी काम आ सकता है। एलोवेरा जैल को आप पानी, जूस या उसकी स्‍मूदी बना कर दिन में कई बार पी सकते हैं। एलोवेरा कई पोषक तत्‍वों से भरा है। इसमें 75 एक्‍टिव विटामिन्‍स, मिनरल्‍स, एंजाइम्‍स, काबोहाइड्रेट्स, अमीना एसिड, सेलिसिलिक एसिड और फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं। ये सभी चीज़ें आपका वजन बड़ी आसानी से और बिना पैसे खर्च किये कम करेंगी। अगर आप नियमित तौर पर एलोवेरा जूस का सेवन करेंगे तो आपका ना केवल मोटापा घटेगा बल्‍कि शरीर की अन्‍य बीमारियां भी दूर हो जाएंगी। आइये जानते हैं कि एलोवेरा को आप किन-किन चीज़ों के साथ मिक्‍स कर के पी सकते हैं, जिससे आपका मोटापा जल्‍दी खतम हो सके।
Aloe Vera Juice For Weight Loss: अगर आप काफी समय से वजन कम करना चाहते हैं, तो यकीनन अब तक आप वजन कम करने के लिए भोजन के बारे में बहुत कुछ जान चुके होंगे. वजन कम (Weight Loss) करने से जुड़े फूड, वेट लॉस डाइट और उनके शरीर और स्वास्थ्य पर उनके प्रभाव के बारे में आपको अच्छी तरह से पता होना चाहिए. हालांकि, ऐसा भी होता है कि कई बार आप एक्सरसाइज और डाइट दोनों को आजमा लेते हैं, लेकिन इसके बाद भी नतीजे नहीं मिलते. कई बार यह काफी डिमोनेटिव हो सकता है और कुछ ही समय में आपका मनोबल गिरा सकता है. अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है तो परेशान न हों. आपको बस इतना करना है कि वजन कम करने में मदद करने के लिए कुछ डाइटरी ट्विक बनाएं और इस हेल्दी ड्रिंक को अपने रोजमर्रा के आहार में शामिल करें.
How To Use Aloe Vera To Lose Weight:

एलोवेरा जूस (Aloe Vera Juice) एक ऐसा पेय है जो प्राकृतिक रूप से पेट की चर्बी को कम करने में आपकी मदद कर सकता है. एलोवेरा या घृतकुमारी विभिन्न आयुर्वेदिक नुस्खों, टॉनिक और दवाओं का हिस्सा रहा है. आयुर्वेद विशेषज्ञ, डॉ. आशुतोष गौतम के अनुसार, "एलोवेरा में कई बीमारियों के इलाज की क्षमता है और यह शरीर को संपूर्ण पोषण प्रदान करता है."
सोते समय इस पेय का सेवन आपके शरीर के चयापचय को बढ़ावा देने का एक अच्छा तरीका है, जो आपके वजन घटाने के कार्यक्रम की गति को और तेज करेगा. अगर आपको एलोवेरा जूस का स्वाद पसंद नहीं है, तो आप इसे अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें थोड़ा सा शहद भी मिला सकते हैं.
How to Drink Aloe to Lose Weight: वजन घटाने को बढ़ावा देने में पाचन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और एलोवेरा का रस पाचन को बढ़ावा देने और पेट से जुड़ी परेशानियों को दूर करने के काम आ सकता है.

एलोवेरा और नींबू एलोवेरा की जैली को एक गिलास में निकाल कर उसमें नींबू, पानी और थोड़ी सी शहद मिक्‍स कर के पी लें। नियमित रूप से पीने पर मोटापा कम होता है।
एलोवेरा और शहद एक गिलास एलोवेरा जूस में 1 चम्‍मच शहद मिक्‍स करें। इसे अच्‍छे से चलाएं और पी लें। इसे नियमित रूप से पीने पर मेटाबॉलिज्‍म बढ़ता है, पेट ठीक रहता है और अत्‍यधिक फैट बर्न होता है।




सामान्य रोगों के घरेलू ,आयुर्वेदिक नुस्खे


                                                   

अक्सर घर के बुजुर्गों के पास ही हर समस्या का समाधान मिल जाया करता है, जो रामबाण इलाज होता है। ऐसी ही कुछ छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जि‍न्हें इन घरेलू नुस्खों से ठीक किया जा सकता है-
* दांत दर्द - हल्दी एवं सेंधा नमक महीन पीसकर, उसे शुद्ध सरसों के तेल में मिलाकर सुबह-शाम मंजन करने से दांतों का दर्द बंद हो जाता है।
*बच्चों के पेट के कीड़े - छोटे बच्चों के पेट में कीड़े हों तो सुबह एवं शाम को प्याज का रस गरम करके 1 तोला पिलाने से कीड़े अवश्य मर जाते हैं। धतूरे के पत्तों का रस निकालकर उसे गरम करके गुदा पर लगाने से चुन्ने (लघु कृमि) से आराम हो जाता है।
*कान दर्द - प्याज पीसकर उसका रस कपड़े से छान लें। फिर उसे गरम करके 4 बूंद कान में डालने से कान का दर्द समाप्त हो जाता है।
*छोटे बच्चों को उल्टी दस्त - पके हुए अनार के फल का रस कुनुकुना गरम करके प्रात:, मध्यान्ह एवं सायं को 1-1 चम्मच पिलाने से शिशु-वमन अवश्य बंद हो जाता है।
* गिल्टी का दर्द - प्याज पीसकर उसे गरम कर लें। फिर उसमें गो-मूत्र मिलाकर छोटी-सी टिकरी बना लें। उसे कपड़े के सहारे गिल्टी पर बांधने से गिल्टी का दर्द एवं गिल्टी समाप्त हो जाती है।
* दांतों के सुराख - कपूर को महीन पीसकर दांतों पर उंगली से लगाएं और उसे मलें। सुराखों को भली प्रकार साफ कर लें। फिर सुराखों के नीचे कपूर को कुछ समय तक दबाकर रखने से दांतों का दर्द निश्चित रूप से समाप्त हो जाता है।
*कान की फुंसी - लहसुन को सरसों के तेल में पकाकर, उस तेल को सुबह, दोपहर और शाम को कान में 2-2 बूंद डालने से कान के अंदर की फुंसी बह जाती है अथवा बैठ जाती है तथा दर्द समाप्त हो जाता है।
*कुकुर खांसी - फिटकरी को तवे पर भून लें और उसे महीन पीस लें। तत्पश्चात 3 रत्ती फिटकरी के चूर्ण में समभाग चीनी मिलाकर सुबह, दोपहर और शाम को सेवन करने से कुकुर खांसी ठीक हो जाती है।
* कब्ज दूर करने हेतु - 1 बड़े साइज का नींबू काटकर रात्रिभर ओस में पड़ा रहने दें। फिर प्रात:काल 1 गिलास चीनी के शरबत में उस नींबू को निचोड़कर तथा शरबत में नाममात्र का काला नमक डालकर पीने से कब्ज निश्चित रूप से दूर हो जाता है।
* पेशाब की जलन - ताजे करेले को महीन-महीन काट लें। पुन: उसे हाथों से भली प्रकार मल दें। करेले का पानी स्टील या शीशे के पात्र में इकट्ठा करें। वही पानी 50 ग्राम की खुराक बनाकर 3 बार (सुबह, दोपहर और शाम) पीने से पेशाब की कड़क एवं जलन ठीक हो जाती है।
*सिरदर्द - सोंठ को बहुत महीन पीसकर बकरी के शुद्ध दूध में मिलाकर नाक से बार-बार खींचने से सभी प्रकार के सिरदर्द में आराम होता है।
*पेशाब में चीनी (शकर)- जामुन की गुठली सुखाकर महीन पीस डालें और उसे महीन कपड़े से छान लें। अठन्नीभर प्रतिदिन 3 बार (सुबह, दोपहर और शाम) ताजे जल के साथ लेने से पेशाब के साथ चीनी आनी बंद हो जाती है। इसके अतिरिक्त ताजे करेले का रस 2 तोला नित्य पीने से भी उक्त रोग में लाभ होता है।
*जुकाम - 1 पाव गाय का दूध गरम करके उसमें 12 दाना कालीमिर्च एवं 1 तोला मिश्री- इन दोनों को पीसकर दूध में मिलाकर सोते समय रात को पी लें। 5 दिन में जुकाम बिलकुल ठीक हो जाएगा अथवा 1 तोला मिश्री एवं 8 दाना कालीमिर्च ताजे पानी के साथ पीसकर गरम करके चाय की तरह पीयें और 5 दिन तक स्नान न करें।
*मंदाग्नि - अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े करके नींबू के रस में डालकर और नाममात्र का सेंधा नमक मिलाकर शीशे के बर्तन में रख दें। 5-7 टुकड़े नित्य भोजन के साथ सेवन करें, मंदाग्नि दूर हो जाएगी।
* खूनी दस्त - 2 तोला जामुन की गुठली को ताजे पानी के साथ पीस-छानकर, 4-5 दिन सुबह 1 गिलास पीने से खूनी दस्त बंद हो जाता है। इसमें चीनी या कोई अन्य पदार्थ नहीं मिलाना चाहिए।



* मोटापा दूर करना - 1 नींबू का रस 1 गिलास जल में प्रतिदिन खाली पेट पीने से मोटापा दूर हो जाता है। ऐसा 3 महीने तक निरंतर करना चाहिए। गर्मी एवं बरसात के दिनों में यह प्रयोग विशेष लाभदायक होता है।
*पेट के केंचुए एवं कीड़े - 1 बड़ा चम्मच सेम के पत्तों का रस एवं शहद समभाग मिलाकर प्रात:, मध्यान्ह एवं सायं को पीने से केंचुए तथा कीड़े 4-5 दिन में मरकर बाहर निकल जाते हैं।
*आग से जल जाने पर - कच्चे आलू को पीसकर रस निकाल लें, फिर जले हुए स्थान पर उस रस को लगाने से आराम हो जाता है। इसके अतिरिक्त इमली की छाल जलाकर उसका महीन चूर्ण बना लें, उस चूर्ण को गो-घृत में मिलाकर जले हुए स्थान पर लगाने से आराम हो जाता है।
* फोड़े - नीम की मुलायम पत्तियों को पीसकर गो-घृत में उसे पकाकर (कुछ गरम रूप में) फोड़े पर हल्के कपड़े के सहारे बांधने से भयंकर एवं पुराने तथा असाध्य फोड़े भी ठीक हो जाते हैं।
*अधकपारी का दर्द - 3 रत्ती कपूर तथा मलयागिरि चंदन को गुलाब जल के साथ घिसकर (गुलाब जल की मात्रा कुछ अधिक रहे) नाक के द्वारा खींचने से अधकपारी का दर्द अवश्य समाप्त हो जाता है।
*मस्तिष्क की कमजोरी - मेहंदी का बीज अठन्नीभर पीसकर शुद्ध शहद के साथ प्रतिदिन 3 बार (सुबह, दोपहर और शाम) सेवन करने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर हो जाती है और स्मरण शक्ति ठीक होती है तथा सिरदर्द में भी आराम हो जाता है।



तेज नाड़ी चलने के कारण और उपचार



इंसान के शरीर का हर अंग का सही से कार्य करना बहुत ही जरूरी है अन्यथा वो रोगों के गिरफ्त में आ जायेगा। इसलिए हमें अपने स्वास्थ्य पर बहुत ही ध्यान रखने की जरूरत होती है। इंसान के शरीर का सबके महत्वपूर्ण भागों में नाड़ी भी एक महत्वपूर्ण भाग है जिसमे खून का दौड़ान होता है और इसी नाड़ी से हमारे शरीर के पूरे पार्ट को ब्लड की सप्लाई होती है। आज हम आपको बताएंगे कि एक स्वस्थ व्यक्ति की नाड़ी कितनी बार चलती है। तो आइये जानते हैं।
एक स्वस्थ व्यस्क पुरुष की नाड़ी सामान्यतः 72 बार एक मिनट में चलती है। उम्र के साथ इस नाड़ी कम्पन्न में भिन्नता हो सकती है। नाड़ी जब सामान्य सी अधिक या कम चलने लगे तो इसका संकेत होता है कि व्यक्ति किसी रोग से ग्रसित है। इसलिए डॉक्टर या वैद्य जब भी रोगी को चेक करते हैं तो उसके हाथ की नाड़ी को पकड़ कर ये देखते हैं कि वो एक मिनट में कितनी बार चल रहा है या फिर उसके चलने की रफ्तार क्या है और इसी आधार पर रोगी के रोग को पता कर पाते हैं।

एक स्वस्थ वयस्क में सामान्य हृदय गति 60-80 बीट प्रति मिनट है। लेकिन, ऐसा होता है कि शारीरिक तनाव जैसे स्पष्ट कारणों से, हमारी नाड़ी की दर बढ़ जाती है, और कभी-कभी यह प्रक्रिया अन्य अप्रिय संवेदनाओं के साथ होती है। और कई खुद से पूछते हैं, क्या इस बारे में चिंता करने लायक है? लेकिन, अगर यह घटना नियमित चरित्र प्राप्त करती है, तो इसकी घटना का कारण पता लगाना फायदेमंद है। लेख में, हम मुख्य कारणों पर विचार करेंगे जो दिल को तेजी से हराते हैं, साथ ही शरीर पर तेजी से नाड़ी के प्रभाव का कारण बनते हैं।
नाड़ी के मूल्यों की सामान्य सीमाएं, सबसे पहले, व्यक्ति की उम्र पर निर्भर करती हैं, लेकिन यह जीव की व्यक्तिगत विशेषताओं के बारे में याद रखने योग्य भी है।
बच्चों के लिए आदर्श 110-140 बीट प्रति मिनट है।
7 साल से कम उम्र के बच्चे - 95-100 बीट प्रति मिनट।
किशोर - प्रति मिनट 75-85 धड़कता है।
वयस्क - 60-80 बीट प्रति मिनट।
बुजुर्ग - 60  प्रति मिनट।


इन संकेतकों से ऊपर जो कुछ भी तेजी से नाड़ी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
पहला सवाल, जिस पर आपको तेजी से दिल की धड़कन के साथ उत्तर खोजने की आवश्यकता है, इसकी घटना के कारण हैं। वे सामान्य शारीरिक और रोगजनक दोनों हो सकते हैं। और यहां दूसरे मामले में, इस लक्षण पर ध्यान देना आवश्यक है।
लेकिन सबसे पहले, हम शारीरिक कारणों पर विचार करें, जब तेजी से नाड़ी जीव की सामान्य प्रतिक्रिया होती है।
1. शारीरिक गतिविधि।
2. तनावपूर्ण स्थिति।
3. डर और उत्तेजना।
4. शरीर की सुविधा।
लेकिन अगर नाड़ी आराम से अधिक बार हो गई है, तो यह समझना महत्वपूर्ण है कि कौन से कारकों ने इसे उकसाया।
1. नींद में गड़बड़ी
2. उत्तेजक की रिसेप्शन।
3. एंटीड्रिप्रेसेंट्स का उपयोग।
4. पदार्थों का उपयोग जो मानसिक स्थिति को बदलता है।
5. पेय पदार्थों की अत्यधिक खपत, जिसमें कैफीन शामिल है।
6. शराब
7. दवाओं का अनियंत्रित उपयोग।
8. अतिरिक्त वजन।
9. आयु परिवर्तन।
10. उच्च रक्तचाप।
11. तीव्र श्वसन रोग।
12. शरीर के तापमान में वृद्धि हुई।
13. गर्भावस्था और विषाक्तता।
रैपिड पल्स ऊंचा या कम दबाव पर हो सकता है।
यदि उपरोक्त कारणों को बाहर रखा गया है, तो यह रोग के लक्षण के रूप में तीव्र हृदय गति पर विचार करने लायक है।
1. अंतःस्रावी तंत्र में विकार। उदाहरण के लिए, यदि थायराइड ग्रंथि प्रभावित होता है, तो इस तरह के लक्षण तेजी से दिल की धड़कन, वजन घटाने, चिड़चिड़ापन में लंबे समय तक हमले के रूप में।
2. क्लाइमेक्स।
3. जहर
4. संक्रामक रोग। इन्हें निर्जलीकरण और शरीर के तापमान में वृद्धि से दर्शाया जाता है, जो नाड़ी को प्रभावित करता है।
5. एनीमिया। इसके अलावा, लक्षणों में पैल्लर, त्वचा, सामान्य कमजोरी शामिल है।
6. वनस्पति-संवहनी dystonia। इसके अलावा, यह बीमारी सिरदर्द, कम रक्तचाप, चक्कर आना जैसे लक्षणों से विशेषता है।
7. हृदय रोगों की एक संख्या - मायोकार्डिटिस, हृदय रोग, धमनी उच्च रक्तचाप, इस्किमिक रोग, कार्डियोमायोपैथी, मायोकार्डियल डाइस्ट्रोफी, एरिथमिया।
इन बीमारियों को बाहर करने के लिए, आपको हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
8. घातक और सौम्य ट्यूमर।
इसलिए, यदि तेजी से नाड़ी के लिए स्पष्ट और स्पष्ट कारण नहीं हैं, तो आपको डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
अक्सर, तेजी से नाड़ी tachycardia जैसे एक घटना के कारण होता है।
टैचिर्डिया साइनस और पैराक्सिस में बांटा गया है।
साइनस टैचिर्डिया शारीरिक तनाव या तनाव के कारण एक तेज नाड़ी है। दिल की धड़कन की संख्या प्रति मिनट 100 धड़कन से अधिक हो सकती है, लेकिन कारकों को समाप्त होने पर यह सामान्यीकृत होता है।
Paroxysmal tachycardia दिल की बीमारी के कारण दिल की दर में वृद्धि है।
वृद्धि 140 से 220 बीट प्रति मिनट की सीमा में है। इस स्थिति को अन्य लक्षणों, जैसे चक्कर आना, मतली, सामान्य कमजोरी के रूप में चिह्नित किया जाता है। हमला अप्रत्याशित रूप से शुरू होता है, और उसके सामने एक धक्का की सनसनी होती है।
Paroxysmal tachycardia उत्तेजना के क्षेत्रों में अलग है। दो प्रकार हैं - एट्रियल और वेंट्रिकुलर।
वेंट्रिकुलर टैचिर्डिया। इसका कारण दिल की मांसपेशी, हृदय रोग, विभिन्न प्रकार की इस्किमिक बीमारी की सूजन संबंधी बीमारियां हो सकती है। यह एक बहुत ही खतरनाक स्थिति है जो हृदय संबंधी मौत, फुफ्फुसीय edema, सदमे जैसे गंभीर परिणामों की शुरुआत कर सकती है।
एट्रियल tachycardia। इस घटना के साथ, दिल ताल सामान्य है, लेकिन दिल की मांसपेशियों की ऑक्सीजन भुखमरी है। हमले के दौरान, सांस की तकलीफ हो सकती है, सीने में भारीपन की भावना हो सकती है, रक्तचाप बढ़ सकता है, रोगी गैस से शुरू होता है। पिछले दो लक्षण एक ऐसी स्थिति के लिए विशिष्ट हैं जहां तंत्रिका वनस्पति तंत्र के उल्लंघन से टचकार्डिया ट्रिगर होता है।
इलाज के लिए इस प्रकार के टैचिर्डिया के मामले में, निदान को सही ढंग से निर्धारित करना आवश्यक है, और मूल कारण के लिए रोग का इलाज करना आवश्यक है।
बेशक, आपको आत्म-औषधि नहीं करना चाहिए, पेशेवर सलाह लेना चाहिए और सभी आवश्यक परीक्षाओं के माध्यम से जाना चाहिए। लेकिन अगर आपको गंभीर बीमारियां नहीं हैं, तो आप घर पर कई उपाय कर सकते हैं।
1. स्वस्थ जीवन शैली का नेतृत्व करें और मध्यम शारीरिक गतिविधि का प्रयोग करें।
 2. यदि हृदय गति में वृद्धि तनाव कारक के कारण होती है, तो आप वैलेरियन और मातवार्ट जैसे जड़ी-बूटियों के आधार पर sedatives का एक कोर्स पी सकते हैं, लेकिन पहले इस्तेमाल के लिए पर्चे और contraindications पढ़ें।
3. रिफ्लेक्सथेरेपी।
4. सुखदायक जड़ी बूटी के decoctions प्राप्त। उदाहरण के लिए, हौथर्न का एक जलसेक तैयार करें। उबलते पानी के 250 मिलीलीटर के 15 ग्राम ब्रू, गर्मी में कुछ घंटे खड़े हो जाओ। दिन में तीन बार भोजन से पहले आधे घंटे तक गिलास का एक तिहाई पीएं।
5. आहार उत्पादों में प्रवेश करें जिनके दिल और रक्त वाहिकाओं के काम पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है। इनमें शामिल हैं - currant, कुत्ता गुलाब, चुकंदर, अजमोद, पागल।
6. गैर पारंपरिक तरीकों में मिट्टी का उपयोग शामिल है। एक लोज़ेंग बनाएं और हमले के दौरान दिल के क्षेत्र में संलग्न करें।
7. श्वसन जिम्नास्टिक का संचालन करें। गहरी सांस लें हवा को 15 सेकंड या 10 सेकंड तक पकड़ें। धीरे-धीरे निकालें। या आप एक गहरी सांस ले सकते हैं, फिर अपनी नाक और मुंह चुटकी लें, और निकालने की कोशिश करें। आप एक उल्टी प्रतिबिंब को उत्तेजित करने का भी प्रयास कर सकते हैं।
8. अगर आपके डॉक्टर ने अनुमति दी है, तो आप corvalol या valocordin लागू कर सकते हैं।
9. गर्दन की शहद मालिश के पाठ्यक्रम के साथ-साथ भोजन में शहद की थोड़ी मात्रा का नियमित सेवन करना।
बढ़ी हुई दबाव और हृदय गति में वृद्धि अक्सर सामान्य कारणों से उत्तेजित होती है, जैसे शारीरिक गतिविधि, मानसिक आंदोलन।
यह फिजियोलॉजी द्वारा समझाया गया है, क्योंकि भौतिक परिश्रम के साथ एक एड्रेनालाईन भीड़ है, जो नाड़ी में वृद्धि और दबाव में वृद्धि को बढ़ावा देती है।
इसलिए यदि संकेतकों की संख्या एक महत्वपूर्ण स्तर पर नहीं है, और अन्य लक्षण अनुपस्थित हैं, तो इसे शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया माना जा सकता है।
लेकिन यह निम्नलिखित बीमारियों की उपस्थिति के बारे में भी बात कर सकता है:
 थायराइड ग्रंथि विकार।
 एनीमिया।
 ओन्कोलॉजिकल neoplasms।
 श्वसन तंत्र में गड़बड़ी।
स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
इसलिए, इस मामले में, यह एक डॉक्टर के लिए परामर्श के लायक भी है।
निम्न रक्तचाप और तीव्र हृदय गति का संयोजन निम्न स्थितियों के लिए विशेषता है:
एनाफिलेक्टिक सदमे।
विषाक्त पदार्थों के साथ जहर।
व्यापक रक्त हानि।
मायोकार्डियल इंफार्क्शन।
न्यूरोकिर्यूलेटरी डाइस्टनिया।
गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल पृष्ठभूमि में परिवर्तन।
कम दबाव और दिल की दर में एक साथ वृद्धि के तहत, निम्नलिखित लक्षण प्रकट होते हैं: छाती में अप्रिय संवेदना, कमजोर या मध्यम तीव्रता के दिल में दर्द, एक स्पंदनात्मक प्रकृति का सिरदर्द।
यदि आपके पास तेज दिल की धड़कन है, तो, सबसे पहले, आपको निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए:
 1. हमले की अवधि।
2. घटना का घटना।
3. घटना का क्षण और इससे पहले की क्रियाएं।
4. क्या दिल की ताल की गड़बड़ी है।
5. अतिरिक्त लक्षणों की उपस्थिति।
6. यदि संभव हो, तो नाड़ी गिनें और दबाव को मापें। संकेतक ठीक करने के लिए।
इस चरण में आप आकलन कर सकते हैं कि आपकी हालत कितनी खतरनाक है, और क्या यह सामान्य है। यदि आपको एक गंभीर स्थिति पर संदेह है, जैसे दिल का दौरा या एनाफिलेक्टिक सदमे, तो आपको तुरंत एम्बुलेंस कॉल करना चाहिए।
यदि स्थिति बाहरी कारक के कारण होती है, तो इसे समाप्त किया जाना चाहिए। जब अंधाधुंध के आगमन से ठीक पहले खून बहने से पहले नाड़ी की रैपिडिटी तेज रक्त हानि से उकसाती है।
इसके अलावा, तेजी से नाड़ी के अलावा, तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए:
 रक्तचाप में तेजी से वृद्धि हुई।
 हृदय रोग हैं।
 थायराइड समारोह बाधित है।
 मधुमेह मेलिटस।
 रिश्तेदारों में हृदय रोग से अचानक मौत के मामले हैं।
 सबसे नज़दीकी रिश्तेदारों में हृदय ताल की गड़बड़ी होती है।
 तुम गर्भवती हो
 प्रत्येक नया हमला पिछले एक की तुलना में भारी है।
यदि स्थिति गंभीर नहीं है, लेकिन स्पष्ट कारणों से दौरे के मामले अधिक बार हो जाते हैं, तो आपको निकट भविष्य में एक डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
1. अपने चेहरे को ठंडा पानी से धोएं।
2. कुछ पानी पीओ।
3. ताजा हवा प्रदान करें।
4. ऑक्सीजन के लिए मुफ्त पहुंच प्रदान करें, ऐसा करने के लिए, बटन दबाए रखें, बेल्ट या संबंधों को ढीला करें, गर्म और घने कपड़े से छुटकारा पाएं।
5. यदि सामान्य कमजोरी या चक्कर आती है, तो अपनी तरफ झूठ बोलें।
6. आंखों को हल्के से मालिश करें।
नाड़ी को सामान्य करने के लिए प्रोफेलेक्सिस के रूप में, श्वसन जिमनास्टिक, योग, व्यसनों को अस्वीकार करने, उचित पोषण में संक्रमण, बिस्तर पर जाने से पहले चलने, औषधीय स्नान लेने की सिफारिश की जाती है।
बढ़ी हुई हृदय गति एक गंभीर स्थिति का लक्षण हो सकती है जो आपके जीवन को धमकी देती है, इसलिए इसे अनदेखा न करें।
गंभीर बीमारियों को बाहर करने के लिए एक बार फिर से अपने स्वास्थ्य की जांच करना आवश्यक है। एम्बुलेंस या डॉक्टर की सलाह से संपर्क करने से डरो मत।
विकास के शुरुआती चरणों में पता चला जब सबसे गंभीर बीमारियों का अधिक सफलतापूर्वक इलाज किया जाता है।
आज, कई बीमारियां बुरी आदतों, अतिरक्षण और तनाव के कारण होती हैं।

रोग की पहचान कैसे होती है
नाड़ी से शरीर के रोगों के बारे में कैसे पता किया जाता है,-
2) जिस तरफ के फेफड़े (Lung) में कोई रोग होता हैं उस ओर की नाड़ी ऊँची होती है।
3) पुराने सिरदर्द वाले रोगी की नाड़ी प्राय: कमजोर होती है।
4) यदि बायीं नाड़ी तेज हो और साथ में खांसी और बुखार भी हो तो फेफड़े (lungs) में रोग होता है।
5) यदि बायीं नाड़ी तीव्र हो परन्तु खांसी या बुखार नहीं हो तो यह मूत्राशय (Urinary-Bladder) की तकलीफ बताती है।
6) किडनी के रोग में नाड़ी कठोर और दृढ़ होती है।
7) यदि नाड़ी बिल्कुल पतली या चींटी की चल जैसी हो जाए तो यह मृत्यु की सूचक है।
8) यदि नाड़ी तेज और लगतार चलते-चलते अटकने लगे तो यह मौत के समीप होने की सूचना देती है।
9) यदि रोगी बुखार में दही खा लेता है तो उसकी नाड़ी गर्म और बहुत तेज हो जाती है।
10) बलगम की अधिकता होने पर नाड़ी मोटी हो जाती है।
11) पाइल्स के रोग में नाड़ी कभी धीमी, कभी टेढ़ी-मेढ़ी और कभी कोमल चलती है।
12) जोड़ो के दर्द में नाड़ी कभी-कभी तेजी से फड़कती है, तो कभी दुर्बलता से।
13) पीरियड्स में तकलीफ होने पर नाड़ी मोटी और स्थिर हो जाती है।
14) तेल और गुड़ खाने वाले की नाड़ी कठोर और शक्तिशाली हो जाती है।
15) अधिक नमकीन भोजन से नाड़ी सीधी और तेज हो जाती है।
16) अधिक मीठा खानेवालों की नाड़ी उछल कर चलती है।
17) मूली खाने से नाड़ी की गति सुस्त हो जाती है।




दालचीनी दूध मे मिलाकर पीने के अनुपम फायदे


                       
दालचीनी अपने औषधीय गुणों के साथ-साथ विशिष्ट स्वाद और खुशबू तौर पर भी जानी जाती है। इस लोकप्रिय औषधीय मसाले का उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों, मीठे और नमकीन व्यंजनों, अनाज के नाश्तों, बेक्ड माल और स्नैक्स में किया गया है। यह एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबायोटिक गुणों से भरा हुआ है। दालचीनी के फायदों को अगर लेना चा‍हते हैं इसे आप दूध के साथ ले सकते हैं। इसके अलावा एक और अच्छा तरीका है कि दालचीनी की छड़ को पानी में भिगोएँ और नियमित रूप से उसे पीएं। हालांकि यहां हम आपको सिर्फ दूध के साथ लेने की सलाह दे रहे हैं और इससे होने वाले फायदों के बारे में विस्‍तार से बता रहे हैं।
दालचीनी की सूखी पत्तियां तथा छाल को मसालों के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसकी छाल थोड़ी मोटी, चिकनी तथा हल्के भूरे रंग की होती है। दालचीनी मोटापा कम करने के साथ-साथ कई बीमारियों को भी दूर करता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि अगर आप दालचीनी का दूध के साथ सेवन करते हैं तो आपको कितने फायदे होंगे। साथ ही दालचीनी के साथ शहद मिलाकर खाने से दिल की बीमारियां, कोलेस्ट्रॉल, त्वचा रोग, सर्दी जुकाम, पेट की बीमारियों के लिए फायदेमंद है। आइए जानते हैं और किन बीमारियों के लिए फायदेमंद है दालचीनी: 


जोड़ों के दर्द से दिलाता है आराम 

जोड़ों के दर्द के लिए भी दालचीनी लाभकारी है। हल्के गर्म पानी के साथ दालचीनी पाउडर का नियमित सेवन करने से आपको समस्या से छुटकारा मिलता है। इसके अलावा आप दालचीनी पाउडर को शहद के साथ मिलाकर शरीर में दर्द वाले अंग पर हल्‍के हाथों से मालिश भी कर सकते हैं। दर्द से राहत मिलेगी।

सर्दी-जुकाम और बुखार में है फायदेमंद 

आजकल के मौसम में वायरल बुखार और सर्दी-जुकाम एक आम समस्या हो गई है। ऐसे में दूध के साथ या एक चम्मच शहद में थोड़ा सा दालचीनी पाउडर मिलाकर सुबह-शाम लेने से खांसी-जुकाम में आराम मिलता है।

गले की खराश दूर करे 

गले में खराब होने पर भी दालचीनी फायदा करती है। गर्म पानी में एक चुटकी दालचीनी पाउडर तथा एक चुटकी पिसी काली मिर्च दूध के साथ मिलाकर पीएं। 2 से 3 बार ही इस मिश्रण के सेवन से आपको गले की खराश से आराम मिल जाएगा।


मोटापे दिलाए छुटकारा 

मोटापे जैसी समस्या के लिए भी दालचीनी फायदेमंद है। साफ पानी में 1 चम्मच दाल चीनी पाउडर मिलाकर इसे उबालें। फिर इसमें दो बड़े चम्मच शहद मिलाकर सुबह—शाम लें। नियमित ऐसा करने से शरीर की अनावश्यक चर्बी का सफाया होता है। 
कब्‍ज और गैसे दिलाए मुक्ति

कब्ज, गैस और अपच जैसी पेट की समस्‍या के लिए भी दालचीनी किसी चमत्कार से कम नहीं है। दूध के साथ थोड़ा सा दालचीनी पाउडर मिलाकर लेने से पेट दर्द और एसिडिटी में आराम मिलता है तथा भोजन भी आसानी से पच जाता है।

दालचीनी वाले दूध के ये फायदे भी उल्लेखनीय हैं-

दिल के रोगों में है लाभकारी 

दिल के दौरे की संभावना को भी दालचीनी खत्म करता है। जिन लोगों को पहले भी हार्ट अटैक का दौरा पड़ चुका है वे अगर दालचीनी का साबुत सेवन करेंगे तो भविष्‍य में हार्ट अटैक की संभावना काफी कम हो जाती है।
*जिन लोगों को हड्डियों में दर्द और कमजोरी रहती हो तो वे दूध में एक चम्मच दालचीनी का चूर्ण और एक चम्मच शहद को मिलाकर रोज सेवन करें। इस उपाय से कमजोर हड्डियों में ताकत आती है। इसके अलावा यह गठिया की समस्या को भी ठीक करता है।
*कैंसर जैसी घातक और जान लेवा बीमारी से बचने के लिए नियमित दालचीन वाले दूध में शहद को मिलाकर पीएं। इस दूध में कैंसर रोधी गुण होते हैं।
*चेहरे की दाग धब्बों की समस्या व बालों का कमजोर होना शरीर की कमजोरी की वजह व पोषण की कमी की वजह से होता है। जब आप दालचीनी वाला दूध पीते हैं तब यह दूध शरीर के अंदर जाकर काम करता है और आपके चेहरे और बालों से जुड़ी हुई हर समस्या को ठीक कर देता है।



*टाइप -2 डायबिटीज से परेशान लोगों को दालचीन से बना दूध का सेवन करना चाहिए। दालचीनी वाला दूध ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है। और यह आपको डायबिटीज की बीमारी में फायदा देता है।
*कई बार यह समस्या हो जाती है कि खाना शरीर में पचता नहीं है जिस वजह से गैस व एसिडिटी बढ़ने लग जाती है। इसके अलावा अपच आदि भी होने लगती है। दालचीनी से बना हुआ दूध आपकी ये सारी समस्याएं पल भर में खत्म कर सकता है।
*रात को सोने से पहले आप एक कप दालचीनी वाला दूध का सेवन करें। आपको इससे बहुत ही अच्छी नींद आएगी। और आपकी अनिंद्रा की समस्या भी ठीक हो जाएगी।
*दालचीनी वाला दूध तभी आपको फायदे देता है जब आप इसका सेवन नियमित करते हैं। यह दूध पूरी तरह से आयुवेर्दिक है जिससे आपको किसी भी तरह का विपरीत प्रभाव नही पड़ेगा।कैसे बनाए दालचीनी वाला दूध?

जब आप दूध में दालचीनी के चूर्ण को मिलाते हैं तब दूध के अंदर एंटी बैक्टीरियल गुण तेजी से बढ़ जाते हैं। जिसकी वजह से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। और यह मधुमेह, चेहरे की समस्या और मोटापा आदि जैसी समस्याओं को भी ठीक कर देता है। इसे बनाने का बहुत ही आसान तरीका है।

कैसे बनाए दालचीनी वाला दूध?

जब आप दूध में दालचीनी के चूर्ण को मिलाते हैं तब दूध के अंदर एंटी बैक्टीरियल गुण तेजी से बढ़ जाते हैं। जिसकी वजह से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। और यह मधुमेह, चेहरे की समस्या और मोटापा आदि जैसी समस्याओं को भी ठीक कर देता है। इसे बनाने का बहुत ही आसान तरीका है। एक कप गरम दूध में एक चम्मच दालचीनी का चूर्ण और एक चम्मच शहद को डालकर घोल लें और इसका सेवन करें