धतूरा के औषधीय प्रयोग


 आयुर्वेद के ग्रंथों में अनेक औषधीय गुणों से युक्त वनस्पतियों का वर्णन मिलता है। आज मैं आपको एक ऐसी ही औषधीय वनस्पति के बारे मे उल्लेख करूंगा जिसका नाम धतूरा है। यूं तो ईश्वर को सभी वनस्पतियाँ प्रिय होती हैं, लेकिन धतूरा इसके औषधीय गुणों के कारण एवं सरंक्षण के उद्देश्य से शिवजी को विशेष प्रिय है। आचार्य चरक ने इसे ''कनक'' तथा सुश्रुत ने ''उन्मत्त'' नाम से संबोधित किया है।

परिचय- 

धतूरे का पौधा सारे भारत में सर्वत्र सुगमता के साथ मिलता है। आमतौर पर यह खेतों के किनारे, जंगलों में, गांवों में और शहरों में यहां-वहां उगा हुआ दिख जाता है। भगवान शिव की पूजा के लिए लोग इसके फूल और फलों का उपयोग करते हैं। धतूरा सफेद, काला, नीला, पीला तथा लाल फूल वाला 5 जातियों का मिलता है। इसका पौधा 170 सेमी तक ऊंचा तथा झाड़ीदार होता है। इसकी तना और शाखाएं बैंगनी या हल्के काले रंग की होती हैं। इसके पत्ते दिल के आकार के, अण्डे के समान, चिकने दन्तुर या मुड़े-मुडे़ 3 से 7 इंच तक लम्बे होते हैं। इसके फूल घंटाकार तुरही के आकार के एक साथ 2-2 या 3-3 सफेद बैंगनी चमक लिए हुए 5 से 7 इंच तक लम्बे हो जाते हैं। इसके फल हरे रंग के कांटेदार, गोल-गोल नीचे की ओर लटके 4 खण्डों से युक्त होते हैं। धतूरा के फल पकने पर अपने आप अनियमित ढंग से फट जाते हैं जिनमें से चटपटे, मटमैले भूरे, वृक्काकार, अनेक बीज निकलकर बाहर निकल जाते हैं।

स्वभाव :

 धतूरा गर्म प्रकृति का होता है।

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हानिकारक -: 

धतूरा नशा अधिक लाता है और प्राणों का भी नाश कर देता है। धतूरे के पत्ते और बीज काफी विषैले होते हैं। धतूरे की निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन करने पर मुंह, गले, आमाशय में तेज जलन और सूजन पैदा होती है। व्यक्ति को तेज प्यास लगती हैं। त्वचा सूख जाती है। आंखे व चेहरा लाल हो जाता है। शरीर का तापमान बढ़ जाता है। चक्कर आने लगता है। आंखों के तारे फैल जाते हैं और व्यक्ति को एक वस्तु देखने पर एक से अधिक  दिखाई पड़ने लगती है। रोगी रोने लगता है। नाड़ी कमजोर होकर अनियमित चलने लगती है। यहां तक की श्वासावरोध होकर या हृदयावरोध होकर मृत्यु तक हो सकती है। धतूरे के विषाक्तता के लक्षण मालुम पड़ते ही तुरन्त ही चिकित्सक की सेवाएं लेनी चाहिए।

दोषों को दूर करने वाला 


शहद, मिर्च, सौंफ धतूरा के दोषों को नष्ट करते हैं।

मात्रा- :

 धतूरा के सेवन की मात्रा लगभग 1 ग्राम का चौथाई भाग तक होती है।

गुण : 

धतूरा नशा, गर्मी, गैस को बढ़ाता है, बुखार और कोढ़ को नष्ट करता है तथा सिर की लीखों व जुओं को खत्म करता है।

चक्कर आना के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार 

*धतूरे के पत्तों का धूँआ दमा शांत करता है। तथा
*धतूरे के पत्तों का अर्क कान में डालने से आँख का दुखना बंद हो जाता है।
*धतूरे की जड सूंघे तो मृगीरोग शाँत हो जाता है।
*धतूरे की फल को बीच से तरास कर उसमें लौंग रखे फिर कपड मिट्टी कर भोभर में भूने ,जब भून जावे तब पीस कर उसका उडद बराबर गोलीयाँ बनाये सबेरे साँझ एक -एक गोली खाने से ताप और तिजारी रोग दूर हो जाय और वीर्य का बंधेज होवे।
*धतूरे के कोमल पत्तो पर तेल चुपडे और आग पर सेंक कर बालक के पेट पर बाँधे इससे बालक़ की सर्दी दूर हो जाती है। और फोडा पर बाँधने से फोडा अच्छा हो जाता है। बवासीर और भगन्दर पर धतूरे के पत्ते सेंक कर बाँधे स्त्री के प्रसूती रोग अथवा गठिया रोग होने से धतूरे के बीजों तेल मला जाता है।


अनचाहे मस्से से मुक्ति के उपाय

*आयुर्वेद के ग्रथों में इसे विष वर्ग में रखा गया है। रस विद्या के जानकार इसके बीज का इस्तेमाल विभिन्न योगों में करते हैं। धतूरे के पत्तों और बीजों में हायो- सायमीन और हायोसीन रसायन पाया जाता है ,यही इसका एक्टिव-तत्व है। कटु ,रूक्ष एवं कफ दोष का शमन करने जैसे गुणों से युक्त यह मदकारक (नशा ) भी पैदा करता है। आइये अब हम इसके कुछ औषधीय प्रयोगों को जानते हैं....
*आधा लीटर सरसों के तेल में ढाई सौ ग्राम धतूरे के पत्तों का रस निकालकर तथा इतनी ही मात्रा में पत्तियों का कल्क बनाकर धीमी आंच पर पकाकर जब केवल तेल बच जाय तब बोतल में भरकर रख लें यह सिर में पाए जानेवाले कृमियों (जूएं ) के श्रेष्ठ औषधि है।
*यदि शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन हो तो बस धतूरे के पत्तों को हल्का गुनगुना कर गर्म कर सूजन वाले स्थान पर बाँध दें निश्चित लाभ मिलेगा।
*धतूरा के बीज को अकरकरा और लौंग के साथ मिलाकर छोटी-छोटी गुटिका बना लें। यह श्रेष्ठ कामोद्दीपक प्रभाव दर्शाता है।


कलमी शोरा (पोटाशियम नाईटेरेट) के गुण उपयोग 


*धतूरे के पत्तों का कल्क बनाकर संक्रमित घाव पर लगाने और इसकी पुल्टीश बांधने से घाव जल्द भर जाता है।
*सरसों का तेल 250 मिली ,60 मिलीग्राम गंधक और 500 ग्राम धतूरे के पत्तों का स्वरस इन सबको एक साथ धीमी आंच पर पकाएं। जब तेल बचा रहे तब उसे इक्कठा कर कान में एक या दो बूँद टपका दें। कान दर्द में तुरंत लाभ मिलेगा।
*धतूरे के बीजों के तेल की मालिश पैर के तलवों पर करने से यह उत्तेजक प्रभाव दर्शाता है।
*आधा लीटर सरसों के तेल में ढाई सौ ग्राम धतूरे के पत्तों का रस निकालकर तथा इतनी ही मात्रा में पत्तियों का कल्क बनाकर धीमी आंच पर पकाकर जब केवल तेल बच जाय तब बोतल में भरकर रख लें यह सिर में पाए जानेवाले कृमियों (जूएं ) के श्रेष्ठ औषधि है।

गुदा के रोग: भगंदर, बवासीर की होम्योपैथिक चिकित्सा 

*यदि शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन हो तो बस धतूरे के पत्तों को हल्का गुनगुना कर गर्म कर सूजन वाले स्थान पर बाँध दें निश्चित लाभ मिलेगा।
*धतूरा के बीज को अकरकरा और लौंग के साथ मिलाकर छोटी-छोटी गुटिका बना लें। यह श्रेष्ठ कामोद्दीपक प्रभाव दर्शाता है।
*धतूरे के पत्तों का कल्क बनाकर संक्रमित घाव पर लगाने और इसकी पुल्टीश बांधने से घाव जल्द भर जाता है।
*सरसों का तेल 250 मिली ,60 मिलीग्राम गंधक और 500 ग्राम धतूरे के पत्तों का स्वरस इन सबको एक साथ धीमी आंच पर पकाएं। जब तेल बचा रहे तब उसे इक्कठा कर कान में एक या दो बूँद टपका दें। कान दर्द में तुरंत लाभ मिलेगा।
*धतूरे के बीजों के तेल की मालिश पैर के तलवों पर करने से यह उत्तेजक प्रभाव दर्शाता है।
*बीजों की राख को 125 -250 मिलीग्राम की मात्रा में देने पर ज्वर में भी लाभ मिलता है।
* धतूरे के फलों का चूर्ण 2 .5 ग्राम की मात्रा में बनाकर इसमें आधा चम्मच गाय का घी और शहद मिलकर नित्य चटाने से गर्भधारण में भी मदद मिलती है।

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सावधानी-

   ये तो रही इसके औषधीय गुणों की बात परन्तु धतूरा विष है तथा अधिक मात्रा में सेवन शरीर में रुखापन ला देता है। मात्रा से अधिक प्रयोग करने पर सिरदर्द ,पागलपन और संज्ञानाश (बेहोशी ) जैसे लक्षण उत्पन्न करता है और मृत्यु का कारण भी बन सकता है। अत: इसका प्रयोग चिकित्सक के निर्देशन में सावधानीपूर्वक करें तो बेहतर होगा।




गुर्दे की पथरी(kidney stone) के रामबाण उपचार

  किडनी,युरेटर या ब्ला्डर, में पथरी निर्माण होना एक भयंकर पीडादायक रोग है। मूत्र में पाये जाने वाले रासायनिक पदार्थों से मूत्र अन्गों में पथरी बनती है,जैसे युरिक एसिड,फ़स्फ़ोरस केल्शियम और ओ़क्झेलिक एसिड। जिन पदार्थों से पथरी निर्माण होती है उनमें केल्शियम ओक्झेलेट प्रमुख है। लगभग ९० प्रतिशत पथरी का निर्माण केल्शियम ओक्झेलेट से होताहै। गुर्दे की पथरी( kidney stone) का दर्द आमतौर पर बहुत भयंकर होता है। रोगी तडफ़ उठता है। पथरी जब अपने स्थान से नीचे की तरफ़ खिसकती है तब यह दर्द पैदा होताहै। 

कलमी शोरा (पोटाशियम नाईटेरेट) के गुण उपयोग 

पथरी गुर्दे से खिसक कर युरेटर और फ़िर युरिन ब्लाडर में आती है। पेशाब होने में कष्ट होता है,उल्टी मितली,पसीना होना और फ़िर ठड मेहसूस होना ,ये पथरी के समान्य लक्षण हैं।नुकीली पथरी से खरोंच लगने पर पेशाब में खून भी आता है।इस रोग में पेशाब थोड़ी मात्रा में कष्ट के साथ बार-बार आता है|
रोग के निदान के लिये सोनोग्राफ़ी करवाना चाहिये।वैसे तो  विशिष्ट   हर्बल औषधियों से 
३० एम एम तक की पथरी समाप्त हो जाती है, लेकिन ४-५ एम एम तक की पथरी घरेलू नुस्खों के प्रयोग से समाप्त हो सकती हैं। मैं ऐसे ही कुछ सरल नुस्खे यहां प्रस्तुत कर रहा हूं।
 १) तुलसी के पत्तों का रस एक चम्मच एक चम्मच शहद में मिलाकर जल्दी सबेरे लें। ऐसा ५-६ माह तक करने से छोटी पथरी निकल जाती है।
२) मूली के पत्तों का रस २०० एम एल दिन में २ बार लेने से पथरी रोग नष्ट होता है।
३) दो अन्जीर एक गिलास पानी मे उबालकर सुबह के वक्त पीयें। एक माह तक लेना जरूरी है।

४) नींबू के रस में स्टोन को घोलने की शक्ति होती है। एक नींबू का रस दिन में १-२ बार मामूली गरम जल में लेना चाहिये।

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५) पानी में शरीर के विजातीय पदार्थों को बाहर निकालने की अद्भुत शक्ति होती है। गरमी में ४-५ लिटर और सर्द  मौसम में ३-४ लिटर जल पीने की आदत बनावें।
६) दो तीन सेवफ़ल रोज खाने से पथरी रोग में लाभ मिलता है।
) तरबूज में पानी की मात्रा ज्यादा होती है । जब तक उपलब्ध रहे रोज तरबूज खाएं। तरबूज में पुरुषों के लिये वियाग्रा गोली के समान काम- शक्ति वर्धक असर भी पाया गया है।
८) कुलथी की दाल का सूप पीने से पथरी निकलने के प्रमाण मिले है। २० ग्राम कुलथी दो कप पानी में उबालकर काढा बनालें। सुबह के वक्त और रात को सोने से पहिले पीयें।

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९) शोध में पाया गया है कि विटमिन बी६ याने पायरीडोक्सीन के प्रयोग से पथरी समाप्त हो जाती है और नई पथरी बनने पर भी रोक लगती है। १०० से १५० एम जी की खुराक कई महीनों तक लेने से पथरी रोग का स्थायी समाधान होता है।
१०). कुलथी में पोटेशियम और पानी की अधिकता होने से गुर्दे के रोगों लाभदायक सिद्ध हुआ है। इसमें अल्बुमिन और सोडियम कम होता है जो गुर्दे के लिये उत्तम है।
११). गाजर और मूली के बीज १०-१० ग्राम,गोखरू २० ग्राम,जवाखार और हजरूल यहूद ५-५ ग्राम लेकर पावडर बनालें और ४-४ ग्राम की पुडिया बनालें। एक खुराक प्रत: ६ बजे दूसरी ८ बजे और तीसरी शाम ४ बजे दूध-पानी की लस्सी के साथ लें। बहुत कारगर उपचार है|

१२) पथरी को गलाने के लिये चौलाई की सब्जी गुणकारी है। उबालकर धीरे-धीरे चबाकर खाएं।दिन में ३-४ बार यह उपक्रम करें।


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१३) बथुआ की सब्जी आधा किलो लें। इसे ८०० मिलि पानी में उबालें। अब इसे कपडे या चाय की छलनी में छान लें। बथुआ की सब्जी भी इसमें अच्छी तरह मसलकर मिलालें। काली मिर्च आधा चम्मच और थोडा सा सेंधा नमक मिलाकर पीयें। दिन में ३-४ बार प्रयोग करते रहने से गुर्दे के विकार नष्ट होते हैं और पथरी निकल जाती है।
14) प्याज में पथरी नाशक तत्व होते हैं। करीब ७० ग्राम प्याज को अच्छी तरह पीसकर या मिक्सर में चलाकर पेस्ट बनालें। इसे कपडे से निचोडकर रस निकालें। सुबह खाली पेट पीते रहने से पथरी छोटे-छोटे टुकडे होकर निकल जाती है।
१५) सूखे आंवले बारीक पीसलें। यह चूर्ण कटी हुई मूली पर लगाकर भली प्रकार चबाकर खाने से कुछ ही हफ़्तों में पथरी निकलने के प्रमाण मिले हैं।
१६) स्टूल पर चढकर १५-२० बार फ़र्श पर कूदें। पथरी नीचे खिसकेगी और पेशाब के रास्ते निकल जाएगी। निर्बल व्यक्ति यह प्रयोग न करें।
१७) मिश्री,सौंफ,सूखा धनिया सभी ५०-५० ग्राम की मात्रा में लेकर रात को डेढ़ लीटर पानी में भिगोकर रख दीजिए २४ घंटे बाद छानकर सौंफ, धनिया पीसकर यह पेस्ट पुन; तरल मिश्रण में घोलकर पीते रहने से मूत्र पथरी निकल जाती है|



कान दर्द,कान पकना,बहरापन के उपचार


१८) जवाखार: 


गाय के दूध के लगभग 250 मिलीलीटर मट्ठे में 5 ग्राम जवाखार मिलाकर सुबह-शाम पीने से गुर्दे की पथरी खत्म होती है।

जवाखार और चीनी-


 2-2 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर पानी के साथ खाने से पथरी टूट-टूटकर पेशाब के साथ निकल जाती है। इस मिश्रण को रोज सुबह-शाम खाने से आराम मिलता है।

२०) गोक्षुर-

 गोक्षुर के बीजों का चूर्ण 3 से 6 ग्राम बकरी के दूध के साथ प्रतिदिन 2 बार खाने से पथरी खत्म होती है।

२१/ फिटकरी:-


भुनी हुई फिटकरी 1-1 ग्राम दिन में 3 बार रोगी को पानी के साथ सेवन कराने से रोग ठीक होता है।

२२/ कमलीशोरा-:


कमलीशोरा, गंधक और आमलासार 10-10 ग्राम अलग-अलग पीसकर मिला लें और हल्की आग पर गर्म करने के 1-1 ग्राम का आधा कप मूली के रस के साथ सुबह-शाम लेने से गुर्दे की पथरी में लाभ मिलता है।

प्रोस्टेट वृद्धि से मूत्र समस्या का 100% अचूक ईलाज 


२३/ आलू: 


एक या दोनों गुर्दो में पथरी होने पर केवल आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है। पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक मात्रा में पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियां और रेत आसानी से निकल जाती हैं। आलू में मैग्नीशियम पाया जाता है जो पथरी को निकालता है तथा पथरी बनने से रोकता है।

२४/ तुलसी:


20 ग्राम तुलसी के सूखे पत्ते, 20 ग्राम अजवायन और 10 ग्राम सेंधानमक लेकर पॉउड़र बनाकर रख लें। यह 3 ग्राम चूर्ण गुनगुने पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से गुर्दे का तेज दर्द दूर होता है।
२५/ पके हुए प्याज का रस पीना पथरी निकालने के लिए बेहद लाभ प्रद उपाय है| दो मध्यम आकार के प्याज लेंकर भली प्रकार छीलें | एक गिलास जल में डालकर मध्यम आंच पर पकाएं| अब इस मिश्रण को मिक्सर में डालकर चलाएं | इस रस को छानकर पियें| ७ दिन तक यह उपचार करने से पथरी के टुकड़े निकल जाते हैं|



 विशिष्ट  परामर्श- 
      
वैध्य श्री दामोदर 9826795656 की जड़ी बूटी - निर्मित औषधि से 30 एम एम तक के आकार की बड़ी पथरी भी आसानी से नष्ट हो जाती है| पथरी के भयंकर दर्द और गुर्दे की सूजन,पेशाब मे दिक्कत,जलन को तुरंत समाप्त करने मे यह औषधि रामबाण की तरह असरदार है|जो पथरी का दर्द महंगे इंजेक्शन से भी काबू मे नहीं आता ,इस औषधि की कुछ ही खुराक लेने से आराम लग जाता है| आपरेशन की जरूरत ही नहीं पड़ती|औषधि मनी बेक गारंटी युक्त है|







लो-बीपी में असरदार 21 उपाय





लो ब्लड प्रेशर, हाइपोटेंशन- जिसमें बॉडी में ब्लड का सर्कुलेशन बहुत ही धीमा हो जाता है जिसके कारण सिर घूमना, चक्कर आना, कमजोरी, जी मिचलाना, धुंधला दिखाई देना और सांस लेने में दिक्कत जैसी कई सारी परेशानियां होने लगती हैं। फिट बॉडी का ब्लड प्रेशर 120/80 होता है लेकिन अगर बीपी का लेवल 90/60 आ रहा है तो ध्यान देने की जरूरत है। बीपी लो होने पर ब्रेन, किडनी और हार्ट पर असर पड़ता है। जिसके चलते हार्ट डिसीज, प्रेग्नेंसी, दिमाग से संबंधित बीमारियों के होने की भी संभावना रहती है।
1
. छाछ में नमक, भुना जीरा और हींग मिलाकर, इसका सेवन करते रहने से भी ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।
2. तुरंत नमक का पानी पिएं। अगर आपको डायबिटीज हो तो खाएं।
3. अपनी मुट्ठी बांधें, फिर खोलें। ऐसा बार-बार, कई बार करें।

4. लो ब्लडप्रेशर के कारण अगर चक्कर आने की शिकायत हो, आंवले के रस में शहद मिलाकर खाने से बहुत जल्दी राहत मिलती है। 
5. इसके अलावा आंवले का मुरब्बा भी ब्लडप्रेशर के रोगियों के लिए एक बेहतर विकल्प है।
6. अपने पैरों को कुछ देर तक हिलाते रहें अर्थात सक्रिय रखें।
 7. दालचीनी के पाउडर को प्रतिदिन गर्म पानी के साथ लेने से भी आपको इस समस्या में लाभ मिल सकता है, इसके लिए सुबह-शाम यह प्रयोग करें।
8. 50 ग्राम देशी चने व 10 ग्राम किशमिश को रात में 100 ग्राम पानी में किसी भी कांच के बर्तन में रख दें। सुबह चनों को किशमिश के साथ अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाएं और पानी को पी लें। केवल किशमिश का प्रयोग भी कर सकते हैं।
9. 200 ग्राम गाजर और 50 ग्राम पालक का उपयोग करें। कम ब्लडप्रेशर में गाजर आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। इसके लिए लगभग 200 ग्राम गाजर के रस में एक चौथाई पालक का रस मिलाकर पिएं। यह आपके लिए बेहद लाभदायक सिद्ध होगा।


10. 
कॉफी

एक कप कॉफी, हॉट चाकलेट या कैफीन मिली हुई चीजों खाने या पीने से भी लो बीपी को तुरंत कंट्रोल किया जा सकता है। लो बीपी की प्रॉब्लम काफी वक्त से चल रही है तो सुबह उठते ही एक कप कॉफी पिएं या नाश्ते के साथ जरूर लें। लेकिन कॉफी पीने की आदत न डालें क्योंकि ज्यादा कैफीन भी बॉडी के लिए सही नहीं।


11. बादाम वाला दूध

दिमागी शक्ति बढ़ाने के साथ ही बादाम मिला दूध ब्लड सर्कुलेशन का लेवल भी सही रखता है। बादाम को रातभर पानी में भिंगोकर रख दें। सुबह इसे छीलकर अच्छे से पीसकर इसका पेस्ट बना लें। पेस्ट को दूध में मिलाकर रोजाना सुबह पीना फायदेमंद होता है।

12. आप ब्लड प्रेशर लो होने पर चुकंदर का जूस पिए हर रोज चुकंदर के जूस की कम से कम 100 ml होना चाहिए|
13. आप लो ब्लड प्रेशर होने पर नमक ,नीबू व चीनी का शरबत बना कर पिए | इससे भी लो ब्लड प्रेशर नार्मल हो जायेगा |
14. लो ब्लड प्रेशर होने पर तुरंत ही बैठ जाये या लेट जाये |अपनी मुठियो को खोले और बंद करे और साथ ही लम्बी सांस अंदर बाहर खींचे | जब आप लेटे तो तकिये को पैरो के निचे लगा ले |
15. आप लो ब्लड प्रेशर होने पर नमक का सेवन करे क्योकि नमक में सोडियम की मात्रा जयादा होती है | जो लो ब्लड प्रेशर में बहुत ही फायदा पहुंचाता है | लेकिन इस बात का हमेशा ही ध्यान रखना ही की नमक का सेवन आपने सिर्फ लो ब्लड प्रेशर होने पर ही करना है हाई ब्लड प्रेशर में नहीं करना है | जब भी आपका ब्लड प्रेशर लो हो तो आप नमक व चीनी को पानी में घोल ले और फिर इसे पि जाये आपका लो ब्लड प्रेशर नार्मल हो जायेगा |

16.तुलसी पत्ती

तुलसी की पत्तियों में विटामिन सी, मैग्नीशियम, पोटैशियम और पैंटोथेनिक एसिड पाया जाता है। ये सारे मिनरल्स स्ट्रेस कम करने के साथ ही दिमाग को शांत रखते हैं। तुलसी की 10-15 पत्तियों का रस निकाल लें उसमें लगभग 1 चम्मच शहद की मात्रा मिलाएं। रोजाना खाली पेट इसे पिएं। बहुत जल्द फायदा मिलेगा।


17.हींग

चुटकी भर हींग के इस्तेमाल से भी लो ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर किया जा सकता है। इससे ब्लड क्लोटिंग नहीं होती जिससे सर्कुलेशन सही तरीके से होता है।



18.अदरक

अदरक के टुकड़ों को नींबू और नमक मिलाकर किसी एयर टाइट डिब्बे में रखें। रोजाना खाने से पहले इसके टुकड़ों को अच्छे से चबाएं। बीपी की प्रॉब्लम दूर करने में ये फॉर्मूला भी बहुत ही कारगर है।
19.खजूर

लो बीपी की समस्या होने पर खजूर का सेवन भी बहुत लाभकारी होता है। सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से जल्द फायदा मिलता है। इसके साथ ही छुहारे खाने से भी इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है|


20.गुड़

रोजना लगभग 50 ग्राम गुड़ खाएं। इसके अलावा गुड़ को पानी में घोलकर उसमें नींबू और नमक की मात्रा मिलाएं और दिन में दो बार इसका इस्तेमाल करें।


21.अनार

अनार का जूस भी लो बीपी की समस्या को दूर करके का बेहतरीन इलाज है। सिर्फ एक हफ्ते के इस्तेमाल के बाद ही फर्क नजर आने लगता है। इसके अलावा सेब, केला, चीकू भी अच्छा ऑप्शन होता है।


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

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अजमोद के औषधीय उपयोग

                                               

अजमोद एक पौधा है जिसका वैज्ञानिक नाम एपियमग्रेविओलिंस (Apiumgraveolens) है। अजमोद का फल और बीज सूखाकर तेल निकाला जाता है और इसके तेल के साथ बीजों का इस्तेमाल दवा के रूप में किया जाता है। अजमोद की पत्तियों का उपयोग बहुत सी बीमारियों के इलाज में किया जाता है आइये जानते है अजमोद के फायदे और अजमोद का सेवन के नुकसान
अजमोद का तेल कैप्सूल के रूप में भी बाजारों में बिकता है जो कई बीमारियों को ठीक करने में उपयोग में लाया जाता है। कुछ लोग अजमोद के रस का उपयोग दवा के रूप में करते हैं। अजमोद का उपयोग गठिया (rheumatism), हिस्टीरिया, घबराहट, सिरदर्द, कुपोषण के कारण वजन घटना, भूख की कमी और थकावट के उपचार में किया जाता है।
Celery (ajmod) में विटामिन ए, विटामिन B1, पोटैशियम, विटामिन B2, पॉलीन, सोडियम,विटामिन B6, एमिनो एसिट और विटामिन C, प्लांट हार्मोन और इसेंशियल ऑयल पाया जाता है, कई बीमारियों को दूर करने में उपयोग में लाया जाता है। तो आइये जानते हैं कि किन-किन बीमारियों के इलाज में अजमोद फायदेमंद होता है।

कोलेस्ट्रॉल घटाने में


स्टडी में पाया गया है कि अजमोद (Celery) में ब्यूटिल प्थैलाइड पाया जाता है और यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल या एलडीएल के स्तर को कम करने में मदद करता है। अजमोद में उच्च मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो शरीर में पित्त स्राव (bile secretion) को बढ़ाता है और कोलेस्ट्रॉल को घटाने में मदद करता है।

  अनिद्रा दूर करने में



सुबह एक गिलास अजमोद का जूस पीने से व्यक्ति पूरे दिन तरोताजा महसूस करता है। अजमोद के रस में मैग्नीशियम पाया जाता है जो हार्ट रेट को तो कम करता ही है साथ में अनिद्रा की बीमारी को दूर कर अच्छी नींद लाने में मदद करता है।

 वजन घटाने में

इसमें कैलोरी बहुत कम होती है इसलिए अजमोद वजन घटाने में सहायक होता है। अजमोद महत्वपूर्ण पोषक तत्व प्रदान करने एवं लिपिड (वसा) के मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करने में मदद करता है। अजमोद का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट, इलेक्ट्रोलाइट, विटामिन C, B एवं पोटैशियम जैसे मिनरल पाये जाते हैं और कैलोरी कम होने के कारण इसके सेवन से वजन घटता है।

 पाचन में 

यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने एवं शरीर एवं पेट के सूजन को दूर करने में उपयोग किया जाता है। आंत में सर्कुलेशन को बेहतर करने में अजमोद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अजमोद के बीच में एंटी-हाइपरटेंशिव गुण होता है जिसके कारण इसके सेवन से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। अजमोद के बीज में गंधहीन और ऑयली यौगिक मौजूद होते हैं जिसे एनबीपी के नाम से जाना जाता है और यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।

हृदय के लिए फायदेमंद

इसके रस में कुछ एंटी-ऑक्सीडेंट पाये जाते हैं जिन्हें प्थैलाइड्स के नाम से जानते हैं। ये एंटी-ऑक्सीडेंट धमनी (artery) की दीवारों को मजबूत करने और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम के अंदर मरम्मत करने में मदद करते हैं। जिससे कि हृदय का तनाव एवं दबाव कम होता है और हार्ट अटैक एवं स्ट्रोक का खतरा कम होता है।

 सूजन दूर करने में

अर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस, अस्थमा एवं ब्रोंकाइटिस (Bronchitis) जैसी बीमारियों के इलाज में भी अजमोद बहुत फायदेमंद होता है। अजमोद में पॉलीएसिटिलीन नामक रसायन मौजूद होता है जो इन बीमारियों को दूर करने में बहुत प्रभावी होता है। अजमोद का रस हर्ब का कार्यकरता है और यह शरीर के सूजन को दूर करने में मदद करता है।

 हार्मोनल समस्याओं के लिए

महिलाओं में हार्मोन असंतुलन की समस्या को दूर करने के लिए अजमोद का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा बांझपन, मेनोपॉज के लक्षणों एवं मासिक धर्म की समस्याओं को दूर करने के लिए भी अजमोद बहुत लाभकारी माना जाता है।

 अल्सर में 

शोधकर्ताओं का मानना है कि अजमोद में फ्लेनॉयड, टैनिन एंवं एल्केनॉयड पाया जाता है जो पेट, कोलोन एवं आंत को पोषण प्रदान करता है। अजमोद पेट में अल्सर को उत्पन्न होने से रोकता है क्योंकि अजमोद में एक विशेष प्रकार का एथेनॉल पाया जाता है जो अल्सर से पाचन तंत्र के परत को सुरक्षा प्रदान करता है।

सेलेरी बेनेफिट्स फ़ॉर कैंसर

दो यौगिक ल्यूटीओलिन एवं एपिजेनिन अजमोद में उच्च सांद्रता में पाये जाते हैं और ये यौगिक एंटी-कार्सिनोजेनिक प्रभाव के होते हैं। ये फ्लैनॉयड ट्यूमर को कम करने एवं शरीर के विभिन्न हिस्सों में कैंसर को फैलने से रोकते हैं और मुक्त कणों को बेअसर करने में मदद करते हैं।

अजमोद के नुकसान
अजमोद का बीज यदि चबाने भर के लिए इस्तेमाल किया जाये तो यह पूरी तरह सुरक्षित है। 

अजमोद के तेलको ज्यादातर लोग मुंह या त्वचा की समस्याओं में दवा के रूप में इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अधिक सेवन करने पर यह त्वचा में सूजन उत्पन्न कर सकता है।
प्रेगनेंसी के दौरान अजमोद का सेवन सुरक्षित नहीं माना जाता है क्योंकि यह गर्भाशय में संकुचन पैदा कर देता है जिसकी वजह से गर्भपात हो सकता है।
यदि आप बच्चे को अपना दूध पिलाती हैं तो अजमोद के तेल या अजमोदक के बीज का सेवन करने से परहेज करना चाहिए।
अजमोद का अधिक सेवन करने से एलर्जिक रिएक्शन भी हो सकता है।
यदि आपको रक्त स्राव की समस्या है तो अजमोद का सेवन करने से अधिक रक्त स्राव होने लगती है, इसलिए ऐसी समस्या हो तो अजमोद से परहेज करें।
अगर आपको किडनी में समस्या है तो अजमोद का सेव
न न करें अन्यथा इससे सूजन बढ़ सकती है।
ब्लड प्रेशर को कम करने में अजमोद का दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है लेकिन यदि आपका ब्लड प्रेशर पहले से ही कम हो तो अजमोद का सेवन न करें अन्यथा यह ब्लड प्रेशर को ज्याद घटा सकता है।
अजमोद केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। सर्जरी के बाद एवं पहले एनेस्थिशिया या अन्य दवाओं के साथ अजमोद का सेवन न करें अन्यथा यह तंत्रिका तंत्र को धीमा कर सकता है। सर्जरी या शल्य चिकित्सा के दो हफ्ते पहले से ही अजमोद का सेवन बंद कर देना चाहिए।





आयरनयुक्त शाकाहारी चीजों से हेमोग्लोबिन बढ़ाएँ


                                                 

आयरन हमारे शरीर के लिए जरूरी है क्योंकि ये रक्त में हीमोग्लोबिन का सबसे जरूरी घटक है। यही हीमोग्लोबिन हमारे शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन ले जाने में मदद करता है। आयरन हमारे शरीर के लिए इसलिए भी जरूरी है क्योंकि ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानि इम्यूनिटी बढ़ाता है।

क्यों जरूरी है आयरन

शरीर में आयरन पर्याप्त मात्रा में होने पर शरीर की हर कोशिका पूरी तरह से ऊर्जा से भरी रहती है। आयरन की कमी से एनीमिया की बीमारी होने के अलावा दूसरी बीमारी होने का जोखिम बना रहता है। इसके कमी से शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता घटती है, जिससे कोई भी बीमारी जल्दी शरीर में घर कर जाती है। बच्चों इसकी कमी से एकाग्र नहीं हो पाते हैं। गर्भवती महिला में इसके कमी से उनके साथ-साथ शिशु पर भी बूरा प्रभाव पड़ता है।
कितनी होनी चाहिए आयरन की मात्रा
गर्भवती महिलाओं को आयरन की सबसे अधिक जरूरत होती है। किसी गर्भवती महिला को रोज़ 27 मिलीग्राम आयरन की ज़रुरत होती है। 18 से 35 वर्ष के महिलाओं और पुरुषों को 18 मिलीग्राम आयरन के सेवन की सलाह दी जाती है। 35 से 50 साल के लोगों को 10 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती है वहीं 50 वर्ष से ऊपर की उम्र के पुरुषों और महिलाओं को 8 मिलीग्राम आयरन की आवश्यकता होती है।
वैसे शरीर की जरूरत देखें, तो हमें सिर्फ 1 से 2 ग्राम आयरन की जरूरत होती है मगर आहार से मिल रहे कुल आयरन का 10 फीसदी आंत अवशोषित कर लेती है। इसलिए हमें कम-से-कम 10 से 20 मिलीग्राम आयरन का सेवन करना चाहिए।
आयरन के शाकाहारी स्रोत

काजू

काजू शरीर में खास पोषक तत्‍वों की कमी को दूर करता है। जिन लोगों के शरीर में आयरन की कमी होती है डॉक्‍टर उन्‍हें काजू लेने की सलाह देते हैं। पुरुषों को 8 मिलीग्राम आयरन की जरूरत है जबकि महिलाओं को 18 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती हैं। अगर कोई 10 ग्राम काजू खाता है तो उसको 0.3 मिलीग्राम आयरन प्राप्‍त होता है।

पालक

पालक में आयरन काफी अधिक मात्रा में होता है। हीमोग्‍लोबिन की कमी होने पर पालक का सेवन करने से शरीर में इसकी कमी पूरी होती है। इसके अलावा पालक में कैल्शियम, सोडियम, क्लोरीन, फास्फोरस, खनिज लवण और प्रोटीन जैसे तत्‍व आदि मुख्य हैं।

मुनक्का

मुनक्के में आयरन और बी कॉम्पलेक्स यानि विटामिन बी भरपूर मात्रा में होता है इसलिए मुनक्का शरीर की कमजोरी और एनीमिया को ठीक करता है। इसमें मौजूद आयरन रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाता है। यह स्‍वाद में मीठा और हल्‍का, सुपाच्‍य और नर्म होता है। गर्मियों में कम मुनक्का खाना चाहिए क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है।

मूंगफली

मूंगफली एक ऐसा नट्स है जो सस्ता और पौष्टिकता से भरपूर होता है। यह आयरन और कैल्शियम का भंडार होता है। इसके अलावा इसमें फाइबर भी होता है। जब मूंगफली को मूंगफली मक्‍खन के रूप में सेवन किया जाता है तो इसके दो बड़े चम्‍मच में 0.6 मिलीग्राम आयरन शामिल होता है। इसमें पोटेशियम, मैग्नीशियम और विटामिन बी भी शामिल होता हैं।

चने


एनीमिया का इलाज करने के लिए रोज सुबह नाश्ते में भीगे हुए चना दाल खाएं। रात को एक कटोरी चना दाल भिगा लें। सुबह उसमें आधा प्याज, लहसुन और एक टमाटर काट कर मिला लें। थोड़ा सा नमक डालें। अब इसे खा लें। रोजाना चना दाल ऐसे ही सुबह खाएं। हीमोग्लोबिन कंट्रोल करने के लिए आप भीगे हुए दाल में एक चम्मच शहद मिलाकर भी खाएंगे तो फायदा करेगा।

तिल

तिल भी आयरन का बहुत अच्छा स्रोत है। इसमें कई प्रकार के प्रोटीन, कैल्शियम, बी काम्‍प्‍लेक्‍स और कार्बोहाइट्रेड आदि तत्‍व पाये जाते हैं। तिल का सेवन करने से तनाव दूर होता है और मानसिक दुर्बलता नही होती। प्रतिदिन लगभग पचास ग्राम तिल खाने से आयरन और कैल्शियम की आवश्यकता पूरी होती है। तिल को आप गुड़ के साथ मिलाकर लड्डू के रूप में भी खा सकते हैं।

गुड़ का सेवन

एक चम्मच गुड़ में 3.2 मि.ग्रा. आयरन होता है। इसीलिए एनिमिया से ग्रस्त लोगों को रोज 100 ग्राम गुड़ जरूर खाना चाहिए। गुड़ में सुक्रोज 59.7 प्रतिशत, ग्लूकोज 21.8 प्रतिशत, खनिज तरल 26 प्रतिशत तथा जल अंश 8.86 प्रतिशत मौजूद होते हैं। खाने के बाद थोड़ा सा गुड़ खाने से भी एनिमिया दूर होता है। इसे खाने से ब्‍लड में शुगर की समस्‍या नहीं होगी।

रागी

रागी आयरन का बहुत अच्छा प्राकृतिक स्रोत है। रागी की खपत से खून की कमी की स्थिति बेहतर होती है।नई माँओं को रागी खाने की सलाह दी जाती है, जिससे उनमें हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाया जा सके। जिन मांओं के स्तनों में दूध का ठीक से उत्पादन ना हो रहा हो, उन्हें हरी रागी का सेवन करने की सलाह दी जाती है।दूध पिलाने वाली माताओं में दूध की कमी के लिये यह टॉनिक का कार्य करता है।

ब्रोकली

ब्रोकली में आयरन और विटामिन सी की भरपूर मात्रा होती है। विटामिन सी शरीर में इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत करने और इन्फेक्शन से लड़ने का काम करता है। इसमें कुछ ऐसे तत्व भी मौजूद होते हैं जो शरीर से टॉक्सिन्स निकाल बाहर करते हैं और सर्दी-जुकाम से प्रतिरक्षा प्रदान करते हैं।

मोटे अनाज

अनाज का सेवन करने से भी आयरन की कमी दूर होती है क्‍योंकि इसमें आयरन अधिक मात्रा में होता है। हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाने के लिए भोजन में गेंहू और सूजी की बनी चीजे बहुत फायदेमंद हैं।



किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचा




अनिद्रा की होम्योपैथिक औषधियाँ( Insomnia and Homeopathy )

                                         

अच्छी सेहत के लिए सिर्फ प्रॉपर डाइट लेना ही काफी नहीं है। अच्छी नींद भी हेल्दी रहने के लिए उतनी ही जरूरी है। आजकल कई प्रफेशन में डिफरेंट शिफ्ट्स में काम होता है। ऐसे में सबसे ज्यादा नींद पर असर पड़ता है। कई बार तो ऐसा होता है कि टुकड़ों में नींद पूरी करनी पड़ती है, लेकिन छोटी-छोटी नैप लेना सेहत के लिहाज से बेहद खराब होता है। एक रिसर्च के मुताबिक, खराब नींद यानि छोटे-छोटे टुकड़ों में ली गई नींद बिल्कुल न सोने से भी ज्यादा खतरनाक होती है। इससे कई तरह की बीमारियां शरीर को शिकार बना सकती हैं।
टुकड़ों में सोने वाले लोग सुबह उठकर भी फ्रेश नहीं फील करते हैं। रिसर्च में यह साबित हो चुका है। अमेरिका के जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में दो तरह की नींद का अध्ययन किया है। इसमें रुकावट के साथ सोने वाली नींद और कम समय के लिए ही सही लेकिन शांति वाली नींद शामिल है। इन लोगों के मिजाज को जब कंपेयर किया गया तो पाया कि टुकड़ों में सोने वाले लोगों की तुलना में शांति से सोने वाले लोगों का मूड बेहतर था।
खराब नींद किडनी पर भी बुरा असर डालती है। शरीर में ज्यादातर प्रोसेस नैचरल डेली रिद्म (सरकाडियन क्लॉक या शरीर की प्राकृतिक घड़ी) के आधार पर होते हैं। ये हमारी नींद से ही कंट्रोल होता है। एक रिसर्च के मुताबिक जब सोने की साइकल बिगड़ती है तो किडनी को नुकसान होता है। इससे किडनी से जुड़ी कई बीमारियां हो सकती हैं।
आधी-अधूरी नींद दिल के लिए भी खतरे की घंटी है। इससे हार्ट डिजीज होने के चांस तो बढ़ते ही हैं, साथ ही दिल का दौरा भी पड़ सकता है। एक रिसर्च में खराब नींद की शिकायत करने वालों में अच्छी नींद लेने वालों के मुकाबले 20 फीसदी ज्यादा कोरोनरी कैल्शियम पाया गया।
  कम नींद लेने से दिमाग सही तरह से काम नहीं कर पाता है। इसका सीधा असर हमारी याद‌्‌दाश्त पर पड़ता है। इसके अलावा, पढ़ने, सीखने व डिसीजन लेने की क्षमताएं भी इफेक्ट होती हैं। खराब नींद से स्ट्रेस लेवल भी बढ़ता है और इमोशनली वीक लोग डिप्रेशन के भी शिकार हो सकते हैं।


होम्योपैथिक उपचार में प्रयुक्त विभिन्न औषधियों से चिकित्सा–


नींद लाने के लिए बार-बार कॉफिया औषधि का सेवन करना होम्योपैथी चिकित्सा नहीं है, हां यदि नींद न आना ही एकमात्र लक्षण हो दूसरा कोई लक्षण न हो तब इस प्रकार की औषधियां लाभकारी है जिनका नींद लाने पर विशेष-प्रभाव होता है- कैल्केरिया कार्ब, सल्फर, फॉसफोरस, कॉफिया या ऐकानाइट आदि।
1. लाइकोडियम- 


दोपहर के समय में भोजन करने के बाद नींद तेज आ रही हो और नींद खुलने के बाद बहुत अधिक सुस्ती महसूस हो तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए लाइकोडियम औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है।

2. चायना- 


रक्त-स्राव या दस्त होने के कारण से या शरीर में अधिक कमजोरी आ जाने की वजह से नींद न आना या फिर चाय पीने के कारण से अनिद्रा रोग हो गया हो तो उपचार करने के लिए चायना औषधि 6 या 30 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक है।

3. कैल्केरिया कार्ब – 


इस औषधि की 30 शक्ति का उपयोग दिन में तीन-तीन घंटे के अंतराल सेवन करने से रात के समय में नींद अच्छी आने लगती है। यह नींद किसी प्रकार के नशा करने के समान नहीं होती बल्कि स्वास्थ नींद होती है।


4. कॉफिया – 

खुशी के कारण नींद न आना, लॉटरी या कोई इनाम लग जाने या फिर किसी ऐसे समाचार सुनने से मन उत्तेजित हो उठे और नींद न आए, मस्तिष्क इतना उत्तेजित हो जाए कि आंख ही बंद न हो, मन में एक के बाद दूसरा विचार आता चला जाए, मन में विचारों की भीड़ सी लग जाए, मानसिक उत्तेजना अधिक होने लगे, 3 बजे रात के बाद भी रोगी सो न पाए, सोए भी तो ऊंघता रहें, चौंक कर उठ बैठे, नींद आए भी ता स्वप्न देखें। इस प्रकार के लक्षण रोगी में हो तो उसके इस रोग का उपचार करने के लिए कॉफिया औषधि की 200 शक्ति का उपयोग करना चाहिए। यह नींद लाने के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि है। यदि गुदाद्वार में खुजली होने के कारण से नींद न आ रही हो तो ऐसी अवस्था में भी इसका उपयोग लाभदायक होता है। रोगी के अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए कॉफिया औषधि की 6 या 30 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है।


5. जेल्सीमियम – 

यदि उद्वेगात्मक-उत्तेजना (इमोशनल एक्साइटमेंट) के कारण से नींद न आती हो तो जेल्सीमियम औषधि के सेवन से मन शांत हो जाता है और नींद आ जाती है। किसी भय, आतंक या बुरे समाचार के कारण से नींद न आ रही हो तो जेल्सीमियम औषधि से उपचार करने पर नींद आने लगती है। बुरे समाचार से मन के विचलित हो जाने पर उसे शांत कर नींद ले आते हैं। अधिक काम करने वाले रोगी के अनिंद्रा रोग को ठीक करने के लिए जेल्सीमियम औषधि का उपयोग करना चाहिए। ऐसे रोगी जिनकों अपने व्यापार के कारण से रात में अधिक बेचैनी हो और नींद न आए, सुबह के समय में उठते ही और कारोबार की चिंता में डूब जाते हो तो ऐसे रोगियों के इस रोग को ठीक करने के लिए जेल्सीमियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।


6. ऐकोनाइट –

बूढ़े-व्यक्तियों को नींद न आ रही हो तथा इसके साथ ही उन्हें घबराहट हो रही हो, गर्मी महसूस हो रही हो, चैन से न लेट पाए, करवट बदलते रहें। ऐसे बूढ़े रोगियों के इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए ऐकोनाइट औषधि की 30 का उपयोग करना लाभकारी है। यह औषधि स्नायु-मंडल को शांत करके नींद ले आती है। किसी प्रकार की बेचैनी होने के कारण से नींद न आ रही हो तो रोग को ठीक करने के लिए ऐकोनाइट औषधि का उपयोग करना फायदेमंद होता है।


7. कैम्फर –

नींद न आने पर कैम्फर औषधि के मूल-अर्क की गोलियां बनाकर, घंटे आधे घंटे पर इसका सेवन करने से नींद आ जाती है।


8. इग्नेशिया – 

किसी दु:ख के कारण से नींद न आना, कोई सगे सम्बंधी की मृत्यु हो जाने से मन में दु:ख अधिक हो और इसके कारण से नींद न आना। इस प्रकार के लक्षण से पीड़ित रोगी को इग्नेशिया औषधि की 200 शक्ति का सेवन करना चाहिए। यदि किसी रोगी में भावात्मक या भावुक होने के कारण से नींद न आ रही हो तो उसके इस रोग का उपचार इग्नेशिया औषधि से करना लाभदायक होता है। हिस्टीरिया रोग के कारण से नींद न आ रही हो तो रोग का उपचार करने के लिए इग्नेशिया औषधि की 200 शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद होता है। यदि रोगी को नींद आ भी जाती है तो उसे सपने के साथ नींद आती है, देर रात तक सपना देखता रहता है और रोगी अधिक परेशान रहता है। नींद में जाते ही अंग फड़कते हैं नींद बहुत हल्की आती है, नींद में सब-कुछ सुनाई देता है और उबासियां लेता रहता है लेकिन नींद नहीं आती है। ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए इग्नेशिया औषधि का उपयोग करना उचित होता है। मन में दु:ख हो तथा मानसिक कारणों से नींद न आए और लगातार नींद में चौक उठने की वजह से नींद में गड़बड़ी होती हो तो उपचार करने के लिए इग्नेशिया औषधि की 3 या 30 शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है।


9. बेलाडोना – 

मस्तिष्क में रक्त-संचय होने के कारण से नींद न आने पर बेलाडोना औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना चाहिए। रोगी के मस्तिष्क में रक्त-संचय (हाइपरमिया) के कारण से रोगी ऊंघता रहता है लेकिन मस्तिष्क में थकावट होने के कारण से वह सो नहीं पाता। ऐसे रोगी के रोग का उपचार करने के लिए के लिए भी बेलाडोना औषधि उपयोगी है। रोगी को गहरी नींद आती है और नींद में खर्राटें भरता है, रोगी सोया तो रहता है लेकिन उसकी नींद गहरी नहीं होती। रोगी नींद से अचानक चिल्लाकर या चीखकर उठता है, उसकी मांस-पेशियां फुदकती रहती हैं, मुंह भी लगतार चलता रहता है, ऐसा लगता है मानो वह कुछ चबा रहा हो, दांत किटकिटाते रहते हैं। इस प्रकार के लक्षण होने के साथ ही रोगी का मस्तिष्क शांत नहीं रहता। जब रोगी को सोते समय से उठाया जाता है तो वह उत्तेजित हो जाता है, अपने चारों तरफ प्रचंड आंखों (आंखों को फाड़-फाड़कर देखना) से देखता है, ऐसा लगता है कि मानो वह किसी पर हाथ उठा देगा या रोगी घबराकर, डरा हुआ उठता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए बेलाडोना औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है। अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए कैमोमिला औषधि का उपयोग करने पर लाभ न मिले तो बेलाडोना औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करें।


10. काक्युलस- 

यदि रात के समय में अधिक जागने के कारण से नींद नहीं आ रही हो तो ऐसे रोगी के इस लक्षण को दूर करने के लिए काक्युलस औषधि की 3 से 30 शक्ति का उपयोग करना चाहिए। जिन लोगों का रात के समय में जागने का कार्य करना होता है जैसे-चौकीदार, नर्स आदि, उन्हें यदि नींद न आने की बीमारी हो तो उनके के लिए कौक्युलस औषधि का उपयोग करना फायदेमंद है। यदि नींद आने पर कुछ परेशानी हो और इसके कारण से चक्कर आने लगें तो रोग को ठीक करने के लिए कौक्युलस औषधि का उपयोग करना उचित होता है।


11. सल्फर –

रोगी की नींद बार-बार टूटती है, जारा सी भी आवाजें आते ही नींद टूट जाती है, जब नींद टूटती है तो रोगी उंघाई में नहीं रहता, एकदम जाग जाता है, रोगी की नींद कुत्ते की नींद के समान होती है। रोगी के शरीर में कहीं न कहीं जलन होती है, अधिकतर पैरों में जलन होती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए सल्फर औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना फायदेमंद होता है।


12. नक्स वोमिका –


रोगी का मस्तिष्क इतना कार्य में व्यस्त रहता है कि वह रात भर जागा रहता है, व्यस्त मस्तिष्क के कारण नींद न आ रही हो, मन में विचारों की भीड़ सी लगी हो, आधी रात से पहले तो नींद आती ही नहीं यादि नींद आती भी है तो लगभग तीन से चार बजे नींद टूट जाती है। इसके घंटे बाद जब वह फिर से सोता है तो उठने पर उसे थकावट महसूस होती है, ऐसा लगता है कि मानो नींद लेने पर कुछ भी आराम न मिला हो। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए नक्स वोमिका औषधि का उपयोग कर सकते हैं।
किसी रोगी को आधी रात से पहले नींद नहीं आती हो, शाम के समय में नींद नहीं आती हो और तीन या चार बजे नींद खुल जाती हो, इस समय वह स्वस्थ अनुभव करता है लेकिन नींद खुलने के कुछ देर बाद उसे फिर नींद आ घेरती है और तब नींद खुलने पर वह अस्वस्थ अनुभव करता है, इस नींद के बाद तबीयत ठीक नहीं रहती। ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए नक्स वोमिका औषधि का उपयोग करना चाहिए।
कब्ज बनना, पेट में कीड़ें होना, अधिक पढ़ना या अधिक नशा करने के कारण से नींद न आए तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए नक्स वोमिका औषधि की 6 या 30 शक्ति का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।


13.पल्स – 


रोगी शाम के समय में बिल्कुल जागे हुए अवस्था में होता है, दिमाग विचारों से भरा हो, आधी रात तक नींद नहीं आती, बेचैनी से नींद बार-बार टूटती है, परेशान भरे सपने रात में दिखाई देते हैं, गर्मी महसूस होती है, उठने के बाद रोगी सुस्त तथा अनमाना स्वभाव का हो जाता है। आधी रात के बाद नींद न आना और शाम के समय में नींद के झोकें आना, रोगी का मस्तिष्क व्यस्त हो अन्यथा साधारण तौर पर तो शाम होते ही नींद आती है और 3-4 बजे नींद टूट जाती है, इस समय रोगी रात को उठकर स्वस्थ अनुभव करता है, यह इसका मुख्य लक्षण है-शराब, चाय, काफी से नींद न आए। ऐसी अवस्था में रोगी को पल्स औषधि का सेवन कराना चाहिए।


14. सेलेनियम – 

रोगी की नींद हर रोज बिल्कुल ठीक एक ही समय पर टूटती है और नींद टूटने के बाद रोग के लक्षणों में वृद्धि होने लगती है। इस प्रकार के लक्षण होने पर रोगी का उपचार करने के लिए सेलेनियम औषधि का उपयोग कर सकते हैं।


15. ऐम्ब्राग्रीशिया – 

रोगी अधिक चिंता में पड़ा रहता है और इस कारण से वह सो नहीं पाता है, वह जागे रहने पर मजबूर हो जाता है। व्यापार या कोई मानसिक कार्य की चिंताए होने से नींद आने में बाधा पड़ती है। सोने के समय में तो ऐसा लगता है कि नींद आ रही है लेकिन जैसे ही सिर को तकिए पर रखता है बिल्कुल भी नींद नहीं आती है। इस प्रकार की अवस्था उत्पन्न होने पर रोग को ठीक करने के लिए ऐम्ब्राग्रीशिया औषधि की 2 या 3 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है। इस औषधि का उपयोग कई बार करना पड़ सकता है।


16. फॉसफोरस –

रोगी को दिन के समय में नींद आती रहती है, खाने के बाद नींद नहीं आती लेकिन रात के समय में नींद बिल्कुल भी नहीं आती है। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए फॉसफोरस औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद होता है।
वृद्ध-व्यक्तियों को नींद न आ रही हो तो ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए सल्फर औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना चाहिए।
आग लगने या संभोग करने के सपने आते हों और नींद देर से आती हो तथा सोकर उठने के बाद कमजोरी महसूस होता हो तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए फॉसफोरस औषधि का उपयोग किया जा सकता है।
रोगी को धीरे-धीरे नींद आती है और रात में कई बार जाग पड़ता है, थोड़ी नींद आने पर रोगी को बड़ा आराम मिलता है, रोगी के रीढ़ की हड्डी में जलन होती है और रोग का अक्रमण अचानक होता है। ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए फॉसफोरस औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना अधिक लाभकारी है।


17. टैबेकम- 

यदि स्नायविक-अवसाद (नर्वस ब्रेकडाउन) के कारण से अंनिद्रा रोग हुआ हो या हृदय के फैलाव के कारण नींद न आने के साथ शरीर ठंडा पड़ गया हो, त्वचा चिपचिपी हो, घबराहट हो रही हो, जी मिचलाना और चक्कर आना आदि लक्षण हो तो रोग को ठीक करने के लिए टैबेकम औषधि की 30 शक्ति का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।


18. ऐवैना सैटाइवा –

स्नायु-मंडल पर ऐवैना सैटाइवा औषधि का लाभदायक प्रभाव होता है। ऐवैना सैटाइवा जई का अंग्रेजी नाम है। जई घोड़ों को ताकत के लिए खिलाई जाती है जबकि यह मस्तिष्क को ताकत देकर अच्छी नींद लाती है। कई प्रकार की बीमारियां शरीर की स्नायु-मंडल की शक्ति को कमजोर कर देती है जिसके कारण रोगी को नींद नहीं आती है। ऐसी स्थिति में ऐवैना सैटाइवा औषधि के मूल-अर्क के 5 से 10 बूंद हल्का गर्म पानी के साथ लेने से स्नायुमंडल की शक्ति में वृद्धि होती है जिसके परिणाम स्वरूप नींद भी अच्छी आने लगती है। अफीम खाने की आदत को छूड़ाने के लिए भी ऐवैना सैटाइवा औषधि का उपयोग किया जा सकता है।


19. स्कुटेलेरिया –

यदि किसी रोगी को अंनिद्रा रोग हो गया हो तथा सिर में दर्द भी रहता हो, दिमाग थका-थका सा लग रहा हो, अपनी शक्ति से अधिक काम करने के कारण उसका स्नायु-मंडल ठंडा पड़ गया हो तो ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए स्कुटेलेरिया औषधि का प्रयोग आधे-आधे घंटे के बाद इसके दस-दस बूंद हल्का गर्म पानी के साथ देते रहना चाहिए, इससे अधिक लाभ मिलेगा।


20. सिप्रिपीडियम –

अधिक खुशी का सामाचार सुनकर जब मस्तिष्क में विचारों की भीड़ सी लग जाए और इसके कारण से नींद न आए या जब छोटे बच्चे रात के समय में उठकर एकदम से खेलने लगते हैं और हंसते रहते हैं और उन्हें नींद नहीं आती है। ऐसे रोगियों के अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए सिप्रिपीडियम औषधि के मूल-अर्क के 30 से 60 बूंद दिन में कई बार हल्का गर्म पानी के साथ सेवन कराना चाहिए। रात में अधिक खांसी होने के कारण से नींद न आ रही हो तो सिप्रिपीडियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए जिसके फलस्वरूप खांसी से आराम मिलता है और नींद आने लगती है।


21. कैमोमिला – 

दांत निकलने के समय में बच्चों को नींद न आए और जंहाई आती हो और बच्चा औंघता रहता हो लेकिन फिर भी उसे नींद नहीं आती हो, उसे हर वक्त अनिद्रा और बेचैनी बनी रहती है। ऐसे रोगियों के इस रोग को ठीक करने के लिए कैमोमिला औषधि की 12 शक्ति का सेवन कराने से अधिक लाभ मिलता है।

22. बेल्लिस पेरेन्निस- 

यदि किसी रोगी को सुबह के तीन बजे के बाद नींद न आए तो बेल्लिस पेरेन्निस औषधि के मूल-अर्क या 3 शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है।
23. कैनेबिस इंडिका- 

अनिद्रा रोग (ओब्सीनेट इंसोम्निया) अधिक गंभीर हो और आंखों में नींद भरी हुई हो लेकिन नींद न आए। इस प्रकार के लक्षण यदि रोगी में है तो उसके इस रोग को ठीक करने के लिए कैनेबिस इंडिका औषधि के मूल-अर्क या 3 शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद है। इस प्रकार के लक्षण होने पर थूजा औषधि से भी उपचार कर सकते हैं।
24. पल्सेटिला-


रात के समय में लगभग 11 से 12 बजे नींद न आना। इस लक्षण से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए पल्सेटिला औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना चाहिए।


25. सिमिसि-

यदि स्त्रियों के वस्ति-गव्हर   की गड़बड़ी के कारण से उन्हें अनिद्रा रोग हो तो उनके इस रोग का उपचार करने के लिए सिमिसि औषधि की 3 शक्ति का उपयोग किया जाना चाहिए।


26. साइना-

पेट में कीड़ें होने के कारण से नींद न आने पर उपचार करने के लिए साइना औषधि की 2x मात्रा या 200 शक्ति का उपयोग करना लाभदाक है।


27. पैसिफ्लोरा इंकारनेट- 

नींद न आने की परेशानी को दूर करने के लिए यह औषधि अधिक उपयोगी होती है। उपचार करने के लिए इस औषधि के मल-अर्क का एक बूंद से 30 बूंद तक उपयोग में लेना चाहिए।

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लकवा के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार


                                           

लकवा एक गम्भीर रोग है| इसमें शरीर का एक अंग मारा जाता है| रोगी का अंग विशेष निष्क्रिय हो जाने के कारण वह असहाय-सा हो जाता है| उसे काम करने या चलने-फिरने के लिए दूसरे के सहारे की जरूरत होती है| 
पक्षाघात (लकवा) 13 के घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं:
1. तुलसी
तुलसी के पत्तों को उबालकर उसकी भाप से रोगी के लकवाग्रस्त अंगों की सेंकाई करनी चाहिए|\
2. तुलसी, अफीम, नमक और दही
तुलसी के पत्ते, अफीम, नमक और जरा-सा दही-इन सबका लेप बनाकर अंगों पर थोड़ी-थोड़ी देर बाद लगाएं|\
3. कलौंजी
कलौंजी के तेल की मालिश लकवे के रोगी के लिए रामबाण है|
4. आक के पत्तों को सरसों के तेल में उबालकर शरीर पर मालिश करें|

5. सरसों
कबूतर का खून सरसों के तेल में मिलाकर रोगी के शरीर पर मलें|
6. तिली और कालीमिर्च
तिली के तेल में थाड़ी-सी कालीमिर्च पीसकर मिला लें| फिर इस तेल की मालिश लकवे के अंगों पर करें|

10. सरसों

सरसों के तेल में थोड़े से धतूरे के बीज डालकर पका लें| फिर उस तेल को छानकर अंग विशेष पर मालिश करें|

11. दूध, सोंठ और दालचीनी

दूध में एक चम्मच सोंठ और जरा-सी दालचीनी डालकर उबाल लें| फिर छानकर थोड़ा-सा शहद डालकर सेवन करें|


12.लहसुन और मक्खन 

लहसुन की चार-पांच कलियां पीसकर मक्खन में मिलाकर सेवन करें|
13. छुहारा या सफेद प्याज का रस दो चम्मच प्रतिदिन पीने से पक्षाघात के रोगी को काफी लाभ होता है|

7. सोंठ, पानी और उरद

सोंठ और उरद (साबुत) – दोनों को 200 ग्राम पानी में उबालें| फिर पानी को छानकर दिन में चार-पांच बार पिएं|

8. पानी

पानी में शहद डालकर रोगी को दिनभर में चार-पांच बार पिलाएं| लगभग 100 ग्राम शहद प्रतिदिन रोगी के पेट में पहुंचना चाहिए|

9. अजमोद, सौंफ, और बालछड़, नकछिनी

अजमोद 10 ग्राम, सौंफ 10 ग्राम, बबूना 5 ग्राम, बालछड़ 10 ग्राम तथा नकछिनी 20 ग्राम – सबको कूट-पीसकर पानी में डालकर काढ़ा बना लें| फिर इसे एक शीशी में भरकर रख लें| इसमें से चार चम्मच काढ़ा प्रतिदिन सुबह के समय सेवन करें|

8. पानी

पानी में शहद डालकर रोगी को दिनभर में चार-पांच बार पिलाएं| लगभग 100 ग्राम शहद प्रतिदिन रोगी के पेट में पहुंचना चाहिए|

पक्षाघात (लकवा) में क्या खाएं क्या नहीं

पक्षाघात के रोगी को गेहूं की रोटी, बाजरे की रोटी, कुलथी, परवल, करेला बैंगन, सहिजन की फली, लहसुन, तरोई आदि देनी चाहिए| फलों में पपीता, आम, फालसा, अंजीर, चीकू आदि बहुत लाभदायक है| दूध का उपयोग सुबह-शाम दोनों वक्त करना चाहिए| चावल, दही, छाछ, बर्फ की चीजें, तले हुए पदार्थ, दालें, बेसन, चना आदि नहीं खाना चाहिए| वायु उत्पन्न करने वाले फल तथा साग न खाएं|
शरीर पर सरसों का तेल, विषगर्भ तेल, तिली का तेल, निर्गुण्डी का तेल, बादाम का तेल या अजवायन का तेल मालिश के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए| यदि रक्तचाप बढ़ा हुआ हो तो सर्पगंधा नामक जड़ी खानी चाहिए| एरण्ड का तेल, चोपचीनी का चूर्ण तथा हरड़-बहेड़ा-आंवला (त्रिफला) भी पक्षाघात के रोगी के लिए बहुत लाभदायक है|

पक्षाघात (लकवा) का कारण

जब शरीर के किसी भाग में खून उचित मात्रा में नहीं पहुंच पता है तो वह स्थान (अंग) सुन्न हो जाता है| यही लकवा है| इसके अलावा जो व्यक्ति अधिक मात्रा में वायु उत्पन्न करने वाले या शीतल पदार्थों का सेवन करते हैं, उनको भी यह रोग हो जाता है| यह रोग रक्तचाप के बढ़ने, मर्म स्थान पर चोट पहुंचने, मानसिक दुर्बलता, नाड़ियों की कमजोरी आदि कारणों से भी हो जाता है| यह तीन प्रकार का होता है – सारे शरीर में पक्षाघात, आधे शरीर में पक्षाघात और केवल मुख का पक्षाघात|

पक्षाघात (लकवा) की पहचान

यह रोग पुरे शरीर या आधे शरीर की नाड़ियों और छोटी नसों को सुखा देता है जिसके कारण खून का संचार बंद हो जाता है| संधियों तथा जोड़ों में शिथिलता आ जाती है| अत: विशेष अंग बेकार हो जाता है| रोगी स्वयं उस अंग को चलाने, फिराने या घुमाने में असमर्थ रहता है| यदि लकवा मुख पर गिरता है तो रोगी के बोलने की क्षमता कम हो जाती है या बिलकुल नहीं रहती| आंख, नाक, कान आदि विकृत हो जाते हैं| दांतों में दर्द होने लगता है| गरदन टेढ़ी हो जाती है| होंठ नीचे की तरफ लटक जाते हैं| चमड़ी पर नोचने से भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता|

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