19.5.18

वात रोग (जोड़ों का दर्द ,कमर दर्द,गठिया,सूजन,लकवा) को दूर करने के उपाय // Remedies to overcome Vata Disease (Joint Pain, Waist Pain, Arthritis, Swelling, Paralysis)

                                                           
वात रोग को दूर करने के उपाय 
 शरीर की अधिकतर बीमारियाँ बात असंतुलन के कारण पैदा होती हैं, बल्कि वात असंतुलन के बगैर पित्त और कफ भी असंतुलित नहीं हो सकते। जिस तरह से हवा के कारण बाहरी दुनिया में संचार संभव होता है, कुछ उसी तरह से वात के कारण ही शरीर के भीतर सभी तत्वों का आपस में जुडाव संभव होता है।
हवा की तरह ही वात का भी एक प्रमुख लक्षण है- गति। शरीर की सभी गतियों का संचालक वात ही है। शरीर के किसी अंग की गति में अवरोध हो तो समझना चाहिए कि वात असंतुलित हो रहा है। मसलन, हृदय का काम है रक्त संचार बनाए रखने के लिए धड़कते रहना। यदि हृदय की धड़कन में गड़बड़ी आ जाए तो इसका अर्थ है कि वात बढ़ रहा है। यदि कोई व्यक्ति चाहकर भी शांत नहीं रह सकता तो समझिए कि वह बात असंतुलन का शिकार है। जिसे अपनी ऊर्जा पर नियंत्रण नहीं है, वह वात रोगी होगा ही। इसी तरह शरीर की गतियों से संबंधित लकवा, पाकिंसन, अकड़न जैसे रोग बढ़े हुए वात के ही परिणाम हैं। यही कारण है कि सभी तरह की मानसिक व्याधियों में बिगड़े हुए वात का हाथ भी कुछ-न-कुछ जरूर दिखाई देता है। वात रोग में मुख्यतः जोड़ों का दर्द, गठिया, कमर दर्द, यूरिक एसिड का बढ़ना, खुश्की तथा रूखापन, शरीर में जकड़न तथा दर्द, सिर में भारीपन, पेट फूलने, गठिया, लकवा आदि शरीरिक कठिनाई आती है आज हम आपको वात रोग निवारण के लिए बहुत ही सरल और उपयोगी घरेलु उपचार बता रहे हैं
वात रोग निवारण के उपाय
*सोंठ चूर्ण आधा चम्मच, जावित्री आधा चम्मच को ग्वारपाठा के 10 ग्राम गूदे के साथ खाने से वात रोग 2 महीनो में ठीक हो जाता है।
*दानामेथी 2 चम्मच, एलोवेरा का रस 4 चम्मच को मिलाकर पीने से सभी वात रोग ठीक हो जाते हैं।
*गेहूँ की रोटी में एलोवेरा का गूदा मिलाकर प्रात:काल 1 बासी रोटी बिना चुपड़ी खाने से पेट की वायु एवं वात रोग शीघ्र शांत होने लगते हैं।
*वात रोग निवारण के लिए दानामेथी चूर्ण 100 ग्राम, सोंठ 50 ग्राम, देशी घी 100 ग्राम तथा पीपल, काली मिर्च, धनिया, पीपरामूल, दालचीनी और नागरमोथा सबका चूर्ण 10-10 ग्राम लें। सभी चीजों को कूट-पीसकर 200 ग्राम ग्वारपाठा का गूदा लेकर मिलाकर गरम करें। अब इनको देशी घी में भून लें। ठण्डा हो जाने पर 20-20 ग्राम के लड्डू बना लें। रोजाना 1 लड्डू खाएँ तो शरीर में सूजन, वात रोग, वात विकार, पेट की गैस आदि रोग जड़ सहित मिट जाते हैं।
*10 ग्राम चोपचीनी, 2 ग्राम पीपरामूल और 10 ग्राम एलोवेरा का गूदा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से वात रोग तथा विकार शांत हो जाते हैं।


वात रोग की वजह से होने वाले गठिया और जोड़ो के दर्द का उपचार

*एलोवेरा के गूदे को गरम करके जोड़ों पर मालिश करने से गठिया रोग में आराम मिलता है।
*अजमोदादि चूर्ण को 4 चम्मच एलोवेरा के रस के साथ खाने से गठिया रोग 2 सप्ताह में चला जाता है।
एक गिलास पानी में 20 ग्राम आंवले को उबालकर उसमें एलोवेरा का 10 ग्राम गूदा मिलाकर दिन मे 3-4 बार 4-4 चम्मच लें तो वात रोग के कारण होने वाली जोड़ों की सूजन मिट जाती है।
*पीपल के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर एलोवेरा का गूदा मिला लें। इस तैयार पानी को ठण्डा करके पीने से गठिया आदि रोग ठीक जाते हैं।
*4 नग बादाम को 4 चम्मच एलोवेरा के रस के साथ पीसकर गरम करके खाने से पक्षाघात वाले अंगों में शक्ति उत्पन्न हो जाती है।
*करेले का रस 2 चम्मच और एलोवेरा का रस आधा कप 10 दिनों तक सुबह शाम खाने से वात रोग के कारण होने वाला हड्डी दर्द ठीक हो जाता है।

*10 ग्राम गुग्गुल को एलोवेरा के रस के साथ सेवन करने से जोड़ों का दर्द मिट जाता है।
*दानामेथी का चूर्ण 1 चम्मच, एलोवेरा के रस के साथ सुबह-शाम लेने से जोड़ों की बीमारियाँ, घुटनों का दर्द मिट जाता है।
*खाने के साथ बच का चूर्ण 1 चम्मच प्रतिदिन एलोवेरा के ताजे रस के साथ सेवन करने से वात व्याधि, जोड़ों का दर्द, घुटनों की पीड़ा शांत हो जाती है।


 वात रोग की वजह से होने वाले कमर दर्द का उपचार

*सोंठ चूर्ण आधा चम्मच, तुलसी के बीजों का रस आधा चम्मच, एलोवेरा का रस 2 चम्मच मिलाकर काढ़ा बनाकर सेवन करने से कमर सम्बन्धी रोगों में आराम होता है।
*सहिजन की फलियों का रस 2 चम्मच, एलोवेरा का गूदा 10 ग्राम मिलाकर लें तो कमर का दर्द ठीक हो जाता है।
*राई 10 ग्राम, एलोवेरा का गूदा 50 ग्राम मिलाकर कमर पर गरम-गरम लेप करने से कमर दर्द एक बार में आधा चला जाता है।
*असगंध चूर्ण 1 चम्मच, सोंठ आधा चम्मच और एलोवेरा का गूदा 4 चम्मच मिलाकर खाने से कमर दर्द, स्लिप डिस्क, चणक, नस का दर्द एवं सायटिका रोग मिट जाता है।
*अजवायन को एलोवेरा के गूदे में भरकर 2 सप्ताह तक धूप में सुखाकर रखें और इस तैयार चूर्ण में से 1 चम्मच को 4 चम्मच एलोवेरा के रस के साथ लें तो वात रोग के कारण होने वाले कमर का दर्द ठीक हो जाता है।


वात रोग से होने वाली सूजन का उपचार

*शरीर में सूजन आ जाने पर मुलतानी या चिकनी मिट्टी में एलोवेरा का गूदा मिलाकर लेप करें तो सूजन ठीक हो जाती है।
*त्रिफला चूर्ण 1 चम्मच, एलोवेरा का रस चौथाई कप मिलाकर रात को सोते समय सेवन करें तो वात रोग, वात विकार और लकवा शीघ्र ठीक हो जाते हैं।

*वात रोग या वात बिगड़ने से शरीर में सूजन आ जाने पर एलोवेरा का रस 2 चम्मच, हल्दी 1 चम्मच और चूना आधा चम्मच मिलाकर लेप करें तो लाभ हो जाता है।
*फिटकरी 1 चम्मच और एलोवेरा का गूदा 10 ग्राम को हल्का गरम करके इसका लेप करें तो सूजन वाले अंग की सूजन मिट जाती है।
*रात को सोते समय एलोवेरा के गूदे से तलवों पर मालिश करने से शरीर की वात संतुलित रहता है और पैरों का सुनपन भी ठीक हो जाता है।


लकवा पक्षाघात के लिए नुस्खे

*अंजीर 2 नग, एलोवेरा का रस 4 चम्मच, सोंठ आधा चम्मच और काली मिर्च चौथाई चम्मच मिलाकर खाने से 2 सप्ताह में लकवा ठीक हो जाता है।
*एलोवेरा का रस 50 ग्राम और तिल्ली का तेल 100 ग्राम मिलाकर उबाल लें एवं तेल तैयार होने पर मालिश करें तो वात रोग के कारण होने वाले लकवे में आराम मिलता है।

*लहसुन की 2-3 कलियाँ छिलकर एलोवेरा के गूदे के रस के साथ खाने से पक्षाघात 2 माह में ठीक हो जाता है।
*शहद 4 चम्मच, एलोवेरा का रस 4 चम्मच मिलाकर प्रात:काल बासी मुँह खाने से लकवा ठीक हो जाता है।
*1 चम्मच सर्पगंधा का चूर्ण को 10 ग्राम एलोवेरा के गूदे के साथ सेवन करने से पक्षाघात ठीक हो जाता है तथा उच्च रक्तचाप शांत हो जाता है।
*चौलाई के पत्तों का रस 2 चम्मच, एलोवेरा का गूदा 20 ग्राम और अदरक का रस 1 चम्मच मिलाकर गरम करके पीने से जोड़ों में मजबूती आती है एव दर्द मिट जाता है।
*एलोवेरा को पत्तों सहित उबालकर उसकी भाप से रोगी के लकवे वाले हिस्से की सिकाई करने से दो सप्ताह में अंगों में फड़कन, चलन शुरू हो जाती है।



16.5.18

सिरका के औषधीय उपयोग // Medicinal use of vinegar

                                             à¤¸à¤¿à¤°à¤•à¤¾ के औषधीय उपयोग के लिए इमेज परिणाम
सिरका कई प्रकार का होता है।अंगूर, सेब, संतरे, अनन्नास, जामुन तथा अन्य फलों के रस, जिनमें शर्करा पर्याप्त है, सिरका बनाने के लिए बहुत उपयुक्त हैं क्योंकि उनमें जीवाणुओं के लिए पोषण पदार्थ पर्याप्त मात्रा में होते हैं।
*आयुर्वेद में सिरके का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है। आप अपने बालों को सुंदर बनाने के लिए भी सिरके का प्रयोग कर सकते हैं। सिरका बालों के लिए अच्छा है । डेंड्रफ, जूं जैसी समस्याओं से बचने के लिए सिरके का प्रयोग लाभकारी है। बालों की अच्छी तरह से सफाई और बालों को स्व्स्थ रखने में सिरके का इस्तेमाल किया जाता है। बालों की कंडीशनिंग के लिए भी सिरके का इस्तेमाल किया जा सकता है।
*बालों में होने वाले फुंसी, फंगस और इसी तरह की अन्य समस्याओं को दूर करने और बैक्टीरिया इत्यादि को नष्ट करने में भी सिरके का प्रयोग किया जाता है।

* भोजन के साथ सिरका खाने से रक्त पतला होता है।
* बालों की चमक बरकरार रखने के लिए और बालों को मुलायम और सुंदर बनाने के लिए सिरके से किफायती कुछ भी नहीं।


* सिरके से बालों को सीधा भी किया जा सकता है। यदि रूखे और घुंघराले बालों को सीधा करना है तो सिरके का प्रयोग करना चाहिए। ऐसे में आपको चाहिए कि आप सेब के सिरके से बालों को धोएं और इससे जल्द ही आप बाल सीधे कर पाएंगे।
* सिरका, चर्बी कम करने और शरीर से विषैले पदार्थ निकालने की प्रक्रिया में सहायक होता है तथा इससे रक्त से वसा और हानिकारक कोलिस्ट्रोल कम होता है।
*सिरके में मौजूद सेट्रिक एसिड आहार में मौजूद कैल्शियम को शरीर का अंश बनाता है और शरीर की भीतरी क्रियाओं के लिए अत्याधिक लाभदायक होता है।
*सिरका, पाचनक्रिया के लिए हानिकारिक बैक्र्टिरिया का नाश करता है। जिन लोगों को पाचनतंत्र की समस्या और क़ब्ज़ तथा दस्त अथवा पेट दर्द में ग्रस्त हैं वह सिरका की सहायता से इन समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।
*सिरका बुद्धि में तीव्रता का कारण बनता है और ह्रदय के लिए लाभदायक होता है।
* सिरके का एक अन्य लाभ यह है कि वह अमाशय की एसिड के स्राव को संतुलित करता है ।
*सिरका दांतों की गंदगी दूर करने और मसूड़े की सूजन में लाभदायक है।
* डाक्टर, कमज़ोर स्नायुतंत्र, गठिया और अल्सर के रोगियों के लिए सिरके को हानिकारक बताते हैं।
*एसीडिटी से निजात पाने के लिए एक ग्लास पानी में दो चम्मच सेब का सिरका तथा दो चम्मच शहद मिलाकर खाने से पहले सेवन करें।
*हृदय रोग, कैलोस्ट्रोल बढ़ने और खून के थक्के होने की शिकायत है, उनके लिए अनुभूत औषधि जो बरसों पहले एक वृद्ध साधू द्वारा बताई गयी है.अदरक का रस एक कप, लहसून का रस एक कप, नींबू का रस एक कप, सेब का सिरका एक कप लेकर, उसको मध्यम आंच पर गर्म करे. जब तीन कप रह जाएँ, तो उसको सामान्य तापमान तक ठंडा कर लें . फिर उसमें तीन कप शहद मिला कर, किसी भी बोतल आदि में रख लें. रोज़ प्रात: खाली पेट, दो चम्मच औषधि को सामान मात्रा में जल मिलाकर, सेवन करें.नाश्ता लगभग आधे घंटे बाद करें.
*जामुन का सिरका पेट सम्बंधी रोगों के लिए लाभकारक है। जामुन के सिरके से भूख बढ़ती है, पेट की वायु निकलती है , कब्ज दूर होती है व मूत्र साफ होता है।काले पके हुए जामुन साफ धो कर पोछ कर मिटटी के बर्तन में नामक मिलाकर साफ कपडे से बांध कर धुप में रख दे । एक सप्ताह धुप में रखने के पश्चात् इसको साफ कपडे से छान कर रस को कांच के बोतल में भर कर रख दे यह सिरका तैयार है । मुली प्याज गाजर शलजम मिर्च आदि के टुकडे भी उसी सिरके में डालकर इसका उपयोग सलाद पर आसानी से किया जा सकता है ।
* किसी ने धतूरा खा लिया हो, तो उसे अंगूर का सिरका दूध में मिलाकर पिलाने से काफी लाभ होता है।
* एक प्याले में सेब का सिरका, एक कप शहद और छिले हुए लहसुन की आठ गाँठे मिलाओ। इन सबको तेज चलने वाली मिक्सी में डाल कर एक मिनट के लिए चला दो और घोल तैयार करो। इस मिश्रण को एक काँच की बोतल में डाल कर पाँच दिन के लिए फ्रिज में बन्द करके रखो। आम खुराक -दो चम्मच पानी या अंगूर या फलों के रस में डाल कर नाश्ते से पहले लो। इस इलाज से बंद नाड़ियों, जोड़ों का दर्द, उच्च रक्तचाप ( हाई ब्लड प्रैशर), कैंसर की कुछ किस्मों, कोलेस्टरोल की अधिक मात्रा, सर्दी ज़ुकाम, बदहज़मी, सिर दर्द, दिल के रोग, रक्त प्रवाह की समस्या, बवासीर, बांझपन, नपुसंकता, दांत दर्द, मोटापा, अल्सर और बहुत सारी बीमारियाँ ठीक करने में सहायता मिलती है।



10.5.18

करौंदा के औषधीय गुण//Medicinal properties of craneberry


    मध्य और पश्चिम भारत के वनों में कंटीली झाडियों वाला पौधा करौंदा प्रचुरता से उगता हुआ देखा जा सकता है। कच्चे करौंदों का अचार बेहद स्वादिष्ठ होता है जबकि पके हुए करौंदों का मुरब्बा बेहद स्वादमय होता है। विटामिन से भरपूर करौंदा का वानस्पतिक नामक कैरिस्सा कैरंडस है। आदिवासी कच्चे करौंदे की सब्जी भी तैयार करते हैं और इसे अनेक पारंपरिक नुस्खों में अपनाते भी हैं।
    करौंदा एक झाड़ की तरह पौधा होता है पेड़ कांटेदार और 7 से 8 फुट तक होते हैं। करौंदा विटामिन C प्रचुर मात्रा में होने के साथ-साथ अत्याधिक एंटी-ऑक्सीडेंट भी होता है करौंदा के वृक्ष दो प्रकार के होते हैं। एक प्रकार के करौंदों में छोटे फल लगते हैं। दूसरी प्रकार के करौदें में बड़े करौंदे लगते हैं करौंदा विटामिन E तथा K का भी अच्छा स्त्रोत है|


करौंदा के औषधीय गुण-

   स्कर्वी रोग की रोगथाम के लिए करौंदा एक प्रमुख पारंपरिक हर्बल उपाय है। माना जाता है कि अक्सर करौंदा की सब्जी और चटनी खाने से और गर्मियों में पके करौंदा का जूस पीने से स्कर्वी रोग की बेहतर रोकथाम की जा सकती है। आधुनिक शोधों से जानकारी मिलती है कि विटामिन ष्ट की अधिकता होने की वजह से स्कर्वी के लिए यह एक बेहतर उपाय है।
     जिन्हें रक्त अल्पता की शिकायत है उन्हें पके हुए करौंदा का जूस पीना चाहिए। डाँग- गुजरात के आदिवासियों के अनुसार प्रतिदिन रोज एक बार एक गिलास करौंदा का जूस पीने से शरीर में रक्त शुद्दि के साथ-साथ खून की मात्रा में भी काफी इजाफा होता है।
*इसमें कम कैलोरी होने के कारण, यह वज़न घटाने में भी सहायक है|
*दांतों को सडन से बचने के साथ सांस की दुर्गन्ध को रोकता है|
*करौंदे के रस का प्रतिदिन सेवन करके स्तन कैंसर से बचा जा सकता है
*करौंदे का रस फेफड़ों की सूजन दूर करने में लाभदायक है|
*स्त्री स्वास्थ्य सम्बन्धी रोगों में विशेष रूप से लाभप्रद है| जैसे- मूत्र संक्रमण
*सूखी खाँसी होने पर करौंदा की पत्तियों के रस का सेवन लाभकारी होता है
*करौंदे के रस का सेवन रक्तचाप को कम करता है
*झुर्रियों के निर्माण की प्रक्रिया को रोक कर, झुर्रियों का आना कम करता है
*करौंदा कैल्शियम प्रदान कर हमारी हड्डियों तथा दांतों को मज़बूत बनाता है|



1.5.18

पपीता के अनुपम फायदे // Unique benefits of papaya

                                                   à¤ªà¤ªà¥€à¤¤à¤¾ के अनोखे फायदे के लिए इमेज परिणाम
विटामिन A, B और C तथा फाइबर से भरपूर पपीता और नींबू पेट, आंख और त्वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। इसके अलावा फॉस्फोरस, पोटैशियम, आयरन, एंटीऑक्सीडेंट्स, काबरेहाइड्रेट, प्रोटीन, सोडियम तथा अन्य खनिज-लवण भी मौजूद रहते हैं, जो स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक होते हैं। पपीता केवल फल नहीं है यह एक दवाई भी है क्योंकि यह पेट से दिल तक स्वस्थ्य लाभ पहुंचता है। 
    पपीता एक ऐसा फल है, जो कच्चा और पका हुआ दोनों ही रूप में खाया जाता है। सबसे अच्छी बात यह है पपीते में कई तरह के विटामिन मिलते हैं, नियमित रूप से खाने से शरीर में कभी विटामिन्स की कमी नहीं होती। बीमार व्यक्ति के लिए भी यह बहुत फायदेमंद होता है। यह आसानी से अवशोषित होकर शारीर को काफी फायदा पहुचता है। पपीते में पपेन नामक पदार्थ पाया जाता है जो मांसाहार गलाने के काम आता है। भोजन पचाने में भी यह अत्यंत सहायक होता है। पपीता पेट के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इससे पाचन तंत्र ठीक रहता है और पेट के रोग भी दूर होते हैं। पपीता पेट के तीन प्रमुख रोग आम, वात और पित्त तीनों में ही राहत पहुंचाता है। यह आंतों के लिए उत्तम होता है।
   पपीते में बड़ी मात्रा में विटामिन-ए होता है। इसलिए यह आंखों और त्वचा के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है। इससे आंखों की रोशनी तो अच्छी होती ही है, त्वचा भी स्वस्थ, स्वच्छ और चमकदार रहती है। पपीते में कैल्शियम भी खूब मिलता है। इसलिए यह हड्डियां मजबूत बनाता है। यह प्रोटीन को पचाने में सहायक होता है। पपीता फाइबर का अच्छा स्रोत है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, कैंसर रोधी और हीलिंग प्रॉपर्टीज भी होती है। जिन लोगों को बार-बार सर्दी-खांसी होती रहती है, उनके लिए पपीते का नियमित सेवन काफी लाभकारी होता है। इससे इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है। इसमें बढ़ते बच्चों के बेहतर विकास के लिए ज़रूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। शरीर को पोषण देने के साथ ही रोगों को दूर भी भगाता है। 
   

कब्ज की शिकायत दूर होती है 

आपको बता दे कि पपीते का सेवन पेट के लिए अच्छा होता है। पपीते के छोटे-छोटे टुकड़े करके काली मिर्च का चूर्ण, सेंधा नमक और नींबू का रस मिलाकर सेवन करने से भोजन के प्रति अरुचि की शिकायत दूर होती है और भोजन सरलता से हजम हो जाता है।इसमे पपाइन नामक एंजाइम पाया जाता है, जो आहार को पचाने में अत्यंत मददगार साबित होता है। इसके सेवन करने से मंदाग्नि की शिकायत दूर होती है।इसमें दस्त और पेशाब की समस्या को दूर करने का गुण है। 
लीवर, सिरोसिस और कैंसर से बचाव 
पपीते और नींबू रस लीवर सिरोसिस के लिए काफी लाभदायक घरेलू उपाय है। पपीता लीवर को काफी मज़बूती प्रदान करता है और नींबू लीवर को पित्त(बाइल) के उत्पादन में सहायता करता है और शरीर से विषाक्त पदार्थ को निकालने में भी मदद करता है। इसलिए हर रोज दो चम्मच पपीता के रस में आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर पिएं। इस बीमारी से पूरी तरह निजात पाने के लिए इस मिश्रण का सेवन तीन से चार सप्ताहों के लिए करें। इसके सेवन से कोलन कैंसर, प्रोस्‍टेट कैंसर और ब्‍लड कैंसर आदि की कैंसर कोशिकाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। 
आंखों के लिए फायदेमंद 
नींबू और पपीते में मौजूद विटामिन ए आंखों की कमजोरी को दूर करता है। पपीते में कैल्श्यिम, कैरोटीन के साथ विटामिन ए विटामिन बी, और सी, डी की की भरपूर मात्रा होती है। जो आंखों की दिक्कतों को खत्म करती है।इसके सेवन से रतौंधी रोग का निवारण होता है और आंखों की ज्योति बढ़ती है।आंखों की दृष्टि अच्‍छी बनाएं रखने के लिए इसका सेवन जरूर करे। जिन बच्‍चों को कम उम्र में ही चश्‍मा लग जाता है उनके लिए यह बेहद लाभकारी होता है।इसके अलावा विटामिन ए भी उम्र से संबंधित धब्बेदार पतन के विकास को रोकता है और आँखों के लिए स्वास्थ्य वर्धक माना जाता है। 
वजन घटाने मे कारगर 


नियमित रुप से सुबह खाली पेट पपीते और नींबू के रस का सेवन करें।नींबू और पपीते में पेक्टिन फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है जो भूख की प्रबल इच्छा से लड़ने में मदद करता है और आप एक लंबे समय के लिए तृप्त महसूस करते है। पेट को भरा भरा महसूस करवाने के साथ यह आंतों के कार्यों को ठीक रखता है जिसके फलस्‍वरूप वजन घटाना आसान हो जाता है। इसके बाद अपना वजन चेक करें उसमें निश्चित ही कमी दिखेगी। इसके सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है।

 दिल औऱ ब्लडप्रेशर रखें सुरक्षित 
नींबू और पपीता फाइबर, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है और धमनियों में कोलेस्ट्रॉल के निर्माण को कम करता है। बहुत अधिक कोलेस्ट्रॉल का निर्माण धमनियों को ब्लॉक कर सकता है और दिल का दौरा पड़ने का कारण बन सकता है। नींबू का सेवन नसों में निरन्तर रक्त संचार सुचारू करने में सक्षम है। और दिल दौरे और अटैक को रोकने में सक्षम है।नींबू में पोटाशियम भी होता है जो ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है और ब्रेन एवं नर्व सिस्टम को दुरूस्त करता है। पपीता में भी ब्लडप्रेशर ठीक करने प्राकृतिक गुण छिपे हुयें है। इन दोनों के सेवन से कुछ समय के लिए उसका शरीर रिलैक्‍स हो जाता है क्‍योंकि उसके शरीर से तनाव दूर करने वाले हारमोन्‍स की मात्रा बढ़ जाती है। इनमे मौजूद कई पोषक तत्व शरीर को मौसम बदलने के साथ होने वाले संक्रमणों से दूर रखने में मदद रखता हैं। 
दिल की बीमारी 
पपीते में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ए, सी और इ पाया जाता है। इस ऑक्सीडेंट से शारीर में कोलेस्ट्रॉल नहीं जम पाता, जिससे वजह से दिल की बीमारी नहीं होती। इसके अलावा इसमें फाइबर होते हैं जो कोलेस्ट्रॉल को खून में कंट्रोल कर के रखते हैं। पाचन तंत्र के लिये : पपीते के रस में ‘पॅपेइन’ नामक एक तत्त्व पाया जाता है, जो आहार को पचाने में अत्यंत मददगार साबित होता है। इसमें दस्त और पेशाब साफ करने का गुण होता है। जिन लोगों को कब्ज की शिकायत हमेशा होती रहती है उनको पपीते का नियमित सेवन करना चाहिए।
वजन घटाने मे कारगर 
समय से पहले बूढा होना भला कौन चाहेगा। पपीता इसी को रोकता है। इस फल को खाने से हमारा शरीर भोजन से सारे पोषण आराम से ग्रहण कर लेता है, जिससे उसकी जरुरत पूरी हो जाती है। अब अगर शरीर में सारे जरुरी पोषण जाएंगे तो वह सालों साल जवान दिखता रहेगा। 


कील मुंहासे 

सौंदर्य प्रसाधनों में भी इसका प्रयोग किया जाता है। पके हुए पपीते का गूदा चेहरे पर लगाने से मुहांसे और झांई से बचाव किया जाता है। इससे त्वचा का रूखापन दूर किया जाता है और झुर्रियों को रोका जा सकता है। इसलिए चेहरे के दाग धब्बों को मिटाने के लिये इसका प्रयोग बहुत ही लाभदायक है।
 कैंसर 
पपीते में एंटी कैंसर के गुंण पाए जाते हैं। इसमें मौजूद विटामिन सी, बीटा कैरोटीन और विटामिन इ शरीर में कैंसर सेल बनने से रोकते हैं। इसलिये आपको रोज अपनी डाइट में पपीता खाना चाहिये। 
वजन घटाने मे कारगर 
पपीता नेत्र रोगों में हितकारी होता है, क्योंकि इसमें विटामिन ‘ए’ प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, इसके सेवन से रतौंधी नामक (रात को न दिखाई देना) रोग का निवारण होता है और आँखों में ज्योंति बढ़ती है। पपीता से रक्तशुद्धि, पीलिया रोग का निवारण, अनियमित मासिक धर्म में हितकारी तथा सौंदर्य वृद्धि में सहायक होता है। 
दाद 
पपीते का दूध निकालकर कुछ दिनों तक दाद पर लगाने से दाद ठीक होता है। 
प्लीहा रोग 
प्लीहा रोग से पीड़ित रोगी को पपीता का सेवन प्रतिदिन करना चाहिए। इससे प्लीहा रोग ठीक होता है।
 यकृत रोग 
यदि छोटे बच्चों के यकृत (जिगर) खराब रहता हो तो उसे प्रतिदिन पपीता खिलाना चाहिए। पपीता यकृत (जिगर) को ताकत देता है। यह पेट के सभी रोगों को भी समाप्त करता है। पपीता और सेब खाने से बच्चों के जिगर की खराबी दूर होती है।
 कब्ज़ 
कच्चा पपीता या पका पपीता खाने से कब्ज की शिकायत दूर होती है। कब्ज से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन सुबह पपीते का दूध पीना चाहिए। इससे कब्ज दूर होकर पेट साफ होता है। खाना खाने के बाद पपीता खाने से कब्ज की शिकायत दूर होती है। पपीते के दूध व अदरक के रस में 50 ग्राम अजवाइन मिलाकर छाया में सूखा लें। सूख जाने पर यह आधा चम्मच की मात्रा में भोजन के तुंरत बाद पानी से लें। इससे कब्ज दूर होती है। यह गैस बनना, गले व छाती की जलन, भूख का न लगना, गुदा की खुजली आदि को भी ठीक करता है।
 पेट के कीड़े 
पपीते के 10 बीजों को पानी में पीसकर चौथाई कप पानी में मिलाकर लगभग 7 दिनों तक लगातार पीने से पेट के कीड़े समाप्त होते हैं।



2.4.18

ओट्स,जौ,जई के अनुपम फायदे //Unique advantages of oats, barley

                                     
                                       


प्राचीन काल से जौ का उपयोग होता चला आ रहा है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों का आहार मुख्यतः जौ थे। वेदों ने भी यज्ञ की आहुति के रूप में जौ को स्वीकार किया है। गुणवत्ता की दृष्टि से गेहूँ की अपेक्षा जौ हलका धान्य है।
ओट्स या जई आसानी से पच जाने वाले फाइबर का जबरदस्त स्रोत है। साथ ही यह कॉम्पलेक्स कार्बोहाइडेट्स का भी अच्छा स्रोत है। ओट्स हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को कम करता है। बशर्ते इसे लो सैच्यूरेटिड फैट के साथ लिया जाए। ओट्स एलडीएल की क्लियरेंस बढ़ाता है। ओट्स में फोलिक एसिड होता है जो बढ़ती उम्र वाले बच्चों के लिए बहुत उपयोगी होता है। यह एंटीकैंसर भी होता है
ओट में कैल्शियम, जिंक, मैग्नीज, आयरन और विटामिन-बी और ई भरपूर मात्रा में होते हैं। जो लोग डिसलिपिडेमिया और डायबिटीज से पीड़ित हैं उन्हें ओट्स फायदेमंद होता है। गर्भवती महिलाओं और बढ़ते बच्चों को भी ओट खाना चाहिए। आईये जाने कुछ और ऐसे ही फायदे



हृदय


ओट्स का सेवन दिल के लिये काफी फायदेमंद होता है। ओट्स में खूब फाइबर मौजूद होता है, और इसमें फॉलीबल फाइबर होता है जो दिल के लिये बहुत अच्छा होता है यही नहीं यह दूसरी बीमारियों से भी बचाता है। इससे शुगर लेवल कम रहता है।

कोलेस्ट्रॉल

ओट्स में मौजूद बीटा ग्लूकॉन नामक गाढा चिपचिपा तत्व हमारी आंतों की सफाई करते हुए कब्ज की समस्या दूर करता है। इसकी वजह से शरीर में बुरे कोलेस्ट्रॉल जमा नहीं हो पाता। अगर तीन महीने तक नियमित रूप से ओट्स का सेवन किया जाए तो इससे कोलेस्ट्रॉल के स्तर में 5 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है

स्तन कैंसर से बचाता है

ओट्स में लिग्नंस और एन्टेरोलैक्टोने जैसे फीटोकमिशल पाये जो कैंसर से लड़ने में सहायक हैं। एन्टेरोलैक्टोने विशेष रूप से, स्तन और अन्य हार्मोन से संबंधित कैंसर की रोकथाम में सहायक है




वजन घटाए


इसमें इनसॉलिबुल और सॉलिबुल फाइबर होता है, जो फैट बर्निंग के लिए काफी अच्छा है, साथ ही प्रोटीन भी मौजूद होने से पेट भर जाता है। जो लोग जिम जाने का या व्यायाम करने का समय नहीं निकल पाते हैं, वे ओट्स खा के अपना वजन जल्दी और आसान तरीके से कर सकते हैं।

उच्च रक्तचाप कम करता है

उच्च रक्तचाप हमारे हृदय के लिए बहुत ज्यादा खतरनाक है , इसे समय रहते अगर रोका ना गया तो यह इंसान की जान भी ले सकता है। इससे बचने का सबसे अच्छा उपाए है ओट्स। ओट्स खाने से उच्च रक्तचाप की परेशानी कम होती है क्योंकि इसमें फाइबर होता है जो कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित रखता है।

आंत को स्वस्थ रखता है

ओट्स में फाइबर होने की वजह से यह आंत और मलाशय के लिए काफी फायदेमंद होता है। ओट्स उनके लिए बहुत लाभदायक है जो लोग अल्सरेटिव कोलाइटिस से पीड़ित हैं। ओट्स रोज़ खाने से कब्ज़ जैसी परेशानियों से निजात मिल जाता है।

त्वचा को चमकदार बनाये

ओट्स ना सिर्फ हमारे शरीर को स्वास्थ रखता है बल्कि यह हमारी त्वचा के लिए भी बहुत लाभदायक है। यह त्वचा को नमी देता है साथ ही जिनकी त्वचा बहुत ज्यादा रूखी या उसमें बहुत खुजली और जलन होती है तो ओट्स बहुत उपयोगी है।

तनाव से बचाता है

ओट्स में फाइबर और मैग्नीशियम पाया जाता है जो दिमाग में सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ता है, जिससे मस्तिष्क शांत रहता है। जिसकी वजह से आपका मूड अच्छा रहता है और नींद भी अच्छी आती है। आप चाहें तो इसमें ब्लूबेरी भी दाल के खा सकते हैं, जिस में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी पाया जाता है जो तनाव से लड़ने में मदद करता है।

ब्लड शुगर लेवल को स्थिर रखता है

ओट्स में कार्बोहाइड्रेट काफी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो आपको ऊर्जा देती है। फाइबर की मात्रा ज्यादा होने की वजह से यह धीरे धीरे पचता है, जिसकी वजह से रक्त में मौजूद ग्लूकोस का स्तर बढ़ता नहीं है। अध्ययनों से यह भी पता चला है कि इसको नियमित खाने से टाइप 2 मधुमेह का खतरा काम हो जाता है।




28.3.18

पित्ताशय की पथरी की दवा गुड़हल के फूल

गाल ब्लैडर स्टोन की चमत्कारी दवा :
गुडहल के फूलों का पाउडर अर्थात इंग्लिश में कहें तो Hibiscus powder. ये पाउडर बहुत आसानी से पंसारी से मिल जाता है. अगर आप गूगल पर Hibiscus powder नाम से सर्च करेंगे तो आपको अनेक जगह ये पाउडर online मिल जायेगा. और जब आप online इसको मंगवाए तो इसको देखिएगा organic hibiscus powder. आज कल बहुत सारी कंपनिया आर्गेनिक भी ला रहीं हैं तो वो बेस्ट रहेगा. कुल मिला कर बात ये है के इसकी उपलबध्ता बिलकुल आसान है। अब जानिये इस पाउडर को इस्तेमाल कैसे करना है...


इस्तेमाल की विधि :
गुडहल का पाउडर एक चम्मच रात को सोते समय खाना खाने के कम से कम एक डेढ़ घंटा बाद गर्म पानी के साथ फांक लीजिये. ये थोडा कड़वा होता है. इसलिए मन भी कठोर कर के रखें. मगर ये इतना भी कड़वा नहीं होता के आप इसको खा ना सकें. इसको खाना बिलकुल आसान है. इसके बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है.
इसके साथ में प्रोस्टेट enlargement की समस्या मे भी उपयोगी है|
पालक, टमाटर, चुकंदर, भिंडी का सेवन न करें। और अगर आपका स्टोन बड़ा है तो ये टूटने समय दर्द भी कर सकता है.



24.3.18

जायफल के घरेलू ,आयुर्वेदिक औषधीय प्रयोग // Nutmeg's home, Ayurvedic medicinal use


                                         


आयुर्वेद में जायफल को वात एवं कफ नाशक बताया गया है।
1.आमाशय के लिए उत्तेजक होने से आमाशय में पाचक रस बढ़ता है, जिससे भूख लगती है। आंतों में पहुंचकर वहां से गैस हटाता है। ज्यादा मात्रा में यह मादक प्रभाव करता है। इसका प्रभाव मस्तिष्क पर कपूर के समान होता है, जिससे चक्कर आना, प्रलाप आदि लक्षण प्रकट होते हैं। इससे कई बीमारियों में लाभ मिलता है तथा सौन्दर्य सम्बन्धी कई समस्याओं से भी निजात मिलती है।
2. जायफल को कच्चे दूध में घिसकर चेहरें पर सुबह और रात में लगाएं। मुंहासे ठीक हो जाएंगे और चेहरे निखारेगा।
3. नीबू के रस में जायफल घिसकर सुबह-शाम भोजन के बाद सेवन करने से गैस और कब्ज की तकलीफ दूर होती है।

4. जायफल और काली मिर्च और लाल चन्दन को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की चमक बढ़ती है, मुहांसे ख़त्म होते हैं।


5. दस्त आ रहे हों या पेट दर्द कर रहा हो तो जायफल को भून लीजिये और उसके चार हिस्से कर लीजिये एक हिस्सा मरीज को चूस कर खाने को कह दीजिये। सुबह शाम एक-एक हिस्सा खिलाएं।
6. सुबह-सुबह खाली पेट आधा चम्मच जायफल चाटने से गैस्ट्रिक, सर्दी-खांसी की समस्या नहीं सताती है। पेट में दर्द होने पर चार से पांच बूंद जायफल का तेल चीनी के साथ लेने से आराम मिलता है।
7. अनिंद्रा का स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और इसका त्वचा पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। त्वचा को तरोताजा रखने के लिए भी जायफल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आपको रोजाना जायफल का लेप अपनी त्वचा पर लगाना होगा। इससे अनिंद्रा की शिकायत भी दूर होगी और त्वचा भी तरोजाता रहेगी।
8. सर में बहुत तेज दर्द हो रहा हो तो बस जायफल को पानी में घिस कर लगाएं।



9. सर्दी के मौसम के दुष्प्रभाव से बचने के लिए जायफल को थोड़ा सा खुरचिये, चुटकी भर कतरन को मुंह में रखकर चूसते रहिये। यह काम आप पूरे जाड़े भर एक या दो दिन के अंतराल पर करते रहिये। यह शरीर की स्वाभाविक गरमी की रक्षा करता है, इसलिए ठंड के मौसम में इसे जरूर प्रयोग करना चाहिए।
10. आपको किन्हीं कारणों से भूख न लग रही हो तो चुटकी भर जायफल की कतरन चूसिये इससे पाचक रसों की वृद्धि होगी और भूख बढ़ेगी, भोजन भी अच्छे तरीके से पचेगा।

11. फालिज का प्रकोप जिन अंगों पर हो उन अंगों पर जायफल को पानी में घिसकर रोज लेप करना चाहिए, दो माह तक ऐसा करने से अंगों में जान आ जाने की संभावना देखी गयी है।
12. प्रसव के बाद अगर कमर दर्द नहीं ख़त्म हो रहा है तो जायफल पानी में घिसकर कमर पे सुबह शाम लगाएं, एक सप्ताह में ही दर्द गायब हो जाएगा।
13. फटी एडियों के लिए इसे महीन पीसकर बीवाइयों में भर दीजिये। 12-15 दिन में ही पैर भर जायेंगे।
14. जायफल के चूर्ण को शहद के साथ खाने से ह्रदय मज़बूत होता है। पेट भी ठीक रहता है।
15. अगर कान के पीछे कुछ ऎसी गांठ बन गयी हो जो छूने पर दर्द करती हो तो जायफल को पीस कर वहां लेप कीजिए जब तक गाठ ख़त्म न हो जाए, करते रहिये।
16.अगर हैजे के रोगी को बार-बार प्यास लग रही है, तो जायफल को पानी में घिसकर उसे पिला दीजिये।
17.जी मिचलाने की बीमारी भी जायफल को थोड़ा सा घिस कर पानी में मिला कर पीने से नष्ट हो जाती है।
18. इसे थोडा सा घिसकर काजल की तरह आँख में लगाने से आँखों की ज्योति बढ़ जाती है और आँख की खुजली और धुंधलापन ख़त्म हो जाता है।
19. यह शक्ति भी बढाता है।
20. जायफल आवाज में सम्मोहन भी पैदा करता है।
21. किसी को अगर बार-बार पेशाब जाना पड़ता है तो उसे जायफल और सफ़ेद मूसली 2-2 ग्राम की मात्र में मिलाकर पानी से निगलवा दीजिये, दिन में एक बार, खाली पेट, 10 दिन लगातार।
17. बच्चों को सर्दी-जुकाम हो जाए तो जायफल का चूर्ण और सोंठ का चूर्ण बराबर मात्रा में लीजिये फिर 3 चुटकी इस मिश्रण को गाय के घी में मिलाकर बच्चे को सुबह शाम चटायें।
22. चेहरे पर या फिर त्वचा पर पड़ी झाईयों को हटाने के लिए आपको जायफल को पानी के साथ पत्थर पर घिसना चाहिए। घिसने के बाद इसका लेप बना लें और इस लेप का झाईयों की जगह पर इस्तेमाल करें, इससे आपकी त्वचा में निखार भी आएगा और झाईयों से भी निजात मिलेगी।
23. जायफल, सौंठ और जीरे को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को भोजन करने से पहले पानी के साथ लें। गैस और अफारा की परेशानी नहीं होगी।
24. चेहरे की झुर्रियां मिटाने के लिए आप जायफल को पीस कर उसका लेप बनाकर झुर्रियों पर एक महीने तक लगाएंगे तो आपको जल्द ही झुर्रियों से निजात मिलेगी।
25. आंखों के नीचे काले घेरे हटाने के लिए रात को सोते समय रोजाना जायफल का लेप लगाएं और सूखने पर इसे धो लें। कुछ समय बाद काले घेरे हट जाएंगे।
26. दूध पाचन : शिशु का दूध छुड़ाकर ऊपर का दूध पिलाने पर यदि दूध पचता न हो तो दूध में आधा पानी मिलाकर, इसमें एक जायफल डालकर उबालें। इस दूध को थोडा ठण्डा करके कुनकुना गर्म, चम्मच कटोरी से शिशु को पिलाएँ, यह दूध शिशु को हजम हो जाएगा।

27. कई बार त्वचा पर कुछ चोट के निशान रह जाते हैं तो कई बार त्वचा पर नील और इसी तरह के घाव पड़ जाते हैं। जायफल में सरसों का तेल मिलाकर मालिश करें। जहां भी आपकी त्वचा पर पुराने निशान हैं रोजाना मालिश से कुछ ही समय में वे हल्के होने लगेंगे। जायफल से मालिश से रक्त का संचार भी होगा और शरीर में चुस्ती-फुर्ती भी बनी रहेगी।
28. जायफल के लेप के बजाय जायफल के तेल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
29. दांत में दर्द होने पर जायफल का तेल रुई पर लगाकर दर्द वाले दांत या दाढ़ पर रखें, दर्द तुरंत ठीक हो जाएगा। अगर दांत में कीड़े लगे हैं तो वे भी मर जाएंगे।
30. पेट में दर्द हो तो जायफल के तेल की 2-3 बूंदें एक बताशे में टपकाएं और खा लें। जल्द ही आराम आ जाएगा।
31. जायफल को पानी में पकाकर उस पानी से गरारे करें। मुंह के छाले ठीक होंगे, गले की सूजन भी जाती रहेगी।
32. एक चुटकी जायफल पाउडर दूध में मिला कर लेने से सर्दी का असर ठीक हो जाता है। इसे सर्दी में प्रयोग करने से सर्दी नहीं लगती।
33. सरसों का तेल और जायफल का तेल 4:1 की मात्रा में मिलाकर रख लें। इस तेल से दिन में 2-3 बार शरीर की मालिश करें। जोड़ों का दर्द, सूजन, मोच आदि में राहत मिलेगी। इसकी मालिश से शरीर में गर्मी आती है, चुस्ती फुर्ती आती है और पसीने के रूप में विकार निकल जाता है।
34. दस जायफल लेकर देशी घी में अच्छी तरह सेंक लें। उसे पीसकर छान लें। अब इसमें दो कप गेहूं का आटा मिलाकर घी में फिर सेकें।इसमें शक्कर मिलाकर रख लें। रोजाना सुबह खाली पेट इस मिश्रण को एक चम्मच खाएं, बवासीर से छुटकारा मिल जाएगा।