Wednesday, June 28, 2017

गुर्दे की कार्य क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोगी योग आसन //Useful Yoga posture to increase kidney functioning




शरीर का महत्वपूर्ण अंग है गुर्दा जिसे अंग्रेजी में किडनी कहा जाता है। 150 ग्राम वजनी गुर्दे का आकार किसी बीज की भांति होता है। यह शरीर में पीछे कमर की ओर रीढ़ के ढांचे के ठीक नीचे के दोनों सिरों पर स्थित होते हैं। शरीर में दो गुर्दे होते हैं।
गुर्दे का कार्य : 
गुर्दा रक्त में से जल और बेकार पदार्थो को अलग करता है। शरीर में रसायन पदार्थों का संतुलन, हॉर्मोन्स छोड़ना, रक्तचाप नियंत्रित करने में सहायता प्रदान करता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायता करता है। इसका एक और कार्य है विटामिन-डी का निर्माण करना, जो मनुष्य की हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है।
गुर्दे के रोग : 
लगातार दूषित पदार्थ खाने, दूषित जल पीने और नेफ्रॉन्स के टूटने से गुर्दे के रोग उत्पन्न होते हैं। इस टूटन के कारण गुर्दे शरीर से व्यर्थ पदार्थो को निकालने में अक्षम हो जाते हैं। गुर्दे.के रोग का बहुत समय तक पता नहीं चलता, लेकिन जब भी कमर के पीछे दर्द उत्पन्न हो तो इसकी जांच करा लेनी चाहिए।
गुर्दे के गंभीर रोगों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है- पहला एक्यूट रीनल फेल्योर इसमें गुर्दे आंशिक अथवा पूर्ण रूप से काम करना बंद कर देते हैं परंतु लगातार उपचार द्वारा यह धीरे-धीरे पुन:कार्यशील हो जाते हैं। गुर्दे की दूसरी बीमारी क्रोनिक रीनल फेल्योर है इसमें नेफ्रॉन्स की अत्यधिक मात्रा में क्षति हो जाती है जिसके कारण गुर्दो की कार्यक्षमता उत्तरोत्तर कम होती चली जाती है।
गुर्दे की जांच : 
उक्त दो तरह के रोगों के निदान के लिए सबसे पहले रक्त यूरिया नाइट्रोजन तथा किरेटिनाइन का रक्त परीक्षण करवाना चाहिए। मूत्र जांच भी करा लेना चाहिए क्योंकि इससे यह पता चलता है कि गुर्दो की कार्यशीलता और कर्यक्षमता कैसी है।
लक्षण : 
जब गुर्दा किसी रोग से रोगग्रस्त हो जाता है तो मूत्र संबंधि तकलीफ शुरू हो सकती है। आंखों के ‍नीचे सुजन या पैरों के पंजों में सुजन हो सकती है। पाचन क्रिया भी कमजोर पड़ जाती है।
गुर्दे को मजबूत बनाए रखने के लिए योगासन:
:भुजंगासन
   भुजंग आसन करने के लिए सर्वप्रथम किसी स्वच्छ और साफ हवादार जगह का चयन कर लें। उसके बाद आसन (चटाई) बिछा कर पेट के बल लेट जाएं।
फिर दोनों परों को अच्छी तरह से लंबा कर के फैला दें। और ठोड़ी (chin) ज़मीन पर लगा दें। दोनों कुहनिया (Elbows) दोनों तरफ की पसलियों से सटी हुयी रख कर, दोनों हाथों की हथेलियाँ ज़मीन पर लगा दें। (Note- याद रहे की आप के हाथों के पंजे सीधे होने चाहिए ओर ज़मीन की और होने चाहिए, तथा दोनों कुहनिया (Elbows) सीधी आकाश की और मुड़ी होनी चाहिए )।
भुजंग आसन करते वक्त इस बात का खास ध्यान रखे की दोनों हाथों के पंजे, हमेशा दोनों कंधों के ठीक नीचे (ज़मीन पर) लगे होने चाहिए।
अब अपनें सिर को ज़मीन से लगा दें। और फिर अपनी दोनों आँखें बंद कर के सांस शरीर के अंदर भरते हुए धीरे धीरे ठोड़ी (chin) को ऊपर उठाएँ, उसके बाद गर्दन को ऊपर आकाश की तरफ उठाएँ। फिर अपनी छाती को धीरे धीरे ऊपर उठाएँ। और उसके बाद अपने पेट के भाग को धीरे धीरे ऊपर उठा लें।
अब आगे, गर्दन को ऊपर की ओर ले जाते हुए पीठ को पीछे की ओर जुकाना है (कमान की तरह )। ऊपर उठनें के लिए शरीर से ज़ोर लगाएं, हाथों पर हो सके उतना कम बल लगाएं। ध्यान में रखें की दोनों पैरों के अग्र भाग को ज़मीन पर लगा कर सामान्य गति से शरीर के अग्र भाग को ऊपर उठने का प्रयत्न करना है।

भुजंग आसन की इस मुद्रा में आने के बाद अपनी दोनों आँखें खोलें और श्वसन गति सामान्य बनाए रखें (सांस सामान्य गति से अंदर लें तथा बाहर छोड़ें)। और पहली बार में इस आसन मुद्रा को बीस सेकंड से तीस सेकंड तक बनाए रखिए। फिर ऊपर उठाए शरीर को नीचे की ओर ले जाना शुरू कर दीजिये।
शुरुआत में पेट के बल लैट कर जिस मुद्रा से आसन शुरू किया था, उस मुद्रा में लौट जाने के बाद अपनें दोनों हाथों पर अपना सिर टीका कर या ज़मीन से अपना सिर लगा कर उतनी ही देर विश्राम करें, जितनी देर तक भुजंग आसन किया हों।
भुजंगासन कर लेने के बाद शवासन कर के थकान मिटा लेनी चाहिए।
, धनुरासन-
सबसे पहले आप पेट के बल लेट जाए।
सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़े और अपने हाथ से टखनों को पकड़े।



सांस लेते हुए आप अपने सिर, चेस्ट एवं जांघ को ऊपर की ओर उठाएं।
अपने शरीर के लचीलापन के हिसाब से आप अपने शरीर को और ऊपर उठा सकते हैं।





शरीर के भार को पेट निचले हिस्से पर लेने की कोशिश करें।
जब आप पूरी तरह से अपने शरीर को उठा लें तो पैरों के बीच की जगह को कम करने की कोशिश करें।
धीरे धीरे सांस ले और धीरे धीरे सांस छोड़े। अपने हिसाब से आसन को धारण करें।
जब आप मूल स्थिति में आना हो तो लम्बी गहरी सांस छोड़ते हुए नीचे आएं।
यह एक चक्र पूरा हुआ।
इस तरह से आप 3-5 चक्र करने की कोशिश करें।
 


हलासन-

. सबसे पहले साफ़ जगह पर एक चटाई बिछा लेंं।
2. आप सर्वांगासन की तरह जमीन पर पीठ के बल लेट जाएंं।
3. अपने दोनों पैरों को एक-दूसरे से मिलाकर रखें और अपनी हथेलियों को कमर के पास सटाकर रखें।
4. अपने मुंह को आकाश की तरफ करके अपनी दोनों आखों को बंद कर लेंं।
5. अपने शरीर को एकदम से ढीला छोड़ देंं।

6. श्वास को अंदर की ओर लेते हुए अपने दोनों पैरों को धीरे-धीरे करके उठाएं।
7. जब दोनों पैरों का समकोण बन जाए तब अपने श्वास को छोड़ें।
8. सर्वांगासन की स्तिथि में आने के बाद अपने दोनों पैरों को अपने सिर के पीछे जमीन पर टिकने की कोशिश करे।
9. अपनी कमर और पीठ को पीछे झुकाने के लिए अपने दोनों हाथो का सहारा लेंं, हाथ की कोहनियों से पीठ को पीछे जमीन से लगा कर रखें।
10.फिर अपनी पीठ और पैर को धीरे-धीरे जमीन पर लगाना शुरू कर देंं|
11. इस आसन में घुटनों का मुड़ना नहींं होता है।








उष्ट्रासन,


उष्ट्रासन की विधि :
1. किसी खुली हवादार जगह पर एक चटाई बिछाएं।
2. दोनों पैरों को सामने की तरफ फैलाएं।
3. अब धीरे-धीरे दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर बैठें। जैसा कि वज्रासन में बैठते हैं।
4. धीरे-धीरे घुटनों के बल उपर की तरफ उठें।
5. अब दोनों हाथों को कमर पर रखकर पीछे की और आराम से झुकें।
6. पीछे कि तरफ झुकते हुए एक हाथ को ऐड़ी से लगाएं और एैसे ही दूसरे हाथ को दूसरे पैर की ऐड़ी पर।


7. ध्यान रहे एक बारी में एक ही हाथ को ऐड़ी से लगाएं। नहीं तो गिरने की संभावना अधिक होती है।
8. सिर को पीछे की ओर झुकाएं।



9. इस आसन में थोड़ा रूकने का प्रयास करें।
10. अब धीरे-धीरे क्रम में वापस पहली वाली अवस्था में वापस आएं।

पश्चिमोत्तनासन-
पश्चिमोत्तनासन करने की विधि -
सबसे पहले आप जमीन पर बैठ जाएं।
अब आप दोनों पैरों को सामने फैलाएं।
पीठ की पेशियों को ढीला छोड़ दें।
सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर लेकर जाएं।
फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुके।
आप कोशिश करते हैं अपने हाथ से उँगलियों को पकड़ने का और नाक को घुटने से सटाने का।





धीरे धीरे सांस लें, फिर धीरे धीरे सांस छोड़े
और अपने हिसाब से इस अभ्यास को धारण करें।
धीरे धीरे इस की अवधि को बढ़ाते रहे।
यह एक चक्र हुआ।
इस तरह से आप 3 से 5 चक्र करें।
त्रिकोणासन
त्रिकोणासन(Trikonasana) योग करने के नियम
सबसे पहले एक समतल स्थान पर अपने दोनों पैरों में कुछ फासला रखकर सीधे खड़े हो जाये।
*अपने दाहिने पैर को दायीं तरफ मोड़कर रखे।
* अपने कंधो की ऊंचाई तक अपने दोनों हाथों को बगल में फैला ले।



अब धीरे-धीरे साँस ले और दांयी तरफ झुके। झुकते समय अपनी नजरो को सामने की तरफ रखे।
*अब दायें हाथ से अपने दायें पैर को छूने की कोशिश करें|





*इसअवस्था में आपका बायाँ हाथ सीधा आकाश की ओर रखे और नजरे अपने बाये हाथ की उंगलियों की तरफ रखे।
*अब सामान्य अवस्था में वापिस आकर बांये हाथ के द्वारा समान क्रिया करें|
* ऐसे कम से कम 20 बार करे।
*शरीर उठाते समय सांसों को अन्दर ले और झुकते समय सांसों को छोड़े।
अंर्धचंद्रासन
अर्ध चंद्रासन शरीर की सभी माँसपेशियों में एकसाथ खिंचाव लाता है. यह आसन शरीर को सुगठित बनाने और अतिरिक्त चर्बी को घटाने में भी सक्षम है.
इसके अतिरिक्त कोई ध्यानात्मक आसन भी करना चाहिए. वीरासन ऐसा आसन है जिसके अभ्यास से अनचाहे विचारों को कम किया जा सकता है. इसके अभ्यास से शारीरिक और मानसिक तनाव से भी छुटकारा पाया जा सकता है.
विधि
अर्ध चंद्रासन करने के लिए दोहरा कम्बल बिछाएं और दोनों घुटनों के बल खड़े हो जाएं. अब बाएं पैर को घुटनों से एक क़दम आगे रखें. दायाँ घुटना ज़मीन से स्पर्श करेगा और दोनों हाथ बगल में रहेंगे. यह प्रारंभिक स्थिति है.
धीरे-धीरे कमर को आगे की ओर धकेलिए. ऐसा करने से बाएं पैर की पिछली ओर जंघा के बीच का फ़ासला कम हो जाएगा परंतु एड़ी नहीं उठाएंगे. नियंत्रणपूर्वक साँस भरते हुए दोनों हाथों को पहले कंधों के सामने लेकर आएँ.
फिर सिर के ऊपर हाथों को लाएँ. बाजू सीधी रखें और गर्दन को भी पीछे मोड़ लीजिए. थोड़ी देर रुकें, पीठ और कमर में खिंचाव को महसूस करें. आकाश की ओर देखें और साँस रोक कर रखें.
इस प्रकार आपके हाथ, पीठ, कमर और पैर के बीच में अर्ध चंद्राकार बन जाएगा. इसीलिए इसे अर्ध चंद्रासन नाम दिया गया है.साँस निकालते हुए हाथों को नीचे ले आएँ और फिर से दोनों घुटनों के बल खड़े हो जाएँ. इस बार दाएँ पैर को आगे रखें और फिर से अर्ध चंद्रासन का अभ्यास करें.



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रोगी का नाम - Awdhesh 
निवासी - कानपुर 
ईलाज से पूर्व की सोनोग्राफी  रिपोर्ट








दिनांक - 26/4/2016
Urea- 55.14   mg/dl

creatinine-13.5   mg/dl 


हर्बल औषधि प्रयोग करने के 23 दिन बाद 17/5/2016 की सोनोग्राफी  रिपोर्ट  यूरिया और क्रेयटिनिन  नार्मल -





creatinine 1.34
mg/dl

urea 22  mg/dl 


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