Friday, May 12, 2017

गर्मी मे मटके का पानी ही सर्वोत्तम


   गर्मियों में जितना पानी पिएं, उतना अच्छा है. त्वचा रूखी हो रही हो या फिर थकान ज्यादा होती हो, लू लग गई हो या फिर शरीर डीहाइड्रेट हो गया हो, हर चीज़ का इलाज है खूब पानी पीना. स्वस्थ रहने का मूल मंत्र भी यही है.
सेहत के लिए अमृत है घड़े का पानी
गरीबों का फ्रिज घड़े का पानी स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से अमृत होता है, लेकिन इसे ऐसे ही अमृत नहीं बोलते, बल्कि वास्‍तव में घड़े का पानी सेहत के लिहाज से बहुत फायदेमंद है, इसके फायदों को जानकर घड़े का पानी पीना शुरू कर देंगे आप। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि पानी भी आपकी सेहत पर उल्टा असर कर सकता है, अगर पानी खराब हो. इसलिए पानी पीते समय हमें कुछ सावधनियां बरतने की जरुरत है. आजकल घरों में वॉटर प्‍योरीफायर लगा लिए हैं. हम बाहर जाते हैं तो पानी की बोतल खरीद लेते हैं. लेकिन इन सभी स्रोतों से आ रहा पानी ज्यादातर ठंडा होता है. घर में भी हम फ्रिज का ठंडा पानी ही पीते हैं, लेकिन क्या आपको पता है फ्रिज या प्लास्टिक की बोतल से ज्यादा मिट्टी के बर्तन में रखा पानी स्वस्थ और सुरक्षित होता है.
  फ्रिज का पानी अक्‍सर बहुत ज्‍यादा ठंडा होता है. ज्‍यादा ठंडा पानी सेहत को नुकसान पहुंचाता है क्‍योंकि पानी और हमारे शरीर के तापमान में बहुत फर्क होता है. कभी भी शरीर के तापमान से बहुत ज्‍यादा या कम तापमान वाली चीज का सेवन नुकसानदेह होता है.
चयापचय को बढ़ावा
नियमित रूप से घड़े का पानी पीने से प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। प्‍लास्टिक की बोतलों में पानी स्‍टोर करने से, उसमें प्‍लास्टिक से अशुद्धियां इकट्ठी हो जाती है और वह पानी को अशुद्ध कर देता है। साथ ही यह भी पाया गया है कि घड़े में पानी स्‍टोर करने से शरीर में टेस्‍टोस्‍टेरोन का स्‍तर बढ़ जाता है।
प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए लाभदायक
प्रेग्नेंट औरतों को फ्रिज का पानी नहीं पीने की सलाह दी जाती है. ज्‍यादा ठंडा पानी बच्‍चे को नुकसान पहुंचा सकता है. घड़े में रखा पानी अपने संतुलित तापमान के कारण उनकी और बच्‍चे की सेहत के लिए अच्छा होता है.
गले को रखता है ठीक



घड़े के पानी से शीतलता मिलती है, लेकिन गला नहीं बैठता और न ही सर्दी-जुखाम की शिकायत होती है. इसलिए अगर ज्यादा ठंडा पानी पीने का मन करे तो भी मटके का पानी ही पिएं. फ्रिज के पानी से गला खराब होने की संभावनाएं ज्यादा रहती हैं.

वात को नियंत्रित रखता है
फ्रिज का पानी पीने वालों को कब्ज की शिकायत हो सकती है. शरीर के दूसरे अंगों पर भी ज्‍यादा ठंडे पानी का खराब प्रभाव पड़ता है. लेकिन मटके या घड़े का पानी आपके वात को नियतंत्रित रखा है. पानी बहुत ठंडा न होने की वजह से वात नहीं बढ़ता.
कैसे ठंडा रहता है पानी
मिट्टी के बने मटके में सूक्ष्म छिद्र होते हैं। ये छिद्र इतने सूक्ष्म होते हैं कि इन्हें नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता। पानी का ठंडा होना वाष्पीकरण की क्रिया पर निर्भर करता है। जितना ज्यादा वाष्पीकरण होगा, उतना ही ज्यादा पानी भी ठंडा होगा। इन सूक्ष्म छिद्रों द्वारा मटके का पानी बाहर निकलता रहता है। गर्मी के कारण पानी वाष्प बन कर उड़ जाता है। वाष्प बनने के लिए गर्मी यह मटके के पानी से लेता है। इस पूरी प्रक्रिया में मटके का तापमान कम हो जाता है और पानी ठंडा रहता है।



बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
रोज़ाना घड़े का पानी का पीने से पाचन तंत्र अच्छा रहता है. प्लास्टिक की बोतल वाले पानी में प्लास्टिक की अशुद्धियां भी घुल जाती हैं. इसलिए प्लास्टिक की बोतल में रखा पानी सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है. मटके के पानी में बहुत सारे रोगों से लड़ने की क्षमता होती है.
विषैले पदार्थ सोखने की शक्ति
मिटटी में शुद्धि करने का गुण होता है यह सभी विषैले पदार्थ सोख लेती है तथा पानी में सभी जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाती है। इसमें पानी सही तापमान पर रहता है, ना बहुत अधिक ठंडा ना गर्म।
पानी का तापमान रखता है नियंत्रित
मिट्टी के घड़े में पानी रखने से पानी का तापमान सही रहता है. न ज्यादा और न कम. मिट्ठी का बर्तन पानी के विषैले कणों को भी सोख लेता है.
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