Wednesday, June 8, 2016

गोखरू किडनी रोगों की महोषधि Caltrap beneficial remedy in kidney diseases



किड्नी के लिए राम बाण  औषधि है गोखरू | बंद किड्नी को चालू करता है| किड्नी मे स्टोन को टुकड़े टुकड़े करके पेशाब के रास्ते बाहर निकल देता है| क्रिएटिन ,यूरिया को तेजी  से  नीचे लाता है ,पेशाब मे जलन हो पेशाब ना होती है ,इसके लिए भी यह काम करता है इसके बारे मे आयुर्वेद के जनक आचार्य श्रुशूत ने भी लिखा इसके अलावा कई विद्वानो ने इसके बारे मे लिखा है इसका प्रयोग हर्बल दवाओं मे भी होता है आयुर्वेद की दवाओं मे भी होता है यह स्त्रियो के बंध्यत्व  मे तथा पुरुषों के नपुंसकता मे भी बहुत उपयोगी होता है इस दवा का सेवन कई लोगो ने किया है जिनका क्रिएटिन 10 पाईंट से भी अधिक था उन्हे भी 15 दिनो मे  संतोषप्रद  लाभ हुआ |आत: जिन लोगो को किडनी की प्राब्लम है वो इसका सेवन करे तो लाभ होना निश्चित है
गोखरू की दो जातियां होती हैं बड़ा गोखरू और छोटा गोखरू। औषधि के रूप में छोटा गोखरू प्रयोग होता है। औषधि के रूप में पौधे की जड़ और फल का प्रयोग होता है।
गोखरू के आयुर्वेदिक गुण Ayurvedic Properties
गोखरू के गुणकर्म संबंधी मत-
*आचार्य चरक ने गोक्षुर को मूत्र विरेचन द्रव्यों में प्रधान मानते हुए लिखा है-गोक्षुर को मूत्रकृच्छानिलहराणाम् अर्थात् यह मूत्र कृच्छ (डिसयूरिया) विसर्जन के समय होने वाले कष्ट में उपयोगी एक महत्त्वपूर्ण औषधि है । आचार्य सुश्रुत ने लघुपंचकमूल, कण्टक पंचमूल गणों में गोखरू का उल्लेख किया है । अश्मरी भेदन (पथरी को तोड़ना, मूत्र मार्ग से ही बाहर निकाल देना) हेतु भी इसे उपयोगी माना है ।
श्री भाव मिश्र गोक्षुर को मूत्राशय का शोधन करने वाला, अश्मरी भेदक बताते हैं व लिखते हैं कि पेट के समस्त रोगों की गोखरू सर्वश्रेष्ठ दवा है । वनौषधि चन्द्रोदय के विद्वान् लेखक के अनुसार गोक्षरू मूत्र पिण्ड को उत्तेजना देता है, वेदना नाशक और बलदायक है ।
गोखरू के औषधीय उपयोग-
*पथरी रोग :- पथरी रोग में गोक्षुर के फलों का चूर्ण शहद के साथ 3 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम दिया जाता है । महर्षि सुश्रुत के अनुसार सात दिन तक गौदुग्ध के साथ गोक्षुर पंचांग का सेवन कराने में पथरी टूट-टूट कर शरीर से बाहर चली जाती है । मूत्र के साथ यदि रक्त स्राव भी हो तो गोक्षुर चूर्ण को दूध में उबाल कर मिश्री के साथ पिलाते हैं ।पथरी की चिकित्सा में सबसे महत्वपूर्ण औषधी है गोखरू :- पथरी के रोगी को इसके बीजो का चूर्ण दिया जाता है तथा पत्तों का पानी बना के पिलाया जाता है | इसके पत्तों को पानी में कुछ देर के लिए भिगो देते है | उसके बाद पतो को १५ बीस बार उसी पानी में डुबोते है और निकालते है इस प्रक्रिया में पानी चिकना गाढा लार युक्त हो जाता है | यह पानी रोगी को पिलाया जाता है स्वाद हेतु इसमे चीनी या नमक थोड़ी मात्रा में मिलाया जा सकता है | यह पानी स्त्रीयों में श्वेत प्रदर ,रक्त प्रदर पेशाब में जलन आदि रोगों की राम बाण औषधी है | यह मूत्राशय में पडी हुयी पथरी को टुकड़ों में बाट कर पेशाब के रास्ते से बाहर निकाल देता है |
*सुजाक रोग :- सुजाक रोग (गनोरिया) में गोक्षुर को घंटे पानी में भिगोकर और उसे अच्छी तरह छानकर दिन में चार बार 5-5 ग्राम की मात्रा में देते हैं । किसी भी कारण से यदि पेशाब की जलन हो तो गोखरु के फल और पत्तों का रस 20 से 50 मिलीलीटर दिन में दो-तीन बार पिलाने से वह तुरंत मिटती है । प्रमेह शुक्रमेह में गोखरू चूर्ण को 5 से 6 ग्राम मिश्री के साथ दो बार देते हैं । तुरंत लाभ मिलता है ।
*प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने में :- मूत्र रोग संबंधी सभी शिकायतों यथा प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने से पेशाब का रुक-रुक कर आना, पेशाब का अपने आप निकलना (युरीनरी इनकाण्टीनेन्स), नपुंसकता, मूत्राशय की पुरानी सूजन आदि में गोखरू 10 ग्राम, जल 150 ग्राम, दूध 250 ग्राम को पकाकर आधा रह जाने पर छानकर नित्य पिलाने से मूत्र मार्ग की सारी विकृतियाँ दूर होती हैं ।
*प्रदर में, अतिरिक्त स्राव में, स्री जनन अंगों के सामान्य संक्रमणों में गोखरू एक प्रति संक्रामक का काम करता है । स्री रोगों के लिए 15 ग्राम चूर्ण नित्य घी व मिश्री के साथ देते हैं ।
गोक्षुर चूर्ण प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र मार्ग में आए अवरोध को मिटाता है, उस स्थान विशेष में रक्त संचय को रोकती तथा यूरेथ्रा के द्वारों को उत्तेजित कर मूत्र को निकाल बाहर करता है । बहुसंख्य व्यक्तियों में गोक्षुर के प्रयोग के बाद ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं रह जाती । इसे योग के रूप न देकर अकेले अनुपान भेद के माध्यम से ही दिया जाए, यही उचित है, ऐसा वैज्ञानिकों का व सारे अध्ययनों का अभिमत है ।
*नपुंसकता impotence arising from bad practice में, बराबर मात्रा में गोखरू के बीज का चूर्ण और तिल के बीज sesame seeds powder के चूर्ण, को बकरी के दूध और शहद के साथ दिया जाता है।
*धातु की कमजोरी में इसके ताजे फल का रस 7-14 मिलीलीटर या 14-28 मिलीलीटर सूखे फल के काढ़े, को दिन में दो बार दूध के साथ लें।
*मूत्रकृच्छ painful urination में 5g गोखरू चूर्ण को दूध में उबाल कर पीने से आराम मिलता है। यह मूत्र की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है और सूजन कम करता है।
*मूत्रघात urinary retention में 3-6 ग्राम फल का पाउडर, पानी के साथ दिन में दो बार लें।
रक्तपित्त में गोखरू के फल को 100-200 मिलीलीटर दूध में उबाल कर दिन में दो बार लें।
*धातुस्राव, स्वप्नदोष nocturnal fall, प्रमेह, कमजोरी weakness, और यौन विकारों sexual disorders में 5 ग्राम गोखरू चूर्ण को बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें।
*यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए, गोखरू, शतावर, नागबला, खिरैटी, असगंध, को बराबर मात्रा में कूट कर, कपड़चन कर लें और रोज़ १ छोटा चम्मच दूध के साथ ले। इसको ४० दिन तक लगातार लें।
*अश्मरी urinary stones में 5 ग्राम गोखरू चूर्ण (फल का पाउडर) शहद के साथ दिन में दो बार, पीछे से गाय का दूध लें।
गोखरू का काढ़ा बनाने की विधि:


250 ग्राम गोखरू लेकर 4 लीटर पानी मे उबालिए जब पानी एक लीटर रह जाए तो पानी छानकर एक बोतल मे रख लीजिए|इस काढे को सुबह शाम हल्का सा गुनगुना करके 100 ग्राम के करीब पीजिए शाम को खाली पेट का मतलब है दोपहर के भोजन के 5, 6 घंटे के बाद काढ़ा पीने के एक घंटे के बाद ही कुछ खाइए और अपनी पहले की दवाई ख़ान पान का रूटीन पूर्ववत ही रखिए 15 दिन के अंदर यदि आपके अंदर अभूतपूर्व परिवर्तन हो जाए तो चिकित्सक  की सलाह लेकर  धीरे धीरे दवा बंद कर दीजिए| जैसे जैसे आपके अंदर सुधार होगा काढे की मात्रा कम कर सकते है या दो बार की बजाए एक बार भी कर सकते है |मेरा निवेदन है कि खराब किडनी रोगी को किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के पहिले यह औषधि जरूर सेवन करके चमत्कारिक परिणाम की उम्मीद करनी चाहिए|
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