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16 April 2014

रक्त चाप पर काबू के लिए खाएं पपीता.

   पपीता एक गुणकारी फल 



             शरीर को स्वस्थ  रखने के लिए वैसे तो हर फल फायदेमंद होता है लेकिन पपीता अपने गुणकारी  और पौषक तत्वों के चलते  सेहत को तारो ताजा रखने  में ज्यादा कारगर साबित होता है| पपीता में कई ऐसे पौषक तत्त्व होते जो   कई  तरह के रोगों से लड़ने में शरीर की मदद करते हैं| इसमें केल्शियम,फास्फोरस,लोह तत्त्व,प्रोटीन और विटामिन पाए जाते हैं जो शरीर के स्वस्थ्य को उन्नत करने  में सहायक है| 

  पपीता में कारपेंन  तत्व होता है जो ब्लड प्रेशर  नियंत्रण  करने  में उपयोगी  है| अत: उच्च  रक्त चाप रोगी को पपीते का नियमित सेवन करने  की सलाह  दी जाती है| पीलिया हो जाने पर रोगी को पपीता  खाना चाहिए| इससे पाचन संस्थान  ठीक होता है|

        जिन स्त्रियों में मासिक धर्म  की अनियमितता  हो ,तकलीफ के साथ  मासिक आता हो वे कम से कम एक माह तक पका हुआ पपीता  ३०० ग्राम की मात्रा में  खाएं\ 

   चेहरे की  झुर्रिया  कम करने और खूबसूरती बढाने के लिए पके हुए पपीते का गूदा चेहरे पर लगाएं\  सूख जाने पर गुन गुने जल से धोलें|  ऐसा कम से कम एक माह तक करना चाहिए| 

   कब्ज निवारण के लिए भोजन के बाद  पपीता खाना चाहिए|  पपीते में पेप्सीन तत्व होता है जो भोजन  को पचाने और पाचन संस्थान को ठीक रखने में मदद कर्ता है| 

  पका पपीता  खाने से मोटापा  नियंत्रित  होता है,खट्टी डकारों की समस्या से मुक्ति मिलती है| 

   कच्चे पपीते की सब्जी भी गुणकारी होती है| 

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26 March 2014

तुलसी के बीज नपुंसकता में लाभकारी

तुलसी के बीज  शीघ्र पतन में हितकारी-
            जब भी तुलसी में खूब फुल यानी मंजिरी लग जाए तो उन्हें पकने पर तोड़ लेना चाहिए वरना तुलसी के झाड में चीटियाँ और कीड़ें लग जाते है और उसे समाप्त कर देते है . इन पकी हुई मंजिरियों को रख ले . इनमे से काले काले बीज अलग होंगे उसे एकत्र कर ले . यही सब्जा है . अगर आपके घर में नही है तो बाजार में पंसारी या आयुर्वैदिक दवाईयो की दुकान पर मिल जाएंगे

शीघ्र पतन एवं वीर्य की कमी-  तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से समस्या दूर होती है|
नपुंसकता- तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है और यौन-शक्ति में बढोतरि होती है।

   मासिक धर्म की  अनियमियता- जिस दिन मासिक आए उस दिन से जब तक मासिक रहे उस दिन तक तुलसी के बीज 5-5 ग्राम सुबह और शाम पानी या दूध के साथ लेने से मासिक की समस्या ठीक होती है और जिन महिलाओ को गर्भधारण में समस्या है वो भी ठीक होती है
         तुलसी के पत्ते गर्म तासीर के होते है पर सब्जा शीतल होता है . इसे फालूदा में इस्तेमाल किया जाता है . इसे भिगाने से यह जेली की तरह फुल जाता है . इसे हम दूध या लस्सी के साथ थोड़ी देशी गुलाब की पंखुड़ियां डाल कर ले तो गर्मी में बहुत ठंडक देता है .इसके अलावा यह पाचन सम्बन्धी गड़बड़ी को भी दूर करता है .यह पित्त घटाता है ये त्रिदोषनाशक  , क्षुधावर्धक है |

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26 February 2014

एलोवेरा जूस अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी.

रोजाना  पियें थोड़ा सा एलोवेरा जूस और  रहें तंदुरुस्त 
एलोवेरा  ५००० वर्ष पुरानी औषधि है| इसे  हिन्दी में ग्वारपाठा  या घृतकुमारी  कहते हैं\ इसे संजीवनी  पौधा भी कहा जाता है| इसकी लगभग २५० प्रजातियों में से  कुछ ही में औषधीय गुण  पाए गए हैं|  हमारे शरीर के सही विकास के लिए २१ तरह के अमीनो एसिड्स  की दरकार होती है|  इनमें से १५ एमिनो एसिड्स तो एलोवेरा में  ही मौजूद होते हैं| इसके जूस में केल्शियम,आयरन ,सोडियम,पोटेशियम,क्रोमियम,मैंगनीज,तांबा  और जस्ता आदि खनिज लवण  पाए जाते हैं| 


    क्या है इसमें खास-इसमें १८ धातु,१५ एमिनो एसिड्स और १२ विटामिन होते हैं| ये खून की कमी दूर कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाते हैं|  एलोवेरा का जूस  गर्भाशय  और  पेट के रोगों में हितकारी है| गर्मी,उमस और बारीश के कारण होने वाले फोड़े फुंसियों  पर इसका  रस लगाने से आराम मिलता है| गुलाब जल में एलोवेरा जूस मिलाकर चेहरे पर लगाने  से  चेहरा चमकने  लगता है} 

   नुकसानदेह तत्वों को शरीर से बाहर कर देता है- अस्वास्थ्यकर जीवन शैली ,जंक,फ़ूड,प्रदूषण ,ड्रिंकिंग और धूम्र पान से  शरीर में  हानिकारक तत्व  एकत्र होने लगते  हैं|  एलोवेरा जूस के प्रयोग से ये बाहर निकल जाते हैं|

   वजन घटाने में सहायक है- रोजाना एक गिलास एलोवेरा जूस पीने से वजन घटने लगता है|  इसके सेवन से बार - बार भूख नहीं लगती है| साथ ही पाचन तंत्र भी दुरुस्त रहता है| एलोवेरा में कई पोषक तत्व भी पाए जाते हैं|

      दांतों को स्वस्थ रखता है-  एलोवेरा का जूस दांतों के पीलेपन को दूर करता है|  दांतों में रोगाणु  समाप्त  कर  है| यह सांस की दुर्गन्ध  को  नष्ट करने वाली  औषधि है|  मुंह के छाले में इसके जूस के गरारे करने चाहिए| 

      बालों और त्वचा को  स्वस्थ बनाता है-  एलोवेरा जूस के सेवन से  रफ स्किन भी स्वस्थ  और कान्तिमान हो जाती है| त्वचा पर निखार आ जाता है|   बालों  की रूसी दूर करता है|   बाल स्वस्थ और  शाईनी  हो जाते हैं|  

        खून की कमी में लाभदायक है-  एलोवेरा का ६ इंच लंबा छिला हुआ टुकड़ा ५-७ तुलसी के पाती,४-५ नीम के पत्ते  लेकर थोड़ा सा पानी डालकर पीस लें इस घोल को गर्म कर  काढा बनाकर पीने से एनीमिया का निवारण  हो जाता है| 

   लाईलाज बीमारियों में हितकारी है-  गिलोय का रस १५ मिली ,एलोवेरा जूस १५ मिली, गेहू के जवारे का जूस १५ मिली ,तुलसी के ११ पत्ते ,नीम के ४ पत्ते इन सभी का जूस  सुबह शाम लेने से  केंसर  और कई लाईलाज रोगों में  आशातीत लाभ मिलता है| 
   एलोवेरा का जूस उच्च  रक्त चाप  में लाभकारी है| इससे ब्लड  सर्कुलेशन  सुधरता है|  इसका रस हृदय रोगों में उपकारी साबित हुआ है| 

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23 July 2013

जलोदर (ascites) रोग की सरल चिकित्सा.

उदर- गुहा में  तरल  जमा होने की सरल चिकित्सा-
                                                                                                                                                 -डॉ.दयाराम आलोक
       पेट (peritoneal cavity)में पानी इकट्ठा होने लगने को जलोदर कहा जाता है।  रोगी का पेट फूल जाता है।
     जलोदर के कारण--
        जलोदर मुख्यतः लिवर के पुराने रोग से उत्पन्न होता है।

  खून में एल्ब्युमिन के स्तर में गिरावट  होने का भी जलोदर से संबंध रहता है।

जलोदर के लक्षण--

पेट का फूलना

सांस में तकलीफ

टांगों की सूजन

बेचैनी और भारीपन मेहसूस होना

घरेलु चिकित्सा--

   जलोदर रोग में लहसुन का प्रयोग हितकारी है।  लहसुन का रस आधा चम्मच आधा गिलास जल में मिलाकर  लेना कर्तव्य है। कुछ रोज लेते रहने से फर्क नजर आएगा।

  देसी चना करीब ३० ग्राम  ३०० मिली पानी में उबालें कि आधा रह जाए। ठंडा होने पर छानकर पियें। २५ दिन  जारी रखें।

      करेला का जूस ३०-४० मिली आधा गिलास जल में  दिन  में ३ बार पियें। इससे जलोदर  रोग निवारण में अच्छी मदद मिलती है।

    जलोदर रोगी को पानी की मात्रा कम कर देना चाहिये। शरीर के लिये तरल की आपूर्ति दूध से करना उचित है। लेकिन याद रहे अधिक तरल से टांगों की सूजन बढेगी।

जलोदर की चिकित्सा में मूली के पत्ते का रस अति गुणकारी माना गया है। १०० मिली रस दिन में ३ बार पी सकते हैं।

     मैथी के बीज इस रोग में उपयोग करना लाभकारी रहता है। रात को  २० ग्राम बीज पानी में गला दें।  सुबह छानकर पियें।

   अपने भोजन में प्याज का उपयोग करें  इससे पेट में  जमा तरल मूत्र के माध्यम से  निकलेगा और आराम लगेगा।

  जलोदर रोगी रोजाना तरबूज खाएं। इससे शरीर में तरल का बेलेंस  ठीक रखने में सहायता मिलती है।

  छाछ और गाजर का रस  उपकारी है।  ये शक्ति देते हैं  और  जलोदर में तरल का स्तर  अधिक नहीं बढाते हैं।

  अपने भोजन में  चने का सूप ,पुराने चावल, ऊंटडी का दूध , सलाद ,लहसुन, हींग को समुचित  स्थान देना चाहिये।

  रोग  की गंभीरता पर नजर रखते हुए  अपने चिकित्सक  के परामर्शानुसार  कार्य करें।
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11 March 2013

दुबले-पतले लोग बढा सकते हैं वजन

जीर्ण-शीर्ण लोगों के लिये वजन बढाने के उपचार   

                                                                                                          डाँ.दयाराम आलोक
                                                                                                              9926524852
  भोजन में पौषक तत्वों की कमी  बनी रहने से लोग आहिस्ता-आहिस्ता  कृष काय हो जाते हैं। अधिक दुबले पतले शरीर  मे शक्ति भी कम हो जाती है। नि:शक्त जन अपनी दिनचर्या सही ढंग से संपन्न करने में थकावट मेहसूस करते है।

   इस लेख में कतिपय ऐसे उपचारों की चर्चा की जाएगी जिनसे आप अपने शरीर का वजन बढा सकते हैं-

१)  नाश्ते में बादाम,दूध,मक्खन घी  का पर्याप्त मात्रा में उपयोग करने से आप तंदुरस्त रहेंगे और वजन भी बढेगा।

२) भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढाएं। दालों में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है। अडा,मछली,मीट भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।बादाम,काजू का नियमित सेवन करें।

३)   बीमारी की अवस्था में,बीमारी के बाद,यात्रा से  या मेहनत  से थके होने पर,,सुबह और शाम के वक्त और उपवास  की अवस्था में अपने पार्टनर से शारीरिक संबंध बनाना हानिकारक है।





४) अधिक केलोरी वाला भोजन लेते रहें।














५) च्यवनप्राश वजन बढाने की और स्वस्थ रहने की मशहूर आयुर्वेदिक औषधि है। सुबह -शाम दूध के साथ सेवन करते रहें।

६)  आयुर्वेद में अश्वगंधा और सतावरी  के उपयोग से वजन बढाने का उल्लेख मिलता है।३-३  ग्राम  दोनों रोज सुबह लं का चूर्ण दूध के साथ प्रयोग करें। वसंतकुसुमाकर रस भी काफ़ी असरदार  दवा है।



७)   रोज सुबह ३-४ किलोमीटर  घूमने का नियम बनाएं। ताजा हवा भी मिलेगी और आपका मेटाबोलिस्म  भी ठीक रह्र्गा।











८)  भोजन खूब अच्छी तरह से चबा चबा कर खाना चाहिये। दांत का काम आंत पर डालना उचित नहीं है।

९)  दोनों वक्त शोच निवृत्ति की आदत डालें।

१०)   ५० ग्राम किश मिश रात को पानी में भिगोदे  सुबह भली प्रकार चबा चबा कर खाएं।  २-३ माह के प्रयोग से वजन बढेगा।

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15 January 2013

गंजापन दूर करने के सरल उपचार. : How to fight against baldness?

                                        गंजापन  के सरल उपचार             

                                                                                      डाँ.दयाराम आलोक:
                                                                                                             9926524852

 गंजापन एक आम समस्या बन गई है,चाहे महिला हो या पुरुष, ये समस्या दोनों को हो सकती हैं. गंजापन को एलोपेसिया भी कहते हैं. जब असामान्य रूप से बहुत तेजी से बाल झड़ने लगते हैं तो नये बाल उतनी तेजी से नहीं उग पाते या फिर वे पहले के बाल से अधिक पतले या कमजोर उगते हैं. ऐसे में आगे जाकर गंजे होने की संभावना अधिक हो जाती है.।

कारण--





  बालों का गिरना या झड़ना एक गंभीर समस्या है. बालों के झड़ने अथवा गंजेपन के कई कारण है जैसे बालों की जड़ों का कमजोर हो जाना, पिट्यूटरी ग्लैंड(पियूस ग्रंथि) में हार्मोन्स की कमी, सिर पर रुसी की अधिकता, बालों की जड़ों में पोषक तत्वों की कमी, क्रोध, शोक, चिंता, अधिक मानसिक परिश्रम, अधिक गरम भोजन, सिर में बढ़ती गर्मी, भोजन में विटामिंस मिनिरल्स, रेशा एवं आभ्यंतर रस हार्मोन्स की कमी, लगातार सिर दर्द रहने से रक्त संचार में कमी, भोजन का सही ढंग से न पचना, सिर के स्नायुओं में प्राण प्रवाह की कमी.

गंजेपन की चिकित्सा--

                

  हमारे भोजन में कतिपय ऐसे मिनरल्स  पाये जाते हैं जिनका गंजापन विरोधी प्रभाव होता है।


 यहां हम ऐसे ही भोजन तत्वों का विवरण  प्रस्तुत करते हैं--

   सबसे महत्वपूर्ण तत्व  जो गंजापन  दूर कर सकते हैं वे हैं- जिंक,कापर ,लोह तत्व और सिलिका.

  जिंक में गंजापन नष्ट करने वाले तत्व पाये जाते हैं। केले,अंजीर,बेंगन ,आलू और  स्ट्राबेरी में जिंक की संतोषप्रद मात्रा निहित होती है।

कापर तत्व हमारे इम्युन सिस्टम को को मजबूत करते हुए बालों की सुरक्षा करता है। रक्त में हेमोग्लोबिन की वृद्धि के लिये कापर  सहायता करता है। दालें,सोयाबीन और वालनट आदि में कापर तत्व पाया जाता है।

लोह तत्व बालों की सुरक्षा और पोषण  के लिये आवश्यक है। मटर,गाजर, चिकोरी, ककडी, और पालक में  पर्याप्त आयरन होता है।  अपने भोजन में इन्हें शामिल करना उचित है।

   सिलिका तत्व चावल और आम में मौजूद रहता है।

   गंजापन में उपयोगी अन्य उपचार-



     - उड़द की दाल को उबाल कर पीस लें। रात को सोते समय इस पिट्ठी का लेप सिर पर  कुछ दिनों तक करते रहने से गंजापन समाप्त हो जाता है।









मैथी का प्रयोग--


 मेथी को पूरी रात भिगो दें और सुबह उसे गाढ़ी दही में मिला कर अपने बालों और जड़ो में लगाएं। उसके बाद बालों को धो लें इससे रुसी और सिर की त्‍वचा में जो भी समस्‍या होगी वह दूर हो जाएगी।मेथी में निकोटिनिक एसिड और प्रोटीन पाया जाता है जो बालों की जड़ो को प्रोषण पहुंचाता है और बालों की ग्रोथ को भी बढ़ाता है। इसके प्रयोग से सूखे और डैमेज बाल भी ठीक हो जाते हैं। 

हरा धनिया

हरे धनिए का लेप जिस स्थान पर बाल उड़ गए हैं, वहां करने से  बाल उगने  लगते हैं.।

     उपयोगी उपचार-

थोड़ी सी मुलहठी को दूध में पीसकर, फिर उसमें चुटकी भर केसर डाल कर उसका पेस्ट बनाकर सोते समय सिर में लगाने से गंजेपन की समस्या दूर होती है.

केले का गूदा निकालकर उसे निंबू के रस में मिलाकर गंजवाले स्थान पर लगाने से बालों के उडने की समस्या में लाभ होता है।

अनार के पती पीसकर गंज-स्थल पर लगाने से गंज का निवारण होता है।

प्याज काटकर दो भाग करें। आधे प्याज को गंज वाले भाग पर ५ मिनिट रोज रगडें।  बाल आने लगेंगे।

गाजर भी बालों की समस्या में बहुत हितकारी है|  गाजर  को  उबालें  फिर  पीसकर पेस्ट बनालें|  यह पेस्ट बालों और गंज  की जगह ३० मिनिट तक लगी रहने दें और फिर धो लें|  इससे बालों के झड़ने पर रोक लगती है और नए बाल उगने लगते हैं|

२-३ आलू का रस निकालें|  इस रस को सेव के रस के साथ मिलाएं| अब इस घोल में अंडे की जर्दी  और थोड़ा सा शहद  मिलाएं| | इस घोल को नहाने के ३० मिनिट पाहिले   सर  पर लगाएं|  इस प्रयोग से बालों की चमक  और लम्बाई  बढ़ती है| नए बाल को उगने का प्रोत्साहन मिलता है|

विनम्र सूचना--

http://downloadamit.blogspot.in यह ब्लागर  मेरे लेखों की चोरी करने का अपराधी है।

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11 November 2012

बुखार की सरल चिकित्सा

                        ज्वर में उपयोगी घरेलू चिकित्सा.
                                                                                  -  डाँ.डयाराम आलोक
                                                                                                           9926524852


         बुखार  शरीर का कुदरती सुरक्षा तंत्र है जो  संक्रमण (इन्फ़ेक्शन)  से मुक्ति दिलाता है\ इसलिये बुखार कोई बीमारी नहीं है।  शरीर का बढा हुआ  तापमान रोगाणुओं के प्रतिकूल होता है।  लेकिन ज्वर जब ४० डीग्री  सेल्सियस अथवा १०४ डीग्री फ़ारेनहीट से ज्यादा हो जाता है तो समस्या गंभीर हो जाती है।थर्मामीटर से दिन में कई बार बुखार  नापते रहना उचित है। मुख में जिव्हा के नीचे २ मिनट तक थर्मामीटर रखने पर समान्य तापमान ३७.५ डीग्री सेल्सियस या ९९.५ डीग्री फ़ारेनहीट  होता है।  इससे ज्यादा तापमान होने पर बुखार समझना चाहिये।

     ज्वर आने के कई कारण हो सकते हैं लेकिन  सर्दी-खांसी ,थकावट,,चिंता, रोगाणुओं का संक्रमण और दिमागी तनाव प्रमुख कारण होते हैं। घरेलू चिकित्सा से  ज्वर दूर करना प्रयोजनीय और हितकारी है।

१) ललाट और सिर पर बर्फ़ या पानी की गीली पट्टी रखें। इससे आपके शरीर  का तापमान शीघ्र ही नीचे आ जाएगा।


२)  बुखार में  होने वाले शारीरिक दर्दों के निवारण के लिये हाथ ,पैर, ऊंगलियां गर्दन,सिर ,पीठ  पर सरसों के तैल की मालिश करवानी चाहिये। इससे  शारीरिक  पीडा शांत होगी और सूकून मिलेगा।बिजली चलित मस्राजर  का उपयोग भी किया जा सकता है।










३)  शरीर पर मामूली गरम पानी डालते  हुए  स्नान करें  इससे  शरीर का तापमान बढेगा । शरीर का तापमान ज्यादा होने पर बुखार के रोगाणु नष्ट होंगे। यह प्रक्रिया ज्वर रहित अवस्था में करना है।











४)  बुखार अगर  १०२ डीग्री फ़ारेनहीट से ज्यादा न हो तो यह स्थिति  हानिकारक  नहीं  है।  इससे शरीर के विजातीय पदार्थों का निष्कासन होता है  और शरीर को संक्रमण से लडने में मदद मिलती है।मामूली बुखार होते ही घबराना और गोली-केप्सूल  लेना  उचित नहीं है।

५) बुखार की स्थिति में आईसक्रीम खाना उपयोगी है। इससे तापक्रम सामान्य होने में सहायता मिलती है।

६)  बुखार मे अधिक पसीना होकर शरीरगत जल कम हो जाता है  इसकी पूर्ति के लिये उबाला हुआ पानी और फ़लों का जूस पीते रहना चाहिये। नींबू पानी बेहद लाभकारी है।

७)   ज्वर के रोगी को अधिक मात्रा में  उबला हुआ या फ़िल्टर किया हुआ पानी पीना चाहिये।  इससे अधिक पेशाब और पसीना होकर शरीर की  शुद्धि होगी।जहरीले पदार्थ बाहर निकलेंगे।




८)  चाय बनाते वक्त उसमें  आधा चम्मच दालचीनी का पावडर,,दो बडी ईलायची,  दो चम्मच  सूखे अदरक(सोंठ) का पावडर  डालकर खूब उबालें। दिन में २-३ बार यह काढा बनाकर पियें। बुखार का उम्दा ईलाज है।












९)  तुलसी के १० पती और ४  नग काली मिर्च मुंह में भली प्रकार चबाकर  खाएं। यह बहुत उपयोगी  चिकित्सा है।

१०) रात को सोते वक्त त्रिफ़ला चूर्ण एक चम्मच  गरम जल के साथ लें।  त्रिफ़ला चूर्ण में ज्वर नाशक   गुण होते हैं।  इससे दस्त भी साफ़ होगा बुखार से मुक्ति का उत्तम उपचार है।






११) बुखार के रोगी को भली प्रकार दो तीन कंबल ओढाकर  पैर गरम पानी की बाल्टी में २० मिनिट तक रखना चाहिये। इससे पसीना होने लगेगा और बुखार उतर जाएगा।


१२)   संतरा ज्वर रोगियों के लिये अमृत समान है।  इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है,तुरंत उर्जा मिलती है,और बिगडे हुए पाचन संस्थान को ठीक करता है।











१३)  एक चम्मच मैथी के बीज के पावडर  की चाय बनाकर दिन में २ बार पीने से ज्वर  में लाभ होता है।










१४)  एक प्याज को दो भागों में काटें। दोनों  पैर के तलवों पर रखकर पट्टी  बांधें। यह उपचार  रोगी के शरीर का तापमान सामान्य होने में मदद करता है।

१५) बुखार के रोगी को क्या खाना चाहिये?
  ज्वर रोगी को तरल भोजन देना चाहिये। गाढा भोजन न दें। सहज पचने वाले पदार्थ हितकारी हैं।उबली हुई सब्जियां,दही,और शहद  का उपयोग करना चाहिये।ताजा फ़ल और फ़लों का रस पीना उपादेय है। १५० मिलि की मात्रा में गाय का दूध दिन में ४-५ बार पीना चाहिये।

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01 October 2012

कमर दर्द की घरेलू चिकित्सा.

                        कमर दर्द में उपयोगी घरेलू उपचार
                                                                           डाँ.दयाराम आलोक
                                                                                                  9926524852












         लगभग ८०% लोग अपने जीवन में कभी न कभी कमर दर्द से  परेशान होते हैं। कमर दर्द नया भी हो सकता है और पुराना रोग भी हो सकता है। नया रोग कमर की मांसपेशियों का  असंतुलित उपयोग करने  से उत्पन्न होता है। रोग पुराना होने पर वक्त बेवक्त कमर दर्द होता रहता है और उसके कारण का पता नहीं चलता है। यह  दर्द कभी-कभी इतना भयंकर होता है कि रोगी तडफ़ उठता है,बैठना-उठना  और यहां तक कि बिस्तर में करवट बदलना भी कठिन हो जाता है।सतही तौर पर देखने पर कमर में होने वाला दर्द भले ही एक सामान्य सी मेडिकल स्थिति लगता है, लेकिन इसे नज़रअंदाज करने से समस्या काफी बढ़ सकती है। 

   शरीर के अंगों  जैसे गुर्दे   में  इन्फ़ेक्शन,पोरुष ग्रंथि की व्याधि,स्त्रियों में पेडू के विकार ,मूत्राषय के रोग  और कब्ज  की वजह से कमर दर्द हो सकता है। गर्भवती स्त्रियों में कमर दर्द आम तौर पर पाया जाता है। गर्भ में बच्चे के बढने से भीतरी अंगों  पर दवाब बढने से कमर दर्द हो सकता है।

   कमर दर्द में लाभकारी घरेलू   उपचार  किसी भी आनुषंगिक दुष्प्रभाव से मुक्त हैं और असरदार भी है। देखते हैं कौन से हैं वे उपचार जो कमर दर्द  राहत पहुंचाते हैं--

   १) नीचे रखी कोई वस्तु उठाते वक्त पहिले अपने घुटने मोडें फ़िर उस वस्तु को उठाएं।

२) भोजन में पर्याप्त लहसुन का उपयोग करें। लहसुन कमर दर्द  का  अच्छा उपचार माना गया है।

३) गूगल कमर दर्द में अति उपयोगी घरेलू चिकित्सा  है। आधा चम्मच गूगल गरम पानी  के साथ सुबह-शाम सेवन करें।

४) चाय  बनाने में ५ कालीमिर्च के दाने,५ लौंग  पीसकर  और थौडा सा सूखे अदरक  का पावडर  डालें।  दिन मे दो बार पीते रहने से कमर दर्द में लाभ होता है।

५)  सख्त बिछोने पर सोयें। औंधे मुंह पेट के बल सोना हानिकारक है।

६)  २ ग्राम दालचीनी का पावडर एक चम्मच  शहद में मिलाकर दिन में दो बार लेते रहने से कमरदर्द में शांति मिलती है।

७) कमर दर्द पुराना हो तो शरीर को गर्म रखें और गरम वस्तुएं खाऎं।

८)  दर्द वाली जगह पर बर्फ़ का प्रयोग करना  हितकारी उपाय है। इससे भीतरी सूजन भी समाप्त होगी। कुछ रोज बर्फ़ का उपयोग करने के बाद गरम सिकाई प्रारंभ कर देने के अनुकूल परिणाम  आते हैं।

९)  भोजन मे टमाटर,गोभी,चुकंदर,खीरा ककडी,पालक,गाजर,फ़लों का प्रचुर उपयोग करें।

१०)  नमक मिलें गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। पेट के बल लेटकर दर्द के स्थान पर तौलिये द्वारा भाप लेने से कमर दर्द में राहत मिलती है।

११)रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन—चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियाँ काली न हो जायें) गर्म कर लें फिर ठंडा कर इसकी पीठ—कमर में मालिश करें।

१२)  कढ़ाई में दो—तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। थोड़े मोटे सूती कपड़े में यह गरम नमक डालकर पोटली बांध लें। कमर पर इसके द्वारा सेक करें।

१३) कमर और पीठ के दर्द के निवारण हेतु कुछ योगासनों का विशेष महत्व है। पाठकों की सुवधा के लिये उनका उल्लेख किया जाता है--

कटि चक्रासन :

पहली स्थिति 


जमीन पर लेट जाएं व घुटनों को मोड़ते हुए एड़ी को हिप्स से छू दें। हथेलियां सिर के नीचे रखें व कोहनियां जमीन से चिपकी हुई। सांस भरते हुए घुटनों को दाई ओर जमीन से छुएं व चेहरा बाई ओर खींचें, पर कोहनियां जमीन पर रहें। सांस छोड़ते हुए वापस आएं व बाई ओर दोहराएं।  


दूसरी स्थिति  

जमीन पर लेटी रहें। दाएं पैर के तलवे को बाई जंघा पर चिपका लें व बायां पैर सीधा रखें और दायां घुटना जमीन पर, हथेलियां सिर के नीचे। सांस भरते हुए मुड़ जाएं, पर दाई कोहनी जमीन से चिपकी रहे। जब तक संभव हो, रुकें व सांस छोड़ते हुए वापस दाएं घुटने को दाई ओर जमीन से छू दें। दस बार दोहराएं, फिर बाएं पैर से 10 बार दोहराएं। 


सर्पासन 


पेट के बल लेट जाएं। पैरों को पीछे की ओर खींचें व एड़ी-पंजे मिलाए रखें। सांप की पूंछ की तरह। हथेलियों व कोहनियों को पसलियों के पास लाएं। ऐसे कि हथेलियां कंधों के नीचे आ जाएं और सिर जमीन को छुए। आंखें बंद रखें। चेहरा व सीना ऊंचा उठाएं, कमर के वजन पर सांप की तरह। इस स्थिति में जब तक हो सके, बनी रहें। फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए जमीन पर वापस आ जाएं। विश्राम करें, हथेलियां सिर के नीचे टिका दें।
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11 April 2012

आहार ही औषध.: foods that heal.

                                                          भोजन द्वारा स्वास्थ्य  
                                                        डाँ.दयाराम आलोक
                                                           9926524852 
                                                                                  
    इस आलेख में दैनिक उपयोग में आने वाले फ़लों,सब्जियों और कतिपय अन्य पदार्थों  में निहित रोग निवारक गुणो का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया गया है।
केला: ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,हड्डियों को मजबूत बनाता है,हृदय की सुरक्षा करता है,अतिसार  में लाभदायक है, खांसी में हितकारी है।



जामुन:  केन्सर की रोक थाम , हृदय की सुरक्षा,कब्ज मिटाता है,स्मरण शक्ति बढाता है,रक्त शर्करा नियंत्रित करता है।डायबीटीज में अति लाभदायक।


सेवफ़ल: हृदय की सुरक्षा करता है,दस्त रोकता है,कब्ज में फ़ायदेमंद है,फ़ेफ़डे की शक्ति बढाता है.

चुकंदर: वजन घटाता है,ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,अस्थिक्षरण रोकता है,केंसर के विरुद्ध लडता है,हृदय की सुरक्षा करता है।

पत्ता गोभी: बवासीर में हितकारी है,हृदय रोगों में लाभदायक है,कब्ज मिटाता है, वजन घटाने  में सहायक है।, केंसर में फ़ायदेमंद है।

गाजर:
नेत्र ज्योति वर्धक है, केंसर प्रतिरोधक है, वजन घटाने मं सहायक है, कब्ज मिटाता है, हृदय की सुरक्षा करता    है।

 फ़ूल गोभी
हड्डियों को मजबूत बनाता है, स्तन केंसर से बचाव करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के केंसर में भी उपयोगी है, चोंट,खरोंच ठीक करता है।

लहसुन:
 कोलेस्टरोल घटाती है, रक्त चाप घटाती है, कीटाणुनाशक है,केंसर से लडती है।

शहद:


घाव भरने में उपयोगे है, पाचन क्रिया सुधारती है, एलर्जी रोगों में उपकारी है, अल्सर से मुक्तिकारक है, तत्काल स्फ़ूर्ती देती है।




नींबू:
त्वचा को मुलायम बनाता है,केंसर अवरोधक है, हृदय की सुरक्षा करता है,,ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है, स्कर्वी रोग नाशक है।

अंगूर:
रक्त प्रवाह वर्धक है, हृदय की सुरक्षा करता है, केंसर से लडता है, गुर्दे की पथरी नष्ट करता है, नेत्र ज्योति वर्धक है।

आम:
 केंसर से बचाव करता है,थायराईड रोग में हितकारी है, पाचन शक्ति बढाता है, याददाश्त की कमजोरी में हितकर है।

प्याज:
फ़ंगस रोधी गुण हैं, हार्ट अटेक की रिस्क को कम करता है। जीवाणु नाशक है,केंसर विरोधी है। खराब कोलेस्टरोल को घटाता है।


अलसी के बीज:


मानसिक शक्ति वर्धक है, रोग प्रतिकारक शक्ति को ताकत देता है, डायबीटीज में उपकारी है, हृदय की सुरक्षा करता है, डायजेशन को ठीक करता है।




संतरा:
हृदय की सुरक्षा करता है, रोग प्रतिकारक शक्ति उन्नत करता है,, श्वसन पथ के विकारों में लाभकारी है, केंसर में हितकारी है।
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टमाटर:
कोलेस्टरोल कम करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के स्वास्थ्य के लिये उपकारी है,केंसर से बचाव करता है, हृदय की सुरक्षा करता है।.
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पानी:
  गुर्दे की पथरी नाशक है, वजन  घटाने में सहायक है, केसर के विरुद्ध लडता है, त्वचा के चमक बढाता है।

अखरोट:
मूड उन्नत करन में सहायक है,  मेमोरी  पावर बढाता है,केंसर से लडता है, हृदय रोगों से बचाव करता है,कोलेस्टरोल घटाने मं मददगार है।
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तरबूज:
स्ट्रोक रोकने में उपयोगी है, प्रोस्टेट के स्वास्थ्य के लिये हितकारी है, रक्तचाप घटाता है, वजन कम करने में सहायक है।

अंकुरित गेहूं:

बडी आंत की केंसर से लडता है, कब्ज प्रतिकारक है, स्ट्रोक से रक्षा करता है, कोलेस्टरोल कम करता है, पाचन सुधारता है।



चावल:
किडनी स्टोन में हितकारी है, डायबीटीज में लाभदायक है,स्ट्रोक से बचाव करता है, केंसर से लडता है, हृदय की सुरक्षा करता है।



आलू बुखारा:
हृदय रोगों से बचाव करता है, बुढापा जल्द आने से रोकता है, याददाश्त बढाता है, कोलेस्टरोल घटाता है, कब्ज प्रतिकारक है।

पाएनेपल:
अतिसार(दस्त) रोकता है, वार्ट्स(मस्से)  ठीक करता है, सर्दी,ठंड से बचाव करता है, अस्थिक्षरण  रोकता है। पाचन सुधारता है।

जौ,जई:


 कोलेस्टरोल घटाता है,केंसर से लडता है, डायबीटीज में उपकारी है,,कब्ज प्रतिकारक्  है ,त्वचा पर शाईनिंग लाता है।
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अंजीर:

रक्त चाप नियंत्रित करता है, स्ट्रोक्स से बचाता है, कोलेस्टरोल कम करता है, केंसर से लडता है,वजन घटाने में सहायक है।
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शकरकंद:
आंखों की रोशनी बढाता है,मूड उन्नत करता है, हड्डिया बलवान बनाता है, केंसर से लडता है।
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18 December 2010

स्मरण शक्ति बढाने के सरल उपचार. how to enhance memory power?

                     स्मरण-शक्ति बढाने के सरल उपचार
                                                                                     डाँ.दयाराम आलोक
                                                                                                           --9926524852
                                                                                                                          


   स्मरण शक्ति की कमजोरी या विकृति से विद्यार्थी  और दिमागी काम करने वालों को असुविधाजनक स्थिति से रुबरु होना पडता है। यह कोई रोग नहीं है और न किसी रोग का लक्छण है। इसकी मुख्य वजह एकाग्रता(कन्संट्रेशन) की कमी होना है।







        स्मरण शक्ति बढाने के लिये दिमाग को सक्रिय रखना आवश्यक है।  शरीर और मस्तिष्क की कसरतें अत्यंत लाभदायक होती हैं। किसी बात को बार-बार रटने से भी स्मरण शक्ति में इजाफ़ा होता है और वह मस्तिष्क में द्रडता से अंकित हो जाती है। आजकल कई तरह के विडियो गेम्स प्रचलन में हैं । ये खेल भी मस्तिष्क को ताकतवर बनाने में सहायक हो सकते हैं|पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित पहेलियां हल करने से भी मस्तिष्क की शक्ति बढती है।


    मैं नीचे कुछ ऐसे सरल उपचार प्रस्तुत कर रहा हूं जो मेमोरी पावर बढाने मे अत्यंत उपकारी सिद्ध होते हैं--
१)  बादाम ९ नग रात को पानी में गलाएं।सुबह छिलके उतारकर बारीक पीस कर पेस्ट बनालें। अब एक गिलास दूध गरम करें और उसमें बादाम का पेस्ट घोलें।  इसमें ३ चम्मच शहद भी डालें।भली प्रकार उबल जाने पर उतारकर मामूली गरम हालत में पीयें। यह मिश्रण पीने के बाद दो घंटे तक कुछ न लें। यह स्मरण शक्ति वृद्दि करने का जबर्दस्त उपचार है। दो महीने तक करें।




२)   ब्रह्मी दिमागी शक्ति बढाने की मशहूर जडी-बूटी है। इसका एक चम्मच रस नित्य पीना हितकर है। इसके ७ पत्ते चबाकर खाने से भी वही लाभ मिलता है। ब्राह्मी मे एन्टी ओक्सीडेंट तत्व होते हैं जिससे दिमाग की शक्ति घटने पर रोक लगती है।


३)  अखरोट  जिसे अंग्रेजी में वालनट कहते हैं स्मरण शक्ति बढाने में सहायक है। नियमित उपयोग हितकर है। २० ग्राम वालनट और साथ में १० ग्राम किशमिस लेना चाहिये।





४)  एक सेवफ़ल नित्य खाने से कमजोर मेमोरी में लाभ होता है। भोजन से १० मिनिट पहिले खाएं।


५)    जिन फ़लों में फ़ास्फ़ोरस तत्व पर्यात मात्रा में पाया जाता है वे स्मरण शक्ति बढाने में विशेषतौर पर  उपयोगी होते है।  अंगूर ,खारक ,अंजीर एवं संतरा दिमागी ताकत बढाने के लिये नियमित उपयोग करना चाहिये।




६)  भोजन में कम शर्करा वाले पदार्थ उपयोगी होते हैं। पेय पदार्थों में भी कम ्चीनी का प्रयोग करना चाहिये।इन्सुलीन  हमारे दिमाग को तेज और धारदार बनाये रखने में महती भूमिका रखता है। इसके लिये मछली बहुत अच्छा भोजन है। मछली में उपलब्ध ओमेगा ३ फ़ेट्टी एसीड  स्मरण शक्ति को मजबूती प्रदान करता है।


७)  दालचीनी का पावेडर बनालें। १० ग्राम पावडर शहद में मिलाकर चाटलें। कमजोर दिमाग की अच्छी दवा है।

८) धनिये का पावडर दो चम्मच शहद में मिलाकर लेने से स्मरण शक्ति बढतीहै।



९)  आंवला का रस एक चम्मच २ चम्मच शहद मे मिलाकर उपयोग करें। भुलक्कड पन में आशातीत लाभ होता है।






१०)  अदरक ,जीरा और मिश्री  तीनों को पीसकर लेने से कम याददाश्त की स्थिति में लाभ होता है।


११)   दूध और शहद मिलाकर पीने से भी याद दाश्त में बढोतरी होती है। विद्ध्यार्थियों के लिये फ़ायदेमंद उपचार है।२५० मिलि गाय के दूध में २ चम्मच शहद मिलाकर उपयोग करना चाहिये।









१२)  तिल में स्मरण शक्ति वृद्दि करने के तत्व हैं। २० ग्राम तिल और थोडा सा गुड का तिलकुट्टा बनाकर नित्य सेवन करना परम हितकार उपचार है।



१३)   काली मिर्च का पावडर एक चम्मच असली घी में मिलाकर उपयोग करने से याद दाश्त में इजाफ़ा होता है।











१४)   गाजर में एन्टी ओक्सीडेंट तत्व होते हैं। इससे रोग प्रतिरक्छा प्राणाली ताकतवर बनती है।  दिमाग की ताकत बढाने के उपाय के तौर पर इसकी अनदेखी नहीं करना चाहिये।









१५)   आम रस (मेंगो जूस) मेमोरी बढाने में विशेष सहायक माना गया है। आम रस में २ चम्मच शहद मिलाकर लेना उचित है।

१६) पौष्टिकता और कम वसा वाले भोजन से  अल्जाईमर्स नामक बीमारी होने का खतरा कम रहता है और दिमाग की शक्ति में इजाफ़ा होता है इसके लिये अपने भोजन में ताजा फ़ल-सब्जियां.मछलियां ,ओलिव आईल आदि प्रचुरता से शामिल करें।

१७) तुलसी के ९ पत्ते ,गुलाब की पंखुरी और काली मिर्च नग एक  खूब चबा -चबाकर खाने से दिमाग के सेल्स को ताकत मिलती है।



े१७)   चित्र में प्रदर्शित योगासन करने से भी मेमोरी पावर में  इजाफ़ा  होता है। योग और प्राणायाम की अनदेखी करना ठीक नहीं।

विनम्र सूचना:- http://rekha-singh.blogspot.in/2011_01_01_archive.html  यह एक चोर ब्लोगर है । ज्योतिष विध्या के नाम से इसने मेरे कई चिकित्सा लेख कापी-पेस्ट कर उक्त ब्लोग पर स्थापित कर लिये हैं।निंदनीय कृत्य है।
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