इस ब्लॉग के समर्थक बनें.

01 July 2015

मेथी मेँ हैं बड़े बड़े गुण :health benefits of fenugrik seeds

     मेथी  सेहत के लिहाज से बहुत गुणकारी है। मेथी में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, नैसिन, पौटेशियम, आयरन और अल्कालाड्यस होता है। इसमें डाइसोजेनिन भी होता है जो ऑस्ट्रियोजेन जैसे गुणों से भरपूर होता है। मेथी में कई स्वास्थ्यवर्धक गुण होते है जो कई शारीरिक समस्याओं को दूर भगा देते है। मेथी के दाने बालों की जड़ों को मजबूत करते हैं और उसे पुनर्जीवित भी करते हैं। इसमें प्रोटीन होता है, इसलिए मेथी दानों को अपनी डाइट में शामिल करने से आपके बाल खूबसूरत बनेंगे।
मेथी के दानों में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। खाली पेट मेथी दानों को चबाने से एक्सट्रा कैलरी बर्न होती है। सुबह दो गिलास मेथी का पानी पीने से मोटापा दूर होता है। मेथी का पानी बनाने क लिए एक बड़ा चम्मच मेथी के दानों को दो गिलास पानी में रातभर भिगो दें और सुबह इसे छानकर पी लें। मेथी के सेवन से किडनी भी स्वस्थ होती है। पथरी के इलाज में भी मेथी फायदा करती है। इस जादुई औषधि से पथरी पेशाब के साथ शरीर से बाहर निकल जाती है।

मेथी के दानों के सेवन से पेट दर्द और जलन दूर होती है। साथ ही पाचन क्रिया भी दुरुस्त होती है। मेथी दाने में फॉस्फेट, लेसिथिन और न्यूक्लिओ अलब्यूमिन होने से यह पोषक होती है। इसमें फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर आदि भी मिलते हैं जो शरीर के लिए बेहद जरूरी हैं। पेट ठीक रहे तो स्वास्थ्य भी ठीक रहता है और खूबसूरती भी बनी रहती है। मेथी पेट के लिए काफी अच्छी होती है।




-----------------------------


23 June 2015

गर्मी में दही का उपयोग सेहत के लिए उपकारी

    दूध से जमनेवाला दही एक रुचिकर और सेहतमंद माध्यम है। दही में अच्छी किस्म के बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से लाभ मिलता है। आयुर्वेद के मुताबिक गर्मियों में दूध के मुकाबले दही खाने के फायदे बहुत अधिक होते हैं। रोजाना एक कटोरी दही न सिर्फ बीमारियों को दूर रखता है बल्कि शरीर स्वस्थ बनाता है। दूध में मिलने वाला फैट और चिकनाई शरीर को एक उम्र के बाद नुकसान पहुंचाता है। इस के मुकाबले दही से मिलने वाला फास्फोरस और विटामिन डी शरीर के लाभकारी होता है। दही में कैल्सियम को एसिड के रूप में समा लेने की भी खूबी होती है। रोज दही दूध के मुकाबले दही खाना सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है। दूध में मिलने वाला फैट और चिकनाई शरीर को एक उम्र के बाद नुकसान पहुंचाता है। इस के मुकाबले दही से मिलने वाला फास्फोरस और विटामिन डी शरीर के लाभकारी होता है। 

      गर्मी के मौसम में दही की छाछ या लस्सी बनाकर पीने से पेट की गर्मी शांत हो जाती है। इसे पीकर बाहर निकलें तो लू लगने का डर भी नहीं रहता है। दही को सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां जैसे- अपच, कब्ज, गैस बीमारियां घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी,मट्ठा, छाछ का उपयोग करने से आंतों की गरमी दूर हो जाती है। पाचन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है।


 

     दही के नियमित सेवन से आंतों के रोग और पेट की बीमारियां नहीं होती हैं तथा कई प्रकार के विटामिन बनने लगते हैं। दही में जो बैक्टीरिया होते हैं, वे लेक्टेज बैक्टीरिया उत्पन्न करते हैं। दही में हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की अद्भुत क्षमता है। यह हमारे रक्त में बनने वाले कोलेस्ट्रोल नामक घातक पदार्थ को बढऩे से रोकता है, जिससे वह नसों में जमकर ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित न करे और हार्टबीट सही बनी रहे। दही में कैल्शियम की मात्रा अधिक पाई जाती है, जो हमारे शरीर में हड्डियों का विकास करती है। दांतों एवं नाखूनों की मजबूती एवं मांसपेशियों के सही ढंग से काम करने में भी सहायक है।

13 May 2015

गर्मी के मौसम में बच्चों का ऐसे रखें ख़याल

      ज्यादा देर  तक घर से बाहर रहने  की अनुमति न दें|  गर्मी के दुष्प्रभाव से बचने की  कुछ सावधानियां   नीचे  लिखी जाती है|







  बाहर ज्यादा डॉ तक रहकर आने पर बच्चे  कूलर  या पंखे से गर्मी शांत करने और पसीना सुखाने  का प्रयास करते हैं|  उन्हें ऐसा करने से मना करें| यह  स्वास्थ्य  के लिए अच्छा नहीं है|  उन्हें कपड़े बदलने के लिए कहना चाहिए|  बच्चों को बताएं कि गर्मी में शरीर को पानी की जरूरत ज्यादा होती है\ इसलिए जब भी प्यास लगे ज्यादा मात्रा में पानी पियें|  

  जब बच्चों को बाहर जाना पड़े  तो उनकी त्वचा की देख-भाल के लिए उन्हें काटन ग्लोव्स ही पहनाएं ,और धुप के दुष्प्रभाव से बचाने  के लिए   सन स्क्रीन  लोशन  का इस्तेमाल करें| | 


  बच्चों को हमेशा घर का बना खाना खिलाएं  और बाजार की वस्तुएँ  खाने से  मना करें| जंक फ़ूड  बच्चों के लिए ठीक नहीं होता है|  गर्मी के मौसम में बच्चों को डॉ बार नहलाएं ताकि पसीने  से होने वाले  त्वचा के नुकसान  से बचाया जा सके\ 

13 April 2015

रक्त शोधक कुदरती भोजन पदार्थ

         रक्त हमारे शरीर का अत्यधिक महत्व पूर्ण  हिस्सा है | यह शरीर के विभिन्न अंगों को पौषक तत्व तथा  आक्सीजन  पहुंचाने जैसे  कार्य करता है|शरीर की कोशिकाओं से अपशिष्ट  पदार्थ और कार्बन डाई आक्साईड  बाहर निकालने का काम करता है| यहाँ मैं  कुछ भोजन पदार्थों का उल्लेख करूँगा  जो  रक्त प्रवाह  से जहरीले और केंसर  युक्त सेल्स  को समाप्त कर रक्त की शुद्धि  करते हैं|




 हरी पत्तेदार  सब्जिया-  हरी सब्जियां  पौषक तत्वों से  परिपूर्ण होती हैं | स्वास्थ्य  की  दृष्टि से सब्जियों के अनगिनत लाभ हैं| सब्जियां रक्त साफ़ करने  में मददगार होती हैं|  ब्रोकली ,बंद गोभी और पालक  में पर्याप्त  केंसर रोधी  तत्व मौजूद  होते हैं| इनमें एंटी आक्सीडेंट  तत्व भी  भरपूर होते हैं| सब्जियां लीवर  को सहयोग कर रक्त के जहरीले तत्वों को  नष्ट  करती हैं| 

   रसदार फल - संतरा,तरबूज,सेवफल,अनार,पाईनेपल ,अंगूर  प्रमुख  रक्त शोधक  फल हैं| इन फलों में  प्रचुर केंसर  रोधी  और एन्टी आक्सीडेंट  तत्व  होते हैं  जो खून में उपस्थित फ्री रेडिकल्स  को नष्ट करते हैं|  इन फलों के जूस  से भी शरीर लाभान्वित होता है|  इन फलों का नियमित रूप से थोड़ी मात्रा में उपयोग करना  हितकारी है| अनार और अंगूर का रस  नाश्ते के वक्त पीना उत्तम है|




लहसुन और प्याज- वैसे तो लहसुन कुदरती  एंटी बायोटिक  है  लेकिन साथ  ही यह प्रभाव शाली रक्त शोधक भी है| भोजन में लहसुन  का प्रयोग करने से  खून की वसा  कम होती है  जिससे खून  के  खराब कोलेस्ट्रोल  का लेविल  नीचे आता है|| लहसुन में  उपस्थित फायटो केमिकल्स  लीवर की मदद  करते हुए रक्त शोधन का  कार्य सम्पादित करते हैं|  लहसुन और प्याज को भोजन  का अंग बनाना  चाहिए| लहसुन की कुछ कुली  चबाकर  भी खा सकते हैं|
   चाय  में अदरक और पुदीने का  व्यवहार  करने से  रक्त शोधन का कार्य  संपन्न होता है| खून के विषैले  तत्वों को बाहर निकालने  में सहायक है|| चुकंदर,गाजर और निम्बू भी  उत्तम कोटि  के रक्त शोधक माने गए हैं|

   रोज सुबह एक चम्मच हल्दी   पानी के साथ लेने से खून साफ़ होता है|


24 February 2015

अंकुरित आहार से रखें सेहत का ख़याल

   शरीर को स्वस्थ  बनाए रखने  में  अंकुरित अनाज यानी स्प्राउट्स  बेहद महत्त्व पूर्ण है|   अगर आप रोजाना अंकुरित सलाद को अलग-अलग तरीके से लें, तो इससे आपकी सेहत बनी रहती है। अनाज, दाल या बीज को अंकुरित कर के खाने से उसकी पौष्टिकता कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए आहार विशेषज्ञ नाश्ते में स्प्राउट्स खाने की सलाह भी देते हैं। 



विटामिन्स का भंडार-

विटामिन ए, सी, बी-6 और ‘के’ के साथ-साथ इसमें कई तरह के मिनरल्स जैसे मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, मैंगनीज और पोटैशियम भी होते हैं। 

एंटी-ऑक्सीडेंट्स-

अंकुरित अनाजों में एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी होते हैं।
इसलिए इसके सेवन से ना सिर्फ झुर्रियां दूर रहती हैं, बल्कि त्वचा पर नेचुरल ग्लो भी आता है। इसके अलावा स्प्राउट्स में डाइटरी फाइबर, प्रोटीन आयरन,,ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे पौष्टिक तत्‍व भी होते हैं। इस कारण यह शाकाहारी लोगों के लिए सबसे अच्छा विकल्प भी है।bold; line-height: 25px; text-align: justify;">

हाजमा ठीक रखता है-
यह हाजमे के लिए जरूरी एन्जाइम का अच्छा स्रोत भी है।  कैलोरी की मात्रा कम होने के कारण यह वजन कम करने वाले लोगों के लिए अच्छा विकल्प है। 




  • अंकुरित दानों का सेवन केवल सुबह नाश्ते के समय ही करना चाहिये।



  • अंकुरित आहार शरीर को नवजीवन देने वाला अमृतमय आहार कहा गया है।

  • अंकुरित भोजन क्लोरोफिल, विटामिन (`ए´, `बी´, `सी´, `डी´ और `के´) कैल्शियम, फास्फोरस, पोटैशियम, मैगनीशियम, आयरन, जैसे खनिजों का अच्छा स्रोत होता है।

  • अंकुरीकरण की प्रक्रिया में अनाज/दालों में पाए जाने वाले कार्बोहाइट्रेड व प्रोटीन और अधिक सुपाच्य हो जाते हैं।
अंकुरित आहार को अमृत आहार   कहा गया है \अंकुरित आहार भोजन की सप्राण खाद्यों की श्रेणी में आता है। यह पोषक तत्वों का श्रोत मन गया है । अंकुरित आहार न सिर्फ हमें उन्नत रोग प्रतिरोधी व उर्जावान बनाता है बल्कि शरीर का आंतरिक शुद्धिकरण कर रोग मुक्त भी करता है । अंकुरित आहार अनाज या दालों के वे बीज होते जिनमें अंकुर निकल आता हैं इन बीजों की अंकुरण की प्रक्रिया से इनमें रोग मुक्ति एवं नव जीवन प्रदान करने के गुण प्राकृतिक रूप से आ जाते हैं।

अंकुरित भोजन क्लोरोफिल, विटामिन (`ए´, `बी´, `सी´, `डी´ और `के´) कैल्शियम, फास्फोरस, पोटैशियम, मैगनीशियम, आयरन, जैसे खनिजों का अच्छा स्रोत होता है। अंकुरित भोजन से काया कल्प करने वाला अमृत आहार कहा गया है अर्थात् यह मनुष्य को पुनर्युवा, सुन्दर स्वस्थ और रोगमुक्त बनाता है। यह महँगे फलों और सब्जियों की अपेक्षा सस्ता है, इसे बनाना खाना बनाने की तुलना में आसान है इसलिये यह कम समय में कम श्रम से तैयार हो जाता है। बीजों के अंकुरित होने के पश्चात् इनमें पाया जाने वाला स्टार्च- ग्लूकोज, फ्रक्टोज एवं माल्टोज में बदल जाता है जिससे न सिर्फ इनके स्वाद में वृद्धि होती है बल्कि इनके पाचक एवं पोषक गुणों में भी वृद्धि हो जाती है।
खड़े अनाजों व दालों के अंकुरण से उनमें उपस्थित अनेक पोषक तत्वों की मात्रा दोगुनी से भी ज्यादा हो जाती है, मसलन सूखे बीजों में विटामिन 'सी' की मात्रा लगभग नहीं के बराबर होती है लेकिन अंकुरित होने पर लगभग दोगुना विटामिन सी इनसे पाया जा सकता है।
अंकुरण की प्रक्रिया से विटामिन बी कॉम्प्लेक्स खासतौर पर थायमिन यानी विटामिन बी१, राइबोप्लेविन यानी विटामिन बी२ व नायसिन की मात्रा दोगुनी हो जाती है। इसके अतिरिक्त 'केरोटीन' नामक पदार्थ की मात्रा भी बढ़ जाती है, जो शरीर में विटामिन ए का निर्माण करता है। अंकुरीकरण की प्रक्रिया में अनाज/दालों में पाए जाने वाले कार्बोहाइट्रेड व प्रोटीन और अधिक सुपाच्य हो जाते हैं। अंकुरित करने की प्रक्रिया में अनाज पानी सोखकर फूल जाते हैं, जिनसे उनकी ऊपरी परत फट जाती है व इनका रेशा नरम हो जाता है। परिणामस्वरूप पकाने में कम समय लगता है और वे बच्चों व वृद्धों की पाचन क्षमता के अनुकूल बन जाते हैं।
अंकुरित करने के लिये चना, मूँग, गेंहू, मोठ, सोयाबीन, मूँगफली, मक्का, तिल, अल्फाल्फा, अन्न, दालें और बीजों आदि का प्रयोग होता है। अंकुरित भोजन को कच्चा, अधपका और बिना नमक आदि के प्रयोग करने से अधिक लाभ होता है। एक दलीय अंकुरित (गेहूं, बाजरा, ज्वार, मक्का आदि) के साथ मीठी खाद्य (खजूर, किशमिश, मुनक्का तथा शहद आदि) एवं फल लिए जा सकते हैं।

द्विदलीय अंकुरित (चना, मूंग, मोठ, मटर, मूंगफली, सोयाबीन, आदि) के साथ टमाटर, गाजर, खीरा, ककड़ी, शिमला मिर्च, हरे पत्ते (पालक, पुदीना, धनिया, बथुआ, आदि) और सलाद, नींबू मिलाकर खाना बहुत ही स्वादिष्ट और स्वास्थ्यदायक होता है। इसे कच्चा खाने बेहतर है क्यों कि पकाकर खाने से इसके पोषक तत्वों की मात्रा एवं गुण में कमी आ जाती है। अंकुरित दानों का सेवन केवल सुबह नाश्ते के समय ही करना चाहिये। एक बार में दो या तीन प्रकार के दानों को आपस में मिला लेना अच्छा रहता है। यदि ये अंकुरित दाने कच्चे खाने में अच्छे नहीं लगते तो इन्हें हल्का सा पकाया भी जा सकता है। फिर इसमें कटे हुए प्याज, कटे छोटे टमाटर के टुकड़े, बारीक कटी हुई मिर्च, बारीक कटा हुई धनिया एकसाथ मिलाकर उसमें नींबू का रस मिलाकर खाने से अच्छा स्वाद मिलता है।





अंकुरण की विधि -
  • अंकुरित करने वाले बीजों को कई बार अच्छी तरह पानी से धोकर एक शीशे के जार में भर लें शीशे के जार में बीजों की सतह से लगभग चार गुना पानी भरकर भीगने दें अगले दिन प्रातःकाल बीजों को जार से निकाल कर एक बार पुनः धोकर साफ सूती कपडे में बांधकर उपयुक्त स्थान पर रखें ।

  • गर्मियों में कपडे के ऊपर दिन में कई बार ताजा पानी छिडकें ताकि इसमें नमी बनी रहे।

  • गर्मियों में सामान्यतः २४ घंटे में बीज अंकुरित हो उठते हैं सर्दियों में अंकुरित होने में कुछ अधिक समय लग सकता है । अंकुरित बीजों को खाने से पूर्व एक बार अच्छी तरह से धो लें तत्पश्चात इसमें स्वादानुसार हरी धनियाँ, हरी मिर्च, टमाटर, खीरा, ककड़ी काटकर मिला सकते हैं द्य यथासंभव इसमें नमक न मिलाना ही हितकर है।
जरूरी  निर्देश -
  • अंकुरित करने से पूर्व बीजों से मिटटी, कंकड़ पुराने रोगग्रस्त बीज निकलकर साफ कर लें। प्रातः नाश्ते के रूप में अंकुरित अन्न का प्रयोग करें । प्रारंभ में कम मात्रा में लेकर धीरे-धीरे इनकी मात्रा बढ़ाएँ।
  • अंकुरित अन्न अच्छी तरह चबाकर खाएँ।
  • नियमित रूप से इसका प्रयोग करें।
  • वृद्धजन, जो चबाने में असमर्थ हैं वे अंकुरित बीजों को पीसकर इसका पेस्ट बनाकर खा सकते हैं। ध्यान रहे पेस्ट को भी मुख में कुछ देर रखकर चबाएँ ताकि इसमें लार अच्छी तरह से मिल जाय।



11 February 2015

हर्बल चाय से करें स्वाइन फ्लू से बचाव

स्वाइन-फ्लू की बीमारी से बचाव के लिए हर्बल चाय बहुत लाभदायक हो सकती है। यह चाय आप अपने रसोई घर में भी आसानी बना सकते हैं।    यह हर्बल चाय लौंग, इलायची, सोंठ, हल्दी, दालचीनी, गिलौय, तुलसी, कालीमिर्च और पिप्पली को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर तैयार की जा सकती है। इस चूर्ण की दो ग्राम मात्रा एक कप चाय में डालकर उसे अच्छी तरह उबालकर सुबह-शाम पीने पर शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और स्वाइन-फ्लू जैसी बीमारी से भी बचाव होता है।  सामान्य स्थिति में भी लोग इस हर्बल चाय का सेवन कर सकते हैं।






     स्वाइन फ्लू को लेकर भ्रमित होने और घबराने की जरूरत नहीं है। आम तौर पर मौसम में बदलाव के समय फ्लू अथवा सर्दी, जुकाम, बुखार की शिकायत होती रहती है, लेकिन सामान्य इलाज से ये शिकायतें दूर हो जाती हैं।कपूर और इलायची को पीसकर कपड़े में छोटी पोटली बनाकर रखें और उसे बार-बार सूंघते जाएं, तो स्वाइन-फ्लू सहित कई प्रकार के फ्लू यानी सर्दी, जुकाम, सिरदर्द, बुखार आदि से बचा जा सकता है। इसके अलावा चिरायता, गुडुची, अनंतमूल, सोंठ, हल्दी, कालमेघ, वासा और तुलसी का काढ़ा बनाकर पीने से भी इस बीमारी के इलाज में फायदा होता है। मरीज को नीलगिरी तेल का वाष्प लेना चाहिए। इसके साथ ही सितोपलादि चूर्ण, त्रिकटु चूर्ण, लक्ष्मी विलास रस, गोदंती, श्रंग-भस्म आदि का सेवन आवश्यकता अनुसार चिकित्सक के परामर्श से करना चाहिए।

 
  स्वाइन-फ्लू कोई नयी बीमारी नहीं है, बल्कि यह सामान्य प्रकार के फ्लू के लक्षणों के समान लक्षण वाला फ्लू (प्रतिश्याय) है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इसका कारण एच-वन-एन-वन नामक विषाणुओं को माना गया है। प्रकृति में ऐसे असंख्य विषाणु वातावरण में मौजूद हैं, जिन्हें कभी नष्ट नहीं किया जा सकता, लेकिन उनसे बचाव किया जा सकता है। आयुर्वेद के आचार्यों ने हजारों वर्ष पहले इसका वर्णन कर दिया था। शरीर में त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) जीवाणुओं से प्रकोपित होकर शरीर में रोग उत्पन्न करते हैं। जब तक त्रिदोष संतुलित अवस्था में होते हैं, तब तक जीवाणुओं की शक्ति कम होती है, लेकिन त्रिदोष का संतुलन बिगडऩे पर बीमारी की स्थिति निर्मित होती है। प्रकृति ने इन जीवाणुओं और विषाणुओं के बीच ही मनुष्य को स्वस्थ बने रहने के लिए उच्च प्रतिरोधक क्षमता प्रदान की है, लेकिन दूषित आहार और अनियमित जीवन शैली की वजह से मनुष्य की रोगप्रतिरोधक क्षमता कम होती जा रही है।

    लगातार बुखार, खांसी, गले में खराश, निगलने में परेशानी, शरीर में दर्द, कमजोरी और थकान, भूख नहीं लगना, अरूचि, छींक आना, स्वाइन-फ्लू के लक्षण हो सकते हैं।आयुर्वेद के अनुसार स्वाइन-फ्लू वास्तव में वात-श्लैश्मिक ज्वर है। इससे बचे रहने के लिए शुद्ध और शाकाहारी भोजन करना चाहिए, वात एवं कफ शामक, गर्म और स्निग्ध आहार अल्प मात्रा में लेना चाहिए, पर्याप्त नींद लेनी चाहिए, खुली और साफ हवा में रहना चाहिए, यानी कमरे हवादार होने चाहिए और उनमें सूर्य की रौशनी पर्याप्त मात्रा में आनी चाहिए, उबालकर ठंडा किया हुआ पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिए, सवेरे नियमित रूप से प्राणायाम करना चाहिए, फ्लू के रोगियों से दूर रहना चाहिए, यथासंभव भीड़ से बचना चाहिए, सुअर के बाड़े अथवा सुअरों से दूर रहना चाहिए, उल्टी, छींक, खांसी आदि शारीरिक वेगों को नहीं रोकना चाहिए। 
-----------------------------------------------------

23 January 2015

प्रजनन क्षमता बढाता है जेतुन का तेल.

हाल में हुए शोध में प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए डाइट में खास तरह के बदलाव को फायदेमंद माना है। 

यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ हैंपटन के
शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में माना है कि ऑलिव ऑयल से बनी डाइट के सेवन से प्रजनन दर 40 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।


शोधकर्ताओं ने छह हफ्तों तक 100 जोड़ों को आईवीएफ ट्रीटमेंट के दौरान ऑलिव ऑयल से बनी डाइट का सेवन कराकर यह शोध किया है।



उनका मानना है कि ऑलिव ऑयल युक्त डाइट के सेवन से भ्रूण का विकास तेजी से होता है और गर्भावस्था के दौरान जच्चा-बच्चा अधिक सेहतमंद रहते हैं।

---------------------------------------------------------------------

02 January 2015

मुलेठी के रोग नाशक गुण

मुलेठी बहुत गुणकारी औषधि है। मुलेठी के प्रयोग करने से न सिर्फ आमाशय के विकार बल्कि गैस्ट्रिक अल्सर के लिए 

फायदेमंद है। इसका पौधा 1 से 6 फुट तक होता है। यह मीठा होता है इसलिए इसे ज्येष्ठीमधु भी कहा जाता है। असली 

मुलेठी अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है।

यह सूखने पर अम्ल जैसे स्वाद की हो जाती है। मुलेठी की जड़ को उखाड़ने के बाद दो वर्ष तक उसमें औषधीय गुण विद्यमान 

रहता है। ग्लिसराइजिक एसिड के होने के कारण इसका स्वाद साधारण शक्कर से पचास गुना अधिक मीठा होता है।


मुलेठी के गुण -



- यह ठंडी प्रकृति की होती है और पित्त का शमन करती है .

- मुलेठी को काली-मिर्च के साथ खाने से कफ ढीला होता है। सूखी खांसी आने पर मुलेठी खाने से फायदा होता है। इससे खांसी 


तथा गले की सूजन ठीक होती है।- अगर मुंह सूख रहा हो तो मुलेठी बहुत फायदा करती है। इसमें पानी की मात्रा 50 प्रतिशत 

तक होती है। मुंह सूखने पर बार-बार इसे चूसें। इससे प्‍यास शांत होगी।

- गले में खराश
के लिए भी मुलेठी का प्रयोग किया जाता है। मुलेठी अच्‍छे स्‍वर के लिए भी प्रयोग की जाती है।

- मुलेठी महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद है। मुलेठी का एक ग्राम चूर्ण नियमित सेवन करने से वे अपनी सुंदरता को लंबे 

समय तक बनाये रख सकती हैं।

- लगभग एक महीने तक , आधा चम्मच मूलेठी का  चूर्ण  

सुबह शाम शहद के साथ चाटने से मासिक सम्बन्धी सभी रोग दूर 

होते है.

- फोड़े होने पर
मुलेठी का लेप लगाने से जल्दी ठीक हो जाते है.

- रोज़ ६ ग्रा. मुलेठी चूर्ण , ३० मि.ली. दूध के साथ पिने से शरीर में ताकत आती है.

- लगभग ४ ग्रा. मुलेठी का चूर्ण घी या शहद के साथ लेने से ह्रदय रोगों में लाभ होता है.

- इसके आधा ग्राम रोजाना सेवन से खून में वृद्धि होती है.

- जलने पर मुलेठी और चन्दन के लेप से शीतलता मिलती है.

- इसके चूर्ण को मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है.

- मुलेठी का टुकड़ा मुंह में रखने से कान का दर्द और सूजन ठीक होता है.

- उलटी होने
पर मुलेठी का टुकडा मुंह में रखने पर लाभ होता है.

- मुलेठी की जड़ पेट के घावों को समाप्‍त करती है, इससे पेट के घाव जल्‍दी भर जाते हैं। पेट के घाव होने पर मुलेठी की जड़ 

का चूर्ण इस्‍तेमाल करना चाहिए।

- मुलेठी पेट के अल्‍सर के लिए फायदेमंद है। इससे न केवल गैस्ट्रिक अल्सर वरन छोटी आंत के प्रारम्भिक भाग ड्यूओडनल 

अल्सर में भी पूरी तरह से फायदा करती है। जब मुलेठी का चूर्ण ड्यूओडनल अल्सर के अपच, हाइपर एसिडिटी आदि पर 

लाभदायक प्रभाव डालता है। साथ ही अल्सर के घावों को भी तेजी से भरता है।

]- खून की उल्टियां
होने पर दूध के साथ मुलेठी का चूर्ण लेने से फायदा होता है। खूनी उल्‍टी होने पर मधु के साथ भी इसे 

लिया जा सकता है।

- हिचकी
होने पर मुलेठी के चूर्ण को शहद में मिलाकर नाक में टपकाने तथा पांच ग्राम चूर्ण को पानी के साथ खिला देने से 

लाभ होता है।

- मुलेठी आंतों की टीबी के लिए भी फायदेमंद है।

- ये एक प्रकार की एंटीबायोटिक भी है इसमें बैक्टिरिया से लड़ने की क्षमता पाई जाती है। यह शरीर के अन्‍दरूनी चोटो में भी 




लाभदायक होती है।

- मुलेठी के चूर्ण से आँखों की शक्ति भी बढ़ती है सुबह तीन या चार ग्राम खाना चाहिये।

- यदि भूख न लगती हो तो एक छोटा टुकड़ा मुलेठी कुछ देर चूसे, दिन में ३,४, बार इस प्रक्रिया को दोहरा ले ,भूख खुल जाएगी .
- कोई भी समस्या न हो तो भी कभी-कभी मुलेठी का सेवन कर लेना चाहिए आँतों के अल्सर ,कैंसर का खतरा कम हो जाता है 


तथा पाचनक्रिया भी एकदम ठीक रहती है

26 March 2014

तुलसी के बीज नपुंसकता में लाभकारी

तुलसी के बीज  शीघ्र पतन में हितकारी-
            जब भी तुलसी में खूब फुल यानी मंजिरी लग जाए तो उन्हें पकने पर तोड़ लेना चाहिए वरना तुलसी के झाड में चीटियाँ और कीड़ें लग जाते है और उसे समाप्त कर देते है . इन पकी हुई मंजिरियों को रख ले . इनमे से काले काले बीज अलग होंगे उसे एकत्र कर ले . यही सब्जा है . अगर आपके घर में नही है तो बाजार में पंसारी या आयुर्वैदिक दवाईयो की दुकान पर मिल जाएंगे


शीघ्र पतन एवं वीर्य की कमी-  तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से समस्या दूर होती है|
नपुंसकता- तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है और यौन-शक्ति में बढोतरि होती है।

   मासिक धर्म की  अनियमियता- जिस दिन मासिक आए उस दिन से जब तक मासिक रहे उस दिन तक तुलसी के बीज 5-5 ग्राम सुबह और शाम पानी या दूध के साथ लेने से मासिक की समस्या ठीक होती है और जिन महिलाओ को गर्भधारण में समस्या है वो भी ठीक होती है
         
तुलसी के पत्ते गर्म तासीर के होते है पर सब्जा शीतल होता है . इसे फालूदा में इस्तेमाल किया जाता है . इसे भिगाने से यह जेली की तरह फुल जाता है . इसे हम दूध या लस्सी के साथ थोड़ी देशी गुलाब की पंखुड़ियां डाल कर ले तो गर्मी में बहुत ठंडक देता है .इसके अलावा यह पाचन सम्बन्धी गड़बड़ी को भी दूर करता है .यह पित्त घटाता है ये त्रिदोषनाशक  , क्षुधावर्धक है |

--------------------------------------------------------

26 February 2014

एलोवेरा जूस अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी.


 
  एलोवेरा  ५००० वर्ष पुरानी औषधि है| इसे  हिन्दी में ग्वारपाठा  या घृतकुमारी  कहते हैं\ इसे संजीवनी  पौधा भी कहा जाता है| इसकी लगभग २५० प्रजातियों में से  कुछ ही में औषधीय गुण  पाए गए हैं|  हमारे शरीर के सही विकास के लिए २१ तरह के अमीनो एसिड्स  की दरकार होती है|  इनमें से १५ एमिनो एसिड्स तो एलोवेरा में  ही मौजूद होते हैं| इसके जूस में केल्शियम,आयरन ,सोडियम,पोटेशियम,क्रोमियम,मैंगनीज,तांबा  और जस्ता आदि खनिज लवण  पाए जाते हैं|


    क्या है इसमें खास-इसमें १८ धातु,१५ एमिनो एसिड्स और १२ विटामिन होते हैं| ये खून की कमी दूर कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाते हैं|  एलोवेरा का जूस  गर्भाशय  और  पेट के रोगों में हितकारी है| गर्मी,उमस और बारीश के कारण होने वाले फोड़े फुंसियों  पर इसका  रस लगाने से आराम मिलता है| गुलाब जल में एलोवेरा जूस मिलाकर चेहरे पर लगाने  से  चेहरा चमकने  लगता है} 

   नुकसानदेह तत्वों को शरीर से बाहर कर देता है- अस्वास्थ्यकर जीवन शैली ,जंक,फ़ूड,प्रदूषण ,ड्रिंकिंग और धूम्र पान से  शरीर में  हानिकारक तत्व  एकत्र होने लगते  हैं|  एलोवेरा जूस के प्रयोग से ये बाहर निकल जाते हैं|

   वजन घटाने में सहायक है-


रोजाना एक गिलास एलोवेरा जूस पीने से वजन घटने लगता है|  इसके सेवन से बार - बार भूख नहीं लगती है| साथ ही पाचन तंत्र भी दुरुस्त रहता है| एलोवेरा में कई पोषक तत्व भी पाए जाते हैं|

      दांतों को स्वस्थ रखता है-  एलोवेरा का जूस दांतों के पीलेपन को दूर करता है|  दांतों में रोगाणु  समाप्त  कर  है| यह सांस की दुर्गन्ध  को  नष्ट करने वाली  औषधि है|  मुंह के छाले में इसके जूस के गरारे करने चाहिए|

      बालों और त्वचा को  स्वस्थ बनाता है-  एलोवेरा जूस के सेवन से  रफ स्किन भी स्वस्थ  और कान्तिमान हो जाती है| त्वचा पर निखार आ जाता है|   बालों  की रूसी दूर करता है|   बाल स्वस्थ और  शाईनी  हो जाते हैं|

        खून की कमी में लाभदायक है-  एलोवेरा का ६ इंच लंबा छिला हुआ टुकड़ा ५-७ तुलसी के पाती,४-५ नीम के पत्ते  लेकर थोड़ा सा पानी डालकर पीस लें इस घोल को गर्म कर  काढा बनाकर पीने से एनीमिया का निवारण  हो जाता है|

   लाईलाज बीमारियों में हितकारी है-  गिलोय का रस १५ मिली ,एलोवेरा जूस १५ मिली, गेहू के जवारे का जूस १५ मिली ,तुलसी के ११ पत्ते ,नीम के ४ पत्ते इन सभी का जूस  सुबह शाम लेने से  केंसर  और कई लाईलाज रोगों में  आशातीत लाभ मिलता है|

   एलोवेरा का जूस उच्च  रक्त चाप  में लाभकारी है| इससे ब्लड  सर्कुलेशन  सुधरता है|  इसका रस हृदय रोगों में उपकारी साबित हुआ है|

--------------------------------------------

     

23 July 2013

जलोदर (ascites) रोग की सरल चिकित्सा.


                                                                                                                                              

       पेट (peritoneal cavity) में पानी इकट्ठा होने लगने को जलोदर कहा जाता है।  रोगी का पेट फूल जाता है।
  
जलोदर के कारण--

        जलोदर मुख्यतः लिवर के पुराने रोग से उत्पन्न होता है।

  खून में एल्ब्युमिन के स्तर में गिरावट  होने का भी जलोदर से संबंध रहता है।

जलोदर के लक्षण--

पेट का फूलना

सांस में तकलीफ

टांगों की सूजन

बेचैनी और भारीपन मेहसूस होना

घरेलु चिकित्सा--

   जलोदर रोग में लहसुन का प्रयोग हितकारी है।  लहसुन का रस आधा चम्मच आधा गिलास जल में मिलाकर  लेना कर्तव्य है। कुछ रोज लेते रहने से फर्क नजर आएगा।

  देसी चना करीब ३० ग्राम  ३०० मिली पानी में उबालें कि आधा रह जाए। ठंडा होने पर छानकर पियें। २५ दिन  जारी रखें।

      करेला का जूस ३०-४० मिली आधा गिलास जल में  दिन  में ३ बार पियें। इससे जलोदर  रोग निवारण में अच्छी मदद मिलती है।


    ;
जलोदर रोगी को पानी की मात्रा कम कर देना चाहिये। शरीर के लिये तरल की आपूर्ति दूध से करना उचित है। लेकिन याद रहे अधिक तरल से टांगों की सूजन बढेगी।

जलोदर की चिकित्सा में मूली के पत्ते का रस अति गुणकारी माना गया है। १०० मिली रस दिन में ३ बार पी सकते हैं।

     मैथी के बीज इस रोग में उपयोग करना लाभकारी रहता है। रात को  २० ग्राम बीज पानी में गला दें।  सुबह छानकर पियें।

   अपने भोजन में प्याज का उपयोग करें  इससे पेट में  जमा तरल मूत्र के माध्यम से  निकलेगा और आराम लगेगा।

  जलोदर रोगी रोजाना तरबूज खाएं। इससे शरीर में तरल का बेलेंस  ठीक रखने में सहायता मिलती है।




  छाछ और गाजर का रस  उपकारी है।  ये शक्ति देते हैं  और  जलोदर में तरल का स्तर  अधिक नहीं बढाते हैं।

 
अपने भोजन में  चने का सूप ,पुराने चावल, ऊंटडी का दूध , सलाद ,लहसुन, हींग को समुचित  स्थान देना चाहिये।

  रोग  की गंभीरता पर नजर रखते हुए  अपने चिकित्सक  के परामर्शानुसार  कार्य करें।
.............................................................................................................



  




11 March 2013

दुबले-पतले लोग बढा सकते हैं वजन


                                                                                                                                   

                                                                                                                                               


      भोजन में पौषक तत्वों की कमी  बनी रहने से लोग आहिस्ता-आहिस्ता  कृष काय हो जाते हैं। अधिक दुबले पतले शरीर  मे शक्ति भी कम हो जाती है। नि:शक्त जन अपनी दिनचर्या सही ढंग से संपन्न करने में थकावट मेहसूस करते है।

   इस लेख में कतिपय ऐसे उपचारों की चर्चा की जाएगी जिनसे आप अपने शरीर का वजन बढा सकते हैं|






प्लान करें वेट गेन शेड्यूल


सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आपके बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई के हिसाब से यह जानने कि कोशिश करें कि आपकी लंबाई और उम्र के हिसाब से आपका वजन क‌ितना होना चाहिए।
बीएमआई आप इंटरनेट पर भी जोड़ सकते हैं या फिर खुद ही इसका हिसाब लगाएं। इसका फार्मूला है-
बीएमआई = वजन (किलोग्राम) / (ऊंचाई X ऊंचाई (मीटर में))
आमतौर पर 18.5 से 24.9 तक बीएमआई आदर्श स्थिति है इसलिए वजन बढ़ाने के क्रम में ध्यान रखें कि आप इसके बीच में ही रहें।

डाइट पर दें ध्यान

वजन बढ़ाने का मतलब यह नहीं कि आप जमकर फास्ट फूड या पैटी डाइट पर टूट पड़ें। यहां समझदारी से काम लेना जरूरी है।
थोड़ी-थोड़ी देर पर डाइट लें और अपने भोजन की मात्रा थोड़ी बढ़ाएं। डाइट में कार्बोहाइड्रेट और हेल्दी फैट्स की मात्रा बढ़ाएं। अध‌िक कैलोरी वाली डाइट जैसे रोटियां, रेड मीट, राजमा, सब्जियां, मछली, चिकन, ऑलिव्स और केले जैसे फल आदि की मात्रा बढ़ाएं।
दिन में कम से कम पांच बार थोड़ी-थोड़ी डाइट लें।

कसरत न छोड़ें



वजन बढ़ाने का मतलब यह नहीं कि आप आलस की चादर ओढ़ लें। शरीर को फिट रखने के लिए हर हाल में कसरत जरूरी है।

प्रतिदिन आधा घंटा भी अगर आप कसरत को देंगे तो आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म अच्छा होगा, भूख अच्छी तरह लगेगी और आप फिट रहेंगे।

कसरत और हेल्दी डाइट का कांबिनेशन वजन घटाने और बढ़ाने, दोनों के लिए जरूरी है। वेट लिफ्टिंग कसरतें इस मामले में मददगार हैं।

तनाव न लें

वजन सेहतमंद तरीके से बढ़ाना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जिसका स्ट्रेस लेने से कोई फायदा नहीं है। कसरत और अच्छी डाइट के साथ-साथ रुटीन में आराम का थोड़ा समय निकालें।
सोने और उठने का समय निर्धारित करें जिससे शरीर तेजी से रिकवर होगा। योग और प्राणायाम के जरिए आप तनाव मुक्त होकर अपने शेड्यूल पर कायम रह सकते हैं।

      नाश्ते में बादाम,दूध,मक्खन घी  का पर्याप्त मात्रा में उपयोग करने से आप तंदुरस्त रहेंगे और वजन भी बढेगा।




   
भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढाएं। दालों में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है। अडा,मछली,मीट भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।बादाम,काजू का नियमित सेवन करें।

     बीमारी की अवस्था में,बीमारी के बाद,यात्रा से  या मेहनत  से थके होने पर,,सुबह और शाम के वक्त और उपवास  की अवस्था में अपने पार्टनर से शारीरिक संबंध बनाना हानिकारक है।







   अधिक केलोरी वाला भोजन लेते रहें।















   च्यवनप्राश वजन बढाने की और स्वस्थ रहने की मशहूर आयुर्वेदिक औषधि है। सुबह -शाम दूध के साथ सेवन करते रहें।

    आयुर्वेद में अश्वगंधा और सतावरी  के उपयोग से वजन बढाने का उल्लेख मिलता है।३-३  ग्राम  दोनों रोज सुबह लं का चूर्ण दूध के साथ प्रयोग करें। वसंतकुसुमाकर रस भी काफ़ी असरदार  दवा है।






   रोज सुबह ३-४ किलोमीटर  घूमने का नियम बनाएं। ताजा हवा भी मिलेगी और आपका मेटाबोलिस्म  भी ठीक रह्र्गा।











 भोजन खूब अच्छी तरह से चबा चबा कर खाना चाहिये। दांत का काम आंत पर डालना उचित नहीं है।

दोनों वक्त शोच निवृत्ति की आदत डालें।

 ५० ग्राम किश मिश रात को पानी में भिगोदे  सुबह भली प्रकार चबा चबा कर खाएं।  २-३ माह के प्रयोग से वजन बढेगा।


 नारियल का दूध - 

यह आहार तेलों का समृद्ध स्रोत है और भोजन के लिए अच्छा तथा स्वादिस्ट जायके के लिए जाना 

जाता है। नारियल के दूध में भोजन पकाने से खाने में कैलोरी बढ़ेगी। जिससे आपके वजन में वृधि 

होगी।


  मलाई- मिल्क क्रीम में आवश्यकता से ज्यादा फैटी 

एसिड होता है। और ज्यादातर खाद्य उत्पादों की तुलना में अधिक कैलोरी की मात्रा होती है। मिल्क 

क्रीम को पास्ता और सलाद के साथ खाने से वजन तेजी से बढ़ेगा।

अखरोट - अखरोट में आवश्यक मोनोअनसेचुरेटेड फैट होता है जो स्वस्थ कैलोरी को उच्च मात्रा में 

प्रदान करता है। रोज़ 20 ग्राम अखरोट खाने से वजन तेजी से प्राप्त होगा।

केला- तुरंत वजन बढाना हो तो केला खाइये। रोज़ दो या दो से अधिक केले खाने से आपका पाचन 

तंत्र भी अच्छा रहेगा।


 ब्राउन राइस - ब्राउन राइस कार्बोहाइड्रेट और फाइबर की एक स्वस्थ खुराक का स्रोत है। भूरे रंग के 

चावल कार्बोहाइड्रेट का भंडार है इसलिए नियमित रूप से इसे खाने से वजन तेजी से हासिल होगा।


आलू-  आलू कार्बोहाइड्रेट और काम्प्लेक्स शुगर का अच्छा स्त्रोत है। ये ज्यादा खाने से शरीर में 

फैट की मात्रा बढ़ जाती है।

 बीन्स : जो लोग शाकाहारी है और नॉनवेज नहीं खाते उनके लिए बीन्स से अच्छा कोई विकल्प 

नहीं है। बीन्स के एक कटोरी में 300 कैलोरी होती है। यह सिर्फ वजन बढ़ने में ही मदत नहीं करता 

बल्कि पौष्टिक भी होता है।

 मक्खन : मक्खन में सबसे ज्यादा कैलोरी पाई जाती है। मक्खन खाने के स्वाद को सिर्फ बढ़ाता ही 

नहीं बल्कि वजन बढ़ाने में भी मदद करता है।

---------------------------------------------------------------------

   

15 January 2013

गंजापन दूर करने के सरल उपचार. : How to fight against baldness?

                                  

                                                                                                                     -डाँ.दयाराम आलोक:
                                                                                                                         9926524852

     गंजापन एक आम समस्या बन गई है,चाहे महिला हो या पुरुष, ये समस्या दोनों को हो सकती हैं. गंजापन को एलोपेसिया भी कहते हैं. जब असामान्य रूप से बहुत तेजी से बाल झड़ने लगते हैं तो नये बाल उतनी तेजी से नहीं उग पाते या फिर वे पहले के बाल से अधिक पतले या कमजोर उगते हैं. ऐसे में आगे जाकर गंजे होने की संभावना अधिक हो जाती है.।



कारण--





  बालों का गिरना या झड़ना एक गंभीर समस्या है. बालों के झड़ने अथवा गंजेपन के कई कारण है जैसे बालों की जड़ों का कमजोर हो जाना, पिट्यूटरी ग्लैंड(पियूस ग्रंथि) में हार्मोन्स की कमी, सिर पर रुसी की अधिकता, बालों की जड़ों में पोषक तत्वों की कमी, क्रोध, शोक, चिंता, अधिक मानसिक परिश्रम, अधिक गरम भोजन, सिर में बढ़ती गर्मी, भोजन में विटामिंस मिनिरल्स, रेशा एवं आभ्यंतर रस हार्मोन्स की कमी, लगातार सिर दर्द रहने से रक्त संचार में कमी, भोजन का सही ढंग से न पचना, सिर के स्नायुओं में प्राण प्रवाह की कमी.

गंजेपन की चिकित्सा--

                

  हमारे भोजन में कतिपय ऐसे मिनरल्स  पाये जाते हैं जिनका गंजापन विरोधी प्रभाव होता है।


 यहां हम ऐसे ही भोजन तत्वों का विवरण  प्रस्तुत करते हैं--

   सबसे महत्वपूर्ण तत्व  जो गंजापन  दूर कर सकते हैं वे हैं- जिंक,कापर ,लोह तत्व और सिलिका.

  जिंक में गंजापन नष्ट करने वाले तत्व पाये जाते हैं। केले,अंजीर,बेंगन ,आलू और  स्ट्राबेरी में जिंक की संतोषप्रद मात्रा निहित होती है।

कापर तत्व हमारे इम्युन सिस्टम को को मजबूत करते हुए बालों की सुरक्षा करता है। रक्त में हेमोग्लोबिन की वृद्धि के लिये कापर  सहायता करता है। दालें,सोयाबीन और वालनट आदि में कापर तत्व पाया जाता है।

लोह तत्व बालों की सुरक्षा और पोषण  के लिये आवश्यक है। मटर,गाजर, चिकोरी, ककडी, और पालक में  पर्याप्त आयरन होता है।  अपने भोजन में इन्हें शामिल करना उचित है।

   सिलिका तत्व चावल और आम में मौजूद रहता है।

   गंजापन में उपयोगी अन्य उपचार-






     - उड़द की दाल    को उबाल कर पीस लें। रात को सोते समय इस पिट्ठी का लेप सिर पर  कुछ दिनों तक करते रहने से गंजापन समाप्त हो जाता है।









मैथी का प्रयोग--  


 मेथी को पूरी रात भिगो दें और सुबह उसे गाढ़ी दही में मिला कर अपने बालों और जड़ो में लगाएं। उसके बाद बालों को धो लें इससे रुसी और सिर की त्‍वचा में जो भी समस्‍या होगी वह दूर हो जाएगी।मेथी में निकोटिनिक एसिड और प्रोटीन पाया जाता है जो बालों की जड़ो को प्रोषण पहुंचाता है और बालों की ग्रोथ को भी बढ़ाता है। इसके प्रयोग से सूखे और डैमेज बाल भी ठीक हो जाते हैं।

हरा धनिया

हरे धनिए का लेप जिस स्थान पर बाल उड़ गए हैं, वहां करने से  बाल उगने  लगते हैं.।

    अन्य  उपयोगी उपचार-

थोड़ी सी मुलहठी को दूध में पीसकर, फिर उसमें चुटकी भर केसर डाल कर उसका पेस्ट बनाकर सोते समय सिर में लगाने से गंजेपन की समस्या दूर होती है.

केले का गूदा निकालकर उसे निंबू के रस में मिलाकर गंजवाले स्थान पर लगाने से बालों के उडने की समस्या में लाभ होता है।

अनार के पती पीसकर गंज-स्थल पर लगाने से गंज का निवारण होता है।

प्याज काटकर दो भाग करें। आधे प्याज को गंज वाले भाग पर ५ मिनिट रोज रगडें। फिर शहद  लगाएं|  बाल आने लगेंगे।

गाजर भी बालों की समस्या में बहुत हितकारी है|  गाजर  को  उबालें  फिर  पीसकर पेस्ट बनालें|  यह पेस्ट बालों और गंज  की जगह ३० मिनिट तक लगी रहने दें और फिर धो लें|  इससे बालों के झड़ने पर रोक लगती है और नए बाल उगने लगते हैं|

     
 २-३ आलू का रस निकालें|  इस रस को सेव के रस के साथ मिलाएं| अब इस घोल में अंडे की जर्दी  और थोड़ा सा शहद  मिलाएं| | इस घोल को नहाने के ३० मिनिट पाहिले   सर  पर लगाएं|  इस प्रयोग से बालों की चमक  और लम्बाई  बढ़ती है| नए बाल को उगने का प्रोत्साहन मिलता है|











नीम के पत्तों  को पीसकर  पेस्ट  बनालें ,इसे भली प्रकार बालों में लगाएं ,सूखने पर बाल धोलें| इस उपचार से बाल झडना बंद हो जाते हैं |









बेसन मिला दूध या दही से  बाल धोएँ|  उपकारी उपाय है|




कच्चे पपीते का पेस्ट  सर  में  १० मिनिट लगाएं फिर धोलें| बाल नहीं  झड़ेंगे और  डेंड्रफ (रूसी) का ईलाज भी हो जाएगा |












बालो के रोग -


पुरुषों में बालों के झड़ने की समस्या को एण्ड्रोजन एलोपेशिया कहते है।

यह अनुवांशिक कारणों से होता है और कई पुश्तें इसकी चपेट में आती हैं।

बाल झड़ने के पीछे हो सकते हैं कई अन्य कारण।

  पुरुषों में बालों का झडना सामान्य समस्या है


इसे एण्ड्रोजन एलोपेशिया कहते है। यह ज्यादातर आनुवांशिक कारणों से होता है और यह पीढ़ी दर पीढ़ी परिवारों में चलता है। पुरुषों के चालीस वर्ष की आयु के आसपास बाल झड़ना शुरू हो जाता है। लेकिन, कई लोगों में यह समस्या इससे पहले भी शुरू हो जाती है।

बालों का पतला होना और बाल गिरना आम समस्या है। पुरुषों में बाल झड़ने का कारण है आहार में विटामिन 'बी' और फोलिक एसिड की कमी, अपर्याप्त पोषण जो की तनाव, उत्तेजना और अचानक किसी सदमे से बढ़ जाता है। बाल झड़ना भी लंबी बीमारी की वजह से हो सकता है। टायफाइड, सिफलिस, लंबे समय से हुई सर्दी, इन्फ्लुएंजा और अनीमिया जैसे रोग बाल झड़ने के कारण हो सकते हैं| 


बालों के झड़ने लिए घरेलू उपचार-


   एक कप सरसों के तेल को गर्म करे और इसमें चार टेबल स्पून हिना ( मेहंदी ) की पत्तियां मिलाएं। इस मिश्रण को छानकर बोतल में रख दें। अपने गंजे धब्बों को इस घरेलू उपचार के साथ रोजाना मालिश करें।



.सिर के जिस हिस्से में बाल उड़ गए हों वहां प्याज की लेई से घिसे जब तक की यह लाल न हो जाए और इसके 
बाद शहद लगाएं।

   अपने सिर पर शहद और अंडे के योक के मिश्रण से मालिश करे। और फिर इसको आधे घंटे के लिए छोड़ दे 


इसके बाद इसे धो लें।

    5 टेबल स्पून दही में एक चम्मच नींबू का रस और 2 टेबल स्पून काले चने का पाउडर मिलायें। इस मिश्रण 


को एक घंटे तक सिर पर लगाकर रखें। इससे आपको काफी लाभ होगा।

   पुरुषों में बाल झडना रोकने के लिए अपने आहार में अतिरिक्त खनिज पदार्थ शामिल कीजिए। जैसे 


कैल्शियम, मैग्नीशियम, और जिंक साथ ही हरी पत्तेदार सब्जियां जरूर खायें। <!-- तनाव और उत्तेजना कम करने के लिए ध्यान और योग करें और गीले बालों पर कंघी करने से बचें।

विनम्र सूचना--

http://downloadamit.blogspot.in यह ब्लागर  मेरे लेखों की चोरी करने का अपराधी है।

-----------------------------------------------------------------