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Tuesday, February 9, 2016

चौलाई सब्जी के लाभ Benefits of Amaranth



हरे पत्ते की सब्जी स्वास्थ्य के लिये बहुत ही लाभ कारी होती हैं। चौलाई को मालवा मे खाटी  भाजी  के नाम से जानते हैं| इन हरे पत्ते की सब्जियों को यदि रोजाना के खाने के साथ प्रयोग किया जाय तो शरीर में होने वाले विटामिन्स की कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है।
चौलाई दो तरह की होती है- एक सामान्य पत्तों वाली तथा दूसरी लाल पत्तों वाली। कटेली चौलाई तिनछठ के व्रत में खोजी जाती है। भादौ की कृष्ण पक्ष की षष्ठी को यह व्रत होता है। चौलाई को खाने से आंतरिक रक्तस्राव बंद हो जाता है। यह सब्जी खूनी बवासीर, चर्मरोग, गर्भ गिरना, पथरी रोग और पेशाब में जलन जैसे रोग में बहुत ही लाभदायक सि‍द्ध हुई है।
यह कफ और पित्त का नाश करती है जिससे रक्त विकार दूर होते हैं। पेट और कब्ज के लिए चौलाई का साग बहुत उत्तम माना जाता है। चौलाई की सब्जी का नियमित सेवन करने से वात, रक्त व त्वचा विकार दूर होते हैं। सबसे बडा गुण सभी प्रकार के विषों का निवारण करना है, इसलिए इसे  विषघ्न भी कहा गया है|  इसके डंठल और पत्तों में पौष्टिक तत्वों की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। पेट और कब्ज के लिए चौलाई बहुत उत्तम मानी जाती है 
इसे  हम अनेकों प्रकार से बनाते हैं जैसे चौलाई के पत्तों में दाल मिला कर साग बनाते हैं, चौलाई को आलू के साथ मिला कर चौलाई आलू भुजिया बनाते हैं, चौलाई को बैंगन में मिला कर चौलाई बैंगन भाजी बनाते हैं ।
आप अपने स्वाद के हिसाब से इसे अन्य मनचाही सब्जियों में मिलाकर बना सकते हैं.  चौलाई के पत्ते को मूंग के दाल के साथ मिला कर बहुत ही स्वादिष्ट सब्जी बनायी जाती है।  कुछ घरों में मूंग दाल की जगह तुअर अथवा  उड़द दाल को मिलाकर भी बनाते हैं।
कुल मिलाकर चौलाई एक स्वादिष्ट सब्जी भी है और महत्वपूर्ण दवा भी।

चौलाई की औषधीय उपयोगिता-
1) औषधि के रूप में चौलाई के पंचाग यानि पांचों अंग जड़, डंठल, पत्ते, फल और फूल काम में लाये जाते हैं। इसकी डंडियों और पत्तियों में प्रोटीन, खनिज, विटामिन ए, सी प्रचुर मात्रा में है। इसका सेवन सब्जी या सूप के रूप में होता है। चौलाई पेट के रोगों के लिए गुणकारी है। इसमें रेशे, क्षार द्रव्य होते हैं, जो आंतों में चिपके हुए मल को निकालकर उसे बाहर धकेलने  में मदद करते हैं। इससे पेट साफ होता है और कब्ज दूर होता है। पाचन संस्थान को ताकत  मिलती  है। छोटे बच्चों को यदि इसका दो-तीन चम्मच रस दिया जाय, तो कब्ज दूर करता है।
2) दूध पिलाने वाली माताओं के लिए यह उपयोगी है अगर उन्हें दूध कम उतरता है, तो चौलाई के साग का सेवन करें।
3) चौलाई की जड़ को पीसकर चावल के माड (पसावन) में डालकर, शहद मिलाकर पीने से प्रदर रोग ठीक होता है। जिन स्त्रियों को बार-बार गर्भपात होता है। उनके लिए चौलाई साग का सेवन लाभकारी है।
4) चूहे, बिच्छू, संखिया किसी का भी विष चढ़ गया हो, तो चौलाई का रस या जड़ का क्वाथ में काली मिर्च डालकर पीने से विष दूर हो जाता है।

5) ये सिद्ध हो चुका है कि धूम्रपान, शराब सेवन  करने वाली महिलाएं मंदबुद्धि तथा कम वजन वाले बच्चे को जन्म देती हैं। ऐसी महिलाओं को चौलाई साग का लगातार सेवन करना चाहिये। शराब सेवन  व धूम्रपान छूट जायेगा।

     6) चौलाई का साग भूख बढ़ाता है। इस साग में लोह तत्व पाया जाता है, जो हमारे शरीर को भरपूर आयरन देता है।
7)  अगर कोई एनीमिक होताहै तो इसकी सब्जी व पत्तों एवं डंठल छीलकर उसका सूप कुछ दिनों तक पियें जल्द फायदा करेगा।

Sunday, February 7, 2016

किशमिश खाने के फायदे Benefits of raisins

अंगूर को एक विशेष प्रक्रिया के तहत सुखाकर किशमिश बनाया जाता है इसलिए इसमें वो सभी गुण पाए जाते हैं जो अंगूर में होते हैं. किशमिश का इस्तेमाल मुख्य रूप से मीठाई, खीर और दूसरी मीठी चीजों को सजाने या स्वाद के लिए किया जाता है. पर एक बेहतरीन स्वाद के अलावा ये सेहत का भी खजाना है.
किशमिश खाना स्वास्थ्य के लिए वरदान है. खासतौर पर सर्दियों में इसके सेवन से कई तरह की बीमारियों से बचाव होता है:




1. किशमिश के सेवन से कब्ज में फायदा होता है. अगर आपको कब्ज की समस्या है तो इसके सेवन से फायदा होगा.
2. अगर आपका वजन बहुत कम है और आप वजन बढ़ाने को लेकर फिक्रमंद हैं तो किशमिश का सेवन आपके लिए फायदेमंद होगा. इसमें पर्याप्त मात्रा में ग्लूकोज और फ्रक्टोज पाया जाता है जिससे ताकत तो मिलती है ही साथ ही इसमें मौजूद तत्व वजन बढ़ाने में सहायक होते हैं.
3. किशमिश में पर्याप्त मात्रा में आयरन पाया जाता है. खून के निर्माण के लिए आवश्यक विटामिन बी कॉम्प्लेक्स की आवश्यकता होती है. किशमिश में पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स पाया जाता है. ऐसे में खून की कमी होने पर किशमिश का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है.

4. किशमिश कामेच्छा को प्रोत्साहित करने में भी कारगर है. यौन दुर्बलता को दूर करने के लिए भी किशमिश का सेवन किया जाता है.
5. किशमिश में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो हड्डियों को मजबूती देने का काम करते हैं. अगर आपको घुटने में दर्द की शिकायत है तो भी किशमिश का सेवन फायदेमंद होगा.
6. किशमिश में एंटी-ऑक्सीडेंट गुण पाया जाता है जो आंखों की रोशनी के बहुत फायदेमंद होता है.

वजन बढ़ाने में उपयोगी

जो लोग अपना वजन बढ़ाने के बारे में सोच रहे है| उन्हें बतादे की किशमिश उनके लिए बेहद फायदेमंद है|  किशमिश में भरपूर मात्रा में फ्रुक्टोज और ग्लूकोज पाया जाता हैं। जो एनर्जी देने के साथ साथ वजन बढ़ाने में भी मदद करता है। अगर आप सही प्रकार से वजन बढ़ाना चाहते हैं, तो बिना इन्तेजार किये आज से ही किशमिश खाना शुरु कर दें।




एनीमिया-

किशमिश में काफी मात्रा में आयरन होता है जो कि एनीमिया से लड़ने की शक्‍ति रखता है। दरहसल खून को बनाने के लिये विटामिन बी कॉमप्‍लेक्‍स की जरुरत पढ़ती है और किशमिश इस कमी को पूरी करती है। इसके अलावा इसमें मौजूद कॉपर भी खून में लाल रक्‍त कोशिका को बनाने में मदद करता है|

बुखार ठीक करे-

आपने अक्सर देखा होगा की जब किसी को बुखार होता है तो उसे किशमिश खाने की सलाह दी जाती है| दरहसल किशमिश में मौजूद फिनॉलिक पायथोन्‍यूट्रियंट जो कि जर्मीसाइडल, एंटी बॉयटिक और एंटी ऑक्‍सीडेंट तत्‍वों की वजह से जाने जाते हैं, वो वाइरल तथा बैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन से लड़ कर बुखार को जल्‍द ठीक कर देते हैं।

पाचन तंत्र सुचारू करे-

रोजाना किशमिश का सेवन करने से आपका हाजमा ठीक रहता है और पाचन तंत्र भी सुचारू रूप से कार्य करता है| किशमिश लैक्सटिव के रूप में कार्य करती है। यह पेट में जाकर पानी को अवशोषित करती है, जिसके फलस्वरूप कब्‍ज से राहत मिलती है| किशमिश में पाये जाने वाले फाइबर गैस्ट्रोइंटेस्टिनल मार्ग से विषाक्त और अपशिष्‍ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं।

आँखों के लिए फायदेमंद-

किशमिश में विटामिन ए, ए-कैरोटीनॉइड और ए-बीटा कैरोटीन मौजूद होता है, जो कि आँखों को फ्री रैडिकल्‍स से लड़ने में मदद करता है। इसमें एंटी ऑक्‍सीडेंट गुण भी पाये जाते है| किशमिश खाने से मोतियाबिंद, उम्र बढने की वजह से आँखों में आने वाली कमजोरी,मसल्स  डैमेज आदि नहीं होता।
  

शराब से छुटकारा

किशमिश की मदद से आप शराब के नशे से छुटकारा पा सकते है| जब भी आपकी शराब पीने की इच्छा हो तब शराब की जगह 10 से 12 ग्राम किशमिश को चबा-चबाकर खाए या किशमिश का शरबत पियें। जहा एक तरफ शराब पीने से ज्ञानतंतु सुस्त हो जाते हैं वही किशमिश के सेवन से शीघ्र ही पोषण मिलता है जिसके चलते मनुष्य उत्साह, शक्ति और प्रसन्नता का अनुभव करने लगता है। यह प्रयोग लगातार करते रहने से कुछ ही दिनों में शराब छूट जायेगी।

कोलेस्ट्रोल घटाए

बहुत कम लोग यह बात जानते है कि किशमिश पूरी तरह से कोलेस्‍ट्रॉल मुक्त होता है। किशमिश में घुलनशील फाइबर बहुत अधिक मात्रा में होता है। यह घुलनशील फाइबर बुरे कोलेस्‍ट्रॉल का विरोध करता है| इसके अलावा किशमिश पोलीफेनोल्स एंजाइम को भी दबाता है जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल को अवशोषित के लिए जिम्मेदार होता है।


कैंसररोधी

कैंसर कोशिकाओं के विकास के लिए फ्री रेडिकल्‍स सबसे प्रमुख कारणों में से एक है| इसके अलावा यह मेटास्टेसिस को भी प्रोत्साहित करते हैं। किशमिश में उच्‍च स्‍तर में काट्चिंस तत्‍व होता है यह तत्‍व रक्त में पॉलीफेनोलिक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। एंटीऑक्‍सीडेंट शरीर के आस-पास रहने वाले फ्री रेडिकल्‍स को शरीर से बाहर निकालता है।

किशमिश के अन्य फायदे -

  1. किशमिश में प्रचुर मात्रा में फाइबर होता हैं जो कब्ज दूर करता हैं।
  2. किशमिश आँखों के लिए भी बेहद फायदेमंद होता हैं।
  3. किशमिश में आयरन पाया जाता हैं जो एनीमिया के उपचार में मदद करता है।
  4. किशमिश कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है|
  5. गठिया और गुर्दे की पथरी की समस्या से निजात दिलाने में भी किशमिश मदद करता है।
  6. किशमिश मुंह में हानिकारक बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकता हैं। इससे कैविटी और दाँत क्षय को रोकने में मदद मिलती है|
  7. किशमिश पोटेशियम और मैग्नीशियम का अच्छा स्त्रोत हैं हैं जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और रक्तचाप कम करने में मदद करता हैं।
  8. इसमें भरपूर मात्रा में फ्रुक्टोज़ और ग्लूकोज पाया जाता हैं जो शरीर में ऊर्जा प्रदान करता हैं और वजन बढ़ाने में भी मदद करता हैं।
  9. किशमिश संक्रमण के खिलाफ शरीर की रक्षा करता है। इसमें मौजूद पॉलीफेनोलिक एंटीऑक्सीडेंट पेट के कैंसर के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।
  10. किशमिश में औषधीय गुण.
  11. कब्ज- – जब इस को खाया जाता है तो यह पेट में जा कर पानी को सोख लेती हैं। जिस वजह से यह फूल जाती है और कब्‍ज में राहत दिलाती है
  12.  वजन बढाए :- हर मेवे की तरह यह भी वजन बढाने में मददगार साबित होती है क्‍योंकि इसमें फ्रकटोज़ और ग्‍लूकोज़ पाया जाता है जिससे एनर्जी मिलती है। अगर आपको भी अपना वजन बढाना है और वो भी कोलेस्‍ट्रॉल बढाए बिना तो आज से ही इस को खाना शुरु कर दें।
  13. . अम्लरक्तता- जब खून में एसिड बढ जाता है तो यह परेशानी पैदा हो जाती है। इसकी वजह से स्‍किन डिज़ीज, फोडे़, गठिया, गाउट, गुर्दे की पथरी, बाल झड़ने, हृदय रोग, ट्यूमर और यहां तक ​​कि कैंसर होने की संभावना पैदा हो जाती है। किशमिश में अच्‍छी मात्रा में पोटैशियम और मैगनीशियम पाया जाता है
  14.  एनीमिया - इस में भारी मात्रा में आयरन होता है जो कि सीधे एनीमिया से लड़ने की शक्‍ति रखता है। खून को बनाने के लिये विटामिन बी कॉमप्‍लेक्‍स की जरुरत को भी यही किशमिश पूरी करती है। कॉपर भी खून में लाल रक्‍त कोशिका को बनाने का काम करता है।
  15.  बुखार - इस में मौजूद फिनॉलिक पायथोन्‍यूट्रियंट जो कि जर्मीसाइडल, एंटी बॉयटिक और एंटी ऑक्‍सीडेंट तत्‍वों की वजह से जाने जाते हैं, बैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन तथा वाइरल से लड़ कर बुखार को जल्‍द ठीक कर देते हैं।
  16.  शराब के नशे से छुटकारा- शराब पीने की इच्छा हो तब शराब की जगह 10 से 12 ग्राम किशमिश चबा-चबाकर खाते रहें या किशमिश का शरबत पियें। शराब पीने से ज्ञानतंतु सुस्त हो जाते हैं परंतु किशमिश के सेवन से शीघ्र ही पोषण मिलने से मनुष्य उत्साह, शक्ति और प्रसन्नता का अनुभव करने लगता है। यह प्रयोग प्रयत्नपूर्वक करते रहने से कुछ ही दिनों में शराब छूट जायेगी।
  17.  यौन दुर्बलता- इस समस्‍या के लिये रोजाना किशमिश खाएं क्‍योंकि यह कामेच्छा को प्रोत्साहित करती है। इसमें मौजूद अमीनो एसिड, यौन दुर्बलता को दूर करता है। इसीलिये तो शादी-शुदा जोडों को पहली रात दूध का गिलास दिया जाता है जिसमें किशमिश और केसर होता है।
  18.  हड्डी की मजबूती- इस में बोरोन नामक माइक्रो न्‍यूट्रियंट पाया जाता है जो कि हड्डी को कैल्‍शियम सोखने में मदद करता है। बोरोन की वजह से ऑस्‍टियोप्रोसिस से बडी़ राहत मिलती है साथ ही किशमिश खाने से घुटनों की भी समस्या  नहीं पैदा होती |
  19. आंखों के लिये -इसमें एंटी ऑक्‍सीडेंट प्रोपर्टी पाई जाती है, जो कि आंखों की फ्री रैडिकल्‍स से लड़ने में मदद करता है। किशमिश खाने से कैटरैक, उम्र बढने की वजह से आंखों की कमजोरी, मसल्‍स डैमेज आदि नहीं होता। इसमें विटामिन ए, ए-बीटा कैरोटीन और ए-कैरोटीनॉइड आदि होता है, जो कि आंखों के लिये अच्‍छा होता है।




  20. किशमिश खाने से छू मंतर हो जाएगा लो ब्लड प्रेशर-आपको अक्सर चक्कर आते हैं, कमजोरी महसूस होती है तो हो सकता है कि आप लो ब्लड प्रेशर के शिकार हों। ज्यादा मानसिक तनाव, कभी क्षमता से ज्यादा शारीरिक काम करने से अक्सर लोगों में लो ब्लडप्रेशर की शिकायत होने लगती है।कुछ लोग इसे नजर अन्दाज कर देते हैं तो कुछ लोग डॉक्टर के यहां चक्कर लगाकर परेशान हो जातें हैं। लेकिन आयुर्वेद में लो ब्ल्डप्रेशर को कन्ट्रोल करने के लिए कारगर इलाज है वो है किशमिश। 

    स्मरण शक्ति और दिमाग को तेज करने वाले योगासन yoga to get sharp mind



    1. दिनभर की थकान और तनाव के बाद कई बार हम छोटी छोटी चीजें भूल जाते हैं। लेकिन दिन में सिर्फ 10 मिनट योगा करने से इस परेशानी को भी दूर कर सकते हैं और अपनी याद्दाश्त मजबूत कर सकते हैं।
    2. भूजंगासन यानि पेट के बल सिधाई में लेट कर धीरे धीरे अपने हाथों के बल ऊपर को उठाना और सिर को उठाना जैसे कोबरा बैठा हो। यह मुद्रा न सिर्फ आपको आराम दिलाती है बल्कि दिमाग से जुड़ी नसों को भी संतुलित और प्रेरित करती है।
    3. हस्तपदोतासन। सीधे खड़े हो कर अपने शरीर को पैरों की तरफ झुकाने और हाथों से जमीन छूनें की यह मुद्रा स्मरण शक्ति  और दिमाग की शक्ति बढ़ाती है। साथ ही ऐसा करने से चेहरे में खून का बहाव बढ़ता और आप जवां दिखते हैं।
    4. हलासन। जैसा कि इस तस्वीर में दिखाया है, उसी तरह यह योग करने से दिमाग तेज चलता है क्योंकि खून का बहाव बढ़ जाता है। इससे थायरॉएड और पैराथायरॉएड ग्लांड की मालिश भी हो जाती है और पूरा शरीर कसा और मजबूत बनता है। 
    5. सुखासन - रीढ़ की हड्डी सीधी कर के पालथी मार के बैठना और ध्यान करना। यह योग सबसे आसान है लेकिन आपके शरीर और दिमाग में उर्जा भरने के लिए काफी है। यह आपकी एकाग्रशक्तिसु बढ़ाता है।
    6. पश्चिमोत्तासन। पैर और हाथ सीधे आगे की तरफ फैला कर खुद को सामने की ओर ऐसे झुकाएं कि माथा पैरों को छुए, जैसे कि तस्वीर में दिख रहा है। यह मुद्रा तनाव दूर करती है।
    7. सर्वांगसन। कंधों के बल अपने शरीर को ऊपर की तरफ उठाने की यह मुद्रा दिमाग तक खून के बहाव को बढ़ाती है। यह योग आपको भावात्मक रूप से भी मजबूत बनाता है।





    Saturday, February 6, 2016

    जामुन के फायदे

    जामुन  बेहद लाभदायक फल है। यह स्वाद और सेहत से भी भरपूर होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। जामुन के सेवन से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता  मजबूत होती है।
    1. 1.यह पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी है। विशेषकर  डायबिटीज वाले लोग भी इसका सेवन कर सकते हैं। बस एक बात का ध्यान रखें कि कभी भी खाली पेट जामुन का सेवन न करें।


       
    2. कभी भी जामुन खाने के बाद दूध का सेवन करें। हाँ अधिक मात्रा में भी जामुन खाने से बचें। 
    3. यदि आपको एसिडिटी की समस्या रहती है तो काले नमक में भुना जीरा मिलाकर पीस लें। फिर इसके साथ जामुन का सेवन करें। एसिडिटी की समस्या दूर हो जाएगी।
    4. जामुन का सिरका बनाकर बराबर मात्रा में पानी मिलाकर सेवन करने से यह न केवल भूख बढ़ाता है, बल्कि कब्ज की शिकायत को भी दूर करता है।
    5. अगर आपको कमजोरी महसूस होती है या आप एनीमिया से पीडित हैं तो जामुन का सेवन आपके लिए फायदेमंद रहेगा। 
    6. जामुन में फाइटोकेमिकल्स भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
    7. यदि आपका बच्चा बिस्तर गीला करता है तो जामुन के बीजों को पीसकर आधा-आधा चम्मच दिन में दो बार पानी के साथ पिलाएं।
    8. यदि आप अपने चेहरे पर रौनक लाना चाहती हैं तो जामुन के गूदे का पेस्ट बनाकर इसे गाय के दूध में मिलाकर लगाने से निखार आता है।


    9. जामुन शुगर पेशेंट के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसमे कैरोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और सोडियम भी पाया जाता है। इस वजह से यह शुगर का लेवल मेंटेन रखता है।साथ ही, डायबिटीज के मरीजों को बार-बार प्यास लगने वा अधिक बार पेशाब  होने की समस्या में भी मददगार है।
    10. जामुन में फ्लेवोनॉइड्स, फेनॉल्स, प्रोटीन और कैल्शियम भी पाया जाता है, जो सेहत के लिए लाभकारी होता है।
    11. इस फल में विभिन्न प्रकार के मिनिरल जैसे कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और विटामिन सी अच्छी मात्रा में है। इसकी वजह से यह हड्डियों के लिए फायदेमंद तो है ही, साथ ही शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है।
    12. एन‌िमिक लोगों के लिए जामुन का सेवन संजीवनी बूटी की तरह ही है। अन्नामलाई विश्वविद्यालय के शोध की मानें तो इसके नियमित सेवन से रक्त में हिमोग्लोबिन का स्तर बढ़ जाता है।


    13. जामुन में पोटैशियम की मात्रा अधिक है। 100 ग्राम जामुन के सेवन से शरीर को 55 मिलीग्राम पोटैशियम मिलता है। इससे दिल का दौरा, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक आदि का रिस्क कम होता है।
    14. जामुन का फल ही नहीं बल्कि इसकी पत्तियों के भी काफी फायदे हैं। आयुर्वेद में इसकी पत्तियों का पाचन ठीक रखने और मुंह से जुड़ी समस्याओं में काफी इस्तेमाल किया जाता है।

    Tuesday, February 2, 2016

    सफ़ेद बाल काले करेंगे ये घरेलू उपाय how to make white hairs black

    यदि आप समय से पहले बालों के सफेद होने की समस्या से परेशान हैं तो कुछ घरेलू उपाय भी आजमा कर देख लीजिए।  आपको जरूर  फायदा होगा।
    प्याज का रस  समय से पहले बालों के सफेद होने, बालों के झड़ने और गंजापन रोकने में मदद करता है। एक कांच के कटोरा में प्याज और नींबू का रस मिलाएं। अपने बालों और सिर पर मालिश करें। 30 मिनट के लिए छोड़ दें और एक हल्के हर्बल शैम्पू से धो लें। हालांकि प्याज का रस ठंडा होता है इसलिए इसका इस्तेमाल गर्मियों करना ठीक रहेगा।



    समय से पहले सफेद बालों के इलाज के लिए आंवला एक अच्छा उपाय है। नारियल के तेल में सूखे आंवले के कुछ टुकड़े डालकर उबाल लें। फिर तेल ठंडा हो जाने पर उसे अपने बालों और सिर पर तेल से मालिश करें। बालों को धोने से पहले कम से कम एक घंटे के लिए या रात भर छोड़ दें। यह प्रक्रिया सप्ताह में कम से कम एक या दो बार  करे|
    नारियल के तेल का  प्रयोग नींबू के रस के साथ किया जाता है। नींबू का रस मिला नारियल तेल अपने बालों और सिर पर मालिश करें। सिर में तेल लगाने के करीब एक घटे बाद ही अपने बालों को धो लें। नारियल तेल सफेद बालों के विकास को रोकने में मददगार है।
    बाल काले करने में मेंहदी पत्तों का प्रयोग भी कारगर है। एक मुट्ठी मेंहदी के पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट में तीन चम्मच आंवला पाउडर, एक चम्मच कॉफी पाउडर और एक चम्मच सादे दही को मिलाकर अपने बालों पर समान रूप से लगाएं, फिर सूख जाने के बाद धो लें।
    बादाम का तेल, नींबू का रस, और आंवला के रस को बराबर मात्रा में मिलाएं। सफेद बालों की समस्या का इलाज करने के लिए इस मिश्रण से अपने बालों की मालिश करें इससे आपके बाल धीरे-धीरे काले होने लगेंगे|
    लौकी के रस में जैतून का तेल या तिल का तेल मिलाकर अपने सिर और बालों की मालिश करें। चौलाई का ताजा रस बालों की प्राकृतिक रंग बनाए रखने, बालों के झड़ने और समय से पहले बालों को सफेद होने से रोकने में मदद करता है।




    नारियल के तेल में कुछ करी पत्ते को पत्तियों के काले होने तक उबालें। फिर इसके ठंडा हो जाने पर अपने सिर और बालों की तेल से मालिश करें। बालों को धोने से पहले 30 से 45 मिनट के लिए छोड़ दें।
    काले तिल या तिल का तेल समय से पहले बालों के सफेद होने की समस्या से छुटकारा पाने में अत्यधिक प्रभावी है। प्रतिदिन एक चम्मच काले तिल का बीज कम से कम तीन महीने तक सेवन करें। अपने बालों पर तिल के तेल से मालिश करें, फायदा मिलेगा।
    काली चाय बालों को काला करने के साथ-साथ नरम और चमकदार बनाता है। एक कप पानी में दो चम्मच चाय की पत्तियों को डालकर उबाल लें। उसमें एक चम्मच नमक मिला लें। फिर ठंडा होने पर छानकर इस पानी से अपने बालों और सिर की मालिश करें और एक घंटे के बाद ठंडे पानी से धो लें।


    Sunday, January 24, 2016

    मटर खाने के फायदे : Health Benefits of eating peas

    ठंड के मौसम में विभिन्न प्रकार की   हरी सब्जियों की बहार होती है। हरी सब्जियों में बहुत से पौष्टिक तत्व होते  है जो हमें बीमारियों से बचाते है। इन दिनों हरी मटर बाजार में खूब आ रही है। मटर का इस्तेमाल हम सब खाने में करते है। मटर में मौजूद गुण आपके शरीर और सेहत के लिए फायदेमंद होता है। मटर से होने वाले लाभ के बारे मे लिखते हैं- 



    1. शरीर के वजन को नियंत्रित रखने में मटर हमारी मदद करता है क्योकि मटर में कैलोरीज,भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और सूक्ष्म पोषक तत्व ज्यादा मात्रा में होती है।  
    2. हरी मटर में मौजूद कोमेस्ट्रॉल पेट के कैंसर से बचाते हैं। रोजाना इसके सेवन करने से इनकी महज 2 ग्राम मात्रा आपको इस घातक बीमारी से दूर रखती है। 
    3. मटर आपकी ढलती उम्र से भी आपको जवां रखते हैं। इसमें भारी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जिनके फ्लेवनॉइड, कैरोटेनॉइड, फेनॉलिक एसिड्स और पॉलीफेनॉल तत्व पाए जाते है जिनसे आपको ऊर्जा मिलती है। 
    4. मटर से दिल के रोग और कैंसर, अल्जाइमर, गठिया, ब्रोंकाइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस और कैंडिडा जैसे रोगों की रोकथाम होती है। 
     

    5.अगर आपके चेहरे पर झुर्रियां पड़ी हो तो रोजाना एक कप हरी मटर खाएं।
     6. रोजाना हरी मटर के सेवन से ब्लड शुगर और टाइप टू डायबिटीज से बचाव होता है।
     7. मटर के सेवन से शरीर में रक्त का संचार सही से होता है और दिल के रोग दूर रहते हैं। इसीलिए यह रक्त धमनियां को स्व्स्थ्य रखने में मदद करता है।
     8. अगर आपको पेट की समस्या जैसे कब्ज आदि हो तो अप मटर ख सकते है। इसे पेट एकदम दुरुस्त रहता है।
     9. मटर हड्डियों को ताकतवर बनाता है। इसमें विटामिन ्य, क्च होता है जो आपको  ऑस्टियोपोरोसिस से बचाते हैं। 
     10. महिलाओं को अनियमित माहवारी को मटर में मौजूद पोषक तत्व दूर रखते हैं।


     
    11. मटर का प्रयोग चेहरे को सुंदर बनाने के लिए भी किया जा सकता है। यह प्राकृतिक स्क्रब है। पानी में मटरो को उबाल कर इसका पेस्ट बना कर चेहरे पर रगडें और 15 से 20 मिनट के बाद साफ पानी से चेहरा धो लें। 
    12. मटर के सेवन से याददाश्त तेज होती हैं।

    Monday, January 4, 2016

    पौष्टिक तत्वों से भरपुर बेंगन : benefits of brinjal

    बैंगन की लोकप्रियता स्वाद और गुण के नज़र से ठंड तक ही रहती है। इसलिए पूरे सर्दी के मौसम की सब्जी-भाजियों में बैंगन को राजा के रूप में माना जाता है। गर्मी के महीनों में इसका स्वाद भी बदल जाता है।ज्यादा बीज वाले बैंगन  जहर का रूप हैं। बैंगन जितने ज्यादा कोमल और मुलायम होते हैं। उतने ही ज्यादा गुण वाले और बलवर्धक माने जाते हैं। गर्मी के महीनों मे पैदा होने वाले ज्यादा बीज वाले बैगन का उपयोग नहीं करना चाहिए।  शरद के महीने में पित्त का प्रकोप होता है। इसलिए इस ऋतु में पित्तकर बैंगन खाने से अनेकों रोग उत्त्पन्न होते है। बसंत के महीनों में बैंगन को खाने से लाभ होता है।तेल और हींग में बनायी हुआ बैंगन की सब्जी वायु प्रकृति वालों के लिए बहुत ही फायदेमंद है। कफ (बलगम) प्रकृतिवालों और समप्रकृति वालों के लिए भी सर्दी के मौसम में बैंगन का सेवन गुणकारी है।
    स्वभाव : बैंगन की प्रकृति गर्म और खुश्क होती है।
    हानिकारक : यह पेट में बादी पैदा करता है और बवासीर को बढ़ाता है।
    दोषों को दूर करने के लिए : बैंगन को गोश्त, घी और सिरका में मिलाकर खाने से इसके दोष दूर हो जाते हैं।
    गुण : बैंगन आमाशय को बलवान बनाता है, गांठों को तोड़कर सिख्तयों को नर्म करता है, पेशाब जारी करता है, गर्मी के दर्दों को शांत करता है,  हल्दी के साथ इसकी सेंक चोट को लाभ करती है। बैंगन कड़वा है, रुचि को बढ़ाता है, मधुर है, पित्त को पैदा करता है, बल को बढ़ाता है और धातु (वीर्य) को बढ़ाता है। यह दिल के लिए फायदेमंद, भारी और वात रोगों में लाभदायक है। बैंगन नींद लाता है, खांसी पैदा करता है, कफ बलगम और सांस को बढ़ाता है। लंबा बैंगन श्रेष्ठ होता है, यह पाचनशक्ति और खून को बढ़ाता है। कच्चा बैंगन कफ बलगम, पित्त को खत्म करता है। पका बैंगन क्षारयुक्त, पित्तकारक तथा मध्यम बैंगन त्रिदोषनाशक, रक्त-पित्त को निर्मल करने वाला है। आग पर भुने हुए बैंगन का भर्ता पित्त को शांत करता है, वात और पित्त रोग को खत्म करता है।
    विभिन्न रोंगों का बैंगन से उपचार :
    1 गैस : - 
    *पेट में गैस बनती हो, पानी पीने के बाद पेट इस तरह फूलता हो जैसे फुटबाल में हवा भर जाती है तो
    लंबे बैंगन की सब्जी-जब तक मौसम में बैंगन हो खाते रहें। इससे गैस की बीमारी दूर हो जायेगी। इस प्रयोग से लीवर और तिल्ली बढ़ी हुई हो तो उसमें भी लाभ मिलता है।
    *बैंगन की सब्जी, भर्ता या सूप बनाकर हींग और लहसुन के साथ खाने से पेट के अन्दर की गैस कम हो जाती है और गुल्म रोग दूर हो जाता है।
    2 पसीना अधिक आना : -
    हाथ की हथेलियों व पैरों के तलवों में पसीना आने पर बैंगन का रस निकाल कर हथेलियों व तलुवों पर लगाने से पसीना आना कम हो जायेगा।
    3 बाला नारू रोग : -
    *बैंगन को सेंककर दही में पीसकर 10 दिनों तक जहां बाला निकल रहा हो वहां पर लगाने से लाभ होता है।
    *एक गोल आकार के मोटे बैंगन को भूनकर पीस लें और दही में मिला लें फिर जहां पर बाला निकल रहा हो वहां पर लगातार 10 दिन तक लगाने से बाला रोग में लाभ होता है।"




    4 बवासीर : 
    *बैंगन का वह हिस्सा जिससें बैंगन जुड़ा रहता है। उसे पीसकर बवासीर पर लेप करने से दर्द और जलन में आराम मिलता है। बैंगन को जला लें। इनकी राख शहद में मिलाकर मरहम बना लें। इसे मस्सों पर लगायें। इससे बवासीर के मस्से सूखकर गिर जायेंगे। बैंगन की डंडी को पीसकर बवासीर पर लगाने से दर्द और जलन से आराम मिलता है।
    *बैंगन को जलाकर पीसकर कपड़े से छान लें। इसे बवासीर के मस्सों पर लगाने से दर्द मे लाभ होता है।"
    5 दिल के रोग में : -

    दिल के रोग में बैंगन का बराबर सेवन करने से लाभ होता है।
    6 मन्दाग्नि  याने पाचनशक्ति का कमजोर होना:-
    बैंगन और टमाटर का सूप पीने से मन्दाग्नि मिटती है और खाना सही से पचने लगता है।
    7 मलेरिया बुखार में :-
     कोमल बैंगन को आग पर सेंककर रोज सुबह के समय खाली पेट गुड़ के साथ खाने से मलेरिया बुखार में तिल्ली बढ़ गई हो और शरीर पीला पड़ गया हो तो इससे लाभ होता है।

    8  पथरी : -
    *बैंगन का साग खाने से पेशाब ज्यादा आकर शुरुआत हुई छोटी पथरी गलकर पेशाब के साथ बाहर आ जाती है।
    *बैगन को आग में पकाकर उसका बीज निकाल लें। फिर उसका भर्ता बनाकर 15 से 20 दिन खायें। इससे पथरी गलकर बाहर निकल जाती है।"
    10 अनिद्रा :-
    बैंगन को आग पर सेंककर, शहद में मिलाकर शाम को चाटने से नींद अच्छी आती है। इस प्रयोग को रोज करते रहने से अनिद्रा का रोग में लाभ होता है।
    11 बंद मासिक-धर्म :-
    मासिक-धर्म कम मात्रा में आता हो या साफ न आता हो तो सर्दियों में बैंगन की सब्जी, बाजरे की रोटी और गुड़ का बराबर मात्रा में सेवन करने से लाभ होता है। ध्यान रहें गर्म प्रकति की स्त्रियों को यह प्रयोग न करायें।
    12 पेट का भारी होना :-
    बैंगन को आग पर सेंककर उसमें सज्जीखार मिलाकर पेट पर बांधने से, भारी पेट कुछ ही समय में हल्का हो जाता है।
    13 फोड़े, फुन्सी :-
    बैंगन की पट्टी फोड़े, फुन्सियों पर बांधने से फोड़े जल्दी पककर फूट जाते हैं।
    14 अंडकोष की सूजन :-
    बैंगन की जड़ को पानी में मिलाकर अंडकोषों पर कुछ दिनों तक लेप करने से अंडकोषों की सूजन और वृद्धि नष्ट हो जाती है।
    15 अफारा (गैस का बनना) : -
    बैंगन की सब्जी में ताजे लहसुन और हींग का छौंका लगाकर खाने से आध्यमान (अफारा, गैस) आदि दूर हो जाती है।
    16 कब्ज (गैस) का बनना: -
    *बैंगन और पालक का सूप पीने से कब्ज मिट जाती है और पाचन-शक्ति को बढ़ती है।*बैंगन को धीमी आग पर पकाकर खाने से कब्ज दूर हो जाती है।"
    17 कान का दर्द :-बैंगन को आग में भूनकर उसका रस निकाल लें। फिर उसके अंदर नीम का गोंद मिलाकर गुनगुना करके कान में बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द समाप्त हो जाता है।
    18 कान के कीड़े : -





    बैंगन को भूनकर उसमें से निकलने वाले धुंए को कान में लेने से कान के सारे कीड़े खत्म हो जाते हैं।
    *बैंगन का धुंआ और सरसों के तेल को गर्म करके गाय के पेशाब में मिलाकर उसमें हरताल की राख को मिलाकर कान में डालने से कान के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।"
    19 जिगर का रोग :-
    यकृत वृद्धि में रोगी को बैंगन का भर्ता बनाकर खिलाने से बहुत फायदा होता है। भर्ता को लोहे की कड़ाही में सरसों के तेल के साथ बनाएं और इसमें लाल मिर्च का प्रयोग करें इससे जिगर का बढ़ना कम हो जाता है।
    20 जलोदर के लिए :-
    1 बड़े बैंगन को चीरकर उसके अंदर ठंडा नौसादार रखकर रात में खुली हुई जगह में रख दें। सुबह-सुबह इसे निचोड़कर इस रस की 4 से 5 बूंद रस को बतासे में भरकर रोगी को सेवन कराने से अधिक पेशाब आकर जलोदर (पेट में पानी भरना) के रोग से छुटकारा मिल जाता है।
    21 प्लीहा वृद्धि (तिल्ली) :-
    ताजे लंबे बैंगन की सब्जी खाने से तिल्ली (प्लीहा) बढ़ने के रोग में आराम मिलता है।
    22 योनि का आकार छोटा होना :
    -सूखे हुए बैंगन को पीसकर योनि में रखने से योनि सिकुड़कर छोटी हो जाती है।
    23 आन्त्रवृद्धि का बढ़ना :-
    मारू बैंगन को गर्मराख में भूनकर बीच से चीरकर अंडकोषों पर बांधने से आन्त्रवृद्धि व दर्द दोनों बंद हो जाते हैं। बच्चों की अंडवृद्धि को ठीक करने के लिए यह बहुत ही उपयोगी है।
    24 सूखा रोग :-
    बैंगन को अच्छी तरह से पीसकर उसका रस निकालकर उसके अंदर थोड़ा सा सेंधानमक मिला लें। इस एक चम्मच रस को रोजाना दोपहर के भोजन के बाद कुछ दिनों तक बच्चे को पिलाने से सूखा रोग (रिकेट्स) में लाभ मिलता है।
    बेंगन के कुछ और गुणों  के बारे मे लिख देते हैं|-
    1.   बैंगन के सेवन से रक्त में कोलेस्ट्रॉल  का स्तर गिरता है। इस तरह के प्रभाव का प्रमुख कारण है। बैंगन में पोटेशियम व मैंगनीशियम की अधिकता। बैंगन की पत्तियों के रस का सेवन करने से भी रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम किया जा सकता है।
    2. बेंगन के सेवन से धमनियों की दीवारों में कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल कम हो जाता है। यहां तक की खून की नसों में भी खून ठीक प्रकार से बहने लगता है।
    3. बैंगन में विटामिन सी बहुत अच्छी मात्रा में है जो प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है और शरीर को संक्रमण से मुक्त रखने में मदद करता है।
    4. बैंगन का सूप तैयार किया जाए जिसमें हींग और लहसून भी स्वाद के अनुसार मिलाया जाए और सेवन किया जाए तो यह पेट फूलना, गैस, बदहज़मी और अपचन जैसी समस्याओं में काफी राहत देता  है| 
    5.   बैंगन का रस दांत के दर्द में लाभदायक प्रभाव दिखलाता है। अस्थमा के उपचार के लिये बैंगन की जड़ें प्रयुक्त की जाती हैं।
    6.   इस पौधे में जो न्‍यूट्रियन्‍ट्स पाए जाते हैं वह हमारे दिमाग के लिये बहुत ही अच्‍छे होते हैं। यह किसी भी प्रकार की हानि  से हमारी कोशिका की झिल्‍ली को बचाते हैं। यह दिमाग को फ्री रेडिकल  से बचाता है और दिमाग  का विकास करता है।
    7.   लीवर की बीमारियां होने पर भी बैंगन का सेवन लाभदायक प्रभाव दिखलाता है। बैंगन की पत्तियों में हल्का निद्राकारी तत्व उपस्थित रहता है। अत: कई दवाईयां बनाने में इसकी पत्तियां आधारभूत तत्व की तरह कार्य करती हैं।
    8. हाई फाइबर और कम कार्बोहाइड्रेट के तत्‍व होने के कारण यह मधुमेह रोगियों के लिये बहुत अच्‍छा आहार है। इसको नियमित खाने से आपका शुगर लेवल कम होगा।
    9.   प्राकृतिक तरीके से सिगरेट छोड़ना चाहते हैं तो डाइट में बैंगन का सेवन अधिक करें। निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी के तहत इसमें मौजूद निकोटिन की सीमित मात्रा सिगरेट छोड़ने वाले लोगों के लिए मददगार हो सकती है।
    10. अगर आप प्रतिदिन बैंगन खाएंगे तो आपका शरीर कैंसर से लड़ने के लिये मजबूत हो जाएगा। यह खासकर पेट के कैंसर से लड़ने में सहायक है।इसमें एक तत्‍व पाया जाता है जो कि शरीर में कैंसर की सेल से लड़ने में सहायक होता है।
    11. यह याद रखें कि सब्जी बनाते समय इसका डंठल व्यर्थ समझकर फेंकना नहीं चाहिए, क्योंकि इसमें पौष्टिक तत्वों की अधिकता होती है।

    Friday, January 1, 2016

    हरड़ के गुण और लाभ : Benefits of Harad

        हरड़ बेहद उपयोगी आयुर्वेदिक  औषधि है| इसके पेड़ पूरे भारत में पाये जाते हैं | इसका रंग काला व पीला होता है तथा इसका स्वाद खट्टा,मीठा और कसैला होता है | आयुर्वेदिक मतानुसार हरड़ में पाँचों रस -मधुर ,तीखा ,कड़ुवा,कसैला और अम्ल पाये जाते हैं |  आयुर्वेद की चरक संहिता मे जिस प्रथम औषधि के बारे में बताया गया है वह हरड़, हर्रे या हरीतकी है। हरड़ की उपयोगिता के बारे मे शास्त्रों मे कहा गया है कि जिसके घर मे माता नहीं है, उसकी माता हरीतकी है। माता फिर भी कभी कुपित (गुस्सा) हो सकती है लेकिन हरड़ पेट में जाने पर कोई अहित नहीं करती बल्कि हमेशा फायदा ही करती है। घरेलू रूप में छोटी हरड़ का ही अधिकतर उपयोग किया जाता है। हरीतकी संपूर्ण शरीर के लिए फायदेमंद है विशेष रूप से कब्ज, बवासीर, पेट के कीड़ों को दूर करने, नेत्र ज्योति व भूख बढ़ाने, पाचन तथा अलग-अलग मौसम में होने वाले रोगों में भी ये प्रभावी होती है। आज हम हरड़ के कुछ लाभ जानेंगे -

    1) हरड़ के टुकड़ों को चबाकर खाने से भूख बढ़ती है | 

    2) छोटी हरड़ को पानी में घिसकर छालों पर प्रतिदिन तीन बार लगाने से मुहं के छाले नष्ट हो जाते हैं | इसको आप रात को भोजन के बाद भी चूंस सकते हैं | 

    3) छोटी हरड़ को पानी में भिगो दें | रात को खाना खाने के बाद चबा चबा कर खाने से पेट साफ़ हो जाता है और गैस कम हो जाती है | 

    4)  कच्चे हरड़ के फलों को पीसकर चटनी बना लें | एक -एक चम्मच की मात्रा में तीन बार इस चटनी के सेवन से पतले दस्त बंद हो जाते हैं | 

    5)  हरड़ का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दो किशमिश के साथ लेने से एसीडिटी ठीक हो जाती है | 

    6) हरीतकी चूर्ण सुबह शाम काले नमक के साथ खाने से कफ ख़त्म हो जाता है | 

    7) हरड़ को पीसकर उसमे शहद मिलाकर चाटने से उल्टी आनी बंद हो जाती है|




    8) भोजन के बाद अगर पेट में भारीपन महसूस हो तो हरड़ का सेवन करने से राहत मिलती है।

    9) हरड़ को पीसकर आंखों के आसपास लगाने से आंखों के रोगों से छुटकारा मिलता है।

    10) हरड़ का सेवन लगातार करने से शरीर में थकावट महसूस नहीं होती और स्फूर्ति बनी रहती है।

    11) हरड़ का सेवन गर्भवती स्त्रियों को नहीं करना चाहिए।




    12) हरड़ पेट के सभी रोगों से राहत दिलवाने में मददगार साबित हुई है।

    13) हरड़ का सेवन करने से खुजली जैसे रोग से भी छुटकारा पाया जा सकता है।

    14)अगर शरीर में घाव हो जांए हरड़ से उस घाव को भर देना चाहिए।
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    Saturday, December 5, 2015

    नशा छोडने का सरल उपाय Measures to quit aadiction






    नशा छोड़ने का  उपाय 

    नशा कोई भी हो शराब, गुटखा, तम्बाकू या कोई ओर निम्न  उपचार  से आप नशे की 


    लत  से मुक्ति पा सकते हैं| 


    अदरक के छोटे छोटे टुकड़े काट ले अब इन पर सेंधा नमक बुरक ले, अब इन टुकड़ो पर 

    निम्बू निचोड़ लेऔर इन टुकड़ो को धुप में सूखने के लिए रख दे। जब सूख जाए तो बस 


    हो गयी दवा तैयार।


    अब जब भी किसी नशे की लत लगे तो ये टुकड़ा निकाला और चूसते रहो। ये अदरक 


    मुह में घुलती नहीं इसको आप सुबह से शाम तक मुह में रख सकते हैं।





    अब आप सोचोगे के ऐसा अदरक में क्या हैं तो सुनिए जब किसी आदमी को नशे की 

    लत लगती हैं तो उसकी बॉडी सल्फर की डिमांड करती हैं, और अगर हम सल्फर की 


    कमी शरीर में पूरी कर दे तो फिर बॉडी को ये नशे की उठने वाली तलब नहीं लगेगी।


    ये प्रयोग आप 3 से 4 दिन करोगे तो ही आप नशा मुक्त हो जाओगे। अगर कोई बहुत 


    बड़ा नशेबाज हैं या रेगुलर ड्रिंक करते हैं तो उनको ये 7 से 8 दिन लग सकते हैं।

    Thursday, November 19, 2015

    सर्दी के मौसम मे खजूर के फायदे :Benefits of Dates

    मौसम के परिवर्तन पर हमको अपने शरीर को तंदुरुस्त  रखने  के लिए  खान पान मे बदलाव लाना  जरूरी हो जाता है| मतलब ये कि सर्दियों में कुछ खास खाद्य पदार्थो के सेवन से हमारे शरीर को विशेष लाभ होता है। 






    खजूर को सर्दियों का मेवा कहा जाता है और इसे इस मौसम में खाने से खास फायदे होते हैं। खजूर या पिंड खजूर कई प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें आयरन और फ्लोरिन भरपूर मात्रा में होते हैं इसके अलावा यह कई प्रकार के विटामिंस और मिनरल्स का बहुत ही खास स्त्रोत होता है। 
    इसका इस्तेमाल नियमित तौर पर करने से आप खुद को कई प्रकार के रोगों से दूर रख सकते हैं और यह कॉलेस्ट्राल कम रखने में भी मददगार है। खजूर को इस्तेमाल करने के अनगिनत फायदे हैं क्योंकि खजूर में कॉलेस्ट्रोल नही होता है और फेट का स्तर भी काफी कम होता है। खजूर में प्रोटीन के साथ साथ डाइटरी फाइबर और विटामिन B1,B2,B3,B5,A1 और c भरपूर मात्रा में होते हैं। 
     खजूर में शरीर को एनर्जी प्रदान करने की अद्भुत क्षमता होती है क्योंकि इसमें प्राक्रतिक शुगर जैसे की ग्लूकोज़, सुक्रोज़ और फ्रुक्टोज़ पाए जाते हैं। खजूर का भरपूर फायदा इसे दूध में मिलाकर इस्तेमाल करने से मिलता है। 

    खजूर खाने से पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है क्योंकि यह घुलनशील और अघुलनशील फायबर से भरपूर होता है साथ ही साथ इसमें अमीनो एसीड भी पाया जाता है। खजूर को रातभर पानी में गलाकर इस पानी के साथ पीने से पाचनतंत्र में निश्चित तौर पर सुधार आता है। 


    खजूर में पाया जाने वाला आयरन शरीर में खून की कमी यानी की एनीमिया को ठीक करने में बहुत कारगर है। खजूर की मात्रा बढाकर खून की कमी को दूर किया जा सकता है। ख़जूर में फ्लूरिन भी पाया जाता है जिससे दांतों के क्षय होने की प्रकिया धीमी हो जाती है। 





    खजूर में पाए जाने वाली पोटेशियम की भरपूर और सोडियम की कम मात्रा के कारण से शरीर के नर्वस सिस्टम के लिए बेहद लाभकारी है। शोध से साबित हुआ है कि शरीर को पोटेशियम की काफी जरुरत होती है और इससे स्ट्रोक का खतरा कम होता है। खजूर शरीर में होने वाले LDL कॉलेस्ट्रोल के स्तर को भी कम रखकर आपके दिल के स्वास्थ्य की रक्षा करता है।
    खजूर उन लोगों के लिए अत्यधिक लाभकारी है जो वजन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इसका उपयोग शराब पीने से शरीर को होने वाले नुकसान से बचने में भी किया जाता है।
    सेक्सुअल स्टेमिना बढाने में खजूर की अहम भूमिका होती है। खजूर को रातभर बकरी के दूध में गलाकर सुबह पीस लेना चाहिए और फिर इसमें थोड़ा शहद और इलाइची मिलाकर सेवन करने से सेक्स संबंधी समस्याओं में बहुत लाभ होता है।
    खजूर से पेट का कैंसर भी ठीक होता है। इसके विषय में सबसे अच्छी बात यह है कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। इससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है और इसके नियमित उपयोग से रतोंधी से भी छुटकारा मिलता है।




    अगर आप अपने शरीर का शुगर स्तर को खजूर के उपयोग से निय़ंत्रित कर सकते हैं। खजूर को शहद के साथ इस्तेमाल करने से डायरिया में भरपूर लाभ होता है। 
     रात में बिस्तर गीला करने वाले बच्चों के लिए खजूर अत्यधिक लाभकारी है। यह उन लोगों के लिए भी बहुत कारगर है जिन्हें बार-बार बाथरुम जाना पडता है। 
    खजूर को विभिन्न तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन इसे इस्तेमाल करने के पहले इसे अच्छी तरह से धोना बेहद जरुरी है। इसके इस्तेमाल से खाने का स्वाद बढ़ता है और शरीर में तुरंत एनर्जी आती है। सर्दियों में इसका उपयोग अत्यधिक लाभकारी है। 
     खजूर के उपयोग से निराशा को दूर किया जा सकता है और यह स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए अत्यधिक लाभकारी है। खजूर गर्भवती महिलाओं में होने वाली कई प्रकार की समस्याओं से छुटकारा दिलाता है क्योंकि यह बच्चेदानी की दीवार को मज़बूती प्रदान करता है। इससे बच्चों के पैदा होने की प्रक्रिया आसान हो जाती है और खून का स्त्राव भी कम होता है।