इस ब्लॉग के समर्थक बनें.

Thursday, September 29, 2016

मस्सों का होम्योपैथिक ईलाज Homeopathic remedies for warts


   होम्योपैथी 'समः समं, शमयति' के सिद्धांत पर काम करती है, जिसका अर्थ है समान की समान से चिकित्सा अर्थात एक तत्व जिस रोग को पैदा करता है, वही उस रोग को दूर करने की क्षमता भी रखता है।
इस पद्धति के द्वारा रोग को जड़ से मिटाया जाता है।किसी भी बीमारी की चिकित्सा करते समय ---रोगी के धातुगत लक्षण,मानसिक लक्षण और रोग के लक्षणों के साथ जिस दवा के लक्षणों (Majority of symptoms) सबसे अधिक मेल खाता हो,उसी दवा का प्रयोग सर्वप्रथम करना चाहिए। आइये अब हम मस्सों का इलाज होमियोपैथी से करते हैं जो निरापद और लाभकारी है।
कॉस्टिकम : कास्टिकम एक प्रधान सॉरा-बिष-नाशक और फास्फोरस की विरोधिनी दवा है। अगर शरीर पर छोटे-छोटे बहुत से ठोस मस्से हो गए हों जिसके जड़ मुलायम एवं ऊपर के मुंह कठोर और नोकदार हो तो ऐसे मस्सों को ठीक करने के लिए कॉस्टिकम औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना लाभकारी होता है। नाखूनों के किनारे, बाहों, हाथों, पलकों एवं चेहरे पर होने वाले मस्सों में भी इस औषधि का उपयोग किया जाता है।
कैलि म्यूर : हाथों पर मस्से होने पर कैलि म्यूर औषधि का सेवन करने के साथ इस औषधि की 3x मात्रा को एक चम्मच पानी में मिलाकर लोशन बनाकर मस्सों पर लगाना भी चाहिए।
सीपिया : जननेन्द्रिय की आगे की त्वचा के अगले भाग या शरीर पर बड़े-बड़े कठोर एवं काले मस्से होने पर सीपिया औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना हितकारी होता है। सीपिया के बाद सल्फर की जरूरत पड़ती है। 
नैट्रम-म्यूर : हथेलियों पर मस्से होने पर नैट्रम-म्यूर औषधि की 3x से 200 शक्ति का सेवन करना लाभकारी होता है।
थूजा :थूजा एक प्रधान एंटीसाइकोटिक दवाहै। इस औषधि का प्रयोग किसी भी प्रकार के मस्सों में किया जा सकता है। मस्सों के यह सबसे अच्छी औषधि है। मस्सों के झुण्ड निकलने, सिर के पीछे मस्से जैसे दाने होने, ठोड़ी पर मस्से होने, लटकने वाले मस्से होने, खूनी मस्से जिससे कभी-कभी खून निकलता रहता है। इन सभी प्रकार के मस्सों को ठीक करने के लिए थूजा औषधि की 30 और 200 शक्ति का सेवन करना लाभदायक होता है। इन मस्सों में थूजा औषधि के सेवन के साथ-साथ थूजा Q (मूल अर्क ) को रूई पर लगाकर मस्सों पर लगाना चाहिए।गर्भावस्था के दौरान स्त्री को पहले कुछ दिनों तक सल्फर औषधि की 30 शक्ति का सेवन कराने और फिर कुछ दिनों तक थूजा औषधि की 30 शक्ति का सेवन कराने और अंत में मर्क सौल औषधि की 30 शक्ति सेवन कराने से बच्चे को मस्से नहीं होते। यदि त्वचा पर मस्से गोभी की तरह दिखाई दे तो इस औषधि का प्रयोग करना लाभकारी होता है। योनि के ऊपर -उसमे दर्द होता है की हाथ लगाया जाता स्वर यंत्र के अर्बुद में थूजा काफी लाभप्रद है।
कैलकेरिया कार्ब : कठोर, नोकदार व चुभने वाले मस्से जिनमें सूजन आने के बाद कभी-कभी जख्म भी बन जाते हैं।चेहरे पर, गर्दन पर, और शरीर के ऊपरी हिस्से के मस्से में लाभकारी। इस तरह के मस्से को ठीक करने के लिए कैलकेरिया कार्ब औषधि की 12 शक्ति का प्रयोग करना लाभकारी होता। नाक अर्बुद से रक्तस्राव होता है।




नाइट्रिक ऐसिड : फूलगोभी की तरह बड़े खुरदरे मस्से, टेढ़े-मेढ़े मस्से एवं ऐसे मस्से जिसे धोने से बदबूदार खून निकलने लगता हो। छूने पर भी खून निकलने लगता है।इस तरह के मस्सों में नाइट्रिक ऐसिड औषधि की 12 शक्ति का प्रयोग किया जाता है। इस औषधि का प्रयोग लटकने एवं होंठों पर मस्से की तरह दाने होने पर भी किया जाता है।
नैट्रम म्यूर : पुराने मस्से, ऐसे मस्से जिसमें दर्द हो और मस्से को हल्का सा छू देने पर असहनीय दर्द हो। मस्से कभी-कभी जख्म में बदल जाता है।हाथ और अंगूठे में अनगिनित मस्से, ऐसे लक्षणों वाले मस्सों का उपचार नैट्रम-म्यूर औषधि की 30 शक्ति से फयदेमन्द होता है। यह रक्तहीन,कमजोर और हरित पाण्डु रोग ग्रस्त स्त्रियों की बीमारी में खास रूप से फायदा करती है।
सल्फर : यदि कठोर एवं दर्द वाले मस्से हो गए हों और उसमें तपकन महसूस होता हो तो सल्फर औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करें।
ऐन्टिम टार्ट : पुरुषों के जननेन्द्रिय की सुपारी के पीछे मस्से हो गए हों तो ऐन्टिम टार्ट औषधि की 12 शक्ति का प्रयोग किया जाता है।
स्थान विशेष के मस्सों में उपयोगी औषधियाँ :
दाढ़ी में : लाइकोपोडियम 
जीभ पर : आरम म्यूर 
गर्दन पर : एसिड नाइट्रिकम 
बाहँ पर :कैल्केरिया,कास्टिकम,कास्टिकम,सीपिया,नाइट्रिक एसिड,सल्फर 
तलहथी पर: नैट्रम म्यूर, अनकॉर्डियम 
अंगुली में : कैल्केरिया, कास्टिकम,लैक्सिस, नैट्रम मयूर,नाइट्रिक एसिड,सल्फर,थूजा, सीपिया 
लिंगमुण्ड पर : एसिड नाइट्रिक,एसिड फास, थूजा 
लिंगाग्र चर्म : सिनाबेर,इयूकैलिप्
मुहं में : कास्टिकम, एसिड नाइट्रिकम, थूजा
भौं में : कास्टिकम,
आँख की पलकों में : एसिड नाइट्रिकम
आँख के नीचे : सल्फर
नाक में : थूजा,कास्टिकम
मुहं के कोने में : काण्डुरैगों

Monday, September 26, 2016

गर्म पानी पीने के फायदे | Drinking Hot Water Benefits

गर्म पानी पीने के फायदे
Drinking Hot Water Benefits 


सामान्य पानी (Normal Water) शरीर की प्यास दूर करता है तो गर्म पानी शरीर से अनेकों रोगों को बाहर निकालने की सामर्थ्य रखता है । गर्म व कुनकुने पानी का सेहत के साथ बहुत पुराना सम्बन्ध है । गर्म पानी के नित्य नियमबद्ध तरीके से सेवन करने से शरीर को रोगानुसार निम्न प्रकार से लाभ मिलते है-
*त्वचा के रुखेपन की समस्या को दूर कर चिकनी व चमकदार त्वचा हासिल करने के लिये एक ग्लास गर्म पानी रोजाना पीएं ।
*गर्म पानी पीने से शरीर के सभी विषैले तत्व शरीर से बाहर हो जाते हैं । (Hot Water Removes all poison in the stomach)



*सुबह खाली पेट और रात्रि भोजन के बाद एक-एक गिलास गर्म पानी पीते कुछ समय लगातार पीने से पाचन सम्बंधी दिक्कतें दूर हो जाती हैं और कब्ज व गैस जैसी समस्याएं परेशान नहीं करती ।
*भूख की कमी, भोजन में अरुचि और पेट में भारीपन जैसी समस्या दिखाई दे तो एक गिलास गर्म पानी में एक *निंबू का रस, चाय का आधा चम्मच (2ग्राम) काली मिर्च पावडर और स्वादानुसार थोडा सा नमक डालकर पीने से कुछ ही समय में पेट का भारीपन दूर होकर खुलकर भूख लगना प्रारम्भ हो जाती है ।
*खाली पेट गर्म पानी पीने से सीने की जलन दूर होने के साथ मूत्र सम्बन्धी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं ।
*वात से उत्पन्न सभी रोगों जैसे जोडों का दर्द, शरीर के किसी भी हिस्से में गैस के कारण उत्पन्न दर्द दूर करनें में गर्म पानी का सेवन अमृत के समान उपयोगी है ।
*गर्म पानी के नियमित सेवन से शरीर का तापमान बढता है जिससे पेशाब व पसीने के माध्यम से शरीर के सारे *जहरीले तत्व आसानी से शरीर से बाहर निकलते रहते हैं । इसके माध्यम से रक्त संचार (ब्लड सर्क्युलेशन) सुचारु बना रहता है ।
*बुखार में प्यास लगने पर रोगी को ठंडा पानी नहीं पीना चाहिये सिर्फ गर्म पानी ही पीना चाहिये । बुखार में गर्म पानी ही शरीर के लिये अधिक उपयोगी होता है ।
*पेट की अधिकांश बीमारियां दूषित जल के कारण ही उत्पन्न होती है । यदि पानी को गर्म करने के बाद ठंडा करके पीने की आदत बना ली जावे तो पेट की अधिकांश बीमारियां शरीर में पनपने ही नहीं पाएगी ।
गर्म पानी शरीर में शक्ति का संचार करता है । इसके प्रयोग से कफ व सर्दी से सम्बन्धित सभी रोग दूर हो जाते हैं ।
*दमा, हिचकी व खराश जैसे रोगों के समाधान हेतु गर्म पानी का उपयोग करने के साथ ही तले-भुने पदार्थों के सेवन के बाद भी गर्म पानी पी लेना शरीर के लिये उचित रहता है
*सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस ( Hot Water mix with lemon Juice) मिलाकर पीने से शरीर को पर्यापत मात्रा में विटामिन सी की पूर्ति होती रहती है । गर्म पानी के साथ नींबू का संयोजन *शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है व शरीर का पी. एच. स्तर भी इससे सही बना रहता है ।



*रोजाना एक गिलास गर्म पानी सिर के सेल्स के लिये उत्तम टानिक का कार्य करता है ।
*वजन घटाने के लिये भी गर्म पानी महुत मददगार होता है । भोजन के एक घंटे बाद गर्म पानी पीने से शरीर का मेटाबालिज्म बढता है । यदि गर्म पानी में थोडा नींबू और शहद मिलाकर इसे मुँह में घुमाते हुए पिया जावे तो इससे वजन संतुलित होकर मोटापा दूर होता है ।
*हमेशा जवान दिखते रहने की चाहत रखने वाले लोगों के लिये गर्म पानी का नियमित सेवन सदैव एक बेहतरीन औषधि के रुप में मददगार साबित होता है ।
पानी पीने की सही विधि- ( Drink Water in the Correct Way)
*. प्रातः उठकर 2-3 गिलास सामान्य तापमान का या गुनगुना पानी पीना चाहिये । इससे मोटापा, कब्ज, त्वचा, रक्तचाप जैसी शारीरिक समस्याओं से मुक्ति पाने में सहायता मिलती है. यही पानी उषापान कहलाता है ।
* पानी हमेशा घूंट-घूंट करके व बैठकर पीना चाहिये क्योंकि इससे लार का निर्माण होता है । हमारे पेट में *भोजन को पचाने के लिये अम्ल होता है व मुँह में जो लार होती है वह क्षार होती है और अम्ल व क्षार के संयमित संयोग से शरीर में कब्ज की शिकायत नहीं होती ।
 *पानी हमेशा शरीर के तापमान के अनुसार पीना चाहिये । न ज्यादा ठंडा और न ही बहुत ज्यादा गर्म क्योंकि ज्यादा ठंडा पानी पीने से पेट को अतिरिक्त कार्य करना पडता है और दिमाग, ह्रदय (Brain, Heart)जैसे महत्वपूर्ण अंगों की कार्यशीलता कम होने लगती है । दिमाग का रक्त गुरुत्वाकर्षण के कारण सबसे पहले कम होने लगता है जिससे आगे चलकर ब्रेन हेमरेज जैसी समस्या की गिरफ्त में हमारा शरीर आ सकता है ।
* ज्यादा ठंडा पानी पीने से पेट की बडी आंत सिकुड जाती है जिससे सभी रोगों की जनक कब्ज की शुरुआत होती है ।
*. खाना खाने के कम से कम 30 मिनिट पहले और 45 मिनिट बाद तक पानी नहीं पीना चाहिये अन्यथा पाचन सम्ब्नधी समस्याएं होती हैं ।
.* कोई भी फल अथवा मीठा खाने के तत्काल बाद पानी नहीं पीना चाहिये ।




यहां आपको कुछ सुझाव दिए जा रहे हैं, ताकि आपको पानी की कमी से होने वाली बीमारियां न घेरें। इसलिए कुछ बातों का ख़ास ध्य़ान रखें।
*पानी पीने से एसिडिटी हटती है, क्योंकि पानी पेट साफ रखता है।
*हमारा दिमाग 90 प्रतिशत पानी से बना है। पानी न पीने से भी सिर दर्द होता है।
*पानी जोड़ों को चिकना बनाता है और जोड़ों का दर्द भी कम करता है।
*हमारी मांसपेशियों का 80 प्रतिशत भाग पानी से बना हुआ है। इसलिए पानी पानी से मांसपेशियों की ऐंठन भी दूर होती है।
.*सुबह उठते ही एक गिलास पानी पीना अच्छा होता है। इसे अपनी आदत में शामिल करें। इससे पेट साफ रहता है। पानी पीने से स्किन में रूखापन नहीं होता।
*सुबह उठने के बाद गरम या गुनगुने पानी में शहद और नींबू डालकर पिया करें। इससे टॉक्सिक एलिमेंट शरीर से निकल जाते हैं और इम्यून सिस्टम भी सही रहता है।
*.कुछ लोग ज़्यादा ही ठंडा पानी पीते हैं। इससे गुर्दे खराब हो सकते हैं। इसलिए ज़्यादा ठंडा पानी न पिएं।
*.अगर आप चाय या कॉफी ज्यादा पीते हैं तो उसकी जगह ग्रीन टी पिएं। इससे एनर्जी मिलती है।
*सॉफ्ट ड्रिंक की जगह गुनगुना पानी या नींबू पानी पिया करें। आपका एनर्जी लेवल बढ़ेगा और डायजेस्टिव सिस्टम भी सही रहेगा।
*कब्‍ज दूर करे- शरीर में पानी की कमी हो जाने की वजह से कब्‍ज की समस्‍या पैदा हो जाती है। रोजाना एक ग्‍लास सुबह गरम पानी पीने से फूड पार्टिकल्‍स टूट जाएंगे और आसानी से मल बन निकल जाएंगे।

* मोटापा कम करे- सुबह के समय या फिर हर भोजन के बाद एक ग्‍लास गरम पानी में नींबू और शहद मिला कर पीने से चर्बी कम होती है। नींबू मे पेकटिन फाइबर होते हैं जो बार-बार भूख लगने से रोकते हैं। सर्दी और *जुखाम के लिये- *अगर गले में दर्द या फिर टॉन्‍सिल हो गया हो, तो गरम पानी पीजिये। गरम पानी में हल्‍का सा सेंधा नमक मिला कर पीने से लाभ मिलता है। खूब पसीना बहाए- जब भी आप कोई गरम चीज़ खाते या पीते हैं, तो बहुत पसीना निकलता है। ऐसा तब होता है जब शरीर का टम्‍परेचर बढ जाता है और पिया गया पानी उसे ठंडा करता है, तभी पसीना निकलता है। पसीने से त्‍वचा से नमक बाहर निकलता है और शरीर की अशुद्धी दूर होती है। शरीर का दर्द दूर करे- मासकि शुरु होने के दिनो में पेट में दर्द होता है, तब गरम पानी में इलायची पाउडर डाल कर पिएं। इससे ना केवल मासिक का दर्द बल्कि शरीर, पेट और सिरदर्द भी सही हो जाता है।
.*वजन कम करने के लिए ठंडे पानी की जगह गुनगुना गर्म पानी पीना फायदेमंद होता है।
सफाई और शुद्धी- यह शरीर को अंदर से साफ करता है। अगर आपका पाचन तंत्र सही नहीं रहता है, तो आपको दिन में दो बार गरम पानी पीना चाहिये। सुबह गरम पानी पीने से शरीर के सारे विशैले तत्‍व बाहर निकल जाते हैं, जिससे पूरा सिस्‍टम साफ हो जाता है। नींबू और शहद डालने से बड़ा फायदा होता है।
*शहद के साथ नींबू और गुनगुने पानी के नियमित सेवन से शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है। शहद और नींबू में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और कई पोषक तत्व शरीर को मौसम बदलने के साथ होने वाले संक्रमणों से दूर रखने में मदद रखता हैं।
*त्‍वचा के लिए नींबू काफी फायदेमंद होता है, लेकिन इसके अलावा इसमें मौजूद क्‍लीजिंग तत्‍व रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है। नई रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करता है। पानी और शहद का मिश्रण आपकी त्वचा के लिए और ज्यादा फायदेमंद होती है।



Saturday, September 17, 2016

कमर दर्द कारण ,घरेलू चिकित्सा



लगभग ८०% लोग अपने जीवन में कभी न कभी कमर दर्द से परेशान होते हैं। कमर दर्द नया भी हो सकता है और पुराना रोग भी हो सकता है। नया रोग कमर की मांसपेशियों का असंतुलित उपयोग करने से उत्पन्न होता है। रोग पुराना होने पर वक्त बेवक्त कमर दर्द होता रहता है और उसके कारण का पता नहीं चलता है। यह दर्द कभी-कभी इतना भयंकर होता है कि रोगी तडफ़ उठता है,बैठना-उठना और यहां तक कि बिस्तर में करवट बदलना भी कठिन हो जाता है।सतही तौर पर देखने पर कमर में होने वाला दर्द भले ही एक सामान्य सी मेडिकल स्थिति लगता है, लेकिन इसे नज़र अंदाज करने से समस्या काफी बढ़ सकती है।
* शरीर के अंगों जैसे गुर्दे में इन्फ़ेक्शन,पोरुष ग्रंथि की व्याधि,स्त्रियों में पेडू के विकार ,मूत्राषय के रोग और कब्ज की वजह से कमर दर्द हो सकता है। गर्भवती स्त्रियों में कमर दर्द आम तौर पर पाया जाता है। गर्भ में बच्चे के बढने से भीतरी अंगों पर दवाब बढने से कमर दर्द हो सकता है।




* कमर दर्द में लाभकारी घरेलू उपचार किसी भी आनुषंगिक दुष्प्रभाव से मुक्त हैं और असरदार भी है। देखते हैं कौन से हैं वे उपचार जो कमर दर्द राहत पहुंचाते हैं--
* कमर दर्द पुराना हो तो शरीर को गर्म रखें और गरम वस्तुएं खाऎं।
*दर्द वाली जगह पर बर्फ़ का प्रयोग करना हितकारी उपाय है। इससे भीतरी सूजन भी समाप्त होगी। कुछ रोज *बर्फ़ का उपयोग करने के बाद गरम सिकाई प्रारंभ कर देने के अनुकूल परिणाम आते हैं।
*भोजन मे टमाटर,गोभी,चुकंदर,खीरा ककडी,पालक,गाजर,फ़लों का प्रचुर उपयोग करें।
*नमक मिलें गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। पेट के बल लेटकर दर्द के स्थान पर तौलिये द्वारा भाप लेने से कमर दर्द में राहत मिलती है।
* भोजन में पर्याप्त लहसुन का उपयोग करें। लहसुन कमर दर्द का अच्छा उपचार माना गया है।



गूगल कमर दर्द में अति उपयोगी घरेलू चिकित्सा है। आधा चम्मच गूगल गरम पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें।
२ ग्राम दालचीनी का पावडर एक चम्मच शहद में मिलाकर दिन में दो बार लेते रहने से कमरदर्द में शांति मिलती है।
*रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन—चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियाँ काली न हो जायें) गर्म कर लें फिर ठंडा कर इसकी पीठ—कमर में मालिश करें।
* कढ़ाई में दो—तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। थोड़े मोटे सूती कपड़े में यह गरम नमक डालकर पोटली बांध लें। कमर पर इसके द्वारा सेक करें।
*चाय बनाने में ५ कालीमिर्च के दाने,५ लौंग पीसकर और थौडा सा सूखे अदरक का पावडर डालें। दिन मे दो बार पीते रहने से कमर दर्द में लाभ होता है।
* सख्त बिछोने पर सोयें। औंधे मुंह पेट के बल सोना हानिकारक है।


Friday, September 16, 2016

नींबू और जीरे से तेजी से वजन घटाएँ


जो लोग मोटापे से परेशान हैं और मोटापे को दूर करने के लिए अनेक तरह के प्रयोग और पैसे बर्बाद कर के थक चुके हैं तो हम बता दें के ये प्रयोग मोटापे के लिए काल साबित होगा।
बिलकुल साधारण सा दिखने वाला ये प्रयोग सिर्फ थोड़े से दिनों में अपना रिजल्ट आपको दिखा जायेगा। और बड़ी बात ये है के ये नुस्खा बिलकुल आसान है। आइये जाने।
हर शाम को एक चम्मच जीरा साफ़ पीने के पानी में भिगो कर रख दीजिये। सुबह खाली पेट ये जीरा चबा चबा कर खा लीजिये और इस बचे हुए पानी को चाय की तरह गर्म करें और इसमें आधा निम्बू निचोड़ कर इसमें एक चम्मच शहद मिला कर इस पेय के घूँट घूँट कर चाय की तरह पियें।
जीरा शरीर में हमारे द्वारा ग्रहण की गयी वसा को शरीर में अवशोषित नहीं होने देता। और गर्म पानी में निम्बू शरीर में जमी हुयी चर्बी को काटता है। इस कारण से प्रयोग मोटापे के लिए चमत्कार है।
और ध्यान रखें, इस प्रयोग के करते समय आप नाश्ता ना करें। नहीं तो मनचाहा रिजल्ट नहीं मिलेगा। सुबह ये पीने के बाद सीधे दोपहर का खाना खाएं। और खाने के पहले एक प्लेट सलाड खाएं। और भोजन में हरी सब्जियों का प्रयोग करें। और रात को भी सोने से 2-3 घंटे पहले भोजन कर लें।





मैदे से बनी हुयी वस्तुओ से परहेज करें। मीठा और चीनी मोटापे में ज़हर के समान हैं। अनाज भी चोकर वाला (आटे को छानने से जो कचरा निकालते हैं वो चोकर होता है उसको मत निकाले) इस्तेमाल करें। फलों का जूस पीने की बजाय फल खाने चाहिए, इससे फाइबर भी मिल जाता है और जल्दी भूख नहीं लगती।
शीघ्र परिणाम  पाने  के इच्छुक व्यक्तियों को इसके साथ साथ में कुछ व्यायाम ज़रूर करना चाहिये। विशेषकर पश्चिमोत्तनासन, कपाल भाति और हो सके तो रनिंग या जॉगिंग ज़रूर करें।
दोपहर और रात के भोजन के तुरंत बाद एक गिलास गर्म पानी चाय की तरह आधा नीम्बू निचोड़ कर पीयें। भोजन के साथ ठंडा पानी बिलकुल नहीं पीना।

Thursday, September 15, 2016

चिकनगुनिया के आसान घरेलू उपचार






    चिकनगुनिया के कारण लक्षण और आयुर्वेदिक घरेलू उपचार
    चिकनगुनिया बुखार एक वायरस बुखार है जो एडीज मच्छर एइजिप्टी के काटने के कारण होता है। चिकनगुनिया और डेंगू के लक्षण लगभग एक समान होते हैं। इस बुखार का नाम चिकनगुनिया स्वाहिली भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है ”ऐसा जो मुड़ जाता है” और यह रोग से होने वाले जोड़ों के दर्द के लक्षणों के परिणामस्वरूप रोगी के झुके हुए शरीर को देखते हुए प्रचलित हुआ है।
    चिकनगुनिया के लक्षण 
    चिकनगुनिया में जोड़ों के दर्द के साथ साथ बुखार आता है और त्वचा खुश्क हो जाती है। चिकनगुनिया सीधे मनुष्य से मनुष्य में नहीं फैलता है। यह बुखार एक संक्रमित व्यक्ति को एडीज मच्छर के काटने के बाद स्वस्थ व्यक्ति को काटने से फैलता है। चिकनगुनिया से पीड़ित गर्भवती महिला को अपने बच्चे को रोग देने का जोखिम होता है।
    चिकनगुनिया के लक्षण
    *उल्‍टी होना
    *एक से तीन दिन तक बुखार के साथ जोड़ों में दर्द और सूजन होना
    *कंपकपी और ठंड के साथ बुखार का अचानक बढ़ना
    *सरदर्द होना
    चिकगुनिया के कारण 
    *चिकनगुनिया मुख्य रूप से मच्छरों के काटने के कारण ही होता है। इसके सामान्य कारण निम्न हैं:
    *मच्छरों का पनपना।
    रहने के स्थान के आसपास गंदगी होना।
    *पानी का जमाव।
    *चिकनगुनिया का सामान्य उपचार
    *चिकनगुनिया से पीड़ित रोगी को निम्न उपाय अपनाने चाहिए:
    चिकनगुनिया का प्राथमिक उपचार 
    *अधिक से अधिक पानी पीएं, हो सके तो गुनगुना पानी पीएं।
    ज्यादा से ज्यादा आराम करें।





    *दूध से बने उत्पाद, दूध-दही या अन्य चीजों का सेवन करें।

    *रोगी को नीम के पत्तों को पीस कर उसका रस निकालकर दें।
    *रोगी के कपड़ों एवं उसके बिस्तर की साफ-सफाई पर खास ध्यान दें।
    *करेला व पपीता अधिक से अधिक खाएं।
    *चिकनगुनिया इस मौसम की घातक बीमारी है, जिसका उपचार भी काफी कठिन होता है। ऐसे में इस बीमारी से बचे रहने के लिए क्या करें, क्या नहीं, बता रहे हैं मूलचंद मेडिसिटी के सलार्हकार (इंटरनल मेडिसिन) डॉ ए के बाली
    *मौसम में बदलाव आया है और माहौल खुशनुमा हुआ है, लेकिन अगर आपने जरूरी सावधानियां नहीं बरतीं तो यह मौसम आपको जानलेवा बीमारियों के चंगुल में भी फंसा सकता है। ऐसी ही एक बीमारी है चिकनगुनिया, जो इस मौसम में पैदा होने वाले मच्छरों के कारण होती है।
    क्या है चिकनगुनिया
    चिकनगुनिया एक तरह का बुखार है, जो वायरस से होता है। यह संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से होता है। ये एडीज मच्छर (एइजिप्टी) मुख्यत: दिन के समय काटते हैं। इस रोग के लक्षण डेंगू बुखार से मिलते-जुलते होते हैं। पिछले कुछ वर्षों से यह बीमारी अपने देश में भी खूब पैरा फैलाने लगी है।
    क्या हैं लक्षण
    इस संक्रमण से होने वाली बीमारी का समय 2 से 12 दिन हो सकता है, लेकिन आमतौर पर तीन से सात दिन हैं। चिकनगुनिया वायरस का संक्रमण एक गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। बुखार, जोड़ों में गंभीर दर्द, ठंड लगना और सिर दर्द, अत्यधिक संवेदनशीलता (प्रकाश से अत्यधिक संवेदनशीलता), आंखों का संक्रमण, मांसपेशियों में दर्द, थकान, भूख की कमी, उल्टी और पेट में दर्द इस बीमारी के प्रारम्भिक लक्षण हैं। इस वायरल के दौरान त्वचा पर चकत्ते पड़ जाते हैं। कभी-कभी सारे शरीर में दाने भी निकलने लगते हैं। ये दाने हाथ-पैरों सहित शरीर के कुछ खास हिस्सों में अधिक देखने को मिलते हैं। कुछ मरीजों में श्वेत रक्त कणों (डब्ल्यूबीसी) की कमी देखने को मिलती है।





    समय रहते जांच जरूरी

    इसकी जांच का सबसे विश्वसनीय तरीका है एलिसा रक्त परीक्षण।
    उपचार 
    फिलहाल चिकनगुनिया के लिए अभी तक कोई विशेष एंटीवायरल उपचार उपलब्ध नहीं है। मरीज के लक्षणों को देख कर उसका इलाज किया जाता है और मुख्यतया बुखार और दर्द के लक्षणों को दूर करने के लिए आराम, अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन और जरूरी दवाओं के सेवन की आवश्यकता पड़ती है।
    रोकथाम

    जरूरी है एडिस मच्छर को पनपने से रोकना। घरों या अपने आसपास के इलाकों में पानी का जमाव न होने दें।
    घरों में कूलर, गमले, टायर, बर्तनों, जानवरों के लिए प्रयोग किए जाने वाले बर्तनों आदि का पानी दो-तीन दिनों के अंतराल में बदलते रहें।
    घर और आसपास के इलाके में मच्छर भगाने वाले स्प्रे, कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराएं।
    पूरी बाजू की शर्ट और फुल पैंट पहनें, ताकि शरीर कम से कम खुला रहे।
    सोने से पहले मच्छरदानी व मच्छर भगाने वाले साधनों का उपयोग करें।
    शरीर के खुले हिस्से में मच्छर से सुरक्षा प्रदान करने वाली क्रीम लगाएं।
    इनसे भी रहें सावधान
    पीलिया पीलिया जिसे जॉन्डिस के नाम से भी जाना जाता है, बरसात में होने वाली आम बीमारी है। पीलिया के लक्षण दस्त, पीला पेशाब, उल्टी और कमजोरी हैं। इस मौसम में पीलिया से बचाव के लिए उबले पानी का सेवन करें और सफाई का पूरा ख्याल रखें।
    डायरिया
    यह बरसात का आम रोग है, लेकिन इस मौसम में भी परेशान करता है। आंत की इस समस्या को रोकने के लिए उचित सफाई रखें। खाना खाने से पहले हाथ धोएं और पानी उबाल कर पिएं।




    टायफॉयड

    यह पानी से होने वाली एक आम बीमारी है। यह बीमारी दूषित पानी या भोजन के कारण फैलती है। तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी आदि इसके आम लक्षण हैं। इससे बचने के लिए सफाई का ध्यान रखें।
    हैजा
    इस मौसम की घातक बीमारी है हैजा। यह अक्सर दूषित भोजन और पानी के कारण होता है। बचाव के लिए
    स्वच्छता का ख्याल रखें।
    चिकनगुनिया में बच्चों की देखभाल
    बच्चों का खास ख्याल रखें। बच्चे नाजुक होते हैं और उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है इसलिए बीमारी उन्हें जल्दी पकड़ लेती है। ऐसे में उनकी बीमारी को नजरअंदाज न करें।
    बच्चे खुले में ज्यादा रहते हैं इसलिए इन्फेक्शन होने और मच्छरों से काटे जाने का खतरा उनमें ज्यादा होता है।
    बच्चों घर से बाहर पूरे कपड़े पहनाकर भेजें। मच्छरों के मौसम में बच्चों को निकर व टी – शर्ट न पहनाएं।
    आमतौर पर छोटे बच्चों को बुखार होने पर उनके हाथ – पांव तो ठंडे रहते हैं लेकिन माथा और पेट गर्म रहते हैं इसलिए उनके पेट को छूकर और रेक्टल टेम्प्रेचर लेकर उनका बुखार चेक किया जाता है। बगल से तापमान लेना सही तरीका नहीं है, खासकर बच्चों में। अगर बगल से तापमान लेना ही है तो जो रीडिंग आए, उसमें 1 डिग्री जोड़ दें। उसे ही सही रीडिंग माना जाएगा।

    Friday, September 9, 2016

    स्तनों को जल्दी बड़ा बनाने के उपाय



    सही आकृति और फिट आकार वाले शरीर को ही आकर्षक और सुंदर काया माना जाता है और आज की हर महिला फेस ब्यूटी के साथ-साथ एक अच्छी फिट बॉडी चाहती है इसीलिए आधुनिक समाज में अच्छे और सुंदर फेस के साथ-साथ सुडौल और बड़े स्तनो को आकर्षक शारीरिक विशेषताओं में से एक माना जाता है।
    अच्छे स्तन पाने की इच्छा महिलाओं को पुरातन काल से रही है। महिलाओं के स्तन उनकी सुंदरता में चार चाँद लगाते हैं और पुरूषों के लिए तो ये हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र रहे हैं। आज के ज़माने में भी पुरुष बड़े और आकर्षक स्तन वाली महिलाओं को ही ज़्यादा पसंद करते हैं। आजकल महिलाएं अपनी सुंदरता के विभिन्न आयामों को लेकर काफी सजग हो गयी हैं,अतः स्तनों को बड़ा और आकर्षक बनाने के तरीकों पर भी शोध चलते रहते हैं।आज एक औरत को और अधिक आकर्षक लगने के लिए उसके पास शारीरिक ऊंचाई और वजन से मेल खाते स्तनों की आदर्श जोड़ी का होना आवश्यक माना जा रहा है। अगर छोटे और बड़े स्तन वाली महिला में अंतर की बात करें तो छोटे स्तनों की अपेक्षा सुडौल और बड़े स्तन वाली महिला देखने में तो अधिक सुंदर लगती ही है साथ में बड़े स्तन वाली महिलाओं के अंदर आत्मविश्वास भी अधिक होता है इसी कारण आत्मविश्वास से भरी महिला जहाँ जाती है उनका नैतिक सम्मान भी बढ़ जाता है।
    आकर्षक शारीरिक विशेषताओं में सुडौल और बड़े स्तनो के महत्व को समझ कर ही आज महिलाएं स्वाभाविक रूप से स्तन के आकार बढ़ाने के उपाय जानने के लिए उत्सुक रहती है पर ज्यादातर महिलायें स्तन का आकार बढ़ाने लिए महंगी प्रक्रिया सर्जरी को ही चुनती है लेकिन स्तन वृद्धि की प्रक्रिया हमेशा परिणाम प्रदान करने वाली सर्जरी कई बार दुष्प्रभाव भी छोड़ जाती है इसलिए ब्रेस्ट का साइज बढाने के लिए हम कुछ सफल और आसान उपाय लेकर आये है जो ब्रेस्ट का साइज बढाने में आपकी मदद जरुर करेंगे।
    चेस्ट प्रेसेस (Chest presses) करने के लिए डंबल्स (dumbbells) या वज़न दोनों तरफ लें और इन्हें उठाएं। चटाई पर सीधे खड़े हो जाएं और घुटनों को मोड़कर वज़न को हाथों में ले लें। इसे तब तक सीधा उठाते रहें, जब तक ये आपके कंधे के स्तर तक ना पहुँच जाए। इसके बाद उसी मुद्रा में वापस आ जाएं। इसे 10 से 15 बार दोहराएं और इससे आपको आसानी से फर्क दिखेगा।
    कसरत और योग : सुडौल और बड़े आकार के स्तन पाने में कसरत और योग हमेशा ही सबसे उपयोगी साबित हुए है। स्तन मांसपेशियों के बढ़ाने के लिए आप पुश-अप,डम्बल से ब्रेस्ट प्रेस,वाल प्रेस,स्विंगिंग आर्म्स के साथ-साथ घर पर गोमुखासन,उष्ट्रासन,वृक्षासन,द्विकोणासन आदि योग का अभ्यास सुडौल और अधिक आकर वाले स्तन प्राप्त करने के लिए कर सकती है। ये सभी कसरत और योग आपको शारीरिक ताजगी देने के साथ-साथ शरीर से तनाव भी दूर कर देंगे।
    पोषक पेय पदार्थ : अगर आप रोज़ाना दूध और पपीते का रस पी सकती हैं तो आपके स्तनों के जल्दी बड़े होने की संभावना काफी ज़्यादा हो जाएगी। इनमें मौजूद विटामिन एवं अन्य पोषक पदार्थ आपके स्तनों की बढ़त तथा उन्हें आकर्षक और सुडौल बनाने में काफी बड़ी भूमिका निभाते हैं। अगर आप रस पीना नहीं चाहती तो ताज़ा पपीता खाने से भी आपको काफी लाभ मिलेगा।
    छाती को सिकोड़ना भी एक व्यायाम है। पैरों में कूल्हों जितनी दूरी बनाकर सीधे खड़े हों। एक नहाने के तौलिये को दोनों कोनों से पकड़ें और हाथों को सीधा खींचें। तौलियों को दोनों हाथों से विपरीत दिशा में लेकर जाएं। इस मुद्रा में 30 सेकंड से एक मिनट तक रहें। यह व्यायाम 3 बार करें।





    प्रोटीन : हम सभी जानते हैं कि मांसपेशियों के विकास के लिए प्रोटीन काफी आवश्यक हैं। अतः जिम में जाकर अपनी मांसपेशियां विकसित करने वालों को मांस और अंडे के सेवन की हिदायत दी जाती है जिनमें प्रोटीन भरा हो। इसी तरह महिलाओं के लिए उनके स्तन भी एक प्रकार की मांसपेशियां ही हैं,अतः उन्हें सुडौल वाक्स की प्राप्ति के लिए काफी मात्रा में प्रोटीन का सेवन करना चाहिए।
    वज़न बढ़ाना: वज़न बढ़ने पर धीरे धीरे स्तनों के आकार में भी काफी वृद्धि होती है। अगर आपको लगता है कि आपके स्तन काफी धीरे बढ़ रहे हैं, तो आप अपने डॉक्टर से भी सलाह कर सकती हैं। वज़न बढाने के लिए मूंगफली, पनीर, मक्खन, दही आदि का सेवन करें। जिम (gym) जाकर वहाँ कुछ समय बिताएं। वहां 13 से 15 पुश अप्स , वज़न उठाना और छाती के अन्य व्यायाम करें, जिससे कि आपकी छाती की मांसपेशियों में खिंचाव आए।
    स्तनों की क्रीम : बाज़ार में आज तरह तरह की क्रीम उपलब्ध हैं जो आपके स्तनों के विकास एवं उन्हें बड़ा बनाने का भरोसा दिलाती हैं। आपको ऐसी क्रीम चुन्नी चाहिए जो आपकी त्वचा के अनुसार सही हो। ये क्रीम्स भी आपके स्तनों को सुडौल एवं आकर्षक बनाने हेतु काफी उपयोगी हैं। आपके लिए केवल यह आवश्यक है कि किसी अच्छी नामी ब्रांड की क्रीम लें जिसकी ग्राहक समीक्षा अच्छी हो।
    चेस्ट फ्लाइस
    (Chest flys) घर पर बिना किसी अतिरिक्त मेहनत के किये जा सकते हैं। एक कुर्सी लेकर बीच में बैठ जाएं और दोनों हाथों में बराबर भार उठाएं। हाथों को वज़न सहित सीधे उठाएं और कंधे तक पहुंचकर धीरे धीरे नीचे आ जाएं। इस बात का ध्यान रखें कि आपके हाथ निचले शरीर की तरफ एक दूसरे से पास रहें। इस व्यायाम को 3 सेट्स (sets) में दिन में 12 बार करें। आप रात को ब्रा पहनने से भी परहेज़ भी कर सकती हैं।
    आहार : स्तन का आकार शरीरक हार्मोन की अनुपस्थिति पर भी निर्भर करता है। आपके शरीर में अगर पुरुष हार्मोन या टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की उपस्थिति होगी तो यह स्तन विकास में बाधा डाल सकता है। इस हार्मोन के अतिरिक्त बात करे तो एस्ट्रोजन की कमी भी छोटे स्तन के पीछे की एक वजह हो सकती है। इन हार्मोनस पर काबू पाने के लिए सबसे अच्छा तरीका नपा तुला खाद्य पदार्थ ही सकता है। आप अपने संतुलित भोजन में चिकन सूप,मछली,सौंफ बीज, सोयाबिन और सोया से बने अन्य खाद्य पदार्थ सब्जियां,फलियां,फल,अंडे,नट्स के साथ-साथ सूरजमुखी के बीज, तिल के बीज और सन बीज भी शामिल कर सकती है।






    मेथी : यह आपके वक्षों को बढ़ाने के प्राकृतिक उपचारों में से एक है। मेथी का रस निकालें और इसे अपने स्तनों पर अच्छे से लगाएं। अगर आप इस विधि का रोज़ाना इस्तेमाल करें तो आपको जल्दी ही सुन्दर और बड़े वक्षों की प्राप्ति होगी।
    स्तन की बढ़त में धैर्य रखना
    : आपको इस बात का इल्म होना चाहिए कि आपके स्तन एक ही दिन में बड़े,सुडौल एवं आकर्षक नहीं हो सकते जब तक आप स्तनों पर शल्य क्रिया का प्रयोग ना करें। जब कोई महिला अपने यौवन के प्रारम्भ की स्थिति में पहुँचती है तो उसकी छाती में दो तरफ स्तन के नाम पर सिर्फ २ छोटे मांस के टुकड़े होते हैं। स्तन बढ़ने में काफी समय लगता है,अतः महिलाओं के लिए यह काफी आवश्यक है कि स्तन बढ़ाने के नुस्खे अपनाते वक़्त धैर्य का परिचय दें।
    पुश अप्स
    करने के लिए सामने के भाग को फर्श पर रखें और हाथों को समतल तरीके से नीचे रखें। पैरों को भी सीधा रखें और हथेलियों की मदद से खुद को धीरे धीरे उठाने और नीचे लाने की प्रक्रिया आरम्भ करें। इसे कम से कम 13 से 15 बार करें और आप खुद के हाथ और छाती में शक्ति का अनुभव करेंगी। कुएं से पानी निकालने से भी आपकी छाती की मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है, जिससे वे तेज़ी से बढती हैं।
    स्तनों की मसाज : सुडौल स्तन पाने का यह एक और कारगर तरीका है। अगर आप तेल से अपने स्तनों की मालिश करें तो भरपूर एवं बड़े स्तन पाने की आपकी इच्छा अवश्य पूरी होगी। सोने के पहले रोज़ाना अपने स्तनों पर तेल लगाकर उनकी मालिश करें। इससे आपके स्तन के तंतु सुडौल होंगे और आपके स्तनों को अच्छी बढ़त मिलेगी।
    व्यायाम
    : कुछ छाती एवं हाथ से जुड़े व्यायाम आपके स्तनों की बढ़त और उन्हें बड़ा बनाने में काफी उपयोगी सिद्ध होते हैं। अगर आप कुछ हाथ के व्यायाम कर सकें जिनके द्वारा आपके स्तनों पर दबाव पड़ सके तो इससे आपके स्तनों को सुडौल एवं बड़ा होने में काफी मदद मिलेगी।






    जड़ीबूटियां : प्राकृतिक रूप से मिलने वाली कुछ जड़ीबूटियां आपके वक्षों को आकर्षक एवं बड़ा बनाने में काफी हद तक सक्षम हैं। ये प्राथमिक रूप से स्तनों को बढ़ाने वाली जड़ीबूटियां ही हैं जो आपके स्तनों को बड़ा करके उन्हें एक सुन्दर आकार देती हैं। आप अपने वक्षों को बढ़ाने के लिए कुछ हॉर्मोन्स की भी मदद ले सकती हैं परन्तु इनके काफी साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। पर अगर आप जड़ीबूटियों का सहारा लेंगी तो साइड इफेक्ट्स की कोई भी संभावना नहीं है।
    कपड़ों का सही चुनाव करें
    : अपने छोटे स्तनों को उजागर करने के लिए हमेशा छोटे या गलत फिटिंग वाले ब्रा पहनना आपकी ब्रेस्ट स्वाथ्य के लिए हानिकारक हो सकता हैइसलिए स्तनों को बड़े और फुले हुए देखने के लिए आप गद्देदार ब्रा की मदद ले सकती है पर घर पर रहते हुए या अधिक समय तक ऐसी ब्रा को पहनना आपके ब्रेस्ट और स्वास्थ्य दोनों के लिए गलत हो सकता है।

    Thursday, September 8, 2016

    शौच ,मल मे खून आने (बवासीर ) के उपचार

    बवासीर मुख्यत दो प्रकार की होती हैं। खुनी बवासीर और बादी बवासीर। खुनी बवासीर में मस्से सुर्ख होते हैं, और उनसे खून गिरता हैं, जबकि बादी बवासीर में मस्सो में खाज, पीड़ा और सूजन बहुत होती हैं। अतिसार, संग्रहणी और बवासीर-ये तीनो एक दूसरे को पैदा करते हैं। जो लोग बवासीर से बहुत परेशान हैं, वो शौच करने के बाद मलद्वार में ऊँगली डाल कर सफाई करे तो कभी बवासीर नहीं होगी। ये थोड़ा अटपटा लगता हैं, मगर ऐसा करने से आप तारो ताज़ा महसूस करेंगे, और आपको बवासीर की शिकायत नहीं होगी। इसके बाद आप सरसों का तेल भी ऊँगली की सहायता से अंदर लगाये, इसको गणेश किर्या भी कहा जाता हैं।
     मस्से मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं।
    ग्रेड प्रथम - मल के साथ खून आता है, परन्तु नसों का गुच्छा बाहर नहीं आता।
    ग्रेड द्वितीय - नसों का गुच्छा बाहर आता है, परन्तु अपने आप अंदर चला जाता है।
    ग्रेड तृतीय - नसों का गुच्छा बाहर आता है, अंगुलियों से वापस अंदर करना पड़ता है।
    ग्रेड चतुर्थ - नसों का गुच्छा बाहर ही रहता है। वापस अंदर नहीं जाता।
    कोई भी व्यक्ति स्वयं इसकी ग्रेड का अनुमान लगा सकता है। मस्सों का मुख्य लक्षण मल में खून आना अथवा मल विसर्जन में जलन पैदा होना होता है।
    शौच के समय खून आना – ख़ूनी दस्त का घरेलु इलाज।
    Bleeding in Toilet.
    शौच के समय खून आना आमतौर पर बवासीर की वजह से हो सकता है। फिशर की वजह से भी ऐसा हो सकता है। शौच करते समय तीक्षण दर्द भी हो सकता है। अधिक तीखा मिर्च मसाला खाने की वजह से ये हो सकता है। ऐसे में मरीज को तुरई कि सब्जी अधिक खानी चाहिए, और पेट में कब्ज नहीं रहने देनी चाहिए। ऐसे में इस रोग के लिए आप निम्नलिखित प्रयोग करेंगे तो आपको बहुत जल्दी आराम आएगा। आइये जाने।
    खुनी दस्त का घरेलु इलाज।
    बेलगिरी (बेल – बिल्व का फल) दस ग्राम, सुखा धनिया दस ग्राम और मिश्री बीस ग्राम लेकर पीस ले। तीनो चीजे मिलाकर 5 ग्राम चूर्ण ताजा पानी से दिन में तीन बार खिलाने पर बहुत शीघ्र लाभ होता है।
    विकल्प
    12 ग्राम धनिया (शुष्क दाना) पिसा हुआ चूर्ण लेकर इस में 12 ग्राम मिश्री मिलाकर आधा कप पानी में घोलकर पीने से दस्त में खून आना बंद होता है।
    सबसे महत्वपूर्ण है योगा प्राणायाम-
    अगर आप पहले दिन से ही इस रोग में आराम चाहते हैं तो सुबह शौच करने के बाद कम से कम १५ से ३० मिनट कपाल भाति प्राणायाम ज़रूर करें।
    :बढ़िया नुस्खा -
    3 ग्राम सफ़ेद (पापड़ी) कत्था लें और उसे पीस लें, या फिर पिसा हुआ ही पंसारी के यहाँ से ले आएं. एक नीम्बू को काटकर बीच में कत्था रखें और दोनों टुकड़ों को मिला कर धागे से बाँध दें. इसे रात में खुले में रख दें (छत, या बालकनी में). अगर आवश्यक समझें तो पतले मलमल के कपडे या दुपट्टे से ढक दें. सुबह इसे (इसके रस और कत्थे को) खा/पी जाएं. इसके एक घण्टे तक कुछ न खाएं-पीयें.
    भगवान ने चाहा तो खून आना एक दिन में ही बंद हो जायेगा. अधिक से अधिक तीन दिन में बबासीर ठीक हो जाती है. वैसे तो आवश्यकता नहीं पड़ती, पर सात दिन तक ले सकते हैं.
    परहेज़ : गरम तासीर की चीजें, शराब, मिर्च, अधिक मसाले, तला, आचार -पापड़, आदि.
    बवासीर  के मस्सो पर लेप-





    बवासीर के मस्सो पर लेप करने के लिए निम्नलिखित उपचार अपनाने चाहिए, ताकि शीघ्र ही इस कष्ट से मुक्ति मिले।
    *हल्दी और कड़वी तोरई का लेप सभी प्रकार के मस्सो के लिए लाभदायक है। ये मस्सो को नष्ट करता हैं।
    *आक और सहजन के पत्तो का लेप भी मस्सो को नष्ट करता हैं।
    *नीम और कनेर के पत्तो का लेप मस्सो को खत्म करता हैं।
    *कड़वा घीया और गुड को कांजी में पीसकर लेप करे। इस से मस्से नष्ट होते हैं।
    *तम्बाकू के पत्ते महीन पीसकर मस्सो पर लगाने से ये शीघ्र ही नष्ट होते हैं।
    *नीम और पीपल के पत्तो का लेप करने से मस्से नष्ट होते हैं।
    *बड़ (बरगद) के पीले पत्ते जलाकर उनकी ६ मासे राख सरसों के तेल में मिलकर लेप करने से बवासीर के मस्से नष्ट होते हैं।
    *गाय के घी में कुचला घिसकर लेप करने से, बवासीर के घाव ठीक हो जाते हैं।

    *प्याज के छोटे छोटे टुकड़े कर के धुप में सुखा ले। सूखे टुकड़ो में से एक तोला प्याज ले कर गाय के घी में तले। बाद में एक माशा तिल और दो तोले मिश्री उसमे मिला कर रोज़ सुबह खाए। ये भी बवासीर का शर्तिया इलाज हैं।
    मूली
    मूली का नियमित सेवन दोनों बवासीर को ठीक कर देता हैं।

    मट्ठा
    बवासीर में मट्ठा अमृत सामान हैं। लेकिन बिना सेंधा नमक मिलाये इसको नहीं पीना चाहिए। यदि बवासीर के रोगी को अपच हो तो उसको मट्ठा नियमित नियमपूर्वक पीना चाहिए।





    गुड हरड़
    गुड के साथ हरड़ खाने से बवासीर का तत्काल नाश होता हैं।
    बकरी का दूध-
    सुबह सवेरे रोज़ बकरी का दूध पीने से बवासीर का नाश होता हैं।
    केला और कत्था
    पके केले को बीच में से चीरकर दो टुकड़े कर ले और उस पर कत्था पीसकर, थोड़ा थोड़ा बुरक ले। कत्था बाजार से पिसा पिसाया मिल जाता हैं। इस के बाद केले के उन टुकड़ो को खुली जगह पर आसमान के नीचे रख दे। सुबह होने पर खाली पेट उन टुकड़ो का सेवन करे। एक हफ्ते ये प्रयोग करे, कैसी भी बवासीर हो, नष्ट हो जाती हैं।
    तुरई
    आधा किलो तुरई को बारीक काटकर २ लीटर पानी में उबाल लिया जाए और छान लिया जाए और प्राप्त पानी में1 बैंगन को पका लें। बैंगन पक जाने के बाद इसे घी में भूनकर गुड़ के साथ खाने से बवासीर में बने दर्द तथा पीड़ा युक्त मस्से झड़ जाते हैं। ये प्रयोग ३ से 5 दिन तक करे। और इस को करने से पहले और बाद में एक घंटे तक कुछ न खाए।
    नारियल की जटा
    नारियल की जटा लीजिए। उसे माचिस से जला दीजिए। जलकर भस्म बन जाएगी। इस भस्म को शीशी में भर कर ऱख लीजिए। कप डेढ़ कप छाछ या दही के साथ नारियल की जटा से बनी भस्म तीन ग्राम खाली पेट दिन में तीन बार सिर्फ एक ही दिन लेनी है। ध्यान रहे दही या छाछ ताजी हो खट्टी न हो। कैसी और कितनी ही पुरानी पाइल्स की बीमारी क्यों न हो, एक दिन में ही ठीक हो जाती है।
    जीरा





    जीरे को भूनकर उसमे ज़रूरत अनुसार मिश्री मिलाकर मुंह में डालकर चूसे और बिना भूने जीरे को पानी के साथ पीसकर बवासीर के मस्सो पर लेप करे। इन दोनों उपचारो से बवासीर की पीड़ा में निश्चित शांति मिलती हैं।
    नीम्बू
    खुनी बवासीर में नीम्बू को बीच में चीरकर उस पर चार ग्राम कत्था पीसकर बुरक दे और use raat में छत पर रख दे। सुबह इनको चूस लीजिये। ये प्रयोग पांच दिन करे। खुनी बवासीर के लिए ये उत्तम प्रयोग हैं।
    रीठा और सफ़ेद मूसली
    पचास ग्राम रीठे तवे पर रख कर कटोरी से ढक दीजिये और तवे के नीचे आग जल दे। एक घंटे में रीठे जल जाएंगे। ठंडा होने पर रीठो को खरल कर ले या सिल पर बारीक पीस ले। इसके बाद सफ़ेद कत्थे का चूर्ण बीस ग्राम और कुश्ता फौलाद तीन ग्राम ले कर उसमे रीठे का बीस ग्राम भस्म मिला दे। उसे सुबह शाम एक एक ग्राम मक्खन के साथ खाए। ऊपर से गर्म दूध पी ले। दोनों ही प्रकार की बवासीर में दस पंद्रह दिनों में आराम आ जाएगा। गुड, गोश्त, शराब, आम और अंगूर का परहेज करे।

    Wednesday, September 7, 2016

    फोड़े ,घाव के सरल घरेलू उपचार

    हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग हमारी त्वचा है और जब त्वचा कटती है या चोट लगती है तब तुरंत ही इसे ठीक करने के लिए जटिल बायोकैमिकल प्रतिक्रियाएं काम करने लगती हैं | प्राकृतिक चीज़ों जैसे हर्बल एंटीसेप्टिक और मरहम के द्वारा चोट का इलाज करने से शरीर की घाव भरने की प्रक्रिया को सहारा मिल सकता है और घाव या चोट को न्यूनतम निशान छोड़े जल्दी ठीक करने में मदद मिल सकती है |
    फोड़े-फुंसियों या दाद-खाज खुजली जैसी चमड़ी की बीमारियों को पीछे प्रमुख रूप से रक्त का दूषित होना होता है। जब शरीर का खून दूषित यानी गंदा हो जाता है तो कुछ समय के बाद उसका प्रभाव बाहर त्वचा पर भी नजर आने लगता है। प्रदूषण चाहे बाहर का हो या अंदर का वो हर हाल में अपना दुष्प्रभाव दिखाता ही है। बाहरी और भतरी प्रदूषण ने मिलकर हमारे शरीर की प्राकृतिक खूबसूरती को छीनकर कई सारे त्वचा रोगों को जन्म दिया है फोड़े- फुंसियां भी उन्हीं में से एक हैं।
    आज दुनिया का हर दूसरा व्यक्ति चमड़ी से जुड़े किसी न किसी रोग से जूझ रहा है। खुजली,जलन, फुंसियां, घमोरियां, दराद, लाल-सफेद चकत्ते... जैसी कई समस्याएं हैं जिनसे हर कोई परेशान है या कभी न कभी रह चुका है। कई बार छूत से यानी इनसे संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने पर खुद को भी संक्रमण

    घाव को बहते पानी के नीचे धोकर साफ़ करें: सुनिश्चित करें कि रक्तस्त्राव बंद हो गया है | घाव युक्त त्वचा को नल के बहते पानी के नीचे लायें | धीमी गति से पानी को कुछ मिनट तक घाव के ऊपर बहने दें |[८]घाव को साफ़ करने की इस विधि का उपयोग करने से संक्रमण पैदा करने वाली अधिकतर अशुद्धियाँ बाहर निकल जाएँगी |
    अधिकतर उथले घावों के लिए जिन्हें सिर्फ घरेलू उपचार की ज़रूरत हो, प्राकृतिक रूप से की जाने वाली सफाई काफ़ी होती है |
    रक्तस्त्राव को बंद करें: अपने घाव की गंभीरता की परवाह किये बिना और अधिक रक्त को न बहने देकर रक्तस्त्राव बंद करके पहला कदम उठायें | एक कॉटन की साफ़ पट्टी को घाव के ऊपर रखें और हल्का एक समान दबाव लगायें | बिना पट्टी हटाये इसे कम से कम 10 मिनट तक पकड़ें रहें |



    एक बार रक्तस्त्राव बंद हो जाने पर घाव भरना शुरू हो सकता है |
    घाव पर बहुत अधिक दबाव न डालें | अगर आप बहुत अधिक दबाव डालेंगे तो आप रक्त संचरण को रोक सकते हैं और इससे रक्त पट्टी के ऊपर आ जायेगा और इस तरह आपके घाव से लम्बे समय तक रक्त बहता रहेगा |
    अगर पट्टी से रक्त ऊपर तक आ जाये तो एक अन्य पट्टी को उसे सुखाने के लिए ऊपर रखें | पहली पट्टी के टुकड़े को न हटायें | एकसमान दबाव बनाये रखें |
    *अगर रक्त तुरंत पट्टी पर आ जाये और दबाव डालने पर भी रक्तस्त्राव का बंद होना प्रतीत न हो तो आपातकालीन कक्ष या डॉक्टर के पास जाएँ |
    *अपने हाथ धोएं: घाव का उपचार करने से पहले आपको हमेशा अपने हाथ साबुन और पानी से धोना चाहिए | इससे संक्रमण की सम्भावना को कम करने में मदद मिलेगी |[६]अपने हाथ गर्म पानी से धोएं और साफ़ टॉवल से सुखाएं |
    *अगर घाव आपके हाथ पर हो तो घाव पर साबुन लगाने से बचें क्योंकि इससे घाव उत्तेजित हो सकता है
    ब्रेड पुटलिस से करें उपचार-
    क्या आपको पता है कि आप ब्रेड पुटलिस से भी फोड़े का उपचार कर सकते हैं। यह एक प्रभावशाली तरीका है। ब्रेड के एक टुकड़े को गर्म दूध या पानी में डुबा लें। अब इस ब्रेड को संक्रमित त्वचा पर लगाएं। इससे जलन कम होगी और जल्द ही फोड़ा भी ठीक हो जाएगा। अच्छे परिणाम के लिए ऐसा दिन में दो बार करें।
    * नींबू के छोटे पत्ते खाने से लाभ होता है। नींबू में मौजूद विटामिन सी खून साफ करता है. फोड़े-फुंसियों पर नींबू की छाल पीसकर लगाएं. सप्ताह में एक बार फोड़े-फुंसिंयों पर मुल्तानी मिट्टी लगाएं. एक-दो घंटे बाद नहाएं 
    *हल्दी खून को साफ करता है और इसमें एंटी-इंफ्लामैटॉरी गुण पाया जाता है। गर्म दूध के साथ हल्दी मिलाकर पीने से फोड़ा ठीक हो जाता है। साथ ही आप हल्दी और अदरक का पेस्ट बनाकर फोड़े पर लगा सकते हैं। कुछ दिन तक ऐसा करने पर फोड़ा ठीक हो जाएगा।
    *एक टूनिकेट (tourniquet) का उपयोग करें: टूनिकेट का उपयोग सिर्फ बहुत गंभीर स्थितियों में करें | घर पर बनी टूनिकेट का उपयोग घाव पर केवल तब करना चाहिए जब खतरनाक मात्रा में रक्त निकलता जाये | सही तरीके से टूनिकेट न बाँधने पर आपके रक्त प्रवाह और हाथ या पैर में गंभीर रूप से नुकसान पहुँच सकता है और उन्हें काटने की नौबत तक आ सकती है |
    * पालक, मूली के पत्ते, प्याज, टमाटर, गाजर, अमरुद, पपीता आदि को अपने भोजन में नियमित रूप से शामिल करें।*सुबह खाली पेट चार-पांच तुलसी की पत्तियां चूंसने से भी त्वचा रोगों में स्थाई लाभ होता है।
    पानी अधिक से अधिक पीएं-
    चन्दन की लेई घाव पर लगाने से भी घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं। कच्चे केले का रस घाव पर लगाने से भी घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं। लहसुन का रस और हल्दी तिल के तेल के साथ मिलाकर बनाये हुए मिश्रण से सूजन कम हो जाती है और घाव जल्दी भर जाते हैं। तिल और नीम के पत्ते एरंडी के तेल के साथ भूनकर और हल्दी और कपूर के साथ पीसकर घरेलू मरहम बनाया जा सकता है। इस मरहम को घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाते हैं। नारियल के तेल में कपूर उबाल लें और इसे सूजी हुई जगह पर लगा लें। अगले दिन उसे गरम पानी से धो लें। इससे अंदरूनी चोट के कारण हुई सूजन कम हो जाती है। संतरे, अंगूर, लहसून, गाजर का सेवन करने से घावों के भरने में सहायता मिलती है। पिसे हुए पुदीने को एक कपड़े में बांधकर घाव पर रखने से घाव जल्दी भर जाते हैं और संक्रमण का डर भी नहीं रहता।
    *सुबह उठकर 2 से 3 किलो मीटर घूमने के लिये अवश्य जाएं ताकि आपके शरीर और रक्त को शुद्ध ताजा हवा मिल सके और शरीर का रक्त प्रवाह भी सुधर सके।






    एलो वेरा
    कटे और छिले को तुरंत ठीक करना हो तो, उस पर एलो वेरा का रस लगा लेना चाहिये।
    किसी पैनी चीज़ जैसे कि चाक़ू, छुरी या रेज़र या काँच के टुकड़े से त्वचा का कटना। खरोंच जिससे त्वचा की उपरी सतह निकल जाती है। किसी सुई या कील से त्वचा का पंचर होना। भेदन घाव जो चाक़ू जैसी चीज़ शरीर के अन्दर घुसने के कारण होता है, बन्दूक की गोली या ऐसे ही किसी प्रक्षेप्य वस्तु के कारण ज़ख्म का होना। अंदरूनी मार, खरोंच वगैरह से भीतरी चोट पहुँचना। हेमाटोमस जिसे रक्त का ट्यूमर भी कहा जाता है, रक्त वाहिका के क्षतिग्रस्त होने के कारण होता है। लम्बे समय से हो रहे दबाव के कारण कृष इंजरी का होना। तीक्ष्ण और गंभीर या अभिघताज घाव, उन चोटों के कारण होते हैं जो टिस्यू को भंग कर देते हैं।
    फोड़े के लिए नीम सबसे अच्छा एंटीसेप्टिक होता है। इससे एंटी बैक्टीरिअल और एंटी माइक्रोबिअल गुण पाया जाता है, जो फोड़े के उपचार में फायदेमंद होता है। वास्तव में नीम हर तरह की त्वचा संबंधित समस्या के लिए फायदेमंद होता है। नीम को पीस कर इसका पेस्ट तैयार कर लें। अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा के संक्रमित हिस्से पर लगाएं। अगर आप चाहें तो नीम की पत्ती को उबाल कर भी इसका पेस्ट तैयार कर सकते हैं। पेस्ट को कुछ देर के लिए लगा रहने दें और फिर पानी से धो लें।
    अगर त्‍वचा छिल गई है या उस पर घाव बन गया है तो, त्‍वचा को तुरंत ही साफ पानी से धो कर उस पर शहद का थोड़ा सा लेप लगाएं। अगर त्‍वचा पर सूजन भी आ गई होगी तो वह भी शहद लगाने से चली जाएगी।
    आज दुनिया का हर दूसरा व्यक्ति चमड़ी से जुड़े किसी न किसी रोग से जूझ रहा है। खुजली,जलन, फुंसियां, घमोरियां, दराद, लाल-सफेद चकत्ते... जैसी कई समस्याएं हैं जिनसे हर कोई परेशान है या कभी न कभी रह चुका है। कई बार छूत से यानी इनसे संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने पर खुद को भी संक्रमण लगने से भी फोड़े- फुंसी या खुजली जैसी कोई त्वचा संबंधी समस्या हो सकती है।
    पता लगायें कि घाव कितना गहरा है: एक गेज या पट्टी के झीने कपड़े (gauge) के द्वारा घाव का परीक्षण करके पता लगायें कि आपको चिकित्सीय देखरेख की ज़रूरत है या इसे घर पर ठीक किया जा सकता है | अगर घाव बहुत गहरा और गंभीर हो तो हॉस्पिटल जाएँ और चिकित्सा विशेषज्ञ के द्वारा इलाज़ कराएँ | गंभीर ताज़े जख्म या घाव को ठीक से भरने के लिए इसमें टांके लगाने की ज़रूरत पड़ सकती है |[१] अगर आपके घाव के लिए इनमे से कुछ सही हो तो आपातकालीन कक्ष में जाएँ:
    घाव में गहराई में लाल मांसपेशियां या पीले वसा ऊतक दिखाई दे रहे हों |
    जब आप घाव के किनारों को पकड़ना छोड़ दें तो घाव खुला रह जाये |
    घाव जोड़ों के पास हो या अन्य अधिक गतिविधि वाले हिस्से के पास हो जहाँ यह बिना टाँके लगाये बंद नहीं रह सकेगा |
    *रक्तस्त्राव गंभीर रूप से हो रहा हो और 10 मिनट तक दबाने के बाद भी बंद न किया जा सकता हो |[२]
    घाव एक धमनी को कटकर खोल दें; जो एक मोटा, हाई ट्रैफिक वेन (high-traffic vein) युक्त घाव हो | धमनियों का रक्त सामान्यतः चटक लाल रंग का होता है | यह आवेग के साथ तेज़ी से आता है और इसके पीछे उच्च दबाव होता है
    *थोड़ी सी साफ रूई पानी में भिगो दें, फिर हथेलियों से दबाकर पानी निकाल दें। तवे पर थोड़ा सा सरसों का तेल डालें और उसमें इस रूई को पकायें। फिर उतारकर सहन कर सकने योग्य गर्म रह जाय तब इसे फोड़े पर रखकर पट्टी बाँध दें। ऐसी पट्टी सुबह-शाम बाँधने से एक दो दिन में फोड़ा पककर फूट जायेगा। उसके बाद सरसों के तेल की जगह शुद्ध घी का उपयोग उपरोक्त विधि के अनुसार करने से घाव भर के ठीक हो जाता है।






    * फोड़े फुंसियों पर वट वृक्ष या बरगद के पत्तों को गरम कर बाँधने से शीघ्र ही पक कर फूट जाते
    चीनी
    चीनी घाव से रिस रहे पानी को बिल्‍कुल सोख लेती है और इंफेक्‍शन को दूर रखती है।आयुर्वेद के अनुसार नीम की सूखी छाल को पानी के साथ घिसकर फोड़े फुंसी पर लेप लगाने से बहुत लाभ मिलता है और धीरे-धीरे इनकी समाप्ति हो जाती है।
    *जब तक समस्या से पूरी तरह से छुटकारा नहीं मिल जाता मीठा यानी शक्कर से बनी, बासी,तली-गली और अधिक मिर्च-मसालेदार चीजों को पूरी तरह से छोड़ दें।
    सिरका
    यह भले ही कटी त्‍वचा पर लगाने से जलता है मगर यह घाव को भरने में बिल्‍कुल भी समय नहीं लेता। इसकी एक बूंद रूई पर डाल कर घाव पर लगाइये।
    *फोड़े-फुंसी, दराद या खुजली वाले स्थान पर मूली के बीज पानी में पीस कर गरम करके लगाने से तत्काल लाभ होता होगा।
    *नीम की पत्तियों को पीस कर फोड़े-फुंसी, दराद या खुजली वाले स्थान पर लगाने और पानी के साथ पीने से बहुत सीघ्र लाभ होता है।


    Monday, August 22, 2016

    गुडहल के उपयोग,उपचार Benefits of Hibiscus


    गुडहल (फूल) के गुण :-
    गुडहल एक आम सा फूल है जो कि देखने में सुंदर होता है। ऐसे कई गुडहल के फूल हैं जो कि अलग-अलग रंगों में पाये जाते हैं जैसे, लाल, सफेद , गुलाबी, पीला और बैगनी आदि। यह सुंदर सा गुडहल का फूल स्वास्थ्य के खजाने से भरा पड़ा है। इसका इस्तेमाल खाने- पीने या दवाओं लिए किया जाता है। इससे कॉलेस्ट्रॉल, मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और गले के संक्रमण जैसे रोगों का इलाज किया जाता है। यह विटामिन सी, कैल्शियम, वसा, फाइबर, आयरन का बढिया स्रोत है।
    गुडहल के ताजे फूलों को पीसकर लगाने से बालों का रंग सुंदर हो जाता है।
    मुंह के छाले में गुडहल के पते चबाने से लाभ होता है।
    डायटिंग करने वाले या गुर्दे की समस्याओं से पीडित व्यक्ति अक्सर इसे बर्फ के साथ पर बिना चीनी मिलाए पीते हैं, क्योंकि इसमें प्राकृतिक मूत्रवर्धक गुण होते हैं।



    क्या आप जानते हैं कि गुडहल की चाय भी बनती है। जी हां, गुडहल की चाय एक स्वास्थ्य हर्बल टी है। तो आइये जानते हैं गुडहल के स्वास्थ्य और औषधीय लाभ के बारे में-
    गुडहल के गुण -
    *जपाकुसुम के पत्ते तथा फूल भी बाल झड़ने से रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। अब आप इन दोनों पदार्थों को मिलाकर बालों को स्वस्थ और सुन्दर बना सकते हैं। एक ताज़ा प्याज लें तथा इसे छीलें। इसके बाद इसे ग्राइंडर में डालकर इसका गूदा बनाएं। इस गूदे से पानी को निचोड़ें तथा रस को एक पात्र में रखें। इसमें जपाकुसुम के पत्तों का रस डालें तथा अच्छे से मिलाएं। इस पैक को बालों पर लगाएं और असर देखें।
    * गुडहल से बनी चाय को प्रयोग सर्दी-जुखाम और बुखार आदि को ठीक करने के लिये प्रयोग की जाती है।
    * गुड़हल के फूल का अर्क दिल के लिए उतना ही फायदेमंद है जितना रेड वाइन और चाय।
    *आंवला का प्रयोग सदियों से बालों के उपचार के लिए किया जाता रहा है। इस फल को कच्चा खाने से भी बालों को पोषण मिलता है तथा चेहरे पर चमक आती है। अगर आप आंवले के रस के साथ जपाकुसुम की पत्तियों का रस मिलाएं तो आपके बाल बिलकुल स्वस्थ हो जाएंगे तथा आपको बाल झड़ने की समस्या से भी मुक्ति मिलेगी।
    विज्ञानियों के मुताबिक चूहों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि गुड़हल का अर्क कोलेस्ट्राल को कम करने में सहायक है। इसलिए यह इनसानों पर भी कारगर होगा।
    *कैंसर से राहत
    गुड़हल की चाय का रोजाना सेवन करके आप कैंसर से बच सकते है। और यदि आपको कैंसर हो चुका है तो भी यह कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को भी धीमा कर देती है। लेकिन हां एक बात का ख्याल रहे की गुड़हल की चाय का सेवन करते समय अपनी ‘कैंसर की मेडिसिन’ नियमित रूप से लेना ना भूले|4. - डायटिंग करने वाले या गुर्दे की समस्याओं से पीडित व्यक्ति अक्सर इसे बर्फ के साथ पर बिना चीनी मिलाए पीते हैं, क्योंकि इसमें प्राकृतिक मूत्रवर्धक गुण होते हैं।
    *गुडहल के फूल के फायदे, आप अब जपाकुसुम की पत्तियों और फूलों के साथ जैतून का तेल मिलाकर इसे शैम्पू की तरह प्रयोग में ला सकते हैं। इस मिश्रण के लिए आपको ३ से ४ जपाकुसुम के फूल चाहिए होंगे। इस पेड़ की पत्तियों की भी एक समान पत्तियों की मात्रा लें। आप मूसल और मोर्टार की मदद से जपाकुसुम की पंखुड़ियों को मसल सकते हैं। एक बार ये हो जाने पर इस पेस्ट को महीन बनाने के लिए इसमें जैतून के तेल की कुछ बूँदें और थोड़ा पानी डालें। अब इस मास्क को बालों में इस तरह लगाएं कि बालों के जड़ों तक ये पहुँच जाए। इस पैक को १५ मिनट तक रखें और फिर धो दें।



    * अगर गुडहल को गरम पानी के साथ या फिर उबाल कर फिर हर्बल टी के जैसे पिया जाए तो यह हाई ब्लड प्रेशर को कम करेगा और बढे कोलेस्ट्रॉल को घटाएगा क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट होता है।
    *लोगों को अकसर बाल झड़ने के साथ बालों के पतले होने की समस्या भी पेश आती है। बालों को पतले होने से बचाने के लिए अदरक एक बेहतरीन विकल्प है। इस हेयर पैक को बनाने के लिए अदरक की जड़ का छोटा सा भाग लें। इसे पीसें तथा इसका रस निकालें। अब जपाकुसुम के फूल से रस निकालें तथा इसे अदरक के रस के साथ मिलाएं। इस मिश्रण को बालों पर अच्छे से लगाएं जिससे एक भी बाल ना छूटें। अगर आप इसका प्रयोग रोज़ाना करें तो बालों का दोबारा उगना भी संभव है।
     *गुडहल का फूल काफी पौष्टिक होता है क्योंकि इसमें विटामिन सी, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट होता है। यह पौष्टिक तत्व सांस संबन्धी तकलीफों को दूर करते हैं। यहां तक की गले के दर्द को और कफ को भी हर्बल टी सही कर देती है।
    *स्मरण शक्ति बढ़ाये
    गुड़हल की पत्तियां शरीर की एनर्जी और इम्युनिटी लेवल को बढ़ाती है। गुडहल के पत्ते या इसके फूलों को सुखाकर पीस लें। अब इसके एक चम्मच पाउडर में एक चम्मच मिर्श्री को मिलाकर पानी के साथ लेने से स्मरण शक्ति तथा स्नायुविक शक्ति बढ़ती है।
     गुडहल के फूलों का असर बालों को स्वस्थ्य बनाने के लिये भी होता है। इसे पानी में उबाला जाता है और फिर लगाया जाता है जिससे बालों का झड़ना रुक जाता है। यह एक आयुर्वेद उपचार है। इसका प्रयोग केश तेल बनाने मे
    भी किया जाता है।
    *अगर गुडहल को गरम पानी के साथ या फिर उबाल कर हर्बल टी के जैसे पिया जाए तो यह हाई ब्लड प्रेशर को कम करेगा और बढे कोलेस्ट्रॉल को घटाएगा क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट होता है।
    * गुडहल के पत्ते तथा फूलों को सुखाकर पीस लें। इस पावडर की एक चम्मच मात्रा को एक चम्मच मिश्री के साथ पानी से लेते रहने से स्मरण शक्ति तथा स्नायुविक शक्ति बढाती है।
    *कोलेस्ट्रोल रखे नियंत्रित-
    गुड़हल के फूल दिल की रक्षा करने के लिए बेहद ही फायदेमंद होते है। यह कॉलेस्ट्रोल, मधुमेह से सम्भंदित बीमारियाँ और रक्तचाप आदि जो की हृदय रोग का कारण बनते है इन सभी परेशानियों को दूर करने में मदद करता है|
    ॰* गुडहल के फूलों को सुखाकर बनाया गया पावडर दूध के साथ एक एक चम्मच लेते रहने से रक्त की कमी दूर होती है |



    प्रकृति में ऐसी कई जड़ीबूटियां हैं जो बालों को स्वस्थ रखने में काफी अहम भूमिका निभाते हैं। इसका एक और उदाहरण जपाकुसुम और करी पत्तों का मिश्रण है। आप जपाकुसुम की पत्तियों, करी पत्तों और नारियल तेल की कुछ बूँदें मिलाकर एक पेस्ट बनाएं। इसे अच्छे से इस तरह मिलाएं कि एक भी पत्ती न दिखे। एक बार महीन पेस्ट बन जाने पर इसे बालों में अच्छी तरह लगाएं और किसी भी हिस्से को न छोड़ें। क्योंकि इसमें नारियल तेल मिला हुआ है, अतः यह बालों की मसाज काफी अच्छे से करता है।
     यदि चेहरे पर बहुत मुहासे हो गए हैं तो लाल गुडहल की पत्तियों को पानी में उबाल कर पीस लें और उसमें शहद मिला कर त्वचा पर लगाए |
    *किडनी और पथरी की समस्या-
    गुड़हल के पत्तो से बनी चाय विदेशो में हर्बल टी के रूप में इस्तेमाल की जाती है। किडनी के रोगियों के लिए गुड़हल की चाय लाभकारी होती है| इससे किडनी की पथरी भी दूर होती है।

    Saturday, July 30, 2016

    ग्रीन काफी के फायदे



    ग्रीन टी के बारे में तो सब जानते हैं कि ग्रीन टी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है। ग्रीन टी के कई फायदे भी हैं जैसे आप ग्रीन टी के सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ सकते हैं। ग्रीन टी से आप तरोताजा और हेल्दी रह सकते हैं। लेकिन क्‍या आप ग्रीन कॉफी के फायदों के बारे में जानते हैं। आइए हम आपको इसके फायदों के बारे में जानकारी देते हैं।

    ग्रीन कॉफी और वजन नियंत्रण

    हाल ही में आए शोधों के मुताबिक नई ग्रीन कॉफी ईजाद की गई है। इतना ही नहीं ग्रीन कॉफी को लेकर शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि सुबह-सुबह खाली पेट यानी नाश्ते से पहले ग्रीन कॉफी का नियमित रूप से सेवन किया जाए तो आप आसानी से अपना वजन कम कर सकते हैं।
    शोधों के मुताबिक, यदि आप अपने वजन से बहुत परेशान हैं लेकिन आप डायट चार्ट भी फॉलो नहीं करना चाहते तो आपको ग्रीन कॉफी का सेवन करना चाहिए।
    ग्रीन कॉफी का सबसे बड़ा फायदा है कि आप एक महीने में ही लगभग 2 किलोग्राम वजन आसानी से कम कर सकते हैं। इसके लिए आपको कोई अतिरिक्त मेहनत भी नहीं करनी होगी।
    यदि आप नियमित रूप से ग्रीन कॉफी यानी हरी चाय का सेवन करते हैं तो ग्रीन कॉफी में मौजूद क्लोरोजेनिक एसिड आपकी आहार नली में शुगर की मात्रा को कम कर देता है। इसके साथ ही ग्रीन कॉफी से आपके फैट के खत्म होने के प्रक्रिया एकदम तेज हो जाती है।
    शोधों के मुताबिक, जो लोग नियमित रूप से ग्रीन कॉफी का सेवन करते हैं, निश्चित रूप से उनका दो सप्ताह में लगभग डेढ़ किलोग्राम तक वजन कम हो सकता है लेकिन यदि एक महीने तक रोजाना ग्रीन कॉफी का सेवन किया जाएं तो आसानी से करीब 2 किलोग्राम वजन कम करने में आसानी होगी।
    शोधों में इस बात का भी खुलासा हुआ कि ग्रीन काफी कुछ ग्रीन टी के समान है। लेकिन ग्रीन कॉफी इसलिए भी अधिक फायदेमंद है क्योंकि ग्रीन कॉफी के कच्चे और बिना भुने स्वरूप में जो तत्व मौजूद होते हैं उनसे पाचन क्षमता ठीक रहती है और ठीक इसके विपरीत इन्हीं तत्वों से वजन नियंत्रण में भी मदद मिलती है।
    रिसर्च के दौरान यह भी बात सामने आई है कि यदि ग्रीन कॉफी के कच्चे और बिना भुने स्वरूप को भूना जाएगा तो इससे असरकारक तत्व नष्ट हो जाते हैं। यही कारण है कि जो लोग सामान्य कॉफी पीने के शौकीन हैं उनका वजन कम नहीं होता क्योंकि इसे असरकारक तत्व भूनने के दौरान खत्म हो चुके होते हैं।



    Saturday, July 16, 2016

    ग्रीन टी के फायदे नुकसान Advantages and disadvantages of green tea


    ग्रीन टी मे कई स्वास्थ्यवर्धक गुण पाए जाते हैं। इसके नियमित सेवन से वज़न घटाने, त्वचा को सुंदर बनाने, तेज़ स्मरण शक्ति, पाचन और शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र मज़बूत बनाने में मदद मिलती है। यह दांतों की सड़न, ऑर्थराइटिस, किडनी के रोग, दिल के रोग और अनियमित रक्तचाप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन इसका अत्यधिक सेवन फ़ायदे की जगह नुक़सान का सबब बन सकता है।

    ‘अति’अच्छी नहीं-
    हालांकि, ग्रीन टी में ज्यादा मात्रा में कैफीन नहीं होता, फिर भी एक सीमा के बाद इसका सेवन अनिद्रा, चिंता, चिड़चिड़ापन और शरीर में आयरन की कमी के लिए ज़िम्मेदार हो सकता है। जानकारी के मुताबिक, दिन में 2-3 कप तक ही ग्रीन टी पीनी चाहिए। इससे ज्यादा पीने से उन लोगों को परेशानी हो सकती है, जो कैफीन की ज्यादा मात्रा के आदी नहीं होते हैं।
    गर्भावस्था में करें नज़रअंदाज़-
    ग्रीन टी में मौजूद कैफीन व टॉनिक एसिड गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु के लिए अच्छा नहीं
    होता। गर्भवस्था के दौरान इसका सेवन न करें।
    कब न पिएं...
    1-बासी ग्रीन टी- लंबे समय तक ग्रीन टी रखे रहने से उसमें मौजूद विटामिन और उसके एटी-ऑक्सीडेंट गुण कम होने लगते हैं। इतना ही नहीं, एक सीमा के बाद इसमें बैक्टीरिया भी पलने
    लगते हैं। इसलिए एक घंटे से पहले बनी ग्रीन टी क़तई न पिएं।
    2-खाली पेट नहीं-सुबह ख़ाली पेट ग्रीन टी पीने से एसिडिटी की शिकायत हो सकती है। इसके बजाय सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुना सौंफ का पानी पीने की आदत डालें। इससे पाचन सुधरेगा और शरीर के अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने में मदद मिलेगी।
    3-भोजन के तुरंत बाद- जल्दी वज़न घटाने के इच्छुक भोजन के तुरंत बाद ग्रीन टी पीते है, जबकि इससे पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
    देर रात पीना
    कैफीन के सेवन के बाद दिमाग़ सक्रिय होता है और नींद भाग जाती है। इसलिए देर रात या सोने से ठीक पहले ग्रीन टी का सेवन न करें।
    दवाई के बाद नहीं- किसी भी तरह की दवा खाने के तुरंत बाद ग्रीन टी न पिएं।
    उबालना नहीं है
    उबलते पानी में ग्रीन टी कभी ना डालें। इससे एसिडिटी की समस्या हो सकती है। पहले पानी उबाल लें, फिर आंच से उतारकर उसमें ग्रीन टी की पत्तियां या टी बैग डालकर ढंक दें। दो मिनट बाद इसे छान लें या टी बैग अलग करें।
    कब पिएं-
    1-
    वज़न कम करे
    एक्सरसाइज़ और वर्कआउट से भी अगर आपका वज़न कम नहीं हो रहा, तो आप दिन में ग्रीन टी पीना शुरू करें। ग्रीन टी एंटी-ऑक्सीडेंट्स होने की वजह से बॉडी के फैट को खत्म करती है। एक स्टडी के अनुसार, ग्रीन टी बॉडी के वज़न को स्थिर रखती है। ग्रीन टी से फैट ही नहीं, बल्कि मेटाबॉलिज्म भी स्ट्रॉन्ग रहता है और डाइजेस्टिव सिस्टम की परेशानियां भी खत्म होती हैं।
    2- स्ट्रेस को कम करना
    स्ट्रेस में चाय दवाई का काम करती है। चाय पीने से आपको आराम मिलता है। इसके अलावा, चाय की सूखी पत्तियों को तकिए के साइड में रखकर सोने से भी सिर दर्द कम होता है। सूखी चाय की पत्ती की महक माइंड को रिलैक्स करती है।



    3-सनबर्न से बचने के लिए
    चेहरे पर सनस्क्रीन लगाने पर भी सनबर्न की दिक्कत अगर खत्म नहीं होती तो आप नहाने के पानी में चाय की पत्ती डाल लें और तब नहाएं। इससे आपको सनबर्न से होने वाली जलन, खुजली आदि से राहत मिलेगी।
    4-आंखों की सूजन को कम करने के लिए
    चाय पत्ती आंखों की सूजन और थकान उतारने के लिए परफेक्ट उपाय है। इसके लिए आपको मशक्कत करने की ज़रूरत नहीं, बस दो टी बैग्स लीजिए और हल्के गर्म पानी में गीला करके 15 मिनट के लिए आंखों पर रखिए। इससे आपकी आंखों में होने वाली जलन और सूजन कम हो जाती है। चाय में प्राकृतिक एस्ट्रिजेंट होता है, जो आपकी आंखों की सूजन को कम करता है। टी बैग लगाने से डार्क सर्कल भी खत्म होते हैं।
    5-मुहासे की समस्या को कम करना
    चाय एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल, एंटी-ऑक्सीडेंट होने के कारण सूजन को कम करती है। चेहरे के मुहांसों को दूर करने के लिए ग्रीन टी परफेक्ट है। चेहरे से मुहांसे खत्म करने के लिए रात में सोने से पहले ग्रीन टी की पत्तियां चेहरे पर लगाएं। खुद को फिट रखने के लिए सुबह ग्रीन टी पिएं। इससे चेहरे पर प्राकृतिक चमक और सुंदरता बनी रहती है।
    6- त्वचा की सुरक्षा
    ग्रीन टी त्वचा  के लिए बेहद ही फायदेमंद होती है। इससे आपकी स्किन टाइट रहती है। इसमें बुढ़ापा रोकने  के तत्व  भी होते हैं। ग्रीन टी में एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-इन्फ्लामेंटरी एलिमेंट्स एक साथ होने की वजह से यह स्किन को प्रोटेक्ट करती है। ग्रीन टी से स्क्रब बनाने के लिए शकर , थोड़ा पानी और ग्रीन टी को अच्छे से मिलाएं। यह मिश्रण आपकी त्वचा  को पोषण करने के साथ-साथ मुलायम  बनाएगा और स्किन के हाइड्रेशन लेवल को भी बनाए रखेगा।
    7-बालों के लिए फायदेमंद

    चाय बालों के लिए भी एक अच्छे कंडिशनर का काम करती है। यह बालों को नेचुरल तरीके से नरिश करती है। चाय पत्ती को उबाल कर ठंडा होने पर बालों में लगाएं। इसके अलावा, आप रोज़मेरी और सेज हरा (मेडिकल हर्बल) के साथ ब्लैक टी को उबालकर रात भर रखें और अगले दिन बालों में लगाएं। चाय बालों के लिए कुदरती कंडिशनर है।
    8-पैरों की दुर्गंध दूर करने के लिए
    ग्रीन टी की महक स्ट्रॉन्ग और पावरफुल होती है। इसकी महक को आप पैरों की दुर्गंध दूर करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। यूज़ की हुई चाय पत्ती को पानी में डाल दें और उसमें पैरों को 20 मिनट के लिए डालकर रखें। इससे चाय आपके पैरों के पसीने को सोख लेती है और दुर्गंध को खत्म करती है।


    9- नव विवाहितों के लिए
    ग्लोइंग स्किन, हेल्दी लाइफ के अलावा ग्रीन टी आपकी मैरिड लाइफ में भी महक बिखेरती है। ग्रीन टी में कैफीन, जिनसेंग (साउथ एशियन और अमेरिकी पौधा) और थियेनाइन (केमिकिल) होता है, जो आपके सेक्शुअल हार्मोन्स को बढ़ाता है। खासकर महिलाओं के लिए ये काफी सही है। इसलिए अगर आपको भी मैरिड लाइफ हैप्पी चाहिए तो रोज़ ग्रीन टी पिएं।
    10- बारीश के मौसम मे चाय का लुत्फ
    मसाला चाय- मानसून के समय में मसाला चाय का अपना अलग ही मज़ा है। यह देसी चाय है, जो
    ज़्यादातर भारतीय पसंद करते हैं। इस चाय में इलायची, अदरक, पुदीना पत्ती और लौंग होती है। यह हेल्थ के लिए भी अच्छी होती है।







    Friday, July 15, 2016

    शतावरी के फायदे Health benefits of asparagus




    शतावरी (asparagus) एक ऐसा आयुर्वेदिक हर्ब है जो पुरूष और महिला दोनों के सेक्स जीवन को उन्नत करने में मदद करती है। आजकल के व्यस्त जीवन और खराब जीवनशैली के कारण लोगों में सेक्स करने की इच्छा धीरे-धीरे कम होती जा रही है। जिसका सीधा प्रभाव वैवाहिक जीवन पर पड़ने लगा है।
    *इस समस्या से राहत दिलाने में शतावरी बहुत मदद करती है। यह पुरूष और महिला दोनों में सेक्स करने की इच्छा को जागृत तो करती ही है साथ ही उसको उन्नत भी करती है। यदि आपको उच्च रक्तचाप की बीमारी है या गर्भवती हैं तो शतावरी का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह ले लें
    *आज हम आपको एक झाड़ीनुमा लता के बारे में बताते है , जिसमें फूल मंजरियों में एक से दो इंच लम्बे एक या गुच्छे में लगे होते हैं और फल मटर के समान पकने पर लाल रंग के होते हैं ..नाम है "शतावरी" ..I
    आपने विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों में इसके प्रयोग को अवश्य ही जाना होगा ..अगर नहीं तो हम आपको बताते हैं, इसके प्रयोग को ..! आयुर्वेद के आचार्यों के अनुसार , शतावर पुराने से पुराने रोगी के शरीरको रोगों से लड़ने क़ी क्षमता प्रदान करता है ...I इसे शुक्रजनन,शीतल ,मधुर एवं दिव्य रसायन माना गया है I महर्षि चरक ने भी शतावर को बल्य और वयः स्थापक ( चिर यौवन को बरकार रखने वाला) माना है.I आधुनिक शोध भी शतावरी क़ी जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मान चुके हैं I
    अब हम आपको शतावरी के कुछ आयुर्वेदिक योग क़ी जानकारी देंगे ..जिनका औषधीय प्रयोग चिकित्सक के निर्देशन में करना अत्यंत लाभकारी होगा |
    *शतावरी के कुछ जड़ों को पीसकर पावडर बना लें। एक कप में उबलता हुआ पानी लें और उसमें इस पावडर को डालकर कुछ देर तक उबालकर काढ़ा जैसा बना लें। फिर थोड़ा-सा ठंडा होने पर काढ़ा को पी लें। इस काढ़ा के सेवन से आपके सेक्स जीवन में कुछ हद तक सुधार ज़रूर आएगा।




    *यदि आप नींद न आने क़ी समस्या से परेशान हैं तो बस शतावरी क़ी जड़ को खीर के रूप में पका लें और थोड़ा गाय का घी डालें ,इससे आप तनाव से मुक्त होकर अच्छी नींद ले पायेंगे ..!
    *शतावरी एक चमत्कारी औषधि है जिसे कई रोगों के इलाज में उपयोग किया जाता है। खासतौर पर सेक्स शक्ति को बढ़ाने में इसका विशेष योगदान होता है। यह एक झाड़ीनुमा पौधा होता है, जिसमें फूल व मंजरियां एक से दो इंच लम्बे एक या गुच्छे में लगे होते हैं और मटर जितने फल पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं।
    *आयुर्वेद के मुताबिक, शतावर पुराने से पुराने रोगी के शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। इसके अलावा इसका उपयोग विभिन्न नुस्खों में व्याधियों को नष्ट कर शरीर को पुष्ट और सुडौल बनाने में किया जाता है।
    *शतावरी क़ी ताज़ी जड़ को यवकूट करें ,इसका स्वरस निकालें और इसमें बराबर मात्रा में तिल का तेल मिलाकर पका लें,हो गया मालिश का तेल तैयार |.इसे माइग्रेन जैसे सिरदर्द में लगायें और लाभ देखें I
    *यदि रोगी खांसते-खांसते परेशान हो तो शतावरी चूर्ण - 1.5 ग्राम ,वासा के पत्ते का स्वरस 2.5 मिली ,मिश्री के साथ लें और लाभ देखें I
    *प्रसूता स्त्रियों में दूध न आने क़ी समस्या होने पर शतावरी का चूर्ण -पांच ग्राम गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है ..!
    *यदि पुरुष यौन शिथिलता से परेशान हो तो शतावरी पाक या केवल इसके चूर्ण को दूध के साथ लेने से लाभ मिलता है I
    *शतावरी को शुक्रजनन, शीतल, मधुर एवं दिव्य रसायन माना जाता है। महर्षि चरक ने भी शतावरी को चिर यौवन को कायम रखने वाला माना था। आधुनिक शोध भी शतावरी की जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मानते हैं। शतावरी के लगभग 5 ग्राम चूर्ण को सुबह और रात के समय गर्म दूध के साथ लेना लाभदायक होता है। इसे दूध में चाय की तरह पकाकर भी लिया जा सकता है।
    * यह औषधि स्त्रियों के स्तनों को बढ़ाने में मददगार होती है। इसके अलावा शतावरी के ताजे रस को 10 ग्राम की मात्रा में लेने से वीर्य बढ़ता है।
    *शतावरी मूल का चूर्ण 2.5 ग्राम को मिश्री 2.5 ग्राम के साथ मिलाकर पांच ग्राम मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से प्रमेह, प्री-मैच्योर इजेकुलेशन (स्वप्न-दोष) में लाभ मिलता है। यही नहीं शतावरी की जड़ के चूर्ण को दूध में मिलाकर सेवन करने से धातु वृद्धि भी होती है।
    *यदि रोगी को मूत्र या मूत्रवह संस्थान से सम्बंधित विकृति हो तो शतावरी को गोखरू के साथ लेने से लाभ मिलता है I
    *शतावरी के पत्तियों का कल्क बनाकर घाव पर लगाने से भी घाव भर जाता है ...!




    यदि रोगी स्वप्न दोष से पीड़ित हो तो शतावरी मूल का चूर्ण -2.5 ग्राम ,मिश्री -2.5 ग्राम को एक साथ मिलाकर .*पांच ग्राम क़ी मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से प्रमेह ,प्री -मेच्युर -इजेकुलेशन (स्वप्न-दोष ) में लाभ मिलता है I
    *गाँव के लोग इसकी जड़ का प्रयोग गाय या भैंसों को खिलाते हैं, तो उनकी दूध न आने क़ी समस्या में लाभ मिलता पाया गया है ...अतः इसके ऐसे ही प्रभाव प्रसूता स्त्रियों में भी देखे गए हैं I
    *शतावरी के जड के चूर्ण को पांच से दस ग्राम क़ी मात्रा में दूध से नियमित से सेवन करने से धातु वृद्धि होती है !
    वातज ज्वर में शतावरी के रस एवं गिलोय के रस का प्रयोग या इनके क्वाथ का सेवन ज्वर (बुखार ) से मुक्ति प्रदान करता है ..I
    *शतावर पुराने से पुराने रोगी के शरीर को रोगों से लडऩे की क्षमता प्रदान करता है। इसे शुक्रजनन,शीतल ,मधुर एवं दिव्य रसायन माना गया है। महर्षि चरक ने भी शतावरी को चिर यौवन को बरकार रखने वाला माना है। आधुनिक शोध भी शतावरी की जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मान चुके हैं। अब हम आपको शतावरी के कुछ आयुर्वेदिक योग की जानकारी देंगे, जिनका औषधीय प्रयोग चिकित्सक के निर्देशन में करना अत्यंत लाभकारी होगा।
    * यदि आप नींद न आने की समस्या से परेशान हैं तो बस शतावरी की जड़ को खीर के रूप में पका लें उसमें थोड़ा गाय का घी डालें और ग्रहण करें। इससे आप तनाव से मुक्त होकर अच्छी नींद ले पाएंगे।
    *शतावरी की ताजी जड़ को मोटा-मोटा कुट लें, इसका स्वरस निकालें और इसमें बराबर मात्रा में तिल का तेल मिलाकर पका लें।इस तेल को माइग्रेन जैसे सिरदर्द में लगाएं और लाभ देखें।
    *यदि रोगी खांसते-खांसते परेशान हो तो शतावरी चूर्ण - 1.5 ग्राम, वसा के पत्ते का स्वरस 2.5 मिली, मिश्री के साथ लें और लाभ देखें।
    *प्रसूता स्त्रियों में दूध न आने की समस्या होने पर शतावरी का चूर्ण -पांच ग्राम गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है।
    -पुरुष यौन शिथिलता से परेशान हो तो शतावरी पाक या केवल इसके चूर्ण को दूध के साथ लेने से लाभ मिलता है।
    *यदि रोगी को मूत्र से सम्बंधित विकृति हो तो शतावरी को गोखरू के साथ लेने से लाभ मिलता है।
    * शतावरी मूल का चूर्ण -2.5 ग्राम, मिश्री -2.5 ग्राम को एक साथ मिलाकर पांच ग्राम क़ी मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से प्रमेह, प्री -मैच्योरइजेकुलेशन (स्वप्न-दोष ) में लाभ मिलता है।
    *शतावरी के जड़ के चूर्ण को पांच से दस ग्राम की मात्रा में दूध के साथ नियमित रूप से सेवन करने से धातु वृद्धि होती है।
    *वातज ज्वर में शतावरी के रस एवं गिलोय के रस का सेवन करने से ज्वर (बुखार) से मुक्ति मिलती है।
    -शतावरी के रस को शहद के साथ लेने से जलन, दर्द एवं अन्य पित्त से सम्बंधित बीमारियों में लाभ मिलता है।
    शतावरी के रस को शहद के साथ लेने से जलन ,दर्द एवं अन्य पित्त से सम्बंधित बीमारियों में लाभ मिलता है ..
    ..शतावरी हिमतिक्ता स्वादीगुर्वीरसायनीसुस्निग्ध शुक्रलाबल्यास्तन्य मेदोस ग्निपुष्टिदा |चक्षु स्यागत पित्रास्य,गुल्मातिसारशोथजित...उदधृत किया है ..तो शतावरी एक बुद्धिवर्धक,अग्निवर्धक,शुक्र दौर्बल्य को दूर करनेवाली स्तन्यजनक औषधि है|


    Thursday, July 14, 2016

    शरीर मे शौथ के कारण और उपचार


    हमारे  पूरे शरीर में या फिर किसी अंग विशेष में सूजन आने के लक्षण प्रकट होते हैं| आमतौर पर हम इसकी अनदेखी करते हैं या फिर दर्द निवारक तेल व मरहम से इसे दूर करने की कोशिश करते हैं। पर हर बार यह लापरवाही ठीक नहीं। यह सूजन शरीर में छिपी किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकती है। 

    चेहरे या शरीर के किसी हिस्से में लंबे समय से बनी हुई सूजन को देख कर भी अनदेखा करना समझदारी नहीं है। यदि शरीर में बार-बार पानी एकत्र हो रहा है तो यह हृदय, लिवर या किडनी की किसी समस्या का संकेत हो सकता है। ‘जब शरीर में अतिरिक्त फ्लूइड यानी पानी इकट्ठा हो जाता है तो शरीर में सूजन आने लगती है, जिसे एडिमा कहा जाता है। जब यह सूजन टखनों, पैरों और टांगों में आती है तो उसे पेरिफेरल एडिमा कहते हैं। फेफड़ों की सूजन पलमोनरी एडिमा और आंखों के पास आने वाली सूजन पेरिऑरबिटल एडिमा कहलाती है। शरीर के ज्यादातर भागों में दिखायी पड़ने वाली सूजन को मैसिव एडिमा कहा जाता है। इस स्थिति में मसूड़ों, पेट, चेहरे, स्तन, लसिका ग्रंथि व जोड़ों आदि सभी भागों पर सूजन आ जाती है। ज्यादा देर तक खड़े रहने या बैठने की वजह से होने वाली सूजन को ऑर्थोस्टेटिक एडिमा कहा जाता है। हल्की सूजन ज्यादातर कोई बड़ी समस्या नहीं होती, लेकिन अधिक समय तक रहने वाली ज्यादा सूजन गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है।

    पेट या शरीर के किसी भी अंग में एक सप्ताह से ज्यादा सूजन रहने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी हो जाता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ऐसे मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं। ऐसा इसलिए भी कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में वसा का अनुपात ज्यादा होता है और वसा कोशिकाएं अतिरिक्त पानी संचित कर लेती हैं। नियमित व्यायाम व खान-पान में लापरवाही भी एडिमा की स्थिति को अधिक बढ़ा सकती है।’

    सूजन का कारण 

    , दिल से जुड़ी बीमारियों, किडनी की समस्या, असंतुलित हॉरमोन और स्टेरॉयड दवाओं के सेवन की वजह से एडिमा की समस्या हो सकती है। दरअसल इन सभी स्थितियों में हमारी किडनी सोडियम को संचित कर लेती है। हालांकि कुछ महिलाओं को मासिक धर्म के एक सप्ताह पहले भी कुछ ऐसे ही लक्षण नजर आते हैं। इस दौरान एस्ट्रोजन हारमोन की मात्रा बढ़ जाती है, जिसकी वजह से किडनी ज्यादा पानी रोकना शुरू कर देती है। हमारा अनियमित भोजन व जीवनचर्या भी एडिमा की बड़ी वजह है। 

    पैरों में सूजन 

    पैरों में सूजन के भी कई कारण हो सकते हैं, जैसे मोच, लंबी दूरी तक सैर करना, ज्यादा देर तक खड़े रहना, व्यायाम या फिर खेल-कूद आदि। लेकिन अचानक एक या दोनों पैर में भारी सूजन, लाली और गर्माहट तथा चलने-फिरने पर पैर में खिंचाव जैसे लक्षण डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डीवीटी) की परेशानी हो सकते हैं। इसमें टांगों की नसों में खून के कतरों का जमाव होता है। अक्सर लोग अज्ञानता के कारण इसे नस में खिंचाव, चोट, थकान, सामान्य संक्रमण या फाइलेरिया मान कर इलाज कराने लगते हैं। सामान्य डॉक्टर भी इसे फाइलेरिया, सियाटिका अथवा नस चढ़ना मान बैठते हैं।

    फाइलेरिया के इलाज के नाम पर कई सप्ताह तक मरीज को दवाएं दी जाती हैं या फिर सही रोग पकड़ में न आने पर रोगी के पैर पर वजन लटकाने की सलाह दी जाती है, जिससे समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं डीवीटी की शिकार अधिक होती हैं। नियमित व्यायाम न करना, गर्भ निरोधक दवाओं का अधिक इस्तेमाल और हारमोन असंतुलन के कारण भी ऐसा होता है। लंबे समय तक ऊंची एड़ी वाले फुटवियर पहनने से भी यह आशंका बढ़ जाती है। पैरों में लंबे समय तक रहने वाली सूजन हृदय रोगों की आशंका को भी दर्शाती है। पैरों की सूजन को कम करने के लिए गरम पानी में नमक डाल कर उसमें अपने पैरों को डुबोएं। सोने से पहले पैरों की गरम तेल से मालिश करें। इससे सूजन व दर्द में कमी आएगी। प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करने से भी रक्त संचार नियमित होता है, जो सूजन व दर्द में राहत देता है। 

    हाथों में सूजन




    हाथों व उंगलियों में सूजन एक आम परेशानी है, खासकर बढ़ती आयु में जब शरीर का मेटाबॉलिज्म घटने लगता है तो यह समस्या आमतौर पर देखी जाती है। ऐसा एडियोपैथिक एडिमा के कारण होता है। ऐसे में हाथों के कुछ सरल व्यायाम और स्ट्रेचिंग सहायक हो सकते हैं। हालांकि कुछ स्थितियों में यह सूजन लिवर व किडनी रोग का संकेत भी होती है। इसके अतिरिक्त हृदय रोग, गठिया, रक्त विकार, हाइपो थाइरॉएड, रूमेटाइड अर्थराइटिस में यह एक महत्वपूर्ण संकेत है। इस स्थिति में शरीर के विभिन्न जोड़ों में सूजन आ जाती है। त्वचा संक्रमण के कारण भी ऐसा होता है।

    चेहरे पर सूजन

    इसके कई कारण हो सकते हैं, मसलन फ्लूइड का इकट्ठा होना, चोट लगना, संक्रमण या फिर कैंसर। यह सूजन गाल, आंख व होठों के पास भी होती है। इस तरह की सूजन को मेडिकल साइंस में फेशियल एडिमा कहते हैं। यदि चेहरे की सूजन थोड़े समय के लिए होती है तो ऐसा संक्रमण के कारण हो सकता है, पर बार-बार ऐसा होने के साथ-साथ चेहरा लाल, बुखार या सांस लेने में परेशानी होती है तो यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टरी सलाह लेकर पूरा उपचार करवाएं।




    जीभ में सूजन
    जीभ में कई कारणों से सूजन आ सकती है, जैसे दवाओं का साइड इफेक्ट, एलर्जी, हारमोन थेरेपी। इसे एंजियोडिमा कहते हैं। इस स्थिति में संक्रमण त्वचा के भीतर गहराई में पहुंच जाता है। हमारी जीभ एपिथेलियम नाम की कोशिकाओं से बनी होती है। इसकी सतह पर बने टेस्ट बड्स से ही हमें खट्टे, मीठे या कड़वेपन का एहसास होता है। जब जीभ पर सूजन आ जाती है तो टेस्ट बड्स भी सूज जाते हैं, जिसकी वजह से सांस लेने में भी परेशानी होती है। इस सूजन की अनदेखी न करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

    आंखों की सूजन
    आंखों की सूजन ज्यादातर संक्रमण, एलर्जी, कॉर्नियल अल्सर, कंजक्टिवाइटिस, स्टाई, ट्यूमर बनने या वायरल इन्फेक्शन के कारण होती है। आंखें शरीर का सबसे जरूरी व नाजुक अंग होती हैं। उनके उपचार में कोई जोखिम न लें। डॉक्टर की सलाह से स्टेरॉयड या एंटीबायोटिक आई ड्रॉप की मदद से आंखों की सूजन को ठीक किया जा सकता है।

    पेट में सूजन
    पेट में सूजन कब्ज, गैस, काबरेनेटेड ड्रिंक्स और फूड एलर्जी के कारण हो सकती है। अधिक फास्ट व जंक फूड के सेवन से भी ऐसा होता है। हाई प्रोसेस्ड फूड में सोडियम की मात्रा अधिक और फाइबर कम होता है, जो पेट में भारीपन और सूजन का कारण बन सकता है। इसलिए डिब्बा बंद आहार या प्रोसेस्ड आहार लेते समय सोडियम की मात्रा जांच लें। अधिक सोडियम का शरीर में जाना सूजन का कारण बन जाता है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर, डायबिटीज की दवाओं व हारमोनल थेरेपी की वजह से भी सूजन देखने को मिलती है। पेट की सूजन को दूर करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। खाने के बाद अजवायन में काला नमक मिला कर खाने से पाचन एकदम दुरुस्त हो जाता है और सूजन भी नहीं होती। अधिक शराब पीने वालों का लिवर सिकुड़ने की वजह से भी पेट पर सूजन आ जाती है। पेशाब पीला आने लगता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

    सूजन को कम करने के उपाय
    सामान्य स्थितियों में जीवनशैली व खान-पान में बदलाव करके सूजन की समस्या से राहत पायी जा सकती है। *हरी सब्जियों व फल के सेवन से विटामिन बी-वन की कमी पूरी होती है। प्रोटीन के लिए दूध, सोयाबीन व दाल का सेवन लाभकारी होता है। इनके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। खून की कमी पूरी होती है, जो सूजन का एक मुख्य कारण है।
    *एडिमा की स्थिति में शराब और कैफीनयुक्त चीजों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है और पानी के अवशोषण की समस्या बढ़ जाती है। हर्बल चाय पिएं। खासतौर पर अजवायन की चाय सबसे अच्छी मानी जाती है।
    *शरीर की जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन भी पानी के अवशोषण की समस्या को बढ़ा सकता है। अधिक नमकयुक्त चीजों के सेवन से बचें।
    *मोटापा होने पर सबसे पहले थोड़ा वजन घटाएं। एक कैलोरी चार्ट बनाएं और उसके आधार पर खान-पान की सूची तैयार करें।
    *रोजाना एक्सरसाइज करने की आदत डालें। इससे पसीने के रूप में शरीर का अतिरिक्त पानी निकल जाता है। त्वचा भी अच्छी रहती है। घूमना, टहलना, तैराकी या नृत्य, अपनी सुविधानुसार आप किसी भी व्यायाम का चुनाव कर सकते हैं।
    *शरीर की नसों, तंत्रिकाओं और मांसपेशियों के कामकाज को नियंत्रित करने में सोडियम के साथ पोटैशियम का भी योगदान होता है। पोटैशियम के लिए रोजाना कम से कम पांच फल और सब्जियों का सेवन जरूर करें। अखरोट, बादाम, मूंगफली आदि भी पोटैशियम के अच्छे स्रोत हैं।
    * शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखने में विटामिन बी-6 मददगार है। ब्राउन राइस व रेड मीट विटामिन बी-6 के अच्छे स्रोत हैं।
    *विटामिन बी-5, कैल्शियम और विटामिन डी सूजन को कम करने में असरकारी हैं। नियमित रूप से कुछ देर धूप का सेवन करें।
    *खाने में कैल्शियम के स्तर की जांच करें। रोजाना टोंड दूध पिएं। दही, मछली, हरी पत्तेदार सब्जियां और अंजीर खाएं।