Saturday, December 3, 2016

छिपकली भगाने के टिप्स

   

 घर की किसी भी दीवार पर छिपकली घूमती है तो हमें दिक्‍कत होती है कि कहीं नीचे न गिर जाएं, खाने में न गिर जाएं आदि। हालांकि, घर में छिपकली के होने से कीड़े-मकोड़े, पंतगी, झिंगुर आदि नहीं रहते है लेकिन छिपकली के शरीर पर गिरने का भय ज्‍यादा बड़ा होता है।
मार्केट में छिपकली को भगाने वाले कई विषैले लिक्विड आते है, लेकिन ये लिक्विड आपके बच्‍चों या पालतू जानवरों को भी नुकसान पंहुचा सकते है। ऐसे में बेहतर होगा कि छिपकलियों को भगाने के लिए कोई घरेलू उपाय किया जाये। इस आर्टिकल में छिपकलियों को भगाने के कुछ ईको-फ्रैंडली घरेलू उपाय बताएं जा रहे है जो निम्‍म प्रकार है |
मोरपंख
छिपकलियों को मोर का पंख देखकर भ्रम हो जाता है कि यहां कहीं सांप है जो उन्‍हे खा जाएगा, इसलिए उसे देखकर वह भाग जाती है। मोरपंख को घर में किसी गुलदस्‍ते आदि में लगाकर रख दें, इससे छिपकलियां भाग जाएगी।
कॉफी पाउडर
कॉफी पाउडर को तम्‍बाकू पाउडर के साथ मिला लें और इसकी छोटी-छोटी गोलियां बनाकर वहां-वहां रख दें जहां छिपकलियां आती है। अगर छिपकलियां इस मिश्रण को खा लेगी तो वह मर जाएगी, वरना वह भाग अवश्‍य जाएगी।
नेफ्थलीन गोलियां-
नेफ्थलीन की गोलियां, एक अच्‍छी कीटनाशक होती है, इसे वार्डरोब, वॉशवेसिन आदि में डाला जाता है। इसे जहां भी रख देगें, वहां छिपकली नहीं आएगी।
लहसून-
एक स्‍प्रे बॉटल लें। इसमें प्‍याज का रस और पानी भर लें। इसमें कुछ बूंद लहसून के रस की मिला लें और अच्‍छे से मिला लें। अब इसे घर के हर कोने में छिड़क दें, जहां-जहां छिपकली सबसे ज्‍यादा आती है वहां भी छिड़क दें। आप चाहें तो लहसून की कली भी रख सकते है, इससे भी छिपकलियां दूर भाग जाती है
अंडे के छिलके-
अंडे के छिलके में कोई भी महक नहीं होती है जो छिपकली वो जगह छोड़ दें, लेकिन छिपकली मानसिक रूप से सोचती है कि इस क्षेत्र में कोई और बड़ा जीव आकर रहने लगा है, इसलिए वह उस स्‍थान को छोड़ देती है। अंडे के छिलके को तीन-चार सप्‍ताह में बदलते रहें।
फेनाइल की गोली
अक्सर हम कपड़ों को कीड़ों से बचाने के लिए फेनाइल की गोलियों को कपड़ों के बीच में रखते हैं। ठीक इसी तरह से ये फेनाइल की गोलियां छिपकलियों को दूर भगाती हैं। जहां पर आपको छिपकली दिखती हो वहां पर दो गोलियां फेनाइल की रख दें। इसकी गंध छिपकलियों को आपके घर से दूर कर देगी।
प्‍याज-
प्‍याज को स्‍लाइस में काटकर उसे धागे में बांधकर लाइट्स आदि के पास लटका दें, इससे वहां आने वाली छिपकली भाग जाएगी। प्‍याज में सल्‍फर ज्‍यादा मात्रा में होता है जिससे बुरी दुर्गंध निकलती है और छिपकली भाग जाती है।




लाल मिर्च पाउडर
बेहद तीखी होने की वजह से छिपकलियों को लाल मिर्च का सहना मुश्किल हो जाता है। यदि आप घर के या दरवाजों के कोनों में लाल मिर्च की स्प्रे करते हैं तो इससे जल्द ही छिपकलियां घर से दूर चली जाएंगी।
आइये जानते हैं कैसे बनाएं लाल मिर्च का स्प्रे :
आधे गिलास पानी में लाल मिर्च पाउडर एक से दो चम्मच मिलाकर घोल बना लें। और अब आप इसका छिड़काव कर सकते हैं
बर्फ वाला ठंडा पानी-
बर्फीले पानी को छिपकली पर स्‍प्रे कर दं, इससे उसको ठंडा लगेगा और वह भाग जाएगी। ऐसा कई दिन तक लगातार करें, ताकि वह घर ही छोड़ दें। पानी डालने के बाद छिपकली गिर जाएं तो उसे डस्‍टबीन में भरकर बाहर फेंक दें।
पिपर पेस्टीसाइड स्‍प्रे-
पानी और काली मिर्च के पाउडर को मिला लें और एक पेस्‍टीसाइड तैयार कर लें। इसे अपनी किचेन, कमरों और बाथरूम अदि जगहों पर छिड़क दें। इससे छिपकलियां भाग जाती है क्‍योंकि काली मिर्च की तीखी गंध उन्‍हे अच्‍छी नहीं लगती है।


Friday, December 2, 2016

वेरिकोस वेन्स(सूजे हुए नस) के घरेलू उपचार Home Remedies For Varicose Veins spider veins





क्‍या है वैरिकोज वेन्स ?
पैर की नसों में मौजूद वाल्‍व, पैरों से रक्त नीचे से ऊपर हृदय की ओर ले जाने में मदद करते है। लेकिन इन वॉल्‍व के खराब होने पर रक्त ऊपर की ओर सही तरीके से नहीं चढ़ पाता और पैरों में ही जमा होता जाता है। इससे पैरों की नसें कमजोर होकर फैलने लगती हैं या फिर मुड़ जाती हैं, इसे वैरिकोज वेन्‍स की समस्‍या कहते हैं। इससे पैरों में दर्द, सूजन, बेचैनी, खुजली, भारीपन, थकान या छाले जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। आइये जाने इस के आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे-
 जैतून का तेल : –
जैतून के तेल और विटामिन ई तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर उसे थोड़ा सा गर्म कर लें। इस गर्म तेल से नसों की मालिश कई मिनट तक एक से दो महीने के लिए करें।
 लहसुन :-
छह लहसुन की कली लेकर उसे एक साफ जार में डाल लें। तीन संतरे का रस लेकर उसे जार में मिलाये। फिर इसमें जैतून के तेल मिलायें। इस मिश्रण को 12 घंटे के लिए रख दें। फिर इस मिश्रण से कुछ बूंदों को हाथों पर लेकर 15 मिनट के लिए सूजन वाली नसों पर मालिश करें। इस पर सूती कपड़ा लपेट कर रातभर के लिए छोड़ दें। इस उपाय को कुछ महीनों के लिए नियमित रूप से करे |
सेब साइडर सिरका :-
सेब साइडर सिरका वैरिकोज वेन्‍स के लिए एक अद्भुत उपचार है। यह शरीर की सफाई करने वाला प्राकृतिक उत्‍पाद है और रक्त प्रवाह और रक्‍त परिसंचरण में सुधार करने में मदद करता है। समस्‍या होने पर सेब साइडर सिरके को लगाकर उस हिस्‍से की मालिश करें। इस उपाय को नियमित रूप से रात को बिस्‍तर पर जाने से पहले और अगले सुबह फिर से करें। कुछ दिन ऐसा करने से कुछ ही महीनों में वैरिकोज वेन्‍स का आकार कम होने लगता है। या फिर एक गिलास पानी में दो चम्‍मच सेब साइडर सिरके को मिलाकर पीये। अच्‍छे परिणाम पाने के लिए इस मिश्रण का एक महीने में दिन में दो बार सेवन करें।
 बुचर ब्रूम :-




बुचर ब्रूम वैरिकोज वेन्‍स की असुविधा से राहत देने में बहुत ही उपयोगी होता है। इस जड़ी बूटी में रुसोगेनिन्स नामक गुण सूजन को कम करने में मदद करता है और एंटी-इफ्लेमेंटरी और एंटी-इलास्‍टेज गुण नसों की बाधा को कम करता है। यह पोषक तत्‍वों को मजबूत बनाने और नसों की सूजन को कम करने के साथ ही पैरों के रक्‍त प्रवाह में सुधार करने में मदद करते हैं। लेकिन उच्‍च रक्तचाप वाले लोग इस जड़ी-बूटी के सेवन से पहले चिकित्‍सक से परामर्श अवश्‍य ले लें।
 अखरोट : –
अखरोट के तेल में एक साफ कपड़े को डूबाकर प्रभावित क्षेत्र पर लगाये। ऐसा एक या दो महीने के लिए दिन में दो से तीन बार करें।
अजमोद :- (अजवायन)
एक मुठ्ठी ताजा अजमोद की एक मुठ्ठी लेकर उसे एक कप पानी में पांच मिनट के लिए उबाल लें। फिर इसे मिश्रण को ठंडा होने के लिए रख दें। फिर इस मिश्रण में गुलाब और गेंदे की तेल की एक-एक बूंद मिला लें। अब इस मिश्रण को कुछ देर के लिए फ्रिज में रख दें। इस मिश्रण को कॉटन पर लगाकर प्रभावित क्षेत्र पर लगायें। अच्‍छे परिणाम पाने के लिए इस उपाय को कुछ महीनों तक करें।
 लाल शिमला मिर्च :-
लाल शिमला मिर्च को वैरिकोज वेन्‍स के इलाज लिए एक चमत्‍कार की तरह माना जाता है। विटामिन सी और बायोफ्लेवोनॉयड्स का समृद्ध स्रोत होने के कारण यह रक्त परिसंचरण को बढ़ाने और संकुलित और सूजी हुई नसों के दर्द को आसान बनाता है। गर्म पानी में एक चम्‍मच लाल शिमला मिर्च के पाउडर को मिलाकर, इस मिश्रण का एक से दो महीने के लिए दिन में तीन बार सेवन करें।
 अर्जुन की छाल :





अर्जुन की छाल वेरीकोस वेन्स के लिए बहुत बढ़िया दवा हैं, अगर आप इस समस्या से परेशान हैं तो आप रात को सोते समय गाय के दूध में या साधारण पानी में अर्जुन की चाल को चाय की तरह उबाले और आधा रहने पर इसको छान कर पी ले।
ये सब प्रयोग आपको एक दिन में आराम नहीं देंगे, मगर 4 से 6 महीने में चमत्कारिक परिणाम मिलेंगे।
वेरीकोस वेन्स में महत्वपूर्ण.
अगर शारीर में रक्त परिसंचरण सही रूप से हो तो यह अनेक समस्याएँ उत्पन्न नहीं होती, इसके लिए हर रोज़ सुबह शौच जाने के बाद 10 मिनट आँखे बंद करके शीर्षासन या सर्वांगासन करें… समस्या चाहे जितनी भी भयंकर हो उसमे आराम आएगा

अगर आप इस बिमारी का शिकार हो चुके हो तो घबराने की बात नहीं है | हम आपको एक ऐसा घरेलू नुस्खा बताएंगे जिससे आपके नसों तथा varicose veins की समस्या दूर हो जायेगी सिर्फ कुछ ही दिनों में |
सामग्री- 

1 गिलास भेड का दूध
नहाने का साबुन आधा टुकड़ा
विधि :-
पहले दूध में साबुन को पीस कर डाल दें और इस मिश्रण को प्लास्टिक कंटेनर में डाल कर फ्रिज में स्टोर करके रखें |
इस मिश्रण को दिन में तीन बार प्रभावित जगह पर रगड़ने से बहुत जल्द अच्छे नतीजे सामने आयगे |

रातो-रात वजन कम करने का घरेलू नुस्खा


वजन कम करना  आजकल  लोगों के लिए मुख्य विषय  बन चूका है हर कोई बढते वजन से परेशान है | हमारा रहन सहन हमारा वजन बढाने के लिए पूरी तरह उत्तरदायी  है | आज कल हमारे खाने की आदते बदल गयी है दिन में जिस समय हमे ज्यादा खाना चाहिए तब हम कम खाते है और जब कम खाना चाहिए तब ज्यादा |
शरीर में ब्राउन फैट –
 Brown fat (भूरा वसा) की नियमितता मोटापे को नियंत्रित रखती है । आधुनिक युग में हर व्यक्ति स्वस्थ एवं छरहरी काया चाहता है, जिसे व्यायाम और सयंमित आहार द्वारा शरीर से अतिरिक्त कैलोरी- Calories घटा कर प्राप्त किया जा सकता है । कुछ शोधो के अनुसार बाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त भोज्य पदार्थ भी चर्बी बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं ।
हर कोई वजन कम करने के अलग अलग नुस्खे (weight loss remedies) अपनाता है जैसे के कम खा कर और ज्यादा कसरत कर के | कुछ लोग जी-जान से कोशिश करने में जुट जाते है लेकिन कुछ समय बाद बहत कम या ना-मात्र नतीजे हाथ में आते है , तो कोशिश करने वाला इंसान अंदर से टूट जाता है और कोशिश करना बंद कर देता है |


हर कोई चाहता है के रातो-रात उसका वजन कम हो जाए,क्या ऐसा सम्भव है ,जी हाँ आप रातोंरात अपना वजन कर सकते है इस आसान घरेलू नुस्खे के जरिये | आज हम आपको दो नुस्खो के बारे में बता रहे है एक घरेलू नुस्खा जो रातो रात आपका वजन कम करेगा सबसे पहले तो आप सुबह  में बिना कुल्ला किये कम से कम 3 से 4 गिलास पानी पिए और इस पानी को पिने के 1 घंटे तक आपको कुछ भी खाना पीना नही है उसके बाद आप इस उपाय को आजमाए
आज हम की तरफ से आपको एक घरेलू नुस्खे के बारे में बताएगे जो जब आप आराम फरमा रहे होंगे वे अपना काम कर रहा होगा तथा रातो-रात आपका वजन कम कर देगा |
समग्री :-
• पानी
• 2 चमच दालचीनी
• 2 चमच शहद
एक वर्तन में पानी को डाल कर उबलने के लिए आग पर रखें | और उसमें दालचीनी डाल कर 15 मिनटों तक उबलने दें | इस मिश्रण के ठंडा होने का इन्तजार कीजिये और इसमें शहद डाल कर मिक्स कर दीजिये |
रोजाना सोने से पहले इस ड्रिंक का सेवन करें जब तक के आप अपने लक्ष्य माने हुए वजन तक नहीं पहंच जाते | यह ड्रिंक वजन कम करने के साथ साथ आपके शरीर को विजातीय पदार्थों  से भी मुक्त करेगा|

मखाने खाने से डायबिटीज, किडनी, पाचन, मर्दाना कमजोरी, प्रजनन क्षमता सहित अनेक रोगों में चमत्कारिक फायदे है


मखाने देखने में तो गोल मटोल सूखे दिखाई देते है पर यह कई औषधीय गुणों से भरपूर होते है । हमारे स्वास्थ्य को तंदरूस्त रखने में मदद करते है। मखानों का प्रयोग हम भोजन में भी कर सकते है। मखाने में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में पाए जाते है। मखानों से तैयार खीर बहुत ही स्वादिष्ट होती है। सब्जी और भुजिया में भी मखाने डालें जाते हैं। मखाने खाने से शरीर को कई रोगों से छुटकारा मिलता है।
मखाना हम खाते रहते हैं उपवास में – खीर के रूप में या नमकीन भुने रूप में मखाना कमल का बीज नहीं होता है ,इसकी एक अलग प्रजाति है, यह भी तालाबों में ही पैदा होता है लेकिन इसके पौधे बहुत कांटेदार होते हैं ,इतने कंटीले कि उस जलाशय में कोई जानवर भी पानी पीने के लिए नहीं घुसता,जिसमे मखाने के पौधे होते हैं। इसकी खेती बिहार के मिथिलांचल में होती है मखाना को देवताओं का भोजन कहा गया है । उपवास में इसका विशेष रूप से उपयोग होता है । पूजा एवं हवन में भी यह काम आता है । इसे आर्गेनिक हर्बल भी कहते हैं । क्योंकि यह बिना किसी रासायनिक खाद या कीटनाशी के उपयोग के उगाया जाता है ।

मखाने का इस्तेमाल नमकीन, मिठाई से लेकर खीर बनाने के लिए होता है। मखाने से खीर व मिठाई का स्वाद बढ़ जाता है। लेकिय आप में से बहुत कम लोग जानते हैं कि मखाना पोषक तत्वों की भूरपूर मात्रा होती है जो आपके कई रोगों को भी ठीक कर सकता है। शरीर को सेहतमंद और ताकत देने के अलावा भी इसके कई फायदे हैं।
किडनी के लिए लाभदायक :
 मखाना खाने से किडनी स्वस्थ रहती है। क्योंकि इसमें स्पलीन को डिटाक्सिीफाइड करने की क्षमता होती है। और इस वजह से कीडनी को पोषक तत्व ठीक मात्रा में मिलते रहते हैं। कीडनी में जमी गंदगी से लेकर बीमारी तक दूर करता है मखाना। 
.दर्द में दवा का काम करता है मखाना :

 हड्डियों का दर्द, कमर दर्द, जोड़ों का दर्द या घुटने का दर्द। मखाना खाने से ये दर्द ठीक होने लगते हैं। मखाने में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है। यह शरीर में कैल्शियम की कमी को भी पूरा करता है।
बढ़ती उम्र को रोकता है, 
एंटी-एजिंग गुण : 





मखाने में बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकने की क्षमता होती है। मखाना एंटी-एजिंग के साथ एंटी-आक्सीडेट से भी भरपूर होता हैं जो उम्र को रोकने में सहायता करता है। जिस वजह से आप लंबे समय तक जवां बने रहते हो। झुर्रियां और बालों का सफेद होना भी मखाने से कम हो जाते हैं।
.डायबिटीज में लाभदायक :
 जिन लोगों को मधुमेह की समस्या है उनके लिए मखाना किसी दवा से कम नहीं है। मखाना खाने से इंसुलिन का बहाव शरीर में कम हो जाता है। मखाना खट्टा और मीठा होता है। जिसे खाने से डायबिटीज की रोकथाम होती है।
बढ़ती उम्र को रोकता है,
.अच्छी नींद और तनाव में मखाना :
 रात को दूध में मखाने डालकर खाने से आपको अच्छी नींद आती है। यह शरीर की कमजोरी को दूर करता है साथ ही तनाव को भी खत्म कर देता है।
.दिल की बीमारी में मखाना :

 मखाने में एस्ट्रीजन गुण होते हैं जो आपको दिल के रोगों से बचाता है।
.पाचन और पेट संबंधी परेशानी : 
मखाना खाने से पेट और पाचन तंत्र दोनों ठीक रहता है। हर उम्र के लोगों को यह आसानी से पच जाता है। जिन लोगों को भूख नहीं लगती है उनहें मखाना जरूर खाना चाहिए। यह भूख को बढ़ाता है। दस्त या पेचिश में मखाने को देसी घी के साथ भूनकर खाने से राहत मिलती है।
मखाना उपजाने  की विधि :
मखाने के क्षुप कमल की तरह होते हैं और उथले पानी वाले तालाबों और सरोवरों में पाए जाते है। मखाने की खेती के लिए तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तथा सापेक्षिक आर्द्रता 50 से 90 प्रतिशत होनी चाहिए।
मखाने की खेती के लिए तालाब चाहिए होता है जिसमें 2 से ढाई फीट तक पानी रहे। इसकी खेती में किसी भी प्रकार की खाद का इस्तेमाल नहीं किया जाता। खेती के लिए, बीजों को पानी की निचली सतह पर 1 से डेढ़ मीटर की दूरी पर डाला जाता है। एक हेक्टेयर तालाब में 80 किलो बीज बोए जाते हैं।
बुवाई के महीने दिसंबर से जनवरी के बीच के होते है। बुवाई के बाद पौधों का पानी में ही अंकुरण और विकास होता है। इसकी पत्ती के डंठल एवं फलों तक पर छोटे-छोटे कांटे होते हैं। इसके पत्ते बड़े और गोल होते हैं और हरी प्लेटों की तरह पानी पर तैरते रहते हैं।
अप्रैल के महीने में पौधों में फूल लगना शुरू हो जाता है। फूल बाहर नीला, और अन्दर से जामुनी या लाल, और कमल जैसा दिखता है। फूल पौधों पर कुछ दिन तक रहते हैं।




फूल के बाद कांटेदार-स्पंजी फल लगते हैं, जिनमें बीज होते हैं। यह फल और बीज दोनों ही खाने योग्य होते हैं। फल गोल-अण्डाकार, नारंगी के तरह होते हैं और इनमें 8 से 20 तक की संख्या में कमलगट्टे से मिलते जुलते काले रंग के बीज लगते हैं। फलों का आकार मटर के दाने के बराबर तथा इनका बाहरी आवरण कठोर होता है। जून-जुलाई के महीने में फल १-२ दिन तक पानी की सतह पर तैरते हैं। फिर ये पानी की सतह के नीचे डूब जाते हैं। नीचे डूबे हुए इसके कांटे गला जाते हैं और सितंबर-अक्टूबर के महीने में ये वहां से इकट्ठा कर लिए जाते हैं।

मखाना के आयुर्वेदिक गुण -
पाचन में सुधार करे :-
मखाना एक एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण, सभी आयु वर्ग के लोगों द्वारा आसानी से पच जाता है। बच्‍चों से लेकर बूढे लोग भी इसे आसानी से पचा लेते हैं। इसका पाचन आसान है इसलिए इसे सुपाच्य कह सकते हैं। इसके अलावा फूल मखाने में एस्‍ट्रीजन गुण भी होते हैं जिससे यह दस्त से राहत देता है और भूख में सुधार करने के लिए मदद करता है।
एंटी-एजिंग गुणों से भरपूर :- 
मखाना उम्र के असर को भी बेअसर होता है। यह नट्स एंटी-ऑक्‍सीडेंट से भरपूर होने के कारण उम्र लॉक सिस्‍टम के रूप में काम करता है और आपको बहुत लंबे समय तक जवां बनाता है। मखाना प्रीमेच्‍योर एजिंग, प्रीमेच्‍योर वाइट हेयर, झुर्रियों और एजिंग के अन्‍य लक्षणों के जोखिम को कम करने में मदद करता है।
डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद :-
 डायबिटीज चयापचय विकार है, जो उच्च रक्त शर्करा के स्तर के साथ होता है। इससे इंसुलिन हार्मोंन का स्राव करने वाले अग्न्याशय के कार्य में बाधा उत्‍पन्‍न होती है। लेकिन मखाने मीठा और खट्टा बीज होता है। और इसके बीज में स्‍टार्च और प्रोटीन होने के कारण यह डायबिटीज के लिए बहुत अच्‍छा होता है।
किडनी को मजबूत बनाये :-
 मखाने का सेवल किडनी और दिल की सेहत के लिए फायदेमंद है। फूल मखाने में मीठा बहुत कम होने के कारण यह स्प्लीन को डिटॉक्‍सीफाइ करने, किडनी को मजबूत बनाने और ब्‍लड का पोषण करने में मदद करता है। साथ ही मखानों का नियमित सेवन करने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और हमारा शरीर सेहतमंद रहता है।
दर्द से छुटकारा दिलाये :-




मखाना कैल्शियम से भरपूर होता है इसलिए जोड़ों के दर्द, विशेषकर अर्थराइटिस के मरीजों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है। साथ ही इसके सेवन से शरीर के किसी भी अंग में हो रहे दर्द जैसे से कमर दर्द और घुटने में हो रहे दर्द से आसानी से राहत मिलती है।
नींद न आने की समस्या से छुटकारा :-
 मखाने के सेवन से तनाव कम होता है और नींद अच्छी आती है। रात में सोते समय दूध के साथ मखाने का सेवन करने से नींद न आने की समस्या दूर हो जाती है।
कमजोरी दूर करना :- 
मखानों का नियमित सेवन करने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और हमारा शरीर सेहतमंद रहता है। मखाने में मौजूद प्रोटीन के कारण यह मसल्स बनाने और फिट रखने में मदद करता है।
*मखाना शरीर के अंग सुन्‍न होने से बचाता है तथा घुटनों और कमर में दर्द पैदा होने से रोकता है।
*प्रेगनेंट महिलाओं और प्रेगनेंसी के बाद कमजोरी महसूस करने वाली महिलाओं को मखाना खाना चाहिये।
*मखाना का सेवन करने से शरीर के किसी भी अंग में हो रही दर्द से राहत मिलती है।
*मखाना का सेवन करने से शरीर में हो रही जलन से भी राहत मिलती है।
*मखाना को दूध में मिलाकर खाने से दाह (जलन) में आराम मिलता है।
* मखानों के सेवन से दुर्बलता मिटती है तथा शरीर पुष्ट होता है।
*वीर्य की कमी, मर्दाना कमजोरी, शुक्रमेह में इसे हलवे के साथ खाना चाहिए।
आटे, घी, चीनी के हलवे मखाने डाल कर खाने से गर्भाशय की कमजोरी और प्रदर की समस्या दूर होती है।

अमरूद की पत्‍तियों में छुपा है हर बीमारी का इलाज..




अमरूद की पत्‍तियां अमरूद से भी ज्‍यादा फायदेमंद हैं। जी हां, आप सही समझे। अमरूद की पत्‍तियों के कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ हैं जिसके बारे में हमें पता ही नहीं है। यह आपकी कई बीमारियों में आराम पहुंचा सकती है। इसमें ऐसे चमत्‍कारी गुण हैं जो आपकी कई बीमारियों को एक पल में दूर कर सकती हैं। त्‍वचा, बाल और स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल के लिये अमरूद की ताजी पत्‍तियों का रस या फिर इसकी बनी हुई चाय बहुत ही फायदेमंद होती है। वजन घटाना हो, गठिया के दर्द ने परेशान कर रखा हो या फिर पेट ठीक ना रहता हो, तो आप अमरूद की पत्‍तियों के रस का प्रयोग कर सकते हैं।  जानते हैं अमरूद की पत्‍तियां किस बीमारी में लाभ पहुंचाती हैं- 

सिर में दर्द :-
आधे सिर में दर्द होने पर सूर्योदय के पूर्व ही कच्चे हरे ताजे अमरूद लेकर पत्थर पर घिसकर लेप बनाएं और माथे पर लगाएं। कुछ दिनों तक नित्य प्रयोग करने से पूर्ण लाभ होता है।
वजन घटाए :-
अमरूद की पत्तियां जटिल स्टार्च को शुगर में बदलने की प्रक्रिया को रोकता है जिसके द्वारा शरीर के वज़न को घटाने में सहायता मिलती है।
गठिया दर्द :-
अमरूद के पत्तों को कूटकर, लुगदी बनाकर उसे गर्म करके लगाने से गठिया की सूजन दूर हो जाती है।
कोलेस्‍ट्रॉल कम करे :-



अमरूद की पत्‍तियों का जूस लिवर से गंदगी निकालने में मदद करता है। यह खराब कोलेस्‍ट्रॉल को कम करता है।
डायरिया मिटाए :-
यह पेट की कई बीमारियों को ठीक करने में असरदार है। एक कप खौलते हुए पानी में अमरूद की पत्‍तियों को डाल कर उबालिये और फिर उसका पानी छान कर पी लीजिये।
पाचन तंत्र ठीक करे :-
अमरूद की पत्‍तियां या फिर उससे तैयार जूस पी कर आप पाचन तंत्र को ठीक कर सकते हैं। इससे फूड प्‍वाइजनिंग में भी काफी राहत मिलती है।
दांतों की समस्‍या बालों की ग्रोथ बढाए :-
इन पत्‍तियों में बहुत सारा पोषण और एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो कि बालों की ग्रोथ को बढ़ाता है।
मधुमेह रोगियों के लिये अच्छा :-
एक शोध के अनुसार अमरूद की पत्तियां एल्फा-ग्लूकोसाइडिस एंज़ाइम की क्रिया द्वारा रक्त शर्करा को कम करती है। दूसरी तरफ सुक्रोज़ और लैक्टोज़ को सोखने से शरीर को रोकती है जिससे शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है।के लिये:-
दांतदर्द, गले में दर्द, मसूड़ों की बीमारी आदि अमरूद की पत्‍तियों के रस से दूर हो जाती है। आप पत्‍तियों को पीस कर पेस्‍ट बना कर उसे मसूड़ों या दांत पर रख सकती हैं।
बालों की ग्रोथ बढाए :-
इन पत्‍तियों में बहुत सारा पोषण और एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो कि बालों की ग्रोथ को बढ़ाता है।
मधुमेह रोगियों के लिये अच्छा :-
एक शोध के अनुसार अमरूद की पत्तियां एल्फा-ग्लूकोसाइडिस एंज़ाइम की क्रिया द्वारा रक्त शर्करा को कम करती है। दूसरी तरफ सुक्रोज़ और लैक्टोज़ को सोखने से शरीर को रोकती है जिससे शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है।
डेंगू बुखार :-
डेंगू बुखार में अमरूद की पत्‍तियों का रस पियें। यह बुखार को संक्रमण को दूर करता है।
एलर्जी दूर करे :-
अमरूद की पत्‍तियों का रस किसी भी प्रकार की एलर्जी को दूर कर सकता है। यह उस वायरस को खतम करता है जिससे एलर्जी पैदा होती है।
मुंह के छाले :-
अमरूद के पत्तों पर कत्था लगाकर चबाएं। केवल अमरूद के पत्ते चबाने से भी छाले ठीक हो जाते हैं।
मुंहासे मिटाए :-



यह एक एंटीसेप्‍टिक पत्‍तियां होती हैं जो कि बैक्‍टीरिया को मार सकती हैं। इसके लिये ताजी पत्‍तियों को पीस कर दाग धब्‍बों के साथ मुंहासो पर लगाएं। ऐसा रोजान करना उचित रहेगा।
खुजलाहट :-
अमरूद की पत्तियों में एलर्जी अवरोधक गुण पाया जाता है। एलर्जी बहुत सारे अन्य खुजलाहट का मुख्य कारण है। अत: एलर्जी को कम करने से खुजलाहट अपने आप कम हो जायेगी।
स्वप्नदोष में लाभ :-
अमरूद के पत्तों को पीसकर उसका रस निकालकर उसमें स्वादानुसार चीनी मिलाकर नित्य पीते रहने से स्वप्नदोष की बीमारी में लाभ होता है।
ल्यूकोरिया में लाभ :-
अमरूद की ताजी पत्तियों का रस १० से २० मिलीलीटर तक नित्य सुबह-शाम पीने से ल्यूकोरिया नामक बीमारी में अप्रत्याशित लाभ पहुंचाता है।

Wednesday, November 30, 2016

अदरक के ये फायदे जानकार दंग रह जायेगे आप



दुनिया के सबसे ज्यादा उपजाए जाने वाले मसाले के रूप में अदरक दुनिया का सबसे बहुपयोगी औषधीय गुण वाला पदार्थ है। 100 से ज्यादा बीमारियों में इस चमत्कारी मसाले के औषधीय लाभों पर अनगिनत अध्ययन किए गए हैं। आधे से अधिक पारंपरिक हर्बल औषधियों में इसे शामिल किया जाता है।
भारत के आयुर्वेदिक ग्रंथों में अदरक को सबसे महत्वपूर्ण बूटियों में से एक माना गया है। यहां तक कि उसे अपने आप में औषधियों का पूरा खजाना बताया गया है। आयुर्वेदिक चिकित्सक इसको एक शक्तिशाली पाचक के रूप में लेने की सलाह देते हैं क्योंकि यह पाचक अग्नि को भड़काता है और भूख बढ़ाती है। इसके पोषक तत्व शरीर के सभी हिस्सों तक आसानी से पहुंच पाते हैं। आयुर्वेद में अदरक को जोड़ों के दर्द, मतली और गति के कारण होने वाली परेशानी के उपचार में भी इस्तेमाल किया जाता है।
अदरक में आपको स्वस्थ रखने की जबरदस्त शक्ति होती है। भारतवासियों को 5,000 साल पहले से अदरक में पाए जाने वाले गुणों के विषय में जानकारी है।
*अदरक में बहुत सारे विटामिन्स के साथ-साथ मैग्नीज और कॉपर भी पाए जाते हैं जिनकी शरीर को सुचारु रूप से चलाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अदरक कई सारे गुणों की खान है और इसे विभिन्न तरीकों से उपयोग में लाया जा सकता है, पर अदरक का ज्यूस इसे इस्तेमाल करने का सबसे अच्छा तरीका समझा जाता है।
* अदरक के ज्यूस में सूजन को कम करने की शक्ति अत्यधिक मात्रा में होती है और यह उन लोगों के लिए वरदान की तरह है, जो जोड़ों के दर्द और सूजन से परेशान हैं। एक अध्ययन के मुताबिक जो लोग अदरक के ज्यूस का उपयोग नियमित तौर पर करते हैं उन्हें जोड़ों में सूजन और दर्द पैदा करने वाली बीमारियां परेशान नहीं करतीं। आपके जोड़ों की समस्या नई हो या कई साल पुरानी- यकीन रखिए कि अदरक का ज्यूस बहुत असरकारी है।अदरक के ज्यूस में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में ताजे रक्त के प्रवाह को बढ़ाते हैं, क्योंकि इनमें खून को साफ करने का खास गुण होता है।
.* सभी प्रकार के दर्द से राहत देने की इसकी क्षमता इसे बहुत ही खास बनाती है। चाहे आपके दांत में दर्द हो या सिर में- अदरक का ज्यूस बहुत असरकारक है। शोधों के हिसाब से यह माइग्रेन से बचने में भी आपकी मदद करता है|. अदरक में खून को पतला करने का नायाब गुण होता है और इसी वजह से यह ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी में तुरंत लाभ के लिए जाना जाता है।



*अदरक कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में सक्षम
आधुनिक शोधों में अदरक को विभिन्न प्रकार के कैंसर में एक लाभदायक औषधि के रूप में देखा जा रहा है और इसके कुछ आशाजनक नतीजे सामने आए हैं।
मिशिगन यूनिवर्सिटी कांप्रिहेंसिव कैंसर सेंटर के एक अध्ययन में पाया गया कि अदरक ने न सिर्फ ओवरी कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट किया, बल्कि उन्हें कीमोथैरेपी से प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने से भी रोका जो कि ओवरी के कैंसर में एक आम समस्या होती है।
इस अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने ओवरी कैंसर कोशिकाओं पर अदरक पाउडर और पानी का एक लेप लगाया। हर परीक्षण में पाया गया कि अदरक के मिश्रण के संपर्क में आने पर कैंसर की कोशिकाएं नष्ट हो गईं। हर कोशिका ने या तो आत्महत्या कर ली, जिसे एपोप्टोसिस कहा जाता है या उन्होंने एक-दूसरे पर हमला कर दिया, जिसे ऑटोफेगी कहा जाता है।
अदरक को स्तन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और कोलोन कैंसर के इलाज में भी बहुत लाभदायक पाया गया है।
जर्नल ऑफ बायोमेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित शोध में पता चला कि अदरक के पौधे के रसायनों ने स्वस्थ स्तन कोशिकाओं पर असर डाले बिना स्तन कैंसर की कोशिकाओं के प्रसार को रोक दिया। यह गुण बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि पारंपरिक विधियों में ऐसा नहीं होता। हालांकि बहुत से ट्यूमर कीमोथैरैपी से ठीक हो जाते हैं, मगर स्तन कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना ज्यादा मुश्किल होता है। वे अक्सर बच जाती हैं और उपचार के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेती हैं।
अदरक के इस्तेमाल के दूसरे फायदे ये हैं कि उसे कैप्सूल के रूप में दिया जाना आसान है, इसके बहुत कम दुष्प्रभाव होते हैं और यह पारंपरिक दवाओं का सस्ता विकल्प है।
आधुनिक विज्ञान प्रमाणित करता है कि अदरक कोलोन में सूजन को भी कम कर सकता है जिससे कोलोन कैंसर को रोकने में मदद मिलती है। मिशिगन यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 30 मरीजों के एक समूह को 28 दिनों में दो ग्राम अदरक की जड़ के सप्लीमेंट या प्लेसबो दिए। 28 दिनों के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन मरीजों ने अदरक की जड़ का सेवन किया था, उनमें कोलोन की सूजन के चिह्नों में काफी कमी पाई गई। इससे यह कोलोन कैंसर के रिस्क वाले लोगों में एक कारगर प्राकृतिक बचाव विधि हो सकती है।




कई और तरह के कैंसर, जैसे गुदा कैंसर, लिवर कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, मेलानोमा और पैंक्रियाज के कैंसर को रोकने में अदरक के तत्वों की क्षमता पर भी अध्ययन किए गए हैं। यह एक दिलचस्प बात है कि एक कैंसर रोधी दवा बीटा-एलिमेन अदरक से बनाई जाती है।|अदरक में कैंसर जैसी भयानक बीमारी से शरीर को बचाए रखने का गुण होता है। यह कैंसर पैदा करने वाले सेल्स को खत्म करता है। एक शोध के हिसाब से अदरक स्तन कैंसर पैदा करने वाले सेल को बढ़ने से रोकता है।
*अगर आपको पाचन संबंधी कोई भी समस्या है, तो समझ लीजिए कि आपकी यह समस्या अब आपको और परेशान नहीं कर पाएगी। अदरक का ज्यूस आपके पेट में पड़े हुए खाने को निकास द्वार की तरफ धकेलता है। अदरक का यह चमत्कारी गुण आपको न केवल पाचन और गैस बल्कि सभी तरह के पेट दर्द से भी निजात दिलाता है।
*अगर आप घने और चमकदार बाल चाहते हैं तो अदरक ज्यूस का नियमित उपयोग आपकी यह इच्छा पूरी कर सकता है। इसे आप पी भी सकते हैं और सीधे सिर की त्वचा पर भी लगा सकते हैं। आपको सिर्फ यह ध्यान रखना है कि आप आप शुद्ध ज्यूस सिर पर लगाएं जिसमें पानी की मात्रा बिलकुल न हो या न के बराबर हो। यह न केवल आपके बाल स्वस्थ बना देगा बल्कि यह आपको रूसी से भी छुटकारा दिला देगा। . अदरक के ज्यूस के नियमित इस्तेमाल से आप कोलेस्ट्रॉल को हमेशा कम बनाए रख सकते हैं। यह रक्त के थक्कों को जमने नहीं देता और खून के प्रवाह को बढ़ाता है और इस प्रकार हृदयाघात की आशंका से आपको बचाए रखता. है|
*अदरक हृदय के लिए लाभकारी
अदरक सालों से हृदय रोगों के उपचार में इस्तेमाल होती रही है। चीनी चिकित्सा में कहा जाता है कि अदरक के उपचारात्मक गुण हृदय को मजबूत बनाते हैं। हृदय रोगों से बचाव और उसके उपचार में अक्सर अदरक के तेल का प्रयोग किया जाता था।
*आधुनिक अध्ययन दर्शाते हैं कि इस जड़ी-बूटी के तत्व कोलेस्ट्रॉल को कम करने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, रक्त प्रवाह में सुधार लाने और अवरुद्ध आर्टरियों तथा रक्त के थक्कों से बचाव करने का काम करते हैं। ये सारी चीजें हृदयाघात (हार्ट अटैक) और स्ट्रोक के जोखिम को कम करती हैं।
*अदरक के ज्यूस में गठिया रोग को भी ठीक करने की क्षमता होती है। इसके सूजन को खत्म करने वाले गुण गठिया और थायराईड से ग्रस्त मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद हैं।
अदरक मोशन सिकनेस को कम करती है
*अलग-अलग तरह की मतली और उल्टी को ठीक करने में अदरक बहुत मददगार होती है। गर्भवती स्त्रियों में मॉर्निंग सिकनेस, सफर पर रहने वाले लोगों में मोशन सिकनेस और कीमोथैरेपी के मरीजों में भी मितली की समस्या में यह राहत देती है। कीमोथैरेपी के दौरान वमन रोकने वाली दवाएं दिए जाने के बावजूद 70 फीसदी मरीजों को मितली की परेशानी होती है। वयस्क कैंसर रोगियों पर किए गए एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि रोजाना कीमो से पहले आधा से एक ग्राम अदरक की डोज दिए जाने पर अध्ययन में हिस्सा लेने वाले 91 फीसदी मरीजों में तेज मितली की गंभीरता काफी हद तक कम हुई।



>अदरक चक्कर आने के साथ आने वाली मितली को भी कम करने में मदद करती है। इस संबंध में हुए शोध से पता चलता है कि इस मसाले के उपचारात्मक रसायन, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र में काम करते हुए उबकाई के असर को कम करते हैं।
अदरक जोड़ों के दर्द और आर्थराइ‍टिस में राहत देती है
*अदरक में जिंजरोल नामक एक बहुत असरदार पदार्थ होता है जो जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द को कम करता है। एक अध्ययन के मुताबिक, अदरक गंभीर और स्थायी इंफ्लामेटरी रोगों के लिए एक असरकारी उपचार है।
*कई और वैज्ञानिक अध्ययन भी जोड़ों के दर्द में अदरक के असर की पुष्टि करते हैं। गठिया के शुरुआती चरणों में यह खास तौर पर असरकारी होता है। *ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित बहुत से मरीजों ने नियमित तौर पर अदरक के सेवन से दर्द कम होने और बेहतर गतिशीलता का अनुभव किया।
*हांग कांग में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि अदरक और संतरे के तेल से मालिश करने पर घुटने की समस्याओं वाले मरीजों में थोड़ी देर के लिए होने वाली अकड़न और दर्द में राहत मिलती है।
*अदरक कसरत से होने वाले सूजन और मांसपेशियों के दर्द को भी कम कर सकती है। जार्जिया यूनिवर्सिटी द्वारा करवाए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने लगातार 11 दिन तक 34 और 40 वाटंलियरों के दो समूहों को कच्ची और पकाई हुई अदरक खिलाई। अध्ययन के नतीजों से यह निष्कर्ष निकाला गया कि अदरक के सप्लीमेंट्स का रोजाना इस्तेमाल, कसरत से होने वाले मांसपेशियों के दर्द में 25 फीसदी तक राहत देती है।

Tuesday, November 29, 2016

ढीली त्वचा(झुर्रियां) में कसाव लाने के उपाय








Sunday, November 27, 2016

ठंड मे गज़क खाने के अनोखे फायदे


    ठंड के दिनों में उत्तर भारत में गजक जमकर खाई जाती है। गजक में तिल, गुड़ के अलावा ड्राय फ्रूट्स डाले जाते हैं जिससे यह हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद साबित होती है। एम्स दिल्ली की डायटीशियन रेखा पाल शाहका कहना है कि गजक टेस्टी तो होती है, इसमें मौजूद इन्ग्रीडिएंट्स जैसे तिल और गुड़ सर्दियों में मेटाबॉलिज्म को तेज करके बॉडी को गर्म रखते हैं। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट्स, विटामिनस और मिनरल्स भी होते हैं जो कई बीमारियों से बचाव करते हैं।
 स्वाद में लाजवाब मीठा-मीठा गजक अधिकांश लोगों की पसंद है। ठंड के दिनों में अक्सर गजक जमकर खाई और खिलाई जाती है। दरअसल, गजक एक ऐसी मिठाई है जो तिल और गुड़ से बनाई जाती है और उसमें इसके अलावा कई तरह के ड्राय फ्रूट्स भी मिलाए जाते हैं, जिससे स्वाद दोगुना बढ़ जाता है। गजक सेहत के लिहाज से बेहद फायदेमंद है। डॉक्टर्स भी ठंड में गजक खाने की सलाह देते हैं क्योंकि इसमें मौजूद तिल-गुड़ मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और शरीर को सर्द मौसम में गर्म रखता है। गजक में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट, विटामिंस और मिनरल कई तरह की बीमारियों से बचाते हैं।




आप भी जान लें ठंड में गजक खाने के अनोखे फायदे....
*गजक में मौजूद तिल और गुड़ ठंड में बॉडी का मेटाबालिज्म तेज रखते हैं। ये वजन कम करने में फायदेमंद है।
* तिल और गुड़ में मौजूद कैल्शियम हड्डियां मजबूत करती हैं।

* गजक अर्थराइटिस जैसी बीमारी से भी बचाता है।
* तिल में सीसामोलिन पाया जाता है जो कि ब्लड प्रेशर को सामान्य करता है और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर करता है।
* तिल और गुड़ लिवर को हेल्दी और फिट रखता है।
*गजक फाइबर से भरपूर होता है। गजक पेट की तकलीफ दूर करते हैँ।
* गजक में जिंक, सेलेनियम जैसे मिनरल्स और एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं जो बुढ़ापे की प्रोसेस को स्लो करने में हेल्पफुल है।

*आयरन का सबसे बेस्ट सोर्स है गजक। इससे सेवन से एनीमिया की बीमारी भी दूर होती है।
*गजक में मौजूद हेल्दी फूड्स सर्द मौसम में शरीर को गर्म रखते हैं।
* तिल और गुड़ बॉडी की इम्युनिटी सिस्टम को बढ़ाकर सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों से बचाता है।
*गजक खाने से कमजोरी दूर होती है।

7 दिनों मैं 7 किलो वज़न कम करने के 7 रामबाण उपाय


अपने शरीर को फिट रखने के लिए लोग काफी प्रयास करते है, जैसे कि सुबह-शाम जिम जाना, दौड़ना या फिर ऊपर से नीचे बार-बार सीढ़िया उतरना और चढना | लेकिन इतना सब करने के बाद भी वो अपने मोटापे को कम नहीं कर पाते है |
कुछ लोग अपने मोटापे से परेशान होकर मेडिकल स्टोर से वजन कम करने वाली दवाइयां ले आते है और उनका सेवन करने लगते है |
इन दवाइयों के सेवन से शरीर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है |
मोटापा कम करने के ऐसे गजब के आसान उपाय जिन्हें अपनाकर आप अपना अतिरिक्त वजन कम कर लेंगे और उनका कोई साइड इफेक्ट् भी नहीं होगा |
वजन कम करने के लिए अपने भोजन में वसा -युक्त भोजन कम कर दीजिये |
वजन कम करने के ऐसे नायब नुस्खे जिन्हें अपनाकर आप 7 दिन में 7 किलो वजन कम कर लेंगे |
वजन कम करने के इस उपाय में हमे 50 ग्राम हरा धनिया, एक निम्बू और दो गिलास पानी की ज़रूरत होगी |
शरीर के मोटापे को कम करने के लिए हरा धनिया ले और धनिये की पत्ती को साफ़ पानी में धोकर बारीक काट लीजिये या किसी ग्राइंडर में धनिये की पत्ती को पीस लीजिये |




एक निम्बू को दो भागों में काटकर उसके रस को उसमे निचोड़ दे और एक बर्तन में दो गिलास पानी ले और हरे धनिया और निम्बू के पेस्ट को अच्छे से मिश्रित कर दे |
इस जूस का रोजाना एक सप्ताह तक खाली पेट सेवन करने से पेट की चर्बी कम होगी और साथ में आपके शरीर की सुन्दरता भी बढ़ जाएगी |
*दालचीनी के नित्य प्रयोग करने से शरीर में शुगर की मात्रा कम हो जाती है |
जिससे शरीर का वजन भी कम हो जाता और शरीर में फिटनेस बढ़ जाती है |
इस प्रयोग में हमे दालचीनी, दो चम्मच शहद और एक गिलास पानी की ज़रूरत पड़ेगी |
शरीर को सुन्दर बनाने के लिए और शरीर की फिटनेस बढ़ाने के लिए दालचीनी को बारीक पीसकर चूर्ण बना ले |
एक बर्तन में एक गिलास पानी डाले और पानी उबलने के बाद उसमे एक चम्मच दालचीनी का चूर्ण डाल दे |
थोड़ी देर बाद इस पानी को नीचे उतार ले और गुनगुनी अवस्था में आने दे |
गुनगुनी अवस्था में आने के बाद इसमें दो चम्मच शहद डाल दे |
इसके बाद दूसरे गिलास में आधा गिलास पानी और ले और उस उबाले हुए पानी में डाल दे एक चम्मच दालचीनी ले और इस पानी में घोल दे |
दालचीनी के इस पेय का सेवन रोजाना रात को सोने से पहले करे |
इस पेय को रात को सोने के 45 मिनट पहले सेवन करे और इस पेय का लगातार 25 दिन सेवन करे |शरीर का वजन कम करने के लिए दही को फायदेमंद और एक पोष्टिक आहार माना जाता है |
दही में प्रो ब्योटिक्स नामक बैक्टीरिया पाया जाता है जो शरीर की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में बहुत ही सहायक होते है |
इस प्रयोग में 25 ग्राम अजवाइन ले और इसे रात को डेढ़ गिलास पानी में भिगोकर रख दे
सुबह इस पानी छान लीजिये और इसमें एक चम्मच शहद या एक निम्बू को मिला लीजिये |
इस अजवाइन के पानी को नित्य सुबह खाली पेट सेवन करे, इससे आपका अतिरिक्त वजन कम हो जायेगा और आपको कोई साइड इफेक्ट भी नही होगा |




गुनगुने पानी के प्रयोग से भी आप अपने वजन को कम कर सकते है |
गुनगुना पानी गुणों की खान है, इसे पीने से आप अपना वजन कम कर सकते है और मोटे लोगो के लिए गुनगुना पानी बहुत ही ज्यादा हितकारी होता है |
गुनगुना पानी शरीर के वषीले तत्वों को बाहर निकाल देता है और इससे शरीर की गंदगी को साफ़ करने का प्रोसेस तेज़ हो जाता है और किडनी के माध्यम से गंदगी बाहर निकल जाती है और इसके साथ आपकी कब्ज की समस्या भी दूर हो जाती है |
योग आसन करके आप 7 दिन में अपना अतिरिक्त वजन कम कर लेंगे |
प्रतिदिन सुबह आठ से दस बार सूर्य नमस्कार करने से आप अपना शरीर का वजन बहुत ही आसानी से कम कर लेंगे |
सूर्य नमस्कार अगर न कर पाए तो आप स्वर्ग आसन, भुजंग आसन,व्रज आसन, पदम् आसन और शलभ आसन भी कर सकते है | ये सभी आसन मिल कर सूर्य नमस्कार हो जाता है |
भोजन में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा ज्यादा लेने से भी आप अपना वजन बहुत ही आसानी से कम कर लेंगे |
इस उपाय में सभी वसा युक्त भोजन को त्याग दे जैसे कि चावल बिलकुल छोड़ दे और चपाती आधी कर दे, तेलिये पदार्थ बिलकुल बंद कर दे और साथ में जंक और फ़ास्ट फ़ूड भी नहीं खाना है |
आप वजन कम करने के लिए प्रोटीन युक्त भोजन ले जैसे कि सुबह के नाश्ते में चना, मूंगदाल, सोयाबीन और किसमिस ले |
शरीर का वजन कम करने के लिए शाम को वशा युक्त भोजन न खाए |
वजन कम करने के लिए सुबह सैर पर जाये और रात को खाना खाने के बाद कुछ देर टहले इस शरीर की अतिरिक्त कैलोरी कम हो जाएगी |
इससे पेट की अतिरिक्त चर्बी भी कम हो जाएगी |

इन चीजों को कभी फ्रिज में न रखें


हम बाजार से खानें की कोई भी चीज लातें है और उसे तुरंत फ्रिज में रख देते है चाहे जो फल या सब्जियां ही क्यों न हो। आप सोच-ते है कि ऐसा करने से वो चीज वैसे ही ताजी बनी रहेगी लेकिन यह चीजो एक-दो दिन में ही सड़ने लगती है। इसके बाद इन्हें आप बाहर भी रखें तो वो नही बच पाती है। अगर आप भी ऐसा करते है तो यह खबर आपके लिए है। जानिए ऐसी कौन सी चीजें है जो फ्रिज में नही रखनी चाहिए।
ब्रेड
वैसे तो ब्रेड को दो या तीन दिन में खा लेना चाहिए। लेकिन अगर आप पिज्जा ब्रेड, बर्गर ब्रेड इत्यादि संभाल कर रखना चाहते हैं तो इन्हें फ्रिज में नहीं, बल्कि फ्रीजर में रखें। फ्रिज में रखने से ब्रेड सूख जाती है। प्लास्टिक में लपेट कर फ्रीजर में रखने से उसकी नमी बरकरार रहती है। खाने से पहले उसे फ्रीजर से निकाल कर कुछ देर के लिए बाहर रख दें और फिर खाएं।





आलू-

फ्रिज में रखने से आलू का स्टार्च चीनी में तब्दील हो जाता है और इसके स्वाद पर असर पड़ता है। आलू को धूप से दूर रखना चाहिए। इसके लिए घर में ही कोई ठंडी जगह ढूंढें और प्लास्टिक की थैली से निकाल कर रखें ताकि आलू सांस ले सके। आलू के लिए 45 डिग्री का तापमान सबसे अच्छा है।
नींबू-
नींबू हो या संतरें इसमें अदिक मात्रा में सिट्रिक एसिड पाया जाता है जिसके कारण यह फ्रिज की ठंडक को बर्दाश्त नहीं कर पाते। जिससे कि छिलके पर दाग पड़ने लगते हैं और स्वाद पर भी असर होता है। फ्रिज में रखने से इन फलों का रस भी सूखने लगता है।
सेब-
अगर आप सेब को फ्रिज में रखना ही चाहते हैं तो कागज में लपेट कर नीचे फल सब्जी के लिए बने शेल्फ में ही रखें। बीज वाले फल जैसे आड़ू, आलूबुखारा और चेरी को भी फ्रिज में ना रखें। कम तापमान में इनमें मौजूद एंजाइम सक्रिय हो जाते हैं और फल जल्दी पक जाता है।
प्याज-
कई लोगों को लगता है कि प्याज को फ्रिज से दूर रखने का कारण केवल उनकी गंध है। दरअसल आलू की तरह प्याज भी नमी से खराब होने लगता है। फ्रिज में रखने पर प्याज गल जाता है। इसे आलू की तरह किसी सूखी और अंधेरी जगह में रखें लेकिन आलू के साथ रखने की भूल ना करें। आलू से निकलने वाली गैस प्याज को खराब करती है।
खीरा-
गर्मी के मौसम में लोग ठंडा खीरा खाना पसंद करते हैं। लेकिन दो या तीन दिन से ज्यादा खीरा फ्रिज में टिक ही नहीं पाता। इसलिएइन्हें बाहर रखें लेकिन केले और टमाटर जैसी चीजों से दूर क्योंकि यह इथाईलीन गैस छोड़ते है और चीजें जल्दी पक जाती है। इन सभी फलों के लिए रसोई में एक रैक रख सकते हैं ताकि वे एक दूसरे को नुकसान ना पहुंचाएं।
तरबूज-
काटने के बाद तो तरबूज और खरबूजे को फ्रिज में रखना ही होगा लेकिन उससे पहले ऐसा ना करें। इन फलों में भारी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो फ्रिज में रखने पर खराब हो सकते हैं। खीरा, तरबूज और खरबूजा खाने से कुछ देर पहले ही फ्रिज में ठंडा करने के लिए रखें।
टमाटर-
अगर आप बाजार से टमाटर लाकर फ्रिज में रख देती है तो आप गलती करते है क्योंकि टमाटर धूप में उगने वाला फल है और इसे अधिक पानी और धूप की जरूरत पड़ती है। मौसम ठंडा होने पर ये ठीक से उग नहीं पाता। इसी कारण जब आप इसे फ्रिज में रखतें है तो जल्दी गल जाता है।





केला -
आपने ध्यान दिया होगा कि केला भी फ्रिज में रखने पर बहुत जल्द काला पड़ जाता है औऱ इसके साथ रखें फल भी पक जाते है या काले पड़ जाते है। इसका कारण है केलें की डंडी में से इथाईलीन गैस निकलती है, जो आसपास के फलों को भी जल्दी पका देती है। इससे बचने के लिए केले की डंडी पर प्लास्टिक चढ़ा सकते हैं। इससे केला और उसके आसपास रखे फल लंबे समय तक ताजा रह पाते हैं।
लहसुन-
प्याज की ही तरह लहसुन भी फ्रिज में ना रखें। इससे यह अंकुरित हो जाएगा और ढीला पड़ने लगेगा। लहसुन और प्याज को एक साथ रखा जा सकता है। ध्यान रहे कि इन पर धूप या बहुत ज्यादा रोशनी ना पड़े।

Saturday, November 26, 2016

एक नीम सौ हकीम..!! नीम के इतने गजब के फायदे तो क्यों ना खाएं रोजाना नीम


1. नीम के फल को निम्बोली कहा जाता है जिससे तेल प्राप्त होता है |
2. नीम के अन्दर कडवे परन्तु स्वास्थ्य वर्धक पदार्थ पाए जाते है |
3. नीम का उपयोग हर्बल सामग्री बनाने में किया जाता है जैसे- साबुन, एंटीसेफ्टिक क्रीम, दातुन मधुमेह नाशक चूर्ण और कोस्मेटिक आदि |
4 नीम मलेरिया फलाने वाले मच्छरों को भी दूर रखता है तथा नीम के पत्तो का धुआं करने से मच्छर भी मर जाते है |
5 . नीम तथा बेर के पत्तो को पानी में उबालकर उससे बाल धोने से बालो का झड़ना बंद हो जाता है |
6 नीम की पत्तियों के रस को आँखों में डालने से आँख आने की समस्या से भी छुटकारा मिलता है




7. नीम के बीजो के चूर्ण को पानी के साथ लेने से बवासीर में भी आराम मिलता है |
८ नीम के तेल की मालिस करने से गठिया बाय में भी आराम मिलता है |
9. नीम की निम्बोलियो का चूर्ण खाने से कब्ज़ से छुटकारा मिलता है |
10 . नीम के फूल, फल, पत्तिया, छाल तथा जड़ के चूर्ण को खाने से गर्मी से होने वाली लू में आराम मिलता है |
11 . नीम के पुराने पेड़ो से liquid निकलता है जिसको नीम ताड़ी कहते है इसका उपयोग औषधि बनाने में किया जाता है |
12 . नीम की छाल में पाए जाने वाले गुण दातोंमें बैक्टीरिया को नहीं होने देते |
13 नीम के तेल की मालिस से अनेक प्रकार के चर्म रोगों को दूर किया जा सकता है |
14 नीम की दातुन करने से दातों तथा मसूडो को मजबूत किया जा सकता है और मुहँ से दुर्गंद भी नही आती |

चर्मरोग जड़ से मिटाये 21 दिन में दाद खाज खुजली


उकवत (एक्जिमा) :- 
दाद, खाज, खुजली जाति का एक रोग उकवत भी है, जो अत्यंत कष्टकारी है। रोग का स्थान लाल हो जाता है और उस पर छोटे-छोटे दाने हो जाते हैं। इसमे चकत्ते तो नही पड़ते परन्तु यह शरीर में कहीं भी हो जाता है। यह दो तरह का होता है। एक सूखा और दूसरा गीला। सूखे से पपड़ी जैसी भूसी और गीले से मवाद जैसा निकलता रहता है। अगर यह सर में हो जाये तो उस जगह के बाल झड़ने लगते हैं।
गजचर्म
चर्मदख :
शरीर के जिस भाग का रंग लाल हो, जिसमें बराबर दर्द रहे, खुजली होती रहे और फोड़े फैलकर जिसका चमड़ा फट जाय तथा किसी भी पदार्थ का स्पर्श न सह सके, उसे चर्मदख कहते हैं।
विचर्चिका तथा विपादिका :- 
इस रोग में काली या धूसर रंग की छोटी-छोटी फुन्सियां होती हैं, जिनमें से पर्याप्त मात्रा में मवाद बहता है और खुजली भी होती है तथा शरीर में रूखापन की वजह से हाथों की चमड़ी फट जाती है, तो उसे विचर्चिका कहते हैं। अगर पैरों की चमड़ी फट जाय और तीव्र दर्द हो, तो उसे विपादिता कहते हैं। इन दोनों में मात्र इतना ही भेद है।
पामा और कच्छु :-

यह भी अन्य चर्म रोगों की तरह एक प्रकार की खुजली ही है। इसमें भी छोटी-छोटी फुन्सियां होती हैं। उनमें से मवाद निकलता है, जलन होती है और खुजली भी बराबर होती रहती है। अगर यही फुन्सियां बड़ी-बड़ी और तीव्र दाहयुक्त हों तथा विशेष कमर या कूल्हे में हो तो उसे कच्छू कहते है।

चर्मरोग-
यह पूरे शरीर की चमड़ी पर कहीं भी हो सकता है। अनियमित खान-पान, दूषित आहार, शरीर की सफाई न होने एवं पेट में कृमि के पड़ जाने और लम्बे समय तक पेट में रहने के कारण उनका मल नसों द्वारा अवशोषित कर खून में मिलने से तरह तरह के चर्मरोग सहित शारीरिक अन्य बीमारियां पनपने लगती हैं जो मानव के लिए अति हानिकारक होती है।




उकवत (एक्जिमा) :- 
दाद, खाज, खुजली जाति का एक रोग उकवत भी है, जो अत्यंत कष्टकारी है। रोग का स्थान लाल हो जाता है और उस पर छोटे-छोटे दाने हो जाते हैं। इसमे चकत्ते तो नही पड़ते परन्तु यह शरीर में कहीं भी हो जाता है। यह दो तरह का होता है। एक सूखा और दूसरा गीला। सूखे से पपड़ी जैसी भूसी और गीले से मवाद जैसा निकलता रहता है। अगर यह सर में हो जाये तो उस जगह के बाल झड़ने लगते हैं।
गजचर्म
चर्मदख :
शरीर के जिस भाग का रंग लाल हो, जिसमें बराबर दर्द रहे, खुजली होती रहे और फोड़े फैलकर जिसका चमड़ा फट जाय तथा किसी भी पदार्थ का स्पर्श न सह सके, उसे चर्मदख कहते हैं।
विचर्चिका तथा विपादिका :- 
इस रोग में काली या धूसर रंग की छोटी-छोटी फुन्सियां होती हैं, जिनमें से पर्याप्त मात्रा में मवाद बहता है और खुजली भी होती है तथा शरीर में रूखापन की वजह से हाथों की चमड़ी फट जाती है, तो उसे विचर्चिका कहते हैं। अगर पैरों की चमड़ी फट जाय और तीव्र दर्द हो, तो उसे विपादिता कहते हैं। इन दोनों में मात्र इतना ही भेद है।
पामा और कच्छु :-

यह भी अन्य चर्म रोगों की तरह एक प्रकार की खुजली ही है। इसमें भी छोटी-छोटी फुन्सियां होती हैं। उनमें से मवाद निकलता है, जलन होती है और खुजली भी बराबर होती रहती है। अगर यही फुन्सियां बड़ी-बड़ी और तीव्र दाहयुक्त हों तथा विशेष कमर या कूल्हे में हो तो उसे कच्छू कहते है।

दाद के लक्षण :- 
दाद में खुजली बहुत ज्यादा होती है की आप उसे खुजाते ही रहते हैं। खुजाने के बाद इसमे जलन होती है व छोटे-छोटे दाने होते हैं।
दाद ज्यादातर जननांगों में जोड़ोें के पास और जहाँ पसीना आता है व कपड़ा रगड़ता है, वहां पर होता है। वैसे यह शरीर में कहीं भी हो सकता है।
खाज (खुजली) :-
इसमें पूरे शरीर में सफेद रंग के छोटे-छोटे दाने हो जाते हैं। इन्हें फोड़ने पर पानी जैसा तरल निकलता है जो पकने पर गाढ़ा हो जाता है। इसमें खुजली बहुत होती है, यह बहुधा हांथो की उंगलियों के बीच में तथा पूरे शरीर में कहीं भी हो सकती है। इसको खुजाने को बार-बार इच्छा होती है और जब खुजा देते है तो बाद में असह्य जलन होती है। यह छुतहाएवं संक्रामक रोग है। रोगी का तौलिया व चादर उपयोग करने पर यह रोग आगे चला जाता है, अगर रोगी के हाथ में रोग हो और उससे हांथ मिलायें तो भी यह रोग सामने वाले को हो जाता है।

चर्मरोग चिकित्सा – 
दाद, खाज, खुजली में आंवलासार गंधक को गौमूत्र के अर्क में मिलाकर प्रतिदिन सुबह शाम लगायें। इससे दाद पूरी तरह से ठीक हो जाता है।
शुद्ध किया हुआ आंवलासार गंधक एक रत्ती को 10 ग्राम गौमूत्र के अर्क के साथ 90 दिन लगातार पीने से समस्त चर्मरोगों में लाभ होता है ।





एक्जिमा :- 
1. कालीमिर्च, मुरदाशंख, कलईवाला नौसादर 10-10 ग्राम लेकर बारीक पीस लें। अब इसमे घी मिलाकर एक्जिमा पर दिन में तीन बार लगाने से कुछ दिनों में यह जड़ से खत्म हो जायेगा।
2. आंवलासार गंधक
 50 ग्राम, राल 10 ग्राम, मोम (शहद वाला) 10 ग्राम, सिन्दूर शुद्ध 10 ग्राम। पहले गंधक को तिल के तेल में डालकर धीमी आंच पर गर्म करें। जब गन्धक तेल में घुल जाए तो उसमें सिन्दूर व अन्य दवायें पाउडर करके मिला दें। सिन्दूर का रंग काला होने तक इन्हे पकायें और आग से नीचे उतारकर गरम-गरम ही उसी बर्तन में घोंटकर मल्हम (पेस्ट) जैसा बना लें। यह मल्हम एग्जिमा, दाद, खाज, खुजली, अपरस आदि समस्त चर्मरोगों में लाभकारी है। सही होने तक दोनों टाइम लगायें।
3. 250 ग्राम सरसों का तेल लेकर लोहे की कढ़ाही में चढ़ा कर आग पर रख दे। जब तेल खूब उबलने लगे तब इसमें ५० ग्राम नीम की कोमल कोंपल (नयी पत्तिया) डाल दे। कोपलों के काले पड़ते ही कड़ाही को तुरंत नीचे उतार ले अन्यथा तेल में आग लग कर तेल जल सकता हैं। ठंडा होने पर तेल को छान कर बोतल में भर ले। दिन में चार बार एक्ज़िमा पर लगाये, कुछ ही दिनों में एक्ज़िमा नष्ट हो जायेगा। एक वर्ष तक लगते रहेंगे तो ये रोग दोबारा नहीं होगा।
दाद, खाज, खुजली, एग्जिमा, अकौता, अपरस का मरहम :- marham banane ki vidhi
गन्धक 10 ग्राम, पारा 3 ग्राम, मस्टर 3 ग्राम, तूतिया 3 ग्राम, कबीला 15 ग्राम, रालकामा 15 ग्राम। इन सब को कूट-पीसकर कपड़छान करके एक शीशी में रख लें। दाद रोग में मिट्टी के तेल (केरोसीन) में लेप बनाकर लगाएँ, खाज में सरसों के तेल के साथ मिलाकर सुबह-शाम लगायें। अकौता एग्जिमा में नीम के तेल में मिलाकर लगायें। यह दवा 10 दिन में ही सभी चर्मरोगो में पूरा आराम देती है।
चर्म रोग नाशक अर्क :-
शुद्ध आंवलासार गंधक, ब्रह्मदण्डी, पवार (चकौड़ा) के बीज, स्वर्णछीरी की जड़, भृंगराज का पंचांग, नीम के पत्ते, बाबची, पीपल की छाल, इन सभी को 100 -100 ग्राम की मात्रा में लेकर व 10 ग्राम छोटी इलायची जौ कुट कर शाम को 3 लीटर पानी में भिगो दें। सुबह इन सभी का अर्क निकाल लें। यह अर्क 10 ग्राम की मात्रा में सुबह खाली पेट मिश्री के साथ पीने से समस्त चर्म रोगों में लाभ करता है। इसके प्रयोग से खून शुद्ध होता है। इसके सेवन से चेहरे की झाइयाँ, आँखों के नीचे का कालापन, मुहासे, फुन्सियां, दाद, खाज, खुजली, अपरस, अकौता, कुष्ठ आदि समस्त चर्मरोगों में पूर्णतः लाभ होता है।

रक्त शोधक :-
1. दिन में एक-दो चम्‍मच अलसी के बीजों के तेल का सेवन करना त्‍वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है। बेहतर रहेगा कि इसका सेवन किसी अन्‍य आहार के साथ ही किया जाए। अलसी के तेल को कभी भी सेकना नहीं चाहिए।
2. रीठे के छिलके के पाउडर में शहद मिलाकर चने के बराबर गोलियाँ बना लें। सुबह एक गोली अधबिलोई दही के साथ और शाम को पानी के साथ निगल लें। उपदंश, खाज, खुजली, पित्त, दाद और चम्बल के लिए पूर्ण लाभप्रद है।
3. सिरस की छाल का पाउडर 6 ग्राम सुबह व शाम शहद के साथ 60 दिन सेवन करें। इससे सम्पूर्ण रक्तदोष सही होते हैं।
4. अनन्तमूल, मुलहटी, सफेद मूसली, गोरखमुण्डी, रक्तचन्दन, शनाय और असगन्ध 100 -100 ग्राम तथा सौंफ, पीपल, इलायची, गुलाब के फूल 50 -50 ग्राम। सभी को जौकुट करके एक डिब्बे में भरकर रख लें। एक चम्मच 200 ग्राम पानी में धीमी आंच में पकाएं और जब पानी 50 ग्राम रह जाय तब उसे छानकर उसके दो भाग करके सुबह और शाम मिश्री मिलाकर पिये। यह क्वाथ रक्त विकार, उपदंश, सूजाक के उपद्रव, वातरक्त और कुष्ठरोग को दूर करता है।
5. चार ग्राम चिरायता और चार ग्राम कुटकी लेकर शीशे या चीनी के बर्तन में 125 ग्राम पानी डालकर रात को उसमे भिगो दे और ऊपर से ढक कर रख दे। प्रात: काल रात को भिगोया हुआ चिरायता और कुटकी का पानी निथार कर कपडे से छान कर पी ले और पीने के बाद 3-4 घंटे तक कुछ नहीं खाए और उसी समय अगले दिन के लिए उसी पात्र में 125 ग्राम पानी डाले। इस प्रकार चार दिन तक वही चिरायता और कुटकी काम देंगे। तत्पश्चात उनको फेंककर नया चार चार ग्राम चिरायता और कुटकी डालकर भिगोये और चार चार दिन के बाद बदलते रहे। यह पानी लगातार दो चार सप्ताह पीने से एक्ज़िमा, फोड़े फुंसी आदि चर्म रोग नष्ट होते हैं, मुंहासे निकलना बंद होते हैं और रक्त साफ़ होता हैं।

40 दिन मे लंबाई बढ़ाने के जबर्दस्त उपाय

    

सम्पूर्ण व्यक्तित्व में आपकी हाइट भी बहुत ही मायने रखती है। जिन लोगों की कद छोटा होता है वे लोग अपनी पर्सनेलिटी में कुछ कमी महसूस करते हैं। वैसे लंबाई जीन्स पर निर्भर करती है। कुछ लोगों का तो मानना है कि लंबाई केवल 18 साल की उम्र तक बढ़ती है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। व्यापाम करके भी हाइट बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा ऐसे बहुत सारे प्राकृतिक तरीके भी हैं, जिनको अपनाकर आप अपनी लंबाई बढ़ा सकते हैं।
. पौष्टिक आहार-
भोजन में मौजूद विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम, जिंक, मैग्नीशियम और फास्फोरस लम्बाई बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं इसलिए स्वस्थ और पोषक आहार लें। चर्बी बनाने वाले भोजन और ज्यादा चीनी लेने से परहेज करें क्योंकि ये आपकी लंबाई पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। दूध, जूस तथा गाजर, मछली, चिकन, अंडे, सोयाबीन, दलिया, आलू, बीन्स और हरी सब्जियां अपने भोजन में शामिल करें।
योग-
ताड़ासन की मदद से लंबाई बढ़ाई जा सकती है। छोटे बच्चे और टीनएजर इस आसन को रोज करके अपनी लंबाई 6 फुट तक बढ़ा सकते हैं। ताड़ासन करने के लिए दोनों हाथ ऊपर करके सीधे खड़े हो जाएं, फिर गहरी सांस लें, धीरे-धीरे हाथों को ऊपर उठाते जाएं और साथ-साथ पैर की एडियां भी उठती रहें। पूरी एड़ी उठाने के बाद शरीर को पूरी तरह से तान दें और फिर गहरी सांस लें। ताड़ासन करने से स्नायु सक्रिय होकर विस्तृत होते हैं। इसी लिए यह कद बढ़ाने में सहायक होता है।
पूरी नींद-
पर्याप्त नींद स्वस्थ जीवनशैली और शरीर की समग्र वृद्धि और विकास के लिए सबसे अच्छा उपाय है। पूरी नींद न लेने से शरीर पर बुरा असर पड़ता है। पर्याप्त नींद लेने से लम्बाई को नियंत्रण करने वाले हार्मोन की वृद्धि होती है, इसलिए एक दिन में कम से कम 7 घंटे की नींद लेना जरूरी होता है।
फ्रीक्वेन्ट मील-
लंबाई बढ़ाने के लिए आपको अपने मेटाबॉलिज्म को मजबूत बनाने की बहुत आवश्यक होती है। एक दिन में छह भोजन लेकर आप अपने चयापचय को मजबूत बना सकते हैं। बीच-बीच में स्वस्थ भोजन लेने से अपके शरीर में कम वसा एकत्रित होगी और इस प्रकार आप प्राकृतिक रूप से अपनी लम्बाई को बढ़ा पाएंगे।
. नशे से रहें दूर-
शराब पीना और धूम्रपान गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं। धूम्रपान या अल्कोहल लेने वाले व्यक्ति के विकास को और लम्बाई पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहें।





शरीर की उचित मुद्रा

अनुचित मुद्रा में रहने से शरीर पर- बुरा प्रभाव पड़ता है। सिर और गर्दन झुकाकर चलने, खड़े रहने से लम्बाई पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। यह न केवल आपकी रीढ़ बाहर की ओर झुका देता है बल्कि लंबाई को भी कम करता है। उचित आसन में रहने से अपकी मांसपेशियों को आराम मिलता है और लम्बाई बढ़ती है।
पानी-
पानी पीना बहुत ही जरूरी है क्योंकि पानी आपके शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने तथा भोजन को अच्छे से पचाने में सहायता करता है। पानी न पीने से मेटबॉलिज्म धीमा हो सकता -है और आपकी बढ़ती लम्बाई बाधित हो सकती है। यहां तक कि कम पानी पीने पर, सारी सावधानियों और पौष्टिक भोजन लेने के बाद भी आपकी लम्बाई नहीं बढ़ती है।
धूप लें-
विटामिन 'डी' अपकी हड्डियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है, और सूरज की रोशनी विटामिन 'डी' का सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत है लेकिन इसका मतलब यह नहीं की आप तेज धूप में ही खड़े रहे। सुबह औऱ शाम को हल्की धूप होने पर सेंके।
हाइट बढ़ाने वाली दवाइयों से बचें
हाइट बढ़ाने के चक्कर में लम्बाई बढ़ाने वाली दवाओं और एंटीबायोटिक्स से बचे क्योंकि इनके बहुत सारे साइड इफैक्ट्स होते हैं। यह लंबाई भी नहीं बढ़ाते और आपको आलसी बना देते हैं।
. जड़ी बूटियां-
कद बढ़ाने के लिए सूखी नागौरी और अश्वगंधा की जड़ के चूर्ण में बराबर मात्रा में खांड मिला लें। रात को सोते समय रोज दो चम्मच गाय के दूध के साथ इसे लें। इसकी मदद से कम कद वाले लोग लंम्बे हो सकते हैं लेकिन इसका सेवन करने से पहले एक बार डाक्टरी सलाह जरूर ले लें।

Friday, November 25, 2016

हार्ट अटैक आने पर क्या करें ? हार्ट अटैक से कैसे बचें




हार्ट अटैक की बीमारी आजकल एक आम समस्या बनती जा रही है और हमारे भारत में तो यह बिल्कुल कॉमन हो गया है ज़्यादातर नौजवान लोगों में हार्ट अटैक आने की काफी मामले सामने आ रहे हैं. | हम आपको बता रहे हैं कि अगर किसी को हार्ट अटैक आ जाए तो हार्ट अटैक आने के 5 मिनट के अंदर आप यह काम करें और इन सावधानियों का ख्याल रखें जिससे मरीज की जान तुरंत बचाई जा सके|
हार्ट अटैक एक ऐसी बीमारी है जो कभी भी अचानक किसी को भी इसका दौरा पड़ सकता है. अगर आपके सामने किसी को हार्ट अटैक आ जाए तो आप तुरंत यहां दिए गए उपायों को अपनाएं जिससे रोगी की जान बचाने में आसानी हो, हार्ट अटैक में जितनी जल्दी रोगी को मेडिकल फैसिलिटी मिल जाए उतना अच्छा होता है क्योंकि हार्टअटैक एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है और इसमें बहुत कम समय मिलता है जिसमें आप रोगी की जान बचा सके|
हृदय रोगी को लंबी सांस लेने को कहें और उसके आसपास से हवा आने की जगह छोड़ दें ताकि उन्हें पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिल सके. कई बार ऐसा देखा गया है के घर में या कहीं किसी को अटैक आया और लोग उसको बुरी तरह से चारों तरफ घेर लेते हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें के रोगी को ऑक्सीजन लेने के लिए पर्याप्त खुली जगह होना चाहिए.
अटैक आने पर रोगी को उल्टी आने जैसा अनुभव होता है ऐसे में उसे एक तरफ मुड़ कर उल्टी करने को कहें ताकि उल्टी लंग्स में न भरने पाए और इन्हें कोई नुकसान ना हो.




रोगी की गर्दन के साइड में हाथ रखकर उसका पल्स रेट चेक करें यदि पल्स रेट 60 या 70 से भी कम हो तो समझ लें कि ब्लड प्रेशर बहुत तेजी से गिर रहा है और पेशेंट की हालत बहुत सीरियस है.
पल्स रेट कम होने पर हार्ट पेशेंट को आप इस तरह से लिटा दें उसका सर नीचे रहे और पैर थोड़ा ऊपर की और उठे हुए हों. इससे पैरों के ब्लड की सप्लाई हार्ट की और होगी जिससे ब्लड प्रेशर में राहत मिलेगी.
इस दौरान रोगी को कुछ खिलाने पिलाने की गलती ना करें इससे उसकी स्थिति और भी बिगड़ सकती है.
एस्प्रिन ब्लड क्लॉट रोकती है इसलिए हार्ट अटैक के पेशेंट को तुरंत एस्प्रिन या डिस्प्रिन खिलानी चाहिए. लेकिन कई बार इनसे हालात और भी ज्यादा बिगड़ जाते हैं इसलिए एस्प्रिन या डिस्प्रिन देने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले लेना चाहिए.
पल्स रेट बहुत ज्यादा कम हो जाने पर पेशेंट के चेस्ट पर हथेली से दबाब देने से थोड़ी राहत जरूर मिलती है लेकिन गलत तरीके से हार्ट को प्रेस करने में प्रॉब्लम और भी बढ़ सकती है इसलिए इसके लिए विशेष अभ्यास की जरूरत होती है रोगी को गाड़ी में बिठाने की बजाए सीधा लिटाएं , इससे उसका ब्लड सर्कुलेशन सही रखने में मदद मिलेगी|पहले यह बीमारी अधिक उम्र के लोगों में मिलती थी लेकिन भारत में अब कम उम्र के लोग भी इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। इस बीमारी की सबसे बड़ी वजहों में से प्रमुख रूप से  तनाव असंतुलित खाना है। तनाव दिल का सबसे बड़ा दुश्मन है। तनाव हृदय का पूरा सिस्टम बिगाड़ देते है। तनाव से उबरने के लिए योग का भी सहारा लिया जा सकता है।हार्ट अटैक से बचने के लिए जीवन शैली में बदलाव लाना चाहिए। मक्खन, घी, मलाई, तली हुई चीजें, चिकनाई युक्त चीजें, मीठा कम खाना चाहिए, स्मोकिंग नहीं करनी चाहिए। हार्ट की बीमारी से बचने के लिए- रोजाना एक्सरसाइज योगा करना चाहिए। सबसे बढ़िया उपाय है कि जॉगिंग की जाए, साइकिल, स्विमिंग करनी चाहिए।

 व्यक्ति को साइकिल चलाना जरुरी है।
 हार्ट की तीन वाहिनियों में कचरा (कोलस्ट्रॉल) फंसने के कारण वाहिनियां 100 प्रतिशत बंद हो जाए तो मेजर (बड़ा) हार्ट अटैक जाता है।




मेजर (बड़ा) हार्ट अटैक आने से पहले मरीज के दिल में तेजी से दर्द होनी शुरु हो जाती है जोकि रुकती नही है। इसके साथ ही मरीज के दिल की धड़कन बढ़ जाती है, ठंडा पसीना आने लग जाता है तथा सांस रुक रुक कर आती है। जिसके लिए मरीज को तुरंत डाक्टर के पास लेकर जाना चाहिए। छोटा हार्ट अटैक को (एनजानिया) कहते है। शुरु में मरीज को छाती के मध्य में दर्द होता है जोकि 5 से 10 मिनट तक रहता है। इसके साथ बाएं बाजू में तथा जबड़े में दर्द जा सकती है। इस दौरान मरीज को बहुत ज्यादा ठंडा पसीना आने लगता है था सांस रुक रुक कर आती है। जिसके लिए मरीज को तुरंत डाक्टर के पास लेकर जाना चाहिए।
छोटा हार्ट अटैक को (एनजानिया) कहते है। इसकी शुरूआत में मरीज को छाती के मध्य में दर्द होता है जोकि 5 से 10 मिनट तक रहता है। इसके साथ बाएं बाजू में तथा जबड़े में दर्द जा सकती है। ठंडा पसीना आने लगता है तथा सांस रुक रुक कर आती है।

Thursday, November 24, 2016

सिर्फ दो हफ्तों में पेट की फैट गायब:



हमारा व्यस्त जीवन नतीजे के तोर पर हमे अस्वस्थ जीवन प्रदान करता है तेजी के इस दौर ने हमारी खाने पीने की आदतों पर प्रभाव डाला है हमारे खाने पीने की आदते बदल गयी है |

हमारे खाने पीने की वजह से ही हमारे शरीर पर अनचाही फैट होने लगती है जिसे हम मोटापा कहते है मोटापा कई बीमारियों का करना होता है जैसे ह्रदय रोग शुगर और ब्लड प्रेशर |




मोटापा अपने आप में एक गम्भीर बीमारी है जिसका नतीजा अस्वस्थ जीवन और मौत हो सकती है | में आपको पेट की फैट कम करने का नुस्खा बताएंगे जिसने दुनिया को हैरान कर दिया है तथा इस प्राकृतिक नुस्खे को चमत्कार मानने पर मजबूर कर दिया है |

सामग्री

1 कप (Apple Cider Vinegar ) सेब का सिरका

3 सुखी अंजीर

विधि

पहले तीन सुखी अंजीर लीजिये और उसके चारो और छोटे छोटे छेद बना लीजिये उसके बाद इसे Apple Cider Vinegar के साथ कप में डाल दे इस ड्रिंक को पूरी रात छोड़ दे और सुबह होते ही इसमे से अंजीर निकाल कर खा लीजिये यह Apple Cider Vinegar एक हफ्ते तक प्रयोग किया जा सकता है|
आठवें दिन Apple Cider Vinegar को बदल दे इस विधि को लगातार दो हफ्ते तक आजमाए आपको हैरान करने वाले नतीजे प्राप्त होंगे |

Wednesday, November 23, 2016

कैसे करे चेहरे को गोरा उसके लिए बेहतरीन आसान नुस्खे



खूबसूरत चेहरा और हेल्दी स्किन के साथ ही यदि रंग गोरा हो तो ऐसा व्यक्ति अधिक आकर्षक लगता है। ऐसा हम भारतीयों का मानना है। शायद गोरा रंग हमें अधिक आकर्षित करता है, इसीलिए यदि किसी इंसान के नैन-नक्श अच्छे हैं, लेकिन उसका रंग ज्यादा गोरा नहीं है तो हम उसे बहुत सुंदर नहीं मानते, क्योंकि हमारे यहां गोरे रंग के प्रति लोगों का आकर्षण ज्यादा है।
इसीलिए लोग गोरे होने के लिए कॉस्मेटिक्स यूज करते हैं। यदि आपके साथ भी यही समस्या है और आप अपना रंग गोरा करने के लिए तरह-तरह के कॉस्मेटिक्स उपयोग करके थक चुके हैं तो घरेलू नुस्खे अपनाइए।
घरेलू नुस्खों को अपनाने से स्किन, हेल्दी, ग्लोइंग, फेयर हो जाती है और कोई रिएक्शन भी नहीं होता है। आज मैं बताऊंगा  कुछ ऐसे नुस्खे जिन्हें अपना लेने पर रंग साफ होने लगता है।
शहद- शहद त्वचा के लिए टॉनिक का काम करता है। शहद खाने से और लगाने से स्किन ग्लो करने लगती है। स्किन को गोरा बनाने के लिए एक छोटा चम्मच शहद लें। इसे चेहरे पर लगाएं।
से कम एक दिन में दो बार करें। दो हफ्ते में ही आपको अपने चेहरे का रंग साफ लगने लगेगा।
संतरा- संतरा विटामिन सी से भरपूर होता है। इसे स्किन के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। संतरा खाने और लगाने से भी त्वचा सेहतमंद हो जाती है। त्वचा का रंग निखारने के लिए रोज संतरे का जूस चेहरे पर लगाएं। सूखने पर इसे धो लें। यदि चेहरे पर दाग-धब्बे हैं तो संतरे के छिलकों का उपयोग करें। संतरे के छिलकों को छांव में सुखाकर पाउडर बना लें। यह पाउडर एक चम्मच कच्चे दूध में मिलाकर चेहरे पर लगाएं। रंग निखरने लगेगा।
कच्चा दूध- दूध त्वचा के लिए टोनर का काम करता है। कच्चे दूध का चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें। सूखने पर चेहरा धो लें। रंग गोरा हो जाएगा।
पपीता- वैसे तो पपीते की तासीर को गर्म माना जाता है, लेकिन स्किन के लिए यह बहुत फायदेमंद होता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ए होता है। इसीलिए पपीता खाने के साथ ही इसे लगाने के भी अनेक लाभ हैं।





स्किन को गोरा बनाने के लिए एक पपीता का टुकड़ा पीस लें। यह गाढ़ा पेस्ट अपने चेहरे पर लगाएं। एक घंटे तक यह पेस्ट चेहरे पर लगा रहने दें। फिर चेहरा धो लें। यह नुस्खा नियमित रूप से दोहराने पर रंग गोरा होने लगता है।
तुलसी- तुलसी ईश्वर का उपहार है। यह सिर्फ बीमारियों को ठीक नहीं करती है, बल्कि स्किन के लिए भी टॉनिक का काम करती है। तुलसी के कुछ पत्ते लेकर उनका जूस बना लें। इसका हल्के हाथों से चेहरे पर मसाज करें। कुछ देर रहने दें और फिर गुनगुने से पानी चेहरा धो लें। ऐसा रोज करने से धीरे-धीरे रंग गोरा होने लगता है।
गुलाब जल- गुलाब जल रंगत निखारने का सबसे आसान और सस्ता तरीका है। घर पर ही गुलाब जल बनाने के लिए गुलाब की पंखुड़ियों को पानी में डालें। जल्दी फायदे के लिए इसका पेस्ट बनाकर पानी में मिलाएं। एक दिन के लिए पानी में छोड़ दें। इस पानी से चेहरा धोने से चेहरे की रंगत गुलाबी होने लगती है।
हल्दी- आयुर्वेद में हल्दी को रंगत निखारने वाली सबसे बेहतरीन औषधि माना जाता है। दूध में एक चुटकी हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगाने से भी रंगत निखरती है। बेसन के उबटन में हल्दी मिलाकर लगाने से भी चेहरा ग्लो करने लगता है।
दही- दही कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर है। दही खाने और लगाने, दोनों का फायदा चेहरे पर दिखाई देता है। रोज सुबह एक चम्मच दही लेकर चेहरे पर मसाज करें। सूखने के बाद चेहरा धो लें। इस नुस्खे को नियमित रूप से करने पर रंग गोरा हो जाता है और पिंपल्स भी खत्म हो जाते हैं।
खीरा- खीरा एक ऐसी गुणकारी फल है, जिसे सप्ताह में एक बार जरूर खाना चाहिए। साथ ही, खीरा स्किन के लिए भी बहुत लाभदायक माना जाता है। इसे खाने से शरीर की गर्मी छंट जाती है। स्किन को ग्लोइंग बनाने के लिए चेहरे पर खीरे का जूस बनाकर या खीरे का पेस्ट बनाकर लगाएं।
नींबू- नींबू स्किन के लिए एक चमत्कारी दवा की तरह काम करता हैं। रंग निखारने के लिए नींबू का रस चेहरे पर लगाएं। कुछ देर बाद चेहरा धो लें। नींबू के रस में टमाटर का रस मिलाकर लगाने से भी त्वचा की सफाई हो जाती है और रंग गोरा होने लगता है।
टमाटर- टमाटर एंटीऑक्सीडेंट व पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसीलिए यह स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है। आप सांवले रंग से परेशान हैं तो टमाटर को पीसकर इसका पेस्ट चेहरे पर लगाएं। चेहरे के दाग-धब्बे दूर हो जाएंगे और रंग निखरने लगेगा।
दूध और केसर-
यदि आप अपनी स्किन की केयर करने के लिए एक्सट्रा टाइम नहीं निकाल पाते हैं तो दूध और केसर का उपयोग करें। थोड़े से दूध में केसर की पत्तियों को पीस लें। इस दूध से चेहरे की मसाज करें। कुछ देर रहने दें। फिर चेहरा धो लें। रंग निखर जाता है और फेस ग्लो करने लगता है।





आलू-
यदि आपके चेहरे पर काले धब्बे हैं तो आलू की स्लाइस लेकर हल्के-हल्के से मसाज करें। आलू का जूस चेहरे पर लगाएं। रोज इसे चेहरे पर लगाने से चेहरा निखर जाता है।
अंडा- अंडे का पीला भाग यानी जर्दी को चेहरे पर लगाने से रंग गोरा हो जाता है। अंडे में शहद और नींबू मिलाकर लगाएं। जब पैक सूख जाए तो ठंडे पानी से चेहरा धो लें। स्किन ग्लो करने लगेगी।
नारियल पानी- नारियल पानी बहुत ही गुणकारी होता है। इसीलिए रोजाना नारियल पानी पीने से चेहरा चमकने लगता है। नारियल पानी से चेहरा धोने से दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं। नारियल का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से रंग निखरने लगता है।
तरबूज-
तरबूज का सेवन गर्मियों में बेहद फायदेमंद होता है। इसमें पानी और पोषक तत्वों की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसके नियमित सेवन से शरीर में ताजगी और ठंडक बनी रहती है। तरबूज का छोटा टुकड़ा लेकर चेहरे पर मलें। एक घंटे तक लगा रहने दें और फिर चेहरा धो लें।

सुबह पेट ठीक से साफ़ न हो तो अपनाएं ये तरीके


पेट खुश तो आप भी खुश
एक साधे, सब सधे। यह बात हमारे पाचन तंत्र पर भी पूरी तरह लागू होती है। कमजोर पाचन तंत्र के कारण न सिर्फ भोजन पचने में परेशानी आती है, बल्कि शरीर का प्रतिरोध सिस्टम भी गड़बड़ा जाता है। शरीर में विषैले तत्वों की मात्रा बढ़ने से शरीर कई अनियमितताओं का शिकार होने लगता है। पाचन तंत्र की विभिन्न गड़बड़ियों और उनसे दूर रहने के उपाय लिखते हैं-
एलोवेरा :
आप जैसे ही सुबह उठें, वैसे ही एक गिलास पानी में थोड़ा सा एलोवेरा का जैल मिक्स कर लें। इसे पीने से आपका पेट बिल्‍कुल ठीक रहेगा।
मुनक्का : मुनक्के में काफी सारा फाइबर और एंटीऑक्‍सीडेंट होता है। इसे जरुर खाएं जिससे पेट साफ रहे।
अलसी-
इनमें भी फाइबर की मात्रा अधिक होती है। इसलिए यह कब्ज जैसी बीमारी से राहत देता है। अच्छे रिज़ल्ट के लिए अलसी के बीज को आप सुबह कॉर्नफ्लेक्स के साथ मिलाकर खा सकते हैं या फिर मुट्ठी भर अलसी के बीज को गर्म पानी के साथ सुबह खा सकते हैं। फाइबर आपकी डाइट में ज़रूर होना चाहिए। इससे आप कब्ज जैसी परेशानी से दूर रहेंगे। अलसी के बीज कब्ज के साथ-साथ डायबिटीज़, हृदय रोग, मोटापे और कैंसर के खतरे को कम करता है।
दही :
दही आपके पेट को अच्‍छा बनाए रखने में मदद कर सकता है। दही को रात में खाएं जिससे सुबह पेट अच्‍छे से साफ हो जाए।
त्रिफला पाउडर
त्रिफला पाउडर आवंला, हरीताकी और विभीताकी औषधियों के चूर्ण से बनता है। इससे पाचन क्रिया संतुलित रहती है और कब्ज जैसी दिक्कतों से राहत मिलती है। आप एक छोटे चम्मच त्रिफला पाउडर को गुनगुने पानी के साथ खा सकते हैं या शहद के साथ पाउडर मिक्स करके खा सकते हैं। इस मिक्सचर को रात में सोने से पहले या सुबह खाली पेट खाने से कब्ज में तुरंत राहत मिलती है। यह पूरी तरह से औषधियों से बना है, इसलिए यह एंटी-बायोटिक दवाइयों से कहीं बेहतर है।





कॉफी कम पियें :

कैफीन के अधिक सेवन से पेट की समस्‍या पैदा होती है, जिससे पेट सुबह अच्‍छे से साफ नहीं होता।
किशमिश

किशमिश फाइबर से भरपूर होती है और नेचुरल जुलाब की तरह काम करती है। मुट्ठी भर किशमिश को रात भर पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इसे खाली पेट खाएं। गर्भवती महिलाओं को होने वाली कब्ज के लिए यह बिना किसी साइड इफेक्ट की दवा है। किशमिश एनर्जी बूस्टर की तरह होती है, इसलिए यह किसी भी प्रकार के एनर्जी ड्रिंक्स से बेहतर होती है।
तनाव से रहें दूर -:
बहुत ज्‍यादा तनाव लेने से भी पेट -की समस्या पैदा होती है। अगर पेट साफ ना हो तो तनाव से दूरी बना लें।
अमरूद
अमरूद के गूदे और बीज में फाइबर की उचित मात्रा होती है। इसके सेवन से खाना जल्दी पच जाता है और एसिडिटी से राहत मिलती है। साथ ही, पेट भी साफ हो जाता है। अमरूद पेट के साथ-साथ शरीर के इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता है, जिससे रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
सेब :
आपको सेब नियमित रूप से खाना चाहिये क्युकी इसमें एक प्रकार का तत्त्व पाया जाता है जो कि आपके पेट को सुबह अच्छे से साफ कर देगा।
अंजीर
अंजीर पका हो या सूखा, जुलाब की तरह काम करता है, क्योंकि इसमें फाइबर की मात्रा काफी ज्यादा होती है। कब्ज से राहत पाने के लिए एक गिलास दूध में अंजीर के कुछ टुकड़ों को उबालें और इसे रात को सोने से पहले पिएं। ध्यान रहे, गर्म दूध ही पिएं। साबुत अंजीर का सेवन मेडिकल शॉप में मिलने वाले कब्ज खत्म करने वाले सीरप से ज्यादा असरदार होता है।
नींद :
क्या आप को इस बात का कभी एहसास हुआ है कि जिन दिनों आपकी नींद अच्छे से पूरी नहीं होती, उस दौरान आपका पेट भी अच्छे से साफ नहीं होता? इसका जवाब है कि आपको नियमित रूप से नींद पूरी करनी चाहिये।
नींबू का रस

अक्सर वैद्य कब्ज से तुरंत राहत दिलाने के लिए नींबू के रस लेने को कहते हैं। एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू और नमक मिलाकर सुबह खाली पेट पिएं। इससे आंतों में से शरीर का बेकार तत्व साफ होता है। इसके लिए एक गिलास गर्म पानी में एक छोटा चम्मच नींबू का रस मिलाएं और फिर चुटकी भर नमक मिलाकर इस जूस को सुबह फ्रेश होने से पहले पिएं। इससे शरीर का टॉक्सिन भी बाहर हो जाते है।





मिर्च :
बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन खाने से बचना चाहिये। इसकी जगह पर आपको साबुत मिर्च का सेवन करना चाहिये।
अरंडी का तेल
अरंडी के तेल को सदियों से कब्ज से राहत पाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। कब्ज खत्म करने के साथ यह पेट के कीड़े भी नष्ट करता है। खाली अरंडी के तेल को पीने से बेहतर रहेगा कि आप इसे रात को सोने से पहले दूध में मिलाकर पिएं। एक चम्मच से ज़्यादा न डालें। इससे अगले दिन पेट साफ रहेगा।
पानी :
प्रतिदिन सुबह एक गिलास गुनगुना पानी अवश्य पिएं।
संतरा
संतरा सिर्फ विटामिन सी का ही मुख्य स्रोत नहीं है, बल्कि इसमें फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। रोज सुबह-शाम एक-एक संतरा खाने से कब्ज जैसी बीमारी में राहत मिलती है।
रेगुलर वर्कआउट :
रेगुलर एक्‍सरसाइज़ करने से पाचन क्रिया हमेशा दुरुस्त बनी रहेगी। शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।